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[SIZE=150%] कभी बेड पर लेट कर अपने चेहरे को गौर से देखती, कभी हाथ पर बने टैटू को, कभी अपनी उठी हुई छाती की दोनों उन्नत पहाड़ियों को और उनके ऊपर चिपके निप्पल को | जिस्म का इससे इससे अच्छा मुयाना वो और कही नहीं कर पाती थी | यहाँ कोई रोक टोक नहीं, कोई आने जाने वाला नहीं | सबसे बड़ी बात कोई जबरदस्ती चिपकने वाला नहीं | कमरे में बजते मधुर मादक संगीत के साथ थिरकती लगती | पढ़ना उसका पसंदीदा काम था, इसलिए मधुर संगीत के बीच उसने एक किताब निकाल ली और बेड पर उल्टा लेट कर पढने लगी | बालो का हाथ में किताब थी, चेहरे पर चस्मा था, बाल को इकठा करके अटका रखा था | कंधे से लेकर पंजो तक पुरे बदन पर बस टैटू ही टैटू था | कामिनी उल्टा लेती हुई थी और उसके पैर घुटनों से हवा में ऊपर को उठे हुए थे | उसका गोरा मांसल टैटू से भरा बदन अलग ही चमक रहा था | उसका बदन ठोस लेकिन नरम मांस से भरा पूरा था,उसके बड़े बड़े हाहाकारी दो मांसल चुतड एक दुसरे से सटे हुए ऊपर को उठे हुए मस्त लग रहे थे जो आगे की तरफ एक दम से ढलान बनाते हुए पतली कमर तक जा रहे थे | मोटी मोटी जांघे और भारी भरकम, नरम मांस से लबालब भरे हुए, ऊपर को उठे हुए चूतड़ देखकर किसी भी मर्द का लंड उठकर खड़ा हो जायेगा |
दो पेज पढने के बाद ही उसे बोरियत होने लगी | पार्टी में किये गए डांस से भी उसे हल्की थकान भी हो रही थी इसलिए उसे खुद को फ्रेश करने की सोची | अलग अलग तरीके से अपने जिस्म और गांड को मटकाते हुए कमरे से लगे बाथरूम पंहुच गयी | बाथरूम की एक दीवार पर शीशा ही लगा था | उसने खुद को भिगोया और सेल्फी खीचने लगी | क्या गोरा गोरा बदन था | जुल्फे चेहरे पर से बिखरी हुई सीने तक लटक रही थी | सीने पर बड़े बड़े स्तन अपने ही बोझे से उसके सीने को झुकाए हुए थे, इसमें कोई दो राय नहीं उसके स्तन औसत से बड़े थे और उसकी छाती की उठान को नयी उचाईयां दे रहे थे | उसकी गोरी गोरी मांसल जांघे टैटू से भरी हुई थी यहाँ तक की उसका चूत त्रिकोण में टैटू से ढका हुआ था | बमुश्किल कोई उसकी चूत की दरार को दूर से देख सकता था | कुल मिलकर कामिनी सचमुच की कामिनी थी जिसे हर लंड चोदना चाहेगा | अब सवाल ये था कि आज तक कामिनी को किसी ने चोदा भी था या नहीं | कोई नहीं जानता था कि कामिनी अपनी सेक्स की प्यास कैसे बुझाती है | उसके आसपास के कुछ जानकर कहते थे कि कामिनी के पास रबर के लंडो का खजाना है और उसी से वो अपनी प्यास बुझाती है | उसने आज तक कभी असली लंड अपनी चूत में लिया ही नहीं | ये सब बाते सिर्फ कॉकटेल पार्टियों की गॉसिप थी, सच कोई नहीं जानता था सिवाय कामिनी के |
कामिनी बाथरूम में नहा रही थी | उसका पूरा बदन पानी से भीगा हुआ था, उसने शरीर को धोने वाला बॉडी लोशन निकाला, उसे बॉडी स्क्रबर के ऊपर उड़ेला और अपने जिस्म पर उसे घुमाने लगी | देखेते ही देखते उसके जिस्म झाग से सरोबार हो गया | कामिनी कंधे से लेकर पंजो तक शरीर के हर अंग और भाग पर स्क्रबर घुमा रही थी | पुरे जिस्म पर झाग ही झाग था | बार बार स्क्रबर को अपनी जांघो के बीच चूत त्रिकोण पर ले आती और अपनी चूत को बार बार रगड़ने लगती | इससे उसे बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था |
खुद को आच्छी तरह धोने के बाद, वो बात टब में जाकर बैठ गयी कुछ देर के लिए उसने आंखे बंद कर ली और अपनी चूत दाने की हलके हलके रगड़ने लगी | ठंडा ठंडा पानी उसके वासना से भरे गरम जिस्म पर बड़ा ही सुकून दे रहा था | वो बस आंख बंदकर अपनी वासनाओं की कप्लानावो में उड़ती हुई, आनंद के सागर में गोते लगा रही थी | अब उसने चूत दाने की रगड़ना छोड़, चूत के गुलाबी ओंठो पर हाथ फिसलना शुरू कर दिया | अपनी एक उंगली अपनी नाजुक चूत की गीली गुनगुनी एयर टाइट सुरंग में धंसा दी | उसके मुहँ से एक कराह निकली, उसने अपनी उंगली को अपनी गीली गरम चूत में अन्दर बाहर करने लगी | अब उससे रहा नहीं जा रहा था | उंगली चूत की दीवारों में कम्पन करा पाने में नाकाम हो रही थी, उसे कुछ बड़ा सा चाहिए था जो उसकी चूत की कसी हुई गीली गरम चिपकी दीवारों को चीरता हुआ अन्दर तक धंस जाये | जो उसे अन्दर तक सनसनाहट दे, उसकी चूत को अन्दर तक भर कर कुचल कर उसमे तरंग जगा दे | वो तेजी से बाथ टब से निकली और एक रबर का लंड लाकर शीशे से चिपका दिया | बिना देर किये खुद घुटनों के बल आकर घोड़ी बन गयी | फिर उसने हलके से खुद को पीछे की ओर खिसकाया | एक हाथ से आगे के जिस्म के भार को सँभालते हुए दुसरे हाथ से नीचे की तरफ लटकते रबर के लंड का सुपाडा ऊपर की ओर किया और उसे अपने चूत के मुहाने पर सटा दिया | रबर के सुपाडे के उसकी चूत के मुहाने पर सटते ही उसने तेजी से खुद को पीछे शीशे की तरफ धकेल दिया | रबर का लंड उसकी चूत की गुलाबी सलवटी दीवारों को चीरता फैलाता हुआ उसके अन्दर जाकर धंस गया | फिर वो धीरे धीरे खुद को आगे पीछे हिलाकर, खुद को रबर के लंड से चोदने लगी | हर पीछे को जाते धक्के के साथ रबर का लंड उसकी चूत में घुस जाता और उसके मुहँ से एक मादक सी सिसकारी फुट पड़ती | खुद को पोजीशन करके खुद को ही चोदना थोड़ा ज्यादा बोरिंग होता है औरतो के लिए, लेकिन जो औरते अकेले अपने जिस्म से खलती है उन्हें इसी में मजा आता है | कामिनी खुद को रबर के लंड से चोद रही थी लेकिन उसे मजा नहीं आ रहा था | वो अपने शरीर में वो कम्पन चाहती थी वो तरंग चाहती थी जो उसे जन्नत की सैर करा दे लेकिन अभी तक इसमें वो नाकाम रही थी | आखिर कुछ देर तक रबर का लंड लेने के बाद उसे अहसास हो गया यहाँ से उसे वो नहीं मिलेगा जो वो चाहती है | उसने रबर के लंड को अपनी चूत में लेना रोक दिया | खुद को तौलिये से पोचा और कमरे में वापस आ गयी | उसने कस्टमर हेल्प को फ़ोन किया और कुछ बातचीत हुई फिर फ़ोन काट दिया |
वो वासना की आग में भठ्ठी बनी हुई थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे अपने बदन का वासना का बुखार उतारे, कैसे अपने जिस्म में लगी आग को शांत करे | फिर उसे ख्याल आया जैसे पहले करती आई है वैसे ही इस बार भी करे | यहाँ की सर्विस में कभी कोई प्रॉब्लम नहीं हुई | इसलिए उसने एस्कॉर्ट सर्विस लेने का मन बनाया था | उसने अपनी चॉइस का स्पेसिफिकेशन बता दिया था | उसे कैसा मेल एस्कॉर्ट चाहिए | किस्मत अच्छी थी पैराडाइज में ऐसे एस्कॉर्ट का अच्छा पूल मौजूद रहता था | पहले कामिनी के दिमाग में ये सब करने का इरादा नहीं था इसलिए उसे माइंड को समझाने में कुछ वक्त लगा, आखिर जिस्म की जरुरत का सवाल था | कामिनी बिस्तर पर आकर फिर से पसर गयी थी और फ़ोन करने के दो मिनट के अन्दर उसके दरवाजे पर नॉक हुआ | कामिनी उल्टा लेती थी उसने लेटे लेटे ही कमिंग की आवाज लगायी | गेट खोलकर एक आदमी अन्दर आया | उसने मास्क पहना हुआ था | कामिनी ने पीछे मुड़कर देखना भी जरुरी नहीं समझा | कामिनी उलटा लेटे लेटे अपने चूतड़ बारी बारी से मसलने लगी | वो मास्क पहले मेल एस्कॉर्ट आकर तय जगह पर खड़ा हो गया |
एस्कॉर्ट - क्या आर्डर है मैडम |
कामिनी - ये देख रहे हो न मेरे चूतड़, इन्हें आज अच्छा फील नहीं हो रहा, वो उत्तेजना नहीं फील हो रही है जो होनी चहिये | इन्हें अच्छा फील करावो | चूमो चाटो मालिश करो, कुछ भी करो मुझे आचा लगना चाहिए |
कामिनी का इतना कहना था, मेल एस्कॉर्ट ने एक आयल की बोतल से कुछ आयल निकाला और कामिनी के मांसल भारी भरकम चुताड़ो पर उड़ेल दिया | एस्कॉर्ट अपनी ड्यूटी निभाते वक्त साफ़ सफाई का बहुत ख्याल रखते थे | उसने हाथो में रबर ग्लव्स पहन रखे थे | आयल को आइस्ते से कामिनी के चुताड़ो से लेकर कमर तक फैला दिया और हलके हाथो से मालिश करने लगा | कामिनी ने खुद का सर बिस्तर में घुसा दिया | कामिनी के उठे हुए ठोस पुष्ट चूतड़ देखकर कोई भी लंड खड़ा हो जाये लेकिन मजाल है एस्कॉर्ट का बिना क्लाइंट की अनुमति के लंड सीधा हो जाये | मालिश करते करते कामिनी के चुतड एस्कॉर्ट फैलाकर चौड़े करने लगा | उसके चुताड़ो की दरार गायब हो गयी थी और जांघे फैलने से दरार के बीच का इलाका साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था | कामिनी इतनी बड़ी टैटू बाज थी उसने अपनी गांड पर भी टैटू बनवा रखा था | सिर्फ गांड ही नहीं बल्कि गांड और चूत के छेद के बीच में भी टैटू था | एस्कॉर्ट में इस टैटू को देखकर हैरान रह गया | एस्कॉर्ट अब कामिनी के चुताड़ो की दरार के निचले हिस्से में मालिश कर रहा था जहाँ उसकी गांड का गुलाबी छेद और चूत स्थित थी | उसने चुताड़ो को फैला दिया था जिससे कामिनी की गांड का छेद खुल गया | गांड का छेद देखकर लग रहा था कामिनी अपनी गांड में भी रबर के लंड घुसेड़ती रही होगी, नहीं तो इतनी आसानी से सिर्फ चूतड़ खीचने से गांड का छेद नहीं खुल जाता | नीचे उसकी चूत के ओंठ का फैलाव उसके अन्दर चूत के खुले छेद की कहानी अपने आप बयां कर रहे थे | एस्कॉर्ट कभी कामिनी के गांड के गुलाबी छल्ले पर उंगलियाँ फिराता, कभी उसकी चूत पर उंगलियाँ सहलाता कभी उसके चूत दाने को मसल देता | एस्कॉर्ट की हरकतों से कामिनी की वासना का बुखार बढ़ता ही जा रहा था लेकिन अभी तक वो उस चीज से मरहूम थी जिसकी उसे तलाश थी | वो कुछ अलग सा तेज सनसनाहट सा, कंपित तरंग जैसा अनुभव करना चाहती थी | एस्कॉर्ट अपनी पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन कामिनी के लिए नाकाफी था |
कामिनी ने आखिरकार उसे रोक दिया - स्टॉप एंड लाई डाउन ऑन बेड |
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दो पेज पढने के बाद ही उसे बोरियत होने लगी | पार्टी में किये गए डांस से भी उसे हल्की थकान भी हो रही थी इसलिए उसे खुद को फ्रेश करने की सोची | अलग अलग तरीके से अपने जिस्म और गांड को मटकाते हुए कमरे से लगे बाथरूम पंहुच गयी | बाथरूम की एक दीवार पर शीशा ही लगा था | उसने खुद को भिगोया और सेल्फी खीचने लगी | क्या गोरा गोरा बदन था | जुल्फे चेहरे पर से बिखरी हुई सीने तक लटक रही थी | सीने पर बड़े बड़े स्तन अपने ही बोझे से उसके सीने को झुकाए हुए थे, इसमें कोई दो राय नहीं उसके स्तन औसत से बड़े थे और उसकी छाती की उठान को नयी उचाईयां दे रहे थे | उसकी गोरी गोरी मांसल जांघे टैटू से भरी हुई थी यहाँ तक की उसका चूत त्रिकोण में टैटू से ढका हुआ था | बमुश्किल कोई उसकी चूत की दरार को दूर से देख सकता था | कुल मिलकर कामिनी सचमुच की कामिनी थी जिसे हर लंड चोदना चाहेगा | अब सवाल ये था कि आज तक कामिनी को किसी ने चोदा भी था या नहीं | कोई नहीं जानता था कि कामिनी अपनी सेक्स की प्यास कैसे बुझाती है | उसके आसपास के कुछ जानकर कहते थे कि कामिनी के पास रबर के लंडो का खजाना है और उसी से वो अपनी प्यास बुझाती है | उसने आज तक कभी असली लंड अपनी चूत में लिया ही नहीं | ये सब बाते सिर्फ कॉकटेल पार्टियों की गॉसिप थी, सच कोई नहीं जानता था सिवाय कामिनी के |
कामिनी बाथरूम में नहा रही थी | उसका पूरा बदन पानी से भीगा हुआ था, उसने शरीर को धोने वाला बॉडी लोशन निकाला, उसे बॉडी स्क्रबर के ऊपर उड़ेला और अपने जिस्म पर उसे घुमाने लगी | देखेते ही देखते उसके जिस्म झाग से सरोबार हो गया | कामिनी कंधे से लेकर पंजो तक शरीर के हर अंग और भाग पर स्क्रबर घुमा रही थी | पुरे जिस्म पर झाग ही झाग था | बार बार स्क्रबर को अपनी जांघो के बीच चूत त्रिकोण पर ले आती और अपनी चूत को बार बार रगड़ने लगती | इससे उसे बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था |
खुद को आच्छी तरह धोने के बाद, वो बात टब में जाकर बैठ गयी कुछ देर के लिए उसने आंखे बंद कर ली और अपनी चूत दाने की हलके हलके रगड़ने लगी | ठंडा ठंडा पानी उसके वासना से भरे गरम जिस्म पर बड़ा ही सुकून दे रहा था | वो बस आंख बंदकर अपनी वासनाओं की कप्लानावो में उड़ती हुई, आनंद के सागर में गोते लगा रही थी | अब उसने चूत दाने की रगड़ना छोड़, चूत के गुलाबी ओंठो पर हाथ फिसलना शुरू कर दिया | अपनी एक उंगली अपनी नाजुक चूत की गीली गुनगुनी एयर टाइट सुरंग में धंसा दी | उसके मुहँ से एक कराह निकली, उसने अपनी उंगली को अपनी गीली गरम चूत में अन्दर बाहर करने लगी | अब उससे रहा नहीं जा रहा था | उंगली चूत की दीवारों में कम्पन करा पाने में नाकाम हो रही थी, उसे कुछ बड़ा सा चाहिए था जो उसकी चूत की कसी हुई गीली गरम चिपकी दीवारों को चीरता हुआ अन्दर तक धंस जाये | जो उसे अन्दर तक सनसनाहट दे, उसकी चूत को अन्दर तक भर कर कुचल कर उसमे तरंग जगा दे | वो तेजी से बाथ टब से निकली और एक रबर का लंड लाकर शीशे से चिपका दिया | बिना देर किये खुद घुटनों के बल आकर घोड़ी बन गयी | फिर उसने हलके से खुद को पीछे की ओर खिसकाया | एक हाथ से आगे के जिस्म के भार को सँभालते हुए दुसरे हाथ से नीचे की तरफ लटकते रबर के लंड का सुपाडा ऊपर की ओर किया और उसे अपने चूत के मुहाने पर सटा दिया | रबर के सुपाडे के उसकी चूत के मुहाने पर सटते ही उसने तेजी से खुद को पीछे शीशे की तरफ धकेल दिया | रबर का लंड उसकी चूत की गुलाबी सलवटी दीवारों को चीरता फैलाता हुआ उसके अन्दर जाकर धंस गया | फिर वो धीरे धीरे खुद को आगे पीछे हिलाकर, खुद को रबर के लंड से चोदने लगी | हर पीछे को जाते धक्के के साथ रबर का लंड उसकी चूत में घुस जाता और उसके मुहँ से एक मादक सी सिसकारी फुट पड़ती | खुद को पोजीशन करके खुद को ही चोदना थोड़ा ज्यादा बोरिंग होता है औरतो के लिए, लेकिन जो औरते अकेले अपने जिस्म से खलती है उन्हें इसी में मजा आता है | कामिनी खुद को रबर के लंड से चोद रही थी लेकिन उसे मजा नहीं आ रहा था | वो अपने शरीर में वो कम्पन चाहती थी वो तरंग चाहती थी जो उसे जन्नत की सैर करा दे लेकिन अभी तक इसमें वो नाकाम रही थी | आखिर कुछ देर तक रबर का लंड लेने के बाद उसे अहसास हो गया यहाँ से उसे वो नहीं मिलेगा जो वो चाहती है | उसने रबर के लंड को अपनी चूत में लेना रोक दिया | खुद को तौलिये से पोचा और कमरे में वापस आ गयी | उसने कस्टमर हेल्प को फ़ोन किया और कुछ बातचीत हुई फिर फ़ोन काट दिया |
वो वासना की आग में भठ्ठी बनी हुई थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे अपने बदन का वासना का बुखार उतारे, कैसे अपने जिस्म में लगी आग को शांत करे | फिर उसे ख्याल आया जैसे पहले करती आई है वैसे ही इस बार भी करे | यहाँ की सर्विस में कभी कोई प्रॉब्लम नहीं हुई | इसलिए उसने एस्कॉर्ट सर्विस लेने का मन बनाया था | उसने अपनी चॉइस का स्पेसिफिकेशन बता दिया था | उसे कैसा मेल एस्कॉर्ट चाहिए | किस्मत अच्छी थी पैराडाइज में ऐसे एस्कॉर्ट का अच्छा पूल मौजूद रहता था | पहले कामिनी के दिमाग में ये सब करने का इरादा नहीं था इसलिए उसे माइंड को समझाने में कुछ वक्त लगा, आखिर जिस्म की जरुरत का सवाल था | कामिनी बिस्तर पर आकर फिर से पसर गयी थी और फ़ोन करने के दो मिनट के अन्दर उसके दरवाजे पर नॉक हुआ | कामिनी उल्टा लेती थी उसने लेटे लेटे ही कमिंग की आवाज लगायी | गेट खोलकर एक आदमी अन्दर आया | उसने मास्क पहना हुआ था | कामिनी ने पीछे मुड़कर देखना भी जरुरी नहीं समझा | कामिनी उलटा लेटे लेटे अपने चूतड़ बारी बारी से मसलने लगी | वो मास्क पहले मेल एस्कॉर्ट आकर तय जगह पर खड़ा हो गया |
एस्कॉर्ट - क्या आर्डर है मैडम |
कामिनी - ये देख रहे हो न मेरे चूतड़, इन्हें आज अच्छा फील नहीं हो रहा, वो उत्तेजना नहीं फील हो रही है जो होनी चहिये | इन्हें अच्छा फील करावो | चूमो चाटो मालिश करो, कुछ भी करो मुझे आचा लगना चाहिए |
कामिनी का इतना कहना था, मेल एस्कॉर्ट ने एक आयल की बोतल से कुछ आयल निकाला और कामिनी के मांसल भारी भरकम चुताड़ो पर उड़ेल दिया | एस्कॉर्ट अपनी ड्यूटी निभाते वक्त साफ़ सफाई का बहुत ख्याल रखते थे | उसने हाथो में रबर ग्लव्स पहन रखे थे | आयल को आइस्ते से कामिनी के चुताड़ो से लेकर कमर तक फैला दिया और हलके हाथो से मालिश करने लगा | कामिनी ने खुद का सर बिस्तर में घुसा दिया | कामिनी के उठे हुए ठोस पुष्ट चूतड़ देखकर कोई भी लंड खड़ा हो जाये लेकिन मजाल है एस्कॉर्ट का बिना क्लाइंट की अनुमति के लंड सीधा हो जाये | मालिश करते करते कामिनी के चुतड एस्कॉर्ट फैलाकर चौड़े करने लगा | उसके चुताड़ो की दरार गायब हो गयी थी और जांघे फैलने से दरार के बीच का इलाका साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था | कामिनी इतनी बड़ी टैटू बाज थी उसने अपनी गांड पर भी टैटू बनवा रखा था | सिर्फ गांड ही नहीं बल्कि गांड और चूत के छेद के बीच में भी टैटू था | एस्कॉर्ट में इस टैटू को देखकर हैरान रह गया | एस्कॉर्ट अब कामिनी के चुताड़ो की दरार के निचले हिस्से में मालिश कर रहा था जहाँ उसकी गांड का गुलाबी छेद और चूत स्थित थी | उसने चुताड़ो को फैला दिया था जिससे कामिनी की गांड का छेद खुल गया | गांड का छेद देखकर लग रहा था कामिनी अपनी गांड में भी रबर के लंड घुसेड़ती रही होगी, नहीं तो इतनी आसानी से सिर्फ चूतड़ खीचने से गांड का छेद नहीं खुल जाता | नीचे उसकी चूत के ओंठ का फैलाव उसके अन्दर चूत के खुले छेद की कहानी अपने आप बयां कर रहे थे | एस्कॉर्ट कभी कामिनी के गांड के गुलाबी छल्ले पर उंगलियाँ फिराता, कभी उसकी चूत पर उंगलियाँ सहलाता कभी उसके चूत दाने को मसल देता | एस्कॉर्ट की हरकतों से कामिनी की वासना का बुखार बढ़ता ही जा रहा था लेकिन अभी तक वो उस चीज से मरहूम थी जिसकी उसे तलाश थी | वो कुछ अलग सा तेज सनसनाहट सा, कंपित तरंग जैसा अनुभव करना चाहती थी | एस्कॉर्ट अपनी पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन कामिनी के लिए नाकाफी था |
कामिनी ने आखिरकार उसे रोक दिया - स्टॉप एंड लाई डाउन ऑन बेड |
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