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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

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तारक :- ऊओ जेठालाल क्या वापिस मुंबई जाने का इरादा है क्या....

जल्दी आओ...ट्रेन में क्यूँ खड़े हो..

जेठालाल :- नही भाई..नही..मुंबई अभी नही जाना....अभी तो बहुत कुछ करना है..

आता हूँ.....

और ट्रेन से उतर के वो भी सबके पीछे चल देता है...स्टेशन से बाहर निकल के

गोआ में मज़े करने ....

में एक बात कहना कहूँगा....यूँ समझ लीजेए एक बार फिर से एक फिलोसफी

देना चाहता हूँ...

हमे मज़ाक सिर्फ़ एक हद तक करना कहिए किसी के साथ....कई बार ये मज़ाक सामने

वाले के लिए बहुत दुखदाई बन जाता है...कई बार बहुत मुसीबत भी आ जाती है..

हमे सिर्फ़ उतना मज़ाक करना चाहिए किसी के साथ...की सामने वाले को उससे तकलीफ़ ना

हो..उसे उस मज़ाक से कोई परेशानी ना हो... किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है..

या फिर ऐसा मज़ाक हुआ हो अब सब के साथ कभी...

जैसे कि अईयर ने किया...अगर कोई गेट नही खोलता तो क्या पता क्या हो जाता जेठालाल

के साथ....

अब सब सोच रहे होंगे..कि ये इन भाई साहब को क्या हो गया है..स्टोरी में कोई

हॉटनेस्स तो ला नही रहे हैं....और यहाँ फिलोशपी झाड़ रहे हैं...

लेकिन में ये बताना चाहता था ...

होप मेरी फिलोसफी से आप परेशान नही हुए होंगे....

टू बी कंटिन्यूड.......!!!!!!!!!!!

 
आख़िर कार सभी लोग गोआ पहुच चुके थी....कुछ बाथरूम में बंद होके...तो

कुछ रात में ट्रेन में चुदाई का खेल खेलके....लेकिन ठीक ठीक सही सलामत..

पहुँच गये थे.....

सभी स्टेशन से बाहर आते हैं......

और गोआ की मस्त ठंडी हवा को महसूस करते हैं...

सोढी :- वाहह भाई..वाहह...जेठा प्रा क्या मस्त जगह का आइडिया दिया था तुमने....

यहाँ आके ऐसा लग रहा है...जैसे जन्नत में आ गये हों..

मोहन लाल :- सोढी भाई...अभी तो आप सिर्फ़ गोआ के स्टेशन तक पहुँचे हैं...जब

आप सब मेरे गोआ रिज़ॉर्ट में चलोगे तो फिर देखना कितना मज़ा आता है...

जेठालाल :- क्याअ...रिज़ॉर्ट..मोहन लाल भाई..आपका रिज़ॉर्ट है यहाँ..

मोहन लाल :- हाँ....और वो भी कोई ऐसा वैसा नही....एक दम आलीशान है...देख के

पता चलेगा आप सब को...

तारक :- फिर तो बड़ा मज़ा आने वाला है...

अब्दुल :- मोहन भाई...मैने सुना है गोआ के बीच बहुत अच्छे होते हैं...क्या हम वहाँ

पे चलेंगे..

भिड़े :- अरे तुम टेन्षन मत लो अब्दुल...गोआ में ज़्यादातर बीच ही हैं...

अंजलि :- सारी बातें आप सब लोग यहीं करोगे..कि चलना भी है.

रीता :- हाँ चलो अब...खड़े खड़े मेरे पैरों में दर्द हो रहा है...

 
जेठालाल :- हाँ तो ठीक है...चलो..

ऊओ टॅक्सी....हाँ भाई तू...

मोहन लाल टॅक्सी वाले से बात करता है.....और ये फ़ैसला होता है कि 3 टॅक्सी करेंगे

जिससे आराम से सभी जा सकें...

पहली टॅक्सी में आगे की तरफ भिड़े...पीछे माधवी..सोढी.....और रोशन...

दूसरी टॅक्सी में...बैठने के लिए.....

हुआ यूँ .. कि सबसे आगे बेत गये... तारक...

पीछे पहले बैठी दया...उसके बाद अंजलि और फिर बैठी बबिता....

अईयर और जेठालाल टॅक्सी के आगे की तरफ खड़े थे...

जब अईयर को लगा अब जेठालाल बैठने के लिए आगे बढ़ रहा है...तो फ़ौरन आगे

भागने लगा जिससे वो बैठ जाए....

लेकिन उससे ये कहाँ पता था...कि . सामना जेठालाल से है..जो पहले से ही उससे..

खुन्नस में था....उसने अपना पैर आगे कर के उसे टॅग्डी दे दी जिससे अईयर

पीछे वाले गेट से कुछ ज़्यादा आगे निकल गया..और तीसरी टॅक्सी के पास पहुच गया..

एक बार तो गिरते गिरते बचा....

(बॅक . म्यूज़िक ... आयूऊ...)

और इसका फ़ायदा उठाया जेठालाल ने ..और वो जाके बैठ गया..बबीता जी की बगल

में........

अंदर बैठे मेहता साब ने बोला....

तारक :- अरे अईयर भाई संभाल के...इतनी जल्दी में क्यूँ हो..कहीं गिर जाते तो

मुसीबत हो जाती..

अईयर :- मेहता साब...ये जेठालाल ने मुझे अपने पैर से टंगड़ी दी...जिसकी वजह

से..में यहाँ आ गया...

जेठालाल :- अईयर भाई मेने..कब...(अपना मासूम चेहरा बनाते हुए..)

अईयर :- जेठालाल झूठ मत बोलो..तुम..

 


बबीता :- बीच में बोलते हुए...एनफ इस एनफ अईयर...तुम जेठा जी के पीछे क्यूँ

पड़े हो...

अईयर :- लेकिन बबिता..

बबीता :- आइ डोंट वॉंट तो लिसन एनितिंग..तुम जाओ और पीछे वाली टॅक्सी में जाके

बैठ जाओ....

जेठालाल की तो ट्यूनिंग स्टार्ट हो जाती है.....

( बॅक जी. में....आई छोरिरी......)

जेठालाल :- बबीता जी कोई बात नही..आप गुस्सा मत कीजिए....

अईयर भाई आप जाके शांति से बैठ जाओ...

अईयर गुस्से में आगे बढ़ता है...उसकी नज़र जेठालाल पर ही थी...

और इसकी सज़ा उससे मिल जाती है....वो सीधा जाकर तीसरी टॅक्सी के गेट से टकरा

जाता है....

अंदर बैठे .... रीता और अब्दुल ने गेट खोल रखा था..जिसकी वजह से वो टकरा

जाता है...

अईयर अपने आप को संभालते हुए....अंदर बैठ जाता है....आगे की तरफ मोहन लाल

बैठा होता है....जो टॅक्सी वाले को चलने के लिए बोलता है..

बाकी आगे की दोनो टॅक्सी आगे जा चुकी थी.....

जिस टॅक्सी में जेठालाल बैठा था....उसमे में पीछे अंजलि दया और बबीता भी

बैठी थी....तो सोचिए...कि ये 4 कैसे बैठ के गये होंगे....

चलीए वो भी जान लेते हैं....

दया के बाद अंजलि बैठी थी..उसके बाद बबिता...और बबीता से चिपका जेठालाल...

पीछे 4 जनों की जगह ना होते हुए भी...वो लोग बैठे थे..

दया और अंजलि तो दोनो लेडीज़ थी...उन दोनो ने तो अड्जस्ट कर लिया...लेकिन

रही बात बबीता की...तो उसे तो अब बहुत कुछ सहना था...क्यूँ कि बगल में मिस्टर

जेठालाल जो बैठे थे...

वो तो ठहरे गोल मटोल..जगह भी ज़्यादा लेंगे..लेंगे क्या..ले रहे थे...

बेचारी बबिता...वो तो बुरी तरह पिस रही थी बीच में...

बबीता पीछे होके बैठी थी..और जेठालाल आगे होके बैठा था...जिसकी वजह से

उसकी हाथ की कोहनी..बबीता के बड़े बड़े चुचों के उपर थी....

और बबीता पूरी तरह उसके हाथ को अपने चुचों पे एहसास कर रही थी...

और जेठालाल को भी अपने हाथ के नीचे बड़ी नरम चीज़ का आभास हो रहा था...

और वो जानता था कि ये क्या है...

इसकी वजह से उसके नीचे रेंगता साँप अब फनफनाने लगा था..

अपने मन में जेठालाल..

जेठालाल :- अरे ओ .. ज़रा थोड़ी देर शांत रह....

मुझे पता है बहुत मुश्किल है..क्यूँ कि बबीता जी के ये चुचे जो मेरे हाथ को छू

रहे हैं...अगर थोड़ी देर ऐसे ही हाल रहा...तो ये फनफना के खड़ा हो जाएगा..

और अगर बबीता जी ने देख लिया तो मेरी तो इज़्ज़त का फालूदा हो जाएगा...

 


वो ये सोच ही रहा था...कि टॅक्सी ने स्पीड में टर्न लिया...जिसके कारण उसकी कोहनी..

बबीता के चुचों में बुरी तरह धँस गई...

पूरी की पूरी चुचि अंदर घुस गई थी.....

टर्न की वजह से जेठालाल बबीता के उपर भी गिरा...और अपने आप को सम्हालने के लिए

जेठालाल का एक हाथ...बबीता की चूत के बिल्कुल साइड पे पड़ा..और काफ़ी गहरा दबाव

पड़ गया...

बबीता के मुँह से एक..ज़ोर से...अहह....निकल गई....

ये सुन के जेठालाल की तो गान्ड फट गई...उससे लगा अब बबीता जी बता देंगी...

अंजलि :- व्हाट हॅपन बबिता??

दया :- क्या हुआ बबीता जी..

तारक भी पीछे मुड़ा..

तारक :- क्या हुआ बबीता जी..

जेठालाल ने अपना हाथ तो हटा लिया था..चूत के उपर से..लेकिन उसकी कोहनी वैसी ही

थी....वो बबीता के फेस को एक टक देखे जा रहा था..कि अब क्या बोलेंगी बबीता जी..

लेकिन जब बबीता ने जवाब दिया....तो जेठालाल के तो होश ही उड़ गये...

वो बबीता ने बोला कुछ ऐसा था कि...

बबीता :- वो अंजलि भाभी...वो एक दम से टर्न आया ना...तो में आपको उपर गिरी...

और जेठा जी का पैर मेरे पैर के उपर गिर गया..जिसकी वजह से में चीख पड़ी...

अंजलि :- ओह्ह..मेने सोचा पता नही क्या हो गया..

दया :- टप्पू के पापा..देखा आपकी वजह से बबीता जी को लग गया..

जेठालाल :- हाँ दया...सही बोल रही है..

सॉरी बबीता जी...आइ आम वेरी सॉरी..वो पता ही नही चला कब मेरा पैर आपके पैर के

उपर गिर गया....

बबीता :- इट्स ओके जेठा जी...मुझे कुछ नही हुआ है..

जेठा की घंटी बजती हुई...

(बॅक ग्राउंड.म्यूज़िक... अहन्ंनननननननननणणन्...)

 
जेठालाल अपने मन में...बबीता जी ने सच नही बोला...इसका मतलब ये कि वो भी मज़े कर

रही थी....नही नही...ऐसी बातें वो सबके सामने नही बता सकती थी..इसलिए नही

बोला होगा...

लेकिन में क्या करूँ..बबीता जी के ये इतने सुंदर और बड़े बड़े चुचे..तो अभी भी

मेरे हाथ के नीचे दबे पड़े हैं....

अगर मेहता साब..ने देख लिया तो बहुत खिचाई करेंगे मेरी...

फिर वो तारक को देखने लगता है....लेकिन उसका ध्यान तो सिर्फ़ बाहर की चीज़ों पे होता

है....वो खिड़की से बाहर देख रहा होता है..

जेठालाल को ये देख के राहत मिलती है...

जेठालाल अपने मन में..

जेठालाल :- हॅश....चलो मेहता सहब तो नही देख रहे.....लेकिन अंजलि भाभी..और दया भी

तो हैं...एक बार उसको भी देख लेता हूँ....

और वो फिर उन दोनो की तरफ देखता है.....

दया तो काफ़ी ज़्यादा खुश थी...और अंजलि को बाहर दिखा दिखा के पूछ रही थी......

जेठालाल :- हस्स्सश......हर तरफ से रास्ता क्लियर है...कोई टेशन नही है...बबीता जी की तरफ भी

देखूं क्या एक बार...नही नही....

चलो एक बार देख ही लेता हूँ....

और वो अपनी गर्दन धीरे धीरे...स्लोली स्लोली...बबीता की तरफ मोड़ता है....और देखने

लगता है.....

बबीता के गाल एक स्टॉबिरी की तरह बिल्कुल लाल थे...आँखों में एक अजीब चीज़ नज़र आ रही

थी...पहचानना मुश्किल था..कि क्या हो रहा है....और वो सिर्फ़ सामने देख रही थी...

जेठालाल बबीता को देख के वापिस अपनी गर्दन सीधी कर लेता है...उसे कुछ समझ नही आ रहा

था..बबीता का चेहरा देख के....वो फिर से अपनी सोच में डूब गया..

ये बबीता जी...को देख के समझ नही आया..कि वो क्या चाहती है...उनको अच्छा लग रहा है..या फिर..

वो इसका बदला बाद में लेगा...

 
इतना सोच ही रहा होता है...कि इस बार भी एक शार्प टर्न आता है.....

लेकिन इस बार उल्टा होता है.....

इस बार बबीता जेठालाल की साइड गिरती है.......

और इस बार चीख जेठालाल के मुँह से निकलती है.............अहह

और साथ हे साथ बबीता के मुँह से भी निकली..लेकिन उसकी आवाज़ थोड़ी लो थी....आह.ओह्ह..

और ये चीख बबीता की चीख से ज़्यादा बड़ी होती है.......(पहली वाली चीख की बात कर रहा हूँ)

पता है क्यूँ.....तो अभी बता देता हूँ...वो हुआ यूँ था..शार्प टर्न की वजह से जब

बबीता उसके उपर गिरती है....जिसके कारण उसके चुचे जेठालाल की कोहनी की वजह से और ज़ोर

से दब जाते हैं....इस बार दोनो चुचों पे हमला होता है...और वो किसी नरम गद्दे

की तरह अंदर धँस जाते हैं...जिसकी वजह से बबीता के मुँह से निकलती है आह.ओह्ह...

और जेठालाल के मुँह से वो बड़ी सी अहह..इसलिए निकलती है...कि जब बबीता उसके उपर गिरती है..

तो अंजाने में उसका एक हाथ..जेठालाल के बिल्कुल खड़े तने लंड पे जाके गिरता हैं..

और वो उसे इतनी ज़ोर से पकड़ लेती है...कि जेठालाल की तो चीख ही निकल जाती है....

ऐसा लगता है..जैसे जेठालाल के लंड को अपने हाथों से कुचल दिया हो बबीता ने...

हाँ अब पता चल गया..तो वापिस चीख वाले किस्से पे आते हैं...

जैसे ही बबीता को एहसास होता है...कि उसका हाथ कहाँ है..वो फ़ौरन हटा लेती है....

तारक पीछे मूड के देखता है...

दया :- टप्पू के पापा क्या हो गया...आप क्यूँ चिल्लाए...

तारक :- क्या हुआ जेठालाल...

जेठालाल मुँह बनाते हुए....

( बॅक ग्राउंड . म्यूज़िक में......बच्चे के रोने की आवाज़....)

(सॉरी में उसे वर्ड्स में डिस्क्राइब नही कर सकता...आप सब खुद इमॅजिन कर लेना..)

 
बबीता अपने मन में..

बबीता :- ओह्ह गॉड....अगर जेठा जी ने बता दिया..तो ये सब क्या सोचेंगे....

तारक :- बोलो जेठालाल...

बबीता की नज़र जेठालाल पे थी....

उसकी आखों में डर था..

जेठालाल अपने दिमाग़ को चलाते हुए...जो उस वक़्त काम बड़ी मुश्किल से कर रहा था..

जेठालाल :- वो मेहता साब...ये हॅंडल चुभ गया..

तारक :- ओह....

ये टॅक्सी वाले भाई...ज़रा आराम से चल ना भाई...बार बार..पीछे से आवाज़ें आ रही है...

टॅक्सी ड्राइवर :- जी सर..सॉरी..अब ध्यान से चलूँगा..

पीछे बैठी बबीता को एक लंबा सुकून मिला...और उसने जेठालाल की तरफ देखा..

उसी टाइम जेठालाल ने भी..बबीता की तरफ देखा..

बबीता के गोरे गोरे चिक्स..इस वक़्त ऐसे लग रहे थे...जैसे किसी ने रेड पैंट लगा दिया

हो...जेठालाल की आँखों में अभी भी लस्त था...मगर बबीता उसे नही देख सकती थी...

फिर बबीता अपनी गर्दन घुमा लेती है...और जेठालाल भी...

बबीता अपने मन में..

बबीता :- जेठा जी का वो..पूरा का पूरा खड़ा था.....

लेकिन क्यूँ?

श में भी कितनी पागल हूँ...उनके हाथ मेरे इतने सेक्सी बूब्स पर हैं...तो खड़ा तो

होगा हे...जब उस दिन माल में अंजलि भाभी...का वो हाल हो गया था..तो जेठा जी

तो एक आदमी है..उनका ये हाल तो होना ही था..

वैसे कितना बड़ा और मोटा है जेठा जी.का...

और फिर दया की तरफ अपनी गर्दन घूमाते हुए..

अपने मन में ही..वाह दया भाभी..क्या किस्मत पाई है..आपने...आपको तो मज़े आ जाते

होंगे..जब जेठा जी का ये लंड आपके अंदर जाता होगा...

ये सब सोचते सोचते...बबीता के चेहरे के एक सेडक्टिव स्माइल आ जाती है....

इश्स वक़्त हो बहुत गरम हो चुकी थी...

और वो क्या इस वक़्त कोई भी औरत इतनी गरम हो जाती...पहले चुचियों पे हाथों का

वार..उसके बाद चूत पे हाथों का दबाव...और खुद के हाथों से एक मजबूत लंड का

एहसास.....

इस वक़्त वो ये नही सोच रही थी...कि वो किसी की पत्नी है...वो बस इतना ही सोच रही थी...कि

वो एक औरत है..और जो शारीरिक तौर से भूखी है...बॅस...यही चल रहा था उसके दिमागमें......

 
बबीता के दिमाग़ में इस वक़्त सिर्फ़ ये चल रहा था...की वो एक औरत है..किसी की पत्नी

नही.....उसे अपने शरीर की आग को शांत करना था...

और आज इस वक़्त..इश्स समय...वो जिस हाल से गुजर रही थी...कि उससे अपने आप को रोका

नही जा रहा था....

जेठालाल की कोहनी.....तो बबीता की लेफ्ट चुचि पे थी इस वक़्त ...और उसे दबा रही थी...

बबीता की आँखें बंद हो चुकी थी...और वो अपना सिर पीछे सीट से टिका के बैठ गई..

थी.....

उसकी आग भड़कती जा रही थी..उससे सहा नही जा रहा था....जेठालाल के बार बार उसके

चुचे पे हाथ चलने ... से वो किसी और ही दुनिया में चली गई थी.......

जेठालाल को पूरा एहसास था..कि उसकी कोहनी चुचों से रगड़ खा के..उन्हे दबा रही

है...

लेकिन वो करता भी क्या......उसके तो मज़े थे....बबीता ने कोई भी विरोध नही किया था...

उसने कुछ सोचा...और अपनी गर्दन पीछे बबीता की तरफ मोडी......और उसने बबीता को

आँखें बंद कर के ...पीछे टेक लगाया हुआ पाया.....

जेठालाल की भी तो हालत खराब थी...आख़िर कार...उसके शरीर में भी तो गर्मी पैदा हो

रही थी....उससे भी रहा नही जा रहा था...लेकिन उससे पता था वो कुछ नही कर सकता....

उसने दया और अंजलि की तरफ देखा...

वो दोनो अभी भी...वैसे ही अपनी ही मस्ती में थी....

तारक की तरफ नज़र घुमाई...वो भी अपनी ही धुन में था.......

जेठालाल ने कुछ सोचा.....

जिस पोज़िशन में जेठालाल और बबीता थे...उस वक़्त सोच का दायरा बस इतना ही होता

है....कि किस तरह अपनी इस प्यास को भुजा सकें....

राइट अभी भी वैसे ही थे...उसके हाथ नीचे ठीक

बबीता की नाभि के आगे..और चूत के सामने....और उसके हाथ की कोहनी..उसके लेफ्ट चुचे को

दबा रही थी..

उसने अपना लेफ्ट हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाया......

और बदाते बढ़ाते....

उसने बबीता की लेफ्ट जाँघ के उपर रख दिया....

बबीता की आँखें फ़ौरन खुल गई....

क्यूँ कि उसने शॉर्ट्स पहन रखे थी...और उसकी नंगी जाँघ पे ठंडे हाथ पड़ने से वो

चौंक गई.....

जेठालाल ने जैसे ही हाथ रखा...उसने एक बार फिर से बबीता की तरफ देखा...

और उसकी आँखों में देखने लगा....

जेठालाल की तो ट्यूनिंग स्टार्ट हो गई.......

(बॅक ग्राउंड. म्यूज़िक...आहान्ंनननननननननणणन्)

 
इस वक़्त बबीता की आँखों में बस उसे यही दिखाई दे रहा था...कि वो उससे कह रही हो...

कि जेठा जी..प्लस्स...रुकिये मत...आपको जो करना है..जैसा ठीक लगता है..वैसा कीजिए...में

आपको नही मना करूँगी....आज आपने मेरे अंदर एक नयी किसम की आग पैदा की है....

इसे भुजने ना दो....

जेठालाल उसकी आँखों की बातों को अच्छी तरह समझ गया....उसने अपनी गर्दन आगे की

तरफ मोड़ ली....

लेकिन बबीता ने.....अपनी आँखें बंद नही की....

वो अपनी आँखों से देखना चाहती थी...कि जेठालाल क्या करता है.....

जेठालाल ने अब अपना काम शुरू कर दिया.....

उसने अपने हाथ को उसकी जाँघ पे चलाना शुरू कर दिया....

बहुत कोमल एहसास था....

वो अपने हाथ जांघों पर फिराता और घुटनो तक पहुचता...

बबीता ना चाहते हुई भी...उसे अपनी आँखें बंद करनी पड़ी....

उसका हल्का सा मुँह खुला हुआ था.....

जेठालाल ने अब दो तरफ़ा वार किया...एक हाथ चल रहा जाँघ पे..और अपनी कोहनी..से दाब

रहे चुचे...

बबीता की पीठ हल्की सी हवा में उठ रही थी..........

एक अजीब सी खामोशी थी....इस वक़्त टॅक्सी में.....तारक तो अपना सर पीछे टिकाए आँखें

बंद के लेटा था...

अंजलि और दया बाहर के नज़ारे देख रही थी.......

इधर जेठालाल और बबिता....दोनो एक दूसरे को प्यार बाँट रहे थे...लेकिन बिना कुछ बोले...

बिना किसी को इशारा दिए....लेकिन बस एक दूसरे को प्यार बाँट रहे थे...

लेकिन ये खामोशी ज़्यादा देर नही चली....और टूट गईईयी...............

एक बहुत ही तेज़ी से ब्रेआकककककककककककक लगा टॅक्सी का....और सब के सब आगे की तरफ

लूड़क पड़े........

और इस बार भी पीछे से आवाज़ आई.....

और इस बार आवाज़ में कुछ बदलाव था.......

बबीता के मुँह से और जेठालाल के मुँह से एक साथ ही चीख निकली............

अवववववववववववववववववववववववववव..ओह...

अहह...

दया और अंजलि भी आगे की तरफ लुड़की...लेकिन उनके मुँह से इतनी तेज़ आवाज़ नही निकली.....

आगे तारक को भी झटका लगा...वो भी आगे की तरफ गिरा....आह...बस उसके मुँह से इतनी

ही आवाज़ निकली.......

तारक फ़ौरन पीछे मुड़ा.....

तारक :- जेठालाल..बबीता जी क्या हुआ......

बबीता के गाल बिल्कुल लाल थे....जैसे किसी ने रेड लिपस्टिक से चेहरा भर दिया हो.....

जेठालाल की तो शक़्ल...की बॅंड बज चुकी थी..

(बॅक ग्राउंड. म्यूज़िक........फ्लश चलने वाली आवाज़...) (डिस्क्राइब नही कर सकता...आप सब इमॅजिन कर लीजिए)

दया :- हाँ टप्पू के पापा...इस बार क्या हुआ आपको...

जेठालाल :- अपनी शकलें बनाते हुए.....

टॅक्सी ड्राइवर पे चढ़ गया....

आई भाई..कैसे चला रहे हो तुम...अभी किसी को ज़्यादा लग जाती तो...

 
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