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“ठीक है कोशिश करती हूँ...”
सुरभि कपड़े हाथ में लेकर अपने वाशरूम में चली गई. स्कर्ट और टॉप पहनकर वह आईने के पास गई और खुद को निहारने लगी. वो स्कर्ट बहुत ही छोटी थी. इतनी छोटी कि मुश्किल से उसके नितंबों को ढक पा रही थी. और इतना बड़ा गला था उस टॉप का कि उसके आधे से अधिक उभार उस टॉप से बाहर निकलने को हो रहे थे. खुद को ऐसे कपड़ों में देखकर उसका चेहरा लाल हो गया था.
‘मैं कितनी हॉट लग रही हूँ... पर क्या मैं विजय के साथ इन कपड़ों में लोकेश के सामने जा सकती हूं...? नहीं नहीं ऐसा करना बड़ा अजीब लगेगा...’ सुरभि मन ही मन सोच रही थी.
तभी विजय ने दरवाजा खटखटाया. "दरवाजा खोलो सुरभि… मुझे देखने तो दो कि तुम कैसी लग रही हो."
"मैं इन कपड़ों में तुम्हारे सामने नहीं आ सकती . ये बहुत छोटे हैं," सुरभि ने शरमाते हुए कहा.
"छोटे हैं तो क्या... मैं तुम्हारा पति हूँ... मैंने तुम्हें बहुत बार नंगा देखा है. तुम्हें मुझसे तो शर्माना नहीं चाहिए."
"तुम्हारे सामने तो आ भी जाउंगी पर उसके सामने नहीं जा पाऊँगी...”
"फिर वही बात... उसने भी तो तुम्हें बिना कपड़ों के देख रखा है..."
"हाँ ये तो है लेकिन अब हालात अलग है. अब तुम भी मेरे साथ होंगे..."
"हम्म… मैं समझ सकता हूँ … पर पहले तुम एक बार बाहर तो आओ. मुझे तुम्हें इन कपड़ो में देखने दो... फिर हम फैसला करेंगे कि क्या करना है.”
सुरभि ने धीरे से दरवाजा खोला और विजय के सामने खड़ी हो गई. उसकी नजरें फर्श पर गड़ी थी.
विजय का मुँह खुला रह गया उसे देख कर.
"ओ माई गॉड... तुम तो बहुत हॉट लग रही हो सुरभि. लोकेश को हार्ट अटैक आ जाएगा जब वो तुम्हें इन कपड़ों में देखेगा. और उसके बाद मैं तुम्हारे साथ आराम से मज़े करूँगा,” विजय ने कहा.
सुरभि का चेहरा लाल हो गया.
“विजय, मैं उसके सामने ये कपड़े नहीं पहन सकती.”
विजय आगे बढ़ा और उसके नितंबों को मसलते हुए उसे अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया.
“तुम ये क्या कर रहे हो?" सुरभि ने शरमाते हुए कहा.
"मैं अपनी सेक्सी बीवी के साथ एन्जॉय कर रहा हूँ..."
"मैंने ये कपड़े उसके लिए पहने हैं, तुम्हारे लिए नहीं..." सुरभि हँस पड़ी.
"तुम्हें इस रूप में देख कर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा... सच में सुरभि तुम आज बहुत हॉट लग रही हो.” इतना कहते ही वो उसके होंठों पर टूट पड़ा और अपने दोनो हाथों से उसके उभारों को मसलने लगा.
"द-दरवाजा खुला है, विजय ... लोकेश अंदर आ सकता है," सुरभि ने कहा. उसकी सांसें तेज हो रही थी. उसकी बाहों में वो पिघलती जा रही थी.
विजय ने सुरभि की बात को अनसुना किया और फिर से उसे चूमने लगा.
"दरवाजा खुला है, विजय," सुरभि ने फिर से कहा.
विजय उसकी बात को अनसुना करके फिर से अपने होंठ उसके होठों के ऊपर रख कर उसे और भी गहराई से चूमने लगा. वो दोनो ही बहुत ज़्यादा एक्साइटिड महसूस कर रहे थे.
सुरभि कपड़े हाथ में लेकर अपने वाशरूम में चली गई. स्कर्ट और टॉप पहनकर वह आईने के पास गई और खुद को निहारने लगी. वो स्कर्ट बहुत ही छोटी थी. इतनी छोटी कि मुश्किल से उसके नितंबों को ढक पा रही थी. और इतना बड़ा गला था उस टॉप का कि उसके आधे से अधिक उभार उस टॉप से बाहर निकलने को हो रहे थे. खुद को ऐसे कपड़ों में देखकर उसका चेहरा लाल हो गया था.
‘मैं कितनी हॉट लग रही हूँ... पर क्या मैं विजय के साथ इन कपड़ों में लोकेश के सामने जा सकती हूं...? नहीं नहीं ऐसा करना बड़ा अजीब लगेगा...’ सुरभि मन ही मन सोच रही थी.
तभी विजय ने दरवाजा खटखटाया. "दरवाजा खोलो सुरभि… मुझे देखने तो दो कि तुम कैसी लग रही हो."
"मैं इन कपड़ों में तुम्हारे सामने नहीं आ सकती . ये बहुत छोटे हैं," सुरभि ने शरमाते हुए कहा.
"छोटे हैं तो क्या... मैं तुम्हारा पति हूँ... मैंने तुम्हें बहुत बार नंगा देखा है. तुम्हें मुझसे तो शर्माना नहीं चाहिए."
"तुम्हारे सामने तो आ भी जाउंगी पर उसके सामने नहीं जा पाऊँगी...”
"फिर वही बात... उसने भी तो तुम्हें बिना कपड़ों के देख रखा है..."
"हाँ ये तो है लेकिन अब हालात अलग है. अब तुम भी मेरे साथ होंगे..."
"हम्म… मैं समझ सकता हूँ … पर पहले तुम एक बार बाहर तो आओ. मुझे तुम्हें इन कपड़ो में देखने दो... फिर हम फैसला करेंगे कि क्या करना है.”
सुरभि ने धीरे से दरवाजा खोला और विजय के सामने खड़ी हो गई. उसकी नजरें फर्श पर गड़ी थी.
विजय का मुँह खुला रह गया उसे देख कर.
"ओ माई गॉड... तुम तो बहुत हॉट लग रही हो सुरभि. लोकेश को हार्ट अटैक आ जाएगा जब वो तुम्हें इन कपड़ों में देखेगा. और उसके बाद मैं तुम्हारे साथ आराम से मज़े करूँगा,” विजय ने कहा.
सुरभि का चेहरा लाल हो गया.
“विजय, मैं उसके सामने ये कपड़े नहीं पहन सकती.”
विजय आगे बढ़ा और उसके नितंबों को मसलते हुए उसे अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया.
“तुम ये क्या कर रहे हो?" सुरभि ने शरमाते हुए कहा.
"मैं अपनी सेक्सी बीवी के साथ एन्जॉय कर रहा हूँ..."
"मैंने ये कपड़े उसके लिए पहने हैं, तुम्हारे लिए नहीं..." सुरभि हँस पड़ी.
"तुम्हें इस रूप में देख कर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा... सच में सुरभि तुम आज बहुत हॉट लग रही हो.” इतना कहते ही वो उसके होंठों पर टूट पड़ा और अपने दोनो हाथों से उसके उभारों को मसलने लगा.
"द-दरवाजा खुला है, विजय ... लोकेश अंदर आ सकता है," सुरभि ने कहा. उसकी सांसें तेज हो रही थी. उसकी बाहों में वो पिघलती जा रही थी.
विजय ने सुरभि की बात को अनसुना किया और फिर से उसे चूमने लगा.
"दरवाजा खुला है, विजय," सुरभि ने फिर से कहा.
विजय उसकी बात को अनसुना करके फिर से अपने होंठ उसके होठों के ऊपर रख कर उसे और भी गहराई से चूमने लगा. वो दोनो ही बहुत ज़्यादा एक्साइटिड महसूस कर रहे थे.