अंजलि सलीम की बाते तो सुन चुकी थी लेकिन कुछ रिक्ट करने की हालत में नहीं थी... कारण ये था कि उसकी चूत में अभी भी सुरसूराहट हो रही थी...
करीब 30 मिनिट बाद अंजलि हिम्मत जुटा कर बिस्तर से उठती है और वॉशरूम में जाकर शवर के नीचे खड़ी हो जाती है.. अंजलि की जांघे काँप रही थी.. उसके पैरो में खुद का वजन भी संभाल पाने की हिम्मत नहीं हो रही थी..
किसी तरह शवर के नीचे खड़े होने के बाद वो धीरे से अपनी पीठ दीवार के सहारे लगाकर नीचे बैठने लगती है.. अपने सारे बदन को सॉफ करने के बाद उसे तोड़ा बहुत आराम महसूस होने लगता है... अंजलि जल्दी से शवर बंद करके वॉशरूम से बाहर आती है.. उसके शरीर पर पानी की बूंदे ऐसे चमक रही थी जैसे कि कोई हीरे से जड़ी हुई मूरत हो...
अंजलि अपने कबाड़ की तरफ जाती है वहाँ से जल्दी से अपनी साड़ी , ब्लाउज, पेटिकोट, ब्रा पेंटी निकाल कर पहन ने लगती है... उसके मन में कयि तरह के सवाल चल रहे थे.. एक प्रकार की उधेड़ बुन चल रही थी...
कभी सोचती है आख़िर देव ने ऐसा क्या किया जो सलीम उनसे इतना नाराज़ है.? कभी सोचती है.. हे भगवान मेने ये कैसे होने दिया एक हिंदू बुड्ढे को मेरे बदन के साथ खेलना... उसे तो देखना भी पाप था.... ओह गॉड... कभी सोचती है.. आख़िर ऐसा क्या राज है देव का जो में नहीं जानती सिर्फ़ सलीम चाचा जानते है.... और मम्मी जी ने मुझसे क्यूँ छुपाया.. कभी सोचती है.. सलीम चाचा के स्पर्श करने से में पागल क्यूँ हो गयी थी... में ऐसी तो नहीं थी.. मुझसे तो अब काबू ही नहीं रहा.. जैसे मेरा शरीर मुझसे ही बग़ावत करने पे तुला है... कभी सोचती है.. क्या में सलीम चाचा से प्यार... नहीं नहीं में शादी शुदा हूँ... देव मेरे पति है.. सुंदर है. यंग है.. पोलीस ऑफीस है.. हॅंडसम और मुझसे प्यार करते है... फिर में कैसे उस बुड्ढे सलीम चाचा से प्यार कर सकती हूँ... कभी नहीं... कभी सोचती है... और ये सलीम चाचा मुझसे कह रहे थे कि मेरी ननद से प्यार करते है और मेरी मदद चाहिए.. मुझे क्या दलाल समझा है.. या किसी कोठे की बाई जो मुझसे एक लड़की का सौदा करने जैसी हरकत कर रहे है.. मदद तो ऐसे माँग रहे थे जैसे मेरे कोई ख़ास दोस्त हो.. ... मेरे सिवा किसी और को कैसे देख सकते है..
इतना सोचना था कि...
लास्ट का विचार आते ही उसकी पेंटी फिर से गीली हो जाती है.. अंजलि की चूत में फिर से खुजली चलने लगती है और पानी टपक ने लगता है.. ये देख कर अंजलि शरमा जाती है.. अंजलि अब वापस अपनी पेंटी निकाल कर उसे धोने वॉशरूम में चली जाती है.. अंजलि वॉशरूम में अपनी पेंटी धोकर सूखने के लिए वही डाल देती है.. अंजलि जैसे ही बाहर आती है.. उसका फोन बजने लगता है...
अंजलि जल्दी से फोन तक आती है और देखती है कि किसका फोन है.. सामने लिखा नाम देखा तो देव......
अंजलि ने फोन उठाया तो और बोली...
अंजलि:, हेलो....
बीप बीप बीप बीप.....
(फोन डिसकनेक्ट)
अंजलि ने फिर से कॉल किया.. लेकिन आउट ऑफ नेटवर्क आ रहा था..
अभी अंजलि अपने विचारों से बाहर निकली ही थी कि घर के डोर की बेल बजती है..
अंजलि सीडियाँ उतरती हुई नीचे आती है… अंजलि देखती है कि सलीम चाचा डोर ओपन करने गये हुए है.
दरवाजा जैसे ही खूलकता है.. कामया भाभी बोलते हुए अंजलि के गले लगती है…
लेकिन थोड़ी देर में उसे पता चल जाता है कि वो उसकी भाभी नहीं बल्कि सलीम चाचा है..