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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

***** **** *कड़ी_02

विशाल और आदिति मूव

जल्द ही दोनों एक नये फ्लैट में आ गए और नये तरीके से बिना किसी परिवार मेंबर के जिंदगी जीने लगे, सिर्फ पति और पत्नी। शुरू में कुछ अजीब लगा वैसे अकेले जीने में, मगर धीरे-धीरे आदत पड़ गई। सब कुछ खामोश, सुनसान था और बहुत आराम और सुकून मिल रहा था वैसे जीने में।

और यही वक्त था जब विशाल, आदिति के दिल-ओ-दिमाग में अपनी फँटसीस को पूरा करने की शुरुवात करने का डिसाइड किया। जबसे शादी हुई थी, तब से अब तक विशाल ने आदिति को कुछ नहीं बताया था अपनी फँटसीस के बारे में। मगर इतने दिनों में विशाल ने आदिति को सेक्स का आदि बना दिया था और हर रोज

सेक्स करता था। शादी की पहली रात से लेकर अब तक, कभी भी मिस नहीं किया था चोदने को। जब आदिति को पीरियड्स होते थे तब विशाल उसके चूतरों के बीच में अपने लण्ड रगड़कर वीर्य वहाँ छोड़ता था।

अपनी तसल्ली के लिए और आदिति को समझाने के लिए की कहीं भी उसके जिश्म पर वो कर सकता है और अपने आपको खुश कर सकता है। विशाल ने बड़े आराम से, बहुत वक्त लिया आदिति को सेक्स की दुनियां में डूबोने को और उसको भी सेक्स को पसंद करने और एक बहुत अहम जरूरतमंद चीज साबित करने के लिये।

आदिति को उसने अपनी तरह से किस करना सिखाया। विशाल खुश था की आदिति बहुत जल्द सीख लेती थी और बिल्कुल उसकी जरूरत के मुताबिक वैसे ही करती थी जैसे वो चाहता था। जैसे की किस करते वक्त वो चाहता था की अपनी जीभ आदिति के मुँह में डाले और वो उसकी जीभ को चूसे और उल्टा आदिति भी अपना जीभ विशाल के मुँह में डाले और वो उसको चूसे।

बहुत सारी लड़कियां यह करने से मना करती हैं। सिर्फ ऊपर-ऊपर होंठों को चूमती रहती हैं। मगर आदिति सब सीख गई और सेक्स के दौरान अपने आप ही वैसे किस करती, और विशाल के जिश्म के ऊपर भी चारों तरफ किस करती और दाँत भी काटती थी। विशाल के गले पर अक्सर लोव बाइट्स हआ करते थे जो आदिति ने किए हुए थे सेक्स के दौरान।

अपने ससुर के घर में आदिति हमेशा चूड़ीदार या साड़ी में रहती थी। आदिति की फिगर बहुत दिलचस्प थी, बहुत खूबसूरत मुश्कान और बहुत हसीन गोरा रंग और एक जान वा नजरें थी उसकी। उसकी आवाज एक और चार चाँद लगाने वाली बात थी उसमें। बस जिस तरह से वो बात करती थी, और जिस तरह से आदिति ने उसके परिवार के साथ दोस्ती किया था, वो विशाल को बेहद पसंद आया था।

अपने पिता के घर उन 10 महीनों के दौरान विशाल ने बहुत कोशिश किया था आदिति को सेक्सी कपड़े पहनाने की। जैसे की क्लीवेज दिखाने वाले ड्रेस, बदन पर खूब चिपके हुए चूड़ीदार ताकी उसकी फिगर का पता चल जाए। छोटी करती ताकी जब वो बैठे तो उसकी जांघों का आकार दिखे। कभी-कभी आदिति वैसे कपड़े पहन लेती थी उसको खुश करने के लिए। मगर ज्यादातर मना करती रहती थी क्योंकी उस घर में और भी मर्द थे। पर जब भी वो कोई ऐसी ब्लाउज पहनती जिसमें उसकी क्लीवेज दिखे तो यह जरूर खयाल रखती थी की उसका पल्लू क्लीवेज को अच्छी तरह से ढंक दे।

विशाल छुपकर उसको देखता था, जब वो खाना परोसती थी पूरे परिवार को। विशाल देखा करता था की कौन

कौन उसकी क्लीवेज को देखता है घर में? जब भी आदिति अपने ससुर या देवर या विशाल के बड़े भाई से बातें करती थी या किसी काम से उन लोगों का पास होती थी तो विशाल खास तौर से ध्यान से देखा करता था आदिति को की उन मर्दो में से कौन आदिति की तरफ ज्यादा देखता है, और उसके जिश्म पर किस तरफ देखता

जब विशाल काम पर होता था तो अक्सर सोचा करता था की क्या पता इस वक्त आदिति घर में किसी के साथ होगी, उसके (विशाल के) पिता के साथ? राकेश के साथ या फिर दीपक के साथ। और रात को जब भी वो ।

आदिति के साथ सेक्स करता तो दिमाग में यही दृष्य देखता की कोई और मर्द उससे कर रहा है। विशाल खुद अपने मन में खुद को अपना बाप या अपना बड़े भाई समझकर आदिति को चोदता था और उसको बड़ा मजा आता था वैसे सोचकर चोदते हए। मगर तब विशाल ने इस बारे में आदिति को कुछ भी नहीं कहा था, सिर्फ अपने दिमाग में ऐसा सोचता था। आदिति को उन 10 महीनों में कुछ नहीं पता था जब विशाल के पिता के घर में रहते थे।

जब कभी भी दिन में वो आदिति को अपने पिता के साथ या राकेश के साथ देखता तो उस मौके को इश्तेमाल करता। अपने दिमाग में अपनी तरफ से कुछ चढ़ा-बढ़ाकर एक सिचुयेशन बनाता अपने जेहन में तब आदिति से सेक्स करता था। जैसे एक बार विशाल ने देखा था की उसका पिता आदिति से टीवी देखते वक्त छेड़खानी कर रहा था एक सीरियल देखते वक्त। आदिति और लीना एक सोफे पर बैठे हुए थे, विशाल के पापा वहीं थे और वो मसकरी कर रहा था और आदिति और लीना हँसे जा रहे थे। उस वक़्त विशाल अपने कमरे के दरवाजे के पीछे खड़ा देख रहा था आदिति और अपने डैडी को।

विशाल ने एक पोजीशन लिया ज्यादा देखने के लिए। क्योंकी वोही वक्त था की आदिति सबको दूध देने जाती

थी। क्योंकी हार रात को आखिरी सर्विंग वही करती थी सबको अपने-अपने ग्लास दूध देकर। आदिति उस वक़्त एक साड़ी में थी और ब्लाउज़ काफी टाइट थी, और क्लीवेज नजर आ रहे थे, तो विशाल देखना चाहता था की जब वो दूध का ग्लास देगी उसके बाप को तो कैसे देगी? और क्या उसका बाप आदिति की क्लीवेज को देखेगा या नहीं? इस इंतेजार में विशाल खड़ा देखे जा रहा था। उसके डैड को दूध देने के बाद आदिति राकेश को भी दूध देने जाती थी।

विशाल सब देखने के लिए खड़ा था दरवाजे के पीछे अपने रूम में। विशाल हर रात और दिन को ऐसा करता था,

छुपकर आदिति को देखा करता था, इंतेजार में था की कब उसके घर का कोई मर्द आदिति के जिश्म को देखे। पर आदिति को कुछ भी पता नहीं था की विशाल उसको वैसे देखता है हमेशा से।

उस रात को जब आदिति दूध वाली ट्रे लेकर आई तो लाउंज की बीच वाली छोटी मेज पर झुक कर रखा। और जो चीज पहले नजर आया विशाल को वो थे आदिति के लंबे बाल, जो उसके झुकने की वजह से आगे की तरफ आ गये थे और उसके बालों से उसकी क्लीवे

ल ने अपनी नजरों को अपने पिता पर किया तो देखा की उस समय उसके पिता आदिति को मुश्कुराते हुए देख रहे थे। तब विशाल ने अपने बड़े भाई की तरफ अपनी आँखें की और देखा की वो आरोवई खेल रहा था। मगर जिस वक्त आदिति ने दूध की ट्रे मेज पर रखा उसने भी आदिति की तरफ देखा एक बार, और दीपक लैपटाप पर गेम खेलने में बिजी था।

तब आदिति ने गर्दन हिलाकर अपने बालों को पीछे किया और सीधा खड़ी हो गई, अपने दोनों बाजुओं को ऊपर उठाकर बाल को पीछे के तरफ करके बाँधने लगी। उस समय उसकी बाजू के नीचे कांख की जगह भीगी हुई थी, ब्लाउज़ पशीना से और विशाल के डैड उस भीगे हुए ब्लाउज़ को देख रहा था और राकेश भी, विशाल ने दोनों को

अच्छी तरह से देखा।

विशाल की नजरें उसके बाप और बड़े भाई पर काफी देर तक रही, वो चेक करना चाहता था की कुछ ऐसा वैसा होगा की नहीं? मगर कुछ भी नहीं हुआ। अब जब बाल बाँधने के बाद आदिति झुकी दूध का ग्लास उसके पिता को देने के लिए तो आदिति ने विशाल की तरफ पीठ किया हुआ था तो विशाल को कुछ नहीं दिखा, और ना ही वो अपने पिता की नजरों को देख सका की क्या वो आदिति की छाती को देख रहा था या नहीं?

और जब आदिति ने दूध दे दिया। फिर से खड़ी हुई तो एक मुश्कान थी उसके चेहरे पर और नीचे वाले उसके होंठ दाँतों तले दबे हुए थे। तब वो राकेश की तरफ जाने लगी दूध देने को। विशाल को बड़ी बेचैनी हुई की वो कुछ नहीं देख पाया। मगर अब राकेश को देखने के लिए तैयार हो गया। अब, जब आदिति चलने लगी राकेश के तरफ जाने के लिए तो विशाल ने फिर अपने डैड को देखा की क्या वो आदिति को देख रहा है? और हाँ वो आदिति को जाते हुए देख रहा था।

उस वक़्त आदिति का पीठ उसकी नजरों के सामने थी। और जो बाप को नजर आया वो थी आदिति के चूतड़, चलते वक्त उसका मटकना, और उसके बाल इस तरफ से उस तरफ हिलते हुए, उसकी चाल के जोर पर। बाप दूध का ग्लास मुँह से लगाए हुए आदिति की गाण्ड को देख रहा था। यह विशाल ने देखा। अब विशाल यह । सोचने लगा की क्यों जिस वक्त उसने उसके पिता को दूध दे दिया तो मुश्कुरा रही थी और होंठ को दाँतों के नीचे दबाया था आदिति ने। क्या उसके पिता ने आदिति को कुछ कहा था? क्या उसने कहीं छुआ आदिति को?

क्या उसने कोई तारीफ की आदिति की? क्या उसने उसके क्लीवेज को देखकर कुछ कहा उससे? यह सोचकर विशाल का लण्ड खड़ा हो गया और उसको रात को चोदने के लिए दिमाग में इमेज आ गया की क्या सोचकर

आदिति से सेक्स करेगा उस रात को।

जब आदिति राकेश को ग्लास दे रही थी, झुकी हुई तो थी मगर उसका एक हाथ उसकी छाती पर था क्लीवेज को ढंकने के लिए। पर राकेश की आँखें वहीं पर थीं विशाल ने नोट किया।

उस रात को विशाल ने आदिति के साथ सेक्स किया तो दिमाग में अपने पिता और राकेश को सोचते हुए किया। उसने ऐसा सोचा कीदूध देते वक्त उसके पिता ने उसकी क्लीवेज को छुआ, इसीलिए वो शर्माकर हँसी थी और होंठों को दबाया था। और राकेश को दूध देते वक्त आदिति ने क्लीवेज पर हाथ नहीं रखा था। राकेश को सब नजर आया था और उसने आदिति का हाथ पकड़कर अपने तरफ खींचा था। ऐसा कुछ सोचकर विशाल ने

आदिति से सेक्स किया था उस रात, जैसे की राकेश और उसका बाप आदिति के साथ कर रहे हैं।

ऐसा सोचने से उसको बड़ा मजा आता था, और उसका लण्ड जमकर खड़ा रहता था सेक्स करने के बाद भी।

आदिति को कुछ भी पता नहीं था इन सबके बारे में। वो बस समझती थी की नार्मल चुदाई हो रही है। उसको कुछ नहीं पता था की विशाल के दिमाग में क्या-क्या चलता रहता है?

शुरू में आदिति चुदाई के मामले में बिल्कुल अनाड़ी थी। अपने आप में बंद थी, छूना मुश्किल था उसे, छूने भी नहीं देती थी ठीक से। मगर धीरे-धीरे कुछ दो महीनों के बाद उसने अपने आपको समर्पण किया सही माने में, तब खुद सेक्स को एंजाय करने लगी। शादी के बाद के पहले दो महीने विशाल ने सिर्फ खुद को खुश करने के लिए उसको चोदा था, आदिति को कोई आर्गेज्म कुछ नहीं हुई थी। उसको तो कुछ पता ही नहीं था क्या होता है सेक्स करना? पर धीरे-धीरे विशाल ने उसको समझाया की सेक्स करते वक्त उसको भी मजा आना चाहिए। उसके जिश्म में एक आग सी लगनी चाहिए वगैरा वगैरा।

विशाल आदिति का सेक्स टीचर था रातों को बेड पर, और यही चाहा था विशाल ने। और वैसे सेक्स करते हुए तीसरा महीना चला तो एक रात को करते वक्त आदिति ने अपने नाखून को जोर से गड़ाया विशाल के कंधों पर

और सिसकियों के साथ थोड़ी सी आवाज निकाली- “ओहह नम्म्म... आआआ...” करने लगी।

विशाल को समझ में आ गया की यह उसकी आदिति की पहली आर्गेज्म है, और अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर बरकरार रखा, और अपनी उंगलियों को चूत के ऊपरी हिस्से पर हौले-हौले मसलने लगा। जब आदिति जोश में आई तो विशाल के कंधों पर अपने दांतों को गाड़ते हए काटकर लाल कर दिया और उसकी जिश्म एक साँप की तरह रेंगने लगी, और जोरों से हाँफते हुए आदिति ने- “आऽऽ उफफ्फ... उईई माँ.” करती गई। वो पहली रात थी जब आदिति को पता चला था की जिश्म का मजा क्या होता है, और उस मजे को पाने के लिए ही चोदा जाता है।

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
***** *****कड़ी_03 विशाल आदिति को तैयार करने लगा

अपने नये घर में किसी का डर नहीं था की कोई उनकी रातों को गरमा गरम सेक्स के दौरान कोई उन लोगों की कराहें या सिसकियां सनें। इसलिए उनकी सेक्स लाइफ और भी मजेदार होने लगी। तो यही वक़्त था की विशाल ने अब आदिति को तैयार करना शुरू किया अपने तरीके से की वो उसके रंग में ढाल जाए। उसको कोई जल्दी नहीं था, वो धीरे-धीरे आदिति को तैयार करना चाहता था की एक दिन आदिति उसकी ख्वाहिशों को पूरा कर सके। अपने रंगों में आदिति को ढालने के लिए सब कुछ सोच रखा था विशाल ने की कैसे और कब क्या-क्या करेगा।

शुरुवात के लिए विशाल ने कुछ लिंगरियां खरीदी आदिति के लिए। पतली-पतली नाइटीस और छोटी भी, जिसके बहुत ही पतली स्ट्रैप्स होते हैं, और जो इतनी पतली कपड़े की थी जिससे सब कुछ अंदर दिखे। आदिति को बिना ब्रा पहनाये, अपनी उंगलियों से उस नाइटी के पतले कपड़े समेत उसकी निपल को अपनी उंगलियों में दबाते हुए उससे छेड़खानी किया।

अब सोचने की बात है की क्या गजरा विशाल पर आदिति को वैसे नाइटी, और छोटी पतली पैंटी पहने के लोये मनवाने में। वो तो लाल पीली हो गई, उसके चेहरे से जैसे खून निकल पड़ेगा, वो काँप उठी, पशीने छूट गये और पहनने से इनकार कर रही थी। पैंटी इतनी पतली और छोटी थी की आदिति उनको देखना भी नहीं पसंद करती है। विशाल को गुस्सा आ गया और वो बाहर बाल्कनी में सिगरेट पीने चला गया आदिति को बेडरूम में छोड़कर।

आदिति बेड के एक कोने में बैठी हुई थी और वो कपड़े बेड के दूसरे कोने में जिसको वो देख भी नहीं रही थी शर्म के मारे।

थोड़ी देर के बाद विशाल बेडरूम की चौखट पर आया और कहा- “दुनियां की हर पत्नी अपने पति को खुश करने के लिए ऐसी लिंगरियां पहनती हैं। अगर तुम मुझको खुश करना चाहती हो तो मैं 5 मिनट के बाद वापस आता हूँ, और तुमको उस ड्रेस में होना चाहिए। और अगर तुमने नहीं पहना तो आज मैं इस बेड पर नहीं सोऊंगा, सोफे पर चला जाऊँगा तुरंत...” यह कहने के बाद विशाल ने आदिति की तरफ पीठ करते हुए कारिडोर में जा रहा था।

आदिति दौड़कर उसके पीछे से लिपट गई, उसके बाहें उसके छाती पर कसके पकड़कर आदिति ने बचपना आवाज में कहा- “मुझे बहुत अजीब लग रहा है वैसे कपड़े पहनने को, वो उन गोरी मेमों के लिए हैं। तुम क्यों मुझको पहनना चाहते हो? बहुत बुरे हो तुम..."

फिर विशाल ने उसे लाउंज में लेजाकर एक बच्चे की तरह समझाना शुरू किया, जैसे एक किंडरगार्टेन के बच्चे को एबीसीडी सिखाया जाता है। आदिति को उसने अपनी गोद में बिठाया समझने के लिए और हाथ धीरे-धीरे समझाते वक्त उसके जिश्म पर फेरता गया। तो आदिति अपनी होश खोने लगी। उस वक़्त वो एक चूड़ीदार में थी और विशाल का हाथ उसकी जांघों से होकर ऊपर तक जाने लगा और उसकी एलास्टिक को पेट पर से नीचे करकर अंडरवेर को उतारने लगा। आदिति नीचे से नंगी हो गई और विशाल हाथ फेर रहा था उसकी मलयन जांघों के बीच और वो घूरते हुए उससे बातें कर रहा था।

विशाल ने आदिति को समझाते हुए कहा- “देखो जान, हम माडर्न लोग हैं, हमको इस माडर्न जमाने में और यहाँ

के रीति रिवाज के तरीके से जीना पड़ेगा। तुम जवान हो, 19 साल की भी नहीं हुई हो अभी और सभी जवान लड़कियां ऐसे कपड़े पहनती हैं यार। खासकर बेड पर रात को अपने बायफ्रेंड के साथ। तुम तो मेरी बीवी हो, तो तुम्हारे लिए तो ज्यादा आसान होना चाहिए इन्हें पहनने को मेरे लिए ना? मैं और ज्यादा खरीदने वाला हूँ। यह तो ब्लैक है, मैंने लाल और पिंक कलर का भी देखा है माल में, उनको भी लाऊँगा और तुमको पहनना ही होगा। बहुत ही हाट और मस्त दिखोगी उनमें जानम। जरा पहन के दिखाओ तो, पागल कर दोगी मुझे। देखो तुम्हारी जांघे इस वक्त नंगी हैं ना... और मैं इन्हें छू रहा हूँ। उसी तरह जब तुम उस कपड़े को पहनोगी तो मैं तुमको ऐसे ही छऊँगा. क्या बरा है इसमें? तब हम दोनों को और भी मजा आएगा और दोनों ज्यादा हाट हो जाएंगे करने के लिए और तुम्हारा आर्गेज्म भी ज्यादा लंबा और मजेदार होगा। ट्राई करके देखो बेबी। जाओ पहनकर आओ मेरी खातिर। जाओ ना मेरी जान जाओ। मुउआहह...”

विशाल ने इतना फुसलाया की आदिति मान ही गई आखिर। और विशाल को एक शर्मीली मुश्कान देते हुए बढ़ी बेडरूम की तरफ लिंगरी को पहनने के लिए। असल बात यह थी की विशाल के छुआ छुई से वो गरम हो गई थी

और उस वक्त उसके दिमाग में सिर्फ एक बात थी और वो था सेक्स करना। क्योंकी जिस तरह से विशाल ने उसकी जांघों के बीच अपनी उंगलियों को फेरा और उन मीठी-मीठी बातों के दौरान वो गीली होने लगी थी।

लिंगरी को पहनने के बाद आदिति ने खुद को आईने में देखा तो वो खुद को देखकर और भी गरम हो गई जैसे एक आग लिपट गई उससे। इतनी हाट और सेक्सी दिख रही थी जैसे की सिर्फ चोदने के लिए वह कपड़े बनाए गये थे। नाइटी ठीक उसके जांघों के पूरा ऊपरी वाले हिस्से पर आती थी, पीछे समझ लो की उसकी गाण्ड की शुरुवात दिख रही थी इतनी छोटी थी नाइटी, ऊपर वाले गोरे और सफेद रंग की मिलावटी रंग भरी जांघे साफ नजर आ रही थीं, और ऊपर आदिति खुद की चूचियों पर निपल की कड़क पाइंट उस मुलायम कपड़े में खूब दिख रही थी। आदिति खुद के जिश्म को देखकर सिसक गई। उसको अपने खुद के जिश्म पर प्यार आया, और उसने अपनी आँखों को बंद करके एक गहरी सांस लेते हुए दोबारा देखा आईने में खुद को निहारते हुए।

तब तक विशाल कमरे में दाखिल हुआ और आदिति को उस नाइटी में देखकर बिल्कुल चौंक सा गया जैसे एक गुड़िया उसके सामने खड़ी थी। उसने झट से अपने कपड़े उतारे और बेड पर चढ़ गया, आदिति को अपने पास बुलाते हुए।

विशाल बेड पर अपने घुटनों पर था जबकी उसका खड़ा, तना हुआ लण्ड सीधे आदिति की तरफ देख रहा था,

और विशाल के लण्ड को देखते हए सामने से आदिति बेड पर चढ़ रही थी। आदिति ने एक घटना अपना बेड पर रखा और दूसरा रखने ही वाली थी की उसी ने अपनी बाहों को जल्दी से विशाल के कंधों पर रखते हए उसकी बाहों में

और फिर

। हाथ को डाइरेक्ट विशाल के लण्ड पर रखकर उसको जोर से पकड़कर मसलते हुए विशाल को चूमने लगी।

तब तक विशाल ने उसको उठाकर उसकी दोनों जांघों को अपने जिश्म पर लपरटते हए आदिति की एक जाँघ को लेफ्ट में किया और दायां में और दोनों एक दूसरे की जीभ चूसने में लग गये। जबकी विशाल का लण्ड उसके चूतड़ों पर रगड़ रहा था। आदिति खुद अपनी चूतड़ों को हिलाते हुए विशाल के लण्ड को महसूस कर रही थी, कभी अपनी चूत पर तो कभी गाण्ड पर। वो जैसे एक बाइसिकल पर बैठी हुई खुद की कमर को हिलाते हुए मजा ले रही थी किस करते वक्त। जल्द ही आदिति ने किस को रोक कर एक गहरी सांस लिया और हाँफते हुए उसकी आँखें बिल्कुल शारबी दिखने लगी। विशाल ने उसके नंगे कंधों को उस नाइटी की पतली स्ट्रैप समेत चाटना शुरू किया। आदिति अपने आपको पूरी तरह खो चुकी थी। उसकी जिश्म की प्यास बिल्कुल बढ़ गई थी, जैसे आग की रफ्तार से लिपटना, और उस वक्त सिर्फ पेनेट्रेशन की चाह थी आदिति को।

आदिति को बहुत सख़्त जरूरत थी उसी वक्त विशाल के लण्ड को अपने अंदर लेने की। यह विशाल को अच्छी तरह से पता था। पिछले 10 महीनों में उसने आदिति की आग को बिल्कुल पहचान लिया था। विशाल इसी वक़्त की इंतेजार में था अपना खेल शुरू करने के लिए। यही सही मौका था आदिति को अपने रंगों में रंगने के लिए।

विशाल ने उसकी जांघों के बीच अपनी उंगली डाला और देखा की उसकी पतली पैंटी बिल्कुल भीग चुकी है। विशाल को पता चल गया की आदिति बिल्कुल गरम हो गई है, और उसका लण्ड अपने अंदर लेने के लिए बेकरार है। मगर जानबूझ कर विशाल नहीं कर रहा था, उसको तड़पा रहा था। क्योंकी वो कुछ और ही चाहता था उस वक़्त। फिर विशाल ने बात किया। हाँ ऐसे नाजुक मौके पर उसने बात किया जो आदिति ने बिल्कुल ही नहीं सोचा था। बातें जो किए वो गले में दबी हए आवाज में थी, भारी साँसों के बीच वाली आवाज में बात निकली और हाँफते हुए आवाज में बात निकली विशाल की। विशाल की आवाज जैसे एक मैंडक की क्रोक और आदिति की बिल्कुल जैसे एक साँप की हिस्स्स।

विशाल ने अपनइ दो उंगलियों से उसकी निपल दबाते हुए अपनी जीभ को उसकी गर्दन पर फेरा और गुर्राते हुए उसके कानों में कहा- “जान चलो आज एक खेल खेलते हैं...”

आदिति ने अंगड़ाई लेते हुये कहा- “हम्म... अब क्या खेल? मुझे इसे लेने दो ना... बहुत मन कर रहा है अब.."

मगर विशाल को कोई जल्दी नहीं थी, वो आदिति के जिश्म पर लेटा था, उसका लण्ड उसकी जांघों के बीच, उसकी छाती आदिति के गले के पास, उसकी कंधों पर से स्ट्रैप्स नीचे किए हुए, उसकी दोनों चूचियां बिल्कुल सीधी खड़ी छत को ताक रही थीं जैसे दो छोटी-छोटी पहाड़ियां। आदिति की जिश्म विशाल के जिश्म के नीचे एक साँप की तरह रेंग रही थी, आदिति एक पोजीशन ढूँढ़ रही थी उसका लण्ड अपने अंदर लेने के लिए। मगर विशाल बहुत होशियारी से उसको नहीं लेने दे रहा था, अपनी कमर को नीचे करते हुए।

विशाल ने अपनी गरम सांसों से उसके कानों को गरम करते हुए कहा- “आदिति यूँ समझो की यह सब मैं नहीं कोई और, एक दूसरा आदमी कर रहा है तुम्हारे साथ... बस कुछ ऐसा सोचो अपने जेहन में..."

आदिति की आँखें उस वक्त जो बंद थी अचानक झट से खोलते हुए उसको किस करके नशीली आवाज में बोली “क्यों जान? क्यों किसी और को सोचूं, जब तुम यहाँ मेरी आगोश में हो डार्लिंग? चलो अब करो ना मुझे इसकी

जरूरत है करो ना प्लीज़्ज़..”

विशाल ने कहा- “नहीं जान, बस तुम किसी और को सोचो, किसी को भी मुझे मत बताओ की किसको सोच रही हो? मगर तुम अपने दिमाग में किसी और मर्द को सोचो। कोई ऐसा जिसको तुमने कभी ऐसी नजरों से देखा हो, कोई ऐसा जिससे कभी तुम प्रभावित हुई हो, किसी भी और मर्द को सोचो, उससे बिनती करो की वो करे तुम्हारे साथ, उससे कहो करने को, उससे कहो की तुमको इसकी सख़्त जरूरत है। करो जान, वैसा सोचो। हम दोनों को बहुत ज्यादा मजा आएगा और हमारे इस हसीन लम्हे को चार चाँद लगा देगा, देखना कितना अजीब सा मजा

आएगा। तुम खुद एंजाय करोगे, मेरी बात मानों जान, करो जो कह रहा हूँ। कम से कम मेरे खातिर सोचो वैसे..."

आदिति ने विशाल के चेहरे में देखते हए, तपती हई जिश्म की आग में अपनी चूचियों को उसकी छाती पर । मसलते हुए और उसके कान के नीचे वाले हिस्से को हल्के से दाँत से काटते हुए बोली- “मैं सिर्फ तुमसे यह सब करना चाहती हूँ, किसी और से नहीं जान.."

विशाल बिल्कुल खुश नहीं हुआ और कहा- “नहीं नहीं ऐसे नहीं। मुझे मत देखो अपनी आँखों को बिल्कुल बंद रखो। किसी और मर्द को महसूस करो, यह सिर्फ एक फँटेसी है बेबी। झूठ मूठ का है, मगर यह हमारी सेक्सुअल जिंदगी को और मजेदार बना देगी, और तुम खुद बहुत पसंद करोगी। मानों मेरी बात देख लेना। ऐसा सोचो की वो तुम्हारे जिश्म के ऊपर है इस वक्त, और तुम उसके लण्ड को अपनी जांघों के बीच महसूस कर रही हो और चाहती हो किवो तुम्हारे अंदर घुस जाये, गहराई से उसको सोचो। वो आदमी इस वक्त तुम्हारे जिश्म के ऊपर है, विशाल नहीं है इस वक्त। वो आदमी तुम पर लेटा हुआ है और यह सब कर रहा है, और तुम भी चाहती हो की वो करता जाए। जल्दी करो अब इससे पहले की विशाल आ जाये सब कर लो जल्दी से तुम दोनों। बोलो उसे की वो जल्दी से विशाल के आने से पहले तुमसे करे। बोलो आदिति बोलो उसको करने को, उसने तुमको बहुत गरम कर दिया और तुमको उसके लण्ड की जरूरत है। अब बोलो जान, बोलो उसे करने को। उसको बोलो तुमको चोदने को चुदवा लो उससे तुम..."

हर एक शब्द विशाल ने हाँफते हुए बहुत जल्दी-जल्दी बोला।

उधर आदिति की सांसें भी बहुत ही तेज हो गई थीं सब सुनते हुए और विशाल के लण्ड ने थोड़ा पानी भी छोड़ दिया था, यह सब करते और बोलते वक्त। विशाल को बेसब्री से इंतेजार था की आदिति कहे की हाँ कोई और है

और वो करे मुझसे।

खुद विशाल ने सोच रखा था की वो उस वक्त खुद का बाप होगा और आदिति उसकी बहु और बह खुद कहेगी उसको चोदने को। उसने आदिति को यह नहीं कहा की वो क्या सोच रहा है। सिर्फ यह कहा की वो किसी और मर्द को दिमाग में बसाकर चुदवाए। विशाल उसको तैयार कर रहा था और आदिति में अडल्टरी बनने की चाह पैदा कर रहा था। ताकी एक दिन सच में ऐसा उससे करवा सके। अभी बस शुरुवात थी तायारियों की।

आदिति बेहाल थी। उस वक्त एक बेहोशी की हालत में थी। जैसे-जैसे वो विशाल छाती को और कंधों को चूसते चाटते जा रही थी, कभी दाँत काट रही थी, बिल्कुल जोश में थी और अपने नाखून को भी विशाल के जिश्म पर कहीं-कहीं गड़ा रही थी। और उसने अपनी दोनों टाँगों को दोनों तरफ फैलाते हुए बंद आँखों से ही विशाल से पूछा “क्यों जान... क्यों मुझसे ऐसा करवाना चाहते हो तुम?” और उसने अपने घूसे से धीरे-धीरे विशाल के छाती पर कई बार मारा जैसे एक बच्चा शरारत करते वक़्त मारता है।

विशाल ने कहा- “बोलो जान बोलो, मैं वेट कर रहा हूँ, वो आदमी इंतेजार कर रहा है की तुम बोलो तब वो अपना लण्ड तेरी चूत के अंदर डालकर तुझको चोदेगा, तब तुमको भी बहुत मजा आएगा। बोलो उससे तुमको इसकी। सख्त जरूरत है। कम ओन अब बोल भी दो ना... देखो यह उसका लण्ड तुम्हारी चूत पर रगड़ रहा है। इसको तुम महसूस तो कर रही हो, मगर कह नहीं रहे हो। बोलो उसको इससे अंदर डालने को..”

विशाल ने अपने लण्ड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। मगर अंदर नहीं डाल रहा था जानबूझ कर। उसकी गीली चूत पर विशाल का लण्ड फिसलने लगा था और आदिति ने जोर से सिसकते हए विशाल को अपने बाहों में लिया और उसके कंधों को चूसते हए कहा- "हाँ हाँ डाल डो अंदर डाल दो अब..” और आदिति अपने हिप को हर

तरह से पोजीशन देती गई लण्ड को अंदर लेने के लिए मगर विशाल नहीं डाल रहा था।

विशाल ने पूछा- “कौन? किससे कह रही हो डालने को? कौन है वो? बोलो जल्दी बोलो तब वो डालेगा ना.."

आदिति से रहा नहीं गया और सिसकियों से साथ चिल्लाई विशाल को बाहों में लेते हुए- “उसी आदमी को जिससे तुम करने को बोल रहे हो। बोलो उसको अंदर घुसाने को। मुझे बहुत जरूरत है। बोलो डाल दे भीतर जोर से। बोलो डालने को ना, बोलो मुझे चोदने को ना। प्लीज़्ज... मुझे इसकी जरूरत है अब सहन नहीं होता...”

फिर विशाल ने अपने लण्ड को ढूंस दिया उसकी गीली चूत के अंदर।

एक अजीब कशिश और खुशी के साथ फिर तुरंत लण्ड के घुसते ही आदिति ने जोर से आवाज निकाली “आआहह- इसस्स्स ..."

फिर विशाल ने एक के बाद एक धक्का देने लगा जोरों के साथ, और बड़ी तेजी के साथ। जबकी आदिति ने उसको जोर से जकड़ा हुआ था और खुद अपनी कमर को विशाल के नीचे रगड़ रही थी और उत्तजना में चिल्लाई “उईई माँ... एसस्स्स... आअहह... इसस्स्स...क्ष जल्दी-जल्दी और तेज ज्यादा तेज करते जओ, बहुत मजा आ रहा है हाँ हाँ करते जाओ... आअहह..."

फिर विशाल भी गुर्राते हुए वीर्य छोड़ने लगा- आघघ्गगघह... उफफ्फ... आअघघ... हाँ बाबययी.. ओह माई गोढ एसस्स... ओऊऊव...”

फिर दोनों हॉफते हुए पशीना-पशीना होते एक दूसरे को देखने लगे और दोनों को लगा की आज पहली बार सेक्स किया दोनों ने। एक अलग ही मजा आया दोनों को इस चुदाई से।

 
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विशाल अपने आफिस से काल करता है उस गरम मसालेदार सेशन के बाद, विशाल आदिति के चेहरे को देखते हुए उसके गालों पर अपने उंगलियां फेरते हुए सोचने लगा- “किस आदमी को इसने अभी-अभी सोचा अपने दिमाग में?"

जबकी आदिति शर्माई और दुस्से से बच्चे की तरह उसने विशाल की छाती पार मारा और अपने चेहरे को छुपा लिया। मगर विशाल ने उसको बाहों लेकर अपनी जीभ को उसके मुँह में डाला और जमकर किस किया। किस के बाद आदिति ने शर्म के मारे नजरों से उसको देखते हुए कहा- “तुम बहुत ही बुरे हो, तुमने मुझको खुद से शर्मिंदा किया है..”

फिर विशाल ने उसकी पीठ थपथपाते हुए उसको बाहों में लेकर उसका सिर अपनी छाती पर किया और दोनों

गहरी नींद में खो गये।

अगली सुबह विशाल हर रोज की तरह जल्दी में था। जल्दी से एक शावर लिया और तैयार होकर आफिस के लिए निकलने वाला था की देखा आदिति उसको अजीब सी नजरों से देख रही है। विशाल अपनी टाई को गले में बाँधते हुए पूछा- “क्या हुआ जान? ऐसे क्यों देख रही हो?"

आदिति ने सिर्फ मुश्कुराते हुए अपनी नाक को टेढ़ा किया और चली गई, उसका लंच बाक्स लाने को। जब वो निकालने लगा तो हमेशा की तरह आदिति उसको चौखट तक छोड़ने गई और विशाल ने उसको बाहों में लेकर

गडबाइ किस किया, और आदिति बोली- “जी चाहता है की आज तम घर पर रहते मेरे साथ...”

विशाल उसको हैरानी से देखते हुए बोला- “नहीं जान। यह नहीं हो सकता, तुमको पता है की मैं जिस प्राजेक्ट पर

काम कर रहा हूँ वो बहुत जरूरी है और जिस टीम के साथ काम कर रहा हूँ उनको मेरी जरूरत पड़ेगी, अगर मैं बीमार भी होता तब भी नहीं रुकता। सारी जान मुझे जाना होगा...” और विशाल निकल गया।

आदिति उसको तब तक देखती रही जब तक विशाल पार्किंग से अपनी कार को रिवर्स करके मेन रोड पर निकला और गेट से बाहर होते ही विशाल हर रोज की तरह अपने हाथ बाहर निकलकर आदिति को हाथ हिलाते हुए चला गया। आदिति भी हाथ हिलाते हुए वापस फ्लैट के अंदर चली गई और अपने बिस्तर पर लेट गई। उसको अजीब महसूस हो रहा था उस वक्त।

आदिति बेड पर लेटे हुए पिछली रात वाली हाट सेशन को याद करने लगी। उसको रात वाली बात बहुत पसंद आई थी, इसीलिए चाहती थी की विशाल घर पर ही रहे और वो सारा दिन उसके साथ बिताती बेड पर। वो अपने आपको एक नई नवेली दुल्हन की तरह महसूस कर रही थी, जैसे कल रात को पहली बार चुदाई किया था। आदिति को इतने महीनों में कभी भी उतना मजा नहीं आया था जितना कल रात को। कल रात को उसको लगा वो उसकी पहली रात थी हनीमून वाली नाइट।

विशाल के पिता के घर में पहले 10 महीनों में उसको कभी वैसा मजा नहीं आया था चुदने में जैसा कल रात को हआ। पहले तो वो सिर्फ लेटकर अपना जिश्म दे देती थी विशाल को एंजाय करने को, मगर अब आदिति को भी

करने की जरूरत महसूस होने लगी थी, जैसे कभी भी पहले नहीं हुई थी। आदिति गहराई से सोचने लगी की कैसे कल रात विशाल उसके जिश्म के उन हिस्सों को छू रहा था, उसको किसी और मर्द के बारे में सोचने पर मजबूर

करते हुए? और वो कितना काँप रही थी उस वक्त। इस वक्त भी उसका जिश्म काँप उठा यह सोचते हुए की कोई और मर्द उसके जिश्म के उन हिस्सों को वैसे ही छू रहा हो। और यही सब सोचते हुए उसकी पैंटी फिर से गीली हो गई। यह पहले कभी भी नहीं हुआ था।

आदिति के साथ ऐसा कभी भी नहीं हुआ था, जो उसको अब हो रहा था। वो सोचने लगी की क्यों कल रात का वाकिया याद करने से उसकी पैंटी गीली हो गई? और आदिति ने पहली बार वो किया जो उसने कभी भी नहीं किया था। उसने अपनी उंगली को पैंटी के अंदर डाला और भीगे हुए हिस्से पर उंगली फेरा, फिर उंगली को बाहर निकाल के अपनी आँखों के सामने लाई और उंगलियों के बीच लगे अपने पानी से खेलते हए देखने लगी की कैसे

वो पानी गाढ़ा था? जैसे उंगलियों में शहद लगा हो।

फिर उसने खुद नहीं सोचा था की वो अपनी उन उंगलियों को अपने मुँह तक लाकर जीभ से चाटेगी और उंगली को चूसेगी जो उसने आज पहली बार किया। खुद अपनी उंगली को चूसते हुए उसको उत्तेजना महसूस हुई और चुदने को बड़ा मन किया तुरंत और बेकाबू हो गई। एक ही तरीका था उस हालत से निकलने का। वो तुरंत बेड से उतरी और बाथरूम में ठंडे पानी से नहाने चली गई।

आदिति अपने आपको कुसूरवार मानने लगी और खुद से कहा- “क्या हो रहा है मुझे? मैंने ऐसा क्यों किया आज? पहले तो कभी भी मैंने ऐसा नहीं किया। मैं पागल हो रही हूँ शायद मुझे कल रात वाली बात को बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए। बिल्कुल गलत है वो..” और उसको खुद पे शर्म आई।

विशाल उस तरफ काम में सोच रहा था और खुद से कहा- “आदिति ने कल रात को किस मर्द को अपने दिमाग में सोचा था? वो बहुत ही गरम हो गई थी। मुझे पक्का यकीन है क्योंकी पिछले 11 महीनों में वो कभी भी वैसी हालत में नहीं आई थी चुदते वक्त। हमेशा मैं चोदता था और वो मुझे बस अपना जिश्म दिया करती थी चोदने को। मगर कल रात को उसने बिल्कुल मेरी तरह किया। उसको कल रात बहुत ही मन कर रहा था, चुदने के लिये तड़प रही थी की मैं उसको चढूं। क्या था वो? क्या वो लिंगरियों के असर था या जो खेल मैंने खेला था उसका असर था? बहुत जल्दी उसकी आर्गेज्म हो गई थी कल रात को। तड़प रही थी की कब मैं अपना लण्ड उसके अंदर डालं। अब मेरा लण्ड या उस आदमी का लण्ड, जिसको वो सोच रही थी खयालों में। मेरा लण्ड उसके अंदर घुसते ही सिर्फ 4-5 बार धक्का देने के बाद ही उसने अपने नाखून गड़ा दिये मेरे कंधों पर, जिससे मुझे पता चला की उसको आर्गेज्म हो गई। इतनी जल्दी तो वो कभी नहीं झड़ी थी। और झड़ते वक़्त उसने अपनी दोनों टाँगों को मेरी कमर पर लपेट लिया था जो उसने पहले कभी भी नहीं किया था। तो अब मैं क्या सोच?

क्या वो खेल इतना असरदार था? खेल ने उसको इतना उतेजित कर दिया था? मझको और ज्यादा वैसा खेल बनाना होगा अब उसके लिए। हाँ, अब वो भी मेरे रंग में रंगने लगी है शायद। मेरा सपना अब पूरा होगा मुझे लगता है। ओके अब और खेल बनाता हूँ उसके लिए। उसको लंच टाइम में फोन करता हूँ और बातों से गरम करता हूँ। अब देखते हैं क्या असर होता है उसपर अब?"

विशाल के पास बेहतर आइडिया थे आदिति को लुभाने के लिए। अपने लंच टाइम में आदिति को उसने फोन किया, अपने बंद आफिस में वो बिल्कुल फ्री था, जैसी बातें करना चाहे वो कर सकता था।

आदिति ने फोन उठाई- “हेलो.."

विशाल- “हाय बेबी, थिंकिंग हाट आफ यू स्वीटहार्ट..."

आदिति- “हू इस इट? हू आर यू?"

विशाल को हैरानी हुई की आदिति ने उसकी आवाज को नहीं पहचाना, और उसके गंदे दिमाग में अचानक एक

जबरदस्त आइडिया ने घर बनाया और विशाल ने अपने रुमाल को फोन पर लगाकर, थोड़ा आवाज बदलकर एक अजनबी होने का ढोंग किया और कहा- “तुमको क्या पता है की इस धरती पर तुम एक अकेली हो जिसकी इतनी प्यारी जिश्म है जानेमन..."

आदिति चौंक गई की कौन उससे वैसे बातें कर सकता है? और उसने जवाब दिया- “देखो अगर तुमने नहीं बताया की तुम कौन हो तो मैं फोन रख रही हूँ ओके?"

विशाल- “सुनो डार्लिंग, मैं तुमको देखना बहुत पसंद करता हूँ, निहारता हूँ तुम्हें मगर तुमको नहीं पता की मैं

तुमको हर रोज देखता हूँ..' |

आदिति- “कहाँ देखते हो मुझे? कहाँ रहती हूँ मैं बताओ?"

विशाल- “अब खुद सोचो जानेमन, तुम्हारे खयाल से, मैं कहाँ से तुमको हर रोज निहार सकता हूँ?

आदिति- “मैं कभी कहीं नहीं जाती, मैं अपने घर के अंदर रहती हूँ, तो तुम कैसे मुझको देख सकते हो? तुम झूठ बोल रहे हो। बताओ तुम कौन हो?"

विशाल- “तुमको लगता है मैं मजाक कर रहा हूँ? तो सुनो आज सुबह जब तुम अपने पति को हाथ हिला रही थी

तो मैं तुमको निहार रहा था। कितनी सेक्सी लग रही थी तुम आज सुबह-सुबह जानेमन। मेरा मन मोह लिया तुमने तो.”

आदिति को डर लगने लगा और अपने कमरे में चारों तरफ देखा की कहीं अंदर कोई है तो नहीं। फिर जवाब दिया- “तुम इसी अपार्टमेंट में रहते हो? तुम्हारा नाम क्या है? उमर क्या है? मुझे हर रोज देखते हो?"

विशाल- “हाँ... मेरी जान, हर रोज इंतेजार करता हूँ के कब अपने हब्बी को सी-आफ करोगी और शाम को छत पर से हब्बी का इंतेजार करती हो तब तुमको ऊपर से नीचे तक देखता हूँ कितनी हसीन हो क्या चीज हो तुम वाह...”

आदिति- “मैं अपने पति को सब कुछ बताऊँगी। आने दो उसको वापस आज शाम को..."

विशाल- “नहीं नहीं ऐसा मत करना प्लीज... तुम्हारा पति मेरा दोस्त है। उसको कुछ मत बताना प्लीज...”

आदिति- “तो फिर मैं तुम्हारी भाभी हुई तो क्यों ऐसी गंदी बातें कर रहे हो मुझसे तुम? क्या यह ठीक बात है भला?"

विशाल- “ओके भाभीजी, तुम बेहद खूबसूरत हो और सबसे हाट और सेक्सी लेडी, जो मैंने आज तक देखा और जाना तो कैसे तुम्हारी तारीफ करने से रोकूगा खुद को मैं बताओ भला? तुम्हारी मुश्कुराहट, तुम्हारी आँखें, तुम्हारी उंगलियां, तुम्हारे बाल, तुम्हारा जिश्म, सब कुछ बेहद पसंद है मुझे और देखता रहता हूँ तुम्हें। इसमें मेरा क्या कुसूर? ऊपर वाले ने आँखें दिया हैं देखने के लिए ना? अब ऊपर वाले ने तुमको इतनी फुर्सत से बनाया है तो हमको देखकर उस ऊपर वाले की तारीफ तो करनी चाहिए। इसमें क्या बुराई है बताओ तो?"

आदिति- “शटप... वरना विशाल को सब कुछ बता दूँगी हाँ..” और आदिति ने फोन रख दिया।

विशाल को बहुत हँसी आई और डिसाइड कर लिया की अब यही डबल रोल खेलेगा आदिति के साथ। उसको एक बहुत अच्छा मौका मिल गया आदिति को ट्राई करने के लिए अब। कोई प्लान नहीं बनाना पड़ा सब कुछ अपने

आप ही हो गया।

पर विशाल ने फिर से आदिति को फोन किया मगर इस बार विशाल बनकर, उसने कहा- “हाय आदिति जान कैसी हो तुम? क्या कर रही हो? आज जब से घर से निकला हूँ सिर्फ तुम्हारे बारे में ही सोच रहा हूँ कल रात वाली सेशन को लेकर...”

जब आदिति ने विशाल की आवाज सुनी तो तुरंत उसको बताने जा रही थी की कोई उसको फोन करके छेड़ रहा था, मगर जिस वक्त विशाल ने कल रात की सेक्स वाली बात किया तो वो आज वाली बात भूल गई और कल रात की वाकिया को सोचने लगी वो भी, और थोड़ा शर्माते हुए एक हँसती आवाज में बोली- “हम्म... चल झूठे.."

विशाल- “नहीं जान... सच में दिन भर सिर्फ तुमको ही सोच रहा हूँ और रात वाली बात को। बहुत मजा आया

था। है ना जान?”

आदिति शर्माई और अपने बालों को अपनी उंगली में घुमाते हुए बोली- “अगर ऐसी बात है तो आज जल्दी घर वापस आना, जब से गये हो मैं तुम्हारी राह देख रही हूँ.”

विशाल- “सच जान? अच्छा बताओ कल रात वाली सेशन में किस पार्ट ने तुमको ज्यादा मजा दिया था?"

आदिति ने बच्चों वाली आवाज में कहा- “हम्म... अब फोन पर भी तुम नाटी हो रहे हो। मैं नहीं बताऊँगी..."

विशाल की पैंट में तंबू बनने लगा। जिस तरह से आदिति ने जवाब दिया अपनी सांसों को रोक रोक कर। तो उसने कहा- “देखो जान तुमने देखा नहीं की कल रात हम दोनों कितने जल्दी झड़ गये थे, तुमको लगा नहीं की हमारी सेक्स लाइफ और भी बहुत ज्यादा मसालेदार थी? हाँ या ना? बोलो?"

आदिति अपने होंठों को दाँतों में चबा रही थी जब विशाल वो सब बोल रहा था और एक सहमी सी आवाज में बोली- “हम्म... सही कह रहे हो बहुत अजीब था कल रात.."

तब विशाल ने खुश होते हुए कहा- “तो सुनो जान, आज रात के लिए मैंने कुछ और तैयार किया है। बस तुमको वोही करना होगा जैसे मैं कहूँगा। और फिर देखना एक और बहुत मजेदार सेशन होगा आज रात को भी, बस बोलो बिल्कुल वैसा करोगी जैसा मैं चाहूँगा?"

थोड़ा हिचकिचाते हुए आदिति बोली- “फिर से? ओहह... नो? बस तुम वैसे ही करना जैसे रात को किया था। मुझसे कुछ मत कहना करने को प्लीज.."

विशाल- “सुनो जान, पहले मेरी बात तो सुनो फिर डिसाइड करना?"

आदिति- “अच्छा ठीक है। ओके बताओ क्या बात है? मगर मैं नहीं कर पाई तो मुझे दोष मत देना। तुम्हें कह देती हूँ हाँ..."

विशाल- “सुनो, आज रात के लिए तुम एक आदमी को सोचो और मुझे उसका नाम बताओ, मैं वो आदमी बन

जाऊँगा। तुम सिर्फ उस आदमी का नाम बताना मुझे और आज रात को अपने सेशन के दौरान मैं वो आदमी बन जाऊँगा, और तुमको वैसे ही बुलाऊँगा जैसे वो तुमको बुलाता है। मिशाल के तौर पर अगर वो एक टीचर है तो मैं टीचर बनूंगा, अगर वो एक पड़ोसी है तो मैं वो पड़ोसी बन जाऊँगा। वैसे किसी को सोचो और वोही आज शाम को घर वापस आएगा, मैं नहीं आऊँगा। मतलब तुम्हारा विशाल नहीं आएगा, जिस आदमी को तुमने सोचा वोही आएगा। समझी तुम?"

आदिति ने एक लंबी साँस लेते हुए जवाब दिया- “मुझसे नहीं होगा, मुझसे कभी ऐसी बात की उम्मीद मत करना नहीं होगा मुझसे वैसा.."

विशाल- “ओके फिर बताओ कल रात को किसने किया तुम्हारे साथ?”

आदिति हँसते हुए- “क्या? वो तुम थे सिर्फ तुम और कौन?"

विशाल- “नहीं। मैंने तुमको किसी और को दिमाग में सोचने को कहा था, और तुमने कहा था की मैं ही उससे बोलूं की वो तुम्हारे साथ करे। तो क्यों कह रही हो मैं था?”

आदिति- “मगर असल में तो तुम्हीं थे ना जान?"

विशाल- “मैं सच्चाई की नहीं बात कर रहा। कौन था तुम्हारी कल्पना में, खयालों में कौन था उस वक्त? तुम

बहुत ज्यादा गरम हो गई थी और करने की सख़्त जरूरत थी उस वक़्त तुम्हें। तो कोई तो था जिसको तुम सोच रही थी, है की नहीं? देखो बेबी, तुमको अच्छी तरह से पता है की कल रात वाली हमारी सेक्स सबसे बेहतर थी,

और किस हद तक वो मसालेदार और गरम थी। अगर हम वैसे नहीं खेलते तो वैसा बिल्कुल नहीं होता। तो प्लीज... जवाब दो और मेरे साथ सहयोग करो, मेरा साथ दो। हम अपनी सेक्स लाइफ को ज्यादा मसालेदार बना सकते हैं जान...”

आदिति- “क्या अब हम उस बात को लेकर लड़ाई करेंगे?"

तब विशाल को लगा की सच में बात बिगड़ सकती है तो, उसको संभालकर खेल को आगे बढ़ाना है। वरना वो कामयाब नहीं होगा। तो उसने कहा- “ओके अच्छा ठीक है नो फाइट्स। तुम नहीं साथ दोगी, मुझे ही सब करना होगा। ठीक है कर लूँगा। खुद ही खेल बनाऊँगा और तुमको सुनाते हुए खेल को आगे बढ़ाऊँगा...”

आदिति- “हाँ वैसे ही करना। जैसा तुम कहोगे मैं करूँगी। मैं तुमको खुश रखना चाहती हूँ मगर ऐसे फोन पर नहीं जान। जब घर वापस आओ, तो वो करो जो तुम्हारे मन में है। मैं इनकार नहीं करूँगी..."

विशाल- “ओके तो सुनो बेबी- मैं चाहता हूं की आज शाम को कुछ ऐसा हो- आज तुम मेरा इंतेजार नहीं करोगी, आज शाम को तुम अपने एक एक्स-बायफ्रेंड का इंतेजार करोगी। आज शाम को 6:00 बजे विशाल नहीं वापस आएगा, विशाल आज ओवरटाइम करेगा और रात को बारह बजे के बाद घर वापस आएगा, तो तुम अपने एक्स बायफ्रेंड का इंतेजार करोगी। वो तम्हारे पापा के शहर से है. और आज रात को वो आ रहा है तमसे एंजाय करने

और तुम दोनों खूब एंजाय करोगे और रात बारह बजने से पहले वो वापस चला जाएगा तुमसे एंजाय करके। समझ गई अब?”

” में जवाब दिया

इन बातों को सुनकर आदिति का रोवां-रोवां खड़ा हो गया पूरे जिश्म पर और सिर्फ "हम्म्म्म विशाल को।

विशाल बोला- “अब आखिर उस बायफ्रेंड को एक नाम तो दे दो?"

आदिति ने कुछ पल सोचा और और बचकाना आवाज में बोली- “आदित्य..."

विशाल बहुत खुश हुआ और कहा- “यह हुई ना बात। अब एक आखिरी बात जान, तुम हर शाम को तकरीबन 5:45 बजे छत पर मेरा इंतेजार करती हो। है ना? तो आज शाम को 5:30 बजे को तुम छत पर रहना और

आदित्य का इंतेजार करना, उसकी राह देखना और रास्ते पर देखना की वो कहीं आ तो नहीं रहा। और सबसे जरूरी बात- तुम उस ग्रे स्कर्ट को पहनना और स्लीवलेश टी-शर्ट को बिना ब्रा के, मेरे लिए इतना करना जान मेरी ओके?"

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
अदिति को अंजान आदमी का फोन विशाल ने अदिति को 5:30 बजे छत पर उसकी राह देखने को कहा तो छत का नाम सुनकर याद आया की कुछ देर पहले किसी ने उसको फोन पर बोला था की वो उसको हर रोज छत पर देखता है, तो फिर से विशाल को बताने ही वाली थे। तभी बिना ब्रा के स्लीवलेश टी-शर्ट पहनने को सुना तो उसके रोंयें खड़े हो गये और उसने अपने बाजू पर जोर से अपने हाथ रगड़े और फिर भूल गई जो कहने वाली थी।

अदिति- "ब्रा के बिना मगर क्यों? सब नजर आएगा अगर किसी ने देखा तो?"

विशाल ने जवाब दिया- “जान दूसरे लोगों को गोली मारो। तुम अपने प्यार को खुश करोगी या दूसरे लोगों के बारे में सोचोगी अब?"

अदिति- “अच्छा अच्छा ठीक है। मैं पहन लूँगी तुम्हारे लिए, फिकर मत करो..."

विशाल बहुत खुश हुआ और फोन रख दिया। अदिति को याद दिलाते हुए को शाम 5:30 बजे छत पर आना है।

विशाल काम से थोड़ा पहले ही निकल गया उस दिन, और एक अनरजिस्टर्ड सिम खरीदा और एक दूरबीन। एक ऐसी जगह पर जाकर रोका कार को, जहाँ से उसकी फ्लैट वाली बिल्डिंग दिखती है और खास कर जहाँ से उसकी अपार्टमेंट वाली छत दिखती है। उस दूरबीन से वो सब कुछ देख सकेगा, मगर अदिति को कुछ नही दिखेगा वहाँ तक, जहाँ विशाल की कार रुकी थी।

अदिति ड्रेस बदलने जा रही थी और फिर उस आदमी को सोचा जिसने कहा था की वो उसको हर रोज देखता है। और खुद से अदिति ने कहा- “अगर वो मुझको बिना ब्रा वाली टी-शर्ट में देखेगा तो उसको पता चल जाएगा

की मैंने ब्रा नहीं पहनी हई है। मेरा निपल दिखेगा टी-शर्ट के ऊपरसे, और चूचियां तो साफ नजर आएंगी। हे भगवान्... क्यों विशाल को ऐसे जंगली आइडियास आते हैं..."

अदिति के जिश्म में एक लहर सी दौड़ी इन सब बातों को सोचकर। एक अजीब से फीलिंग हुई उसके मन और तन में। उसको चाहत की आग ने घेरा और मन सेक्स की ओर फिर से दौड़ा तो एक गहरी सांस लेते हुए उसने सोचा की टी-शर्ट पहनने से पहले एक बार छत पर जाकर चेक करे की कोई दिख तो नहीं रहा बाहर? तब तक 5:30 बजने के करीब था और विशाल दूरबीन के साथ उस जगह पर आलरेडी था और अपने छत को ही देख रहा था उससे।

अदिति छत पर गई और अपार्टमेंट के बाकी दूसरी छतों पर देख रही थी की कोई है तो नहीं। एक दूर वाली छत पर एक मियां बीवी खड़े थे, और एक दूसरी छत पर एक आरामकुर्सी पर एक बूढ़ा आदमी बैठा हुआ था। और एक छत पर दो औरतें रास्ते पर देख रही थीं, शायद किसी के काम से लौटने का इंतेजार करते हुए। मगर उन लोगों में से कोई भी उसकी तरफ नहीं देख रहा था। बिल्डिंग कछ सेमी सर्कल की शक्ल में थी और हर कोई एक दूसरे की छत पर देख सकता था, अगर देखना चाहे तो।।

उधर से विशाल को अदिति दिख गई की उसने ड्रेस नहीं चेंज किया था अभी तक। उसने उस अनरजिस्टर्ड सिम

से पहले अपने लैंड लाइन पर फोन किया, ताकी अदिति अंदर जाए फोन लेने को।

फोन की घंटी सुनकर अदिति जल्दी वापस अंदर गई। विशाल ने आवाज बदली और रुमाल भी लगाया मोबाइल पर और बोला- “मेरी जान आज तुम बहुत जल्दी अपने हब्बी को देखने निकल गई छत पर क्या बात है?"

अदिति को झटका लगा और पूछा- “तुम मुझको कहाँ से देख रहे हो? बाताओ की तुम कौन हो वरना मैं अपने पति को बताऊँगी की तुम मुझको परेशान कर रहे हो और तुमपर पोलिस केस भी हो सकता है इस बात के लिए...”

विशाल- “क्या जान... इसमें पोलिस का क्या काम? जब दिल तुम पर आ गया है, इतना निर्दई तो मत बनो

जान मेरी...”

अदिति- “शटप...”

विशाल- “देखो स्वीटहार्ट, तुम्हारे जैसी हाट, यंग और खूबसूरत जानेमन के बहुत सारे चाहने वाले हो सकते हैं,

और मैं उनमें से एक हूँ। इसमें क्या बुरा है एंजाय करो यार? तुमको तो खुश होना चाहिए की तुम्हारे पति के इलावा कोई और भी है तुमको चाहने वाला...”

अदिति- “मैं वैसी औरत नहीं हूँ। तुम कहीं और देखो और मुझे फोन करना बंद करो। वरना तुमको बहुत प्राब्लम्स होगी। मैं कह देती हूँ.”

विशाल- “कैसी औरत... तुम कैसी नहीं हो? हे भाभीजी, मैं तुमको भाभीजी बुला रहा हूँ तो तुम कैसी औरत की बात कर रही हो बताओ तो जरा?"

अदिति- “अच्छा तुमने मुझको देखा अभी कहा ना तुमने? तो बताओ मैंने क्या पहना है अभी?”

विशाल- “एक बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी चूड़ीदार में हो अभी डियर भाभीजी मुउआहह..”

अदिति अब सोचने लगी की जब वो स्लीवलेश टी-शर्ट बिना ब्रा के पहनेगी तो वो आदमी उसको देखेगा और बहुत परेशान हो गई, और समझ में नहीं आई उसको की क्या करे? और कहा- “यू शटप आंड गेट लास्ट, मैं जा रही हूँ..”

विशाल- “रुको-रुको भाभीजी, अपना सेल फोन नंबर दो ना... मैं तुमसे बात करूँगा जब तम छत पर आओगी...”

 
अदिति की लैंडलाइन पर कालर आई.डी नहीं था तो उसने सोचा की अगर उसको सेल नंबर देगी तो उसका नंबर आएगा उसकी सेल पर, और तब वो पता कर सकेगी की किसका नंबर काल कर रहा है उससे।

यह सोचकर अदिति ने उसको अपना सेल नंबर दे दिया और जल्दी से चेंज करने गई। क्योंकी 5:30 बज गया था। जब चेंज कर रही थी, तो जैसे ही अपनी ब्रा उतारा तो सेल फोन बजने लगी। एक हाथ से अपनी चूची ढक कर सेल लिया रिप्लाई करने के लिये। मगर किसी का नंबर नहीं दिख रहा था सेल पर। विशाल ने आउटगोइंग काल के लिए नंबर पर सेल की सेटिंग पर रोक डाला हुआ था और फिर अनरजिस्टर्ड सिम था तो नंबर नहीं दिखा अदिति को। अदिति ब्रा रखकर टी-शर्ट पहन रही थी और साथ-साथ उस अजनबी से बात कर रही थी।

विशाल- “अब क्या कर रही हो स्वीट भाभीजी, छत पर आओ की मैं तुमको देख सकूँ मेरी सेक्सी भाभी..”

अदिति बिना उसको जवाब दिए चेंज कर रही थी, और उस टी-शर्ट को बिना ब्रा के पहनकर छत पर गई, कान से सेल फोन लगाए हुए।

विशाल ने जैसे ही अदिति को बिना ब्रा के स्लीवलेश टी-शर्ट में दूरबीन से देखा, तो मोबाइल पर एक सीटी मारते हुए कहा- “फीईवव... ओऊऊओव... भाभीजी यह ड्रेस तो जानलेवा है। क्या तुमने मुझको रिझाने के लिए चेंज किया? अभी तो चूड़ीदार में थी तुम?”

अदिति ने चारों तरफ ढूँढ़ते हुए की कोई सेल फोन पर बात करते हुए नजर आए जवाब दिया- “तुम चुप भी करोगे? मैंने यह अपने पति के लिए पहना, वो अब आने ही वाला है और मैं फोन रख रही हैं। यू जस्ट शटप। बदतमीज आदमी..."

विशाल को बहुत मजा आ रहा था अदिति को उस हालत में देखते हुए। इसलिये कहा- “सुनो ना भाभीजी,

तुम्हारा पति तो 6:00 बजे आता है और अभी 20 मिनट बाकी हैं। मुझको इन लम्हों का सही फायदा उठाने दो ना... 20 मिनट नहीं तो कम से कम 15 मिनट तो हम चैट कर ही सकते हैं..."

अदिति- “तुमको मेरे पति के बारे में इतना कैसे पता है? तुम सच में उसके दोस्त तो नहीं हो?"

विशाल- “जानेमन, एक बात बताओ। तुमने ब्रा नहीं पहनी है सही कह रहा हूँ ना?”

अदिति का चेहरा लाल हो गया और अपने एक हाथ को अपनी छाती पर रखते हए गौर से चारों तरफ देखने लगी की वो कालर नजर आ जाए उसे। उसको एक गहरी सांस लेनी पड़ी उस अजनबी की आखिरी बात सुनकर की उसने ब्रा नहीं पहनी हुई है, और खुद बड़बड़ाई- “हे भगवान्... वो सब कुछ देख सकता है। कौन है वो, कहाँ से मुझको देख रहा है? उसको मेरी चूचियां दिख गई, काश एक बार वो मुझे दिख जाए..."

फिर अदिति ने उससे कहा- “बोलो तुम कहाँ हो, मैं तुमको देखना चाहती हूँ..”

विशाल- “इतनी बेसब्री क्यों स्वीटहार्ट भाभी, मैं तुम्हारा चाहने वाला हूँ, तुम तो मेरे चाहने वाली नहीं हो तो तुम

क्यों मुझे देखना चाहती हो भला? मुझे तुम्हारी तारीफ करने दो, जिस दिन मुझको लगेगा की मुझे तुम्हारे सामने आना चाहिए तो आ जाऊँगा। वैसे भाभीजी आपकी टाँगें बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी हैं, आपकी स्कर्ट ठीक घुटनों के ऊपर रुकती है और आपकी सेक्सी जांघों की शुरुवात नजर आ रही है। वाह... क्या लगती हो डियर सेक्सी भाभीज। मुउआहह..”

अदिति ने अपने पेशानी पर पशीने की बूंदें महसूस की, उस आदमी की बातों को सुनकर और खुद झुक कर अपनी जांघों को देखी और उसको अजीब सा महसूस हुआ पूरे जिश्म में। उसकी समझ में नहीं आया की उसको खुद की जांघों को देखकर सेक्सी फीलिंग हुई उसे। यह उस अजनबी की बातों को कामप्लीमेंट समझकर उसको अच्छा लगा, और ज्यादा हैरानी अदिति को तब हुई जब उसको लगा की उस अजनबी की बातों को सुनने में उसको अच्छा लग रहा है। दिल करता है की वो ऐसे बातें करता जाए। कभी उसकी जिंदगी में किसी ने ऐसी बातें नहीं किया था उसके साथ। जिंदगी में पहली बार ऐसी बातें कर रहा था कोई उससे, तो अदिति की समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या कहें, क्या करें और क्या जवाब दे उस अजनबी को?

अदिति ने हकलाते हुए पूछा- “क-कह-कहाँ से बोल रहे हो तुम? प्लीज बताओ। कौन हो तुम?"

विशाल- “यह जरूरी नहीं है जानेमन, जरूरी है हमारी बातचीत, जरूरी यह है की हमारी आवाज एक दूसरे को पहुँच रही हैं और हम एंजाय कर रहे हैं। है ना भाभीजी? पता है भाभीजी, मेरा जी करता है की मैं तुम्हारे करीब होता इस वक्त, और तुम्हारे सामने अपने घुटनों पर आ जाता और अपनी बाहों को तुम्हारी जांघों के दोनों तरफ

करके उनको चूमता और अपनी जीभ को फेरता वहाँ उन नर्म-नर्म जांघों के बीच। कितना मजा आता मुझे और तुम्हें भी। है के नहीं प्यारी भाभीजी?"

अदिति ने काँपती आवाज में कहा- “शटप... मैं फोन रख रही हूँ अब...”

विशाल- “भाभीजी सुनो, एक काम करना, आज रात को जब आपका पति आपसे लोव करेगा...” कहकर विशाल ने बात पूरी नहीं की और दूरबीन से उसके रिएक्सन को देख रहा था।

अदिति सुन रही थी और कहा- “हेलो, हेलो क्या कहा तुमने? कहो फिर क्या बोलो... हेलो.."

विशाल उसकी बेसब्री को देख रहा था और इंतेजार में था की वो गिड़गिड़ाकर बात बोलने को कहे।

अदिति बोलती गई- “कम ओन बोलो, अब क्यों रुक गये? क्या कहना चाहते थे अब बोलागे भी की नहीं?”

विशाल ने जब उसकी बेचैनी और बेसब्री देखी तो कहा- “प्यारी सेक्सी भाभी, आज रात को जब आपका पति

आपको लोव करेगा, जब आपकी नंगी जिश्म उसके जिश्म पर होगी, जब आपकी नंगी छाती उसकी गरम छाती पर होगा तो... ...” और विशाल फिर रुक गया और उसके चेहरे का रंग को देखने लगा, उसकी बेचैनी को वाच करने लगा।

अदिति बोली- “तब क्या? उसके बाद क्या? क्यों अपने जुमले को खतम नहीं कर रहे हो तुम? डैम इट, जब मेरा पति मुझसे लोव करेगा फिर क्या?"

विशाल को बड़ा मजा आ रहा था उसकी बेसब्री देखकर तो बोला- “उस वक्त आप मुझको सोचना, आपके साथ

वैसा करते हुए। सोचना की मैं वो सब कर रहा हूँ आपके साथ, आपके पति नहीं। सोचना की मेरा जिश्म आपके जिश्म की गर्मी ले रहा है, सोचना की इस आवाज का मालिक आपसे वो सब कर रहा है जो वो करेगा आपके साथ। आज रात को मैं आपके साथ सेक्स करूँगा भाभीजी और बहत एंजाय करूँगा, और आप भी उतना ही एंजाय करोगी यकीनन... बाइ स्वीट भाभीजी और रात को खूब मजा करना मेरे साथ मुउआह्ह..” और विशाल ने काल कट कर दिया।

उधर अदिति काँप उठी और अपनी दोनों जांघों को एक दूसरी जाँघ से जोर से दबाया और महसूस किया की नीचे भीग चुकी है।

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
update_06 विशाल वापस आता है और आदित्या का एस.एम.एस.

अदिति के पशीने भी निकले और काँप भी उठी, उस अजनबी की बातों को सुनकर और रास्ते पर देखने लगी की विशाल तो नहीं आ रहा है। फिर उस अजनबी की बातों को सोचने लगी और खुद से कहा- “यह सब मर्द एक जैसे होते हैं क्या? बिल्कुल विशाल के जैसे बातें करता है, और वो भी उसको रात को कल्पना में सोचने को कहता है, जैसे विशाल किसी और को सोचने को बोला था। क्या होता है इन मर्दो को भला?”

मगर यह यकीनन हुआ था अदिति को की उस अजनबी के बातों ने उसको बहुत उतेजित किया और वो गीली हो गई नीचे और बहुत असर किया उसने अदिति पर अपने बातों से।

विशाल गेट के अंदर ड्राइव करके अया और ऊपर सिर उठाकर अदिति को देखा और हाथ हिलाया। अदिति ने

भी वही किया उसको। दूसरे लोग जो उस वक्त बाल्कनी पर थे सबने अदिति को मुड़कर देखा। जब उन्होंने देखा की विशाल किसी को ऊपर की तरफ हाथ हिला रहा है तब, और अदिति ने उन लोगों की नजरों को खुद पर आते हुए देखकर थोड़ा डिस्टर्ब महसूस किया।

वो एक 6 स्टोरी की बिल्डिंग थी और विशाल का अपार्टमेंट दूसरे फ्लोर पर ही था। नीचे एक अंडरग्राउंड पार्किंग था अपार्टमेंट वालों के लिए। मगर यार्ड में कोई 30 गाड़ियों के लिए और भी पार्किंग थी वहाँ। तो विशाल कभी अंडरग्राउंड में पार्क करता था और कभी यार्ड में ही रहने देता था कार को, और अपनी छत पर से कभी भी झाँक सकता था कार को। वैसे यार्ड वाला पार्किंग विजिटर्स के लिए था और रेसिडेंटस के लिए अंडरग्राउंड वाला।

अदिति क्योंकी अब छत पर थी तो विशाल ने कार को यार्ड में ही पार्क किया और कार से निकलते ही अदिति को देखा और एक फ्लाइंग किस किया। जबकी दूसरे लोग देखकर हँस रहे थे, और अदिति शर्माते हुए कभी लोगों को देख रही थी और अपनी एक उंगली को दाँतों के बीच दबाते हुए विशाल को देख रही थी।

दो बूढ़ी औरतों ने विशाल को फ्लाइंग किस किया। और शायद बंगाली में बात करते हुए एक ने दूसरे से बोला “कितना क्यूट है ना लौंडा हिहीही... अपनी वाइफ को फ्लाइंग किस भेजता नीचे से ऊपर को। उसने तो कैच ही नहीं किए हिहीही...”

अदिति ने सब देखा और सुना और उन लोगों से हँसी भी सामने वाले छत से। नीचे विशाल जब चलते हए लिफ्ट की तरफ बढ़ रहा था तो अदिति ने अपनी उंगलियों से उसको चलने की इशारे करते हुए कुछ कहा,

मतलब पूछ रही थी की वो लिफ्ट से ऊपर आ रहा है या पैदल? ऐसा था की वो दूसरे फ्लोर पर ही रहते थे तो अक्सर विशाल चलकर ऊपर जाता था, यह कहते हुए की थोड़ा सा एक्सर्साइज भी हो जाती है। मगर जब कभी ज्यादा थकान महसूस होती है तब लिफ्ट से ही ऊपर जाता है। इसीलिए अदिति पूछ रही थी उससे। जिसका जवाब उसने भी उंगलियों से चलने का इशारा करते हुए कहा की पैदल ऊपर आएगा।

जैसे ही नीचे विशाल पहले सीढ़ी चढ़ने लगा, अदिति जल्दी से वाशरूम गई अपने आपको वाश करने। क्योंकी उस अजनबी की बातों ने उसको गीली कर दिया था। उसने एक टिश्यू को अपने पैंटी के अंदर डाल लिया क्योंकी भीगी हुई थी वहाँ, और खुद सोचने लगी के क्यों उस अजनबी की बातों ने उसको इतना गीला कर दिया। वैसा कभी भी नहीं हुआ था अदिति के साथ। वो उस अजनबी की बातों को काफी देर तक सोचती रही।

उधर विशाल ने सीढ़ियां चढ़ते हुए खुद से कहा- “देखता हूँ की अदिति मुझको यह बात बताती है की किसी अजनबी ने उसको फोन करके उस किश्म की बातें की उससे? अगर वो मुझको नहीं बताएगी तो मतलब यह की मैं कामयाब हुआ और वो मेरे रंग में रंगने लगी है। अगर उसने मुझको बता दिया तब मुझको बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, वो पाने के लिए जो उससे चाहता हूँ..."

जैसे ही विशाल घर में दाखिल हुआ अदिति दौड़कर उसकी बाहों में आ गई और अपने चेहरे को उसके सीने में छुपा लिया, विशाल को जोर से बाहों में जकरते हुए। उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था और विशाल उसकी धढ़कनों को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था। विशाल ने भोला बनते हुए पूछा- “किया हुआ जान? क्यों इतनी गरम हो और पशीना छूट रहा है? तुमको बुखार है किया?"

मगर बिना कोई जवाब दिए अदिति उसकी बाहों में खामोश थी कुछ देर। सोच रही थी अजनबी के बारे में विशाल को बताए की नहीं? उसकी दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थी अजनबी को सोचते हुए। फिर अदिति ने

सोचा किया पता वो अजनबी सच में विशाल का कोई दोस्त हो, और अगर अदिति ने कछ बताया तो दोस्तों के बीच परेशानी होगी। यह सोचकर उसने डिसाइड किया की अभी कुछ नहीं बताएगी विशाल को जब तक सही-सही नहीं पता चल जाता की वो अजनबी कौन है?

किस करके उसने विशाल से बात किया और उसको फ्रेश होने को कहा। कुछ देर बाद विशाल ने एक तौलिया लिया और बाथरूम चला गया शावर लेने को। मगर उसने अपने उस मोबाइल को भी साथ लिया अनरजिस्टर्ड सिम वाला, जिसको उसने तौलिया में लपेटा और अंदर बाथरूम में घुस गया नहाने को।

अंदर से विशाल ने एक एस.एम.एस. भेजा अदिति को जिसमें लिखा था- “उम्मीद है की आज रात को बिस्तर पर तुम मुझको ही सोचोगी.”

उस एस.एम.एस. को पढ़ते ही अदिति का पशीना छूट गया और जल्दी से उसने बाथरूम की तरफ देखा की विशाल ने देखा या सुना तो नहीं और बहुत घबराई हुई थी। उसने एस.एम.एस. का जवाब यह टाइप किया- “तुम पागल हो किया? प्लीज मुझे एस.एम.एस. मत करो। मेरा पति घर पर है शकर है की वो बाथरूम में है वरना उसने यह एस.एम.एस. देख लिया होता अभी। तुम मुझको मुसीबत में डालोगर, प्लीज एस.एम.एस. मत करना।

वैसे तुम्हारा नाम किया है मुझे जल्दी बताओ इसी वक्त, इससे पहले की विशाल बाथरूम से बाहर आए.."

बाथरूम के अंदर से विशाल ने हँसते हुए जवाब लिखा- “जानम, मोबाइल को साइलेंट कर दो और अपने पति के पास मत होने देना, हम ज्यादा एस.एम.एस. कर सकेंगे। उसको पता नहीं चलेगा की मैं एस.एम.एस. कर रहा हूँ, जब रिंगटोन ही नहीं बजेगी समझी? चलो ठीक है जब वो बाहर आए तो नहीं करूँगा एस.एम.एस., बोलो वो कितने देर में बाहर आता है बाथरूम से? किया हमारे पास कोई 15 मिनट हैं एस.एम.एस. चैट करने के लिए?

और मेरा नाम क्यों जाना चाहती हो जानेमन? हम्म... पहले अपना नाम बताओ तब मैं अपना नाम बताऊँगा? तुम्हारा किया नाम है दिलवर जानी?"

अदिति ने बहुत जल्दी जवाब टाइप किया- “मेरा नाम अदिति है, और ठीक है अपना नाम मत बताओ मगर मैं तुमको एक नाम दे रही हूँ। मेरे लिए तुम आदित्य हो ओके? और हाँ आज रात को तुम मेरे साथ होगे जब विशाल मुझसे लोव करेगा तो मैं आदित्य को सोचूँगी अब खुश? हाँ वो 15 मिनट लेता है शावर लेने को। अब अगर मैं जवाब नहीं करूँगी तो समझ लेना की वो मेरे पास है। और प्लीज... प्लीज... मुझको और एस.एम.एस. मत करो और बताओ किया तुम मेरे पति के दोस्त हो और किया इसी अपार्टमेंट में रहते हो?"

तो, जो खेल आज रात के लिए विशाल ने सोचा था और एक नाम अपने लवर के लिए जो अदिति ने विशाल को बताया था वो नाम दे दिया अदिति ने उस अजनबी को। तो इसका मतलब यह हुआ की अदिति बिल्कुल विशाल के रंगों में रंगने लगी है अब। विशाल को बेहद खुशी हुई वो एस.एम.एस. पढ़कर और समझ गया की अब अदिति उसके खेल में बिल्कुल शामिल हो रही है, और अब उसका सपना जरूर पूरा होगा।

विशाल-आदित्य ने एस.एम.एस. का जवाब दिया- “मुझे बहुत खुशी है की मुझको इतना अच्छा नाम मिल रहा है अदिति जी, बैंक्स आ लाट, और मैं अभी आपको नहीं बाताऊँगा की मैं इसी अपार्टमेंट में रहता हूँ और आपके पति का दोस्त हूँ या नहीं? मगर एक बात यह है की आप आज बहुत ही मस्त दिख रही हो, यू आर टू हाट,

आपकी चूचियां बहुत खूबसूरत हैं, मुझे उनके फार्स दिखे, ना वो ज्यादा बड़ा हैं और ना ही छोटा, बिल्कुल वैसे हैं जैसे मुझको पसंद हैं। आपके निपल बिल्कुल खड़े हुए थे ना? हाँ या ना? आप उतेजित हुए थे मेरी बातों से, है ना अदिति? मुझे आपके निपल्स दिखे थे आपके टी-शर्ट पर। बहुत उत्तेजित हुआ था मैं की आपने बिना ब्रा के टी-शर्ट पहना था। आपकी जांघे भी बेहद खूबसूरत हैं। दिल कर रहा था आकर चूम लूँ, चावू चूतूं। तुमसे मिलने को दिल करता है जानेमन। मन करता है की आज रात को सच में तुम्हारे बेड पर तुम्हारे साथ आऊँ। यह सब लिखते हए मेरा खड़ा हो गया डार्लिंग...”

उसका एस.एम.एस. पढ़ने के बाद अदिति ने फिर से अपनी दोनों जांघों को एक दूसरे से जोर से दबाया। उसका पानी छूट रहा था वो एस.एम.एस. पढ़कर। फिर उसने उसी पोजीशन में जल्दी से जवाब टाइप किया- “तुम आज रात को मेरे बेड पर ही होगे, मगर अफसोस की बात यह है की तुम मुझे जानते हो, और मैं नहीं जानती तुमको। तुम सिर्फ मेरे खयालों में रहोगे। मगर तुम्हारे लिए तो ऐसा नहीं है, तुम तो मुझको महसूस करोगे, मेरे चेहरे को महसूस करोगे, मेरा जिश्म को देखा है तो महसूस करोगे मगर मेरा किया? मैं तो तुमको सिर्फ खयालों में जानती हूँ। खैर, अब टेक्सटिंग बंद करो। मैं तुम्हारे सभी मेसेजेस डेलिट कर रही हूँ तुम भी सेम करो, बाइ.."

 
update_07 अदिति के दिमाग में आदित्य के साथ हाट सेशन

मगर विशाल ने एक और एस.एम.एस. भेजा जो अदिति ने पढ़ा- “मेरी जान प्लीज... एक काम करना। आज रात को अपने पति से मुझसे करने के बाद तुम मोबाइल लेकर टायलेट जाना और मुझको एस.एम.एस. करना की किया तुमको मजा आया मेरे साथ? किया तुमने खूब एंजाय किया? मैं यह जानने के लिए बेताब रहूँगा की तुमने मेरे साथ वाला सेशन एंजाय किया या नहीं? प्लीज... इतना करना मेरे लिए आज रात को ओके? मैं इंतेजार करूँगा। ठीक है अब एस.एम.एस. नहीं करूँगा तुमको, लेकिन आज रात मैं तुम्हारे सेशन के बाद तुम्हारे एस.एम.एस. का बेसबरी से इंतेजार करूंगा.."

अदिति बार-बार बाथरूम की तरफ देख रही थी और सुन रही थी की शावर का पानी गिर रहा है या नहीं? और अपने मोबाइल पर एस.एम.एस. देख रही थी।

आखिरी मेसेज पढ़कर उसने जवाब लिखा- “अभी के लिए यह मेरा आखिरी एस.एम.एस. है। ठीक है रात को एस.एम.एस. करूँगी सब कुछ हो जाने के बाद रात को शायद 10 से 11 बजे तक खुश? अब बाइ प्लीज इसके बाद कोई एस.एम.एस. मत भेजना, थैक्स..."

विशाल बहुत खुश था और अपनी बीवी के मेसेज पढ़कर जमकर खड़ा हो गया था नहाते वक़्त, अपने लण्ड को हाथ में लिए उसको मूठ मारने का मन कर रहा था। वो मासूम, भोली भाली पत्नी जिसको वो सिखा रहा था इतने दिनों से, अब उसके मुताबिक उस रास्ते पे आ रही थी, जिसमें वो उसको लाना चाहता था इतने दिनों से। विशाल ने कभी नहीं सोचा था की वो इतनी जल्दी ऐसे मान जाएगी। फिर भी विशाल को और बहुत कुछ करना

बाकी था, ताकी उसका सपना और फँटसीस पूरी हो सकें, जैसे वो सोचता और चाहता है। फिलहाल विशाल बहत खुश था की शुरुवात बहुत बढ़िया हो रही थी।

रात को जैसे ही अदिति बेड पर आई उसके पास। विशाल ने उसके कंधों पर अपनी जीभ फेरना शुरू किया अदिति की नाइटी के स्ट्रैप्स को हटाकर। उस रात को अदिति जैसे भूखी थी और विशाल को खा जाना चाहती थी, बिल्कुल भूखी शेरनी लग रही थी। अदिति ने भी विशाल के कंधे पर अपने दाँतों से काटा और अपने हाथ को सीधे उसके लण्ड पर रखा जो उस वक्त अंडरवेर में था। उसको अदिति ने जमकर अपने हाथ से दबाया। फिर अदिति विशाल के ऊपर चढ़ गई, जबकी वो अपनी पीठ पर लेटा हुआ था।

यह पहली बार थी पिछले 11 महीनों में जब अदिति विशाल के ऊपर चढ़ी थी अपनी दोनों टाँगों को दोनों तरफ किए हुए और उसकी चूत विशाल के लण्ड पर, जो अंडरवेर के अंदर था, उसपर रगड़ रही थी अपने कमर को हिलाते हुए, और ऊपर एक भूखे जानवर की तरह विशाल के गाल, गला, कान, कंधे पर दाँत काट रही थी और

चूसे जा रही थी, जैसे नशे की हालत में थी।

तब विशाल की बोलने की बारी थी और उसने कहा- “किसको ऐसे भूखी शेरनी की तरह खाने की कोशिश कर रही हो जान? मैं इस वक्त विशाल नहीं हूँ ना? तो किसके साथ हो बोलो अब?"

अदिति के दिमाग में उस वक्त तो आदित्य बसा हुवा था। वो एक सिसकती आवाज में बोली- “तुम मेरा प्यार आदित्य हो याद है?"

विशाल की खुशी का इंतेहा नहीं थी उसका जवाब सुनकर। फिर उसने उसको बाहों में लेकर धीरे से उसके गले पर अपनी जीभ फेरते हुए धीरे-धीरे उसकी चूचियों तक ले गया अपनी जीभ को। अदिति ने हाँफते हुए विशाल की आँखों में देखा। मुँह खुले हुए वो एक भूखा भेड़िया लग रही थी उस वक्त। वो बहुत उतेजित थी विशाल को साफ नजर आ रहा था।

विशाल ने और ज्यादा आग भड़काने के लिए कहा- “ठीक है, अपने आशिक को ऐसे ही किस करती जाओ, और धीरे-धीरे छाती से नीचे पेट की तरफ चाटते जाओ, और धीरे-धीरे उसके अंडरवेर को अपने उंगलियों से नीचे की तरफ करो और जैसे ही लण्ड नजर आए उसपर अपने जीभ धीरे-धीरे फेरना शुरू करो। आशिक को खुश करो..."

अदिति ने वही करना शुरू किया जैसे विशाल ने कहा। वो झुक कर विशाल की छाती को चाटते हुए नीचे की तरफ बढ़ रही थी, उसकी चूचियां लटक रही थीं उसकी नाइटी के अंदर और एक स्ट्रैप कंधे से सरकीर्की हुई थी उसके बाजू पर, उसके बाल खुले और बिखरे हुए।

वो विशाल के अंडरवेर तक पहुँची तो जैसे विशाल ने कहा था निकालने को वैसा नहीं किया और विशाल को खुद हैरानी हुई जब अदिति ने अपने मुँह से लण्ड को अंडरवेर के अंदर होते हुए ही मुँह में लिया अंडरवेर समेत और

जैसे उसको खाना चाहती थी। विशाल गुर्राया उसकी उस आक्सन पर और काँप गया।

विशाल ने अदिति का सिर हाथ से थामे हुए कहा- “हाँ सस्स्स्स्श

हो आघघह...”

ह वाह किया बात है जानम। बहुत खूब जा रही

अदिति ने आँखें ऊपर करते हुए विशाल के चेहरे में देखा। फिर धीरे से अपने कोमल हाथों से उसके अंडरवेर को धीरे-धीरे नीचे की तरफ करना शुरू किया, अदिति ने विशाल की आँखों में नशीली आँखों से देखते हए एकदम धीरे-धीरे यह किया। और जब थोड़ा सा अंडरवेर नीचे आया तो उसके लण्ड का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा, और तुरंत अदिति ने अपनी जीभ उसपर फेरते हए उसको चाटा और जैसे थोड़ा और दिखा तो अदिति ने उतना मुँह में झट से ले लिया और धीरे-धीरे जितना अंडरवेर नीचे होता गया उतना लण्ड दिखता गया और जितना दिखता गया उतना अदिति अपने मुँह में लेती गई जब तक की पूरा खड़ा लण्ड उसके मुँह में पूरा आ गया।

विशाल पागल हो रहा था। खुशी के मारे उसका मन उछलने को कर रहा था।

अदिति ने जब अंडरवेर नीचे फेंक दिया तब अपने सिर को झटका देते हए बालों को पीछे किया और विशाल को उममग भरी नजरों से झक कर उसके लण्ड को अपने कोमल, नाजक हाथ में लिया, और इससे पहले की वो लण्ड को अपने मुँह में लेती।

विशाल ने कराहती हुई आवाज में कहा- “तुम्हारा पति कहाँ है बेबी? मैं तेरा आशिक आदित्य हूँ, अब अगर तेरा पति आ गया तो?"

अदिति ने तड़पती आवाज में जवाब दिया- “वो ओवरटाइम कर रहा है आज, रात को बारह बजे तक वापस आएगा, इस मौके का फायदा उठाओ। अब बात करना बंद करो और महसूस करो इसको तुम, मुझसे और नहीं रहा जाता अब...”

विशाल को बेहद खुशी हुई की अदिति खेल में भरपूर हिस्सा बिल्कुल उसी तरह ले रही थी, जैसे उसने सोचा था। वो इतना खुश और उतेजित हुआ की उससे रहा नहीं गया और जैसे ही अदिति ने अपनी जीभ उसके लण्ड से लगाया तो प्री-कम निकल गया। जिसको अदिति ने जीभ से चाटते हुए उसके आँखों में देखा और उस नमकीन लटपट पानी को खूब चाटा अदिति ने।

अदिति विशाल को देखते हुए बोली- “हम्म... नमक नमक जैसा टेस्ट है, क्यों इतनी जल्दी निकल गया आज? उम्मीद है की तुम मुझसे पहले ना झड़ जाओ। मुझे इसकी सख्त जरूरत है आज, अपने आपको कंट्रोल करो डार्लिंग। आज तुम्हें मुझको झड़ाना जरूरी है...”

विशाल ने अपने पंजों में चादर को लपेटा और गुर्राते हुए अपने दाँतों को मुँह में दबाकर लण्ड को अदिति के मुँह में ठूसने की कोशिश की।

अब अदिति के दिमाग में किया चल रहा था उस वक़्त? किया वो सच में आदित्य को महसूस कर रही थी या अपने विशाल को? कोई भी एक औरत के दिमाग को नहीं पढ़ सकता। विशाल ने ट्राई किया अदिति के मन की बात पढ़ने का, मगर नाकामयाब रहा।

जल्द ही अदिति उसके लण्ड को छोड़कर ऊपर आ गई और विशाल के मुँह में अपनी जीभ डाला और एक बहुत हाट, सेनुयल किस में खोने लगी, और नीचे विशाल के लण्ड को खुद अपने हाथ से लेकर अपनी चूत में डाला

और अपनी कमर हिलाने लगी जैसे वो विशाल को चोद रही थी। कमर को इस तरह हिलाती गई और लण्ड को अपने अंदर महसूस करते हुए कभी कमर को दायें बायें घुमाती तो कभी ऊपर-नीचे करती, बड़ी जोश में थी और विशाल के छाती और कंधों पर दाँत गड़ाए जा रही थी, चूत में लण्ड को महसूस करते हुए। बहुत तेजी के साथ

करती जा रही थी जैसे एक ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली हो।

अदिति जल्द ही एक लंबी सांस लेकर जोर से चिल्लाई- “उफफ्फ... उईई माँ.” और जोरों से हाँफते हुए कमर को हिलाती जा रही थी।

विशाल अपने हाथों से उसकी गाण्ड को उठक बैठक करा रहा था।

अदिति इतनी गरम हो चुकी थी की बस दो मिनट में ही हॉफते हुए कांपती आवाज में सिसकियों के साथ चिल्लाई- “उह्ह... सस्स्स.... ओह माई गोड... मैं झड़ रही हूँ... झड़ रही हूँ मैं... हाँ और गहराई में पेलो अपने लण्ड

को आह्ह... आहह... आह्ह... आह्ह... आईई बहुत मजा आ रहा है जान वाह.. आअहह... इस्स्स्स... उईईई.."

जब अदिति तड़पती हुई चिल्ला रही थी तो विशाल ने उसको अपनी बाहों में जोर से कैद कर लिया और धीरे से उसके कानों में कहा- “मुझको आदित्य कहकर फुकारो..” बोलो- “आदित्य मेरे और अंदर डालो और अंदर... बोलो जान बोलो...”

अदिति बिल्कुल नशे जैसी हालत में थी उस वक्त और विशाल के कहने के बाद जोर से बोली- “हाँ आदित्य हाँ और गहराई में घुसाओ अपने लण्ड को मेरे अंदर और अंदर आदित्यय, हाँ लोव यू बाय..."

दोनों झड़ गये और अदिति विशाल के जिश्म के ऊपर लेटे हुए आँखों को बंद किए हुए उसकी छाती को चूस रही

थी।

विशाल ने सोचा- “किया इसने सच में किसी और से चुदवाते हुए महसूस किया आज?"

कुछ पल बाद अदिति बोली- “मुझे पेशाब करने जाना है..” और वो अपनी मोबाइल छुपाकर चली गई तायलेट में और आदित्य को एस.एम.एस. किया- “तुम कमाल के हो आदित्य, बहुत मजा आया तुम्हारे साथ आज, बहुत ही मजा आया। तुमने बिल्कुल मेरे अंदर डाला आज और मुझे इसकी और बहुत जरूरी पड़ेगी अब, बाइ गुड नाइट, स्लीप टाइट, किस यू हाट बेबी...” और जैसे मेसेज सेंट हो गया, अदिति ने मोबाइल स्विच-आफ कर दिया।

विशाल ने बेड पर मेसेज पढ़ा और चकित हो गया और खुद से कहा- “यह मेरी अदिति ने ही लिखा? वो आज किसी और से खुश हो गई, उससे जिसको वो जानती तक नहीं?”

 
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