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Guest
रीमा - जीजा जी बड़े छुपे खिलाडी निकले, मै भी चौकान्नी रहती हूँ लेकिन जीजा जी के इरादे भांप ही नहीं पाई | मुझे भी आपको एक बात बतानी है | उस दिन के बाद आतक मौका नहीं मिला |
रोहिणी - बोल |
रीमा - उस दिन जीजा जी यहाँ जानबूझकर अपना फ़ोन भूल गए थे | मैंने सोफे पर से उठकर मेज पर रख दिया था | सोचा था सुबह जाकर दे आउंगी |
रोहिणी - मुझे पता था इसने जानबूझकर ही किया होगा |
रीमा - दीदी आप नाराज तो नहीं होगी अगर मै कुछ और भी बताऊ |
रोहिणी - मै तू अलग है क्या, जो भी बताना है दिल खोलकर बोल |
रीमा - जीजा जी जब वापस आये तब तक मै अपने कपडे निकालकर शीशे के सामने खड़ी थी, और सोने से पहले बस खुद को देख रही थी | बाहर डायनिंग हाल में अँधेरा था और कमरे में लाइट जल रही थी | उन्होंने मुझे पूरा का पूरा नंगा देख लिया | सब कुछ देख लिया मेरा | जब मुझे अहसास हुआ शायद कोई बाहर है, तो मै बाहर आई, पिछला दरवाजा बंद किया उअर फिर बेड पर जाकर सो गयी | सुबह उठी तो पिछले दरवाजे की अन्दर से बंद बेलन खुला हुआ था | जीजा जी का फ़ोन मेज पर से गायब था |
दीदी उन्होंने मुझे पूरा का पूरा नंगा देख लिया | सुबह जब अहसास हुआ तो बड़ी शर्म आई मुझे, इसलिए इधर प्रियम का हाल चाल लेने भी नहीं आई |
रोहिणी - अरे कितनी भोली है तू, मुझे तो पता था | इसलिए उस दिन के बाद से बौराया बौराया घूम रहा है | रात में तेरे सपने देखता है, और मुझ पर तू समझकर चढ़ने की कोशिश करता है | एक दिन फटकार कर मैंने भगा दिया, तबसे अलग कमरे में सुलाती हूँ इस कलुये को |
रीमा - इसलिए आज भी मुझे बड़ी शर्म आ रही थी |
रोहिणी रीमा को घूरते हुए, उसको अपनी बांहों में भीचते हुए - तू भी कम न है मेरी कट्टो रानी, बहुत ही घाघ है, पक्का है तूने हिला हिलाकर अपने चूतड़ इनको दिखाए होंगे |
रीमा एक दम से झेंप गयी, जैसे किसी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो | वो शर्म से दोहरी हो गयी | रोहिणी ने उसे और कसकर बेंच लिया - क्यों सही कहा न मेरी खूबसूरत परी जैसी कट्टो रानी |
रोहिणी आंखे मटकाते हुए - बोल न सच है की नहीं, तभी धतुरा खाने वाले इंसान की तरह बौराए घूम रहे है |
रीमा शर्म और लाज से दोहरी होकर रोहिनिकी बांहों में समाती चली गयी | उसका एक हाथ रोहिणी के कुल्हो तक चला गया |
रीमा भी अब कुछ हद तक बेशर्म बन गयी थी - दीदी एक बात पूछु |
रोहिणी - पुछु पुछु क्या लगा रखा है, जो पूछना है पूछ न |
रीमा थोडा लजाते हुए - ये आपका बोनट कुछ ज्यादा ही ..............................|
रोहिणी - धत्त बेशर्म, अब तू बेहयाई पर उतर आई है |
रीमा छोटे बच्चे की तरह जिद करती हुई - बतावो न दीदी |
रोहिणी - क्या सुनना चाहती है, जब ११ लम्बे काले मुसल की जबरदस्त ठोकर पिंडलियों पर लगेगी, तब चूतड़ अपने आप चौड़े हो जाते है | और कुछ सुनना है |
रीमा - सच में इतना बड़ा है क्या, कभी आपने इंची टेप लेकर नापा है क्या ?
रोहिणी उसका कान खीचते हुए - कट्टो रानी को शैतानी आ रही है, बुलाऊ, एक आवाज पर हाजिर हो जायेगे, फिर नाप लेना |
रोहिणी - अरे सुनते .................................|
रीमा ने रोहिणी के मुहँ पर हाथ रख दिया - क्या कर रही है दीदी मरवाएगी क्या ?
रोहिणी - तू ही तो नाप पूछ रही थी, मैंने सोचा यही बुलाकर नाप लेती हूँ |
रीमा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - आप नाराज हो जाती हो मुझे आपसे बात नहीं करनी |
रोहिणी - बोल |
रीमा - उस दिन जीजा जी यहाँ जानबूझकर अपना फ़ोन भूल गए थे | मैंने सोफे पर से उठकर मेज पर रख दिया था | सोचा था सुबह जाकर दे आउंगी |
रोहिणी - मुझे पता था इसने जानबूझकर ही किया होगा |
रीमा - दीदी आप नाराज तो नहीं होगी अगर मै कुछ और भी बताऊ |
रोहिणी - मै तू अलग है क्या, जो भी बताना है दिल खोलकर बोल |
रीमा - जीजा जी जब वापस आये तब तक मै अपने कपडे निकालकर शीशे के सामने खड़ी थी, और सोने से पहले बस खुद को देख रही थी | बाहर डायनिंग हाल में अँधेरा था और कमरे में लाइट जल रही थी | उन्होंने मुझे पूरा का पूरा नंगा देख लिया | सब कुछ देख लिया मेरा | जब मुझे अहसास हुआ शायद कोई बाहर है, तो मै बाहर आई, पिछला दरवाजा बंद किया उअर फिर बेड पर जाकर सो गयी | सुबह उठी तो पिछले दरवाजे की अन्दर से बंद बेलन खुला हुआ था | जीजा जी का फ़ोन मेज पर से गायब था |
दीदी उन्होंने मुझे पूरा का पूरा नंगा देख लिया | सुबह जब अहसास हुआ तो बड़ी शर्म आई मुझे, इसलिए इधर प्रियम का हाल चाल लेने भी नहीं आई |
रोहिणी - अरे कितनी भोली है तू, मुझे तो पता था | इसलिए उस दिन के बाद से बौराया बौराया घूम रहा है | रात में तेरे सपने देखता है, और मुझ पर तू समझकर चढ़ने की कोशिश करता है | एक दिन फटकार कर मैंने भगा दिया, तबसे अलग कमरे में सुलाती हूँ इस कलुये को |
रीमा - इसलिए आज भी मुझे बड़ी शर्म आ रही थी |
रोहिणी रीमा को घूरते हुए, उसको अपनी बांहों में भीचते हुए - तू भी कम न है मेरी कट्टो रानी, बहुत ही घाघ है, पक्का है तूने हिला हिलाकर अपने चूतड़ इनको दिखाए होंगे |
रीमा एक दम से झेंप गयी, जैसे किसी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो | वो शर्म से दोहरी हो गयी | रोहिणी ने उसे और कसकर बेंच लिया - क्यों सही कहा न मेरी खूबसूरत परी जैसी कट्टो रानी |
रोहिणी आंखे मटकाते हुए - बोल न सच है की नहीं, तभी धतुरा खाने वाले इंसान की तरह बौराए घूम रहे है |
रीमा शर्म और लाज से दोहरी होकर रोहिनिकी बांहों में समाती चली गयी | उसका एक हाथ रोहिणी के कुल्हो तक चला गया |
रीमा भी अब कुछ हद तक बेशर्म बन गयी थी - दीदी एक बात पूछु |
रोहिणी - पुछु पुछु क्या लगा रखा है, जो पूछना है पूछ न |
रीमा थोडा लजाते हुए - ये आपका बोनट कुछ ज्यादा ही ..............................|
रोहिणी - धत्त बेशर्म, अब तू बेहयाई पर उतर आई है |
रीमा छोटे बच्चे की तरह जिद करती हुई - बतावो न दीदी |
रोहिणी - क्या सुनना चाहती है, जब ११ लम्बे काले मुसल की जबरदस्त ठोकर पिंडलियों पर लगेगी, तब चूतड़ अपने आप चौड़े हो जाते है | और कुछ सुनना है |
रीमा - सच में इतना बड़ा है क्या, कभी आपने इंची टेप लेकर नापा है क्या ?
रोहिणी उसका कान खीचते हुए - कट्टो रानी को शैतानी आ रही है, बुलाऊ, एक आवाज पर हाजिर हो जायेगे, फिर नाप लेना |
रोहिणी - अरे सुनते .................................|
रीमा ने रोहिणी के मुहँ पर हाथ रख दिया - क्या कर रही है दीदी मरवाएगी क्या ?
रोहिणी - तू ही तो नाप पूछ रही थी, मैंने सोचा यही बुलाकर नाप लेती हूँ |
रीमा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए - आप नाराज हो जाती हो मुझे आपसे बात नहीं करनी |