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मेरा अंदाज़ा था कामिनी शर्मा जायेगी और फिर ‘हट’ बोलेगी पर कामिनी तो खिलखिला कर हंस पड़ी और फिर बोली- दीदी भी ऐसा ही बोलती हैं।
“क्या … मतलब? कब? तुमने मधुर से भी इस बारे में बात की थी क्या?”
“नहीं एतबाल दीदी ने मेला हाथ देखकर बताया था.” कामिनी ने शर्माते हुए अपनी मुंडी फिर नीचे कर ली।
“फिर तुमने क्या जवाब दिया?”
“मैंने बोला कि दीदी आप चाहो तो दोनों ही रख लेना। सब कुछ आपका ही तो है। मेरे और मेरे परिवार पर आपके कितने अहसान हैं मैं तो आपके लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ।”
ओहो … तो कामिनी को यह सारा ज्ञान हमारी हनी डार्लिंग (मधुर) का दिया हुआ लगता है। तभी मैं सोचूं उस दिन कामिनी ने अपना हाथ देखने की बात मुझ से क्यों की थी? शायद वह इन बातों को कन्फर्म करना चाहती होगी। मुझे डर लगा कहीं इस बावली सियार ने वो भूतनी या चुड़ैल वाली बात तो मधुर से नहीं पूछ ली होगी?
“अरे कहीं तुमने मधुर से वो भूतनी वाली बात तो नहीं पूछ ली?”
“किच्च …” कामिनी ने मेरी ओर संदेहपूर्ण दृष्टि से देखते हुए कहा “दीदी से तो नहीं पूछा पल… तहीं आपने मुझे उल्लू तो नहीं बनाया था?”
“अरे नहीं… यार… इसमें उल्लू बनाने वाली कौन सी बात है? मैंने कई किताबों में इसके बारे में पढ़ा है।”
“मैंने इसते बाले में यू-ट्यूब पल सल्च तिया था। उसमें तो इसे सुपलस्टेशन… अंधों… ता विश्वास जैसा तुछ बताया? ये अंधों ता विश्वास त्या होता है मेली समझ में नहीं आया?”
एक तो यह साली मधुर किसी दिन मुझे मरवा ही देगी। इस लोल को अब यू-ट्यूब चलाना और सिखा दिया। कामिनी शायद सुपरस्टिशन (अंधविश्वास) की बात कर रही थी। मुझे तो कोई जवाब सूझ ही नहीं रहा था।
“अरे नहीं … दरअसल अंधे व्यक्ति देख नहीं सकते तो उनको भूतनी या चुड़ैल पर विश्वास नहीं होता होगा इसलिए ऐसा बताया होगा?” मैंने गोलमोल सा जवाब देकर उसे समझाने की कोशिश की। अब पता नहीं मेरी बातों पर उसे विश्वास हुआ या नहीं भगवान जाने पर इतना तो तय था कि अब उसके मन की शंकाएं कुछ हद तक दूर जरूर हो गई थी।
बातों-बातों समय का पता ही नहीं चला 9:30 हो गए थे। कामिनी बर्तन उठाकर रसोई में चली गई और मैं दफ्तर के लिए भागा।
जय हो लिंग देव !!!
मुझे ध्यान आता है पिछले 15-20 दिनों में तो मधुर से ज्यादा कोई बात ही नहीं हो पाती है। ऐसा लगता है जैसे उसके पास मेरे लिए समय ही नहीं है। सुबह वह स्कूल में जल्दी चली जाती है और साम को या तो मंदिर में पूजा पाठ में लगी रहती है या फिर कामिनी के साथ रसोई में लगी रहती है। और आप तो जानते ही हैं शुद्धता को लेकर रात को तो वह अलग सोने लगी है इसलिए रात वाली बातें तो आजकल वर्जित हैं।
अरे भई! मैं चुदाई की बात कर रहा हूँ।
आज रात को जब हम सोने का उपक्रम कर रहे थे तो मधुर ने कहा- प्रेम! ये कामिनी है ना?
“क्या … मतलब? कब? तुमने मधुर से भी इस बारे में बात की थी क्या?”
“नहीं एतबाल दीदी ने मेला हाथ देखकर बताया था.” कामिनी ने शर्माते हुए अपनी मुंडी फिर नीचे कर ली।
“फिर तुमने क्या जवाब दिया?”
“मैंने बोला कि दीदी आप चाहो तो दोनों ही रख लेना। सब कुछ आपका ही तो है। मेरे और मेरे परिवार पर आपके कितने अहसान हैं मैं तो आपके लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ।”
ओहो … तो कामिनी को यह सारा ज्ञान हमारी हनी डार्लिंग (मधुर) का दिया हुआ लगता है। तभी मैं सोचूं उस दिन कामिनी ने अपना हाथ देखने की बात मुझ से क्यों की थी? शायद वह इन बातों को कन्फर्म करना चाहती होगी। मुझे डर लगा कहीं इस बावली सियार ने वो भूतनी या चुड़ैल वाली बात तो मधुर से नहीं पूछ ली होगी?
“अरे कहीं तुमने मधुर से वो भूतनी वाली बात तो नहीं पूछ ली?”
“किच्च …” कामिनी ने मेरी ओर संदेहपूर्ण दृष्टि से देखते हुए कहा “दीदी से तो नहीं पूछा पल… तहीं आपने मुझे उल्लू तो नहीं बनाया था?”
“अरे नहीं… यार… इसमें उल्लू बनाने वाली कौन सी बात है? मैंने कई किताबों में इसके बारे में पढ़ा है।”
“मैंने इसते बाले में यू-ट्यूब पल सल्च तिया था। उसमें तो इसे सुपलस्टेशन… अंधों… ता विश्वास जैसा तुछ बताया? ये अंधों ता विश्वास त्या होता है मेली समझ में नहीं आया?”
एक तो यह साली मधुर किसी दिन मुझे मरवा ही देगी। इस लोल को अब यू-ट्यूब चलाना और सिखा दिया। कामिनी शायद सुपरस्टिशन (अंधविश्वास) की बात कर रही थी। मुझे तो कोई जवाब सूझ ही नहीं रहा था।
“अरे नहीं … दरअसल अंधे व्यक्ति देख नहीं सकते तो उनको भूतनी या चुड़ैल पर विश्वास नहीं होता होगा इसलिए ऐसा बताया होगा?” मैंने गोलमोल सा जवाब देकर उसे समझाने की कोशिश की। अब पता नहीं मेरी बातों पर उसे विश्वास हुआ या नहीं भगवान जाने पर इतना तो तय था कि अब उसके मन की शंकाएं कुछ हद तक दूर जरूर हो गई थी।
बातों-बातों समय का पता ही नहीं चला 9:30 हो गए थे। कामिनी बर्तन उठाकर रसोई में चली गई और मैं दफ्तर के लिए भागा।
जय हो लिंग देव !!!
मुझे ध्यान आता है पिछले 15-20 दिनों में तो मधुर से ज्यादा कोई बात ही नहीं हो पाती है। ऐसा लगता है जैसे उसके पास मेरे लिए समय ही नहीं है। सुबह वह स्कूल में जल्दी चली जाती है और साम को या तो मंदिर में पूजा पाठ में लगी रहती है या फिर कामिनी के साथ रसोई में लगी रहती है। और आप तो जानते ही हैं शुद्धता को लेकर रात को तो वह अलग सोने लगी है इसलिए रात वाली बातें तो आजकल वर्जित हैं।
अरे भई! मैं चुदाई की बात कर रहा हूँ।
आज रात को जब हम सोने का उपक्रम कर रहे थे तो मधुर ने कहा- प्रेम! ये कामिनी है ना?