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सुबह राज की जब आंख खुली तो उसे फिर उन्हीं ख्यालों ने आ घेरा। डॉली अपने किसी काम से गई हुई थी, इसलिए राज अकेला पड़ा-पड़ा तमाम हालात पर गौर करता रहा । दो-तीन घंटे लगातार सोच-विचार के बाद वो जिस नतीजे पर पहुंचा, वो यह था कि क्रिसमसस की रात उस लड़की रोजी ने उसे जानबुझकर बेहोश किया था। उसके बाद कुछ इस तरह की घटनाएं घटीं कि वो अपनी याददाश्त खो बैठा था। छः महीने तक वो किन हालात में, किन लोगों के साथ रहा और क्या करता रहा, इस बारे में उसे बिल्कुल कोई बात याद नहीं आ सकी।
उसके बाद शायद सड़क पर चलते हुए उसके साथ कार वाली दुर्घटना घट गई। लोगों ने लावारिस समझकर उसे हस्पताल में भर्ती करवा दिया। वहां संयोग से सिर पर चोट लगने की वजह से उसकी याददाश्त वापिस आ गई। इसके अलावा इन रहस्यमय घटनाओं से सम्बन्धित सवालों इसके बाद दो सवाल और उठ खड़े होते थे।
पहला यह कि ज्योति और जय वर्मा उसे कहां मिल गए थे? दूसरा यह कि वो लड़की रोजी कौन थी?
वो सवालों के जवाब ढूंढने लगा
'हो सकता है रोजी ज्योति के लिए काम कर रही हो और ज्योति ने ही उसे उसके जरिये बेहोश करावाया हो? लेकिन अगर ऐसा भी था तो उन्होंने मुझे जिन्दा क्यों छोड़ दिया? अगर मैं ज्योति और डाक्टर जय के चंगुल में फंस गया था तो उन्होंने मुझे कत्ल क्यों नहीं कर दिया?'
अब उसके जेहन में एक और सवाल ने सिर उभारा-'इन छ: महीनों में मैं बेहोश ही रहा होऊंगा? हो सकता है डॉक्टर जय मुझे कत्ल करने के बजाय मेरे जिस्म पर कोई खतरनाक प्रयोग कर रहा हो? उसी प्रयोग के दौरान उसने मुझे छ: महीने तक बेहोश रखा हो?'
दोपहर के वक्त डॉली आ गई। मनमोहक मुस्कुराहट के साथ उसने राज का अभिवादन किया और प्यार भरे लहजे में बोली
"कहिए राज जी, अब क्या हाल है?"
"हाल तो ठीक है।” राज ने जवाब दिया।
वो कुर्सी खींच कर राज के करीब ही बैठ गई। दवा का वक्त हो चुका था। उसने दवा पिलाई और बोली
"अभी-अभी डॉक्टर के पास मिसेज ज्योति का फोन आया था। वो आपका हाल पूछ रही थीं। जब डॉक्टर न बताया कि अब आप होश में है तो उसने कहा कि वो शाम के वक्त आपको देखने आएगी। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर आपकी सेहत ज्यादा खराब न हो तो वह आपको अपनी कोठी पर ले जाना चाहती है।"
"बड़ी अजीब बात है डॉली।" राज ने डॉली का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, "मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि
आखिर यह माजरा क्या है?"
''मैं खुद आपकी बताई हुई घटनाएं सुनकर हैरान हूं।" डॉली ने कहा।
"लेकिन जो बातें अभी तुम्हें मालूम नहीं हैं, अगर तुम्हें बता दूं तो तुम्हारी हैरत दस गुना बढ़ जाएगी।
"कैसी बातें?" डॉली ने उत्सुकता से पूछा।
"बताने में मुझे कोई एतराज नहीं है।" राज बोला
"लेकिन शर्त यह है कि ये बातें सिर्फ तुम तक ही रहनी चाहिएं।"
"ओह उसकी फिक्र न कीजिए।" डॉली ने मुस्कराते हुए कहा, ''मैं पेट की हल्की नहीं हूं। खास तौर से आप की बातों तो हमेशा मेरे दिल में सुरक्षित रहेंगी।"
"क्यों, मेरे में ऐसी क्या खास बात है?"
जवाब में उसका चेहरा गुलाबी हो गया और उसने शरमा कर नजरें झुका लीं।
राज का दिल सीने में धड़कने लगा तेजी से। उसके सवाल का इससे खूबसूरत जवाब क्या हो सकता था? उसने प्यार से डॉली का हाथ सहलाते हुए कहा
"डॉली...."
डॉली ने पलकें उठाकर राज की तरफ देखा, दोनों एक दूसरे की निगाहों में खो गए। राज जो कुछ उससे कहना चाहता था, वो नजरों ने कह दिया था। उसका उपयुक्त जवाब उसे डॉली की नशीली आंखों से मिल गया।
फिर अचानक वो चौंक उठी और अपना हाथ राज के हाथों से खींचते हुए बोली
"वो घटनाए सुनाइए न....।"
"ओह...मैं तो बिल्कुल भूल गया था। दरअसल तुम्हारी इन काली-काली आंखों में इतना जादू भरा है कि इनमें खोकर अपनी सारी परेशानियां भूल जाता हूं.....।"
"अब इतनी तारीफ भी न कीजिए।" डॉली ने शरमाति हुए कहा, "वर्ना मैं बहक जाऊंगी। अब जरा काम की बात भी तो कर लीजिए।"
"घटनाएं तो इस तरह हैं......।" कह कर नीलण्ठ डॉली को पिछली घटनाओं से लेकर मिरू और फिर बम्बई की घटनाओं के बारे में विस्तार से बताने लगा।
"फिर.....फिर.....उसके बाद क्या हुआ?" डॉली ने पूछा, ''मेरा मतलब है, उएन दोनों के खुदखुशी कर लेने के बाद?'
"फिर.....!" राज ने गहरी सांस लेकर कहा, इतनी" भयानक आग में कोई जिन्दा नहीं रह सकता था। लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि ज्योति और डॉक्टर जय का बाल भी बांका नहीं हुआ था। और इस बार भी मेरे दिल का सन्देह सही निकला, यानि वो दोनों एक बार फिर धोखा देकर साफ बच गए थे।"
"वो कैसे? डॉली ने हैरत से पूछा।
"वो ऐसे..... ।” राज ने विस्तार से बताते हुए कहा,
"कोठी में तेज आग लगने के एक हफ्ते बाद मैं अपना सन्देह दूर करने के लिए मैं उस जली हुई कोठी का मुआयना करने गय था और वहां पहुंच कर मुझे पता चला था कि मुझे जिस बात का सन्देह था, वही हुई थी। जय और ज्योति ने जिस कमरे में बन्द होकर आग लगाई थी, उस कमरे के नीचे एक सुरंग बनी हुई थी, जिसका दूसरा मुंह कोठी से दूर दो फाग के फासले पर था। वो एक गार में निकलती थी। जय ने हमें धोखा देने के लिए आग लगाई और खुद ज्योति को लेकर सुरंग के जरिये वहां से निकल गया। अब तुम खुद अन्दाजा लगा लो वो लोग मेरे दोस्त कैसे हो सकते है?"
"यह वाकई उपन्यास की घटनाएं मालूम होती हैं।"
डॉली ने हैरत से कहा, "लेकिन सवाल यह है कि आप छः महीने पहले यहां, कलकत्ता में क्या करने आए थे?"
"यह भी बताता हूं। दरअसल दिल्ली में एक डॉक्टर नरेन्द्र गुप्ता हैं जो सांपों और जहरों के माहिर हैं, उनसे मेरी गहरी दोस्ती है। हम दोनों जहरों पर प्रयोग करते रहे हैं। यह छःसात महीने पहले की बात है कि कलकत्ता पुलिस को एक आदमी की लाश मिली थी। जिसकी मौत बड़े अजीबोगरीब तरीके से हुई थी। मेरा ख्याल है तुमने भी उस अजीबो-गरीब मौत के बारे में अखबारों में पढ़ा होगा।"
"हां।” डॉली ने सिर हिलाकर स्वीकर किया "सात महीने पहले एक नाले के किनारे वो लाश पाई गई थी। उस पर इस तरह के निशान थे जैसे उसके पूरे जिस्म को रस्सियों से जकड़ा गया हो
और उसका खून चूसा गया हो। जब उसका पोस्टमार्टम हुआ था तो पता चला कि उसके खून में जहर के कण मौजूद थे।
"बिल्कुल ठीक।" राज बोला, "यही हुआ था और यहां के डॉक्टर उस रिपोर्ट से किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा थाकि आखिर उस आदमी को किस तरह कत्ल किया गया है। लाश पर रस्सियों के निशान
कैसे हैं और उसके खून में जहर मिल गया? इसलिए जब यहां के डाक्टर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने एक सक्सपर्ट के तौर पर डॉक्टर नरेन्द्र को बुलवाया था।
लेकिन संयोग से उन दिनों डॉक्टर नरेन्द्र बहुत व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने अपनी जगह मुझे भेज दिया था ताकि मैं यहां के डॉक्टरों के साथ मिलकर उस जहर का विश्लेषण कर सकूँ। यहां आकर मैं डॉक्टर जेम्स से मिला, जो डॉक्टरों की एक संस्था के अध्यक्ष हैं। तीन-चार दिन तक हम उस जहर के बारे में मालूम करने के लिए लाश पर नित नए प्रयोग करते रहे, लेकिन कुछ मालूम नहीं कर पाए।
उसके बाद शायद सड़क पर चलते हुए उसके साथ कार वाली दुर्घटना घट गई। लोगों ने लावारिस समझकर उसे हस्पताल में भर्ती करवा दिया। वहां संयोग से सिर पर चोट लगने की वजह से उसकी याददाश्त वापिस आ गई। इसके अलावा इन रहस्यमय घटनाओं से सम्बन्धित सवालों इसके बाद दो सवाल और उठ खड़े होते थे।
पहला यह कि ज्योति और जय वर्मा उसे कहां मिल गए थे? दूसरा यह कि वो लड़की रोजी कौन थी?
वो सवालों के जवाब ढूंढने लगा
'हो सकता है रोजी ज्योति के लिए काम कर रही हो और ज्योति ने ही उसे उसके जरिये बेहोश करावाया हो? लेकिन अगर ऐसा भी था तो उन्होंने मुझे जिन्दा क्यों छोड़ दिया? अगर मैं ज्योति और डाक्टर जय के चंगुल में फंस गया था तो उन्होंने मुझे कत्ल क्यों नहीं कर दिया?'
अब उसके जेहन में एक और सवाल ने सिर उभारा-'इन छ: महीनों में मैं बेहोश ही रहा होऊंगा? हो सकता है डॉक्टर जय मुझे कत्ल करने के बजाय मेरे जिस्म पर कोई खतरनाक प्रयोग कर रहा हो? उसी प्रयोग के दौरान उसने मुझे छ: महीने तक बेहोश रखा हो?'
दोपहर के वक्त डॉली आ गई। मनमोहक मुस्कुराहट के साथ उसने राज का अभिवादन किया और प्यार भरे लहजे में बोली
"कहिए राज जी, अब क्या हाल है?"
"हाल तो ठीक है।” राज ने जवाब दिया।
वो कुर्सी खींच कर राज के करीब ही बैठ गई। दवा का वक्त हो चुका था। उसने दवा पिलाई और बोली
"अभी-अभी डॉक्टर के पास मिसेज ज्योति का फोन आया था। वो आपका हाल पूछ रही थीं। जब डॉक्टर न बताया कि अब आप होश में है तो उसने कहा कि वो शाम के वक्त आपको देखने आएगी। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर आपकी सेहत ज्यादा खराब न हो तो वह आपको अपनी कोठी पर ले जाना चाहती है।"
"बड़ी अजीब बात है डॉली।" राज ने डॉली का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, "मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि
आखिर यह माजरा क्या है?"
''मैं खुद आपकी बताई हुई घटनाएं सुनकर हैरान हूं।" डॉली ने कहा।
"लेकिन जो बातें अभी तुम्हें मालूम नहीं हैं, अगर तुम्हें बता दूं तो तुम्हारी हैरत दस गुना बढ़ जाएगी।
"कैसी बातें?" डॉली ने उत्सुकता से पूछा।
"बताने में मुझे कोई एतराज नहीं है।" राज बोला
"लेकिन शर्त यह है कि ये बातें सिर्फ तुम तक ही रहनी चाहिएं।"
"ओह उसकी फिक्र न कीजिए।" डॉली ने मुस्कराते हुए कहा, ''मैं पेट की हल्की नहीं हूं। खास तौर से आप की बातों तो हमेशा मेरे दिल में सुरक्षित रहेंगी।"
"क्यों, मेरे में ऐसी क्या खास बात है?"
जवाब में उसका चेहरा गुलाबी हो गया और उसने शरमा कर नजरें झुका लीं।
राज का दिल सीने में धड़कने लगा तेजी से। उसके सवाल का इससे खूबसूरत जवाब क्या हो सकता था? उसने प्यार से डॉली का हाथ सहलाते हुए कहा
"डॉली...."
डॉली ने पलकें उठाकर राज की तरफ देखा, दोनों एक दूसरे की निगाहों में खो गए। राज जो कुछ उससे कहना चाहता था, वो नजरों ने कह दिया था। उसका उपयुक्त जवाब उसे डॉली की नशीली आंखों से मिल गया।
फिर अचानक वो चौंक उठी और अपना हाथ राज के हाथों से खींचते हुए बोली
"वो घटनाए सुनाइए न....।"
"ओह...मैं तो बिल्कुल भूल गया था। दरअसल तुम्हारी इन काली-काली आंखों में इतना जादू भरा है कि इनमें खोकर अपनी सारी परेशानियां भूल जाता हूं.....।"
"अब इतनी तारीफ भी न कीजिए।" डॉली ने शरमाति हुए कहा, "वर्ना मैं बहक जाऊंगी। अब जरा काम की बात भी तो कर लीजिए।"
"घटनाएं तो इस तरह हैं......।" कह कर नीलण्ठ डॉली को पिछली घटनाओं से लेकर मिरू और फिर बम्बई की घटनाओं के बारे में विस्तार से बताने लगा।
"फिर.....फिर.....उसके बाद क्या हुआ?" डॉली ने पूछा, ''मेरा मतलब है, उएन दोनों के खुदखुशी कर लेने के बाद?'
"फिर.....!" राज ने गहरी सांस लेकर कहा, इतनी" भयानक आग में कोई जिन्दा नहीं रह सकता था। लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि ज्योति और डॉक्टर जय का बाल भी बांका नहीं हुआ था। और इस बार भी मेरे दिल का सन्देह सही निकला, यानि वो दोनों एक बार फिर धोखा देकर साफ बच गए थे।"
"वो कैसे? डॉली ने हैरत से पूछा।
"वो ऐसे..... ।” राज ने विस्तार से बताते हुए कहा,
"कोठी में तेज आग लगने के एक हफ्ते बाद मैं अपना सन्देह दूर करने के लिए मैं उस जली हुई कोठी का मुआयना करने गय था और वहां पहुंच कर मुझे पता चला था कि मुझे जिस बात का सन्देह था, वही हुई थी। जय और ज्योति ने जिस कमरे में बन्द होकर आग लगाई थी, उस कमरे के नीचे एक सुरंग बनी हुई थी, जिसका दूसरा मुंह कोठी से दूर दो फाग के फासले पर था। वो एक गार में निकलती थी। जय ने हमें धोखा देने के लिए आग लगाई और खुद ज्योति को लेकर सुरंग के जरिये वहां से निकल गया। अब तुम खुद अन्दाजा लगा लो वो लोग मेरे दोस्त कैसे हो सकते है?"
"यह वाकई उपन्यास की घटनाएं मालूम होती हैं।"
डॉली ने हैरत से कहा, "लेकिन सवाल यह है कि आप छः महीने पहले यहां, कलकत्ता में क्या करने आए थे?"
"यह भी बताता हूं। दरअसल दिल्ली में एक डॉक्टर नरेन्द्र गुप्ता हैं जो सांपों और जहरों के माहिर हैं, उनसे मेरी गहरी दोस्ती है। हम दोनों जहरों पर प्रयोग करते रहे हैं। यह छःसात महीने पहले की बात है कि कलकत्ता पुलिस को एक आदमी की लाश मिली थी। जिसकी मौत बड़े अजीबोगरीब तरीके से हुई थी। मेरा ख्याल है तुमने भी उस अजीबो-गरीब मौत के बारे में अखबारों में पढ़ा होगा।"
"हां।” डॉली ने सिर हिलाकर स्वीकर किया "सात महीने पहले एक नाले के किनारे वो लाश पाई गई थी। उस पर इस तरह के निशान थे जैसे उसके पूरे जिस्म को रस्सियों से जकड़ा गया हो
और उसका खून चूसा गया हो। जब उसका पोस्टमार्टम हुआ था तो पता चला कि उसके खून में जहर के कण मौजूद थे।
"बिल्कुल ठीक।" राज बोला, "यही हुआ था और यहां के डॉक्टर उस रिपोर्ट से किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा थाकि आखिर उस आदमी को किस तरह कत्ल किया गया है। लाश पर रस्सियों के निशान
कैसे हैं और उसके खून में जहर मिल गया? इसलिए जब यहां के डाक्टर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने एक सक्सपर्ट के तौर पर डॉक्टर नरेन्द्र को बुलवाया था।
लेकिन संयोग से उन दिनों डॉक्टर नरेन्द्र बहुत व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने अपनी जगह मुझे भेज दिया था ताकि मैं यहां के डॉक्टरों के साथ मिलकर उस जहर का विश्लेषण कर सकूँ। यहां आकर मैं डॉक्टर जेम्स से मिला, जो डॉक्टरों की एक संस्था के अध्यक्ष हैं। तीन-चार दिन तक हम उस जहर के बारे में मालूम करने के लिए लाश पर नित नए प्रयोग करते रहे, लेकिन कुछ मालूम नहीं कर पाए।