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Adultery यौवन का शिकारी

धीरे धीरे घर का माहॉल ठीक होने लगा……फिर हमारे दो रूम रेंट पर चढ़ गये…..दोनो ही रूम एक फॅमिली ने रेंट पर लिए थे….उनके बच्चे अभी बहुत छोटे थे……इसीलिए एक दिन मेने अपने जेठ और जेठानी के घर जाने का प्लान बनाया. में सुबह किरायेदार की बीवी को ये बोल कर चली गयी कि, में किसी काम से जा रही हूँ…..वो प्राजक्ता का ध्यान रखे………

जब में अपनी जेठानी के घर पहुचि, तो वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई, मानसी ने मुझे अंदर बुलाया और खातिरदारी की, उसके बाद में हमने थोड़ा इधर उधर की बातें की……

मानसी: और दीदी बताए कैसे आना हुआ……

में: दरअसल में इसलिए आई थी कि, में चाहती हूँ कि तुम प्राजक्ता के लिए भी कोई अच्छा सा रिश्ता ढूँढ दो…..उसकी शादी भी जल्द से जल्द करवानी है मुझे…..

मानसी: क्या हुआ दीदी कोई बात है क्या ?

में: नही ऐसे ही, दरअसल मेरी तबीयत भी आज कल ठीक नही रहती……सोचती हूँ कि आँखें बंद करने से पहले प्राजक्ता भी अपने घर चली जाए…..

मानसी: क्या हुआ दीदी आग लगे दुश्मनो को……अभी तो आप जवान हो….फिर ऐसी बात क्यों कर रही है……

में: मानसी प्लीज़ प्राजक्ता के लिए अच्छा सा रिश्ता ढूँढ लो…….प्राची को अपने ससुराल में खुश देखती हूँ तो दिल का बोझ हल्का हो जाता है…..

मानसी: में समझती हूँ दीदी…..इनको आने दो आज रात को ही बात करती हूँ…

में: ठीक है और सूनाओ बच्चे कैसे है…….

मानसी: ठीक है दीदी…….स्कूल गये है…….

दोफर को खाने के बाद में घर वापिस आ गयी…..जब में घर वापिस आई तो, प्राजक्ता घर पर नही थी……जब मेने किरायेदार से पूछा तो बोली, वो उसकी सहेली आई थी, उसके साथ मार्केट गयी है…….मुझे पता नही क्यों चिंता होने लगी थी……उस वाक़ए को ३ महीने गुजर गये थे……..उसके बाद से ना तो मेने अभिषेक की शकल देखी थी, और ना ही नाम सुना था……थोड़ी देर बाद प्राजक्ता भी आ गयी……दिन गुज़रते गये…..८

अप्रैल का महीना था……शाम के ४ बजे की बात है…..उस घटना को लगभग ६ महीने हो चुके थे…..में अपने घर में बैठी हुई सिलाई का काम कर रही थी……१० दिन पहले जो फॅमिली हमारे घर रहने आई थी.वो भी कमरा खाली कर जा चुके थे……..

कई जगह प्राजक्ता के रिश्ते की बात चली, पर बात नही बन पाई……उस दिन में बैठी कपड़े सिल रही थी….प्राजक्ता अपनी सहेली के घर में थी पड़ोस में तभी बाहर डोर बेल बजी…….मेने सोचा कि, प्राजक्ता आ गयी है…मेने जैसे ही बाहर जाकर गेट खोला तो, मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी…..सामने अभिषेक खड़ा था….उसको देखते ही मेरी रगो में खून का दौरा तेज हो गया …

में: तू तू क्या लेने आया है इधर……

अभिषेक कुछ नही बोला, और मेरी तरफ एक पॅकेट बढ़ा दिया……”क्या है ये” मेने गुस्से से उससे कहा…..”देखो लो…..तुम्हारे लिए बहुत ज़रूरी समान है इसमे” मेने उसके हाथ से वो पॅकेट नही लिया…..उसने एक बार मेरी तरफ देखा, फिर उसने वो पॅकेट गेट के अंदर नीचे फेंक दिया……फिर वो मुड़कर वापिस चला गया…..मुझे समझ में नही आया वो यहाँ क्या करने आया है….मेने गेट बंद किया, और पॅकेट को उठा कर खोला…….

जैसे ही मेने पॅकेट खोला, तो उसमे से एक डीवीडी डिस्क निकल कर बाहर आ गयी….और उसमे एक स्लिप भी थी जिस पर लिखा हुआ था ये डीवीडी देखने के बाद तुम्हे मेरी ज़रूरत पड़ेगी…..और उसके नीचे उसका मोबाइल नंबर लिखा हुआ था……

मेने गेट लॉक किया, और अंदर आ गयी…..नज़ाने क्यों मेरा दिल बहुत घबरा रहा था….प्राजक्ता भी पड़ोस के घर में थी….मेने वो डीवीडी ली, और उसे डीवीडी प्लेयर में लगाया….थोड़ी देर बाद उसमे कुछ शुरू हुआ…..कॅमरा कुछ घूम सा रहा था……फिर किसी का हाथ कॅमरा के सामने आया, और कॅमरा एक जगह सेट हो गया……ये किसी रूम का नज़ारा था……

पर मुझे समझ में नही आ रहा था कि कहाँ का सीन था. थोड़ी देर बाद अभिषेक उसमे दिखाई दिया…वो बेड पर बैठा हुआ था……और वो किसी से बात कर रहा था. जो शायद कॅमरा के दूसरी तरफ था…..फिर वो शक्स सामने आया………जिसे देखते ही मेरी रूह तक काँप गयी…..वो प्राजक्ता थी…..प्राजक्ता अभिषेक के पास आकर बेड पर बैठ गयी…..में बड़ी हैरानी से ये सब देख रही थी….क्योंकि जिस रूम में वो क्लिप बनी थी वो हमारा नही था…….

फिर अभिषेक ने प्राजक्ता को पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा, और उसके होंठो पर होंठ लगा दिए…..ये देखते ही मेरे पैरो की ज़मीन खिसक गयी…….प्राजक्ता कब उससे मिलने गयी……..मुझे याद भी नही था कि, कब वो इतनी देर तक घर से बाहर रही…मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था……प्राजक्ता भी अपने बाहें अभिषेक के गले में डाले हुए, उसका पूरा साथ दे रही थी……

मेरे आँखें टीवी पर इस कदर गढ़ गई थी कि, में अभिषेक की हर हरक़त को देखने की कोशिश कर रही थी………और मेरा दिल बैठा जा रहा था…..अभिषेक ने अपने हाथों को उसकी कमर से ऊपर लेजाते हुए, प्राजक्ता की स्तनों पर ले गया. जिसके कारण प्राजक्ता उससे और चिपक गयी……..वो प्राजक्ता के होंठो को चूस्ते हुए उसकी स्तनों को दबा रहा था…….और बार बार उसको अपनी तरफ खेंच रहा था….

फिर उसने प्राजक्ता की कमीज़ को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया…..और मुझे ये देख कर बहुत हैरानी हुई, ये सब करते हुए, प्राजक्ता भी उसका पूरा साथ दे रही थी….अगले ही पल उसने प्राजक्ता की कमीज़ को उसके बदन से अलग कर नीचे फेंक दिया……..प्राजक्ता की कमीज़ को नीचे फर्श पर देख कर मुझे ऐसा लगा कि हमारी इज़्ज़त नीचे फर्श पर पड़ी धूल चाट रही है….

फिर उसने उसकी स्तनों को ब्रा के ऊपर से पकड़ कर मसलना शुरू क्या..प्राजक्ता उसकी बाहों में छटपटाने लगी……..फिर अभिषेक ने एक हाथ नीचे लेजाते हुए, उसकी सलवार का नाडा खोल दिया……प्राजक्ता बेशर्मो की तरह उसकी गोद में बैठी हुई थी…..जब अभिषेक ने उसकी सलवार को नीचे सरकाना शुरू किया…उसने बड़ी बेशर्मी से अपनी नितंब को ऊपर उठा लिया……..और अभिषेक ने खेंचते हुए उसकी सलवार उसके पैरों से निकाल कर नीचे फेंक दी……

कॅमरा का फोकस सीधा उन पर था……मेरी अपनी बेटी उस हरामी की गोद में अधनंगी बैठी हुई थी…फिर अभिषेक ने पीछे से उसकी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर फेला दिया……..और एक हाथ आगे लेजा कर उसकी पैंटी को एक साइड में कर दिया…..मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गयी….पैंटी को साइड करके, उसने प्राजक्ता की योनि की फांकों को अपने हाथ की उंगलियों से खोला…उसका गुलाबी छेद में साफ साफ देख पा रही थी……..तभी टीवी पर ब्लॅक स्क्रीन आ गयी….
 
डीवीडी ख़तम हो चुकी थी……मैं सच में बहुत घबरा गयी थी…मुझे समझ में नही आ रहा था कि में क्या करूँ…….तभी फोन की रिंग बजी……मेने जल्दी से प्लेयर में से डीवीडी निकली, और अपने साथ लेकर अपने रूम में आ गयी….

मेने काँपते हुए हाथों से फोन उठाया, और बड़ी ही मुश्किल से हेलो कहा..उधर से अभिषेक की आवाज़ थी…..

अभिषेक: क्यों आंटी जी कैसे लगी फिल्म……

में: अपनी बकवास बंद कर, अगर तू मेरे सामने होता ना…तेरा मूह तोड़ देती में…..

अभिषेक:ओह इतना गुस्सा ! इतना गुस्सा ठीक नही है आपकी सेहत के लिए…..ये तो सिर्फ़ टेलर था…..अभी तो पूरी फिल्म बाकी है……तो बोलो कब आ रही हो ?

में: क्या ?

अभिषेक: पूरी फिल्म देखने जो मेरे पास है …….

में: हरामज़ादे में तुम्हारी रिपोर्ट पोलीस में करदुंगी,

अभिषेक: ना ना ना भूल कर भी ऐसी ग़लती मत करना…..नही तो मुझ से बुरा कोई ना होगा……..पूरे बाज़ार में तुम्हारी बेटी की सहवास की मूवी बना कर बेच दूँगा….और पता है नाम क्या रखूँगा…..प्राजक्ता ठुकी अपने यार के लिंग से…हा हा हा”

उसकी वो कमीनी हँसी ने मुझे अंदर तक झींझोड कर रख दिया……”में तेरी बातों में नही आने वाली कमीने.जब पोलीस के हत्ते चढ़ेगा ना तब पता चलेगा. ऐसी जगह लेजा कर मारूँगी कि तुझे पानी पूछने वाला कोई ना होगा.” में गुस्से में जो मन में आ रहा था बोले जा रही थी..

अभिषेक: ओह्ह अच्छा रस्सी जल गयी पर बल नही गया….देखते है कि तुम क्या कर सकती हो…..मेरे तो आगे पीछे कोई रोने वाला भी नही…..में तो मर जाऊंगा. पर तुझे और तेरी बेटी को कहीं का नही छोड़ूँगा…….अब तू देख में क्या करता हूँ

ये कह कर उसने फोन रख दिया…….में वही बैठ कर फुट फुट कर रोने लगी…और उस मनहूस घड़ी को याद कर कोसने लगी…..जब मेने उसे अपने यहाँ रहने के लिए रूम दिया था……में काफ़ी देर तक वही बैठी रोती रही….और पता नही कब मेरी आँख लग गयी…..में तब उठी जब प्राजक्ता ने बाहर आकर डोर बेल बजाई…..मेने उठ कर बाहर गयी, और गेट खोला……मेरी आँखें रोने से लाल हो चुकी थी……

जिसका पता प्राजक्ता को चल गया……..” क्या हुआ माँ आप रो रही थी” मेने अपने आप को संभालते हुए कहा…”नही बस वो प्राची की याद आ रही थी…..में ये बात प्राजक्ता को नही बताना चाहती थे…..में चुप चाप अपने रूम में आ गयी….मुझे यही डर सता रहा था कि, गुस्से में अभिषेक कुछ उल्टा सीधा ना कर दे…..में तो किसी को मूह दिखाने के लायक नही रहूंगी……

रात को प्राजक्ता ने खाना बनाया……..पर मेरा मन खाने को नही था..इसीलिए में तबीयत ठीक ना होने का बहाना बना कर अपने रूम में आ गयी… में दिल बुरी तरह घबरा रहा था…..मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि, में इस मुसबीत से कैसे छुटकारा पाऊ….अब मेरे सामने मुझे कोई रास्ता नही आ रहा था….में काफ़ी देर तक बस यही सोचती रही…मेने घड़ी की तरफ देखा रात के १० बज रहे थे…..अब मुझे इस मुसीबत से निपटना ही था…

में बेड से खड़ी हुई, और उस पॅकेट में जो स्लिप थी उसे निकाला, और अपने काँपते हुए हाथों से उस पर लिखा मोबाइल नंबर डायल किया….थोड़ी देर रिंग बजने के बाद उधर से अभिषेक की आवाज़ आई……

अभिषेक: हेलो क्या हुआ नींद नही आ रही क्या ? सच सच बताना मेरे ही बारे में सोच रही थी ना?

में: अपनी बकवास बंद करो. और बताओ कि तुम क्या चाहते हो….आख़िर हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है…..आख़िर तुम हमारे साथ ये सब क्यों कर रहे हो ?

अभिषेक: अर्रे वाह तुम्हें तो भूलने की बीमारी अभी से लग गयी है.भूल गयी उस दिन कैसे तुम ने मुझे जलील करके घर से निकाला था….अब ध्यान से सुनो कल तुम मुझे मेरे घर पर आकर मिलो….अगर तुम चाहती हो कि, तुम्हारी बेटी की वो क्लिप दुनिया के सामने ना आए तो, और हां किसी से ये बात की तो, मुझसे बुरा कोई नही होगा…..

में: ठीक है ! में आउंगी….पर तुम वो क्लिप किसी को ना देना…में तो जीते जी मर जाऊंगी…..

अभिषेक: ठीक है…….अगर तुम चाहती हो कि, में वो क्लिप किसी को ना दिखाऊ…तुम्हे मेरी हर बात माननी होगी…..में जैसा कहूँ करना होगा……

में: (अभिषेक के इस तरह की बात करने पर मुझे अभिषेक की नियत पर शक होने लगा था.) तुम तुम चाहते क्या हो……

अभिषेक: में वही चाहता हूँ जो मेने तुम्हारी बेटी के साथ किया…….बस एक बार अपनी योनि का स्वाद चखा दो…..उसके बाद में वो क्लिप तुम्हे दे दूँगा….में प्रॉमिस करता हूँ……दोबारा तुम्हे तंग नही करूँगा……

अभिषेक ने उसी वक़्त फोन काट दिया….और उसके बाद में वही बैठी रोने लगी….नज़ाने में कितनी देर तक रोती रही……वो हराम की औलाद मुझसे ऐसे बात कर रहा था……. और फिर बेड पर लेटे लेटे नींद आ गये.
 
सुबह होते ही अभिषेक चला गया…उसके जाने के बाद में नहा कर नाश्ता बनाने लगी…तभी मेरे जेठ जी, प्राजक्ता को लेकर वापिस आ गये….और प्राजक्ता को छोड़ कर वापिस चले गये…..में अब नये सिरे से जिंदगी शुरू करना चाहती थी…..और सब कुछ भुला कर आगे बढ़ना चाहती थी……

किस्मत भी अब हमारा साथ देने लगी थी……..हमारे चारो रूम रेंट पर चढ़ गये थे….सिलाई के काम की आमदनी मिला कर अच्छी इनकम होने लगी थी…..धीरे धीरे कुछ दिन गुजर गये…..मेने वो डीवीडी भी तोड़ कर फेंक दी थी. मुझे लग रहा था कि, अब सब कुछ ठीक हो गया है……

एक दिन में कुछ खरीद दारी करने मार्केट गयी हुई थी, खीरदारी करते हुए मुझे किसी ने मेरा नाम लेकर पुकारा, जब मेने पीछे देखा, तो पीछे अभिषेक मेरी तरफ हाथ हिलाते हुए, मुझे बुला रहा था…..में उसके पास गयी और कहा.

में: ये क्या बदतमीजी है…..तुम यहाँ मुझे ऐसे क्यों बुला रहे हो…..

अभिषेक: ओह्ह इतना गुस्सा वंदना जी………इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक नही होता.

में: हां बोलो क्या कहना है….

अभिषेक: यार तुम तो मुझे भूल ही गयी. कहो तो कल तुम्हारे घर आ जाऊ.

में: नही ऐसा मत करना…..घर पर बहुत से किरायेदार रहते है….

अभिषेक: फिर तुम वही आ जाओ…..जहा मेने पहली बार तुम्हें ठोका था…..

में: में नही आउंगी. अब मुझे तुम से कुछ लेना देना नही…..

अभिषेक: चलो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी…..बस एक बार मेरे लिंग के बारे में सोच लेना…क्यों कहर ढा रही हो मेरे लिंग पर……कल आ जाओ ना……तुम्हारी योनि की बहुत याद आती है…..तुम्हें कभी वो पल याद नही आते…जब तुम मेरे लिंग पर उछल उछल कर ठुक रही थी……याद नही आता वो सब…..कल आ जाना…देखो इतनी सर्दी में अगर ठुकाई का मज़ा नही लिया तो फिर कब लोगी….में तुम्हारा कल इंतजार करूँगा……

अभिषेक बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया……में घर वापिस आ गयी…..मेरे जहन में रह रह कर उसकी बातें घूम रही थी….और उसकी बातें सच भी थी. में उस रात की ठुकाई को याद करके रात को तड़पती थी…पर अपने मन को ये समझा कर शांत कर लेती थी…कि अब मुझे इन सब बातों को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए…….

उस रात में सो नही पे…..वासना के कारण मेरी बुरी हालत हो चुकी थी….मेरी योनि की आग ऐसे भड़क रही थी….जैसे कभी शांत ही ना होगी. पूरे एक महीने बाद जब अभिषेक को देखा तो, फिर से उस रात की यादें ताज़ा हो गयी…..किसी तरह रात गुज़री…..और मेने सुबह उठ कर नाश्ता बनाया, घर के काम निपटा कर नाश्ता कर लिया…….

उसके बाद में अपने सिलाई के काम में लग गयी……पर मेरा मन काम में नही लग रहा था…….सारी रात मेरी योनि में आग सी लगी रही थी…जो अभी तक शांत होने का नाम नही ले रही थी…..में उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी…….आज सनडे था, हमारे जो किरायेदार नीचे वाले रूम में रहते थे……उसका पति घर पर ही था…..

जब में उनके रूम के सामने से गुज़री, तो मेरी नज़र अंदर चली गयी. वो दोनो पति पत्नी रज़ाई ओढ़े एक दूसरे को बाहों में लिए हुए लेटे हुए थे..मेने देखा किरायदार अपनी पत्नी के होंठो को चूस रहा था. और उसका एक हाथ उसके स्तनों पर था….जो उससे ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था…….

ये देख कर मेरे अंदर की आग और भड़कने लगी…..में जल्दी से बाथरूम में गयी…..अपनी सलवार खोली, और फिर पैंटी को नीचे जाँघो तक सरका दिया. मेने वाइट कलर की पैंटी पहनी हुई थी……जो कि नीचे से एक दम गीली हो चुकी थी” हाए रब्बा हुन इस उम्र विच क्यों पानी छड रही है” में पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गयी…….पेशाब करके पैंटी ऊपर की, फिर सलवार ऊपर करके बाँध कर बाथरूम से बाहर आ गयी……
 
मुझे समझ में नही आ रहा था कि, में कैसे अपनी योनि की आग को ठंडा करूँ……दूसरी तरफ प्राजक्ता अपने रूम में टीवी देख रही थी…..मेरा दिल बार बार यही कर रहा था कि, काश अभिषेक यहाँ होता, और मुझे ज़बरदस्ती ही ठोक देता. कम से कम मेरी योनि की आग तो ठंडी हो जाती,

में अपने आप से हार रही थी…….में इस कदर गरम हो चुकी थी कि, में अपना सब कुछ ताव पर रखते हुए अपने रूम में गयी, और अभिषेक को फोन किया…..पर अभिषेक ने फोन नही उठाया…….मेने दो तीन बार ट्राइ किया. पर उसने फोन नही उठाया……..अब में करू……मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था. मुझे याद आया कि, कल अभिषेक ने मुझे वही वाले घर में आने को कहा था..

अब तो जैसे में लिंग के लिए पागल सी हो गयी थी……पति की मौत के ६ साल बाद तक मेने अपने अरमानो को मारे रखा था..पर आज में अपनी उतेजना को दबा नही पा रही थी……..में प्राजक्ता के रूम में गयी,

में: प्राजक्ता वो में बाज़ार जा रही हूँ..कुछ सामान लेने जाना है….

प्राजक्ता: ठीक माँ….

में: घर पर ही रहना……

प्राजक्ता : ठीक है माँ आप जाओ में घर पर ही हूँ……..

मेने घर से निकल कर ऑटो किया, और सीधा उस पते पर चली गयी. जहाँ पहले गयी थी……मुझे समझ में नही आ रहा था कि, में कैसे उसके सामने जाऊ. अगर उसने मुझसे पूछ लिया कि में मना करने के बाद क्यों आ गयी, तो में उसे क्या जवाब दूँगी……..

पर अपने ही दिल में पैदा हुए सवालों के जवाब मेरे पास भी ना थे. थोड़ी देर में ही में वहाँ पहुँच गयी…….मेने ऑटो वाले को पैसे दिए. और गली में अंदर बढ़ने लगी……..जैसे जैसे में उसके घर की तरफ बढ़ रही थी….वैसे वैसे मेरे दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी…….मुझे आज खुद पर ही शरम आ रही थी…..मेने गेट के सामने पहुँच कर डोर बेल बजाई….थोड़ी देर बाद गेट खुला तो सामने अभिषेक खड़ा था…..

अभिषेक: (मुझे देख कर मुस्कुराते हुए) अंदर आ जाओ…..

में बिना कुछ बोले अंदर आ गयी……मेरे अंदर आते ही उसने गेट को अंदर से लॉक कर दिया….और रूम की तरफ जाने लगा…..में भी सर झुकाए हुए उसके पीछे रूम में जाने लगी….अगर अभिषेक घर पर ही था तो उसने मेरा फोन क्यों नही उठाया…ये सवाल मेरे दिमाग़ में घूम रहा था…..”तुमने फोन क्यों नही उठाया मेरा” मेने रूम में एंटर होते हुए कहा…

अभिषेक: हां मेने देखी तुम्हारी मिस कॉल. वो में सो गया था..और फोन साइलेंट मोड पर था….

अंदर आते ही अभिषेक ने अपने पायजामा को उतार कर एक तरफ फेंक दिया…..और फिर सोफे पर बैठते हुए, अपने अंडरवेर को घुटनो तक नीचे सरका दिया…उसका का लिंग जो अभी पूरी तरह से खड़ा नही था मेरी आँखों के सामने आ गया…मेने अपनी नज़रे झुका ली…..

अभिषेक: वो मुझे ज़रूरी काम से जाना है थोड़ी देर बाद..इसीलिए मेरे पास ज़्यादा टाइम नही है…..चल आजा ज़्यादा टाइम ना लगा….

में: (एक दम से घबराते हुए) क्या…..(में मन में सोचने लगी कि ये क्या तरीका है एक तो बुलाया खुद और अब बिना कोई बात किए सीधा सीधा मुझे ठुकने के लिए कह रहा है)

अभिषेक: चल आ ना वहाँ क्या खड़ी है…चल खोल अपनी सलवार…..अच्छा चल इधर तो आ मेरे पास पहले…….

जैसे ही में अभिषेक के पास गयी, अभिषेक ने खड़े होते हुए मुझे बाहों में भर लिया….और फिर अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया….मेने हल्का सा विरोध किया..पर उसके हाथों की गर्मी अपने बदन पर महसूस करके में ढीली पड़ गयी….उसने मेरे होंठो को चूस्ते हुए, अपने एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे सलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….

जैसे ही मेरे सलवार का नाडा खुला, अभिषेक पीछे हट कर सोफे पर बैठ गया. और अपने लिंग को हाथ से हिलाते हुए बोला.”चल अब जल्दी कर…” मेरी सलवार ढीली होकर मेरी जाँघो पर आ चुकी थी….मेने सर झुकाए हुए पहले अपनी सलवार को निकाला, और फिर पैंटी को उतार दिया……अभिषेक ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खेंच लिया…..

में घुटनो को उसकी दोनो जाँघो की तरफ करके उसके ऊपर आ गयी….अभिषेक ने अपने लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया……में कल रात से अभिषेक के मोटे लिंग के लिए तरस रही थी…..जैसे ही उसके तने हुए लिंग का दहकता हुआ सुपाडा मेरी योनि के छेद पर लगा…….मेरे पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी……मेने आगे झुकते हुए, अभिषेक के सर को अपनी बाहों में लेते हुए अपनी स्तनों पर दबा दिया…..

में: “अह्ह्ह्ह अभिषेक तू साची मेनू गश्ती बना दित्ता है……अह्ह्ह्ह दस में की करा……क्यों तुम मेरे साथ ऐसा कर रहे हो…

मेरी बात का उसने कोई जवाब नही दिया……और मेरी कमीज़ के ऊपर से मेरे स्तनोंं को मूह में भर कर नीचे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाला. मेरी योनि पहले से ही पानी छोड़ रही थी…..उसके लिंग का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…में मस्ती में एक दम से सिसक उठी “आहह श्ह्ह्ह्ह अभिषेक तेरी लिंग नी मेरी योनि नू पागल कर छड़िया है हाए ओई होले”
 
मेने भी अपनी योनि को उसके लिंग पर दबाना शुरू कर दिया……और कुछ ही पलों में मेरी योनि उसकी के लिंग को निगल गयी……मेरा पूरा बदन मस्ती में थरथरा कर काँपने लगा…..अभिषेक ने मेरी कमीज़ को ऊपर उठाना शुरू कर दिया……जैसे ही मेरी कमीज़ ब्रा के ऊपर हुई, मेने खुद ही मदहोश होते हुए, अपने हाथों को पीछे लेजा ते हुए, अपनी ब्रा के हुक्स खोल दिए. और फिर ब्रा के कप्स को ऊपर उठा कर अपना एक स्तन निकाल कर उसके होंठो से भिड़ा दिया

में: आहह सीईईई अभिषेक ले चूस ली अपनी आंटी की स्तन अह्ह्ह्ह मार मेरी योनि…..कल तो आग लगनी पानी छड रही है……..

अभिषेक ने भी बिना एक पल देरी किए, मेरी स्तनों को जितना हो सकता था..मूह में भर लिया…..और चूस्ते हुए, अपनी कमर को हिलाने लगा…..पर मेरा सारा वजन उसकी जाँघो के ऊपर था…..इसलिए वो शॉट नही मार पा रहा था…इधर मेरी योनि में आग और भड़क चुकी थी….

मेने अभिषेक के सर को अपनी बाहों में भरकर उसे अपनी स्तनों पर दबाते हुए अपनी नितंब को उछालना शुरू कर दिया…..में पागलों की तरह अपनी नितंब उछाल उछाल कर अपनी योनि को उसके लिंग पर पटकने लगी…..वो भी मस्ती में आकर नीचे से अपनी कमर हिला रहा था…….

में: आहह ठोक अपनी गश्ती नू अह्ह्ह्ह ठोक्द्द मेनू मार ले मेरी योनि हाए ओईए हां में गश्ती बन गेययी हाए ओईई तेरा लिंग मेनू जीन नही देन्दा आह आ अहह ह सीईईईई सीईईईईई मार्र होर्र ज़ोर दीए मार्र हइईई. तेरा लिंग मैं रोज योनि च लेनाआ है हइई ओईई आग लग जाए मेरीए योनि नू..

में फिर से मदहोश होकर जो मूह में आ रहा था बके जा रही थी…और अपनी नितंब को तेज़ी से ऊपर नीचे उछाल कर उसके लिंग को अपनी योनि में ले रही थी…में कल रात से तड़प रही थी……इसीलिए ३-४ मिनिट बाद ही मुझे लगाने लगा कि, में झड़ने वाली हूँ…..

में: हाई अभिषेक मार ज़ोर दे मार…..आह देख मेरी योनि वजन लगी हाए चढ़ता पानी मेरी फुददी तो हो गयी में हो गयी मेरी योनि……..

में बिखरकर झड़ने लगी….अभिषेक ने मुझे होंठो से चूसना शुरू कर दिया….में झड़ कर उसके ऊपर निढाल हो गयी…..पर अभिषेक अभी तक नही झड़ा था…..”चलो हटो मुझे अभी जाना है…..बाकी फिर किसी दिन तेरी योनि के खबर लेता हूँ” ये कह कर उसने मुझे अपने ऊपर से उठा दिया…..

में: पर तुम्हारा तो अभी तक हुआ नही…….

अभिषेक: कोई बात नही तुझे तो खुश कर दिया ना मेरे लिंग ने…..

में अभिषेक के बात सुन कर शरमा गयी….और उसके ऊपर से उठ कर खड़ी हो गयी….उसका लिंग अभी तना हुआ झटके खा रहा था….पता नही मुझे क्यों अभिषेक का लिंग इतना प्यारा लगने लगा था…..मेने नीचे बैठते हुए, उसके लिंग को अपने हाथ में पकड़ लिया…अभिषेक ने मुस्कुराते हुए कहा”क्या हुआ”

पर मेने उसकी बार का कोई जवाब नही दिया……और अपनी आँखें बंद करते हुए, उसके लिंग के मोटे सुपाडे को अपने मूह में भर लिया….मेरी योनि के पानी का स्वाद मेरे मूह में घुलने लगा…..में झड़ने के बाद एक दम मस्त हो चुकी थी…..और उसके लिंग के सुपाडे को अपने होंठो में दबा दबा कर चूसने लगी.”अहह आंटी चूस इसी इसका ख़याल तुझे ही रखना है”

अभिषेक ने मेरे सर को दोनो हाथों से पकड़ लिया……..में कभी उसके लिंग के सुपाडे को चुस्ती, तो कभी उसके लिंग के सुपाडे पर जीभ घुमाने लगती….और अपने दोनो हाथों से उसके बॉल्स को सहलाने लगी……में करीब ५ मिनिट तक उसके लिंग को ऐसे ही चुस्ती रही…..और फिर जब मुझे लगा कि, अब अभिषेक झड़ने वाला है, मेने उसके लिंग को मूह से बाहर निकाल लिया…..और उसके पेशाब वाले छेद को अपने जीभ के नोक से कुरदेने लगी…….

अभिषेक: अह्ह्ह्ह सीईईई आंटी मेरा छूटने वाला है……..

पर में नही रुकी, और फिर उसके लिंग से वीर्य की पिचकारिया छोटने लगी…जिससे मेरा पूरा फेस भर गया…..अभिषेक का लिंग रह रह कर झटके खा रहा था….जब वो शांत हुआ तो, में खड़ी हुई, और बाथरूम में चली गयी……अपने आप को साफ करके बाहर आई तो, अभिषेक अपने कपड़े पहन चुका था…..

हम दोनो के बीच कोई बात नही हो रही थी……मैने अपनी पैंटी और सलवार पहनी, और अभिषेक के साथ बाहर आकर अपने घर के तरफ चली गयी…..जाते हुए अभिषेक नी भी कुछ नही बोला…..

उस दिन के बाद मुझे पता नही क्या हो गया….मुझे अब रोज लिंग की ललक लगाने लगी थी…..जिसके लिए में बेशरम होकर तीन चार बार अभिषेक के पास जा चुकी थी……अभिषेक भी मेरी योनि के पूरी तसल्ली करवा देता था…..फिर एक दिन की बात है, मौसम बहुत ठंडा था……उस दिन भी सनडे था……और मेरी योनि में सुबह से खुजली होने लगी थी…..मेने अभिषेक को फोन किया…….पर अभिषेक ने इस बार मुझे साफ इनकार कर दिया……

उसके इस इनकार के कारण में एक दम से तड़प उठी, ऐसे ही दो तीन तक चला. पर अभिषेक ने मुझे इनकार करना जारी रखा…..आख़िर एक दिन में अपनी योनि की आग से मजबूर होकर उसके घर पहुच गयी….जब में और अभिषेक रूम में आई, तो में अभिषेक से पागलो के तरह चिपक गयी….और उसके पूरे चेहरे पर चुंबनो की बोछार कर दी…..

में: अभिषेक तुम क्यों मुझे तडफा रहे हो…….पहले तुमने खुद ही मेरी योनि में आग लगाई. अब तुम पीछे हट रहे हो..तो तां मेनू कमली कर देता…..दस की करा में…..

अभिषेक: आंटी आप यहाँ से चली जाओ….अब मुझे तुम से कुछ लेना देना नही है..

में: (अभिषेक की ये बात सुन कर में गुस्से में आ गयी) क्यों लगता है उस गस्ति उर्मिला से तेरी सुलहा हो गयी है……अभिषेक मेने पहले भी कहा था कि, वो तुम्हारी जिंदगी खराब कर देगी…..

अभिषेक: और तुम? तुम क्या कर रही हो?

अभिषेक की ये बात सुन कर में एक दम से चुप हो गये……पर अब में उसके लिंग की इस कदर दीवानी हो चुकी थी कि, में उसे इस तरह खोना नही चाहती थी.

में: फिर आख़िर तुम चाहते क्या हो…..क्यों मेरे अरमानो के साथ खेला…

अभिषेक: वेट वेट में कहाँ खेला तुम्हारे अरमानो के साथ….साफ साफ क्यों नही कहती जब योनि की आग ठंडी नही होती तो तुम्हे मेरे याद आती है….

में: अभिषेक तुम समझ नही रहे……….में नही रह सकती तुम्हारे बिना…..

अभिषेक: ओह्ह भूल जाओ मुझे…….मेरे आगे मेरे सारी जिंदगी पड़ी है….मुझे अपने बारे में भी सोचना है….तुम कब तक मेरा साथ दोगी….

में: अभिषेक में सारी उम्र तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूँ….तुम जैसे कहोगे में वैसे करने को तैयार हूँ……

अभिषेक: हम्म अच्छा….जैसे में कहूँ…..वैसा तुम करोगी ?

में: हां एक बार बोल कर तो देखो……

अभिषेक: ठीक है तो फिर सुनो….में और प्राजक्ता एक दूसरे से प्यार करते है….अगर तुम मुझे चाहती हो तो, मेरी शादी प्राजक्ता से करवा दो….

में: अभिषेक मेने पहले भी तुमसे कहा था कि, तुम प्राजक्ता से दूर रहोगे…उसकी तरफ देखने की सोचना भी मत….अर्रे तुम हो कौन जो उसके साथ शादी करने के ख्वाब देख रहे हो….
 
अभिषेक: क्यों ...! क्या कमी है मुझ मे……सब कुछ तो है…कुछ महीनो बाद मुझे गवर्नमेंट जॉब मिल जाएगी…दिखने में भी ठीक ठाक हूँ…..और मेरे लिंग का तो तुझे पता ही है……खुश रखूँगा तेरे बेटी को और साथ में तुझे भी….

में: नही अभिषेक ये नही हो सकता…..

अभिषेक: ज़रा सोच जब में तुम्हारी और तुम्हारी बेटी की योनि को एक साथ ठोकुंगा. तो मज़ा दुगना हो जाएगा….और अगर तू सोचती है कि ऐसा नही हो सकता तो, मुझे भूल जा……और हां ये बात याद रखना, कि प्राजक्ता आज भी मुझे उतना ही प्यार करती है……तू कैसे भूल गये कि, उसकी योनि के सील भी मेने तोड़ी है……और वो भी तेरी तरह मेरे लिंग के दीवानी है…….

अभिषेक: चल अभी मुझे काम पर जाना है……अगर तू मेरी शादी प्राजक्ता से नही करवा सकती तो मुझे भूल जा…..

में अभिषेक की बातें सुन कर बहुत परेशान हो गई…..मेने मन ही मन फैंसला कर लिया था…….कि चाहे कुछ भी हो जाए…..में प्राजक्ता की शादी उससे नही होने दूँगी………..११

में घर वापिस आ गयी, और अपने मन को समझा कर आगे की जिंदगी के बारे में सोचने लगी……कुछ दिन और बीत गये……पर मेरी योनि की आग मुझे जीने नही दे रही थी……में अक्सर रात को अभिषेक के लिंग के बारे में सोचते हुए, अपनी योनि में उंगली करती,

पर आग शांत होने की बजाए…….और भड़क उठती……..एक दिन में ऊपर छत पर बैठी धूप सेंक रही थी……छत पर आगे की तरफ एक रूम था….जिसमे अरशद नाम का आदमी अपनी नयी नयी पत्नी सलमा के साथ रहता था.उनकी शादी को अभी तीन महीने हुए थे….. मुझे उनके रूम से सलमा के सिसकने के आवाज़ आ रही थी…..रूम के एक साइड में विंडो थी……जो बारिश के पानी से भीग कर थोड़ी खराब हो गयी थी……

और उसमे जगह जगह दरार पड़ गयी थी…….

में अपने आप को रोक ना पे, और विंडो के पास जाकर दरार में अंदर झाँकने लगी……अंदर का नज़ारा देख मेरे पूरे बदन में आग लग गयी….अंदर अरशद बेड के किनारे नीचे खड़ा था…और सलमा बेड पर घोड़ी बनी हुई सीसीया रही थी…..

सलमा: जी नितंब में मत डालिए….बहुत दर्द होता है..

अरशद: चुप कर साली क्यों नौटंकी कर रही है………तेरी नितंब को पिछले दो महीनो से मार रहा हूँ..और अभी तक तुझे नितंब में लिंग लेने से दर्द होता है. में नही मानता…….

सलमा: सच कह रही हूँ…….

अरशद ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया, और अपने लिंग पर तेल लगाकर, अपने लिंग के सुपाडे को उसकी नितंब के छेद पर भिड़ा दिया…सलमा एक दम सिसक उठी. ओह्ह जी धीरे धीरे मारना……”

अरशद ने अपने लिंग को सलमा की नितंब के छेद पर दबाना शुरू कर दिया. मेरे देखते ही देखते, अरशद का पूरा लिंग सलमा की नितंब में समा गया…..और अरशद ने अपना लिंग सलमा की नितंब के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया……

सलमा: जी और ठोकिए ...आह बहुत मज्जा आ रहा है…

सलमा भी अब अपनी नितंब को पीछे की तरफ धकेलनी लगी थी. में ये सब देख कर बहुत हैरान थी, कि आदमी औरत की नितंब भी मारते है, और उससे ज़यादा हैरान सलमा पर थी, जो पहले दर्द से कराह रही थी….अब अपनी नितंब को पीछे की तरफ फेंक फेंक कर अरशद का लिंग नितंब में ले कर मज़े कर रही थी….ये सब देखते हुए मेरी बुरी हालत हो गयी……

में फॉरन नीचे आ गयी…….अपने रूम को अंदर से लॉक किया….तेज़ी से अपनी सलवार खोली, फिर सलवार के साथ साथ अपनी पैंटी को भी नीचे सरका दिया. मेने अपनी योनि पर अपनी उंगलिया घुमाना शुरू कर दिया…..मेरी योनि इतनी गीली हो चुकी थी, कि कुछ ही सेकेंड्स में मेरी उंगलिया भी पानी से सन गयी.

पर मेरी योनि में सरसराहट और बढ़ती जा रही थी…..मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि, में अपनी योनि में हो रही खुजली को कैसे शांत करूँ… में बेड पर गिरते हुए लेट गयी…..मेरे बदन में आग लगी हुई थी…..रह रह कर मुझे अभिषेक के याद सता रही थी…..उसके साथ बिताए हुए हर पल मेरी आँखों के सामने घूमने लगा था……..

मेरे ज़हन में उसकी कही बातें घूमने लगी……में उन सब बातों में उलझ कर रह गयी थी….में मन मार कर बाहर आ गयी…मेने देखा प्राजक्ता अपने रूम में उदास सी लेटी हुई थी………जब से अभिषेक यहाँ से गया था, वो बेहद उदास थी….में उसके पास गयी, और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए.

में: क्या हुआ बेटा उदास क्यों हो…..

प्राजक्ता: (रूखे अंदाज़ में) कुछ नही……

में: देख प्राजक्ता में कई दिनो से देख रही हूँ…..तू बहुत उदास रहती हो… बेटा मेने जो किया वो तुम्हारे भले के लिए ही किया है……अभिषेक तुम्हारे लायक नही है….

प्राजक्ता: (एक दम से प्राजक्ता की आँखों में आँसू आ गये) माँ में उससे प्यार करती हूँ…….में नही रह पाउंगी उसके बिना……..

में: (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए) चुप कर, तू जानती क्या है उसके बारे में…तुझे पता है, वो जो उर्मिला आंटी आई थी, उसकी साथ वो कौन थी…..

प्राजक्ता: (सुबकते हुए) हां जानती हूँ माँ……सब जानती हूँ…….अभिषेक ने मुझे सब बताया था……उनके बीच में जो होता था……

में: (प्राजक्ता की बात सुन कर जैसे मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गयी) फिर भी तू उससे प्यार करती है….तू ये कैसे कर सकती है….

प्राजक्ता: मुझे नही पता माँ…..उसने मुझे सच तो बताया ना…..तुम ही बताओ कौन अपने ऐसे राज़ किसी को बताता है……में अगर शादी करूँगी तो उससे ही करूँगी, नही तो में जहर खा कर मर जाऊंगी……

में: तू पागल हो गयी है प्राजक्ता….

प्राजक्ता: हां में पागल हूँ, उसके प्यार में पागल……अब जब में उसे अपना सब कुछ दे चुकी हूँ, तो कैसे किसी और के साथ शादी कर लूँ. तुम ही बताओ माँ….

मेने चुप कर बाहर आना ही ठीक ही समझा…….हमारी जिंदगी में ऐसा तूफान आया था.जो थमने का नाम ही नही ले रहा था…..प्राजक्ता से मेरी अगले दो दिन तक बात ही नही हुई,….प्राजक्ता ने दो दिन से कुछ नही खाया था…. वो मेरे सामने अंदर ही अंदर घुट रही थी…….में अपनी हालत से इतना मजबूर हो गयी थी, कि आख़िर मेने सोच ही लिया कि, अब प्राजक्ता को ही अपनी जिंदगी का फैंसला लेने दूं…..आख़िर अभिषेक भी ठीक ही कह रहा था……..

उसमे कोई कमी भी नही थी…..में प्राजक्ता के रूम में गयी, तो उसने मुझे देख कर फेस घुमा लिया….मेने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा”प्राजक्ता नाराज़ हो अपनी मम्मी से” प्राजक्ता ने कुछ नही बोला……

में: चल उठ कर खाना खा ले,

प्राजक्ता: मुझे भूख नही है……

में: तूने कल से कुछ नही खाया बेटा बीमार पड़ जाएगी…..

प्राजक्ता: मर भी जाऊ तो उससे आपको क्या फरक पड़ता है…

मेने प्राजक्ता को पकड़ कर अपने गले से लगा कर “ना बेटा ऐसा नही बोलते.तुझसे पहले में ना मर जाउ….तू अभिषेक से शादी करना चाहती है ना….जा कर ले. मुझे कोई ऐतराज नही….पर अगर अभिषेक ने तुझसे शादी करने के लिए मना कर दिया तो,

प्राजक्ता: (प्राजक्ता को तो जैसे मेरी बात पर यकीन ही नही हो रहा था…) क्यों नही करेगा…..वो भी मुझसे प्यार करता है……

में: चल ठीक है, जैसे तू कहेगी में राज़ी हूँ……

प्राजक्ता मेरे बात सुन कर एक दम से उछल पड़ी….और बेड से उतरते हुए बाहर जाने लगी…”अर्रे कहाँ जा रही है….खाना तो खा ले…….

प्राजक्ता: माँ अभिषेक को फोन करने जा रही हूँ….बाद में खाना खाती हूँ..
 
प्राजक्ता मेरे रूम में फोन करने चली गयी…….में वही उसके रूम में बैठी सोचने लगी कि, क्या जो में कर रही हूँ , वो सही है या ग़लत….पर इन सब सवालों के जवाब मेरे पास भी ना थे….प्राजक्ता करीब १५ मिनिट तक अभिषेक से फोन पर बात करती रही थी…..और जब वो मेरे रूम में आई तो, उसका चेहरा उतरा हुआ था…..उसके आँखें आँसू से भरी हुई थी…..

वो मेरे पास आई, और फिर मेरे गले लग कर रोने लगी…..में उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी…….पर वो बेसूध रोए जा रही थी….”आख़िर हुआ क्या है बता तो सही….”

प्राजक्ता: (रोते हुए) माँ तुमने तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ ?

में: क्या हुआ मेने क्या क्या बता तो सही…..

प्राजक्ता: माँ मुझे अभिषेक ने सब बता दिया है…..तुम उससे मिलने जाती थी ना…

प्राजक्ता की बात सुन कर मेरे होश उड़ गये…….मुझे यकीन नही हो रहा था कि, उसने सब प्राजक्ता को बता दिया था….”अर्रे में तो वैसे ही गयी थी उससे मिलने के लिए सच”

प्राजक्ता: (मुझे अपने दूर धकेलते हुए) झूट मत बोलो…..तुम बहुत गंदी हो….अपनी बेटी की उम्र के लड़के के साथ छि…..तुमने मेरा सब कुछ लूट लिया माँ……

में: (में प्राजक्ता के सामने एक दम शर्मिंदा हो गयी) पर उसने कहा क्या ?

प्राजक्ता: अब मुझे सब बताना पड़ेगा क्या….

में कुछ ना बोल पाई, और उसके रूम से बाहर आकर अपने रूम में आ गयी…गुस्से से मेरे हाथ पैर काँपने लगे…..मेने अभिषेक को फोन लगाया.

अभिषेक: हेलो…..

में: हरामजादे आख़िर दिखा ही दी ना तूने अपनी औकात…..

अभिषेक: हेलो तमीज़ से बोलो…….

में: अब तू मुझे तमीज़ सिखाएगा……मेने सोचा था कि, अगर तुम्हारी शादी प्राजक्ता के साथ कर दूं, तो तू शायद सुधर जाए…..पर कुत्ते के पूंछ कभी सीधी नही होती…..में ये भूल गयी थी…क्या कहा तूने प्राजक्ता को…

अभिषेक: मेने क्या कहा..मेने तो सिर्फ़ इतना कहा था कि, हम सुहागरात तीनो साथ मिल कर मनाएँगे…….

में: घिन आती है मुझे तुम्हारी सोच पर……..तुमने एक बार भी प्राजक्ता के बारे में नही सोचा……वो पागलो की तरह तुमसे प्यार करती है…भूखी रह कर जान देने पर तुली हुई थी…….और तू छि……तू तो आदमी के नाम पर भी कलंक है……..

अभिषेक: तो में कौन सा प्राजक्ता से प्यार नही करता……..में भी तो उससे प्यार करता हूँ…….बस फरक ये है कि, में तुम दोनो से एक जैसा प्यार करता हूँ……अब जो मेरे दिल में है मेने उससे कह दिया…..बाकी तुम लोग सोचो क्या करना है क्या नही करना है…….

में: सही हुआ जो वक़्त रहते तूने अपनी औकात दिखा दी….

अभिषेक: मेरे पास ज्यादा टाइम नही है ! तुम सोचो क्या करना है…..

ये कहते हुए उसने फोन रख दिया…..में वही बैठे रोने लगी….पता नही कब दोपहर हुई कब शाम और कब रात…..में और प्राजक्ता अपने अपने कमरो में रोती रही…..करीब ८ बजे मेरे रूम के डोर पर नॉक हुआ, मेने डोर खोला, तो देखा सामने प्राजक्ता खड़ी थी…….उसके हाथ में खाने की प्लेट थी….

प्राजक्ता: माँ खाना खा लो……

में: (अपने आँसू को साफ करते हुए) तुमने खा लाया….

प्राजक्ता: नही थोड़ी देर बाद खा लूँगी….

में: अच्छा चल खाना अपने रूम में लेकर चल…साथ में खाना खाते है.

प्राजक्ता प्लेट लेकर अपने रूम में चली गयी…….में बाथरूम में गयी…..और सोचने लगी कि, शायद प्राजक्ता समझ चुकी है, कि अभिषेक उसके लायक नही है…उसकी सच्चाई अब प्राजक्ता की आँखों के सामने आ चुकी थी….मेरे मन का बोझ थोड़ा सा हल्का हुआ….में फ्रेश होकर बाहर आई, और प्राजक्ता के रूम की तरफ जाने लगी. मेरे नज़र मेरे रूम में गयी…..प्राजक्ता फोन पर किसी से बात कर रही थी. में सीधा प्राजक्ता के रूम में चली गयी….

थोड़ी देर बाद प्राजक्ता रूम में आ गयी, और मेरे सामने बेड पर बैठ कर खाना खाने लगी…….”किससे बात कर रही थी”

प्राजक्ता: (मेरी तरफ देखते हुए) अभिषेक से…..

में: अब अभिषेक से बात करके क्या करना है तुझे……..

प्राजक्ता: माँ वो में तुमसे कहना चाहती थी कि,

में: हां बोल ना क्या कहना चाहती थी तू…

प्राजक्ता: माँ मुझे आप से कोई शिकायत नही है……में उस बात को लेकर आप से बिकुल भी नाराज़ नही हूँ कि, अभिषेक के साथ आप ने क्या किया……और मुझे आगे भी कोई ऐतराज नही होगा अगर मुझे अभिषेक को आपके साथ शेर करना पड़े…..

प्राजक्ता की ये बात सुन कर खाने का नीवाला मेरे गले में ही अटक गया. में एक टक हैरान होते हुए, प्राजक्ता को घुरे जा रही थी…रूम में खामोशी से छा गयी थी………प्राजक्ता नीचे अपनी प्लेट में देख रही थी…..

में: प्राजक्ता तू होश में तो है ? ये क्या बके जा रही है…….

प्राजक्ता: (घबराई हुई आवाज़ में)हां माँ में होश में हूँ…मेने देखा है आपको तड़पते हुए…..मुझे सब मंजूर है माँ…..

में: (खाने की प्लेट एक साइड में रखते हुए) तू पागल हो गयी है….पता नही उसने तेरे दिमाग़ में क्या भर दिया है….

प्राजक्ता: प्लीज़ मान जाओ ना माँ…….में नही जी पाउंगी, उसके बिना.बोलो तुम उससे प्यार नही करती……

में: अब में तुम्हें कैसे समझाऊ प्राजक्ता…..ऐसा नही होता है….

प्राजक्ता: प्लीज़ माँ मान जाओ, ना मेरी खातिर……हम दोनो आपको बहुत खुश रखेंगे…….

में: मुझे कुछ वक़्त चाहिए सोचने के लिए……

प्राजक्ता: (मेरे गाल को चूमते हुए) आइ लव यू मोम…….
 
मेने खाना खाया, और अपने रूम में चली गयी…..में इस बारे में रात भर सोचती रही……फिर सुबह हुई तो, में अपने रूम से बाहर आई,. तो देखा प्राजक्ता पहले से उठ कर नहा चुकी थी…….और खाना बना रही थी…

में: अर्रे वाह आज इतनी सुबह सुबह कैसे उठ गयी…..

प्राजक्ता ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया…..में बाथरूम में गयी, और नहा धो कर वापिस आ गयी…….प्राजक्ता नाश्ता लगा चुकी थी….हम ने साथ में नाश्ता किया, और फिर में बर्तन उठाने लगी…….

प्राजक्ता: माँ फिर क्या सोचा तुमने……

में: अब में तुमसे क्या कहूँ प्राजक्ता……जैसे तुम्हारा दिल करता है वैसे करो.

वो तो बेड पर ही उछल पड़ी….और बेड से उतार कर मुझे गले लगा लिया….फिर मेरे कान में धीरे से फुस्फुसाइ…..

प्राजक्ता: माँ तू मेरी सौतन बनेगी ? (फिर प्राजक्ता जोर जोर से हँसने लगी…….

में: (उसकी ये बात सुन कर में एक दम से दंग रह गयी)चुप कर बेशरम. अपनी माँ के साथ ऐसे बात करते है…..

में किचन में आ गयी…..पर सच कहूँ तो, मेरे मन में भी अजीब से हलचल मच गयी थी…प्राजक्ता की आवाज़ मुझे आई, वो फोन पर बात कर रही थी…मुझे मालूम था कि, वो अभिषेक से ही बात कर रही थी..थोड़ी देर बाद प्राजक्ता ने मुझे रूम में आने को कहा…में अपने रूम में गयी…

में: क्या है ?

प्राजक्ता: लो अभिषेक से बात करो.वो आप से बात करना चाहता है……

में( मेने प्राजक्ता से फोन लेकर कान पर लगाया) हेल्लो.

अभिषेक: बहुत जलदी मान गयी आप…..

उसकी इस बात पर में खामोश हो गयी….

अभिषेक: अच्छा सुनो. हम इस सनडे को शादी कर लेंगे…..सबसे पहले तुम एक काम करो…..अपने सब किरायेदारो को रूम खाली करने के लिए बोल दो…..

में: क्यों ? ऐसे अचानक वो कहाँ जाएँगे…

अभिषेक: अर्रे कह देना कि प्राजक्ता की शादी है, मेहमान आएँगे तो उनको ठहराने के लिए जगह भी तो होनी चाहिए….और उनको बता कर तुम प्राजक्ता को लेकर मार्केट में आ जाओ……में तुम दोनो का वही वेट कर रहा हूँ

में: मार्केट में क्या करना है….

अभिषेक: अर्रे भाई शादी है, तो थोड़ी शॉपिंग करना तो बनता है ना…

में: ठीक है हम दोपहर को १ बजे आ जाएँगे…

उसके बाद मेने अपने सभी किराएदारो से बात की, और उन्हे २ दिन में कमरे खाली करने को कहा….दोपहर को में प्राजक्ता के साथ तैयार होकर, मार्केट आ गयी… हम अभिषेक की बताई हुई जगह पर पहुच गयी…वहाँ पर अभिषेक हमारा इंतजार कर रहा था…उस दिन अभिषेक नॉर्मल बिहेव कर रहा था….

प्राजक्ता शॉपिंग को लेकर इतनी एक्ससाईटेड थी कि, उसे ये ख़याल भी नही था कि, अभिषेक किस शर्त पर उससे शादी के लिए तैयार हुआ था….में बार बार प्राजक्ता की तरफ देख रही थी….पर मुझे उसके चेहरे पर कोई शिकन नज़र नही आ रही थी… मुझे ऐसा लग रहा था. जैसे वो अभिषेक के साथ शादी करने के लिए बहुत खुश है….

में औलाद के मोह में बँधी सब कुछ चुप चाप देख रही थी…शॉपिंग के बाद हम दोनो घर वापिस आ गये….अभिषेक अपने घर चला गया….अगले कुछ दिनो में हमारे सारे किरायेदार रूम खाली कर चले गये….मेने अपने जेठ जेठानी और प्राची को फोन पर ही बता दिया था , सब मेरे इस फैंसले को सही मान रहे थे…..पर असल बात उनको पता नही थी..

खैर वो दिन भी आ गया………जब प्राजक्ता और अभिषेक की शादी होनी थी…..मेरे कहने पर अभिषेक प्राजक्ता के साथ कोर्ट मॅरेज करने के लिए तैयार हो गया. क्यों कि में ये पक्का कर लेना चाहती थी कि, मेरी बेटी के साथ धोका ना हो….हम सब लोग कोर्ट गये, और प्राजक्ता और अभिषेक की शादी करवा दी गयी…..शाम को घर में मेरे जेठ जी का परिवार और प्राची का पति और उसके सास ससुर आए थे…इस लिए घर में छोटी सी पार्टी अरेंज करी थी…

अगले दिन सुबह सब अपने अपने घर के रवाना हो गये…..आज मेरे और प्राजक्ता के लिए सुबह थी….और आज के बाद मेरी लाइफ पूरी तरह से बदल जानी वाली थी….शायद में इस समाज की पहली औरत होने वाली थी….जो अपनी बेटी के साथ साथ उसके पति के साथ एक ही सेज पर ठुकने वाली थी……..

डर भी लग रहा था…..और इस नये अनुभव के बारे में सोच सोच कर मेरे पूरे बदन में सरसराहट सी दौड़ जाती…..मन में भी अजीब सी हलचल बनी हुई थी…….”हाईए कैसे में ठुकुन्गि….अपनी बेटी के सामने ……कैसे अपने बेटी को अपनी योनि में लिंग लेते देखूँगी….ये सोच कर ही मेरी योनि काँप जाती….
 
सभी मेहमानो के जाने के बाद अभिषेक घर से निकल गया….जब मेने प्राजक्ता से पूछा तो उसने कहा कि वो उस को भी कुछ बता कर नही गया….दोपहर को अभिषेक घर वापिस आया…..में प्राजक्ता के साथ किचन में खाना बना रही थी… अभिषेक सीधा किचन में आ गया….मेरा दिल उस समय थम गया.जब उसने मेरे सामने ही प्राजक्ता को पीछे से अपनी बाहों में भर कर उसके गर्दन पर अपने होंठो को रख दिया….

मेने शरमा कर दूसरी तरफ मूह कर लिया……मुझे प्राजक्ता के सिसकने की आवाज़ आई “आह अभिषेक छोड़ो ना” मेने अपनी कनखियों से देखा तो, वो प्राजक्ता के ब्लाउस के ऊपर से उसकी स्तनों को मसल रहा था….और प्राजक्ता अपने एक हाथ को पीछे लेजा कर उसके सर को थामे हुए थी…..और उसने अपने सर को अभिषेक के कंधे पर रख कर आँखें बंद कर रखी थी…..फिर अभिषेक बाहर चला गया…..

आज मेरे लिए एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था. में कैसे अभिषेक और प्राजक्ता के साथ एक बिस्तर पर नही नही मुझसे नही होगा. वैसे भी अभिषेक पर अब सिर्फ़ प्राजक्ता का हक़ है. अभी तो उसने भोलेपन में ये सब करने के लिए हां कर दी. पर कौन सी पत्नी अपनी पति को किसी दूसरी औरत के साथ शेअर करना पसंद करेगे. बाद में आगे चल कर कही गड़बड़ हो गयी तो, नही में अभी अभिषेक से बात करती हूँ. ये सोचते हुए, मैं प्राजक्ता के रूम में चली गयी…..जहा पर अभिषेक बैठा टीवी देख रहा था. मुझे देखते ही उसने टीवी का वॉल्यूम कम कर दिया. और मेरी तरफ देखने लगा….मेने हिम्मत करते हुए, अभिषेक से कहा.

में: अभिषेक ये सब करना ज़रूरी है क्या ?

अभिषेक: तुम किस बारे मे बात कर रही हो..साफ साफ बताओ ना.

में: (थोड़ी देर और हिम्मत जुटाने के बाद) एक साथ सहवास करने के बारे मे. में अपनी बेटी के सामने नही कर पाउंगी ये सब.

अभिषेक: ठीक है. जब तक तुम नही मानोगी, तो मैं और प्राजक्ता भी अपनी सुहागरात नही मनाएँगे…

मैं: ये क्या बच्चो वाली ज़िद्द है. देखो अभिषेक प्राजक्ता अब तुम्हारी पत्नी है. और तुम उसके पति. कोई भी औरत अपने पति को दूसरी औरत के साथ बरदाश्त नही कर सकती. और मैं तो उसकी माँ हूँ. मैं कैसे अपनी बेटी के प्यार को शेअर कर सकती हूँ.

अभिषेक: अच्छा इस बारे में प्राजक्ता से ही पूछ लो.

में अभिषेक को रोकना चाहती थी. पर उसने मेरे कुछ कहने से पहले ही प्राजक्ता को आवाज़ लगा दी. प्राजक्ता अभिषेक की आवाज़ सुन कर रूम में आ गयी. “क्या हुआ अभिषेक “ प्राजक्ता ने हम दोनो की तरफ देखते हुए कहा. “देखो ना तुम्हारी माँ क्या कह रही है” अभिषेक ने मुस्कुराते हुए, प्राजक्ता की तरफ देख कर बोला. “क्या हुआ माँ कोई प्राब्लम है क्या”

अब मैं कहती. मैं थोड़ी देर वहाँ चुप खड़ी रही. और जब मेरे कुछ बोलने की हिम्मत ना हुई, तो में रूम से बाहर आकर अपने रूम में चली गयी….मुझे अभिषेक और प्राजक्ता की बातों की आवाज़ हलकी हलकी आ रही थी. पर वो क्या बात कर रहे थे. मुझे समझ नही आ रहा था.

थोड़ी देर बाद प्राजक्ता मेरे रूम में आई, और मेरे पास आकर बेड पर बैठ गयी. थोड़ी देर के लिए वो रूम में इधर उधर देखती रही, और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली.

प्राजक्ता: माँ प्लीज़ मान जाओ ना. तुम्हे मेरी खुशी की ज़रा भी परवाह नही है क्या…..प्लीज़ मान जाओ ना.

ये कहते हुए प्राजक्ता रूम से बाहर चली गयी….में उसे हैरत से जाते हुए देख रही थी…..और सोच रही थी कि, आख़िर अभिषेक ने प्राजक्ता पर ऐसा क्या जादू कर दिया कि, वो मेरे सामने ही अभिषेक से ठुकने के लिए तैयार हो गयी है….मैं अभी यही सोच ही रही थी कि, प्राजक्ता एक बार फिर से रूम मे आई….उसके हाथ मे एक शॉपिंग बॅग था…उसने वो शॉपिंग बॅग मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा “ये तुम्हारे लिए अभिषेक लाया है. और आज रात को आपको इसे पहनना है” वो बॅग मेरे सामने रख कर बाहर चली गयी…..

मेने वो बॅग उठाया, और उसमे से वो ड्रेस निकाली, उसके पिंक कलर की शॉर्ट और स्लीव्लेस्स नाइटी थी…..उसमे स्तनों की जगह पर नेट का कपड़ा लगा हुआ था….और ब्रा शेप सी बनी हुई थी….जिसमे आगे की तरफ तीन हुक्स थे….अब मैं खुद भी अपनी योनि के हाथों लाचार महसूस कर रही थी…..

आख़िर वो घड़ी भी आ गयी……रात को खाना खाने के बाद प्राजक्ता मेरे रूम मे आई……उसका चेहरा एक दम खिला हुआ था….उसकी खुशी उसके चेहरे को देखते ही बन रही थी….उसने अंदर आते ही मुझे बाहों में भर लाया, और मेरे गालो को चूमती हुई बोली, “माँ जल्दी से तैयार हो जाओ……..अभिषेक वेट कर रहा है.प्लीज़ जल्दी करना….ये बोल कर प्राजक्ता बाहर चली गयी…..

मैं बेड से खड़ी हुई, और नाइटी को उठा कर एक बार देखा. और फिर मन ही मन सोचा.”आख़िर तू भी तो चाहती है कि, अभिषेक तुझसे भी प्यार करे…..तेरी भी तो कुछ ज़रूरते है…उन्हे कौन पूरा करेगा….अब अगर प्राजक्ता को कोई एतराज नही तो मैं क्यों इस भोले पन का ढोंग करू” मेने अपने सारे कपढ़े उतार दिए….और फिर वो नाइटी पहन कर मिरर के सामने आई तो मैं खुद पर शर्मा गयी….

वो स्लीव्लेस्स नाइटी मेरी जाँघो तक मुश्किल से आ रही थी…..उसमे मेरा जिस्म एक दम कसा हुआ लग रहा था….ऊपर से मेरी स्तनों की शेप उसमे अलग ही नज़र आ रही थी….. में घबराते हुए, अपने कमरे से बाहर निकली, और काँपते हुए कदमो से चलते हुए, प्राजक्ता के रूम के डोर के पास पहुची.

अंदर से प्राजक्ता और अभिषेक के हँसने की आवाज़ आ रही थी…..डोर पर खड़े हुए मेरे हाथ पैर एक दम सुन्न पड़ गये थी….आख़िर मैं इस हालत मे अंदर जाऊ तो जाऊ कैसे. तभी रूम मे एक दम से सन्नाटा छा गया….जैसे प्राजक्ता और अभिषेक को मेरे रूम के बाहर खड़े होने का अंदेशा हो गया हो….मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था… साँसे ऐसे चल रही थी…मानो मीलो दौड़ कर आई हूँ….

मैं अपने सांसो को थामने की कोसिश करते हुए, डोर के बाहर खड़ी थी….और अंदर जाने के लिए हिम्मत जुटा रही थी….तभी एक दम से डोर खुला….सामने अभिषेक खड़ा था….उसने एक बार ऊपर से लेकर नीचे तक मेरे बदन को देखा, और फिर मेरा हाथ पकड़ कर अंदर लेजाने लगा….मैं किसी कट्पुतली की तरह उसके साथ खिंचती चली गयी…..वो मेरी स्तनों को घुरे जा रहा था….मेरी नाइटी में से मेरे काले रंग के मोटे स्तनाग्र साफ झलक रहे थे….

में शरम के मारे अपना सर भी ऊपर नही उठा पा रही थी….रूम के बीचो बीच आकर अभिषेक ने मेरा हाथ छोड़ दिया….और फिर मुझे पीछे से डोर बंद होने की आवाज़ आई….अभिषेक अंदर से डोर को लॉक कर रहा था….वैसे तो घर में अब हम तीनो के सिवाए कोई नही था…..पर उसके डोर को लॉक करने की आवाज़ सुन कर मुझे ये अहसास होने लगा कि, अब आगे क्या होने वाला है….

.फिर मुझे अपने पीछे से अभिषेक मेरी तरफ बढ़ता हुआ महसूस हुआ…मेने हिम्मत करके, अपनी नज़रे ऊपर उठाए, तो देखा सामने प्राजक्ता बेड पर रेड कलर की नाइटी पहनी हुई घुटनो के बल बैठी थी…..उसके माथे पर ज़रा भी शिकन नही थी. वो एक दम नॉर्मल लग रही थी……

तभी अभिषेक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया……उसकी बॉडी मेरी बॅक से सट गयी थी…..मेने फॉरन ही अपना सर फिर से झुका लिया….और अगले ही पल अभिषेक के दोनो हाथ मेरी कमर के बगलो से होते हुए, मेरे पेट पर आ गये….उसने पीछे से मेरे को बाहों में जाकड़ लिया था….मुझे उसका तना हुआ लिंग अपनी नितंब की दरार में साफ महसूस हो रहा था….जिसके कारण मेरे पैर मेरा साथ छोड़ने लगे थी…..वो धीरे धीरे अपने दोनो हाथों को मेरे पेट पर घूमाते हुए सहला रहा था…..और पीछे से अपनी कमर को हल्का हलका सा घुमा रहा था….
 
मुझे शरम भी आ रही थी…..और अभिषेक के लिंग को अपनी नितंब की दरार मे महसूस करके में एक दम से गरम भी होने लगी थी….फिर मुझे उसकी साँसे मेरे कान पर महसूस हुई, मेरा पूरा जिस्म एक दम सिहर गये….

मेने अपने दोनो हाथों को अभिषेक के हाथो पर रख कर दबा दिया….

.”आज तेरे पिछले छेद का उद्घाटन करना है…..सुहागरात पर मुझे ये तोफा चाहिए…बोल मुझे अपनी नितंब मारने देगी ना”

अभिषेक की ये बात सुन कर तो जैसे मेरे दिल की धड़कने ही थम गयी….उस दिन मेने अरशद को सलमा की नितंब मारते हुए देखा था. वही सीन मेरी आँखो के सामने घूम गया….दूसरा अभिषेक ने ये बात धीरे नही बोली थी….प्राजक्ता को ज़रूर इस बात को सुन लिया होगा…..

मैं एक दम से शरमसार हो गयी…..फिर अभिषेक ने अपने होंठो को मेरे गले पर रख दिया….और मेरी गरदन को चूमने लगा…..मेरी आँखें अभिषेक के होंठो को अपनी नेक पर महसूस करते ही, बंद हो गयी….पूरा बदन कांप गया….मेरे हाथ अभी भी उसके हाथों के ऊपर थे…..और वो अपने हाथों से मेरे पेट को मसलते हुए, मेरी स्तनों की तरफ बढ़ रहा था…..ये जानते हुए भी कि प्राजक्ता बिकुल मेरे सामने बैठी है…..मैं एक दम मदहोश सी होती हुई उसके हाथ को रोक नही पा रही थी…..धीरे धीरे उसके दोनो हाथ मेरी स्तनों पर आ पहुचे…….और नाइटी के ऊपर से मेरे स्तनों के स्तनाग्र को अपनी उंगलियों में लेकर मसलने लगा……”आह अभिषेक प्राजक्ताआ” मैं एक दूं सिसक उठी…..

तभी मुझे अहसास हुआ कि, मेरे घुटनो से कुछ टकरा रहा है…..

मेने सर झुका रखा था……मेने अपनी आँखें खोल कर देखा तो, वो बेड का किनारा था…..मदहोशी के आलम में मैं कब बेड तक पहुच गयी मुझे पता ही नही चला….फिर अचानक से उसने मुझे बेड पर धकेल दिया…..मैं बेड पर जा गिरी…जैसे ही मेने आँखे खोली तो मेने देखा कि मेरी आँखो के सामने प्राजक्ता वैसे ही बैठी हुई थी…मैं बेड पर पेट के बल थी….फिर मुझे अपनी जाँघो पर कुछ महसूस हुआ….मेने लेटे हुए, पीछे गर्दन घुमा कर देखा तो, अभिषेक मेरी जाँघो पर बैठा था…..उसके वजन के कारण मैं हिल भी नही पा रही थी. पता नही कब उसने अपना पायजामा उतार दिया था….अब उसके बदन पर सिर्फ़ अंडरवेर था…..जो आगे से उभरा हुआ था…..

उसने अपने दोनो हाथों को मेरी जाँघो पर रख दिया….और मेरी जाँघो को मसलते हुआ, ऊपर की तरफ बढ़ने लगा….मेरे पुर बदन मे सनसनी दौड़ गयी….मेरे आँखें फिर से बंद होने लगी….मेरे फेस के बिलकुल सामने बैठी प्राजक्ता अपनी आँखें फाडे देख रही थी….मेने अपने चेहरे को अपने हाथो से ढक लिया…..

अभिषेक मेरी जाँघो को मसलते हुए, धीरे धीरे ऊपर बढ़ रहा था…. मेने नाइटी के नीचे पैंटी भी नही पहनी थी…..फिर अभिषेक ने एक झटके से मेरी नाइटी को मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया…..मेरी नितंब मेरी बेटी प्राजक्ता के आँखो के सामने नंगी हो गयी होगी……मैं यही सोचते हुए शरम से मरे जा रही थी……उसने अपने दोनो हाथों से मेरे नितंबो को फेला कर मसलना शुरू कर दिया…..मैं एक दम से सिसक उठी……मेने सिसकते हुए अभिषेक को रुकने के लिए कहा….

पर वो मेरी एक नही सुन रहा था…..उसने मेरे दोनो नितंबो को पकड़ कर फेला दिया…..फिर थोड़ी देर वैसे ही बैठा रहा…..मैं नीचे चद्दर मे अपने हाथों से अपने मूह को ढके हुए थी…..इसीलिए मैं देख तो नही पा रही थी. पर मुझे अहसास हो रहा था कि, प्राजक्ता मेरे आगे से उठ कर अभिषेक के बगल मे जाकर बैठ चुकी थी…..शायद अभिषेक ने उसे इशारे से पास बुलाया था….ये सोच कर मैं शरम से दोहरी हो गयी……मेरी अपनी बेटी मेरे नंगे नितंबो को देख रही है……और अभिषेक ने जिस तरह से मेरे नितंबो को फेला रखा था…मुझे यकीन है कि, उसे मेरी योनि के लिप्स भी दिख रहे होंगे….

फिर मुझे अपनी जाँघो पर वजन हल्का होता हुआ महसूस हुआ……फिर मुझे कुछ सरकने की आवाज़ आई…….और अगले ही पल एक गरम और सखत चीज़ मेरी नितंब के छेद पर आ लगी…..में एक दम सिसक उठी…..वो चीज़ कुछ और नही….अभिषेक के लिंग का मोटा और गरम सुपाडा था……

जैसे ही मेने अपनी नितंब के छेद पर अभिषेक के लिंग के सुपाडे को महसूस किया….मेरा पूरा बदन एन्ठ गया…..योनि के अंदर सरसराहट दौड़ गयी…..मेने अपने चेहरे से हाथों को हटा लिया. और मेरे मूह से सिसकारी ना निकले.इसलिए मेने बेडशीट को अपने दाँतों में दबा लिया…….पर फिर भी मूह से घुटि हुई आह निकल गयी…..

अभिषेक के लिंग के सुपाडे की गरमी को महसूस करते ही…..मेरी जांघे अपने आप खुलने लगी…..फिर मुझे कुछ पच पच की आवाज़ आने लगी…..में शरम से अपना सर घुमा कर भी नही देख सकती थी….पर वो आवाज़ और उँची होती गयी. और जब मेरे सबर का बाँध टूटा तो, मेने पीछे की तरफ सर घुमा कर कनखियो से देखा…..तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये…..प्राजक्ता और अभिषेक एक दूसरे के होंठो में होंठ डाले हुए, स्मूच कर रहे थे…..

मैं हैरत से ये सब देख रही थी…..कि मेरी अपनी बेटी मेरी मौजूदगी में इतनी वाइल्ड्ली स्मूच कर रही है. उसको तो जैसे किसी बात की परवाह ही नही थी…..अभिषेक ने अपना एक हाथ प्राजक्ता की पीठ के पीछे से घुमा कर उसके नितंबो पर रखा हुआ था……और दूसरे हाथ से वो प्राजक्ता की नाइटी के ऊपर से ही उसकी स्तनों को मसल रहा था…..प्राजक्ता अपनी दोनो बाहों को अभिषेक की कमर पर लपेटे हुए उससे एक दम चिपकी हुई थी..

ये देख कर मेरी योनि में सरसराहट और बढ़ गयी……फिर अचानक से अभिषेक ने प्राजक्ता के होंठो से अपने होंठो को अलग किया….और फिर मेरी जाँघो से ऊपर उठाते हुए, मुझे एक झटके से सीधा पीठ के बल लेटा दिया….मैं एक दम से हड़बड़ा गयी…..इस पहले कि मैं संभाल पाती…..अभिषेक ने मेरी दोनो टाँगो को घुटनो से पकड़ कर ऊपर उठा दिया….और फिर मेरी टाँगो को फेला दिया…..अगले ही पल उसके लिंग का सुपाडा मेरी योनि के छेद पर भिड़ा हुआ था….मेने अपनी अध खुली आँखों से देखा…..प्राजक्ता अभिषेक की चेस्ट पर अपनी हथेलयों को फेर रही थी….अभिषेक ने अपने लिंग के सुपाडे को मेरी योनि के छेद पर दबाना शुरू कर दिया….

और उसके लिंग का सुपाडा मेरी योनि की फांको और छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…मैं मस्ती में एक दम से सिसक उठी…….और सीईईई और सिसकने की आवाज़ मेरे कानो में गूँज उठी….ये प्राजक्ता की आवाज़ थी….जो अभिषेक की ओर वासना से भरी नज़रों से देखते हुए सिसकारियाँ भर रही थी….उसने अभिषेक के फेस को अपनी तरफ घुमाया, और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. अभिषेक बेदर्दी से प्राजक्ता के होंठो को चूसने लगा…….एक तो योनि में लंबा और मोटा लिंग ऊपर से मेरी बेटी अपने होंठो को चुसवा रही थी…….मेरी योनि की दीवारो ने अभिषेक के लिंग को अपने अंदर जकड़ना शुरू कर दिया…….फिर एक तेज मस्ती से भरी सरसराहट मेरी योनि मे उस समय दौड़ गयी. जब अभिषेक के लिंग का सुपाडा मेरी योनि की दीवारो से बुरी तरहा रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आया. मैं एक दम से मचल उठी. और अपने सर के नीचे रखे तकिये को दोनो हाथो से पकड़ लिया..
 
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