• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

ले मेरी रानी मौज कर अंकल के चुदाई से.. अब तुम जब चाहो तब एक बार फ़ोन कर देना और यहाँ आजाना.. तिम्हे स्वर्ग दिखा दूंगा... ममम.. स्नेह.. अब रहा नहीं जाता.. छोड़ रहा हूँ.. बोलो कहाँ छोडूं.. अंदर या बाहर" वह पुछा।

"अब मैं सेफ पीरियड में हूँ अंकल.. मैं सुरक्षित हू.. अंदर ही छोड़िये... मेरी सहेली सरोज कहती है की मर्द का गर्म वीर्य अंदर लेने से राहत मिलती है.. वह आनंद मैं चाहती हूँ.. डालिये अंदर ही..आआह्ह्ह्हह्ह.. मेरा भी होगया अंकल.. मैं झड़ रही हूँ..." कहते वह भी झड़ गयी.. साथ ही साथ वह अंकल का गर्म लस लसे का आनंद भी ले रही थी।

उसके बाद उस दिन राज से उसने एक बार फिर से चुदवायी। संतृप्त होकर शाम को वह अपने घर के लिए निकली।

"शाजिया... सच कहना मजा आया...?" राज पुछा।

"हाँ अंकल बहुत मजा आया..पहले दर्द बहुत हई थी पर बादमें बहुत आनंद आया.. बादमें तो मैं स्वर्ग में विचर रही थी। थैंक्स अंकल..." शाजिया बोली।

"थैंक्स तो मुझे बोलना चाहिए...वैसे फिर कब मिलोगी...?"

"जल्दी ही मुलाकत होगी अंकल बाई.. बाई... वह बोलकर बाहर को निकली।
 
उस दिन संडे था। सुबह के दस बजकर पंद्रह मिनिट हुए हैं। शाजिया किचन में खाना बना रही थी और उसकी अम्मी कुछ कपडे सिलवाई कर रही थी। शाजिया ने दिल में सोचि थी की वह आज कहीं नहीं जाएगी, और घर में आराम करेगी। इतने में उसकी मोबाइल बजती है। शाजिया ने देखा कि वह कॉल राज का था।वह एक क्षण हीच किचाई और फ़ोन उठाकर बोली "हेलो... कौन...?"

"अच्छा अब मैं कौन होगया...?" उधर से राज की आवाज शिकायत भरे स्वर में आयी।

"ओह, अंकल.. आप... सॉरी.. में खाना बनारहि थी तो आपकी फ़ोन बजी जल्दबाजी में मैं आपका नाम नहीं देखि... सॉरी" वह मृदु स्वर में बोली। वह राज को कुपित नहीं करना चाहती थी।

"डार्लिंग.. कितने दिन होगये तुम मुझसे मिलकर.. आज मिलोगी...?"

'सच में ही एक महिने के ऊपर होगये राज अंकल से मिलकर' शाजिया सोची और बोली "बोलिये अंकल..."

"डार्लिंग... बोलना क्या है.. कोई तुमसे मिलने तड़प रहा है...?"

स्नेह को मालूम है की कौन तड़प रहा है.. मुस्कुराते पूछी.. "कौन तड़प रहा है अंकल...?"

"डार्लिंग आजाओ तो उस से मिलवा देता हु... बेचारा बहुत एक्ससिटेड है तुमसे मिलने के लिए..."

"अंकल फ़ोन पर डार्लिंग या डियर मत बोलो... मेरे साइड में ही अम्मी ठहरी है... हाँ आज मिलते है.. कहाँ मिलना है...?" फिर फ़ोन पे बोली... "कोई नहीं अम्मी.. मेरी सहेली है.. पिक्चर देखने चलने को कह रही है..." उधर से राज समझ गया की वह अम्मी से बहाना बनारही है.. और "घर आजाओ..." वह फूस फुसाया।

"ठीक है.. एक घंटे में आती हूँ..." कही और अम्मी की ओर घूम कर बोली... "अम्मी... मेरी सहेली पिक्चर के लिए बुला रही है.. मै चलती हूँ.. सब खाना बन गया है..."

अरे बेटी खाना तो खाके जाओ..." उसकी अम्मी बोली।

"नहीं अम्मी.. मेरी सहेली के साथ खालूंगी..."

फिर वह तैयार होकर पहले वह लेग्गिंग्स और कुर्ती पहन ने को सोची, लेकिन कुछ सोचकर उसने सलवार सूट पहनी और अम्मी की bye .. bye.. कहकर निकल पड़ी।

///////---------\\\\\\\
 
घंटी की बजने पर जब गंगराम ने डोर खोली तो सामने शाजिया को पाया।

"ओह शाजिया... डार्लिंग.. वेलकम..." वह कहा और शाजिया को अपने आलिंगन में लेकर उसके गालों को चूमा।

"ओह अंकल.. हाउ स्वीट ऑफ़ यू..." कही, अपने बाँहों को राज के छाती के गिर्द लपेटकर अपने नन्ही चूचीयों को छाति पर दबाते उसके गाल को चूमि।

"और तुम भी बहुत स्वीट हो डियर..." राज कहते शाजिया के कमर के गिर्द हांथ लपेट उसे अंदर ले चला। दोनों हाल में आकर सोफे पर बैठे।

"शाजिया तुमने एक महीने तक तड़पाया..." राज उसे देखता बोला ।

"सॉरी अंकल... बीच मे दो संडे को भी डॉक्टर साब ने आने को बोले.. उसिलिये... और एक संडे को मेरी मेंसेस चल रही थी... वैसे आप कह रहे थे की कोई मेरे लिए तड़प रहा है..कौन है वह..." मुस्कुराते पूछी।

]

"मेरे पास आओ बताता हूँ..." वह सिंगल सोफे पर बैठे हे जब की शाजिया 2 सीटर सोफे पर। वह अपने जगह से उठी और राज के पास गयी। वह उसकी कलाई पकड़ कर खींच अपने गोद में बिठाया...

"ओह तो यह है जो मुझसे मिलने तड़प रहा है..चलो .. मैं आज उसकी तड़प को मिठा देति हूँ...." वह अपने कूल्हे राज के उभरते डंडे पर दबाती बोली।

राज उसके कमर में हाथ डाल उसे ऊपर ठीक से खींचा और उसके होठ चूमते पूछा.. "क्या लोगी..?" पहली बार जब वह चुदी तो राज ने उसकी दर्द कम करने के लिए उसे एक पेग व्हिस्की पिलायी थी... तब से वह कभी भी राज से मिली राज उसे एक, डेढ़ पेग पिला देता था। इसीलिए पुछा।

"अभी नहीं अंकल बाद में देखते है..."

"अरे... व्हिस्की नहीं तो चाय तो चलेगा न..?"

"हाँ.. चाय चलेगी... लेकिन चाय मैं बनाउंगी ..."

"ठीक है बाबा...चलो ..." दोनों उठकर किचेन की ओर चलते हैं।

शाजिया किचेन प्लेटफार्म के पास ठहर कर चाय बना रही थी और राज शाजिया की कमर में हाथ डालकर उसकी गर्दन पर चूम रहा था।

"आआह्ह्ह्ह.. अंकल.. हाहा। .. वहां मत चूमिए..." वह तड़पते बोली।

"क्यों...? क्या हुआ...?" अपना चूमना जारी रखते; अब उसने शाजिया की छोटी चूची की अपने हथेली के नीचे दबाते पुछा..."

"नहीं.. ऐसा मत करिये प्लीज....गुद गुदी होती है.."

"गुद गुदी ही तो होती है न.. कुछ और तो नहीं...?"

"कुछ और भी होती है..."

"अच्छा.... क्या...?" उसकी पूरी छाती को टीपते पूछा..."

[IMG]]

शाजिया लाज से शरमाने का नखरे करते बोली... "जाओ अंकल मैं आपसे बात नहीं करूंगी... आप बहुत बेशरम हो गए है.. चलो चाय बनगयी है हॉल में चलते है..." कही और एक कप अंकल को थमाकर खुद एक ली और हाल में आकर सोफे पर बैठ गये। पहले की तरह राज ने शाजिया को फिर अपने गोद में बिठाया...

दोनों एक दूसरे को प्यार भरी नज़रों से देखते चाय पी रहे थे। पूरे एक महीने के बाद मिलने से शाजिया में भी excitement थी। चाय पीकर कप साइड में रखे और राज ने शाजिया की कमीज ऊपर उठाया और पहले उसकी ब्रा की चूचियों के ऊपर खींच कर उसके छोटे छोटे चूची पर हाथ फेरा।

"आआअह्हह्हह" अंकल कहते वह छटपटा रही थी।

राज अपने सर झुका कर शाजिया की चूची को पूरा मुहं में लिया और चुसकने लगा...

शाजिया ने अंकल की सर को अपने सीने से दबा लिया

"क्यों जानू.... कैसी लग रही है...?" वह एक को चूसता दूसरे की घुंडी को उँगलियों में मसलता पूछा।

शाजिया ने कोई जवाब नहि दिया बल्कि सिसकने लगी।

जैसे जैसे राज उसे चूस रहा था.. उसका डंडा शाजिया के नितम्बों के नीचे उभर कर उसे ठोकर मार रहा था । जब अंकल का उस्ताद अपने गांड में चुभते ही अब शाजिया से रहा नहीं गया। वह राज के गोद से उतरी अपने घुटनों पर नीचे कार्पेट पर बैठ कर अंकल की लुंगी हटा दी।

राज अंदर कुछ पहना नहीं था तो उसका नाग सिर उठाकर फुफकार रहा था । पूरा तनकर छत को देख रहा था । उसका सामने की चमड़ी पीछे को रोल होकर हलब्बी गुलाबी सुपाड़ा tube light की रौशनी में चमक रहा था ।

शाजिया उसकी गोद में झुक उस नाग को मुट्टीमे जकड़ी.. उसे एक दो बार प्यार से चूमि और फिर अपने जीभ उस सुपाडे की गिर्द चलाते एक बार तो उसने उस पिशाब वाली नन्हे छेद में कुरेदी।

[IMG]]

"स्स्स्सस्स्स्स...शाजिया..डियर..मममम...हहहहह..." कहते राज छटपटाया...

"क्या हुआ अंकल...?" कहती शाजिया ने उसकी वृषणों को हथेलि में लेकर मसलने लगी।

"Saleeeeeeeee...." राज एक बार फिर गुर्राया।

उसने अपने ऊपर झुकी शाजिया के सलवार का नाडा खींचा तो सलवार उसके घुटन पर गिरी। फिर उसने उसकी पैंटी का भी वही हाल कर दिया। वह भी सलवार के साथ उसके घुटनों से निकल कर ज़मीन पर पड़ी है राज ने पहले उसके नन्हे कूल्हों पर दोनों हाथ फेरा और फिर एक हाथ की ऊँगली पीछे से उसकी बुर मे पेल दिया।

"आआह्ह्ह्ह..." शाजिया ने अपने कूल्हे और फैलाई । अब राज की दायां हाथ की ऊँगली शाजिया की बुर को कुरेद रही तो बायां हाथ की तर्जनी ऊँगली से वह उसकी अन चुदी गांड को कुरेद रहा था।

राज की नजर उसकी छोटी नितंबो वाली गांड पर पहले से ही थी। दो तीन बार उसे लेने की भी कोशिश किया लेकिन हर बार शाजिया ने डर के मारे मना करती रही। वह शाजिया को रुष्ट नहीं करना चाहता था। कारण उसके मन में लम्बे दिनों तक चुदने लायक शाजिया के साथ साथ शाजिया की बहन राबिया जो 18 वर्ष की है और उसकी सहेली सरोज को भी चोदने का इरादा बना लिया था। इसी लिये वह शाजिया को कुपित होते नहीं देखना चाहता था।

अपने ऊपर चल रही दोहरे आक्रमण से शाजिया उत्तेजित होने लगी और अपनी गांड और चूत को राज की उंगलियों पर दबाने लगी।

[IMG]]

अब गांगाराम की ऊंगली उसकी बुर को चोदने लगे.. वह उसे फिंगर फ़क कर रहा था... इधर शाजिया राज की लंड को जोर जोर से चूस रही थी।

वह एक दूसरों पर भावविहल्व हो रहे है की... दरवाजे की घंटी बजी।

दोनों घभरा कर अलग हुए और एक दूसरे को देखने लगे।

"इस समाय कौन आ गया...?" राज होंठों में बुद बुदाया; और फिर शाजिया को अंदर जाने का ईशारा करा।

शाजिया अपनी सलवर उठाकर नाडा बांधते अंदर को भागी। गांगाराम भी अपने आप को व्यवस्तित करा और अपनी लुंगी को सीधा किया बालों मे उँगलियों का कंघा फिराते दरवाजे की और बढ़ा। इतने मे एक बार फिर घंटी बजी।

-x-x-x-x-x-x-x-
 
राज ने दरवाजा खोला और सामने ठहरे आदमी को देख कर बोला। "...अरे राव साब ... आप.. आईये.. अंदर आईये.." कहते उसे अंदर बुलाया।

दोनों अंदर आकर बैठे। टू सीटर सोफे पर आने वाला बैठा तो उसके दायां तरफ के सिंगल सीट सोफ़े पर राज बैठा था।

"बोलिये राव साब कैसे आना हुआ....?" राज ने उसे देखते पुछा। उनकी बातें अंदर से शाजिया सुन रही थी।

"वही राज जी.. वह डील फाइनल करना था... बस इसीलिए चला आया..." आने वाला जिसे रावसाब करके राज बुला रहा था कहा।

"लेकिन राव साब रेट वही रहेगा..."

"ठीक है.. जब तुम उसी रेट पर अड़े हो तो वैसे ही सही..." राव साब एक लम्बा सांस लेते बोला।

"दीपा बेटी...." राज ने अंदर की ओर देखते बुलाया। अंदर ठहरी शाजिया समझ गयी की अंकल उन्हें ही बुला रहे हैं! वह यह भी समझ गयी की अंकल नहीं चाहते की आनेवाले को उसका असली नाम न मालूम हो...

"आयी अंकल..." कहती शाजिया बाहर आयी और सामने वाले को देख कर नमस्ते कहि और राज की ओर देखकर पूछी "क्या है अंकल..."

"बेटी .. दो कप चाय बना देना..."

"जी अंकल..." शाजिया कही और किचेन की ओर चली।

दस मिनिट बाद वह एक ट्रे में दो कप चाय और दो ग्लासों में पानी, कुछ बिस्कुट लायी, सेंटर टेबल पर रखी।

"दीपा बैठो बेटी खड़ी क्यों हो..." राज बोला। शाजिया ख़ामोशी से सामने के सोफे पर सिमिट कर बैठगयी।

राव साब को एक कप चाय थमाता बोला "राव साब यह मेरी भांजी है.. मेरी छोटी बहन की लड़की.... इंटर हो गया है.. अब यह यहीं से ग्रेजुएशन करेगी..." शाजिया का परिचय कराया; और शाजिया की ओर मुड़ कर बोला "दीपा बेटी.. यह राव साब है.. कारोबारी (business man) है..."

शाजिया ने एक बार फिर 'नामसे' कही और राव साब को परखने लगी। वह एक लग भाग 50 के उम्र का आदमी लगता है। सर से गांजा है... सिर्फ साइड और पीछे पतले बाल है... आदमी गोरा है और तोंद भी है। महँगी ड्रेस पहना ही.. शर्ट को टक करा है.. बयां हाथ के दो उंगलियों मे सोने की अंगूठियां है।

कुछ देर वही बैठ कर फिर पूछी "अंकल मैं अंदर जाये क्या...?'

"हाँ बेटी जाओ..." शाजिया उठकर अंदर चली गयी।

पूरा पंद्रह मिनिट बाद राज अंदर आया और शाजिया से कहा.. "शाजिया.. एक अच्छा डील आया है ... मैं डॉक्यूमॉन्ट बनवाने बाहर जा रहा हूँ... एक डेढ़ घंटे में आजाऊंगा... यह आदमी बहुत बिजी रहता है... मेरा आने तक इसे रोक के रखना... डॉक्यूमेंट पर इसके दस्तखत जरूरी है.... यह बातूनी है.. उसके साथ बैठकर उस से बातें करो और उसे मेरे आने तक रोके रखो...उसे कुछ देदेना... चाय.. व्हिस्की.. कुछ भी... लेकिन रोक के रखना... वह चला गया तो उसे फिर से पकड़ना मुश्किल... समझ गयी" शाजिया कि कन्धा तप तपाता बोला।

"जी अंकल..." शाजिया बोली। दोनों बाहर आये और राज रावसाब की ओर देख कर बोला " रावसाब मैं डॉक्यूमेंट बनाकर लाता हूँ, रुकिए.. दीपा आप को कंपनी देगी.. अगर कुछ चाहिए तो निस्संकोच पूछियेगा..." कहा और शाजिया की ओर देख सर हिलाकर चला गया।

-x-x-x-x-x-x-x-
 
राज ने दरवाजा खोला और सामने ठहरे आदमी को देख कर बोला। "...अरे राव साब ... आप.. आईये.. अंदर आईये.." कहते उसे अंदर बुलाया।

दोनों अंदर आकर बैठे। टू सीटर सोफे पर आने वाला बैठा तो उसके दायां तरफ के सिंगल सीट सोफ़े पर राज बैठा था।

"बोलिये राव साब कैसे आना हुआ....?" राज ने उसे देखते पुछा। उनकी बातें अंदर से शाजिया सुन रही थी।

"वही राज जी.. वह डील फाइनल करना था... बस इसीलिए चला आया..." आने वाला जिसे रावसाब करके राज बुला रहा था कहा।

"लेकिन राव साब रेट वही रहेगा..."

"ठीक है.. जब तुम उसी रेट पर अड़े हो तो वैसे ही सही..." राव साब एक लम्बा सांस लेते बोला।

"शाजिया बेटी...." राज ने अंदर की ओर देखते बुलाया। अंदर ठहरी शाजिया समझ गयी की अंकल उन्हें ही बुला रहे हैं! वह यह भी समझ गयी की अंकल नहीं चाहते की आनेवाले को उसका असली नाम न मालूम हो...

"आयी अंकल..." कहती शाजिया बाहर आयी और सामने वाले को देख कर नमस्ते कहि और राज की ओर देखकर पूछी "क्या है अंकल..."

"बेटी .. दो कप चाय बना देना..."

"जी अंकल..." शाजिया कही और किचेन की ओर चली।

दस मिनिट बाद वह एक ट्रे में दो कप चाय और दो ग्लासों में पानी, कुछ बिस्कुट लायी, सेंटर टेबल पर रखी।

"शाजिया बैठो बेटी खड़ी क्यों हो..." राज बोला। शाजिया ख़ामोशी से सामने के सोफे पर सिमिट कर बैठगयी।

राव साब को एक कप चाय थमाता बोला "राव साब यह मेरी भांजी है.. मेरी छोटी बहन की लड़की.... इंटर हो गया है.. अब यह यहीं से ग्रेजुएशन करेगी..." शाजिया का परिचय कराया; और शाजिया की ओर मुड़ कर बोला "शाजिया बेटी.. यह राव साब है.. कारोबारी (business man) है..."

शाजिया ने एक बार फिर 'नामसे' कही और राव साब को परखने लगी। वह एक लग भाग 50 के उम्र का आदमी लगता है। सर से गांजा है... सिर्फ साइड और पीछे पतले बाल है... आदमी गोरा है और तोंद भी है। महँगी ड्रेस पहना ही.. शर्ट को टक करा है.. बयां हाथ के दो उंगलियों मे सोने की अंगूठियां है।

कुछ देर वही बैठ कर फिर पूछी "अंकल मैं अंदर जाये क्या...?'

"हाँ बेटी जाओ..." शाजिया उठकर अंदर चली गयी।

पूरा पंद्रह मिनिट बाद राज अंदर आया और शाजिया से कहा.. "शाजिया.. एक अच्छा डील आया है ... मैं डॉक्यूमॉन्ट बनवाने बाहर जा रहा हूँ... एक डेढ़ घंटे में आजाऊंगा... यह आदमी बहुत बिजी रहता है... मेरा आने तक इसे रोक के रखना... डॉक्यूमेंट पर इसके दस्तखत जरूरी है.... यह बातूनी है.. उसके साथ बैठकर उस से बातें करो और उसे मेरे आने तक रोके रखो...उसे कुछ देदेना... चाय.. व्हिस्की.. कुछ भी... लेकिन रोक के रखना... वह चला गया तो उसे फिर से पकड़ना मुश्किल... समझ गयी" शाजिया कि कन्धा तप तपाता बोला।

"जी अंकल..." शाजिया बोली। दोनों बाहर आये और राज रावसाब की ओर देख कर बोला " रावसाब मैं डॉक्यूमेंट बनाकर लाता हूँ, रुकिए.. शाजिया आप को कंपनी देगी.. अगर कुछ चाहिए तो निस्संकोच पूछियेगा..." कहा और शाजिया की ओर देख सर हिलाकर चला गया।

-x-x-x-x-x-x-x-
 
राव और शाजिया एक दूसरे के आमने सामने बैठ है। कुछ देरी के ख़ामोशी के बाद शाजिया ने ही पूछी "आप क्या करते है अंकल...?"

"मेरा गारमेंट्स की बिज़नेस है..." राव बोला और फिर शाजिया है से पुछा "क्या नाम है बेटी तुम्हारा...?"

"मैं शाजिया हूँ अंकल..." एक क्षण रुकी और बोली "राज जी मेरे मामा है.. मेरी अम्मी का बड़ा भाई...:" राज ने क्या कही उसे याद करती बोली।

"कहां तक पड़ी हो...?"

"इंटर हो गया है.. अब डिग्री करना चाहती हूँ..."

"घर में कौन कौन रहते है...?" राव फिर से पुछा...

"मम्मी, बाबा, मेरी एक छोटी बहन और एक छोटा भाई..."

"तुम्हरे अब्बू क्या करते है...?" उसके पूछने पर शाजिया सोची... 'बाप रे सच में यह तो बहुत बातूनी है' सोचते बोली..."अब्बू एक फैक्ट्री में काम करते है... और मम्मी हाउस वाइफ है..." वह पूछने से पहले बोली।

राव ने अपने फॅमिली के बारे मे भी बोला। उसके एक पत्नी और चार बच्चे है... पहले एक लड़का और लड़की फिर एक लड़का और लड़की। पहले लड़का और लड़की की शादी हो गयी और बाकि के दो पढ़ रहे है।

उसके बाद दोनों के पास क्या बात करना समझ मे नहीं आया... कुछ देर बाद वह बोला "मैं चलता हूँ..." वह उठने लगा.. तो शाजिया बोली.. अरे रुकिए अंकल.. मामाजी आते ही होंगे.. तब तक आप कुछ लीजिये... चाय, कॉफी या कुछ ठंडा ..." वह रुकी।

"यह चाय, कॉफ़ी का समय नहीं अगर व्हिस्की होता तो..." वह भी हिचकिचा रहा था...

"घर में है.. अंकल; (मामाजी) घर में रखते है... अभी लायी.. और शाजिया जल्दी से गयी और एक ट्रे में व्हिस्की बोतल एक गिलास एक कटोरी में ice cubes और कुछ नमकीन ले आयी और टेबल पर रखि।

राव गिलास में व्हिस्की डालते पुछा.. "शाजिया तुम...?"

"ओह नो अंकल.. में नहीं पीती..." वह नाटक करती बोली।

"अरे... आज कल तो middle class ke हर घर में लड़कियां भी लेती है.. मेरे घर में भी मेरी दोनों बेटिया और मेरी बड़ी बहु भी लेती है.. खैर .. कम से कम कोई ठंडा ही लो.. मुझे कंपनी देने के लिए।"

शाजिया अंदर गोई और एक गिलास में फ्रूटी ले आयी और बैठने लगी तो बोला "शाजिया वहां नहीं; मेरे यहाँ बैठो.." राव ने अपनी बगल में सोफा तप तपाया।

शाजिया एक क्षण के लिए असमंजस में रही और धीरे से आकर राव् के बगल में बैठ गयी। दोनों इधर उधर की बातें करते अपने अपने ड्रिंक्स सिप कर रहे थे। राव अपना आधा पेग खतम करके शाजिया से बोला ... "शाजिया डियर. एक गिलास पानी चाहिए थी"। शाजिया अपनी गिलास टेबल पर रखी और पानी लाने किचेन की ओर गयी। राव ने जल्दी से अपने गिलास का व्हिस्की शाजिया के गिलास में उंडेला और फिर अपने गिलास में व्हिसकी डालने लगा। तब तक शाजिया पानी ले आयी।

अपने गिलास की व्हिस्की में पानी मिलाकर एक सिप करा और चटकार लेते बोला .. "उम्दा शराब है.. तुम्हारे मामा तो उम्दा शराब की शौकीन है..." कहा... कहते कहते उसने ठहाका लगाकर हंसा और शाजिया कि कांधों को धीरे से दबाया।

"शाजिया कुछ बोली नहीं.. ख़ामोशी से अपना फ्रूटी सिप करने लगी। उसे फ्रूटी का स्वाद कुछ अलग लगी लेकिन वह समझी की यह स्वाद कूलिंग के वजह से होगी और सिप करने लगी।

राव शाजिया से इधर उधर के बातें करते अपना हाथ नीचे खिसकाया और उसके पीठ को सहलाने लगा.. "अंकल हाथ निकालिये..." वह धीरे से बोली।

"क्यों क्या हुआ डियर...?" वह काम जारी रखते पुछा...

"मुझे अच्छा नहीं लग रहा है..." बोली।

राव कुछ देर ख़ामोशी से रहा और फिर से बोला ... "लगता है तुम्हारे मामाजी तो अभी नहीं आएंगे, मैं चलता हूँ..."

"नहीं अंकल रुकिए तो.. मामाजी आजायेंगे..." शाजिया कही...

"अच्छी बात है.. तुम्हरे बात पर ठहरता हूँ..." कहा एक क्षण रुका और फिर बोला.. "शाजिया.. तुम बहतु सुंदर लड़की हो..." कहते वह झट शाजिया की ओर झुका और उसके गलों को चूम लिया।

"ओह.. अंकल यह क्या कर रहे है...आप..." कहती शाजिया ने अपने गाल पोंछी।

"क्या कर रहा हूँ..? प्यार ही तो कर रहा हूँ... क्यों यह भी पसंद नहीं...?"

"शाजिया को क्या बोले समझमें नहीं आ रहा था... अंकल ने उससे, उसे रोकने को कहे... कहरहे थे डील बड़ा है.. हाथ से न निकले... लेकन यह है की बार बार उठ रह है...' सोच रही थी।
 
"सच में तुम बहतु सुन्दर हो..." वह फिर उसे चूमा। अबकी बार शाजिया ने अपने गाल नहीं पोंछी और राव को बातों में रखने के लिए बोली..."आप झूट बोल रहे है अंकल.... मैं उतना सुन्दर नहीं हूँ... यह मुझे मालूम है.. मैं दुबली पतली हूँ.. और..." वह रुक गयी।

"हाँ... हाँ.. बोलो और क्या...?"

"जी.. कुछ नहीं..."

"मुझे मालूम है तुम क्या कहना चाहती हो.. यहि न की तुम्हारी चूचियां छोटी है.. अरु तुम्हारे कूल्हे छोटे है.. यही न..."

शाजिया सहमकर रह गयी।

"पगली.. तुम अच्छी लड़की हो... तुम्हारे breasts छोटे है तो क्या हुआ.. बहूत लुभावनी है.. और तुम्हारे कूल्हे भी... देखो कितना प्यारे हैं..." कहते राव ने शाजिया को एक गुड़िया की तरह उठाकर अपनी गोद में बिठाया..."

"ओह अंकल छोड़ो मुझे... नहीं तो में मामाजी से कहूँगी..." शाजिया ने उसे ढराने की कोशिश करि।

"बोलो.. उस से क्या होगा.. में तुम्हारे मामा का कस्टमर हूँ... यह तो पक्का है की वह मुझे पुलिस में नहीं देंगे.. उल्टा मैं यह जो सौदा करने वाला हूँ.. उसे कैंसिल कर दूंगा..."

राव के आखरी शब्द सुनते ही.. वह घबरा गयी। अंकल ने उसे रोकने के लिए कहे और वह है की डील ही कैंसिल करने को कह रहा है... वह सोचमे पड गयी। जैसे राज शाजिया को कुपित नहीं देखना चाहता वैसे ही शाजिया भी अंकल को तकलीफ नहीं पहुंचना चाहती... अंकल के मिलने से.. उसे ज़िन्दगी के मजे मिल रहे है.. पैसे को पैसा.. और ऊपर से कीमती वस्तुएं... गिफ्ट में... वस्तव में वह किसी को नहीं बताई और न दिखाई लेकिन राजने उसके लिए एक सोने की चैन भी दिलाया है...

यह बात ख्याल में आते ही शाजिया ने राव के साथ प्रतिघटना छोड़ दी और अपने आप को ढीला छोड़ दी।

जैसे ही शाजिया ने अपने शरीर को ढीला छोडी तो राव समझ गया की यह लड़की अब प्रतिरोध नहीं करेगी तो वह जोश में आगया और उसके होंठों को अपने में लेकर चूसने लगा।

शाजिया ने फिर भी कुछ रेसिस्ट करने को सोची लेकिन फिर चुप हो गयी। अब उसे भी मजा आने लगा और वह खुद गरम होने लगी। इसके दो कारण थे। एक राव ने उसकी फ्रूटी में व्हिस्की मिलायी थी उसका असर पड रहा है और दूसरा... राव के आने से पहले राज और वह मस्ती के आलम में थे... राव ने आकर उन्हें डिस्टर्ब कर दिया।

"अंकल नहीं.. प्लीज ऐसा मत करो..."

"क्यों मेरी जान...? अच्छा नहीं लग रहा है क्या..? अरे तुम जवान हो.. मजे लूटो..." उसने शाजिया के छोटे चूची को पूरी हथेली के नीचे लेकर दबाते बोला।

"अंकल नाराज हो जायेंगे..."

"हर चीज अंकल को मालूम होने की क्या जरूरत है... स्वीटी यह राज़ हम दोनों की बीच की राज़ है.. ओके..."

"फिर भी अंकल को मालूम होगया तो...?"

"कैसे मालूम होगा... क्या तुम बोलने जाओगी की मैं चुद गयी हूँ..."

"छी .... आप कैसे बात करते हैं ..."

वह कुछ बोला नहीं.. उसकी कमीज़ उसके सर के ऊपर से निकाल दिया।

चूत में आग की धधक के कारण शाजिया ने भी... न...न... कहते अपनी कमिज उतर वाली।

राव ने उसे वहीँ हॉल में कारपेट पर नीचे पीठ का बल सुलाया और उसकी सलवार भी खोलने लगा।

"ओह नहीं... मुझे शर्म अति है..." वाह सच में ही शर्माने लगी।

"पागल हो गयी क्या.. बगैर इसे उतारे असली काम कैसे होगा..." कहते शाजिया ना....ना.. कहने पर भी उसकि सलवार और पैंटी उतार दिया।

राव खुद अपनी पैंट उतर फेंका और सिर्फ बॉक्सर में रह गया। शाजिया बॉक्सर के अंदर उसके उफनते औजार की उभार दिख रही थी। उस उभार को देखते ही शाजिया एक बार सिहर उठी। वह ललचायी नजरों से उसे ही देख रही थी।

"क्यों शाजिया डार्लिंग देखोगी..." पूछा...

शाजिया शरम से लाल होगयी।
 
"कुछ नहीं स्वीटी ... में तुम्हे पिछेसे लेना चाहता हूँ..."

"पर क्यों...?"

"आरी पगली... मेरी तोंद के वजह से सीधे में मेरा पूरा अंदर नहीं घुसेगा.. इसिलिये.... पिछेसे..." कहा और शाजिया को अपने कोहनियों पर और घुटनों पर झुकाया। कोहनियों पर होने वजह से उसकी गांड ऊपर उठकर बुर सामने दिखने लगी। वह अपने लण्ड के सुपाडे को शाजिया की खुली फांकों पर रगड़ा।

लंड के स्पर्श से शाजिया का शरीर एक बार फिर सिहर उठी। दिल थाम के राव को अंदर प्रवेश होने का वेट कर रही थी।

राव ने और एक बार अपनी डिक हेड उसकी फांकों पर चलाया... "ममममम...." कहती शाजिया ने कमर को पीछे ठेली।

राव ने अपना कमर का दबाव दिया... 'फक' की आवाज़ के साथ उसका लंड का टोपा अंदर चली गयी। Sudden आक्रमण से शाजिया एक बार तडपडाई...

राव ने कमर को पीछे किया एक और शॉट दिया...

"अम्म्मा..." वह चिल्लाई।

फिर उसके बाद दोनों में खूब चुदाई हुई...शाजिया ने भी कमर को पीछे ढकेल ढकेल कर चुदने लगी। पूरा दस मिनिट की मेहनत के बाद उसने पुछा.. "मैं खल्लास होने वाला हूँ..." वह बोल रहा था की शाजिया बोली.. "अंकल अंदर नही...प्लीज..." वह बोल ही रही थी की वहअपना गरम लावा से उसकी बुर को भर ने लगा।

"ओह अंकल यह क्या किये आपने.. मैं अब unsafe पीरियड में हूँ..."

"डोंट वोर्री शाजिया.. मेरी नसे बहुत पहले ही बंद होचुके है.. मेरा वीर्य से तुम्हे कुछ नहीं होगा..." उसके ऐसे कहने से शाजिया ने एक लम्बी सांस ली।

फिर दोनों सुस्त होकर अगल बगल पड़े रहे।
 
फ़ोन कि घंटी बजे तो दोनों को होश आया। शाजिया की फोने बज रही थी। यह फ़ोन देखि... राज का था। "हाँ अंकल.. में शाजिया .." बोली।

"मेरा काम हो गया है... 10 मिनिट में घर पहुँचता हूँ...." बोलकर फ़ोन काट दिया।

अंकल दस मिनिट में आ रहे है.. कहती वह उठी अपने कपडे लेकर अंदर चली गयी।

"कॉमन bathroom किधर है...?" राव पुछा तो उसने बताया और वह भी उधर बढ़ा।

दस मिनिट बाद दोनों फेश होकर बाहर अये और सोफे पर बैठे।

पांच मिनिट बाद राज पहुँच कर डॉक्युमेंट्स पर राव का दस्तखत लिया और बोला ... "राव साब .. बुधवार यानि की दो दिन बाद आपकी लैण्ड (Land) रजिस्ट्रेशन है..."

…………………………………………

"ठीक है..बुधवार को रजिस्ट्रेशन ऑफिस में मिलूंगा..." कह कर वह चला गया. उसने शाजिया पर नजर तक नहीं डाला।

x-x-x-x-x-x-

राव के जाने के बाद राज ने शाजिया के कन्धों पर हाथ रख कर कहा..."राव को रोक के रखने के लिए थैंक यू शाजिया..." और उसके गालों को चूमा। शाजिया झट अपने दोनों बाहें राज के गर्दन में डाली और उस से लिपटती फफक कर रोई। राज घबरा गया.. "अरे शाजिया...ऐसा क्यों रो रहे हो...? क्या हुआ...?" उसके पीठ को सहलाता पुछा।

शाजिया उस से अलग हुए बिना ही सुबक ते.."अंकल उसने ..में...रे..से...जबर.....दस्ती...." कह कर रुक गयी।

"Kyaaaaa....? राज चकित रह गया।

शाजिया अभी भी सुबक रही थी....

"उसने कुछ किया....?" शाजिया की पीठ सहलाना जारी रखते पुछा।

शाजिया ने न में सर हिलायी और सुबकती बोली... "उस राव ने मेरे से जबरदस्ती करने की कोशश की... कह रहा था मुझे जो चाहे दे देगा... एक बार... कह रहा था।' वह वैसे ही सुबक ते बोली और फिर शुरू हुई "मैंने उस से कहा की अगर वह मुझे जबरदस्ती करेगा तो..मैं खुदकशी कर लूँगी.. फिर मेरे अंकल को कहना की मैं क्यों खुदकशी करि..." तो वह रुक गया... नहीं तो..." शाजिया की शरीर ने एक झुर झूरी ली।

"सस्साला.... हरामजादा .. ऐसा करा उसने.. मैं अभी उसका डील कैंसिल करता हूँ... मैं उसकी डाक्यूमेंट फाड़ देता हूँ..." कहते राज ने डाक्यूमेंट निकाल के फाड़ने जा रहा था।

शाजिया ने उसे रोकते... "नहीं.. ऐसा मत करिये... अंकल... अभी तो मैं सेफ हूँ... डॉक्यूमेंट फाड़ने से जो हुआ वह अनहोनी तो नहीं होजाएगी"

"नहीं शाजिया... उसे सबक सीखाना चाहिए..."

"सबक सीखना अपना नुकसान करके नहीं अंकल... मेरे पास एक आईडिया है..." शाजिया बोली।

"क्या..." राज का गुस्स अभी कम नहीं हुआ...

"वह कह रहा था की उसकी एक बेटी है... कॉलेज पढ़ती है... किसी तरह उस से मेरी इंट्रो कराओ.. फिर देखो.. साला.. उसकी बेटी तुम्हारे नीचे होगी..."

"वह क्या प्लान है..येहि ठीक होगा... उसके घर मेरा आना जाना तो है ही... चांस मिलते ही में उसकी तुमसे परिचय करादूंगा..."

राज की ऐसा कहने से शाजिया ने एक लम्बी सांस ली।

-x-x-x-x-x-x-x-

बुधवार को राज और शाजिया रजिस्ट्रेशन ऑफिस में थे और राव का वेट कर रहे थे। राज ने शाजिया को आज छुट्टी लेने को कहा था तो शाजिया ने आधे दिनकी छुट्टी ली।

बारह एक बजे रजिस्ट्रेशन हो गया।

राज राव का दिया हुआ कमीशन की चेक हाथ में लेकर शाजिया से पुछा.. "शाजिया तुम्हारा कोई बैंक अकाउंट है क्या...?"

"हाँ अंकल.. है.. मेरे डॉक्टर साब कभी कभी मेरी सैलरी चैक में देते हैं..."

"कितने रुपये हैं...?"

"यहि कोई दो या तीन हजार...बस.... "

ठीक है में तुम्हे एक नया बैंक अकाउंट खुलवाता हूँ.. चलो पहले खाना खाते है! राज और शाजिया दोनो एक होटेल में जाकर लंच करते है। राज में कुछ अच्छे गुण है.. उसमे से एक उसे कोई भी प्रॉफिट हो उसमे से उसने प्रॉफिट दिलाने वालों को कुछ हिस्सा देदेता है... आज भी उसका इरादा यही है.. लगभग ढाई लाख कंमिशन मिली उसको... उसमे से कुछ वह शाजिया की नाम करना चाहता था।

दोनों बैंक जाते है और 5000 रूपये से एक बैंक अकाउंट खुलवाकर उसमे 60 हजार रूपये जमा करता है।

शाजिया बैंक बैलेंस देख कर चकित रह जाती है... "अंकल यह क्या... इतने रूपये.. मेरे नाम पर..."

"हाँ शाजिया... यह रूपये तुम्हारे ही है... राव से तुम्हारे साथ जो बीती फिर भी तुमने उसे रोक के रखा.. और मैं ग़ुस्से मे डॉक्यूमेंट ही फाड़ देने वाला था.. लेकिन तुमने मुझे रोका... देखो.. मुझे जो कमीशन मिली उसमे से थोड़ा .. तुम्हारे नाम पर... "

"ओह अंकल..." वह उस से लिपट गयी..."

चलो चलते है... यहाँ से तुम घर जाओ.. में ऑटो बुलाता हूँ.. कह कर उसे शाजिया को ऑटो में चढ़ाया और किराया भी भर दिया..."

शाजियाका चेहरा ख़ुशी से दमक रहा था...

………………………………………………….
 
Back
Top