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Guest
मेरा मन तो उसे जोर से अपनी बांहों भरकर चूम लेने को करने लगा। पर इससे पहले कि मैं ऐसा कर पाता कामिनी मुँह में दुपट्टा दबाकर रसोई में भाग गई। उसे शायद अब अहसास हुआ कि वो अनजाने में क्या बोल गई है।
मैं उसके पीछे रसोई में चला आया। शर्म के मारे उसने अपना सर झुका रखा था। उसके चहरे का रंग लाल सा हो गया था और साँसें तेज चलने लगी थी।
“अरे क्या हुआ?”
“किच्च …” उसने ना करने के अंदाज़ में अपनी मुंडी हिलाते हुए अपने मुंह से आवाज निकाली।
“तो फिर रसोई में क्यों भाग आई?”
“वो … वो … आप बाहल बैठो, मैं नाश्ता बना तल लाती हूँ”
“कामिनी यह तो गलत बात है?”
“त्या?”
“एक तो तुम बात-बात में शर्माती बहुत हो?”
कामिनी ने अपनी निगाहें अब भी झुका रखी थी।
“आओ हॉल में बैठ कर सैंडविच के लिए तैयारी मिलकर करते हैं तुम सारा सामान लेकर हॉल में आ जाओ.”
“हओ”
थोड़ी देर बाद कामिनी ट्रे में ब्रेड, प्याज, हरि मिर्च, धनिया, उबले आलू आदि लेकर हॉल में आ गई। उसने सामान टेबल पर रख दिया और स्टूल पर बैठ गई। मुझे लगा कामिनी कुछ गंभीर सी लग रही है। मैं चाहता था वो सामान्य हो जाए। इसके लिए उसके साथ कुछ सामान्य बातें करना जरुरी था।
मैंने बातों का सिलसिला शुरू किया- कामिनी एक काम कर?
“हओ?”
“मैं प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और धनिया काट देता हूँ और तुम जल्दी से आलू छील लो.”
“हओ.”
हम दोनों अपने काम में लग गए।
साला ये प्याज काटना भी सब के बस के बात नहीं। जैसे सभी औरतें छिपकली से डरती हैं उसी तरह ज्यादातर आदमी प्याज काटने से डरते हैं। मैंने पहले 3-4 हरी मिर्च काटी और फिर प्याज छीलकर काटने लगा। ऐसा करते समय गलती से मेरा हाथ आँख के पास लग गया।
लग गए लौड़े!
एक तो प्याज की तीखी गंध और ऊपर से हरी मिर्च? थोड़ी जलन सी होने लगी और आँखों में आंसू भी निकल आये। मेरी नाक से सुं-सुं की आवाज निकलने लगी।
“ओहो … क्या मुसीबत है?” मैंने रुमाल से अपनी नाक साफ़ करते हुए कहा.
अब कामिनी का ध्यान मेरी ओर गया। उसे हँसते हुए मेरी ओर देखा।
“मैंने आपतो बोला था मैं तर लूंगी आप मानते ही नहीं?”
“ओहो … मुझे क्या पता था प्याज काटना इतना मुश्किल काम है? मैंने 2-3 बार फिर नाक से सुं-सुं किया। आँखों और नाक से पानी अब भी निकल रहा था।
“आप जल्दी से हाथ धोकल ठन्डे पानी ते छींटे मालो”
“ओह … हाँ … मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और फिर अंदाजे से वाश बेसिन की ओर जाने लगा।
इतने में मैं पास रखी स्टूल से टकराते-टकराते बचा। कामिनी सब देख रही थी। वह उठी और मेरा बाजू पकड़ कर वाश बेसिन की ओर ले जाने लगी। मैंने अपनी आँखें बंद ही रखी। उसकी कोमल कलाइयों का स्पर्श मुझे रोमांचित किये जा रहा था। आज पहली बार उसमें मुझे छुआ था।
“आप जल्दी से साबुन से हाथ धोओ मैं, ठन्डे पानी ती बोतल लाती हूँ.” कहकर कामिनी रसोई की ओर भागी।
मैं गूंगे लंड की तरह वहीं खड़ा रहा।
इतने में कामिनी ठन्डे पानी की बोतल लेकर आ गई।
“अले आपने हाथ धोये नहीं?”
“मेरी तो आँखें ही नहीं खुल रही हाथ कैसे धोऊँ?”
“ओहो … आप लुको” कहकर उसने एक हाथ से मेरी मुंडी थोड़ी नीचे की और फिर बोतल से ठंडा पानी हाथ में लेकर मेरी आँखों और चहरे पर डालने लगी।
मैं उसके पीछे रसोई में चला आया। शर्म के मारे उसने अपना सर झुका रखा था। उसके चहरे का रंग लाल सा हो गया था और साँसें तेज चलने लगी थी।
“अरे क्या हुआ?”
“किच्च …” उसने ना करने के अंदाज़ में अपनी मुंडी हिलाते हुए अपने मुंह से आवाज निकाली।
“तो फिर रसोई में क्यों भाग आई?”
“वो … वो … आप बाहल बैठो, मैं नाश्ता बना तल लाती हूँ”
“कामिनी यह तो गलत बात है?”
“त्या?”
“एक तो तुम बात-बात में शर्माती बहुत हो?”
कामिनी ने अपनी निगाहें अब भी झुका रखी थी।
“आओ हॉल में बैठ कर सैंडविच के लिए तैयारी मिलकर करते हैं तुम सारा सामान लेकर हॉल में आ जाओ.”
“हओ”
थोड़ी देर बाद कामिनी ट्रे में ब्रेड, प्याज, हरि मिर्च, धनिया, उबले आलू आदि लेकर हॉल में आ गई। उसने सामान टेबल पर रख दिया और स्टूल पर बैठ गई। मुझे लगा कामिनी कुछ गंभीर सी लग रही है। मैं चाहता था वो सामान्य हो जाए। इसके लिए उसके साथ कुछ सामान्य बातें करना जरुरी था।
मैंने बातों का सिलसिला शुरू किया- कामिनी एक काम कर?
“हओ?”
“मैं प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और धनिया काट देता हूँ और तुम जल्दी से आलू छील लो.”
“हओ.”
हम दोनों अपने काम में लग गए।
साला ये प्याज काटना भी सब के बस के बात नहीं। जैसे सभी औरतें छिपकली से डरती हैं उसी तरह ज्यादातर आदमी प्याज काटने से डरते हैं। मैंने पहले 3-4 हरी मिर्च काटी और फिर प्याज छीलकर काटने लगा। ऐसा करते समय गलती से मेरा हाथ आँख के पास लग गया।
लग गए लौड़े!
एक तो प्याज की तीखी गंध और ऊपर से हरी मिर्च? थोड़ी जलन सी होने लगी और आँखों में आंसू भी निकल आये। मेरी नाक से सुं-सुं की आवाज निकलने लगी।
“ओहो … क्या मुसीबत है?” मैंने रुमाल से अपनी नाक साफ़ करते हुए कहा.
अब कामिनी का ध्यान मेरी ओर गया। उसे हँसते हुए मेरी ओर देखा।
“मैंने आपतो बोला था मैं तर लूंगी आप मानते ही नहीं?”
“ओहो … मुझे क्या पता था प्याज काटना इतना मुश्किल काम है? मैंने 2-3 बार फिर नाक से सुं-सुं किया। आँखों और नाक से पानी अब भी निकल रहा था।
“आप जल्दी से हाथ धोकल ठन्डे पानी ते छींटे मालो”
“ओह … हाँ … मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और फिर अंदाजे से वाश बेसिन की ओर जाने लगा।
इतने में मैं पास रखी स्टूल से टकराते-टकराते बचा। कामिनी सब देख रही थी। वह उठी और मेरा बाजू पकड़ कर वाश बेसिन की ओर ले जाने लगी। मैंने अपनी आँखें बंद ही रखी। उसकी कोमल कलाइयों का स्पर्श मुझे रोमांचित किये जा रहा था। आज पहली बार उसमें मुझे छुआ था।
“आप जल्दी से साबुन से हाथ धोओ मैं, ठन्डे पानी ती बोतल लाती हूँ.” कहकर कामिनी रसोई की ओर भागी।
मैं गूंगे लंड की तरह वहीं खड़ा रहा।
इतने में कामिनी ठन्डे पानी की बोतल लेकर आ गई।
“अले आपने हाथ धोये नहीं?”
“मेरी तो आँखें ही नहीं खुल रही हाथ कैसे धोऊँ?”
“ओहो … आप लुको” कहकर उसने एक हाथ से मेरी मुंडी थोड़ी नीचे की और फिर बोतल से ठंडा पानी हाथ में लेकर मेरी आँखों और चहरे पर डालने लगी।