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Adultery Hawas ke ghulam ( हवस के गुलाम )

अंजलि सलीम की ओर देखती है और उस पाउडर को दूध के साथ गटक जाती है.. और अपना रूम बंद कर लेती है.. और सलीम मुस्कुराता हुआ नीचे आ जाता है..

रात करीब डेढ़ बजे अंजलि का पूरा शरीर पसीना से भीगा हुआ था.. अजीब सी बैचेनी हो रही थी.. लेकिन नींद में होने के कारण उसे ये सिर्फ़ एक सपना लग रहा था..

कैसे जैसे रात कट कर एक नई सुबह हो गई...

कामया: भाभी..... भाभी....

डोर नॉकिंग

अंजलि: ह्म कॉन है...

कामया: भाभी में हूँ कामया...

अंजलि आँखे खोल कर एक नज़र घड़ी पर डालती है ओह माइ गॉड आज तो 8 बाज गये..

में पहले कभी इतना लेट तक नहीं सोई..

कामया: भाभी जल्दी उठो.. में लेट हो रही हूँ..

अंजलि तुरंत उठती है.. लेकिन उठते ही उसे चक्कर आने लगता है, आँखों के सामने अंधेरा सा छा जाता है... वो फिर भी चलते हुए दरवाजे तक पहुँच जाती है और दरवाजा खोलती है..\

कामया: भाभी रात को लेट सोई थी क्या.?

अंजलि: हाँ ह्म शायद..

कामया: भाभी मुझे प्लीज़ 2000रुपये. दे दो..

अंजलि: अभी

कामया: भाभी अभी चाहिए तभी तो..

अंजलि: ओके लेकिन मेरे पास थोड़ा सा कॅश होना ज़रूरी है तुम एक काम करो अपने भैया का एटीएम ले जाओ...

कामया: ओके बट उसका पासवर्ड...

अंजलि:**** ये लो एटीएम...

कामया: थॅंक यू भाभी और आगे झुक कर कामया अंजलि के गाल पर एक किस कर देती है..

आरती कामया को दरवाजे से जाते देख कर दरवाजा बंद करती है और खुद नहाने चली जाती है...

 
करीब 1 अवर्स बाद वो बाथरूम से निकलती है स्ट्रीम बाथ लेकर..

थोड़ा सा रिलॅक्स फील कर रही थी..

अंजलि: एक पिंक कलर का टवल लपेट कर बाथरूम से बाहर निकलती है..

हेर ड्राइयर से अपने बाल सूखने लगती है कि तभी डोर फिर से नॉक होता है...

अंजलि: कॉन है..

डोर फिर से नॉक होता है..

अंजलि चल कर दरवाजा खोलती है कि.. सामने किसी को देख कर चोंक जाती है..

अंजलि: तुम? इस वक्त? यहाँ ? कैसे? मेरा मतलब कब आई?

आरती जी हां दोस्तो ये कॅरक्टर है जो सबसे कम इस कहानी में दिखाई दिया है..अंजलि की सबसे छोटी ननद). भाभी मुझे थोड़े से कॅश की ज़रूरत है..

अंजलि: चोन्क कर तुम्हे भी..

आरती: क्या मतलब तुम्हे भी..

अंजलि: वो कामया भी तुम्हारे भैया का एटीएम लेकर गयी है उसे भी ज़रूरत थी..

बट तुम्हे क्यूँ चाहिए..

आरती: बाद में बता दूँगी भाभी.. अभी तो दो आप.

अंजलि: ठीक है कितने दूं.

आरती : 2000₹-/ ओन्ली

अंजलि: ओके वेट... अंजलि अपनी कबाड़ से अपना पर्स निकलती है उसमे से 2000र्स निकाल कर आरती को दे देती है...

अंजलि: आरती ? हॉस्टिल? में सब ठीक तो है ना..?

आरती : हाँ भाबी में खुद 1 वीक के हॉलिडे पर आई हूँ.. डॉन'ट वरी किसी का सिर फोड़ कर नहीं आई में..

हहहे हहे

अंजलि: हहहे शैतान..

अंजलि फिर से दरवाजा बंद कर ती है मेन गेट और आरती को भेज देती है..

अंजलि अभी अपने रूम तक पहुँची ही थी कि फिर से गेट नॉक होता है..

अंजलि: ओह गॉड अब कॉन है...

डोर फिर से नॉक होता है..

अंजलि: आ रही हूँ बाबा..

अंजलि जैसे ही गेट खोलती है...

सामने सलीम खड़ा था उसका चेहरा भी ढका हुआ था.. वो कुछ सामान लेकर आया था जो कभी भी गिर सकता था...

अंजलि: काका ये सब क्या है.. इतना सामान.. घबराते हुए अंजलि पूछती है..

सलीम: मदद करो.. अंजलि आगे बढ़ कर कुछ सामान उठाने लगती है कि सलीम सारा सामान अंजलि के हाथो में दे देता है.. अंजलि और सलीम दोनो इस वक़्त सामान को संभाले खड़े थे कि..

सलीम: मेड्म. जल्दी कीजिए इस सामान को स्टोर रूम में रखा दीजिए..

 
सलीम और अंजलि उस कार्टून को उठा कर स्टोर रूम में ले जाते है कि अंजलि गिरने वाली होती है..उसे लगता है कि कुछ उसके परों में अटक गया हो.. अंजलि अपना पैर उठा कर आगे बढ़ जाती है.. सलीम और अंजलि दोनो स्टोर रूम में समान रखने लगते है.नीचे स्टोर रूम में आना प्राब्लम नहीं थी प्राब्लम ये थी कि स्टोर रूम में लाइट नहीं जली हुई थी..

अंजलि: काका प्लीज़ लाइट जला दो..

सलीम जाकर लाइट जला देता है..

लाइट ऑन होते ही सलीम के होश उड़ जाते है..

सलीम एक टक देखता रह जाता है.. सलीम जैसे ही लाइट बंद करके घूमता है तो देखता है कि अंजलि पूरी तरह से नंगी खड़ी है स्टोर रूम में..

हाथो में बॉक्स पकड़े.. लंबे बाल जो कि उसकी कमर तक थे, और उसकी गान्ड ... बस सलीम एक टक देखता रहता है है.. तभी अंजलि घूम कर इशारा करती है काका बॉक्स..

सलीम धीरे से अंजलि के पास जाकर बॉक्स लेता है और उसे रख देता है..

अभी भी अंजलि को अपनी दशा का कोई होश नहीं होता.. सलीम 2 तीन बार इधर उधर देखने का नाटक करता है लेकिन अंजलि को कुछ समझ नहीं आता लेकिन अंजलि सलीम को चिढ़ाने का सोचती है..

अंजलि मन ही मन: (शायद काका मुझे टवल में देख कर शरमा रहे है चलो थोडा सा और जलाती हूँ..)

अंजलि: काका.. मेरी पीठ पर कुछ है क्या देखिए ना. कही कोई मकड़ी तो नहीं है..

और फिर से सलीम की ओर पीठ कर देती है..

अब तो सलीम के बर्दाश्त के बाहर था.. सलीम आगे बढ़ कर अंजलि की पीठ पर हाथ घुमाने लगता है....

तभी अंजलि की नज़र सामने जाती है.. जहाँ एक अलमारी रखी हुई थी कोई पुरानी सी जिसके दरवाजे पर बड़ा वाला आईना लगा हुआ था.. आईने में अंजलि खुद को देखती है तो स्तब्ध रह जाती है..

अंजलि : (ओह गॉड तो इसलिए बूढ़ा शर्मा रहा था या नाटक कर रहा था.. ये कैसे हुआ.. तभी उसे ध्यान आता है कि वो जब बॉक्स को लेकर स्टोर रूम में आ रही थी तब टवल खुल गया था वही उसके पैरों में अटका था जिसके कारण वो गिरने वाली हो गयी थी..)

तभी उसे एहसास होता है कि सलीम के हाथ अंजलि की क़मर पर है और उसके होंठ अंजलि की गर्दन पर.. तभी अंजलि को सामने अलमारी के पास एक कोक्करॉच नज़र आता है जिसे देख कर अंजलि डर जाती है और पलट कर फिर से सलीम के गले लग जाती है.. अंजलि को एहसास हो जाता है कि उसने ये क्या किया..

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और सलीम अंजलि को अपनी बाहों में क़ैद कर लेता है..

 
तभी अंजलि की नज़र सामने जाती है.. जहाँ एक अलमारी रखी हुई थी कोई पुरानी सी जिसके दरवाजे पर बड़ा वाला आईना लगा हुआ था.. आईने में अंजलि खुद को देखती है तो स्तब्ध रह जाती है..

अंजलि : (ओह गॉड तो इसलिए बूढ़ा शर्मा रहा था या नाटक कर रहा था.. ये कैसे हुआ.. तभी उसे ध्यान आता है कि वो जब बॉक्स को लेकर स्टोर रूम में आ रही थी तब टवल खुल गया था वही उसके पैरों में अटका था जिसके कारण वो गिरने वाली हो गयी थी..)

तभी उसे एहसास होता है कि सलीम के हाथ अंजलि की क़मर पर है और उसके होंठ अंजलि की गर्दन पर.. तभी अंजलि को सामने अलमारी के पास एक कोक्करॉच नज़र आता है जिसे देख कर अंजलि डर जाती है और पलट कर फिर से सलीम के गले लग जाती है.. अंजलि को एहसास हो जाता है कि उसने ये क्या किया..

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और सलीम अंजलि को अपनी बाहों में क़ैद कर लेता है..

अब सलीम के हाथ धीरे धीरे अंजलि की क़मर से होते हुए उसकी गान्ड को दबाने लगते है कि अंजलि सलीम को धक्का देकर पीछे हो जाती है और भाग कर स्टोर रूम से बाहर निकल जाती है..

अंजलि तुरंत अपना टवल उठा कर अपने रूम की ओर भाग जाती है

यहाँ सलीम अपनी जगह पर स्तब्ध खड़ा रह जाता है..

सलीम : मन ही मन. साला क्या ज़िंदगी है.. हे भगवान जब भीख माँगने निकलता हूँ तो दाने दाने को मोहताज हो जाता हूँ, आज बिन माँगे ही बहुत कुछ दे दिया..

बस तेरा इसी तरह मुझ पर रहम ओ करम रहेगा तो जल्द ही चिड़िया को पानी चखा दूँगा.. सलीम मुस्कुराता हुआ स्टोर रूम बंद करता है और अंजलि के रूम की ओर जाने लगता है..

सलीम अंजलि के दरवाजे के पास जाकर दरवाजा नॉक करने की सोचता है लेकिन फिर वापस घूम कर जाने लगता है..

फिर वापस सलीम अंजलि के दरवाजे के पास आता है और दरवाजा नॉक करता है...

अंजलि: काका प्लीज़ चले जाओ..

सलीम: अंजलि जी एक बार दरवाजा खोलो..

अंजलि: नहीं बिल्कुल नहीं अभी जो कुछ हुआ वो सब एक ग़लती थी भूल थी... फिर धीरे से बोलती है या शायद इत्तेफ़ाक़ .

सलीम: ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी.. लेकिन सिर्फ़ एक मिनिट मेरी बात सुन लीजिए उसके बाद में आपको कभी भी परेशान नहीं करूँगा.

अंजलि: जी बोलिए...

सलीम: आप दरवाजा तो खोलिए..

अंजलि: में टवल में हूँ.

सलीम: में तो अभी आपको उसके बिना भी तो देख चुका हूँ.

अंजलि कुछ सोच कर दरवाजा खोल देती है... सलीम अंजलि के पास जाकर उसे बोलता है.

सलीम: अंजलि जी मुझे प्यार हो गया है..

अंजलि सलीम के मूह से ये बात सुनते ही शॉक्ड हो जाती है..

अंजलि: क्या???

सलीम: जी मुझे कामया जी से प्यार होगया है..

अंजलि के लिए अब तो सबसे मुश्किल वक़्त था... क्यूँ कि पहली बार जब सलीम ने प्यार की बात कही तो उसे लगा शायद वो उसके बारे मे बात कर रहा है लेकिन जब उसने कामया का नाम लिया तो उसके पैरो तले से ज़मीन खिसक गयी...

अंजलि: क्या बकवास है काका.. आप ऐसा सोच भी कैसे सकते है.

सलीम: सोचना तो नहीं चाहता था लेकिन जबसे कामया की चूत चाटा हूँ, अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा हूँ आपकी मदद से... तब से उसकी खुश्बू मुझे पागल बना रही है..

अंजलि सलीम के मूह से ऐसी बात सुन कर सॉक्ड हो जाती है.... अगले ही पल वो गुस्से में आकर 2-3 थप्पड़ सलीम के गालो पर जड़ देती है..

 
सलीम चुप चाप गर्दन नीचे करके खड़ा रहता है..

अंजलि सलीम को इस हालत में देख कर उसे खुद पर शर्म आती है कि वो एक बुड्ढे पर हाथ उठा चुकी...है

अंजलि: कुछ बोलने वाली ही थी कि सलीम फिर से बोल पड़ता है..

सलीम: में जानता हूँ आप मुझसे प्यार करती है...

अंजलि के लिए ये बात तो बिल्कुल ऐसी थी जैसे कोई काला पानी की सज़ा मिठाई खिलाते हुए सुना रहा हो...

अंजलि: बकवास बंद कीजिए मुझे और आपसे प्यार , इंपॉसिबल .. मे देव की बीवी हूँ और उसी से प्यार करती हूँ मरते दम तक करती रहूंगी... पता नहीं में यहाँ चुप चाप खड़ी आपकी इतनी बकवास सुन क्यूँ रही हूँ..

सलीम: आप को 100% यकीन है आप मुझसे प्यार नहीं करती...

अंजलि: यकीन क्या करना यही सच है..

सलीम: ठीक है अगले 5 मिनिट आप मुझे मत रोकना में खुद 5 मिनिट बाद चला जवँगा.. अगर इन पाँच मिनिट में आपने ये साबित कर दिया कि आप देव साहब से प्यार करती है तो में आपको कभी कुछ नहीं कहूँगा, और चुप चाप इस घर से चला जाउन्गा.

अंजलि: हां शायद आपका चले जाना ही बेहतर होगा. में आपको इस लिए लाई थी क्यूकीमुझे लगा उस वक़्त में ग़लत थी. लेकिन शायद आपकी किस्मत में यही है...

ठीक है आपको 5 मिनिट दिए लेकिन खबर दार जो अपनी लिमिट रॉस की तो...

सलीम: ठीक है..

सलीम: अंजलि को कंधे से पकड़ कर अपने सीने से लगा लेता है..

अंजलि छूटने की कोशिश करती है और बोलती है कि ये क्या बदतमीज़ी है... आप क्या ज़बरदस्ती करोगे.

सलीम चिल्ला कर अंजलि से बोलता है.

सलेम: ईईई चुप . प्याअर में ज़बरदस्ती चलती है , लेकिन प्यार कोई ज़बरदस्ती नहीं करवा सकता समझी. सलीम उसकी आँखों में देखने लगता है तभी अंजलि भी सलीम के गुस्से के आगे शांत पड़ जाती है और साली की आँखों में देखने लगती है.

सलीम: अंजलि मेरी आँखों में तुझे क्या सिर्फ़ हवस दिखाई देती है. क्या तुम्हे नहीं लगता मुझे भी हक़ है प्यार करने का प्यार पाने का.?

अंजलि एक टक सलीम की आँखों में देखने लगती है उसे वहाँ हल्के से आँसू दिखाई देते है.. अंजलि अब थोड़ी सी नरम पड़ने लगी थी. उसे पता ही नहीं चला कि कब उसका टवल सलीम उसके बदन से अलग कर चुका था.

अंजलि: काका ऐसा मत कीजिए ना... (अंजलि बहकते हुए सलीम से बोलती है)

सलीम अंजलि को घुमा देता है. अब अंजलि की पीठ सलीम की तरफ थी और सलीम के हाथ अंजलि की क़मर से होते हुए उसके पेट पर आ चुके थे. अंजलि अपनी आँखे बंद करके उपर की ओर गर्दन उठा देती है कि तभी सलीम अपने होंठ अंजलि की गर्दन पर रख देता है...

 
अंजलि एक टक सलीम की आँखों में देखने लगती है उसे वहाँ हल्के से आँसू दिखाई देते है.. अंजलि अब थोड़ी सी नरम पड़ने लगी थी. उसे पता ही नहीं चला कि कब उसका टवल सलीम उसके बदन से अलग कर चुका था.

अंजलि: काका ऐसा मत कीजिए ना... (अंजलि बहकते हुए सलीम से बोलती है)

सलीम अंजलि को घुमा देता है. अब अंजलि की पीठ सलीम की तरफ थी और सलीम के हाथ अंजलि की क़मर से होते हुए उसके पेट पर आ चुके थे. अंजलि अपनी आँखे बंद करके उपर की ओर गर्दन उठा देती है कि तभी सलीम अपने होंठ अंजलि की गर्दन पर रख देता है...

अंजलि अब एक दम मदहोश हो चुकी थी...सलीम अब अपने हाथ अंजलि की क़मर से हटा लेता है. अंजलि एक अजीब सी खुमारी से घिर चुकी थी , उसके मन में अजीब सी गुद गुदि और ख्याल आ रहे थे, दिमाग़ में अजीब से धुंधले चित्र बन रहे थे और ख़त्म हो रहे थे, उसका दिमाग़ किसी सख़्त निर्णय पर नहीं पहुँच पा रहा था और शरीर सलीम की हरकतों से उसका साथ नहीं दे पा रहा था.

अंजलि एक हाथ अचानक सलीम के सर पर घुमा कर रख लेती है और सलीम को और चूमने के लिए उकसाने लगती है. तभी सलीम वापस अपने हाथ अंजलि की क़मर पर ले जाता है...

अंजलि की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी थी, उपर से सलीम अंजलि की कमर को सहलाते हुए अंजलि के टवल की गाँठ खोल देता है..

अंजलि कुछ बोलना चाहती थी, या कुछ सोचना चाहती थी कह नहीं सकते बस जो कुछ उसके साथ अभी हो रहा था उसने उसके दिमाग़ को सुन्न कर दिया था और जिस्म..... वो मदहोशी की हालत में उसके वश में नहीं था...

अचानक सलीम अंजलि को अपनी तरफ घुमाता है..

अंजलि सलीम से नज़रें नहीं मिलाती और अपनी नज़रे झुका लेती है...

सलीम अंजलि की ठुड्डी को अपनी उंगली से उपर करके बोलता है..

सलीम;: अंजलि मेरी तरफ देखो...

अंजलि अपनी आँखें बंद रखती है..

सलीम: अंजलि एक बार देखो तो...

अंजलि अपनी आँखें खोलती है और सलीम की ओर देखती है...

सलीम: अंजलि में जानता हूँ तुम शादी शुदा हो... ये सब तुम्हे बाद में ग्लानि से भर देगा.. लेकिन क्या ये सच नहीं है कि तुम मुझे प्यार करती हो...

अंजलि : ना में सिर हिलाती है... नहीं ये सच नहीं है..

तभी सलीम अंजलि के हाथो को उपर उठा कर अपने गले के चारों ओर रख लेता है..

अंजलि: आपके 5 मिनिट पूरे हुए...

सलीम: नहीं अभी 3 मिनिट बाकी है...

अंजलि कुछ नहीं बोलती...

सलीम: अच्छा चल अगले 3 मिनिट बाद तू खुद सोचेगी कि तू मुझे प्यार करती है या उस कमीने देवराज को..

अंजलि सलीम के मूह से देव राज को कमीना कहने पर उसे धक्का देकर पीछे धकेल देती है..

अंजलि: खबरदार जो मेरे पति के बारे में कुछ भी कहा तो..

सलीम वापस अंजलि के पकड़ कर अपनी ओर खींचता है.. लेकिन अंजलि इस बार उसे दूर धकेल रही थी..

तभी अंजलि का टवल पकड़ कर सलीम खींच लेता है.. अंजलि घूम कर बिस्तर पर पड़ जाती है..

सलीम: माशा अल्लाह... अंजलि तुम कुदरत का एक करिश्मा हो... माँ कसम जन्नत की हूर भी तुम्हारे आगे कुछ नहीं है...

 
अंजलि सलीम की बातों से शरमाने लगती है..

अंजलि: प्लीज़ मेरा टवल देदो..

सलीम: मेरी बस 5 इच्छाएँ पूरी करदो..

अंजलि एक टक सलीम की ओर देखती है...

सलीम: वादा करता हूँ उसके बाद में तुम्हे कभी भी परेशान नहीं करूँगा.

अंजलि चुप चाप ज़मीन की ओर देखने लगती है...

अंजलि: पहले आप इच्छा ये बताओ क्या है..

सलीम: नहीं पहले तुम्हे वादा करना होगा मुझसे...

अंजलि: नहीं तो.. मुझे आप बदनाम करोगे..

सलीम: तुम्हारे ससुराल वालो की तरह नहीं हूँ..

अंजलि: क्या मतलब..

सलीम: तुम बहुत भोली हो... चलो फिर भी में तुम्हे आज एक छोटा सा किस्सा सुनाउन्गा अगर तुम मेरी आज पाँच इच्छा ये पूरी करो तो...

अंजलि: ठीक है बोलो क्या है..

सलीम : ऐसे नहीं... खाओ अपने पति देव राज और मंगल सूत्र की कसम..

अंजलि कुछ देर सोचने के बाद अपने हाथ में अपना मंगल सूत्र पकड़ लेती है..

अंजलि: में मेरे पति देव की कसम खाकर बोलती हूँ कि में आपकी पाँच इच्छा ये पूरी करूँगी लेकिन सेक्स नहीं करूँगी आपके साथ...

सलीम मुस्कुराते हुए..

सलीम:में भी नहीं करूँगा...

अंजलि सलीम की ओर देखती है..

सलीम: मेरी पहली इच्छा है कि तुम अगले 2 मिनिट के लिए अपनी शर्म भूल जाओ...

अंजलि: ये कैसे हो सकता है..

सलीम: अब तुम मेरा टाइम बर्बाद करोगी तो...

अंजलि: ठीक है ठीक है.. ओके.. में नहीं शरमा रही..

सलीम: तो बेड से खड़ी हो जाओ और मेरे गले लगो ...

अंजलि: झिझक ते हुए बेड से खड़ी होकर सलीम के गले लग जाती है...

(मन मे.. ऐसा क्या है जो सलीम चाचा जानते है में नहीं... मुझे भी ऐसा कई बार लगा है जैसे सासू माँ और देव दोनो कुछ छिपा रहे हो...)

सलीम अंजलि को पकड़ कर बेड पर बिठा देता है...

सलीम: अपनी दोनो टांगे खोलो..

अंजलि: व्हाट......? ये क्या बदतमीज़ है..

सलीम: अभी तो बोला था 2 मिनिट के लिए अपनी सारी शर्म भूल जाओ.

अंजलि: लेकिन में ऐसा कैसे कर सकती हूँ...

सलीम: ठीक है...तुम मत करो मुझे कर लेने दो.. लेकिन में करूँगा तो मेरी दूसरी शर्त कुछ इस तरह से होगी कि में तुम्हारी टांगे खोल कर तुम्हारी चूत के साथ थोड़ी देर खेलूँगा..

अंजलि का मूह खुल का खुला रह जाता है जब वो सलीम के मूह से ऐसी बात सुनती है तो..

सलीम: बोलो मंजूर है..

अंजलि: नहीं में ही .....

सलीम: क्या में ही..

अंजलि: में खुद करती हूँ(गुस्से में बोलती है..)

सलीम: (मुझे माफ़ कर्दे ना में ये सब करना नहीं चाहता था...) तो अपनी टांगे को खोलो...\

अंजलि अपनी दोनो टांगे को खोल लेती है ...

सलीम: अच्छे से खोलो ताकि मुझे तुम्हारी चूत दिखे...

अंजलि रोने वाली सी हो जाती है...

अंजलि अपनी टांगे और खोल देती है..

 
अंजलि की टांगे खोलते ही उसकी चूत भी खुल जाती है..

उसकी चूत देख कर ही कहा जा सकता था कि ठुकाइ ज़्यादा नहीं हुई है..

सलीम: मेरी तीसरी शर्त है है...कि तुम मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मूह से टच करो...

अंजलि: नहीं..... ..... ये क्या बकवास है मेने कहा ना नो सेक्स...

सलीम: तो में कॉन्सा अंदर डालने के लिए बोल रहा हूँ...

सलीम इतना बोल कर अंजलि के सामने नंगा हो जाता है...

अंजलि सलीम के 10 या 10.5 इंच के हथियार को देखे बिना ही गर्दन घुमा लेती है...

सलीम: जल्दी कर मेरा टाइम पूरा हो जाएगा तो...

अंजलि: प्लीज़ ये सब मुझसे नहीं होगा... अभी तक जो कुछ किया वो सब भी मुझे नहीं करना चाहिए था..

सलीम: फिर में खुद करू..

अंजलि: नहीं......बिल्कुल नहीं.....

अंजलि(कहीं इसने अंदर डाल दिया तो में कहीं की नहीं रहूंगी... इस से बेहतर तो मैं ही इसे हाथ से पकड़ कर रखूँगी ताकि अंदर ना जाए..

अंजलि: ठीक है ...

\

सलीम : तो बुला मुझे...

अंजलि: व्हाट?

सलीम : क्या चाहिए तुझे अंजलि...?

अंजलि: चर्चा......!

सलीम: मेने कहा कुछ चाहिए तुम्हे...?

अंजलि: शरमा जाती है कि में क्या कहूँ अब इनसे..

अंजलि; चाचा मेरे करीब आओ..

सलीम: ठीक है आता हूँ कपड़े तो पहन लूँ..

अंजलि: नहीं नहीं..

सलीम : क्या चाहिए...

अंजलि: झुंझला जाती है..

अंजलि : आपको नहीं पता क्या चाहिए...

सलीम: इंसान हूँ भगवान थोड़े ही. हूँ

अंजलि: शरमाते हुए नीचे देखती है.. उसे बोलने के अलावा और कुछ समझ नहीं आता...

अंजलि: चाचा आप मेरे पास तो आइए... मुझे आपका वो पेनिस चाहिए...

और बुरी तरह से शरमाने लग जाती है..

 
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