• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

[SIZE=150%] प्रियम का रोना जारी रहा - चाची सचमुच में बहुत बड़ी गलती हो गयी, माफ़ कर दो, अपनी मरी माँ की कसम खाता हूँ अब ऐसा कभी नहीं करूगां |

प्रियम की माँ मरी नहीं थी उसे छोड़ कर चली गयी थी और ये बात सिर्फ चार लोग जानते थे, रोहित, रोहित की बहन, रोहित का जीजा और रीमा | अब रीमा का दिल पसीजने लगा | वो सीधी हो गयी और उसी पत्थर पर सीधी बैठ गयी | कुछ देर सोचती रही फिर अपनी जांघे फैला दी और अपनी चूत के ओंठ खोल दिए | असल में रोहित से चुदने के बाद रीमा को अपनी असली स्थिति का अहसास हुआ | उसे पता लग गया की उसके और प्रियम के रिश्ते की एक हद है और उसे उससे आगे न खुद बढ़ना है न उसे बढ़ने देना है | यही सब सोचकर उसने एक नए तरीके से प्रियम के साथ रिश्ता बनाने की सोची थी लेकिन उसकी बेवखूफी ने सब गड़बड़ कर दिया और रीमा का गुस्सा सातवे आसमान पर पंहुचा दिया | इसलिए पिछले तीन से ज्यादा घंटे से उसकी सजा भुगत रहा है और अब सजा भुगतते भुगतते टूट गया |

रीमा ने अपनी आटे से सनी चूत के फांके खोले और प्रियम को दिखाते हुए बोली - देख रोहित के लाल, ये रीमा की चूत कमाल, जिस पर नहीं है एक भी बाल, इसमें तू मत अपना लंड डाल, ये नहीं बनी तेरे लिए लाल |

ये चूत तेरे लंड के लिए नहीं है | मै बस यही देखना चाह रही थी कि इस चूत के लिए तेरे अन्दर कितनी तड़प है | कान खोलकर सुन ले ये रीमा की गुलाबी चिकनी चूत तेरे लिए नहीं है, तेरे लिए नहीं है तेरे लिए नहीं है | अपने लंड को अच्छी तरह से समझा दे इस चूत के सपने देखना छोड़ दे | ये उसे नहीं मिलने वाली | तुझे चूत चोदनी है, मै दिलऊँगी ताजा फ्रेश कसी हुई गुलाबी कुंवारी चूत | इसके ख्वाब देखना छोड़ दे |

इसके बाद ख़ामोशी छा गयी | न प्रियम ने सर सीधा किया, न रीमा आगे कुछ बोली |

कुछ देर रूककर थोडा सोचकर रीमा ने ही किचन की ख़ामोशी तोड़ी - तू इसे चुसना चाहे तो चूस सकता है, छु सकता है चाट भी सकता है, इसका पानी भी पी सकता है लेकिन मै इसे तुझे चोदने नहीं दे सकती, न ही तू इसमें कभी अपना लंड घुसाने का ख्वाब देखना | तेरे लंड से रीमा की ये चूत कभी नहीं चुदेगी, न तू इसे कभी चोद पायेगा | कम से कम मेरे पुरे होशोहवास में तो कभी नही | (रीमा ने झूठ बोला ताकि प्रियम पर दबाव बना सके ) | इस चूत ने सिर्फ एक लंड लिया है अब तक और वो है मेरे पति का | तू अपनी छोड़ तेरे बाप की कभी हिम्मत नहीं हुई, मेरी चूत के बारे में सोचने की | तू बच्चा लंड है इसलिए तेरे लंड पर रहम कर रही हूँ वरना अभी रस्सी से बंधकर वो कसकर निचोड़ती तेरा लंड और गोटियों को कि यहाँ से सीधे हॉस्पिटल जाता | बच्चा है इसलिए प्यार से डील कर रही थी, अभी अभी तेरा लंड चूसा था, फिर खड़ा होगा, फिर चूस के झाड़ दूँगी लेकिन तू अपनी उम्र में लड़की दूंढ, वही तेरे लिए अच्छा है | तू मुझे नंगा देख चूका है, मेरे जिस्म जिस्म को छु चूका है, मेरी चूंची दबा चूका है, मेरे ओंठो का रस पी चूका है, मेरी चूत चाट चूका है, मेरा चूत दाना चूस चूका है | इससे ज्यादा औरत के जिस्म में लुटाने को और होता ही क्या है, अब बचा क्या है मेरे जिस्म में जिसको तुझे पाना है | एक बच्चा समझकर मैंने तेरी मदद की | तुझे चूत कैसे चोदते है ये भी सिखाऊंगी लेकिन किसी और की चूत के साथ | अब कान खोलकर सुन ले जो आज के बाद ऐसी बेवखूफी भरी हरकत की और ख़बरदार जो इसके बारे में किसी को बताया तो | तेरे बाप को सब पता है, ये भी बता दूँगी फिर सोच लेना क्या हाल करेगा तेरा वो रोहित |

प्रियम ने डरते हुए - लेकिन चाची एक बार, सिर्फ एक बार .........................................|

रीमा फिर पुराने टन में लौट में आई - तुमारी गांड फाड़ के रखो तब तक ही तुम्हे मेरी बात समझ आती है | नहीं का मतलब नहीं है | मुझे नहीं चुदवाना समझे, एक बार नहीं चाहे हजार बार गिडगिडाओ | इस चूत में तुमारे लंड क लिए कोई जगह नहीं है |

प्रियम समझ गया ज्यादा जोर डाला तो फिर पहले की तरह चंडी बन जाएगी, बेहद धीमी डरती आवाज में - इसको क्या करू, अब हाथ से नहीं होगा मुझसे | आप सामने नंगी बैठी हो मुझसे नहीं हो पायेगा |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] रीमा फिर पुराने टन में लौट में आई - तुमारी गांड फाड़ के रखो तब तक ही तुम्हे मेरी बात समझ आती है | नहीं का मतलब नहीं है | मुझे नहीं चुदवाना समझे, एक बार नहीं चाहे हजार बार गिडगिडाओ | इस चूत में तुमारे लंड क लिए कोई जगह नहीं है |

प्रियम समझ गया ज्यादा जोर डाला तो फिर पहले की तरह चंडी बन जाएगी, बेहद धीमी डरती आवाज में - इसको क्या करू, अब हाथ से नहीं होगा मुझसे | आप सामने नंगी बैठी हो मुझसे नहीं हो पायेगा |

रीमा भी अब नार्मल हो गयी थी - ऊहोहोहो तो ये बात है, सामने नंगी औरत बैठी है इसलिए मुठीयाने में मजा नहीं आ रहा है | मेरी गुलाबी चूत देखकर लगता है पागल हो गया है बच्चा लंड | अच्छा एक काम कर बच्चे का कच्चा लंड जाकर फ्रिज से एक आइस क्यूब ले आ, जब मुझे मजा आएगा तभी तुझे मजा दूँगी | प्रियम का शरीर थका हारा था फिर भो वो फ्रिज तक गया और एक आइस उठा लाया | चल इसे मेरे चूत पर चारो तरफ रगड़ और फिर मेरे संकरे गुलाबी छेद में डाल दे |

प्रियम चौंक गया - ये ठंडा ठंडा नहीं लगेगा |

रीमा - यही ठंडा गरम तो चूत का असली मजा है जो औरत और उसकी चूत को घनघना, झनझना देता है, अच्छे अच्छे मर्द नहीं समझ पाए फिर तेरे जैसे कच्चे लंड के कैसे पल्ले पड़ेगा, तू बस जो बोला है वो कर |

प्रियम ने चारो तरह बर्फ का टुकड़ा घुमाया, फिर चूत दाने को रगड़ा और कुछ देर बाद ही उसे चूत के छेद में घुसेड़ दिया | गरम गीली चूत के अन्दर बर्फ के ठन्डे सर्द चुभन से एक अलग ही तरह का कम्पन रीमा के शरीर में हुआ | ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने बर्फ के चाकू से उसकी चूत चीर दी हो लेकिन चूत की दीवारों पर ठन्डे बर्फीलेपन के अहसास से एक अलग ही किंकी सुख रीमा को मिला | अक्सर वो अपने शरीर पर बर्फ के टुकड़े फिराती थी लेकिन चूत और चूत के अन्दर ये अनुभव उसे पहली बार ही हुआ था |

उसकी चूत की दीवारे सुन्न होने की तरफ जा रही थी लेकिन रीमा ये बेहद अलग अनुभव किसी भी तरह जाया नहीं करना चाहती थी और इसलिए उसने प्रियम को खड़ा करके उसके पास घुटनों के बल बैठ गयी | उसका ये खुद को ही तकलीफ देकर एन्जॉय करने का तरीका प्रियम के ऊपर से निकल गया | बर्फ से सर्द टुकड़े ने रीमा की चूत में ऐसी हलचल मचाई की रीमा जोश में आ गयी | उसने एक लम्बा सा बर्गर उठाया उसे बीच से चीरा मारा और प्रियम के लंड को उसके अन्दर चारो ओर से लपेट लिया | प्रियम का लंड बर्गर में समां गया | रीमा ने प्रियम को उसके लंड के चारो तरफ लिपटे बर्गर को थामने को कहा ताकि वो उस पर क्रीम और सास लगा सके | जब प्रियम ने लंड के चारो तरफ लिपटे बर्गर को थामा तो रीमा ने मस्तियाते हुए बर्गर सहित प्रियम को अपने मुहँ में लेने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही | फिर रीमा सास और क्रीम लेने चली गयी |

प्रियम हैरान था की अब रीमा चाची क्या करने वाली है | वो बस साँस थामे आगे होने वाले रीमा के एडवेंचर का वेट कर रहा था और मन ही मन सोच रहा था, कहाँ से इतने आईडिया आते है इनके पास , क्या सोचा था मैंने रीमा चाची के बारे में और ये क्या निकली | ये तो सेक्स की जन्म जन्मान्तर की भूखी है और थकती भी नहीं | मेरी तो अभी से जान निकल गयी है | इसके बाद तो मुझसे अपने पैरो पर खड़ा भी नहीं हुआ जायेगा |

रीमा ने प्रियम के लंड और बर्गर के चीरे के बीच में ढेर सारा टोमेटो सास उड़ेल दिया और चाट चाट कर चखने लगी | प्रियम हैरान था की रीमा चाची के पास कितने तरीके है लंड से खेलने के, अपने जिस्म से खेलने के | कैसे उनकी चूत इतनी ठंडी बर्फ निगल गयी | एक ही दिन में उसने औरत किचन में कितनी तरह से सेक्स गेम खेल सकती है ये सब देख लिया था | जिस उम्र में वो था शायद ही उसे कुछ समझ आया हो, लेकिन जो भी रीमा बोलती गयी किया उसने सब कुछ, भले ही उसके डर से | जाहिर सी बार है इसमें उसके लिए मजे वाली कोई बात नहीं थी, लेकिन अब उसकी चेतना लौट चुकी थी दिमाग ने सोचना शुरू कर दिया था | उधर रीमा ने प्रियम के लंड को लाल चटनी के साथ चाटना शुरू कर दिया | प्रियम का लंड कई बार मसला जा चूका था और सास में मिर्च का प्रभाव था इसलिए वो प्रियम के लंड पर जाकर तेजी से लगा | प्रियम चीखने लगा तो रीमा ने डांट दिया |

रीमा के डांटने से प्रियम तो चुप हो गया लेकिन उसकी आंखे बह चली | रीमा ने तेजी से लाल चटनी उसके लंड पर से साफ़ करने शुरू कर दी ताकि उसके लंड में हो रही जलन कुछ कम हो सके | साथ में बर्गर को पकड़कर उसके लंड के ऊपर ऊपर नीचे करने लगी | रीमा अपने हाथ की मुट्ठी की बजाय बर्गर से प्रियम का लंड रगड़ कर मुठिया रही थी | प्रियम का खड़ा लंड जलन से बेहाल था लेकिन रीमा की चूमा चाटी और मुठीयाने से मुरझा भी नहीं रहा था | बड़ी विषम स्थिति थी प्रियम की, रीमा चाची के सामने ही चार बार झड चूका था लेकिन मजाल है जो एक बार भी उसे रीमा ने इसके सुख का अहसास करने दिया हो |

रीमा प्रियम की हालत देख कर बोली - बिलकुल ऐसी ही हालत होती है औरत और उसके चूत की, जब कोई बिना पूछे, बिना चूमे, बिना चाटे, बिना मर्जी के औरत को चोदना शुरू कर देता है | उसे भी चुदाई में दर्द या चूत में जलन महसूस होती है, ऐसे ही जैसे अभी तुम्हे हो रही है | धीरे धीरे ये जलन तुमारी मै चाट चाट कर ख़त्म कर दूँगी और फिर तुम अपने वासना के ज्वार में डूब जावोगे | वैसे ही जैसे कुछ देर तक चूत में लंड जाने से चूत अपने आप गीली हो जाती है और औरत का बदन गरम, फिर वो भी चुदाई में साथ देने लगाती है | इसलिए ध्यान रखो बिना औरत की मर्जी के कभी उसकी चूत मत मारना, उसे बिलकुल उसी अनुभव से गुजरना पड़ता है जैसे अभी तुम गुजर रहे हो | जिस दिन इस दर्द के अहसास को अपना बना लोगे, और औरत को चोदते समय उसका ख्याल रखोगे, उसके बाद हर औरत खुसी खुसी तुमसे चुदेगी |

रीमा बर्गर को मुहँ में लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका साइज़ बहुत बड़ा था., फिर रीमा ने प्रियम के सुपाडे को चुसना शुरू कर दिया | प्रियम के लंड की जलन कम हो गयी थी और वो अपने लंड को काफी देर से हिला भी रहा था | बाकि कसर रीमा के चूसने ने पूरी कर दी | प्रियम की गोलियां फिर से फूल गयी और उसकी गोलियों में बचा हुआ सफ़ेद गरम रस उसके लंड के मुहाने की तरफ बह चला | प्रियम के हाथ पांव ढीले पड़ गए | प्रियम झड़ने लगा | अब उसके शरीर में जान नहीं बची थी, बस एक गरम रस का आवेग था जिसे बहकर निकल जाना था और प्रियम चाहता था ये जल्दी से जल्दी निकले | उसकी जान को सुकून मिले | इससे पहले कभी भी वो लगातार दो बार के बाद नहीं झड़ा था | आज तो उसकी सारी लिमिट टूट गयी | रीमा ने उसे जड़ सहित निचोड़ लिया | पिचकारी छुटते समय प्रियम की टांगे काँप गयी और उसका रस रीमा के सुडौल छातियों से जाकर चिपक गया | बस दो छोटी पिचकारी में ही उसका काम तमाम हो गया |

उसकी गोलियों में अब और रस नहीं बचा था | रीमा ने सब निचोड़ लिया था, एक एक बूँद निचोड़ लिया था | प्रियम पस्त हो चूका था | उसके हाथ पांव सब ढीले पड़ चुके थे | वो वही धम्म से बैठ गया | रीमा ने उसकी तरफ बर्गर बढ़ा दिया, बिना इनकार के प्रियम ने बर्गर ले लिया और खाने लगा | रीमा ने अपने उभरी छाती की पहाड़ी पर गिरे सफ़ेद रस को उंगलियों से पोछा और चाटने लगी | रीमा ने आज अपनी फंतासी जी भर के जी, प्रियम न आया होता तो शायद रूटीन की तरह नंगे होकर खाना बनाती, थोडा बहुत अपने जिस्म से खेलती और सो जाती | लेकिन प्रियम ने तो उसका दिन बना दिया | रोहित के चुदाई के बाद जो आत्मविश्वास उसे मिला था उसमे आज चार चाँद लग गए | पूरा सेक्स सेशन उसने लीड किया और प्रियम को अपने स्लेव की तरह बनाकर जो मर्जी हुई वो करवाया | उसे एक पल को प्रियम के लिए दुःख होता लेकिन अगलने पल ही वो गुस्से से भर जाती और खुद के फैसले और हरकतों को खुद के अन्दर ही जस्टिफाई करने लगती |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] प्रियम तो बर्गर खाने के बाद जैसे फर्श पर ही पसर गया | रीमा समझ गयी उसे एनर्जी की जरुरत है, वो जल्दी से एग का फ्रूट शेक बनाकर ले आई |

उसने गिलास प्रियम की तरफ बढ़ा दिया - लो पियो |

प्रियम - आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया, क्या मैंने इतनी बड़ी गलती कर दी थी की आप मेरी जान ही निकाल दो | आपने मेरो गोलियों की आखिरी बूँद तक निचोड़ ली है | मेरे लंड और सुपाडे में दर्द हो रहा है और गोलियों में भी | प्रियम दुखी होता हुआ बोला |

रीमा - लंड और गोलियों का दर्द तो ठीक हो जायेगा, कल सुबह तक गोलियां फिर से भरने लगेगी और २ दिन के अन्दर ही उनमे फिर से उतना माल जमा हो जायेगा जितने की अभी पिचकारी मारी है | तुमारी गलती इतनी बड़ी है की मै तुम पर अब जिंदगी भर भरोसा नहीं करूंगी | तुमने मेरा भरोसा तोडा है | ये जो सजा मिली है वो इस बात की है, औरत के कपडे उतारने से पहले उसकी इज्जत करना सीखो, चूत को चोदने से पहले उसकी कीमत जानो और उसको क़द्र करो | औरत का शरीर सिर्फ हांड मांस का जिस्म नहीं है, उसके साथ उसकी भावनाओं के अथाह सागर जुड़े है | उन भावनाओं की क़द्र नहीं करोगे तो तुममे और जानवर में अन्तर क्या है | औरत उन्ही भावनाओं में डूब कर ही तो दिलो जान से किसी को प्यार करती है और चुदती भी है | जब उन भावनाओं की क़द्र नहीं करोगे तो उसके जिस्म, उसकी चूत की क़द्र कैसे करोगे | औरत चुदते समय जिस दर्द के साथ लंड अपनी चूत में लेती, जिस दर्द से गुजरती है उसे महसूस तो करो, उसका अहसास तो करो कम से कम | जावो किसी औरत का दिल जीतो पहले, फिर जमकर चोदो उसे, जमकर मतलब जमकर, वो हर दर्द बर्दास्त करेगी, क्योंकि उसे पता है जिस लंड के लिए वो इतना कुछ बर्दास्त कर रही है उसे उसकी कीमत पता है, उसकी वो हमेशा क़द्र करेगा | अपनी गुलाबी मखमली चिकनी चूत को अच्छे से फैलाते हुए - देख लो इसे, ध्यान से देख लो, ये तुमारी रीमा चाची की चूत नहीं है बल्कि वो चूत है जो तुम्हे चाहिए, देखो इस छेद को ध्यान से, इसी में अपना लंड घुसेड कर अन्दर बाहर तो करना चाहते थे | ये मेरी चूत नहीं है ये वो चूत है जो तुम्हे चाहिए, सब औरतो की चूत एक ही जैसी होती है, रंग रूप की बात अलग है लेकिन जिस चूत को भी देखोगे ऐसी ही मिलेगी | जावो बाहर निकालो, अपने लायक, अपने लिए अपनी चूत ढूंढो, उसे अपना बनावो और खूब चोदो | यहाँ तुम्हें बस इतना ही मिल सकता है जितना तुमारे सामने है | इससे आगे बढ़ने की न तो मै तुम्हे इजाजत दूँगी और न ही तुम्हे इसका हक़ है |

रीमा ने जांघे समेत ली - जब तक तुम्हे चोदने के लिए तुमारी चूत नहीं मिलती, तुमारे लंड की स्टैमिना ट्रेनिंग जारी रह सकती है बशर्ते ये मै तय करूंगी की कब और कैसे ट्रेनिंग देनी है |

प्रियम - आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, ऊपर से आप नंगी होकर तो कहर ही ढाती हो, भला मुझे कोई और कैसे पसंद आएगी |

रीमा - इस उम्र में होता है ये सब, धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा |

प्रियम - कैसे होगा, आपके जिस्म का इक एक हिस्सा, एक एक कसाव, एक एक कटाव, एक एक उभार सब देखा है मैंने | और कौन लड़की मुझे इस तरह से नंगा होकर ये सब दिखाएगी |

रीमा हल्का सा मुस्कुरा दी - पुरे के पुरे गधे हो क्या | क्या चाहते हो की पहले लड़की नंगा होकर तुम्हे अपना जिस्म दिखाए, अपनी चूत, छाती, चुतड के दर्शन कराये तब उससे दोस्ती करोगे | पहले दोस्ती होती है, खाना पीना साथ खाते है, कई महीनो तक अच्छे से एक दुसरे को जानने के बाद कही लड़की चुदने को तैयार होती है |

प्रियम - इतनी मेहनत करू भी और न पसन् आई उसकी चूत तो |

रीमा हंस पड़ी - चूत में क्या पसंद नापसंद, चूत तो सबकी एक जैसी ही होती है गधे कही के | रही बात मेहनत की तो देखो तो कितनी मेहनत लगती है चूत की एक झलक पाने में, चोदना तो बहुत दूर की बात है | यहाँ फ़ोकट में सब मिल गया] तो उल्टा मुझे ही ब्लैकमेल करने चले आये |

प्रियम - फिर भी न पसंद तो |

रीमा - पहले एक किसी को चोद तो सही, फिर बताना पसंद आई की नहीं | कम से कम तेरा खाता तो खुलेगा, फिर न पसन् आये तो लड़की को बोलकर अगल हो जाना, किसी और को ट्राई करना | लडकिय भी तो यही करती है | मेरी चूत के बारे में भूल जावो, ये तुम्हे मरते दम तक नहीं मिलने वाली | इसे चूम चाट लिया , इसे अपना सौभाग्य समझो | अब तो अन्दर तक छेद भी खोलकर दिखा दिया | इससे ज्यादा और क्या चाहिए | अब निकलो और सीधे अपने फ्रेंड के यहाँ जाना, जैसा तुमने रोहित को बोला था |

प्रियम ने झट से अपने कपडे पहने और अपने घर की तरफ निकल गया | जाने से पहले रीमा ने उसे कुछ गोलिया दी, जो इस तरह से निचोड़े जाने के बाद होने वाले उसके सर दर्द और बदन दर्द में काम आने वाली थी | रीमा ने उसे ये भी बता दिया की कब कौन सी गोली खानी खानी है | प्रियम राजू का मोबाइल लिए बिना ही वापस चला गया, उसे पता था की राजू को क्या बोलना है, रीमा नंगे ही खाना बनाने में लग गयी |

उस दिन के बाद से एक हफ्ते तक प्रियम को ये ही नहीं समझ आया कि उसके साथ हुआ क्या ? वो ईमानदारी से आकलन करने की मनोस्थिति में ही नहीं था, उसकी रीमा चाची उसकी ऐसी गांड फाड़ेगी, ये उसने सपने में भी नहीं सोचा था | उसे इस बात का भी अफ़सोस था कि गलती भी उसकी ही थी, लेकिन इससे ज्यादा सोच पाने में वो असमर्थ था | अपने दोस्तों को भी इस बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ था, क्योंकि सच बोलता तो उसकी खिल्ली उड़ाई जाती और झूठ बोलता तो पकड़ा जाता | ऊपर से राजू पहले दिन से ही प्रियम से अपने फ़ोन के बारे में पूछ रहा था | प्रियम का हर बार एक ही जवाब होता कि कही खो गया है या गिर गया है वो उसे एक नया स्मार्ट फ़ोन लेकर दे देगा | अब सात दिन बीत चुके थे अब राजू का धैर्य जवाब दे रहा था | प्रियम ने हालाँकि खुद को सामन्य दिखाने की भरपूर कोशिश की लेकिन उसकी सुस्ती और कमजोर आत्मविश्वास ने राजू के अन्दर शक पैदा कर दिया | उसने अपने मोबाइल पर कई बार फ़ोन लगाया लेकिन मोबाईल स्विच ऑफ़ ही आ रहा था | प्रियम ने भी उसे सिर्फ इतना कहा की वो उसको नया मोबाइल लाकर दे देगा इससे ज्यादा कुछ नहीं बोला | राजू समझ गया कुछ गड़बड़ है लेकिन प्रियम के मन की बात पता कैसे चले | एक दो बार उसने के साथ रीमा को लेकर अश्लील गप्पे मारने की कोशिश की लेकिन प्रियम ने अनमने भाव से मना कर दिया | प्रियम के खास दोस्तों में बस दो ही लोग थे एक जग्गू और दूसरा राजू | जग्गू से उसकी दोस्ती मतलब की थी चूँकि वो एक स्लम एरिया के मामूली से गुंडे का लड़का था, जो स्लम से निकालकर एक ठीक ठाक जगह रहने आ गया था | उसका बाप उसे अपने से अलग एक पढ़ा लिखा इंसान बनाना चाहता था इसीलिए उसको महंगे अंग्रेजी स्कूल भेजा, लेकिन जग्गू एक नंबर का आवारा और बदमाश लड़का था | स्कूल में आये दिन मारपीट करना धौंस दिखाना, कॉलेज के लड़के लडकियों को ड्रग्स बेचना (जो वो अपने बाप के पास से चुराता था ) और कभी कभार लडकियों को छेड़ना उसके लिए आम बात थी | पैसे और रसूखदार बाप की वजह से कॉलेज उसे फ़ैल नहीं करता था लेकिन बोर्ड में उसकी असलियत सामने आ ही जानी थी | इसके उलट राजू न केवल पढने में तेज था, बल्कि उसका दिमाग भी शार्प था | प्रियम अपनी बाते सिर्फ राजू से शेयर करता था लेकिन जग्गू को वो पता ही चल जाती थी | अभी तक जग्गू के मन में प्रियम की इमेज सिर्फ एक अमीर बाप की एकलौती औलाद की थी लेकिन जब से उसने रीमा चाची के लंड चूसने का किस्सा सुनाया तब से जग्गू की नजर में प्रियम की इज्जत और रुतबा दोनो बढ़ गया था | प्रियम और राजू दोनों कुंवारे थे, मतलब अभी तक दोनों के लंडो को चूत के अन्दर जाने का मौका नहीं मिला था जबकि जग्गू कई बार अपने रहने की पुराणी जगह जाकर झुग्गी की लड़कियों को चोद कर अपना कुंवारापन कब का गँवा चूका था | फिर भी प्रियम ने जिस विस्तार से रीमा चाची द्वारा अपने लंड चूसने, मुट्ठ मारने और उनकी चूत चूसने की कहानी बताई थी, उसके बाद जग्गू को लगा एक बार प्रियम की रीमा को नंगा करके चोदना बनता है, हो सकता है उसे चुदाई का कुछ नया एक्सपीरियंस मिले | अब तक उसे कम उम्र लौडिया ही मिली थी जिनके हजारो नखरे थे, उन नखरो को झेलने में खड़े लंड को पसीने आ जाते थे, चुदाई का मजा लेना तो दूर बस किसी तरह से सारे जतन करके अपनी पिचकारी छोड़ने तक उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता था | कई बार बीचो बीच चुदाई में उठकर भाग गयी और जग्गू को हाथो से हिलाकर लंड की प्यास बुझानी पड़ी | जवान होती जवानी में किसकी चाहत नहीं होती औरत के बदन की मादक खुसबू को अपने में उतारने की लेकिन राजू जग्गू की तरह मुखर नहीं था | उसकी भी चाहत थी कि वो किसी लड़की को चोद कर कुंवारापन मिटा सके लेकिन वो फट्टू बहुत था इसलिए लडकियों के मामले में हमेशा पीछे की तरफ भागता था | प्रियम के किस्से सुनने के बाद से दोनों की जवान होती लालसाए और ज्यादा तेजी से जवान होने लगी थी, क्योंकि उनके किशोर मन में पता नहीं क्यों ये बात घर कर गयी थी कि अब वो दिन दूर नहीं जब वो रीमा को चोदकर जवानी के आंगन में पहला कदम रख सकते है | एक सपना था जो उन्हें पूरा होता हुआ नजर आ रहा था | इस सपने की उम्मीद जगाने वाला और कोई नहीं बल्कि प्रियम था |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] अब प्रियम को जल्दी ही जिस रीमा चाची के दर्शन हुई थे उसके बाद तो प्रियम की हिम्मत रीमा से नजर मिलाने तक कि भी नहीं थी | वो अन्दर ही अन्दर से बहुत पछता रहा था, उसे लग रहा था की अपना मामला उसे पाने और रीमा चाची के बीच ही रखना चाहिए था उसने राजू और जग्गू को बताकर शायद गलती कर दी | आये दिन जग्गू और राजू उसे रीमा को लेकर छेड़ते रहते और प्रियम बस चुपचाप उनके मजाक को सह लेता क्योंकि रीमा का नाम लेटे ही उसके सामने किचन का वो मंजर किसी फिल्म की तरह सामने चलने लगता | रीमा ने उसका आत्मविश्वास हिलाकर रख दिया था | वो रीमा पर बात करने से साफ़ मना भी नहीं पा रहा था जबकि उसके दोनों दोस्त खासकर जग्गू उसके मुहँ पर रीमा को चोदने की बात करने लगता | प्रियम बस टालमटोल करके जैसे तैसे उससे पीछा छुड़ाता |

इधर रीमा के आत्मविश्वास के क्या कहने थे, उसे लग रहा था की उसे आदमियों को कण्ट्रोल करना आ गया | उसने प्रियम से छीना मोबाईल, स्विच ऑफ़ करके अपने एडल्ट टॉयज वाले सीक्रेट ड्रोर में रखकर ताला लगा दिया | उसे उस मोबाईल से ज्यादा कोई मतलब था भी नहीं, बस अगर कभी प्रियम ने लाइन क्रॉस करी तो उसे धमकाने के लिए वो इस्तेमाल कर पायेगी | उस दिन के बाद रीमा अपने रूटीन काम में बिजी रही, उसका खुद के जिस्म के साथ खेलना भी जारी रहा | रीमा रोहित की बात होती, रीमा चाहती थी रोहित आये लेकिन अपनी तरफ से खुला आमंत्रण उसे देना अपने स्त्रीत्व स्वाभिमान के खिलाफ लगता था | उसको लगता था किसी न किसी दिन रोहित उसके जिस्म को भोगने की लालसा लिए हुए, उसकी चूत को चोदने की हवस से बेबस होकर किसी मल्लिका के गुलाम की तरह खुद ही आएगा | रोहित भी रीमा के पास आने की बहुत कोशिश करता, उसने प्रियम का अजीबो गरीब व्यवहार भी नोटिस किया, उसने प्रियम से इस बारे में पुछा, रीमा से भी जानने की कोशिश की लेकिन दोनों ने इस मामले को लेकर ओंठ सिल लिए थे | रोहित भी बेहद सतर्क था कि कही गलती से भी प्रियम को उसके और रीमा के बारे में नहीं पता चलना चाहिये, क्योंकि प्रियम अब बड़ा हो गया था और औरत मर्द के बीच की दुनिअदारी समझने लगा था | जाहिर सी बात है रोहित और रीमा दोनों ही अपनी अपनी जगह तड़प रहे थे लेकिन परिस्थितयो के हाथो मजबूर थे | रोहित चाहता तो रीमा से कही बाहर भी मिल सकता था लेकिन शहर के लोग उसे अच्छी तरह से जानते थे इसलिए कोई भी उसे कही भी पहचान सकता था | रंगीन मिजाज होना एक अलग बात है लेकिन अपने ही मारे हुए भाई की बीबी के साथ सेक्स करना!!!!!!!!!!!!!!! समाज में हजार तरह की बाते होने लगेगी | वो तो एक बार को सुन भी लेगा लेकिन रीमा का क्या होगा? अभी वो जहाँ भी जाती है उसे उसके पति की जगह का सम्मान मिलता है | एक झटके में सब ख़त्म हो जायेगा, उसे संयम रखन चाहिए | यही सब सोचकर कर खुद को समझा लेता था | फ़ोन पर बात करते समय एक एक दुसरे की भवनाओं का अंदाजा हो ही जाता था लेकिन क्या करे रोहित को इतना काम था कि एक दिन की भी छुट्टी नहीं थी ऊपर से उसे शायद अगले हफ्ते कम्पनी के नए प्रोजेक्ट की वजह से बाहर भी जाना पड़े | जाहिर सी बात है रोहित की धमक सिर्फ समाज में ही नहीं बल्कि उसके काम में भी वैसी ही थी | एक दिन रोहित ने बॉस से जल्दी जाने की छुट्टी मांगी, असल में राजू का बर्थडे था | राजू का बाप और रोहित दोनों जिगरी यार थे और सोशल स्टेटस भी बराबर होने के कारन उनमे खूब छनती थी | जाहिर सी बात है प्रियम और रोहित को जाना था | प्रियम सुबह से ही राजू के बर्थडे में जाने की तयारी कर रहा था | रोहित ने प्रियम को बोला था कि पांच बजे तक हर हाल में वो घर आ जायेगा | लेकिन जब वो बॉस के पास पंहुचा तो बॉस के केबिन में कुछ अलग ही रायता फैला हुआ था | कंपनी के ही क्वालिटी कण्ट्रोल डिपार्टमेंट की ऑडिट रिपोर्ट नेगेटिव आई थी और उसी डिपार्टमेंट की पॉजिटिव ऑडिट रेटिंग पर नए प्रोजेक्ट की डील फाइनल होनी थी | रोहित का काम डिजाईन और आर्किटेक्ट का था लेकिन अब ऑडिटर से रेटिंग पॉजिटिव करवाना बहुत जरुरी था वरना प्रोजेक्ट कंपनी के हाथ से निकल सकता था | बॉस रोहित की तरफ बहुत उम्मीदों से देख रहा था और रोहित भी मना कर सकने की स्थिति में नहीं था, क्योंकि अगर क्लाइंट प्रोजेक्ट रिजेक्ट कर देता तो रोहित का भी तो नुकसान था | रोहित ने ऑडिटर की बजट सीधे क्लाइंट से बात करने की सलाह बॉस को दी और तब तक एक जरुरी फ़ोन कॉल करके की बार कहकर बाहर आ गया | रोहित की बात सुनकर बॉस एकदम चौक गया | कुछ देर तो बाहर जा रहे रोहित को देखता रहा | फिर किसी को फ़ोन मिलाने लगा |

इधर रोहित ने घर पर फ़ोन मिलाया - हेल्लो प्रियम कैसे हो बेटा ??

प्रियम - डैड कहाँ तक पंहुचे, मै ready हूँ ?

रोहित - तुम अभी से ready हो गए |

प्रियम - यस डैड |

रोहित - हुन्हुन्हुन्हून | कुछ देर चुप्पी के बाद ......................

प्रियम - हेल्लो डैड डैड .,..........हेल्लो |

रोहित - बेटा एक प्रॉब्लम है, मुझे ऑफिस में बहुत ही अर्जेंट एक मीटिंग करनी है और इसमें रात के बारह बज सकते है, तो मै पांच बजे तक घर नहीं आ पाउगां |

प्रियम - नोनोनोन्नोनोनोनोनो दैदैदैद्द्द्दद्द्द , नो डैड डोंट से इट |

रोहित - प्रियम लिसेन तो मी केयरफुल्ली, इट्स अर्जेंट, वैरी अर्जेंट |

प्रियम मायूस होता हुआ - आप हमेशा यही करते हो, लास्ट वन इयर में मैंने एक भी बर्थडे पार्टी अटेंड नहीं है सिर्फ आपकी वजह से | राजू मेरा सबसे बेस्ट फ्रेंड है मुझे ये पार्टी अटेंड करनी है |

रोहित - यू डोंट अंडरस्टैंड, थिस इस वैरी टफ फॉर मी, लेकिन मेरा ऑफिस में रहन बहुत इम्पोर्टेन्ट है |

दोनों कुछ देर छुप रहे ......................... समस्या ये थी पार्टी शहर से दूर बने एक गेस्ट हाउस में थी, वहां तक कोई भी पब्लिक व्हीकल नहीं जाता था और बाकि सारे लोग अपनी अपनी प्लानिंग के हिसाब से निकल गए थे | प्रियम को अकेला इस तरह जाने की परमिशन रोहित दे नहीं सकता था | उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे | तभी केबिन से बॉस की आवाज आई |

रोहित ने फ़ोन काटते हुए प्रियम से कहा - बॉस इस कालिंग मी, मै बस तुम्हे अभी फ़ोन करता हूँ | डोंट बी सैड, मै कुछ करता हूँ |

रोहित केबिन में घुस गया और बॉस के साथ क्लाइंट के साथ प्रॉब्लम को दुसरे तरीके से डिस्कस करने लगा | असल में रोहित को कुछ टाइम चाहिए था क्लाइंट से, कम से कम 6 महीने , तब तक एक और साइकिल ऑडिट हो जायेगा | वो क्लाइंट को ये समझाने में लगा था चूँकि ये एक बड़ा प्रोजेक्ट है, भले ही उनकी कंपनी को ऐसे प्रोजेक्ट का एक लम्बा एक्सपीरियंस है फिर भी क्यों न एक पायलेट प्रोजेक्ट पहले बनाकर स्टडी कर ली जाये ताकि फाइनल प्रोजेक्ट के फील्ड चैलेंज कम हो जायेगे | इसके पीछे रोहित का मकसद प्रोजेक्ट को 6-9 महीने डिले करने का था | क्लाइंट इस बात पर राजी तो हो गया लेकिन उसे पूरा प्लान अभी के अभी स्टेप by स्टेप समझना था | रोहित माथा पकड़कर बैठ गया | बॉस ने रोहित को उलझन में देख फ़ोन का स्पीकर म्यूट किया - रोहित एनी प्रॉब्लम, हमने कुछ ज्यादा तो नहीं प्रोमिस कर दिया |

रोहित - नहीं सर, आई कैन हैंडल इट |

बॉस - कुछ परेशान लग रहे हो |

रोहित - अब आपसे क्या छुपाना, मेरे बेटे के बेस्ट फ्रेंड का बर्थडे है और मैंने उसे प्रॉमिस किया था, मै उसे अपने साथ पार्टी में ले जाऊंगा |

बॉस - तुम नहीं जा रहे हो तो वो अकेला चला जाये, अब इतना भी छोटा नहीं है तुमारा बेटा |

रोहित - बॉस प्रॉब्लम ये है पार्टी, रिवर लाउन्ज में है |

बॉस - वो तो ये प्रॉब्लम है, और कोइ नहीं जो उसके साथ जा सके |

रोहित - राजू के साथ ही जा सकता था लेकिन वो लोग तो सुबह से ही बाहर है फैमिली सहित, है तो एक दो लोग, लेकिन सर ईमानदारी से कंहू, मुझे किसी पर भरोसा नहीं |

बॉस - मै समझ सकता हूँ | तुमारी सिस्टर आने वाली थी, कब आ रही है वो |

रोहित - सर वो जीजा जी के प्लान बदलते रहते है, जब उन्हें छुट्टी होगी तभी आयेगें |

बॉस - इट मीन्स कोई क्लोज रिलेटिव नहीं है जो प्रियम को रिवर लाउन्ज ले जा सके | यू नो रोहित हाउ इम्पोर्टेन्ट थिस इस |

रोहित - आई अंडरस्टैंड सर |

बॉस थोड़ा सोचकर - रोहित करेक्ट मी अगर मै गलत हूँ, याद है तुमने एक बार एक गॉर्जियस ब्यूटीफुल वैरी सिंपल लेडी से मिलवाया था, सीमा नाम था शायद उनका |

रोहित - सर रीमा |

बॉस - वो ब्यूटीफुल लेडी भी तो तुमारी शायद रिलेटिव है !!!!!!!!!!!!!!!!!!! इफ आई ऍम नॉट रांग |

रोहित मन ही मन बॉस को गलिय देता हुआ - साले ठरकी बुड्ढ़े, इस उम्र में तो तेरा वियाग्रा खाकर भी नहीं खड़ा होगा, रीमा के बारे में सोचना छोड़ दे हरामखोर साले | मुझे भी पता है वो ब्यूटीफुल है |

रोहित - यस बॉस, वो मेरे बड़े भाई की विडो है | कुछ सोचकर .........................

रोहित - बॉस आप क्लाइंट से कुछ देर गप्पे मारो, मै बस दो मिनट में आया |

बॉस - गुड लक, ब्यूटीफुल लेडी को हेल्लो बोलना |

रोहित मन ही मन में - ठरकी बुड्ढ़े काम पर ध्यान दे ----- ओके सर बोल दूगां |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] रोहित ने रीमा को फ़ोन मिलाया | रीमा अभी घर पंहुची नहीं थी रास्ते में ही थी | आज के उसके कुछ अलग प्लान थे | उसने सोच रखा था, जाकर सबसे पहले 20 मिनट का पॉवर नैप लेगी | फिर मिनिमम कपड़ो में किचन की सफाई करेगी | फिर जल्दी खाना बनाकर, आज अपने सीक्रेट ड्रोर की सफाई करेगी | रोहित तो आने से रहा तो उसे अपनी प्यास अपने तरीके से ही बुझानी पड़ेगी, इसलिए उसी ड्रोर से अपने सीक्रेट टॉयज निकालेगी, जिन्हें खरीदने के बाद से एक बार भी रोहित के असली टॉय के दर्शन रीम को दुर्लभ हो गए, अब इन नकली मशीनी टॉयज से काम चलाना उसकी मजबूरी थी | इन टॉयज के साथ हर तरह की आजादी थी रीमा को लेकिन वो पुरुष देह का कठोर स्पर्श, उसकी मादक गंध, उसकी बलिष्ट भुजाये, चौड़ी छाती और गन्दी गन्दी मादकता फैलाती बाते | बहुत कुछ दिमाग में चल रहा था, लेकिन इतना तय था आज वो कुछ बड़ा खेल खुद के साथ खेलने वाली थी | जैसे ही उसका फ़ोन बजा, उसकी सोचने की तन्द्रा टूटी | स्क्रीन पर पर रोहित का नाम देखेते ही थोडा आश्चर्य हुआ, क्योंकि रोहित के फ़ोन आने का टाइम अक्सर फिक्स ही होता है | इस समय अचानक रोहित का फ़ोन आने से रीमा का चौकना स्वाभाविक था |

रीमा ने कॉल उठाई - हेल्लो रोहित ......

रोहित - हेल्लो रीमा , हाउ आर यू |

रीमा - मै अच्छी हूँ, अपना बतावो |

रोहित - एक काम है मेरा, अगर कर सको तो बहुत अहसानमंद रहूँगा तुमारा |

रीमा ने ताना मारा - मुझे पता था, बिना मतलब इस अबला को याद कौन करता है..........................

रोहित - रीमा मजाक नहीं, इट्स सीरियस |

उसके बाद रोहित ने सारी राम कहानी रीमा को सुना डाली | पहले तो प्रियम के साथ इतनी दूर जाने में रीमा हिचकी, वो निश्चित नहीं थी कि प्रियम कैसे रियेक्ट करेगा पब्लिक के सामने| उसके मन में हल्का सा संदेह था, इतनी दूर प्रियम के साथ अकेले गाड़ी में जाना ठीक रहेगा या नहीं, उसके अपने प्लान थे, अब उसे बेबी सिटर बनकर प्रियम के आगे पीछे घूमना पड़ेगा, पहले सोचा मना कर दे, क्या हो जायेगा अगर वो बर्थडे पार्टी में नहीं जायेगा लेकिन फिर रोहित के जोर देने पर सोचने को मजबूर हो गयी ........, फिर हिम्मत करके उसने रोहित को हाँ कर दी | उसने सोचा जो होगा देखा जायेगा ........ |

रोहित ने प्रियम को फ़ोन मिलाया, प्रियम को जब उसने रीमा के साथ जाने के बारे में बताया तो एकदम से प्रियम उखड़ सा गया |

प्रियम - डैड ये आपके मेरे बीच की बात थी, ये रीमा आंटी बीच में कहाँ से आ गयी | आपने प्रॉमिस किया था चलने के लिए, मै किसी और के साथ नहीं जाऊंगा |

रोहित - मै मानता हूँ मैंने प्रोमिस किया था लेकिन अभी मै नहीं आ सकता | प्रॉब्लम क्या है रीमा के साथ जाने में |

मै नहीं चाहता तुमारी पार्टी मिस हो | मैंने रीमा से बात कर ली है |

प्रियम चौककर - क्या !!!!!!! आपने आंटी से बात भी कर ली और मुझसे पुछा तक नहीं डैड |

रोहित - तो क्या हो गया, तू ऐसे क्यों रियेक्ट कर रहा है जैसे कोई बाहरी हो |

प्रियम - डैड मुझे आपके साथ जाना था, वहां ढेर सरो मस्ती करनी थी | आपको तो पता है न रीमा आंटी का नेचर | शी ऑलवेज बी सीरियस |

रोहित मन ही मन में - साले अपने बाप को चुतिया बना रहा है, मन ही मन में लड्डू फुट रहे होंगे | रोहित को असलियत पता नहीं थी इसलिए रोहित अपने हिसाब से अनुमान लगा रहा था - देख प्रियम तेरे पास ज्यादा आप्शन है नहीं , मै नहीं आ सकता बहुत ही इम्पोर्टेन्ट काम है | अब तुझे अगर राजू के पार्टी में जाना है तो तेरे पास सिर्फ यही एक रास्ता है | मैंने रीमा को बोल दिया है, एक घंटे के अन्दर वो रेडी होकर गाड़ी लेकर घर पर आ जाएगी | तू तैयार रहना | नहीं जाना है तो अभी बता दे |

प्रियम छुप रहा .....................................................

रोहित - बोल हाँ या न |

प्रियम की सारी खुशियाँ हवा हो चुकी थी, बेहद मायुस आवाज में - ओके डैड .........|

रोहित ने फ़ोन काटकर रीमा की मिलाया और उसे साफ़ शब्दों में प्रियम को किसी भी तरह के अल्कोहल पीने से रोकने की हिदायत दी | रीमा समझ गयी, उसे पता था अब क्या क्या करना पड़ेगा | पहले की बात होती तो एक सिंपल साड़ी लपेट कर पार्टी को रीमा चल देती, लेकिन अब वो अपने बारे में एक अलग नजरिया रखती थी इसलिए घर पंहुचने के बाद उसने अच्छे से खुद को तैयार किया | और अपने तय समय पर गाड़ी लेकर प्रियम के घर के सामने आ गयी | उसने एक दो बार हॉर्न दबाया, कुछ देर तक वेट किया जब प्रियम घर से बाहर नहीं निकला, तो रीमा घर के अंदर चली गयी | उसने प्रियम को आवाज दी | प्रियम अपने कमरे में कुछ ढूंढ रहा था | उसने अन्दर से ही धीमी आवाज में जवाब दिया | रीमा कुछ देर तक इधर उधर टहलती रही, फिर वही लटके झूले पर लेट गयी |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] प्रियम अपने कमरे में कुछ नहीं कर रहा था बस वो रीमा का मूड पता लगाने की कोशिश कर रहा था | इसी चक्कर में बार बार पेंट बदल बदल कर पहन रहा था | पेंट पहनना तो बहाना था वो बस इतना निश्चित करना चाहता था की कही फिर से रीमा उसकी लेना न शुरू कर दे | रीमा ने फिर पुछा - क्या कर रहा है प्रियम, हम लेट हो जायेगें |

पूरी तरह से तैयार प्रियम अन्दर से धीरे से बाहर आया | रीमा ने झूले पर लेटे लेटे ही उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देखा | रीमा - बच्चे पेंट की जिप बंद कर ले, बर्थडे पार्टी में जा रहा है लौंडियाँ चोदने नहीं |

प्रियम बुरी तरह झेंप गया - शिटटट ट ट ...........................|

रीमा - जब बिना वजह पेंट बदलेगा तो यही होगा, मुझे पता है जब मै गाड़ी लेकर आई थी तो तू खिड़की के अन्दर से झांक रहा था | मुझे लगा अपने आप ही आ जायेगा | पर तुझे तो नौटंकी करने में और फिर अपनी बेज्जती करवाने में ज्यादा मजा आता है | कोई बात नहीं मेरे सामने क्या क्या बेज्जती.....................तुझे तकलीफ में देखकर मुझे भी दुख होता है | .............................अच्छे से सुन बिलकुल नार्मल दिखना, जैसा है, कॉंफिडेंट | अपने ऊपर ज्यादा लोड मत डाल, आज मै कुछ नहीं करने वाली हूँ | जो कुछ हुआ वो सिर्फ हमारे बीच में रहेगा, समझा न | (कुछ सोचकर ) अच्छा सुन .................................. किसी को न कुछ जताने की जरुरत है, न बताने की जरुरत, अच्छे से समझ ले फिलहाल आज के टाइम में रोहित और मुझसे ज्यादा सगा इस दुनिया में तेरा कोई नहीं है, कई मायनों में मै रोहित से ज्यादा सगी हूँ, रोहित के साथ तू बहुत कुछ नहीं शेयर कर सकता जो तू मुझे बेफिक्र बता सकता और जितना मै तेरे लिए कर सकती हूँ उतना कोई नहीं करेगा, मैंने अपने जिस्म का एक एक कोना तुझे दिखा दिया, और तो और तुझे अपनी चूत खोलकर दिखा दी है, तेरा भला ही चाहती और हर मुसीबत से भी तुझे बचाऊँगी बशर्ते मेरे सामने अपनी औकात में रहियो और मेरी बात मानेगा तो हमेशा फायदे में रहेगा | चल अब पार्टी फुल एन्जॉय करने को तैयार हो जा |

दोनों घर से बाहर निकले, रीमा आगे आगे और प्रियम पीछे पीछे | दोनों गाड़ी में बैठे और रिवर लाउन्ज की तरह को रावना हो गए | रिवर लाउन्ज मुख्य शहर से 8 किमी दूर नदी के दुसरे छोर पर घनी हरियाली के बीचो बीच स्थित था |

रीमा और प्रियम कुछ ही देर में वहां पंहुच गए | राजू के पिता को रोहित ने पहले ही फ़ोन कर दिया था, इसलिए रीमा के लाउन्ज में घुसते ही उसका स्वागत करने चला आया |

राजू के पिता - नमस्ते रीमा जी, आवो प्रियम बेटा, स्वागत है आप दोनों का |

रीमा - धन्यवाद कपिल जी | ये लीजिये .......

रीमा ने उसे गिफ्ट सौंप दिया | उसने भी आभार व्यक्त किया |

एक नजर को रीमा को देखता रह गया क्योंकि रीमा कभी इतना सजाती धजती नहीं थी, इसलिए उसका चौकना स्वाभाविक था | रीमा को देखकर कपिल थोडा असहज था लेकिन जल्द ही संभल गया, फिर उसने शिष्टाचार वस् बोल ही दिया - भाभी जी आप बहुत खूबसूरत लग रही है, आइये आपको गेस्ट से मिलवाता हूँ | प्रियम बेटा, राजू उधर है | प्रियम भागता हुआ एक तरफ चला गया |

रीमा - थैंक्यू सो मच कपिल जी, काफी बड़ी पार्टी की तैयारी की है आपने |

कपिल - कुछ खास नहीं, बेटे का मन था, नेक्स्ट इयर १८ का हो जायेगा तो ये लास्ट टीन ऐज बर्थडे है उसका |

रीमा कपिल टहलते टहलते मैंन हाल में आ गए | वहां बाकि आये गेस्ट से मिलना मिलाना शुरू हुआ | ठीक समय पर बर्थडे केक काटा गया | फिर नाच गाना शुरू हुआ | बच्चो की पार्टी अलग शुरू हुई और बड़े लोगो का ड्रिंक अलग शुरू हुआ | पार्टी में आये मर्दों की नज़रे गाहे बगाहे रीमा की पैमाइश ले ही जाती | सभी गेस्ट फॅमिली के साथ आये हुए थे इसलिए फ़्लर्ट करने की बहुत ज्यादा गुंजाईश नहीं थी लेकिन फिर भी दो पैग जाने के बाद कुछ शायर बन ही गए, कुछ आशिक | सभी जमकर मस्ती कर रहे थे |

रीमा ने भी स्कॉच के दो पैग पी लिए थे, उसे अभी गाड़ी ड्राइव करके शहर तक वापस भी जाना था इसलिए उसने सॉफ्ट ड्रिंक भी पीनी शुरू कर दी | उसे पता था अगर बार के आस पास बैठी रही तो कोई न कोई उसे जबरदस्ती पिला ही देगा | इसलिए फ़ोन कॉल का बहाना करके वहां से खिसक ली | उसकी नज़ारे प्रियम को ढूंढ रही थी | आखिर कुछ ही दूरी पर अपनी मंडली के साथ मस्ती करते दिख गया | रीमा ने पास जाकर उनकी पार्टी ख़राब करने की बजाय दूर एक किनारे बैठकर उस पर नजर रखने की सोची | वो एक हट की ओट में बैठकर अपने फ़ोन को चेक करने लगी | बीच बीच में राजू के दोस्तों के ग्रुप पर नजर चली जाती | उनके ग्रुप में १० -११ लड़के लड़कियां थे | कुछ देर देखने के बाद बरबस ही रीमा की नजर के चेहरे पर टिक गयी |

रीमा मन ही मन अनुमान लगाने लगी - मै इसे जानती हूँ ? मैंने इस लड़की को कही देखा है | कौन है ये ?????

दिमाग पर थोड़ा जोर डालते ही उसे के चेहरा याद आ गया, जिसने उसकी जिदगी बदलकर रख दी | अरे ये तो नूतन है, मनोज जी की बेटी | वही नूतन जिसकी बड़ी बड़ी चुचियों को प्रियम और राजू चूस रहे थे | एक स्तन को प्रियम मसल रहा था और एक को राजू मसल रहा था | नूतन बस सिसकारियां भर रही थी | उसके बाद की सारी घटनाये एक के बाद एक उसके सामने से तैर गयी | रीमा बस इन्ही खयालो में खोयी थी तभी कोई उसको आवाज लगता सुनाई दिया | ये और कोई नहीं कपिल था | रीमा हट की ओट से बाहर आई |

कपिल - अरे रीमा जी आप कहाँ गायब हो गयी थी |

रीमा - जी मै वो फ़ोन पर किसी से बात कर रही थी |

कपिल - कोई नहीं, चलिए आपको राजू के दोस्तों से मिलवाता हूँ |

रीमा - ठीक है चलिए |

रीमा और कपिल वहां पंहुच गए जहाँ सभी बच्चे मस्ती कर रहे थे, बच्चे तो नहीं थे अब वो लेकिन जवान भी नहीं कह सकते | सबकी उम्र 15 से १७ से बीच में ही थी | सिवाय दो को छोड़कर, एक नूतन, दूसरा जग्गू | कुल मिलाकर 7 लड़के और ४ लड़कियां थी |

कपिल - हेल्लो यंग बॉयज एंड गर्ल्स .....

ग्रुप - हेल्लो अंकल |

कपिल - मीट Mrs. रीमा, ये प्रियम की आंट है |

ग्रुप - हेल्लो आंटी .........|

रीमा - हेल्लो एवरीवन, आर यू हविंग अ गुड टाइम |

ग्रुप - यस आंटी |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] सारे लड़के रीमा को जीभर के देखने लगे, जग्गू के तो होश ही उड़ गए | रीमा के बारे जितना प्रियम ने उसे बताया था उससे कही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी | राजू ने दो चार बार देखा था लेकिन बिना मेकअप के इसलिए उसका चौकना भी स्वाभाविक था | सभ्य और असभ्य में एक अंतर होता है, सभी लोग अगर कोई चीज पसंद है तो घुमा फिराकर चासनी लगाकर उसकी तारीफ करते है जिससे सामने वाला असहज न हो | लगभग सभी लडको ने अपनी नजरे नीची कर ली थी और अब नजरे चुराकर रीमा को देखने लगे सिवाय जग्गू को छोड़कर | वो एकटक रीमा को देखे जा रहा था, प्रियम ने जल्द ही ये बात नोटिस कर ली, उसने राजू को चेताया, राजू ने जग्गू के एक हल्का मुक्का मारा और बात संभल ली | जब तक जग्गू संभलता तब तक रीमा की तेज नजरो में वो पूरी तरह स्कैन हो चूका था | रीमा और कपिल दोनों अनुभवी थे, दोनों ने महसूस किया कि यहाँ ज्यादा देर खड़े रहना किसी के लिए भी सहज नहीं है, दोनों ने लड़के और लडकियों की हरकते अच्छे से रिकॉर्ड करी थी |

कपिल - बेटा आप लोग एन्जॉय करो, हम चलते है |

ग्रुप - बाय अंकल बाय आंटी |

रीमा और कपिल फिर से अपने हम उम्र ग्रुप में लौट आये - रीमा ने आगे ड्रिंक लेने से तो मना कर दिया, लेकिन उनके साथ बैठकर लोगों की बोरिंग बाते सुन सुन कर मुस्कुराती रही |

थोड़ी देर बात सभी डांस फ्लोर पर पंहुच गए, सभी नाचने गाने में मशगूल हो गए , रीमा भी उसी में मस्त थी, तभी उसकी नजर दूर खड़े एक परछाई पर गयी | थोडा गौर से देखने पर पता चल गया ये तो जग्गू है | उसको बिना आभास हुए रीमा उस पर निगाह रखने लगी | जग्गू रीमा को घूर रहा था | रीमा को समझते देर न लगी, ये मुर्गा उसे रूप की बलि चढ़ गया है | पहले की रीमा और अब की रीमा में अंतर ये है की पहले की रीमा नाचना बंदकर किसी जगह जाकर शांत बैठ जाती, जहाँ जग्गू उसे देख न पता, लेकिन ये रीमा तो और ज्यादा अग्रेस्सिव होकर मादक तरीके से नाचने लगी | साड़ी पहनकर इस तरह का डांस करना मुस्किल होता है लेकिन रीमा किसी तरह बस मैनेज कर रही थी | फ्लोर की थुलथुल मोटी औरते रीमा से जलभुनकर राख हुई जा रही थी और उनके मर्द अपने अधेड़ उम्र का बचा हुआ रिजर्व भी खर्च करके दुगने जोश से नाच रहे थे | आखिर इतनी हसीं औरत के साथ फ्लोर शेयर करना भी किस्मत वालो के नसीब में होता है | रीमा सबके साथ नाच रही थी लेकिन उसकी नजरे बार बार उस परछाई की तरफ ही जाकर टिक रही थी | कुछ देर बाद परछाई गायब हो गयी | रीमा मदमस्त होकर एक थुलथुल आंटी के साथ नाचने लगी | काफी देर तक नाचने के बाद सभी थक गए थे, सभी आराम करने लगे, रीमा वाशरूम के बहाने प्रियम का हाल चाल लेने निकल पड़ी | प्रियम बच्चो के स्टेज पर नहीं था | बच्चे इधर उधर हो गए थे | रीमा ने चारो तरफ नजर दौड़ाई सभी बच्चे दिख गए सिवाय राजू, प्रियम और जग्गू के | रीमा ने उनको खोजना शुरू किया | इदर उधर पुछा - गेस्ट तो सभी दारू के नशे में फुल थे उन्हें कहाँ होश था लेकिन लाउन्ज के स्टाफ ने बताया की, दो लड़के पीछे की तरफ एक हट है वहां गए है | रीमा तेज कदमो से उधर चल दी |

रास्ते में हल्की रौशनी थी, जबकि हट के पास अच्छी खासी रौशनी थी | रास्ते में जाते समय रीमा को लगा शायद कोई उसका पीछा कर रहा है उसने एक दो बार इधर उधर चौकन्ने होकर देखा लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं पड़ा | वो सतर्क होकर तेज कदमो से हट की तरफ जाने लगी |

हट के पास पंहुचते ही उसे कुछ आवाज सुनाई पड़ने लगी | आमतौर पर इस लाउन्ज के किसी भी हट में दरवाजा नहीं है लेकिन इस हट में दरवाजा था और वो बंद था | अन्दर से कुछ आवाजे आ रही थी, रीमा ने जब उन आवाजो पर गौर किया तो पहचान गयी, वो प्रियम और राजू थे, लेकिन ये तीसरी आवाज तो किसी लड़की की है | अब रीमा के कान खड़े हो गए | उसने इधर उधर से झांककर देखने की कोशिश की लेकिन हट चारो तरफ से बंद थी | रीमा घूमते घूमते हट के पीछे की तरफ चली गयी, जिसके पीछे लाउन्ज की चाहरदीवारी थी | चाहरदीवारी के उधर सब जंगल था | ये लाउन्ज का आखिरी छोर था | मजे की बात इधर से हट के ऊपर के हिस्से में एक एक वर्ग फुट का होल बना रखा था हवा आने जाने के लिए | हट बनाने वालो ने ये होल जानबूझकर दीवार की तरफ रखा हुआ था क्योंकि हट से दीवार की तरफ कोई भी आने जाने से रहा | दीवार भी पूरी तरह ठोस नहीं थी बल्कि ईंटो की जाली और पत्थर के मिश्रण से बनी थी, जिससे उसमे एक रफ़ जंगली लुक आ सके | अन्दर रौशनी थी इसलिए पीछे की तरफ जाते ही रीमा की आँखों में चमक आ गयी, हट से आ रही रौशनी असल में रीमा की उम्मीदों की रौशनी थी | रीमा की ऊँचाई से हट के होल की ऊँचाई ज्यादा थी इसलिए रीमा को जमीन से ऊपर उठने के लिए कुछ और भी चाहिए था | रीमा से अपनी साड़ी ऊँची की और दीवार में उभरे एक पत्थर पर अपना पैर जमाया और चहारदीवारी पर चढ़ गयी, फिर धीरे से खुद को आगे की तरफ झुका लिया | जैसे ही उसने हट के अन्दर का नजारा देखा, उसके होश उड़ गए | राजू, प्रियम और नूतन तीनो हट में मौजूद थे | आस पास दारू के पैग रखे थे | ये दारू कैसे इनको मिली, जरुर ये नूतन का काम होगा | नूतन राजू और प्रियम से दो साल बड़ी थी | नूतन, राजू और प्रियम सेक्स कर रहे है, नूतन प्रियम और राजू का लंड अपने हाथो में लेकर मुठिया रही थी | दोनों के लंड उनकी पतलूनो से बाहर निकले हुए थे और तनकर सीधे हो चुके थे | नूतन की कमसिन तनी हुई चूचिया बेपर्दा थी, उसकी टॉप ऊपर गले तक उठी हुई थी और नूतन एक लंड को अपने नाभि के निचले हिस्से में चूत त्रिकोण पर रगड़ रही थी और दुसरे को तेजी से दुसरे हाथ से मुठिया रही थी | दोनों उत्तेजना के भंवर में गोते लगा रहे थे |

नूतन एक सामन्य से लोअर मिडिल क्लास फैमिली से आती थी | नूतन बचपन से ही पड़ने में बहुत तेज थी इसलिए उसका इस कॉलेज में नाम नर्सरी से ही लिखा हुआ था | नूतन के घर की आर्थिक हालत बहुत बेहतर नहीं थी इसलिए उसे पॉकेट मनी के नाम पर बहुत कम पैसे मिलते थे, नूतन को स्कूल में अपने दोस्तों से बराबरी करने का मौका नहीं मिलता था | जब भी उसका खर्च करने का नंबर आता उसके पास पैसे ही नहीं होते थे | अमीर स्कूल में पढने के ये नुकसान गरीब बच्चो की अक्सर अनुभव करने पड़ते है | नूतन ने 6 क्लास तक आते आते इसका तोड़ निकल लिया, उसने अमीर घरो के लडको को पटाना शुरू कर दिया | वो पढने में तेज थी इसलिए कभी उनका होमवोर्क कर देती, कभी उनको दिया असाइनमेंट बना देती, इस तरह से वो लड़के नूतन को अच्छा खासा पॉकेट मनी दे देते थे | धीरे धीरे उसकी आदते डेवेलोप होने लगी | 8 तक आते आते उसे अहसास हो गया कि सिर्फ होमवर्क करके काम नहीं चलेगा | उसने एक अमीर लड़के को पटाकर उसको किस करना चालू कर दिया और उसके ग्रुप में खुद को उसकी गर्लफ्रेंड घोषित कर दिया | लड़का भी जोश में नूतन के सारे खर्चे उठाने लगा | लेकिन ये सिलसिला बस दो साल चला, क्योंकि अगले साल नूतन इन सब दुनिअदारी में इतनी उलझ गयी की फ़ैल हो गयी | उसके घर में तो जैसे आसमान टूट पड़ा हो, घर के ताने और चिकचिक से तंग आकर वो ज्यादातर स्कूल में ही टाइम बिताती | फ़ैल होने से उसका पूरा फ्रेंड सर्किल उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ गया और अपने फ्रेंड सर्किल में नूतन एक तरह से वैम्प या कामिनी लड़की की तरह जानी जाने लगी |

नूतन से इससे त्रस्त होकर अपने से जूनियर से दोस्ती करनी आरम्भ कर दी | उससे दो क्लास जूनियर दो अमीर लड़के उसके दोस्त बने, जिनका नाम था राजू और प्रियम | ऐसा नहीं था नूतन के बाकि लड़के दोस्त नहीं थे, वो सबसे अपना मतलब सीधा रखने के लिए दोस्ती रखती थी | उम्र बढ़ने के साथ साथ नूतन के और भी कई तरह से लड़कों को अपने जाल में फ़साना शुरू किया | इससे उसे अपनी पढाई का पूरा खर्चा निकल आता था | फिलहाल राजू और प्रियम उसे सबसे ज्यादा पैसे देते थे इसलिए राजू और प्रियम उसके खास दोस्त थे | ऐसा नहीं था की नूतन कोई बेश्या थी | पुरे कॉलेज के ज्यादातर लडको का मानना था कि नूतन के बेहद ही बोल्ड और बिंदास लड़की है, और उसके न जाने कितने लड़को से रिश्ते है | सब ये मान चुके थे वो न जाने कितनी बार चुद चुकी होगी लेकिन इसके उलट कहानी ये थी, कि नूतन असल में अब तक कुंवारी थी | इतने सारे लडको के साथ फ्लर्ट करने के बावजूद सबको बस यही लगता था की ये सामने वाले के साथ सोई होगी | कोई भी ये दावा नहीं कर सका कि मै नूतन के साथ सोया हूँ और मैंने उसे चोदा है | अफवाहे उड़ती रहती थी इससे बेपरवाह नूतन बस अपने में मस्त रहती | नूतन के अपने करीब के एक रिश्तेदार की बेहद शालीन बेटी को गर्भवती होते देखा था, जो कि उन्ही के किसी रिस्तेदार ने से चोरी छिपे चुदवाकर पेट से हो गयी थी | जिसने भी उसके बारे में सुना था यकीन नहीं कर पाया, बेचारो को शहर छोड़ दूसरी जगह जाना पड़ा रहने के लिए | वो एक दिन था जब उसकी माँ ने उसका माथा चूमा था और गर्व से बोली थी - मेरी बेटी कैसी भी लेकिन चोरी छिपे किसी के साथ मुहँ काला नहीं कराती |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] उसी दिन से नूतन का नियम था, below the बेल्ट नो एंट्री | उसके फ्रेंड सर्किल में ये बात भी तैरती रहती किनूतन घुमती सबको है लेकिन देती किसी को नहीं | जाहिर से बात है उसके पास राजू को महगा गिफ्ट देने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने उसके बर्थडे को स्पेशल बनाने की सोची | दूसरा उन तीनो में सिर्फ राजू था जो अब तक हर तरफ से कोरा था, चूत को चोदना तो छोड़ो, उसके लंड को भी अभी तक किसी लड़की ने नहीं छुआ था | प्रियम इस मामले में थोडा लकी रहा | इसलिए नूतन का प्लान था की राजू का लंड चूसकर उसे भी थोडा अच्छा फील कराया जाये इससे उसक कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा | लेकिन राजू इतना फट्टू था कि अकेले के लिए राजी ही नहीं हुआ इसलिए देखते देखते नूतन ने प्रियम के लिए भी मूड बना लिया |

असल में हट के अन्दर आते ही नूतन ने लंड चूसने की शरुआत प्रियम से करी ताकि उसे देखकर राजू को पता चल जाये की क्या होने जा रहा है और वो जरुँरत से ज्यादा उत्तेजित न हो | रास्ते में नूतन दोनों के लंड पेंट के ऊपर से सहलाती हुई आ रही थी इसलिए दोनों के तम्बू पेंट के अन्दर तने हुए थे | नूतन ने प्रियम की पेंट की जिप खोली और सीधे उसका लंड का सुपाडा मुहँ में ले लिया और टॉफी की तरह चूसने लगी | राजू आंखे चौड़ी करके ये नजारा देखने लगा | थोड़ी देर तक नूतन प्रियम का लंड बिलकुल लोलीपोप वाले अंदाज में चूसती रही |

फिर वो राजू की तड़प को भांप कर उसका भी लंड पेंट के बाहर खींच लिया उसके लंड को हाथ में लेकर मुठीयाने लगी | राजू का लंड भी पेंट के अन्दर ही तनकर कठोर हो चूका था | कुछ देर तक राजू का लंड मुठीयाने के बाद अब वो दोनों हाथो से दोनों लंडो को मुठीयाने लगी थी | ये देखकर राजू बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया | नूतन ने धीरे धीरे दोनों लंडो के सुपाडे पर अपनी जीभ फिरनी शुरू कर दी | नूतन की गीली खुदुरी जीभ दोनों के खून से उबलते गरम लंडो पर किसी ठंडी फुहार जैसी लग रही थी | इस अनुभव को महसूस करके दोनों मस्ती के सागर में गोते लगाने लगे | दोनों के मुहँ से आहे कराहे निकलने का सिलसिला बदस्तूर जारी हो गया | नूतन के मुहँ से बस लोलीपोप चूसने जैसी ही आवाजे आ रही थी लेकिन राजू और प्रियम के मुहँ से आह आह आह लगातार निकल रहा था | अब नूतन दोनों लंड बारी बारी से चूस रही थी | रीमा जब आई तो ना केवल दोनों के कपडे उतर चुके थे बल्कि नूतन पूरी गति से दोनों लंडो को अच्छे से संभाल रही थी | नूतन को देखकर लगता था वो इस गेम में की पुरानी खिलाडी रह चुकी है | रीमा भी ये देखकर नूतन का ये स्किल देखकर उससे इम्प्रेस हो गयी, दो लंडो को संभालना किसी नयी लड़की के लिए इतना आसन नहीं होता |

प्रियम और राजू के धड़कने तेज थी, दोनो एक दुसरे की सांसो की आवाजे सुन सकते थे | नूतन का जिस्म भी गरम हो चला था उसकी चूत ने भी अपना पहला रिसाव करना शुरू कर दिया था | प्रियम और राजू नूतन की चुचियो से खलेने लगे और वो उनके लंडो से खेल रही थी | तीनो की आँखों में वासना की सुर्खियाँ तैरने लगी | रीमा को अब समझ आया अच्छा तो इसलिए ये लड़का पार्टी में आने की इतनी जिद इसलिए कर रहा था | रीमा चाहती तो उनको अभी रोक सकती थी लेकिन पिछले बार की टोकाटोकी उसके पक्ष में नहीं गयी थी इसलिए रीमा को लगा यहाँ से उसे चले जाना चाहिए, फिर एक पल को रूककर कुछ सोचने लगी | उसे यहाँ से क्यों जाना चाहिए | उसे तो इस थ्रीसम के मजे लेने चाहिए | रीमा के लिए ये बिलकुल नया था जब दो लंड एक ही लड़की शेयर कर रहे हो और तीनो में से किसी को भी रत्ती भर की शर्म नहीं थी | उसने अपना मोबाईल निकाला और फ़्लैश off कर दिया, फिर अन्दर के नज़ारे को मोबाइल में शूट करने लगी | प्रियम और राजू की पतलूने नीचे खिसक चुकी थी, नूतन घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और बारी बारी से दोनों के लंड के सुपाडे पर अपनी गीली गुलाबी जीभ घुमाने लगी | दोनों की सिकरियां निकली शुरू हो गयी थी | नूतन एक हाथ से लंड की खाल को मसल रही थी और दुसरे सर हिला हिला कर बारी बारी से दोनों लंडो के सुपाडे को मुहँ में लेकर चूस रही थी | प्रियम राजू तो जैसे जन्नत की सैर कर रहे हो - यस बेबी लाइक दैट, सक इट बेबी, येस्स्स्सस्स्सस बेबी चुसो, कसकर चुसो |

नूतन भी मुहँ से लंड निकालकर - यस बेबी आई ऍम सकिंग इट, चूस रही हूँ कसकर चूस रही हूँ |

ये सब देखकर रीमा की हालत ख़राब होने लगी, उसकी गुलाबी चिकनी चूत भी रिसने लगी | रीमा को यकीन ही नहीं हुआ, यहाँ इस अँधेरे में दीवार के ऊपर जिस तरह से वो हवा में टंगी रहकर उनका विडिओ बना रही थी उसके बावजूद अगर उसकी चूत गीली हो चली थी इसका मतलब जरुर उसके साथ कुछ गलत है | रीमा खुद के अन्दर ही खुद का व्यवहार देखकर हैरान थी | उसे यहाँ से चले जाना चाहिए | हर जवान लड़के लड़की को जवानी का सुख भोगने का हक़ है , क्या सही है क्या गलत है उनके माँ बाप देखे, संभाले, वो कौन होती है मोरल बॉस बनकर उनको रोकने वाली | बड़ा अंतर्द्वंद उसके अन्दर चलने लगा | उसे भी एन्जॉय करना चाहिए ये सीन देखकर !!!, क्या ये सीन देखना सही है ????, किसी के प्राइवेट पलो को इस तरह से छिपकर देखना कितना सही है | अगले पल खुद से ही खुद को उत्तर भी दे रही थी - काहे का प्राइवेट पल, प्राइवेट दो लोगो के बीच में होता है, तीन के नहीं | ऊपर से प्राइवेट करना है तो घर में कमरे में करे, यहाँ पब्लिक के बीच में हट में नहीं | क्या इस तरह से दुसरे के बेहद निजी मोमेंट को मोबाइल से रिकॉर्ड करना सही है | जब प्रियम ने मेरे नंगा विडिओ रिकॉर्ड किया था तो मुझे कितना बुरा लगा था | लेकिन कल को मेरे पास प्रूफ तो है मै कौन सा इसे अपलोड करने जा रही हूँ | रीमा इसी उधेड़बुन में खोयी थी, तभी उसने देखा खुद नूतन दोनों के तने सख्त लंडो को मुहँ से सटाकर सेल्फी ले रही है | उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं था, क्या जमाना आ गया है, अपने ही सेक्स की फोटो खीच रहे है और मै कहाँ सही गलत के चक्कर में पड़ी थी | उसे भी ये सब देखने में मजा आ रहा है फिर क्या सही क्या गलत, मेरी चूत भी तो गीली हो रही है इसका मतलब उसको भी मजा आ रहा है |

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] नूतन से अलग अलग पोज में कम से कम 20 फोटो खीचे | तीनो आपस में इतने मस्त थे की किसी का ध्यान हट में ऊपर की तरफ हवा पास कने के लिए बने छेद की तरफ नहीं गया | हालाँकि अन्दर रौशनी से भरे हुत से बाहर देखने पर केवल काला असमान दिखता लेकिन अगर उनमे से कोई गौर से देखता तो काले आसमान में दाग भी दिख जाता और वो दाग कोई और नहीं रीमा थी | अब बारी राजू की थी, राजू ने अपना मोबाईल निकाला और नूतन प्रियम के लंड के साथ तरह तरह के पोज देने लगी | कुछ देर बाद प्रियम फोटो खीचने लगा और राजू के लंड के साथ नूतन पोज दे रही थी |

उसके बाद फिर से लंड चुसाई शुरू हो गयी, इस बार तेजी से फुर्ती के साथ नूतन दोनों का लंड बारी बारी से चूस रही थी | लंड को अन्दर तक मुहँ में ले जाने के लिए जोर जोर से अपना सर हिला रही थी | जीतनी तेजी से प्रियम के लंड पर अपना सर हिलाकर उसे अपनी ओंठो की सख्त जकड़न में लेकर चूस रही थी और मुहँ में ले रही थी, प्रियम को रीमा की लंड चुसाई याद आ गयी | यहाँ उतनी रिद्धम और कला नहीं थी, न ही नजाकत थी लेकिन स्पीड कमाल की थी | जीतनी तेज नूतन के मुहँ में प्रियम का लंड जा रहा था उतनी ही तेज राजू का लंड भी नूतन के हाथ में फिसल रहा था | दो लंडो के साथ इतनी स्पीड में खेलने से नूतन हांफने लगी थी और तीनो ने एक और ब्रेक लिया | नूतन की चूत का रस अब बाहर की तरफ बहने लगा था, उसके तेज धडकने उसको साफ़ सुनाई दे रही थी, यही हाल राजू और प्रियम का था, दोनों अपने चरम की बढ़ते बढ़ते काम वासना में कराह रहे थे | नूतन की इस एक्सप्रेस लंड चुसाई से दोनों का रोम रोम खड़ा हो गया, तभी नूतन ने एक और ब्रेक लेने की सोची, अगर नूतन दोनों का लंड मुठियाना और चुसना न बंद करती तो शायद दोनों झड़ने के कगार पर पंहुच जाते और जल्दी ही उनकी पिचकारी छुटने लगती |

तीनो अपनी अपनी सांसे काबू करने में लगे हुए थे, नूतन कैमरा का टाइमर ऑन करके एक जगह रख आई | इस बार कैमरा टाइमर के साथ फोटो खीची जाने लगी | ऐसा लग रहा था हट में तीन कमसिन युवा जवानी की प्यास बूझाने नहीं आये है बल्कि नंगी फोटो शूटिंग करने आये है, ऐसा तो बस पोर्न फिल्मो के स्टेज पर होता है | तीनो को ये सब करने में न कोई शर्म थी न कोई झिझक | जी तरह से नूतन दोनों के लंडो को पकड़ पकड़ कर फोटो खीच रही थी, ऐसा लग रहा था आगे चलकर उसे न्यूड मॉडलिंग ही करनी है | सबसे बड़ी बात है वो इसे पूरा एन्जॉय कर रही थी और पूरी तरह से कॉंफिडेंट भी लग रही थी | कही से भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वो इस हट में उन दोनों का कोई अहसान चुकाने आई है, बल्कि बॉडी लैंग्वेज से राजू और प्रियम कम कॉंफिडेंट लग रहे थे | शायद इसलिए क्योंकि राजू ये सब पहली बार एक्सपीरियंस कर रहा था, जाहिर सी बात है उसके मन में हजारो सवाल और जिज्ञासाए होंगी और प्रियम का रीमा के सामने आखिरी एक्सपीरियंस जैसा था उस हिसाब से उसका कम उत्साही होना समझ में आ रहा था | नूतन दोनों में जोश भरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी, वो दोनों को कुछ वाइल्ड करने के लिए जमकर उकसा रही थी | आजकल के युवा सेक्स में कितना जंगलीपन चाहते है ये देखकर रीमा हैरान थी | सेक्स दो लोगो के बीच का बेहत निजी पल होता है लेकिन यहाँ तो तीन थे और तीनो को इस बात का न कोई संकोच था, न मलाल, तीनो इस बात से भी पूरी तरह बेपरवाह थे कुछ दूरी पर उनके फैमिली वाले है | वो सब इस बात को लेकर कॉंफिडेंट थे की शराब के नशे में उन्हें ढूढ़ने यहाँ कोई नहीं आने वाला | उनकी खैर खबर अब सुबह ही लेने कोई आएगा, अगर आएगा तो |

कैमरा बंद होते ही तीनो फिर से अपने काम में लग गए लेकिन इस बार की चुसाई थोड़ी अलग थी | थोड़ी उग्र थी, थोडा जंगली पन लिए हुई थी नूतन बेहद स्पीड से दोनों के लंड मसलने लगी, मुहँ में लेकर चूसने लगी, कभी कभी दोनों लंडो के फूले गुलाबी सुपाडे मुहँ फैलाकर एक साथ मुहँ में रख लेती | दोनों अब उत्तेजना से कराहने लगे थे | बीच बीच में उनके लंडो के सुपाडे पर अपनी दांत गडा देती , उनके सख्त लंडो की खाल को दन्त से कटाने लगती | ऐसा होते ही दोनों की कराह ज्यादा तेज हो जाती | बीच बीच में नूतन दोनों को उकसाती रहती, ताकि कुछ मर्दाना जोश दिखाए | हालाँकि दोनों पर इसका कम ही असर हुआ | प्रियम अब तक रीमा के सदमे से बाहर नहीं आया था लेकिन वो वासना की उत्तेजना के चरम की तरफ बढ़ रहा था इसलिए उस असर को दिलोदिमाग पर छाई हवस ने कम जरुर कर दिया था, इसलिए अब वो सक्रीय रूप से इसमें भाग ले रहा था | वो भी नूतन की चूची कसकर रगड़ कर मसल देता जिससे नूतन के मुहँ में ही घुटी चीख निकल जाती | कभी कभी दोनों के लंडो को अपने मुहँ में भरकर कसकर उन पर दांत से काटने लगाती | रीमा को ये जंगलीपन बहुत भा रहा था | उसके दिमाग में बस यही ख्याल आ रहा था उसने ऐसा कभी क्यों नहीं किया | दो लंडो को तो वो जन्नत की बड़ी आसानी से सैर करा सकती है और जंगली बिल्ली बनकर अपना सारा जंगलीपन उन पर उतार सकती है |

दो दो लंडो की चुसाई से नूतन का बदन भी आग की भट्ठी की तरह गरम हो गया, उसके शरीर पर भी पसीने के बुँदे झलक आई | नूतन के राजू के लंड को कसकर सख्ती से हाथो में लकड़ लिया और मुहँ के अन्दर बाहर करने लगी, राजू का ये पहला मोमेंट था, इसलिए राजू की हालत ज्यादा खराब थी, प्रियम ने राजू का लंड नूतन के मुहँ से निकालते ही अपना लंड नूतन के मुहँ में ठूंस दिया और उसके सर को पकड़कर उसके मुहँ को चोदने लगा | नूतन के एक पल लगा सँभलने में, फिर वो आराम से मुहँ खोलकर प्रियम के लंड से अपना मुहँ चुदवाने लगी, उसके मुहँ से बस गों गों की आवाजे आने लगी | दोनों की सांसे धौकनी की तरह चल रही थी लेकिन दोनों के जिस्मो में लगी आग उन्हें जलाये दे रही थी | उसे बुझाना बहुत जरुरी था चाहे जो करना पड़े | प्रियम के अपने अंदर उमड़ रहे लावे को बाहर निकालना ही था नहीं तो अन्दर ही अन्दर वो उसे झुलसा देता | नूतन के शरीर में भी आग लगी हुई थी, उसे भी बारिश के मौसम की पहली फुहार की जरुरत थी जो इस तपते बदन को ठंडा कर सके | उसकी चूत में मचा तूफान बस फुहार छुटने के बाद ही शांत होगा | नुतन को प्रियम का ये अंदाज बहुत पसंद आया लेकिन राजू के ये देखकर फट गयी | राजू भी प्रियम को देखकर कसकर नूतन के उरोजो को मसलने लगा | नूतन तो जैसे इस दर्द में भी अपन परम सुख पा रही थी | आजतक उसका मुहँ ऐसे किसी ने नहीं चोदा था, वो तो प्रियम की कायल हो गयी | नूतन बस मुहँ खोले प्रियम के लंड को घोटने में लगी थी | नूतन ने राजू के लंड को कसकर जकड लिया और बेदर्दी से मसलने लगी | जीतनी तेज प्रियम के धक्के उसके मुहँ पर लग रहे थे उतनी तेज वो राजू का लंड मुठिया रही थी |

ये सब देख रीमा की तो हालत ख़राब हो गयी, उसकी चूत बुरी तरह पानी छोड़ रही थी और उसकी पैंटी का एक हिस्सा उसके चूत रस से गीला हो गया था | प्रियम दे दनादन धक्के पर धक्के धक्के जमकर नूतन का मुहँ चोदने रहा था , उसकी आँखों से मेकअप का काजल आंसुओं के साथ बहाने लगा | लार निकालकर गले को तर करने लगी और प्रियम दे धक्के पर धक्के जमकर नूतन का मुहँ चोद डाला | नूतन का शरीर उसके काबू में नहीं था, उखड़ती सांसे, धकधक करता सीना और पुरे शरीर में दौड़ रही मादक तरंग अब उसके शरीर को कांपने लगी थी | नूतन चरम पर पंहुच गयी थी, उसकी पिंडलिया उर जांघे कांपने लगी थी वो झड़ने लगी थी | तभी राजू ने मोबाईल का विडिओ कैमरा नूतन के मुहँ पर फोकस करके ऑन करके रख दिया | असल में नूतन और दोनों के झड़ने का विडिओ रिकॉर्ड करना चाहता था, इससे बेहतर बर्थडे गिफ्ट क्या होगा |

नूतन भी उतनी बेदर्द से राजू के लंड को मुठीया रही थी | प्रियम के लंड मुहँ से निकालते ही नूतन ने एक लम्बी साँस ली और तेज हांफने लगी | उसके शरीर का कंपन कम होने लगा था, नूतन को चरमसुख का अनुभव प्रियम ने करा दिया था, नूतन झड़ चुकी थी |

हांफते हुए ही प्रियम से पुछा - ये कहाँ से सीखा प्रियम |

प्रियम अपने चरम के करीब था - कही से भी सीखा हो तुझे मजा तो आया न |

नूतन - बहुत मजा आया, तुमने तो मुहँ का पुर्जा पुर्जा हिला दिया, जमकर चोद दिया, मुझे ओर्गास्म हो गया |

प्रियम - ओ रियली, तो फिर फिर से लो न मजा बेबी | इतना कहकर फिर से लंड मुहँ में ठेल दिया |अब तीनो उत्तेजना के चरम पर पंहुच गए थे | नूतन जोरो से राजू के लंड को मुठिया रही थी, जबकि प्रियम ने एक बार फिर नूतन का मुहँ चोदना शुरू कर दिया | इधर राजू की पिच्ज्कारी छुटने के कगार पर आ गयी | राजू जोर जोर से कराहे लगा - आअहाआअहाआह्ह आअहाआअहाआह्ह नूतन मै माआआआआआआ ................................................|

[/SIZE]
 
[SIZE=150%] प्रियम के लंड से नूतन के चुदते मुहँ पर ही राजू की पिचकारी गिरने लगी, इतने में प्रियम ने नूतन के मुहँ से लंड निकल लिए और बुलेट ट्रेन की स्पीड से मुठीयाने लगे | राजू के सफ़ेद लंड रह से नूतन का पूरा मुहँ सन गया, कुछ लंड रस उसके मुहँ में भर गया | नूतन ने राजू का लंड छोड़ दिया, राजू खुद ही अपने लंड को पकड़कर बचा कुचा सफ़ेद लंड रस की बुँदे निचोड़ने लगा |

इधर प्रियम की भी पिचकारी छुटने लगी | प्रियम - आअहाआअहाआह्ह आअहाआअहाआह्ह नूतन माय जान बेबी, आअहाआअहाआह्ह आअहाआअहाआह्ह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! और दे दनादन एक के बाद एक, कभी नूतन के ओठो पर कभी उसकी आँखों पर, कही गले, कभी सीधे मुहँ में, प्रियम की गोलियों में भरा गरम सफ़ेद गाढ़ा लावा लंड से निकलकर गिरने लगा | उस गरम लावे की तपिश नूतन को अपने गरम बदन पर भी महसूस हो रही थी | दोनों लंड के मथन से उनके जिस्म से निकला गरम सफ़ेद गाढ़ा लंड रस से नूतन का पूरा मुहँ सरोबार हो गया | वो अपने मुहँ पर फैले गरम लावे को समेटकर अपने मुहँ में भरने लगी | दोनों के लंड हाथ में लेकर उनसे आखिरी बूंद तक निचोड़ने लगी, उसके मुहँ में भरी सफ़ेद गाढ़ी क्रीम उसके उन्ठो की गिरफ्त की पार करके मुहँ से बाहर फिसलने लगी और नूतन बड़ी सैक्स्ट अदाओ से मोबाईल के कमरे की तरफ देख रही थी |

दोनों के लंड नरम होने शुरू हो गए थे | नूतन बार बार मुहँ से फिसल कर नीचे की तरफ जा रही गाढ़ी सफ़ेद लंड क्रीम को मुहँ में भर लेती और फिर दोनों के सुपाडे को बारी बारी चिसने लगती | दोनों अपने नरम होते झड चुके लंड को नूतन के लंड रस से सने मुहँ पर हिला रहे थे | उसके गाल सहला रहे थे और नूतन बारी बारी से उनके सुपाडे को मुहँ में ले रही थी |

अब तीनो बिस्तर पर निढाल हो गए | सबकी आंखे बंद थी, शायद अभी अभी मिले चरम सुख को याद कर रहे थे | रीमा ने मोबाईल ऑफ किया और धीरे से दीवार से उतरी, वो वापस मैं हाल में जाने लगी तभी उधर से उसे कोई आता दिखाई दिया | रीमा एक झुरमुट की आंड में हो गयी | जब वो काफी नजदीक आ गया तो रीमा उसे पहचान गयी, ये तो वही परछाई वाला शख्स है | ये तो जग्गू है | ये इधर क्या करने आ रहा है | कही इसको मेरे बारे में पता तो नहीं चल गया | या ये प्रियम से मिलने आ रहा है | या ये भी नूतन के प्लान का हिस्सा है | अब दोनों के जाने के बाद ये अपनी प्यास बुझाएगा | जग्गू जैसे जैसे हट की तरफ बढ़ रहा था रीमा को उसके बारे में सब कुछ साफ़ दिखने लगा था | वो पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाते हुए आ रहा था | इसक मतलब ये था की वो भी अपनी ठरक उतारने ही उधर आ रहा है | जग्गू ने भी शराब पी रखी थी |

इससे पहले जग्गू हट के गेट तक पंहुचता | हट का गेट खुल गया | प्रियम और राजू दोनों चोरो की तरह उसमे से बाहर निकले, चारो तरफ नजर दौडाई, जब उन्हें कोई नजर नहीं आया तो चोरो की तरह चुपके से अपने गतव्य की ओर चल पड़े | प्रियम और राजू को देखकर जग्गू एक बारगी को एक पेड़ की ओट हो गया | जग्गू समझ गया कुछ तो गड़बड़ है | इतनी देर से इन्हें ढूंढ रहा हूँ और ये साले यहाँ इतनी दूर इस झोपड़े में क्या कर रहे है | उसे रंगे हाथो प्रियम और राजू को पकड़ना था लेकिन उसकी बजाय, उसकी दिलचस्पी हट में ज्यादा थी | ऊपर से प्रियम की चाची रीमा उसके लिए एक रहस्य सी बन गयी थी | उनको कहाँ कहाँ नहीं ढूँढा लेकिन वो कही दिख ही नहीं रही है | हाल में सब नशे में धुत है, कही तो वो भी नशे में धुत पड़ी होंगी, अपने हसीन जवान गोर जिस्म को लेकर | बस एक बार दर्शन हो जाये दूध जैसे गुलाबी गोरे बदन के, जहाँ मिलेगी वही दबोच लूगाँ, मसल डालूँगा साली | साली क्या माल है, ये आटू झान्टू लौडिया उसके आगे सब बेकार है | साला एक बार उसकी चूत गुलाबी के दर्शन हो जाये तो जिंदगी सफल हो जाये | बस एक बार साली को चोदने का मौका मिल जाये, जिंदगी भर की प्यास बुझा लूँगा | पूरी रात चोदुगा साली को, भले ही गोली खानी पड़े | यही सब सोचकर जग्गू तेजी से पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था | जैसे ही प्रियम और राजी थोडा दूर निकल गए, जग्गू हट की तरफ बढ़ गया |

रीमा भी झुरमुट की आंड से निकलकर हट के पास आ गयी | पता नहीं आज क्या होने को था, वो तो बस प्रियम को ढूढ़ने आई थी और यहाँ जो हो रहा था उसे देखकर रुक गयी लेकिन खेल तो पता नहीं किस तरफ जा रहा था | रीमा को अब ऐसे रहस्यमयी खेलों में बड़ी दिलचस्पी रहती थी | अब ये जग्गू हट के अन्दर जाकर पता नहीं क्या गुल खिलायेगा | रीमा का वहां से जाने का मन था, वो प्रियम के लिए आई थी और प्रियम जा चूका था | अब उसका यहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं था, लेकिन जग्गू में अचानक जगी उसकी दिलचस्पी, उसके अंतर्मन को कुचल उसके शैतानी दिमाग पर हावी होती जा रही थी | रीमा ने लम्बी उहा पोह के बाद आखिर सच पता चलने तक रुकने और इन्तजार करने का फैसला किया |

नूतन और जग्गू की आपस में नहीं बनती थी, उसका कारन था जग्गू का मुहँ फट्ट होना | नूतन को उसका जाहिलपन बिलकुल पसंद नहीं था | जग्गू नूतन के मुहँ पर ही वो सारी बाते बोल देता था जिनके बारे लोग नूतन की पीठ पीछे बाते करते थे | नूतन के नजर में जग्गू एक नंबर का लुच्चा लफंगा बदमाश और लडकियों की इज्जत न करने वाला लड़का था | जग्गू की नजर में नूतन एक नंबर की छिछोरी रंडीबाज लौंडिया थी जो न जाने कितने लंडो से कितनी बार चुद चुकी होगी, और चुदवा चुदवा कर अपनी चूत सुरंग बना चुकी होगी | नूतन जिस भी लड़के से बात करती थी जग्गू उसका मतलब ये समझता था की नूतन उससे भी चुदवा चुकी है या चुदवाने की तैयारी में है | इसी वजह से जग्गू उसकी जरा सी भी इज्जत नहीं करता था |

रीमा हट के गेट के पास आ गयी, जग्गू अब तक अन्दर घुस चूका था | जग्गू ने अन्दर जाकर जो देखा, उसके मुहँ से अनायास ही निकल गया - अरे बहनचोद ये साले यहाँ इस रंडी को चोदने आये थे इसलिए साले हमको नहीं बताये | इनकी माँ की चूत साला ये तो जैकपोट मार लिए, हमको बताया तक नहीं बहनचोदो | इनकी माँ का भोसना मादरचोदो की | इनको तो बाद में देखूगां, पहले जरा इस रंडी नूतन की चूत का हाल चल तो लू | जग्गू में मतलब भर की शराब पी रखी थी, और उसका साफ़ असर उसके बोल चाल में दिख रहा था |

नूतन ने भी एक पैग लगा रखा था लेकिन वो पुरे होशो हवास में थी, अचनक से जग्गू को हट में देखकर हक्की बक्की सी जग्गू को देख रही है, उसे कुछ समझ नहीं आया, ये जग्गू कहाँ से आ गया | असल में प्रियम और राजू के जाने के बाद नूतन हट का दरवाजा बंद करना भूल गयी | बल्कि ऐसे ही खुद को ठीक करने लगी | लंड रस से सने मुहँ को अच्छे से पोछकर मेकअप करने लगी | इसी चक्कर में अपने कपड़े पहनना भूल गयी , उसकी छातियाँ बिलकुल बेपर्दा थी | उसकी शार्ट पेंट भी नीचे को खिसकी हुई थी, उसकी गुलाबी पैंटी भी अपनी जगह से नीचे को खिसकी हुई और उसके चूत त्रिकोण का चिकना बाल रहित इलाका और चूत की दरार साफ़ दिख रहा था | जग्गू को देखते ही उसने झट से कपडे उठाकर खुद को ढकने की असफल कोशिश की, लेकिन जग्गू उसके जवान कमसिन जिस्म के उतार चढ़ाव की एक पैमाइश तो ले ही चूका था | जग्गू ने आज तक कभी नूतन की चुंचियां और उरोज नहीं देखे थे बस ऊपर से टाइट कपड़ो के उभारो उसके स्तनों और चुताड़ो का अंदाजा लगाता था |

[/SIZE]
 
Back
Top