पुलिस स्टेशन मैं हुए उस भयानक हत्याकांड की ख़राब पुरे राजनगर मैं फ़ैल चुकी थी देश के बड़े बड़े न्यूज़ चैनल इस खबर को कवर करना छह रहे थे और इस वक़्त पुलिस स्टेशन के सामने रिपोर्टर्स की भरी भीड़ थी, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था के आखिर इतने सरे पुलिस कर्मचारी इतनी बेरहम तरीके से कैसे मारे गए कौन है इस घटना के पीछे, रिपोर्टर्स और रिज़र्व पुलिस फाॅर्स जब तक वहा पहुचे तक तक कालसेना के लोग अपने लोगो की लाशो को वहा से ले जा चुके थे वो अब भी खुल कर सामने नहीं आना चाहते थे अगर उनके बस मैं होता तो शायद ये खबर भी दब जाती लेकिन मामला बड़ा था और इसे दबाना इतना आसन भी नहीं था
इस वक़्त सरे न्यूज़ चैनलों पर सिर्फ राजनगर की ये न्यूज़ दिखाई जा रही थी घर पर अनिरुद्ध शाश्त्री जी सुमित्रादेवी और श्रुति भी ये न्यूज़ देख रहे थे और उन्हें अपने बेटे की चिंता हो रही थी क्युकी न्यूज़ देखते ही वो समझ गए थे के ये सब घटनाये रमण के स्टेशन मैं हुयी है, श्रुति का हाल रोने जैसा था वही सुमित्रादेवी अपने को संभाले हुए थी साथ ही राघव के बारे मैं भी इन्हें कोई खबर नहीं थी
इस वक़्त टीवी पर न्यूज़ चल रही थी जिसका एंकर बोल रहा था "इस वक़्त हम राजनगर के पुलिस स्टेशन मैं खड़े है जहा आज दिन धहदे कई पुलिस वालो को मारा गया है, हैरानी की बात ये है ये आस पास के लोगो ने किसी ने भी कोई गोली की आवाज नहीं सुनी, इन सरे पुलिस कर्मचारियों को बेहद ही क्रूरता के साथ मारा गया है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकेंगे, आसपास के कुछ लोगो से पूछ ताछ मैं उन्होंने बताया की उन्होंने कुछ नीले कपडे पहले लोगो को अंदर जाते देखा था पर उसके बाद क्या हुआ किसी को इस बात की कोई जान करी नहीं, सूत्रों के अनुसार पुलिस स्टेशन मैं उस वक़्त मौजूद कोई भी पुलिस वाला जिन्दा नहीं बच पाया है S.I.रमण शास्त्री की बॉडी अभी तक बरामद नहीं हुयी है शायद वो जिन्दा बच गए हो लेकिन अभी तक उनकी हमारे पास कोई खबर नहीं है, कौन हो सकता है इन सब के पीछे? क्या इसमें हमारे किसी दुश्मन देश का हाथ है? ये आतंकवादी हमला है या कुछ और? इन सब बातो पर चर्चा के लिए देखे हमारा विशेष कार्यक्रम अब से कुछ ही देर मैं रात ९ बाते, कैमरा मैन गौरव के साथ मैं अविनाश +२४ न्यूज़"
न्यूज़ सुन कर श्रुति और सुमित्रादेवी का बुरा हाल हो रहा था पर कही न कही उन्हें लग रहा था के रमण ठीक होगा
श्रुति-मम्मी जी मैं तब से इनका फ़ोन लगा रही हु लग नहीं रहा है राघव भैया भी फ़ोन नहीं उठा रहे है
सुमित्रादेवी-तुम फ़ोन लगाती रहो कुछ जरूर पता चलेगा
वही अनिरुद्ध जी कुछ सोच रहे थे और अचानक वो खड़े हुए
अनिरुद्ध-चिंता मत करो बहु रमण को कुछ नहीं होगा और राघव भी ठीक होगा तुम उन्हें फ़ोन लगाती रहो और कुछ पता चले तो मुझे सूचित करना मैं आता हु
सुमित्रादेवी- आप कहा जा रहे है पहले ही हमारे दोनों बेटो का कुछ पता नहीं है ऐसे मैं आप
अनिरुद्ध-ये सुनिश्चित करने जा रहा हु के मेरे दोनों बच्चे सुरक्षित रहे, मेरी चिंता मत करो महादेव मेरे साथ है मुझे कुछ नहीं होगा, एक ऐसे व्यक्ति से मिलने जा रहा हु जहा से मुझे आशा मैं की मैं खली हाथ नहीं आऊंगा
सुमित्रादेवी-पर.....
सुमित्रादेवी कुछ कह पाती इससे पहले ही अनिरुद्ध शास्त्री वह से निकल गए, वो कहा जा रहे थे ये केवल उनका मन जानता था.....
वही दूसरी तरफ नरेश राघव और रमण को अपनी कहानी सुना रहा था की कैसे उसके भाई ने रूद्र को बनाया और जब कालसेना ने उसके परिवार को मार दिया तब से वो और रूद्र उसने भीड़ रहे है और कैसे उन्होंने अपने जैसे लोगो को खोज कर कालसेना के खिलाफ अपनी एक टीम तयार की है तभी वहा अरुण आ पंहुचा
अरुण के चेहरे पर चिंता साफ़ देखि जा सकती थी, रात का समय हो चला था और मौसन भी बिगड़ने लगा था अरुण काफी चिंतित चेहरे के साथ सोफे पर जा बैठा उसके हाथ मैं एक किताब थी
नरेश-अरुण तुम तो आधी रात तक आने वाले थे इतनी जल्दी कैसे आ गए? रमण राघव इनसे मिलो हमारे वेपन एक्सपर्ट अरुण जो आर्मी मैं कमांडो भी रह चुके है और अब कालसेना से लड़ने मैं हमारी मदद कर रहे है, पुलिस स्टेशन पर कालसेना के हमले की सुचना हमें अरुण ने ही दी थी
अरुण-मैं एक बुरी खबर लाया हु नरेश भाई, आज रात कुछ तो बड़ा होने वाला है हो सकता है शायद अंतिम कुर्बानी?
राघव-पर उसमे तो अभी समय है अंतिम कुर्बानी तो आने वाली पुरनमासी को होगी
अरुण-ये लोग किसी मुहूर्त का इंतजार नहीं करते बच्चे यदि इन्होने किसी को पकड़ा होगा तो कुर्बानी आज ही होगी पर मेरी जानकारी मैं अभी तक कालसेना को आखरी कुर्बानी नहीं मिली है.....
नरेश-मुझे लगता है तुम व्यर्थ चिंता कर रहे हो अरुण हो सकता है ऐसा कुछ न हो
रमण-पर आपको ये सब कैसे पता है? मतलब पहले पुलिस स्टेशन वाली घटना और अब ये??
अरुण-तुम्हे शायद जानकार हैरानी हो इंस्पेक्टर, मेरे पिता इन मे से एक थे, वो इन अन्धविश्वासी कालसैनिको मैं से एक थे और जब उन्हें कोई कुर्बानी नहीं मिली तो उन्होंने मेरी आँखों के सामने मेरी माँ को कुर्बानी के नाम पर जला कर मार डाला था, उस समय मैं छोटा था जिसके बाद मैंने ठान लिया था इस कालसेना को ख़तम करने का, जितनी अच्छी तरह मैं कालसेना को जानता हु उनता शायद यहाँ मौजूद कोई नहीं, मेरा अपना एक नेटवर्क है जिसके जरिये मुझे ये खबरे मिलती रहती है,
रमण-आपकी कहानी सुन कर दुःख हुआ और मैं आपके लड़ने के जज्बे की करदा करता हु, मेरी जान बचने का शुक्रिया अगर आप रूद्र को न भेजते तो शायद मैं यहाँ नहीं होता
रूद्र-पर अरुण भाई आप गए कहा था और ये आपके हाथ मैं क्या है?
अरुण-मैं अपने घर गया था रूद्र अपने बाप के घर जहा उसका सामान पड़ा हुआ था ये देखने की कही उसके सामान मैं हमें कोई ऐसी चीज़ मिल जाये जो हमारी इस लडाई मैं मदद करे और वहा मुझे ये मिली, ये किताब जिसकी ये कालसैनिक पूजा करते है
अरुण ने वो किताब सबको दिखाते हुए कहा
नरेश-क्या ये वही है जो मैं सोच रहा हु?
अरुण-काले जादू की किताब जिसका लेखक स्वयं कालदूत को माना जाता है, मेरे पिता की है, कभी सोचा नहीं था की मैं इसे देखूंगा
नरेश-मुझे लगा था ये एक ही है
अरुण-कालदूत ने तो एक ही दी थी पर कालसैनिको ने इसकी प्रतिया तयार की है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे जुड़े
रूद्र-इसे खोलकर देखो पता चले इसमें क्या राज दफ़न है
उनलोगों ने उस ख़िताब के पन्ने पलटे, शुरवाती पन्नो मैं तो कुछ बेहद ही विभत्स रीती रिवाज थे जो कालसैनिक बनने की प्रक्रिया मैं करने पड़ते थे जैसे भैसे का सर काटकर खाना और सिर्फ कंकाल छोड़ना, मनुष्य की आंते निकालकर खाना आदि, ऐसे चित्र देख कर वहा मौजूद हर कोई घृणा से भर गया
रमण-काफी भयानक चित्र है पर ये भाषा क्या है
राघव-ये इस दुनिया की भाषा नहीं है
राघव के इतना बोलते ही सब उसकी तरफ देखने लगे
नरेश-तुम ये भाषा पढ़ सकते हो??
राघव-पता नहीं मैं ये कैसे कर पा रहा हु पर हा मैं इसे पढ़ सकता हु, ये किताब काले जादू का भंडार है, इसमें ऐसी सिद्धियों का वर्णन है जो यदि किसी एक इंसान के पास हो तो वो पुरे ब्रह्माण्ड पर राज कर सकता है
नरेश-लगता है तुममे किसी भी भाषा को समझने की भी काबिलियत है
राघव-पता नहीं शायद
संजय-पर ये भाषा जब इस दुनिया की नहीं है तो ये उन कालसैनिको को कैसे समझ मैं आ सकती होगी?
नरेश-ये समझना इतना भी मुश्किल नहीं है संजय....कालदूत उनसे मानसिक तरंगो द्वारा जुडा हुआ है वो इसे आसानी से समझ सकते है
ये लोग इन सब के बारे मैं बात ही कर रहे थे की दरवाजे पर दस्तक हुयी
रूद्र-इस समय कौन हो सकता है??
नरेश-मैं देखता हु...
नरेश ने जब दरवाजा खोला तो उसके सामने अनिरुद्ध शास्त्री खड़े थे........
नरेश ने जब दरवाजा खोला तो सामने अनिरुद्ध शास्त्री खड़े थे, उन्हें वहा देख कर पहले तो नरेश चौका, उसे कभी उम्मीद ही नहीं थी के अनिरुद्ध उससे मिलने आएगा
नरेश- अनिरुद्ध भैया आप आइये अंदर आइये
अनिरुद्ध अंदर आकर नरेश से कुछ बात करता या बोलता इससे पहले ही उसकी नजर राघव और रमण पर पड़ी...
राघव-बाबूजी आप यहाँ??
अनिरुद्ध-तुम दोनों यहाँ और रमण तुम्हारे पुलिस स्टेशन मैं आज इतनी भयानक घटना हुयी है हम सबको तुम्हारी चिंता हो रही है, श्रुति कब से तुम दोनों भाइयो का फ़ोन तरी कर रही है....बात क्या है तुम यहाँ क्या कर रहे हो??
नरेश-मैं बताता हु भैया आप बैठिये...
फिर नरेश ने अनिरुद्ध शास्त्री को सारी बात बताई की कैसे रूद्र ने रमण को बचाया वगैरे जिसके बाद
अनिरुद्ध- रूद्र, नरेश मैं जिन शब्दों मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा करू समझ नहीं आ रहा है
नरेश-ये आप कैसी बात कर रहे है भैया राघव और रमण की सुरक्षा करना मेरा फर्ज था, अफ़सोस इस बात का है के अगर गुरूजी के कहे मुताबिक मैं राघव से मिल लेता तो शायद आज दुनिया पर इतना बड़ा खतरा न मंडरा रहा होता पर आपने.....
रमण-आप नरेश जी को कैसे जानते है पिताजी?
अनिरुद्ध- वो..
नरेश-ये कैसा सवाल है रमण....मैं अभी तुम्हे बताया था के मैं और मेरा भाई महेश गुरूजी के साथ रहते थे जाहिर है मैं अनिरुद्ध भैया और भाभी को अच्छी तरह जानता हु...
अनिरुद्ध-मैं डर गया था नरेश, पिताजी के जाने के बाद मैं अपने बच्चो को किसी मुसीबत मैं नहीं देखना चाहता था और यहाँ तो पिताजी ने राघव के कंधो पर पूरी दुनिया का जिम्मा डाला था..
राघव-मतलब आप को इन सब के बारे मैं पहले से खबर थी
अनिरुद्ध-हा, पिताजी ने जो बाते तुम्हारे बारे मैं नरेश को चिट्ठी मैं बताई थी वो उन्होंने मुझसे कहा था लेकिन मैं नहीं चाहता था के तुम इस तरह के किसी खतरे मन पड़ो इसीलिए मैंने कभी तुमसे इस बारे मैं कोई बात नहीं की राघव, नरेश जब अमेरिका से लौट कर तुमसे मिलना चाहता था तब मैंने ही उसे रोका था, पर नियति को जो मंजूर होता है वही होता है तुम आज यहाँ पहुच ही गए
नरेश-मैं आपकी चिंता समझता हु भैया....
अनिरुद्ध-पिताजी सही कहते थे आप कितनी ही कोहिश क्यों न कर लो जो होना है वो होकर ही रहता है खैर जो हुआ सो हुआ अब मैं उन लोगो से लड़ने मैं क्या मदद कर सकता हु बताओ...
रमण-ये काम हम पर ही छोडिये पिताजी आप घर जाइये और माँ और श्रुति से कहिये की मैं और राघव ठीक है कुछ काम ख़त्म करके जल्द ही आते है...
अनिरुद्ध-पर...
राघव-भाई सही कह रहा है पिताजी....
ये सब बाते यहाँ चल ही रही थी तभी अरुण को किसी का फ़ोन आया जिसे सुन कर उसका चेहरा गंभीर हो गया..
अरुण-नरेश भाई बुरी खबर है..मेरा शक सही निकला आज रात कुछ बड़ा होने वाला है कालसैनिक अंतिम कुर्बानी की तयारी कर रहे है....
नरेश-क्या??
अरुण-हा हमारे पास समय बहुत कम है
नरेश-रमण तुम भैया को घर छोड़ आओ और मुझे यही आकर मिलो तब तक हम आगे की रणनीति सोचते है..
रमण-ठीक है....
वही दूसरी तरफ...
इस वक़्त रात के १२ बज रहे थे और राजनगर मं भरी बारिश शुरू हो गयी थी, समय समय पर थर्रा देने वाली बिजली भी चमक उठती थी लेकिन बारिश या बिजली का असर उन काले लम्बे चोगे वाले नकाबपोशो पर नहीं पड़ रहा था जो उस विशाल कब्रिस्तान मैं भरी तादाद मैं मौजूद थे जहा रोहित की बलि दी गयी थी...
सुशेन एक उची जगह पर खड़ा होकर अपनी बुलंद आवाज मैं सबको संबोधित कर रहा था
सुशेन-मेरे दोस्तों! १००० वर्ष बाद अब जाकर हमें लोगो के बीच छिपने की जरुरत नहीं रहेगी क्युकी आज रात आखरी कुर्बानी की रात है जो इतने समय से चले आ रहे कुर्बानियों के चक्र को तोड़ेगी.....हमारा देवता समुद्रतल की गहरायो से आजाद होकर इस धरती पर राज करेगा....मैं जानता हु पिछले कुछ दिन हमारे लिए अच्छे नहीं रहे है...उन तुच्छ मनवो ने आज मेरे भाई को मार दिया, मैं इस दुखद घटना के कारण शोक मैं डूब गया था लेकिन कुछ समय बाद मुझे समझ आया के मेरे भाई का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए, शक्ति के अंत के बाद ब्लू हुड पूरी तरह बिखर गया था मैंने उन्हें हमारे साथ शामिल कर लिया है, हमारे पास जितने अधिक लोग होंगे लक्ष्य तक पहुचना उतना ही आसान होगा, इससे कालसेना की सिमित संख्या मैं बढ़ोतरी हो चुकी है....मेरे साथ दोहराओमहान भगवान कालदूत की.....
कालसैनिक एकसाथ- जय!!!
सुशेन-महान कालदूत अमर रहे!!
कालसैनिक- अमर रहे कालदूत.....!!
कालदूत का जयकारा लगाने मैं सबसे आगे संतोष खड़ा था......
वही राघव नरेश और बाकि सब घर पर तयारियो मैं जुटे थे, रूद्र खिड़की के बाहर देख रहा था नरेश उसके पास जाकर खड़ा हो गया
रूद्र-आज की रात बहुत काली है नरेश जी, बारिश भी तेज है....
नरेश-इतनी फ़िक्र मत करो लड़के
अरुण-हा रूद्र अब इन कालसैनिको पर आखरी वार करने का वक़्त है, वो अपना रिवाज पूरा करने किसी को ढूंढ रहे होंगे हमें उनपर पूरी ताकत से हमला करना है....
रूद्र-अगर मेरे पास उनका पता हो तो मैं अभी जाकर उन सब को ख़त्म कर सकता हु आप लोगो को आने की जरुरत नहीं है...
रमण-लेकिन तुम्हे नहीं पता की वो लोग इस वक़्त कहा पर है और सारे कालसैनिक एक जगह तो मिलेंगे नहीं, उनका प्लान होगा अलग अलग जगह से लोगो को उठाने का प्रयास करे, उन्हें नाकाम करने के लिए हमें भी बिखरना होगा
रमण ने अंदर आते हुए कहा....
संजय-अब हमारा प्लान क्या है आगे क्या करना है?
नरेश-राजनगर मैं कुछ ही ऐसे संवेदनशील हिस्से मैं जहा पर आजतक कालसेना ने हमला किया है जब मैंने इन हिस्सों को मार्क करना शुरू किया तो मुझे समझ मैं आया की असल मैं तीन ही ऐसी जगह है जहा ये कालसेना के लोग हमला करते है, अब हमें भी उन्हें ढूंढने के लिए तीन टीम्स मैं बटना होगा, उत्तर दिशा की तरफ रूद्र अकेला जायेगा क्युकी उसपर काले जादू का telekinesis का असर नहीं होता है, पूरब मे मैं और अरुण जायेंगे और दक्षिण मैं राघव संजय और रमण, रूद्र के अलावा हम सबको उनका सामना करने के लिए हथियारों की जरुरत होगी क्युकी हम मे से कोई भी रूद्र जैसा अभेद्द नहीं है, राघव हो सकते तो अपनी शक्तियों को पहचानने की कोशिश करो हमें तुम्हारी जरुरत है बच्चे, अपनी रफ़्तार और बहुबल हो पहचानो, तुम यहा अकेले ऐसे इंसान हो जो कालसैनिको का खात्मा चंद पालो मैं कर सकते हो तुमसे हमें बहुत उमीदे है
राघव-मैं पूरी कोशिश करूँगा
नरेश-पहले हम छिपकर उनकी गतिविधि देखेंगे, उनका कोई गुप्त अड्डा जरूर होगा जहा पर वो सब मिलते होंगे और आज जब वो आखरी कुर्बानी ढूंढने निकले है तो सारे कालसैनिक एक जगह जरूर इकठ्ठा होंगे, हम बस चुप चाप उनका पीछा करके वो गुप्त स्थान ढूंढेंगे और फिर बिना नजरो मैं आये RDX प्लांट करेंगे और पूरी जगह ही उड़ा देंगे और अगर फिर भी कोई कालसैनिक बच गया ओ उसके लिए हथियारों का इंतजाम अरुण ने कर दिया है, देखते ही मार देंगे उन्हें बस ध्यान रहे उन्हें मौका नहीं मिलना चाहिए वरना आखरी कुर्बानी हम मैं से किसी की होगी, सभी को गुड लक
सभी लोग घर के बाहर निकले, अबतक बारिश हलकी हो चुकी थी और हवा मैं ठण्ड के साथ नमी भी बढ़ चुकी थी लेकिन रात का अँधेरा और सन्नाटा बरक़रार था साथ ही रह रहकर बिजली भी जोरो से कड़क रही थी, तीनो टीम के लोग आपस मैं एकदूसरे से गले मिले और रूद्र नरेश के पास आया
रूद्र(झिझकते हुए)- देखिये...अगर आपको वो लोग मिले तो आपको मुझे या राघव को कॉल करना है खुद कोई एक्शन नहीं लेना है
नरेश-मैं समझता हु रूद्र तुम्हे मेरी चिंता है लेकिन अगर हमारा प्लान काम कर गया तो चिंता की कोई बात नहीं है
रूद्र-कुछ चांस ये भी है के हमारी योजना काम न करे फिर हम क्या करेंगे? आप जानते है आपके सिवा मेरा दुनिया मे कोई नहीं है मैं नहीं चाहता आपका हाल आपके भाई और मेरे निर्माता जैसा हो...
नरेश-मैं वादा करता हु की अगर मुझे कुछ गड़बड़ लगी तो तुम्हे या राघव को कॉल करूँगा खुद कोई एक्शन नहीं लूँगा, अब मेरी चिंता करने का वक़्त नहीं है बल्कि धावा बोलने का वक़्त है
फिर तीनो टीम्स अपने लक्ष्य की तरफ रवाना हुयी, रमण संजय और राघव रमण की जीप मैं जिसके पीछे वाली सीट पर उन्होंने अरुण के दिए हुए हथीयार रखे थे, नरेश और अरुण अरुण की गाड़ी मैं जिकसी डिक्की मैं भी काफी हथीयार थे और रूद्र अपनी बाइक पर बैठकर अपनी लोकेशन की तरफ रवाना हुआ.....
अरुण और नरेश तेजी से अपनी गाड़ी मैं पूरब दिशा की और बढ़ रहे थे, जिस तरफ वो लोग इस वक़्त जा रहे थे वो कुछ कुछ जंगली इलाका था, समय समय पर गीदड़ और भेडियो की मनहूसियत भरी आवाज से वातावरण गूंज रहा था लेकिन उनके पास इन सब बातो पर ध्यान देने का वक़्त नहीं था.
वो एक ऐसे इलाके मैं पहुचे जहा सड़क और संकरी हो गयी थी और चारो तरफ जमीन पर छोटी छोटी झाड उगी हुयी थी, दूर दूर तक एक भी स्ट्रीटलाइट नहीं थी, इंसान तो छोडो कोई जानवर भी नजर नहीं आ रहा था, ख़राब इंटरनेट की वज्र से नरेश के मोबाइल का जीपीएस ढंग से काल नहीं कर रहा था और इसी वजह से मजबूरन उन्हें कागज का नक्षा खोलकर देखना पड़ा..
नरेश-नक़्शे के हिसाब से तो यही वो जगह है जाया ये कालसैनिक एक बार नहीं बल्कि कई बार देखे जा चुके है, यहाँ से कई लोगो सारे को गायब किया है उन्होंने
अरुण-इसका मतलब हमें गाडी की गति धीमी कर लेनी चाहिए और सतर्क हो जाना चाहिए, इस प्रकार की अँधेरे और वीरान जगह पर वो लोग कही भी घात लगा कर बैठे हो सकते है हमें काफी सावधानी बरतनी होगी
नरेश-वो तो ठीक है अरुण पर तुम ज्यादा जोश मैं मत आ जाना, हमें पहले छिपकर चुपचाप चीजों का अवलोकन करना है उन्हें शक नहीं होना चाहिए
अरुण-मैं ये बात जानता हु नरेश भाई मुझे पता है की ये सब कितना जरुरी है
नरेश-और और बात है अरुण
अरुण-तो बोलिए न नरेश भाई
नरेश-अगर वो लोग मुझे पकड़ ले तो तुम तेजी से निकल जाना पहले अपनी जान बचाना समझे...
अरुण-पर आप ऐसा सोच ही क्यों करे है? हमारा प्लान जरूर कामयाब होगा और अगर उनलोगों ने आपको कुछ भी किया तो रूद्र हर एक के दस टुकड़े कर देगा.
नरेश-इसी बात का तो डर है
अरुण-मतलब?
नरेश-रूद्र कोई इंसान तो है नहीं न अरुण, मतलब मेरी या तुम्हारी तरह नहीं, वो बिना ज्यादा सोचे लोगो को निर्दयता से मार देता है, हालाँकि ये कालसैनिक जिन्दा छोड़े जाने के लायक भी नहीं है पर कभी कभी मैं सोचता हु के अगर रूद्र इंसानियत के विपक्ष मैं लड़ा तो क्या होगा? राघव ही केवल एकमात्र ऐसा इंसान है जो रूद्र की क्षमताओ पर काबू कर सकता है बस वो जल्द से अपने अप को जान ले
अरुण(मजाकिया अंदाज मे)-वो सब तो ठीक है नरेश भाई पर पहले फिलहाल तो हमें अपने लक्ष्य परे ध्यान देना चाहिए, वैसे भी आप इस तरह के काम के लिए बूढ़े हो चले है
नरेश(मुस्कुराकर)- हा हा और तुम तो अभी बच्चे हो न
तभी अचानक अरुण ओ गाड़ी के ब्रेक लगाने पड़े और नरेश को झटका महसूस हुआ, एक व्यक्ति सड़क पर बेहोश पडा हुआ था
नरेश-लगता है उनलोगों को उनका शिकार मिल गया, इसे किसी कारण उन्होंने यहा छोड़ दिया, तुम इसे उठा लो और एम्बुलेंस को फ़ोन कर दो
अरुण-रुको नरेश भाई! गाड़ी से उतरना ठीक नहीं होगा ये उनलोगों की कोई चाल भी हो सकती है
नरेश-और अगर चाल नहीं हुयी तो? एक जिर्दोश मारा जायेगा अरुण, अपनी बन्दूक उठाओ और सावधानी से जाकर चेक करो
बारिश और कदक्तो बिजली माहोल को और भिज्यदा भयानक बना रही थी, इस माहोल मैं अरुण गाडी से बाहर निकला, वातावरण मैं अब कुत्तो और बिल्लियों की मनहूस आवाजे भी शामिल हो गयी थी, अरुण धीरे धीरे बन्दूक लेकर बेहोश व्यक्ति की तरफ बढा, उसने धीरे से उस व्यक्ति को देखने के लिए उसे हाथ लगाया ही था के तभी अचानक उस बेहोश पड़े व्यक्ति ने अरुण के गर्दन को पकड़ लिया और एक 'चटाक' की आवाज़ हुयी और उसी के साथ ही अरुण की जान चली गयी, नरेश गाड़ी मैं बैठ ये नजारा देख चूका था और अब वो घबराने लगा था,
वो व्यक्ति उठा और उसने अपना काला चोगा और नकाब पहना और अरुण को वही सड़क पर मरा छोड़कर वो व्यक्ति गाडी की तरफ बढ़ा, अब तक नरेश गाडी का स्टीयरिंग संभाल चूका था, उसने तेजीसे गाडी को उस इंसान की तरफ बढाया लेकिन उस व्यक्ति ने केवल अपना हाथ हवा मैं उठाया और गाडी बंद पड गयी, नरेश ने कई बार चाबी घुमाकर गाडी दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ,
उस व्यक्ति के हाथो मैं फिर से हरकत हुयी और अबकी बार गाडी का पूरा दरवाजा उखाड़कर निकल गया, उस इंसान ने कुछ देर नरेश को घुरा और फिर उसके करीब आया, नरेश अबतक उस आदमी का चेहरा ठीक ढंग से देख नहीं पाया था और उसने अरुण को मारते ही नकाब पहन लिया था और अब उस इंसान से नरेश को घूरते हुए फिर से अपना काला नकाब उतारा.....
वो कोई और नहीं सुशेन था और इस वक़्त उसके चेहरे पर अजीब सा वहशिपन था! उसने नरेश को गाडी से बाहर खिंच लिया, नरेश ने एक जोरदार मुक्का उसके चेहरे पर जड़ना चका लेकिन उसने नरेश का हाथ पकड़ कर जोर से भींच दिया जिससे नरेश की हथेली की हड्डियों का कचूमर बन गया जिससे नरेश की चींख निकल गयी, नरेश की चींख ने उस सुनसान माहोल को बुरी तरह देहला दिया, फिर सुशेन ने एक जोरदार घुसा नरेश के पेट मैं जादा जिससे उनके मुह से खून आने लगा, अब नरेश पूरी तरफ अशक्त होकर जमीन पर पड़ा हुआ था.....
सुशेन-तुम लोग मेरे भाई के मौत के जिम्मेदार हो.
सुशेन ने काफी क्रोध मैं कहा
नरेश-तुम...तुम्हे कैसे पता?
सुशेन-जब पुलिस स्टेशन मे रूद्र ने शक्ति को मारा और इस इंस्पेक्टर और उसके भाई को लेकर तुमसे मिलने आया तब भी मेरे लोग बेहद सावधानी से उनका पीछा कर रहे थे, उन्हें तुम्हारी लोकेशन मिल गयी, हम चाहते तो किसी भी वक़्त तुम्हारे घर पर हमला कर सकते थे लेकिन हमसे सही मौके का इंतजार किया और तुम तक हमारी खबर पहुचाई और हमें मौका मिल गया जब तुम लोग अलग अलग रस्ते हमारी तलाश मैं निकले
नरेश-म...मतलब तुम्हे पुरे समय हमपर नजर राखी?
सुशेन-हा हा हा, हमने इस मामले मैं तुमसे थोडा ज्यादा होशियारी से काम किया लेकिन चिंता मत करो, तुम्हारी मृत्यु को हम ऐतहासिक बनायेंगे, क्युकी तुमको हम मौका देंगे वो अंतिम कुर्बानी बनने का को कालदूत के लिए इस दुनिया का मार्ग प्रशस्त करेगी.....
फिर सुशेन ने एक जोरदार घुसा नरेश को जड़ा जिससे उसका दिमाग बेहोशी के अँधेरे मैं डूबता चला गया, फिर उसके बेहोश शारीर को अपने कंधे पर डालकर सुशेन एक और बढ़ता चला गया
दूसरी तरफ राघव जो रमण और संजय के साथ निकला था उसे किसी अनहोनी घटना का आभास होने लगा, उन्हें अब तक अपने मार्ग मैं कोई भी ऐसी चीज़ या हरकत नहीं दिखी थी जो इस और इशारा करे करे की यहाँ कालसेना की मौजूदगी होसकती है
राघव ने अरुण और नरेश ने संपर्क बनाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ उनका फ़ोन नहीं लग रहा था और जब राघव की कई कोशिशो ने बाद भी नरेश का फ़ोन नहीं लगा तो उसे चिंता होने लगी और उसने रूद्र को फ़ोन लगाया
रूद्र बाइक से तेजी से बढ़ रहा था तभी उसका फ़ोन बजा और उसने फ़ोन उठाकर कान को लगाया
राघव-रूद्र! मैं राघव बात कर रहा हु
रूद्र-हा! क्या हुआ है सब ठीक है न?
राघव-हमारे पास सब ठीक है लेकिन अरुण और नरेश जी से हमारा संपर्क टूट गया है
रूद्र-शायद बारिश की वजह से ऐसा हो..!
राघव-काश ऐसा ही हो वैसे हमें यहाँ किसी भी कालसैनिक का नामोनिशान नहीं मिला है तुम कहो
रूद्र-अभी तक तो नहीं...
राघव-तो क्या नरेश जी और अरुण......रूद्र मेरे मन को किसी अनहोनी का आभास हो रहा है
राघव की बात सुनकर रूद्र भी बुरी तरह आशंकित हो गया उसे अचानक कुछ याद आया और उसने राघव की बात को बीच मैं काटकर पूछा
रूद्र-रमण ने किसी कब्रिस्तान के बारे मैं बताया था कुछ!
राघव-हा एक पुराना कब्रिस्तान है जहा भाई को रोहित नाम के एक इंसान की जली हुयी लाश मिली थी मैं जानता हु उस जगह के बारे मैं
रूद्र-तुम सबको लेकर तुरंत वहा पहुचो मैं भी पहुच रहा हु बस एक बात का ध्यान रखना राघव मेरे आये तक प्लीज कोई एक्शन मत लेना मेरा इंतजार करना
राघव-ठीक है...
उसके बाद राघव ने रमण और संजय को ये बात बताई और वो लोग उस कब्रिस्तान की और निकल गए और रूद्र ने भी अपनी बाइक उस कब्रिस्तान की और मोड़ ली.....
राघव संजय और रमण अपनी जीप से कुछ ही समय मैं कब्रिस्तान पहुच गए थे और उन्होंने अपनी जीप कब्रिस्तान से कुछ दूर पहले ही कड़ी कर दी थी ताकि उसकी आवाज से कही कालसैनिक सतर्क नहो जाए फिर जीप की पिछली सीट से एक एक रायफल उठाकर वो सावधानी से कब्रिस्तान की और बढे, कब्रिस्तान के बाहर लोहे के गेट के बगल मैं एक बरगद का पेड़ था वो लोग उसकी ओट मैं छिप गए,
वहा से कब्रिस्तान के अंदर का दृश्य देख पाना इतना आसन नहीं था क्युकी अँधेरा होने के कारण दूर तक ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन कब्रिस्तान के अंदर से आ रही आवाजो को सुना जा सकता था, ये आवाजे उनलोगों को दूर से ही सुने दे रही थी जिससे इतना तो तय हो चूका था के ये लोग अंदर की है और कुछ भरी गड़बड़ कर रहे है
रमण(फुसफुसाकर)- ये क्या! ये लोग तो अंदर कोई मंत्र वगैरा पढ़ रहे है
राघव-इन्हें अंतिम कुर्बानी मिल गयी है भैया ये वही मंत्र है जो मैंने उस किताब मैं देखे थे, इनकी तो....! मैं इन्हें अभी ख़त्म कर दूंगा..!
संजय-रुको राघव! गुस्से मैं बेवकूफी के कदम नहीं उठाया करते, तुम पूरी तरह टायर नही हो, हमें रूद्र का इंतजार करना है, देखो वो भी आ गया है
संजय को रूद्र दूर से आता हुआ दिखाई दिया, रूद्र ने अपनी बाइक उनकी जीप के पास कड़ी कर दी और तेजी से उनलोगों के पास पंहुचा
रूद्र-क्या चल रहा है?
राघव-उन लोगो को अंतिम कुर्बानी मिल गयी है
रूद्र-अच्छा है ये सब एक जगह है, मैं उन कमीनो को छोडूंगा नहीं तुम लोग यही रुको
राघव-तुम नहीं हम मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा
रूद्र-तुम तयार हो
राघव-बिलकुल ज्यादा नहीं तो उनके दिमाग मैं घुस के उनकी नसे तो फाड़ ही सकता हु
रूद्र-ठीक है तो फिर चलो आज इनका काम ही ख़तम कर दे
रमण-रुको हम भी चलते है
रूद्र-क्या आप मेरी तरह कृत्रिम मानव है या आपके पास राघव के जैसी शक्तिया है
रमण-आ....नहीं
रूद्र-तो फिर अप दोनों यही रुके, मेरा तो यर लोग वैसे भी जादू टोने से कुछ बिगाड़ नहीं सकते और राघव अपनी शक्तियों से इन्हें मसल देगा बस अगर कोई कालसैनिक हमसे बचकर बाहर भागने का प्रयास करे तो उसे गोली मारने मैं देर मत कीजियेगा, अपने हथियार तयार रखिये
राघव-रूद्र सही कह रहा है भाई....
फिर कुछ पल के लिए राघव ने वही आसन लगा कर अपनी आँखें बंद की और ध्यान की मुद्रा मैं बैठ गया मनो अपनी शक्तियों का आकलन कर रहा हो और जब उसने अपनी आँखें खोली तो उसकी आँखें हलके हरे रंग मैं चमक रही थी और उसके होठो पर एक मुस्कान थी और मस्तिक्ष एकदम शांत, अब राघव जानता था की उसे क्या करना है
वही रूद्र धडधडाते हुए कब्रिस्तान मैं घुस गया लेकिन वहा का दृश्य देख कर उसका खून खुल उठा, कालसैनिक गोल घेरा बनाकर मंत्रोच्चारण कर रहे थे और उनके घेरे के ठीक बीच मैं बुरी तरह से घायल नरेश अर्धबेहोशी की अवस्था मैं दिवार मे के एक बड़े से टुकड़े मैं गडी हुयी लोहे की जंजीरों से बंधा हुआ था
रूद्र को देखते ही मंत्र का उच्चारण करते कालसैनिक एकदम से रुक गए और रूद्र ने गुस्से मैं अपनी मुट्ठिया भींच ली
यहाँ राघव ने जैसे ही आंखन खोली तब तक रूद्र कब्रिस्तान मैं जा चूका था तो राघव ने भी उसके पीछे दौड़ लगा दी पर इस बार उसकी गति अकल्पनीय रूप से बढ़ी हुयी थी वो पलक झपकते ही रूद्र के पास खड़ा था मनो उसने एक जगह से दूसरी जगह टेलिपोर्ट किया हो, राघव खुद अपनी गति से चौक गया था पर ये समय इन सब के बारे मैं सोचने का नहीं था सामने का नजारा देख कर राघव भी गुस्से से उबलने लगा तभी रूद्र क्रोध मैं आकर बोला
रूद्र-तुम लोगो की यह हिम्मत जो नरेशजी को कैद करो!! मैं तुममे से किसी एक भी जिन्दा छोड़ने वाला नहीं हु
राघव वहा मौजूद सभी कालसैनिको की मानसिक स्तिथि का अंदाजा लगा सकता था उसने जैसे ही कब्रिस्तान के मैंदान मैं चारो तरफ नजर दौडाई उसी के साथ वो अपनी शक्तियों से वहा मौजूद सभी के दिमाग से मानसिक रूप से जुड़ चूका था पर वो एकसाथ सब पर हमला नहीं कर पा रहा था पर उनके दिमाग को भाप रहा था ,रूद्र की गुस्से भरी गर्जना सुन कर कालसैनिक कुछ समय के लिए घबराये जरूर थे पर उनमे डर का नामोनिशान नहीं था
रूद्र तेज कदमो से उस घेरे की तरफ आगे बढ़ने लगा तभी अचानक किसी ने उसे एक जोरदार लात मार कर दूर फेक दिया,, रूद्र के जीवन मैं ये पहली बार था के वो किसी के प्रहार से इतनी दूर जाकर गिरा था वही इस बात ने राघव को भी चौका दिया था क्युकी जो रूद्र की क्षमता को जनता था और अगर किसी ने रूद्र को एक लात मैं इतनी दूर फेका है तो वो कोई मामूली इंसान नहीं हो सकता, राघव और रूद्र दोनों ने रूद्र पर हमला करने वाले को देखा तो सामने चेहरे पर राक्षसी भाव लिए सुशेन खड़ा था, उसकी आँखों की पुतलिया पूरी तरह लाल हो चुकी थी जिसके कारण वो बेहद भयानक लग रहा था
सुशेन(कुटिलता से मुस्कुराते हुए)- तो अब हम दोबारा मिल गए! और तुम अपने साथ इस बच्चे को भी ले आये, अगर मुझे पहले पता होता की तुम इस तुच्छ इंसान को अपने साथ लाने वाले हो तो अंतिम कुर्बानी के लिए इस बुड्ढे को नहीं चुनता मैं
राघव-अभी तुम्हे पता चल जायेगा की तुच्छ कौन है
और राघव ने सुशेन की तरफ दौड़ लगा दी और पलक झपकने भर मणि राघव ने सुशेन को पूरी ताकत से एक मुक्का जड़ दिया पर उसका सुशेन पर इतना खास प्रभाव नहीं परा पर इतना उसे समझ आ गया था के राघव कोई मामूली इंसान नहीं है, सुशेन राघव ने मुक्के से बस एक फूट दूर सरका था और फिर जब उसने राघव पर telekinesis करने का सोचा तो वो उसका दिमाग भेद नहीं आया, सुशेन ने इतना प्रबल मस्तिक्ष पहले कभी महसूस नहीं किया था
सुशेन(हैरानी से )-कौन हो तुम??
राघव-इतनी जल्दी क्या है जान जाओगे
तभी रूद्र अपनी जगह से उठ आया और उसने सुशेन पर वार करने की कोशिश की लेकिन सुशेन ने इस बार भी उसका हमला नाकाम कर दिया
सुशेन-तुम आज मुझसे नहीं बचोगे रूद्र
रूद्र-तुममे इतनी जबरदस्त शक्ति कहा से आ गयी?? क्या किया है तुमने?
सुशेन-हमारे प्रभु कालदूत का शारीर भले ही समुद्र की गहराइयों मैं दफ़न है लेकिन वे मंसिर रूप से हरदम हम लोगो के रूप मैं सक्रिय है इसीलिए उनको ये बात ज्ञात है की उनको स्वतंत्र करने से हम लोग केवल १ कुर्बानी दूर है इसीलिए उन्होंने अपनी शक्ति का एक बड़ा हिस्सा मुझे दे दिया है तकी इस कार्य मैं कोई बाधा न आये मेरे शारीर मैं इस वक़्त ऐसी शक्ति है की मैं तुझे चींटी की तरह अभी मसल दू
वहा मौजूद सारे कालसैनिक इस वाकये को अपने सामने होता देख रहे थे मगर कोई भी एक वक़्त सुशेन के बीच मैं नहीं आ रहा था या राघव और रूद्र को रोकने की कोशिश नहीं कर रहा था
राघव-मेरे होते हुए ये इतना भी आसन नहीं है
राघव ने सुशेन से कहा औरपने दोनों हाथ हवा मैं एक विशिष्ट मुद्रा मैं लहराए और उन्हें सुशेन की तरफ किया जिससे एक तेज हवा का झोका धुल को अपने मैं समेटे सुशेन की तरफ बढ़ा और उसी हवा की रफ्तारसे राघव ने सुशेन पर हमला किया लेकिन सुशेन ने अपने एक हाथ राघव का वार खली कर दिया और उसे दूर फेक दिया
रूद्र गुस्से से चिल्लाते हुए सुशेन की तरफ भगा लेकिन सुशेन ने फिर एक जोरदार घुसा रूद्र के मुह पर रसीद किया जिससे वो वही गिर५ पड़ा, उसके कृत्रिम शारीर ने जीवन मैं पहली बार खून दर्द और बेबसी का अनुभव किया था, रूद्र और राघव दोनों ही इस वक़्त अपने आप को सुशेन के सामने बेबस महसूस कर रहे थे, सुशेन रूद्र को घसीटते हुए राघव के पास ले गया, राघव इस वक़्त जमीन पर पड़ा करह रहा था, क्या करे उसे कुछ सूझ नहीं रहा था, सुशेन ने उन दोनों को गर्दन से पकड़कर उठा लिया, राघव और रूद्र दोनों अपनी पूरी ताकत के लगाकर भी सुशेन की पकड़ से छुट नहीं पा रहे थे, राघव तो दर्द मैं अपनी शक्तिया भी भुला बैठा था
सुशेन(क्रोध से)- तुम लोगो ने मेरे भाई को मार डाला! पता है कितना दर्द होता है जब हम किसी अपने को खोते है? मैं बताता हु,
सुशेन ने दोनों को गर्दन से पकड़ कर उठाकर रखा था फिर उसने एक कालसैनिक को इशारा किया और उसने राघव और रूद्र के सामने telekinesis द्वारा नरेश को यातना देना शुरू किया, नरेश दर्द के कारण बुरी तरह चीख रहा था क्युकी धीरे धीरे उसके पेट का उपरी आवरण हट रहा था और त्वचा से फटकार बाहर आती अंतड़िया दिखने लगी थी
राघव और रूद्र काफी कोशिशो के बाद भी खुद को छुड़ा नहीं पा रहे थे
सुशेन- हा हा हा! अब वक़्त है आखरी कुर्बानी देने का, इस कुर्बानी के कारण हजार वर्षो से चला आ रहा कुर्बानी का चक्र समाप्त हो जायेगा और महान कालदूत का आगन इस धरती पर होगा, फिर वे देवताओ की इस सृष्टि को अपनी सृष्टि बनायेंगे और मैं बनूँगा इस नई दुनिया के सृजन मैं उनका सहयाक, उनका परम अनुयायी!
सुशेन ने दुसरे कालसैनिक को इशारा किया उर उसने पास ही पड़ा एक केरोसिन का डब्बा telekinesis द्वारा नरेश के पिरे शारीर पर छिड़क दिया और माचिस से आग लगा दी, इस दौरान बाकि कालसैनिको का मंत्रोच्चारण काफी तेज हो गया था और नरेश को अत्याधिक्क पीड़ा का अनुभव हो रहा था, उसका शारीर जल उठा था वो चीख रहा था लेकिन उससे भी बुरी तरह रूद्र चीख रहा था वही राघव अपने पुरे प्रयास के बाद भी सुशेन की मजबूत पकड़ से नहीं निकल पा रहा था और नरेश को जलता देखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा था.......
सुशेन ने दुसरे कालसैनिक को इशारा किया उर उसने पास ही पड़ा एक केरोसिन का डब्बा telekinesis द्वारा नरेश के पिरे शारीर पर छिड़क दिया और माचिस से आग लगा दी, इस दौरान बाकि कालसैनिको का मंत्रोच्चारण काफी तेज हो गया था और नरेश को अत्याधिक्क पीड़ा का अनुभव हो रहा था, उसका शारीर जल उठा था वो चीख रहा था लेकिन उससे भी बुरी तरह रूद्र चीख रहा था वही राघव अपने पुरे प्रयास के बाद भी सुशेन की मजबूत पकड़ से नहीं निकल पा रहा था और नरेश को जलता देखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा था.......
जल्द ही नरेश ने रहा सहा प्रतिरोध करना भी बंद कर दिया, उसके शारीर की सारी हरकते और तड़प शांत हो चुकी थी, अब तक हलकी पड़ चुकी बारिश अब एकबार फिर तेज हो गयी थी और अब तक बुरी तरह गल चुके उनके शारीर को जलाती आग भी धीरे धीरे बारिश से बुझने लगी थी लेकिन आग बुझने तक वो शारीर शारीर नहीं रहा बल्कि जंजीरों मैं लटका मांस का एक लोथड़ा बन चूका था, आखरी कुर्बानी की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी थी, रूद्र बस एकटक उस जगह की तरफ देखे जा रहा था जहा कुछ समय पहले नरेश जी जीवित मौजूद थे,
सुशेन ने उन दोनों की गर्दन छोड़ दी, रूद्र घुटनों के बल जमीन पर बैठ गया वही राघव अर्धबेहोशी की हालत मैं पहुच चूका था और जमीन पर लेट रहा था और अपनी सास नोर्मल कर रहा था,
रूद्र जमीन पर बैठा नरेश को लाश को एकटक देख रहा था, पहले इनलोगों ने उसके निर्माता को मारा था फिर जिस व्यक्ति ने उसे पिता की तरह पाला उसे इन कालसैनिको ने इतनी भयानक मौत दी थी, रूद्र की पूरी दुनिया ही उजाड़ गयी थी और जब किसी के साथ ऐसा होता है तो उसे दुःख नहीं होता बल्कि उसका पूरा दिमाग ही कुछ समय के लिए शुन्य मैं चला जाता है, रूद्र के साथ ऐसा ही हुआ था उसके रोना नहीं आ रहा था, सही कहा जाये तो उसे कुछ भी महसूस होना बंद हो चूका था,
नरेश की मौत से वो भी इतनी भयानक मौत से राघव भी शोक मैं डूबा हुआ था कही न कही उसे ऐसा लग रहा था के ये सब उसी के कारण हुआ है क्यों वो अपनी शक्तिया सही से इस्तमाल नहीं कर पाया, उसने मान ही लिया थाए ये जंग वो हार चुके थे और अब कुछ नहीं बचा था और धीरे धीरे राघव की ऑंखें बंद होने लगी
वही सुशेन कुटिल और विजयी मुस्कान लेकर खड़ा था, गोले मैं खड़े कालसैनिको के मंत्रोच्चारण बंद हो चुके थे, कालदूत के जागने की प्रक्रिया पूर्ण होने की आपर ख़ुशी उन सबके चेहरे पर देखी जा सकती थी
सुशेन- हा हा हा...प्रक्रिय पूरी हुयी, अब १००० साल का इंतज़ार ख़त्म! हमारे देवता अब इस नापाक धरती पर अपना कदम रखेंगे, सभी धर्मो के लोग अब सिर्फ कालदूत की पूजा करेंगे और को विरोध करेगा उसे ऐसी ही भयानक मौत दी जाएगी और सबसे पहले इन्ही लोगो की बारी है जिन्होंने कालदूत के माहन कार्य मैं बाधा बनने की कोशिश की है
रूद्र के मुह से खून रिस रहा था और उसके कपडे जगह जगह से फटे हुए थे पर अब भी वो शुन्य मैं था, उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी वही राघव ने जैसे ही अपनी आंखे बंद की उसे उसके मस्तिष्क मैं उसके दादा की छवि उभर्तोई दिखी मनो वो उससे कह रहे हो की ये अंत नहीं है अभी तो और भी काम करने बाकि है, अब राघव की चेतना लौटने लगी थी और उसमे एक नई हिम्मत का संचार हुआ था, राघव की हालत भी रूद्र से अलग नहीं थी चोटे उसे भी आयी थी लेकिन वो दोबारा उठ खड़ा हुआ, अब उसे दर्द महसूस नहि हो रहा था और शारीर मैं ये नई उर्जा न मनो प्रवाह बह रहा हो, इस बार राघव के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे न डर न गुस्सा न दुःख, उसकी हिम्मत देख कर रूद्र भी अपनी चेतना मैं वापिस आया और एक बार फिर वो कालसैनिको से लड़ने के लिए उठ खड़ा हुआ
अभी तक सुशेन और कालसैनिको का ध्यान इनपर नहीं गया था सुशेन कालदूत की आज़ादी की ख़ुशी मन रहा था
सुशेन-हा हा, कालसैनिको कुछ ही समय मैं हमारे भगवान हमारे बीच होंगे उसके पहले हमें इन बद्जतो को इनके किये की सजा देनी है सबसे पहले तो ये मरेगा जिसपर telekinesis असर नहीं करती, इसे मैं अपने हाथो से मारूंगा और उसके बाद इसके साथ आया हुआ लड़का
तभी पीछे से राघव से सुशेन को आवाज दी जिससे सुशेन का ध्यान उन दोनों पर गया
राघव-ओ.....तट्टो के सौदागर, ये लडाई अभी ख़त्म नहीं हुयी है और भेंचोद अगर मरना ही है तो कमसे कम तुमको मार के मरेंगे मादरजात.....
राघव की बात और उसके मुह से अपने लिए गाली सुनके सुशेन का गुस्सा भड़क रहा था मगर जब तक वो कुछ करता राघव ने उसकी तरफ दौड़ लगा दी और राघव इतनी तेजी से सुशेन की और लपका की किसी को समझ ही नहीं आया और राघव मे सुशेन पर अपने मुक्को की बारिश कर दी पर कालदूत की दी हुयी शक्तियों की वजह से सुशेन राघव के हमले को भाप गया और उसने भी अब राघव का प्रतिरोध करना शुरू कर दिया अब लग रहा था की दो टक्कर के प्रतिद्वंदी लड़ रहे है वही जब इनदोनो के बीच कालसैनिको ने हस्तक्षेप करने ने कोशिश की तो उनके बीच रूद्र खड़ा था
लड़ते लड़ते सुशेन ने एक जोरदार प्रहार राघव पर किया जिससे वो कुछ फूट पीछे सरक गया मगर इतने मैं रूद्र सुशेन से लड़ने उसके सामने थे, सुशेन ने फिर रूद्र को घुसा मारने की कोशिश की लेकिन इस बार रूद्र ने सुशेन के वार को अपने हाथ से रोक लिया, ये देख कर सुशेन को बेहद हैरानी हुयी, उसे कुछ देर पहले अपने शारीर मैं जो असीम शक्ति थी वो अब कम होती महसूस हो रही थी, उसकी आँखों की पुतलिया जो अब तक लाल थी वो सामान्य हो रही थी, अपने अंदर इतने शारीरिक परिवर्तन देख कर अब सुशेन घबराने लगा था
सुशेन-ये...ये क्या हो रहा है? मेरी शक्तिया कहा चली गयी?
रूद्र-तुम्हारा इश्वर तो स्वार्थी निकला रे...जबतक तुमसे काम था तबतक तुम्हे उसने शक्तिया दी और जैसे ही प्रक्रिया पूर्ण हुयी शक्ति वापिस ले ली?
सुशेन से चेहरे पर डर साफ़ देखा जा सकता था रूद्र ने उसके हाथ को जोर से भींच दिया जिससे उसके हाथ की हड्डीया टूट हाई और सुशेन अपना हाथ लेकर वही बैठ गया, ये घटना देख कर बाकि कालसैनिको ने वह से भागने की कोशिश की लेकिन रूद्र और राघव अब उन्हें छोड़ने के मूड मैं बिलकुल नहीं थे
राघव ने अपनी मानसिक शक्तियों के उपयोग से कालसैनिको के सोचने और भागने की गतिको धीमा कर दिया था और जल्द ही पुरे वातावरण कालसैनिको की चीख पुकार से दहल रहा था, रूद्र और राघव एक एक कालसैनिक को तेजी से मार रहे थे
रूद्र ने एक कालसैनिक की छाती के आरपार अपना हाथ ऐसे निकाल दिया मनो उसका शारीर हाड मांस का नहीं बल्कि कागज का बना हो, राघव कालसैनिको के telekinesis से ही उन्हें मात दे रहा था उस कब्रिस्तान मैं मनो इस समय प्रलय नाच रहा था
कुछ सौभाग्यशाली कालसैनिक को दरवाजे से बाहर भागने का मौका मिला भी लेकिन बाहर कदम रखते ही रमण और संजय ने अपनी भरी बन्दूको से उन्हें मारना शुरू कर दिया, कालसैनिक telekinesis के प्रयोग से पहले ही मौत के घाट उतर रहे थे वही कुछ कालसैनिक छिप कर वहा से भाग चुके थे
काफी सारे कालसैनिक अब लाश बन चुके थे और जो दो चार बचे थे उनसे राघव निपट रहा था और रूद्र सुशेन की तरफ बढ़ा तभी एक काला चोगा पहने स्त्री उसके और सुशेन के बीच आ गयी......
काफी सारे कालसैनिक अब लाश बन चुके थे और जो दो चार बचे थे उनसे राघव निपट रहा था और रूद्र सुशेन की तरफ बढ़ा तभी एक काला चोगा पहने स्त्री उसके और सुशेन के बीच आ गयी.....
रूद(क्रोध से)- सामने से हट जाओ लड़की!
सुशेन बैठा बैठा की अपनी भयानक पीड़ा भूलकर जोर से चिल्लाया
सुषाओं-हट जाओ सारा! ये तुम्हे भी मार डालेगा!
सारा(सुशेन को प्यार से देख कर)- तो मैं ख़ुशी ख़ुशी से तुम्हारे लिए जान दे दूंगी मेरी जान
इतना कहकर सारा ने telekinesis द्वारा वहा मौजूद एक भरी पत्थर उठाया और उसे रूद्र की तरफ फेका अब तक राघव का ध्यान भी इस लडाई की तरफ हो चूका था और वो भरी पत्थर जब तक रूद्र के करीब पहुच कर उसे हानी पहुचता तब तक रूद्र ने एक जोरदार प्रहार उस पत्थर पर किया और उसके टुकड़े हो गए, रूद्र की आँखों मैं अब और क्रोध उतर आया था
रूद्र-मेरा शारीर कोई आम मानव शारीर नहीं है बल्कि तरह तरहके धातुओ से बना है देखना चाह्तिहो मेरी ताकत
सुशेन(घबराकर)-न...नहीं..रूद्र! मुझे मार डालो जितनी बुरी मौत देनी हो दे दो लेकिन इसे छोड़ दो
रूद्र(सुशेन की तरफ देखकर)- तू हमें अपनों की मौत से होने वाले दर्द के बारे मैं बता रहा था न?तुम कालसैनिको ने मेरा निर्माता महेश को मारा और उनके भाई मेरे पिता सामान नरेशजी और उनकी बीवी को मारा तब मैं कुछ नहीं पर सका मगर आज मैं हैवानियत दिखाऊंगा और तुम लोग कुछ नहीं कर सकोगे, कोई एक भी यहाँ से बचकर जिन्दा नहीं जायेगा, तुम लोग हमारे समाज मैं कैंसर की तरफ हो जो हमारे बीच सामान्य लोगो की तरफ रहकर हमें ही नुक्सान पहुचाएंगे
तभी सारा ने एक बार फिर रूद्र पर हमला करने का सोचा वही राघव को मनो आगे होने वाली घटना का पूर्वानुमान हो गया था उसने रूद्र को आवाज़ लगायी "रूद्र रुको!!" पर रूद्र भी सारा की मंशा समझ चूका था और राघव रूद्र को रोक पता या सारा रूद्र पर हमला करती इससे पहले ही रूद्र ने उसे एक जोरदार थप्पड़ रसीद किया जिससे सारा की नाजुक गर्दन की हड्डिया कडकड़ा उठी, रूद्र तो ये अंदाजा भी नहीं लगा पाया था के क्रोध के वश मैं आकर उसने क्या कर दिया है वही राघव भी अफ़सोस मैं था की वो सही समय पर रूद्र को रोक नहीं पाया था, सारा की सासे थम चुकी थी और उसका निर्जीव शारीर धरती पर पड़ा था, धरती पर गिरने के बाद भी उसकी आँखें खुली हुयी थी जो एकटक सुशेन को प्यार से निहार रही थी
सुशेन-नहीं..! तुमने...तुमने उसे मार डाला! अब तुमलोगों मैं और मुझमे क्या अंतर रह गया है, जरा अपने आस पास देखो तुम दोनों की वजह से कब्रिस्तान मौत का कितना भयानक मंजर फैला हुआ है! तुम लोग हमें राक्षस बताते हो और खुद क्या हो, आज तुमने भी तो लोगो की जान ली है
राघव ने अपने चारो तरफ फैली लाशो को देखा, कुछ दिन पहले अगर उससे कोई कहता की वो क्रूर है तो वो नहीं मानता पर आज उसने कब्रिस्तान मैं जिस क्रूरता का प्रदर्शन किया था उससे वो खुद चकित था, उसे अपने और कालसैनिको मैं कोई अन्तेर नजर नहीं आ रहा था फिर भी उसने अपने बचाव मैं कह
राघव-तुम सब खुनी हत्यारे थे मौत तो तुम्हारा मुकद्दर थी
सुशेन-मान लिया की यहाँ सभी खुनी हत्यारे थे जिन्हें तुम लोगो ने मारा लेकिन हम सबके बीच ऐसा कोई था जो बिलकुल निर्दोष था, जिसने एक भी जान नहीं ली थी जिसे इस रूद्र ने मार डाला
रूद्र का कृत्रिम दिल जोरो से धड़क रहा था
रूद्र-तू किसकी बात कर रहा है??
सुशेन-मेरी बीवी सारा, वह १ महीने की गर्भवती थी और तुमने उसके साथ साथ उसके बच्चे की भी जान ले ली
रूद्र-या ये कहो की एक कालसैनिक को इस दुनिया मैं आने से रोक दिया जो किसी शैतान की भक्ति के नाम पर अपने पिता की तरफ तमाम निर्दोशो का खून बहाता
सुशेन-या फिर मुझ से बगावत करा अरुण की तरह बनता जो अपने की पिता के खिलाफ लड़ा था, तुमने पहले ही सोच लिया था के मेरा बच्चा मेरे जैसा बनेगा? अब तो स्वीकार कर लो की तुम्हारे हाथो एक मासूम का खून चढ़ गया है और तुम लोगो के हाथ भी किसी मासूम के खून से लाल हो चुके है
सुशेन की बातो से राघव और रूद्र बुरी तरफ हिल चुके थे और अब सुशेन इनकी बेबसी पर हस रहा था, काफी देर से बाहर खड़े रमण और संजय भी अंदर आ गए और उन्होंने बाकि बचे कालसैनिको को अपनी बन्दूको से मार डाला और राघव और रूद्र के करीब आये को बुत बने खड़े थे और सामने सुशेन जोर से हस रहा था जिसके बाद उन्होंने सुशेन को भी अपनी बन्दूक से छलनी कर दिया अब अब सुशेन भी उस कब्रिस्तान मैं पड़ी लासको मैं शामिल हो गया था और उन लाशो के बीच संजय राघव रमण और रूद्र खड़े थे, भीषण गोलीबारी चीखपुकार और भयानक रक्तपात के बाद कब्रिस्तान एक बार फिर शांत हो गया था
रमण ने पीछे से जाकर राघव के कंधे पर हाथ रखा और अपने भाई का स्पर्श समझते ही राघव उससे लिपट गया
संजय-मुझे नहीं पता था की तुम लोगो इतन क्रूरता से मार सकते हो
रूद्र-अब कोई फर्क नहीं पड़ता हम उन्हें आखरी कुर्बनि देने से नहीं रोक पाए, अब कात्दूत को जागने से कोई नहीं रोक सकता
संजय-क्या? हम तो बाहर थे अंदर का कुछ पता नहीं लगा यहाँ क्या हुआ था रूद्र?
रूद्र ने लोने की जंजीरों की तरफ इशारा करते हुए कहा "ये थी आखरी कुर्बानी"
रमण-उफ्फ, कितनी भयानक मौत दी है बिचारे को कौन था वो व्यक्ति?
राघव-नरेश जी
नरेश का नाम सुन कर संजय और रमण के पैरो तले जमीन खिसक गयी वो कभी उस लाश को देखते तो कभी रूद्र को जिसकी आँखों से अब आंसू बह रहे थे, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था के रूद्र को सांत्वना कैसे दि जाये कुछ समय बाद वो लोग रूद्र को शांत करने मैं सफल हुए और वहा से नरेश की लाश लेकर अंतिम संस्कार करने निकल गए संजय रूद्र के साथ आगे चल रहा था वही राघव रमण के साथ था
राघव-भईया रूद्र ठीक होगा न?
रमण-हम उसकी हालत का अंदाजा नहीं लगा सकते राघव नरेश ने उसे अब तक पाला था, भले ही वो कृत्रिम मानव है पर है एक २२ साल का लड़का ही,उससे आज उसका सब छीन गया है हम उसकी मनोस्तिथि नै समझ सकते बस सांत्वना दे सकते है, अब पता नहीं इस दुनिया का क्या होगा अगर कालदूत सच मैं आ गया तो........
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कही दूर हिन्द महासागर मैं दो मछुवारे मछली पकड़ने वाला जाल समुद्र मैं डाल रहे थे
रघु-आबे आज हम ज्यादा दूर निकल आये है चलो जल्दी से काम निपटाया जाए
हरिया-अबे रुक जा थोड़ी देर थोड़ी मछिलिया और हाथ लगने दे
रघु-अरे हाल देख मौसम का इतने आंधी तूफान मैं नव ज्यादा समय नहीं टिकेगी
तभी अचानक समुद्र मैं हलचल होने लगी, पानी का रंग भी धीरे धीरे बदलने लगा
हरिया- अरे! ये क्या हो रहा है
रघु-पता नहीं ऐसा लग रहा है मनो समुद्र से कोई चीज़ बाहर आ रही हो
हरिया-ये जरूर व्हेल जैसी कोई बडी मछली होगी वरना पानी मैं इतनी हलचल और कौन मचा सकता है?
रघु-पता नहीं! अरे देख! एक काला बड़ा शारीर पानी से बाहर आ रहा है
हरिया-हे भगवान! ये क्या है?
रघु(घबराते हुए)- ये.....ये कोई मछली नहीं है! ये तो शैतान का अवतार लगता है!
उसके बाद उन मछुवारो के सामने उनके जीवन का सबसे भयानक दृश्य उपस्तिथ हो चूका था, धीरे धीरे १०० फूट का एक प्राणी समुद्र से बाहर निकला जिसका सर एक नाग की भांति था शारीर मानव की तरह और पीठ पर ड्रैगन जिसे विशालकाय पंख लगे थे, इतने विशाल शारीर वाले प्राणी को देख कर वो नाविक बुरी तरह आतंकित हो चुके थे....
[color=rgb(184,]कालदूत अपनी कैद से आजाद हो चूका था..........[/color]
दूर हिन्द महासागर मे वो स्याह काली भयानक आकृति उपर आ रही थी, धीरे धीरे वो आकृति पूरी तरह समुद्र से बाहर निकल आई थी और एकटक उन मछुवारो को घूर रही थी वही उस शैतान को देख कर उन मछुवारो की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी ही और घबराहट के मारे उनके पैर कांप रहे थे,
हरिया-हे भगवान....ये...ये कैसा प्राणी है!!!
रघु-हरिया...बोल मत जाल निकाल और जल्दी नाव घुमा वरना हम नहीं बचेंगे.....
कालदूत कोदेख कर रघु और हरिया दोनों की हालत काफी खराब थी, हो भी क्यों न कालदूत का रूप ही इतना भयंकर था की सामान्य मनुष्य उसे देख कर ही डर के मरे मर जाये यहाँ तो तब भी रघु और हरिया ने थोड़ी हिम्मत दिखाई और अपनी जान बचने के लिए वहा से भागने लगे
तभी कालदूत की आवाज रघु और हरिया के दिमाग मैं गूंजी "शांत हो जाओ मनुष्यों! हमसे डरने की तुम्हे कोई आवशकता नहीं है, यदि हमें तुम्हे क्षति पहुचानी होती तो ये कार्य हम कबका कर चुके होते, तुम्हारे यहाँ से भागने की प्रतीक्षा नहीं करते पर हमें तुम्हारा डर नै बल्कि भक्ति चाहिए, तुम मुझे भक्ति दो और मैं तुम्हे ऐसी शक्तिया दूंगा जिसकी तुमने कभी अपने जीवन मैं कल्पना भी नहीं की होगी! ऐसी शक्तिया जो तम्हारा तथाकथित इश्वर तुम्हे कभी नहीं दे सकेगा! हमारी शरण मे आ जाओ हम तुम्हारा कल्याण कर देंगे!"
उन डरे हुए नाविकों पर कालदूत की बातो ने जादुई असर किया और वे अपना डर भुलाकर तुरंत कालदूत के सामने झुक गए, उन्होंने कालदूत के सामने घुटनों पर बैठकर अपना सर उसके सामने झुका लिया,
जैसे ही कालदूत ने देखा की ये नाविक उसके सामने झुक गए है,उसकी शरण मे आ गए है कालदूत के भयानक नेत्रों से एक विशेष प्रकार की तरंगे निकली जो सीधी जाकर उन मछुवारो के शारीर से जा टकराई, हरिया और रघु इन तरंगो के प्रभाव से निचे गिर गए और बुरी तरह तड़पने लगे पर फिर धीरे धीरे उनमे कुछ आश्चर्यजनक शारीरिक परिवर्तन होने लगे, उनके शारीर का आकर बदलने लगा, उनके दांत पैने, आँखें लाल और चमड़ी नीली हो गयी थी, देखते ही देखते वो सामान्य से नाविक अब एक भयानक दरिंदे बन चुके थे...
कालदूत ने अपने आज़ादी के साथ ही अपने लिए दो भयानक सेवको का निर्माण किया था और फिर कालदूत ने तुरंत अपना वो भयानक और विशाल रूट त्यागा और एक खतरनाक लेकिन प्रभावशाली मनुष्य का रूप धारण कर लिया,
कालदूत का मानव रूप उसके असल रूप से कम प्रभावशाली नहीं था,एक लम्बा चौड़ा व्यक्ति जिसने काली शेरवानी जैसा वस्त्र परिधान कर रखा था ये रूप भी सामान्य लोगो के मन मैं सिरहन पैदा करने के लिए पर्याप्त था
कालदूत(मुस्कुराकर)- इस दुनिया को महान कालदूत के आगमन का पैगाम दिया जाये......
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सुबह के ६ बज चुके थे, घनी अँधेरे कालरात्र के बाद एक बार फिर से सूरज चारो और अपनी छटा बिखेरता नजर आ रहा था, दुनिया के लिए नई उम्मीद नई उमंगो और नए खतरों के साथ ये सुबह आयी थी, वही इस दुनिया मैं एक इंसान ऐसा भी था जिसने इस सुबह के साथ अपना सब कुछ खो दिया था, ये दुनिया इस वक़्त कालदूत के आगमन से भले ही अनजान हो लेकिन लेकिन उसके आगमन के बाद इस पृथ्वी पर कई जगहों पर भयानक हादसे देखने मिले थे पर फिलहाल जिनपर इस दुनिया की रक्षा का, कालदूत से लड़ने का जिम्मा था वो इस वक़्त इन सब घटनाओ से अनजान अपनों के जाने के शोक मैं बैठे थे
नरेश और अरुण के अंतिम संस्कार की क्रिया पूरी करके सभी लोग इस वक़्त नरेश के घर मैं बैठे हुए थे, रूद्र ने भी अपने आप को काफी हद तक संभल लिया था लेकिन वो चुपचाप बैठा हुआ था, नरेश के बगैर ये घर उसे कचोट रहा था, राघव भी एकदम शांत था कुछ ही घंटो मैं उसे नरेश से एक जुडाव महसूस होने लगा था साथ ही उसके मन मैं नरेश को न बचा पाने का मलाल था और सारा के अजन्मे बच्चे के मरने का दुःख, राघव को बार बार ये बात खाए जा रही थी के अगर वो चाहता तो रूद्र को कब्रिस्तान मैं रोक सकता था और कही न कही इस बात ने राघव के मन मैं घर किया हुआ था के एक अजन्मे बच्चे को उसने दुनिया मैं आने से ही रोक दिया, पर ये बात राघव ने अभी तक किसी से कही नहीं थी
रमण और संजय भी वही बैठे हुए थे पर किसी से भी कुछ भी बोलते नहीं बन रहा था आखिरकार रूद्र ने ही चुप्पी तोड़ी
रूद्र-अब मैं राजनगर मे नहीं रुकने वाला
रमण-ऐसा क्यों?
रूद्र-नरेशजी ने मुझे अपने बच्चे की तरह पाला, उन्होंने अपनी पत्नी के मरने के बाद कभी दूसरी शादी भी नहीं की लेकिन इस सब के बदले मैं उन्हें क्या मिला...एक दर्दनाक मौत!
राघव रूद्र की बात सुन रहा था पर कुछ बोल नहीं रहा था
संजय-ये तूम कैसी बात कर रहे हो ? उनकी मृत्यु के जिम्मेदार तुम नहीं हो
रूद्र-आपलोग कुछ भी बोले लेकिन ये सच्चाई कभी कोई नहीं बदल पायेगा की हम लोग उनके साथ हुयी अनहोनी को नहीं रोक पाए
रमण उठ कर रूद्र के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला
रमण-मेरी बात सुनो लड़के और राघव तुम भी, तुम दोनों अपने आप मैं बेहद खास हो और इसका नजारा हम कल रात उस कब्रिस्तान मैं देख चुके है जहा तुम दोनों इतने सरे लोगो से भीड़ गए थे, तुम लोगो ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है, तुमदोनो ने जो हो सकता था किया है, ये सब जो कुछ हुआ है उसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, नरेश भाई की मौत का दुःख हम सबको है लेकिन ये वक्त शोक मैं डूबने का नहीं है, इस तरह तो नरेश जी का बलिदान व्यर्थ चला जायेगा अगर हम यही बैठे रहेंगे और कालदूत को रोकने के लिए कुछ नहीं करेंगे तो....
संजय-अब हमें कालदूत को रोकना तो होगा ही वरना ये दुनिया ख़तम होते देर नहीं लगेगी
राघव(मुट्ठी भींचते हुए)- कमर कास लो भैया नरेश जी की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी कालदूत को हम रोककर करेंगे रूद्र तुम साथ हो न?
रूद्र-हमेशा....
संजय-उसके पहले हमें दुनिया की खोज खबर ले लेनी चाहिए, आखिर पता तो चले की कालदूत के आगमन ने दुनिया पर किस प्रकार असर डाला है
संजय की बात सुन कर रूद्र ने टीवी चालू किया और वो सब लोग टीवी देखने बैठ गए
न्यूज़ फ़्लैश- कल रात दुनियाभर के मौसम मैं कई तरह के अजीबोगरीब परिवर्तन पाए गए, अमेरिका के कई शहरो मे भयानक बिजली गिरी जिससे सडको और इमारतों को भरी नुकसान हुआ तो भारत मैं भी कई जगह भारी वर्षा के कारन फसलो को काफी नुकसान हुआ है साथ ही देश मैं कई जगह आंधी तूफान आने की खबरे मिली है,लेकिन सबसे अजीबोगरीब खबर मिली थी कच्छ मरुस्थल से उस भाग से जिसकी सीमा समुद्र तट से जुडी हुयी है, स्थानीय लोगो के अनुसार उन्होंने किसी बडी की आकृति को रात के अँधेरे मैं समुद्र के पास देखा था हालाँकि ये बात एक अफवाह ही साबित हुयी है पर वहा के कुछ मछुवारो के गायब होने की खबर जरुर सामने आई है, कुछ लोग इन घटनाओ को अपशकुन मान रहे है वही कुछ ने तो इसे दुनिया का अंत ही घोषित कर दिया है, इन सब अफरा तफरी मैं कई लोगो की जाने भी गयी है जिसके बारे मैं जानकारी हम आपको अपने अगले सेगमेंट मैं देंगे, अन्य कोई खबर मिलते ही आपको वो सबसे पहले हमारे ही चैनल पर देखने मिलेगी तब तक बने रहिये हमारे साथ......
राघव ने टीवी ऑफ किया और बाकियों से बोला
राघव-कही पर भी कल रात राजनगर मैं हुए हत्या कांड की कोई खबर नहीं है
संजय-तुम्हे क्या लगता है ये कालसैनिक १००० साल से इतने खून करके कैसे बचे हुए है, उनके लोग पूरी दुनिया भर मैं फैले हुए है, मीडिया मैं भी, तभी तो आज तक उनसे जुडी कोई खबर लोगो तक नहीं पहुच पाई है
राघव-एक मिनट! मुझे तो लगा था के कल रत हमने सुशेन के साथ सभी कालसैनिको को कब्रिस्तान मैं खत्म कर दिया था
रूद्र-हमें एक बडी संख्या मैं उनलोगों को खत्म किया है राघव पर अब भी कई कालसैनिक बचे हुए है और मुझे लगता है कालदूत जरूर अपने उन बचे हुए कालसैनिको एक जगह इकठ्ठा करेगा
तभी उन्हें घर मैं उपर की तरफ की कुछ हलचल सुनाई दी और सबका ध्यान उस और चला गया.......
रूद्र-हमें एक बडी संख्या मैं उनलोगों को खत्म किया है राघव पर अब भी कई कालसैनिक बचे हुए है और मुझे लगता है कालदूत जरूर अपने उन बचे हुए कालसैनिको एक जगह इकठ्ठा करेगा
तभी उन्हें घर मैं उपर की तरफ की कुछ हलचल सुनाई दी और सबका ध्यान उस और चला गया.......
राघव मुह पर ऊँगली रखकर धीमी आवाज मैं बोला
राघव-श्श्श...सब लोग धीरे बोलो लगता है कोई घर के अंदर चोरी से घुसा है
रमण(धीमी आवाज मैं)- ये जरूर उन कालसैनिको मैं से कोई होगा चलो चलकर देखते है उपर क्या है, रूद्र क्या है वैसे उपर?
रूद्र-कुछ खास नहीं नहीं जो चीज़े रोजमर्रा के काम नहीं आती थी उन्हें नरेश जी उपर के कमरे मैं रखवा देते थे, वहा बड़े बड़े कांच के शीशे लगे है जहा से घर मैं घुसना आसन है
राघव-ठीक है उपर चल कर देखते है कौन है रूद्र तुम यही पीछे रुको ताकि अगर उपर कुछ गड़बड़ हो तो तुम हमारे बैकअप की तरह काम आ सको
रूद्र-ठीक है
सब धीरे धीरे सीढियो से उपर की तरफ बढे, कोशिश कर रहे थे की उनकी कदमो की आवाज न हो, जल्द ही वो लोग उपर पहुच गए, उपर के फ्लोर पर कोई बल्ब वगैरा भी नहीं लगा हुआ था जो भिओ रौशनी आ रही थी खिड़की पर लगे शिशो से आ रही थी, राघव संजय और रमण बडी सावधानी से आगे बढ़ रह थे
संजय-यहाँ तो कोई नहीं दिख रहा है
राघव(गुस्से से चिल्लाकर)- ये चूहे बिल्ली का खेल बहुत हुआ अब अगर अपनी जान प्यारी हो तो चुपचाप बाहर निकल आओ वरना अगर मैं ढूंढने लगा तो अच्छा नहीं होगा
तभी संजय का ध्यान छत की तरफ गया जिसके दो कोनो मैं दो लड़के अपने शारीर को एक विशिष्ट कोण मैं रखकर छत से मकड़ी की तरह चिपके हुए थे संजय की उनपर नजर पड़ते ही वो अपनी जगह से कूदे और उन्होंने राघव रमण और संजय पर धावा बोल दिया....
उन्होंने साधे टीशर्ट और जीन्स पहन रखे थे और चेहरे पर नाक से निचे वाले हिस्से को काले नकाब से ढक रखा था ताकि पहचान मैं न आये, रमण ने उस लड़के से भिड़ने की कोशिश की लेकिन वो गजब का निकला, रमण कुछ करता या कुछ समझ पाटा उससे पहले ही उसके पेट पीठ और गर्दन मैं पर तीन चार मुक्के पड़ चुके थे, संजय ने भी दुसरे लड़के से निपटने की कोशिश की लेकिन वो लड़का फुर्ती से संजय के हर वार से बच रहा था, उसने हवा मैं घूमकर एक तेज़ लात संजय के सीने पर मारी जिससे संजय खुद को संभल नहीं पाया और गिर पड़ा राघव ने उस लड़के को उसका कॉलर पकड़कर खिंचा, उस लड़के ने राघव के पेट पर भी तेज लात मारी जिससे राघव पर कोई असर नहीं हुआ, कल रात के हत्या काण्ड के बाद राघव की शक्तिया जागृत थी जिससे उसकी शारीरिक क्षमता मैं बहुत बढ़त हुयी थी, अब तो सामान्य इंसानों के प्रहारों का उसपर ज्यादा असर नहीं होता था पर उस लड़के के पैर मैं जरूर चोट लग गयी और राघव ने उसे गर्दन से पकड़कर हवा मैं उठा लिया और रमण से लड़ते लड़के को देखकर राघव चिल्लाया
राघव-रुक जाओ! वरना तुम्हारे साथी की गर्डर तोड़ दूंगा मैं और ये बेकार ही मारा जायेगा, पहले बताओ तुम लोग ककून हो? यहाँ क्या करने आये हो?
राघव की बात सुनकर उन नकाबपोश ने भी रमण की गर्दन पर एक छोटा सा चाकू रख दिया
नकाबपोश-कोशिस तो करो तुम्हारा साथी भी जान से जायेगा
तभी वहा रूद्र भी पहुच गया लड़ने की आवाज सुन कर उसे गड़बड़ का अंदाजा हुआ और वो वहा आ गया
रूद्र-तुम जो कोई भी हो इसका अंजाम नहीं जानते तुम रमण की गर्दन से चाकू हटाओ
राघव(क्रोधित होकर)- आखिर कितनी जाने लोगे तुम कालसैनिक?कितने निर्दोशो की मौत से पेट भरेगा तुम्हारा?
राघव के प्रश्न पर रमण को गिरफ्त मैं लिए लड़के की भोहे चौड़ी हो गयी, वो भी गुस्से मैं बोला
नकाबपोश-क्या बकवास कर रहा है? हम कालसैनिक? हम तो यहाँ नरेश जी से मिलने आये थे पर जब यहाँ उके घर मैं अजनबियों को देखा तो हमें कुछ गड़बड़ लगी इसीलिए इसतरह अंदर आये, हमें लगा तुम कालसैनिक हो
रूद्र से बहस करते हुए उस लड़के की पकड़ रमण की गर्दन पर ढीली पद गयी जिसका फायदा उठाते हुए रमण से उसका हाथ पकड़कर उसे एक जोरदार धोबी पछाड़ दी
रमण-अगर हम कालसैनिक होते तो तुमको telekinesis के प्रयोग से रोकते कुश्ती नहीं खेलते तुम्हारे साथ
तभी वहा एक लड़की की बुलंद आवाज गूंजी "बस करो तुम सब लोग"
वहा उस कमरे मैं मौजूद सभी का ध्यान उस कमरे मैं अँधेरे कोने की तरफ गया जहा से अभी तक खामोश कड़ी लडकी निकलकर आगे की तरफ आई थी, खिड़की से आते मद्धिम प्रकाश मैं उसकी लहराती जुल्फे और खुबसूरत बडी सी आँख साफ़ दिखाई देने लगी थी, अब तक बाकि दोनो लड़के बभी अपना नकाब उतर चुके थे, वो लगभग राघव के ही उम्र के थे
लड़की थोडा आगे बढ़ी और रूद्र को गौर से देखते हुए उन दोनों लडको से बोली "हमें ग़लतफहमी हो गयी थी, ये लोग कालसैनिक नहीं हो सकते क्युकी ये कृत्रिम मानव इनके साथ है
ये बात सुन कर सबको झटका लगा और सबसे ज्यादा तो उन दोनों लडको को उनमे से एक बोला
लड़का-तुम जो कह रही हो जानती हो न? तुम्हे कैसे पता की ये वही है जिसका निर्माण हमारी संस्था ने करवाया था
लड़की-मैं जानत हु मैं क्या कह रही हु मुझे नरेश जी ने इसके बारे मैं बताया था और मैंने इसकी फोटो देखि थी वही ये दूसरा लड़का शायद राघव है नरेश जी ने इसके बारे मैं भी बताया था बस मैं पहचान नहीं पायी
लड़का-तुम जानतो हो न क्या कह रही हो?
लड़की-तुम जब इनसे लड़ रहे थे तब मैं अँधेरे मैं छिप कर तुम्हारी लडाई का एक एक मोमेंट नोटिस कर रही थी, अविनाश की किक से ये हिला तक नहीं जभी अविनाश अकेला ही १० से भीड़ जाये पर इसने उसे आसानी से काबू कर लिया, तुम लोग ये बात नोटिस नहीं कर पाए क्युकी तुम लड़ने मैमश्गुल थे
तभी रूद्र के अचानक ध्यान मैं आया और उसने पूछा
रूद्र-शिवानी??
लड़की-हा सही पहचाना
रूद्र-माफ़ करना पर मैंने पहले तुम्हे कभी देखा नहीं था बस नरेश जी से तुम्हारे बारे मैं सुना था इसीलिए तुमलोगों को पहचान नहीं पाया
शिवानी-कोई बात नहीं....
उनलोगों के वार्तालाप से राघव भ्रमित सा हो गया था वो उनकी तरफ देखकर बोला
राघव-आपलोगों की बात मुझे समझ मैं नहीं आ रही है थोडा विस्तार से बताओ रूद्र ये लोग कौन है और यहाँ क्या करने आये है
शिवानी-हमलोग उसी गुप्त संस्था के लोग है जिसने रूद्र को बनाने के लिए महेश जी को फंडिंग किया था, मेरा नाम शिवानी है और ये मेरे भाई है चेतन और अविनाश
रूद्र-तो इसका मतलब आपलोग मेरे निर्माता महेश को भी जानते होंगे?
अविनाश-महेश जी हमारे पिता थे, उन्होंने हम तीनो अनाथ बच्चो को गोद लिया थ और जब कालसेना से उन्हें मारा था तभी से उसके बाद हमारा भरण पोषण आर्गेनाईजेशन ने किया, हमें बचपन से ऐसा कठोर प्रशिक्षण दिया गया जिसके कारण हम आज संस्था के काबिल लड़ाको मैं से एक बन गए है
रमण-बीच मैं रोकने के लिए माफ़ी चाहता हु पर ये 'आर्गेनाईजेशन' है क्या??.......
अविनाश-महेश जी हमारे पिता थे, उन्होंने हम तीनो अनाथ बच्चो को गोद लिया थ और जब कालसेना से उन्हें मारा था तभी से उसके बाद हमारा भरण पोषण आर्गेनाईजेशन ने किया, हमें बचपन से ऐसा कठोर प्रशिक्षण दिया गया जिसके कारण हम आज संस्था के काबिल लड़ाको मैं से एक बन गए है
रमण-बीच मैं रोकने के लिए माफ़ी चाहता हु पर ये 'आर्गेनाईजेशन' है क्या??.......
चेतन-हालाँकि हमारी संस्था के अस्तित्व से ये दुनिया अनभिज्ञ है पर आप लोग नरेश जी के साथ है इसीलिए मुझे नहीं लगता के आप लोगो को यह राज बताने मैं कोई बुरे है, ये बात तो बहुत छोटी है उनके सामने..हम लोग हिडन वारियर्स है, छिपे हुए योद्धा, हम अपनी आर्गेनाईजेशन मैं ऐसे लोगो का चुनाव करते है जिन्होंने युद्ध काला, हथियार और विज्ञान मे क्षेत्र मैं बहुत अधिक प्रशिक्षण हासिल किया हो, यह आर्गेनाईजेशन पिछली एक शताब्दी से अस्तित्व मैं है, हमारे पास दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक, वेपन एक्सपर्ट अलग अलग देशो की मिलिट्री इत्यादि से जुड़े लोग भी है, कालसेना की तरह ही हमारी भी पहुच रॉ इण्टरकॉम FBI जैसे संगठनो मैं है, हम लोग मुख्य रूप से पैरानोर्मल या कह लीजिये की ऐसी चीजों से लड़ने का प्रयास करते है जिनके अस्तित्व पर या तो दुनिया को यकीन नहीं होता या फिर बाकि नमी गिरामी संस्थाए इस लायक नहीं होती की उन असाधारण शक्तियों को रोक सके, पीछे १०० सालो मैं अगर हम किसी को रोक नहीं पाए है तो वो है कालसेना, इसके पीछे एक कारन यह भी था के इनके लोग भी हमारी तरफ कई पावरफुल पोजीशन पर थे, हमने समय समय पर इनसे भिड़ने की कोशिश भी की लेकिन कभी भी इनको पूरी तरह से नष्ट नहीं कर पाए ,कालसेना से लड़ने के दौरान हमारी आर्गेनाईजेशन को कालदूत नाम के प्राणी का पता कुछ सालो पहले ही चला और तब हमारी आर्गेनाईजेशन ने रूद्र को बनाने का निर्णय लिया क्युकी आम मनुष्य उनके आगे घुटने टेक सकता था पर कृत्रिम मानव नहीं, हमें तब राघव के बारे मैं पता नहीं था हमें तो राघव के बारे मैं महेश जी के गुरूजी ने बताया था जब वे रूद्र के शारीर मैं आत्मा डालने आये थे तभी से हमारी नजर राघव पर भी बनू हुयी थी अब रूद्र को बनाने के बाद कैसे कालसैनिको ने उसके निर्माता और हमारे पिता को मारा ये तो आप सब जानते ही होंगे
हमारी संस्था चौबीसों घंटे वातावरण मं फैली तामसिक उर्जाओ को ढूंढती रहती है और हम एजेंट्स का काम होता है उस उर्जा को कैद करना या नष्ट करना, कालदूत की स्वतंत्रता के बाद हमें वातावरण मैं बेहद भीषण तामसिक उर्जा के संकेत मिले है इतनी भरी मात्र मे ये उर्जा हमारे यंत्रो ने कभी महसूस नहीं की थी, जब हमें पता चला की नरेशजी यानि हमारे चाचा इनके भिड़ने मैं लगे है तब शिवानी ने उन्से संपर्क किया था और हम तो यहाँ उन्हें अपने साथ शामिल करने आये है
संजय-आपको कैसे पता चला के हमलोग और नरेशजी कालसेना को ढूंढ कर ख़तम कर रहे है?
शिवानी-हमारे संपर्क सूत्र कालसेना से बेहतर है दुनिया के किसी भी हिस्से की जानकारी हम तक पहुचने मैं समय नहीं लगता
रूद्र(दुखी होकर)- अफ़सोस लेकिन एक जानकारी तुम्तक समय रहते नहीं पहुची..
शिवानी-क्या?
रूद्र-कालदूत की जागने की प्रक्रिया मैं जो आखरी कुर्बानी थी को नरेशजी की ही थी, वो अब इस दुनिया मैं नहीं रहे हम अभी उनका अंतिम संस्कार करके लौटे है
रूद्र की बात सुनकर शिवानी अविनाश और चेतन एकदम सन्न रह गए थे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था की इस बात पर कैसे प्रतिक्रिया दे, शिवानी के चेहरे पर दुःख साफ़ झलक रहा था, वो अपनी भावनाओ को काबू मैं नहीं रख पाई और उसकी आँखों से आसू निकलने लगे, उसके दोनों भाई उसे सँभालने की कोशिश कर रहे थे पर आँखें उनकी भी नाम थी, शिवानी कोरोता देख कर राघव का भी मन भरी होने लगा था परिस्तिथि सो सँभालने के लिए रमण बोला
रमण-चलिए अब जब साडी बाते स्पष्ट हो गयी है तो निचे चलकर बात कर लेते है
वो सब लोग निचे सोफे पर आकर बैठ गए रूद्र उनसब के पिए पानी ले आया था पानी पीकर शिवानी थोड़ी शांत हुयी
शिवानी-हिडन वारियर्स मैं शामिल होने के बाद हम कभी नरेश चाचा से नहीं मिल पाए थे बस एक सुचना मिली थी के चाचाजी रूद्र के साथ राजनगर मे है, मुझे लगा था कोई तो है जो पिताजी के रिक्त स्थान को भर सकता है लेकिन कालसेना से हमारी वो उम्मीद भी छीन ली
रूद्र भी शिवानी के आक्रोश को महसूस कर सकता था उसी आक्रोश के चलते उसने और राघव ने कब्रिस्तान मैं एक भी कालसैनिक को जिन्दा नहीं छोड़ा था
रमण से उनतीनो को विस्तार से एक एक घटना बताई जो कल रात हुयी थी
अविनाश-आप लोगो के साथ एक और इंसान भी था जिसका नाम हमारे रिकार्ड्स मैं है जिसके पिता कालसैनिक थे
रमण-आप शायद अरुण की बात कर रहे है पर अफ़सोस वो भी अब नहीं रहा
अविनाश-उफ्फ...अगर वो होते तो उनसे काले जादू की किताब के बारे मैं पता चल सकता था
राघव-कही आप इस किताब की बात तो नहीं कर रहे
राघव ने अरुण की दी हुयी किताब अविनाश को दखाई
अविनाश-हा यही तो है वो
रमण-पर ये तो सिर्फ एक कॉपी है ऐसी और कई होंगी
अविनाश-कॉपी...नहीं ये कॉपी नहीं है..एक किताब कालदूत ने बिरजू को दी थी जिसने कालसेना की स्थापना की थी १००० साल पहले फिर उई ने बस ४-५ किताबे लिखी थी बिलुल ऐसी ही
रमण-ओह....
चेतन-ये किताब सिर्फ कालदूत के बारे मैं नहीं है ये वो ज्ञान है को कालदूत ने अर्जित किया है अपने जीवन के अनुभवों से, जो बाते और रहस्य हम इस ब्रह्माण्ड के बारे मैं नहीं जानते वो सब इसी किताब मैं है बस एक एक बेहद प्राचीन भाषा मैं है जिसे डिकोड करना इस दुनिया मैं किसी के बस की बात नहीं है, साथ ही काले जादू और telekinesis के बारे मैं भी बहुत कुछ है जो भी इसे सीखता है वो कालदूत से मानसिक संपर्क मैं आ जाता है
संजय-ये बाते तो हमने कभी सोची भी नहीं थी
अविनाश-हम यहाँ जल्दी आ जाये लेकिन नहीं आ सके क्युकी कल रात दुनिया भर के हमारे गुप्त अड्डो पर कालसेना से धावा बोला था, कालसेना से अपने कुछ लोग हिडन वारियर्स मैं भी छोड़ रखते थे शाय, उनसे निपटने मैं समय लग गया अब समझ आ रहा है की उनलोगों ने हमारा वक़्त क्यों नष्ट करवाया ताकि हम यहाँ समय से न पहुच पाए और जैसा उन्होंने सोचा था वैसा ही हुआ हम नरेश चाचा को नही बचा पाए और न ही कालदूत को आजाद होने से रोक पाए
रमण-देखो जो होना था हो गया उसे हम बदल नहीं सकते लेकिन जो सामने है उससे निपटने का प्रयास जरुर कर सकते है क्या तुम लोगो के पास कोई प्लान है कालदूत को रोकने का
अविनाश-फिलहाल हमारे पास कोई प्लान नहीं है कल रात हमारे ठिकाने पर हुए हमले मैं हमारे काफी सारे यन्त्र नष्ट हो गए है वरना हम उनकी मदद से कालदूत की लोकेशन का पता लगा सकते थे हमारे काफी हथीयार भी नष्ट हो गए है हमारा एक साथी बची हुयी चीजों को सँभालने मैं लगा हुआ है उससे बात करके देखता हु यदि को कोई मदद कर दे
रमण-तुम लोग तांत्रिको की तरह भुत पकड़ते ही क्या अगर कालदूत का पता भी चला तो उसका सामना कैसे करोगे
चेतन-हमारा सामना कई तरह ही चीजों से होता है दोस्त हमारी संस्था के पास कई ऐसे गुप्त हथियार है जिसके सामने अमेरिका रूस या जापान के सबसे विध्वंसक हथीयार भी खिलौने लगेंगे, अभी तक ऐसी नौबत नहीं आयी के उन्हें इस्तमाल करना पड़े पर अब लगता है उनके इस्तमाल का समय आ गया है पर अफ़सोस अभी वो हथियार हमारे पास नहीं है राहुल उन्हें सुरक्षित करने मैं लगा है और न ही हमारे पास कालदूत का पता है
राघव-तुमने कहा था इस किताब को पढ़ कर समझने वाला कालदूत के दिमाग से जुड़ सकता है
चेतन-हा
राघव-मैं इस किताब को पढ़ सकता हु मैं इसे जरिये कोशिश कर सकता हु के कालदूत के दिमाग मैं झांक कर उसकी लोकेशन पता कर सकू पर इसमें कितना समय लगेगा पता नहीं
अविनाश-यदि तुम सच मैं ऐसा कर सकते हो तो ये बहुत बढ़िया बात है मैं राहुल के बात करके उसे हमारे यन्त्र ठीक करने कहता हु एक बार हमें पता चल जाये कालदूत कहा है तो उससे लड़ा जा सकता है
इसके बाद राघव ने उस किताब को उठाया और पढने लगा और कोशिश करने लगा की वो कालदूत के दिमाग से संपर्क बना सके वही बाकि लोग भी आगे की रणनीति पर चर्चा करने लगे.......
कच्छ के विशाल रेगिस्तान मैं दूर नजर दौड़ाने पर तीन आकृतिया नजर आई, एक था मानव स्वरूपी काल्दोत और बाकि वो दोनों मछुवारे जिनको काल्दोत ने अपनी शक्ति द्वारा एक जानवर जैसा खूंखार बना दिया था
कालदूत ने उन जानवर रूपी मछुवारो के सर पर हाथ फेरते हुए कहा
कालदूत-ये कोई आम स्थल नहीं है वत्स, इस स्थान से और भी कई रहस्यमयी संसारो का द्वार खुलता है, आमतौर पर हमें हमारा संसार ही नजर आता है परंतु हमारे आसपास ऐसे अनगिनत संसारो के द्वार हर पल तैरते रहते है जिन्हें मनुष्य की सामान्य आँखें नहीं देख सकती, उन अदृश्य संसारो तक पहुचने वाले द्वरो को कहते है आयाम! सामान्यतः एक आयाम द्वार खोलने के लिए हमें अत्यधिक उर्जा चाहिए, मुझे भी एक आयाम द्वार खोलना है परंती इतने वर्षो तक समुद्र की गहराइयों मैं कैद रहने की वजह से हमारे शारीर मैं अभी आयाम द्वार खोलने के लिए पर्याप्त उर्जा नहीं है, सर्वप्रथम हम अपने शारीर को पहले की भांति शक्तिशाली बनायेंगे और फिर इस दुष्कर कार्य को संपन्न करेंगे इस धरती को और बेहतर बनाने का समय आ गया है, अब विश्व को ये बताने का समय आ गया है के कालदूत स्वतंत्र को चुके है आने वाले कुछ समय मैं हम इस धरती को अपने अधीन कर लेंगे
तभी अचानक ही कालदूत की नजर कुछ दुरी पर पड़ी वह उसने कुछ लोगो को ऊँटो की सवारी करते देखा तो उसकी भोहे तन गयी और वो बोला
कालदूत-मेरी सृष्टि मैं कोई भी जीव मेरे अलावा किसी और की सत्ता को नहीं स्वीकारेगा! इन मनवो को हमेशा से ही अपने से कमजोर का लाभ उठाने की आदत रही है पर मेरे राज मैं ऐसा अन्याय नहीं होगा
फिर कालदूत ने उन दो मछुवारो को कुछ इशारा किया जिसके बाद वो दोनों दौड़ते हुए उन मनवो की तरफ गए, ऊंट पर बैठे लोगो ने दूर से किसी चीज़ को अपनी तरफ दौड़ कर आते देखा तो पहले तो वो समझ नहीं पाए की ये, उनमे से एक आदमी बोला, "अरे ये क्या है? ये कैसे जानवर है?" बाकि लोगो को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन जब राक्षसी रूप मैं वो दो मछुवारे उन लोगो के पास पहुचे तो वो बुरी तरह घबरा गए और उनमे से एक ऊंट सवार बोला "भागो यहाँ से! ये..ये कोई जानवर नहीं है ये तो राक्षस लग रहे है!"
लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी, दोनों मछुवारो ने एक एक ऊंट सवार पर छलांग लगा दी, फिर उनको रेट मैं पटककर अपने पैने पंजेनुमा हाथो से उनकी छाती चिर दी और उनका धड़कता हुआ दिल निकाल कर खाने लगे, इतना भयंकर और वीभत्स दृश्य देख कर बाकि ऊंट सवारों ने अपना ऊंट तेजी से हाकना शुरू किया लेकिन वे भी ज्यादा डोर नहीं जा पाए और उनका भी उन राक्षसी मछुवारो ने वही हाल किया,
कच्छ की धरती उन ऊंट सवारों केव रक्त से लाल हो चुकी थी, वो मछुवारे किसी आज्ञाकारी पालतू कुत्ते की तरफ कालदूत के पास वापिस लौट आये
कालदूत-हा हा हा! अब इन तुच्छ मनवो की अक्ल ठिकाने आएगी, अब मुझे संसार भर मैं पीले अपने भक्तो को अपनी शक्ति द्वारा अपने पास बुला लेता हु ताकि देवताओ की इस सृष्टि पर अधिकार करने की अपनी योजना क्रियान्वित कर सकू.....
कालदूत ने अपने दोनों हाथो को हवा मैं उठाकर अपनी आँखें बंद कर ली और उसके ऐसा करते ही आसपास के वातावरण मैं एक अजीब सी उर्जा का प्रवाह होने लगा और अचानक एक एक करके संसार के सभी बचे हुए कालसैनिक काले चोगे और काले नकाब धारण किये हुए अपनी पारंपरिक वेशभूषा मैं कालदूत के समक्ष खड़े थे, कालदूत के अपनी शक्ति के बल पर सबको वहा इकठ्ठा कर लिया था और कालदूत को सामने देख कर वो सब अपने घुटनों पर बैठ गए
कालदूत इतनी सिमित संख्या मैं भक्तो को देखकर हैरान था, पिछले १००० वर्षो मैं कई लोगो ने कालदूत की भक्ति करनी शुरू की थी लेकिन जब कालदूत ने इतनी कम संख्या मे पने भक्तो कोदेखा तो उसे काफी निराशा हुयी, वो बोला
कालदूत-बस इतने ही लोग है? ये तो ५०० के आसपास होंगे,
तभी एक कालसैनिक नकाब उतारकर कालदूत के सामने जाकर खड़ा हुआ, वो और कोई नहीं बल्कि संतोष था जो उस रात कब्रिस्तान से बचकर भागने मैं कामयाब हो गया था, संतोष कालदूत से बोला
संतोष-लोग तो और भी थे प्रभि लेकिन उस राघव रुद्र और किसी गुप्त संस्था की वजह से अब हम लोग आधे भी नहीं बचे है, हालाँकि हम सभी कालसैनिक को आपके आगमन की सुचना मिल गयी थी लेकिन सुशेन और शक्ति की अकस्मात मृत्यु के कारण अब हमारा नेतृत्व करने वाला कोई नहीं बचा है, ब्लू हुड तो शक्ति के साथ पूरी तरह ख़तम हो गया था जिसके कारण हम ब्लू हुड के बचे हुए लोग भी ब्लैक हुड मैं शामिल हो गए थे लेकिन आपके परम विरोधियो ने ब्लैक हुड को भी नहीं छोड़ा
कालदूत-कोई बात नहीं वत्स! मेरे रहते लोगो की संख्या मैं अब कोई कमी नहीं आएगी और न ही अब इससे कोई फर्क पड़ता है,अब तो पूरी दुनिया कालदूत की बहती स्वीकारने वाली है और जो विरोध करेगा उसे तुरंत मृत्यु के घाट उतार दिया जायेगा, रही बात सुशेन की तो उसके हश्र से मैं पूर्णतः वाकिफ हु क्युकी मैं न सिर्फ सुशेन से अपितु तुम सभी से मानसिक रूप से जुडा हु, सुशेन को मैंने अपनी शक्ति का कुछ हिस्सा दिया था ताकि वो मेरे विरोधियो से निपट सके लेकिन जब आखरी कुर्बानी संपन्न हुयी तो युगों युगांतर से समुद्र की गहरायी मैं पड़े मेरे अशक्त शारीर को बाहर निकालने के लिए मुझे मेरी शक्ति का एक एक कतरा चाहिए थे इसीलिए कुछ समय मुझे सुशेन को प्रदान की गयी अपनी शक्ति वापस लेनी पड़ी लेकिन उतनी देर मैं उसकी हत्या कर दी गयी, अपने भक्त के इस हश्र के लिए मन कही न कही स्वयं को दोषी मानता हु और आपलोगों को नया नेता देना भी आवश्यक है इसीलिए मैं आज से संतोष को आपका नया मुखिया बनाता हु, आप सब संतोष के नेतृत्व मे मेरे विरोधियो का सामने करेंगे
कालदूत की बात सुनकर संतोष उसके चरणों मे गिर गया और कालदूत ने अपना हाथ उसके सर पर रखा
कालदूत-मुझे उम्मीद मैं वत्स तुम भी सुशेन की तरह अपने लोगो के लिए अच्छे मुखिया साबित होंगे
संतोष खड़ा हुआ और बाकि कालसैनिको की तरफ देख कर बुलंद आवाज़ मैं बोला
संतोष-मेरे मित्रो,आज हम सबको हमारी इतने वर्षो की तपस्या का फल मिला है, हमारे इश्वर लाखो वर्षो की कैद से मुक्त होकर इस धरती पर वापिस आये है लेकिन ये समय ख़ुशी मानाने का नहीं है बल्कि दुनिया को दुनिया को अपनी मुट्ठी मैं करने का है जिसकी शुरुवात आसपास के गाँव से होगी, सब लोग दक्षिण दिशा के गाँव की और जाओ और भगवान कालदूत की और से सन्देश पहुचाओ की ये हमारे साथ मिल जाये या एक दर्दनाक मौत के लिए तयार रहे.
वहा मौजूद सभी कालसैनिको ने संतोष की बात मणि और उनके जाते ही कालदूत संतोष से बोला
कालदूत-वत्स संतोष! हमें कुछ दिनों के लिए संपूर्ण एकांत की आवशकता है तो ध्यान रहे कोई भी हमें न छेड़े
संतोष-जो आज्ञा प्रभु!
फिर कालदूत ने हवा मैं हाथ लहराकर अपने लिए वहा एक आसन की व्यस्था कर ली और अपनी आँखें मूंद ली.......