S
StoryPublisher
Guest
दीदी बोली - जबरदस्ती करने की कोई जरूरत नहीं है, जब दुबारा लंड खड़ा हो तब चोद देना | इस तरह से खुद से जबरदस्ती न करो | चूत की प्यास है कुछ देर और प्यासी रह लेगी |
दीदी ने जो भी कहा मेरे कानी तक शायद पंहुचा ही नहीं | मैंने कुछ नहीं सुना था | मैंने दीदी चुताड़ो को पकड़कर फिर उसे को चोदने लगा था | दीदी को लगा मै उनकी सुनने वाला नहीं हूं तो अपने हाथ से चूत दाने को मसलते हुए फिर से टीवी देखने मस्त हो गई थी| असल में दीदी टीवी नहीं देख रही थी मेरी चुदाई का आनंद ले रही थी | इस बार मैंने उन्हें लंबे लंबे और धीरे धीरे धक्के लगा रहा था | जैसा कि दीदी ने खुद बताया था कि आराम से पूरा लंड चूत के आखिर छोर तक घुसेड़ो और फिर पूरा लंड बाहर निकालो | मैं उसी तरह से धीरे धीरे दीदी को चोद रहा था |
धीरे धीरे मेरा लंड फिर से पत्थर की तरह सीधा हो गया | दीदी की चूत की गरमी और उसके चुताड़ो की नरम मांसल अहसास ने मेरे जिस्सम में फिर से उत्तेजना भर दी | बार चोदते चोदते काफी देर तक मेरा लंड दीदी की चूत में ही अंदर बाहर होता रहा लेकिन इस बार पिचकारी नहीं छूटी थी मैं भी हैरान था दीदी की बातों में तो जादू था | जैसा दीदी कह रही थी मैं बिल्कुल वैसा ही करता रहा | इसी बीच में मैंने नोटिस किया दीदी का जिस्म दो बार कांपा | दीदी अभी भी टीवी ही देख रही थी लेकिन साथ में चूत दाने को भी मसल रही थी इधर उनकी चूत में सटासट मेरा लंड आ जा रहा था | अब मै दीदी को जोर जोर से पेल रहा था | मै बुरी तरह हांफने लगा था } और मै बुरी तरह से थक भी गया था | वो तो भला तो मेरी सफ़ेद मलाई का जो दीदी की चूत की सुरंग इतनी चिकनी हो गयी नहीं तो अब तक दीदी की नयी नवेली कसी चूत मुझे अब तक निचोड़ चुकी होती | दीदी खुश हो गई थी काफी देर तक चुदाई के बाद दीदी बोली - मुझे अब कसकर चोदो जितेश , जोर जोर से चोदो | जीतनी तेज मेरी चूत में लंड ठेल सकते हो ठेल दो |
दीदी के कहने से मै तेजी से धक्के लगाने लगा | सटासट मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में आ जा रहा था | मै दीदी की कसी चूत को लगातार दुबारा चोद रहा था | मै दीदी की चूत के हर प्यास बुझाने में दिल जान से लगा हुआ था | मेरे जिस्म में जीतनी ताकत थी उससे दे धक्के पे धक्के लगाकर मै दीदी को चोद रहा था | ऐसा लगा रहा था शायद इसके बाद कभी दीदी को चोदने को ना मिले | मेरा लंड और दीदी की चूत में भीषण घर्षण हो रहा था | दीदी की चूत तो जैसी आग की भट्ठी बन गयी ठिया और उसमे मै अपनी आग की मीनार को दनादन पेल रहा था |
मै - दीदी आपकी चूत ने तो मुझे पागल कर दिया है आःह्ह | इतना मजा तो मुझे पूरी जिंदगी में कभी नहीं मिला |
दीदी - चोदो जितेश, मुझे जी भर के चोदो, मेरी चूत की सारी प्यास बुझा दो | मेरे जिस्म की सारी आग बुझा दो | जमकर चोदो मुझे | जैसे मन हो वैसे चोदो मुझे | जीतनी तेज चोद सकते हो उतनी तेज चोदो मुझे |
मै - हाँ दीदी मैंने अपनी पूरी जान लगा दी है आपको चोदने में |
दीदी में अपने चूत दाने को बुरी तरह मसल रही थी | अभी उनका सर सोफे में घुसा हुआ था | वो भी अपने आखिरी चरम पर थी |
इधर मै दनादन दीदी की चूत में लंड पेले पड़ा था |
दीदी - यस जितेश बस ऐसे ही जोरदार तरीके से मसल डालो इस चूत को ........आआह्ह्ह्ह ऐसे तो मूवी में भी कोई नहीं चोदता है | चोदो मुझे |
न जाने मेरे अन्दर इतनी ताकत कहाँ से आ गयी थी | मै बिना रुके थके दीदी की चूत में लगातार दनादन धक्के मार रहा था | दीदी का जिस्म कसकर हिलने लगा | मैंने कसकर उनके चूतड़ थाम के उन्हें लुढ़कने से रोका और अपना पूरा जोर लगाकर तेजी से लंड को पूरा का पूरा दीदी की चूत में घुसेड लिया | मेरा लंड दीदी की चूत की गहराई में जाकर दुसरे छोर पर टकराया और मेरे अन्दर उबल रहे दावानल का बांध टूट गया | मेरा बदन हिलने लगा | मेरे पाँव जोर जोर से कांपने लगे | मेरे लंड से दीदी की चूत की सुरंग के आखिर छोर पर मेरी सफ़ेद मलाई छुटने लगी | काफी देर तक मेरी पिचकारी निकलती रही | मै पूरी तरह से थक कर पस्त हो चूका था | मुझे नहीं पता कब तक मेरा लंड अपनी मलाई दीदी को चूत में भरता रहा | मै दीदी के चुताड़ो पर ही टिकाकर खड़ा रहा | मेरी पिचकारियो से दीदी की चूत पूरी भर गयी थी | दीदी बोली - जितेश तुमने अपनी दीदी की चूत की प्यास बुझा दी | तुमने मेरी चूत को अपनी मलाई से लबालब भर दिया | असल में इसको चुदाई कहते है | इस उम्र में ही तुम किसी सच्चे मर्द से बढ़कर एक औरत को चोद सकते हो |
मेरा लंड मुरझाने लगा | मै अपने उखड़े प्राण लेकर दीदी की चूत से लंड निकाल कर वही फर्श पर बैठ गया |
दीदी ने जो भी कहा मेरे कानी तक शायद पंहुचा ही नहीं | मैंने कुछ नहीं सुना था | मैंने दीदी चुताड़ो को पकड़कर फिर उसे को चोदने लगा था | दीदी को लगा मै उनकी सुनने वाला नहीं हूं तो अपने हाथ से चूत दाने को मसलते हुए फिर से टीवी देखने मस्त हो गई थी| असल में दीदी टीवी नहीं देख रही थी मेरी चुदाई का आनंद ले रही थी | इस बार मैंने उन्हें लंबे लंबे और धीरे धीरे धक्के लगा रहा था | जैसा कि दीदी ने खुद बताया था कि आराम से पूरा लंड चूत के आखिर छोर तक घुसेड़ो और फिर पूरा लंड बाहर निकालो | मैं उसी तरह से धीरे धीरे दीदी को चोद रहा था |
धीरे धीरे मेरा लंड फिर से पत्थर की तरह सीधा हो गया | दीदी की चूत की गरमी और उसके चुताड़ो की नरम मांसल अहसास ने मेरे जिस्सम में फिर से उत्तेजना भर दी | बार चोदते चोदते काफी देर तक मेरा लंड दीदी की चूत में ही अंदर बाहर होता रहा लेकिन इस बार पिचकारी नहीं छूटी थी मैं भी हैरान था दीदी की बातों में तो जादू था | जैसा दीदी कह रही थी मैं बिल्कुल वैसा ही करता रहा | इसी बीच में मैंने नोटिस किया दीदी का जिस्म दो बार कांपा | दीदी अभी भी टीवी ही देख रही थी लेकिन साथ में चूत दाने को भी मसल रही थी इधर उनकी चूत में सटासट मेरा लंड आ जा रहा था | अब मै दीदी को जोर जोर से पेल रहा था | मै बुरी तरह हांफने लगा था } और मै बुरी तरह से थक भी गया था | वो तो भला तो मेरी सफ़ेद मलाई का जो दीदी की चूत की सुरंग इतनी चिकनी हो गयी नहीं तो अब तक दीदी की नयी नवेली कसी चूत मुझे अब तक निचोड़ चुकी होती | दीदी खुश हो गई थी काफी देर तक चुदाई के बाद दीदी बोली - मुझे अब कसकर चोदो जितेश , जोर जोर से चोदो | जीतनी तेज मेरी चूत में लंड ठेल सकते हो ठेल दो |
दीदी के कहने से मै तेजी से धक्के लगाने लगा | सटासट मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में आ जा रहा था | मै दीदी की कसी चूत को लगातार दुबारा चोद रहा था | मै दीदी की चूत के हर प्यास बुझाने में दिल जान से लगा हुआ था | मेरे जिस्म में जीतनी ताकत थी उससे दे धक्के पे धक्के लगाकर मै दीदी को चोद रहा था | ऐसा लगा रहा था शायद इसके बाद कभी दीदी को चोदने को ना मिले | मेरा लंड और दीदी की चूत में भीषण घर्षण हो रहा था | दीदी की चूत तो जैसी आग की भट्ठी बन गयी ठिया और उसमे मै अपनी आग की मीनार को दनादन पेल रहा था |
मै - दीदी आपकी चूत ने तो मुझे पागल कर दिया है आःह्ह | इतना मजा तो मुझे पूरी जिंदगी में कभी नहीं मिला |
दीदी - चोदो जितेश, मुझे जी भर के चोदो, मेरी चूत की सारी प्यास बुझा दो | मेरे जिस्म की सारी आग बुझा दो | जमकर चोदो मुझे | जैसे मन हो वैसे चोदो मुझे | जीतनी तेज चोद सकते हो उतनी तेज चोदो मुझे |
मै - हाँ दीदी मैंने अपनी पूरी जान लगा दी है आपको चोदने में |
दीदी में अपने चूत दाने को बुरी तरह मसल रही थी | अभी उनका सर सोफे में घुसा हुआ था | वो भी अपने आखिरी चरम पर थी |
इधर मै दनादन दीदी की चूत में लंड पेले पड़ा था |
दीदी - यस जितेश बस ऐसे ही जोरदार तरीके से मसल डालो इस चूत को ........आआह्ह्ह्ह ऐसे तो मूवी में भी कोई नहीं चोदता है | चोदो मुझे |
न जाने मेरे अन्दर इतनी ताकत कहाँ से आ गयी थी | मै बिना रुके थके दीदी की चूत में लगातार दनादन धक्के मार रहा था | दीदी का जिस्म कसकर हिलने लगा | मैंने कसकर उनके चूतड़ थाम के उन्हें लुढ़कने से रोका और अपना पूरा जोर लगाकर तेजी से लंड को पूरा का पूरा दीदी की चूत में घुसेड लिया | मेरा लंड दीदी की चूत की गहराई में जाकर दुसरे छोर पर टकराया और मेरे अन्दर उबल रहे दावानल का बांध टूट गया | मेरा बदन हिलने लगा | मेरे पाँव जोर जोर से कांपने लगे | मेरे लंड से दीदी की चूत की सुरंग के आखिर छोर पर मेरी सफ़ेद मलाई छुटने लगी | काफी देर तक मेरी पिचकारी निकलती रही | मै पूरी तरह से थक कर पस्त हो चूका था | मुझे नहीं पता कब तक मेरा लंड अपनी मलाई दीदी को चूत में भरता रहा | मै दीदी के चुताड़ो पर ही टिकाकर खड़ा रहा | मेरी पिचकारियो से दीदी की चूत पूरी भर गयी थी | दीदी बोली - जितेश तुमने अपनी दीदी की चूत की प्यास बुझा दी | तुमने मेरी चूत को अपनी मलाई से लबालब भर दिया | असल में इसको चुदाई कहते है | इस उम्र में ही तुम किसी सच्चे मर्द से बढ़कर एक औरत को चोद सकते हो |
मेरा लंड मुरझाने लगा | मै अपने उखड़े प्राण लेकर दीदी की चूत से लंड निकाल कर वही फर्श पर बैठ गया |