• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Horrar भूतों का न्याय

सारा दिन यूं ही बीत गया। रात के 9:00 बजे थे। उसने जैसे ही सोने के लिए अपनी आंखें मूंदी, भूत भाई सामने थे।

डॉली- क्या हुआ भूत भाई आज इस समय कैसे..?

भूत- इस इलाके का पुलिस इंस्पेक्टर रणवीर सिंह सही आदमी नहीं है। उसने भोली को बेवजह थाने में बुला लिया है। और मुझे लगता है कि वह उसके साथ कुछ

गलत भी कर सकता है। भोली बेचारी तो पहले से ही लुटी पिटी है। उसके घर के लोग भी पुलिस इंस्पेक्टर के कारण दहशत में है। वह गरीब परिवार है। इसलिए पुलिस इंस्पेक्टर उन्हें धमका रहा है। विजय तो मर गया। लेकिन ये इंस्पेक्टर तो विजय से भी ज्यादा गिरा हुआ है।

डॉली- मगर यह इंस्पेक्टर ऐसा क्यों कर रहा है..?

भूत- इसका दो कारण है। एक तो इस केस का हल न निकलने के कारण उसकी बदनामी हो रही है। और दूसरा कारण यह है की विजय से उसकी ऊपरी कमाई होती थी। थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि काफी मोटी कमाई होती थी। और उसके मारे जाने से उसकी यह मोटी कमाई बंद हो गई है। और इसका कारण वो भोली को मानता है। और इसीलिए वह भोली से खफा है। और अपने यहां का सिस्टम ऐसा है, कि अगर इंस्पेक्टर किसी से खफा हो जाए, तो उसकी खैर नहीं..!

डॉली- यह तो बहुत गलत बात है। और ऐसी स्थिति में तो इंस्पेक्टर को ही सबक सिखाना चाहिए। और इंस्पेक्टर को और भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि उसको तो लोगों की भलाई करने के लिए ही सरकार तनखा देती है .. लोगों की मदद के लिए..! अगर वो ही जनता को लूटने लगेगा.. जनता के साथ नाइंसाफी करने लगेगा, तो फिर बेचारी जनता कहां जाएगी..?
 
भूत- तुमने सही कहा । पहले भोली के घरवाले इसलिए डर रहे थे, क्योंकि उनको विजय से खतरा था। और जब वो खतरा टल गया, तो भोली और उसका पूरा परिवार इंस्पेक्टर रणबीर से डरा हुआ है। हालत इतनी बुरी है, कि ये इंस्पेक्टर भोली और उसके घर वालों को ही विजय की हत्या के जुर्म में फंसाना चाहता है। और ये इंस्पेक्टर भोली से रेप भी कर सकता है..!

डॉली- व्हाट..? क्या इंस्पेक्टर इतना गिरा हुआ है..?

भूत- उसके हाथ में पावर है। और इस पावर का दुरुपयोग कर वह कुछ भी कर सकता है। अकेली भोली को रात के समय थाने बुलाने का क्या औचित्य है..? आज की रात भोली के लिए कयामत की रात है..!

डॉली- नहीं भूत भाई। हमें अभी थाना जाना होगा। और भोली को बचाना होगा।

भूत- ठीक है तुम अपनी मम्मी से कोई बहाना बनाओ। और मेरे साथ चलो। हम कोशिश करेंगे जल्दी से जल्दी वापस आने की।

डॉली- ठीक है..!

डॉली(मम्मी से)- मम्मी मुझे अभी जाना है। कुछ जरूरी काम है। मैं एक डेढ़ घंटे में आ जाऊंगी।

मम्मी- कहां जाना है..? और अभी किससे बातें कर रही थी तू..?

डॉली- मम्मी, मेरी एक सहेली है। थोड़ी परेशान है। अकेली है। माल में है।। उसी से मिलने जाना है। क्योंकि रात के समय उसे अपने घर जाने में डर लग रहा है। मैं अभी उसको उसके घर पहुंचा कर आती हूँ।

मम्मी- लेकिन बेटी, कहीं उसकी मदद करने के चक्कर में तू खुद किसी परेशानी में न पड़ जाए..?

डॉली- कैसी बातें कर रही हो मम्मी..? मैं एक फौजी की बेटी हूं..! मुझे कोई हाथ भी लगा दे, इतनी हिम्मत किसी में नहीं है..!

मम्मी- ठीक है बेटी मगर जल्दी आना।

डॉली- हां मम्मी, मैं बहुत जल्दी आऊंगी। तू मेरी तरफ से बिल्कुल बेफिक्र रह। क्योंकि तेरी बेटी बहुत बहादुर है..! और एक दिन मेरे को भी मिलिट्री ज्वाइन करनी है।

मम्मी- ठीक है बेटी।

मम्मी से परमिशन मिलते ही भूत भाई ने डॉली के जिस्म में प्रवेश कर लिया। क्योंकि रात का समय था। टेंपो का कोई भरोसा नहीं था। इसलिए रूबी ने अपनी स्कूटी निकाली और भूत भाई के साथ थाने पर पहुंच गई।
 
भोली को खतरे में देख डॉली भूत भाई के साथ थाने में पहुंच चुकी थी।

भूत- थाना तो आ गया लेकिन अभी तेरा अंदर जाना उचित नहीं है। क्योंकि रात का समय है। एक अकेली लड़की के साथ कुछ भी गलत हो सकता है। क्योंकि मैंने पहले ही तुझसे कहा है कि इंस्पेक्टर रणबीर सही आदमी नहीं है।

डॉली- तो क्या हुआ। अंदर चल कर आज उसको भी लपड़िया देंगे।

भूत- सवाल उसको लपड़ियाने का नहीं है। सवाल इस बात का है कि जब तू अंदर जाएगी तो कई पुलिसवाले तुझको देख लेंगे। और फिर तू फंस जाएगी कि तू थाने किस लिए आई थी..! इसलिए मैं अंदर जाकर पहले देखता हूं कि इंस्पेक्टर कहां है..? और भोली कहां है..?

और जब वहां कोई न होगा, तब तुझ को अंदर ले चलूंगा, जिससे इंस्पेक्टर के सिवा कोई और तुझको ना देखें। इसलिए तू यही नीचे झुक कर बैठ जा। जिससे अगर कोई तुझको यहां देखे, तो यह समझे कि शायद तेरी गाड़ी कुछ खराब हो गई है। और किसी को तुझ पर कोई शक ना हो।

डॉली- ठीक है। मैं यही अपनी गाड़ी के नीचे झुक कर बैठ जाती हूं।

भूत- ठीक है । अब तेरे शरीर से निकलकर मैं अंदर जा रहा हूं।

डॉली- ओके

भूत अंदर गया। चार पांच पुलिस वाले आपस में बातें कर रहे थे।

एक पुलिसवाला- आज तो भोली गई।

दूसरा- लेकिन यह गलत है।

तीसरा- लेकिन हम क्या कर सकते हैं।

चौथा- छोड़ यार। इज्जत तो उसकी पहले ही जा ही चुकी है। अब अगर दूसरे तीसरे के साथ भी चिपक लेगी तो कौन सी आफत आ जाएगी ।

पहला- सही कहा तूने। क्योंकि अब जितना भी वो अपने को बचाने की कोशिश करेगी, उतना ही दलदल में फंसती जाएगी। इसलिए उसको चाहिए अपने घर को ही छोड़ दे। इससे उसके घर वालों को उससे मुक्ति मिल जाएगी। और उसकी जिंदगी भी खुशहाल हो जाएगी। क्योंकि ऐसी लड़कियों इज़्ज़त से समाज में नहीं रह सकती। इसलिए उन्हें बार डांसर बन जाना चाहिए और लोगों के मन बहलाने का धंधा अपना लेना चाहिए। क्योंकि यही धंधा उनको सुकून और शांति और खुशी दे सकता है।

दूसरा- गलत तो यह भी है, मगर इसके सिवा कोई और रास्ता भी तो नहीं है। और शायद इसी को किस्मत का खेल कहते हैं। जब बिना किसी गलती के ही इंसान दुखों के सागर में डूब जाता है..! और जीवन की वास्तविक खुशियां उसे हमेशा के लिए उससे दूर हो जाती है..!

तीसरा- सही बात है।

चौथा- बिल्कुल सही बात है। लेकिन अगर ऐसा हो जाए तो अपनी भी चांदी हो जाए।

पहला- अरे यार। अगर इंस्पेक्टर के साथ सही-सही मामला बैठ गया, तब बाद में हमारा भी नंबर आएगा।

लेकिन लड़की अगर ज्यादा जिद्दी निकली, तो मामला गड़बड़ भी हो सकता है।

चौथा- कुछ नहीं कर पाएगी। इसके पहले भी कितनी लड़कियां आ चुकी है..! क्या हुआ उनका..? अपने इंस्पेक्टर के चंगुल में जो लड़की भी फस गई, उसको सरेंडर करना ही पड़ता है..!

पहला- रात के 10:00 बजने वाले है! अब किसी ने आना तो है नहीं। चल थोड़ी थोड़ी पी लेते हैं।

चौथा- लेकिन यहां कौन रहेगा..?

पहला- 10 मिनट में कौन सी आफत आ जानी है। और अगर कोई आता है, तो थोड़ी देर इंतजार कर लेगा।

और फिर वो सभी पुलिस वाले अंदर चले गए। उन्होंने थाने के अंदर एक स्पेशल कमरा बना रखा था .. ज़हां दारू के साथ-साथ और भी कई तरह ऐशोआराम की व्यवस्था थी..!
 
भूत को इसी मौके की तलाश थी। वो तुरंत बाहर आया और डॉली के शरीर में प्रवेश कर उसके बोला- जल्दी चल अंदर।

डॉली- तुरंत अंदर गई और भूत उसे इंस्पेक्टर रणबीर के कमरे में ले गया।

भोली लहूलुहान अवस्था में इंस्पेक्टर रणबीर की बाहों में थी।

इंस्पेक्टर- अगर पहले ही मेरा कहा मान लिया होता, तो तेरे शरीर पर इतने जख्म ना होते..! जवान है खूबसूरत है..! पर इतना भी नहीं समझती की औरतों का जिस्म मर्द की हवस को शांत करने के लिए ही होता है। मर्द एक हो या दस..! इससे क्या फर्क पड़ता है..?

और मैं तो तुझ को सही रास्ता दिखा रहा हूं, कि इन कपड़ों को खुशी खुशी उतार दे। फिर तेरी जिंदगी बहुत हसीन हो जाएगी। तेरी सारी तकलीफें दूर हो जाएंगी। रुपया पैसा सब कुछ तेरे पास होगा..! और इस इंस्पेक्टर के रहते तेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर पाएगा..!

डॉली- सही कहा तूने, कि तेरे रहते कोई इसका बाल भी बांका नहीं कर पाएगा..? लेकिन जब तू नहीं होगा, तब इसका क्या होगा..?

इंस्पेक्टर- तू कौन है और यहां अंदर कैसे आ गई..?

डॉली- एक को तो तू जबरदस्ती उठा ले आया। और मैं अपने आप आ गई। तो इसमें इतना हैरान क्यों है तू..?

इंस्पेक्टर- मैं हैरान नहीं हूं। बल्कि मैं तो यह सोच रहा हूं कि आज किसका मुंह देख कर उठा था मैं, कि एक की बजाय दो दो मिल गई..!

डॉली- शर्म आनी चाहिए तुझे एक इंस्पेक्टर होकर किसी लड़की से इतना गंदा व्यवहार करते हुए...उसकी इज्जत लूटते हुए..?

इंस्पेक्टर- एक इंस्पेक्टर से कैसे बात की जाती है अभी तुझको मालूम नहीं है। और मैं तो इस लड़की को खुश देखना चाहता हूं । इसे प्यार करना चाहता हूं।

और किसी को प्यार करने में गरीब घर की गंदी लड़कियां कहती हैं, कि उनकी इज्जत लूट गई। जबकि बड़े घरों की अच्छी लड़कियां बोलती है कि आज उन्होंने खूब एंजॉय किया।

और अपनी इसी गलत सोच के कारण गरीब लड़कियां हमेशा दुखी रहती है, और अमीर लड़कियां मस्त रहती है और खुश रहती है

भूत- इंस्पेक्टर से बहस बाजी मत कर। समय बहुत कम है। जल्दी से इसको फिनिश कर। क्योंकि मौत से कम सजा इसके लिए नहीं हो सकती है।

डॉली- ठीक है भूत भाई। अभी इसकी कहानी खत्म

करती हूं।

इंस्पेक्टर- किस की कहानी खत्म करने की बात कर रही है..?

लेकिन डॉली ने इंस्पेक्टर की बात का कोई उत्तर नहीं दिया। उसने अपने दोनों हाथों से उसी गर्दन को दबोच लिया, और एक मिनट में ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए।

फिर उसने जल्दी से एक कागज लिया और उस पर लिखा-" तू इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि राक्षस है। इसलिए मौत से कम तेरी सजा नहीं हो सकती। और कोई भी इंस्पेक्टर अगर गलत काम करेगा तो, उसका यही अंजाम होगा..! इस कागज को उसने उसके गले में फंसाया और भोली के साथ तेजी से थाने से बाहर निकल गई। फिर उसको अपनी स्कूटी पर बैठाया और बोली-" तू अपने घर जा। अब किसी की हिम्मत नहीं पड़ेगी तुझ पर हाथ उठाने की। और अगर किसी ने भी तुझ पर हाथ उठाया, तो उसका भी वही अंजाम होगा, जो विजय का हुआ..जो इंस्पेक्टर रणवीर का हुआ..।

और हां, अगर घर में कोई तुझसे पूछे, कि तू कैसे आई, तो सब से यही कहना-तुझे कुछ याद नहीं। पता नहीं कौन मुझे घर तक छोड़ दिया और वापस चला गया। कोई कुछ भी पूछे, हर प्रश्न का तेरे पास सिर्फ

यही उत्तर होना चाहिए-मुझे कुछ नहीं मालूम और मुझे कुछ भी याद नहीं है।

और भोली को उसके घर छोड़कर वो अपने घर वापस आ गई।

घर आकर उसने भूत को "गुड़ नाईट" कहा , फिर दो कप स्पेशल चाय बनाई, एक अपने लिए और एक मम्मी के लिए और चाय पीने के बाद मीठी नींद में सो गई।
 
दूसरे दिन इंस्पेक्टर रणबीर की मौत की खबर ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। क्योंकि इस बार भी एक पत्र बरामद हुआ, जिसमें लिखा था- तू इंस्पेक्टर नहीं राक्षस है और मौत से कम तेरी सजा नहीं हो सकती। और कोई भी इंस्पेक्टर अगर गलत काम करेगा, तो उसका भी यही अंजाम होगा।

इस घटना के बाद मानो पूरे शहर में सन्नाटा छा गया। कई दिन तक शहर में कोई कांड नहीं हुआ। थानों में भी सही सही रिपोर्ट लिखी जाने लगी। और कई दिनों तक रेप का एक भी केस नहीं आया । भूत भाई भी कई दिन से नहीं आए। क्योंकि वो हमेशा उस समय ही आते हैं, जब किसी को मदद की जरूरत होती है।

डॉली समझ गई, कि पूरा शहर इस समय दहशत में है।

रेप करने वालों की सांसें फूलने लगी है और उन्हें अपने सर पर अपनी मौत दिखने लगी है। थाने में इंस्पेक्टर भी जनता से घूस खाने और उन्हें प्रताड़ित करने में भय खाने लगे हैं। ऐसा लगता है, जैसे कि अब अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई है। क्योंकि जवान लड़कियों को भी घर से अकेले निकलने में अब डर नहीं लगता.!

~~~~~~~~~~~~~

डॉली का रोज का नियम बन गया था सुबह उठना और फ्रेश होने के बाद सबसे पहले अखबार पढ़ना अपने भूत भाई का इंतजार करना फिर नाश्ता करना और इसके बाद घर के दूसरे काम करना।

भूत भाई की मदद से वो प्रताप सिंह, विजय और इंस्पेक्टर रणवीर को ऊपर पहुंचा चुकी थी और अब उसके शहर में अप्रत्याशित रूप से अपराधों में बहुत कमी आ गई थी। पिछले 10 दिन से शहर में एक भी रेप का केस नहीं हुआ था।

और सबसे बड़ी बात यह थी कि किसी भी केस में पुलिस उसके घर तक नहीं आयी और वो पूरी तरह से सेफ़ थी। क्योंकि इन हत्याओं से जुड़े हुए हर पहलू पर

पुलिस ने अपनी नजर दौड़ाई थी और छानबीन की थी, लेकिन उसे कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इन तीनो मर्डर केस में पुलिस की असफलता के कारण अंततः इस केस को सीबीआई को सौंप दिया गया, मगर सीबीआई को भी कोई सूत्र न मिला, कि आखिर किस ने इनकी हत्या की है।

रोज की की ही भांति आज भी सुबह जब डॉली अखबार पढ़ने बैठी तो एक बड़ी विचित्र खबर उसने अखबार में देखा। इस खबर के अनुसार एक महिला ने अपने सभासद पति रमाशंकर पर उसके संग रेप करने और उसकी हत्या करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था..! यह बड़ी अजीबोगरीब खबर थी।

उस महिला ने, जिसका नाम रूपा था, पुलिस कमिश्नर को अपनी कहानी बताते हुए कहा-" मेरे पति सभासद रमाशंकर, जो एक दबंग नेता है, आज से दो साल पहले उन्होंने स्कूल जाते समय मुझको किडनैप करवा लिया था। और अपने घर में मेरे से बलात्कार किया। तब मेरी उम्र केवल 17 साल थी। बाद में मैं मेरे बाप के साथ थाने में जब उनके विरुद्ध रिपोर्ट लिखाने गई, तो थानेदार ने यह कह करे हमे भगा दिया, कि अगर जिंदा रहना है तो इस बात की किसी को खबर ना करना। और इस राज को अपने तक ही सीमित रखना। और अगर रमाशंकर जी के विरुद्ध तूने कभी भी अपना मुंह खोला, तो सिर्फ तेरे को ही नहीं, बल्कि तेरे पूरे परिवार

को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।"

पुलिस का सपोर्ट न मिलने और रमाशंकर की दबंगई से मैं बुरी तरह से डर गई। उस दिन के बाद से रमाशंकर जब न तब मुझको अपने पास बुला लेता और मेरे संग रेप करता। उसने मेरी गंदी वीडियो भी बना ली थी। मैं और मेरे घर वाले हमेशा उससे डर डर कर रहते थे।

फिर इलेक्शन का समय आया। इलेक्शन से कुछ समय पहले उसने मुझसे शादी कर ली। मेरे घर वालों ने मजबूरी में इस रिश्ते को कबूल कर लिया। क्योंकि अपने घर की इज्जत बचाने का उनके पास कोई और रास्ता भी ना था। अपने मां-बाप के दबाव में आकर मैंने यह शादी कर ली।

शादी होने के दूसरे दिन सुहागरात की सेज पर उसने मुझसे कहा-मैं इतना बड़ा बेवकूफ नहीं हूं कि तुझ जैसी मामूली लड़की से शादी करूंगा। और सुन, शादी के समय मैंने तेरी मांग में सिंदूर नहीं बल्कि लाल रंग भरा था। लेकिन यह राज सिर्फ मैं जानता हूं, और अब इस राज को तू भी जान गई है। इसलिए दुनिया की नजर में आज से तू मेरी पत्नी है , जबकि मेरे लिए तेरी हैसियत सिर्फ एक रखैल की है।और मेरी आज्ञा से अब तुझको सिर्फ मेरे साथ नहीं, बल्कि मेरे दोस्तों के संग भी तुझको सोना होगा। और इस तरह शादी के बाद से वो रोज मुझसे बलात्कार करता रहा। और अपने दोस्तों से

भी मेरे जिस्म को नोचवाता रहा।

लेकिन दुनियां की नज़र में चूंकि उसने मुझ गरीब लड़की से शादी की थी, तो इसका एक बड़ा लाभ उसको आने वाले सभासद के चुनाव में हुआ और वो चुनाव जीत गया। इस चुनाव को जीतने के बाद उसकी दबंगई और भी बढ़ गई।

और आज रात मैंने उसको अपने एक आदमी से ये कहते सुना है, कि अब वो मुझसे छुटकारा पाना चाहता है, क्योंकि मेरे से उसका दिल भर चुका है। और शायद कोई दूसरी लड़की उसकी जिंदगी में आ गई है। सर, वो कमीना उससे शादी करने के लिए मेरे को तलाक देने की बजाय मेरे को जान से मरवाना चाहता है, क्योंकि मेरे को तलाक देने पर उसके रसूख पर दाग लगेगा और उसकी बदनामी होगी। जब कि मुझे मरवाने के बाद दूसरी लड़की से शादी करने मैं उसको अपना ज्यादा लाभ दिख रहा है। सर कृपया मेरी जान की सुरक्षा कीजिये, क्योंकि उसकी दबंगई के कारण मैं अपने मायके में भी नहीं जा सकती क्योंकि तब वह मेरे साथ साथ मेरे मां-बाप को भी मार डालेगा..!
 
कमिश्नर साहब के आदेश से महिला की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, और महिला को उसकी सुरक्षा हेतु "निराश्रित महिला सेवा सदन" भेज दिया गया।

इस पूरी खबर को पढ़ने के बाद डॉली का दिमाग घूम गया। उसने सोचा कि इस महिला को न्याय दिलाना बहुत जरूरी है। और यह सभासद जब अपनी पत्नी के साथ इतना जुल्म कर सकता है, तो अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं पर कितना जुल्म करता होगा..!

लेकिन किस तरह वो इस महिला की मदद करें, यह बात उसके कुछ समझ में नहीं आ रही थी। और सबसे बड़ी मुश्किल यह थी, कि उसके दोस्त भूत भाई भी कई दिनों से नजर नहीं आए थे।

और वो अपने भूत भाई को याद ही कर रही थी, कि उसके आंख बंद करते ही अचानक भूत भाई उसके सामने प्रकट हो गए।

डॉली भूत भाई को देखते ही खुश होकर बोली- आपकी उम्र बहुत लंबी है। मैं अभी आपको ही याद कर रही थी..!

भूत- मेरी उम्र बहुत लंबी है..! यह बात तूने सही कही लेकिन मुझे बहुत लंबी उम्र नहीं चाहिए, क्योंकि मुझे इस भूत योनि से मुक्ति भी चाहिए।

डॉली-ठीक है। लेकिन जो जरूरी काम है उसे तो करना ही होगा। क्योंकि जब तक सारे पेंडिंग काम पूरे नहीं हो

जाते तब तक मुक्ति की उम्मीद करना व्यर्थ है।

भूत- सही बात है। क्योंकि जब तक हम बहुत से अच्छे काम नहीं करेंगे, तब तक हम भूतों की न तो छवि सुधरेगी और न इस भूत योनि से मुक्ति ही मिलेगी।"

डॉली-" तो ठीक है अब एक और अच्छा काम करने में आप हमारी मदद करें।"

भूत- मुझे मालूम है। और इसीलिए मैं आया भी हूं। क्योंकि मैंने पहले ही तुमसे वादा किया था, की जरूरत पड़ने पर मैंजरूर हाजिर हो जाऊंगा।

डॉली- फिर तो आपको यह भी मालूम होगा कि आज हमने कहा जाना है।

भूत- हाँ। मालूम है आज हमने सभासद रमाशंकर के यहां जाना है। और चूंकि वो अपनी पत्नी रूपा का मर्डर करना चाहता है, तो किसी न किसी को इस काम की सुपारी भी वो ज़रूर देगा। और तुम जब उससे मिलोगी, तो यह काम तुम्हें अपने हाथ में लेना होगा..! आगे क्या और कैसे करना है यह मैं तुमको बताऊंगा।

डॉली -ठीक है। मैं फटाफट तैयार जाती हूं। वैसे आज टेंपो से चलूं या अपनी गाड़ी से।

भूत- तुझे गरीब लड़की बनकर जाना है उसके पास। तो तेरे पास स्कूटी कहां से आएगी..? हां कोई टूटी फूटी साइकिल से जरूर जा सकती है। मगर बेहतर होगा कि तू टेंपो से चल।

डॉली-" ठीक है भूत भाई। हम टेम्पो से चलेंगे। और इस सभासद रमाशंकर को ऐसा मजा चखाएंगे कि उसकी सारी हेकड़ी निकल जाएगी..!"

भूत-"तू नाश्ता कर के फिट हो जा।तब तक मैं जरा रमाशंकर से मिल कर आता हूं। क्योंकि हम उसके घर पहुंचे और वो कहीं और हो, फिर तो सब गड़बड़ हो जाएगा। इसलिए मैं अभी पता करके आता हूं, कि वह इस वक्त कहां है..?"

डॉली-"ओके। मैं आपका इंतजार करूंगी।"

भूत भाई हवा के झोंके की तरह रमाशंकर जी के घर पहुंचे, मालूम हुआ कि अभी जनाब सो रहे हैं। भूत भाई ने सोचा कि ये आलसी एक घंटे से पहले नहीं उठेगा। और अगर सुबह सुबह डॉली जैसी खूबसूरत लड़की के दर्शन हो जाएंगे इसे, फिर तो इसका दिन बहुत ही बेहतरीन होगा..! वैसे कितना बेहतरीन होगा इसका दिन, यह तो इसे तब पता लगेगा जब डॉली इससे मिलेगी। फिर सब कुछ ठीक-ठाक देखकर भूत भाई वापस डॉली के पास आ गया और उसके अंदर प्रवेश

कर गया।

प्रिया ने अपने अंदर भूत भाई के आगमन को महसूस किया और अपनी मम्मी से इजाजत लेकर सभासद रमाशंकर के घर को चल पड़ी..!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
 
डॉली जब रामाशंकर के बंगले पर पहुंची, उसी समय मोनिका भी उनसे मिलने आई थी।

मोनिका ने डॉली से पूछा -"तुम कौन हो और किस लिए आई हो..?"

डॉली-"यही प्रश्न मैं तुमसे भी पूछ सकती हूं, कि तुम कौन हो और किस लिए आई हो..?"

मोनिका- "मैं रमाशंकर की बीवी हूं। अब बोलो तुम कौन हो..?"

डॉली- "कमाल है..! अभी आज के ही अखबार में निकला है श्री रमाशंकर की बीवी रूपा है! और उसने रमाशंकर पर रेप का आरोप लगाया है..! और तू कह रही है कि तू रमाशंकर की बीवी है..! कम से कम झूठ ऐसा तो बोल, जो पकड़ में न आए..!"

मोनिका- "मतलब तुझे सब कुछ मालूम है रमाशंकर के

बारे में..! क्या रमाशंकर की बीवी रूपा को तू जानती है..? क्या तूने उसे कभी देखा है..?"

डॉली- "नहीं मैं उसे नहीं जानती और मैंने उसे कभी नहीं देखा। लेकिन तू बात को घुमा क्यों रही है..? तू कौन है..? क्योंकि यह तो पक्की बात है, कि तू उसकी बीवी नहीं है..?"

मोनिका- "यह कैसे कह सकती है तू कि मैं उसकी बीवी नहीं हूं जबकि तूने उसकी बीवी को देखा ही नहीं कभी..?

डॉली- "ईट्स सो सिंपल..! अगर तू उसकी बीवी है तो तू रूपा है..! और तूने कमिश्नर साहब को अपनी कहानी बताई है, कि तेरा पति तेरे संग बलात्कार करता है। और अब वह तुझको मार डालना चाहता है ..! तो क्या इस समय अपने पति के हाथों मरने के लिए यहां आई है तू..? फिर इस समय तो तुझको निराश्रित महिला सेवा सदन में होना चाहिए था..! क्या वहां से भाग कर आई है तू..? या उन्होंने खुद तेरे को मरने के लिए यहां भेज दिया?"

मोनिका- "मतलब रूपा की सारी बातें तुझे पता है। मगर सवाल यह है कि मैं तेरे को अपनी बातें क्यों बताऊं, कि मैं कौन हूं..? और तू होती कौन है मेरे से ये सारी बातें पूछने वाली..?"

डॉली- "शुरुआत मैंने नहीं, शुरुआत तूने की है। पहले तूने मुझसे पूछा था, कि मैं कौन हूं..? लेकिन मैं इतना तेरे को बता दूं, कि मुझे रूपा की दर्द भरी कहानी पढ़कर बहुत गुस्सा आया है। और मैं रमाशंकर को उसके बुरे कर्मों की सजा देने की नियत से इस समय यहां आई हूँ..!"

मोनिका- "कहीं इस रामाशंकर ने तेरे साथ भी तो कुछ गलत हरकत नहीं की है..?"

डॉली- "वह मेरे साथ कोई गलत हरकत करेगा उसके पहले ही मैं उसकी जान ले लूंगी..! क्योंकि इस जैसे अय्याश इंसान का जीना ठीक नहीं है।"

मोनिका-"फिर तो लगता है, कि तू मेरी दोस्त है। चल पेड़ के नीचे बैठ कर बातें करते हैं। आज संडे है। और संडे के दिन रमाशंकर सिर्फ खास लोगों से ही मिलता है।"

डॉली-"ओके।"

रामाशंकर के बंगले के बाहर काफी खुली जगह थी और वहां आम, अमरूद, जामुन, नीम, पीपल, गूलर आदि के बड़े बड़े छायादार वृक्ष लगे थे और लान हरी भरी घास का खूबसूरत बिछोना था।

दोनों लड़कियां नीम के एक वृक्ष के नीचे घास पर बैठ गई। फिर मोनिका ने कहा-"मैं एक्चुअली रूपा नहीं हूं। बल्कि मेरा नाम मोनिका है। और मैं उससे शादी करने वाली हूं। मतलब उसकी होने वाली पत्नी हूँ..!"

डॉली- "यह बात तो तू पहले भी बता सकती थी। क्योकि पत्नी और होने वाली पत्नी में बहुत अंतर है। "

मोनिका- "ज्यादा अंतर नहीं है। क्योंकि मैं उसके साथ हमबिस्तर हो चुकी हूँ। मुझे उसकी सच्चाई बाद में पता लगी कि उसकी कोई पत्नी भी है और वह मेरे साथ धोखा कर रहा है। और अब अगर मैं उस पर गुस्सा होती, तो सिर्फ अपना ही बिगाड़ती, और उसका बाल भी बांका ना होता। इसलिए बहुत ही सोच विचार कर मैंने उस पर गुस्सा नहीं किया बल्कि उससे प्यार करने का नाटक किया। और उसके समक्ष शादी का प्रस्ताव रख दिया जिसे उसने स्वीकार भी कर लिया। इसलिए तुम यह समझ सकती हो, कि पत्नी होने का दर्जा तो मुझको मिल ही चुका है। सिर्फ समाज की मुहर लगना बाकी है..!"

डॉली- "लेकिन क्या तुम्हें यह नहीं लगता कि तुम गलत काम कर रही हो..? भले ही यह तुम्हारा एक नाटक है, फिर भी एक शादीशुदा पति पत्नी की जिंदगी में तुमने जहर घोला है..? उसकी पत्नी को उसके घर से बेदखल

किया है..? लेकिन तुम ऐसा कैसे कर सकती हो..? और सबसे बड़ी बात तो ये है, कि तुम रमाशंकर जैसे कमीने इंसान के साथ शादी करके खुद को भी बर्बाद कर रही हो..!"

मोनिका- "बच्ची हो तुम। इसलिए सच्चाई से बहुत दूर हो। रमाशंकर कमीना है, यह मैं पहले ही कह चुकी हूं, और इसीलिए मैं उससे शादी कर रही हूँ। क्योंकि शादी करने के बाद उसकी सारी प्रॉपर्टी पर मेरा कानूनी अधिकार हो जाएगा। सिर्फ एक रस्म निभा कर अगर कानूनी तौर पर मैं उसकी सारी दौलत पर कब्जा कर सकती हूँ, तो क्या यह उचित नहीं है? अगर मैं चोरी करूंगी.. उसके साथ धोखा करूंगी..तो कुल कितना पैसा मिल पाएगा मुझको ..? लाख ..दो लाख..! इससे ज़्यादा तो नहीं मिल सकता न..! और पकड़े जाने का रिस्क अलग से। जब की शादी करने के बाद उसकी करोड़ों की प्रॉपर्टी मेरी अपनी होगी और वह भी कानूनी तौर पर..!"

डॉली-"मतलब तू सिर्फ पैसों के लिए शादी कर रही है रमाशंकर से।'

मोनिका- "सिर्फ पैसों के लिए नहीं, मुझे रमाशंकर से बदला भी लेना है। और उसकी पत्नी की जिंदगी में मैं जहर भी नहीं घोल रही हूं, क्योंकि इस अय्याश इंसान को अगर मोनिका छोड़ देगी, तो किसी "सोनी" को

फंसा लेगा ये। और दूसरी बात यह भी हये, , कि मैं तुझे पहले ही बता चुकी हूं कि उस समय मेरे को ये बात नहीं मालूम थी, कि ये व्यक्ति शादीशुदा है। और इसने मेरे साथ धोखा कियाहै..! इसलिए मैंने फैसला किया है कि मैं इससे शादी करूंगी। लेकिन मैं रूपा की तरह सीधी नहीं हूं। मैं शादी करने के बाद इसे खलास कर दूंगी..!"

डॉली- "मतलब मार देगी उसे..?"

मोनिका- "हां मैं मार दूंगी उसे क्योंकि इस जैसे इंसान को जीने का हक नहीं होना चाहिए..!"

डॉली- "लेकिन यह इतना आसान नहीं है। तेरी गर्दन फंस सकती है। और तुझे सजा मिल सकती है..!'

मोनिका- "मुझे सजा की चिंता नहीं है। जब तक जिऊंगी ऐश से जिऊंगी। मेरी तो बस इतनी सी कहानी है, जो मैंने तुझे बता दिया ।अब तू अपनी कहानी मेरे को बता कि तेरी रमाशंकर से कौनसी दुश्मनी है और किस लिए तू आई है यहां..?"

डॉली- "मैंने तो सिर्फ अखबार में रूपा की कहानी पढ़ी और मुझे इस इंसान पर इतना गुस्सा आया कि मेरा दिल कर रहा है कि मैं अभी इसकी जान ले लूं, और इसीलिए मैं यहां आई हूं..!"

मोनिका- "तू भी कमाल की लड़की है .! ऐसे तो अखबार में रोज कोई न कोई केस आते रहते हैं..! तू किन-किन लोगों की जान लेगी..?"

डॉली-" ऐसे दो चार लोगों की भी जान ले लूँ ना, तो पचास सौ लोगों की जान बच सकती है.."

मोनिका-" हां , इस बात को तो मैंने भी नोटिस किया है। क्योंकि दस बारह दिन पहले यहां दो तीन लोगों का मर्डर हो गया। तब से अब तक रेप के कोई केस नहीं हुए। सबके दिल में दहशत मची हुई है..! और सबसे विचित्र बात यह है, किसने इन बदमाशों को मारा, इसका अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है..! पर जिसने भी यह काम किया है, मेरी और मुझ जैसी हजारों लड़कियों और औरतों की उसके साथ दुआएं ज़रूर हैं..!"

डॉली- "थैंक्स डियर! बहुत खुशी हुई यह जानकर, कि उस लड़की के प्रति बहुत से लोगों की दुआएं हैं।"

मोनिका- "व्हाट..? तुम कहना क्या चाहती हो..? और उस लड़की के प्रति..? इसका क्या अर्थ है..? और तुम्हें कैसे मालूम कि किसी लड़की ने ये काम किया है..? क्या तुम उस लड़की को जानती हो..?"

डॉली के मुंह से यह बात अचानक निकल गई थी। लेकिन मोनिका में उसे अपनापन दिखा था। इसलिए वह उसके आगे खुल गई। क्योंकि छुपाने से शायद बात और गड़बड़ हो सकती थी। उसने मोनिका से कहा-" तूने अभी अभी यह कहा है कि तेरी दुआएं उस लड़की के साथ हैं..!"

मोनिका- "बिल्कुल कहा है। और उस लड़की के साथ दुआएं तो होगी ही, क्योंकि जो काम पुलिस नहीं कर सकी, कानून नहीं कर सका, कोई नेता नहीं कर सका, उस काम को उसने अंजाम दिया। इसलिए वो जो कोई भी है पूजनीय है और वंदनीय है..!"

डॉली- "तो ठीक है। मैं तुझे बताती हूं। इन सब हरामखोरों को मैंने मारा है। और इस रमाशंकर को भी मारने की उद्देश्य ही मैं यहाँ आई हूँ। लेकिन कोई बात नहीं! तू पहले इससे शादी कर ले, और तब तक के लिए मैं इस रमाशंकर को जिंदगी बक्श दे रही हूं। और इस बात को अच्छी तरह से याद कर ले, कि शादी के बाद इस प्रताप को मार कर अपनी जान जोखिम में डालने की तेरे को कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि तेरा ये काम मैं कर दूंगी..!"

मोनिका-" अनबीलिवीएबल यार..! क्योंकि कितनी मासूम है तू..? फिर इतने बलिष्ट और क्रुएल लोगों को तू कैसे मार सकती है..? विश्वास नहीं होता। और अगर

यह सच है, तो मैं तेरे पैर छूकर तुझको नमन करती हूं..!" और इस बात को कहकर वास्तव में मोनिका ने उसके पैर छू, लिये।

डॉली- "प्लीज, मेरे पैर को तू मत छू..! लेकिन एक प्रार्थना ज़रूर है तुझसे, कि मेरे इस राज को हमेशा अपने दिल में दफन करके रखना..!"

मोनिका-" जरूर फ्रेंड। लेकिन अभी भी मैं भरोसा नहीं कर पा रही हूं यह काम तूने किया होगा..!"

डॉली-" पहले तू अपना हाथ मेरे हाथ में दे..!"

" यह ले..! लेकिन इससे क्या होगा..?" मोनिका ने डॉली के हाथ में अपना हाथ देते हुए कहा।

डॉली-" अब तू अपना हाथ छुड़ाने के लिए कितनी भी ताकत लगा ले, लेकिन तू अपना हाथ नहीं छुड़ा सकती..!"

मोनिका ने कहा-"ओके..!" और फिर उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी..और पूरा दम लगा दिया अपना हाथ छुड़ाने के लिए, लेकिन डॉली ने इस बुरी तरह उसके हाथों को जकड़ लिया था, कि अपनी सारी कोशिशों के बावजूद वो अपना हाथ नहीं छुड़ा सकी।

तब मोनिका बोली-" मान गई यार, कि तुझमें असीमित ताकत है। और तू इस रमाशंकर को भी जरूर मार देंगी।"

डॉली-"तो ठीक है फ्रेंड, अब इस समय मुझे रामाशंकर से मिलने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन तू फटाफट इस हैवान से शादी कर ले, जिससे किसी और की जिंदगी बर्बाद होने से पहले ही मैं इसको हमेशा के लिए इस दुनिया से खत्म कर सकूं। और मैं अब जाती हूँ।"

मोनिका-"ओके बहन, मेरे को अपना नंबर दे दे, जिससे मैं तुझे अपनी शादी में बुला सकूं।"

डॉली ने मोनिका को अपना मोबाइल नंबर दिया, और वापस अपने घर आ गई।

घर आकर उसने भूत भाई से कहा-"आज तो रामाशंकर को हमने छोड़ दिया। लेकिन उसे मरना तो होगा ही।"

भूत-" अच्छा किया। लेकिन एक बात गड़बड़ हो गई.? मोनिका उससे शादी कैसे करेगी, जब तक वो रूपा की जान नहीं ले लेता..!"

डॉली-" हां यार, यह बात तो मैं भूल ही गई..! अब क्या करूं..?"

भूत-" तू चिंता ना कर। यह रमाशंकर जो भी आगे की प्लानिंग बनाएगा, मुझे सब पता लग जाएगा। और तब बिना बुलाये मैं तेरे पास आ जाऊंगा। इसलिए फिलहाल तो तू खाना खा और ऐश कर। ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। रूपा को न्याय मिलेगा और जरूर न्याय मिलेगा..!"

डॉली-"थैंक्स भूत भाई।"

"ओके, बॉय।" भूत ने कहा और उसके जिस्म से निकलकर अंतरिक्ष में विलीन हो गया..!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
 
डॉली के जाने के कोई 10 मिनट बाद रमाशंकर बाहर आया और मोनिका से पूछा-"अरे तू तो अकेली यहां है। मुझे ऐसा लगा जैसे तू किसी से बात कर रही है..?"

मोनिका-" हां, मैं खुद से ही बात कर रही थी। मैं यह सोच रही थी कि मेरी तुझसे शादी कब होगी और कैसे होगी..?"

रमाशंकर-" मैं तो अभी तुझ से शादी कर लूँ मेरी जान, लेकिन कानूनी तौर पर तुझ से शादी करने के लिए रूपा का मरना जरूरी है। क्योंकि रूपा के मरने के बाद हम दोनों इस दुनिया में बिल्कुल फ्री होंगे। और मैं कानूनी तौर पर तुझको अपना लूंगा। तू मेरी पत्नी होगी और तेरे जिस्म पर सिर्फ मेरा अधिकार होगा..!"

मोनिका-"मेरे जिस्म पर तो अब भी सिर्फ तेरा ही अधिकार है। लेकिन जब तक हमारी शादी नहीं हो जाती, तुझको तो कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है, लेकिन

मुझको यह समाज बदनाम कर सकता है..! "

रमाशंकर-"ठीक है डियर! मैं आज ही जग्गू से बात करता हूं, कि वो रूपा को ठिकाने लगा दे..! फिर लीगल तरीके से मैं तुझ से शादी कर लूंगा।"

मोनिका-"लेकिन तू रूपा को तू तलाक क्यों नहीं दे देता..? क्योंकि तलाक देने के बाद भी तो हमारी शादी हो सकती है..?"

रमाशंकर-""सच्ची बात यह है कि जब उससे मैंने शादी किया ही नही है, तो तलाक किस बात का..?"

मोनिका-" तू कहना क्या चाहता है ? मैं समझी नहीं..!"

रमाशंकर-" शादी के समय मैंने उसकी मांग में सिंदूर नहीं, बल्कि रंग भरा था..! तो यह शादी कहां हुई..? लेकिन समाज की नजर में वह मेरी पत्नी है, इसलिए तुझ से शादी करने के लिए उस से छुटकारा पाना जरूरी है। और इस काम के लिए मेरे पास दो ऑप्शन है। तलाक या उसकी हत्या।। तलाक देने से मेरी नेता छवि पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए उसको मरवा देने में ही मेरी भलाई है।"

मोनिका-"लेकिन उस औरत को मारना उचित नहीं है,

क्योंकि एक हत्यारे को अपने पति के रूप में मैं कैसे स्वीकार कर पाऊंगी..?"

रमाशंकर-" इस दुनिया में न मालूम कितनी औरतों की नित्य हत्याएं होती है..! किस किस के भले के बारे में सोचेगी तू..? इसलिए इन बातों को छोड़, और ऐश कर..!"

मोनिका-" ओके। लेकिन वह मरेगी कैसे और तेरी प्लानिंग क्या है..?"

रमाशंकर-"बताया तो तुझे, कि जग्गू से बात करता हूं। फिर जैसा भी होगा, तुझको बताऊंगा। तब तक चल अंदर। और थोड़ी देर के लिए भूल जा इन सारी बातों को।।"

मोनिका अंदर गई, तो उसने रमाशंकर को कुछ ज्यादा ही शराब पिला दी, और बोली-" जग्गू को अभी बुला, और रूपा की छुट्टी कर..!"

( रमाशंकर शराब के नशे में धुत हो चुका था। उसने जग्गू को फोन किया, और तुरंत आने को कहा।)

रमाशंकर-"जग्गू , तू क्या कर रहा है अभी आ..!"

जग्गू-" आप काम बोलो साहब। हमें पैसा की बहुत

जरूरत है इस समय..!"

रमाशंकर-" पागल है तू। पर्सनल बातें फोन पर नहीं की जाती। तुरंत आ। और पैसा ले जा।"

जग्गू-" ठीक है। अभी आता हूं।"

(और आधे घंटे बाद ही जग्गू रमाशंकर के सामने था। लेकिन सामने एक लड़की को देखकर कुछ बोल नहीं पाया।)

रमाशंकर-" तू चिंता ना कर, यह मेरी पार्टनर है। और मेरे होने वाली बीवी भी है।।"

जग्गू-" ओके बास। बोल क्या काम करना है..?"

रमाशंकर-" मेरी पहली पत्नी रूपा को ऊपर पहुंचाना है। आज और हो सके तो इसी वक्त..!"

जग्गू-" ठीक है। कहां है इस वक्त वो..?"

रमाशंकर-" वो निराश्रित महिला सेवा सदन में है। "

जग्गू-" उसका मोबाइल नंबर..?"

रमाशंकर-" 3695******"

जग्गू-"ठीक है। इस महिला सेवा सदन की संचालिका कौन है? और उसका मोबाइल नंबर..?"

रमाशंकर-"लालो देवी। मोबाइल नम्बर 8456******"

जग्गू-" ठीक है साहब, आज ही उसका काम तमाम कर दूंगा।

लेकिन यह मर्डर का मामला है। इसलिए एक लाख और लगेगा, क्योंकि इस 50 में 25 तो मैं लालो देवी को ही दे दूंगा।"

रमाशंकर-" ठीक है एक लाख तुझको और मिल जाएंगे। लेकिन काम जितनी जल्दी हो खत्म कर..!"

जग्गू-" मैं अभी जाता हूं। और आज ही उसको खत्म करता हूं। आप ₹100000 तैयार रखिये..!"

रमाशंकर-" एक लाख नगद रखा है। तेरा काम होते ही तुझको मिल जाएगा।"

जग्गू-" ठीक है सर। मैं जाता हूं अपने मिशन पर!!"

( और यह कह कर जग्गू चला गया। जग्गू के जाने के बाद रमाशंकर ने मोनिका से कहा)

रमाशंकर-" अब तो खुश है ना..? रास्ते का रोड़ा हटते ही तू मेरी हो जाएगी हमेशा के लिए..!"

"थैंक्स सर..!" मोनिका ने कहा, और उसके गले में अपनी बाहें डाल कर शराब की पूरी बोतल और उसके मुंह में उड़ेल दी..!

(कुछ देर बाद जब रमाशंकर पूरी तरह से अपने होशो हवास खो बैठा, तो मोनिका ने डॉली को फोन किया।)

मोनिका-" हाय डॉली मैं मोनिका बोल रही हूं।''

डॉली-" हां बोल मोनिका। क्या कोई नई खबर है..?"

मोनिका-" हां दीदी। अभी अभी जग्गू नाम का एक आदमी निराश्रित महिला सेवा सदन को रवाना हो चुका है। वो आज ही रूपा का काम तमाम कर देना चाहता है। इस सेवा सदन की संचालिका का नाम लालो देवी है। जग्गू उन्हें घूस की रकम देकर, अपना काम निकालना चाहता है। आप कुछ करो, वरना बेचारी रूपा बेमौत मारी जाएगी..!"

डॉली-" तुम चिंता ना करो मैं। कोई न कोई ऐसा रास्ता निकाल लूंगी जिसे रूपा की जान बच जाए।"

मोनिका-" लेकिन अगर उसकी जान बच जाएगी तो मेरी रमाशंकर से शादी कैसे होगी..? इसलिए कोई ऐसा रास्ता ढूंढ, जिससे रूपा की जान भी बच जाए और मेरी रमाशंकर से शादी भी हो जाए। और फिर अपनी सुहागरात की रात में ही मैं रमाशंकर को उसकी मौत का तोहफा देना चाहूंगी..! लेकिन यह काम अपने वादे के अनुसार तुझको ही करना है.!"

डॉली-" तू चिंता ना कर। मैं कोई न कोई ऐसा रास्ता निकाल लूंगी कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे..!"

मोनिका-" धन्यवाद दीदी।" और यह कहकर मोनिका ने फोन रख दिया।

* * * * *

जग्गू(फोन पर)- हेलो, मुझे निराश्रित महिला सेवा सदन की संचालिका लालो देवी से बात करनी है।"

लालो देवी-"यस, मैं ही लालो देवी हूं। बताइए क्या काम है..?"

जग्गू-" मैं अभी आपके ₹25000 आपको दे रहा हूं। 10 मिनट में आ जाऊंगा। मेरा इंतजार करिएगा।"

(लालो देवी मन में सोचती है, कि कैसा पागल आदमी

है, जो मुझे ₹25000 देने की बात कर रहा है, जबकि मैं तो इस नाम के किसी आदमी को जानती भी नहीं। फिर भी पैसा दे रहा है, तो इससे मिलने में क्या हर्ज है। क्योंकि सही कहानी तो उसके आने पर ही पता लगेगी।)

लालो देवी-" ठीक है मैं तेरा इंतजार कर रही हूं।"

" थैंक यू मैडम! " जग्गू ने कहा और फोन काट दिया।

(10 मिनट बाद निराश्रित महिला सेवा सदन के ऑफिस में)

जग्गू-" नमस्ते मैडम मेरा नाम जग्गू है। आपके यहां रूपा नाम की एक औरत है। आज ही आई है। मुझे उसे अपने साथ ले जाना है..!"

लालो देवी-" यह क्या बकवास कर रहा है तू..? मैं उसे यहां से कैसे जाने दे सकती हूं..?"

जग्गू( जेब से ₹25000 नोट की गड्डी निकालकर मेज पर रखते हुए)-" आप उसे मेरे साथ नहीं भेज सकती, लेकिन उसको यहां से भागने पर मजबूर तो कर सकती है न..?"

लालो देवी( नोटों का अपनी मेज़ की दराज़ में रखते

हुए)- " मगर उसे भागने पर किस तरह मजबूर कर सकती हूँ मैं..?"

जग्गू-" मैंने यहां के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर ली है। आपके इस भवन में पीछे एक कमरा है, जिसके रोशनदान की जाली टूटी हुई है। और वो कमरा आपका टॉर्चर रूम है। और आप रूपा को उस कमरे में ले जाइए, और उसे टॉर्चर कीजिए। फिर ये कह कर कि अभी आप आधे घंटे में फिर आएंगी, उसे ताले में बंद कर दीजिए। बस इतना ही काम है आपका। क्योंकि इस आधे घंटे में रूपा उस टूटी हुई रोशनदान की जाली से भाग निकलेगी। बाकी उसके बाद जो कुछ भी करना है वह हम करेंगे..!"

।"

लालो देवी-" ठीक है अभी आधे घंटे बाद मैं उसको टार्चर रूम में ले जाती हूं। बाकी आगे क्या होगा मुझे नहीं मालूम। लेकिन कुछ अनहोनी होने पर मेरे साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए..!"

जग्गू-" ये बाहुबली सभासद रमाशंकर का क्षेत्र है! और मैं रमाशंकर का ही आदमी हूं! इसलिए आप पर कोई आंच नहीं आएगी। आप उसके लिए बेफिक्र रहिए।"

लालोदेवी-" ठीक है। मुझे उम्मीद है, आधे घंटे बाद

रूपा आपको पिछवाड़े खेत में मिल जाएगी। क्योंकि टॉर्चर से बचने के लिए कोई कुछ भी कर सकता है। और पहले भी टार्चर से भयभीत होकर कई लड़कियां उस रोशनदान से भाग चुकी है..!"

जग्गू-" मुझे यहां की सारी हिस्ट्री पता कर लिया है। इसीलिए मैंने आपसे ये बात कही है।"

लालो देवी-"ओके, मैं चलती हूँ..!"

जग्गू-"और मैं आपके टार्चर रूम के पिछवाड़े में जाता हूं। बाय..!"

यह कह कर जग्गू निराश्रित महिला सेवा सदन के उस टार्चर रूम के पिछवाड़े खेत में पहुंच गया और रूपा के भाग कर आने का इंतजार करने लगा।
 
(निराश्रित महिला सेवा सदन का टॉर्चर रूम, जहां रूपा के हाथ पाव को एक चारपाई में बांध के रखा गया है। तभी लालो देवी अंदर प्रवेश करती है।)

लालो देवी-" किसी ने तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं किया न..?"

रूपा-" मुझे यहां बांध के क्यों रखा है..?"

लालो देवी-" क्योंकि तूने अपने सम्मानित पति के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई है। और रमाशंकर जो हमारे क्षेत्र का सभासद भी है, वो तेरे साथ भला गलत कैसे कर सकता है..? और एक पति अपनी पत्नी के साथ बलात्कार नहीं करता है, बल्कि वह जो कुछ भी उसके साथ करता है वह उसका अधिकार होता है..! इसलिए अपना यह नाटक बंद कर और इन बड़े लोगों और पैसे वाले लोगों को ब्लैकमेल करने का धंधा छोड़ दें, और उनके खिलाफ जो रिपोर्ट लिखाई है तूने उसे वापस ले ले..!"

रूपा-" मैंने जो भी रिपोर्ट में लिखाया है, वो सारी बातें बिल्कुल सत्य है। और मुझे उस कमीने से अपनी जान का भी खतरा है। इसलिए इस रिपोर्ट को वापस नही लुंगी मैं। लेकिन आप मुझसे ऐसा करने को क्यों कह रही है..? मुझसे तो कमिश्नर साहब ने यहां मेरी सुरक्षा के लिए भेजा था। और आपने मेरे हाथ पांव क्यों बांध रखे हैं..? मैं कमिश्नर साहब से आपकी भी कंप्लेंन करूंगी..!"

लालो देवी-" मेरी कम्प्लेन करेगी..? " सटाक..! रूपा के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ लगाते हुए लालो देवी ने कहा।

लालो देवी-" अपने पति के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने वालों को बहुत कड़ी सजा देती हूं मैं। और अगर मेरे खिलाफ तूने किसी से भी कोई कंप्लेन की तो तू जिंदा नहीं बच पाएगी..!"

रूपा-" एक तरफ मेरा पति मेरी जान लेने के पीछे पड़ा है। और यहां तू भी मेरी जान लेना चाहती है..! तू तो महा नीच औरत है जो एक औरत के दर्द को भी नहीं समझती..!"

लालो देवी- सटाक..!

एक और तमाचा उसके गाल पर जड़ते हुए लालो देवी बोली-"ये निराश्रित महिला सेवा सदन सिर्फ सरकारी खर्चे से नहीं चलता। यहां की सुख सुविधाओं के लिए तुझ जैसी लड़कियो के जिस्म का सौदा भी किया जाता है। इसीलिए तुझको यहां बांध के रखा है, जिससे जो पुरुष यहां आए, उनके साथ तू कोई बदतमीजी ना कर सके..!"

रूपा-"तू इंसान है या राक्षसी.? मैं तुझ को जिंदा नहीं छोडूंगी..?"

लालो देवी-" हाथ पांव दोनों बंधे है तेरे, फिर भी तेरी हेकड़ी नहीं जा रही..!

रूपा-" मेरे हाथ पांव खोल, फिर बताती हूं तुझको..!"

लालो देवी-" अभी भेजती हूं 2 हफ्ते कट्टे नौजवानों को तेरे हाथ पाव खोलने के लिए..!"

रूपा-" आप ऐसा नहीं कर सकती हैं..! आप भी गुनहगारों से मिली हुई है। "

लालो देवी-" हां, मैं गुनाहगारों से मिली हुई हूँ..! लेकिन तू क्या कर लेगी मेरा..? और सुन कमिश्नर को भी सब मालूम है, कि कहां क्या होता है। लेकिन उसने जो फॉर्मेलिटी करना था, वो कर दिया। अब वो अपने एयर कंडीशंड रूप से निकल कर यहां आने की

तकलीफ नहीं करेगा। इसलिए तेरी इज्जत अब सिर्फ इसी शर्त पर बच सकती है , कि तू इस केस को वापस ले ले। वरना भुगतने को तैयार रह..? अब बोल..। क्या फैसला है तेरा..?"

रूपा-" मेरा फैसला वही है जो पहले था। और अब मैं तेरे खिलाफ भी रिपोर्ट लिखाऊंगी..!"

लालो देवी-" ठीक है! अब तू आधे घंटे तक इंतजार कर। उसके बाद तुझको पता लगेगा कि मैं तेरे साथ क्या करूंगी ..!" ये कहकर लालो देवी उसके कमरे में ताला लगा कर बाहर चली गई।

लालू देवी के जाने के बाद रूपा के कुछ समझ में न आया कि निराश्रित महिलाओं को आश्रय देने वाला यह कैसा सेवा सदन है..! लेकिन लालो देवी की धमकी से इस समय वो काफी परेशान थी। और उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें। उसके पास आधे घंटे का समय था, इसी बीच उसने कुछ करना था। आखिर काफी जद्दोजहद के बाद उसने अपने बंधे हाथों को खोल लिया। फिर अपने पैरों के बंधन भी खोल लिए। फिर कमरे का पूरा मुआयना करने के बाद उसे रोशनदान की जाली टूटी हुई नजर आई। यह देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई। और थोड़े प्रयास करने के बाद अंततः किसी प्रकार रोशनदान से बाहर निकल उस जेल रूपी निराश्रित महिला सेवा

सदन से वो आजाद हो गई..!

लेकिन वहां से आजाद होते ही वह जग्गू के शिकंजे में आ गई, जो पहले से ही घात लगा कर बैठा था। बगल में एक कार खड़ी थी, जिसका इंजन पहले से ही स्टार्ट था। ड्राइविंग सीट पर दीनू बैठा था। जग्गू रूपा को घसीटते हुए कार तक लाया और उसे कार के अंदर ढकेल कर उसकी बगल में बैठ गया और गाड़ी फर्राटे मार कर आगे बढ़ गई।

दीनू-"बॉस, मालीगांव कि रास्ते में नदी पड़ती है। इस समय सन्नाटा रहता है। वहीं नहडॉली में इसे फेंक देते हैं। काम खतम।"

जग्गू-" ठीक है। लेकिन इसने मरना तो है ही। तो क्यों न इसे मारने के पहले हम दोनों थोड़ा मजा ले ले..? वैसे दारू की कोई बोतल है या नहीं..?"

दीनू-"है..!"

जग्गू-" तो ठीक है। ला, पहले मैं दो घूंट चढ़ा लेता हूं। फिर तू भी चढ़ा लेना। और गाड़ी को नहडॉली के पहले बाई तरफ टूटी हवेली में ले ले। वह स्थान सही रहेगा। जब तक मैं इसके साथ काम करूं, तब तक तू गाड़ी को रोककर पहिए पर जैक लगा देना, जिससे इत्तेफाक से अगर कोई राहगीर इधर आ भी जाए, तो

यही सोचे कि तू कार का टायर बदल रहा है।"

दीनू-"ठीक है।"

( दीनू ने नहडॉली के ठीक पहले बाई तरफ टूटी हवेली पर गाड़ी रोक दी और जग्गू रूपा को घसीटते हुए हवेली के पीछे ले गया।)

* * * * *

डॉली खाना खाकर जैसे ही आराम करने को बैठी, भूत भाई उसके सामने आ गए।

डॉली-" क्या हुआ भूत भाई..? कोई विशेष बात..?"

भूत-"हां, तू जल्दी से अपनी स्कूटी निकाल। हमें अभी टूटी हवेली चलना है। वहां रूपा के साथ कुछ गलत होने वाला है..!"

डॉली-" ठीक है अभी चलती हूं।"

डॉली ने मां से कहा, मैं एक जरूरी काम से अपनी एक सहेली के यहां जा रही हूं। एक-दो घंटे में आ जाऊंगी। और यह कहकर उसने अपनी गाड़ी निकाली। भूत भाई जल्दी से उसके शरीर में प्रविष्ट हो गए। और डॉली अपनी गाड़ी को भगाती हुई टूटी हवेली पर पहुंच गई..!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

टूटी हवेली के पीछे सन्नाटे में जग्गू रूपा की अस्मत से खेलना चाहता था।उसने बोतल की बची शराब को रूपा के मुंह में उड़ेल दी। शराब की सबसे बड़ी खासियत यह होती है, कि ये इंसान के दिमाग को अपने कंट्रोल में ले लेती है। इंसान जानता है कि उसके साथ गलत हो रहा है, लेकिन उसमें विरोध की शक्ति क्षीण हो जाती है, और जब तक वह अपने होश में आता है, तब तक सब कुछ बर्बाद हो चुका होता है।

रूपा मजबूर थी.. विवश थी, लेकिन उसका दिमाग बहुत तेज़ी से काम कर रहा था। और वह मौके की तलाश में थी कि जग्गू पर प्रहार कर उसकी गिरफ्त से अपने को आजाद कर सके। लेकिन जैसे ही जग्गू ने उसके मुंह में शराब की बोतल उड़ेली, उसका दिमाग चक्कर खाने लगा और वो अपना होश खो बैठी। वो चाहती थी जग्गू के गाल पर एक करारा तमाचा ज़ड़ना, लेकिन उसके हाथ उठ नहीं रहे थे। वो चाहती थी जग्गू के मुंह को नोच लेना, लेकिन उसके हाथ उसका साथ नहीं दे रहे थे। वो चाह रही थी जग्गू के नाजुक अंगों पर

प्रहार करना, लेकिन शराब के नशे में उसका कोई भी अंग सही तरह से काम नहीं कर रहा था और जग्गू की बाहों में जकड़ी हुई किसी बेबस मछली की भांति वो तड़प रही थी..!

लेकिन इसके पहले कि जग्गू उसको धरती पर पटक कर उसके साथ कुछ गलत कर पाता, उसके सामने डॉली आ गई..!

वासना की आग में ज़ल रहे जग्गू ने जब अपने सामने एक बहुत ही खूबसूरत अट्ठारह साल की लड़की को देखा, तो उसने रूपा को छोड़ दिया और डॉली की तरफ बढ़ते हुए बोला-" कमाल की खूबसूरत लड़की है तू..! उम्र भी 18 से ज्यादा नहीं होगी..! लेकिन यहां कैसे आ गई..!"

डॉली चिल्ला कर बोली-"रूपा, तू भाग यहां से..! इस कमीने से मैं निपटती हूँ..!"

जग्गू-"हाहाहाहा..! शायद तुझे यह नहीं मालूम कि इसने इतनी पी रखी है कि यह भाग ही नहीं सकती..! और तुझ में इतना दम कहा कि तू जग्गू से निपटेगी..! लेकिन जब इतने करीब आ गई है मेरे तो थोड़ा और करीब आ जा। क्योंकि अब पहले तुझसे मैं अपनी प्यास बुझाऊंगा, फिर तेरी रूपा से निपटुंगा..! वैसे तू है कौन और तू रूपा की क्या लगती है..?"

डॉली-" मैं तो रूपा की छोटी बहन हूँ.! लेकिन तू कौन है इसका और तेरा इसके साथ क्या संबंध है..?"

जग्गू-"लगता है कम सुनती है तू..! अभी-अभी तुझको बताया तो कि मेरा नाम जग्गू है। और मेरा इससे वही रिश्ता है, जो एक वैश्या का रिश्ता अपने ग्राहक से होता है..!"

डॉली-"ओ मॉय गॉड। लेकिन क्या कपड़े पहने पहने ही सारे काम करेगा..? क्या अपनी नंगी बॉडी मेरे को नहीं दिखाएगा..?"

जग्गू-"वाह..! क्या मस्त लड़की है तू ..! और सच तो यह है कि जिंदगी में पहली लड़की ऐसी मिली है मेरे को, जो मेरी बॉडी देखना चाहती है..! इसलिए तेरी इस इच्छा को तो मैं जरूर पूरी करूंगा ।"

(और जग्गू ने यह कहते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए..! और डॉली की ओर आगे बढ़ते हुए बोला)-"ये ले और जी भर कर देख मेरी इस बॉडी को..! इतनी मस्त बॉडी आज तक जिंदगी में तूने कभी ना देखी होगी..! और मेरी इस बॉडी को देखकर अच्छों अच्छों के पसीने छूट जाते हैं ..!"

(ये कहते हुए वो डॉली के बिल्कुल नज़दीक आ गया, और जैसे ही उसने डॉली के कंधे पर हाथ रखा, उसके

मुंह पर एक करारा तमाचा लगाते हुए डॉली बोली)- ये पहला तमाचा मेरी बहन को वेश्या बोलने का था..!"

फिर दूसरा तमाचा जड़ते हुए बोली-"और ये दूसरा तमाचा मेरे कंधे पर हाथ धरने का..!"

डॉली के हाथों दो तमाचा खाने के बाद जग्गू के होश फाख्ता हो गए, क्योंकि तमाचा इतना जोरदार था, कि उसका दिमाग भन्ना गया..! फिर थोड़ा होश में आते ही उसने रूपा को अपने कस्टडी में लेकर उस पर बंदूक तानते हुए बोला-"अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो इसकी जान ले लूंगा..!"

रूपा ने फौरन अपने कैमरे से उसकी नङ्ग धडंग फोटो खींच ली। तभी भूत भाई ने कहा-"तू चिंता न कर। और आगे बढ़। मैं अभी तेरे जिस्म से निकल कर इसकी बंदूक को फूंक मार कर उड़ा देता हूं। और फिर तुरंत तेरे जिस्म में वापस आ जाऊंगा।"

डॉली बोली-"ओके..!"

और फिर अगले पल ही एक जादू हुआ। जग्गू की बंदूक अचानक उसके हाथ छूट कर ज़मीन पर गिर गई। और जग्गू ने जैसे ही दुबारा बंदूक उठाने की कोशिश की, डॉली ने तीसरा चाटा उसके जबड़े पर मारा, जिससे उसके दो दांत टूट कर बाहर आ गए और

उसके मुंह से रक्त निकलने लगा..!

फिर अच्छे से उसकी धुनाई कर डॉली ने रुमाल से उसकी बंदूक उठाया और रूपा के साथ टेंपो पर आई, जहां दीनू अपनी गाड़ी में ज़ैक लगाए जग्गू के आने का इंतजार कर रहा था। दीनू ने डॉली और रूपा को हैरत से देखा और इसके पहले कि वो कुछ बोलता, डॉली ने उसके सीने पर बंदूक चला दी। यह सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि दीनू कुछ समझ ना सका और वहीं पर ढेर हो गया..!

डॉली ने बंदूक वहीं फेंक दी। रूपा को अपनी स्कूटी पर बैठाया और रास्ते में रूपा की सारी कहानी संक्षेप में सुनी।

लड़खड़ाती जुबान से उसकी सारी कहानी सुनकर डॉली ने कहा-" तू चिंता ना कर। ये निराश्रित महिला सेवा सदन वाले अब तेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे। और वहां किसी के पूछने पर भी सिर्फ एक बात बताना, कि तू यहां से भागी और कुछ गुंडों ने तुझे पकड़ लिया। आगे क्या हुआ तुझे कुछ भी याद नहीं है। और तू डरना मत। मैं तेरे आस-पास ही रहूंगी और जरूरत पड़ने पर तेरी मदद करने ज़रूर जाऊंगी । लेकिन इस बात को तू राज़ रखना और मेरा नाम किसी को न बताना, कि मैंने तेरे को बचाया है।"

रूपा ने कहा-"ठीक है! मैं तेरे बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगी!"

डॉली को बीस मिनट लगे निराश्रित महिला सेवा सदन के कार्यालय पहुंचने में..!

लालू देवी ने जब रूपा को एक लड़की के साथ अपने कार्यालय में आते हुए देखा, तो उसकी आंखें फटी रह गई..! लेकिन उसने डॉली से बहुत ही पोलाइटली कहा-" थैंक्स जो आप इसे वापस यहां ले आई। ये औरत आज ही हमारे यहां आई, और कमरे के रोशनदान से भाग गई थी..! मैं बहुत परेशान थी इसके भागने से..! शायद दिमाग से विक्षिप्त है यह। लेकिन आप चिंता ना करें। हमारे यहां ऐसे मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। लेकिन यह आपको मिली कहा ..?"

डॉली-" मैं इधर से ही जा रही थी, कि ये औरत रास्ते में गिरी पड़ी मिली मुझे। इसने मेरे से कहा कि किसी ने इसकी इज्जत लूटने की कोशिश की। फिर इसने यहां का नाम बताया, और कहा कि वो यहां से परेशान होकर भागी थी, लेकिन यहां से भागते ही उसे गुंडों ने पकड़ लिया। इसने यह भी कहा कि इसे यहां से भागना नही चाहिए था। इसलिए मैंने इसको यहां पहुंचाया। और मैडम मैं किसी केस में उलझना नहीं चाहती। क्योकि मुझे तुरंत घर जाना है। मेरी मम्मी मेरा

इंतजार कर रही होगी। मेरा आपसे सिर्फ एक अनुरोध है कि मेरा नाम इस केस में ना आए। क्योंकि मैंने सिर्फ मानवीयता के नाते इसकी मदद की है।"

"ओके, थैंक्स..! तुम्हारा नाम इस केस में कहीं नहीं आएगा।" लालो देवी ने कहा।

"थैंक्स मैडम।" डॉली ने कहा।

वैसे डॉली की इच्छा तो यही थी, कि इस लालो देवी का भी अभी बाजा बजा दे, लेकिन इस समय उसको अपने घर जाने की जल्दी थी। उसने सोचा, इसको इसके किए की सजा बाद में दूंगी। इसकी सारी कारस्तानी जानने के बाद। फिर भी अप्रत्यक्ष रूप से लालो देवी को धमकाते हुए उसने रूपा से कहा -" तू चिंता ना कर। और डर मत। तेरे साथ जो कोई भी गलत करेगा, ईश्वर उसको मौत की सजा देगा।" यह कह कर डॉली अपने घर वापस आ गई।

डॉली के जाने के बाद लालो देवी ने रूपा से कहा-" यहां से भागने वालों का क्या अंजाम होता है, देखा ना तूने.? क्या हुआ तेरे साथ..? आखिर लूट-पिट करा आ गई न वापस..? और आगे से अगर फिर यहां से भागने की कोशिश की, तो मैं तेरे को ऐसी सजा दूंगी, कि मेरे नाम से भी तेरी रूह काँपेगी।"

फिर लालो देवी ने एक बेल बजाया। बेल सुनते ही एक औरत अंदर आई। लालो देवी ने उससे कहा-" इसे अंधेरी कोठरी में ले जा कर बंद कर दो। क्योंकि यहां से भागने की कम से कम नहीं सज़ा है..!"

वो औरत रूपा को अपने साथ ले गई और उसको एक अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया।

लालो देवी की आंखों में चमक आ गई और उसने खुद से कहा-" कल सुबह तक इसके होश ठिकाने आ जाएंगे। फिर आसानी से इसका सौदा कर सकुंगी। वैसे भी शादीशुदा औरत कब तक अपने पति के बिना रह सकती है..! और पति का साथ अगर छूट जाए, तो किसी का साथ तो पकड़ना ही नहीं पड़ता है..! लेकिन वो कौन होगा, इसका फैसला मैं करूंगी ..सिर्फ मैं..!"

तभी लालो देवी के फोन की घंटी बज उठी। फोन पर किसी ने उसे बताया, कि जग्गू और उसका ड्राइवर मारा गया..!

इस खबर को सुनते ही लालो देवी का होश उड़ गया..! तभी डॉली के शब्द उसके कानों में गूंजने लगे, जो उसने रूपा से कहा था-"तू चिंता ना कर और डर मत..! तेरे साथ जो कोई भी गलत करेगा, ईश्वर उसको मौत की सजा देगा..!"

~~~~~~~~~~~~~~
 
नंग धड़ंग जग्गू की लाश को देखकर इस्पेक्टर रोनाल्डो यह तो समझ गया इस जग्गू ने जरूर किसी के साथ कोई गलत हरकत की होगी। इसीलिए इसकी जान ली गई। वरना इस टूटी हवेली में नंग धड़ंग अवस्था में जग्गू क्या कर रहा था..? और जग्गू का नाम वैसे भी पुलिस स्टेशन पर अपराधियों की हिट लिस्ट में शामिल था।

और टूटी हवेली के बाहर टेंपो ड्राइवर की मौत जिस बंदूक से हुई थी, वह बंदूक सभासद रमाशंकर के नाम से जारी की गई थी। और चूंकि उस इलाके में पब्लिक का आना जाना बहुत कम था, इसलिए इस हत्या का कोई चश्मदीद गवाह मिलना बहुत मुश्किल था। वैसे जग्गू की हत्या से रोनाल्डो अंदर से बहुत खुश था, क्योंकि जग्गू पुलिस के लिए एक सिर दर्द था। कारण ये, कि वो जब भी पकड़ा जाता, ऊपर से कोई सोर्स आ जाता उसको छुड़ाने के लिए..! इसीलिए जग्गू की मौत से पुलिस महकमे को काफी राहत मिली।

और चूँकि जिस बंदूक से टेंपो ड्राइवर दीनू को गोली मारी गई वो बंदूक रमाशंकर के नाम पर थी इसलिए सभासद रमाशंकर पर शिकंजा कसना भी अब आसान था।

हमारे समाज में बहुत लोग ऐसे हैं जिनको सब जानते हैं कि ये क्रिमिनल हैं, किंतु सबूत के अभाव में हमेशा कानून से ये बच जाते हैं। यही कारण है कि दस दस बीस बीस केस इन पर चलते रहते हैं, फिर भी ये छुट्टा समाज में घूमते हैं, और इनकी दहशत कायम रहती है..!

बाहुबली सभासद रमाशंकर की माफियागिरी से सभी वाकिफ थे। उसके नाम पर दर्जनों किस थाने में दर्ज थे । बावजूद इसके सबूत के अभाव में किसी भी केस में उसको अब तक सजा नहीं हुई थी।

लेकिन इस समय दीनू की हत्या के आरोप में बाहुबली रमाशंकर का फंसना तय था, क्योंकि इस बात का जवाब तो उनको देना ही था, कि उनकी बंदूक जग्गू के पास कैसे आई..?

और इसी बात को ध्यान में रखकर इंस्पेक्टर रोनाल्डो ने रमाशंकर को फोन किया-" सर यहां अभी थोड़ी देर पहले जग्गू और टेंपो ड्राइवर दीनू का खून हो गया है। और दीनू का खून जिस रिवाल्वर से हुआ है, वह

रिवाल्वर आपके नाम पर है..! क्या आप बता सकते हैं कि आपकी रिवाल्वर यहां कैसे आई..?

जग्गू और दीनू के खून की खबर सुनकर रमाशंकर के होश उड़ गए..! उसको सपने में भी उम्मीद न थी कि जग्गू जैसे खूंखार इंसान को भी कोई मार सकता है..! अब तक इस जग्गू ने उसके लिए कई खून किए थे..! और ये जग्गू उनका दाया हाथ था। और इसीलिए उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक जग्गू को दे रखी थी, क्योंकि वो जानता था, कि जग्गू हारने वालों में नहीं है। लेकिन जग्गू और दीनू, इन दोनों के खून ने उन्हे विचलित कर दिया और उन्हें कुछ समझ में नहीं आया, की इंस्पेक्टर रोनाल्डो को क्या जवाब दें..! फिर भी कोई ना कोई जवाब तो उन्हें देना ही था।

अंततः कुछ सोचकर इंस्पेक्टर रोनाल्डो से उन्होंने कहा-" मुझे नहीं पता, कि मेरी रिवाल्वर वहां कैसे पहुंची। मुझे तो अभी आप से ही मालूम हुआ कि मेरी रिवाल्वर मेरे पास नहीं है। वरना मैं अपनी रिवाल्वर के चोरी होने की रिपोर्ट पहले ही आपके पास दर्ज करा देता. !"

इंस्पेक्टर रोनाल्डो-" ठीक है। लेकिन यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है कि आपका रिवाल्वर एक अपराधी के पास कैसे आया..! क्या आप जग्गू को जानते थे..?"

रमाशंकर-" मैं तो जग्गू का पहली बार नाम सुन रहा

हूं..! मेरा इस आदमी से कोई संबंध नहीं है..!"

रोनाल्डो ने रमाशंकर की इस बात को रिकॉर्ड कर लिया, क्योंकि वो जानता था कि जग्गू उनका अपना आदमी है, और अब इस केस से अपना हाथ पीछे खींचने के कारण वो सफेद झूठ बोल रहा है..! लेकिन रमाशंकर और जग्गू के बीच रिश्ते का कोई न कोई प्रूफ तो वो निकाल ही लेगा और फिर रमाशंकर अपने इस बयान के आधार पर अपने ही जाल में फंस जाएगा..!!

* * * * *

रामाशंकर को अत्यंत परेशान देखकर मोनिका ने कहा-" क्या हुआ डियर..! इतना परेशान क्यों दिख रहे हो..?"

रमाशंकर-" मैंने जग्गू को इसलिए भेजा था कि रूपा को खत्म कर सके। ₹50000 की रकम भी उसको एडवांस में दिया। किंतु उसे किसी ने मार डाला..! और जिस टेंपो पर वो था उस टेंपो के ड्राइवर को भी किसी ने मार डाला। और सबसे बुरी बात यह हुई, कि टेंपो ड्राइवर को जिस रिवाल्वIर से मारा गया वो रिवाल्वर मेरे नाम से था जो जग्गू को मैंने उसकी सुरक्षा हेतु दिया था। अब इस जग्गू ने काम तो किया नहीं , उल्टा मेरे से ₹50000 भी ले गया। और इस केस में मेरे को भी मुसीबत में डाल दिया..!

मोनिका-" अब क्या होगा और हमारी शादी..?"

रमाशंकर-"तू चिंता क्यों करती है..? रमाशंकर पर हाथ डालना इतना आसान नहीं है। क्योंकि पैसों में और बंदूक में बहुत ताकत होती है। रूपा को अगर जग्गू नहीं मार सका, तो लालो देवी उसे मार देगी या उसपर इतना जुल्म करेगी कि वो खुद ही सुसाइड कर लेगी।।"

मोनिका-" ठीक है अभी मैं जाती हूँ..! कल फिर आऊंगी।"

रमाशंकर-"ओके, तब तक मैं भी कुछ प्लानिंग बना लूंगा, कि आगे मुझे क्या करना है। वैसे तू चिंता बिल्कुल मत कर, क्योंकि रूपा ने मेरे खिलाफ गवाही देकर बहुत बड़ी गलती की है। और उसे हर हाल में मौत की सजा मिलनी है..!"

मोनिका(मन में; मौत की सजा तो मैं तुझको दूंगी लेकिन एक बार तुझसे शादी हो जाए उसके बाद..! लेकिन ऊपर से बोली)-" आप बाहुबली नेता है। और होगा तो वही जो आप चाहेंगे!"

रमाशंकर-" बिल्कुल ठीक कहा तूने, कि होगा तो वही, जो हम चाहेंगे । और अभी तो सभासद हूं मैं..! लेकिन अगला टारगेट विधायक का है। और विधायक की

कुर्सी भी मैं जीत के ही रहूंगा..!"

मोनिका-" आपकी जीत के लिए मैं अभी से आपको मुबारकबाद देती हूं।" यह कह कर मोनिका वहां से चली गई और उसने डॉली को फोन किया-"डॉली, क्या तुझे मालूम है..? जग्गू की किसी ने जान ले ली..! रमाशंकर ने उसे रूपा का खून करने के लिए भेजा था..!"

डॉली-"मुझे सब मालूम है। लेकिन तू चिंता ना कर। मैं अपना वादा पूरा करूंगी।"

मोनिका-"थैंक्स डियर। वैसे एक खबर और है। रमाशंकर ने लालो देवी को रूपा की जान लेने को कहा है..!"

डॉली-"थैंक्स फ़ॉर दिस इन्फॉर्मेशन। लेकिन तू चिंता ना कर। ईश्वर की मर्जी के खिलाफ कोई कुछ नहीं कर सकता।"

मोनिका-"ओके, बॉय।"

डॉली-"बॉय।"

* * * * *

लालो देवी अपने ऑफिस में अपना सर पकड़ कर बैठी

थी। तभी अचानक रमाशंकर का प्रवेश हुआ।

लालोदेवी-" नमस्ते सर। कैसे आना हुआ आपका..? कोई हुकुम हो तो बताएं..!"

रमाशंकर-" मैं इसलिए यहां आया हूं कि तू कुछ ऐसा कर कि आज रूपा अपने कमरे में सुसाइड कर ले..!"

लालोदेवी-" लेकिन सर..?"

रामशंकर-" लेकिन कैसे..? यह सोचना तेरा काम है। और इन नोटों की गड्डियों को देख कर तेरी बुद्धि थोड़ा तेज काम करेगी..!"

लालोदेवी-" जी, कितने है..?"

रमाशंकर-" पूरे एक लाख है..!"

लालोदेवी-" जी आपका काम हो जाएगा। लेकिन एक पहेली मुझको समझ में नहीं आ रही है सर..?"

रमाशंकर-" कौन सी पहेली..?"

लालोदेवी-" कल जग्गू के कहने पर मैंने रूपा को टार्चर कर उसे यहां से भागने पर मजबूर कर दिया था..! वो भागी भी, लेकिन जिंदा वापस आ गई जबकि

जग्गू और उसका ड्राइवर मारा गया। यह एक अजीब सी पहेली है मेरे लिए..!"

रमाशंकर-" मतलब जब जग्गू मारा गया, उस समय वो उसके साथ थी..!"

लालोदेवी-"यस सर।"

रमाशंकर-"लेकिन उसके अंदर इतनी ताकत कहां, जो रमाशंकर और ड्राइवर को वो मार सके..?"

लालोदेवी-" यस सर। और जब वो यहां वापस लौट कर आई, उस समय बुरी तरह नशे में थी।"

रमाशंकर-" दारू तो फिर जग्गू ने ही उसको पिलाया होगा। मारने से पहले उसकी इज्जत लूटने के लिए। लेकिन जग्गू और ड्राइवर को मारा किसने, इसका पता लगाना बहुत ज़रूरी है..! वैसे रूपा वापस कैसे आई..?"

लालोदेवी-"कोई लड़की उसे अपने साथ में ले आई थी। बोल रही थी उसको रास्ते में गिरी पड़ी मिली थी। और वो लड़की रूपा को यहां पहुंचा कर तुरंन्त चली गई।"

रमाशंकर-" कहीं उस लड़की ने ही तो उन दोनों नहीं मारा..?"

लालोदेवी-" मुश्किल से सत्रह अट्ठारह साल की वो लड़की कैसे मार सकती है उन दोनों को..? ये तो असम्भव बात है..! मगर रूपा जब यहां आई तो बहुत डरी हुई थी। और तब उस लड़की ने रूपा से कहा, कि तू चिंता न कर। और जो कोई भी तेरे साथ कुछ गलत करेगा, ईश्वर उसे मौत की सजा देना..! और सर, उसके जाने के बाद रूपा के द्वारा कहे गए उसके ये शब्द अब तक मेरे दिमाग में गूंज रहे हैं..!"

रमाशंकर-" इसमें कोई नई बात नहीं है। ये बेवकूफ लड़कियां ईश्वर पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करती है। इसलिए तू उसकी चिंता ना कर। और अपने काम को अंजाम दे। रूपा जिंदा नहीं बचनी चाहिए। उसको तो मरना ही होगा। और यह काम तुझको हर हाल में करना है । या तो तू खुद उसको मार दे, या उसको इतना टॉर्चर कर, कि वह सुसाइड कर ले..! लेकिन मुझे हर हाल में उसकी मौत की खबर चाहिए..! और अगर तूने इस काम को नहीं किया, तो तेरी मौत पक्की है..! अब चलता हूँ..!" और इस धमकी को देकर सभासद रमाशंकर वहां से चले गए..!

~~~~~~~~|~~~~~~~~~~~~~~~~
 
Back
Top