• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

शाजिया अपनी सहेली सरोज को राज से चुदने की बात की बात बताती है।

उस दिन संडे था। समय कोई ग्यारह बज रहे थे। शाजिया ने अपनी सहेली सरोज को फ़ोन किया और पूछी की क्या वह खाली है.. सरोज ने उधर से जवाब दी की वह खाली है।

"तेरे पति नहीं है क्या...?" पूछी शाजिया।

"नहीं वह अपने कुछ फ्रेंड्स के साथ फिल्म देखने गया है और कह गया ही की वह शाम से पहले आने वाला नहीं।."

"खाना खायी...?"

"कहाँ यार स्टोव भी नहीं जलाई... में अकेली हूँ, सोच रहा हूँ की मेस से एक प्लेट अम्मीगा लेती हूँ; मेरे घर के समीप ही एक मेस है। वहां फ़ोन करूँ तो भिजवा देते है..." सरोज का जवाब आया।

"चल, आज मैं तुझे खाना अच्छे से होटल में खिलाती हूँ..."

"अरे वाह मेरी बन्नू... क्या बात है.... बहुत चहक रही है...?"

"वैसा कुछ भी नहीं यार... बहुत दिन हो गये तुमसे मिलकर... कल ही मेरी सैलरी मिली है.. बस.."

"अच्छी बात है.. कहाँ मिलूं.. या तू मेरे घर आजा..."

"नहीं, तुहीं होटल को आजा.." शाजिया होटल का नाम बोलती है और फिर कहती खाने के बाद "मैं तुम्हारे साथ.... गप्पे मारते है.."

"ठीक है..." सरोज फ़ोन बंद कर तैयार होने लगती है।

सरोज हेमा की उम्र की ही लड़की है.. वह भी शाजिया की तरह एक डॉक्टर के पास काम करती है। दिखने में शाजिया से जरा सा गोरी है उसका शरीर भी शाजिया कि मुकाबले में भरा, भरा है। सरोज के चूची भी शाजिया के मुकाबले बड़े है। जब की शाजिया के 28 A कप वाली ही तो सरोज के 32 B कप के है। उसके कुल्हे भी शाजिया के मुकाबले बड़े है और मांसल (fleshy) है। जब वह चलती है तो उसकी थिरकते कूल्हे देख कर राह चलने वालों की मन मचल जाती है। दो साल पहले उसकी शदी हो चुकी है और अभी तक उसका कोई संतान नहीं है।

जब दोनों सहेलियां होटल के सामने मिले तो लगभग एक बज रहा था। सरोज को शाजिया होटल के बाहर ही उसका वेट करते मिली। शाजिया को देख कर सरोज ढंग रह गयी। शाजिया जीन पैंट पहन कर शर्ट डाली थी। सरोज शाजिया से मिलकर तीन महीने के ऊपर होगये। शाजिया कभी भी जीन पैंट नहीं पहनती थी। लेकिन आज वह जीन पैंट में और शर्ट में थी, और खूब जच रही थी। जीन पैंट से शाजिया के पतली जाँघे और छोटे नितम्बो का कटाव दिख रहे थे। सरोज खुद सलवार सूट में थी।

"हाय हनी..." सरोज शाजिया से गले मिली। शाजिया भी उसे चिपक गयी। दोनों अंदर चलने लगी।

"शाजिया क्या बात है... बहुत मस्त लग रही है..." सरोज उसे नीचे से ऊपर तक देखती पूछी।

"कुछ नहीं मेरी अम्मी.. पहले चल अंदर जमके भूख लगी है..." इससे पहले भी दोनों सहेलियां, कभी कभी मिलकर बाहर खाना खाते थे, लेकिन तब हमेशा होटल न जाकर मेस में खा लिया करते थे। लेकिन आज शाजिया उसे इतनी अच्छे होटल ले आयी है..बात क्या है'...' वह सोचने लगी।

दोनों आमने सामने बैठ गए। "बोल क्या खायेगी...?" शाजिया पूछी।

"यार आज बटर नान और कड़ाई चिकेन खाने का दिल बोल रही है... चलेगा...?"

"हाँ.... हाँ.. क्यों नहीं चलेगा जो चाहे खालो.... फिर आइस क्रीम भी मंगालेना। बिलकी फ़िक्र न कर.." शाजिया बोली।

"यार शाजिया, कोई बात तो जरूर है... जो तू इतना दरिया दिल निकली.. कोई लाटरी लग गयी क्या...?"

"आरी मेरी अम्मी.. चुप करना... पहले आर्डर तो दे... घर चल कर सब बता दूँगी.."

"एक बात बता शाजिया.. कोयी बॉय फ्रेंड मिल गया क्या... बहतु खुश दिख रही है..."

""हाँ, लेकिन बॉय फ्रेंड नहीं... मैन फ्रेंड है.."

"क्या.. मैन फ्रेंड..? यह कौन हुआ...?"

"यार, मैन फ्रेंड यानि की आदमी... कोई जवान नहीं..."

"अच्छा.. कितने वर्ष का है..कोई 30, 32 वर्ष का तो होगा ही..." सरोज शाजिया को देखती पोची।

"नहीं रे.. और बड़ा है..."

"अरे कितना बड़ा है.. कहीं बुड्ढा तो नहीं .."

"यार सरोज, सबकुछ यहीं पूछेगी क्या...? में कही थी न घर चलकर बताउंगी..." शाजिया अपनी सहेली को डाँटि। उसके बाद दोनों इधर उधर की बाते करते खाने लगे।

"यार सरोज.. तेरे पती कैसे हैं...?"

"उन्हें क्या वह तो मनमौजी है...सवेरे कंपनी जाते है और शाम को वापस.. मैं ही ऐसी की सवेरे दस बजे से दोपहर दो तक और फिर शाम 5.30 से रात दस कभी कभी 10.30 होजाते है। साली क्या नौकरी है...न आराम है न छुट्टी मिलती।"

"हाँ वह तो है... लगभग मेरा भी यही हाल है..." एक लम्बी साँस लेते बोली शाजिया।

दोनों सहेलियां खाना ख़तम करने के बाद शाजिया ने लजीज ice cream मंगाई। उसका cost मालूम होते ही सरोज फिर से दंग रहगयी। सोची 'जरूर कोई मालदार के पाले पड़ी है'।

खाना ख़तम करने के बाद दोनों सहेलियां सरोज के घर आयी। सरोज का दो कमरों का छोटा सा घर है। एक बेड रूम, एक फ्रंट रूम और छोटासा किचन बस। दोनों सहेलियां हाथ मुहं धोकर सरोज के बेडरूम में आये। सरोज ने दो मैक्सी निकाल कर एक शाजिया को दी और एक खुद पहनी। शाजिया ने भी अपना जीन पैंट और शर्ट उतार कर सरोज दवरा दिए मैक्सी पहनी।
 
दोनों सहेलियां पलंग पर अगल बगल लेटे रहे। वह एक दुसरे को देखते बातें करने लगे। सरोज का हाथ शाजिया के कमर क गिर्द लिपटी है तो शाजिया का सरोज के कमर के गिर्द। ऐसे लेटके बातें करना वह पहले से करते थे।

"शाजिया..." सरोज बुलाई और शाजिया को अपने नजदीक खींची।

"vooon" बोलती शाजिया सरोज के समीप किसकी। "क्या है...?" पूछी।

"तुझ में बहुत बदलाव आए है..." शाजिया की गाल पर अपनी तर्जनी ऊँगली घुमाती बोली।

"अच्छा... ऐसे क्या बदलाव देखे है तूने..?"

"सबसे पहले तो तेरे छेहरे पर निखार आयी है। तेरी स्किन पहले से ज्यादा स्मूथ हो गयी है। और अब तू कुछ ज्यादा महंगे कपडे पहन ने लगी। पहले तू सर्फ सलवार सूट में रहती थी लेकन अब..." सरोज कुछ पल रुकी और पीर बोली "अब तु जीन्स, शर्ट के साथ साथ, लेग्गिंग्स और शार्ट कुर्ती भी पहन रही है... क्या यह सब बदलाव नहीं है..?" सरोज रुकी।

"वाह बहुत अच्छी परख रही है..."

"सच बोलना शाजिया यह सब उस बॉय फेरेंड का असर तो नहीं है...?"पूछी।

"हाँ.... उसी का असर है..." शाजिया कुछ सोचते बोली।

"चल सुना अपना किस्सा..." कहती सरोज ने शाजिया के मैक्सी के अंदर हाथ डालकर एक चूचिको पकड़कर भींची।

"सससससस...ह्ह्ह्हआआ.... इतने जोरसे नहीं.." शाजिया सरोज के हाथ को रोकते बोली। "चल सुन.. तू भी क्या यद करेगी...?"

ठहर.... आज बहुत गर्मी है.. मैक्सी निकल देते है..." सरोज कही और खुद ही अपना और शाजिया का भी मैक्सी उतार फेंकी। अब दोनों सहेलियां सिर्फ पैंटी और ब्रा में रह गये है। शाजिया की ब्रा, पैंटी का ब्रांड का नाम देख कर सरोज बोली "waaaav... इतनी महंगी अंडरवियर..." वह अचम्भे में रह गयी।

उसे मालूम है की उस कंपनी के ब्रा और पैंटी की से मिनीमम 300 रूपये से कम नहीं है।

यह पैंटी तो बहुत अच्छी...महंगी होगी...?" सरोज अपने हाथ शाजिया के पैंटी को टच करती बोली।

"हाँ ब्रा और पैंटी का जोड़ा 400 की है।" 400 रुपिये उस निम्न मध्य वर्गीय (Lower middle class) युवतियों किये महंगी ही है। वैसे मार्किट में 1000 रुपये के ऊपर वाले भी उपलब्ध हैं।

सरोज याद् करि की वेह लोग हमेशा मर्केट से किसी ठेले वाले के पास से 25, 30 की ब्रा पैंटी खरीदते थे। वह कुछ बोलने को सोची, फिर खामोश होगयी।

उसके बाद शाजिया ने अपनी राज का किस्सा पहले से सुनाई।

"ओह.. तो तू उस 55 साल के बुड्डे से चुद गयी..."

"सरोज मै फ्रेंड... 55 साल का बुड्ढा नहीं... 55 साल का जवान कह; जवान मर्द कैसे चोदते हैं मुझे नहीं मालूम नहीं; क्यों की मैं इस से पहले किसी से चुदाई नहीं... लेकिन इस अंकल की चुदाई तो मुझे स्वर्ग की सैर कराती है।"

"अच्छा... क्या तुम्हरा यह अंकल इतना अच्छा करता है...?" सरोज में उत्सुकता जगी।

पूछो मत.. मुझे तो मजा ही मजा मिलती है... प्यार भी ऐसे करते है की दिल बाग बाग हो जाति है।

"अच्छा.... तू कितने बार करा चुकी है...?" सरोज उत्सुकता से पूछी।

"यार मेरा और उनका परिचय 4 महीने से चल रहा है.. और अब तक में सात से आठ बार उनसे.... वह रुकी... सच बहुत मजा देते हैं..." शाजिया राज की हरकतों को याद करते बोली।

"अच्छ ऐसा क्या करते हैं...?"

"क्या बोलूं.. मेरी समझमे नहीं आ रहा है.. अंकल तो मेरी चूची के दीवाने है ....?

"क्या...? मैं तो सुना है की लोग बड़े चूची के दीवने होते है... सॉरी.. तुम्हारे तो इतना छोटे है की..."

"आरी इस में सॉरी क्यों... जो है वही कह रही है न.. सही.. मेरे तो बहुत छोटे हैं... मैं इक्कीस की हूँ लेकीन मेरी दुद्दू.. छी...छी.... दुद्दू क्या वह तो कच्ची कैरी की गुटली जैसे है...उसे चूची कहना चूची के साथ अन्याय होगी..."

"खैर छोड़ो... भगवन ने जैसे दिए है वैसे हैं ... तो तुम्हरे अंकल क्या करते हैं ..?

"यार वह तो मुझे पहले चित लिटाते है और मेरी कपडे निकलने बाद सबसे पहले तो मेरी चूची पर टूट पड़ते हैं..."

"चूची पर टूट पड़ते हैं.. क्या मतलब...?"

"पहले तो वह एक के बाद एक को चूची की बेस से ऊपर नन्ही सी घुंडी तक चाटते हैं। उनकी खुरदरी जीभ का स्पर्श से ही में झड़ जति हूँ..... चाटते चाटते वह घुंडी को अपने जीभ से टिकल करते है तो मेरी सारे शरीर में बिजली दौड़ती है..."ममममम... अंकल.." कहते मैं उन्हें मेरे सीने से दबाती हूँ... फिर यह मेरी नन्ही घुंडी को होंठों मे दबाते है.. दांतों में नहीं... होंठों में... जब तो मैं पागल सी हो जति हूँ... और मैं खुद मेरी ऊँगली अपनी बुर पर पैंटी के ऊपर से चलाती हूँ...

फिर अंकल मेरे पूरी चूचिको अपने मुहं में लेते है और ऐसे चूसते है की मुझे तो लगता है मेरा सारा खून मेरी चूची से उनके मुहं में बह रहा हो..." शाजिया रुकी।
 
शाजिया की दास्ताँ से सरोज भी जोशमे आने लगी। वह खुद शाजिया की पैंटी के साइड से ऊँगली अंदर डाल कर उसकी बुर को खुरदते वह खुद शाजिया की पूरी चूची को मुहं में लेकर चूसने लगी।

"ससससस.... सरोज.. यह तू क्या कर रही हैं...?" शाजिया भी अपनी सहेली की चूची को पकड़ते पूछी। सरोज की चूची B कप के size के है... और घुँडो भी बेर की बीज जैसे है। शाजिया उसे उँगलियों में लेकर मसलने लगी।

"शाजिया बोलना और क्या करते है.. तुम्हारे अंकल..."

"क्या बोलूं यार.. मैं बोलते बोलते थक जाउंगी..." शाजिया ने भी सरोज की चुदी चूत में अपनी ऊँगली घुसाते बोली।

"अच्छा एक बात बता.. तुम्हरे अंकल का कैसा है...?"

"पूछो मत... एकदम लाजवाब है..."

"अच्छा... कितना बड़ा है...? छह इंच का तो होगा ना..." सरोज अपने पति की याद करते बोली।

"छह इंच.. यह तो अंकल के समने चूहा है.. अंकल का तो पूरा 9 1/2 इंच के ऊपर है.. और मोटापा पूरा 4 इंच का है..."

"तुम्हे कैसा पता.. है कि वह उतना लम्बा और मोटा है...?"

"उसकी लम्बाई देख कर में दंग रह गयी थी... मुझे तुम्हारी बात यद् आयी की तुम्हारा पति का लग भग छह इंच का है... तो मैंने उसे नापी.. तौबा.. पूरा नौ इंच से भी जयदा है उनका.. फिर उनके, उसके गिर्द धागा लपेट कर उसकी नाप ली तो पूरा चार इंच है..."

"हाय.... दय्या... इतना मोटा और लम्बा..." सरोज अपने हाथ अपने सीने पर रख कर कही...

"क्यों.. मन कर रहा है ...?" शाजिया ने सरोज के गाल को चिकोटी काटी।

"चुप.. साली.. बेहया निगोड़ी कहीं की..." सरोज शाजिया की चूची टीपते बोली

कुछ देर बाद सरोज फिर से पूछि.. "इतना मोटा अंदर घुसा तो तुझे दर्द नहीं हुअ.. उतना मोटा घुसने से.. मेरा तो मेरा पति का घुसते ही दर्द से जान निकल गयी थी..." वह अपनी सुहाग रात याद करते बोली।

"क्यों नहीं ... मेरी भी जान ही निकल गयी.. मैं अंकल नीचे चट पटाने लगी। उनका सिर्फ आगे का हिस्सा ही मेरे अंदर गयी। तभी मेरा यह हाल होगयी.. अगर पूरा एक ही बार में घुसता तो....

"अच्छा..एक बात बता..." शाजिया पूछी।

"क्या...?"

"तू कितने बार खलास होती है...?"

"कितनी बार क्या.. मुश्किल से एक बार... वह भी कभी कभी। कभी कभी मुझे ऐस लगता है की जब मैं पूरे ताव में आती हूँ तो मेरा पति कुछ देर और करे... या दूसरी बार करे.. लेकिन.. वैसा नहीं होता..." सरोज कुछ उदास स्वर में बोली।

"तुझे मालूम है अंकल कितनि देर करते है... और मैं कितनी बार झड़ती हूँ...?" शाजिया बोली।

"कितनी बार झड़ती है...?"

कम से कम तीन बार... कभी कभी ज्यादा भी.. और अंकल... पूरा 35 से 40 मिनिट करते है।

"क्या इतनी देर...?"

"हाँ यार.. मेरी कमर टूट जाती है.. लेकिन अंकल है की स्खलित होने का नाम नहीं लेते।" ऐसे ही बात करते जरते दोनों सहेलियां एक दूसरे की अंगों से खिलवाड कर एक एक बार झड़ चुके और और उठ गए। सरोज ने शाजिया से राज के बारे में कुरेद कुरेद कर पूछी और शाजिया जोश में जवब दे रहीथी। शाम पांच बजे तक शाजिया अपने सहेली के साथ रही और घरचली गयी।

-x-x-x-x-x-x-x-x-

जाने अनजाने में ही शाजिया ने सरोज के मन में लंबे मोटे लंड के चुदाने ने का मज़े के किस्से सुनाकर उसमे आग भड़का दी। उस रात जब सरोज को उसका पति चोद रहा तो, वह अपने ऊपर राज की कल्पना करने लगी। अनजाने में ही सरोज में राज के प्रति एक चाहत पनपने लगी। जैसे जैसे अह राज के बारे सोच रहीथी, वैसे वैसे राज की प्रति उसकी चाहत बढ़ने लगी। एक बार चुदाके देखने में क्या हर्ज़ है... सरोज सोची। शाजिया से पूछूँगी की वह उसे अंकल से मिलवाये। क्या शाजिया मिलवाएगी... वह सोच रही थी। पूछ के तो देखते है... देखते है शाजिया क्या कहती है। वह सोचने लगी।

-x-x-x-x-x-x-x-x-
 
शाजिया की आज कल की व्यवहार (बेहवियर) देख कर उसकी अम्मी; जिसका नाम है फ़ातिमा, को अनुमान हुआ की उसकी बेटी किसि से शारीरक सम्बन्ध बनाये है। 'शायद वह राज बोलने वाला ही होगा' वह सोची। आज कल वह हर रविवार को सहेली से मिलना कहकर चली जाती है... घर में खाना भी बराबर नहीं खाती। फ़ातिमा ने, शाजिया की शरीर में आरहे बदलाव को भी देखि। लेकिन वह उसे डांट नहीं सकती। लड़की जवान है, समझदार भी है। उसी से तो घर चल रहा है; उसका बेवड़ा पति तो पी पी कर अच्छा खासा सरकारी नौकरी ही खो दिया। तब से शाजिया उस डॉक्टर के पास काम करके घर चला रही है। छोटी बहन और छोटे भाई की फीस भी तो वही भरती है। उसका डर यही है की कहीं उसकी बेटी इतना बदनाम न हो की उसकी शादी में बाधा न पाडे। 'लेकिन क्या यह लोग उसकी शदी करेंगे...?' यह एक बड़ा सवाल थी।

एक दिन जब घर में कोई नहीं थे तो उसने शाजिया से कही, "बेटी तुमसे कुछ बात करनी थी... तुम्हे पुरसत है क्या...?"

"बोलो न अम्मी... क्या बात है...?"

बेटी देखो मेरी बातों का बुरा मत मान ना ..." वह बेटी की टोड़ी पकड़ कर बोली।

"अरे इसमें बुरा मान ने कि क्या बात है.. तुम मेरी अम्मी हो.. कहो क्या कहना चाहती हो...?

"शाजिया बेटी तुम समझदार हो...तुम जो भी कदम उठारहि हो... सोच समझ कर उठाना... कहीं ऐसा न हो की तुम इतना बदनाम हो की आगे चलकर तुम्हारी शादी में कोई बाधा न पड़े..."

"अम्मी....." शाजिया अपनी अम्मी को आश्चर्य से देखने लगी।

"हाँ.. बेटी... मुझे मालूम है... तुम जवान हो गयी हो.. तम्हारा पीवट पिता तो तेरी शादी करने से न रहे। मैं समझ चुकी हूँ की तुम आज कल तुम कहते हो न वह राज अंकल.. उसके साथ घूम रही हो... जवानी ऐसे ही होती है.. मैं तुम्हे नहीं रोक नहीं रहीं हूँ.. लेकिन संभाल के.. कहीं तुम.... तुम समझ गयी न मेरी बात को..."

"जवानी होती ही ऐसे.. मैं खुद इसका शिकार हो चुकी हूँ...." उसकी अम्मी फिर कही।

"अम्मी......!" शाजिया आश्चर्य से अपने अम्मी को देखि।

"हाँ बेटी .. मेरा मामा, अम्मी का छोटा भाई... जब मैं जवान थी तो शादी करने का वादा करके... मेरे से..." वह रुकी और बोली "आज कल तुम नींद में भी बड बडाने लगी हो..."

"क्या..." शाजिया चकित रह गयी।

"हाँ बेटी..."

"मैं क्या बड़ बड़ा रही थी...." शाजिया अपनी अम्मी से पूछी।

शाजिया की अम्मी 'फ़ातिमा' जिसकी उम्र केवल 41 साल की है गालों में लालीअम्मी छागयी। अम्मी के कपोलों पर इस उम्र में आयी लालिमा देख कर सोची 'ऐसे क्या बोलदिया मैंने' सोची और अम्मी के गालों आयी लालिमा से मोहित होते पूछी..."बोलो ना अम्मी..."

"छोड़ो बेटी... आगे से संभल के रहना..." अम्मी बेटी से बोलने हिच किचा रही थी।

"लेकिन अम्मी.. मैं ऐसे क्या बोली.. मुझे मालूम तो हो..."

बेटी, तुम्हे मालूम है है हम सब एक ही कमरे में सोते है... उस रात तुम्हारी बड़ बड़ाने आवाज सुनकर मेरी नींद खूली। तुम कह रही थी... "ओह अंकल.. जरा धीरेसे पेलिये.. आपका बड़ा है..." अम्मी के मुहं से यह बात सुनते ही... शाजिया शर्म से लाल पिली हो गयी। उसे क्या बोलना समझमे नहीं आया। खामोश रह गयी। "बेटी मेरे बातों का बुरा मत समझना... तुम अपने लिए किसी अच्छे लड़के को ढूंढ लो... उस से शादी करलो... और उस अंकल के साथ संभल के ... बस मैं यही कहना चाहती हूँ..." अम्मी बोली और खाना बनाने चली गयी।

उसके बाद तो शाजिया को खुली छूट मिल गई... अब वह अपने अम्मी से अंकल के यहाँ जा रही हूँ कहकर जाने लगी। वह समझ गयी की मा उसे रोक नहीं रही है.. केवल सावधान रहने को कही। शाजिया समझ गयी अम्मी का ईशारा किधर है.. और अब वह गर्भ निरोधक गोलियां लेने लगी।

-x-x-x-x-x-x-x-x-x-x-
 
दोनों सहेलियां, सरोज और शाजिया मिलके एक महीने के ऊपर होगया है। आखिरी बार जब वह मिले थे तो शाजिया ने अनजाने में ही हो आपनी सहेली सरोज के मन में मोटा और लम्बे लण्ड से चुदाने का मजे के बारे में बताकर उसके मन में एक छोटीसी चिंगारी सी पैदा करदी। उसी रात जब सरोज अपने पति से करवा रही थी तो उसने अपने ऊपर शाजिया का बॉय फ्रेंड, 55 वर्ष के राज की कल्पना करी थी।

उस मिलन के दूसरे या तीसरे दिन सरोज सोची की राज से उसका परिचय कराने के लिए शाजिया से पूछेगी। लेकिन वह नौबत नहीं आयी। एक महीने के ऊपर होगया इस चिंगारी को सुलग के। उस चिंगारी ने अब आग बनगयी है। इस बीच शाजिया से उसकी (सरोज) दो तीन बार सिर्फ फ़ोन पे ही बातें हुई थी।

आज फिर रवि वार है। उसका और शाजिया का भी छुट्टी का दिन। उस दिन उसने शाजिया को फोन करि।

"हाँ बोल सरोज कैसी है..?." स्क्रीन पर सरोज का नाम देख कर उधर से शाजिया कही।

"मैं तो ठीक हूँ.. तू बोल कैसी है...?" सरोज कही।

"हाँ यार सब चंगा.. बोल कैसे फोन करी..?"

"यार सोचा हम दोनों मिलकर बहुत दिन हो गए, सोचा बैठकर गप्पे लडाते हैं... बस उसिलिये.. तेरा कोई इंगेजमेंट है क्या...?"

"नहिं... वैसा कुछ भी नहीं है.. सोच रही हूँ कि आज घर में ही रेस्ट करने की ..." शाजिया का जवाब आया।

"शाजिया एक काम कर..तू तैयार होक मेरे यहाँ आजा.. यहीं रेस्ट करलेना और अपने गप्पे भी हो जाएंगे.. क्या...?" सरोज बोली।

"क्यों तेरा पति नहीं है क्या...?"

"यह तो सवेरे ही चला गया... अब तक अपने यार मित्रों के साथ ताश में बैठा होगा..."

शाजिया कुछ पूछे ने को सोची और फिर बोली.. ठीक है आती हूँ..." कही और अपने अम्मी से कह कर वह सरोज के घर चली।

-x-x-x-x-x-

दोनों सहेलियां गले मिलते है और सरोज शाजिया को अंदर बुलाई और एक पुरानी सोफे पर बैठे। कुछ देर इधर उधर की के बातें होने का बाद.. सरोज ने शाजिया को चाय पिलायी।

"सरो... तुमसे एक बात पूछनी थी; पूछूं, बुरा मत मान ना..." शाजिया अपनी सहेली को देखते पूछी।

"अरे.. इसमें तेरेसे बुरा होना क्या बात है.. पूछ क्या पूछने चाहती है...?" सरोज शाजिया के हाथ को अपने हाथ में लेकर बोली।

"कुछ नहीं.. सरो.... आज संडे है और तुम्हारा पति का भी छुट्टी है... वह तुम्हे कभी बहार घूमाने नहीं ले चलता... यही एक ही दिन तो तुम्हे मिल झुलकर रहना चाहिए थी।"

"आआआआह्ह्ह्हह्ह" सरोज ने एक लम्बी सी आह भरी बोली... शाजिया मैं डियर जो तुम कह रही हो वह सच है... लेकिन वह कहता है की वह सारे हप्ते मेरे साथ रहता है तो संडे के दिन उसे दोस्तों से मिलना जरूरी है..."

"सारा हपता तुम्हरे साथ.. कब..?" शाजिया चकित ठोकर पूछी।

"उसका मतलब रातों से है.. हर रात मेरे साथ रहता है... यह वह कहता है..."

"खैर छोड़ो वह किस्सा... चलो किचन में.. खाना बनाते बातें करते हैं..." सरोज शाजिया का हाथ पकड़ी।

"अब क्या खाना बनाएगी तू... चल आज बाहर से मंगाते है...डोंट वोर्री... पेमेंट मैं करूंगी"

"यार शाजिया आज कल तू बहुत दरिया दिल वाली बन रही है..."

"ऐसे कोई बात नहीं... बस यही तो दिन है मौज मस्ति करने की..." फिर वह फ़ोन पर एक मटन बिरयानी, मटर पनीर करी, मीट बॉल्स कोफ्ता करी के साथ डबल का मीठा का आर्डर करि।

फिर दोनों सहेलियां बैडरूम में पहुँचते है.. और बातों में लगते है। दोनों अगल बगल में लेटे है और एक दूसरे को देखरहे हैं। शाजिया का हाथ सरोज के कमर पर तो सरोज का शाजिया का कमर पर। सडनली (suddenly) सरोज शाजिया को अपने सामीप खींचती है और " शाजिया आज तू बहुत आकर्षक (attractive) लग रही है...." कहते उसके होंठों को अपने में लेकर चूसने लगी।

"स्स्स्सस्स्स्स.... सरोज.. यह क्या कर रही है..." शाजिया जबरदस्ती उस से छुड़ाती बोली।

"सच में यार तू आज बहुत आकर्षक लग रही है..." सरोज ने शाजिया की छोटी चूची को अपने हाथ के नीचे दबाती बोली।

"ममममम... तुम भी तो कुछ काम नहीं हो सरो..." शाजिया ने अपनी सहेली की चूची थामी। कुछ ही देर में दोनों नंगे होगये... उनके शरीर पर सिर्फ ब्रा और पैंटी ही रह गयी है। सरोज ने शाजिया के चूची को पूरा अपने मुहं में लकर चूसने लगी... "आअह्ह्ह... सरोज.. ऐसे ही चूसे मेरी सहेली.. मजा आ रहा है... ससस..हह" कही और सरोज के सर को अपने सीने से दबाली।

वह खुद सरोज के चूची के निप्पल को पिंच करते... दूसरे हाथ को उसके बुर पर पैंटी के ऊपर से चलाने लगी। सरोज ने अपने टाँगे पैलादि। शाजिया की ऊँगली उसके सहेली के बुर में झड़ तक घुस गयी है।

"हाहाहा... ममम.. शाजिया ऐसे ही कर मेरी बन्नो.. और डाल अपनि ऊँगली... को..." कहते कमर उछाली। फिर दोनों सहेलियां ऐसे ही मस्ती करते एक दूसरे की बुर को चूमते, चाटते उँगलियों से चुदाई करके झड़ जाते है..."

जब तक वह दोनों फ्रेश होजाते है तो उनका आर्डर किया खाना आजाती है, फिर दोनों सहेलियां बातें करते खाने पर बैठ जाते हैं।

खाना खाते.. सरोज पूछी... "बोल शाजिया तुम्हारा क्या हाल है... इस बीच तुम अपने अंकल से मिली हो क्या....? (उसका इशारा राज से था)

"हाँ यार.. लास्ट वीक ही मिली हूँ...."

"अच्छा.. अबकी बार क्या किया था तुम्हारे अंकल ने..." सरोज शाजिया कि छोटीसी निप्पल को दबोचती पूछी ।

"यार सरोज मत पूछ... इस बार तो उन्होंने मेरी गांड मारी ..."

"क्या...? तूने गांड मरवाई...?" सरोज आश्चर्य से पूछी।

"हाँ..."

"शाजिया तुझे दर्द नहीं हुआ...? तुम तो कह रही थी की उनका बहुत बड़ा है..."

"हाँ.. बहुत बड़ा है.. लेकिन अंकल इतना प्यार से करे की मुझे मालूम नहीं हुआ की उनका डंडा मेरे पीछे में चली गयी है..."

"ऐसा कैसे हो सकता है....?"

"है ना मिरकिल.... (miracle) यही हुआ और सच मनो तो मुझे भी मजा आया..."

"हाय राम.. तेरा गांड है की सुरंग..." कहते सरोज ने अपने जांघों के बीच अपने हाथ डालकर खुद अपनी बुर को भींची।

"क्यों.. खुजली हो रही है क्या..? तुम भी अंकल से क कराना चाहती हो...?"

"तुम्हारे अंकल मुझे क्यों करेंगे..? तुम तो कहती हो की वह तुम पर फ़िदा है..."

वह सब छोड़... तुझे कराना हैतो बोल... मैं अंकल से कहूँगी कि वह मेरे अच्छी सहेली का भी जरा ध्यान रखे।

"क्या वह मुझे चोदेंगे? "

"क्यों नहीं चोदेंगे....? क्या कमि है तुम में.. मेरी से गोरी हो... और तेरा शरीर भी मेरे शरीर से भरा है ... और तेरे चूचिया तो देख कितने मस्त है...." उसने सरो की चूची को जोर से मिंझी और बोली "वैसे मैं एक बात बोलना भूल गयी " शाजिया कही।

"क्या....?" पूछी सरोज.. वैसे उसके मन में शाजिया की बातों से उछाल खुद करने लगी।

"इस संडे, अंकल ने हमें फॅमिली के साथ दावत में बुलाये है.. कह रहे थे अगर मेरी किसी सहेली को बुलाना चाहती हूँ तो बुला सकती हूँ। तू चलेगी क्या... अंकल से तेरा परिचय भी हो जाएगी..." शाजिया बोली।

सरोज को तो मानो उसकी इच्छा पूरी है रही है... वह हाँ कहते कहते रुकी... और बोली.. "नहीं यार.. कहीं तुम्हारा अंकल कुछ और न समझे..."

"ऐसी कोई बात नहीं है...वह खुद कह चुके हैं की में किसी को भी बुला लूँ.. यार शाजिया चलना..." शाजिया रिक्वेस्ट करि।

"दावत किस लिए...?" पूछी सरोज।

"अंकल का जन्मदिन है" (birthday)

"ओह कब...?"

"वैसे जन्म दिन तो फ्राइडे (Friday) को है... लेकिन हमें छुट्टी नहीं मिलती ईसी लिये संडे बारह बजे ... अगर तुम चाहो तो तुम्हारे पति को भी ले चलो..."

"कौन.. मेरा पति... न.. न.. यह पहले से ही शक्की मिजाज का है... नहीं उन्हें नहीं.... वैसे भी वह हर संडे की तरह अपने दोस्तों से मिलने जाता है..."

ठीक है.. फिर.. संडे को 10 बजे मिलते है..." बोली शाजिया।

"वह तो ठीक है.. पहले तुम अपनी गांड मराने की किस्सा तो बता दे... तुमने तो मुझमे उत्सुकता जगादि।"

"क्या अभी...?"

हाँ.. अभी.. अभि तो दो ही बजे है.. तुम चार बजे जयेगी न.. बहुत समय है.. जरा डिटेल से बताना ..." कही और कपड़ों के ऊपर से ही शाजिया की गांड पर एक थपकी दी।

"स्स्स्सस्ठ्ठाआ..." इतनी जोरसे क्यों मार रही है.. सुन बताती हूँ..." और शाजिया अपनी गांड मराने की किस्सा सुनाते सुनाते उस दिन की घटना के बारे में सोच ने लगी।

-x-x-x-x-x-
 
उस दिन सवेरे कोई गयारह बजे शाजिया को राज के यहाँ से फ़ोन आया।

"हेलो अंकल.." शाजिया चाहकते बोली...

"शाजिया.. मुझे पहले इस जगह पे मिलो..." बस इतना कह जगह नाम बताया और फ़ोन काट दिया।

वह झट स्नान करके तैयार होने लगी। जब से राज ने उसके अकाउंट में 60,000 रूपये जमा कराया है शाजिया राज पे फ़िदा होने लगी। वह एक पिंडलियों तक आनेवाली स्कर्ट और गोल गले का टाइट टॉप पहन कर निकली। टॉप टाइट होने की वजह से उसके छोटे छोटे चूची भी बहुत लुभावनि दिखरहे थे। निर्धारित समय और निर्धारित जगह पर राज ने उसे पिक किया और गाड़ी आगे चलने लगी।

शाजिया सामने पैसेंजर सीट पर बैठते ही आगे झुक कर राज की गाल को किस करि और सीट पर जम गयी। राज गाड़ी चला रहा था।

"हम कहाँ जा रहे है अंकल..." वह राज से पूछी।

"just wait डार्लिंग मालूम पड़ जाएगा.." कहते उसने स्नहा के गाल को पिंच किया। उसके बाद उन दोनों में कोई वार्तालाप नहीं हुई। शाजिया ख़ामोशी से खिड़की से बाहर का नजारा कर रही थी। कोई 40 km चलने के बाद गाड़ी एक रिसोर्ट में घूमी। शाजिया पूरा नाम नहीं पढी लेकिन एक रिसोर्ट है यह समझ गयी। रिसोर्ट के अंदर maingate गेट से कोई 2km दूरी पर main building दिखी।

राज और शाजिया गाड़ीसे उतरे और अंदर चले। एक manager ने आकर उसे स्वगत किया और राज उससे कुछ पूछे। फिर दोनों गाड़ी में बैठे। उनके के साथ एक रिसोर्ट के कर्मचारी भी था जो उन्हें रास्ता दिखाने लगा। रिसोर्ट के main building के पीछे कोई 3 मिनिट चलने का बाद वह एक कॉटेज के सामने रुके और कर्मचारी ने कॉटेज का ताला खोल कर उन्हें अंदर तक ले गया और राज का दिया टिप लेकर चला गया।

राज और शाजिया अंदर बेडरूम में पहुंचे... वह बड़रूम इतना बड़ा होगा शाजिया ने अनुमान नहीं लगाया। बहुत बड़ा था और बहुत बड़ी पलंग और उस पर मखमली गद्दी...

राज ने शाजिया को गद्दी पर धकेला और उस पर टूट पड़ा... शाजिया खिल खिलाकर हँसते बेड पर रोल होते अंकल को अपने ऊपर गिराने से बची।

कुछ देर बाद दोनों हँसते बेड पर बैठे और राज उसे अपने गोद में खींचा... वह हँसते हुए उसके गोद में बैठी और अपने हाथों का हार राज की गले में पहनाई।

"ओह.... अंकल कितना अच्छा है यह जगह... कहते उसे चूमने लगी। घबराओ नहीं डार्लिंग तुम मेरे साथ रहो मैं तुम्हे एक से एक स्वर्ग जैसी जगह दिखावुंगा और तुम्हे स्वर्गकी सैर करावुंगा....बोलो.. दोगी साथ...?" बोलते उसने उसे चूमते उसके मादक छोटे बूब्स पर हाथ फेरने लगा।

"अंकल मैं तो हमेशा आपके साथ हूँ..." मादक अंदाज से बोली और "अंकल I am वेटिंग..." कहती उसने राज की जांघों में हाथ डाली।

"नहीं शाजिया...अभी नहीं..." वह उसे रोका...

शाजिया उसे अस्चर्य से देखने लगी।

"चलो फ्रेश होजाओ.. बाहर जाकर खुले में बैठते हैं..."

शाजिया बातरूम में घुसी और बातरूम की सजावट देख कर दंग रह गयी। इतना उम्दा बातरूम था वह। एक ओर बात टब, दूसरी ओर एक आदमकद शीशे के साथ ड्रेससिंग टेबल... शाजिया सपने में भी कभी नहीं सोची की ऐसे रिसोर्ट में वह कुछ समय बितायेगी। उसके फ्रेश होक बाहर आते ही राज भी फ्रेश होकर आया और दोनों कॉटेज के सामने लॉन (lawn) में बिछे एक टू सीटर सोफे पर जम गए। सामने के एक छोटे टेबल पर कुछ डिशेस पहले से ही रखे हैं। लगता है राज ने पहले से ही आर्डर दे रखा है। साथ में एक व्हिस्की बोतल और दो गिलास भी थे।

राज ने दोनों ग्लासों में व्हिस्की डाला और पानी मिलाकर शाजिया को एक थमाते चियर्स बोला। दोनों आराम से व्हिस्की चूसक रहे थे। अब शाजिया बेहिचक व्हिस्की लेने लगी। शाजिया राज को देखकर हँस रही थी। राज ने एक आंख दबायी। शाजिया हँसते हुए अपने जगह से उठी और राज की गोद में अपने छोटे नितम्ब जमाकर बैठ गयी।

"थैंक यू डियर...:" राज ने उसे किस करा।

राज उसे गोद में बिठाकर बहुतसे बाते करने लगा। वह अपने बिज़नेस के बारे में भी उसे बता रहा था। उसने किधर किधर कितना रुपए इन्वेस्ट किया... जैसी बहतु से बातें।

उसने अपने दोनों बेटों के बारे में भी बताया.. और न जाने क्या क्या....

शाजिया खामोशी से सुन रहीथी।

शाजिया एक पेग तक ही सिमित राहि, जब की राज दूसरा पेग ले रहा था। फिर दोनों ने वहां परोसे खाना खाया.. कुछ देर बाद एक कर्मचारी आकर टेबल साफ करके चला गया।

दोनों वही बैठे व्हिस्की सिप करते गप्पे मार रहे थे। राज शाजिया के घर के बारे में, उनके घर के सदस्य के बारे में पूछ रहा था। और उसके सहेलियों के बारे में.. और भी बहुत से बातें।

"शाजिया कभी अपने घर के दूसरे सदस्यों से हमारा परिचय करादो; वैसे ही तुम्हरे कोई दोस्त भी हो तो... देखो मैं अकेला रहता हूँ... मुझे लोग बहुत पसंद है..."

"उसमे क्या है अंकल जरूर परिचय करा दूँगी... मेरे घर के मेंबर्स के साथ मेरी एक अच्छी सहेली है सरोज .. मैं अपको उस से मिलवा दूंगी" बोली।

"तुम्हारा कोई मेल (male) फ्रेंड्स नहीं है क्या...?" राज पुछा।

"नहीं अंकल..."

"कोई बॉय फ्रेंड...?"

"आप मेरे बॉय फ्रेंड ही है न..."

"मेरे अलावा..."

"बॉय फ्रेंड.. और मेरा....." वह हंसी और बोली... I am not so lucky अंकल... मुझे फुरसत कहाँ मिलती.. किसी को बॉय फ्रेंड बनाने का..."

"हूँ... खैर छोड़ो..."

"वैसे शाजिया..एक बात; आने वाले संडे को मैं एक पार्टी देरहा हूँ.. तुम अपने फॅमिली को और भी कोई अपने दोस्तों को फॅमिली के साथ invite कर सकती हो" कहते उसने उसके स्कर्ट के नीचे हाथ घुसा दिया।

हाय अंकल यह क्या कररहे हो.. इतने उजालेमे वो भी बाहर लॉन में..." कहते उसने राज के हाथ को बहार खींचने की कोशिश करने लगी।

"अरे डियर.. जबतक हम न कहे यहाँ कोई नहीं आएगा.. मेरी गारंटी... कहते उसके पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को दबोचा...

"सससससस....हहह" शाजिया एक मीठी सिसकारी ली; और बोली ठहरो अंकल... और उसने राज के हाथ बाहर निकालते ही अपना पैंटी ही उतार फेंकी।

"वाह यह हुई न बात..." उसने फिरसे हाथ स्कर्ट के नीचे डाल दिया। शाजिया अपने टांगे पैलादी।

राज की मिडिल फिंगर शाजिया के बुरमें जड़तक घुस चुकी थी। उससे अपने बुर को कुरेदवाते, शाजिया ने राज की पजामा के सामने का ज़िप नीचे झीँच कर उसके डंडे को बाहर खेंचि। उसके 9 1/2 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा डंडा बाहर खुले आसमान को ताक रहा था। शाजिया झुककर उसे एकबार चूमि... और बोली... "अंकल यह आपका जादू का डंडा सचमे ही मुझपर जादू कररही है..." कहि और उसके मोठे सुपाडे को मुहंमें ली। राज उसके स्कर्ट के नीचेसे हाथ निकाल कर पिछेसे उसे जकड़ा। अब दोनों को सहूलियत थी। वह पीछे से उसे ऊँगली से चोद रहा था और शाजिया उसके पहलवान को चुभला रही थी।

कोई पांच छह मिनिट यह चुभलाना और ऊँगली से चुदवाने का सिल सिला चला। अब दोनों को ही अपने आप को संभालना मुश्किल लग रहा था।

"शाजिया डार्लिन अब रहा नहीं जाता... जल्दी से मुझे स्वर्ग में आने दो..." वह शाजिया कि छोटी चूची को टीपता बोला।

"रोक कौन रहा है अंकल.... आईये न... ठहरो मैं हि इसे अंदर लेलेती हूँ..." कही और राज की गोद में बैठी। बैठने से पहले उसने अपने स्कर्ट को कमर तक उठायी और उसके डंडे को अपने बुर में लेली।

"आअह्ह्ह्ह... कितना गर्म हो.. तुम्हारी .. सससस.. सच मजा आगया.. ऐसे खुले आसमान के नीचे दिन के उजाले में... तुम्हे कैसा लग रहा है.... शाजिया डियर...?" वह नीचेसे उसके बुर में धक्का देते पुछा।

"पुछा पूछो मत अंकल.. में तो स्वर्ग में हूँ... और तुम कहते हो की स्वर्ग मेरे जांघों में है... लेकिन में कहती हूँ स्वर्ग तो आपके जांघों के बीच है...." वह उसके ऊपर उछलती बोली।

शाजिया गंगराम के गोद में बैठ कर ऊपर नीचे हो रही थी तो वह नीचे से ठोकर देने लगा।

वह लोग अपने काम में डूबे थे की राज की मोबाइल बजी। चिढ चिढ़ाते उसने फ़ोन उठाया और 'हेलो' बोला। शाजिया उधर से आने वाले बातों को सुन नहीं पायी लेकिन गंगराम की बातें उसके कानों में पड रहे थे।

"नहीं, नहीं समीर खान जी यह नहीं होसत्ता..." राज कहरहा था।

"......... "

"अरे बाबा.. सुनते नहीं हो...; नहीं हो सकता..."

"..........."

""आप समझते क्यों नहीं समीर साहब..."

".............."

"ठीक है मैं रख रहा हूँ.. हाँ.. बाबा.. सोचूंगा..." और राज ने फ़ोन काट दिया, फिर अपने गोद में बैठे शाजिया की ओर ध्यान दिया..

अंकल..." शाजिया उसके उपर उछलती बुलाई

"hooon"

"कौन था...अंकल...." उसके लंड पर अपनी बुर दबाती पूछी।

"था कोई औरतों का रसिया.. स्साला..." राज घुसे हे कहा।

फिर दोनों के बीच धमसान चुदाई हुई और राज अपना मॉल अंदर छोड़ चूकाथा तो; शाजिया ने दोबार झड़चुकी और थककर राज के ऊपर गिरी। दोनों अंदर आये और बेड पर गिरे। गिरते ही शाजिया की आंखे मूंदने लगी।

0x0x0x0x0x0x0
 
जब उसे होश आया तो उसने महसूस किया की उसके नितम्बों के बीच कोई ऊँगली कर रहा है... "ममममम..." कहती उसने आंख खोली तो "उठ गयी डार्लिंग..." राज पुछा।

"क्या कर रहे हो अंकल...?" तबतक उसे गांडके दरार में ऊँगली का मजा आने लगा तो टांगे पैलाती पूछी।

"तुम्हारी गांड बहुत मस्ती भरी है.. उसे चोदने की तैयारी कर रहा हूँ,,,"

"ओह... नो.. अंकल... मेरी गांड फट जाएगी..." वह बोली लेकिन राज को रोकने की कोशिश नहीं करि।

राज अपने साथ लाये पॉन्ड्स पोमेड को शाजिया कि गांड के इर्द गिर्द और उसके गोल छेद पर मलते दबाव देरहा था। "अरे पगली.... चूत और लैंड का मजा तो ली है.. अब गांड मराने का मजा भी तो ले..." और अपना काम जरी रखते इसके ऊपर झुका और उसके गालों को काटने लगा।

शाजिया को मजा आरहा था तो वह खामोश पड़ी अपने गांड को चिकना करवा रही थी। उसके गांड पर पोमेड लगाते लगाते, राज ने अपनी तर्जनी ऊँगली को थोड़ा दबाव दियातो वह दो टकनों तक गांड के अंदर चली गयी। गांड में ऊँगली घुसने का शाजिया महसूस करि लेकिन उसे कुछ दर्द नहीं हुआ तो वह चकित रह गयी। जब वह कुछ नहीं बोलीतो राज ने पुछा.. "शाजिया..कुछ दर्द हो रहा है...?"

"नहीं अंकल.. आपका ऊँगली अंदर गयी क्या...?"

"हाँ... दो टकनों तकतो अंदर गयी..."

"Wwaaaaaaaavvvv...." वह बोलती गांड को ऊपर उछाली।

"जनू ... अब लंड डाल रहा हूँ..." अपने सुपाड़ा उसकी चिकनहट पर रख पुछा..."

"अंकल.. संभल के..." वह कहही रहीथी की राज ने अपने लंडपर दबव दिया..पोमेड के चिकनाहट की वजहसे "पछ...." की हलकी सी आवाज के साथ सूपड़ा अंदर चलीगयी।

"डार्लिंग सूपड़ा अंदर.. कुछ दर्द तो नहीं...? वह पुछा।

"नहीं अंकल...."

राज ने एक और धक्का दिया और आधेसे ज्यादा लंड गांड में चली गयी..."

"आह....आह.. " अबकी बार उसे हल्कासा दर्द महसूस हुआ।

"दर्द हुआ...?"

"हाँ लेकिन थोडासा ..."

राज उसके कमर पकड़ कर एक और शॉट जमकर दियातो उसका औजार पूरा अंदर चला गया..."

"सससस...हहहआ..." शाजिया चट पटायी। राज ने अपनी चुदाई शुरू करदी।

तीन चार मिनिट बाद शाजियाको भी मजा आने लगा तो..वह अपने गांड को पीछे धकेलती बोली... "आअह्ह्ह अंकल.. अब मजा आरहा है.."

राज उसके छोटे कुल्हों पर तपकी देता जमकर उसकी गांड मारने लगा...

"सससस.. अंकल डालो अंदर.. अब मजाही मजा आरही है.. मारो मेरी कुंवारी गांड को.. मजा दे रही है क्या...?"

"हाँ.. स्वीटी मुझे भी मजा ही मजा है..." कहते दना दन गांड मारने लगा।

"अंकल मेरी चूत में भी खुजली हो रही है..." अपने गांड को पीछे धकेलती बोली।

राज अपना एक हाथ उसकी जांघों में डालकर उसकी रिसरही चूतको कुरेदने लगा। "आआअह्ह्ह्ह...." ख़ुशी से वह जोर से चिल्लायी..

"क्या हुआ....?"

"कुछ नहीं अंकल...आप करते रहीये... अब मैं झड़ने वाली हूँ... ऊँगली मेरी बुरमें और अंदर डालिये...आआह्ह्ह्ह..." वह कही और झड़ गई। राज की ऊँगली उसके चूत रस से चिपडा था। उस ऊँगली को उसने शाजिया के मुहं के पस रखा... शाजिया अपना मुहं खोलकर उस ऊँगली को ली और चूसने लगी।

राज पूरे आठ दस मिनिट उसकी गांड मारते रहा और उसके गांड में अपना गरम लस लसा से भरने लगा। दोनों थके हारे बेड पर गिरे।

0x0x0x0x0x0x0
 
अंकल वह कौन था जो आप इतना गुस्से में थे...?" गाड़ी से वापिस आते समय शाजिया पूछी..

"छोड़ो.. उस नालायक की किस्सा..." राज चिढ़ते बोला।

"बोलिये ना अंकल.. प्लीज...." कहती वह उसकी ओर झुकी और उसकी गाल को चूमि।

"कुछ नहीं शाजिया..." राज उस की कंधे पर दबाव देता बोला "वह एक सरकारी अधिकारी है। नाम है समीर खान। जबतक उस अधिकारी की सर्टिफिकेट न आये मुन्सिपल वाले बिल्डिंग प्लान अप्रूव (approve) नहीं करते। उसके पास मेरा एक फाइल है... वह उसमे दस्तखत करता तो मेरा एक प्लाट पर एक पांच माला बिल्डिंग बन सकती है.. हर माले में तीन तीन फ्लैट होंगे... 50:50 हिसाब से बिल्डिंग बनाने को एक बिल्डर तैयार है.. लेकिन यह सस्ला.. फाइल sign नहीं कर रहा है..."

"उसे कुछ देदेना था..."

वह सब होगया.. वह मान नहीं रहा है ...वह औरत खोर है.. उसे औरत या लड़की चाहिये.. वह भी घरेलू... किसी रंडीको तो मैं ब्रोकर से बुक करा सकता हूँ... लेकिन उसे वह पसंद नहीं है.. उसे सिर्फ और सिर्फ फॅमिली औरत चाहिए.... इसे मैं कहाँ से लावूं ..."

"oooooooohhhhh" बोली शाजिया।

,,…………………………………….

शाजिया समीर खान के यहाँ से राज की फाइल ले आती है। कैसे जानिए...

दोपहर के एक बज रहे थे। शाजिया इधर उधर देखते उस कार्यालय में पहुंची। उस समय वह घुटनों के ऊपर आने वाली स्कर्ट और गोल गले वाली टॉप पहनी है। उसके टाइट टॉप से उसके छोटे छोटे मुम्मे समाने वाले के आँखों में चुभने जैसे है। अपने बालों को वह दो ponytail में बांध, उस ponytail में लाल रंग की hair band लगाई है। स्कर्ट ऊपर को होने की वजह से उसके पतले जाँघे नुमाया हो रहे थे। उसके जांघें और पिंडलियाँ बहुत स्मूथ दिखकर देखने वालों की मुहं में पानी ला रहे हैं। एक बात में बोला जाये तो 21 वर्ष की यह लड़की एक पंद्रह सोलह वर्ष की लड़कीजैसे दिख रही है।

ऑफिस के अंदर कॉरिडोर में दोनों तरफ क़तार से चार कमरे थे और हर कमरे के सामने दीवार पर उस अधिकारी का नाम प्लेट है। दीवार के साथ लगकर ही कमरे के सामने तीन कुर्सियां बिछे है ताकि आने वाले वहां बैठे। दरवाजे के पास एक स्टूल था लेकिन उस पर कोई नहीं था। दो कमरों के आगे एक स्टूल पर एक चपरासी बैठा है। लगता है उधर के चार अधिकारीयों का एक ही चपरासी है।

'समीर खान' नाम पढ़कर शाजिया वहां रुकी और इधर उधर देखने लगी। वहां से दो कमरे के आगे जो चपरासी बैठा था, शाजिया के पास आया और काम पुछा।

"साहब से मिलना है..." शाजिया नाम प्लेट कीओर इशारा करते बोली।

"आपके पास अपॉइंटमेंट है...?" उस चपरासी ने पुछा।

"नहीं... लेकिन मिलना जरूरी है... साहेब से मिलवादो प्लीज..." कही और उस चपरासी के हाथ में एक सौ का नोट थमादि।

सौ का नोट देखते ही उसके बांचे खिल गयी। क्यों की सौ का नोट देने वाले कोई आता ही नहीं। 20 से ज्यादे से ज्यादा उसे 50 की नोट थमाने वाले ही आते है। वह भी कभी कभी।

"आप बैठिये" उसे अदब से कुर्सी दिखाते बोला दरवाजे ठेल कर अंदर गया और 2 मिनिट में बाहर आया और शाजिया से कहा... "साहब कुछ फाइल्स देख रहे है... आधे घंटे तक किसी को न भेजने को कहे है... आप इंतजार करिये.. या नहीं तो नजदीक के कैंटीन में चाय पीकर आईये..."

"नहीं मैं यहाँ बैठती हूँ..." कहते शाजिया ने एक कुर्सी पर जम गयी।

पूरे चालीस मिनिट बाद घंटी बजने पर चपरासी फिर अंदर गया और अधिकारी जिसका नाम है समीर खान से बोला "साहेब आपसे मिलने कोई लड़की आयी है..."

"लड़की...?" उसने आश्चर्य से पुछा....

"हाँ साहब..."

"लड़की या औरत..."

"लड़की है साहेब... सांवली है लेकिन एक दम कड़क..." चपरासी जिसे समीर खान के आदत मालूम है... दांतें दिखाते बोला।

"पागल कहीं के... उसे अंदर क्यों नहीं भेजा...?"

"साहेब आपही तो कहेथे की किसी भी विजिटर को कम से कम आधा घण्टा बिठाने को..." चपरसी डरते, झिझकते बोला।

"ब्लडी फूल...." समीर खान रुका और फिर बोला "खैर.... उसे अंदर बेजो..."

चपरासी बहार आया और शाजिया को अंदर भिजवाया...

"सर नमस्ते..." शाजिया ने सर झुकाकर नमस्ते कही और उसे देखने लगी।

समीर खान ने सर नवाकर कहा "प्लीज कम; टेक युवर सीट..." उसके सामने पड़े कुर्सियों की तरफ इशारा करते बोला।

शाजिया बैठ गयी और अपने हाथ मलने लगी।

'वाह, साली क्या मॉल है...' यह सोचते समीर ने उसे परखा जब वह अंदर आ रहीथी तो ही उसके खुले जांघें देख कर ही उसकी पैंट में खलबलि मची।

चमकती आंखे, सतुवा नाक्, पतले गुलाबी होंठ, छोटीसी ठोढ़ी (chin), गर्दन लम्बी.. और उसकी छोटी छोटी चूचियां... देख कर 'मस्त मॉल है' सोचते पुछा..."यस...."

"सर... मेरा नाम शाजिया है... आपके पास एक फाइल है... उसे लेन के लिए मेरे मामा ने मुझे बेझे हैं.."

समीर शाजिया की चमकती आँखों को देखते पुछा..."क्या नाम है तुम्हरा मामा का...?"

"राज जी है.. वह रियल्टार हैं..."

समीर अपने सीट से उठा और फाइलिंग कैबिनेट के अंदर से एक फाइल निकला और अपने आप् में बुद बुदाया... 'यस हियर इट ईस' वह फाइल लेकर वापिस अपने सीट पर बैठा और फाइल खोल कर देखने लगा ।

कोई दस मिनिट तक फाइल देखने का बहाना कर वह शाजिया कीओर देखता बोला ... "इसमें कुछ खामियां है... उसे पूरा करने के लिए कहा था उनसे..."

"यस सर.. उसे पूरा करने के लिए ही मैं यहाँ हूँ..."

"अच्छा.. तुम्हे मालूम है.. क्या करना है...?"

"नो सर... मामाजी कह रहे थे की आप मुझे समझायेंगे..."

समीर एक बार फिर शाजिया को परखा और अपने आप में सोचा... 'क्या यह लड़की मुझे झेल पायेगी...?' वह अपने हलब्बी लंड के बारे में सोचते शाजिया से बोला "बाहर कार पार्किंग के पास ठहरना... मैं अता हूँ..."

"सर वह फाइल..." शाजिया रुक गयी।

"मैं ले आता हूँ..."

"थैंक्यू सर..." कह कर शाजिया बहार आगयी और कार पार्किंग की ओर बढ़ी।

-x-x-x-x-x-
 
दस मिनिट बाद समीर खान अपने हाथ में एक फाइल लेकर पार्किंग पर आया, और शाजिया को देख क्र कहा "चलो..." और वह अपनी कारकी ओर चला। शाजिया उसके पीछे पिछे चलने लगी। समीर एक एस्टीम कार कि डोर (door) खोल कर अंदर बैठते शाजिया से कहा "बैठो..." कहते सामने का पैसेंजर सीटकि ओर दरवाजा खोला। शाजिया झिझकते अंदर बैठी। समीर खान ख़ामोशी से कार चलाने लगा। दोनों खामोश बैठे थे। कुछ देर बाद....

"सर हम कहाँ जा रहे है...?" शाजिया पूछी।

"हमारे घर..."

"क्यों...?"

तुम्हारे मामा के फाइल के खामियां दूर करने..." उसके बाद शाजिया खामोश बैठी रही।

दो तीन मिनिट बाद समीर पुछा..."क्या नाम है तुम्हारा...?"

"शाजिया...." शाजिया जवाब दी। शाजिया वह नाम है जब राव (राज और शाजिया 2) के सामने राज ने शाजिया का पिरचय कराया था। शाजिया वही नाम का उपयोग कर रही है।

"क्या कर रही हो...?"

"इंटर हो गया.. अब डिग्री में एडमिशन लेनी है..."

"इंटर...." वह चकित होते उस से बोला "क्या उम्र है तुम्हारी...?"

"उन्नीस... वर्ष... 19 years"

"तुम तो उन्नीस वर्ष की और इंटर कर चुकी लड़की दिखती ही नहीं हो... तुम्हे देख कर कोई भी यही कहेगा की कोई नवीं या दसवीं की लड़की होगी और उम्र तो १६ से ज्यादा दिखती नहीं हो तुम" कहते उसने उसके नंगे घुटने पर हाथ लगाया।

शाजिया सकुचाते "मेरा बॉडी ही वैसा है सर..." बोली और फिर पूछी... हम आपके घर क्यों जारहे हैं...?"

"मालूम पड जायेगा... जल्दी क्याहै...?' कहते उसने अपना हाथ ऊपर करते जांघ पर घुमाया। शाजिया के शरीर में एक सुर सूरी हुई। वह समीर के हाथ को रोकने का प्रयास करती बोली।

"सर नहीं...." समीर अपना हाथ निकाल नहीं वहीँ रख के रखा। शाजिया ने दुबारा प्रतिरोध नहीं किया।

पंद्रह मिनिट बाद वह लोग समीर के घर पहुंचे। समीर दरवाजे का ताला खोलने लगताहै तो शाजिया पूछी... "घर में कोई नहीं है क्या...?"

"नहीं...फिलहाल मैं अकेला हूँ.. मेरी पत्नी डेलिवरी के लिए मइके गयी है... एक बेटा है 5 साल का.. वह भी उसीके साथ..."

दरवाजा खोल कर दोनों अंदर आते है और समीर शाजिया को सोफे पर बिठाता बोला "दस मिनिट; मैं फ्रेश होकर आता हुं.." कहा और अंदर चला गया। कोई 15 मिनिट बाद यह लुंगी और कुर्ता पह्ने हॉल में आया और साइड सोफे पर बैठ गया। दो तीन मिनिट बाद वह फिर किचेन की ओर चला। शाजिया खमोशी से बैठ के घर को देख रही थी। घर बड़ा है.. और सलीक़े से सजी है। हॉल में कुछ तस्वीरें और कुछ पेंटिंग्स भी लगे है । उन तस्वीरों में, एक तस्वीर में एक 30, 32. वर्ष की सुन्दर युवती और उसे साथ एक छोटा बच्चे का भी है। 'शायब इनकी पत्नी और बेटा होंगे' शाजिया सोची।

"शाजिया यह लो चाय..." समीर उसे एक कप थमाते बोला।

"इसकी क्या जरूरत थी सर..." वह सकुचाते बोली और कप लेली। फिर दोनों के बीच कोई वार्तालाप नहीं हुई। ख़ामोशी से चाय सिप कर रहे थे।

दोनों ने चाय ख़तम किये और कप साइड टेबल पर रखे।

"तुम्हारे मामा ने वास्तव में नहीं कहे काम के बारे में...?"

"नो सर..."

"hooooon" समीर बोला और उसे अपने यहाँ बुलाया "शाजिया यहाँ आना..."

शाजिया झकते अपने यहाँ से उठी और समीर खान के पास आयी।

समीरने शाजियाको एकबार ऊपरसे निछे तक देखा और उसका कलाई पकड़ कर अपने साइड में बिठाया... और उसके कंधे के गिर्द अपना हाथ लपेटकर उसके गाल को चूमा।

"सर, यह क्या क्र रहे है आप...?" शाजिया बोली।

"वही.. जो काम अधूरा रह गया था...जिस से फाइल की खामियां दूर हो..."

"लेकिन...: शाजिया कुछ बोल रही थी की समीरने उसे झट अपने ऊपर खींचा, जिस से शाजिया के छोटे नितम्ब उसके गोद में जम गए।

"सर.. छोड़िये.. यह सब गलत है..." शाजिया बोली, लेकिन अपने आप को छुड़ाने की कोशिश नहीं की।

"अच्छा..शाजिया एक बात बताओ.." वह अपने हाथ शाजिया कन्धों पर रख कर पूसा।

शाजिया सिर उठाकर उसे देखि।

"तुम्हारे मामा ने तुमसे क्या कहे...?"

"यहीकी आप एक फाइल देंगे.. उसे लेआना.. और उस फाइलकी जो खामियां है उसे ठीक करने में मुझे आपकी सहायता करनी है। मैं जब पूछीकि कैसे तो उन्होंने कहा आपको मालूम है और मुझे आप जैसा बोले वैसे करना है..."

"यही कहे है या और कुछ"

"जी नहीं...और कुछ नहीं कहे..."

"तो तुम तुम्हारे मामा जैसे बोले वैसे करोगी..."

"हाँ...."

"तो जब मैं कुछ कर रहा हूँ तो तुम मुझे क्यों रोक रही हो...?

"लेकिन सर यह गलत है..."

"देखो यही एक तारीखा है तुम्हारे मामा के फाइल को दुरुस्त करने का... अब तुम सोचलो फाइल दुरुस्त करना या नहीं..."

"सर लेकिन..."

"देखो शाजिया; इसमें जोर जबरदस्ती नहीं है... तुम चाहो तो फाइल तुम्हे अभी देदेता हूँ... without signature तुम फाइल लेजा सकती हो" समीर शाजिया के आँखों में देखता बोला।

"सर मैं ऐसा कभी नहीं की है..."

"हर काम का एक पहल होती है.. समझो ये तुम्हारा पहल है..."

शाजिया खामोश रही। समीर खान समझ गया की लड़की मानेगी। हुआ भी यही... शाजिया सिर झुका कर धीमें स्वर में बोली..."ठीक है..."

"क्या ठीक है...?"

"में आप जैसा बोले वैसा करूंगी..."

"शाबाश यह हुई न बात.. चलो जरा हंसकर दिखाओ..."

शाजिया समीर की ओर देखकर एक चित्ताकर्षक ढंगसे मुस्कुरायी। समीर अपने हाथ पैलाया.. और शाजिया शर्मसे लाल होती उसके बाँहोमें आगयी। वह उसे गोदमें बिठाकर उसे चूमने और चाटने लगा... शाजिया शर्माने का नाटक करते उसके चुम्बनों का आनंद ले रहीथी। समीर उसके गर्दनपर किस करते, एक हाथ से अपने गोद में बैठे शाजिया कि स्कर्ट ऊपर उठा रहा था तो दूसरे हाथ को उसके छोटे छोटे गुटली पर फेर रहा था। इतनी जवान लड़की के साथ यह सब करते समीर अपने आप में नहीं था।

"शाजिया.. वूं..." कहते समीर अपने होंठों को आगे बढाया... तो शाजिया ने उसे अपने होंठों में लेकर चूमने लगी। फिर कुछ देर बाद समीर अपना जीभ उसकी होंठों पर फेरा... शाजिया के होंठ समीर के जीभ के स्वागत के लिए खुल गए हैं। समीर का जीभ शाजिया की मुहं के अंदर explore करने लगी। उसे इस खेल में मजा आरहा था। उत्तेजना में वह समीर को जोरसे लिपटने लगी।

"उसका लिपटना देख ते ही समीर समझ गया की लड़की अब जो बोले वह करेगी।

"शाजिया कैसी है...?" उसके नन्हे चूची को हाथ नीचे दबाता पुछा।

शाजिया ने कोई जवाब नहीं दी सिर्फ उस से जोरसे लिपटने लगी।

"यह क्या है...?" उसकी चूची को दबाता पुछा... वह इस लड़की से जी भर कर खेलने को सोचा।

शाजिया शर्म से लाल होती अपना सर झुकाली।

"अरे भाई कुछ तो बोलो.. यह क्या है...?" उसने चूची को जोरसे दबाते पुछा।

"च.... चू ....च...ची...." धीरे से बोली।

"अच्छा..तो यह क्या है...?" सनीर ने शाजिया कि स्कर्ट के नीचे हाथ डालकर उसकी उभार को जकड़ते पुछा...

"छी... सर... आप गंदे है..." वह उसके हाथ को निकालने की कोशिश करते बोली।

समीर और जोर से उसके बुर को जकड़ा और उसके कान में फूस फुसाया ... "बोलो..यह क्या है...?"

"छी... मुझे नहीं मालूम..." वह सर दुसरी ओर करके कही।

"जब तक तुम बोलोगी नहीं मैं यह नहीं छोडूंगा..." उसकी बुर को पकड़कर गाल को चूमता बोला। शाजिया कुछ देर नखरे करती रही और फिर मन्द्र स्वर में बोली..."चू...त.... बुर..." शाजिया को भी इस खेलमे मजा आने लगी। राज के साथ मौजमस्ती करने पर भी वह ऐसा खेल कभी नहीं खेला।

"गुड...अंग्रेजी में क्या कहते हैं मालूम...?"

शाजिया अपनी नितम्ब उसके अकड़ रहे डंडे पर दबाती बोली "पूसी, कंट, वजिना...."

समीर को भी लड़की से ऐसे खेल खेलने में मजा आने लगा...वह शाजिया का सारा मुहं को चाटने लगा। दोनों हाथों से उसके चूची दबाता पुछा... "लंड क्या होती है मालुम.. कभी देखि हो....?"

शाजिया ने शर्माने का नाटक करते सर झुकाली।

"अच्छा तो देखि हो... किसकी देखि...?"

"मेरे बड़े भैया को..." वह झूट बोलदी।

"कैसे....?" अब समीर का हाथ फिर से शाजिया के स्कर्ट के नीचे घुसी और पैंटी के साइड से उसकी नंगे दरार पर ऊँगली चलाता पुछा...

शाजिया ने उसकी ऊँगली के लिए अपने जाँघे खोल ते बोली "एक रात भैय्या भाभी को...." वह रुक गयी।
 
"भाभी को करते देखि हो...?" उसने 'हाँ...' में सर हिलायी।

"क्या कर रहे थे...?" ऊँगली को अंदर डालने की कोशिश करते पुछा।

"स्स्स्सह्ह्ह्हआआ... द... र्द...सससस..." वह दर्द से तिल मिलायी।

समीर को आश्चर्य हुआ की उसकी बुर इतनी तंग होगी की ऊँगली से भी उसे दर्द होने लगा। "शाजिया ... तुम.. तुम... कुँअरि हो...?" पुछा।

दर्द से तिल मिलाते उसने 'हाँ' में सर हिलायी समीर को आश्चर्य हुआ की उसकी बुर इतनी तंग होगी की ऊँगलीसे भी उसे दर्द होने लगा। "शाजिया ... तुम.. तम... कुँअरि हो...?" पुछा। उसे मालूम है की आज कल लड़कियां जवान होते ही, चौदह, पंद्रह की होते होते ही स्कूल में हि अपने क्लास मेट्स से अपना सील तुडवते है...

शाजियाने धीरे से 'हाँ'' में अपना सर हिलायी। "My God I got a virgin cunt" वह बोला! शाजिया खामोश रही, कुछ बोली नहीं...

"तो बोलो क्या कर रहे थे तुम्हारे भइया और भाभी?" अपना ऊँगली चलना जारी रखते कहा।

"सर, मैं 19 की हूँ और मैं वैसे काम करि नहिं लेकिन...लेकिन सेक्स के बारे में थोड़ा बहुत जानती हूँ" वह नाज नखरे करते बोली।

"तो बोलना... क्या कर रहे थे...?"

"भैया भाभी के टांगे पसारकर अपना डंडा भाभी की चूतमें घुसा रहेथे..." वहभी अब समीर को ख़ुश करने के लिए बोली।

"अब तक कितने लंड दीखि हो...?" वह बात को घुमाकर पुछा।

"कितने क्या.. एक ही, मेरे भैय्या का... मेरा छोटे भाई का भी देखि हूँ.. लेकिन उसका बहुत छोटा है.. और नरम भी थी... भैय्या की तरह उसका कड़क नहीं थी।

"मेरा देखोगी..." उसे अपने गोद से उठाकर अपने सामने खड़े करते पुछा।

शाजिया की आँखों में एक चमक आयी लकिन जल्दी ही लुप्त होगयी। उसने शर्म से ना में सर हिलायी।

"क्यों....?"

"मुझे शर्म अति है..."

"अरे... इस शर्म को दूर करने के लिए तो देखना है..." कहते उसने झट अपना लुंगी खींच डाला।

सहज ही (Automatically) शाजिया के नजरें उसके जाँघों के बीच गयी। समीर का फन फनाते लंड को देखते ही उसकी सांसे एक क्षण के लिए रुक गए। उतना लम्बा था उसका.... 'यह तो लग भाग राज अंकल के जैसे ही है...' वह दिल में सोच रही थी।

समीर ने उसे अपने लंड को देखते पाया और पुछा "पसंद आया...?"

"यह तो बहुत बड़ा है..." वह सीने पर अपना हाथ रखती बोली।

"तुम्हे कैसा मालूम की यह बड़ा है.. किसी का देखि हो...?" अपने औजार को मुट्ठी में दबाते पुछा।

"अभीतो कहीं हूँ.. मैं मेरे भैया का देखि हूँ..."

"इसे चूसोगी...?"

"मुझे नहीं मालूम, मैंने ऐसे कभी नहीं किया..."

"मैं सिखादूँगा..." शाजिया ऎसे नखरे करि की वह असमंजस में है.. सर हिलादी।

"आओ... मेरे घुटनों के बीच बैठो..."उसने अपने घुटने चौड़ा करते बोला।

शाजिया अपने घुटनों पर बैठने जा रहिथी तो बोला "ठहरो..." नेहा रुककर उसे दखने लगी। समीर ने उसे समीप खींचा और एक झटके में उसका स्कर्ट और टॉप निकल फेंका।शाजिया अब उस चुड़क्कड़ के सामने सिर्फ पैंटी और ब्रा में रह गयी। समीर ने लालसा भरे नजरों से शाजिया की पतले जांघो को देखता उसे घुटनों पर बिठाया और अपना उसके मुट्ठी में थमा दिया।

शाजिया महसूस करि की समीर का उसके मुट्ठी में फुल है और गर्म भी है। "इसे मुहंमें लेलो और चूमो, चाटो"

शाजिया ने पहले उसके सुपाडे को चूमि और फिर झिझकने का नाटक कर उसे जीभसे टच करि।

"uuzzzzsssss...." समीर के मुहंसे एक मीठी सिसकारी निकली। "शाबाश.. वैसे हि करो.. जो तुम्हारे दिल में आया वो करो..." कहा और उसके ब्रा के हुक खोल् कर उस नन्ही, नंगी चूची पर हाथ फेरा।

"ममममममअअअअ..." शाजिया बोली।

"क्या हुआ....?"

"अच्छा लग रहा है..."कही और अबकी बार जीभ को समीर के सारे लम्बाई पर चलाने लगी।

फिर उसने समीर के डंडे को मुहं में ली और चूसने लगी। समीर नीचे से उसके मुहं में दकके देने लगा। हर दकके के साथ उसका मुस्सल थोड़ा थोड़ा शाजिया की मुहं में जा रही है। चूसते, चूसते शाजिया ने उसके अंडकोषों को भी सहलाने लगी।

"शाबाश.. बहुत अच्छे जल्दी ही सिख गयी... करो.. वैसे ही करो.. और अंदर लेलो.. मैं क्या कर रहा हूँ मलूम...?" समीर उसके मुहं में अपना मुस्सल पेलते पुछा...

"क्या कर रहे है...?" मासूमियत से पूछी। उसकी मासूमियत पर समीर फ़िदा होगया और बोला "मैं मुहं को चोद रला हूँ..."

"छी... मुहं भी कहीं चोदने के लिए है क्या...?" वह आंखे मिचकाते पूछी।

"तुम कितनी भोली हो शाजिया.... चूत के साथ साथ मुहं को और गांड को भी चोदाजाता है..."

"हाय राम.. यह क्या....? गांड तो हगने की जगह है.. क्या उसे भी..."

"हाँ उसे भी... तुम गांड मरवावोगी...?" ऐसे बातों में दोनों ही बहुत उत्तेजित होने लजे। अब दोनों ही चरम सीमा पर पहुंचे। "चूसो...और चूसो... वेरु गुड... तुम तो बहुत अच्छी चूसती हो...हहहहहहह.. मेरा हो गया.. बस होगया..." कहते उसने शाजिया की मुहं में उंडेलने लगा...

एक दम से हुई इस आक्रमण से शाजिया confuse हो गयी... गरम गरम गाढ़ा वीर्य से उसका मुहं भरने लगा... उसका मॉल इतना जयदा था की शाजिया पूरा निगल न सकी.. ज्यादा सा भाग मुहं से बाहर उसके लबों पर वहां से उसकी बदन पर बहने लगी।

"यह क्या सर अपने मेरे मुहं में ही....." बोलते बोलते उसने अपने शरीर परसे उस वीर्य को ऊँगली से पोंछने लगी।

"कैसा है...? टेस्टी है ना?"

"नमकीन है और थोडासा कसैला पैन भी..." जीभ से होंठों को चाटते बोली।

चलो बहुत देर हो गयी है.. अब मुझे चोदने दो..."

"ओह नो.. सर..."

"क्यों क्या हुआ...?" जब चोदुँगा तो और अच्छा लगेगा..." इसके निप्पल को उँगलियों में लेकर मसलता बोला।

"नहीं...." वह घबराने का नाटक करते बोली। लेकिन एक ओर उसके बुर में खुजली हो रहीथी और वह चुदाने को बेसब्री से इंतजार कर यही थी।

"क्यों....?"

"आपका बहुत लम्बा और मोटा है.. मेरी फट जाएगी.."

"धत पगली... ऐसा कुछ नहीं होता..."

"नहीं... मुझे डर लग रहा है..."

"इधर आओ कमरे में चलते हैं..." समीर कहा और उसे गुड़िया कि तरह उठाकर कमरे में चला। उसे पलंग पर चित लिटाकर उसका पांटी भी निकाल दिया। उसकी चिकनी चूत फूली फूली थी। शाजिया अब उसके सामने मादरजात नंगी पड़ी थी। इतनी देर से उस से खेलने की वजह से अब समीर भी अपने आपको रोक नहीं पा रहा है।
 
Back
Top