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Horrar भूतों का न्याय

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Guest
भूतों का न्याय

चार-पांच लोग सफेद कपड़ों में लिपटे हैं। उनके मुंह पर नकाब है। एक बड़ी मेज़ के चारों और कुर्सियां है। इन कुर्सियों पर सभी बैठे हैं। ये सभी भूत हैं।

भूत नम्बर एक- बहुत बुरा हुआ। हमारे किसी भाई ने एक मासूम लड़की को डरा दिया। और उसने अपने भाई और मां की हत्या कर दी। अगर हमारे भाई ने उसको ना डराया होता, उसे चिंता मुक्त होकर अपनी पढ़ाई करने दिया होता, तो आज उसका भाई और उसकी मां जिंदा होती। और उसके पिता की आंखें आंसुओं में डूबी ना होती।

भूत नम्बर तीन- बिल्कुल सही कहा। अगर हमें अपनी भूत योनि से मुक्ति चाहिए, तो हमें अपनी छवि को सुधारनी होगी। और हमारे प्रति जो दहशत की भावना है लोगों में, उसे दूर करना होगा। हमें कुछ अच्छे काम करने होंगे। हमें लोगों की मदद करनी होगी। हमारे पास इतनी ताकत है, कि हम कुछ भी कर सकते हैं। और कहीं भी आ जा सकते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम अपनी शक्ति का दुरुपयोग करें

भूत नम्बर चार-हां। हमें अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमें मासूम बच्चों को डराना नहीं चाहिए। उन्हें बुरे बुरे सपने नहीं दिखाना चाहिए। अगर डराना हीं है, तो हमें अपराधियों को..माफियाओं को..डराना चाहिए..!

भूत नम्बर पांच- आप सब भाइयों की बात बिल्कुल सही है। यह माना कि आज हम धरती पर नहीं है। हमारी मृत्यु हो चुकी है। हम भूत बन चुके हैं। लेकिन इस तरह भूत बनकर रहना..यह भी कोई जिंदगी है..? हम सब धरती के सताए हुए लोग हैं। धरती पर हमारी इच्छाएं अधूरी रह गई और मृत्यु ने हमें दबोच लिया। परिणामस्वरूप हम सभी भूत बन गए। लेकिन इस भूत योनि से मुक्ति हमें तभी मिलेगी, जब हम कोई अच्छा काम करेंगे। लोग हमारी तारीफ करेंगे। लोग हमारी मुक्ति के लिए दुआ करेंगे। लेकिन जो काम हमने आज किया, उससे हमें और भी बद्ददुआएं मिलेंगी। और ये बद्दुआएं ही हमें भूत योनि से मुक्ति दिलाने में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए हम सबको मिलकर कुछ करना होगा।

भूत नम्बर एक- लेकिन क्या करना होगा..?

भूत नम्बर दो-पृथ्वी पर जरूरतमंद लोगों की मदद करनी होगी।

भूत नम्बर तीन- मगर हम जरूरतमंद लोगों की मदद कैसे कर सकते हैं..? उनकी गरीबी कैसे दूर कर सकते हैं..?

भूत नम्बर चार- सही बात है गरीबों की गरीबी तो हम दूर नहीं कर पाएंगे क्योंकि हमारे पास नोट कहां है..?

भूत नम्बर पांच- कोई और उपाय सोचिए। क्योंकि यह फैसला तो पक्का है कि हमें गरीबों की मदद करना है जरूरतमंदों की मदद करना है परेशान लोगों की मदद करना है तभी पृथ्वी पर हमारी छवि सुधरेगी। तभी हमको लोगों की दुआएं मिलेंगी और तभी हमें अपनी भूत योनि से मुक्ति मिलेगी।

भूत नम्बर एक- मेरे दिमाग में अभी-अभी एक आइडिया आया है।

बाकी के चारो भूत एक साथ- जल्दी बोलो? क्या आईडिया है..?

भूत नम्बर एक- आजकल पृथ्वी पर मासूम लड़कियों के साथ रेप की घटनाएं बहुत हो रही है। विशेष रूप से भारत में। और रेप की घटनाएं होने के बाद भी रेपिस्ट खुलेआम घूमते हैं। और बेचारी लड़कियों की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो जाती है। एक तो ये लड़कियां बेचारी पहले से ही सताई होती है। उस पर से उन्हें ना घरवालों का सपोर्ट मिलता है और ना पुलिस का और न कानून का। इसलिए हमें इन लड़कियों की मदद करनी चाहिए और इनकी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इन्हें मान और सम्मान से जीने का रास्ता दिखाना चाहिए।

चारो भूत( मेज़ थपथपा कर)- हां, यह बेस्ट आईडिया है।

दूसरा भूत-सही बात है। हमें पृथ्वी पर लोग बुरा मानते हैं। हम से डरते हैं। हमारा नाम लेते ही थरथर कांपने लगते हैं। हमें अपनी इस छवि को बदलना होगा। हमें अच्छा काम करना होगा। रेपिस्टों के हाथों सताई हुई लड़कियों की मदद कर उन्हें मान सम्मान दिलाना होगा। और रेपिस्टों को सजा देनी होगी। उनके हौसलों को पस्त करना होगा, जिससे उनके हाथों सताई लड़कियों को न्याय मिल सके और वो भी समाज मे मान सम्मान के साथ जी सके।

तीसरा भूत- लेकिन इस कार्य को किस तरह किया जाएगा..?

चौथा भूत- हमें इसके लिए पृथ्वी पर कुछ अच्छे लोगों को तलाशना होगा। और उनके जिस्म में प्रवेश कर उन्हें शक्तिमान बनाना होगा, और उनके हाथों इन रेपिस्टों को सज़ा देना होगा। जब कई लोगों को इस तरह की सजा मिलेगी, तब उनके अंदर भय उत्पन्न होगा, और फिर लड़कियों के साथ कुछ गलत करने से पहले हजार बार वो सोचेंगे।

पांचवा भूत- बिल्कुल सही बात है। क्योंकि जब हमारी मदद से रेपिस्टों को सजा मिलेगी और उनके द्वारा सताई लड़कियों को इंसाफ मिलेगा, तो हमारे प्रति लोगों की छवि भी सुधरेगी। उनमें हमारे प्रति जो डर है, वो कम होगा। हमें उनकी दुआएं मिलेंगी और तब हम भी अपने इस प्रेत योनि से मुक्ति पा सकेंगे। तो दोस्तों यह फाइनल हुआ, कि हम सभी अपने अपने क्षेत्रों में अच्छे लोगों को तलाशेंगे औरउनकी आत्मा में प्रवेश कर जनता का भला करेंगे जिससे हमारी बुरी छवि में सुधार हो और हमारी अच्छाई का गुणगान हो। और यही हमारा टर्निंग प्वाइंट है, कि हम अब कभी किसी के साथ बुरा नहीं करेंगे। अच्छा काम करेंगे। अच्छे बनेंगे। और अपनी छवि को सुधारेंगे..!

पहला भूत- वैसे एक और सुझाव है दोस्तों। हमें केवल रेपिस्टों को सजा नहीं दिलाना है, बल्कि जो लड़कियों को तेजाब से घायल करते हैं , उन्हें भी सजा देना है, जो मां बाप अपने बहुओं को दहेज के लिए जला देते हैं, उनको भी सजा देना होगा। क्योंकिहमारे इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह है, इस समाज में सताई जाने वाली हर लड़की को हमें न्याय दिलाना है। और दोषियों को सजा देनी है और उनके मन में भय उत्पन्न करना है..!

दूसरा भूत- बिल्कुल सही बात

तीसरा भूत- हम भी सहमत हैं

चौथा भूत-यस, यही उचित है।

पांचवा भूत- हम सभी इस प्रस्ताव से सहमत हैं। सो ईट्स फाइनल। अब सब लोग अपने अपने क्षेत्र में अपने अपने काम में लग जाए। और अति आवश्यक होने पर हम सब फिर इकट्ठा होंगे अपनी दूसरी सभा के लिए।

और इसके साथ ही भूतों की यह सभा समाप्त हो गई।~~~~~~~~~~~~~~
 
कुसुम(डॉली की मॉम)-डॉली कितनी देर हो गई! अभी तक उठी नहीं..?

डॉली-मॉम, छुट्टियां चल रही है। स्कूल बंद है। थोड़ा और सो लेने दो ना..!

कुसुम- ठीक है सोती रह। लेकिन अगर पकौड़िया खत्म हो जाएगी तो बाद में ना कहना कि मेरे लिए नहीं बची..!

डॉली- तुम हमेशा मुझे ये कहकर फंसा देती हो कि पकौड़ियाँ या खत्म हो जाएंगी..क्योंकि पकौड़ियों का नाम सुनकर तो अब उठना ही पड़ेगा..!

और डॉली उठकर जल्दी-जल्दी ब्रश करती है और फ्रेश होकर डायनिंग टेबल पर आ जाती है।

डॉली- मां जल्दी पकौड़ियाँ लाओ। बहुत तेज भूख लगी है.!

मां- अभी लाती हूँ। थोड़ा इंतजार कर..!

डॉली- मतलब जब मैं सो रही थी, तो तेरे कहने के मुताबिक पकौड़ियाँ बन चुकी थी, जबकि पकौड़ियाँ अभी तक बनी ही नहीं है..!

मां- तुझे उठाने के लिए ये सारे पापड़ बेलने पड़ते हैं।

डॉली- तुम बहुत वैसी हो माँ..!

और गुस्सा होकर अखबार पढ़ने लगती है।

डॉली- उफ्फ..! कितनी वहशियाना खबर है..! एक आठ साल की बच्ची के संग रेप..! कातिल का पता नहीं..! तलाश जारी..!

इस खबर को पढ़ते ही दुख से उसकी आंखें बंद हो जाती है। तभी उसे एक रोता हुआ भूत दिखता है..!

डॉली- तुम कौन हो..? और यहां क्यों आए हो..? और रो क्यों रहे हो..?

भूत- मैं भूत हूँ।

डॉली- और तुम्हारे साथ यह छोटी लड़की कौन है.?

भूत- ये मासूम सोना है, जिसके साथ कल एक दरिंदे ने रेप किया है। क्या तूने अभी अभी अखबार में पढ़ा नहीं..?

डॉली- ओह। कितनी प्यारी बच्ची है..? लेकिन इन दरिंदों ने इस मासूम सी बच्ची के साथ ऐसा गलत काम क्यों किया..?

भूत- इसलिए, क्योंकि वो पागल है.. वहशी है..दरिंदा हैं..!

डॉली- इन जालिमो को सजा मिलनी चाहिए

भूत- हाँ। और वो सज़ा तुम दोगी उसे।

डॉली- म..म..मैं..? म..म..म मैं कैसे सज़ा दी सकती हूं..?

भूत- तुमको इन्हें सजा देना होगा। और इस काम को करने के लिए हम तुम्हें अपनी ताकत देंगे और तुम्हारी मदद भी करेंगे। यह देखो इस पते को नोट करो और इस प्रताप को सजा-ए-मौत दो..!

डॉली ने देखा अंतरिक्ष में से कुछ शब्द उड़ते हुए उसकी आंखों के सामने आ गए और आपस में जुड़ गए और उसे एक पता लिखा हुआ नजर आया।

प्रताप सिंह 745, फिरंगी रोड..!

भूत- तुम चाय नाश्ता करके इस पते पर जाओ और इस आदमी को खत्म कर दो।

डॉली- लेकिन मैं किसी का खून नहीं कर सकती।

भूत- अगर तुमने प्रताप सिंह का खून नहीं किया तो एक दिन यही प्रताप सिंह तुम्हारे अस्मत से भी खेलेगा..! तुम्हारे साथ भी दरिंदगी करेगा। तब उस समय तुम क्या करोगी। उस पर दया करोगी या उसे मार दोगी..?

डॉली- मार दूंगी उस प्रताप को
 
भूत- नहीं, उस समय तुम उसे नहीं मार पाओगी, क्योंकि वो तुम पर अचानक हमला करेगा। और उस समय खुद को बचाने के लिए तुम्हारे पास कोई साधन भी न होगा।

डॉली- लेकिन मैं जेल नहीं जाना चाहती।

भूत- तुम उसकी चिंता ना करो। अभी इस बच्ची सोना की रूह तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर जाएगी। और वही प्रताप सिंह की हत्या करेगी। तुम सिर्फ माध्यम बनोगी। और तुम्हारे खिलाफ पुलिस को कोई सबूत नहीं मिलेगा।

तुम्हें इस मासूम सोना की मदद करनी है। उसके हत्यारों को खत्म करना है। क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो उसका हौसला बढ़ जाएगा और फिर दूसरी मासूम बच्चियों के संग भी रेप करेगा वो और उनकी हत्या करेगा।

डॉली- नहीं वो प्रताप ऐसा नहीं कर सकता।

भूत- तो ठीक है। अब मैं कल सुबह इसी समय तुझसे मिलूंगा। तब तक के लिए बाय।

डॉली- बाय

और उसके तुरंत बाद डॉली को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उस मासूम बच्ची की आत्मा उसके जिस्म में प्रवेश कर गई है।

जब तक डॉली की भूत से बात होती रही, मम्मी ने पकौड़ियाँ और चाय बना लिया।

डॉली ने पकौड़ी खाया चाय पिया और मार्केट जाने का बहाना बनाकर घर से निकल गई।

मासूम सोना की आत्मा ने उसको प्रताप सिंह के घर पहुंचा दिया। ये सब कुछ बड़ा अजीबोगरीब था। क्योंकि डॉली जैसे ही अपनी आंखें बंद करती, उसकी आंखों के सामने चित्र आ जाता कि उसे क्या करना है, किधर जाना है और कैसे जाना है..!

जिस समय डॉली प्रताप सिंह के यहां पहुंची और उसने कॉल बेल बजाई, प्रताप सिंह ही बाहर आया और सुबह सुबह अपने सामने एक खूबसूरत लड़की को देखकर आश्चर्यचकित रह गया।

प्रताप सिंह- कौन है तू..?

डॉली- मैं तेरी मौत हूं।

प्रताप सिंह- हा हा हा हा तू मेरी मौत है। लेकिन पहले यह बता कि तू वास्तव में है कौन..? क्योंकि मैं तो आज पहली बार तुझको देख रहा हूं। और तू मेरी जान क्यों लेना चाहती है..?

डॉली- क्योंकि तूने मेरी 8 वर्ष की मासूम बहन के साथ रेप किया और उसकी जान ले ली..!

प्रताप सिंह- हा हा हा हा। वैसे सच कह रहा हूं डियर, कि अगर तू पहले मिली होती तो, उसके संग रेप ना करता बल्कि तेरे संग रेप करता। लेकिन कोई बात नहीं। अंदर आ जा।

डॉली अंदर गई और जैसे ही प्रताप सिंह ने उसके जिस्म से उसके दुपट्टे को हटाना चाहा, डॉली के अंदर असीम ताकत आ गई और उसने प्रताप सिंह का गला दबाकर उसे मार डाला। फिर डॉली ने एक कागज में लिखा-" मैं सोना की रूह हूं। इस प्रताप सिंह ने मेरे संग रेप करके मुझे मार दिया था। इसलिए इसे मौत की सजा मिलनी चाहिए थी। और मैंने इसे मार दिया।

एक बात और है। अब कोई भी व्यक्ति अगर किसी लड़की के संग रेप करेगा, तो उसका यही हश्र होगा। हम दुखी आत्माओं की मीटिंग में यह विधेयक पास हुआ है।

डॉली ने किस तरह ये सारी बातें लिखी, उसे खुद नहीं पता। और उसने जो कुछ भी लिखा, वो उसकी हैंडराइटिंग में नहीं था।

डॉली इस कागज को उसके निर्जीव बदन पर रखकर वापस अपने घर आ गई।
 
घर आने पर डॉली ने पल भर के लिए जैसे ही अपनी आंखें बंद की, उसको आंखों के सामने लिखा नजर आया-"थैंक्स दीदी।"

फिर उसने महसूस किया कि सोना की आत्मा उसके

जिस्म से निकल चुकी थी।

~~~~~~~~~~~~~

डॉली आज सुबह समय से उठ गई थी। क्योंकि उसे मालूम था कि भूत भाई उससे मिलने आएंगे। और उसे अखबार में खबर भी पढ़नी थी, प्रताप सिंह के मर्डर केस के बारे में..!

कुसुम- अरे बेटी आज तो तू समय से उठ गई। लगता है आज सूरज पश्चिम से निकला है।

डॉली- माँ, सूरज तो पूरब में ही निकला है, लेकिन मैं ही रोज पश्चिम दिशा में उठने को सोचती थी। मगर आज पूरब दिशा में ही उठ गई, क्योंकि पूरब दिशा में उठना शुभ होता है, कुछ इसी तरह की बात आज सपने में मैंने यह देखा।

कुसुम- ईश्वर करे, तुझको रोज ऐसे ही सपने आए। और तू समय से उठ जाया करे।

डॉली- अब मैं रोज समय से उठ जाया करूंगी। क्योंकि

मुझे सपने में भगवान ने यह आदेश दिया है।

कुसुम- अरे वाह..! अब तो तेरे सपने में भगवान भी आने लगे..!

डॉली- हाँ, क्योंकि भगवान ने कुछ अच्छे काम करने के लिए मेरे को सिलेक्ट किया है..! तभी तो आज इतनी जल्दी उठ गई।

कुसुम- भगवान का लाख-लाख शुक्रिया। मैं अभी तेरे लिए चाय बना कर लाती हूं। तब तक तू हाथ मुंह धो ले और मंजन कर ले।

डॉली- ओके मम्मी।

प्रिया तुरंत हाथ मुँह धोकर और मंजन करके अखबार लेकर बैठ गई।

अखबार में मुख्य पृष्ठ पर यह खबर छपी थी-मासूम लड़की सोना के कातिल का कत्ल..! हैरतअंगेज कर देने वाली बात यह है, कि पुलिस कातिल को नहीं ढूंढ सकी, लेकिन मासूम लड़की सोना की रूह ने ही ही कातिल की तलाश की और उसकी जान ले ली..!

मासूम सोना की जान प्रताप सिंह नाम के एक व्यक्ति ने ली थी, जिस की लाश के पोस्टमार्टम से सिद्ध हो

गया, कि उसी ने सोना के संग रेप करने के बाद उसकी हत्या की थी।

चौंकाने वाली बात यह भी है, कि मरने वाले की लाश पर पुलिस को एक खत भी मिला है, जिसमें लिखा है कि मैं सोना की रूह हूं। इस प्रताप सिंह ने हीं मेरा रेप करके मेरी जान ली थी। इसीलिए मैंने इसे मार डाला। और आगे भी अगर किसी ने किसी लड़की के संग रेप किया और उसकी जान ली तो उसका भी यही हश्र होगा।

मरने वाली लड़की सोना की हैंडराइटिंग इस पत्र की हैंडराइटिंग से बिल्कुल मिलती है। पुलिस आश्चर्य में है, कि सोना की रूह कैसे आ सकती है, और वह कैसे किसी की जान ले सकती है..? मगर अब तक मिले सारे सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं, कि सोना की रूह ने ही प्रताप सिंह की हत्या की है..!

प्रिया ने इस खबर को पढ़ा तो उसे बड़ा मजा आया। वो खुद की ही तारीफ करने लगी।

डॉली(खुद से)- ग़ज़ब यार..! तूने तो कमाल कर दिया..! मासूम सोना कि हत्यारे को उसके किए कि तुरंत सजा दे दी। नो वकील.. नो दलील.. नो कानून..नो जिरह..सीधे फैसला..मौत की सज़ा..और कहानी खत्म..!

और फिर मुस्कुराते हुए उसने अपनी आंखें मूंद ली।

भूत- नो..नो..नो.. अभी कहानी खत्म नहीं हुई है। अभी तो कहानी की शुरुआत हुई है..!

डॉली- भूत भाई नमस्ते

भूत- नमस्ते। आज फिर तेरे शहर में एक दरिंदे ने एक लड़की से रेप किया है। वह लड़की जिंदा तो है, लेकिन बहुत बुरी स्थिति में है। और जिस दरिंदे ने उस लड़की से रेप किया है, वो खुल्लम खुल्ला घूम रहा है, और लड़की को धमका रहा है, कि अगर उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखाई, तो उसकी जान ले लेगा। लड़की अपने मां बाप के साथ पुलिस में रिपोर्ट लिखाने गई थी, लेकिन पुलिस वालों ने उसे भगा दिया, क्योंकि वह भी गुंडे से मिली हुई है..! वह तो मीडिया वालों को भनक लग गई, इसलिए अखबार में छप गया। और पुलिस को रिपोर्ट भी दर्ज करनी पड़ी। वरना शायद यह लड़की सुसाइड कर लेती और अपराधी किसी और लड़की को दबोच रहा होता..!

डॉली- यह कौन लड़की है और अपराधी का नाम क्या है..?

भूत- इसी अखबार के पेज नम्बर दो पर ये खबर छपी है। तू पूरी खबर पढ़ ले और चाय नाश्ता कर ले उसके

बाद में आता हूं।

डॉली- ओके भूत भाई।
 
प्रिया ने अखबार का पन्ना पलटा तो मोटे मोटे अक्षरों में छपा था- एक 14 साल की नाबालिग लड़की से दबंग माफिया "विजय" ने रेप किया। रिपोर्ट लिखाने पर उसको जान से मारने की धमकी दी। लड़की और उसका पूरा परिवार दहशत में है। पुलिस रिपोर्ट नहीं लिख रही थी। मगर मीडिया के दबाव में पुलिस की रिपोर्ट लिखना पड़ा। अब लड़की को लगातार धमकी दी जा रही है, कि अगर उसने रिपोर्ट वापस न ली, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा..!

डॉली(पूरी खबर पढ़ने के बाद)- ओह.! यह तो गुंडागर्दी की हद हो गई। बेचारी लड़की से रेप किया ..उसकी इज्जत लूटी.. और अब उसी को परेशान किया जा रहा है। और पुलिस भी दबंगो के पक्ष में है। इस विजय को भी सजा देना बहुत जरूरी है।

डॉली ने यह फैसला लिया और जैसे ही अपनी आंखें बंद की, भूत भाई के दर्शन हो गए।

भूत- पढ़ लिया ना तूने पूरी कहानी..?

डॉली- हां भूत भाई। यह तो बहुत गलत हुआ है। मगर

पेपर में लड़की का नाम तो छपा ही नहीं है..!

भूत- लड़की का नाम भोली है। बहुत मासूम और सीधी-सादी लड़की है। और बहुत बुरी स्थिति में है। एक तरफ उसको रेपिस्ट धमका रहा है। और दूसरी तरफ उसके घर वाले भी उसको भला बुरा बोल रहे हैं। उसकी मां ने तो यहां तक कह दिया, कि कलमुही तू पैदा होने से पहले ही मर क्यों नहीं गई..? और पुलिस वाले भी केस को वापस लेने पर दबाव डाल रहे हैं। लड़की की जांच करने की बात हो रही है। और अभी आगे भी बहुत कुछ गलत होना है उसके साथ..!

डॉली- भूत भाई इस लड़की की मदद करो। और विजय को भी सजा दिलवाओ।

भूत- हां विजय को भी सजा जरूर मिलेगी। और चूंकि भोली हमारी भूतों की दुनिया में नहीं है, और वह जिंदा है, इसलिए इस बार मैं खुद तेरे अंदर प्रवेश करूँगा, और इस विजय को उसके किए की सजा दूंगा। उसका पता है-विजय, 45, एम जी मार्ग। अब तू फटाफट नाश्ता पानी करके फिट हो जा। फिर दोनों चलते हैं विजय की डुगडुगी बजाने..!

डॉली- दोनों विजय से मिलते चलते हैं..? किस तरह..?

भूत- बताया तो कि अभी मैं तेरे अंदर प्रवेश करता हूं। तो हम दो हुए कि नहीं।

डॉली- ओके भूत भाई। आजा मेरे अंदर।

भूत- आ गया।

और डॉली ने महसूस किया, कि किसी आत्मा का उसके अंदर प्रवेश हो गया है।

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चाय नाश्ता करने के बाद डॉली फिर घर से यह कह कर निकल गई कि वो अपनी सहेली के यहां जा रही है।

भूत- आज का मामला थोड़ा टेढ़ा है। क्योंकि यह विजय दबंग है। और इससे थोड़ा संभल कर रहना होगा तुझे..!

डॉली- मगर जब तू मेरे साथ है तो मुझे चिंता किस बात की..!"

भूत- मैं तो तेरे साथ हूं, लेकिन मैं तेरे अंदर हूं। और तेरी सुरक्षा की पूरी गारंटी है। लेकिन अगरतूने होशियारी से काम न लिया या गुस्से में आकर कोई गलती कर दी तूने, तो बदनामी तो तेरी ही होगी ना..? इसलिए बहुत सोच समझ के और होशियारी से काम करना होगा तुझे। और इस बात की पूरी कोशिश करनी होगी तुझे कि ना तो तुम मीडिया की नजर में आये और ना पुलिस की नजर में। इस बात का तुझे पूरा ध्यान रखना होगा। बाकी मैं संभाल लूंगा।

डॉली- ओके भूत भाई।

भूत- पहले टेंपो से एमजी मार्ग चल। उसके बाद किधर जाना है, मैं बताऊंगा तुझे।

डॉली- ओके

एमजी मार्ग पहुंचने पर भूत ने डॉली को रास्ता बताया और एक आलीशान बंगले पर ले गया। वहां भूत ने देखा, कि विजय अपने कई साथियों के संग बीच में बैठा है।

डॉली- अब कहां जाना है?

भूत- बंगला तो यही है। मगर अभी विजय कई लोगों के बीच में है। जब ये अकेला हो, तब इसको दबोचना उचित होगा। इसलिए हमें थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी होगी।

डॉली- ठीक है कहीं छाया में बैठती हूं।

भूत- ठीक है तू छाया में बैठ। और मैं तेरे अंदर से निकलकर बंगले के अंदर जाता हूं। और मौका मिलते ही मैं तेरे पास आ जाऊंगा। लेकिन तू कहीं जाना मत, वरना सारा प्लान गड़बड़ हो जाएगा। और मैं तो भूत हूं। इसलिए मेरा कुछ ना बिगड़ेगा, लेकिन तू परेशान तू हो जाएगी..!

डॉली- ओके भूत भाई। मैं कहीं नहीं जाऊंगी!

भूत डॉली के जिस्म से निकलकर बंगले के अंदर चला गया।

विजय- लगता है मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई। कई दिनों से मीडिया वालों की कोई पार्टी नहीं हुई। इसीलिए उन्होंने भोली का केस उछाल दिया। अगर उनको दारू की पार्टी पहले ही दे दिया होता, तो भोली का मामला भी दब जाता।

कुंदन(विजय का खास आदमी)- मीडिया को रोज नया मसाला चाहिए। आज भोली का केस उछला है। कल उनको कोई नया मुद्दा मिल जाएगा और यह खबर गायब हो जाएगी और फिर सारा मामला रफा-दफा हो जाएगा।

विजय- सही कहा। वैसे आज कोई लड़की नहीं दिखी क्या..?

कुंदन- आज तो पूरी पांच लड़कियों का झुंड दिखा था। परंतु एक साथ पांचों को पकड़ना बड़ा मुश्किल था। एक दो लड़की होती तो दबोच लाता।

विजय- ताकत कुछ कम हो गई है क्या..? अगर पांचों को दबोच लेता, तो तुम सब की भी दावत हो जाती। और बंदूक की नोक पर तो दस बीस लोगों को भी अगवा कर लिया जाता है। तू पांच लड़कियों को भी अगवा नहीं कर सका..?

कुंदन- वहां बाहर की पुलिस भी थी गुरु। इसलिए थोड़ा कठिन था। अगर सिर्फ लोकल पुलिस होती, तब तो उनके सामने ही इन पांचों को अगवा कर लेता।

विजय- आगे से ध्यान रखना। क्योंकि हमारी दहशत तभी कायम होगी जब दस लोगों के बीच से हम इन लड़कियों को गायब कर दें।

कुंदन- सही बात है गुरु।

विजय- ठीक है। अब थोड़ी देर तू भी आराम कर और मैं जाता हूं खाना खाने। एक घंटे बाद फिर मिलियो।

भूत ने देखा, कुंदन और बाकी सभी गुर्गे वहां से निकल लिए। और विजय अकेला रह गया। इसके पहले की विजय अंदर जाता, भूत जल्दी से डॉली के पास गया और उसके अंदर घुस गया।
 
भूत- जल्दी चल। इस समय विजय अकेला है। और सुन गेट पर एक चौकीदार है। उसके समीप जाते ही अपने दुपट्टे से तू अपना मुंह ढक लेना और उसके सिर पर एक जोरदार मुक्का जड़ देना।

डॉली- "ठीक है।"

डॉली तेज़ी से बंगले पर आई , मुंह दुपट्टे से ढका और चौकीदार के सिर पर एक जोर का मुक्का जड़ दिया। चौकीदार सर पकड़ कर वहीं बैठ गया। विजय अंदर जाने को अपनी कुर्सी से उठ चुका था, तभी उसकी नजर एक खूबसूरत लड़की पर पड़ी और वो रुक गया।

डॉली- विजय आप ही है ना..?

विजय- हां लेकिन तू कौन है..?

डॉली- मैं भोली की बहन हूं। और तूने उसके साथ अच्छा नहीं किया।

विजय- यह तो तूने बिल्कुल सही कहा, कि मैंने उसके साथ अच्छा नहीं किया। मगर तेरे से एक बहुत बड़ी गलती हो गई..?

डॉली- मेरे से कोई गलती नहीं हुई। गलती तो तूने की है और उसकी तूने सजा भुगतनी है।

विजय- सजा मुझे नहीं बल्कि सजा तुझे भुगतनी है। और गलती तुझसे यह हुई है, कि तू बिना सोचे समझे शेर की मांद में आ गई..! और अब यह शेर तेरा भी शिकार करेगा।

डॉली- तू मेरा शिकार करेगा हा हा हा हा..!

डॉली ने अपना हाथ उसके गले में फंसा दिया और और उसका गला दबाते ही चटक से उसके गले की हड्डी टूट गई और धड़ाम से वो जमीन पर गिर पड़ा।

फिर जल्दी से एक पर्ची पर उसने लिखा-" मासूम लड़कियों का रेप करने वाले की सजा कम से कम मौत है। कानून इसे 10 साल बाद सजा देता, मगर यह ठीक नहीं था। इन 10 सालों में तो यह न जाने कितनी लड़कियों के संग रेप कर करता और न जाने कितनी लड़कियों का मर्डर भी कर देता। इसलिए इसका आज ही मरना जरूरी था। मैंने इसकी जान ली है। और चूंकि मैं भूत हूं, इसलिए न पुलिस मुझे पकड़ सकती है और न कोई कोर्ट और कानून मुझे सजा दे सकता है। और सावधान। हर रेपिस्ट की यही सजा होगी। और उसे मरना होगा। इस पर्ची पर भी हैंडराइटिंग डॉली की नहीं थी। यद्यपि पर्ची को लिखा उसी ने था। पर्ची पर उस भूत की हैंडराइटिंग थी, जो उसके अंदर प्रवेश कर गया था।

डॉली ने पर्ची उसके कालर में फंसा दी और आराम से वहां से निकल गई और अपने घर आ गई।

घर पहुंचते ही भूत उसके जिस्म से बाहर निकला और बोला-थैंक्स..!
 
भूतों का न्याय-5

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डॉली ने बचपन में भूतों की खूब कहानियां सुनी थी और उसे भूतों से बड़ा डर लगता था। लेकिन इस नये भूत ने तो उसकी मानसिकता बदल दी। अब तो उसे भूतों से प्यार हो गया। वह कल्पना भी नहीं कर सकती थी कि भूत इतने अच्छे होते हैं। उसने भूतों की मदद से 2 दिन में दो बेटियों को न्याय दिलाया था, जबकि सरकार उन्हें कई सालों में भी न्याय ना दिला पाती। वो बहुत खुश थी। और उसे अपने इस नए तरह के समाजसेवी कार्य में मजा आने लगा था। भूतों की मदद से उसने प्रताप सिंह और विजय जैसे खतरनाक बदमाशों को खत्म कर दिया था।

तीसरे दिन भी वो सुबह जल्दी उठ गई । उसकी मम्मी भी उसके जल्दी उठने से बहुत खुश थी। और उन्हें इस बात पर बड़ा आश्चर्य था, कि अचानक ऐसी क्या बात हो गई कि रोज देर तक सोने वाली मेरी लाडो आजकल अपने आप सुबह इतनी जल्दी कैसे उठने लगी।

डॉली ने सुबह उठते ही सबसे पहले अखबार पढ़ा। अखबार के पहले पन्ने पर ही मोटे मोटे अक्षरों में लिखा था-" एक और रेपिस्ट की हत्या। मरने वाले के कालर में फंसी एक पर्ची मिली, जिसमें लिखा है कि मरने वाला एक रेपिस्ट है और इसीलिए मैंने उसकी जान ली है। और क्योंकि मैं एक भूत हूं, इसलिए ना मुझे पुलिस पकड़ सकती है और न कानून मुझे सजा दे सकता है। और सावधान। आगे से हर रेपिस्ट का यही अंजाम होगा।।

डॉली ने यह खबर पढ़ी और जोर जोर से हंसने लगी-

हाहाहाहा ! हाहाहाहा..!!

फिर उसने पूरा अखबार छान मारा। आज किसी भी लड़की के रेप की कोई खबर नहीं छपी थी।

डॉली- अभी तो सिर्फ दो रेपिस्ट मरे हैं। लेकिन लगता है अभी से सारे रेपिस्ट डर गए। और अपने अपने बिल में घुस गए। जो काम आज तक पुलिस कानून नहीं कर सका, उस काम को हमारे भूत भाई ने कर दिया। अब हमारे शहर की बेटियां सुरक्षित है। भूत भाई आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

फिर उसने अपने भूत भाई की तारीफ़ में एक कविता लिखी-

भूत भाई भूत भाई मेरे प्यारे भूत भाई

हम बहनों के मददगार

दिलों-जाँ से हम तुम पर न्यौछार

कोई लड़की घर से बाहर

निकलने में अब नहीं डरेगी

किसी लड़की को टच करने की

रेपिस्टों की अब हिम्मत न होगी

रूह काँपेगी उनकी

जो करते हैं लड़कियों से छेड़छाड़

भूत भाई भूत भाई मेरे प्यारे भूत भाई..!

अभी वो इस कविता को लिख ही रही रही थी, कि आंख बंद करते ही उसको भूत भाई के दर्शन हो गए।

डॉली- नमस्ते भूत भाई।

भूत- नमस्ते। आज बहुत खुश लग रही हो।

डॉली- हां भूत भाई आज मैं बहुत खुश हूं। क्योंकि आज अपने शहर में किसी भी लड़की का रेप होने की कोई खबर नहीं है। लगता है, अब सभी रेपिस्ट डरने लगे हैं। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया इस महान कार्य हेतु। पर मैं तो आपके ऊपर एक कविता भी लिख रही थी।

भूत- बहुत-बहुत शुक्रिया। लेकिन अगर तुम न साथ देती तो मैं कुछ भी नहीं कर सकता था। इसलिए मुझ पर तुम्हारा एहसान है। क्योंकि हम जब अच्छा कार्य करेंगे, तभी हमें इस भूत योनि से मुक्ति मिलेगी। और हमारे अच्छे कार्य करने में तुम हमारी मदद कर रही हो। इसलिए हमारा तुमको नमन है।

डॉली- और आपके बिना मैं भी इस कार्य को नहीं कर सकती थी। इसीलिए कहा गया है, कि एकता में बल है.. एकता में शक्ति है.. एकता में ताकत है.. और हमें हमेशा एक दूसरे से मिल जुल कर रहना चाहिए.. और जरूरत पर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए..!
 
भूत- तुम मेरी बहुत अच्छी मित्र हो। मैं तुम्हें हमेशा याद रखूंगा और मैं हमेशा तुम्हारी मदद करूंगा।

डॉली- यह बहुत अच्छा काम आप लोग कर रहे हैं। मैं आज एक बात सोच रही हूं। हमें भोली की खबर लेनी चाहिए कि वो कैसी है..?

भूत- जब तक विजय जिंदा था, तब तक उसकी जान को खतरा था, उसके घर वालों को भी जान का खतरा था। लेकिन इस समय सब डरे हुए हैं। और भोली के खिलाफ किसी के अंदर बोलने की हिम्मत नहीं है। क्योंकि उन सभी को डर है, कि कहीं विजय जैसा उनका हश्र भी ना हो जाए..! इसलिए अब उसे

कोई प्रॉब्लम नहीं है। और अभी तेरा वहां जाना ठीक भी नहीं है। क्योंकि अनावश्यक पुलिस को तुझ पर शक हो सकता है। तेरे खिलाफ कोई कुछ नहीं कर सकेगा, और न पुलिस को कोई सबूत मिलेगा। लेकिन चूंकि ये मर्डर का केस है, इसलिए अगर शक के दायरे में भी तू आ गई तो अनावश्यक रूप से तू परेशान हो जाएगी, और तेरे घर वाले भी तुझसे हजार तक के क्वेश्चन पूछेंगे, कि तू क्यों वहां गई थी..? किससे मिलने गई थी..? और कौन है वहां तेरा..? इसलिए अभी कहीं भी तेरा जाना ठीक नहीं है।इसलिए आज छुट्टी मना और घर में ही इंजॉय कर..!

डॉली- आपने बिल्कुल सही कहा है। क्योंकि अगर मैं पुलिस के चक्कर में फस गई, तो बहुत मुश्किल हो जाएगा मेरे लिए..!

भूत- ठीक है दोस्त। अब मैं जाता हूं। कल सुबह फिर मिलूंगा..!

भूत ने कहा और अंतरिक्ष में विलीन हो गया..!

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डॉली ने इंटरनेट खोला, तो पूरे इंटरनेट पर इन्हीं रेपिस्टों की हत्या की चर्चा की। फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर.. हर जगह इन्ही रेपिस्टों पर पोस्ट डाली जा रही थी। और भूतों की भी खूब चर्चा थी।

प्रताप सिंह और विजय इन दोनों के मर्डर केस पुलिस के लिए सिरदर्द बन गए थे। कोई सुराग हाथ में नहीं आ रहा था। प्रताप सिंह की देह पर सोना की हैंडराइटिंग में लिखा पत्र पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द था। उस पर से विचित्र बात यह, उस पत्र में लिखे शब्दों की सोना की हैंडराइटिंग से मिलान भी करवाया गया, और एक्सपर्ट ने भी यही कहा यह पत्र कॉपी नहीं है और यह पत्र सोना के द्वारा ही लिखा गया है..! तो क्या मारने वाले ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पहले ही सोना से इस पत्र को लिखवा लिया था..? लेकिन इसका अर्थ तो यह भी निकलता है कि मारने वाले को पहले से ही पता था कि प्रताप सिंह उसकी हत्या करेगा..! लेकिन यह कैसे मुमकिन हो सकता है..?

और विजय का मर्डर करने के बाद जो पत्र मिला, उस पत्र में हैंडराइटिंग किसकी है, इसका भी कुछ पता न चल सका। विजय के सभी संबंधियों और उसके जानने वालों की हैंडराइटिंग से उस पत्र की मिलान करवाया गया, लेकिन किसी की भी हैंडराइटिंग उस पत्र की हैंडराइटिंग से नहीं मिली। यह पहेली भी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। भोली के घर वालों ने ही विजय की हत्या की, इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिल पाया, क्योंकि जिस समय विजय की हत्या हुई, उस समय भोली के घर वाले सभी अपने घर में थे और बहुत डरे हुए थे..!

विजय के बंगले के गेट पर ड्यूटी कर रहे चौकीदार पर किसने हमला किया, इसका भी कुछ पता नहीं चल सका। क्योंकि चौकीदार के अनुसार वह देख ही ना सका कि किस ने उस पर हमला किया। लेकिन जिसने भी उसके सर पर चोट किया, वह बहुत ताकत वाला था, क्योंकि उसके एक ही प्रहार से उसका माथा घूम गया और वो अपना सिर पकड़कर वहीं पर बैठ गया था। और जब तक वह होश में आता, उसन नवागंतुक ने विजय की जान ले ली थी और वहां से कहां गया, कुछ पता नहीं चला। चौकीदार ने यह भी कहा, कि जिस ने उस पर हमला किया, उसको शंका है कि वो कोई लड़की थी। और अकेले थी। उसका यह बयान और भी चौंकाने वाला था।

क्योंकि एक अकेली लड़की चौकीदार को कैसे मार सकती है और विजय जैसे हट्टेगट्टे माफिया की गर्दन की हड्डियां कैसे तोड़ सकती है..?

डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार विजय की गर्दन पर हाथ का कसाव इतना मजबूत था, उसकी हड्डियां चिटक गई। और यह कोई बहुत ताकतवर पुरुष का ही काम हो सकता है।

और यही बात प्रताप सिंह के केस में भी थी। उसकी हड्डियां भी किसी मजबूत हाथों ने चिटका दीं।

रिपोर्ट में एक और अद्भुत बात देखने को मिली। और वो अद्भुत बात ये थी, कि दोनों हत्या एक ही तरह से की गई थी और ऐसी संभावना थी, कि किसी एक व्यक्ति ने ही उन दोनों हत्याओं को अंजाम दिया था।

अब यहां पर यह प्रश्न था, कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसका इन दोनों हत्याओं से सम्बन्ध हो सकता है..! प्रताप सिंह और विजय इन दोनों का कनेक्शन कहीं से भी आपस में नहीं मिल रहा था। और ठीक इसी प्रकार सोना और भोली का भी कनेक्शन आपस में नहीं मिल पा रहा था। इनके परिवार वाले एक दूसरे से बिल्कुल अनभिज्ञ थे।

और बहुत लोग तो भूत की बात पर ही भरोसा कर रहे

थे, कि हो ना हो इन दोनों मर्डर केस में भूत का ही हाथ है। लेकिन कानून भूत को कहां मानता है। कानून को तो प्रमाण चाहिए।

इतने सारे मैसेज और पोस्ट पढ़ पढ़ कर डॉली को मजा आ गया। आज उसने घर में खूब बढ़िया बढियां खाना बनाया। मम्मी के हर काम में खूब मदद की। वैसे भी अपने मां बाप की वो इकलौती बेटी थी। पापा मिलिट्री में सर्विस करते थे। इसलिए उनका कभी कभी आना हो पाता था। घर में सिर्फ मां बेटी थी। इकलौती होने के कारण डॉली थोड़ी बिगड़ैल भी थी, और थोड़ी जिद्दी भी थी। लेकिन दो-तीन दिन से उसके अंदर बहुत ज्यादा बदलाव आ गया था। उसके अंदर आए इस बदलाव से उसकी मम्मी बहुत खुश थी। हालांकि वो इस बात को समझ नहीं पा रही थी, कि डॉली के अंदर इस बदलाव के आने का असली कारण क्या है..?
 
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