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Adultery लेखक-प्रेम गुरु की सेक्सी कहानियाँ

मेरा अंदाज़ा था कामिनी शर्मा जायेगी और फिर ‘हट’ बोलेगी पर कामिनी तो खिलखिला कर हंस पड़ी और फिर बोली- दीदी भी ऐसा ही बोलती हैं।

“क्या … मतलब? कब? तुमने मधुर से भी इस बारे में बात की थी क्या?”

“नहीं एतबाल दीदी ने मेला हाथ देखकर बताया था.” कामिनी ने शर्माते हुए अपनी मुंडी फिर नीचे कर ली।

“फिर तुमने क्या जवाब दिया?”

“मैंने बोला कि दीदी आप चाहो तो दोनों ही रख लेना। सब कुछ आपका ही तो है। मेरे और मेरे परिवार पर आपके कितने अहसान हैं मैं तो आपके लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ।”

ओहो … तो कामिनी को यह सारा ज्ञान हमारी हनी डार्लिंग (मधुर) का दिया हुआ लगता है। तभी मैं सोचूं उस दिन कामिनी ने अपना हाथ देखने की बात मुझ से क्यों की थी? शायद वह इन बातों को कन्फर्म करना चाहती होगी। मुझे डर लगा कहीं इस बावली सियार ने वो भूतनी या चुड़ैल वाली बात तो मधुर से नहीं पूछ ली होगी?

“अरे कहीं तुमने मधुर से वो भूतनी वाली बात तो नहीं पूछ ली?”

“किच्च …” कामिनी ने मेरी ओर संदेहपूर्ण दृष्टि से देखते हुए कहा “दीदी से तो नहीं पूछा पल… तहीं आपने मुझे उल्लू तो नहीं बनाया था?”

“अरे नहीं… यार… इसमें उल्लू बनाने वाली कौन सी बात है? मैंने कई किताबों में इसके बारे में पढ़ा है।”

“मैंने इसते बाले में यू-ट्यूब पल सल्च तिया था। उसमें तो इसे सुपलस्टेशन… अंधों… ता विश्वास जैसा तुछ बताया? ये अंधों ता विश्वास त्या होता है मेली समझ में नहीं आया?”

एक तो यह साली मधुर किसी दिन मुझे मरवा ही देगी। इस लोल को अब यू-ट्यूब चलाना और सिखा दिया। कामिनी शायद सुपरस्टिशन (अंधविश्वास) की बात कर रही थी। मुझे तो कोई जवाब सूझ ही नहीं रहा था।

“अरे नहीं … दरअसल अंधे व्यक्ति देख नहीं सकते तो उनको भूतनी या चुड़ैल पर विश्वास नहीं होता होगा इसलिए ऐसा बताया होगा?” मैंने गोलमोल सा जवाब देकर उसे समझाने की कोशिश की। अब पता नहीं मेरी बातों पर उसे विश्वास हुआ या नहीं भगवान जाने पर इतना तो तय था कि अब उसके मन की शंकाएं कुछ हद तक दूर जरूर हो गई थी।

बातों-बातों समय का पता ही नहीं चला 9:30 हो गए थे। कामिनी बर्तन उठाकर रसोई में चली गई और मैं दफ्तर के लिए भागा।

जय हो लिंग देव !!!

मुझे ध्यान आता है पिछले 15-20 दिनों में तो मधुर से ज्यादा कोई बात ही नहीं हो पाती है। ऐसा लगता है जैसे उसके पास मेरे लिए समय ही नहीं है। सुबह वह स्कूल में जल्दी चली जाती है और साम को या तो मंदिर में पूजा पाठ में लगी रहती है या फिर कामिनी के साथ रसोई में लगी रहती है। और आप तो जानते ही हैं शुद्धता को लेकर रात को तो वह अलग सोने लगी है इसलिए रात वाली बातें तो आजकल वर्जित हैं।

अरे भई! मैं चुदाई की बात कर रहा हूँ।

आज रात को जब हम सोने का उपक्रम कर रहे थे तो मधुर ने कहा- प्रेम! ये कामिनी है ना?
 
“हम्म?”

ये साली मधुर भी एकबार में सीधी तरह कोई बात करती ही नहीं। किसी छोटी सी बात को भी इतना घुमाफिरा कर सनसनी पूर्ण बनाकर करती है कि लगता है अभी कोई बम फोड़ देगी। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था।

“आजकल पता नहीं इसका ध्यान किधर रहता है।”

“क… कैसे… ऐसा क्या हुआ?” मैंने हकलाते हुए पूछा। हे लिंग देव ! प्लीज लौड़े मत लगा देना।

“पढ़ाई में इसका मन ही नहीं लगता और पहले दिन जो पढ़ाओ वो दूसरे दिन भूल जाती है। किसी विषय पर पकड़ ही नहीं है इसकी!”

“अच्छा?”

“अंग्रेजी तो इसके पल्ले ही नहीं पड़ती?”

“मुझे लगता है इसका ऊपर का माला खाली होगा?” मैंने हंसते हुए कहा।

“नहीं जी… और दूसरी बातें तो जी में आये उतनी किये जाओ बस पढ़ाई से जी चुराती रहती है।”

मैंने मन में सोचा ‘इस बेचारी की चूत और गांड अब एक अदद लंड माँगने लगी है पढ़ाई-लिखाई में अब इसका मन कहाँ लगेगा। इसे तो अब कलम-किताब के बजाय लंड पकड़ना और प्रेमग्रन्थ पढ़ना सिखाओ।’

“प्रेम, क्या तुम एक काम कर सकते हो?”

“हाँ कर दूंगा.” मेरे मुंह से अचानक निकल गया।

पता नहीं मधुर क्या सोच ले तो मैंने तुरंत बात को संवारते हुए कहा- हां … हाँ … बोलो क्या करना है?

“तुम इसे रोज थोड़ी देर अंग्रेजी पढ़ा दिया करो.”

“पर … मेरे पास कहाँ समय होता है? सुबह तो ऑफिस जाना होता है और …” मैंने जानबूझ कर बहाना बनाया।

मधुर मेरी बात को बीच में ही काटते हुए बोली- प्लीज रात को 9 के बाद पढ़ा दिया करो.

“लगता तो मुश्किल ही है पर मैं कोशिश करूँगा?”

अब मैं सोच रहा था अब तो रात में भी कामिनी के साथ 2-3 घंटे का समय आराम से बिताया जा सकता है। सुबह तो ऑफिस जाने की जल्दी रहती है तो ज्यादा बातें नहीं हो पाती पर अब तो शाम को भी अच्छा समय मिल जाएगा। अब तो अंग्रेजी के साथ में इसे जोड़-घटा और गुणा-भाग भी सिखा दूंगा।

“और अगर यह पढ़ने में जी चुराए तो मास्टरजी की तरह इसके कान भी खींच देना!” कहकर मधुर हँसने लगी।

“अरे नहीं … अभी छोटी है … सीख लेगी धीरे धीरे।” मैंने मधुर को दिलासा दिलाया।

मैं सोच रहा था ‘मेरी जान तुम चिंता मत करो बस तुम देखती जाओ कान ही नहीं इसकी तो और भी बहुत सी चीजें पकड़नी और खींचनी हैं।’

आज सुबह भी जब तक मैं फ्रेश होकर बाहर हॉल में आया मधुर स्कूल जा चुकी थी।
 
मेरे बाहर आते ही कामिनी रसोई से बाहर आ गई और मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोली- गुड मोल्निंग सल!

“वेरी गुड मोर्निंग डार्लिंग!” मैंने उसे ऊपर से नीचे देखते और हंसते हुए जवाब दिया।

आजकल मेरे डार्लिंग बोलने पर कामिनी ने शर्माना छोड़ दिया है।

कामिनी ने आज काली पैंट और लाल रंग की चोखाने वाली डिजाइन की कमीज (शर्ट) पहन रखी थी जिसकी आस्तीन (बाहें) उसने फोल्ड कर रखी थी और ऊपर के दो बटन खुले थे। लगता है उसने आज भी ब्रा पैंटी नहीं पहनी है। अब पता नहीं उसे ब्रा पैंटी पहनना अच्छा नहीं लगता या वह जानकर ऐसा करती है?

उसके उरोजों के कंगूरे आगे से बहुत नुकीले लग रहे थे। मैं उस दिन तो जी भर कर इन्हें चूस ही नहीं पाया था। अब पता नहीं दुबारा कुच मर्दन और चूसन का मौक़ा कब मिलेगा? मैंने ध्यान दिया उसके गालों पर 2-3 छोटी-छोटी लाल रंग की फुंसियां सी हो रही थी जिनपर उसने कोई क्रीम सी लगा रखी थी। उसकी आँखें कुछ लाल सी लग रही थी अब यह नींद की खुमारी थी या उफनती, बलखाती, अल्हड़ जवानी का असर था या कोई और बात थी पता नहीं।

“आपते लिए चाय बनाऊं या तोफी?”

“अ… हाँ … चाय ही बना लो।” कहकर मैं अखबार पढ़ने लगा और कामिनी चाय बनाने रसोई में चली गई।

थोड़ी देर में कामिनी चाय बनाकर ले आई और अब हम दोनों सुड़का लगाकर चाय पीने लगे।

“आपतो एक पहेली पूछूं?” अचानक कामिनी ने पूछा।

“हओ” आजकल मैंने भी कामिनी के सामने उसी की तरह ‘किच्च’ औए ‘हओ’ बोलना शुरू कर दिया है।

“वो त्या चीज है जो हम एत हाथ से तो पतड़ सतते हैं पल दूसले हाथ से नहीं?”

“हम्म … कोशिश करता हूँ।”

मैंने पहले चाय का गिलास अपने दोनों हाथों से पकड़कर देखा और फिर अपनी नाक, कान, ठोड़ी, गला, पैर, पेट, घुटने और होंठ आदि सभी अंगों को पकड़ कर देखा। सभी तो दोनों हाथों से पकड़े जा सकते हैं फिर ऐसा क्या है जो एक हाथ से तो पकड़ा जा सकता है पर दूसरे हाथ से नहीं?

इसी दौरान मैंने एकबार कामिनी के घुटनों और जाँघों पर भी दोनों हाथ लगा कर देख लिए थे पर बात बनती नज़र नहीं आई। मेरी इस हालत पर मंद-मंद मुस्कुरा रही थी। फिर मैंने अपने खड़े पप्पू को भी पायजामे के ऊपर से पकड़ ट्राई किया तो मेरी इस हरकत पर कामिनी और जोर-जोर से हंसने लगी थी।

“यार कमाल है?… तुम बताओ?”

“आपने हाल मान ली?”

“हओ” मैंने अपनी हार की हामी भरी।

“अच्छा अब आप अपने एत हाथ से अपने दूसरे हाथ ता अंगूठा पतड़ो।”

मैंने कामिनी के कहे अनुसार किया पर बात अभी भी पल्ले नहीं पड़ी।

“अच्छा अब इसी अंगूठे को इसी हाथ से पतड़ो?”

“ओह… कमाल है … मेरे दिमाग में तो यह बात आई ही नहीं?” मैंने हंसते हुए कहा।

कामिनी तो अब हंस-हंस कर जैसे दोहरी ही होने लगी थी। आज तो वह अपनी विजय-पताका फहराकर बहुत खुश लग रही थी। हंसते हुए उसके गालों पर पड़ने वाले डिम्पल तो लगता है आज कलेजा ही चीर देंगे।

“लगता है तुमने यह सब यू ट्यूब पर देखा होगा?”

“हओ”

“अरे… कामिनी!”

“हम?” कामिनी ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा।

“ये तुम्हारे चहरे पर क्या हुआ है? कहीं किसी दिलजले आशिक मच्छर ने तो नहीं काट लिया?” मैंने हंसते हुए पूछा।

“नहीं… पिम्पल्स (मुंहासे) हो गए हैं?” कामिनी अब थोड़ी गंभीर हो गयी थी।

“इन पर कुछ लगाया या नहीं?”

“दीदी ने पतंजलि फेसवाश बताया था पल फलक नहीं पड़ा.” कामिनी अचानक उदास हो गई।

“ओह… अक्सर रात को देर से सोने पर या खाने-पीने में असावधानी रखने से भी ऐसा हो जाता है?”

मैंने एक बार कामिनी से उसकी खाने-पीने की पसंद के बारे में पूछा था तो उसने बताया था कि उसे नूडल्स, डोसा, बर्गर, पेस्ट्री, पकोड़े आदि तैलीय चटपटी चीजें और मिठाई में रसमलाई और आइस-क्रीम बहुत पसंद है। फलों में उसे आम और लीची बहुत अच्छे लगते हैं। मुझे लगता है इस चौमासे (बारिश) की सीजन में यहाँ आने के बाद उसने यही सब खूब जी भर के खाया होगा उसके कारण भी और रात को देर से सोने के कारण भी पेट की गड़बड़ से यह मुंहासे हुए है। कई बार सेक्स का दमन करने से भी ऐसा हो सकता है।

“पता है दीदी त्या बोलती है?”

“क्या?” कामिनी की बात संकर मैं चौंका।

“वो बोलती हैं- तुम्हारी जवानी फूट रही है? शादी के बाद ही ठीक होगी.”

“तो कर लो शादी?” मैंने हंसते हुए उसे छेड़ा।

“हट… आपतो मजात सूझ लहा है और मेली डल ते माले जान नितल लही है?”

“शादी में डरने वाली क्या बात है?”

“अले… शादी से नहीं?”

“तो?”

“मुझे डल है वो गुप्ताजी ती लड़ती ती तलह मेला चेहला तो खलाब नहीं हो जाएगा?”

“अरे हाँ… उसका तो मुहांसों के कारण पूरा चेहरा ही छेदवाली फटी बनियान जैसा हो गया है।” कह कर मैं हंसने लगा।

अलबत्ता कामिनी की शक्ल रोने जैसी हो गयी थी।

“पर उसकी समस्या तो अब जल्दी ही ठीक हो जायेगी.”

“तैसे?”

“जल्दी ही उसकी शादी होने वाली है ना?” मैंने हंसते हुए कहा।

“हम्म …” कामिनी उदास सी हो गई थी।

“कामिनी, यह अक्सर हारमोंस में बदलाव के कारण होता है। और उभरती जवानी में तो खूबसूरत लड़कियों के साथ अक्सर ऐसा होता है। हमारे एक जानकार की लड़की थी। पता है उसकी सगाई हो चुकी थी और शादी होने वाली थी.”

“फिल?”

“फिर उसके चहरे पर मुंहासे हो गए जिसके कारण उसका चेहरा खराब हो गया तो उस बेचारी की तो सगाई ही टूट गई थी और फिर बहुत दिनों तक उसकी शादी नहीं हो पाई तो उस बेचारी ने आत्महत्या कर ली।”

“ओह… अब त्या होगा? मेला भी चेहला खलाब हो जाएगा त्या? हे मातालानी! मेले मुंहासे ठीक तल दो मैं आपतो नौमी ते दिन गुलगुले चढ़ाऊँगी” कामिनी हाथ जोड़कर मन्नत सी माँगने लगी। उसे अपनी सुन्दरता खोने का डर सताने लगा था। मुझे लगा कामिनी अब रोने ही लगेगी।

“कामिनी इधर आओ! मैं देखता हूँ किस प्रकार के मुंहासे हैं? उभरती जवानी वाले या हारमोंस वाले?”
 
कामिनी बिना किसी शर्म और हील-हुज्जत के मेरे बगल में सोफे पर आकर बैठ गई। उसकी जांघ अब मेरी जांघ से सट गयी थी। चूत की खुशबू से मेरा लंड एकबार फिर से किलकारी मारने लगा था। जैसे कह रहा था ‘गुरु आज मौक़ा भी है और बहाना भी अच्छा है साली का सोफे पर ही गेम बजा डालो।’

मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ लिया। आह… रेशम के फोहों जैसे स्पंजी और गुलाबी गाल तो ऐसे लग रहे थे जैसे कह रहे हों ‘हमें चूमोगे नहीं?’ उसके होंठ काँप से रहे थे और सांसें बहुत तेज़ चलने लगी थी। उसकी साँसों के साथ उरोजों का उतार-चढ़ाव उसकी घबराहट दिखा रहा था। कामिनी की आँखें बंद थी। मेरा मन तो सब कुछ भूलकर उसके गालों और अधरों को फिर से चूम लेने को करने लगा था पर मैंने अपने आप को बड़ी मुश्किल से रोक रखा था। लंड तो साला फिर से ख़ुदकुशी की धमकी ही देने लगा था।

फिर मैंने उन मुहांसों पर अपनी अंगुली फिराई। राई के दाने जितने 2-3 मुंहासे किसी खलनायक की तरह वहाँ खड़े मेरी ‘तोते जान’ को जैसे डरा-धमका रहे थे।

“थीत हो जायेंगे ना?”

“ओह… हाँ…” कामिनी की आवाज सुनकर मैं चोंका।

“कामिनी यह सब हारमोंस की गड़बड़ी से हुए लगते हैं.”

“तैसे? मैं समझी नहीं?”

मेरा मन तो कर रहा था साफ़ साफ़ बता दूं कि ‘मेरी तोते जान अब तुम अपने आशिकों को चु…ग्गा (चूत-गांड) देना शुरू करो तुम्हारी चूत और गांड को मेरे जैसे एक अदद लंड की जरूरत है। दोनों तरफ से खूब चुदाई का मज़ा लो ये कील मुंहासे सब ख़त्म हो जायेंगे।’

पर मैंने कुछ सोचते हुए कहा- देखो! किशोरावस्था के बाद उभरती जवानी में अक्सर ऐसा होता है। वैसे तो एलोपेथी में बहुत सी दवाइयां हैं पर इनका दुष्प्रभाव (साइड इफ़ेक्ट) भी होता है। आयुर्वेद में भी इसका इलाज़ तो है।

“प्लीज बताओ ना?” कामिनी को कुछ आशा बंधी।

“चरक संहिता में 8 घटकों के मिश्रण से अष्टावहेल (एक लेप) बनाया जाता है। जिसमें नीम गिलोय और गुलाब की पत्तियाँ, एलोविरा का रस, बबूल का गोंद, हल्दी, एक चम्मच ताज़ा कच्चा दूध और शहद शामिल हैं। फिर इस अष्टावहेल में एक और चीज भी मिलाकर चहरे पर लगाया जाता है.”

“वो त्या चीज होती है?” कामिनी ने अधीरता से पूछा।

“ओह… कैसे समझाऊं?”

“त्या हुआ बताओ ना?”

“ओह… यार मुझे शर्म भी आ रही है और झिझक सी भी हो रही है.” मैंने शर्माने का नाटक किया।

“ओहो… प्लीज बताओ ना? इसमें शल्म ती त्या बात है?”

“वो… वो… शादी के बाद ठीक हो जायंगे तुम चिंता मत करो.” मैंने एक बार फिर से उसे टालने का नाटक किया।

“नहीं… नहीं … मुझे अभी 5-7 साल शादी-वादी बिलतुल नहीं तलानी? आप इलाज़ बताओ ना?”

“यार… आज तो तुमने मुझे ही फंसा लिया… कैसे बताऊँ?”

“अच्छाजी… जब मुझे शल्म आती है तो आप मजात समझते हैं अब अपनी बाली (टर्न) आई तो जनाब तो शल्म आती है? मुझे पता है आप जानतल नहीं बताना चाहते?”

“ओह… अच्छा… रुको मैं बताने की कोशिश करता हूँ…” मैंने एक बार फिर से शर्माने और झिझकने का नाटक किया ताकि अब मैं उसे जो भी बताऊँ कामिनी को सौ फ़ीसदी (प्रतिशत) यकीन हो जाए कि मैं जो भी बता रहा हूँ बिलकुल सच है और उसे ज़रा भी यह नहीं लगे कि मैं उसके साथ कोई छल कपट कर रहा हूँ।

फिर मैंने अपना गला खंखारते हुए कहा- दरअसल शादी होने के बाद दोनों पति पत्नी सेक्स का खूब आनन्द लेते हैं। इससे उनके शरीर में रक्त का संचार बहुत तेजी से होने लगता है जिसके कारण हारमोंस में बदलाव आ जाता है।

इतना कहकर मैं थोड़ी देर रुक गया।
 
मैं देखना चाहता था कि मेरी बात पर कामिनी की क्या प्रतिक्रया होती है। वह ध्यानपूर्वक मेरी बात सुन रही थी और कुछ सोचे भी जा रही थी। शायद उसे थोड़ी शर्म तो जरूर आ रही थी पर उसने कुछ बोला नहीं अलबत्ता उसके चहरे से लग रहा था वो आगे जानने की उत्सुक जरूर है। लगता है चिड़िया अब सब कुछ सुनने, समझने और करने के लिए अपने आप को तैयार कर रही है।

“और… एक और बात है?”

“त्या?” उसने अपनी मुंडी ऊपर करते हुए पूछा।

“देखो कामिनी ! सेक्स ईश्वर द्वारा मानव को प्रदत्त आनन्दायक क्रिया है यह कोई पाप कर्म नहीं है। इसमें पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका को जिन क्रियाओं में आनन्द मिले वो सब प्राकृतिक और निष्पाप होती हैं। अब चाहे वो आलिंगन हो, चुम्बन हो, सम्भोग हो या फिर अपने साथी के कामांगों को चूमना हो या चूसना हो।”

मैंने अपनी भाषा पर पूरा नियंत्रण रखा था। मेरी कोशिश थी कि किसी भी प्रकार का कोई अभद्र या अश्लील शब्द अभी मेरे मुंह से नहीं निकले। बाद में तो इसे चूत, गांड, लंड और चुदाई सब स्पष्ट शब्दों में बता भी दूंगा और सिखा भी दूंगा।

“कामिनी एक बात तुम्हें और भी बताता हूँ?”

“त्या?”

“जब मधुर की शादी हुई थी तब मधुर को भी पिम्पल्स हो रहे थे.”

“अच्छा? फिल तैसे थीत हुए?” कामिनी की आँखें जैसे चमक ही उठी। उसे लगने लगा था अब तो उसकी समस्या का समाधान अवश्य ही मिल जाएगा।

“यार प्राइवेट बात है.” मैंने फिर से थोड़ा शर्माने की एक्टिंग की।

“मैं भी तो अपनी साली बातें आपतो बताती हूँ आप त्यों नहीं बता लहे?”

“पता नहीं तुम क्या सोचोगी और विश्वास करोगी या नहीं?”

“तलुंगी… प्लीज बताओ?”

“मधुर ने अपने मुंहासों के लिए मेरे वीर्य का पान किया था? और तुम्हें विश्वास नहीं होगा उसके मुहांसे तो 15-20 दिनों में ही बिलकुल ठीक हो गए थे।”

“अच्छा?” कामिनी आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगी। वह कुछ सोचने लगी थी मुझे लगा उसके मन में अभी थोड़ा संशय है।

“वो… आप दवाई ते बाले में बता रहे थे ना?” साली दिखने में लोल लगती है पर कितनी सफाई से बात का रुख मोड़ दिया है।

“वो दरअसल उस लेप (मिश्रण) में चिकनाई के लिए अपने पति का ताज़ा वीर्य मिलाया जाता है। अगर शादी नहीं हुई हो तो फिर अपने प्रेमी या किसी नजदीकी मित्र से सहायता ली जा सकती है।”

“ओह…”

“कामिनी ! दरअसल दवाई तीन तरह से प्रयोग में लाई जाती है?”

“?” कामिनी ने फिर आश्चर्य से मेरी ओर देखा।

“एक तो लगाई जाती है दूसरी खाई या पी जाती है और तीसरी इंजेक्ट (सुई लगाना) की जाती है। मधुर ने लेप-वेप का झमेला ही नहीं किया उसने तो सीधे ही वीर्य-पान करके अपनी समस्या से छुटकारा पा लिया था।” कहकर मैं हंसने लगा।

कामिनी भी थोड़ा शर्मा तो जरूर रही थी पर कुछ गंभीरतापूर्वक सोचती भी जा रही थी। मुझे लगता है उसे भी यह आईडिया जच तो रहा था। हे लिंग देव… बस थोड़ी सी मदद कर दे। मेरा लंड तो अब डंडे की तरह खड़ा हो गया था। उसे भी अब चुग्गे की उम्मीद और स्वाद की खुशबु नज़र आने लगी थी।

मैंने अपना प्रवचन जारी रखते हुए उसे आगे बताया-

“कामिनी सुनने और देखने में यह थोड़ा गंदा सा काम लगता है पर विदेशों में तो वीर्यपान आम बात हैं। बहुत सी विदेशी फिल्म हिरोइनें तो ताज़ा वीर्य को अपने चेहरे पर लगाती भी हैं और शहद के साथ पीती भी हैं इससे उनकी सुन्दरता बढ़ती है और चहरे पर निखार आने लगता है। जानकारों के अनुसार चेहरे पर वीर्य लगाने से यह किसी एंटी-एजिंग (Anti-aging) उत्पाद की तरह काम करता है। 40 साल की औरत भी 25-26 की लगती है। वीर्य में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद रहते हैं जो त्वचा की झुर्री और त्वीचा के लचीनेपन जैसे विकारों को दूर करने में मदद करता है। चेहरे के लिए वीर्य बहुत ही फायदेमंद होता है इसलिए इसे आजकल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बेचा भी जा रहा है।
 
वीर्य का सेवन करने से तंत्रिका विकास फैक्टर, ऑक्सीटोसिन, प्रोजेस्टेरोन, टेस्टोस्टेरोन, कोर्टिसोल और कुछ प्रोस्टाग्लैंडिन जैसे इंफ्लेमेटरी गुण प्राप्त होते हैं। वीर्य हमारे शरीर में मौजूद टीजीएफ-बीटा प्रोटीन की सहनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है। यह चिंता और तनाव को दूर करने में मदद कर सकते हैं। यह प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होता है। अब कोई इसे पीने के लिए तैयार हैं या नहीं इसका निर्णय उसे खुद लेना होता है।

आज तो मैंने भारी भरकम ज्ञान कामिनी को दे डाला था। अब पता नहीं उसे क्या और कितना समझ आया पर वह लोटन कबूतरी की तरह मुंह बाए बस सुनती ही रही।

“कामिनी शायद तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं हो तो तुम यू ट्यूब पर भी वीर्यपान के लाभ देख सकती हो.” मैंने कामिनी फ़तेह अभियान के ताबूत में एक और कील ठोक दी।

“पल… एत बात मेली समझ में नहीं आई?”

“क्या?”

“यह लेप वाली बात मुझे दीदी ने त्यों नहीं बताई?” कामिनी ने कुछ सोचते हुए कहा।

“भई! अब यह मियाँ-बीवी की निजी बातें होती हैं। खूबसूरत औरतों को तुम्हारी तरह शर्म बहुत आती है ना? इसलिए नहीं बताई होगी.” कहकर मैं हंसने लगा। अब तो कामिनी के चेहरे पर भी मुस्कराहट ऐसे फ़ैल गई जैसे रात को चांदनी फ़ैल जाती है।

प्यारे पाठको और पाठिकाओ! आज का सबक मैंने जानबूझ कर अधूरा छोड़ा था। बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिये हमारी तोतेजान खुद ही वीर्यपान की इच्छा जाहिर करने वाली है।

रात्रि भोजन (डिनर) निपटाने के बाद मधुर ने मेरी ओर इशारा करते हुए कामिनी को समझाया- आज से सर तुम्हें नियमित रूप से रात को अंग्रेजी पढ़ाया करेंगे। मैं रसोई में तुम्हारी मदद कर दिया करुँगी. काम को जल्दी निपटा लिया करना ताकि ठीक से पढ़ाई हो सके।

“हओ …” अब बेचारी तोतेजान ‘हओ’ के अलावा और क्या बोल सकती थी।

“और प्रेम, अगर यह पढ़ाई में कोई कोताही बरते (आनाकानी करे) तो एक डंडा रख लो चाहो तो उससे इसकी अच्छी तरह पिटाई भी कर देना।”

डंडे वाली बात पर हम तीनों ही हंस पड़े। मेरा डंडा तो वैसे ही आजकल अटेंशन रहता है अब तो मधुर ने भी इजाजत दे दी है। अब डंडे का इस्तेमाल कहाँ, कब और कैसे करना है मैं सही समय पर अपने आप कर लूंगा। लिंग देव इस पढ़ाकू कबूतरी का भला करे।

“मैं सोने जा रही हूँ। आज से ही पढ़ाई शुरू कर दो। और गर्मी के सीजन में ये क्या पैंट-कमीज पहन रखी है वो शॉर्ट्स क्यों नहीं पहनती?” और फिर मेरी ओर मुस्कुराते हुए ‘गुड नाईट’ कहकर मधुर बेड रूम की ओर चली गई।

मेरी तोतेजान तो बेचारी सकपका कर रह गई।

“ग … कामिनी तुम अपनी बुक्स वगैरह ले आओ.”

“हओ …” कहकर कामिनी सुस्त कदमों से चलकर स्टडी रूम अपने कमरे में चली गई।

अब मैं सोच रहा था यह साली मधुर मेरे साथ कोई गेम तो नहीं खेल रही? जिस प्रकार उसने कामिनी को शॉर्ट्स पहनने के लिए कहा था और बाद में मेरी ओर मुस्कुराते हुए देखा था, मुझे कुछ थोड़ी शंका भी होती है और डर भी लगता है। औरतों के बारे में एक बात जो जग जाहिर है कि वे अपनी पति को दूसरी लड़की या औरत के पास फटकने भी नहीं देती तो मधुर इस प्रकार मुझे और कामिनी को खुली छूट कैसे दे रही है? पता नहीं इसके दिमाग में क्या खिचड़ी पक रही है?

प्रिय पाठको और पाठिकाओ! आप सभी तो बहुत ही अनुभवी और गुणी हैं आपको क्या लगता है मधुर के ऐसा करने के पीछे कोई प्लान या साज़िश तो नहीं? कहीं वह मेरी परीक्षा तो नहीं ले रही? मुझे कामिनी के साथ अपने सम्बन्धों को आगे विस्तार देना चाहिए या यहीं विराम दे देना चाहिए? मैं आपकी अनमोल राय का मुन्तजिर और आभारी रहूंगा।

कामिनी ने अपने कपड़े बदल लिए थे अब वह छोटी वाली निक्कर और सफ़ेद रंग का स्लीवलेस टॉप (जिसपर फूलों वाली डिजाईन बनी थी) पहन कर आ गई।

हे भगवान् … पतली कमर में बंधे निक्कर के ऊपर गोल गहरी नाभि तो किसी योगी की तपस्या भी भंग कर दे। उसने अपने बालों की दो चोटी बना रखी थी और इन शॉर्ट्स में तो वह टेनिस की खिलाड़ी जैसी लग रही थी।
 
आप सोच सकते हैं मुझे उस समय सिमरन की कितनी याद आयी होगी? पुष्ट और गुलाबी रंग की मादक जांघें देखकर तो मेरा पप्पू उछलने ही लगा। मैं तो उसे अपलक देखता ही रह गया। मेरे मुंह से ‘वाओ’ निकलते-निकलते बचा।

उसने अपनी 2-3 किताबें और कापियां अपनी छाती से चिपका रखी थी। साली इन किताबों की किस्मत भी कितनी बढ़िया है, कामिनी की छाती से चिपकी हुई हैं। कामिनी अपनी कॉपी-किताबें टेबल पर रखकर वहीं खड़ी हो गई।

“ब… बैठो कामिनी! और अब यह बताओ तुम्हें अंग्रेजी में क्या-क्या आता है?”

“एत मिनट लुतो?” (एक मिनट रुको)

और फिर कामिनी झुककर मेरे पैरों को छूने की कोशिश करने लगी। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि कामिनी ये क्या कर रही है? मैं तो उसके कुंवारे बदन और स्लीवलेस टॉप में उसकी रोम विहीन कांख से आती मदहोश करने वाली खुशबू में ही खोया था। याल्लाह… अगर कांख इतनी कोमल और साफ़ सुथरी है तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इसने अपनी बुर (सॉरी… सु-सु) को कितनी चिकनी चमेली बनाया होगा?

मेरा ख्याल है उसने अपनी केशर क्यारी को रेज़र या हेयर रिमूविंग (बालसफा) क्रीम के बजाय वैक्सिंग से साफ़ किया होगा। अब तो उसके पपोटे मोटे-मोटे और गुलाबी नज़र आने लगे होंगे और दोनों पपोटों के बीच की दरार (झिर्री) तो कामरस में भीगी होगी। हे भगवान् उसके पपोटों को अगर थोड़ा सा खोल कर उसकी झिर्री पर जीभ फिराई जाए तो जन्नत यहीं यही उतर आये।

बस इन मुंहासों को ठीक करने वाला मेरा आईडिया उसे जम जाए तो अब मंजिले मक़सूद ज्यादा दूर नहीं रहेगी। हे लिंग देव ! अब इस वीर्य पान वाले सोपान को निर्विघ्न पूरा करवा देना अब अंतिम समय में लौड़े मत लगा देना प्लीज…!!!

“आप मुझे आशिल्वाद दो?”

“ओह… हाँ…” कामिनी की आवाज सुनकर मैं अपने ख्यालों से वापस आया।

मैंने कहा- सदा प्रसन्न रहो और तुम्हारे मुंहासे जल्दी ठीक हो जाए।

मुझे लगा कामिनी मुंहासे ठीक होने के लिए आशीर्वाद मांग रही है।

“अले… नहीं… अच्छी पढ़ाई ता आशिल्वाद?”

“ओह.. हाँ …” पता नहीं आजकल मेरा तो जैसे दिमाग ही काम नहीं करता मैं तो सुबह से इसके मुंहासों का इलाज करने के बारे में बहुत ही गंभीरता पूर्वक विचार किये जा रहा था।

“खूब पढ़ो। मेरा आशीर्वाद और प्रेम सदा तुम्हारे साथ रहेगा। मैं आज से तुम्हें अपनी प्रिय शिष्या के रूप में स्वीकार करता हूँ। कबूल है, कबूल है, कबूल है।”

अब हम दोनों ही हंसने लगे। कामिनी मेरे दोनों पैर छूकर अपना हाथ अपने सिर पर लगाया और सोफे पर बैठ गई।

“कामिनी तुमने तो कबूल है बोला ही नहीं?”

“हां… तबूल है.” कामिनी ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखकर कहा।

“तीन बार बोलो.” मैंने हंसते हुए उसे टोका।

“ऐसा तो शादी में बोला जाता है?” कहते हुए कामिनी रहस्यमई ढंग से मुस्कुराई और फिर उसने बड़ी अदा से (सलाम बजाने के अंदाज़ में) तीन बार ‘कबूल है’ कहा।

“देखो तुमने मुझे गुरु स्वीकार किया है अब मेरी हर बात और आज्ञा तुम्हें माननी पड़ेगी और कुछ बताने में शर्म भी छोड़नी पड़ेगी.”

“हओ… ठीत है गुलुजी।” कामिनी ने हंसते हुए कहा।

“कामिनी एक काम तो आज से करो?”

“त्या?”

“एक तो ‘हओ’ और ‘किच्च’ की जगह अब ‘यस’ और ‘नो’ बोलना शुरू करो। और अंग्रेजी के छोटे-छोटे वाक्य बोलना शुरू करो जैसे थैंक यू, सॉरी, प्लीज, ओके, वेलकम, स्योअर … आदि।”

“हओ… सोल्ली… इ..यस” कामिनी के मुंह से फिर हओ निकल गया।

“शुरू-शुरू में थोड़ा गड़बड़ होगा पर धीरे धीरे तुम्हें अंग्रेजी आने लगेगी। अब यस सर बोलो?” मैंने हंसते हुए कहा।

“यस सल” इस बार कामिनी ने पूरे विश्वास के साथ बोला।

“अच्छा अब बताओ तुम्हें अंग्रेजी में क्या-क्या आता है?”

“मुझे तल्लस (कलर्स), वेजिटेबल ओल दिनों ते नेम, थ्लस्टी त्रो ती स्टोली, माय फ्लेंड ओल दिवाली का एस्से भी याद है ओल लीव एप्लीतेशन भी आती है।”

“अरे वाह … तुम्हें तो बहुत कुछ आने लगा है।”

“सब दीदी … सोल्ली मैडम ने पढ़ाया है? मुझे बस मीनिंग याद नहीं लहते।”

“कामिनी, तुम्हें पार्ट्स ऑफ़ बॉडीज के नाम आते हैं क्या?”

“यस … आपतो सुनाऊं?”

“हाँ… हाँ सुनाओ.”

“नोज, टीथ, हैण्ड, फिन्गल, लिप्स, चिन, हेड, लेग, इअल, आइज, एब्डोमेन साले याद हैं.” कामिनी ने अपनी अंगुली इन सभी अंगों पर लगाते हुए बताया।

बाकी सब तो ठीक था पर साली ने चूत, गांड, बोबे और नितम्बों के नाम नहीं बताये।

“वाह… बहुत बढ़िया!”

“अच्छा… घुटनों को क्या कहते हैं?”

“नीज”

“और… जीभ को?”

“टोंग”

“अंगूठे को?”

“हाथ वाले तो थंब ओल पैल वाले तो टो बोलते हैं।”
 
“वाह … शाबास तुम्हें तो सारे याद हैं. कामिनी अगर तुम शरमाओ नहीं तो एक-दो मीनिंग और पूछूं?”

“हम?” उसने मेरी ओर आश्चर्य मिश्रित मुस्कान के साथ देखा।

“वो… दूद्दू को क्या बोलते हैं?”

“मिल्त” (मिल्क)

“अरे उस मिल्क की नहीं मैं तुम्हारे वाले दूद्दू की बात कर रहा हूँ?”

“ओह…” कामिनी ने अपने दुद्दुओं को देखते हुए थोड़ा शर्माते हुए जवाब दिया- इनतो ब्लेस्ट बोलते हैं।

“हम्म… और प्राइवेट पार्ट को क्या बोलते हैं?”

कामिनी कुछ सोचने लगी थी। मुझे लगा इस बार वह ‘हट’ बोलते हुए जरूर शर्मा जायेगी।

“प्लाइवेट पाल्ट तो प्लाइवेट पाल्ट ही होता है?” उसने बिना झिझके जवाब दिया।

“अरे नहीं … स्त्री के प्राइवेट पार्ट को वजिना और पुरुष के प्राइवेट पार्ट को पेनिस बोलते हैं।”

“पल… मैडम ने यही समझाया था?”

“ओके…”

“तल मैडम ने मुझे 20 मीनिंग याद तरने दिए थे?”

“फिर?”

“मैंने याद तल लिए.”

“अरे वाह… तुम सब काम मन लगाकर करती हो ना इसीलिए जल्दी याद हो जाते हैं।”

कामिनी अपनी बड़ाई सुनकर मंद-मंद मुस्कुने लगी थी।

“कामिनी मैं आज तुम्हें सेल्फ इंट्रोडक्शन देना सिखाता हूँ?”

“सेल्फ… इंट्लो…” शायद कामिनी को समझ नहीं आया था।

“सेल्फ इंट्रोडक्शन माने अपने बारे में किसी को बताना?”

“ओके”

और फिर मैंने उसे अगले आधे घंटे तक सेल्फ इंट्रोडक्शन के बारे में 8-10 वाक्य अंग्रेजी में रटा दिए। कामिनी अभी भी आँखें बंद किये मेरे बताये वाक्यों को रट्टा लगा रही थी। मेरी निगाहें बार-बार उसकी जाँघों के संधि स्थल के उभरे हुए भाग चली जा रही थी। एक-दो बार कामिनी ने भी इसे नोटिस तो किया पर वह अपनी पढ़ाई में लगी रही।

उसकी जांघें इतनी चिकनी और गोरी थी कि उन पर नीले से रंग की हल्की-हल्की शिरायें सी नज़र आ रही थी। और घुटनों के ऊपर का भाग तो मक्खन जैसा लग रहा था। आज उसने जो फूलों वाली डिजाईन का स्लीवलेस टॉप पहना था वह पीछे से डोरी से बंधा था। उसमें कसे हुए उरोज किसी हठी बच्चे की मानिंद लग रहे थे जैसे जिद कर रहे हों हमें आजाद कर दो। जब वह पढ़ते समय थोड़ा झुकती है तो कई बार उसके नन्हे परिंदे अपनी गर्दन बाहर निकालने की कोशिश में लगे दिखते हैं।

मैंने एक बात नोटिस की है। आजकल कामिनी ब्रा और पैंटी नहीं पहनती है। हो सकता है मधुर ने रात में सोते समय ब्रा पैंटी पहनने के लिए मना किया हो पर कामिनी तो आजकल दिन में भी इन्हें कहाँ पहनती है। कच्छीनुमा निक्कर में इसके नितम्ब इतने कसे हुए लगते हैं कि किक मारने का मन करने लगता है।
 
अब तक लगभग 11 बज गए थे। कामिनी को भी उबासी (जम्हाई) सी आने लगी थी। अब आज के सबक की एक और आहुति देनी बाकी थी।

“अरे कामिनी!”

“यस?”

“एक बात तो बताओ?”

“त्या?”

“वो तुमने अपने मुंहासों का कोई इलाज़ किया या नहीं?”

“किच्च… नहीं” कामिनी ने एक बार मेरी ओर देखा फिर अपनी मुंडी झुका ली।

“कोई दिक्कत?”

“मेली तिस्मत ही खलाब है?”

“क्यों? ऐसा क्या हुआ है?”

“वो आपने जो बताया मैं खां से लाऊँ?”

“ओह… कामिनी यार अजीब समस्या है?”

कामिनी ने प्रश्नवाचक निगाहों से मेरी ओर देखा।

“यार मैं तुम्हारी हेल्प तो कर सकता हूँ… पर…”

“पल… त्या?” कामिनी ने मेरी ओर आशा भरी नज़रों से ताका।

“अब पता नहीं तुम मुझे गलत ना समझ लो?” मैंने जानबूझ कर बात अधूरी छोड़ दी।

“नहीं … आप बोलो?”

“कामिनी तुम कल बाकी चीजों का इंतजाम कर लेना फिर मैं उस 8वीं चीज के लिए कुछ करता हूँ।”

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था। पता नहीं क्यों कामिनी से सीधे नज़रें मिलाने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। क्या पता कामिनी क्या सोच रही होगी या क्या प्रतिक्रिया करेगी.

“हओ”

“अच्छा कामिनी! सवा ग्यारह हो गए हैं अब बाकी कल पढ़ेंगे। आज जो पढ़ाया उसे दिन में अच्छे से याद कर लेना।”

“ओके सल … गुड नाईट.”

“ओके डीअर शुभ रात्रि.”

हे लिंग देव तेरी जय हो। मैं तो इस सावन में सोमवार के बाकी बचे सभी व्रत बड़ी ही श्रद्धापूर्वक करूंगा और तुम कहोगे तो भादों महीने में भी व्रत रख लूंगा बस… तुम अपनी कृपा दृष्टि मेरे और इस तोतापरी के ऊपर इसी प्रकार बनाए रखना।

प्रिय पाठको और पाठिकाओ! आइए अब लिंग दर्शन और चूसन के इस सोपान की अंतिम आहुति डालते हैं…

आज सुबह-सुबह मधुर ने नया फरमान जारी कर दिया। आज प्रेम आश्रम में हरियाली तीज महोत्सव मनाया जाने वाला है तो हमारी हनी डार्लिंग (मधुर) अपनी सभी सहेलियों के साथ आश्रम में जाने वाली है।

मधुर ने लाल रंग की सांगानेरी प्रिंट की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहना है और कलाइयों में लाल रंग की चूड़ियाँ। हाथों में मेहंदी, पैरों पर महावर, मांग में सिन्दूर और होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक लगाई है।

लगभग 8 बजे सभी सहेलियां आश्रम जाने वाली हैं। स्कूल से आज उसने छुट्टी ले रखी है। आज का पूरा दिन आश्रम में बिताने वाली है। मधुर ने बताया कि वहाँ सभी सुहागन स्त्रियाँ हरियाली तीज महोत्सव मनाएंगी जिसमें मेहंदी प्रतियोगिता और गुरूजी के साथ झूला झूलने की प्रतियोगिता होगी। मुझे तो कई बार डर भी लगता है। आजकल इन बाबाओं के दिन खराब चल रहे हैं। किसी दिन साले किसी बाबा ने सच में झूला झुला दिया तो फिर मेरा क्या होगा? हे लिंग देव! कृपा करना।

मधुर के आश्रम कूच करने के बाद कामिनी ने मेन गेट बंद कर दिया और रसोई में चाय बनाने चली गई और मैं हाल में सोफे पर बैठा अखबार पढ़ने लगा।
 
थोड़ी देर में कामिनी चाय बनाकर ले आई। जब वह थर्मोस से गिलास में चाय डालने लगी तो मैंने कहा- कामिनी, मुझे लगता है यह जिन्दगी तो चाय या कॉफ़ी में बीत जायेगी.

और फिर मैं अपनी बात पर हंसने लगा।

“वो तैसे?” कामिनी ने आँखें नचाते हुए पूछा।

“अरे यार! क्या जिन्दगी है? सारे दिन भाग दौड़ और ऑफिस की मगजमारी? किसी के पास मेरे लिए समय ही नहीं है और ना ही कोई परवाह।”

“हम्म”

“जी में आता है मधुर और तुम्हें लेकर किसी हिल स्टेशन पर जाकर बस जाऊं.”

“ना बाबा ना … वहाँ तो बड़ी बालिश होती है.” कामिनी ने हंसते हुए कहा।

“तो क्या हुआ रोज बारिश में खूब नहाया करेंगे. तुम्हें बारिश में नहाना अच्छा नहीं लगता है क्या?”

“बचपन के दिनों में जब बालिश होती थी तो मैं मोहल्ले के सभी बच्चों के साथ खूब नहाया कलती थी।” कह कर कामिनी हंसने लगी।

“पता है मुझे भी बचपन में बारिश में नंगे होकर नहाने में बड़ा मज़ा आता था और सारे बच्चे कपड़े भीगने के डर से नंगे होकर नहाते थे ताकि घरवाले नाराज़ ना हों।”

कामिनी अब खिलखिला कर हंसने लगी।

“अच्छा कामिनी तुम भी सारे कपड़े निकाल कर नहाती थी क्या?”

“हट …” कामिनी शर्मा गई।

“काश मैं भी उस समय तुम्हें नंगी नहाते देख सकता!”

“हट… ऐसी बातों से मुझे बहुत शल्म आती है।”

“कामिनी पता है कई बार मैं क्या सोचता हूँ?”

“त्या?”

“मैं मरने के बाद अगले जन्म में मक्खी, मच्छर या कोक्रोच ही बन जाऊं?”

“आप मलने ती बात त्यों तलते हैं?”

“अरे यार, तुम्हारे लिए तो मैं सौ जन्म भी ले लूं?”

“तैसे? त्यों? मैं समझी नहीं?”

“अरे बड़ा मज़ा आएगा?”

“इसमें मज़े वाली त्या बात है?”

“हाय… तुम क्या जानो?”

“अच्छा आप बताओ?”

“मक्खी या मच्छर बनकर मैं बाथरूम में छिपकर बैठ जाऊंगा और मर्जी आये उसी खूबसूरत लड़की को नहाते समय मज़े ले-ले कर देखता रहूँगा? आह… तुम नहाते समय कितनी खूबसूरत लगती होगी?”

“हट!”

“सच्ची … कामिनी मैं सच कहता हूँ तुम बहुत खूबसूरत हो।”

कामिनी शरमाकर एक बार फिर से लाजवंती बन गई। अब वह छिपाने की चाहे लाख कोशिश करे पर उसकी झुकी हुई मुंडी और मंद-मंद मुस्कान से साफ़ पता चलता है कि वह इस समय वह रूपगर्विता बनकर अपने आप को बड़ी खुशनशीब समझ रही है।

“अरे कामिनी?”

“हओ?”

“ये तुम्हारे मुंहासे तो बढ़ते ही जा रहे हैं?”

“हओ… मेली तिस्मत खलाब है। पता है आजतल इन मुंहासों ती चिंता में मुझे लात को नींद ही नहीं आती.” कामिनी की शक्ल रोने जैसी हो गयी थी।

“हाँ… यार यह बात तो सच है। अगर चेहरा खराब हो गया तो बड़ी परेशानी होगी। अब देखो ना गुप्ताजी की लड़की का कितनी मुश्किल के बाद अब जाकर रिश्ता हुआ है और वो भी 40-45 साल का बुढ़ऊ के साथ।” मैंने जानकार कामिनी को थोड़ा और डराया।

“हे भगवान्…” कामिनी ने आह सी भरी।

मुझे लगा कामिनी अब सुबकने लगेगी।

“अच्छा कामिनी?”

“हओ?”

“तुमने वो बाकी चीजों का जुगाड़ किया या नहीं?”

“गुलाब ती पत्तियाँ, शहद, दूध ओल हल्दी ही मिली.”

“और बाकी चीजें?”

“किच्च… नहीं मिली?”

“ओह…?” मैंने एक लम्बी सांस छोड़ते हुए कहा।

“कामिनी ये लेप वाला भी झमेले का काम है। एक काम तो हो सकता है पर …” मैंने अपनी बात जानबूझ कर अधूरी छोड़ दी।

“पल… त्या?” कामिनी ने कातर दृष्टि से मेरी ओर ताका।

“तुम से नहीं हो पायेगा.”

“आप बताओ… प्लीज?”

“शरमाओगी तो नहीं?”

“किच्च?”

“ओ.के. … चलो एक काम करो वो शहद, कच्चा दूध और गुलाब की पत्तियाँ आदि जो भी मिला वो सब एक कटोरी में डाल कर लाओ फिर कुछ करते हैं।”
 
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