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Guest
ये बात सुन के सबका दिमाग़ डाइवर्ट हो गया.....और वो भी टॅक्सी ड्राइवर पे चढ़ गये...
तारक :- आई भाई...तुझे कौन सी भाषा में समझाऊ......
कैसे चला रहा है भाई........
टॅक्सी ड्राइवर :- भाई साहब..क्या करूँ आगे वाले ने एक दम ब्रेक लगा दी..
तारक :- अरे तो तू कम स्पीड में चला ना भाई....अभी किसी को लग जाती तो...बेकार
में तो हमारे टूर को सत्या नाश करने में लगा है....
थ्डा पॉज़ हो के....
फिर से बोलना शुरू करता है..
तारक :- अभी देखा ना तूने...कैसे कैसे आवाज़ें निकल रही है.....आहह..ओह्ह्ह...कर रहे हैं..
अब अगली बार ढंग से चलाओ भाई....नही तो पता नही और कौन से किसम की आवाज़ें सुनने
को मिलेंगी...
टॅक्सी ड्राइवर :- जी सर...अब में अच्छे से चलूँगा..और आपको सही सलामत छोड़ दूँगा..आप
टेंशन मत लो..हमारा रोज़ का काम है..
तारक :- भाई तो ढंग से चला....नही तो पीछे की आवज़ों से में पागल हो जाउन्गा..
उस तरफ जेठालाल मन में..
जेठालाल :- हाशह...किसी ने पूछा नही..कि ऐसे क्यूँ चिल्लाए....
इतना सोच ही रहा होता है...कि बॅस..
दया :- अरे टप्पू के पापा...आप क्यूँ चिल्लाए थे इतनी तेज़....क्या हुआ आपको..
जेठालाल अपने मान में....
ये दया को भी चैन नही है.....
जेठालाल कुछ बोलता उससे पहले बबीता बोल पड़ती है...
बबीता :- वो क्या है ना दया भाभी...ब्रेक लगने की वजह से में एक पैर जेठा जी के
पैर के पंजो के उपर पड़ गया..और कुछ ज़्यादा ज़ोर से पड़ा..जिसकी वजह से हुआ....
दया :- ओह्ह अच्छा....
जेठालाल बबीता को देखते हुए.....अपने मन में...
वाह बबीता जी वाह...क्या दिमाग़ पाया है आपने...कितनी बखूबी से बचाया है मुझे..
सलाम है आपको...
बॅस वो इतना सोच ही रहा था कि फिर से...
दया :- लेकिन बबीता जी आपको क्या हुआ था..आप क्यूँ ऐसे चीखी थी....
बबीता को कुछ समझ नही आया कि क्या बोले..
इस बार उसकी मदद जेठालाल ने की.....
तारक :- आई भाई...तुझे कौन सी भाषा में समझाऊ......
कैसे चला रहा है भाई........
टॅक्सी ड्राइवर :- भाई साहब..क्या करूँ आगे वाले ने एक दम ब्रेक लगा दी..
तारक :- अरे तो तू कम स्पीड में चला ना भाई....अभी किसी को लग जाती तो...बेकार
में तो हमारे टूर को सत्या नाश करने में लगा है....
थ्डा पॉज़ हो के....
फिर से बोलना शुरू करता है..
तारक :- अभी देखा ना तूने...कैसे कैसे आवाज़ें निकल रही है.....आहह..ओह्ह्ह...कर रहे हैं..
अब अगली बार ढंग से चलाओ भाई....नही तो पता नही और कौन से किसम की आवाज़ें सुनने
को मिलेंगी...
टॅक्सी ड्राइवर :- जी सर...अब में अच्छे से चलूँगा..और आपको सही सलामत छोड़ दूँगा..आप
टेंशन मत लो..हमारा रोज़ का काम है..
तारक :- भाई तो ढंग से चला....नही तो पीछे की आवज़ों से में पागल हो जाउन्गा..
उस तरफ जेठालाल मन में..
जेठालाल :- हाशह...किसी ने पूछा नही..कि ऐसे क्यूँ चिल्लाए....
इतना सोच ही रहा होता है...कि बॅस..
दया :- अरे टप्पू के पापा...आप क्यूँ चिल्लाए थे इतनी तेज़....क्या हुआ आपको..
जेठालाल अपने मान में....
ये दया को भी चैन नही है.....
जेठालाल कुछ बोलता उससे पहले बबीता बोल पड़ती है...
बबीता :- वो क्या है ना दया भाभी...ब्रेक लगने की वजह से में एक पैर जेठा जी के
पैर के पंजो के उपर पड़ गया..और कुछ ज़्यादा ज़ोर से पड़ा..जिसकी वजह से हुआ....
दया :- ओह्ह अच्छा....
जेठालाल बबीता को देखते हुए.....अपने मन में...
वाह बबीता जी वाह...क्या दिमाग़ पाया है आपने...कितनी बखूबी से बचाया है मुझे..
सलाम है आपको...
बॅस वो इतना सोच ही रहा था कि फिर से...
दया :- लेकिन बबीता जी आपको क्या हुआ था..आप क्यूँ ऐसे चीखी थी....
बबीता को कुछ समझ नही आया कि क्या बोले..
इस बार उसकी मदद जेठालाल ने की.....