में--मुझे किसी प्रधान की तलाश है....वो मुंबई का ही है शायद....क्या आप मुझे उसके बारे में कुछ बता सकते है....
अंकल--ज़रूर बेटा मुझे थोड़ा वक़्त दो...में उसके बारे मे पूरी इन्फ़ॉर्मेशन निकलवाता हूँ...
उसके बाद मैने जुगल किशोर अंकल से विदा ली और बढ़ गया फिर से अपने घर की तरफ....रास्ते में मंदिर पड़ा वहाँ जाकर ग़रीबो के लिए खाने की व्यवस्था करवा दी....भगवान को प्रशाद का भोग लगाया और घर जाने का रास्ता पकड़ लिया....
घर पहुँचा तो देखा भाभी और रूही किचन मे काम कर रही है हॉल में मम्मी की गोद मे सिर रख कर शमा सो रही है और मम्मी शमा के सिर पर प्यार से अपने हाथ फिरा रही थी.....आँखे अभी भी आँसुओ से भीगी थी उनकी....लेकिन चहेरे पर खुशी की दमक भी दिखाई दे रही थी उनके....
वक़्त बदल रहा था....समय फिर से अपनी रफ़्तार पकड़ने लगा था कुछ मोड़ ज़िंदगी के निकल चुके थे कुछ मोड़ अभी और भी आने बाकी थे....
में चुपचाप म्म्मी के सामने से बिना कुछ बोले निकल गया वो अभी भी शमा से मिलन की अनुभूति से बाहर नही आ पाई थी....वो बस उसे अपना सारा प्यार देना चाहती थी...
में चुप चाप अपने रूम में चला गया....जब में किचन के सामने से गुज़रा तो भाभी ने मुझे देख लिया और पीछे पीछे वो भी मेरे रूम मे आ गई....
रूम मे आते ही भाभी ने मुझे कस कर अपने गले से लगा लिया और कहने लगी....
भाभी--इस घर में खुशिया फिर से आ गयी है....सिर्फ़ तुम्हारी वजह से...मम्मी तो कुछ सुनने को रेडी ही नही है....बस शमा मे ही खोई हुई है...
मैने अपने आप से भाभी को अलग करते हुए कहा...
में--बस यही खुशी मैं सबके चेहरो पर देखना चाहता हूँ....हमारा परिवार अब पूरा हो गया है....बस ये घर हमेशा ऐसे ही मुस्कुराता रहे कोई बुरी नज़र अब इस पर ना पड़े यही महादेव से मेरी प्रार्थना है....ये प्रशाद आप सभी को दे देना भाभी....शमा के आने की खुशी में मैं मंदिर गया था वही भगवान को भोग लगाने के बाद बचा हुआ प्रशाद ले आया....
भाभी--अच्छा किया जय जो तुम मंदिर चले गये....मैं तो कब से मम्मी से मंदिर जाने के लिए कह रही थी....लेकिन मम्मी तो बस सब कुछ भूल कर शमा में ही खोई बैठी है कब से...
में--एक काम करो मम्मी को बोलो मैं उन्हे बुला रहा हूँ...वो मेरा नाम सुनते ही नींद से जाग जाएँगी...
भाभी--हाँ ये सही रहेगा....में अभी मम्मी को बुलाती हूँ...
उसके बाद भाभी वहाँ से निकल कर सीधा मम्मी के पास चली जाती है....
अंकल--ज़रूर बेटा मुझे थोड़ा वक़्त दो...में उसके बारे मे पूरी इन्फ़ॉर्मेशन निकलवाता हूँ...
उसके बाद मैने जुगल किशोर अंकल से विदा ली और बढ़ गया फिर से अपने घर की तरफ....रास्ते में मंदिर पड़ा वहाँ जाकर ग़रीबो के लिए खाने की व्यवस्था करवा दी....भगवान को प्रशाद का भोग लगाया और घर जाने का रास्ता पकड़ लिया....
घर पहुँचा तो देखा भाभी और रूही किचन मे काम कर रही है हॉल में मम्मी की गोद मे सिर रख कर शमा सो रही है और मम्मी शमा के सिर पर प्यार से अपने हाथ फिरा रही थी.....आँखे अभी भी आँसुओ से भीगी थी उनकी....लेकिन चहेरे पर खुशी की दमक भी दिखाई दे रही थी उनके....
वक़्त बदल रहा था....समय फिर से अपनी रफ़्तार पकड़ने लगा था कुछ मोड़ ज़िंदगी के निकल चुके थे कुछ मोड़ अभी और भी आने बाकी थे....
में चुपचाप म्म्मी के सामने से बिना कुछ बोले निकल गया वो अभी भी शमा से मिलन की अनुभूति से बाहर नही आ पाई थी....वो बस उसे अपना सारा प्यार देना चाहती थी...
में चुप चाप अपने रूम में चला गया....जब में किचन के सामने से गुज़रा तो भाभी ने मुझे देख लिया और पीछे पीछे वो भी मेरे रूम मे आ गई....
रूम मे आते ही भाभी ने मुझे कस कर अपने गले से लगा लिया और कहने लगी....
भाभी--इस घर में खुशिया फिर से आ गयी है....सिर्फ़ तुम्हारी वजह से...मम्मी तो कुछ सुनने को रेडी ही नही है....बस शमा मे ही खोई हुई है...
मैने अपने आप से भाभी को अलग करते हुए कहा...
में--बस यही खुशी मैं सबके चेहरो पर देखना चाहता हूँ....हमारा परिवार अब पूरा हो गया है....बस ये घर हमेशा ऐसे ही मुस्कुराता रहे कोई बुरी नज़र अब इस पर ना पड़े यही महादेव से मेरी प्रार्थना है....ये प्रशाद आप सभी को दे देना भाभी....शमा के आने की खुशी में मैं मंदिर गया था वही भगवान को भोग लगाने के बाद बचा हुआ प्रशाद ले आया....
भाभी--अच्छा किया जय जो तुम मंदिर चले गये....मैं तो कब से मम्मी से मंदिर जाने के लिए कह रही थी....लेकिन मम्मी तो बस सब कुछ भूल कर शमा में ही खोई बैठी है कब से...
में--एक काम करो मम्मी को बोलो मैं उन्हे बुला रहा हूँ...वो मेरा नाम सुनते ही नींद से जाग जाएँगी...
भाभी--हाँ ये सही रहेगा....में अभी मम्मी को बुलाती हूँ...
उसके बाद भाभी वहाँ से निकल कर सीधा मम्मी के पास चली जाती है....