(निराश्रित महिला सेवा सदन का टॉर्चर रूम, जहां रूपा के हाथ पाव को एक चारपाई में बांध के रखा गया है। तभी लालो देवी अंदर प्रवेश करती है।)
लालो देवी-" किसी ने तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं किया न..?"
रूपा-" मुझे यहां बांध के क्यों रखा है..?"
लालो देवी-" क्योंकि तूने अपने सम्मानित पति के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई है। और रमाशंकर जो हमारे क्षेत्र का सभासद भी है, वो तेरे साथ भला गलत कैसे कर सकता है..? और एक पति अपनी पत्नी के साथ बलात्कार नहीं करता है, बल्कि वह जो कुछ भी उसके साथ करता है वह उसका अधिकार होता है..! इसलिए अपना यह नाटक बंद कर और इन बड़े लोगों और पैसे वाले लोगों को ब्लैकमेल करने का धंधा छोड़ दें, और उनके खिलाफ जो रिपोर्ट लिखाई है तूने उसे वापस ले ले..!"
रूपा-" मैंने जो भी रिपोर्ट में लिखाया है, वो सारी बातें बिल्कुल सत्य है। और मुझे उस कमीने से अपनी जान का भी खतरा है। इसलिए इस रिपोर्ट को वापस नही लुंगी मैं। लेकिन आप मुझसे ऐसा करने को क्यों कह रही है..? मुझसे तो कमिश्नर साहब ने यहां मेरी सुरक्षा के लिए भेजा था। और आपने मेरे हाथ पांव क्यों बांध रखे हैं..? मैं कमिश्नर साहब से आपकी भी कंप्लेंन करूंगी..!"
लालो देवी-" मेरी कम्प्लेन करेगी..? " सटाक..! रूपा के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ लगाते हुए लालो देवी ने कहा।
लालो देवी-" अपने पति के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने वालों को बहुत कड़ी सजा देती हूं मैं। और अगर मेरे खिलाफ तूने किसी से भी कोई कंप्लेन की तो तू जिंदा नहीं बच पाएगी..!"
रूपा-" एक तरफ मेरा पति मेरी जान लेने के पीछे पड़ा है। और यहां तू भी मेरी जान लेना चाहती है..! तू तो महा नीच औरत है जो एक औरत के दर्द को भी नहीं समझती..!"
लालो देवी- सटाक..!
एक और तमाचा उसके गाल पर जड़ते हुए लालो देवी बोली-"ये निराश्रित महिला सेवा सदन सिर्फ सरकारी खर्चे से नहीं चलता। यहां की सुख सुविधाओं के लिए तुझ जैसी लड़कियो के जिस्म का सौदा भी किया जाता है। इसीलिए तुझको यहां बांध के रखा है, जिससे जो पुरुष यहां आए, उनके साथ तू कोई बदतमीजी ना कर सके..!"
रूपा-"तू इंसान है या राक्षसी.? मैं तुझ को जिंदा नहीं छोडूंगी..?"
लालो देवी-" हाथ पांव दोनों बंधे है तेरे, फिर भी तेरी हेकड़ी नहीं जा रही..!
रूपा-" मेरे हाथ पांव खोल, फिर बताती हूं तुझको..!"
लालो देवी-" अभी भेजती हूं 2 हफ्ते कट्टे नौजवानों को तेरे हाथ पाव खोलने के लिए..!"
रूपा-" आप ऐसा नहीं कर सकती हैं..! आप भी गुनहगारों से मिली हुई है। "
लालो देवी-" हां, मैं गुनाहगारों से मिली हुई हूँ..! लेकिन तू क्या कर लेगी मेरा..? और सुन कमिश्नर को भी सब मालूम है, कि कहां क्या होता है। लेकिन उसने जो फॉर्मेलिटी करना था, वो कर दिया। अब वो अपने एयर कंडीशंड रूप से निकल कर यहां आने की
तकलीफ नहीं करेगा। इसलिए तेरी इज्जत अब सिर्फ इसी शर्त पर बच सकती है , कि तू इस केस को वापस ले ले। वरना भुगतने को तैयार रह..? अब बोल..। क्या फैसला है तेरा..?"
रूपा-" मेरा फैसला वही है जो पहले था। और अब मैं तेरे खिलाफ भी रिपोर्ट लिखाऊंगी..!"
लालो देवी-" ठीक है! अब तू आधे घंटे तक इंतजार कर। उसके बाद तुझको पता लगेगा कि मैं तेरे साथ क्या करूंगी ..!" ये कहकर लालो देवी उसके कमरे में ताला लगा कर बाहर चली गई।
लालू देवी के जाने के बाद रूपा के कुछ समझ में न आया कि निराश्रित महिलाओं को आश्रय देने वाला यह कैसा सेवा सदन है..! लेकिन लालो देवी की धमकी से इस समय वो काफी परेशान थी। और उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें। उसके पास आधे घंटे का समय था, इसी बीच उसने कुछ करना था। आखिर काफी जद्दोजहद के बाद उसने अपने बंधे हाथों को खोल लिया। फिर अपने पैरों के बंधन भी खोल लिए। फिर कमरे का पूरा मुआयना करने के बाद उसे रोशनदान की जाली टूटी हुई नजर आई। यह देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई। और थोड़े प्रयास करने के बाद अंततः किसी प्रकार रोशनदान से बाहर निकल उस जेल रूपी निराश्रित महिला सेवा
सदन से वो आजाद हो गई..!
लेकिन वहां से आजाद होते ही वह जग्गू के शिकंजे में आ गई, जो पहले से ही घात लगा कर बैठा था। बगल में एक कार खड़ी थी, जिसका इंजन पहले से ही स्टार्ट था। ड्राइविंग सीट पर दीनू बैठा था। जग्गू रूपा को घसीटते हुए कार तक लाया और उसे कार के अंदर ढकेल कर उसकी बगल में बैठ गया और गाड़ी फर्राटे मार कर आगे बढ़ गई।
दीनू-"बॉस, मालीगांव कि रास्ते में नदी पड़ती है। इस समय सन्नाटा रहता है। वहीं नहडॉली में इसे फेंक देते हैं। काम खतम।"
जग्गू-" ठीक है। लेकिन इसने मरना तो है ही। तो क्यों न इसे मारने के पहले हम दोनों थोड़ा मजा ले ले..? वैसे दारू की कोई बोतल है या नहीं..?"
दीनू-"है..!"
जग्गू-" तो ठीक है। ला, पहले मैं दो घूंट चढ़ा लेता हूं। फिर तू भी चढ़ा लेना। और गाड़ी को नहडॉली के पहले बाई तरफ टूटी हवेली में ले ले। वह स्थान सही रहेगा। जब तक मैं इसके साथ काम करूं, तब तक तू गाड़ी को रोककर पहिए पर जैक लगा देना, जिससे इत्तेफाक से अगर कोई राहगीर इधर आ भी जाए, तो
यही सोचे कि तू कार का टायर बदल रहा है।"
दीनू-"ठीक है।"
( दीनू ने नहडॉली के ठीक पहले बाई तरफ टूटी हवेली पर गाड़ी रोक दी और जग्गू रूपा को घसीटते हुए हवेली के पीछे ले गया।)
* * * * *
डॉली खाना खाकर जैसे ही आराम करने को बैठी, भूत भाई उसके सामने आ गए।
डॉली-" क्या हुआ भूत भाई..? कोई विशेष बात..?"
भूत-"हां, तू जल्दी से अपनी स्कूटी निकाल। हमें अभी टूटी हवेली चलना है। वहां रूपा के साथ कुछ गलत होने वाला है..!"
डॉली-" ठीक है अभी चलती हूं।"
डॉली ने मां से कहा, मैं एक जरूरी काम से अपनी एक सहेली के यहां जा रही हूं। एक-दो घंटे में आ जाऊंगी। और यह कहकर उसने अपनी गाड़ी निकाली। भूत भाई जल्दी से उसके शरीर में प्रविष्ट हो गए। और डॉली अपनी गाड़ी को भगाती हुई टूटी हवेली पर पहुंच गई..!
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टूटी हवेली के पीछे सन्नाटे में जग्गू रूपा की अस्मत से खेलना चाहता था।उसने बोतल की बची शराब को रूपा के मुंह में उड़ेल दी। शराब की सबसे बड़ी खासियत यह होती है, कि ये इंसान के दिमाग को अपने कंट्रोल में ले लेती है। इंसान जानता है कि उसके साथ गलत हो रहा है, लेकिन उसमें विरोध की शक्ति क्षीण हो जाती है, और जब तक वह अपने होश में आता है, तब तक सब कुछ बर्बाद हो चुका होता है।
रूपा मजबूर थी.. विवश थी, लेकिन उसका दिमाग बहुत तेज़ी से काम कर रहा था। और वह मौके की तलाश में थी कि जग्गू पर प्रहार कर उसकी गिरफ्त से अपने को आजाद कर सके। लेकिन जैसे ही जग्गू ने उसके मुंह में शराब की बोतल उड़ेली, उसका दिमाग चक्कर खाने लगा और वो अपना होश खो बैठी। वो चाहती थी जग्गू के गाल पर एक करारा तमाचा ज़ड़ना, लेकिन उसके हाथ उठ नहीं रहे थे। वो चाहती थी जग्गू के मुंह को नोच लेना, लेकिन उसके हाथ उसका साथ नहीं दे रहे थे। वो चाह रही थी जग्गू के नाजुक अंगों पर
प्रहार करना, लेकिन शराब के नशे में उसका कोई भी अंग सही तरह से काम नहीं कर रहा था और जग्गू की बाहों में जकड़ी हुई किसी बेबस मछली की भांति वो तड़प रही थी..!
लेकिन इसके पहले कि जग्गू उसको धरती पर पटक कर उसके साथ कुछ गलत कर पाता, उसके सामने डॉली आ गई..!
वासना की आग में ज़ल रहे जग्गू ने जब अपने सामने एक बहुत ही खूबसूरत अट्ठारह साल की लड़की को देखा, तो उसने रूपा को छोड़ दिया और डॉली की तरफ बढ़ते हुए बोला-" कमाल की खूबसूरत लड़की है तू..! उम्र भी 18 से ज्यादा नहीं होगी..! लेकिन यहां कैसे आ गई..!"
डॉली चिल्ला कर बोली-"रूपा, तू भाग यहां से..! इस कमीने से मैं निपटती हूँ..!"
जग्गू-"हाहाहाहा..! शायद तुझे यह नहीं मालूम कि इसने इतनी पी रखी है कि यह भाग ही नहीं सकती..! और तुझ में इतना दम कहा कि तू जग्गू से निपटेगी..! लेकिन जब इतने करीब आ गई है मेरे तो थोड़ा और करीब आ जा। क्योंकि अब पहले तुझसे मैं अपनी प्यास बुझाऊंगा, फिर तेरी रूपा से निपटुंगा..! वैसे तू है कौन और तू रूपा की क्या लगती है..?"
डॉली-" मैं तो रूपा की छोटी बहन हूँ.! लेकिन तू कौन है इसका और तेरा इसके साथ क्या संबंध है..?"
जग्गू-"लगता है कम सुनती है तू..! अभी-अभी तुझको बताया तो कि मेरा नाम जग्गू है। और मेरा इससे वही रिश्ता है, जो एक वैश्या का रिश्ता अपने ग्राहक से होता है..!"
डॉली-"ओ मॉय गॉड। लेकिन क्या कपड़े पहने पहने ही सारे काम करेगा..? क्या अपनी नंगी बॉडी मेरे को नहीं दिखाएगा..?"
जग्गू-"वाह..! क्या मस्त लड़की है तू ..! और सच तो यह है कि जिंदगी में पहली लड़की ऐसी मिली है मेरे को, जो मेरी बॉडी देखना चाहती है..! इसलिए तेरी इस इच्छा को तो मैं जरूर पूरी करूंगा ।"
(और जग्गू ने यह कहते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए..! और डॉली की ओर आगे बढ़ते हुए बोला)-"ये ले और जी भर कर देख मेरी इस बॉडी को..! इतनी मस्त बॉडी आज तक जिंदगी में तूने कभी ना देखी होगी..! और मेरी इस बॉडी को देखकर अच्छों अच्छों के पसीने छूट जाते हैं ..!"
(ये कहते हुए वो डॉली के बिल्कुल नज़दीक आ गया, और जैसे ही उसने डॉली के कंधे पर हाथ रखा, उसके
मुंह पर एक करारा तमाचा लगाते हुए डॉली बोली)- ये पहला तमाचा मेरी बहन को वेश्या बोलने का था..!"
फिर दूसरा तमाचा जड़ते हुए बोली-"और ये दूसरा तमाचा मेरे कंधे पर हाथ धरने का..!"
डॉली के हाथों दो तमाचा खाने के बाद जग्गू के होश फाख्ता हो गए, क्योंकि तमाचा इतना जोरदार था, कि उसका दिमाग भन्ना गया..! फिर थोड़ा होश में आते ही उसने रूपा को अपने कस्टडी में लेकर उस पर बंदूक तानते हुए बोला-"अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो इसकी जान ले लूंगा..!"
रूपा ने फौरन अपने कैमरे से उसकी नङ्ग धडंग फोटो खींच ली। तभी भूत भाई ने कहा-"तू चिंता न कर। और आगे बढ़। मैं अभी तेरे जिस्म से निकल कर इसकी बंदूक को फूंक मार कर उड़ा देता हूं। और फिर तुरंत तेरे जिस्म में वापस आ जाऊंगा।"
डॉली बोली-"ओके..!"
और फिर अगले पल ही एक जादू हुआ। जग्गू की बंदूक अचानक उसके हाथ छूट कर ज़मीन पर गिर गई। और जग्गू ने जैसे ही दुबारा बंदूक उठाने की कोशिश की, डॉली ने तीसरा चाटा उसके जबड़े पर मारा, जिससे उसके दो दांत टूट कर बाहर आ गए और
उसके मुंह से रक्त निकलने लगा..!
फिर अच्छे से उसकी धुनाई कर डॉली ने रुमाल से उसकी बंदूक उठाया और रूपा के साथ टेंपो पर आई, जहां दीनू अपनी गाड़ी में ज़ैक लगाए जग्गू के आने का इंतजार कर रहा था। दीनू ने डॉली और रूपा को हैरत से देखा और इसके पहले कि वो कुछ बोलता, डॉली ने उसके सीने पर बंदूक चला दी। यह सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि दीनू कुछ समझ ना सका और वहीं पर ढेर हो गया..!
डॉली ने बंदूक वहीं फेंक दी। रूपा को अपनी स्कूटी पर बैठाया और रास्ते में रूपा की सारी कहानी संक्षेप में सुनी।
लड़खड़ाती जुबान से उसकी सारी कहानी सुनकर डॉली ने कहा-" तू चिंता ना कर। ये निराश्रित महिला सेवा सदन वाले अब तेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे। और वहां किसी के पूछने पर भी सिर्फ एक बात बताना, कि तू यहां से भागी और कुछ गुंडों ने तुझे पकड़ लिया। आगे क्या हुआ तुझे कुछ भी याद नहीं है। और तू डरना मत। मैं तेरे आस-पास ही रहूंगी और जरूरत पड़ने पर तेरी मदद करने ज़रूर जाऊंगी । लेकिन इस बात को तू राज़ रखना और मेरा नाम किसी को न बताना, कि मैंने तेरे को बचाया है।"
रूपा ने कहा-"ठीक है! मैं तेरे बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगी!"
डॉली को बीस मिनट लगे निराश्रित महिला सेवा सदन के कार्यालय पहुंचने में..!
लालू देवी ने जब रूपा को एक लड़की के साथ अपने कार्यालय में आते हुए देखा, तो उसकी आंखें फटी रह गई..! लेकिन उसने डॉली से बहुत ही पोलाइटली कहा-" थैंक्स जो आप इसे वापस यहां ले आई। ये औरत आज ही हमारे यहां आई, और कमरे के रोशनदान से भाग गई थी..! मैं बहुत परेशान थी इसके भागने से..! शायद दिमाग से विक्षिप्त है यह। लेकिन आप चिंता ना करें। हमारे यहां ऐसे मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। लेकिन यह आपको मिली कहा ..?"
डॉली-" मैं इधर से ही जा रही थी, कि ये औरत रास्ते में गिरी पड़ी मिली मुझे। इसने मेरे से कहा कि किसी ने इसकी इज्जत लूटने की कोशिश की। फिर इसने यहां का नाम बताया, और कहा कि वो यहां से परेशान होकर भागी थी, लेकिन यहां से भागते ही उसे गुंडों ने पकड़ लिया। इसने यह भी कहा कि इसे यहां से भागना नही चाहिए था। इसलिए मैंने इसको यहां पहुंचाया। और मैडम मैं किसी केस में उलझना नहीं चाहती। क्योकि मुझे तुरंत घर जाना है। मेरी मम्मी मेरा
इंतजार कर रही होगी। मेरा आपसे सिर्फ एक अनुरोध है कि मेरा नाम इस केस में ना आए। क्योंकि मैंने सिर्फ मानवीयता के नाते इसकी मदद की है।"
"ओके, थैंक्स..! तुम्हारा नाम इस केस में कहीं नहीं आएगा।" लालो देवी ने कहा।
"थैंक्स मैडम।" डॉली ने कहा।
वैसे डॉली की इच्छा तो यही थी, कि इस लालो देवी का भी अभी बाजा बजा दे, लेकिन इस समय उसको अपने घर जाने की जल्दी थी। उसने सोचा, इसको इसके किए की सजा बाद में दूंगी। इसकी सारी कारस्तानी जानने के बाद। फिर भी अप्रत्यक्ष रूप से लालो देवी को धमकाते हुए उसने रूपा से कहा -" तू चिंता ना कर। और डर मत। तेरे साथ जो कोई भी गलत करेगा, ईश्वर उसको मौत की सजा देगा।" यह कह कर डॉली अपने घर वापस आ गई।
डॉली के जाने के बाद लालो देवी ने रूपा से कहा-" यहां से भागने वालों का क्या अंजाम होता है, देखा ना तूने.? क्या हुआ तेरे साथ..? आखिर लूट-पिट करा आ गई न वापस..? और आगे से अगर फिर यहां से भागने की कोशिश की, तो मैं तेरे को ऐसी सजा दूंगी, कि मेरे नाम से भी तेरी रूह काँपेगी।"
फिर लालो देवी ने एक बेल बजाया। बेल सुनते ही एक औरत अंदर आई। लालो देवी ने उससे कहा-" इसे अंधेरी कोठरी में ले जा कर बंद कर दो। क्योंकि यहां से भागने की कम से कम नहीं सज़ा है..!"
वो औरत रूपा को अपने साथ ले गई और उसको एक अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया।
लालो देवी की आंखों में चमक आ गई और उसने खुद से कहा-" कल सुबह तक इसके होश ठिकाने आ जाएंगे। फिर आसानी से इसका सौदा कर सकुंगी। वैसे भी शादीशुदा औरत कब तक अपने पति के बिना रह सकती है..! और पति का साथ अगर छूट जाए, तो किसी का साथ तो पकड़ना ही नहीं पड़ता है..! लेकिन वो कौन होगा, इसका फैसला मैं करूंगी ..सिर्फ मैं..!"
तभी लालो देवी के फोन की घंटी बज उठी। फोन पर किसी ने उसे बताया, कि जग्गू और उसका ड्राइवर मारा गया..!
इस खबर को सुनते ही लालो देवी का होश उड़ गया..! तभी डॉली के शब्द उसके कानों में गूंजने लगे, जो उसने रूपा से कहा था-"तू चिंता ना कर और डर मत..! तेरे साथ जो कोई भी गलत करेगा, ईश्वर उसको मौत की सजा देगा..!"
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