S
StoryPublisher
Guest
[SIZE=150%] खुद को आस्वस्त करने और अपने अन्दर हिम्मत जुटाने में उसे कुछ समय लगा | आशंकित मन और कांपते हाथो से उसने हैंडल लॉक में टटोल कर मास्टर की लगायी और लॉक खुल गया | रीमा घटाटोप अँधेरे में अन्दर घुसी, जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया, दरवाजा लॉक हो गया | दरवाजा लॉक होते ही एक कीपैड चमका और कीपैड से आवाज आई, इंटर योर कोड | रीमा को कुछ समझ न आया तो कुछ देर उलझन में उसी अँधेरे में शंकित नजरो से कीपैड को देखती रही, कीपैड से फिर आवाज आई इंटर योर कोड, रीमा को समझ नहीं आया क्या टाइप करे, करे या न करे, वापस भाग चले | लेकिन सवाल था अब वापस भी कैसे जाएगी | दरवाजा तो लॉक हो चूका है | कीपैड से फिर आवाज आई इंटर योर कोड, आर प्रेस यच फॉर हिंट | रीमा ने यच प्रेस किया, कीपैड से फिर आवाज आई इंटर योर कोड, योर कोड इज योर की नंबर | रीमा ने फटाफट M01R टाइप किया, कॉटेज के अन्दर बने 4 दरवाजो में से एक अनलॉक हो गया और हल्की सी रौशनी जल गयी, जहाँ से उसको नीचे की तरफ जाती हुई सीढियां दिखाई दी | रीमा धड़कते दिल और आइस्ता कदमो से सीढियों से नीचे उतरने लगी | नीचे जाते ही उसे हलकी रौशनी में चार दरवाजे फिर दिखाई पड़े, सब पर उनका कोड पड़ा था | रीमा ने M01R वाले दरवाजे में चाभी लगायी और दरवाजा खोलते ही फिर सीढियां दिखाई दी जो पांच कदम चलते ही खतम हो गयी | उसके बाद था एक आलिशान सा कमरा, जिसमे सोफा, बेड, टीवी और कुर्सी सब मौजूद था | कमरे में आगे बढ़ने पर उसके दोनों छोरो पर एक एक बड़ा सा शीशा लगा था जिसमे से बाहर की तरफ तो देखा जा सकता था लेकिन बाहर वाला अन्दर नहीं देख सकता था | शीशे के किनारे पंहुचते ही रीमा को समझ आ गया आखिर क्यों इसको मास्टर रूम कहा जाता है | शीशे से रीमा ने जो नजारा देखा, उसकी आंखे फटी की फटी रह गयी, उसने सपने में भी नहीं सोचा था यहाँ आकर ऐसा कुछ भी देखने को मिल सकता है, वो तो यहाँ कुछ और ही सोचकर आई थी लेकिन उसने ये सब तो कभी नहीं सोचा था |
रीमा की आँखों के सामने जो भी था वो रीमा के लिए एक 440 वोल्ट के झटके से कम नहीं था |
रीमा जिस कमरे में अभी थी, वहां मध्यम लाइट जल रही थी लेकिन बाहर से अन्दर दिखने का कोई चांस नहीं थी | कमरा काफी बड़ा था और साथ में अटैच्ड एक आलिशान बड़ा बाथरूम था | कमरे में एक तरफ छोटा सा केबिन भी बना हुआ था, जिसमे कम से कम एक दर्जन स्क्रीन लगी हुई थी | मास्टर रूम के चारो तरफ 8 फीट नीचे चारो तरफ एक दर्जब खुला केबिन बने हुए थे, जो लगभग लगभग उसके रूम की डिजाईन के ही थे लेकिन उनका साइज़ इससे छोटा था | हर केबिन में वही सारा सामान था जो मास्टर केबिन में था बस फर्क ये था उन सब की छत सीमेंट की नहीं थी | हर केबिन की छत पर एक वही शीशा लगा हुआ था जो मास्टर रूम में था, बस फर्क ये था उसमे केबिन की अन्दर वाला कुछ भी बाहर का नहीं देख सकता था, उसे छत की तरफ देखने पर ये अहसास भी नहीं होता की छत पारदर्शी है, लेकिन मास्टर रूम के दोनों छोरो पर शीशे से झांकते इंसान को उन केबिन की सुई तक दिख सकती थी | मास्टर केबिन की लाइट डिम थी लेकिन केबिन में लाइट बहुत थी और ऊपर से सब कुछ दिखाई दे रहा था | इसके अलावा मास्टर केबिन में बना साइड केबिन जिसमे हर केबिन की हरकत देखने को मॉनिटर लगे थे, वहां से भी केबिन में क्या हो रहा है इस पर नजर रखी जा सकती थी |
रीमा ने जो कुछ उन केबिन में होता देखा, उसके होश उड़ गए | उसे लगा कोई केबिन से उसे यहाँ खड़ा इस तरह देख न ले इसलिए पीछे हटकर बेड पर बैठ गयी | हर केबिन की एक अपनी कहानी थ, यहाँ कोई मीटिंग नहीं हो रही थी | ये एक अय्याशी का खुफिया अड्डा था इसलिए यहाँ सिर्फ उन्ही को आने की इजाजत थी जिन्होंने इसके लिए पैसे भरे थे | मास्टर केबिन और उसके आस पास के केबिन ऐसे डिजाईन किये गए थे, की किसी को भी भनक न लगे की पड़ोस में क्या हो रहा है और मास्टर केबिन में बैठा इंसान सब कुछ देख ले | जबकि केबिन का आदमी सिर्फ केबिन में ही मस्त रहे | मास्टर केबिन में एक बड़ा सा पर्दा था रीमा को समझ नहीं आया ये क्या है | वो बेड पर बैठी बस चारो तरफ केबिन का जायजा ले ही रही थी | मन में डर और आशंका के साथ एक अनचाही सी लालसा भी थी, वो क्या थी पता नहीं | रीमा शंकाओं से घिरी हुई थी, उसने केबिन में जो भी होता देखा वो उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं था | वो ये सब देखकर कुछ भी सोच पाने में असफल थी | कैसी है ये दुनिया, कैसे है ये लोग | उसके अन्दर दुविधा, हीनता, अविश्वास और सबसे ज्यादा शर्म घर करती जा रही थी | उसने यहाँ का जो नजारा देखा उसके बाद यहाँ से जाने का फैसला कर लिया | वो इस गन्दगी से जीतनी जल्दी हो सके दूर जाना चाहती थी | उसने चाभी हाथ में थामी और तेजी से बेड से उठी और अपने केबिन के दरवाजे को उन लॉक किया और बाहर निकल गयी | जीतनी शांति से वो यहाँ आई थी उतनी ही शांति से वो यहाँ से चली गयी | वो कॉटेज से बाहर निकली ही थी, रोहित का फ़ोन आ गया | एक बरगी को रोहित का नाम देखकर चौंक गयी लेकिन उसे लगा शायद रोहित उसके और प्रियम के लिए चिंतित होगा, इसलिए फ़ोन किया होगा |
रीमा - हेल्लो रोहित |
रोहित - कैसी हो रीमा |
रीमा - बढ़िया |
रोहित - पार्टी एन्जॉय करी |
रीमा - अरे कहाँ ??
रोहित - झूठ क्यों बोल रही हो, मैंने सुना है तुमने वहां भी झंडे गाड़ दिए है | हर कोई तुमारा दीवाना हो गया है |
[/SIZE]
रीमा की आँखों के सामने जो भी था वो रीमा के लिए एक 440 वोल्ट के झटके से कम नहीं था |
रीमा जिस कमरे में अभी थी, वहां मध्यम लाइट जल रही थी लेकिन बाहर से अन्दर दिखने का कोई चांस नहीं थी | कमरा काफी बड़ा था और साथ में अटैच्ड एक आलिशान बड़ा बाथरूम था | कमरे में एक तरफ छोटा सा केबिन भी बना हुआ था, जिसमे कम से कम एक दर्जन स्क्रीन लगी हुई थी | मास्टर रूम के चारो तरफ 8 फीट नीचे चारो तरफ एक दर्जब खुला केबिन बने हुए थे, जो लगभग लगभग उसके रूम की डिजाईन के ही थे लेकिन उनका साइज़ इससे छोटा था | हर केबिन में वही सारा सामान था जो मास्टर केबिन में था बस फर्क ये था उन सब की छत सीमेंट की नहीं थी | हर केबिन की छत पर एक वही शीशा लगा हुआ था जो मास्टर रूम में था, बस फर्क ये था उसमे केबिन की अन्दर वाला कुछ भी बाहर का नहीं देख सकता था, उसे छत की तरफ देखने पर ये अहसास भी नहीं होता की छत पारदर्शी है, लेकिन मास्टर रूम के दोनों छोरो पर शीशे से झांकते इंसान को उन केबिन की सुई तक दिख सकती थी | मास्टर केबिन की लाइट डिम थी लेकिन केबिन में लाइट बहुत थी और ऊपर से सब कुछ दिखाई दे रहा था | इसके अलावा मास्टर केबिन में बना साइड केबिन जिसमे हर केबिन की हरकत देखने को मॉनिटर लगे थे, वहां से भी केबिन में क्या हो रहा है इस पर नजर रखी जा सकती थी |
रीमा ने जो कुछ उन केबिन में होता देखा, उसके होश उड़ गए | उसे लगा कोई केबिन से उसे यहाँ खड़ा इस तरह देख न ले इसलिए पीछे हटकर बेड पर बैठ गयी | हर केबिन की एक अपनी कहानी थ, यहाँ कोई मीटिंग नहीं हो रही थी | ये एक अय्याशी का खुफिया अड्डा था इसलिए यहाँ सिर्फ उन्ही को आने की इजाजत थी जिन्होंने इसके लिए पैसे भरे थे | मास्टर केबिन और उसके आस पास के केबिन ऐसे डिजाईन किये गए थे, की किसी को भी भनक न लगे की पड़ोस में क्या हो रहा है और मास्टर केबिन में बैठा इंसान सब कुछ देख ले | जबकि केबिन का आदमी सिर्फ केबिन में ही मस्त रहे | मास्टर केबिन में एक बड़ा सा पर्दा था रीमा को समझ नहीं आया ये क्या है | वो बेड पर बैठी बस चारो तरफ केबिन का जायजा ले ही रही थी | मन में डर और आशंका के साथ एक अनचाही सी लालसा भी थी, वो क्या थी पता नहीं | रीमा शंकाओं से घिरी हुई थी, उसने केबिन में जो भी होता देखा वो उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं था | वो ये सब देखकर कुछ भी सोच पाने में असफल थी | कैसी है ये दुनिया, कैसे है ये लोग | उसके अन्दर दुविधा, हीनता, अविश्वास और सबसे ज्यादा शर्म घर करती जा रही थी | उसने यहाँ का जो नजारा देखा उसके बाद यहाँ से जाने का फैसला कर लिया | वो इस गन्दगी से जीतनी जल्दी हो सके दूर जाना चाहती थी | उसने चाभी हाथ में थामी और तेजी से बेड से उठी और अपने केबिन के दरवाजे को उन लॉक किया और बाहर निकल गयी | जीतनी शांति से वो यहाँ आई थी उतनी ही शांति से वो यहाँ से चली गयी | वो कॉटेज से बाहर निकली ही थी, रोहित का फ़ोन आ गया | एक बरगी को रोहित का नाम देखकर चौंक गयी लेकिन उसे लगा शायद रोहित उसके और प्रियम के लिए चिंतित होगा, इसलिए फ़ोन किया होगा |
रीमा - हेल्लो रोहित |
रोहित - कैसी हो रीमा |
रीमा - बढ़िया |
रोहित - पार्टी एन्जॉय करी |
रीमा - अरे कहाँ ??
रोहित - झूठ क्यों बोल रही हो, मैंने सुना है तुमने वहां भी झंडे गाड़ दिए है | हर कोई तुमारा दीवाना हो गया है |
[/SIZE]