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Incest अपनों का प्यार या रिश्तों पर कलंक [ ड्रामा + सस्पेंस ] (completed)

मम्मी--ऐसा नही बोलते दीक्षा ...तुम उनके लिए बोझ नही हो....वो बस तुम्हारी पढ़ाई में डिस्टर्ब ना हो इसलिए तुम्हे फोन नही कर रहे होंगे....तू कॉलेज से आजा उसके बाद तुम दोनो बहनो के साथ तेरे माँ बाप की मिल कर क्लास लगाएँगे....

उसके बाद वो सब कार में बैठ कर अपने अपने स्कूल कॉलेज की तरफ रवाना हो गये....

और में वही बैठा बैठा अख़बार पढ़ने लग गया....इसी तरह टाइम पास करते करते 10 बज गये तभी मेरे पास राजेश का फोन आ गया....

रहेश--जय रेडी हो गये ना....

में--हाँ राजेश भाई में बस आपके फोन का ही वेट कर रहा था....बोलिए कहाँ मिलेंगे आप...में अपनी कार लेकर वही आ जाता हूँ....

राजेश--ठीक है तुम मुझे ऑफीस के बाहर से ही पिक कर लो 11.15 की फ्लाइट है ज़्यादा देर मत करना....

में--में बस निकल ही रहा हूँ....10.30 आपके पास पहुँच जाउन्गा....

राजेश--ठीक है आ जाओ अब में फोन रखता हूँ....

उसके बाद में फोन अपनी जीन्स में डालकर एक छोटे से ट्रॅवेल बेग में कुछ ज़रूरी सामान भर लेता हूँ....और मम्मी से कहता हूँ जुगल किशोर अंकल की दुकान से कोई आएगा उन्हे वो बॉक्स दे देना....

मम्मी--ठीक है में वो दे दूँगी लेकिन तेरे दिमाग़ में चल क्या रहा है बताएगा मुझे....

में--बहुत जल्दी इस घर में खुशिया आने वाली है....बस मुझे थोड़ा वक़्त और दे दो....उसके बाद में सब कुछ ठीक कर दूँगा....

मम्मी--ठीक है जा जहाँ जाना है....लेकिन अपना ख्याल रखना....

में उसके बाद वहाँ से निकल कर सीधा राजेश के ऑफीस की तरफ बढ़ जाता हूँ वहाँ मुझे राजेश बाहर ही नज़र आजाता है....

उसके बाद हम तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ जाते है....

हम लोग वाराणसी एरपोर्ट पहुँच गये थे...वहाँ से हमे एक कार लेकर 2 घंटे के सफ़र पर निकलना था....मैने शमा को फोन करके यहाँ पहुँचने के बारे में बता दिया....उसकी आवाज़ से घबराहट काफ़ी सॉफ दिखाई पड़ रही थी....

शमा से बात करने के बाद हम लोग एक पोलीस हेडक्वॉर्टर में पहुँचे जहाँ राजेश ने कुछ मालूमात करी...

राजेश--जय भाई मामला बड़ा गंभीर है....यहाँ कुछ धर्म के ठेकेदार है जो वेश्याव्रती को सही मानते है....और ये लोग पोलिटिकली भी काफ़ी साउंड है....हमे कुछ और ही करना होगा....

में--क्या करना होगा राजेश भाई...

राजेश--तुम्हे शमा को यहाँ से खरीद कर ही ले जाना होगा....अगर में यहाँ पुलिस के साथ रेड डालता हूँ उसमें किसी को चोट भी पहुँच सकती है....और दूसरी बात ये काम बिना मीडीया के पासिबल भी नही है....और अगर मीडीया इस काम में एंवोल्व हो गयी तो तुम खुद समझ सकते हो तुम्हारे परिवार की कितनी बदनामी होगी....

में--बात तो सही है राजेश भाई....मेरे दिमाग़ में एक प्लान है अगर आप सुनना चाहे तो....

राजेश--अगर वासत्व में कोई सेफ प्लान है तो में ज़रूर सुनना चाहूँगा....

में--हमारा सब से पहला मकसद शमा को यहाँ से कोई भी कीमत देकर निकालना है....हम लोगो के निकलने के बाद अगर आप....यहाँ रेड कर दे तो शमा भी बच जाएगी और काफ़ी सारी लड़कियो की जिंदगी भी बच जाएगी....

राजेश--मेरे दिमाग़ में भी यही चल रहा है जय....

रेड के टाइम तुम्हारे दिए हुए पैसे भी बरामद हो जाएँगे....लेकिन रेड से पहले में तुम्हारे साथ उस कोठे पर नही जा सकता....

में--हम लोग जैसे ही वहाँ से निकलेंगे आपको इनफॉर्म कर देंगे आप हमारे वहाँ से निकलते ही कोठे पर रेड कर देना....

राजेश--ठीक है जय अभी....7 बज रहे है और वहाँ का महॉल भी रंगीन हो रखा होगा....मेरे ख्याल से तुम्हे वहाँ एक बार जाना चाहिए....

उसके बाद में राजेश से विदा लेकर कोठे की तरफ बढ़ जाता हूँ....
 
फिर उसके बाद नीरा मुझे पर झपट पड़ती है और मेरे पूरे चेहरे पर अपने होंठों से निशान बना देती है....और फिर लास्ट में मेरे नीचे वाले होंठ पर एक हल्का सा बाइट कर के कहती है ....

नीरा--गुड मोर्निंग जान....

और में भी कस कर उसे अपने गले से लगा लेता हूँ....उसके बाद में उसे बाहर जाने को कहता हूँ और बाथरूम में घुस जाता हूँ....

नीरा का इस तरह मेरा ख्याल रखना मुझे काफ़ी अच्छा लग रहा था....में जल्दी जल्दी फ्रेश हो कर बाहर निकल कर आ गया....बाहर सभी हॉल में बैठ कर मेरा वेट कर रहे थे नाश्ते के लिए....

कोमल--भैया क्या बात है आज कल कॉलेज की खूब छुट्टियाँ मार रहे हो आप....

में--क्यो तेरा भी स्कूल से छुट्टी मारने का मन कर रहा है क्या....

कोमल--स्कूल से छुट्टी मारने का तो नही लेकिन कहीं घूमने जाने का ज़रूर मन कर रहा है.....

में--में एक बार ये काम निपटा लूँ उसके बाद नेक्स्ट वीक हम 4 दिनो के लिए कहीं बाहर चलेंगे....

कोमल--पक्का ना भैया.....

दिखसा--अब उनसे क्या लिख कर लेगी....चुप चाप खाना खा और स्कूल जाने की तैयारी कर....

मम्मी--अरे दीक्षा बेटा बोलने दे उसे वो अपने भाई को ही बोल रही है कोई दूसरा बाहर वाला नही है....

कोमल--बड़ी मम्मी दीदी हमेशा मुझे डाँटती रहती है...

मम्मी--क्या बात है दीक्षा कुछ दिनो से तेरा बर्ताव क्यो बदला हुआ है....

दीक्षा--कुछ नही बड़ी मम्मी.. मम्मी पापा ने गाँव जा कर एक बार भी हमसे फोन करके बात नही करी....ऐसा लग रहा है जैसे एक बोझ था उनके सीने पर जिसे वो इस घर में छोड़ कर चले गये है....ये कहते कहते दीक्षा की आँखो में आँसू आ गये...और मम्मी ने वहाँ से उठ कर दीक्षा के माथे को अपने सीने में दबा लिया....
 
सुहानी--ओके जय अब ग़लती नही होगी....अब में फोन रखती हूँ....मुझे अरेंज्मेंट्स भी देखने है....

उसके बाद सुहानी फोन काट देती है और में फोन सामने टॅबेल पर रख कर नीरा की तरफ देखता हूँ जो बस मुझे गुस्से से खा जाने वाली नज़रो से देख रही होती है......

नीरा--ये क्या तरीका है....रिजोर्ट चेंज कर दिया....लेकिन वो जगह कितनी अच्छी थी...अब उस से अच्छी जगह कौनसी होगी....

में--अरे मेरे लाल टमाटर नाराज़ क्यो होती है वैसे तो मुझे सुहानी पर भरोसा है लेकिन अगर फिर भी तुम्हे वो जगह पसंद ना आए तो हम पुरानी जगह चल देंगे....इस में मुँह फुलाने की कौनसी बात है...

भाभी--अगर कोई नयी जगह है जो पहले से भी बेहतर हो तो मज़ा दुगना हो जाएगा....वैसे टूर के लिए सही समय चुना है तुमने....4 -5 दिन हम सब वहाँ मज़े करेंगे और उसके बाद होली भी है....यानी मस्ती करने के खूब सारे दिन है अब हमारे पास.....

में--होली....अरे बाप रे...होली से तो डर ही लगता है भाभी मुझे...

रूही--चल अब डरना बंद कर और पॅकिंग कर ले....शाम को निकलना भी है...होली जब आएगी तब आज़एगी...

उसके बाद हम सभी अपनी अपनी तैयारियो मे मशगूल हो जाते है....बीच बीच मे नीरा आकर मुझे किस भी करती जा रही थी....

शाम को हमने दो गाड़ियाँ ले ली थी....एक गाड़ी में ड्राइव कर रहा था जिसमें आगे नीरा बैठी थी पीछे भाभी और शमा....
और दूसरी गाड़ी रूही चला रही थी...उस गाड़ी में आगे दीक्षा पीछे मम्मी और कोमल...

हम लोग हर 1 घंटे में रुक रहे थे क्योकि रूही हाइवे पर गाड़ी चलाने की इतनी अभ्यस्त नही थी....इसलिए किसी को भी गाड़ी में नींद नही आ रही थी....

ऐसे ही चलते चलते मस्तिया करते करते हृषिकेश पहुँच गये....

सुहानी ने हम लोगो का स्वागत जोरदार तरीके से किया....और उसके बाद रिजोर्ट की दो गाडियो में हम जंगल के अंदर बढ़ने लगे....

में--सुहानी ये जंगल तो काफ़ी गहरा है....किसी जंगली जानवर का डर तो नही है यहाँ....

सुहानी--जंगली जानवर तो काफ़ी है यहाँ लेकिन इंसानो को कोई नुकसान नही पहुँचा सकता....यहाँ के जानवर इंसानो से दूर ही रहते है....

में--फिर ठीक है....नही तो मालूम पड़ा जंगली जानवरो से डरते डरते हुए यहाँ एंजाय करना पड़े....

सुहानी--ऐसा कुछ भी नही होगा....आज का दिन आप लोग आराम करिए....कल से जंगल के नज़ारे देखना शुरू कर देना...

उसके बाद सुहानी हमे जंगल के बीचो बीच एक जगह पर ले आई....लेकिन ना तो यहाँ टॅंट लगाने की जगह दिख रही थी ना हे आराम करने की....

में--ये कैसी जगह है सुहानी....यहाँ तो सभी पेड़ इतने पास पास है कि गाड़ी भी आगे नही जा पाएगी....

सुहानी--मैने आप सभी के रहने की पूरी व्यवस्था यहीं करी है....

उसके बाद हम गाडियो से निकल कर पैदल ही जंगल के अंदर बढ़ने लगे....एक जगह रुकने के बाद सुहानी ने अपने हाथो का इशारा एक सिढी की तरफ किया और मुझे पहले उस पर चढ़ने को कहने लगी....

ज़मीन से उपर देखने पर मुझे पता चला कि वहाँ ट्री हाउस बने हुए थे....में सिढी पर चढ़ गया....ट्री हाउस अंदर से किसी लग्जरी होटेल रूम की तरह ही बना हुआ था....लाइट्स भी उन ट्री हाउस में सुपली हो रही थी....

में--वाह सुहानी ये तो मजेदार जगह है....

सुहानी--असली नज़ारा आपने देखा कहाँ है....ज़रा सेकेंड फ्लोर पर जाकर देखो....
 
नीरा के इतना कहने के बाद ही में किसी तोते की तरह फिर से आज जो कॉलेज में हुआ वो सब को बता देता हूँ....और इस बारे मे कोई भी बात करने से मना भी कर देता हूँ...मैं नही चाहता मेरा परिवार किसी भी बात पर परेशान हो इसलिए क्लोज़ दा टॉपिक...

शमा--शॉपिंग करने में तो मज़ा आ गया भैया....

में--शॉपिंग तो कर ली लेकिन घूम कर आने के बाद तुम्हे पढ़ाई पर ध्यान भी देना होगा....मैं नही चाहता कभी भी किसी के सामने भी तुम्हारा सिर नीचा हो....

भाभी--इसकी पढ़ाई की चिंता तुझे करने की ज़रूरत नही है....वो मेरा काम है मैं संभाल लूँगी....खुद की पढ़ाई पर ध्यान दे तो ज़्यादा अच्छा होगा...

भाभी की ये बात सुनकर में बगले झाकने लगा ....आख़िर कहा भी तो सही था उन्होने....पढ़ाई की माँ बहन हो रखी थी इतने टाइम से....और मैं पढ़ाई का ग्यान शमा को दे रहा था...

मम्मी--अच्छा चलो अब जल्दी से खाना खा लो फिर बढ़िया सा रिजोर्ट सेलेक्ट कर लो....

नीरा--सेलेक्ट क्या करना है....वही रिजोर्ट सही रहेगा....लेकिन इस बार आउटिंग की जगह थोड़ी अलग होनी चाहिए....आप सुहानी को फोन क्यो नही कर देते....

में--मैं उसे फोन लगाने ही वाला था....लेकिन सोचा सब कुछ तुम लोगो के साथ ही सेलेक्ट किया जाए....

नीरा--आप तो ऐसे कह रहे हो जैसे आपका सेलेक्ट किया हुआ हमे पसंद नही आता....पिछली बार भी जबरदस्त सर्प्राइज़ था हम सब के लिए....और मुझे पक्का यकीन है आप इस बार भी कोई ना कोई सर्प्राइज़ देने की तैयारी मे ही हो...

रूही--ठीक कहा नीरा....चलो भाई अब जल्दी से फोन लगा भी दो सुहानी मेडम को....

उसके बाद मेरी उंगलिया सुहानी का नंबर डाइयल करने लग जाती है....

सुहानी--कैसे है सर....आज कैसे याद आ गयी....

में--हम सब अच्छे है सुहानी....बस हृषिकेश आने की तैयारी कर रहे है....लेकिन चाहते है इस बार जहाँ हम रुके वो जगह पहले से ज़्यादा ख़ास हो....बिल्कुल नेचर के करीब....

सुहानी--में तो आपकी मदद के लिए हमेशा रेडी हूँ सर....लेकिन जिस रिजोर्ट मे मैं पहले थी वो मैं अब छोड़ चुकी हूँ....इसलिए अगर आप को परेशानी ना हो तो क्या आपकी बुकिंग जहाँ मैं अभी हूँ वहाँ कर लूँ.... ये रिजोर्ट छोटा है लेकिन आपकी नीड्स बखूबी पूरी कर सकता है....

में--कैसी बात कर रही हो सुहानी....पहले वाला रिजोर्ट कोई मेरे ससुर का थोड़े ही था जो हमे उसी में जाना है....बस जगह अच्छी होने चाहिए....और मुझे तुम पर भरोसा है...

सुहानी--आपका भरोसा कभी नही टूटेगा....कितने मंबेर्स के लिए बुक रखना है सर....

में--ये सर सर क्या लगा रखा है.....जय नाम है मेरा....और चाहूँगा तुम मुझे इसी नाम से बुलाओ....

सुहानी--ठीक है सर.....आइ मीन जय...

में--मेरे अलावा 7 मेंबर है...और मेरे अलावा बाकी सब फीमेल है इस लिए उनकी सुविधा का ध्यान रखना होगा तुम्हे....

सुहानी--एक शेर और 7 शेरनिया......अब तो इंतज़ाम पक्का करना ही होगा....वरना गुस्से में आकर शेरनियो ने मेरा शिकार कर लिया तो में गयी....

में--हहहहः ऐसा कुछ नही है....तुम आराम से तैयारी कर लो....हम कल दिन तक वहाँ पहुँच जाएँगे आज रात को ही हम यहाँ से निकल रहे है....

सुहानी--ठीक है सर....सॉरी....सॉरी....जय....आप आएँगे तब तक सारी तैयारिया पूरी हो जाएँगी.....

में--ठीक है सुहानी....लेकिन इस सर को अपनी ज़ुबान से निकाल दो वरना पक्का मैं तुम्हारा सिर फॉड दूँगा....

सुहानी--ओके जय अब ग़लती नही होगी....अब में फोन रखती हूँ....मुझे अरेंज्मेंट्स भी देखने है....

उसके बाद सुहानी फोन काट देती है और में फोन सामने टॅबेल पर रख कर नीरा की तरफ देखता हूँ जो बस मुझे गुस्से से खा जाने वाली नज़रो से देख रही होती है....
 
मीना--अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट लाते हुए......जॉनी पार्टी तो ज़रूर लूँगी.....लेकिन थोड़े और पैसे जोड़ ले वरना ख़तम होने पर मुझ से फिर से माँगेगा....

इस बात पर मीना के साथ साथ हम भी हँसने लग गये.....

तभी रूम का दरवाजा खुला और मीना के मम्मी पापा अंदर आगये....उनके अंदर आते ही हम लोग बँच पर से उठे और मैं जैसे ही बाहर जाने के लिया मुड़ा मीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया....

मीना--पापा ये है जय....आज इसी की वजह से आपके सामने ज़िंदा पड़ी हूँ मैं...

उसके पापा मेरी तरफ हाथ जोड़ कर खड़े होगये उनकी आँखो मे आँसू थे ज़ुबान से शब्द नही निकल रहे थे....और एक बाप की ये हालत एक बाप ना होते हुए भी मैं समझ पा रहा था.....

मैने उन्हे अपने गले से लगाया और कहा चिंता की कोई बात नही है मीना अब ठीक है....मीना की मम्मी भी प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी....

जॉनी--मीना अब हम लोग चलते है कोई भी ज़रूरत हो हम यहाँ बाहर ही है....

में--मीना मैं रुक तो नही पाउन्गा क्योकि आज रात को मुझे परिवार के साथ कहीं जाना है 4-5 दीनो के लिए....इसलिए मैं अब कुछ दिनो बाद ही मिल पाउन्गा....

मीना--आराम से जाओ जय अब तो मम्मी पापा भी आ गये है....और जल्दी ही मैं भी ठीक हो जाउन्गि....

मीना से विदा लेने के बाद हम तीनो हॉस्पिटल से बाहर आ गये और अरमान और जॉनी को मैने हिदायत दे दी कि वो मीना का अच्छे से ध्यान रखे....पोलीस प्रोटेक्षन मीना को मिल ही चुका था....

अब मैं वहाँ से सीधा अपनी बाइक उठा कर अपने घर की तरफ बढ़ गया.....
घर पहुँचने के बाद में सीधा अपने रूम मे चला गया था....घर पर इस वक़्त सिर्फ़ मम्मी थी जो अभी अपने रूम मे ही थी....मुझे आया देख वो भी मेरे पास आ गयी...

मम्मी--क्या बात है जय आज इतनी देर कैसे हो गयी....

मम्मी के इस सवाल ने मुझे फिर से पूरे दिन की घटना याद दिला दी....में उन्हे सब कुछ बताता चला गया....

मम्मी--ये तो बुरा हुआ जय....लेकिन उस बच्ची की खुश किस्मती से वो बच गयी वरना जाने क्या होता उसके साथ...

में--वो अब ठीक है मम्मी....क्या मुझे एक कॉफी मिल सकती है....

मम्मी--तू चेंज कर ले तब तक में तेरे लिए बढ़िया कॉफी बना कर लाती हूँ..

उसके बाद मम्मी बाहर चली गयी और में चेंज करने लगा....थोड़ी देर बाद मम्मी अपने हाथो में दो मग कॉफी के ले आई और मेरे पास ही बैठ कर पीने लगी....

मम्मी--जय वहाँ रिजोर्ट में बुकिंग करवा ली क्या तूने....

में--नही अभी करवाता हूँ....मैने सोचा सब आजाए तो उनके सामने ही बुकिंग करवा दूं....

मम्मी--चल ठीक है....मुझे तुझ से एक बात करनी है....,

में--बोलो क्या बात है....ऐसी कौनसी बात है जो आपको इतना परेशान कर रही है....

मम्मी--में नेहा के बारे में तुझ से बात करना चाहती थी....

में--भाभी के बारे में....??क्या हुआ बोलो..

मम्मी--तूने नीरा से शादी कर ली....लेकिन मैं सोच रही हूँ नेहा को भी कोई साथी मिलना ही चाहिए....

में--मम्मी ये बात वक़्त के हाथो में ही छोड़ दो....जब वक़्त आएगा भाभी को भी किसी का साथ मिल ही जाएगा....

हम लोग उसके बाद काफ़ी देर तक इधर उधर की बाते करते रहे....और थोड़ी देर बाद ही वो सभी लोग बाज़ार से शॉपिंग करके पहुँच गये थे.....

में--हो गयी तुम लोगो की शॉपिंग....लगता है आज पूरा बाज़ार ही खरीद लाए....

कोमल--जिसका भाई आपके जैसा हो....उसकी बहने बाज़ार भी खरीद सकती है....

रूही--आज क्या कांड हो गया कॉलेज में....मेरी सहेली बता रही थी कि मीना के साथ कुछ हुआ था....

में--कुछ नही हुआ सब ठीक है....तुम बताओ कैसा रहा सब कुछ...

नीरा--सब क्या ठीक है....क्या हुआ ये बताओ....हम लोग इसी वजह से घर जल्दी आ गये क्योकि दीदी की सहेली ने आपका नाम भी लिया था....
 
हम वहाँ से हॉस्पिटल पहुँच गये थे.....राजेश और वो तीनो लेडी पोलीस हमे मीना के रूम के बाहर ही मिल गये थे....

राजेश ने बताया कि मीना ठीक है.....शरीर पर काफ़ी जखम है लेकिन वो सब जल्दी ही ठीक हो जाएँगे....

में राजेश से बाद में मिलने का बोल कर मीना के रूम में जा घुसा....

रूम के अंदर मीना हॉस्पिटल बेड पर लेटी हुई थी हाथ में ग्लूकोस द्रीप और चेहरे पर ऑक्सिजन मास्क चढ़ा हुआ था उसकी एक आँख के चारो तरफ एक काला घेरा बना हुआ था.....होंठो पर चढ़ि सूजन अभी भी उसे मिले दर्द की कहानी बता रही थी....हम सभी उसके पास लगी बँच पर जा बैठे और मैने मीना का हाथ अपने हाथो में ले लिया....

मेरे हाथ का स्पर्श पाते ही उसने अपनी आँखे खोल दी और मेरी तरफ देखने लगी....अचानक उसकी आँख से एक आँसू लुढ़क कर उसके गालो से होता हुआ सीधा पिल्लो पर जा गिरा...

उसे इस हालत में देख कर मैं भी ज़्यादा देर तक अपने आँसू नही रोक पाया....

मीना--मुझे बचाने के लिए शुक्रिया दोस्त....आज अगर तुम वक़्त पर नही पहुँचते तो ना जाने वो मेरा क्या हाल करते....

में--मीना तू आराम कर....और वैसे भी तुझे अब दुखी होने की ज़रूरत नही है उन भेड़ियो को इसका अच्छा सबक मिला है.....अब कोई भी किसी लड़की की तरफ आँख उठाने से पहले 100 बार सोचेगा....

मीना--जॉनी अरमान मेरी मम्मी को कॉल किया क्या तुमने....

अरमान--हाँ मीना वो रास्ते मे ही है थोड़ी देर में पहुँच जाएँगे....जब तक हम है ना तेरी देखभाल के लिए....

में--मीना मुझे एक बात बताओ कॉलेज के मेन गेट पर लॉक लगा हुआ था तो फिर तुम पहुँची कैसे वहाँ तक.....

मीना--मैं जब सुबह कॉलेज आई तो मुझे वहाँ एक सर मिले जो कि बता रहे थे किसी स्टाफ की डॅत हो गयी है तो आज कॉलेज बंद रहेगा.....इसलिए मैं कॅंटीन की तरफ चली गयी लेकिन आज वो भी बंद थी....थोड़ी देर बाद एक लड़की मेरे पास आई और उसने कहा कि अरमान और जॉनी पीछे वाले पोर्षन म है....उसके बाद मैं वहाँ से उठ कर सीधा पीछे पहुँच गयी लेकिन वहाँ किसी को नही देखा मैने....

अचानक मेरा ध्यान उस खुले हुए दरवाजे की तरफ चला गया जो कॉलेज के अंदर जाने का रास्ता था....वहाँ ताला भी टूटा हुआ था.....मुझे लगा अरमान और जॉनी किसी ग़लत इरादे से अंदर घुसे तो मैं जस्ट उन दोनो डाटने के इरादे से जैसे ही अंदर घुसी किसी ने मेरा मुँह दबोच लिया....मैं कुछ समझ पाती उस से पहले ही वो मुझे उठाकर वहाँ लेगये....वो सब मुझे अपने साथ इन्वॉल्व होने को कह रहे थे और धमकी भी दे रहे थे अगर तू नही मानी तो गली का कुत्ता भी तेरे साथ नही सोएगा ऐसी हालत कर देंगे वो मेरी....

लेकिन मैने उन लोगो से हार नही मानी....मैं उन तीनो से लड़ती रही और वो मेरे जिस्म से एक एक कपड़ा नोचते गये....मुझे बहुत मारा उन्होने....मेरे हाथ मे मेरी एक सॅनडेल आ गयी जिसे मैने एक लड़के पर ज़ोर से फेक के मारा था....लेकिन वो सॅनडेल भी जाकर खिड़की पर लगा....

में--तुम्हारा वही सेंडल मुझे तुम्हारे पास ले आया....अब ये सारी बाते भूल जाओ....राजेश ने तुम्हारा बयान ले ही लिया होगा मैं उसे बोल दूँगा वो तुम्हे ज़्यादा परेशान नही करेगा....

जॉनी--मीना जल्दी से ठीक हो जा.....उसके बाद तू जहाँ बोलेगी वहाँ पार्टी दे दूँगा तुझे....बस जल्दी से ठीक हो जा....

मीना--अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट लाते हुए......जॉनी पार्टी तो ज़रूर लूँगी.....लेकिन थोड़े और पैसे जोड़ ले वरना ख़तम होने पर मुझ से फिर से माँगेगा....

इस बात पर मीना के साथ साथ हम भी हँसने लग गये.....

तभी .................
 
तभी मेरा ध्यान मीना के रोने की आवाज़ सुन कर उस की तरफ हो गया....मैने तुरंत अपनी शर्ट निकाल कर उसे पहना दी और उसे अपनी बाहो में भर कर चुप करने लगा.....

तभी दरवाजे पर अरमान और जॉनी की आवाज़े भी गूंजने लगी....मैने मीना को वही एक बँच पर बैठा दिया और दरवाजे की तरफ बढ़ गया.....

अरमान--कौन है अंदर दरवाजा खोल....

में--अरमान जल्दी से किसी लड़की के पास से एक जोड़ी कपड़े लेकर आ ....यहाँ मीना की हालत बुरी है....और में नही चाहता तुम लोग इसे इस हालत में देखो.....

अरमान मेरी आवाज़ पहचान गया और लगभग दौड़ते हुए किसी लड़की को ढूँढने लगा....अक्सर कॉलेज जाने वाली लड़किया अपने बेग में एक जोड़ी ड्रेस ज़रूर रखती है....लेकिन मीना के पास बस वही कपड़े थे जो वो पहन कर आई थी और वो फर्श पर फटे पड़े थे....

अरमान को भी कुछ लड़कियो से पूछने के बाद एक लड़की के पास एक्सट्रा ड्रेस मिल हे गयी वो भागते हुए दरवाजे के पास आ गया....इस बीच मैं राजेश को भी फोन लगा कर यहाँ का हाल बता चुका था.... मैने धीरे से दरवाजा खोला जॉनी और अरमान अंदर झाकने लगे लेकिन मैने उन्हे अभी अंदर आने से मना कर दिया....वापस दरवाजा बंद करके मैने वो कपड़े मीना को पहनने के लिए दे दिए और दूसरी तरफ अपना चेहरा घुमा कर खड़ा हो गया....

मीना ने भी सुबक्ते सुबक्ते जल्दी ही वो कपड़े पहन लिए और तभी मेरा फोन घनघना उठा ये कॉल राजेश का था....मैने अरमान को आवाज़ लगाकर नीचे से राजेश को लाने के लिए बोल दिया और दरवाजा खोल दिया....दरवाजा खोलते ही जॉनी रॉकेट की तरह भागता हुआ मीना के पास चला गया और वहाँ का हाल देख कर वो मीना को अपने गले से लगा कर रोने लगा....

दोस्ती नाम ही ऐसा है....एक दोस्त को दर्द हो तो वो दर्द जल्दी ही दूसरा भी महसूस कर लेता है....जॉनी ने खुद को काबू में लाते हुए उन तीनो पर लात घुसो की बारिश कर दी ....तभी राजेश भी 3 लेडी पोलीस के साथ वहाँ पहुँच गया था....वो लेडी पोलीस स्पेशल डिपार्टमेंट की थी....और जब उन तीनो ने वहाँ का हाल देखा तो जॉनी को साइड में हटा कर खुद पिल पड़ी उन तीनो पे....

उन तीनो लड़कियो ने उन लड़को को अपने बूट्स की ठोकरों पर ले लिया था....उनमे से एक लड़की ने अपनी जेब में से एक चाकू निकाला और एक लड़के का लिंग बिना सोचे समझे काट दिया....उस लड़की के ऐसा करते ही बाकी दो ने भी यही किया....

हम उनको ऐसा करते देख लगभग सन्नाटे में आगये....एक दुमाम से ऐसा कुछ हो जाएगा इसकी कल्पना भी नही करी थी किसी ने भी....वो तीनो अपना काम ख़तम करने के बाद पलटी और राजेश से ये कहने लगी....

लड़की--सर अगर हमने कुछ ग़लत किया है तो आप हमारे खिलाफ रेपौर्त दर्ज करवा सकते है.....

राजेश--तुम ने जो कुछ भी किया वो सही किया....वैसे भी ये लोग ज़्यादा दिन जेल में नही रहते....तुम्हारे ऐसे करने से इन्हे उमर भर अपने किए को भुगतना होगा....

में--राजेश भाई मीना को हॉस्पिटल पहुचना होगा जल्दी ही....इन हरामजादो ने बहुत मारा है इस बच्ची को....

राजेश--जय तुम फिकर मत करो....

राजेश उन तीनो लेडी पोलीस को मीना को हॉस्पिटल ले जाने के लिए बोल देता है और हॉस्पिटल मे ही उनसे मिलने का बोलकर उन्हे रवाना कर देता है....

वो तीनो लड़के बेहोश हो गये थे....उनका खून अभी भी बह रहा था....राजेश एक आंब्युलेन्स और मंगवा लेता है और उन तीनो को उसमें पटक कर उसे भी हॉस्पिटल भिजवा देता है....

राजेश--वास्तव में तुम किसी देवता से कम नही हो जय....पहले बनारस में तुमने उन सभी लड़कियो को आज़ाद करवा के ये साबित कर दिया है....और अभी इस लड़की की जान बचा कर.....मन करता है तुम्हारे कदमो में झुक जाउ लेकिन मेरी वर्दी ऐसा करने की इजाज़त नही देती...

में--राजेश भाई इतना बड़ा मुझे मत बनाओ....में एक इंसान ही ठीक हूँ भगवान कह कर मुझे शर्मिंदा मत करो....

राजेश--मुझे माफ़ करना जय लेकिन भगवान तो तुम हो....और ये में नही वो सारी लड़किया भी कहती है जिन्हे वहाँ से छुड़ाया था हमने....

में--क्या अब सारी लड़किया सुरक्षित है....

राजेश--हाँ सब ठीक है...म वहाँ से आने के बाद तुम्हे बताना चाहता था लेकिन शादी के चक्कर में ऐसा उलझा के बता भी ना सका....

में--शादी....? किस से कब....क्या राजेश भाई आपने बुलाया भी नही....

राजेश--नज़्म से शादी कर ली है मैने....उसकी मासूमियत मेरे पत्थर जैसे दिल को भी पिघला गयी....इसीलिए हम दोनो ने यहाँ आते ही शादी के पवित्र बंधन में एक दूसरे को जीवन भर के लिए बाँध लिया....

में--ये आपने बहुत अच्छी खबर सुनाई....

राजेश--चलो जय मैं अब निकलता हूँ....उन हरामजादो की अभी और खातिर करनी है....और मीना का भी बयान लेना है....

में--क्या मेरी भी ज़रूरत पड़ेगी....क्योकि कल हम सब कुछ दिनो के लिए बाहर जा रहे है...

राजेश--तुम आराम से जाकर आओ....में यहाँ सब संभाल लूँगा....

उसके बाद राजेश अपनी जीप में बैठ कर निकल जाता है और में जॉनी और अरमान भी हॉस्पिटल की तरफ बढ़ जाते है मीना के पास....
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सवेरे ...सवेरे

हमेश की तरह रूही मुझे नींद से जगा रही थी....मैने जल्दी ही उठ कर रूही को मोर्निंग विश किया और चल पड़ा बाथरूम के अंदर....जब मैं रेडी हो कर बाहर आया तो बाहर सिर्फ़ रूही और मम्मी बैठी थी....नीरा और भाभी किचन में घुसी हुई थी...

मम्मी--क्या बात है....आज सवेरे सवेरे कहाँ जाने की तैयारी है....

में--मैने सोचा आज कॉलेज का चक्कर लगा आउ काफ़ी दिन हो गये कॉलेज गये हुए.....

रूही--लेकिन मुझे तो आपने कॉलेज जाने से मना किया है....और आप वहाँ जाकर क्या करोगे अकेले....

में--तुम लोगो को जाने से मैने इसलिए रोका ताकि तुम सभी आराम से शॉपिंग कर सको....और मैं घर मे पड़ा पड़ा क्या करूँगा इसलिए मैं कॉलेज जा रहा हूँ....

मम्मी--ठीक है चला जा....दिन में क्या खाएगा ये बता दे मुझे....

में--कुछ भी बना लेना सब चलेगा....शमा कहाँ है और दीक्षा और कोमल भी दिखाई नही दे रही....

मम्मी--शमा तो जल्दी ही उठकर मंदिर चली गयी है....और कोमल और दीक्षा अभी सो रही है....

में--अच्छी बात है....मम्मी में चाहता था कि शमा की पढ़ाई पर आप लोग थोड़ा ध्यान दें...में नही चाहता कि बस एक पढ़ाई की कमी से शमा का भविश्य खराब हो....

मम्मी--तू चिंता मत कर....नेहा ने उसे पढ़ाने की ज़िम्मेदारी उठा ली है....और वो जल्दी ही उसे सब कुछ सिखा भी देगी....

में--हाँ ये अच्छा हुआ....भाभी का एक्सपीरियेन्स शमा के काफ़ी काम आएगा....
तो फिर में चलता हूँ कॉलेज के लिए दिन में आकर मिलता हूँ....

उसके बाद में अपनी बाइक उठा कर तेज़ी से कॉलेज की तरफ बढ़ जाता हूँ....कॉलेज में आज ज़्यादा लोग दिखाई नही दे रहे थे......आज तो कोई छुट्टी भी नही है फिर सारे लोग गये कहाँ....

में इन्ही सवालो में उलझा हुआ अपनी बाइक पार्क करके कॉलेज की तरफ बढ़ गया...लेकिन कॉलेज की बिल्डिंग पर भी ताला लटक रहा था..

उसके बाद में कॅंटीन की तरफ जाने लगा वहाँ बाहर ही मुझे जॉनी और अरमान भी मिल गये....

मुझे देखते ही वो मेरे पास पहुँच गये और मेरा हाल चाल पूछने लग गये....

मैने उन से जब मीना के बारे में पूछा तो उन्होने कहा कि वो लोग भी कब से मीना का वेट कर रहे है....लेकिन उसका फोन भी बंद आरहा है....

तभी किसी शीशे के टूटने की आवाज़ से हमारा ध्यान उस तरफ चला गया....वो खिड़की 3र्ड फ्लोर पर थी और जब हम वहाँ पहुँचे तो वहाँ किसी गर्ल का एक सॅंडल पड़ा हुआ दिखाई दे गया....

मुझे तुरंत किसी गड़बड़ की आशंका ने घेर लिया....मैने तुरंत जॉनी और अरमान को गेट का टाला तोड़ने के लिए कहा और में पाइप्लाइन के सहारे उस खिड़की के करीब पहुँचने लगा....

में उस खिड़की के करीब पहुँच चुका था....उस खिड़की मे कोई जाली या रेलिंग नही लगी हुई थी....एक ज़ोर दार किक मारते हुए में उस खिड़की में घुस गया और जब मैने वहाँ का हाल देखा तो कुछ पॅलो के लिए बूत सा बना रह गया.....

मीना बिल्कुल नंगी वहाँ पड़ी थी....उसके चेहरा मार खाने की वजह से बुरी तरह से सूजा हुआ था....उसके बूब्स पर काटने नोचने के निशान सॉफ दिखाई दे रहे थे....उसकी निपल खून से लथपथ हो रखी थी वहाँ वो तीनो लड़के भी नंगे खड़े थे....उनमे से एक मीना की पीठ पर अपनी बेल्ट से मारे जा रहा था...

मुझे स्तिथि समझते ज़्यादा देर नही लगी और लगभग चीखता हुआ उन तीनो की तरफ बढ़ गया....

खिड़की टूटने की आवाज़ के कारण वो भी समझ चुके थे कि कोई अंदर आ गया है....उनमे से एक लड़का मुझे बोला...

लड़का--भाई लड़ाई झगड़े में कुछ नही रखा....चल साथ में इस लड़की की चूत फाड़ते है....उद्घाटन तू ही कर पहले हम बाद में कर लेंगे....

वो बस इतबा ही बोल पाया था तब तक में उसके पास पहुँच चुका था....एक जोरदार किक उसकी गोटियो पर जड़ते ही किसी पर कटे पन्छि की तरह ज़मीन पर तड़पने लगा....

आगे बढ़कर मैने उस बेल्ट वाले लड़के से वो बेल्ट छीन लिया और लगा उन दोनो की सुताई करने.....गुस्सा और उन लोगो के प्रति मेरी बढ़ती हुई नफ़रत ने मेरे हाथो की गति को और तेज़ कर दिया था....उन लोगो ने मुझे भी मारने की कोशिश करी लेकिन मुझे जुनून में किसी दर्द का आभास नही हो रहा था....

आख़िरकार बेल्ट का सबर भी टूट गया....वो मेरे हाथो से टूट कर अलग हो चुका था....जब में अपने होश में आया वो तीनो लड़के ज़मीन पर पड़े पड़े तड़प रहे थे.....

तभी मेरा ध्यान मीना के रोने की आवाज़ सुन कर उस की तरफ हो गया....मैने तुरंत अपनी शर्ट निकाल कर उसे पहना दी और उसे अपनी बाहो में भर कर चुप करने लगा.....

तभी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
मम्मी जा चुकी थी नीरा रूही कोमल दीक्षा और शमा कब से मेरे रूम में डेरा डाले बैठी थी....थोड़ी देर बाद भाभी भी वहाँ आ गयी....

में--कल तुम सब लोग अपने स्कूल कॉलेज की छुट्टी कर लेना....

रूही--क्यो भाई कल क्या है....

में--शॉपिंग नही करनी क्या....पिच्छली बार शॉपिंग करने का तुम लोगो को ज़्यादा मौका मिला नही लेकिन इस बार शमा कोमल और दीक्षा भी साथ में हैं इस लिए दिल खोल के शॉपिंग करो तुम सब....

कोमल--भैया वैसे हम चल कहाँ रहे है....

में--हृषिकेश....

कोमल--लेकिन वहाँ तो आप लोग पहले भी जा चुके हो....फिर दुबारा क्यो..

में--बस ऐसे ही मुझे वो जगह बहुत पसंद आई थी....

भाभी मेरे कोहनी मारते हुए...

भाभी--कुछ ज़्यादा ही पसंद आ गयी थी इसे वो जगह....

में--भाभी अब तो टाँग खिचना बंद करो....

भाभी--चलो अच्छी बात है न्ही खिचती टाँग....अब सोने की तैयारी करो और शमा आज से तुम मेरे रूम मे सोना...

शमा--जी भाभी....वैसे हृषिकेश में क्या हुआ था जो आप भैया की टाँग खीच रही हो....

भाभी--हुआ था कुछ....राज़ की बात ऐसे ही नही बताई जाती....और ये तो ऐसा राज़ है जिसे सुन कर तुम सब के होश उड़ जाएँगे....

में--अब बस भी करो भाभी....अब मुझे नींद आ रही है अब जाओ सब अपने अपने रूम में....और सोने दो मुझे....

उसके बाद वहाँ से सभी चले जाते है....सब लोगो के जाने के बाद....कुछ ही देर में नीरा मेरे रूम मे आजाती है और कस कर मुझे अपने गले से लगा लेती है....मेरे पूरे चेहरे पर अपने होंठो की बरसात करते हुए मेरे होंठो को वो अपने होंठो से जकड लेती है....कुछ देर होंठो की लड़ाई चलती रहती है....एक प्यास जो बुझने की बजाए और भड़कने लग जाती है....

नीरा--जान मैं आज रात आपके पास हेए रुक जाउ....

में--नीरा तुझे मैं रोकुंगा नही लेकिन खुद को थोड़ा समय दे....जो कुछ भी हुआ है हम लोगो के दरम्यान वो इतना जल्दी नही होना चाहिए था....

नीरा--आपका इंतजार तो हमेशा रहेगा....क्या करुण...अभी आपकी तरह समझदार नही हुई हुण जो ऐसी बाते समझ सकुण...ठीक है मैं मेरे रूम में जेया रही हूँ....आइ लव यू जान गुड नाइट...

उसके बाद में भी उसे गुड नाइट विश करता हुण और उसके माथे पर एक किस कर देता हुण....

नीरा के चले जाने के बाद मैं उसकी के बारे मे सोचता हुआ ना जाने कब नींद की बाहों में समा जाता हूँ
 
में--एक काम करो मम्मी को बोलो मैं उन्हे बुला रहा हूँ...वो मेरा नाम सुनते ही नींद से जाग जाएँगी...

भाभी--हाँ ये सही रहेगा....में अभी मम्मी को बुलाती हूँ...

उसके बाद भाभी वहाँ से निकल कर सीधा मम्मी के पास चली जाती है....

भाभी--मम्मी ऐसे कब तक शमा को अपनी गोद में सुला कर रखोगी....इसे अब आराम करने दो....जय आ गया है और आपको बुला रहा है...

मम्मी ने एक दम से भाभी का चेहरा देखा और शमा का सिर अपनी गोद में से उठा कर धीरे से सोफे पर रखे पिल्लो पर रख दिया...

मम्मी--जय आ गया है....कहाँ है मेरा बेटा...

भाभी--मुस्कुराते हुए....अपने रूम में है मम्मी आप को वही बुला रहा है....

उसके बाद मम्मी बिना कुछ कहे मेरे रूम की तरफ बढ़ गयी....में अपने बेड पर लेटा हुआ कोई बुक पढ़ रहा था....मम्मी मेरे पास बेड पर आकर बैठ गयी....

मम्मी--तू कब आया....में तो हॉल में ही बैठी थी....मुझे बोला क्यो नही....

में--आपको शमा के साथ खोया हुआ देखकर मन नही माना आपको डिस्टर्ब करने को....लेकिन भाभी ने बताया आप कब से ऐसे ही बैठी हो....बस शमा मे ही खोई हुई तो मुझे भाभी को आपके पास भिजवाना पड़ा...

मम्मी--क्या करूँ बेटा...माँ हूँ ना अपनी बच्ची के सारे दुख तकलीफे ले लेना चाहती थी...

में--मम्मी मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ....

मम्मी--बोल बेटा क्या बात करनी है....

में--मम्मी मैने नीरा से शादी कर ली है है...शमा को उस नरक से निकालने के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा....

मम्मी--मुझे नीरा ने पहले ही बता दिया है ये सब....और मुझे खुशी है कि तूने भी मुझ से कुछ नही च्छुपाया....वैसे उस कोठे पर जो भी हुआ वो ग़लत ही था लेकिन एक रिश्ते को बचाने के लिए दूसरे रिश्ते की कुर्बानी कभी कभी ज़रूरी हो जाती है...अब से नीरा मेरी बेटी नही बहू है....

में--मम्मी लेकिन यहाँ सभी जानते है कि नीरा मेरी बहन है....और कोई नीरा की तरफ उंगली भी उठाए तो मुझ से बर्दाश्त नही होता....

मम्मी--धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा....हर रिश्ते को बनने में समय लगता है...तुम्हे भी एक दूसरे को समय देना चाहिए...

में--मम्मी एक नाम जो में भूल गया था वो फिर से मेरे सामने आ गया है...प्रधान ने ही आपको मारने की सुपारी दी थी प्रधान ने ही शमा के 19 साल उस नरक मे खराब कर दिए....प्रधान ने ही आपके साथ वो सब किया....लेकिन अब बस अब ये नाम दुबारा हमारे परिवार की खुशियो के बीच में नही आएगा....बस मुझे ये पता चल जाए कि आख़िर प्रधान रहता कहाँ है करता क्या है....

मम्मी--वो आख़िरी दिन था जब मैने प्रधान को देखा था...उसके बाद ना किशोर ने मुझे कुछ बताया ना उन सब के बारे में कोई खबर पढ़ने को मिली....वो सब गायब हो गये थे अपना सब कुछ छोड़ छाड कर...शायद इसी बात का बदला लेने के लिए प्रधान ने ये चाल चली होगी...

में--और जब उसे लगा होगा कि उसका बदला पूरा हो गया है तो वो कुछ और काम करने लग गया होगा....

मम्मी--बस अब उन सब का नाम. लेकर इस घर के माहॉल को खराब मत कर....जो हुआ तू भी भूल जा...जैसे मैं भूल गयी....

में--नही मम्मी अभी नही....कोई मेरे परिवार की तरफ आँख उठाकर देखे उस से पहले में उसकी आँखो की रोशनी छीन लूँगा....बस थोड़ा और वक़्त....और फिर जिनके हाथो में शतरंज की दोनो बाजिया हुआ करती थी....उन्हे मुझ जैसा अपने परिवार का सिपाही राजा बन कर नेस्तोनाबूत कर्देगा....जल्दी ही

खुशियों के फूल फिर से आँगन में खिल उठे है....और मुझे ही मेरी छोटी सी बगिया को संभालना है.
 
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