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Adultery सेक्स स्लेव भाभी और हरामी देवर

PART-20

हिना और शिवानी की यह बातचीत चल ही रही थी कि उसी समय गौरव वापस आ गया और शिवानी से बोला : तुम नीचे जाकर टेबल पर खाना लगवाओ-मैं हिना को लेकर वहीं आता हूँ

शिवानी नीचे चली गयी और गौरव हिना की तरफ देखकर कहने लगा : चलो अब तुम्हारी बाकी की ट्रेनिंग खाना खाने के बाद होगी.

यह कहकर उसने हिना के बंधे हुए हाथ खोल दिए और पहनने के लिए शिवानी की अलमारी में से एक गाउन निकालकर दे दिया

खाना खाने के बाद हिना,शिवानी और गौरव फिर से पहली मंज़िल पर वापस आ गए. पहली मंजिल की छत काफी बड़ी थी और खुली हुई थी. छत में पांच कमरे बने हुए थे. 3 कमरे बंद पड़े थे और दो कमरों में शिवानी और गौरव रह रहे थे. बाकी की छत पर बहुत बड़ा आँगन था-आँगन में भी बैठने के लिए चार कुर्सियां और एक टेबल रखीं थी क्योंकि गौरव और विवेक कभी कभी यहां बैठकर भी चाय नाश्ता आदि करते हैं.

छत में एक ही साइड में सारे कमरे बने हुए थे. बाकी की सभी तीनों साइड 3 फिट की बाउंडरी के साथ खुली हुई थीं और वहां से और घरों की छतें नज़र आती थीं

खाना खाकर वापस आते आते दस बज गए थे. गौरव ने कमरे में जाने से पहले शिवानी से कहा : ऐसा करते हैं, यहीं छत पर थोड़ी देर टहल लेते हैं -बाकी घरों की छतों पर भी लोग इस समय खाना खाकर चहलकदमी कर रहे थे-कुछ घरों की छतों पर बच्चे भी हुड़दंग मचा रहे थे.

इस समय शिवानी और हिना दोनों ही फ्रंट ज़िप वाला गाउन पहने हुए थीं. गौरव क्योंकि बाहर कहीं मीटिंग से आया था, इसलिए उसने अभी तक अपनी जींस और टी शर्ट ही पहनी हुई थी-खाना खाने की जल्दी में उसने अभी तक अपने जूते भी नहीं उतारे थे.

छत पर इस समय बहुत तेज़ और ठंडी हवा चल रही थी और आसमान से निकल रहे पूर्णमासी के चन्द्रमा की रोशनी से सारी छतें चमक रही थीं

दस मिनट तक छत पर टहलने के बाद वे सभी लोग छत पर रखी कुर्सियों पर बैठकर वहां से दूसरे घरों की छतों पर होने वाली चहलकदमी को देखने लगे

गौरव के सामने वाली साइड में शिवानी और हिना बैठी हुई थीं.

गौरव को अब लगा कि थोड़ा मज़ा लेने का यह सही समय है -इसलिए उसने हिना की तरफ देखकर कहा : अब तुम्हारी ट्रेनिंग दुबारा से शुरू हो रही है-चलो खड़ी हो जाओ

हिना कुर्सी से उठकर खड़ी हो गयी और चरों तरफ देखती हुई कहने लगी : यहां तो छतों पर खड़े सब तरफ से लोग हमें देख रहे हैं

गौरव हँसते हुए कहने लगा : कोई बात नहीं. थोड़ा इस तमाशे का मज़ा वे लोग भी ले लेंगे -चल इधर आकर मेरे जूते उतार

गौरव ने कुर्सी पर बैठे बैठे अपनी दोनों टाँगे आगे की तरफ फैला दीं और अपने दाएं हाथ से अपनी जींस में कैद लण्ड को पकड़कर सहलाने लगा

हिना को बहुत अजीब लग रहा था-उसे लग रहा था कि इस समय सब लोगों की नज़रें सभी छतों पर हमारी तरफ ही हैं और उसे गौरव जान बूझ कर ज़लील करने के लिए अपने जूते उतारने को कह रहा था. वह अभी तक अपनी जगह पर खड़ी हुई थी. उसे अपनी जगह से हिलता न देख गौरव ने दुबारा उससे कहा : अब अपने गाउन की ज़िप को पूरा खोलो और यहां आकर मेरे जूते उतारो-अगर अब भी तुमने मेरे हुक्म की तामील नहीं की तो तुम्हे पूरा नंगा करके तुमसे जूते उतरवाऊँगा

अब हिना एकदम सकपका गयी और कहने लगी : प्लीज़ मेरा गाउन मत खुलवाओ. मैंने तो अंदर ब्रा और पैंटी भी नहीं पहनी हैं-मैं ऐसे ही आपके जूते उतार देती हूँ

गौरव : नहीं, तुमने एक बार में मेरी बात नहीं मानी तो अब तुम्हे गाउन खोलना ही पडेगा-जल्दी करो या फिर मैं तुम्हे पूरा नंगा करके परेड करवाऊं ?

अब हिना ने जल्दी से अपने गाउन की ज़िप नीचे सरका दी-ज़िप को नीचे सरकाते ही उसका गाउन इधर उधर तेज़ हवा में उड़ने लगा -अपने हवा में उड़ते गाउन को किसी तरह संभालते हुए हिना जल्दी से गौरव के पैरों के पास आकर बैठ गयी और उसके जूतों के फीते खोलने लगी. हिना को अब राहत महसूस हो रही थी क्योंकि उसे लग रहा था कि जब तक वह नीचे जमीन पर बैठी रहेगी, उसे दूसरी छतों पर से लोग ठीक से नहीं देख पाएंगे और वह शर्म और ज़लालत से तब तक बची रहेगी जब तक वह जमीन पर बैठी रहेगी

अपने जूते उतरवाने के बाद गौरव उससे बोला : चलो अब मोज़े भी उतारो

हिना ने उसके पैरों से मोज़े भी उतार दिए

गौरव अब हिना से बोला : अब मेरे पैरों को अपने हाथों में पकड़कर दोनों को दस दस बार चूमो

जब हिना गौरव के दोनों पैरों पर चुम्मे दे चुकी तो गौरव ने अपने पैरों के तलवों को उसके गालों पर रगड़ते हुए कहा : अब एक एक करके मेरे दोनों पैरों के तलवों को अपनी जीभ से चाटो

हिना अब फिर से गिड़गिड़ाने लगी : मुझे अब और ज़लील मत करो प्लीज़...

गौरव ( हँसते हुए ) : चलो तुम्हे मैं एक और आसान काम बताता हूँ- तुम उठकर खड़ी हो जाओ और अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर आधे घंटे तक खड़ी रहो

कुर्सी पर बैठी शिवानी यह सारा तमाशा देख रही थी-हिना को यह आसान वाला काम दरअसल बहुत मुश्किल लग रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि जैसे ही वह अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर खड़ी होगी-दूसरी छतों पर खड़े सभी लोग उसीकी तरफ देखना शुरू कर देंगे-ऊपर से हवा इतनी तेज़ चल रही थी कि उसका खुला हुआ गाउन लगातार उड़ उड़ कर उसके नंगे बदन की नुमायश सबके सामने कर देगा.

गौरव को मालूम था कि हिना इस बात के लिए राजी नहीं होगी और हुआ भी यही. हिना अब गौरव से बोली : नहीं मैं आपके पैरों के तलवे चाटने के लिए तैयार हूँ

यह कहकर उसने गौरव के पैरों के तलवे चाटने शुरू कर दिए

हिना से अपने तलवे चटवाते हुए गौरव अपने लण्ड को सहलाये जा रहा था जो अब तक काफी कड़क हो गया था.

गौरव ने कुर्सी पर बैठे बैठे अपनी जींस की ज़िप खोलकर उसमे से अपने लण्ड को बाहर निकाला और हिना से बोला : अब इसे अपने मुंह में लेकर चूस

हिना : नहीं ..सब देख रहे हैं.. यहां खुले में यह सब मत करवाओ प्लीज़...

गौरव ने अब हिना के दो थप्पड़ लगाए और बोला : चल खड़ी हो साली...

हिना घबराकर उसका लण्ड चूसने के लिए आगे बड़ी लेकिन गौरव के दिमाग में अब कुछ और ही चल रहा था : खड़ी होकर अपना गाउन उतार और एकदम नंगी हो जा -अब तुझे यह मालूम पड़ जाना चाहिए कि अगर मेरी बात पहली बार में नहीं मानेगी तो तुझे कितनी सख्त सजा मिल सकती है -चल खड़ी हो और गाउन उतार कर दिखा -एक बार कह चुका हूँ -दुबारा इस सजा को और बढ़ा दूंगा

हिना घबराई हुई थी. उसने जल्दी से अपने गाउन को उतार दिया और एकदम नंगी अवस्था में वहां गौरव के सामने खड़ी होकर अपने हाथों से अपने मम्मों और चूत को छिपाने का प्रयास करने लगी

अब गौरव उससे बोला : देख सब लोगो की नज़र से बचने का अभी भी एक मौका है. नीचे बैठ जा और मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले ले

हिना ने इस बार बिना मौका गँवाए गौरव की बात मान ली और जमीन पर बैठ गयी और उसके लण्ड को अपने मुंह में लेकर उस पर अपनी जीभ और होंठों से मालिश करने लगी.

शेष अगले भाग में
 
हिना गौरव के खड़े लण्ड को अपने मुँह में लेकर उस पर अपनी जीभ फिराए जा रही थी। गौरव पूरी मस्ती में था। वह बीच बीच मे हिना के गालों पर हल्के हल्के चपत भी मार रहा था और बोल रहा था : ठीक से चूस साली। क्या आज से पहले किसी मर्द का लण्ड अपने मुंह मे नही लिया है तूने ?

हिना तो पहली बार ही किसी का लंड चूस रही थी, यह बात गौरव को मालूम थी फिर भी वह उसे ज़लील करने के मूड में था। उसने अब शिवानी की तरफ देखकर कहा : जाओ शिवानी मेरे कमरे से चमड़े का हंटर लेकर आओ

शिवानी झट से उठी और हंटर लेकर गौरव के सामने हाज़िर हो गई।

गौरव : इस चिकनी के पिछवाड़े को इस हंटर से गर्म करना शुरू करो। यह थोड़ा उछलेगी तो ठीक से लंड चूसेगी

शिवानी समझ गई कि गौरव क्या चाहता है।

उसने जोर जोर से हंटर हिना के सुडौल नितंबों पर मारने शुरू कर दिये और जैसी की उम्मीद थी, हंटर लगते ही हिना का पूरा दूधिया बदन उछलने लगा और उसके मस्त मस्त मम्मे भी हिल हिल कर गौरव की टांगों से टकराने लगे। अब गौरव को बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ देर में उसने अपने लण्ड की पिचकारी हिना के मुंह मे छोड़ते हुए उससे कहा : मेरे सारे जूस को पी जा। एक बूंद भी तेरे मुंह से बाहर नहीं गिरनी चाहिए

हिना तो पहले ही बहुत डरी हुई थी। वह सारा वीर्य चुपचाप पी गई।

गौरव ने अपने लण्ड को उसके मुंह मे से बाहर निकाला और बोला : अब इसे चाट चाट कर साफ कर

हिना गिड़गिड़ाते हुए बोली : प्लीज़ मुझे हंटर मारना बंद करो। मैं तो आपकी सब बातें मान रही हूँ। फिर मुझे हंटर क्यों मारे जा रहे हैं। मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब मत मारो प्लीज़

शिवानी ने हंटर मारने बंद कर दिए तो गौरव उससे बोला : रुको मत। इसे हंटर मारती रहो। इसकी ट्रेनिंग के लिए यह सब बहुत जरूरी है। इस साली ने अपने पति को बहुत परेशान करके रखा है। वह बता रहा था कि पिछले 6 महीने में इन दोनों ने सिर्फ 10 बार ही सेक्स किया है। यह रंडी अपने पति को अपने खूबसूरत बदन को हाथ ही नही लगाने देती है। मेरा लण्ड तो यह अपने मुंह मे लेकर कुतिया की तरह चूस रही है लेकिन उसके लण्ड को आज तक इसने अपने हाथ मे भी नही लिया है। क्यों साली मैं ठीक कह रहा हूँ ना ?

हिना अब तक गौरव का लण्ड चाट चाट कर साफ कर चुकी थी। उसने अपने लण्ड को वापस जीन्स में डालकर ज़िप बन्द करते हुए फिर से हिना की तरफ देखकर पूछा : बोल साली, जो मैं कह रहा हूँ वही बात है या फिर कुछ और है ?

हिना : जी आप ठीक कह रहे हैं

रात के साढ़े 11 बज चुके थे। अब सब छतों पर से ज्यादातर लोग जा चुके थे। गौरव ने चारों तरफ एक बार नज़र डाली और हिना से बोला : चल अब घोड़ी बन कर दिखा

शिवानी गौरव का इशारा समझ चुकी थी। उसने हिना को घोड़ी बनने में मदद करते हुए उसके पिछवाड़े को गौरव की तरफ कर दिया और इसके चेहरे को अपनी तरफ करवा लिया। हिना इस समय अपने चारों हाथ पैरों के बल जमीन पर घोड़ी बनकर खड़ी हुई थी।

शिवानी ने अपने गाउन की ज़िप भी खोल ली थी ताकि इस मौके का भरपूर फायदा उसे मिल सके।

हिना को जिस तरह से गौरव पेल रहा था, उसे देखकर शिवानी की अपनी चूत एकदम गीली हो गई थी। गाउन के अंदर शिवानी ने भी पैंटी नही पहनी थी।

शिवानी के हाथ से हंटर अब गौरव ने अपने हाथ मे ले लिया और एक जोर का हंटर हिना के नितंबों पर मारता हुआ उससे बोला : टाँगे खोलकर दिखा। अब तेरी गाँड़ मारी जायेगी।

हिना ने जैसे ही अपनी टाँगे खोली, गौरव ने अपना खड़ा लण्ड उसके दोनों नितंबों के बीच मे घुसा दिया और शिवानी की तरफ देखकर बोला : इस रंडी से तू भी मज़े ले ले अब

शिवानी ने पहले ही हिना के चेहरे को कुर्सी पर अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी दोनों टाँगों के बीच मे फंसा रखा था और उससे कहती जा रही थी : चल हरामजादी अपने चेहरे को मेरी चूत पर रगड़ रगड़ कर मुझे भी खुश कर। बीच बीच मे शिवानी हिना के गालों पर यह कहते हुए चपत भी मार रही थी : ठीक से चाट इसे-अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत में डालकर उसकी ठीक से मालिश कर

उधर गौरव हिना के पिछवाड़े को हंटर मार मार कर उसकी गाँड़ मारने में लगा हुआ था

लगभग 20 मिनट तक दोनों ने आगे पीछे से हिना को पेलकर मज़े लिए और फिर वहां से उठते हुए गौरव बोला : अब यह चिकनी लौंडिया ऐसे ही घोड़ी बनी बनी मेरे कमरे में जाएगी। शिवानी तुम जरा इसकी पीठ पर मेरे जूते और मोजे रख दो। अगर इसकी पीठ से मेरे जूते या मोजे नीचे गिरे तो इसके इन मस्त चूतड़ों पर 100 बेंत और लगाए जाएंगे।

शिवानी ने गौरव के दोनों जूते मोजे हिना की पीठ पर रख दिये

गौरव ने हंसते हुए उसके नितंबों पर एक हंटर मारा और बोला : चल मेरी घोड़ी मेरे कमरे में चल

हिना का सारा ध्यान इस बात पर था कि उसकी पीठ पर से गौरव के जूते मोजे न गिर जाएं। इस चक्कर मे वह अपनी इस हालत से पूरी तरह बेख़बर थी कि वह इस समय पूरी तरह निर्वस्त्र होकर खुली छत में अपने चारों हाथ पैरों के बल एक जानवर की तरह गौरव के कमरे की तरफ जा रही थी

काफी मशक्कत करने के बाद वह बिना जूते मोजे गिराए गौरव के कमरे में आ गई।

गौरव ने अब शिवानी को उसके कमरे में यह कहते हुए भेज दिया : अब इस लौंडिया को मैं खुद ट्रेनिंग दूँगा

गौरव हिना के पीछे पीछे अपने कमरे में घुसा और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करता हुआ उससे बोला : अब मैं कुछ देर सोफे पर बैठकर आराम करूंगा। तू इसी तरह घोड़ी बनी मेरे सामने खड़ी रह।

गौरव ने अपने जूते मोजे उसकी पीठ से अब हटा लिए थे

शेष अगले भाग में
 
गौरव सोफे पर बैठा बैठा कुछ देर तक हिना के मस्त सुडौल नितम्बों पर अपने हाथ फेर फेर कर उन्हें थपथपाता रहा

हिना अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों के बल घोड़ी बने बने काफी थक चुकी थी और बार बार यह कह रही थी : सर मैं बहुत थक गयी हूँ...मुझे अब और घोड़ी मत बनाओ...मैं वह सब करूंगी जो आप मुझे हुक्म दोगे लेकिन प्लीज़ अब और नहीं...

गौरव को मालूम था कि लड़कियों को अपने कंट्रोल में करने के लिए उन्हें इस तरह से प्रताड़ित करना बहुत जरूरी है, इसलिए वह बार बार उसे हड़काते हुए यही कह रहा था : जब तक मैं तुम्हे उठने की परमिशन नहीं दूँ, तब तक तुम्हे इसी तरह घोड़ी बने रहना है

गौरव ने अब सोफे से खड़े होते हुए अपने सारे कपडे उतार फेंके और बिल्कुल नंगा हो गया -सारे कपडे उतारने के बाद गौरव बिस्तर पर जाकर सीधा होकर लेट गया और लेटे लेटे ही हिना से बोला : आ जा अब उठकर बिस्तर पर आ जा और मेरी सेवा कर

हिना एकदम उठकर खड़ी हो गयी और बिस्तर पर पहुँच गयी जहां उसने पहली बार गौरव को पूरी तरह निर्वस्त्र अवस्था में देखा

गौरव : चलो अब तुम अपनी जीभ और होंठों का इस्तेमाल करते हुए मेरे लण्ड के ऊपरी हिस्से को, अंडकोषों को और उसके आसपास की जगह की चूमा चाटी शुरू करो

हिना अब गौरव की टांगों के बीच अपने चेहरे को उस जगह ले गयी जहां गौरव का लण्ड एकदम तनकर खड़ा हुआ था -अपनी जीभ से उसने उसके लण्ड पर फिराना शुरू कर दिया.

गौरव बोला : सब जगह जीभ फिराओ -आसपास के सारा हिस्सा अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ करो

गौरव के लण्ड के नीचे के अंडकोषों पर भी हिना ने अपनी जीभ फिरानी शुरू कर दी लेकिन उसके मुंह का टेस्ट एकदम ख़राब सा हो गया क्योंकि वहां गौरव के बालों में से बहुत ज्यादा अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी -उसने अपने चेहरे को वहां से हटते हुए गौरव से कहा : सर यहां तो बहुत ज्यादा दुर्गन्ध आ रही है -पहले आप वाशरूम जाकर इसे पानी से धो लें फिर मैं यहां भी चूमा चाटी कर दूंगी

गौरव ने अपने पास रखा हाउ हंटर उठाकर उसे जोर से हिना के बदन पर मारते हुए कहा : यह सब नखरे और बहाने अब नहीं चलेंगे -सब कुछ तुझे अपने होंठों और जीभ से ही साफ़ करना है -जब तक यहाँ से दुर्गन्ध आनी एकदम ख़त्म न हो जाए, तब तक तुझे इसी तरह चूमते चाटते रहना है -चल शुरू हो जा

हिना का अब पूरा चेहरा उसकी जांघों के बीच में बार बार रगड़ खा रहा था -गौरव को तो कोई रोकने वाला नहीं था और वह एकदम निरंकुश होकर उससे कह रहा था : मेरी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर भी अपनी जीभ फिरा फिराकर वहां साफ़ करो - उसकी जाँघों के अंदरूनी भाग को चाटने के लिए हिना को और अधिक अपने चेहरे को झुकना पड़ा जिसकी वजह से उसके मस्त मस्त मम्मे अब उसके लण्ड से टकराकर उसके लण्ड के साइज को और अधिक बढ़ा रहे थे

गौरव अब हिना से पूछने लगा : तुमने कभी परवेज़ की भी इस तरह से सेवा की है ?

हिना : नहीं सर

गौरव : फिर मेरी क्यों कर रही हो ?

हिना : सर आपसे मुझे बहुत डर लग रहा है- आप बात बात में बहुत सख्त सजा दे रहे हो

गौरव (मुस्कुराते हुए) : मतलब जब तक तुम्हे डराया नहीं जाएगा तुम अपने बदन पर किसी को हाथ भी नहीं लगाने दोगी चाहे वह शख्स तुम्हारा पति ही क्यों न हो

हिना : जी सर , डर के मारे तो सब कुछ करना पड़ता है

गौरव : तो तुम यह चाहती हो कि परवेज़ भी तुम्हारे साथ वही सब कुछ करे जो मैं कर रहा हूँ ?

हिना कुछ नही बोली तो गौरव ने फिर से एक जोर का हंटर उसके बदन पर लगाया और बोला : जब तक मैं तुमसे सवाल कर रहा हूँ, जबाब देती रहो वरना तुम्हारे इस खूबसूरत बदन पर हंटर लगते रहेंगे

हिना : जी सर आप ठीक कह रहे हैं

गौरव : साफ़ साफ़ बोल -गोलमोल बात मत कर

हिना : परवेज भी मेरे साथ अगर वही सब करेंगे जो आप कर रहे हैं तो मुझे मजबूरन उनकी भी हरबात और हर हुक्म मानना पड़ेगा

गौरव : वैरी गुड़- अब ऐसा कर यहां बिस्तर पर अपनी टाँगे फैलाकर सीधी होकर लेट जा -अब तेरी चुदाई शुरू की जाएगी

हिना बिस्तर पर गौरव की बगल में ही लेट गयी और अपने टांगों को थोड़ा सा फैला लिया

गौरव ने अब अपने बदन को हिना के बदन के नीचे दबाते हुए अपने लण्ड को उसकी गीली हो रही चूत के अंदर दाल दिया और उसकी जमकर चुदाई करने लगा. उसके सीने के नीचे हिना के मखमली मम्मे दबे हुए थे और वह अपने चेहरे को हिना के गोरे चेहरे पर रगड़ते हुए उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में लेकर चूस रहा था

काफी देर तक हिना की मस्त जवानी को रौंदने के बाद गौरव अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच गया और अपने लण्ड की पिचकारी उसकी चूत के अंदर छोड़ दी. हिना के मुंह से भी एक हर्ष मिश्रित आवाज़ निकल गयी जिसका मतलब था कि वह भी अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच गयी थी.

इसके बाद गौरव ने अपने लण्ड को बाहर निकाला और उसे लेकर वह हिना के मस्त मस्त मम्मों पर बैठ गया और उसके होंठों पर अपने वीर्य से साणे लण्ड को रखते हुए बोला : चल इसे अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ कर

हिना अपनी जीभ को उसके लण्ड के चारों तरफ गोल गोल घुमाकर उसे साफ़ करने लगी -जब लण्ड पूरी तरह साफ़ हो गया तो गौरव की हिम्मत और बढ़ गयी. उसने आगे बढ़कर अपने नितम्बों को हिना के चेहरे के ऊपर ले जाकर उसके मुंह पर टिका दिया और उससे बोला : अब मेरे नितम्बों की चूमा चाटी शुरू करो

हिना को इस की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी. वह कहने लगी : नहीं सर, यह तो बहुत गन्दा काम है-मुझसे नहीं होगा -इस जगह पर मैं चूमा चाटी कैसे कर सकती हूँ -प्लीज़ सर मुझे इतना ज़लील मत कीजिये

गौरव : अगर किसी और सख्त सजा से बचना चाहती है तो मेरी हर बात को एक बार में ही मानने की आदत दाल ले रंडी वरना तुझे बहुत पछताना पड़ेगा-चल अब शुरू हो जा और चूमा चाटी शुरू कर दे

बेबसी की मारी हिना ने अपने होंठों और जीभ का इस्तेमाल करते हुए वही सब कुछ किया जो गौरव चाहता था

अपनी पूरी तसल्ली करवाने के बाद गौरव बिस्तर पर लेट गया और हिना से बोला : मेरे पूरी बदन पर अपने हाथ फिरा फिराकर तब तक मालिश करती रह, जब तक मुझे नींद न आ जाए. जब मुझे नींद आ जाए, तब तू भी यहीं मेरे पास सो जाना

शेष अगले भाग में
 
हिना को ट्रेनिंग देने के बहाने उसका यौन शोषण करते करते 3 दिन कब निकल गए किसी को पता भी नहीं चला -इस दौरान अलग अलग तरह से शिवानी और गौरव ने हिना को बुरी तरह पेला और उसे एकदम पालतू जानवर की तरह बना दिया था और वह उन दोनों की हर बात को एक बार में ही मानने लगी थी

चौथे दिन सुबह 11 बजे जब परवेज़ हिना को वापस लेने गौरव के पास आया तो हिना उस समय शिवानी के कमरे में उसकी सेवा कर रही थी.

गौरव परवेज को अपने कमरे में ले आया और उससे बोला : मैंने अपने वादे के मुताबिक तेरी वाइफ को एकदम बढ़िया ट्रेनिंग दे दी है. लेकिन पांच मिनट की ट्रेनिंग तुझे भी देनी जरूरी है-जिसके बिना पिछले तीन दिनों से हिना को दी गयी ट्रेनिंग का मज़ा और फायदा तुझे पूरी तरह नहीं मिल पायेगा

परवेज़ : भाई ,यह तो बहुत बढ़िया बात है- तू मुझे पांच मिनट क्या पचास मिनट की ट्रेनिंग दे दे तो वह भी चलेगा

गौरव : देख अब जो कुछ भी मैं तुझसे कहने जा रहा हूँ-उसे बहुत ध्यान से सुन क्योंकि जो मैं कहने जा रहा हूँ, उसी में इस ट्रेनिंग की सफलता का सीक्रेट छिपा हुआ है

परवेज़ ध्यान से गौरव की बात सुनने लगा

गौरव ने बोलना शुरू किया : हर औरत शादी से पहले या बाद में यही चाहती है कि उसका मर्द चाहे वह बॉय फ्रेंड हो या फिर पति हो, उसे अपने पूरे कंट्रल और रौब दाब में रखे -इसका मतलब यही है कि अपनी गर्ल फ्रेंड या पत्नी को कुछ भी कहते समय मर्द की आवाज़ में काफी रौब और आवाज़ कड़क होनी चाहिए. उसे मर्द की आवाज़ सुनकर अपनी टांगों के बीच अगर गीलापन महसूस नहीं हो रहा है तो समझो कि तुम्हारी बात में अभी वह रौबीला पन नहीं आया है -कुल मिलाकर तुम्हारी औरत तुम्हारे इशारे पर नाचनी चाहियें-यह सुनिश्चित करना मर्द का काम है कि उसकी वाइफ या उसकी गर्ल फ्रेंड उसकी हर बात माने और एक बार में ही माने -ऐसा नहीं होता है तो सारी गलती मर्द की ही होती है-औरत की नहीं-औरत तो पैदा ही मर्द के इशारों पर नाचने के लिए हुई है-अगर मर्द उसे अपने इशारे पर नहीं नचवा पा रहा है, तो यह उसकी गलती है, औरत की नहीं

गौरव अपनी बात ख़त्म करके रुक गया और बोला : चल अब शिवानी के कमरे में चलते हैं-वहां हिना भी बैठी हुई है-हम लोग चाय नाश्ता भी साथ साथ कर लेंगे और तुझे मैं तेरे सामने यह दिखा भी दूंगा कि हिना की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है -अगर फिर भी कभी तुझे मेरी जरूरत पड़े, तो मैं तो हमेशा ही तेरे लिए हाज़िर हूँ.

दोनों उठकर अब शिवानी के कमरे में आ गए. वहां टेबल पर चाय नाश्ता पहले से ही रखा हुआ था. सब लोगों ने फटाफट चाय नाश्ता कर लिया.

गौरव और परवेज़ टी शर्ट और जींस पहने हुए सोफे पर पास पास बैठे हुए थे.

उनके सामने वाली साइड पर दो कुर्सियों पर हिना और शिवानी बैठी हुई थीं

शिवानी ने साड़ी पहनी हुई थी और हिना जो कपडे यहां पहनकर आयी थी, वही पहनकर बैठी हुई थी- उसने स्लीवलेस टॉप और पूरी टांगों को ढकने वाली लम्बी सी स्कर्ट पहनी हुई थी

कुछ देर तक कमरे में खामोशी छाई रही और सब एक दूसरे की तरफ देखकर आगे होने वाली घटनाओं के प्रति आशंकित से लग रहे थे. हिना और शिवानी कुछ ज्यादा ही बेचैन थी -शिवानी इसलिए बेचैन थी कि अब हिना के जाने के बाद गौरव का सारा फोकस उस पर ही आने वाला था और अब तक जिस तरह से हिना को पेला जा रहा था, वही सब कुछ उसके साथ शुरू होने वाला था

हिना इसलिए बेचैन थी कि उसे यह नहीं मालूम था कि अब परवेज़ के साथ घर वापस जाने से पहले और बाद में उसके साथ क्या-कुछ होने वाला है

अचानक ही गौरव ने हिना की तरफ देखकर कड़क आवाज़ में उसे उंगली के इशारे से अपनी तरफ बुलाते हुए कहा : इधर मेरे नज़दीक आकर आकर खड़ी हो जाओ

हिना बिना किसी देरी के एकदम अपनी कुर्सी से उठकर खड़ी हो गयी और धीरे धीरे चलते हुए गौरव के नज़दीक आकर खड़ी हो गयी

गौरव : अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ

हिना ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए

गौरव : नीचे फर्श पर बैठ जाओ

हिना हाथ ऊपर किये किये ही नीचे जमीन पर बैठ गयी

गौरव : फिर खड़ी हो जाओ

हिना फिर से खड़ी हो गयी

गौरव : अब थोड़ी अपनी टांगें खोलो

हिना ने अपनी टांगों को थोड़ा और खोल दिया

गौरव : अब अपने कान पकड़ो और गिनती बोलते हुए दस बार उठक बैठक लगाकर दिखाओं

हिना ने कान पकड़ लिए और गिनती बोल बोल कर उठक बैठक लगाने लगी

गौरव ने परवेज़ की तरफ देखा. वह एकदम सकते में आ गया था और उसकी जींस के अंदर बहुत बड़ा टेंट अब तक बन चुका था जिसे वह अपने हाथ से एडजस्ट करने की असफल कोशिश कर रहा था

जब हिना उठक बैठक लगा चुकी तो गौरव उससे बोला : नीचे बैठो और परवेज़ के जूते उतारो

हिना नीचे परवेज़ के पैरों के पास बैठ गयी और उसके जूतों के फीते खोलने लगी

परवेज़ को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब सपना था या फिर हकीकत में हो रहा था

हिना जब परवेज़ के दोनों जूते उतार चुकी तो गौरव उससे बोला : अब मोज़े भी उतारो

हिना ने मोज़े भी उतार दिए

गौरव : अब इन पैरों को अपने हाथों में एक एक करके उठाओ और इनकी चूमा चाटी करो

गौरव का अपना लण्ड भी जींस के अंदर कड़क होकर खड़ा हो चुका था लेकिन वह उसे एडजस्ट करने की बजाये उस पर अपना हाथ फिराए जा रहा था

परवेज़ को तो इतना मज़ा अपनी पूरी जिंदगी में नहीं आया था जितना उसे आज पांच मिनटों केअंदर मिल चुका था

जब काफी देर तक हिना परवेज़ के दोनों पैरों को आगे पीछे से चूम-चाट चुकी तो गौरव उससे बोला : चलो अब खड़ी अपने हाथ ऊपर करके परवेज़ के सामने खड़ी रहो

कुछ देर तक हिना इसी तरह अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर परवेज़ के सामने खड़ी रही-कुछ देर बाद परवेज बोला : ठीक है गौरव भाई. तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया. अब हम लोग अभी चलते हैं -फिर जब अगली बार आएंगे तो फिर से मुलाकात होगी. हम लोगों को 4 बजे शहर निकलना है और अभी घर जाकर पैकिंग भी करनी है

सब लोग नीचे की तरफ चलने लगे लेकिन परवेज़ यह देखकर हैरान था कि हिना अभी भी अपने हाथ ऊपर उठाकर चल रही थी. उसने गौरव के कान में पूछा : यार यह अपने हाथ नीचे क्यों नहीं कर रही है , नीचे अंकल आंटी देखेंगे तो क्या कहेंगे ?

गौरव : जब तक तुम या मैं इसे हाथ नीचे करने के लिए नहीं कहेंगे, यह अपने हाथ नीचे नहीं करेगी-यही तो मेरी ट्रेनिंग का जलवा है भाई !

अब परवेज़ ने कहा : अपने हाथ नीचे करो हिना

हिना ने तुरंत अपने हाथ नीचे कर लिए

परवेज़ ने "टेस्ट" करने के लिए फिर से बोला : फिर से अपने हाथ ऊपर उठाओ

परवेज़ ने देखा कि उसने फिर से अपने हाथ ऊपर उठा लिए थे -अब तो उसका लण्ड उसकी जींस ने एकदम बेकाबू हो गया था

परवेज़ फिर से बोला : ठीक है, अपने हाथ नीचे कर लो

हिना ने अपने हाथ फिर से नीचे कर लिए

हिना को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में देखकर परवेज़ ने एक बार फिर से अपने खड़े हो रहे लण्ड को ठीक से एडजस्ट किया और फिर वह गौरव को शुक्रिया कहता हुआ हिना को लेकर वहां से रवाना हो गया

गौरव और शिवानी उन दोनों को वहां से जाते हुए देखने लगे

गौरव और शिवानी अब घर में वापस आकर अपने अपने कमरे में चले गए

शेष अगले भाग में ......
 
PART-26

शादी के बाद आज गौरव और रवीना की सुहागरात थी

गौरव सब कुछ एक साज़िश के तहत कर रहा था -रवीना हालॉंकि शिवानी से भी ज्यादा सुन्दर थी लेकिन गौरव ने रवीना से शादी के लिए जल्दबाज़ी में हाँ इसलिए ही कर दी थी ताकि शिवानी पर उसका कंट्रोल और दबदबा आगे भी बना रहे क्योंकि जब से शिवानी पुनीत की बहन के शादी में गयी थी, तभी से गौरव को अपनी पोल खुलने का डर सताये जा रहा था.

गौरव शिवानी की तरह अपनी वाइफ रवीना को भी पहले ही दिन से अपनी पूरे कंट्रोल और रौब दाब में रखना चाहता था ताकि उसका पूरा दबदबा हर समय बना रहे और शिवानी की ही तरह रवीना भी उसकी सेक्स स्लेव बनकर रह जाए

रवीना को सुहागरात के लिए शिवानी ने ही तैयार कर दिया था और वह उसे रात दस बजे गौरव के कमरे में छोड़ गयी.

कुछ ही देर में गौरव अपनी कमरे में आया तो उसने देखा कि सजी धजी रवीना बिस्तर पर अपनी साड़ी का घूंघट किये बैठी थी

गौरव कमरे में घुसा तो रवीना की तरफ देखता हुआ बिस्तर के सामने पड़े हुए सोफे पर बैठ गया और वहीं से बिस्तर पर घूंघट में लिपटी रवीना को देखने लगा

कुछ देर बाद ही गौरव रबीना की तरफ देखते हुए बोला : रवीना बिस्तर पर से उठकर मेरे पास आओ -मैं तुम्हे बताऊंगा कि सुहागरात का क्या मतलब होता है और किसी भी वाइफ को सुहागरात और उसके बाद क्या करना होता है

रवीना शर्माती हुई और अपनी साड़ी और उसका घूंघट संभालती हुई बिस्तर पर से उठी और गौरव के पास आकर खड़ी हो गयी

गौरव : चलो अपनी साड़ी उतारो

रवीना ने अपनी साड़ी उतार कर बिस्तर पर ही एक तरफ रख दी

अब रवीना ब्लाउज़ और पेटीकोट में खड़ी थी और उसका ज्यादातर बदन गौरव को दिख रहा था- लाल रंग की ब्लाउज़ में कैद उसके मम्मे काफी मस्त लग रहे थे -ब्लाउज़ और पेटीकोट के बीच उसका पेट एकदम चिकना और समतल था और उसकी नाभि साफ़ नज़र आ रही थी-कुल मिलाकर वह एक मस्त माल थी

गौरव ने कुछ देर उसे ऐसे ही देखते रहने के बाद कहा : अब अपनी बाकी के कपडे भी उतारो और अपना नंगा बदन मुझे दिखाओ -तुम्हारे बदन को चेक करने के बाद ही मैं इस बात का फैसला करूंगा कि तुम मेरे लायक हो भी या नहीं

रवीना को शर्म तो बहुत आ रही थी-उसने आज से पहले कभी किसी के सामने अपनी कपडे इस तरह नहीं उतारे थे-गौरव उसका पति था लेकिन अभी तक वह एक अनजान मर्द ही था -रवीना ने कुछ सोचा और फिर झिझकते हुए अपनी ब्लाउज़ उतारनी शुरू कर दी

ब्लाउज़ उतारने के बाद, रवीना रुकी तो गौरव बोला : रुको मत ! सब कुछ उतारो और एकदम नंगी हो जाओ

यह सब कहते कहते गौरव अपनी जींस में कैद खड़े लण्ड पर भी लगातार हाथ फिराता जा रहा था -रवीना के खूबसूरत बदन को वह भी पहली बार ही देखने वाला था-इसलिए वह बहुत उत्तेजित और उत्साहित था लेकिन वह उसे पूरी तरह ज़लील करके पहले ही दिन से अपने कंट्रोल में लेकर उस पर अपना दबदबा कायम करना चाहता था

अब रवीना ने अपना पेटीकोट भी उतार दिया और उसके हाथ अब अपने ब्रा और पैंटी को अपनी बदन से अलग करने में व्यस्त थे-कुछ ही देर में वह एकदम निर्वस्त्र अवस्था में गौरव के सामने खड़ी थी और अपने एक हाथ से अपनी मम्मों को और दूसरे हाथ से अपने चिकनी चूत को ढंकने की कोशिश कर रही थी लेकिन गौरव ने उसे ऐसा करने से रोकते हुए कहा : हाथ ऊपर उठाओ और पीछे घूमकर दिखाओ

इस बीच गौरव ने अपने टी शर्ट और जींस उतार फेंकी थी और अब वह सोफे पर सिर्फ एक अंडरवियर पहनकर बैठा हुआ था

रवीना गौरव की तरफ देखकर अब एकदम चिल्ला पडी : ऐसा होता है क्या सुहागरात में ? मुझे यह सब नहीं करना -मैं आपकी वाइफ हूँ ना कि कोई खरीदी हुई गुलाम जो मुझसे इस तरह बात कर रहे हो आप ?

गौरव : अभी तुम्हे सब पता चल जाएगा कि तुम कौन हो-तुमने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया है, उसके लिए तुम्हे अब सजा मिलेगी -आओ मेरी टांगों पर उल्टी होकर लेट जाओ

रवीना : मैं तुम्हारी वाइफ हूँ -कोई स्कूल में पढ़ने वाली पांचवी क्लास की स्टूडेंट नहीं हूँ जो तुम मुझे सजा देने की बात कर रहे हो- मुझे यह सब पसंद नहीं है -मुझे यहां से जाना है

गौरव ( हँसता हुआ ) : इसी बात की ट्रेनिंग तो सुहाग रात वाले दिन दी जाती है ताकि वाइफ अपनी जगह को हमेशा के लिए पहचान ले और यह समझ जाए कि आज से वह अपनी पति की एक सेक्स स्लेव से ज्यादा कुछ नहीं है-इसलिए अब तुम्हे वह सब करना होगा जो मैं तुमसे कहूंगा-मैं अगर कहूँ कि रवीना खड़ी हो जा तो तुम्हे खड़ा होना पडेगा और मैं अगर कहूँ कि रवीना बैठ जा तो तुम्हे बैठना होगा-मेरा कहना नहीं माना तो उसके लिए तुम्हे सख्त सजा मिलेगी -अब जल्दी से मेरी टांगों पर आकर उल्टी लेट जाओ और आज की पहली सजा भुगतने के लिए तैयार हो जाओ- नहीं तो मुझे तुम्हारी सजा बढ़ानी पड़ेगी

रवीना अब डर के मारे उसकी टांगों पर उल्टी होकर लेटने की कोशिश करने लगी -गौरव ने उसकी चिकने योनि प्रदेश को आपनी दायीं जांघ पर टिका दिया और उसके मस्त मस्त मम्मों को आपनी बायीं जाँघों पर रख दिया-उसके मक्खन जैसे मम्मे जैसे ही उसकी खुरदरी जांघों पर टिके, उसके लण्ड का साइज और भी अधिक बढ़ गया. रवीना का चिकना पेट उसके खड़े लण्ड पर टिका हुआ था और उसके चेहरे को उसने अपनी बाएं हाथ में संभाल रखा था -कुछ देर तक गौरव अपनी दाएं हाथ को उसके मस्त मस्त नितम्बों को दबाता सहलाता और थपथपाता रहा और फिर उससे बोला : अब तुम्हारी सजा शुरू होगी. तुम्हारे इन मस्त नितम्बों पर मैं इस छड़ी से 50 स्ट्रोक लगाऊंगा -अगली बार मेरी बात एक बार में नहीं मानी तो 100 स्ट्रोक लगाए जाएंगे

यह कहकर गौरव ने अपनी दाएं हाथ में एक छड़ी पकड़कर उसे रवीना के चिकने और मस्त नितम्बों पर मारना शुरू कर दिया : इन्हे गिनती भी रहो- जिस स्ट्रोक पर गिनती नहीं बोलोगी, उसे काउंट नहीं किया जाएगा

अब गौरव रवीना के लैप डांस का मज़ा ले रहा था-हर स्ट्रोक पर रवीना जोर से चिल्लाते हुए अपनी बदन को उछालकर जम्प मारती और हर बार रवीना का चिकना समतल पेट उसके लण्ड पर आकर जोर से टकराता

40 स्ट्रोक के बाद ही रवीना जोर जोर से कहने लगी : प्लीज़ मुझे और मत मारो..मुझे बहुत दर्द हो रहा है..मैंने पहली बार ही तो आपकी बात नहीं मानी है...पहली बार में इतनी सख्त सजा मत दो..प्लीज़ अब छोड़ दो...आज से आपकी सब बातें मैं पहली बार में ही मानूंगी

गौरव तो रवीना के मुंह से यही सब सुनना चाहता था -अब उसने उसे फिर से अपने सामने खड़ा कर दिया और बोला : चल अब अपने कान पकड़कर 50 उठक बैठक लगाना शुरू कर और मेरी बात को गौर से सुन

रवीना ने अपनी कान पकड़कर उठक बैठक लगानी शुरू कर दीं

गौरव ने अब बोलना शुरू कर दिया : आज के बाद से तू मेरी सेक्स स्लेव है- मैं जब चाहूँ, जैसे चाहूँ और जहां चाहूँ , तुझे पूरी तरह नंगा करके तुझे आगे पीछे, ऊपर नीचे कहीं से भी तेरी चुदाई कर सकता हूँ- अगर मैं कहूँ कि खड़ी हो जा तो तुझे खड़ा होना पडेगा और अगर मैं तुझे कहूँ कि बैठ जा तो तुझे बैठना पडेगा, अगर तुझे मुर्गा बनने के लिए कहूँ तो तुझे मुर्गा बनना पडेगा और अगर तुझे घोड़ी बनने के लिए कहा जाए तो तुझे घोड़ी बनना पडेगा-अगर मैं तुम्हे अपना पेशाब भी पिलाऊँ तो तुम्हे खुशी खुशी पीना पडेगा -बोलो तुम यह सब करने के लिए राजी हो या फिर अभी तुम्हारे पिछवाड़े को और गर्म किया जाए ?

रवीना का पिछवाड़ा अभी तक दर्द कर रहा था, उसने और सजा न मिल जाए, इस डर से फौरन राजी होते हुए कह दिया : मुझे आपकी सारी बातें मंजूर हैं-बस मुझे और सजा मत दीजिये प्लीज़

गौरव अब हँसते हुए बोला : अब बनी न तू मेरी परफेक्ट स्लेव. चल अब जरा घोड़ी बन कर दिखा

रवीना : घोड़ी कैसे बनते हैं-मुझे तो बनना नहीं आता है

गौरव : कोई बात नहीं. मैं सिखा दूंगा

यह कहकर गौरव ने उसे उसके दोनों हाथों और पैरों के बल पर फर्श पर घोड़ी बना दिया और उसके पिछवाड़े को अपनी तरफ करते हुए उसके नितम्बों पर हाथ फिराते हुए बोला : चल अब जरा अपनी टाँगे चौड़ी करके खड़ी हो

रवीना ने घोड़ी बने बने अपनी टाँगे फैला दीं और गौरव ने अपना खड़ा लण्ड उसके पिछवाड़े में घुसेड़कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.

कुछ देर तक उसकी पीछे से चुदाई करने के बाद गौरव ने अपना लण्ड बाहर निकाला और रवीना से बोला : अब इधर मेरे सामने आकर अपने घुटनों के बल बैठ जा और मेरे इस लण्ड को अपनी जीभ से साफ़ कर

रवीना गौरव की टांगों के बीच अपनी घुटनों के बल बैठ गयी और गौरव ने अपना गीला लण्ड उसके मुंह में डाल कर उसे आदेश दिया : इसे अपने जीभ से चाट चाट कर साफ़ कर -जब तक मैं न कहूँ यह लण्ड तेरे मुंह के अंदर रहना चाहिए और तेरी जीभ इसके इर्द गिर्द गोल गोल घूमती रहनी चाहिए

गौरव अब आराम से सोफे पर रिलैक्स होकर बैठ गया और रवीना के मुख मैथुन का मज़ा लेने लगा -उसे इस बात की खुशी थी कि सुहाग रात वाले दिन ही उसने रवीना को अपनी पूरी कंट्रोल में ले लिया था और अब उसके पास अपना लण्ड घुसेड़ने के लिए शिवानी और रवीना दो दो लडकियां मौजूद थीं.

कुछ देर में गौरव ने अपनी लण्ड की पिचकारी रवीना के मुंह में छोड़ते हुए कहा : मेरा सारा जूस पी जा

रवीना उसके लण्ड से निकलने वाले सारे जूस को पी गयी

पूरी तसल्ली से रवीना का मुख मैथुन करने के बाद गौरव ने रवीना से कहा : अब जाकर बिस्तर पर सीधी होकर लेटो-अब तुम्हारी फाइनल चुदाई की जाएगी

रवीना बिस्तर पर जाकर लेट गयी- गौरव भी बिस्तर पर आ गया और उसके बदन पर अपनी बदन को डालते हुए उसकी चूत में अपना लण्ड डालकर उसकी चुदाई करने लगा-रवीना के सीने की मस्त गोलाईयाँ उसके सीने में हलचल मचा रही थीं और वह उसके चेहरे गर्दन और होंठों को बुरी तरह चूमे जा रहा था

कुछ समय बाद गौरव को क्लाइमेक्स आ गया और उसने अपनी लण्ड की पिचकारी से उसकी चूत को भर दिया. अपना लण्ड बाहर निकलने के बाद वह बिस्तर पर सीधा होकर लेट गया और रवीना से बोला : चल उठ और मेरे सने हुए लण्ड को अपनी मुंह में लेकर इसे तब तक साफ़ करती रह, जब तक मुझे नींद ना आ जाए. जब मुझे नींद आ जाये, तब तू भी मेरे पास लेटकर सो जाना -और सुन-हर रोज तुझे यही सब करना है जो आज कर रही है

यह कहकर गौरव बिस्तर पर आराम से लेट गया और उसके लण्ड को रवीना अपनी मुंह में लेकर उसके सोने का इंतज़ार करने लगी

शेष अगले भाग में ...
 
PART-27

होली का त्यौहार दो दिन बाद ही था और सब जगह होली की तैयारियां जोरो शोर से चल रही थीं.

गाँव में होली कुछ ख़ास ढंग से ही मनाई जाती थी- रवीना की यह पहली होली थी

होली से एक दिन पहले ही जब गौरव गाँव में किसी काम से बाजार गया था तो उसके दोस्तों ने उससे कहा भी था : भाई इस बार तो भाभी के साथ होली खेली जाएगी

गौरव ने अमित,मोहित और रोहित की और देखकर कह दिया : हाँ भाई, इस बार तो रवीना के साथ मेरी पहली होली है

अमित, रोहित और मोहित : कल सुबह हम सब भी अपनी रवीना भाभी के साथ पहली होली खेलने आएंगे

गौरव उन लोगों के चेहरे की शरारती मुस्कान को देखकर ही समझ गया कि उन सबके इरादे नेक नहीं हैं और वे सब जरूर कुछ बदमाशी करने के मूड में हैं

गौरव ने उन सबको टालने के लिए कह दिया : देखो यार आजकल बड़े भैया भी घर पर ही होते हैं-उनका कमरा छत पर मेरे कमरे के पास ही होने की वजह से हम लोग बहुत ज्यादा खुलकर कुछ भी नहीं कर पाते हैं -ऐसा करते हैं-कल तुम सब दोपहर का लंच हमारे साथ करने आ जाओ

अमित,रोहित और मोहित को लंच वगैरा में कोई दिलचस्पी नहीं थी -उन्होंने कहा : यार लंच तो हम कभी भी कर लेंगे -कल तो होली खेलने आएंगे- और तेरे भैया को तो कल सुबह पंचायत सभा में भाग लेने के लिए जाना है-इसका मतलब सुबह आठ बजे से ग्यारह बजे तक तो तुम और रवीना भाभी घर पर अकेले ही होंगे

गौरव को यह याद ही नहीं था कि हर होली को ग्राम पंचायत के होली मिलान समारोह और सभा में भैया को जाना होता था

गौरव ने कुछ हाँ या ना नहीं कहा और बाज़ार से वापस घर आ गया और कल होने वाली होली के बारे से सोचता हुआ रवीना से बोला : कल होली है, कल सुबह मेरे कुछ दोस्त वगैरा भी होली खेलने के लिए घर पर आ सकते हैं

रवीना बिना कुछ बोले गौरव की बात सुनती रही-इतनी देर में शिवानी भी अचानक गौरव के कमरे में आ गयी और रवीना से बोली : आज रात को होलिका दहन के समय की जाने वाली पूजा की तैयारी करनी है-तुम भी नीचे मेरे साथ ही आ जाओ

गौरव : भैया कहाँ हैं भाभी ?

शिवानी : वह होली के लिए सामान लेने बाज़ार गए हैं

शिवानी रवीना को नीचे लेकर चली गयी तो गौरव पुनीत के बारे में सोचने लगा-जब से शिवानी के मौसेरे भाई से पुनीत की बहन की शादी हुई है, पुनीत उससे कुछ दूर दूर ही रहने लगा है-कल भी अमित,रोहित और मोहित के साथ वह मौजूद नहीं था जबकि यह चारों अक्सर एक साथ ही घूमते फिरते रहते थे.

गौरव को फिलहाल इस बात की चिंता हो रही थी कि कल कहीं यह तीनों आकर कुछ ज्यादा बखेड़ा न खड़ा कर दें

यह सोचते सोचते उसने देखा कि शिवानी और रवीना दुबारा से ऊपर आ रही हैं

दोनों जैसे ही उसके पास कमरे में आईं, गौरव ने शिवानी से भी बोल दिया : कल सुबह मेरे दोस्त अमित,रोहित और मोहित यहां होली खेलने आ रहे हैं

शिवानी को मानो करंट लगा. वह जोर से बोली : क्या..... ?? वे सब अव्वल दर्ज़े के बदमाश यहां क्या करने आ रहे हैं ?

गौरव शिवानी की इस बात पर एकदम सकते में आ गया और उसके गालों पर जोरदार थप्पड़ लगाते हुए बोला : लगता है तू अपनी औकात भूल गयी है-मेरे दोस्तों को अव्वल दर्ज़े का बदमाश बता रही है साली , कहते हुए उसने एक थप्पड़ शिवानी के और जड़ दिया

रवीना को काटो तो खून नहीं -वह यह क्या देख रही थी ?

उसकी बड़ी बहन और उसके पति की बड़ी भाभी शिवानी को उसका छोटा देवर गाली गलौज करते हुए थप्पड़ लगा रहा था

रवीना ने गौरव को रोकने की कोशिश करते हुए कहा : यह आप क्या कर रहे हैं-यह आपकी बड़ी भाभी हैं -आपने इन पर हाथ उठा दिया ?

गौरव : तुम चुप रहो और एक तरफ खड़ी रहो-अब मैं इसे इसकी औकात याद दिलाता हूँ

यह कहकर गौरव ने अपनी जींस में से लेदर की बेल्ट खींचकर बाहर निकाली और उसे जोर से शिवानी के बदन पर मारता हुआ बोला : चल रंडी अपने सारे कपडे उतार -तुझे तेरी औकात दिखाता हूँ

शिवानी को यह उम्मीद नहीं थी कि गौरव उसे उसकी छोटी बहन के सामने ही इस तरह ज़लील करना शुरू कर देगा

वह गौरव के हाथ जोड़ते हुए कहने लगी : यह तुम क्या कर रहे हो-कम से कम रवीना का तो ख्याल करो-वह मेरी छोटी बहन है -वह क्या सोचेगी

गौरव (हँसता हुआ) : रवीना को दिखाने के लिए ही यह सब कर रहा हूँ-आखिर मेरी वाइफ को भी तो मालूम पड़े कि तेरी मेरे आगे क्या औकात है-चल जल्दी से नंगी होकर दिखा

शिवानी वैसे तो गौरव के सामने कई बार नंगी हो चुकी थी -लेकिन उसे ज्यादा ज़लालत और शर्म इस बात को लेकर हो रही थी कि उसी छोटी बहन भी वहीं खड़ी थी और उसके सामने उसे नंगा होना पड़ रहा है

गौरव ने एक बेल्ट शिवानी के बदन पर और मारी तो शिवानी ने फटाफट अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए

गौरव जिस तरह से शिवानी से कपडे उतरवा रहा था, उसे देखकर रवीना को बहुत बुरा लग रहा था और शर्म भी आ रही थी लेकिन वह तो खुद ही गौरव से काफी डरी सहमी हुई थी-उसने शर्म और ज़लालत से अपनी ऑंखें बंद करनी चाहीं तो गौरव उससे बोला : अपनी ऑंखें खोलकर अपनी बहन को नंगा होते देख मेरी जान-तेरी बहन का बदन भी काफी मस्त और सेक्सी है

शिवानी अपनी साड़ी उतार चुकी थी और अब वह अपना ब्लाउज़ उतार रही थी-इस बीच गौरव ने रवीना से कहा : दरवाज़े को अंदर से बंद कर दो रवीना

रवीना ने कमरे के दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया

अब तक शिवानी अपने सारे कपडे उतार चुकी थी

गौरव अपने हाथ से अपने जींस में कैद खड़े लण्ड को सहलाता हुआ शिवानी से बोला : चल अब कान पकड़कर 100 उठक बैठक लगा

शिवानी ने कान पकड़कर गिनती बोलते हुए उठक बैठक लगानी शुरू कर दी

गौरव ने अपनी बेल्ट रवीना को पकड़ाते हुए कहा : अगर यह चिकनी बीच में कहीं रुक जाए, गिनती न बोले या तुम्हे लगे कि यह ठीक से उठक बैठक नहीं लगा रही है तो तुम इसके नितम्बों पर एक जोरदार बेल्ट का स्ट्रोक मारकर इसे सजा दोगी -अगर तुमने इसकी हर गलती पर इसके बेल्ट नहीं लगाईं तो मैं उसकी डबल बेल्ट इसे बाद में इकट्ठी मारूंगा -इसलिए इसकी उठक बैठक को ध्यान से देखो और जहां यह गलती करे, बेल्ट का स्ट्रोक इसके मस्त नितम्बों पर लगाओ

रवीना ने डरते हुए बेल्ट गौरव के हाथ से ले ली और अपनी बड़ी बहन को कान पकड़कर उठक बैठक लगाते हुए देखने लगी

शेष अगले भाग में
 
PART-28

शिवानी गिनती बोलते हुए कान पकड़कर उठक बैठक लगाने लगी

गौरव शिवानी के सामने सोफे पर बैठा हुआ अपने लण्ड पर हाथ फिर रहा था और साइड में लेदर बेल्ट लिए रवीना खड़ी थी

शिवानी अभी तक बिना रुके एकदम ठीक तरीके से उठक बैठक लगाए जा रही थी -इसलिए रवीना को ऐसा कोई मौका नहीं मिला जिस पर वह अपनी लेदर बेल्ट का इस्तेमाल उसके नितम्बों पर कर पाती

गौरव (शिवानी से) : टाँगे फैलाकर उठक बैठक लगाओ

शिवानी जब तक कुछ समझकर अपनी टाँगे चौड़ी करके दुबारा से उठक बैठक लगाती, तब तक रवीना ने उसके नितम्बों पर दो लेदर बेल्ट के स्ट्रोक जोर से जड़ दिए थे.

गौरव यही चाहता था. वह रवीना से बोला : वैरी गुड, गलती करे तो ऐसे ही इसका पिछवाड़ा गर्म करती रहो

जब पचास उठक बैठक पूरी हो गयीं तो शिवानी हाथ जोड़ते हुए गिड़गिड़ाने लगी : अब मुझसे नहीं होगा-मैं तो पहले ही बहुत थकी हुई हूँ आज. अब बस करो

इस बीच में रवीना ने फिर से दो बेल्ट स्ट्रोक शिवानी के जड़ दिए थे

गौरव ने रवीना को रोकते हुए शिवानी की तरफ देखते हुए कहा : चल अब घोड़ी बन और अपने दोनों हाथों और पैरों पर चलती हुई मेरी तरफ आकर मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर मुझे खुश कर -ऐसा करने पर तुझे बाकी की 50 उठक बैठक लगाने से छूट मिल जाएगी

रवीना के लिए यह सब कुछ बेहद डरावना और चौंकाने वाला था : उसका पति अपनी भाभी से अपना लण्ड चुसवा रहा था और वह उसका लण्ड चूसने की लिए मजबूर भी थी. ऐसा क्यों ? ऐसे कई सवाल रवीना के दिमाग में आने लगे लेकिन उससे पहले ही गौरव की आवाज़ से उसका ध्यान टूट गया. वह रवीना से कह रहा था : देख यह मेरे लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूस रही है-अब तुम मेरी तरफ देखती रहो, जैसे ही मैं इशारा करूँ, वैसे ही तुमने इसके नितम्बों पर अपनी बेल्ट का स्ट्रोक जोर से मारना है -लौंडियों का पिछवाड़ा गर्म होता रहे तो वे लण्ड को अच्छे से चूसती हैं

गौरव ने अपने लण्ड चूसे जाने के दौरान रवीना को इशारा करके दस बार शिवानी के बेल्ट स्ट्रोक लगवाए -हर बेल्ट स्ट्रोक पर शिवानी उछल उछल कर उसके लण्ड को और बढ़िया ढंग से चूसने लगी.

लण्ड चुसवाने के बाद गौरव ने अपने लण्ड को उसकी जीभ से साफ़ भी करवाया और फिर बोला : अब उठ अपने कपडे पहन कर भाग यहां से. भैया आने वाले होंगे. अपनी औकात हमेशा याद रख और मेरे सामने आगे से तमीज से पेश आ , वरना तुझसे बाहर खुली छत पर नंगा मुजरा करवाऊंगा साली.

शिवानी अपने कपडे पहनकर वहां से जा चुकी थी-रवीना एकदम डरी सहमी सी खड़ी अभी तक यह सोच रही थी की यह सब क्या हो रहा था

गौरव डरी हुई रवीना को देखकर मुस्कराते हुए बोला : तू इतनी क्यों डर रही है चिकनी ? तुझे मैं कुछ थोड़े ही कह रहा हूँ . मेरी बात मानती रहेगी और मुझे खुश रखेगी तो तू बहुत मज़े में रहेगी -वरना तेरे साथ भी वही सब कुछ हो सकता है, जो शिवानी के साथ होता हुआ तू देख चुकी है- अब इधर आ जा और मेरी गोद में बैठ जा

रवीना चुपचाप गौरव की गोद में आकर बैठ गयी

गौरव ने अपने हाथों से उसके बदन को सहलाना दबाना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमते हुए उसके चिकने गालों पर अपने चेहरे को रगड़ने लगा

शेष अगले भाग में
 
Part 29

अगले दिन होली थी। हर तरफ होली का हुड़दंग मचा हुआ था।शिवानी का पति विवेक सुबह सुबह नाश्ता करके होली के अवसर पर आयोजित ग्राम पंचायत की सभा मे भाग लेने के लिए चला गया।

जाने से पहले उसने औपचारिक रूप से रवीना और शिवानी के साथ होली भी खेली।

विवेक हालांकि रवीना को रंग लगाने में संकोच कर रहा था लेकिन जब उसने देखा कि गौरव " होली है होली है " कहकर उसकी पत्नी शिवानी को तबियत से रंग लगा रहा है तो उसने भी रवीना के चेहरे पर ठीक से रंग लगाना शुरू कर दिया। रवीना को यह सब बहुत अजीब लग रहा था क्योंकि उसे पहली बार उसका जेठ उसके चेहरे और गालों पर कसकर रंग लगाने के बहाने इसके गालों पर हाथ फिरा रहा था।

विवेक के जाने के बाद, गौरव ने छत पर स्पीकर लगा कर उस पर भड़काऊ होली के गाने लगे दिए। आसपास की सभी छतों पर भी लोग गाने बजा रहे थे और आपस मे होली खेल रहे थे। उनके दोस्त यार और रिश्तेदार भी छत पर आकर एक दूसरे पर रंग गुलाल लगाकर होली खेल रहे थे।

गौरव, शिवानी और रवीना आसपास की छतों का होली का नज़ारा देख ही रहे थे कि यकायक वहाँ रंगों से लथपथ अमित, रोहित और मोहित आ गए और " होली है होली है" करते हुए गौरव को रंग लगाने लगे। गौरव ने भी उन सबको ठीक से रंग लगाया।

गौरव को रंग लगाने के बाद अमित, रोहित और मोहित एकदम शिवानी की तरफ दौड़ पड़े और उसे पकड़कर उसे रंग लगाने लगे। अमित ने शिवानी को पीछे से पकड़ लिया और उसकी पीठ और गर्दन पर हाथ फिरा फिराकर रंग लगाने लगा। रोहित उसके चेहरे पर रंग लगा रहा था और मोहित रंग लगाने के बहाने उसके मम्मे और चिकने पेट और नाभि प्रदेश पर हाथ फेर रहा था। तीनों ने शिवानी को चारों तरफ से अपनी गिरफ्त में जकड़ा हुआ था और होली खेलने के नाम पर खुली छत पर ही उसके बदन से खिलवाड़ कर रहे थे। शिवानी बेबस थी क्योंकि यह सब गौरव के सामने और उसकी मूक सहमति से ही हो रहा था।

रवीना अभी तक स्तब्ध होकर अपनी बड़ी बहन के साथ होने वाली होली के नाम पर इस जबरदस्ती और बदतमीजी को देखे जा रही थी।

अचानक रवीना ने जो देखा उसे देखकर उसके होश ही उड़ गए। गौरव ने आगे बढ़कर शिवानी की साड़ी उतार दी और बोला : अब खेलो होली इसके साथ, अब आएगा मज़ा।

इस बीच अमित ने रंग से भरी एक बाल्टी शिवानी के ऊपर डाल दिया और अब उसकी ब्लॉउज़ और पेटीकोट भीगकर उसके बदन से चिपक सा गया था। शर्माकर वह कमरे में भगाना चाहती थी लेकिन मोहित ने उसे पकड़कर अपनी बाहों में दबोच लिया और बोला : भागती कहाँ है साली, अभी तो होली शुरू हुई है। मोहित का लण्ड शिवानी के नितंबों की गर्मी महसूस कर रहा था क्योंकि उसने पीछे से शिवानी को अपनी बाहों में कैद किया हुआ था। अमित रोहित और गौरव हंसते हुए होली खेलने के बहाने उससे जी भरकर छेड़खानी और बदमाशी कर रहे थे।

रवीना यह सब देखने के लिए विवश थी। उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वह अब क्या करे।

शिवानी पेटीकोट और ब्लॉउज़ में भीगी खड़ी उन सबकी बदमाशी और छेड़खानी को झेले जा रही थी। चारों अब एक घेरा बनाकर कुर्सियों पर बैठ गए और शिवानी को बीच मे खड़ा करके उससे बोले : चल अब अपने दोनों हाथ उठाकर इस गाने पर सेक्सी डांस करके दिखा। उस समय "टिप टिप बरसा पानी" गाना चल रहा था।

शिवानी ने घबराकर चारों तरफ देखा और बोली : सब देख रहे हैं। हाथ ऊपर मत उठवाओ प्लीज़

गौरव : हाथ ऊपर उठाकर सेक्सी डांस कर साली। नहीं तो तेरी ब्लाउज़ और पेटीकोट उतरवाकर डांस करवाऊंगा। नाच फटाफट

शिवानी अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर गाने की धुन पर थिरकने लगी

गौरव ने अब रवीना की तरफ देखा : इधर आकर मेरी गोद मे बैठ

रवीना अब गौरव की गोद मे आकर बैठ गयी। गौरव उसके बदन के साथ भी छेड़खानी और खिलवाड़ करने लगा।

अमित रोहित और मोहित अब शिवानी के डांस का मज़ा भी ले रहे थे और गौरव जिस तरह से रवीना को मसल रहा था, उसका भी देख देख कर मज़ा ले रहे थे

शेष अगले भाग में
 
Last Part

अमित, मोहित और रोहित का ध्यान अब शिवानी से हटकर गौरव की गोद मे बैठी रवीना की तरफ लगा हुआ था लेकिन उन लोगों की अभी तक हिम्मत नही हो रही थी कि उसके साथ होली खेलकर उसे भी अपनी छेड़खानी का शिकार बनाएं।

गाना खत्म हो चुका था और शिवानी ने डांस भी करना बंद कर दिया था। शिवानी ने अब अपने दोनों हाथ भी नीचे कर लिए लेकिन मोहित ने उसे हुक्म देते हुए कहा : हाथ ऊपर करके खड़ी रह-उस पोजीशन में तू बहुत मस्त और सेक्सी लगती है।

रोहित और अमित भी यह सुनकर भी हंसते हुए कहने लगे : साली है तो एकदम एटम बम। इसे देखते ही लण्ड खड़ा हो जाता है।

वे सब यह बातें ही कर ही रहे थे कि गौरव ने रवीना को अपनी गोद से उतारते हुए कहा : मैं अभी जरा वाशरूम से फ्रेश होकर आता हूँ। तब तक तुम लोग होली खेलो।

यह कहकर गौरव तो कमरे में चल गया और बाहर छत पर अमित,रोहित,मोहित,शिवानी और रवीना रह गए।

अमित ने शरारत से मोहित और रोहित की तरफ देखा और जैसे ही उन तीनों ने नज़रों ही नज़रों में कुछ इशारा किया, वैसे ही तीनों एकदम " होली है होली है' कहते हुए रवीना की तरफ झपट पड़े और उस पर रंग लगा लगाकर उसके बदन के सभी अंगों से छेड़खानी करने लगे।

शिवानी को यह देखकर गुस्सा आ गया और वह जोर से चिल्लाकर नीचे की तरफ भाग खड़ी हुई। शिवानी को नज़रअंदाज़ करते हुए वे तीनों रवीना को अपनी गिरफ्त में लेकर रंग लगाने और होली खेलने के बहाने उससे बदमाशी और छेड़छाड़ किये जा रहे थे। रवीना की साड़ी भी उन लोगों ने उतार फेंकी थी।

साड़ी उतरते ही रवीना ने भी जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया: कोई बचाओ इन बदमाशों से।

इतनी देर में शिवानी नीचे से अपने सास ससुर को लेकर ऊपर पहुंच चुकी थी।

शिवानी उन लोगों की सारी बदमाशी पहले से ही अपने सास ससुर को बताकर लाई थी।

सास ससुर अपने हाथ मे लाये लाठी डंडों से उन तीनों मनचलों की धुनाई करने लगे। मौका देखकर रवीना और शिवानी भी डंडे लेकर उन तीनों पर टूट पड़ी। वे तीनों भौंचक्के होकर इस हमले को झेल रहे थे। इतनी देर में गौरव भी वाशरूम से बाहर आया और उसने यह सारा ड्रामा देखा कि मम्मी पापा रवीना और शिवानी मिलकर उसके तीन दोस्तों की तबियत से पिटाई कर रहे हैं।

गौरव को देखते ही उसके पापा उससे बोले : बेटा, अंदर से मेरी लाइसेंस वाली बंदूक लेकर आ और इन तीनों को ढेर कर दे। इन बदमाशों ने हमारे खानदान की बहुओं की इज़्ज़त पर हाथ डाला है।

गौरव अंदर की तरफ भागा और जब वापस आया तो उसने बंदूक की गोलियाँ उन तीनों के ऊपर दागकर उन्हें वही ढेर कर दिया।

अमित,मोहित और रोहित खून की होली की भेंट चढ़ चुके थे।

इतनी देर में विवेक भी वापस आ चुका था । उसने सारी बातचीत सुनी तो बोला : इन लोगों ने हमारी इज़्ज़त पर हाथ डालने की जो जुर्रत की है, उसके हिसाब से इनके साथ यही होना चाहिए था। गौरव ने एकदम सही काम किया है।

बाद में पुलिस गौरव को पकड़कर ले गई और वह तीन साल तक जेल में चक्की भी पीसता रहा लेकिन वकीलों और पैसों के बल पर उस पर उन तीनों की हत्या का मामला अदालत में साबित नही हो सका और वह 3 साल जेल में चक्की पीसने के बाद छूटकर घर आ गया और शराफत से रहने की कोशिश करने लगा।

The End
 
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