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Adultery यौवन का शिकारी

“आहह अभिषेक सीईइ” मेने अपनी अध खुली आँखो से अभिषेक और प्राजक्ता की ओर देखते हुए सिसकारी भरी…अभिषेक ने प्राजक्ता के होंठो से अपने होंठो को अलग किया, और फिर मेरे ऊपर झुकते हुए, मेरे स्लीव्लेस्स नाइटी के स्ट्रॅप को पकड़ कर कंधो से नीचे सरकाना शुरू कर दिया. मेने उसे रोकने की कोशिश की, पर उसके आगे मेरी एक ना चली, जैसे ही मेने उसके हाथो को पकड़ कर रोकना चाहा.

उसने अपने लिंग को दो तीन बार पूरी तेज़ी से मेरी योनि के अंदर बाहर कर दिया……मेरे पूरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया…..और मेरी पकड़ अभिषेक के हाथो पर ढीली हो गयी. और उसका फ़ायदा उठाते हुए, उसने मेरी नाइटी के स्ट्रॅप्स को मेरे कंधो से नीचे सरका कर , मेरी बाहों से बाहर निकालते हुए, नीचे खेंच दिया.

मेरे स्तन अब नाइटी की क़ैद से बाहर आ गयी थी…..जो मेरे तेज़ी से साँस लेने से ऊपर नीचे हो रही थी…..फिर अभिषेक ने झुकते हुए, मेरे हाथो को पकड़ कर बेडशीट से टिका दिया. और मेरी एक स्तन मूह मे भर कर चूसने लगा. उसने मेरे दोनो हाथो को पकड़ कर मेरे सर के दोनो तरफ बिस्तर पर दबाया हुआ था……मेरी आँखे मस्ती में बंद होने लगी……

तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया……मुझे मेरे दूसरे स्तनाग्र पर मुझे कुछ गरम और नरम सा अहसास हुआ. मेने अपनी आँखो को ज़ोर लगा कर खोल कर देखा, तो में एक दम से हैरान रह गयी…..मेरे एक स्तन को अभिषेक चूस रहा था. और दूसरे स्तन को प्राजक्ता अपने मूह मे भर कर चूस रही थी….मेरे पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और साथ ही शरमसार भी हुए जा रही थी. मेरी योनि और ज़्यादा पानी छोड़ने लगी……नीचे अभिषेक के धक्के और तेज हो गये. वो अपने लिंग को पूरा बाहर निकाल निकाल कर मेरी योनि मे पेल रहा था.

अब मुझसे भी बरदाश्त से बाहर होता चला जा रहा था. मेरी योनि की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि, मेने खुद ही अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछालना शुरू कर दिया……मेरी इस हरक़त को देख प्राजक्ता ने अपना मूह मेरी स्तनाग्र से हटा लिया. और फिर मेरी योनि की तरफ देखने लगी. जिसमे अभिषेक का लंबा मोटा लिंग बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था….”आह धीरे आह अहह उंह “

अभिषेक: ले साली और ले…….देख तुझे तेरे बेटी के सामने ठोक रहा हूँ. देख प्राजक्ता तेरी माँ की योनि कितनी गरम है. देख कैसे पानी छोड़ रही है….

अभिषेक ने अपना लिंग मेरी योनि से बाहर निकाल कर दिखाते हुए कहा. उसका लिंग मेरी योनि के पानी के कारण ट्यूब लाइट की रोशनी मे चमक रहा था. उसका झटके ख़ाता हुआ लिंग आज और ज़्यादा विकराल लग रहा था.

फिर प्राजक्ता ने वो क्या जिसके बारे में मेने सोचा भी नही था. अभिषेक ने प्राजक्ता की गर्दन के पीछे एक हाथ डाल कर उसे अपने लिंग पर झुका लिया. जो मेरी योनि के ठीक ऊपर झटके खा रहा था. और मेरे देखते ही देखते. प्राजक्ता ने अपने मूह को खोल कर अभिषेक के लिंग के बड़े और मोटे लाल सुपाडे को अपने होंठो में कस लिया.”आह” अभिषेक भी सिसक उठा….उसने अपने दोनो हाथों से प्राजक्ता के सर को पकड़ कर अपनी कमर को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.

प्राजक्ता भी अभिषेक के लिंग आधे से ज़्यादा निगलते हुए चूस रही थी….उसका एक हाथ मेरे पेट के ऊपर था. और दूसरा हाथ उसने बेड पर टिका रखा था.

“पुच पबब्ब पबब्ब की आवाज़ें प्राजक्ता के मूह से निकल रही थी….फिर थोड़ी देर बाद प्राजक्ता ने लिंग को मूह से बाहर निकाला. और फिर हाथ से पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी. और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली. “मम्मी ये तुम्हारी बेटी की तरफ से तुम्हारे लिए तोहफा है” और फिर उसने हाथ से अभिषेक के लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया…..

में भी अपनी योनि की फांको को अपने हाथो से फेलाते हुए, उसे अपनी योनि का गुलाबी छेद दिखाया. और अभिषेक का लिंग एक बार फिर से मेरी योनि के छेद पर था. “अह्ह्ह्ह प्राजक्ता बेटा मुझी ये गिफ्त बहुत पसंद है….अहह अह्ह्ह्ह धीरे अभिषेक आह मर गयी. मेरी योनी अह्ह्ह्ह” अभिषेक ने फिर से अपना पिस्टन चलाना शुरू कर दिया था…..उसके हर झटके के साथ ठप ठप की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी…..

तभी मुझे अपने ऊपर कुछ महसूस हुआ. मेने मस्ती में सिसकते हुए अपनी आँखो को खोल कर देखा तो, प्राजक्ता मेरे ऊपर थी. उसके दोनो पैर मेरी कमर के दोनो तरफ थे. और वो बिलकुल डॉगी स्टाइल मे मेरे ऊपर थी…..”माँ मुझे भी तुमसे गिफ्ट चाहिए “ प्राजक्ता ने मेरी अध खुली आँखो में झाँकते हुए कहा.

पर मैं कुछ बोल नही पा रही थी…उसने मेरे कोई जवाब देने से पहले ही, अपने होंठो को मेरे होंठो की तरफ बढ़ा दिया. “आह नही” मेने अपनी योनि मे महसूस हो रहे धक्को से सिसकते हुए कहा, और अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लया.

अभिषेक और ज़ोर से अपना लिंग बाहर निकाल निकाल कर अंदर पेलने लगा था. उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल रहा था. उसके बॉल्स मेरी नितंब के छेद पर टकरा रहे थे. “उम्मह सीईईई अभिषेक आह धीरे आह” फिर प्राजक्ता ने मेरे फेस को अपने हाथो में पकड़ कर जबरन अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया.

मेने शरम के मारे अपने होंठो को आपस मे भींच लिया. पर अभिषेक के लिंग के झटके अब मेरी योनि में इतने तेज हो गये थे कि, मुझे अपने होंठो को खोलना पड़ा. जैसे ही मेने अपने होंठो को खोला, प्राजक्ता ने अपनी जीभ मेरे मूह मे घुसा दी. उसकी जीभ मेरे मूह के हर कोने में घूम रही थी.

उसके दोनो हाथ मेरे स्तनों पर थे. जिसे वो दबा दबा कर खेंच रही थी. फिर उसने मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया. अब मेरे भी बरदाश्त से बाहर होता जा रहा था. मेने मन में सोच लिया था कि, अगर मेरे बेटी मुझसे इस तरह बेशर्मी से पेश आ सकती है, तो में क्यों पीछे रहूं.

मेने भी प्राजक्ता का साथ देना शुरू कर दिया. कभी वो मेरे होंठो को चुस्ती, तो कभी मैं उसके होंठो को चुस्ती………”आहह सालियो मुझे भूल गयी क्या ?” अभिषेक ने नीचे से मेरी योनि में अपना लिंग पेलते हुआ कहा. और फिर उसने एक ज़ोर दार थप्पड़ प्राजक्ता की नितंब पर मारा.

जिसकी आवाज़ मुझे साफ सुनाई दी, और फिर प्राजक्ता के सिसकने की आवाज़ आई. मेने देखा, प्राजक्ता मेरे ऊपर से उठ कर फिर से अभिषेक के पास जाकर घुटनो के बल बैठ गयी. अभिषेक ने अपने लिंग को मेरी योनि से बाहर निकाला, और प्राजक्ता की तरफ देखने लगा. प्राजक्ता ने अभिषेक को लिंग को हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.

अभिषेक का लिंग मेरी योनि के कामरस से पूरी तरहा भीगा हुआ था. प्राजक्ता उसके लिंग को हिलाते हुए धीरे धीरे नीचे झुकने लगी. उसके होंठो और मेरी योनि के बीच सिर्फ़ थोड़ा ही फाँसला ही रह गया था. और योनि के ठीक सामने अभिषेक का लिंग था. उसने झुकते हुए अभिषेक के लिंग को मूह में भर लिया.

और जोर जोर से सर हिलाते हुए, अभिषेक के लिंग को चूसने लगी. में ये सब देख कर और गरम हुई जा रही थी…..अभिषेक ने मेरी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाया,और मेरी जाँघो को ज़ोर से पकड़ लाया. फिर उसने एक हाथ से प्राजक्ता के बालों को पकड़ा और उसका सर पीछे खेंचते हुए, अपने लिंग को उसके मूह से बाहर निकल लिया. फिर उसने प्राजक्ता के बालो को पकड़े हुए, उसके फेस को मेरी योनि की तरफ बढ़ा दिया. अगले ही पल उसने प्राजक्ता के बालो को छोड़ कर मेरी टाँगो को पकड़ कर और फैला दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती, प्राजक्ता ने अपनी जीभ को नॉकदार बनाते हुए, मेरी योनि के छेद पर लगा दिया. मैं जल बिन मछली की तरह तड़प उठी. पर मैं अपने आप को छुड़ा नही पा रही थी. क्योंकि अभिषेक ने मेरी टाँगो को फेला कर ज़ोर से पकड़ रखा था……प्राजक्ता अपनी जीभ मेरी योनि के छेद पर रगड़ रही थी.

सुर्प सुर्प की आवाज़ से ऐसा लग रहा था. जैसे कि वो मेरी योनि से बह रहा सारा पानी पी जाएगी. मेरे आँखे फिर से मस्ती मे बंद हो गयी…..

मैं: अह्ह्ह्ह सोइना आहह ईए ईए क्याअ कर मत करो अह्ह्ह्ह उंह सीयी आह बेटाअ अहह हट जाअ….

मेरी मस्ती का कोई ठिकाना नही था. मेरी कमर अपने आप ही झटके खाने लगी. जिससे मेरी योनि बार बार प्राजक्ता के मूह पर दब जाती, और वो और ज़ोर से मेरी योनि की फांको को मूह में भर कर चूसने लगती…..फिर अभिषेक ने मेरी टाँगो को पकड़ और ऊपर उठा दिया. इतना ऊपर कि, मेरी नितंब बेड से ऊपर उठ गयी…और अगले ही पल प्राजक्ता ने मेरी योनि को चाटते हुए, एक तकिया मेरी नितंब के नीचे लगा दिया. मेरी योनि से निकल रहा पानी, और प्राजक्ता का थूक बहता हुआ मेरी नितंब के छेद की तरफ जा रहा था….

.जैसे ही प्राजक्ता ने मेरी नितंब के नीचे तकिया लगाया. अभिषेक ने मेरी टाँगो को छोड़ दिया. नीचे तकिया होने के कारण मेरी नितंब अब कुछ ज़यादा ही ऊपर उठ चुकी थी…….
 
प्राजक्ता अभी भी मेरी योनि को चाट रही थी. मैं मस्ती आहह ओह्ह्ह्ह बस उफ्फ किए जा रही थी….तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया. जब अभिषेक ने अपने फन्फनाते हुए लिंग का गरम सुपाडा मेरी नितंब के छेद पर लगा दिया. मेरे पूरे बदन में सनसनी दौड़ गयी……”

आह नही अभिषेक वहाँ नही प्लीज़ “ मेने सिसकते हुए कहा……एक तो अभिषेक के लिंग का गरम सुपाडा मेरी नितंब के छेद पर रगड़ खा रहा था. और ऊपर से प्राजक्ता मेरी योनि के छेद को चाट रही थी. बस सिर्फ़ कहने को मना कर रही थी…..पर मैं बिकुल भी विरोध नही कर पा रही थी…..मेरी योनि से निकला काम रस और प्राजक्ता का थूक मेरी नितंब के छेद पर आ रहा था…….जिससे मेरी नितंब का छेद नरम हो गया था. अभिषेक ने धीरे अपने लिंग के सुपाडे को मेरी नितंब के छेद पर दबाना शुरू कर दया.

ग का सुपाडा मेरी नितंब के छेद को फेलाता हुआ थोड़ा सा अंदर घुसा, मेरे पूरे बदन में दर्द की तेज लहर दौड़ गयी. मेरा पूरा बदन एक दम से ऐंठ गया. मेने अपने आप को दर्द से बचाने के लिए अपने पैरो को हिलाना शुरू कर दिया. पर अभिषेक ने मेरी टाँगो को कस के पकड़ा हुआ था. अभिषेक अपने लिंग के सुपाडे को मेरी नितंब के टाइट छेद में अंदर घुसाने लगा……में दर्द से एक दम चीख उठी.

“अहह अभिषेक मर गयी मैं छोड़ दे मुझे आह मेरी नितंब फॅट जाएगी.ओह्ह्ह अभिषेक अह्ह्ह्ह आहह माआ” अभिषेक ने अपने लिंग के सुपाडे को दबाते हुए, मेरी नितंब के छेद मे घुसा दिया था. दर्द की तेज लहर मेरे बदन में दौड़ गयी. मेरा पूरा बदन दर्द के कारण काँपने लगा……पर अभिषेक को मेरी हालत पर ज़रा भी तरस नही आया…..उसने मेरी जाँघो को पकड़ कर ऊपर उठाते हुए, मेरी स्तनों से सटा दिया. और अपनी पूरी ताक़त से एक जोरदार धक्का मारा. अभिषेक का आधा लिंग मेरी नितंब में घुस कर फँस गया…….

“हाए ओई मारा डाला हरामी अह्ह्ह्ह फाड़ दी अह्ह्ह्ह मेरीए माआ बहुत दर्द हो रहा है अहह ओह ओह्ह्ह्ह निकालो ईससीए अभिषेक मेरीई.” पर अभिषेक तो जैसे रुकने का नाम ही नही ले रहा था. उसने अपने लिंग को ही मेरी नितंब के छेद के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…..मेरी आँखे दर्द के कारण बंद हो चुकी थी….और मेरे आँसू भी निकल आए थे…..

जब मेरी आँखे बंद थी, तब पता नही कब प्राजक्ता एक बार फिर से मेरे ऊपर आ गयी……इस बार वो मेरे ऊपर ६९ की पोज़िशन मे थी. उसका फेस मेरी योनि की तरफ था. और उसकी योनि मेरे फेस के ठीक ऊपर थी….मेरी टाँगो के दरमिया बैठा, अभिषेक अपने लिंग को सुपाडे तक बाहर निकाल कर फिर से नितंब मे पेल देता. मेरी तो दर्द से जान ही निकली जा रही थी…..पर मुझे तब दर्द से थोड़ी राहत मिली, जब प्राजक्ता ने फिर से मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया.

कहाँ तो मुझे ये सोच कर ही घिन आ रही थी, कि मेरे अपनी बेटी ही, मेरी योनि को चाट रही है. और कहाँ अब मैं उसकी योनि चाटने से मस्त होने लगी थी. “आह क्या कर रही हो प्राजक्ता आह हाई मेरीए नितंबड़ अह्ह्ह्ह मत कर प्राजक्ताअ अहह आह तू तू येयी सब क्यो कर रही है अहह” पर वो तो जैसे मेरी बात ही नही सुन रही थी…..अब धीरे धीरे मेरा दर्द भी कम होने लगा. पर अभिषेक के धक्को की रफ़्तार जैसे जैसे बढ़ती दर्द भी बढ़ता…..पर थोड़ी देर बाद कम हो जाता……..अब अभिषेक पूरी रफ़्तार से अपने मुन्सल लिंग को मेरी नितंब के छेद के अंदर बाहर कर रहा था…..

“अहह क्या टाइट नितंब है साली अहह मेरा लिंग पिघल जाएगाअ अह्ह्ह ले मेरीई रानी मैं आयाअ अहह” अभिषेक झड़ने के करीब था….लेकिन इससे पहले कि अभिषेक झाड़ता. प्राजक्ता बोल पड़ी……”नही अभिषेक मुझे तुम्हारा पानी पीना है… प्लीज़ कम ऑन माइ फेस”

अभिषेक: आहह हां ले नाआ आ जल्दी आ…….

अभिषेक की बात सुनते ही प्राजक्ता मेरे ऊपर से उतर कर बेड पर घुटनो के बल बैठ गयी…..अभिषेक ने मेरी नितंब से अपना लिंग बाहर निकाला, और प्राजक्ता के सामने खड़ा होकर तेज़ी से मूठ मारने लगा. और अचानक ही वो गरजते हुए झड़ने लगा. उसके लिंग से वीर्य की धार निकल कर प्राजक्ता के चेहरे को भिगोने लगी. जैसे ही प्राजक्ता के चेहरे पर अभिषेक के लिंग से निकला पानी गिरने लगा तो प्राजक्ता के होंठो पर ऐसी मुस्कान आ गयी………जैसे उसे अमृत मिल गया हो. ये सब देखते हुए मुझे पता नही कब मेरा हाथ मेरी योनि की भगनासा पर चला गया. और मैं अपनी उंगलियो से योनि की क्लिट को मसलने लगी….

जैसे जैसे अभिषेक के लिंग के सुपाडे से वीर्य की बौछार निकल कर प्राजक्ता के चेहरे पर गिर रही थी……वैसे वैसे मेरी योनि ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मैं भी झड कर हाँफने लगी……अभिषेक भी झड कर बेड पर लेट गया…..प्राजक्ता एक दम से बेड से नीचे उतरी, और बाथरूम के लिए बाहर चली गयी…..मेरी हालत बहुत बुरी हो चुकी थी…..थोड़ी देर बाद प्राजक्ता वापिस आ गयी. और मैं उठ कर बाथरूम में चली गयी……मैं बड़ी मुश्किल से चल पा रही थी…..अभिषेक के मुन्सल लिंग ने तो सच मे मेरी नितंब को फाड़ कर रख दिया था. जब बाथरूम से वापिस आई, तो मेने देखा. अभिषेक बेड पर पीठ के बल लेटा हुआ था. और प्राजक्ता उसकी जाँघो के पास बैठी हुई झुक कर उसके लिंग को चूस रही थी……..

मेरे कदमो की आहट सुन कर प्राजक्ता ने अभिषेक के लिंग को मूह से बाहर निकाला, और मेरी तरफ देखा. पर उसे शायद अब मेरी मौजूदगी से कोई फरक नही पड़ रहा था. उसने फिर से मेरी ओर देखते हुए, अभिषेक के लिंग के सुपाडे पर जीभ बाहर निकाल कर चाटने लगी. ये सब वो मेरी ओर देखते हुए कर रही थी….अभिषेक भी मेरी ओर देख कर मुस्करा रहा था. उसने मुझे अपने पास आने का इशारा किया. मैं अपने सामने ठुकाई के इस खुले खेल को देख कर मंत्र मुग्ध सी बेड की ओर खिचति चली गयी.

जैसे ही, मैं बेड पर आई. अभिषेक ने मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खेंचते हुए, अपने ऊपर झुका लिया. अब मैं और प्राजक्ता एक दूसरे के बिलकुल सामने थी. वो अभिषेक के लिंग को बार बार अपने मूह से निकालती, और मेरी तरफ देखते हुए, अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके लिंग के मोटे लाल सुपाडे को चाटने लगती. मैं एक टक हैरानी से उसे ये सब करता हुआ देख रही थी. जब वो अभिषेक के लिंग के सुपाडे को जीभ बाहर निकाल कर चाटती, तो वो अभिषेक के लिंग को नीचे से पकड़ कर मेरे होंठो की तरफ करती. जैसे कहना चाहती हो. तुम क्यों फ्री बैठी हो……फिर उसने अभिषेक के लिंग को चूसना छोड़ कर अभिषेक के बगल मे लेट गये. अभिषेक ने एक हाथ से मेरे बालो को पकड़ कर मुझे अपने लिंग पर झुकाना शुरू कर दिया…..
 
मैं भी इतनी मस्त हो चुकी थी, कि किसी बात की परवाह किए बिना अभिषेक के लिंग के मोटे सुपाडे के चारो तरफ अपने होंठो को कस लिया. और फिर उसके लिंग के सुपाडे को अपने होंठो के बीच में दबाते हुए चूसने लगी. मेने अभिषेक के लिंग को चूस्ते हुए देखा के प्राजक्ता ने अपनी नाइटी के स्ट्रॅप्स को अपने कंधो से सरका कर निकाल दिया था. और अभिषेक प्राजक्ता की स्तनों को चूस रहा था. “अहह श्ह्ह अभिषेक “ प्राजक्ता अभिषेक के बालो को सहलाते हुए, उसके सर को अपनी स्तनों पर दबा रही थी.

प्राजक्ता: आहह अभिषेक चूसो ना मेरे स्तनों को अह्ह्ह्ह देखो ना माँ कैसी तुम्हारे लिंग को चूस रही है…..

ये सुनते ही मेने शरम के मारे अभिषेक के लिंग को मूह से बाहर निकाल दिया. और फिर प्राजक्ता मुस्कुराते हुए, अभिषेक के ऊपर आ गयी. अब उसकी योनि भी बिलकुल मेरी आँखो के सामने थी……

”माँ डालो ना मेरी योनि के अंदर अभिषेक का लिंग” प्राजक्ता ने पीछे फेस घुमा कर मेरी तरफ देखते हुए कहा. मैं बुत सी बनी वैसे ही बैठी रही…..

अभिषेक: डाल ना साली देख नही रही, तेरी बेटी कैसे मेरे लिंग के लिए तरस रही है. चल डाल जल्दी…..

अभिषेक की रोबदार आवाज़ सुन कर मुझे झटका सा लगा. मेने अपने काँपते हुए हाथो से अभिषेक के लिंग के पकड़ कर प्राजक्ता की योनि के छेद पर लगा दिया. जैसे ही अभिषेक के लिंग का सुपाडा प्राजक्ता की योनि के छेद पर लगा….प्राजक्ता के मूह से मस्ती भरी आह निकल गयी……..उसने अपनी योनि को अभिषेक के लिंग के सुपाडे पर दबाना शुरू कर दिया…..मैं उसके पीछे बैठी हुई ये सब देखते हुए हैरान हो रही थी.

अभिषेक का लिंग प्राजक्ता की योनि के टाइट छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा……जैसे जैसे अभिषेक का लिंग प्राजक्ता की योनि की गहराइयों में समाता जा रहा था. प्राजक्ता की सिसकारियाँ उँची होती जा रही थी….मेरे देखते ही देखते, अभिषेक का मुन्सल जैसा लिंग प्राजक्ता की टाइट योनि में समा गया……अभिषेक ने फिर मुझे अपने पास आने का इशारा किया……मैं उठ कर अभिषेक की बगल मे जाकर लेट गयी…..उधर प्राजक्ता ने अपनी नितंब को ऊपर नीचे हिलाते हुए अभिषेक के मुन्सल लिंग से ठुकवाना शुरू कर दिया था….अभिषेक ने मुझे पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया, और मेरे होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसने लगा.

मैं अपने सामने अपनी बेटी को ठुकते देख और मदहोश होती जा रही थी. जिसके कारण मैं अभिषेक को किसी भी बात के लिए रोक नही पा रही थी. ठुकाई का जो सिलसिला आज शुरू हुआ था. वो अब मेरे जीवन में सदा के लिए रहने वाला था.ये सिर्फ मेरी उस छोटी सी भूल की सजा है जो मैंने एक शिकारी को अपने घर मे पनाह देते हुए की थी.लेकिन यह सज़ा अब मुझे अच्छी लगने लगी है.जिसके लिए मैं अब कुछ भी कर सकती हूँ.
 
अगली सुबह जब में उठ कर रूम से बाहर आई तो देखा,प्राजक्ता अभी तक सो रही थी…मेने उसे आवाज़ देकर उठाया, और फिर फ्रेश होकर नाश्ता बनाने लगी. प्राजक्ता भी फ्रेश होकर मेरी हेल्प करने लगी….नाश्ता तैयार करने के बाद अपने रूम में गयी, और अपनी जेठानी को फोन लगाया….

मानसी: हेलो…..

में: हेलो दीदी में बोल रही हूँ वंदना…..

मानसी: हां वंदना बोलो. इतनी सुबह सुबह……..

में: हां दीदी दरअसल मुझे कुछ काम था….

मानसी: हां बोलो क्या काम है ?

में: दीदी आज तो सनडे है ना…..बच्चे और भाई साहब घर पर ही होंगे…

मानसी: बच्चे तो घर पर है, पर ये काम पर गये है…..रात को आएँगे…

में: दीदी क्या आप आज बच्चो के लेकर हमारे घर आ सकती हो……..दरअसल मुझे किसी काम से बाहर जाना है…….तो प्राजक्ता घर पर अकेली है…..

मानसी: हां हां क्यों नही….वैसे भी मेरा भी दिल कर रहा था.वहाँ आने को…तुमने कब जाना है…..

में: बस जैसे ही आप आएँगी में चली जाऊंगी…..और शाम तक आ जाऊंगी……

मानसी: ठीक है तो में इनको फोन कर देती हूँ……शाम वो हमे तुम्हारे घर से लेते आएँगे……..

में: ठीक है दीदी…….

१० बजे मानसी दीदी आ गयी अपने बच्चो के साथ……मेने थोड़ी देर उनके साथ बातें की, और फिर इजाज़त लेकर अभिषेक के बताए हुए पते पर जाने के लिए घर से निकली……मुझे मालूम नही था कि जो में करने जा रही हूँ…..वो ठीक है या नही…..पर उस मुसबीत की घड़ी में मुझे जो सही लगा…..में करती गयी…

बाहर रोड पर आकर मेने एक ऑटो वाले को वो पर्ची दिखाई, और बोला इस पते पर जाना है…..ऑटो वाले, ने इशारे से बैठने को कहा..में ऑटो में बैठ गयी….और ऑटो वाला ऑटो चलने लगा…..मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. आगे क्या होगा यही सब सोच सोच कर मेरे हाथ पैर थर थर कांप रहे थे.

मुझे लग रहा था. जैसे में किसी दलदल में धँसती जा रही हूँ, और उम्मीद की कोई किरण नज़र नही आ रही थी….जैसे जैसे ऑटो उस बताए हुए पते की तरफ बढ़ रहा था…मेरे हाथ पैर सुन्न होते जा रहे थे….मेरा दिल पूरे जोरो से धड़क रहा था….तभी अचानक ऑटो वाले ने ब्रेक लगा दी, और पीछे पलट कर बोला.

ऑटो वाला: लो जी मेडम जी. पहुँच गये….वो जो सामने वाइट पैंट वाला घर दिखाई दे रहा है ना…वही घर है….

उसकी बात सुन कर मानो जैसे मेरी साँस ही रुक गयी हो…..में ऑटो से नीचे उतरी ,और ऑटो वाले को पैसे दिए…..ऑटो वाले ने ऑटो स्टार्ट किया, और वापिस मूड गया……मेने हिम्मत करके उस घर की तरफ चलना शुरू किया…पूरी गली सुनसान थी..ऐसा लग रहा था जैसे इस गली में कोई रहता ही ना हो….

जैसे जैसे में उस घर की तरफ बढ़ रही थी…….मेरा दिल डर के मारे बैठा जा रहा था….किसी तरह काँपते पैरों से चलते हुए, में उस घर के गेट के बाहर पहुचि, और वही खड़ी होकर सोचने लगी. कि जो में कर रही हूँ ठीक कर रही हूँ या नही……मुझे ये बात किसी को तो बतानी चाहिए थी…फिर अगले ही पल अभिषेक की वो धमकी याद आ गयी……

जब उसने कहा था कि, वो तो अनाथ है. मर भी जाएगा तो कोई रोने वाला भी नही……मुझे सच में लग रहा था कि, अभिषेक कुछ भी कर सकता था…..मुझे उस पर गुस्सा भी आ रहा था और हैरत भी हो रही थी…..कि इतनी सी उम्र में ये सब उसके दिमाग़ में कहाँ से आ गया……..

मेने हिम्मत करते हुए डोरबेल बजाई, और थोड़ी देर बाद गेट खुला, तो सामने अभिषेक खड़ा मेरी तरफ देखते हुए अजीब से ढंग से मुस्करा रहा था.उसने एक बार मुझे सर से पाँव तक घूर कर देखा, और फिर चेहरे मुस्कान लाते हुए बोला.”चल अंदर आ जा”

में किसी बुत की तरह घर के अंदर आ गयी…..अंदर आते ही, उसने गेट बंद कर दिया, और बिना कुछ बोले, घर के अंदर जाने लगा…..में बिना कुछ बोले उसके पीछे चली गयी…..जैसे ही में उसके पीछे रूम में दाखिल हुई, तो मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी……

ये वही रूम था. जो मेने उस क्लिप में देखा था….मुझे यकीन नही हो रहा था कि, प्राजक्ता इतनी दूर यहाँ कैसे आ गयी…….दिल में हज़ारो सवाल घर किए हुए थे….

में: आख़िर तुम चाहते क्या हो ? क्यों कर रहे हो ये सब हमारे साथ ?

अभिषेक: (गुस्से से गुर्राते हुए) साली अब तो ऐसी भोली बन रही है…..जैसे तुझे कुछ पता ही ना हो……..मादरजात उस दिन तो तू मुझे जान से ही मार देती….अब में बताता हूँ कि अभिषेक से पंगा लेने का अंज़ाम क्या होता है…..

में: देखो अभिषेक में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ……अपनी ग़लती की माफी मांगती हूँ ! प्लीज़ कुछ ग़लत ना करना……..हमारी तो दुनिया ही बर्बाद हो जाएगी..

अभिषेक: ये तो तुम्हे पहले सोचना चाहिए था……जब तूने मुझे पिटा था.

में: प्लीज़ अभिषेक मुझे माफ़ कर दो…..वो क्लिप मुझे दे दो…..तुम जो कहोगे में करूँगी……

अभिषेक: अच्छा जो में कहूँगा वो तुम करोगी ?

मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुआ, कि मेने डर में क्या बोल दिया था……अभिषेक मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ, और अलमारी के पास जाकर उसे खोल कर कुछ ढूँढने लगा….और फिर वो मेरी तरफ पलटा…..उसके हाथ में एक रेड कलर की पैंटी और ब्रा थी…..वो मुझे पैंटी और ब्रा दिखाते हुए बोला……

अभिषेक: तुम्हे पता है ये किसकी है ?

में मूह फाडे उसकी तरफ देखे जा रही थी…….में कुछ भी बोल ना पा रही थी……”ये तुम्हारी बेटी प्राजक्ता की है. मेने उसे गिफ्ट में लाकर दी थी. अब अगर तुम चाहती हो कि, में वो क्लिप तुम्हे दे दूं….तो इसे लेकर बाथरूम में जाओ और पहन कर मेरे सामने आओ” अभिषेक की ये बातें तीर की तरह मेरे कानो में लग रही थी……मुझे यकीन नही हो रहा था कि, मेरे बेटे की उम्र का लड़का मेरे सामने मुझसे ये बात कर रहा है…..

इसमे इतनी हिम्मत आई कहाँ से…….मुझे यकीन नही हो रहा था…..”अब सोच क्या रही है…जा जल्दी से जाकर इसे पहन कर आ……..साला आज लिंग ने सुबह से ही, तंग कर रखा है……देखना आज तेरी योनि का कैसे पानी निकालता हूँ..”

में: अपनी बकवास बंद करो……..में कुछ नही करने वाली……..और तुम जो मुझे ब्लॅकमेल कर रहे हो ना……तुम्हारे लिए बहुत बुरा होगा……तुम जानते नही में कौन हूँ……

अभिषेक: (हंसते हुए)हाँ हाँ जानता हूँ अच्छी तरह जानता हूँ…….साली घर में तेरे खाने के लाले पड़े है, और बन तो ऐसी रही है…….जैसे कमिश्नर की बीवी हो….चुप चाप जैसे में कहता हूँ कर वरना यहाँ मेने तुझे तेरी शकल देखने के लिए नही बुलाया……नही तू फुट यहा से…….में देखूँगा मुझे क्या करना है……साली पूरे देश में तेरी बेटी की नंगी क्लिप को ना बेचा तो मेरा नाम अभिषेक नही……तो आज ही देख लेना……

में: (अभिषेक की बातें सुन कर में बुरी तरहा घबरा चुकी थी) नही अभिषेक तुम ऐसा कुछ नही करोगे…..में में तुम जो कहो करने को तैयार हूँ….

अभिषेक: तो चल फिर ये ले, और जाकर बाथरूम में ये पहन कर मेरे सामने आ….आज तो तेरी योनि मार मार कर सूजा दूँगा…….

ये कहते हुए, उसने वो ब्रा और पैंटी बेड पर फेंक दी……..में नीचे फर्श की तरफ देखते हुए घबरा रही थी…..अब मुझे कोई रास्ता नही सूझ रहा था.”जल्दी कर मेरे पास ज़्यादा टाइम नही” अभिषेक ने घुरते हुए कहा….मेने नीचे की ओर देखते हुए वो ब्रा और पैंटी उठा ली……और काँपते हुए कदमों से बाथरूम की तरफ जाने लगी……

अभिषेक: जल्दी कर…….टाइम वेस्ट ना करना……

में बाथरूम में घुस्स गयी……मेरी आँखें नम हो चुकी थी…..मेने जैसे ही मेने उस पैंटी और ब्रा को देखा……तो में सोचने लगी कि ये तो प्राजक्ता के साइज़ की है, मेरे कैसे आएगी…..मेने डरते हुए अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए….और धीरे धीरे सारे कपड़े उतार दिए….फिर मेने उस वी शेप पैंटी को अपने हाथ में लिया….और झुक कर उसे पहनने लगी….

पैंटी तंग तो थी, पर स्ट्रिचबल थी, मेने झुक कर उसे पहनना शुरू किया. और में एक दम हैरान रह गयी…..वो छोटी सी वी शेप पैंटी मेरे नितंबो पर चिपकी हुई थी….फिर मेने वो ब्रा उठा कर पहनी, मुझे यकीन नही हो रहा था कि, वो ब्रा भी मेरे ३८ डी साइज़ की स्तनों पर आ गयी…..तभी बाथरूम का डोर एक दम से खुल गया…सामने अभिषेक खड़ा मेरी तरफ वासना भरी नज़रों से देख रहा था…वो अपने सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवेर में खड़ा था…और उसका लिंग उसके अंडरवेर में बड़ा सा तंबू बनाए हुए था……

उसके इस तरह अंदर आजाने से में एक दम घबरा गयी, और उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी…..फिर मुझे पीछे से उसकी कदमो की आहट नज़दीक आती हुई सुनाई दी, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा….में अध नंगी हालत में उसके सामने खड़ी थी….फिर कुछ देर खोमाशी के बाद उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जाकड़ लाया…..उसके दोनो हाथ मेरी स्तनों पर थे….और उसने मेरी स्तनों को बेहरमि से मसलना शुरू कर दिया…

अभिषेक: आहह साली क्या स्तन है तेरे….आज तो इनको निचोड़ दूँगा……

में: अभिषेक तुम ये ठीक नही कर रहे हो….

अभिषेक: चुप साली वेश्या अब ज़्यादा नखरे करेगी तो, तेरा और तेरी बेटी का जीना मुश्किल कर दूँगा…..चल मेरे साथ……

ये कहते हुए, उसने मेरा हाथ पकड़ा और खेंचते हुए रूम में ले गया….रूम के अंदर आते ही उसने मुझे बेड पर धकेल दिया…..में अपने आप को अभिषेक के सामने इस हालत में पाकर अपनी नज़रे नही उठ पा रही थी…वो कमीनी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा रहा था….में इस कदर घबराई हुई थी, कि मेरे सोचने समझने की शक्ति भी ख़तम हो गयी थी….
 
में अब बेड पर अधनंगी लेटी हुई थी……उसने मेरी तरफ देखते हुए, अपने लिंग को एक बार अपने अंडरवेर के ऊपर से मसला, और फिर एक ही झटके में अपने अंडरवेर को उतार कर फेंक गया….उसका का लिंग मेरी आँखों के सामने झटके खा रहा था…..मेने एक पल के लिए ही उसके लिंग की तरफ देखा और फिर अपने नज़रे घुमा ली..

अभिषेक: (बेड पर चढ़ते हुए) क्यों साली पसंद आया अपनी बेटे के यार का लिंग…देख इसे इसी के ऊपर तेरी बेटी चढ़ कर ठुकती है….

मेरे दिल की धड़कने अब और तेज चलने लगी थी…..में अपने आप को उसके सामने इस क़दर महसूस कर रही थी कि, में कुछ बोल भी नही पा रही थी….वो बेड पर धीरे धीरे मेरे पास आ रहा था….फिर अचानक से उसने मुझे मेरी टाँगों से पकड़ कर अपनी तरफ ज़ोर से खेंच दिया….में बेड पर घिसटते हुए लेट गयी….”अह्ह्ह्ह अभिषेक” मेरा सर बिस्तर से जा टकराया…..

पर उस पर तो जैसे कोई शैतान सवार हो गया था….उसने आव देख ना ताव, और मेरी टाँगों को घुटनो से पकड़ कर फेला दिया…मेने जो वी शेप पैंटी पहनी थी…वो मुश्किल से मेरी योनि की फांकों को ढक पा रही थी….मेरी टाँगों के फेलने के कारण मेरी योनि की फांके पैंटी की साइड से बाहर आ गयी…..

मेने शरम और हया से अपनी आँखें बंद कर ली, में जान चुकी थी, कि प्राजक्ता की वजह से जिस दलदल में फँस चुकी हूँ, उससे निकलने का यही एक रास्ता है…. मेने एक बार फिर आख़िरी बार अभिषेक को समझाने की कोशिश की, “देखो अभिषेक ये तुम ठीक नही कर रहे हो……तुम बहुत बड़ा पाप करने जा रहे हो…..अभी भी वक़्त है, में किसी से कुछ नही कहूँगी…”

अभिषेक: चुप साली वेश्या मुझे ज़्यादा समझाने की कोशिश ना कर….

ये कहते हुए, उसने एक हाथ से पैंटी को साइड में कर दिया….उसकी इस हरकत से में एक दम चोंक गयी……इससे पहले कि में कुछ कर पाती, अभिषेक ने अपने लिंग का सुपाडा मेरी योनि के छेद पर टिका कर ज़ोर दार धक्का मारा…..मुझे सहवास किए लगभग ६ साल हो चुके थे……मेरी योनि एक दम सुखी थी….जिसकी वजह से जब अभिषेक के लिंग का सुपाडा मेरी योनि की फांकों को फेलाता हुआ अंदर घुसा तो में दर्द से एक दम चिल्ला उठी…….”अहह माआ ओह मर गइई”

एक तो मेरी योनि एक दम सुखी थी, और दूसरा अभिषेक का लिंग लंबा और मोटा था…..जब वो मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुसा मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरी योनि के दीवारें छिल गयी हो…..में दर्द से छटपटा रही थी….पर अभिषेक को उससे कोई असर नही हो रहा था….उसने मेरी टाँगों को और ऊपर उठा कर फेला दिया…..और फिर से एक ज़ोर दार झटका मारा.. इस बार धक्का इतना जबरदस्त था कि, मेरा पूरा बदन दर्द से काँप गया…..और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगी….

इस बार अभिषेक का लिंग पूरा का पूरा मेरी योनि में उतर चुका था…..”अहह बहुत दर्द हो रहा है माआअ में मर जाऊंगी” में दर्द से सिसक रही थी. पर अभिषेक किसी बात की परवाह नही कर रहा था….उसका लंबा लिंग जड तक मेरी योनि में घुस चुका था…..में हैरान और परेशान ये सब देखते हुए सोच रही थी कि, इस उम्र में इसका लिंग इतना बड़ा कैसे हो सकता है….मेने दो बेटियों को जनम दिया था….इसके बावजूद भी मुझे अपनी योनि उसके लिंग के चारो और कसी हुई मालूम हो रही थी….

उसने अपने लिंग को बाहर की तरफ खेंचा….जिससे एक बार फिर उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों से रगड़ खाने लगा……और में दर्द से तिलमिलाने लगी…”फिर उसने अपने लिंग को बाहर निकल लिया….और मेरी पैंटी को दोनो साइड से पकड़ कर मेरी टाँगों से खेंचते हुए निकाल कर एक तरफ फेंक दिया…..फिर उसने मेरी टाँगों को पकड़ कर ऊपर उठा दिया….इतना ऊपर कि मेरे घुटने मेरी स्तनों पर दब गये…..

में: आह अभिषेक प्लीज़ ऐसे ना करो….मुझ पर थोड़ा सा रहम खाओ….

पर अभिषेक तो जैसे मेरे बात सुन ही नही रहा था….उसकी आँखें मेरी योनि पर गढ़ी हुई थी..और उसकी आँखों में वासना साफ झलक रही थी…उसने मेरी योनि पर झुकते हुए एक ही पल में मेरी योनि पर मूह लगा दिया….आज तक कभी मेरी योनि को मेरे पति ने भी सक नही किया था…..ऐसा अहसास मुझे पहली बार होने वाला था…..जैसे ही उसका मूह मेरी योनि पर लगा…..में तड़पते हुए एक दम से सिसक उठी…..”अहह अभिषेक ये ये क्या कर रहे हो ओह्ह अभिषेक में पागल आह आहह ओह”

मेरे पूरे बदन में सर्सराहट दौड़ गयी…..ना चाहते हुए भी मेरे मूह से सिसकारियाँ निकलने लगी…..पहली दफ़ा कोई मेरी योनि चाट रहा था…इसके बारे में सिर्फ़ सुना था….और सच बता रही हूँ…वो पल आज भी मेरे बदन को रोमांच से भर जाता है…..वो अपनी जीभ निकाल कर पागलों की तरह मेरी योनि की फांकों और योनि के छेद पर रगड़ रहा था…..में मज़े से तिलमिलाए जा रही थी…..मुझे ऐसा लग रहा था कि, अपने होशोहवास खो बैठूँगी…..और सच में हो भी ऐसे ही रहा था…..

फिर अभिषेक ने मेरी योनि की फांकों को अपने हाथों से पूरा फेला दिया, जिससे मेरी योनि का क्लिट जो कि उस समय फूल कर आधे इंच का हो चुका था…उसे अपने मूह में भर कर जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया……

में: अहह ओह अभिषेक्त्त प्लीज़ छोड़ दो अहह सीईईईईईईई उंह अहह उंघह ओह्ह्ह्ह अभिषेक……

मुझे अब साँस लेने में भी तकलीफ़ होने लगी थी….मुझे ऐसा लगने लगा था कि, अब में कई सालों बाद झड़ने के करीब पहुँच चुकी हूँ….पर अचानक अभिषेक ने अपना मूह मेरी योनि से हटा लिया, और अपने लिंग के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर लगा कर मेरी तरफ देखते हुए कहा…..

अभिषेक: क्यों वेश्या मज़ा आ रहा था ना……अब देख तेरी योनि कैसे फाड़ता हूँ….आज तेरी योनि में लिंग ठोक ठोक कर सूजा दूँगा…..

फिर अभिषेक ने अपने लिंग के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर दाबना चालू कर दिया. मुझे लगा एक बार फिर से मेरी जान निकल जाएगी…..पर इस बार मुझे दर्द नही हुआ… क्योंकि मेरी योनि अब अभिषेक के थूक से सनी हुई थी…और मुझे लग रहा था कि आज कई सालो बाद मेरी योनि ने भी पानी निकाला है…..अभिषेक का लिंग फिसलता हुआ मेरी योनि में समाता जा रहा था…..

उसका सेब जैसा मोटा सुपाडा जब मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जा रहा था, तो मेरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ती जा रही थी……मेरा बदन थरथर काँप रहा था…..योनि के अंदर लिंग के घर्षण के कारण में एक दम मदहोश हो गयी……और अपने होंठो को दाँतों से काटते हुए, बेड शीट को अपने हाथों में कस के पकड़ लिया…मुझे अभिषेक का लिंग अपनी बच्चेदानी से टकराता हुआ महसूस हुआ, और में एक दम से सिसक उठी……….

अभिषेक मेरे ऊपर झुक गया, और मेरे होंठो की तरफ अपने होंठो को बढ़ाने लगा…..उसके होंठो पर मेरी योनि का पानी अभी भी लगा हुआ था…जिसे देख कर मेने घिन से दूसरी तरफ मूह घुमा लिया…..मेरी इस हरक़त पर वो गुस्से से बोला..”क्या वेश्या तेरी ही योनि का पानी है” और ये कहते हुए उसने मेरे बालों को खेंच कर मेरे फेस को सीधा कर दिया……

सर के बाल खिच जाने के कारण में दर्द से कराह उठी…..और उसने मेरे होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसना शुरू कर दिया…..अभिषेक मेरे होंठो को चूस्ते हुए,अपने दोनो हाथों को मेरी पीठ के पीछे लेगया, और ब्रा के हुक्स खोल कर ब्रा को निकालने लगा….में पहले से ही उसके सामने अध नंगी लेटी हुई थी. और में नही चाहती थी कि, मेरे तन पर बचा ये आख़िरी कपड़ा भी उतर जाए..इसलिए मेने अपने दोनो हाथों से ब्रा के कप्स को पकड़ लिया….

पर उसके सामने अब मेरी कहाँ चलने वाली थी…..उसने ब्रा को खेंचते हुए मेरे बदन से अलग कर बेड पर फेंक दिया…..मैं अपने दोनो हाथों से अपनी स्तनों को ढकने की कोशिश करने लगी…..”चल हाथ हटा साली, अब क्या बचा है जो तू नखरे कर रही है….लिंग तो पहले ही योनि में लिया हुआ है तूने…..” ये कहते हुए उसने मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर स्तनों से हटाते हुए मेरे सर के दोनो तरफ बेड पर टिका दिया……..

और मेरे हाथों को पकड़े हुए, मेरी स्तनों पर झुकते हुए, मेरे एक स्तन को मूह में भर लिया…..उसकी गरम जीभ को अपने स्तनाग्र पर महसूस करते ही, में एक दम से तड़प उठी……मेरी आँखें मस्ती में बंद हो गयी……ना तो मुझे अच्छा लग रहा था, और ना ही मुझे रोना आ रहा था…पता नही अजीब से स्थिती थी….वो जितना हो सकता था, मूह कर खोल कर मेरे राइट साइड वाले स्तन को मूह में भर कर चूसने लगा….

में: अहह अभिषेक प्लीज़ ऐसे ना करो……

अभिषेक: (अपने मूह को स्तनों से हटाते हुए) क्यों ना करूँ…..(और फिर उसने उस स्तन को मूह में भर लिया)

में: उंह श्ह्ह्ह्ह्ह अभिषेक मुझे कुछ हो रहा है…

इस बार उसने कोई जवाब नही दिया, और मेरे स्तनाग्र को चूस्ते हुए, अपने लिंग को आधे से ज़यादा बाहर निकाला, और फिर धीरे धीरे अपने लिंग को मेरी योनि के अंदर बाहर करने लगा……आज कई बरसो के बाद ठुक रही थी…..इस लिए में अपना आपा खोती जा रही थी….अभिषेक के धक्को की रफ़्तार लगतार बढ़ती जा रही थी….जब उसके लिंग का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होता, मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ जाती….और में मस्ती में तड़प उठती…
 
मेरे दोनो स्तनाग्र एक दम तन कर टाइट हो चुके थे……मुझे अपने स्तनाग्र में सरसराहट होती साफ महसूस हो रही थी…उसके हर झटके से मेरा पूरा बदन हिल जाता….में अब उसका बिलकुल भी विरोध नही कर रही थी…..उसने मेरे हाथों को छोड़ कर अपना मूह मेरी स्तनों से हटाया, और अपने लिंग के झटकों को रोक मेरी तरफ देखने लगा…….मेने अपनी आँखें खोल कर उसकी तरफ देखा, तो वो मेरे तरफ देखते हुए मुस्करा रहा था…..

फिर अभिषेक ने अपने होंठो को मेरे होंठो के तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया…..अब में अपने होशोहवास पूरी तरह खो चुकी थी…..मेने अपनी आँखें फिर से बंद कर ली….और वो भूखे जानवर के तरह मेरे होंठो को सक करने लगा…वो कभी मेरे नीचे वाले होंठ को चूस्ता, तो कभी ऊपर वाले होंठ को कभी वो अपने दाँतों को मेरे होंठो में गढा देता……तो मुझे दर्द का अहसास होता… मेरा पूरा बदन मस्ती के कारण काँप रहा था…..

वो ५ मिनिट तक मेरे होंठो को निचोड़ता रहा….और जब उसका मन भर गया तो, वो मेरे ऊपर से उठ गया…..उसका तना हुआ लिंग मेरी योनि से पच की आवाज़ से बाहर आ गया…..मेने बड़ी मुश्किल से अपनी आँखें खोल कर उसकी तरफ देखा,उसका लिंग मेरी योनि से निकल रहे पानी से एक दम भीगा हुआ था…..मेरे ऊपर से उठते हुए, उसने मुझे मेरे बालों से पकड़ कर खड़ा किया……और बेड से नीचे उतारते हुए मुझे सोफे पर धकेल दिया……

में सोफे पर घुटनो के बल जा गिरी, फिर उसने मेरे बालों को पकड़ कर सोफे पर डॉगी स्टाइल में कर दिया….और पीछे से अपने लिंग को मेरी योनि के छेद पर रख कर जोरदार धक्का मारा. धक्का इतना जबरदस्त था कि, में आगे की तरफ लूड़क गयी…..उसने मुझे मेरे बलों से खेंचते हुए फिर सीधा किया…..और फिर मेरी नितंब को दोनो हाथों से फेला कर पकड़ लिया…..

अभिषेक: अब देख में तेरी योनि का क्या हाल करता हूँ…..

ये कहते हुए, उसने अपने लिंग को सुपाडे तक बाहर निकाला, और फिर एक ही बार में मेरी योनि की गहराइयों में उतार दिया….उसके लिंग का सुपाडा सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया….दर्द और मस्ती से भरी लहर मेरे पूरे बदन में दौड़ गयी और में एक दम से सिसक उठी” अहह उंघह ओह” फिर तो जैसे उस पर कोई भूत ही सवार हो गया हो…..वो अपना लिंग पूरा निकाल निकालकर मेरी योनि में ठोक रहा था……….और में उसके हर धक्के के साथ आहह ओह्ह किए जा रही थी…..

उसका का लिंग किसी एंजिन के पिस्टन के तरह पूरी रफ़्तार से मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था….उसके लिंग के सुपाडे की रगड़ अपनी योनि की फांकों पर महसूस करके में अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी….अब मेरी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूंजने लगी थी…….”अहह ओह अभिषेक धीरे आ सीईइ में गइईए आह आह अभिषेक्त मुझी मुझीई अहह”

अभिषेक: हां ले साली आहह और्र ले, आज तेरी योनि फाड़ कर ही रहूँगा..ले मेरा लिंग अपनी योनि में आह…..

मुझे अब बरदाश्त नही हो रहा था…..में झड़ने के बेहद करीब थी…मेने सोफे के साइड को अपने हाथों में कस के दोबच लिया….शायद अभिषेक ये जान चुका था कि, में झड़ने के बेहद करीब हूँ….इसीलिए उसने और तेज़ी से झटके लगाने शुरू कर दिए……मेरी योनि में बरसो से जमा लावा एक दम से फॅट पड़ा…..और में चीखते हुए झड़ने लगी…..मेरा पूरा बदन रह रह कर झटके खा रहा था…..तभी अभिषेक के धक्को की रफ़्तार और बढ़ गयी…..और वो घुरते हुए अपने वीर्य को मेरी योनि में छोड़ने लगा……मुझे अपनी योनि उसके वीर्य से भरती हुई साफ महसूस हो रही थी…

उसके लिंग से गरम पानी निकल कर मेरे पेट की ओर जाता हुआ साफ महसूस हो रहा था…..थोड़ी देर वैसे ही वो मेरी योनि में लिंग डाले खड़ा रहा……और फिर उसने अपने लिंग को बाहर निकाल लाया, और फिर मेरी नितंब पर एक जोरदार झापड़ मारते हुए बोला” उठ साली हो गया” चल बेड पर चल थोड़ी देर बाद फिर से तेरी योनि की ठुकाइ करता हूँ……

में तेज़ी से साँसे लेती हुई सोफे से खड़ी हुई, जैसे ही में खड़ी हुई, मुझे अपनी योनि से कुछ चिपचिपा निकल कर अपनी जाँघो पर जाता हुआ महसूस हुआ, जब मेने नीचे देखा तो उसका वीर्य और मेरी योनि का पानी मेरी जाँघो योनि की फांकों और यहाँ तक मेरी नितंब पर लगा हुआ था…..अपनी सहवास लाइफ में आज तक में इस तरह गीली नही हुई थी…….ये सब मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था……में सीधा बाथरूम में चली गयी, और अपने आप को साफ किया….

जब में बाथरूम से कपड़े पहन कर बाहर आई, तो अभिषेक मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देख कर बोला “ तुझे किसने कहा कपड़े पहनने को” में उसकी ये बात सुन कर थोड़ा सा घबरा गयी…..

में: अभिषेक मुझे बहुत देर हो चुकी है, मुझे जाने दो….और वो क्लिप मुझे दे दो…

अभिषेक: जाना ही तो चली जाओ……पर अभी वो क्लिप में तुम्हे नही दे सकता…..मुझे अभी मेरे दोस्त का फोन आया था.मुझे वहाँ जाना है…..

में: देखो अभिषेक अब तुम ये ठीक नही कर रहे हो…..मुझे क्लिप दे दो….

अभिषेक: (उठ कर मेरे पास आते हुए) वो अभी मेरे पास नही…वो मेरे रूम में है, ये घर तो किसी दोस्त का है…..अगली बार जब आओगी, तो वो क्लिप्स ला दूँगा…..

ये कहते हुए, उसने मुझे फिर से बाहों में भर लिए, और अपने हाथों को मेरी कमर के पीछे लेजा ते हुए, मेरी नितंब को मसलने लगा…..फिर उसने मेरे होंठो को एक बार चूसा और बोला….”अब चलो, मुझे भी जाना है”

अब में कर भी क्या सकती थी, में रूम से बाहर आई, और उसके साथ घर से निकल गयी……जिस शिकारी के चंगुल से में अपनी बेटी को आजाद कराने आयी थी,में आज खुद उसका शिकार हो गयी थी.मेने अपने घर के लिए ऑटो पकड़ा और घर वापिस आ गयी….जब घर पहुचि तो मानसी घर जाने को तैयार थी……

मानसी: आ गयी दीदी में तो जाने ही वाली थी…..

में: अर्रे कुछ देर बैठ ना…..

मानसी: नही दीदी देर हो जाएगी……अच्छा दीदी क्या मैं प्राजक्ता को कुछ दिनो के लिए साथ ले जाउ….

में: (थोड़ी देर सोचने के बाद) हां हां क्यों नही…..

फिर मानसी प्राजक्ता और अपने बच्चो के साथ घर चली गयी…….उनके जाने के बाद में बाथरूम में गयी, और कपड़े उतार कर नहाने की तैयारी करने लगी…..मेने देखा मेरी जांघे अभी भी उसके वीर्य से चिपचिपा रही थी.. मेरी योनि से अभी भी पानी निकल कर बाहर आ रहा था….मेरी पैंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी…..

में अभी नहाने ही वाली थी कि, फोन की रिंग बजी मेने अपनी टाँगों को साफ किया, और बाथरूम में रखी मॅक्सी पहन कर रूम में गयी….और फोन उठाया……

में: हेलो कौन…..

अभिषेक: हाँ रानी में हूँ ! घर ठीक से पहुँच तो गयी ना…..

में: (उसकी आवाज़ सुन कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया) अब क्यों फोन किया है. तुम हमारा पीछा छोड़ क्यों नही देते…..

अभिषेक: छोड़ दूँगा साली, अच्छा अभी अभी मेने प्राजक्ता को तेरी जेठानी के साथ जाते देखा है…….

में: तो तुझे मतलब…..

अभिषेक: घर पर अकेली हो..बोलो तो आ जाउ…..

में: नही में तुम्हारी परछाई भी अपने घर पर नही पड़ने देना चाहती..

अभिषेक; ओह्ह इतना गुस्सा….मुझे लगता है कि, तेरे बेटी की क्लिप को बाज़ार में बेचना ही अच्छा रहेगा…..और हां सुन साली आज तो तेरी नंगी मूवी भी बन गयी.उसे भी साथ में बेच दूँगा

में: नही अभिषेक तुम ऐसा नही करोगे….

अभिषेक: क्यों क्यूँ नही कर सकता…..चल अब अपनी योनि की तेल से मालिश करके तैयार हो जा…में आ रहा हूँ….

ये कहते हुए उसने फोन बंद कर दिया……में वही बैठी अपनी किस्मत को रोती रही, और उस मनहूस घड़ी को कोसने लगी. जब मेने उसे रूम रेंट पर दिया था….मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि, प्राजक्ता के साथ साथ मेने भी बहुत बड़ी ग़लती कर दी है……में वही बैठी यही सब सोचती रही….. कि बाहर डोर की बेल की आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा….मुझे पता था कि बाहर अभिषेक ही होगा….

मैं अपने आप को संभालते हुए, बाहर गयी और गेट खोला……सामने अभिषेक खड़ा था….वो बिना कुछ बोले अंदर आ गया…..में उसके इरादों को अच्छे से जानती थी…..अब मुझे ही कुछ करना था….में सोच रही थी कि में उसे बातों से मना लूँगी…..मेने गेट बंद किया और, उसके पीछे अपने रूम में आ गयी. वो बिफिकर होकर मेरे बेड पर बैठ गया…..

अभिषेक: तो बता कैसा लगा मेरा लिंग अपनी योनि में लेकर ?

में: मुझे तुम्हारी ये फालतू बकवास नही सुननी……

अभिषेक: ठीक है में भी ज़्यादा बोलने के मूड में नही हूँ…..

ये कहते हुए उसने अपनी पेंट खोल कर नीचे सरका दी, उसका लिंग एक दम तना हुआ था, और झटके खा रहा था…उसने मुझे इशारे से पास आने को कहा.जैसे ही में उसके पास गयी, उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने सामने नीचे ज़मीन पर बैठा दिया, और फिर मेरे खुले हुए बालों को पकड़ कर बोला….”ले चूस इसे”

मेने इससे पहले कभी लिंग को मूह में नही लिया था.इसके बारे में सिर्फ़ सुना था..और मुझे ये सब करना अच्छा भी नही लगता था…”नही अभिषेक में नही ले सकती” अभिषेक ने मुझे गुस्से से देखा और घुरते हुए बोला….”साली जब अपनी योनि चुस्वा सकती है, तो मेरा लिंग नही चूस सकती चल चूस इसे” ये कहते हुए उसने एक हाथ से अपने लिंग को पकड़ा , और दूसरे हाथ से मेरे बालों को खेंचते हुए, अपने लिंग के सुपाडे को मेरे होंठो पर रगड़ने लगा…..

में उसके सामने दर्द से छटपटा रही थी…पर उसके ऊपर तो जैसे कोई असर नही हो रहा था…..आख़िर कार मुझे अपना मूह खोल कर उसके लिंग के सुपाडे को मूह में लेना पड़ा….”अह्ह्ह्ह हां चूस इसे आह” अभिषेक ने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा…..मुझे जितना आता था में उसी तरहा से उसके लिंग को चूसने लगी….वो पैर नीचे लटका कर बैठा हुआ था…और फिर वो पीठ के बल बेड पर लेट गया…..

फिर उसने मेरे बालों को पकड़ कर खेंचा, तो उसका लिंग मेरे मूह से बाहर आ गया….दूसरे हाथ से उसने अपने बॉल्स को पकड़ कर बोला” चल इसे भी चाट” में किसी वेश्या के तरह उसकी हर बात मानने को मजबूर थी….मेने अपनी जीभ निकाल कर उसके टट्टो को चाटना शुरू कर दिया…..मुझे ये सब करने में बहुत घिन आ रही थी…..पर मजबूरी ही ऐसी थी….फिर उसने मुझे और ऊपर उठा कर अपने ऊपर चढ़ा लिया….में उसकी कमर के दोनो तरफ घुटनो के बल बैठ गयी…..मुझे समझ में नही आ रहा था कि, अब वो क्या करने वाला है….उसने मेरी नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया. मेने नाइटी के नीचे कुछ नही पहना हुआ था
 
उसने मेरी योनि की क्लिट को अपनी उंगलियों में लेकर मसलते हुए कहा…..”वाह तेरी योनि तो अभी तक पनियाई हुई है” फिर उसने मेरी नितंब को दोनो तरफ से पकड़ कर मुझे थोड़ा ऊपर उठाया, और अपने लिंग के सुपाडे को योनि के छेद पर टिकाते हुए, मुझे नीचे की और दबाने लगा…..

उसका लिंग मेरी योनि के छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…..जैसे ही उसके लिंग का गरम सुपाडा मेरी योनि के अंदर घुसा मेरे मूह से मस्ती भरी आह निकल गयी….और में अपने आप ही उसके ऊपर झुकती चली गयी….भले ही में सब मजबूरी में कर रही थी….पर कई सालो के बाद ठुकने से मेरे अंदर की आग और भड़क चुकी थी…..

उसने मेरे गले के पीछे हाथ डाल कर अपने ऊपर झुकाते हुए मेरे होंठो को अपने होंठो में भर लिया…..और नीचे से अपनी कमर को पूरी ताक़त के साथ ऊपर की तरफ उछाला…..जिसके कारण अभिषेक के लिंग का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस गया……मेरे बदन में करेंट सा दौड़ गया…..और मेने उसके बाजुओं को कस के पकड़ लिया….

उसका पूरा लिंग मेरी योनि में समाया हुआ था……और वो बेदर्दी से मेरे होंठो को चूस रहा था….उसका एक हाथ मेरे नितंबो पर था, और दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को दबा दबा कर खेंच रहा था….वो मेरे नितंबो को मसलते हुए कभी, अपनी एक उंगली नितंब की दरार में फेर देता, तो मेरा पूरा बदन मस्ती में काँप जाता….और मेरी कमर झटके खाने लगती……जिससे लगता कि, में खुद ही उसके लिंग पर बैठी हुई अपनी नितंब आगे पीछे कर रही हूँ. वो बार बार मेरी नितंब की दरार में उंगली फेर देता….और मेरे कमर आगे की तरफ झटका खाती, और उसके लिंग का सुपाडा मेरी बच्चेदानी से रगड़ खा जाता…

वो करीब ५ मिनिट से मेरे होंठो को चूस रहा था…..और मेरी योनि उसके लिंग को कभी अपने अंदर कस्ति और कभी ढीला छोड़ देती…..अभिषेक को भी इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि, जब वो मेरी नितंब की दरार में उंगली फेरता है, तो में आगे की तरफ अपनी कमर को धक्का देती हूँ….मेरी इस बात का उसने फ़ायदा उठाते हुए मेरी नितंब के छेद पर अपनी उंगली लगा कर दबाने लगा…..मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि में बयान नही कर सकती…..कहाँ तो कुछ देर पहले में अपनी मजबूरी पर रो रही थी…..और कहाँ अब योनि की आग के कारण में मदहोश हो गयी थी….

मेरी कमर अपने आप ही आगे की तरफ झटके खाने लगी…..जिससे मेरी योनि के अंदर अभिषेक का लिंग अंदर बाहर होकर रगड़ खाने लगा…..वो अभी भी मेरे होंठो को बुरी तरहा से चूस रहा था…बीच बीच में वो मेरे होंठो पर अपने दाँत भी गढ़ा देता….मुझे पता नही कब मेरे हाथ उसकी बाजुओं से हट कर उसके सर पर चले गये….और में भी उसके सर को पकड़ कर अपने होंठो को चुसवाने लगी….अभिषेक भी धीरे धीरे अपनी कमर को हिला रहा था…..

थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठो को छोड़ा, और मुझे अपने ऊपर सीधा बैठा दिया……मुझे उसका लिंग अपनी नाभि तक अंदर घुसा हुआ महसूस हो रहा था…. उसने मुस्कुराते हुए कहा……..”देख तेरी योनि कैसे पानी की नदी बहा रही है… साली मेरे टटटे भी गीले कर दिए…..” मेने अपना चेहरा घुमा कर पीछे की ओर देखा, पर में ठीक से नही देख पे…..फिर अभिषेक ने मेरा एक हाथ पकड़ कर कमर के पीछे लेजाते हुए अपने टट्टो पर लगा दिया……

जैसे ही मेने उसके बॉल्स को छुआ में एक दम हैरान रह गयी…..उसके बॉल्स एक दम गीले हो चुके थे….जैसे किसी ने पेशाब कर दिया हो…..मेने अपना हाथ आगे करके अपने सर को झुका लिया…..अभिषेक थोड़ा एडजेस्ट होते हुए बैठ गया…..हम दोनो बेड के बिलकुल किनारे पर थे….उसके पैर बेड के नीचे लटक रहे थे, और में उसके लिंग को अपनी योनि में लिए हुए उसकी गोद में बैठी थी….

अभिषेक: क्यों सही कह रहा हूँ ना…

में उससे नज़रे नही मिला पा रही थी….उसने मेरी नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपर उठाना चालू कर दिया……वो मेरे नाइटी को उतारना चाहता था. पर में फिर से उसके सामने नंगी होने से शरमा रही थी……इसीलिए मेने हाथ ऊपर नही किए….पर उसने ज़बरदस्ती करते हुए मेरी नाइटी को मेरे गले से निकाल कर नीचे फेंक दिया….अब में एक बार फिर से उसके सामने नंगी थी…. उसने मेरे नितंबो को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया…….”उच्छल ना साली अब ऐसे लिंग योनि में लिए बैठी रहे गी क्या”

मेने उसकी बात कोई जवाब नही दिया….वो भी अपनी कमर को नीचे से ऊपर नीचे कर रहा था……..उसके लिंग के घर्षण को अपनी योनि की दीवारों पर महसूस करके में एक दम गरम हो गयी….में भी उसके साथ ऊपर नीचे होने लगी…….धीरे धीरे हम दोनो की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी……और जब मेरी नितंब उसकी जाँघो से टकराती तो, ठप ठप की आवाज़ होने लगती…….

में काफ़ी देर से अपनी सिसकारियों को दबाए हुए थी……..पर अब में अपने आप पर काबू नही रख पा रही थी…..”अहह अभिषेक ओह्ह्ह मुझी माफ़ कर दूओ..ह ह धेरीई अभिषेक्त्त मेरी यो..नि अह्ह्ह्ह ओह ओह”

पूरा रूम ठप ठप और मेरी सिसकारियों की आवाज़ से गूँज रहा था…..अभिषेक का लिंग अब पूरी रफ़्तार से मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था, और में भी उसके लय में लय मिलाती हुई, अपनी नितंब को उछाल उछाल कर उसके लिंग पर अपनी योनि को पटक रही थी……

मेरा बदन एक दम से अकड़ने लगा…..और मेरी योनि फिर से पानी छोड़ने लगी…. में हाए ओह्ह करती हुई झड गयी….अभिषेक भी तेज़ी से शॉट लगाते हुए झड़ने लगा..ठुकाई का ये दौर करीब ३० मिनट तक चला……में बुरी तरह से उसकी गोद में हाँफ रही थी……मुझे कुछ होश ना था….थोड़ी देर बाद में जब मुझे होश आया तो देखा, कि में अभिषेक के ऊपर लेटी हुई थी…उसका आधा खड़ा लिंग मेरी नितंब की दरार पर रगड़ खा रहा था…..उसकी आँखें भी बंद थी. में उसके ऊपर से उठ कर बेड से नीचे उतर गयी…..और झुक कर अपनी नाइटी उठाने लगी…तो मुझे अपनी नितंब पर अभिषेक के हाथ महसूस हुए, जब मेने पलट कर देखा, तो अभिषेक बेड के किनारे पर बैठा हुआ, मेरी नितंब को सहला रहा था..उसकी आँखों में अजीब सी चमक थी….

मेने अपनी नाइटी उठाई, और पहन ली, अभिषेक खड़ा हुआ, और मेरी नाइटी को पकड़ कर कमर तक ऊपर उठा दिया…..”अभिषेक छोड़ो मुझे अब बहुत हो गया” अभिषेक ने मेरी और मुस्कुराते हुए देखा, और अपने लिंग को मेरी नाइटी से साफ करने लगा. उसके बाद उसने अपनी पेंट पहन ली, और बाथरूम के तरफ जाते हुए बोला….

अभिषेक: जान मेरा भी खाना बना लेना…….आज रात यही रुकुंगा और तेरी योनि का भरता बना कर सुबह जाऊंगा…..

में अभिषेक से कुछ ना कह पाई…..बाथरूम से वापिस आकर अभिषेक बेड पर लेट गया….उसके बाद में बाथरूम में गयी….और नहा कर बाहर आई….मेने कभी ज़िदगी में नही सोचा था कि, मुझे ऐसे दिन देखने पड़ेंगे…..

नहाने के बाद जब में अपने रूम में आई, तो देखा अभिषेक सो रहा था… एक बार तो सोचा कि अभी इसको जान से मार दूं तो सारा खेल यही ख़तम हो जाएगा. फिर मन में डर था कि एक चीज़ से बचाने के लिए दूसरी ग़लती नही कर सकती में मन मार कर किचन में आ गयी….

रात के ८ बज चुके थे……मेने खाना तैयार किया….और बाहर आकर बरामदे में बैठ गयी…थोड़ी देर बाद अभिषेक उठ कर बाहर आ गया….

अभिषेक: खाना बना लिया……

में: हां. बन गया है, अभिषेक अब तक तुमने जैसे कहा. मेने वैसे किया अब में तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ……वो क्लिप मुझे दे दो….

अभिषेक: ठीक है दे देता हूँ……पर एक शर्त है.

में: क्या शर्त है, में तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूँ….

अभिषेक: (मुझे क्लिप की डीवीडी देते हुए) ये लो, पर हां आज रात भर मुझे खुश रखना होगा…

मेने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया, और अपने रूम में जाकर वो डीवीडी छुपा दी, अब मेरे पास वो डीवीडी आ चुकी थी…..एक बार तो सोचा अब इसको धक्के दे कर घर से निकाल दूं….पर फिर भी मन में डर था, कि कही ये इसकी कोई और चाल तो नही…..मेने बाहर आकर खाना लगाया, और हम दोनो ने खाना खाया. अब रात बहुत हो चुकी थी…..बाहर सर्दी अब पूरे जोरों पर थी…..जब में काम निपटा कर अपने रूम में दाखिल हुई, तो मेरे कदम वही जम गये…

अभिषेक मेरे बेड पर नंगा लेटा हुआ था. उसने कमर से निचले हिस्से पर रज़ाई ओढ़ रखी थी….और अपने हाथ से अपने लंबे लिंग को हिला रहा था….मेने डोर बंद किया, और बेड के किनारे पर आकर बैठ गयी…..अभिषेक ने एक हाथ बढ़ा कर मेरी शॉल को पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा…..में बिना कुछ बोले बेड पर चढ़ गयी……अभिषेक ने रज़ाई उठा दी, ताकि में रज़ाई के अंदर आ सकूँ….जैसे ही में रज़ाई के अंदर लेटी, वो मेरे ऊपर आ गया….और मेरी शाल को मेरे बदन से अलग करके नीचे फेंक दिया…..अब में सिर्फ़ नाइटी में थी….

उसने मेरे ऊपर लेटते हुए मेरे होंठ अपने होंठो में भर लिया….और मेरे होंठो को चूस्ते हुए नाइटी के आगे के हुक्स को खोलने लगा…..इस बार वो पहले की तरह बेदर्दी नही दिखा रहा था……उसने एक एक करके मेरी नाइटी के सारे हुक्स खोल दिए….मेने नीचे कुछ नही पहना था….उसने मेरे स्तनोंं को पकड़ कर नाइटी से बाहर निकाल लाया……और मेरे होंठो से अपने होंठ हटा कर मेरे लेफ्ट स्तनाग्र को मूह में भर चूसना शुरू कर दिया…..
 
अपने स्तनाग्र पर उसकी गरम गरम जीभ महसूस करते ही, में सिसक उठी……इस बार वो बड़े ही प्यार से मेरे स्तनाग्र को चूस रहा था…..और दूसरे हाथ से मेरी नाइटी को नीचे से ऊपर कर रहा था…..थोड़ी देर में ही नाइटी मेरी कमर तक चढ़ चुकी थी…..हम दोनो रज़ाई के अंदर थे.इसीलिए नीचे का कुछ दिखाई नही दे रहा था……मुझे इसका अहसास तब हुआ जब उसके लिंग का दहाकता सुपाडा मेरी योनि के छेद पर आ लगा…….मेरा जिस्म बुरी तरह से कांप गया.

मुझे पता नही में क्यों इतनी मदहोश हो गयी कि, मेने गले में बाहें डाल कर अपने से चिपका लिया”ओह्ह्ह अभिषेक” मेने मस्ती भरी आवाज़ में कहा…..अभिषेक ने मेरी स्तनों को मूह से निकाला और फिर मेरी तरफ देखते हुए, अपने होंठो को मेरे होंठो के तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया…..

उसका लिंग मेरी योनि के छेद पर लगा हुआ झटके खा रहा था….में इस कदर मदहोश गयी थी, कि मेने भी अपने होंठो को खोल कर उसके होंठो की तरफ बढ़ा दिया……अभिषेक फिर से मेरे होंठो को चूसने लगा…..इस बार नज़ाने क्यों में उसका साथ देने लगी थी……वो मेरे होंठो को चूस्ते हुए, मेरे स्तनाग्र को अपने हाथों की उंगलियों में लेकर मसल रहा था, और मरोड़ रहा था….

मेरी योनि फिर पनिया गयी…..और उसने कुछ देर मेरे होंठो को चूसा, फिर मेरे गालों और गर्दन को जीभ चाटने लगा……में उसकी इन हरकतों से मदहोश होती जा रही थी…..मेरे हाथ उसके कंधो और पीठ को सहला रहे थे….वो मेरे बदन के हर हिस्से को चूम रहा था चाट रहा था….फिर वो धीरे धीरे नीचे की और बढ़ने लगा……मेरे पेट को चूमते हुए, मेरी नाभि के अंदर जीभ डाल कर चाटने लगा…..

उसकी इस हरकत से में एक दम से सिसक उठी…..मेने उसके बालो को पकड़ लिया… और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ चलाने लगी……जब मेरे पति जिंदा थे, तब उन्होने कभी मेरे साथ ऐसा फोरप्ले नही किया था…हम तो सीधा साधा सा सहवास करना जानते थे……इन सब चीज़ों में कितना मज़ा आता है.ये मुझे आज महसूस हो रहा था…….

मेरी सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी…..शुकर था कि, घर पर हम दोनो के सिवा कोई नही था…..फिर वो और नीचे की ओर बढ़ने लगा….मेरी जाँघो की जडो को जीभ से चाटने लगा…..में एक दम से तिलमिला उठी….”आह अभिषेक्त सीईइ वाहाा नही मुझसे सहा नही जाता अह्ह्ह्ह अभिषेक्त्त्तत्त ओह्ह्ह्ह.” पर अभिषेक तो मेरी कोई बात नही सुन रहा था…आख़िर कार मेरे सामने वो मंज़र घूम गया, जब उसने सुबह मेरी योनि को चाटा था…..

फिर वो मेरी योनि पर आ गया…..और किसी भूखे जानवर की तरह मेरी योनि को फांकों के साथ मूह में भर कर चूसने लगा…..

में: (एक दम मस्त होकर गरम होने लगी) आहह ओह्ह्ह नही अभिषेक्त्त ओह अह्ह्ह्ह अहह सीईईईई नही आईई माआ ओह क्या कर्र रहा है ओह्ह्ह मुंडिया मान जा अहह मेरीए जान काढ़ के रहेँगाआ आह खा गया आह तू मुझीई आ पूराअ काा पूराअ आह ख़ाा जाअ पूराअ अहह उफफफ्फ़ मेरीए जानंनणणन् फंससस्स गाईए……..हाई मेरीए योनीईईइ खा गायाअ..

में पता नही क्या अनाप सनाप बके जा रही थी..मुझे खुद इस बात का होश नही था…..मेरी नितंब बेड से २ फुट ऊपर उठ चुकी थी….और मेरी कमर बुरी तरह झटके खा रही थी…..फिर उसने मेरी योनि से मूह हटा लिया…..मेने तेज़ी से साँसे लेते हुए उसकी तरफ देखा…फिर वो नीचे झुक कर मेरे टाँगों को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाने लगा…..

में मदमस्त और बदहवास सी उसके इशारो पर काम करने लगी थी…..जैसे ही उसने मेरी टाँगों को ऊपर उठा कर फेलाया……उसने मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर मेरी योनि पर रखते हुए मेरी फांकों को फेलाना शुरू कर दिया….में समझ गयी कि, वो क्या चाहता है….मेने अपनी योनि की फांकों को फेला दिया. फिर उसने मेरी उंगलियों को पकड़ कर योनि की फांकों पर क्लिट के बिलकुल पास दोनो तरफ सेट किया, और फेलाने के लिए हाथों को खेंचा….जैसे ही मेने फिर से क्लिट के पास के मास को खेंचा….मेरा क्लिट किसी फूले हुए दाने की तरफ बाहर आ गया.

जिसे देख कर उसकी आँखें चमक उठी……मेने अपनी आँखें बंद कर ली, मुझे पता था कि, अभिषेक का अगला स्टेप क्या होने वाला है, पता नही कि में बरदाश्त कर पाउंगी या नही….में अभी यही सोच रही थी कि, उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरी क्लिट पर रगड़ना शुरू कर दिया…में बुरी तरह से हिल गयी…..मेरे हाथ वहाँ से निकल गये…”अहह अभिषेक्त”

अभिषेक: क्या साली क्या कर रही है…..चल फिर से निकाल अपना दाना बाहर…

उसने फिर से मेरी टाँगों को फेला दिया…..और मेरे हाथों को पकड़ कर वही पर रखते हुए बोला”चल अब निकाल बाहर” मेने फिर से क्लिट वाले पास के मास को खेंचा,और योनि का क्लिट फिर से बाहर आ गया….इस बार उसने अपने हाथों से और मास को खेंचा, तो क्लिट पूरी तरह से बाहर आ गया……इस बार उसने बिना किसी देर किए, पूरा का पूरा क्लिट मूह में भर लिया…..और साथ में मेरी टाँगों को ऊपर की तरफ उठा कर दबोच लिया….ताकि में हिल ना सकूँ…..

कुछ पलों के लिए तो मेरी साँस ही रुक गयी…..मूह खुला का खुला रह गया……मुझे ऐसा लग रहा था कि , जैसे अभी मेरे जिस्म से जान निकल जाएगी…फिर थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे आसमान में उड़ रही हूँ….मेरे मूह से सिसकारियाँ निकल कर पूरे घर में गूंजने लगी…..

में: अह्ह्ह्ह अभिषेक ओह खा जा मुझे पूरा खा जाआअ मेरी योनि को आह तू मुझीए अह्ह्ह्ह उहह वेश्या कहता है ना अह्ह्ह्ह हां तूने मुझे वेश्या बनाअ दिया है अहह ओह माआ. हाईए ओईई एह मुंडा पागल हो गयाआ हाईईइ….अहह अहह अहह अभिषेक्त मेरीए योनिईईइ जल गयी ओह्ह मेरा काम होने वाला हाई आह आह अभिषेक्त्त…….

में उसके सर को पकड़े हुए अपनी नितंब को उछाल रही थी…वो किसी तरह मेरे ऊपर काबू पाए हुए था………फिर कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे सच में मेरे जान मेरी योनि से ही निकल जाएगी…….”अहह अभिषेक्त ले गाईए मेन्णन्न् कंजरी बना देताअ मेनू…..आहह मेरीए इज़्ज़त लूट लेती तू कंज़ारा ह ओह मेरीए योनीई…..

में बुरी तरह काँपते हुए, झड़ने लगी….मेरा बदन थरथरा रहा था….योनि से पानी निकल कर मेरी नितंब की दरार और छेद पर चला गया था. इस बार में बहुत बुरी तरह से झड़ी थी…..

में: अभिषेक्त छड दे मेनू……मेरीए योनीई वाज गइईई. हाए ओईए…

पर अभिषेक तो जैसे बहरा ही हो गया था…..वो अपना मूह मेरी योनि से हटा नही रहा था……

में एक बार बुरी तरह से झाड़ चुकी थी, थोड़ी देर बाद उसने अपना मूह मेरी योनि से हटाया, और बेड पर मेरे बगल में लेट गया….”चल उठ जल्दी कर अभी तू तूने कुछ देखा ही नही है….” ये कहते हुए, उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खेंच लिया….में उसके ऊपर आ चुकी थी, मेरे दोनो घुटने उसकी कमर के दोनो तरफ थे……उसने मेरी जाँघो के नीचे हाथ डालते हुए, मेरी नितंब को पकड़ कर ऊपर उठाया, तो में पैरों के बल बैठ गयी…..

फिर वो मेरे नीचे से खिसकता हुआ इतना नीचे हो गया कि, मेरी योनि ठीक उसके मूह के ऊपर आ गयी….मेरा बदन ये देख कर फिर से कांप गया. अब और कितना तड़पाएगा मुझे…..जैसे ही मेरी योनि उसके मूह के ऊपर आई तो वो बोला” चल अब खोल अपनी योनी….चल खोल ना ड्रामा क्या कर रही है” मेने काँपते हुए हाथों से अपनी योनि की फांकों को फेला दिया….
 
में उसके सर के दोनो तरफ पैर करके पंजो के बल बैठी थी…..ऊपर से मेरा पूरा बदन अभी भी झड़ने के कारण कांप रहा था.इसलिए मुझे बॅलेन्स बनाने में दिक्कत होने लगी….और में आगे की तरफ गिरने वली थी कि, मेने अपने हाथों से अभिषेक के सर को पकड़ लिया…..इससे पहले कि में कुछ बोल पाती, उसने मेरी योनि को फेलाते हुए, योनि पर मूह लगा दिया….मेरे बदन में मानो ४२० वॉट का करंट दौड़ गया हो…..

उसने मेरी योनि को चाट्ना शुरू कर दिया….और अपनी ज़ुबान को मेरी योनि के छेद पर रगड़ने लगा….”अहह मुंडिया क्या कर रहा है,,,,हाईए आज मेरी योनि दी खैर नही…..ओह मर गइई….क्यों मेरी योनि नू ख़ान ळगया है…..हाए ओईई एहह मुंडा किथे मूह मार रहााअ है..हाई हट जा… बस वी कर हुन्न्ं अह्ह्ह्ह मेरीए गइई.,……लिंग पा दे मेरी योनि विच……आह अभिषेक अपना लिंग मेरी योनि च पा दे……..”

अभिषेक एक दम से रुक गया….और मुझे अपने ऊपर से हटाते हुए नीचे लेटा दिया. फिर मेरी टाँगों को खोल कर बीच में आकर बैठ गया……”हां बोल क्या कह रही थी तू मेरा लिंग चाहिए तुझे तेरी योनि में….बोल” जो कुछ पल पहले में अनाप सनाप बक रही थी…….अब में उसके मूह से सुन कर शर्मिंदा हो रही थी…में उसकी तरफ देख भी नही पा रही थी……

उसने मेरी योनि के फांकों पर अपने लिंग को रगड़ते हुए फिर पूछा “बोल अब क्या कह रही थी….नही तो तब तक ऐसे ही करता रहूँगा…..” में सच में इस क़दर मस्त हो चुकी थी, कि दिल कर रहा था कि उसका लिंग अपनी योनि में लेकर ज़ोर ज़ोर से ठुकवाऊ……”कुतिया हूँ की सुनना चहन्दा है……मार मेरी योनि….पा दे अपना लिंग मेरी योनि विच…..मेरे घरवाले ने मेरी आज तक इक दिन विच इनवारी नही लयी……..तू ता मेनू गस्ति ही बना दित्ता है”

मेरी ये बातें सुनकर वो हँसने लगा…और मेरी योनि पर अपने लिंग के सुपाडे को दबाने लगा….उसका लिंग फिसलता हुआ मेरी योनि के अंदर जाने लगा….जैसे ही उसका आधा लिंग मेरी योनि में गया….उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक ज़ोर दार धक्का मारा…फॅच की आवाज़ से पूरा लिंग मेरी योनि में समा गया…..मेने तड़प्ते हुए, उससे अपने ऊपर खेंच लाया, और उसके होंठो को खुद ही होंठो में भर भर कर चूसने लगी…..वो मेरी इस हरक़त से जोश में आ गया…और अपने लिंग को पूरा निकाल निकाल कर अंदर डालने लगा….उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल जाता……

में भी पागलों के तरफ उसके होंठो को चूस्ते हुए, अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछाल उछाल कर उसका लिंग अपनी योनि में लेने लगी…..उसने मेरे होंठो से अपने होंठो को अलग किया, और मुझे बाहों में भरते हुए, ऊपर उठाने लगा…..अब में उसकी गोद में आ चुकी थी…मेरी टाँगें उसके कमर के इर्द गिर्द घेरे की शकल में आ चुकी थी……वो अपनी कमर को लगतार हिलाते हुए मुझे ठोक रहा था. और साथ में वो मेरी नाइटी को ऊपर उठाने लगा…. में वासना की आग में इस कदर झुलस रही थी, कि मेने अपनी नाइटी को खुद ही उतार कर नीचे फेंक दिया….

में: आहह अभिषेक लेले जी भर कर मेरी ले आज अह्ह्ह्ह मेरे स्तन चुस्स नाअ…

मेरी बात मानते हुए, उसने मेरा एक स्तनाग्र मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया…अब उसकी कमर हिलनी बंद हो चुकी थी…..पर मेरी नितंब तो मानो मेरे काबू में नही थी…..में लगतार अपनी नितंब को आगे पीछे करते हुए, उसके लिंग से ठुक रही थी…..उसका लिंग बुरी तरह से मेरी योनि की दीवारों से रगड़ खा रहा था…..मेरे इस तरह करने पर वो और जोश में आ गया…….और फिर मुझे अपने बाहों में उठाते हुए वैसे ही खड़ा होने लगा……उसका लिंग अभी भी मेरी योनि में था…..

मुझे यकीन नही हो रहा था कि, मेरे बेटे के उम्र का लड़का मुझे अपनी बाहों में उठाए हुए ठोक रहा था….”हाईए फाड़ दित्ति मेरी योनी…..गश्ती बना दित्ता तू मेनू फाड़ दे अपनी गस्ति की योनि….अहह एह बेहन दे लौडी नू वी आग लगी हुई है” आज मेरी योनि विच ठंड पा दे…….”

वो कुछ मिनिट मुझे ऐसे ही उठा कर ठोकता रहा…फिर उसने मुझे नीचे उतार दिया…..और दीवार की तरफ मुझे घूमाते हुए बोला “चल कोड़ी हो जा” में दीवार से हाथ लगा कर झुक गयी..”उसने पीछे से मेरी नितंब को पकड़ कर फेलाया, और अपना लिंग एक ही धक्के में अंदर पेल दिया….

में: आह आह एह किथो सीख के आया है सब कुछ किद किद मेरी ले रहा है… हाए ओई मार सुटिया मेनू…..ज़िदा मर्ज़ी ले मेरी योनि….बस इन्हो ठंडी कर दे….नये नये तरीके कितो सीख की आया हाई हाई मररर देता….वज गयी आज मेरी योनि…….ओह्ह्ह्ह मार होर ज़ोर दे अपना लिंग मेरी योनी च मार….”

आज भी जब में उन पलों के बारे में सोचती हूँ, तो अपने आप से शरमा जाती हूँ….मेने अपने पति के सामने भी कभी ऐसे वर्ड यूज़ नही किए थी..पता नही मुझ बावली को क्या हो गया था…..जो मूह में आ रहा था बके जा रही थी..”हाई अभिषेक मेरे स्तन दा कसूर तां दस्स…….पात हुन इन्हा नू. मसल दे इनको…..अह्ह्ह्ह”

अभिषेक कभी मेरी नितंब को दबाने लग जाता तो, कभी मेरे स्तनों को खेंच खेंच कर दबाता….में दूसरी बार झड़ने के बहुत करीब थी…..अब खड़े खड़े थक भी गयी थी….अभिषेक ने मेरी योनि से अपना लिंग निकाला, और बेड पर लेट गया….मुझे इशारे से ऊपर आने को कहा…….मेरी योनि में पहले ही आग लगी हुई थी. मेने भी बिना किसी शरम के उसके ऊपर आते ही, उसके लिंग को पकड़ कर अपनी योनि के छेद पर लगा कर अपनी कमर को पूरी ताक़त से झटका दिया….

लिंग फॅच की आवाज़ से अंदर जा घुसा….और फिर मेने आव देखा ना ताव अपनी नितंब को उछल उछल कर उसके लिंग पर पटकने लगी…”अहह ले मेरी योनि आज सारी रात लेना…..सारी रात मेरी योनी च लिंग पा के रखी……तेरी गश्ती तेनू मना नही करेगी…..आहह ले, मेरी योनि वजन वाली है…आह ले गाईए तेरी गस्ति दी योनि, हाए आहह निकल गयी सारी मलाई….ओह्ह्ह वज गयीए..”

में अभिषेक के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ी…..मेरी योनि से इतना पानी निकला कि, बेडशीट भी गीली हो गयी…….अभिषेक के लिंग से भी वीर्य की बोछार होने लगी….उसने मेरे होंठो को अपने होंठो में भरते हुए, मेरे निचले होंठ पर अपने दाँत गढ़ा दिए…..मुझे हल्का सा दर्द हुआ, पर वो दर्द उस समय मुझे कुछ भी नही लग रहा था….

थोड़ी देर बाद में अभिषेक की बगल में लेट गये…..हम दोनो ने अपने ऊपर रज़ाई ओढ़ ली……..”एक बात बोलू वंदना” अभिषेक के मूह से अपना नाम सुन कर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा” ह्म्म बोलो”

अभिषेक: वंदना तेरी योनि सच में जलती हुई भट्टी है….मुझे लग रहा था कि, मेरा लिंग अंदर ही पिघल जाएगा…..प्राजक्ता की योनि भी तेरी योनि के आगे कुछ नही है….सच में मज़ा आ गया तेरी लेकर…

में: अभिषेक तुम अब प्राजक्ता के साथ कुछ नही करोगे……तुमने जैसा कहा मेने वैसे कर दिया…..

अभिषेक: चल ठीक है, वैसे तेरी योनि है कमाल की, साली जैसे आग हो…

अभिषेक की ये बात सुन कर मुझे हँसी आ गयी….और में दूसरी तरफ फेस घुमा कर मुस्कुराने लगी…….”क्या हुआ”

में: कुछ नही….

अभिषेक: तो फिर हंस क्यों रही हो ?

में: तुम्हें तो औरतों की तारीफ भी नही करनी आती…..

अभिषेक: तो फिर तुम सिखा दो ना…….

में उसकी बात का कोई जवाब नही दे पाई……दोस्तो उस रात अभिषेक ने मुझे कई बार ठोका….हर तरीके से हर नये पोज़ में जिसके बारे में मेने कभी सुना भी नही था…….मुझे तो याद नही, कि रात को कितनी देर के लिए उसका लिंग मेरी योनि से बाहर रहा होगा…..सुबह मेरी हालत ये थी कि, मेरी योनि पाव रोटी की तरह सूज कर फूल गयी थी……
 
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