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रोहिणी कल्पना कर रही थी कि यह सब कुछ रीमा कर रही है आखिर रोहिणी की वासना का पारा पूरी तरह से चढ़ा हुआ था वह भी पूरी तरह से रीमा के हुस्न के जाल में मदहोश हुई पड़ी हुई थी आखिर क्यों हो रीमा ऐसी चीज ही थी | रोहिणी को मदहोश होना बनता था | रीमा की वासना के जाल में जाकर रोहिणी खुद को चोद कर रगड़ कर अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर रही थी ताकि उसके परेशान मन को थोड़ी सी शांति मिले |
उधर अनिल का भी यही हाल था उनका लंड पूरी तरह से अब कपड़ों के जाल से मुक्त था और पूरी तरह से सीधा ऊपर की तरफ तो ना हुआ था अंधेरे में भी अगर कोई नजदीक जाकर देखें तो ऐसा लग रहा था जैसे फुट भर का कोई डंडा उनके शरीर से निकलकर के छत की तरफ को सीधा तना हुआ है और उस पर तेजी से उनका हाथ फिसल रहा था | वह रीमा की कल्पना करके खुद का मुट्ठ मार रहे थे और सोच रहे थे जैसे वह रीमा की गुलाबी चूत को चोद रहे हो | रीमा के गुलाबी जिस्म को अपने सख्केत हाथो से थामे उसकी उन्नत नुकीली पहाड़ियों को मसलते हुए अपना मुसल लंड उसकी गुलाबी कसी चूत में पेल रहे हो | उसके गुलाबी जिस्म के उठे हुए उन्नत नुकीली पहाड़ियों का रस पी रहे हो | उसके मीठे रसीले गुलाबी नर्म होठों का रस चख रहे हो और उसके जिस्म को भोग रहे हो लेकिन असल में वह सिर्फ मुट्ठ मार रहे थे | रीमा को पाने की लालसा ने जो अनिल को पूरी तरह से अपनी काबू में ले रखा था उन्हें रीमा के अलावा कुछ नहीं सूझ नहीं रहा था | रीमा के किडनैप होने के बाद से जो जैसे वह बस दिन-रात रीमा के बारे में ही सोचते रहते थे और चिंता से घुले हुए गले जा रहे थे और वहीं उनकी चिंता कब उनकी वासना में बदल गई उन्हें खुद नहीं पता चला | रीमा की चिंता अब रीमा की वासना में बदलकर के उनके उनके दिलो-दिमाग में भर गई थी और उसी को बुझाने के लिए वह स्टडी रूम में तेजी से अपने लंड को मुठिया रहे थे
रोहिणी और अनिल दोनों एक ही गति को प्राप्त हो रहे थे एक अपनी चूत दाने को रगड़ रही थी, चूत में उंगली कर रही थी | वही दूसरा अपने लंड को मसल रहा था और काफी देर तक दोनों अपने अपने अपने जिस्म को मसलते हुए आखिर अपने अपने चरम पर पहुंच गए थे | रोहिली अपनी चूत से बरस कर ठंडी हो गई और अनिल अपनी पिचकारिया निकालकर के ठंडे हो गए | इसके बाद उनके मन को थोड़ी शांति मिली और वह अपनी-अपनी जगहों पर जहां लेटे हुए थे वहीं सोने की कोशिश करने लगे |
इधर रोहित की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी और प्रियंम का भी वही हाल था | आखिर रोहित और प्रियम रीमा के ज्यादा करीब थे | रोहित को न केवल रीमा की चिंता थी बल्कि उसकी सुरक्षा की भी उन्हें चिंता थी आखिर उनका रिश्ता अनिल और रोहिणी से ज्यादा गहरा था | जाहिर सी बात है उनका रिश्ता रीमा के साथ बहुआयामी था और उसमें वासना का एक डोर थी जो सबसे ज्यादा मजबूत थी लेकिन सिर्फ वासना की डोर का रिश्ता ही नहीं था रीमा के साथ | आत्मीयता का, लगाव का, प्यार का, दुलार का, वात्सल्य का, जो रिश्ता रोहित और प्रियम का था वह शायद और कोई नहीं समझ सकता था | आखिरकार प्रियम इधर-उधर लुढकता धीरे-धीरे सो गया और इधर रोहित भी खुद सोने की कोशिश करने लगा लेकिन उसको नींद नहीं आ रही थी | आखिर वो क्या करें | वह जाकर की एक एल्बम उठा लाया और उसमें अपने भाई और रीमा की शादी की फोटो देखने लगा था और उन्हीं को सोच सोच कर के अपनी यादों के भवर में खोने लगा था | कुछ देर तक वह एल्बम देखता रहा | उसके बाद जाकर बिस्तर पर लेट गया और उसके दिलो-दिमाग में बस एक ही सवाल घूम रहा था | रीमा तुम कहां होगी... कहां चली गई.... इस तरह से जैसे-जैसे वह रीमा के बारे में सोचता रीमा को ढूंढने के लिए उसका दृढ़ संकल्प और बढ़ता चला जाता आखिर उसने तुरंत ही अपने एक खास आदमी को फोन लगाया पत्नी और उससे रिपोर्ट लेने की कोशिश करने लगा वह आदमी पहले पुलिस ने था और अब रिटायर हो चुका था जाहिर सी बात है रोहित ने उससे पहले भी काम पर लगा रखा था लेकिन रोहित ने उसे कहा भाई मुझे किसी भी हाल में कोई न कोई क्लू तो दो आखिर वह कहां है कैसी है ताकि हम कुछ आगे बढ़ सके | 3 दिन से हम हाथ-पांव मार रहे हैं लेकिन हमें ये तक नहीं पता हमें किस जगह उसे ढूढना चाहिए | अब तक हम ऐसा लग रहा है जैसे जहां खड़े थे वहीं के वहीं खड़े हैं |
उस आदमी ने आश्वासन दिया कल सुबह तक कोई न कोई निकाल कर मुझे जरूर बताता हूं तो चिंता मत कर मैं पर्सनली खुद फील्ड पर निकला हुआ हूँ | उस आदमी ने रोहित को काफी देर तक दिलासा दी इसके बाद रोहित के अशांत मन को थोड़ी सी राहत मिली और वह आंख बंद कर सोने की कोशिश करने लगा जैसे ही उसने आंखें बंद करें सामने रीमा का खिलखिलाता हुआ मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने आ गया | उसका वह खूबसूरत चेहरा, हँसते हुए तो और भी अप्सरा लगने लगती थी | रोहित जी रीमा को वो तस्वीर संजोये सोने की कोशिश करने लगा |
मनोविज्ञान का एक पहलू यह भी है कि जब आप किसी चीज के बारे में दिन-रात सोचते हो तो वह चीज आपके सपनों में भी आती है | तरह-तरह आपको उसी चीज का एहसास दिलाती रहती है | जब से उसने रीमा को नंगा देखा था उसकी गुलाबी चूत देखि थी | तब से उसे कुछ और सपने में आता ही नहीं | वही रीमा प्रियम को अपना गोरा बदन और गुलाबी चूत दिखाकर ललचाती हुई | प्रियम का रोज का यही हाल था | जिस तरह से वह अपनी रीमा चाची के बारे में दिन रात सोचता रहता अब उसकी नींद में भी रीमा चाची आने लगी थी | उसके सोते ही उसने जो सपना देखना शुरू किया | लेकिन आज का सपना रोज के सपनो से अलग था | आअज रीमा उसे नंगी होकर सिर्फ चूत दिखाने नहीं आई थी |
प्रियम बहुत गहरी नींद में सो रहा था और वह एक सपना देख रहा था और सपना यह था कि रोहित विदेश में है तो वह उदास है और इसलिए उसकी उदासी मिटाने के लिए उसकी चाची उसके गूमने का प्वलान बनाती है | वह और उसकी रीमा चाची एक खुली जीप में बैठकर के एक जंगल की तरफ पिकनिक मनाने जा रहे हैं | रीमा चाची गाड़ी चलाती हुई एक पतली जंगल के रास्ते से होते हुए एक झील के किनारे जाकर गाड़ी रोक देती हैं और वहां पर एक चादर बिछा कर के अपना सारा सामान रख देती हैं प्रियम भी वही हल्की-हल्की गुनगुनी धूप में लेट जाता है और उसके बाद उसकी प्यारी चाची अपने सारे कपड़े उतारते हुए हुए धीरे-धीरे पानी में घुस जाती हैं और नहाने लगती हैं | प्रियम यह सब देखकर हैरान रह जाता है | चाची का नंगा गुलाबी बदन देखते ही उसकी पेंट में भी तंबू तने लगता है अपनी चाची को पानी में अठखेलियां खेलते हुए देखता रहता है उनके सौंदर्य को अपलक निहारता रहता है और उनकी खूबसूरती को देखकर खुश होता रहता है |
उधर अनिल का भी यही हाल था उनका लंड पूरी तरह से अब कपड़ों के जाल से मुक्त था और पूरी तरह से सीधा ऊपर की तरफ तो ना हुआ था अंधेरे में भी अगर कोई नजदीक जाकर देखें तो ऐसा लग रहा था जैसे फुट भर का कोई डंडा उनके शरीर से निकलकर के छत की तरफ को सीधा तना हुआ है और उस पर तेजी से उनका हाथ फिसल रहा था | वह रीमा की कल्पना करके खुद का मुट्ठ मार रहे थे और सोच रहे थे जैसे वह रीमा की गुलाबी चूत को चोद रहे हो | रीमा के गुलाबी जिस्म को अपने सख्केत हाथो से थामे उसकी उन्नत नुकीली पहाड़ियों को मसलते हुए अपना मुसल लंड उसकी गुलाबी कसी चूत में पेल रहे हो | उसके गुलाबी जिस्म के उठे हुए उन्नत नुकीली पहाड़ियों का रस पी रहे हो | उसके मीठे रसीले गुलाबी नर्म होठों का रस चख रहे हो और उसके जिस्म को भोग रहे हो लेकिन असल में वह सिर्फ मुट्ठ मार रहे थे | रीमा को पाने की लालसा ने जो अनिल को पूरी तरह से अपनी काबू में ले रखा था उन्हें रीमा के अलावा कुछ नहीं सूझ नहीं रहा था | रीमा के किडनैप होने के बाद से जो जैसे वह बस दिन-रात रीमा के बारे में ही सोचते रहते थे और चिंता से घुले हुए गले जा रहे थे और वहीं उनकी चिंता कब उनकी वासना में बदल गई उन्हें खुद नहीं पता चला | रीमा की चिंता अब रीमा की वासना में बदलकर के उनके उनके दिलो-दिमाग में भर गई थी और उसी को बुझाने के लिए वह स्टडी रूम में तेजी से अपने लंड को मुठिया रहे थे
रोहिणी और अनिल दोनों एक ही गति को प्राप्त हो रहे थे एक अपनी चूत दाने को रगड़ रही थी, चूत में उंगली कर रही थी | वही दूसरा अपने लंड को मसल रहा था और काफी देर तक दोनों अपने अपने अपने जिस्म को मसलते हुए आखिर अपने अपने चरम पर पहुंच गए थे | रोहिली अपनी चूत से बरस कर ठंडी हो गई और अनिल अपनी पिचकारिया निकालकर के ठंडे हो गए | इसके बाद उनके मन को थोड़ी शांति मिली और वह अपनी-अपनी जगहों पर जहां लेटे हुए थे वहीं सोने की कोशिश करने लगे |
इधर रोहित की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी और प्रियंम का भी वही हाल था | आखिर रोहित और प्रियम रीमा के ज्यादा करीब थे | रोहित को न केवल रीमा की चिंता थी बल्कि उसकी सुरक्षा की भी उन्हें चिंता थी आखिर उनका रिश्ता अनिल और रोहिणी से ज्यादा गहरा था | जाहिर सी बात है उनका रिश्ता रीमा के साथ बहुआयामी था और उसमें वासना का एक डोर थी जो सबसे ज्यादा मजबूत थी लेकिन सिर्फ वासना की डोर का रिश्ता ही नहीं था रीमा के साथ | आत्मीयता का, लगाव का, प्यार का, दुलार का, वात्सल्य का, जो रिश्ता रोहित और प्रियम का था वह शायद और कोई नहीं समझ सकता था | आखिरकार प्रियम इधर-उधर लुढकता धीरे-धीरे सो गया और इधर रोहित भी खुद सोने की कोशिश करने लगा लेकिन उसको नींद नहीं आ रही थी | आखिर वो क्या करें | वह जाकर की एक एल्बम उठा लाया और उसमें अपने भाई और रीमा की शादी की फोटो देखने लगा था और उन्हीं को सोच सोच कर के अपनी यादों के भवर में खोने लगा था | कुछ देर तक वह एल्बम देखता रहा | उसके बाद जाकर बिस्तर पर लेट गया और उसके दिलो-दिमाग में बस एक ही सवाल घूम रहा था | रीमा तुम कहां होगी... कहां चली गई.... इस तरह से जैसे-जैसे वह रीमा के बारे में सोचता रीमा को ढूंढने के लिए उसका दृढ़ संकल्प और बढ़ता चला जाता आखिर उसने तुरंत ही अपने एक खास आदमी को फोन लगाया पत्नी और उससे रिपोर्ट लेने की कोशिश करने लगा वह आदमी पहले पुलिस ने था और अब रिटायर हो चुका था जाहिर सी बात है रोहित ने उससे पहले भी काम पर लगा रखा था लेकिन रोहित ने उसे कहा भाई मुझे किसी भी हाल में कोई न कोई क्लू तो दो आखिर वह कहां है कैसी है ताकि हम कुछ आगे बढ़ सके | 3 दिन से हम हाथ-पांव मार रहे हैं लेकिन हमें ये तक नहीं पता हमें किस जगह उसे ढूढना चाहिए | अब तक हम ऐसा लग रहा है जैसे जहां खड़े थे वहीं के वहीं खड़े हैं |
उस आदमी ने आश्वासन दिया कल सुबह तक कोई न कोई निकाल कर मुझे जरूर बताता हूं तो चिंता मत कर मैं पर्सनली खुद फील्ड पर निकला हुआ हूँ | उस आदमी ने रोहित को काफी देर तक दिलासा दी इसके बाद रोहित के अशांत मन को थोड़ी सी राहत मिली और वह आंख बंद कर सोने की कोशिश करने लगा जैसे ही उसने आंखें बंद करें सामने रीमा का खिलखिलाता हुआ मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने आ गया | उसका वह खूबसूरत चेहरा, हँसते हुए तो और भी अप्सरा लगने लगती थी | रोहित जी रीमा को वो तस्वीर संजोये सोने की कोशिश करने लगा |
मनोविज्ञान का एक पहलू यह भी है कि जब आप किसी चीज के बारे में दिन-रात सोचते हो तो वह चीज आपके सपनों में भी आती है | तरह-तरह आपको उसी चीज का एहसास दिलाती रहती है | जब से उसने रीमा को नंगा देखा था उसकी गुलाबी चूत देखि थी | तब से उसे कुछ और सपने में आता ही नहीं | वही रीमा प्रियम को अपना गोरा बदन और गुलाबी चूत दिखाकर ललचाती हुई | प्रियम का रोज का यही हाल था | जिस तरह से वह अपनी रीमा चाची के बारे में दिन रात सोचता रहता अब उसकी नींद में भी रीमा चाची आने लगी थी | उसके सोते ही उसने जो सपना देखना शुरू किया | लेकिन आज का सपना रोज के सपनो से अलग था | आअज रीमा उसे नंगी होकर सिर्फ चूत दिखाने नहीं आई थी |
प्रियम बहुत गहरी नींद में सो रहा था और वह एक सपना देख रहा था और सपना यह था कि रोहित विदेश में है तो वह उदास है और इसलिए उसकी उदासी मिटाने के लिए उसकी चाची उसके गूमने का प्वलान बनाती है | वह और उसकी रीमा चाची एक खुली जीप में बैठकर के एक जंगल की तरफ पिकनिक मनाने जा रहे हैं | रीमा चाची गाड़ी चलाती हुई एक पतली जंगल के रास्ते से होते हुए एक झील के किनारे जाकर गाड़ी रोक देती हैं और वहां पर एक चादर बिछा कर के अपना सारा सामान रख देती हैं प्रियम भी वही हल्की-हल्की गुनगुनी धूप में लेट जाता है और उसके बाद उसकी प्यारी चाची अपने सारे कपड़े उतारते हुए हुए धीरे-धीरे पानी में घुस जाती हैं और नहाने लगती हैं | प्रियम यह सब देखकर हैरान रह जाता है | चाची का नंगा गुलाबी बदन देखते ही उसकी पेंट में भी तंबू तने लगता है अपनी चाची को पानी में अठखेलियां खेलते हुए देखता रहता है उनके सौंदर्य को अपलक निहारता रहता है और उनकी खूबसूरती को देखकर खुश होता रहता है |