कामली--जनाब जिस तरह से मैने अभी तक आपके बारे में नही पूछा वैसे ही मैने ना ज़्यादा प्रधान के बारे में पूछा और ना ही दीनू के बारे में.....लेकिन दीनू की पिटाई करवाने के बाद उसकी जेब में जो भी माल था वो सब निकाल लिया गया था....तकरीबन 20000 रुपये और कुछ कागज भी मिले थे उसकी जेबो मे से.....उन कागजो में उसका गाड़ी चलाने का लाइसेन्स भी था....
में--क्या में वो सब कागज देख सकता हूँ...
कामली--बेशक जनाब.....माना कि ये कागज मेरे किसी काम के नही थे लेकिन अमानत के तौर पर आज भी मैने संभाल कर रखे है...क्या पता वो अपने कागजात लेने वापस आता लेकिन 19 सालो में वो दुबारा कभी नही आया....में अभी वो कागजात ले कर आती हूँ....
में--मन मे ही सोचे जा रहा था....प्रधान और दीनू के बारे मे....इन दोनो का नाम मैं पहले भी कही सुन चुका था....लेकिन कहाँ सुना कुछ याद नही आ रहा था....लेकिन अगर कामली के पास दीनू का ड्राइविंग लाइसेन्स पड़ा है तो इसका मतल्ब जल्दी ही इस पहली से परदा हट जाएगा.....
तभी कामली भी वापस आचुकी थी...उसने वो कागज मेरे हाथ में पकड़ा दिए....
उन कागजो में कुछ हिसाब किताब लिखा था कुछ रसीद थी सामानों की और एक ड्राइविंग लाइसेन्स
में उस लाइसेन्स को उलट पुलट कर देखने लगता हूँ....दिनेश वर्मा....सोन ऑफ गोपाल लाल वर्मा
अथवा लाने नियर क्रिस्टल अपार्टमेंट सूरत गुजरात.....
मेरे पास दीनू का 19 साल पहले का पता आचुका था...
में--कामली बाई क्या में इसे अपने पास रख सकता हूँ....
कामली--ज़रूर जनाब....लेकिन मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है....आप क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहे है....
गढ़े मुर्दे नही में बिछड़े हुए कुछ अपनो को मिलाने की कोशिश कर रहा हूँ....कम से कम शमा जान तो पाएगी कि उसके माँ बाप कौन है....
कामली--जनाब आप सही कह रहे है....लेकिन ये कोठा है और यहाँ जो एक बार आजाता है उसे दुनिया इतनी आसानी से नही अपनाती है...
में--आपको कोई ऐतराज तो नही है अगर में शमा के माँ बाप को ढूँढने की कोशिश करूँ....
कामली--जनाब ऐतराज कैसा शमा की पूरी कीमत दी है आपने....आप जो चाहे वो करे लेकिन इस कोठे के कुछ उसूल है इन्हे आपको पूरा करना बाकी है....अब आप शमा की नथ उतराई की रसम जल्दी से जल्दी पूरा कर दीजिए....
में--कामली बाई आपसे एक चीज़ माँगूँ....
कामली--हुकम कीजिए जनाब....
में--जब हम लोग यहाँ से जाए....तो वो खून से सना हुआ कपड़ा आप मुझे वापस लौटा दीजिएगा....क्योकि में तंत्र मंत्र पर काफ़ी यकीन रखता हूँ और में नही चाहता कोई भी उस कपड़े का ग़लत यूज़ करे.....
कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.
में--क्या में वो सब कागज देख सकता हूँ...
कामली--बेशक जनाब.....माना कि ये कागज मेरे किसी काम के नही थे लेकिन अमानत के तौर पर आज भी मैने संभाल कर रखे है...क्या पता वो अपने कागजात लेने वापस आता लेकिन 19 सालो में वो दुबारा कभी नही आया....में अभी वो कागजात ले कर आती हूँ....
में--मन मे ही सोचे जा रहा था....प्रधान और दीनू के बारे मे....इन दोनो का नाम मैं पहले भी कही सुन चुका था....लेकिन कहाँ सुना कुछ याद नही आ रहा था....लेकिन अगर कामली के पास दीनू का ड्राइविंग लाइसेन्स पड़ा है तो इसका मतल्ब जल्दी ही इस पहली से परदा हट जाएगा.....
तभी कामली भी वापस आचुकी थी...उसने वो कागज मेरे हाथ में पकड़ा दिए....
उन कागजो में कुछ हिसाब किताब लिखा था कुछ रसीद थी सामानों की और एक ड्राइविंग लाइसेन्स
में उस लाइसेन्स को उलट पुलट कर देखने लगता हूँ....दिनेश वर्मा....सोन ऑफ गोपाल लाल वर्मा
अथवा लाने नियर क्रिस्टल अपार्टमेंट सूरत गुजरात.....
मेरे पास दीनू का 19 साल पहले का पता आचुका था...
में--कामली बाई क्या में इसे अपने पास रख सकता हूँ....
कामली--ज़रूर जनाब....लेकिन मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है....आप क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहे है....
गढ़े मुर्दे नही में बिछड़े हुए कुछ अपनो को मिलाने की कोशिश कर रहा हूँ....कम से कम शमा जान तो पाएगी कि उसके माँ बाप कौन है....
कामली--जनाब आप सही कह रहे है....लेकिन ये कोठा है और यहाँ जो एक बार आजाता है उसे दुनिया इतनी आसानी से नही अपनाती है...
में--आपको कोई ऐतराज तो नही है अगर में शमा के माँ बाप को ढूँढने की कोशिश करूँ....
कामली--जनाब ऐतराज कैसा शमा की पूरी कीमत दी है आपने....आप जो चाहे वो करे लेकिन इस कोठे के कुछ उसूल है इन्हे आपको पूरा करना बाकी है....अब आप शमा की नथ उतराई की रसम जल्दी से जल्दी पूरा कर दीजिए....
में--कामली बाई आपसे एक चीज़ माँगूँ....
कामली--हुकम कीजिए जनाब....
में--जब हम लोग यहाँ से जाए....तो वो खून से सना हुआ कपड़ा आप मुझे वापस लौटा दीजिएगा....क्योकि में तंत्र मंत्र पर काफ़ी यकीन रखता हूँ और में नही चाहता कोई भी उस कपड़े का ग़लत यूज़ करे.....
कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.