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Incest आनंद और तड़प (तन में उत्तेजना की हलचल )

उसकी बुर लंड के लिए तड़प रही थी राजू के मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर लेने के लिए मचल रही थी,,, बुर के अंदर की संकरी दीवारें,,, राजू के मोटे तगड़े लैंड की रबड़ को अपने अंदर महसूस करने के लिए उतावली हुए जा रही थी इसलिए बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,,।

सोनी की मदहोशी देखकर राजू की समझ गया था कि अब उसे लंड की जरूरत है,,,, इसलिए अपने तृप्त होठों को उसकी प्यासी बुर से अलग करते हुए वह सोने की तरफ देखने लगा उसके होठों से सोनी की बुर से निकला काम रस टपक रहा था जिसे देखकर सोनी की काम भावना हो ज्यादा भड़क रही थीक्योंकि इतने प्यार से और जो उसके साथ किसी ने भी उसकी बुर को इस कदर चाटा नहीं था,,,,।

कैसा लगा दीदी,,,,

मजा आ गया राजा तूने तो मुझे मस्त कर दिया,,,,

अब क्या करना है दीदी,,,,(राजू एकदम से मासूम बनता हुआ बोला)

करना क्या है मेरे राजा अब अपने मुसल को मेरी ओखली में डाल दी और जी भर कर इसकी कुटाई कर दे,,,(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली)

चिल्लाओगी तो नहीं दीदी,,,,

बिल्कुल नहीं चिल्लाऊगी मेरे राजा,,,, अगर दुखेगा तो भी तू बिल्कुल भी मत रुकना मुझ पर रहम मत करना,,,,

औहह दीदी तुम कितनी अच्छी हो ,,,,(इतना कहने के साथ ही वहसोने की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर हुआ उठ खड़ा हुआ और अपनी आंखों के सामने उसकी मदद से चूचियों को देख कर उसे अपने मुंह में भरने के बाद उसको रोक नहीं पाया और अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसकी चुचियों को थाम लिया और से मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,, पूरी तरह से साड़ी में लिपटी हुई सोनी की चूचियां सर्वप्रथम आकर्षण की केंद्र बिंदु बनी रहती हैं और उस पर नजर राजु की पहले से ही थी लेकिन उसकी बुर से मजा लेने के चक्कर में उसकी चूची उसको भूल गया थालेकिन अब वह सारी कसर निकाल लेना चाहता था वह जोर-जोर से उसकी चूची को दबा कर उसका रस पी रहा था मानो जैसे कि उसके हाथों में दशहरी आम आ गया हो,,,,

सोनी भी कामवासना से ग्रस्त होकर राजू के लंड को पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी बुर पर रगडना शुरू कर दी थी,,, सोने की यह हरकत राजू के होश उड़ा रही थी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी जब तक वहउसकी चुचियों से खेलता रहा तब तक सोनी उसके लंड को अपनी बुर के छेद में डालने की नाकाम कोशिश करती रही,,,, लेकिन उसकी इस ख्वाहिश को राजू पूरी करने के उद्देश्य से अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी बड़ी गांड पर रखकर अपनी तरफ खींच दिया जिससे उसके लंड का हल्का सा भाग उसकी बुर के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करने लगा जिससे सोनी एकदम से मचल उठे और अपनी एक टांग उठा कर राजू के कमर में डाल दी जिससे लंड को बुर में घुसने की जगह मिल गई,,, और बुर पूरी तरह से गिली होने की वजह से,,, लंड के सुपाड़े को अपने अंदर की तरफ खींचने लगी सोनी से यह उतेजात्मक पल बर्दाश्त नहीं हुआऔर वह अपने होठों को उसके होठों पर रखकर चूसना शुरु कर दी एक तरह से वाह राजू को और ज्यादा उकसा रही थी आगे बढ़ने के लिए और राजू भी कम नहीं था वह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर उसे सहारा देते हुए उसकी बुर में लंड डालने का प्रयास करने लगा और उसका यह प्रयास सफल होने लगा,,, धीरे-धीरे राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, और जब हाथी घुस जाए तो पूछ को घुसने में कौन सी तेरी लगती है,,, इसलिए राजू अपने दोनों हाथों को सोनी के बड़ी बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर से दबाते हुए अपनी तरफ खींच लिया और अपने लंड को धीरे धीरे अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया और देखते ही देखते हैं उसका लंड पूरी तरह से सोनी की बुर के अंदर खो गया,,,, राजू की खुशी का ठिकाना ना था जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था आज उसकी चुदाई कर रहा था धीरे-धीरे राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,।

मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करते हैं सोनी पूरी तरह से मस्त हो गई थी और अपनी बाहें उसके गले में डाल दी थी,,,,,।

सोने के लिए यह पल बेहद अद्भुत और अविश्वसनीय था क्योंकि कभी उसने कल्पना भी नहीं की थी कि वह गांव के किसी जवान लड़के के साथ संभोग करेगी,,, लेकिन राजु के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसकी इच्छा इतनी ज्यादा प्रबल हो गई थी कि आज वह अपनी इच्छा के बल पर उसे पा चुकी थी,,,,होठ में होठ भीड़े हुए थे,,,दोनों की सांसो की गति तेज हुए जा रहे थे राजू धीरे-धीरे सोनी की चुदाई कर रहा था बड़े घर की औरत की बुर चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, राजू के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनी अपनी बुर की अंदर बहुत अच्छे से महसूस कर रही थी,,, और यह एहसास उसकी मस्ती को और ज्यादा बढ़ावा दे रहा था,,,,।

दोनों में किसी भी प्रकार का वार्तालाप नहीं हो रहा था दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए बस चुदाई के कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे थे,,,।

आम के बगीचे में गांव का लड़का और हवेली की औरत संभोग सुख प्राप्त करने में जुटे हुए थे कोई सोच भी नहीं सकता था कि आम के बगीचे में इस तरह का कार्यक्रम भी चल रहा होगा,,,आम के बगीचे में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था दोपहर में भी इधर रात की तरह ही सन्नाटा छाया रहता था बस पंछियों के कलरव की आवाज ही सुनाई देती थी,,,। धीरे-धीरे धक्के मारते हुए राजू सोनी से बोला,,,।

अब कैसा लग रहा है सोनी,,,,

(लंड को घर में डालते हैं राजू के लिए सोनी दीदी अब केवल सोनी रह गई थी वैसे भी संभोग करते समय उस औरत के प्रति मर्दों का देखने का रवैया बदल जाता था उस औरत में उसे बीवी प्रेमिका के साथ-साथ एक रंडी भी नजर आने लगती थी जिसके साथ वह चुदाई का सुख प्राप्त करता है,,, लेकिन सोनी को इस बात का जरा भी बुरा नहीं लगा था वह तो और ज्यादा आनंदित हुए जा रही थी और आनंदित होते हुए बोली,,,)

बहुत मजा आ रहा है राजा ऐसा लंड आज तक मैंने अपनी बुर में नहीं ली हुं,,,

अभी तो तुम्हें और मजा आएगा मेरी जान,,,,(राजू के बोलने का तरीका उसके तर्कों के साथ बदलता जा रहा था जिससे सोनी की मदहोशी भी बढ़ती जा रही थी,,,, उसे और ज्यादा मजा देने का वादा करके राजू अगले ही पल उसकी दूसरी टांग को भी अपनी कमर में लपेटते हुए अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी गांड पर रखकर उसे अपनी गोद में उठा दिया और उसे गोद में उठाए हुए उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,,, सोनी हैरान ठीक से समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में यह क्या हो गया राजू की ताकत उसकी हिम्मत उसके उसको देखकर सोनी पानी पानी हुए जा रही थी सोनी को यकीन नहीं हो रहा था कि राजू जैसा एक जवान लड़का उसे अपनी गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा है क्योंकि उसे उम्मीद भी नहीं थी कि उसे राजू इतने आराम से उठा लेगा और गोद में लिए हुए ही उसकी चुदाई करेगा,,,, शायद चोदने की वजह से इंसान की ताकत और उसका जोश और ज्यादा बढ़ जाता है और यही जोश राजू दिखा रहा था इस तरह की हरकत इस तरह की जुर्रत सोनी के साथ किसी ने भी नहीं किया था,,, जिस किसी ने भी मर्द पर सोने का दिल आ जाता था और मर्द के साथ सोनी अपने तरीके से मजा लेती थी ना कि उसको कभी अपने ऊपर हावी होने देती थी लेकिन राजु के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह शुरू से सोच रही थी कि राजू के साथ वह अपनी मनमानी कर पाएगी लेकिन राज्यों के सामने वह अपने आप को मजबूर महसूस करने लगी थी उसके मस्त मोटे तगड़े की ताकत को देखकर वह उसके आगे घुटने टेक दी थी,,,

राजू उसके ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुका था उसके बदन के साथ हुआ मनमानी कर रहा था लेकिन ऐसा नहीं कहा कि सोनी को इसमें मजा नहीं आ रहा था उस की मनमानी से सोनी का मजा दुगुना होता जा रहा था इसलिए वह उसे कुछ नहीं बोल रही थी,,,,

गोद में उठाए हुए वह उसकी बुर में लंड पेले जा रहा था,,, सोनी के मन में कोई भी गिला शिकवा नहीं था,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से गोद में उठाए हुए उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी चुदाई करता रहा लेकिन वह अपनी रफ्तार को बढ़ाना चाहता था जो कि इस आसन में बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था इसलिए वह अच्छी सी जगह देखकर जहां ढेर सारी घास रखी हुई थी वहां पर अपनी गोद में उठाए हुए ही वह सोनी को लेकर आगे बढ़ा और धीरे-धीरे उसे उसी खास पर ले कर दिया बिना अपने लंड को उसकी बुर से निकाले,,,,।

यह आसन राजू और सोनी दोनों के लिए ठीक था क्योंकि इस आसन में राजू पूरी तरह से अपना दम दिखा पाने में सक्षम रहता था और इस आसन में सोनी को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो जाएगी इस बात का राजू को पूरा विश्वास था इसलिए वह तुरंत उसकी चूची को मुंह में भर कर अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया गर्म शिकारियों से पूरी झोपड़ी गूंजने लगी थी लेकिन उसकी कर्मचारियों को सुनने वाला वहां पर कोई भी नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक कोई भी दिखाई नहीं देता था सिर्फ पंछियों की आवाज ही सुनाई देती थीजिसका फायदा उठाते हुए सुननी भी दिल खोलकर गर्म सिसकारीयो की आवाज अपने मुंह से निकाल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,।

मेरी रानी आज तेरी ऐसी चुदाई करुंगा की तू जिंदगी भर याद रखेगी,,,(राजू की यह सभ्यता और उसकी भाषा बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसके अंदर भी वासना का शैतान आ चुका था जिसके चलते वह पूरी तरह से बस्ती के सागर में गोते लगाते हुए जो मन में आ रहा था वह बकरा था,,,,,,,सोनी पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूब चुकी थी वह राजू को अपनी बाहों में लेकर ऊपर से नीचे तक उसके बदन पर जहां हो सकता था वहां तक अपनी हथेली को उसके नंगे बदन पर रगड रही थी,,,,वह थोड़ा नीचे से उठाना चाहती थी ताकि वह अपनी तरफ से कुछ धक्के लगा सके लेकिनराजू बड़ी मजबूती से उसे अपनी आगोश में लिए हुए था जिससे उसे हिलने का भी मौका नहीं मिल रहा था उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड बार-बार उसके बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था जिससे सोनी एकदम मस्त हो जा रही थी क्योंकि इधर तक अभी तक कोई भी नहीं पहुंच पाया था और राजू के लंड की लंबाई दूसरों की अपेक्षा ज्यादा ही थी जो कि बड़े आराम से उसके बच्चेदानी तक पहुंच रही थी,,,।

जवानी की गर्मी पिघल कर दोनों के बदन से पसीना बनकर टपक रही थी,,,, राजू के धक्के कम होने का नाम ही नहीं ले रहे थे वहीं कई रफ्तार में आगे पीछे हो रहे थे,,, कमला चाची और गुलाबी की चुदाई करने के बाद उसे बड़े घर की औरत मिली थी जिसे चोदने का सुख उसकी जिंदगी में सबसे अधिक उत्सुक था जो कि वह कभी भी भूलने वाला नहीं था खूबसूरत अंगों से खेलने का सुख उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,।सोनी उसके जबरदस्त तेज धक्कों को सहन नहीं कर पा रही थी इसलिए उसकी हर एक धक्के के साथ उसकी आह निकल जा रही थी,,,,। कुछ देर बाद सोनी का बदन फिर से अकड़ने लगा,,, वह चरम सुख के करीब पहुंचती जा रही थी,,,,

आहहह आहहहह मेरे राजा मेरा निकलने वाला है और जोर से धक्के लगाओ मेरा पानी निकलने वाला है,,,

चिंता मत करो रानी मैं भी तुम्हारे बेहद करीब हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से दबाते हुए अपनी कमर की रफ्तार बढ़ा दिया,,,,उसका लंड बड़ी 2G से सोनपुर के अंदर बाहर हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर में कोई मोटर चल रही हो,,, राजू के धक्के और ज्यादा तेज हो गए,,,, और कुछ देखो के बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,,जबरदस्ती चुदाई करते हुए राजू पहली बार सुना था लेकिन सोनी तीन बार अपना पानी निकाल कर मस्त हो गई थी ऐसा सुख उसने कभी भी प्राप्त नहीं की थी कि एक ही बार कि चुदाई में तीन बार झढ़ी हो,,,,ऐसा उसके साथ पहली बार हुआ था राजू उसकी उम्मीदों पर बिल्कुल खरा उतरा था वह बहुत खुश थी राजू अपना पानी उसकी बुर में निकालते हुए उसके ऊपर ढेर हो चुका था,,,।

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अद्भुत अविस्मरणीय अतुल्य संभोग का सुख भोगते हुए राजू सोनी के खूबसूरत बदन पर ढेर हो चुका था और सोनी एक असीम आनंद की अनुभूति लेते हुए गहरी सांसे ले रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि संभोग में इतना अत्यधिक आनंद भी कोई दे सकता है,,,, अभी तक वह केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए ही अपने बदन का प्रयोग करती आ रही थी लेकिन आज सही मायने में उसको संभोग के सुख के बारे में ज्ञात हुआ था,,, एक शिक्षिका होने के बावजूद भी आज उसे अपने ही विद्यार्थी से बहुत कुछ सीखने को मिला था,,,,।

ज्ञान सिर्फ शब्दों का हो यह जरूरी नहीं,,, संभोग कला में पारंगत होना भी जीवन में बहुत जरूरी होता है,,, राजू को शब्दों का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं है लेकिन बहुत ही जल्द उसने संभोग कला में महारत हासिल कर लिया था,,,, और अपनी इस कला का सही उपयोग सही समय पर सही व्यक्ति पर करना उसे बखूबी आता था तभी तो बड़े घर की औरत होने के बावजूद भी सोनी मंत्रमुग्ध से राजू के सामने चारों खाने चित हो गई थी,,,। सोनी बेलगाम जवानी की मालकिन थी और उसकी जवानी पर अभी तक किसी ने भी लगाम नहीं लगा पाया था,,, जिस किसी के साथ भी बसारी संबंध बनाती थी उस पर उसका पूरा वर्चस्व बनाए रहती थी,,,उसके जीवन में आने वाला राजू ही ऐसा पहला शख्स था जिसके आगे वह घुटने टेक दी थी पूरी तरह से उसके मर्दाना अंग के आगे धराशाई हो गई थी,,,,,, पहली बार में ही राजू ने मर्दानगी का सही अर्थ उसे समझाया था,,,,।

राजू का मर्दाना ताकत से भरा हुआ अंग अभी भी सोनी के कोमल अंग को भेदता हुआ उसके अंदर समाया हुआ था,,। ऐसा लग रहा था कि कोई कुशल तैराकी समुंदर को ही अपना घर बना कर उसके अंदर बैठा हुआ है,,,,,, राजू अपने मोटे तगड़े लंड से सोनी की मदमस्त जवानी की धज्जियां उड़ा दिया था तब तक वह शांत नहीं हुआ जब तक कि अपना गरम लावा से उसकी बुर की कटोरी भर नहीं दिया,,,लंड की गजब की तेज धारदार पिचकारी को अपने बच्चेदानी पर साफ साफ महसूस की थी और पूरी तरह से गदगद हो गई थी,,,,,, इतने सारे लावा को वह पहली बार अपनी बुर के अंदर महसूस कर रही थी क्योंकि इतना किसी का निकलता ही नहीं था जितना कि राजू ने निकाला था,,,।

दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,,कुछ देर तक उसी तरह से शांत लेटे रहने के बाद राजू सोनी की आंखों में देखते हुए बोला,,,,।

कैसा लगा सोनी दीदी,,,,

पूछो मत राजू गजब का मजा आ गया ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं मिला था तुम्हारा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है तुम्हारे जैसा लंड मैंने आज तक नहीं देखी,,,,।

(सोनी के मुंह से अपनी तारीफ खास करके अपने लंड की तारीफ को सुनकर खुश हो गया और उसके होठों को चूम लिया,,,)

तू बहुत खूबसूरत हो सोनी दीदी मैंने आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा तुम्हारा अंग अंग ऐसा लगता है कि भगवान ने खुद अपने हाथों से बनाया है,,,,

तुमको भी बहुत मजा आया ना राजू,,,।

बहुत मजा आया सोनी दीदी,,,,

मुझे दीदी मत बोला करो,,,, दीदी कहते हो तो ऐसा लगता है कि अपनी बहन को ही चोद रहे हो,,,,

तो क्या हुआ सोनी दीदी तुम्हारी जैसी खूबसूरत बहन हो तो कौन भाई होगा जो नहीं चोदेगा,,,,

धत् कैसी बातें करते हो कोई अपनी बहन को चोदता है क्या,,,!

अगर बहन चाहे तो क्यों नहीं,,,,( राजू अपने होठों पर कुटिल मुस्कान लाते हुए बोला,,, थाना कि राजू ने अभी अपनी बहन की चुदाई नहीं किया था बहन उससे बड़ी थी जिसकी शादी हो चुकी थी लेकिन अपनी बुआ की चुदाई कर चुका था इसलिए उसे धीरे-धीरे लगने लगा था कि रिश्तो के बीच भी चुदाई मुमकिन है दूसरी तरफ सोनी का भी हाल यही था भले ही वह भाई और बहन के बीच शारीरिक संबंध से इंकार कर रही हो लेकिन वह तो खुद अपने बड़े भाई के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रखती थी इसलिए उसके लिए भी भाई-बहन के बीच का पवित्र रिश्ता कोई मायने नहीं रखता था,,,। राजू की बात सुनकर सोनी बोली,,,)

तुम पागल हो गए हो राजू भला रिश्तो के बीच चुदाई मुमकिन कैसे हैं,,,,?

क्यों मुमकिन नहीं है सोनी दीदी जब एक खूबसूरत बहन अपनी बड़ी बड़ी चूची को झूलाते चलेंगीऔर अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकाते चलेगी अपने भाई को तड़पाएगी तो क्या होगा,,,जब वह खुद तैयार हो अपने भाई से चुदवाने के लिए तो भाई को भला ईंकार कैसे हो सकता है,,,

(भाई बहन के ऊपर राजू की बातें और उसका मंतव्य सुनकर सोनी के बदन में गुदगुदी होने लगी थी उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि दुनिया में केवल वही एक ऐसी औरत नहीं है जो अपने भाई से चुदवाती है ऐसे कई लोग हैं जो अपनी बहन को चोदते हैं,,,,इस बात से उसे थोड़ी संतुष्टि मिल रही थी लेकिन राजू की उत्तेजना एक बार फिर से बढ़ने लगी थी इसलिए सोनी की बुर में ढीला पड रहा लंडएक बार फिर से खुशी के मारे फूलने लगा था जिसका एहसास सोनी को अपनी बुर के अंदर बराबर हो रहा था,,,, उसे भी आनंद आ रहा था राजू की ताकत से‌ वह पूरी तरह से परिचित हुए जा रहे थे एक बार झड़ने के बावजूद भी और वह भी उसे तीन बार झड़ चुका था और तुरंत तैयार भी हो रहा था यह सब बातें सोनी को आश्चर्यचकित कर रहे थे नहीं तो एक बार की चुदाई के बाद तो आदमी ढेर हो जाता है,,,, जैसा कि उसका खुद का भाई,,, लेकिन राजू की बात कुछ और थी इसे थकान बिल्कुल भी महसूस नहीं होती थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह ईसी कार्य के लिए जन्म लिया है,,,।

सोनी को,,, बड़े जोरो की पिशाब लगी थी,,, इसलिए वह राजू को अपने ऊपर से उठाते हुए बोली,,,।

चल अच्छा हट,,, बडा आया अपनी बहन को चोदने,,,,

तो क्या अभी अभी तो अपनी बहन को चोदा हुं,,,,

(राजू के कहने का मतलब को समझकर सोनी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

मैं तुम्हारी सगी बहन थोड़ी हूं,,,

तो क्या हुआ दीदी तो कहता हूं ना,,,,

(सोनी राजू को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन राजू था कि हटने का नाम नहीं ले रहा था,,, उसका लंड अभी भी सोनी की बुर में घुसा हुआ था,,,। जोकि धीरे-धीरे फूलने लगा था उसे फूलता होगा सोनी अपनी बुर में बराबर महसूस कर रही थी और इसी की वजह से उसकी उत्तेजना भी फिर से शुरू होने लगी थी लेकिन उसे बड़े जरूर की पेशाब लगी थी इसलिए उसे हटाना जरूरी था वह हट नहीं रहा था इसलिए सोनी जोड़ देते हुए बोली,,,)

चल अच्छा हट जाओ सगी बहन होती तो नहीं चोदता अभी सिर्फ बातें कर रहा है,,,

नहीं-नहीं जरूर चोदताअगर तुम इसी तरह से मेरे सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी होती तो जरूर मेरा लंड तुम्हारी बुर में होता जैसा कि अभी घुसा हुआ है,,,,(राजू धीरे-धीरे जोश में आ रहा था जिसकी वजह से वह हल्के हल्के उसकी चुचियों को मुंह में लेकर काट ले रहा था,,,,उसका इस तरह से चुचियों को काटना अच्छा भी लग रहा था लेकिन पेशाब की तीव्रता की वजह से वह परेशान थे इसलिए ना चाहते हुए भी उसे बोलना पड़ा,,,।)

अरे उतारोगे,,, मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,,,

(खूबसूरती की मुहूर्त सोनी के मुंह से पेशाब लगने वाली बात सुनकर राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह उत्तेजित स्वर में बोला,,,)

अभी तो मुत कर आई थी,,,

तो क्या हुआ फिर से लग गई है,,,,

तुम्हें पैसाब बहुत जल्दी जल्दी लगती है,,,(इतना कहते हुए वह उठने लगा और सोनी अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर थोड़ी होने लगी और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर कर दी,,, जहां पर राजू का लंड अभी भी पूरी तरह से गहराई में धंसा हुआ था,,,, राजू सोनी की आंखों में देखते हुए बोला,,,)

तुम्हारी बुर में से लंड को निकालने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है,,,

निकालोगे नहीं तो पैशाब कैसे करुंगी,,,(सोनी भी अपनी दोनों टांगों के बीच देखते हुए ही बोली,,)

तुम कहती हो तो निकाल देता हूं वरना मेरा इरादा अभी ईसे निकालने का बिल्कुल भी नहीं था,,,,

बहुत शैतान हो मैं तो तुम्हें कितना सीधा साधा समझ रही थी,,,,

अब जिसके पास इतनी खूबसूरत गुलाबी छेद है तो उसे देखकर इंसान कब तक सीधा-साधा रह सकता है,,,,

बातें बहुत आती है तुझे चलो जल्दी से निकालो,,,।

ठीक है महारानी जैसी आपकी आज्ञा,,,(राजु की बात सुनकर सोनी हंसने लगीऔर राजू अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को उसके गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच फंसे मुसल को निकालना शुरू कर दिया,,, राजु अपनी कमर को उठाते हुए अपने लंड को बाहर खींच रहा था बाहर खींचते समय भी लंड की नशे बुर की अंदरूनी दीवारों पर रगड़ खा रही थी जिसकी वजह से सोनी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,और देखते ही देखते राजू ने अपने लंड को उसकी बुर से पक्क की आवाज के साथ बाहर खींच लिया,,, सोनी मुस्कुराने लगी और खड़ी होने लगी राजू भी खड़ा हो गया था और अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,।

अब कपड़े मत पहनो फिर से निकालना पड़ेगा,,,,।

तो क्या हुआ निकाल देना कपड़े उतारने में तो तुम माहिर हो,,,

नहीं नहीं तुम बिना कपड़ों के ही बाहर जाओ एकदम नंगी,,, बहुत अच्छा लगेगा,,,,

पागल हो गया क्या बिना कपड़ों के बाहर कैसे जाऊंगी किसी ने देख लिया तो,,,

यहां कौन आएगा देखने के लिए इतनी वीरान जगह है एकदम सुनसान यहां कोई नहीं आता,,,।

नहीं नहीं मैं कपड़े पहन कर ही जाऊंगी,,,(अपने पेटीकोट को नीचे से उठाते हुए बोली तो राजू तुरंत आगे बढ़ा और उसके हाथ से पेटीकोट छीन लिया और बोला,,,)

कोई नहीं देखेगा ऐसे ही चलो ना एक बार एकदम नंगी बहुत मस्त लगोगी साड़ी में जब चलती हो तो एकदम कयामत लगती हो बिना कपड़ों के चलोगी तो तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर मेरा लंड,,,(अपने लंड को पकड़ कर हीलाते हुए) एकदम बावला हो जाएगा,,,,

(पर आ चुकी है बात सुनकर वह कुछ सोचने लगीराजू की बातें उसके मन पर भी गहरा प्रभाव छोड़ रही थी वह भी बिना कपड़ों के ही बाहर जाना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि बिना कपड़ों के घूमने में घर से बाहर आम के बगीचे में क्या-क्या लगता है वैसे तो घर में व कई बार बिना कपड़ों के घूम चुकी थी लेकिन आज वह अलग अनुभव लेना चाहती थी इसलिए उसकी बात मानते हुए बोली,,,)

ठीक है तेरी बात मैं मान लेती हूं लेकिन तुझे भी इसी तरह से चलना होगा नल तक,,,, वहीं पर में पेशाब करूंगी,,,,

ठीक है सोनी दीदी,,,,

फिर दीदी कहा,,,,

ठीक है सोनी,,,,,

(सोनी मुस्कुराते भी झोपड़ी के बाहर कदम रखने से पहले एक बार चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है वैसे भी इस जगह पर कोई आता नहीं था फिर भी वह थोड़ी तसल्ली कर लेना चाहती थी और जब पूरी तरह से तसल्ली कर ली तो वह अपना एक कदम बाहर निकाल दी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी आज वह पहली बार घर के बाहर नंगी घूमने का अनुभव ले रही थी पीछे पीछे राजू खड़ा था जो कि झोपड़ी से बाहर निकलने मैं समय ले रही थी तो वह ठीक सोनी के पीछे आ गया उसकी चूची दोनों हाथों से पकड़कर अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ने लगा राजू की हरकत से वग पूरी तरह से बावली हो गई,,,, और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहहहहह ,,,,,आहहहहहहह राजु,,,,,, पेशाब तो कर लेने दे,,,,

रोका किसने है खड़े-खड़े मुत लो,,,ना,,,

धत्,,,, पागल हो गया है क्या,,,, छोड़ो मुझे,,,,( और इतना कहकर झोपड़ी के बाहर निकल गई,,, आगे आगे चल रही है सोनी की बड़ी बड़ी गांड मटकते हुए देखकर राजू के होश उड़ रहे थे,,,,उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में पहुंच गया और वहां पर परियों के साथ काम लीला रचा रहा हो,,,, आगे-आगे चल रही सोनी उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत लग रही थी साड़ी में चलते हुए उसे देखा था लेकिन नंगी देखने का सुख उसके भाग्य में लिखा हुआ था इसीलिए आज वहां इस आम के बगीचे में हमसे बिना कपड़ों के चलते हुए देख रहा था सोनी रह-रहकर पीछे की तरफ देख कर मुस्कुरा दे रही थी और जवाब में राजू अपना लंड पकड़ कर हिला दे रहा था,,, दोनों की इस तरह की हरकतें बेहद मदहोशी फैला रही थी दोनों की आंखों में चार बोतलो का नशा छाने लगा था,,,, देखते ही देखते सोनी हेड पंप के पास पहुंच गई और बेझिझक राजू के सामने ही अपनी बड़ी बड़ी गांड लेकर नीचे बैठ गई और मुतना शुरू कर दि,,, 5 कदम की दूरी पर राजू खड़ा हो गया था क्योंकि उसे इतने जोरो की पिशाब लगी हुई थी कि उसकी गुलाबी बुर के छेद से पेशाब की धार बाहर निकलने लगी और साथ ही उसमें से मधुर सिटी की ध्वनि सुनाई देने के लिए जो कि राजू के हौसले पस्त कर रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,,,
 
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