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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

मेरी पहली चुदाई मेरे कुत्ते से

मेरा नाम शबनम है. मेरे परिवार मे सिर्फ़ मम्मी, पापा, मेरे बड़े भैया और मैं हैं. हां, और हमारा अल्सेशन कुत्ता भालू. जब मैं 11 साल की थी हम एक छ्होटे से घर में रहते थे. एक किचन, बाथरूम और दो कमरे. भैया एक कमरे में सोते थे और मैं मम्मी पापा के साथ एक कमरे में.

घर छ्होटा होने के कारण मैने कई बार पापा और मम्मी को प्यार करते देखा था. पापा मेरी मम्मी के उपर चढ़ जाते थे और मम्मी अपनी लातें फैला देती थीं और फिर पापा अपना लंड उनके अंदर डाल देते थे. फिर पापा उपना लंड मम्मी की चूत में अंडर बाहर करते थे और कुछ देर बाद मम्मी सिसकारियाँ लेने लगती थी. मुझे लगता था के उन दोनो को खूब मज़ा आ रहा है.

उन दिनो में मुझे यह बातें अजीब नहीं लगी. मैं नादान थी और मुझ पे अभी जवानी का जोश नही पड़ा था. जब मैं 12 साल की हुई तो मेरा बदन बदलने लगा. मेरी छाती पे मेरे बूब्स आने लगे, मेरी चूत पर हल्के हल्के बॉल उगने लगे.

मैं जवान होने लगी. मैने आजमाया कि अपने बूब्स को सहलाने से मुझे अजीब सा मज़ा आता है. जब मैं अपनी चूत पर हाथ फेरती तो बहुत ही अछा लगता.

जब मैं मम्मी पापा को चुदाई करते देखती तो जी करता के मैं भी उनके साथ यह प्यार का खेल खेलूँ: पापा मेरे भी बूब्स को दबाएँ और अपना लंड मेरे अंडर डालें और में उनका लंड मुँह में लूँ और चूसू, जैसे मम्मी करती थी. फिर स्कूल में मेरी सहेलियों ने मुझे बताया के यह चुदाई का क्या मतलब है. मेरी सहेली लता ने तो अपने पड़ोसी लड़के के साथ ट्राइ भी किया था.

उसने बताया के लड़के के लंड को हाथ मे लेके सहलाने से वो बढ़ हो जाता है और वो लोहे जैसे सख़्त अकड़ जाता है और उसको फिर मुँह में लेके चूसने में बहुत मज़ा आता है. उसने अपने फ्रेंड का लंड अपनी चूत पे भी उपर नीचे रगड़ता था.

उसको बहुत अछा लगा था. उसने बताया के लंड चूसने के बाद वो झार जाता है और उसमे से खूब सारा मलाई जैसा पानी निकलता है जिसको पीने में बहुत मज़ा है.

उसने बताया के वो अब अपने फ्रेंड का लंड अंदर भी लेना चाहती है. सिर्फ़ मौका मिलने की बात है. यह बातें सुनते मेरे अंदर अक्सर एक अजीब सी गरमाइश उठती थी और मेरा दिल करता था के मैं भी यह बातें आज़माऊ. तब तक मैं 13 साल की हो गयी थी.

एक दिन मैं स्कूल से आकर होमवर्क करने को बैठी. मम्मी, पापा दोनो ऑफीस गये हुए थे और मैं घर में अकेली थी. गर्मी थी इस लिए मैने सिर्फ़ टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे.

हमारा कुत्ता भालू कमरे में आकर मेरे पास बैठा था. मेरा मन होमवर्क पर नहीं था. मेरे सर में तो सेक्स के ख्याल आ रहे थे जैसे लता ने सुनाए थे. मैं बेड पे पीछे लेट गयी और अपने बूब्स को, जो अब साइज़ 34 के हो गये थे, अपने हाथों के साथ मसल्ने लगी.

फिर मैने अपनी टी-शर्ट उतार दी ताके मेरे हाथ अच्छी तरह सब जगह पहुँच सकें. फिर मैने एक हाथ शॉर्ट्स के अंदर डाला और में अपनी चूत को सहलाने लगी. मेरी चूत हल्की सी गीली होने लगी और मेरी उंगलियाँ आसानी से मेरी चूत पे घूमने लगी.

मेरा एक हाथ मेरे बूब्स पे और दूसरा हाथ चूत पे घूम रहा था. फिर अचानक मुझे महसूस हुआ के भालू की गरम गरम गीली ज़बान मेरी जाँघो को चाट रही है. मैने भालू को पीछे धकेला और गुस्से से बोली “ नो भालू, बॅड बॉय”. मगर सच बताउ तो वो भालू का चाटना मुझे बहुत अछा लगा था. कुछ देर बाद भालू फिर आकर मेरी जाँघो को चाटने लगा.

मैं कुछ नहीं बोली और उसको चाटने दिया. आहिस्ता आहिस्ता वो उपर की तरफ, मेरी चूत के पास चाटने लगा.

उसकी ज़बान बहुत गरम थी और उसका मुलायम फर मेरी चॅम्डी पर रगड़ रहा था. मुझे बहुत अछा लग रहा था. मेरी चूत भी खूब गीली हो चुकी थी और मेरे अंदर खूब गरमाइश चढ़ चुकी थी. मैने अपनी शॉर्ट्स नीचे खिस्काई और उतार दी. अब मैं बेड पर नंगी पड़ी थी.

मैने भालू का सर अपने हाथ में लिया और उसको उपर अपनी चूत की तरफ खींचा. वो चाटने लगा. में तो बहाल होने लगी.

मैने अपनी टाँगें फैलाईं और भालू को अपनी चूत का पूरा प्रवेश दिया. अब उसकी ज़बान मेरे दाने पर भी घिस रही थी और कभी कभी मेरी कुँवारी चूत में भी प्रवेश करती थी. मैं बेड के किनारे तक खिसक गयी ताके भालू की ज़बान सब जगह तक पहुँच सके. उसकी लंबी, गरम और खर खरी ज़बान मेरी गांद से उपर मेरे दाने तक चाट रही थी. मेरी टांगे काँपने लगी. मैं अपने चूतर उपेर करके भालू से और जोश से चटवाने लगी.

उसकी ज़बान मेरी चूत में घुस गई और मेरी गरमाइश बढ़ गई. मेरे अंदर में से यह गरमाइश मेरे पूरे बदन में फैल गई. मेरी चूत अचानक झटके देने लगी और में मज़े में खो गई. मैं तब पहली बार झाड़ गई. मेरी चूत से और पानी बहने लगा जिसको भालू ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. मेरा बदन पूरा थर थारा उठा. जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैने भालू को उपर बेड पर खींच लिया.

वो दो पैर के साथ मेरे उपर खड़ा था और मेरे बूब्स को चाटने लगा. मैने फिर अपना हाथ नीचे उसके पैट को खिसकाया और मैं उसके लंड को सहलाने लगी, जोकि अभी उसके कवर में था. आहिस्ता आहिस्ता उसका लंड बाहर आने लगा. वो बहुत गरम और गीला चिकना था. थोड़ी ही देर में वो लंबा मोटा और सख़्त हो गया और भालू हांफता हुआ हवा में, मेरे उपर धक्के लगाने लगा. मैने नीचे देखा तो उसका लंड अब कम से कम 9 इंच लंबा हो चुक्का था.

मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके लंड को अपनी चूत पर फेरने लगी. जन्नत का मज़ा मिल रहा था. मेरी साँस फूल गयी और मैं फिर से कामपति, झटके खाती हुई झार गई. अब मेरा कुत्ता पूरे जोश में था. उसका लंबा सख़्त लंड मेरी चूत के फांको के बीच था.

कभी कभी वो मेरी चूत के च्छेद पर भी आता था और थोड़ा अंदर भी जाता था. वो झटके मारने लगा और अचानक उसका लंड मेरे अंदर कोई 3-4 इंच तक समा गया.

मेरी चूत तो पूरी तरह से गीली थी और उसका लंड आगे से तीखा और चिकना था. पहले तो मुझे डर सा लगा. मेरे दिमाग़ मे आया कि अभी तो आधे से ज़्यादा लंड बाहर है, बाकी कैसे अंदर लूँगी? मगर भालू को इन सब बातों का क्या पता था. वो तो चोद्ने में मगन था. वो अपनी कुत्ते की रफ़्तार से मेरे अंदर बाहर जा रहा था. हर झटके के बाद उसका लंड थोड़ा और मेरे अंदर समा जाता. उसके लंड में से थोड़ा थोड़ा गरम गरम पानी सा मेरी चूत को और भी गीला और चिकना कर रहा था.

मेरी चूत भरी जा रही थी और में मज़े से अपने कुत्ते से चुद रही थी. मैने जोश में आ कर भालू को पीछे से पकड़ा और ज़ोर से अपनी तरफ खींचा. मुझे नही पता था कि क्या होगा. उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर पूरा समा गया.

मुझे महसूस हुआ कि मेरे अंदर कुछ फटा है और में दर्द से चीख पड़ी. भालू ने मेरी सील तोड़ दी थी. मैने उसे धकेल कर उसको मेरे अंदर से निकालने की कोशिश करी मगर मैं उसको पीछे नही हटा पाई. उसने अपने अगले पैर मेरे बदन के पीछे अटकाए हुए थे और वो मेरे उपर चिप्टा हुआ था. उसका फर मेरे बूब्स और पेट पर सरक रहा था. उसकी ज़बान मेरी गर्दन और मुँह को चाट रही थी. मैं अपना दर्द बिल्कुल भूल गयी और उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी. अब भालू का पूरा 10 इंच लंबा गरम गरम मोटा लंड मेरे अंदर बाहर जाने लगा. में भी अपनी लातें फैला कर अपने चूतर उठा उठा उसके धक्कों का मुक़ाबिला कर रही थी.

जन्नत का मज़ा आ रहा था मुझे. उसका लंड हर धक्के के साथ मेरी पूरी गहराई तक पहुँच रहा था. मैं तब बहुत ही ज़ोर से झार गयी. मेरा पूरा बदन फिर से काँप उठा और मेरी चूत झटके खाने लगी. भालू नही रुका और मुझे चोद्ता रहा. उसकी रफ़्तार बढ़ती गयी और मुझे ऐसे लगा जैसे उसका लंड और भी मोटा होता जा रहा है. मैने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ा तो मैने महसूस किया कि उसका लंड जड़ के पास बहुत ज़्यादा मोटा था.

मोटा ही नहीं वो तो एक टेन्निस बॉल जैसे गोल था. हर धक्के से यह गोला मेरी चूत के अंदर जाने की कोशिश कर रहा था. फिर वही हुआ. वो गोला मेरी चूत के अंदर चला गया. मुझे लगा जैसे मेरी चूत फॅट जाएगी. भालू फिर मेरी चूत में झड़ने लगा और उसने अपना गरम गरम वीर्य मेरे अंदर एक पिचकारी जैसे छोड़ दिया. अब वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर नहीं कर पा रहा था. हम दोनो चूत और लंड से जुड़े हुए थे.

फँसे हुए थे जैसे कुत्ता और कुतिया जुड़े हुए दिखते हैं. मेरा कुत्ता और में पूरे 15 मिनिट ऐसे ही पड़े रहे. उतने में मैं एक बार फिर झाड़ गयी. फिर उसका लंड ढीला हुआ और वो मेरी चूत में से निकला. साथ ही उसका ढेर सारा पानी निकला.

भालू मेरे उपर से उठा और कमरे के एक कोने में बैठके अपना लंड चाटने लगा. में बेड पर लेटी रही और अपनी पहली चुदाई का मज़ा लेती रही.तो दोस्तो आपको ये बकवास कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त

 
मेरी बहन दीपा --1

मेरा नाम मनीष है मेरी बहन का नाम दीपा है वो 29 साल की है दीपा देखने मैं बहुत मस्त लगती है उसे देख के हर किसी के मन मैं उसे बस चोदने का ख्यल ही आता होगा.दीपा की ब्रा का साईज़ 32 है उसकी नेवल बहुत सुन्दर है उसके बूबस उसकी चुत सब बहुत मस्त है उसके नंगे जिस्म देख के ऐसा लगता है जैसे कोई गदराई बरसों की प्यासी जवानी है जो मचल रही है, और ये सब मैं कैसे जानता हु ये ही बतना चाहता हु.मै और दीपा दोनों अकेले दिल्ली मैं रेहते हैं मैं जॉब करता हु वो कोलेज मैं पढती है और वही होस्टेल मैं रेहती है, वीकेंडस पे आती रेहती है मेरे पास.ये पिछले महीने दिवाली से 2 हफ़्ते पहले की बात है दीपा वीकेंडस पे आई हुई थी, रात के 9:30 हो रहे होंगे मैं और दीपा दोनों सब टीवी पे लेफ्ट राइट लेफ्ट देख रहे दी. तभी दरवाजे पे दस्तक हुई और मे मैने जैसे ही दरवाजा खोला मैं देखा कुछ लोग बाहर खड़े थे सारे ६ फीट के आस पास के थे शक्ल से क्रिमिनल्स लग रहे थे उन्होने मुझे घर के अंदर धक्का दे दिया और अंदर घुस गए और दरवाजा लॉक कर लिया और कहा शोर मचाया तो गोली मार देंगे और अपनी पिस्टोल मेरे सर पे लगा दी तभी दीपा अंदर के रूम से बहर आ गयी उनकी आवजों को सुन के.

उन्होने दीपा को उपर से नीचे तक घूर के देखा फिर उन मैं से एक ने कहा साला रंडी चोद रहा था, फिर एक ने कहा साले आज कल के लौंडे यहाँ पढने आते हैं पर करते हैं रंडी बाज़ी फिर उन्होने मुझे कहा क्या बे मादरचोद रंडी बुलाता है घर मैं हैं और वो मुझे लेके अंदर आ गये और पहले वाले रूम मैं बैठ गए असल मे दीपा ने उस वक्त व्हाइट कलर की स्कर्ट और पिंक टॉप पहनी थी इस वजह से उसकी गंड बहुत बड़ी लग रही थी और दीपा के लिप्स देखने मैं नॉर्मली ऐसे लगते हैं जैसे की पता नहीं कितना लंड चूस्ती हो पर मे जानता हु की वो अभी तक वर्जिन है और बहुत ही शरीफ और सीधी है. अब मुझे पता चला के वो कुल 6 लोग थे, दीपा उन्हें देख के बहुत डरी हुई लग रही थी तभी उनमे से एक आगे बढ़ा और दीपा के पास ख़ड़ा होके दीपा को छूने लगा और कहने लगा साली कितने मे चुद रही थी तू? नाम क्या है तेरा? दीपा ने डर से धीरे से कहा- दीपा.फिर उनमे से एक ने मुझसे पूछा- कौन है रंडी? कहाँ से लाया? मैने कहा मेरी छोटी बहन है.

इस पे सारे हँसेने लगे कहा वाह क्या मस्त माल है तेरी बहन साली की गांड देख के तो लगता है बहुत मराती है. फिर सब हंसने लगे. दीपा के डर के मारे आंसू निकलने लगे.तभी एक ने कहा साली जा खड़ी क्या है हमारे खाने के लिये कुछ ला, और दीपा किचन मैं चली गयी कुछ लाने, थोड़ी देर मे कुछ खाने को लेके वो वापिस आ गयी और जैसे ही झुक के प्लेट

टेबल पर रखने लगी उसके पीछे खड़े एक आदमी ने उसकी स्कर्ट को पूरा उपर उठा के कहा साली की गांड तो देखो क्या गदराई हुई है, दीपा इस हरक़त पे चिल्ला पड़ी बोली-ये क्या बातमीजी है? तभी उनमे से एक ने दीपा के बाल को पकड़ के खींचा दीपा दर्द से कराहने लगी, तब उनमैं से एक बोला साली तुझे तो अब हम बतायेंगे की बातमीजी क्या होती है.

मैने चिल्ला के कहा-मेरी बहन को छोड़ दो, तब उन्होने कहा- साले बेहन के लोड़े तेरी तो, और वहीं पड़े चादर को उठा के मेरे हाथ पैर बांध दिये. और कहा देख आज तेरे सामने तेरी बहने की ब्लू फिल्म बनायेगे इसे अपनी रंडी बनायेंगे. और उन्होने दीपा को पकड़ लिया और कहा साली चल अपने सारे कपड़े उतर नहीं तो तेरे और तेरे भाई दोनो को गोली मार देंगे, दीपा डर गयी उसने उनसे बहुत कहा हमे छोड़ दो

पर वो नहीं माने अंत मैं दीपा ने रोते हुये अपने कपड़े उतारने शुरू किये और उनमे से एक ने अपने पॉकेट से फोन निकाल लिया और दीपा की फिल्म बनाने लगा, पहले दीपा ने अपना टॉप उतारा. दीपा की छूचियाँ उसके ब्रा से झलकने लगी उसकी नेवेल पूरी मस्त सी देखने लगी, फिर उन्होने कहा चल अब स्कर्ट उतार. दीपा बोली- प्लीज़ ये नहीं. तब उनमे से एक ने जबरदस्ती दीपा की स्कर्ट उतर दी.मैने पहली बार दीपा को पॅंटी और ब्रा मैं इस तरह देखा था. उसको इस तरह देख के पता नहीं क्यूं मुझे अच्छा भी लगने लगा, अब बारी थी पॅंटी उतारने की दीपा ने धीरे से पॅंटी उतार दी, हे भगवान मैं आज अपनी सगी बहन की झाटों भरी चूत देख रहा था और वो अपनी चूत को अपनी मोटे मोटे जाँघों के बीच छुपा रही थी, अब बारी थी ब्रा की, लेकिन इसके पहले ही उन लोगों ने उसकी ब्रा खींच के फाड़ दी और दीपा के दोनो चूचियाँ आजाद होके उनके सामने झूल गयी, फिर क्या था सारे दीपा के जिस्म के साथ खेलने लगे और एक फिल्म बनाता रहा. दीपा बार बार उन्हे कह रही थी प्लीज़ भगवान के लिये मुझे जाने दो कुछ मत करो ऐसा मत करो मैं बर्बाद हो जौउँगी, पर वो कहाँ सुनने वाले थे. वो तो दीपा की जिस्म से खेलने मैं लगे थे. फिर उनमे से एक ने कहा भाई साली की चूत चाटते पर साली की झांटे इतनी बड़ी हैं की मज़ा नहीं आयेगा तभी दूसरे ने कहा तो क्या हो गया रंडी की चूत शेव कर देते हैं, और उसने अपने एक साथी से कहा-जा और जाके रूम से रेज़र दूंढ़ के ला. फिर 10 मिनट मे वो आदमी रेज़र, मग मैं पानी और साबुन लेके आ गया. उन लोगों ने जबरदस्ती दीपा को बेड पे लिटा दिया और उसकी टांगे पकड़ के खोल दी. अब तो दीपा चिल्लाने लगी थी और रोने लगी थी. तभी उनमे से दो ने दीपा के हाथ पकड़ लिये और दो ने टांगे. पेहले वाले ने दीपा को जाँघों से पकड़ लिया. दीपा चिल्ला रही थी इस वजह से जो फिल्म बना रहा था उसने फटाक से अपना पॅंट खोला और अपना मोटा लम्बा लंड निकाल के दीपा के मुह मे डाल दिया और फिल्म बनाने लगा. बाकी जो एक था उसने दीपा की चूत 5 मिनट मे शेव कर दी. अब दीपा की पूरी चूत चिकनी दिख रही थी. वो उनके सामने बिलकुल नंगी थी. उसकी चूत ऐसी लग रही थी जैसे किसी ************ साल की लड़की की होती है, दीपा चिल्ला तो नहीं पा रही थी मुह मे लंड होने की वजह से पर उसके मुह से गुऊंन गू गॅप गॅप की आवाज आ रही थी, अब तो बारी बारी से सारे दीपा की चूत को चाटने लगे. अब दीपा को भी मस्ती आने लगी थी क्यूंकि उसके मुह से अब आवाजें आने लगी थी आआआहहह्ह उऊऊन्न आआःह्ह सीईइइस इस तरह काफी देर तक कोई दीपा से लंड चुसवाता कभी कोई उसकी चूचियाँ दबाता कभी उन्हें चूसता और दीपा ऊ ओई मा मज़ा आगया ऊई ऊई कर रही थी. कह रह थी आअह राजा और चाटो आहह. अभी तक मैने ये सिर्फ सुना था की हर औरत मे एक रंडी छुपी होती है और आज ये मैने दीपा मे देख लिया की कैसे वो 6 अंजान लोगो के आगे नंगी होके अपनी चूत चटवा रही थी उनके लंड को लॉलीपोप की तरह चूस चूस के मज़े ले रही थी.

दीपा को ऐसे मस्ती मे बोलते देख मैं समझ नहीं पा रहा था की क्या ये वही मेरी छोटी बहन दीपा है, पर दीपा को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था. वो ये भी नहीं सोच रही थी की वो अपने बड़े भाइ के सामने उन 6 अजनबियों से अपनी चुत चटवा रही थी और बारी बारी से उनके लंड अपने मुह मे ले रही थी.ये सब काफी देर तक चलता रहा, तभी उनमे से एक उठा और बोला- रानी क्या अपनी चुत मैं हम सबके लंड को लेना पसंद करोगी, दीपा ने कहा- आह ओह नहीं …मुझे छोड दो मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. वो चिल्ला रही थी पर वो कमीने उसे चोदना चाहते थे. मैं सच बोलता हूँ वो मेरी बहन थी लेकिन मेरा लंड भी मेरे कच्छे मे पूरा खडा हो गया था समझ नहीं आ रहा था क्या करूं. ये गुंडे अभी मेरी कुँवारी बहन को चोद जायेंगे और मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा. तभी एक गुंडा जो उनका बॉस था बोला- देखो साले को, अपनी बहन की चूत देख कर इसका भी लंड खडा हो गया. साले बहुत मजा आ रहा है अपनी बहन की चूत देख कर, बेटे चिन्ता मत कर तुझे भी दिलवाएंगे इसकी चूत. ये देख कर दीपा की आखें फटी की फटी रह गयी की उसे इस हलत मैं देख कर मैं उत्तेजित हो रहा हूँ. मुझे उन पर बहुत गुस्सा आ रहा था, तभी मैने देखा मस्ती मैं एक गुंडे ने अपना पिस्टल बेड पर रख दिया, मैने उसे उठा लिया और उनके बॉस की कनपटी से सटा दिया वो एक दम से डर गया. मैने कहा- छोड दो उसे नहीं तो सालो अभी गोली मार दुंगा..सब कुछ इतनी जल्दी मैं हुआ वो एकदम से घबरा गए. दीपा मेरे पीछे आ गयी. मैने उसे कहा पुलिस को फोन लगाये. वो सब डर के मारे वहाँ से भाग गए. उनके जाने के काफी देर बाद भी दीपा मुझसे चिपकी हुई थी पूरी नंगी और गरम.. मेरी समझ नहीं आ रह था क्या करूं.. वो रोने लगी तो मैं उसे दिलासा देने लगा. मैने उसे गले से लगा लिया और उसकी पीठ थपथापने लगा.. उसकी कठोर चूचियां मेरे सीने मैं लग रही थी.. मेरा लंड नेकर से बाहर जा रहा था दिमाग काम नहीं कर रहा था. मेरा लंड उसकी जांघों के इर्दगिर्द घूम रहा था. वो उस देख कर और अस्मंजस मैं हो रही थी… मैने दिलासा देने के बहाने उस अपने सीने से जकड लिया और बोला- डियर इसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं है, ये सिर्फ एक हादसा था.. ये सब भूल जाओ. उन गुंडों ने उस की चूत चाट-2 कर उसे बहुत गरम कर दिया था और मैं इसे मौके का फायदा लेना चाह रहा था….वो अब मुझसे शर्मा रही थी और उसने कपड़े पेहनने के लिये हाथ बढाया.. मैने उस रोका और बोला अब भी कुछ बचा है हमरे बीच…. वो आँखें फ़ाड-2 कर मुझे देख रही थी.

मैं उसे बाहों मैं लेकर बेड पर ले गया… वो कुछ बोल नहीं पा रही थी… मैने सीधे उसे बेड पर लिटा कर उसे कम्बल ओढा दिया और उस के बगल मैं लेट गया.. हमारे बदन टकरा रहे थे.. वो भी मेरे मन को समझ रही थी.. लेकिन बोल दोनों के बंद थे… मैने धीरे से अपना हाथ उस की उठी हुई चूचियों पर रख दिया… साला 440 वॉल्ट का करेंट सा लगा….. लौंडिया भी सिहर उठी और बोली- भैया… प्लीस ऐसे मत करो. हाय ज़ालीम.. क्या लग रही थी मेरी जान दीपा..

अब मैं फैसला कर चुक था कि इसे आज चोदना है….मैने अपना कच्छा उतार के फेंक दिया.. मेरा लंड उसकी चूत के आस पास घूम रहा था… लौंडिया तो पेहले से ही गरम थी लेकिन शायद अपने सगे भाई से चुदवाने मैं डर रही थी.. अब थोड़ी समझदारी की ज़रूरत थी. दीपा बोली- भैया ये सही नहीं है, आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. मैं- क्या तू मुझे प्यार नहीं करती? दीपा- हाँ, अपनी जान से भी ज्यादा. मैं- और मैं भी तेरा कितना ख्याल रखता हूँ (साथ-2 मैं उसकी चूचियों पर भी हाथ फेर रहा था और बीच-2 मैं मुह से चूस भी रहा था) दीपा- लेकिन भाई क्या ये सही है? मैं- अब कुछ बचा है? मैं तेरी चूचियाँ चूस रहा हूँ.. मेरा लंड तेरी चूत के दरवाज़े पर खड़ा है.. जानेमन अब ज्यादा सोच विचार मत कर.. मौके का फ़ायदा उठा और मज़ा ले.. तू भी गरम है और मैं भी. इतना कह कर मैं उसकी चूचियों को बेतहाशा चूसने लगा… हाय मैं स्वर्ग मैं था.. दीपा का भी बुरा हाल था… और गुंडे सही कह रहे थे मेरी बहन टॉप माल थी…. और ऐसी चूत को कोई और चोदे और मैं खड़ा देखता रहूं? बहुत ना इंसाफी होती…. उसका गोरा बदन मेरी बाहों मैं मचल रहा था…. मैने धीरे से अपना लौडा दीपा की चूत के मुह पे टिकाया और हल्का सा धक्का दिया.. हाय मर र्रर्र गयी ईईईईई…… भैया प्लीज़ इसे निकाल लो… वो मेरे से विनती करने लगी. लेकिन मुझे तो पूरा मज़ा आ रहा था… उसकी चूत खून से लथपथ हो गयी… 24 केरट सोने जैसी चूत थी दीपा क़ी.. जो गुंडों से तो बच गयी लेकिन अपने भैया से नहीं.. उस रात मैने दीपा को कोई दस बार चोदा और अब वाकई हम बहुत मजे करते हैं.

दोस्तों उस रात के बाद से हम अक्सर चुदाई किया करते थे. अब आपको वो बात बताता हूँ जिसे सोच के मैं आज भी अजीब सा फील करता हूँ.. हुआ ये की हम राजस्थान घुमने गए टूर एण्ड ट्रेवेल की बस से. जाते हुए बस एक जगह रास्ते मैं रुकी.. रात के 8 बाज रहे थे.. एरिया कफी सुनसान सा था और एक ही ढाबा था... सब उतरे तो हम भी उतर गए. हमने सोचा कुछ खा पी लें और फिर हमने खाना ऑर्डर कर दिया.. खाना खत्म करने के बाद जैसे ही बस की तराफ बढे की दीपा ने कहा- भइया मुझे सू सू आई है. मैने कहा- अब जयपुर पहुंच के करना यहाँ कुछ ऐसा दिख नहीं रहा जहाँ तुम जाओ. पर उसने कहा- मैं नहीं रोक सकती मुझे जाना ही है. मैने वहीं पूछा की भाइ वाशरूम है क्या तो

उन्होने बताया नहीं बाबु जी यहाँ तो आगे जाके किसी खेत मैं ही जाना पड़ेगा और जल्दी करो नहीं तो बस कहीं ना चली जाये. फिर मैं दीपा को लेके अंदर खेत की तरफ गया. दीपा ने कहा- थोडा और अंदर जाऊंगी क्योंकी सब इधर ही देख रहे हैं और यहाँ रोशनी भी है. मैने कहा- ओ के चलो. जैसे ही दीपा सुसु करने बैठी तभी मुझे लगा की शायद हमारी बस खुल गयी है. मैने दीपा को कहा- तुम पेशाब करो मैं बस को रोकता हूँ. मैं भगा भगा बाहर आया पर तब तक तो हमारी बस जा चुकी थी.

मैं परेशान हो गया की यार अब इस रात मैं पता नहीं कब तक दूसरी बस का इंतज़ार करना होगा. यही सोच विचार करते मैने सिग्रेट जला ली और वहीं खड़े एक आदमी से बात करने लगा. अचानक 10 मिनट के बाद मुझे ध्यान आया की दीपा कहाँ है वो तो अभी तक आई ही नहीं... पहले मैने ढाबे के चारो तरफ देखा... कहीं नहीं थी... फिर मैं भाग के वहीं गया जहाँ वो पेशाब करने गयी थी... खेतों मैं बहुत अंधेरा था मैने काफी अवाज़ दी और बहुत ढूंढा मगर वो कहीं नहीं मिली..

मैं भाग के ढाबे के पास आया और लोगो से दीपा का हुलिया बता के पूछने लगा की कहीं किसी ने देखा है.... लेकिन किसी को नहीं मालूम था... तभी एक लम्बा चौड़ा सा आदमी आया उसने कहा की कहीं ये पीछे के खेत की तरफ पेशाब करने तो नहीं चली गयी थी... मैने कहा- हाँ वो वहीं गयी थी... फिर मैने उससे पूरी बात बताई.... उसने कहा- भाई तेरी बहन अब दो तीन दिनो से पेहले नहीं मिलने वाली.. और किस हाल मैं मिलेगी उसकी भी गारंटी नहीं... मैं- ये क्या कह रहे हो आप? मैं परेशान हो गया फिर मैने कहा- ऐसा क्या हुआ? उसने कहा- तेरी बहन की उमर कितनी थी? मैने कहा- 30 की थी... उसने कहा- शादी सुदा थी? मैने कहा- नहीं कुंवारी... फिर उसने कहा- ह्म्म्म लेकिन 30 की उमर मे तो लड़कियां मां बन जाती हैं, वो कुंवारी क्यूं है? मैने कहा- इससे आपको क्या मतलब? उसने कहा- 30 की है शायद संभाल भी ले मामला, देखो बुरा मत मानना इस उमर मैं तो लड़कियों को लंड ही चाहिये होता है. मैने कहा- ये क्या बकवास है. उसने कहा- भाई बकवास नहीं सच है, पीछे का जो गांव है वो रंडवो का गांव है कोई औरत नहीं है वहा... सिर्फ मर्द हैं और वो लोग अक्सर ऐसा करते हैं. यहैं तक की पुलिस वाल़े भी मिले हुये हैं उनसे.... और मुझे पूरा यकीन है की वो लोग ही उठा के ले गये हैं तेरी बहन को. तू यहीं इंतज़ार कर दो तीन दिनो मे यहीं छोड़ जायेंगे तेरी बहन को.

मैने कहा- नहीं ऐसा मत कहो मेरी मदद करो. उसने कहा- ना बाबा ना. मैने बहुत रिक्वेस्ट की तब उसने कहा- फिर मुझे क्या फ़ायदा होगा तेरी मदद करके? मैने कहा- जो बोलोगे दूंगा. उसने कहा- ओके ठीक है फिर.

उसने बताया की हमे उस गाँव मे चल के पता करना होगा की तेरी बहन वहीं है या नहीं. फिर क्या था मैं खेतों के रास्ते गाँव की तरफ जाने लगा. लगभाग 45 मिन हो गए थे और हम लगभाग गाँव पहुंच चुके थे. गाँव मे बहुत सन्नाटा था सभी सो रहे थे. गाँव काफी छोटा सा था लगभग 10-15 घर होंगे. मैने सोचा हर घर को पूछते हैं शायद किसी को पता हो पर मेरे साथ जो था उसने कहा नहीं रात को किसी घर पे जाना खतरनाक है और साथ ही हम उनसे ये नहीं पूछ सकते की तेरी बहन खो गयी है तू उसे ढूंढता हुआ यहाँ आया है. अगर सच मैं तेरी बहन यहीं होगी तो ये लोग तेरी बहन के साथ साथ तेरे को भी मार देंगे, इसलिये हमे बड़ी चालकी से पता करना होगा.

अभी रात के करीब 11 बजे थे तभी 4-5 लोग उधर से गुजरे उन्होने पूछा- बेटा यहाँ रात को कैसे? हमने कहा- हमारी गाड़ी खराब है कल तक बनेगी सो हम रात गुजरने आ गए. उन्होने कहा- ओ अच्छा ठीक है चलो आओ, हम तुम्हे ठीकाना देते हैं रात गुजारने के लिये. फिर हम उनके साथ वहीं से करीब 1 km और आगे गए. वहाँ एक पुरानी सी हवेली थी. उन्होने कहा- देखो ये हमारे भाइ साहब की हवेली है तुम लोग हवेली के पीछे एक छोटा सा कमरा है वहीं रूक जाओ. और ये कह के वो लोग जल्दी से अंदर चले गए. हम उस कमरे मे जाके बैठ गए और मैं ये सोचने लगा की पता नहीं दीपा कहाँ होगी किस हाल मे होगी. मेरे साथ जो आदमी था वो सो गया. रात के करीब 2 बज रहे होंगे और मुझे नीद बड़ी मुश्किल से आई थी. तभी मुझे किसी के चिल्लाने की आवाज़ आई. मैं जल्दी से उठा और बाहर देखने लगा की ये अवाज़ कहाँ से आ रही है. ये आवाज़ हवेली के अंदर से आ रही थी और वो भी किसी लड़की की. मैं डर गया की भगवान ये दीपा ना ह प्लीज़. तभी मेरे साथ वाला भी जाग गया. वो भी बाहर आया देखने को. उसने कहा- ये आवाज़ तो हवेली के अंदर से आ रही है लगता है तेरी बहन इनके पास तो नहीं? मैने कहा- नहीं ऐसा मत बोलो. उसने कहा- देख कुछ हो जाये उन लोगों को ये पता नहीं चलना चाहिये की वो तेरी बहन है नहीं तो सबूत मिटाने के लिये ये हम दोनों को मार देंगे.

चल ज़रा छुप के देखने की कोशिश करते हैं बात क्या है. और हम हवेली के पीछे वाले रास्ते से गए. वहाँ एक टुटा दरवाज़ा था. उस से हम एक कमरे मैं पहुंच गए. पर वहाँ अंधेरा था और कहीं और जाने का रास्ता नहीं था. अवाज़ अब काफी साफ हो गयी थी और मेरा दिल बैठने लगा था की कहीं दीपा ही तो नहीं है. मेरे साथ वाले ने कहा- भाइ यहाँ एक खिड़की है खोल के देखें? मैं बोला- कहीं पकडे गए तो? उसने कहा- रुक जा धीरे से खोलता हु. वो खिड़की दूसरी साइड से लगी थी पर इतनी खुल गयी थी की उसमे से दिखाई दे रहा था. एक हॉल सा कमरा दिख रहा था जहाँ करीब 8-10 लोग बैठे दारू पी रहे थे और आवाज़ भी उस लड़की की वहीं कहीं से आ रही थी पर वहाँ कोई लड़की दिख नहीं रही थी. तभी पास की सीढियों से कुछ और लोग उतरे और किसी लड़की को खींच के ले आये. पर उस लड़की का फेस नहीं दिखा. तभी वो मेरे साथ वाला आदमी आ गया और मुझे हटा के खुद देखने लगा बोला- मुझे देखने दे क्या माज़रा है? मैने कहा- मुझे देखने दो कहीं मेरी बहन तो नहीं? उसने कहा- नहीं पहले मैं देखूँगा देखने दे नहीं तो शोर मचा दूंगा. मैने कहा- ओके. पर उस लड़की की आवाज़ मुझे कहीं ना कहीं दीपा की याद दिला रही थी. मैं उसे हटा के अंदर देखने की कोशिश की और जो मैने देखा उसे देख के तो मेरी हालत खराब हो गयी क्यूंकी जिस लड़की की आवाज़ आ रही थी वो कोई और नहीं दीपा थी.

वो लोग करीब 15 आदमी थे. 3 -4 दीपा के कपड़े फाड़ने मैं लगे थे बोल रहे थे खुद उतार दे नहीं तो 1 इंच भी कपड़ा नहीं बचेगा और तुझे अपने घर नंगे ही जाना होगा. मैने अपने साथ वाले आदमी से कहा- ये तो दीपा है मेरी बहन. उसने कहा- भाई अब तो पता नहीं वो तेरी बहन के साथ क्या करेंगे. पर तू भूल से भी कोई गलती मत करियो नहीं तो ये मार देंगे हम दोनो को. मैने कहा- मैं क्या करूं. उसने कहा- यहीं से देखते हैं इसके अलावा कोई उपाय नहीं है अभी. उसने जैसे ही अंदर देखा तो दीपा को देख के कहा- भाई बुरा मत मानना तेरी बहन है सही चीज़. मैने कहा- चुप रहो तुम. तभी मैने देखा वो लोग दीपा को पूरी तरह नंगा कर चुके थे और उसे वहीं एक बड़े से टेबल पे बैठने को बोल रहे थे. दीपा रोते हुए टेबल पे बैठ गयी. उसने अपने दोनो हाथों से अपनी जवान मस्त चूचियों को छिपा रही थी. वो लोग उसकी चूत और गांड पे हाथ लगा रहे थे. जब वो वहां हाथ रखती तो उसकी चूचियों को दबा देते. किसी तरह वो टेबल पे चढ़ के बैठ गयी. फिर उनमे से एक ने कहा- चल अपनी टांगे खोल के अपनी चूत दिखा साली. एक बोला- इसकी इतनी बड़ी गांड़ है चूत तो बहुत मस्त होगी. पर दीपा नहीं मान रही थी, रो रही थी और उनको मना कर रही थी. तभी एक ने कहा- साली ऐसे नहीं मानेगी लगता है आज इसको भी जड़ी-बूटी देनी पड़ेगी. ये सुन के सब हंसे लगे. एक बोला- हाँ वो तो हैं वर्ना साली इतने लोगों को सम्हालेगी कैसे? फिर एक अंदर कुछ लाने चला गया. उनमे से एक दीपा के नज़दीक आया और उसने पूछा- क्यूं बे रंडी हमारे खेतों मैं क्यूं घुम रही थी? और दीपा की चूचियों को ज़ोर से दबा दिया. दीपा की तो चीख निकल गयी. दीपा ने बोला- प्प प्सेसाब करने आई थी. तभी एक ने कहा- साली रंडी हमारे खेत मैं पेशाब करेगी आज देख हम तेरे उपर पेशाब करेंगे. फिर उसने पूछा- क्या नाम है तेरा? दीपा ने धीरे से कहा- दीपा... तभी उसने कहा- ह्म्म्म उमर क्या है तेरी? दीपा ने कहा-30. फिर उस आदमी ने कहा- साली शादी हुई है या नहीं? दीपा ने कहा- नहीं. उसने कहा- साला बच्चा पैदा करने की उमर निकल गयी है और शादी तक नहीं हुई तेरी... साली... चल चूत दिखा कुंवारी है या चुदी हुई है. दीपा अपनी टांगे खोल ही नहीं रही थी. वो लगातार रो रही थी और चिल्ला रही थी की छोड़ दो मुझे प्लीज़. तभी दो लोग और आये और ज़बरदस्ती दीपा की दोनो टांगे खोल दी. दीपा की चूत पे एक भी बाल नहीं था. सब ये देख के पागल से हो गये. और तभी एक ने दीपा की चूत पे थूक लगा के सहलाया और एक बार मैं ही अपनी दोनो उंगलियाँ अंदर डाल दी. दीपा दर्द से कराह उठी. और तब उसने कहा- भाई लोग आज तो मज़े हैं खेली खाई रांड है ये तो मज़े देगी बहुत. तभी वो आदमी अंदर से बाहर आ गया एक इंजेक्शन लेके. ३-4 लोगों ने दीपा को पकड़ लिया और उसने वो इंजेक्शन दीपा को दे दिया. और सबने 5 मिनट तक दीपा को पकड़े रखा उसके बाद सब दीपा को छोड़ के अलग बैठ के दारू पीने लगे.

उसके कुछ देर बाद ही जब मेरी नज़र दीपा पे गयी तो मैं हैरान था की दीपा अपने हाथों से खुद आपनी चूचियों को मसल रही थी, अपने शरीर को सेहला रही थी पर आँखें बंद थी उसकी. तभी उनमे से एक बोला- ज्यादा टाइम ले रही है साली. तो दूसरे ने कहा- जितना टाइम लेगी उतने मज़े देगी. मेरे साथ जो आदमी था उसने कहा- भाई तेरी बहन तो सच मे कमाल है जी करता है साली को अभी जा के चोद दूं. और वो अपना लंड सेहला रहा था दीपा को देख के. तभी दीपा अजीब अजीब सी आवाजें निकालने लगी. वो सिसकारियां लेते हुए कराहने लगी. लगभग 2 मिनट मैं ही पूरे कमरे मैं सिर्फ दीपा के कराहने की आवाज़ थी. आआआआहहहह्ह... एयाया... प्ल्ज़... प्*लज़्ज़ कुछ करो... आआ प्लीज़ कुछ करो मैं मर जाउंगी उई मा. तभी एक आदमी ने आवाज़ दी- क्या हुआ साली लंड चाहिये क्या? और जो दीपा ने कहा वो सुन के तो मैं हैरान रह गया. दीपा ने कहा- हाँ लंड चाहिये मुझे.

चोदो मुझे... मेरी चूत चाटो मुझे चोदो प्लीज़... नहीं तो मैं मर जाऊँगी. मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ. प्लीज़ कोई तो चोदो. तभी एक ने कहा- चूदना है तो आजा बहुत से लंड हैं, आके खुद ही ले ले. और दीपा फौरन टेबल से कूद कर उन लोगों के बीच चली गयी और उनके लंडो को उनके पैजामे के उपर से ही पकड़ के सक करने की कोशिश करने लगी. और फिर क्या था सब नंगे हो गये और दीपा ने दो लंड को एक साथ अपने मुह मैं ले लिया और बारी बारी से सबके साथ ये करने लगी. कुछ लोग दीपा की चूचियों पे लगे थे कुछ चूत चाट रहे थे. और दीपा तेज़ तेज़ कराह रही थी- मुझे चोदो, लंड चाहिये मेरी चूत को, फाड़ दो. ये सब लगभग 45 मिनट तक चलता रहा.

उसके बाद उन लोगों ने दीपा को टेबल पे लिटा दिया और उसकी दोनो टांगे खोल दी. दीपा लंड के लिये जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी. तभी जो सबसे बड़ा आदमी था, वो आया और उसने दीपा की चूत पे अपना लंड लगा के एक ही थाप मैं पूरा अंदर डाल दिया. दीपा आआई आई करके चिल्लाने लगी. तभी एक ने आगे बढ़ के उसकी चूचियों को मसलना शुरू किया और एक ने अपना मोटा लंड दीपा के मुह मैं डाल दिया. अब बारी बारी से 5 लोग चोद चुके थे और 3-4 लोगो ने दीपा के मुह मैं अपना पानी छोड दिया था. तभी पुलिस के सायरन की आव़ाज़ आई और सबने फटा फट दीपा को एक कपड़े से साफ कर उसे एक कुर्ता पहना के पीछे वाले सोफे पे बिठा दिया. पर दीपा होश मे नहीं थी. वो बार बार चोदने को ही बोल रही थी. तभी उन लोगों ने दरवाज़ा खोला और कहा- आइये थानेदार साहब आइये. मेरी सांस मे सांस आई की चलो अब दीपा बची.

लेकिन अगले ही पल मेरे होश फिर उड़ गये जब थानेदार ने ये कहा की आज ढाबे पे पता चला की कोई 30 साल की लड़की गायब हो गयी है. कहाँ है वो अकेले ही मज़े लेने का इरादा है क्या. उन्होने कहा- नहीं साहब, और एक ने आवाज़ दी- अरे जा जरा लेके आ साहब के माल को. दो लोग दीपा को पकड़ के लाये. दीपा की आँखें चढ़ी हुईं थी जैसे बहुत दारू पी रखी हो. थानेदार ने दीपा को उपर से नीचे तक देखा. दीपा सिर्फ कुर्ते मैं थी. उसकी नंगी चौड़ी जाँघें बिल्कुल साफ दिख रही थी जिस पे एक भी बाल नहीं था और कुर्ते से उसके दोनो निपल साफ दिख रहे थे. थानेदार ने कहा- चल साली को जीप मैं डाल. उन लोगों ने कहा की साहब यहीं कर लो जो करना है थाने क्यूं ले जा रहे हो. थानेदार ने कहा- बहनचॉद जो कह रहा हूँ सुन डाल साली को जीप मैं. तभी एक ने कहा- भाई इसके कपड़े उपर हैं लेके आउँ? थानेदार ने कहा- मादरचोद तेरी बहन लगती है जो कपड़े पहना रहा है. डाल साली को गाड़ी मैं पता नहीं कौन है साली. थाने लेजा के ही पूछूंगा. और उन लोगों ने दीपा को सिर्फ कुर्ते मैं और उस नशे की हालत मैं ही ले जाके जीप मैं डाल दिया और थानेदार फौरन वहां से चला गया. मैं तो कुछ समझ नहीं पा रहा था की क्या हो रहा है ये सब. कहीं ये सपना तो नहीं. मैं बार बार यही सोच रहा था अच्छा होता की ट्रिप पे ही नहीं आता. तभी अंदर वो लोग बोले- साला थानेदार ले गया हमारी माल को, पूरा मज़ा ख्राब कर दिया. तभी एक ने कहा- साला कहता है पूछताछ करेगा. साला थाने ले जाके चूदाई करेगा... और क्या. ये सुन मैने अपने साथ वाले आदमी से कहा- भाई मेरी हेल्प करो दीपा को इन लोगों से छुडाओ. उसने कहा तो फिर चल थाने चल के देखते हैं. और मैं फटाफट वहां से उसके साथ थाने की तरफ निकल गया. जैसे तैसे भागे भागे हम थाने पहुंचे... हमे एक हवलदार ने बाहर ही रोक लिया की साहब बिज़ी हैं वेट करो. हमने उससे बहुत बोला पर वो जाने नहीं दे रहा था. लगभग 40 मिनट हो गये तो हम जबरदस्ती अंदर गये और जैसे ही मेरी नज़र लॉक अप की तरफ गयी मैने देखा दीपा वहीं बिल्कुल नंगी थी और तीन पुलिस वाले भी थे. मैने देखा उन लोगों ने दीपा के दोनो हाथ बाँध रखे थे और एक डंडे के एक किनारे पे एक टांग और दूसरे किनारे पे दूसरी टांग को इस तरह बाँध रखा था की उसकी दोनो टांगे पूरी खोली थी चुदवाने की पोज़िशन मैं. वो लोग दीपा को बार बार कह रहे थे-साली रांड बता कौन है तू? कहां से आई है... कौन कौन है तेरे साथ जो धंधा करता है? तभी एक ने दीपा की चूत मैं उंगली डाल दी और कहा- साली ने दारू पी रखी है और देखो तो सही सिर्फ लंड मांगती है... पक्की रांड है... पर है किसके ग्रूप की पता भी तो नहीं चल रहा है. तभी दो पुलिस वाले आये और उन्होने हमे दूसरे कमरे मैं जबरदस्ती बंद कर दिया की साहब केस मैं बिज़ी हैं यहीं रहो. और थोड़े ही देर मैं दीपा की फिर से आवाज़ आने लगी- चोदो मुझे और ज़ोर से.. उई मा मर गयी.. ओ मेरे राज़ा चोदो.. हमने ज़ोर से धक्का दिया तो दरवाज़ा खुल गया. बाहर देखा दो पुलिस वाले मिलके दीपा को चोद रहे थे. जैसे ही उन्होने हमे देखा वो थोड़े दर गये की हमने उन्हें ये सब करते देख लिया है और फौरन उन्होने दीपा की चुदाई छोड़ पिस्टल लेके हमारे उपर तान दिया. और बोला- कौन हो तुम लोग और यहाँ क्या कर रहे हो. मैने सोचा बस सब कुछ बता के दीपा को छुड़ा लूँ यहाँ से. पर जैसे ही कुछ बोलता मेरे साथ वाले ने मुझे चुप करा के कहा- साहब हमारा बैग चोरी हो गया है.
 
मेरी बहन दीपा --2

मैने सोचा बस सब कुछ बता के दीपा को छुड़ा लूँ यहाँ से. पर जैसे ही कुछ बोलता मेरे साथ वाले ने मुझे चुप करा के कहा- साहब हमारा बैग चोरी हो गया है. उसी के लिये आये थे. पुलिस वाले ने कहा- कल आना जा भाग जा अभी. तभी मेरे साथ वाले आदमी ने कहा- साहब अगर बुरा ना माने तो क्या मैं भी थोड़ा. पुलिस वाले उसका इशारा समझ गये और हंसने लगे. उन्होने कहा- ठीक है, ठीक है, जब कद्दू कट ही रहा है तो सबमे बटेगा. फिरपुलिस वाले ने मुझे घूर के देखा और कहा- क्यूं बे तेरे को भी कद्दू चाहिये. मैं तो बिल्कुल सकपका गया. कुछ समझ नहीं आ रहा था. कहाँ फंस गया हू. ये क्या हो रहा है. तभी दूसरे पुलिस वाले ने कहा- ये क्या बोलेगा, लेना तो इसको भी पड़ेगा नहीं तो बाहर जाके हमारे खिलाफ कुछ उगल देगा. और जब तक मैं कुछ सोच पाता मैने देखा मेरे साथ वाला आदमी नंगा होके अपना लंड दीपा के मुह मे डाल रहा था और एक पुलिस वाला चूत मार रहा था और दूसरा चूचियों को चूस रहा था. और दीपा पागलों की तरह चुदाई करवा रही थी. अ आ आई मा चोदो और तेज़ और तेज़.. फाड़ डालो मेरी चूत. तभी पुलिस वाले ने मुझे कहा- मादरचोद नामर्द है क्या, चल आजा मज़े ले इससे नहीं तो गोली मार दूंगा. मैं क्या करता कुछ समझ नहीं आ रहा था. दीपा ड्रग्स के असर से मुझे पहचान तक नहीं पा रही थी वैसे भी वो आँखें बंद किये हुए थी. जब दुबारा वो पुलिस वाला चिल्लाया तो मैं फटाफट दीपा के पास पहुंच गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा. मुझे ऐसा करता देख मेरे साथ वाला आदमी मुस्कुरा रहा था... और फिर क्या बारी बारी से हम सब ने दीपा को चोदा. दीपा लगभग बेहोश हो चुकी थी. सुबह के 5 बज रहे थे. पुलिस वालों ने कहा- जा मेडिकल स्टोर पास मैं ही है वहीं एक डाक्टर रहता है. उससे बोलना थानेदार साहब ने टॉनिक लेके बुलाया है. दूसरा पुलिस वाला गया और 1 घंटे मैं डाक्टर को लेके आया. उस डाक्टर ने दीपा को और दो इंजेक्शन दिये और बोला की 4 - 5 घंटे मैं एक दम सही हो जायेगी कुछ याद नहीं रहेगा इसे. और वो चला गया. मैने कहा की मैं जरा टायलेट होके आता हूँ और जब मैं वापिस आया तो दोनो पुलिस वाले और वो मेरे साथ वाला आदमी मुझे देख के हंस रहे थे. तभी पुलिस वाले ने कहा- बहनचोद रंडी के, खुद की बहन को चोदा तूने कल हमारे साथ साले दलाल. पर सच कहूँ तो तेरी बहन है बड़ी मस्त. हम सबको मस्त कर दिया. मज़ा आ गया साली की चूत मार के. वैसे कहाँ से आया है तू? मैने कहा- दिल्ली से और राजस्थान घूमने जा रहा था. फिर मैने उसे पूरी कहानी सुनाई. उन्होने कहा- साले इतनी मस्त माल को कौन छोड़ता है, वैसे भी तेरी बहन कमाल की है सबको अच्छे से सम्हाल लिया. फिर उसने कहा- चल मज़े बहुत दिये हैं तेरी रांड बहन ने इसी लिये दोनो को छोड़ रहा हूँ जैसे ही होश आयेगा लेके चला जा.

पुलिस वालों ने वहीं हवेली से दीपा के कपड़े लाके मुझे दे दिये पेहनाने को. मैने दीपा को कपड़े पेहना दिया उसी बेहोशी की हालत मे. 4 - 5 घंटे बाद दीपा को होश आया. वो बोली- भैया मैं कहाँ हू? और मुझे क्या हुआ है? मेरा शरीर दर्द हो रहा है. मैने कहा- कुछ नहीं हुआ है. दीपा ने कहा- मुझे तो कल कुछ लोग उठा के ले गये थे और एक घर मैं ले जाके मेरे साथ गलत काम करने की कोशिश कर रहे थे. उसके बाद का कुछ याद नहीं. मैने कहा- कुछ नहीं हुआ. इन पुलिस वालों ने तुम्हे बचा लिया है चलो अब घर चलो. और हम घर जाने लगे. मैं बस यही सोच रहा था बस किसी तरह इन सब से पीछा छूटे तो कभी लौट के नहीं आउंगा इस तरफ. जैसे ही थाने से बाहर निकल रह था तभी उस पुलिस वाले ने मुझे अंदर बुलाया और बोला- सुन तेरी बहन हमे बहुत पसंद आई है. अपना मोबाइल नंबर और पता दे दे. साली ने हमे एकदम मस्त कर दिया है. मैने कहा- नंबर और पता क्यूं? उसने कहा- साले तेरी रांड की चूत मारेंगे और किसलिये. तुम लोगों को जाने दे रहा हूँ ये समझो. मैने कहा- नहीं नहीं सर नंबर और पता नहीं दूंगा. उसने कहा- साले ये देख और उसने कंप्यूटर ऑन किया. जो मैने देखा मेरे तो होश उड़ गये. उसमे उस हवेली से लेके थाने तक की दीपा की एक एक चुदाई की फिल्म बनी हुई थी. फिर पुलिस वाले ने कहा- अगर किसी और को इस बारे मे कहा तो ये सीडी मार्केट मे होगी. और सुन, जब भी फोन करूं रांड को लेके आ जइयो नहीं तो वहीं आके तेरे घर पे चोदेंगे सबके सामने समझा. और फिर मुझे भगा दिया. मैं बस किसी तरह दीपा को लेके वापिस आ गया.

दिल्ली पहुंच के मैने चैन की सांस ली. दीपा ने कहा- भइया बताओ ना क्या हुआ था? मुझे कुछ याद तो नहीं पर मेरी बॉडी मैं बहुत दर्द है. मैने कहा- कुछ नहीं बस भूल जा जो भी हुआ. इस बात को 2 महीन हो गए थे, मैं भी लगभग सब भूल चुका था. अचानक एक दिन एक अंजाने नंबर से मेरे सेल पे फोन आया. मैने जैसे ही फोन उठाया, तभी उधर से अवाज़ आई- रंडी के, बहनचोद हमे भूल गया क्या? मैं हडबडा गया और बोला- क्क कौन..जबान सम्भाल के बात करो. तभी उसने कहा- मादरचोद, हमे जबान सम्भालने को कह रहा है, साले हम वही पुलिस वाले बोल रहे हैं जिसने तेरी बहन के साथ सुहागरात मनाई थी. मैं डर गया और बोला- जी बोलिये सर. उसने कहा- साले बहुत दिन हो गए, चल आजा कल यहीं, दीपा रांड को लेके. मैने कहा- नहीं नहीं सर ऐसा मत बोलो और प्लीज़ हमे छोड़ दो ये ठीक नहीं. उसने कहा- रंडी के, लेके आता है या वहीं आके चोद दू या सीडी मार्केट मैं बेच दू. मैने कहा- सर सर. तब तक उसने फोन काट दिया. अब मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था. दीपा को इस बारे मैं कुछ पता तक नहीं था. क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा था. फिर मैने सोचा दीपा को सब कुछ बता देना चाहिये और जल्द ही हम अपना फ्लैट बदल लेंगे. उसी रात मैने दीपा को वो सारी कहानी सुनाई की क्या क्या हुआ था उसके साथ. दीपा परेशान हो गई और वो हैरान भी थी के ये सब उसके साथ हो चुका है और उसे पता तक नहीं. फिर हम दोनों ने फैसला किया की हम फ्लैट बदल लेंगे और नंबर भी जल्द से जल्द बदल लेंगे. बाकी सीडी का कोई उपाय नहीं सो उसे जाने देंगे. और अगले दिन जब उस पुलिस वाले का फोन आया तो मैने नहीं उठाया. उसने उस दिन 50 कॉल किए पर मैने नहीं उठाया. हम बस जल्दी से जल्दी शिफ्ट करने की तैयारी मे थे.

इस बात को कुछ दिन और हो गये और कल हम शिफ्ट होने वाले थे नये फ्लॅट मे. मैं शाम को जब आफिस से घर आया तो देखा कि मेरे फ्लॅट के बाहर कुछ भीड़ सी लगी थी. जैसे ही मैं आया सब इधर उधर फुसफुसाते हुये निकल गये. उनमे से एक कह रहा था क्या ज़माना आ गया है लोग दुनिया को कहते हैं की हम भाई बहन हैं और यहाँ हम शरीफ लोगों के बीच रह के ये सब करते हैं. तभी मैं वहां खड़े गार्ड से पूछा क्या हुआ. उसने कहा साहब आपकी बहन को पुलिस लेके गयी. मैं तो ये सुन पागल सा ही हो गया. मैने पूछा कब, क्यूं और कहाँ लेके गये? उसने कहा मालूम नहीं कहाँ लेकिन 1 घंटे पहले लेके गये. कह रहे थे की ये लड़की कॉल गर्ल है और बहुत दिनो से पुलिस को इसकी तलाश थी. मेरे तो समझ ही नहीं आ रहा था क्या करूं. उसने कहा साहब जल्दी जाओ मामला कुछ ठीक नहीं लग रहा था. वैसे बुरा मत मानना साहब आपकी बहन के कपड़े वैसे ही थे जैसे उन लड़कियों के होते हैं. मैने कहा- क्या बकवास कर रहा है. उसने कहा- बकवास क्या साहब इतनी छोटी सी स्कर्ट और लगभग ब्रा जैसे टी-शर्ट पहनी हुई थी उसने और स्कर्ट ऐसा था की जब पुलिस वाले उससे जीप मे बैठा रहे थे तो सब दिख रहा था. साहब जी जाओ जाके देखो. मैं तुरंत भागा लेकिन बाहर आके ये सोचा की अब जाऊँ कहाँ और ढूँढूँ कहां?

तभी मैने सोचा की क्यूँ ना उस पुलिस स्टेशन मैं वापिस जाउं जॉ राजस्थान से 100 km पहले है. मैने फट से एक टेक्सी बुक करवायी और निकल पडा उस पुलिस स्टेशन की तरफ. लगभाग 4 घंटे बाद रात के करीब 11 बजे मैं पहुंचा. पर मुझे वहाँ वो पुलिस वाले नहीं मिले. वहीन पे खडे पुलिस वालों ने कहा की वो लोग तो 1 हफ़्ते की छुट्टी मैं कहीं घूमने गए हैं. मैं सोचा अब क्या होगा. तभी बाहर से मुझे वही हवलदार आता दिखा जॉ उस रात मिला था जॉ मुझे बाहर रोक रहा था. वो मुझे देखते ही पहचान गया और मुस्कुराने लगा. बोला- तू तो वही ना जिसकी बहन को यहीं थाने मैं लेके आये थे, अब क्या हुआ, अब क्यूँ आया है. मैने उसे सरी कहानी बताई. उसने कहा- हम्म्म...देख तेरी बहन भी तो वैसी सी है ना. देखा नहीं था कैसे चुद रही थी उस दिन. मुझे तो लगता है की उसे वो लोग उसे वहीं ए गए होंगे. मैने पूछा-कहां? वो बोला- यहाँ से 5 km आगे एक जगह है जहाँ पे एक बीयर बार है आमतौर पे वो लोग वहीं पार्टी करते हैं. जाके देख शायद मिल जाये तेरी बहन.

मैं जल्दी से भागा उस बार की तरफ लगभाग 20 मिनट मैं पहुंच गया और मैने टेक्सी वहीं रोक के रखी. अंदर गया तो देखा लगभग 50 लोग बैठे बीयर पी रहे थे.

वहां जॉ भी मुझे देखता मुस्कुराने लगता. बड़ा अजीब लगा की ये लोग मुझे देख कर क्यूँ मुस्कुरा रहे हैं. जैसे वो मुझे जानते हों. कुछ लोग गौर से मुझे देख रहे थे. और जैसे ही मैं आगे बढा मेरी नज़र वहाँ लगी एक बड़ी LCD टीवी पे गई. मैने देखा उसपे दीपा की वही विडियो चल रही थी जिसमैं मैं भी था और वो एक रंडी की तरह चुद रही थी. विडियो देख के ऐसा लग रहा था की कोई रियल ब्ल्यू फिल्म चल रही है. मेरे तो समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है. तभी एक आदमी आया और उसने कहा की तुम्ही दीपा के भाइ हो ना? मैने कहा- हाँ. बस ये सुन सब मेरी तरफ देखने लगे और कहा की बेटा क्या बहन है तेरी कितने लेगा एक रात के. मुझे तो समझ नहीं आ रहा था क्या की क्या जबाब दू तभी वो विडियो बंद हो गया. मैने देखा सब अपना लंड सहला रहे थे दीपा की विडियो देख के.

तभी उस टीवी पे कुछ आने लगा. उसमे एक लड़की अपनी पीठ की तरफ किए खडी थी और धीरे धीरे डांस कर रही थी. मैने उस लड़की की फिगर जैसे ही देखी मैं समझ गया ये तो दीपा है. फिर दीपा विडियो की तरफ घूम गई और डांस करन लगी. यहाँ ये सब देख के बाकी लोग पागल से हो गए और चिल्लाने लगे- साली रांड जल्दी चूत दिखा अपनी..वाह मज़ा आ गया. दीपा धीरे धीरे अपनी चूचियों को कपडों के उपर से दबा रही थी और कभी हाथ ले जाके चूत सहला रही थी.

तभी दीपा ने अपना टॉप उतर दिया. अब दीपा सिर्फ ब्रा और पैन्टी मैं थी. उसने अब अपनी एक उंगली मुह मे ले जाके गीली की और धीरे से अपने पैन्टी के अंदर ले गयी और चूत पे मलने लगी. और जैसे ही दुबारा हाथ लेके उपर गयी उसने अपने ब्रा का हूक खोल दिया और उसके दोनो रसीले आम जैसे दूध आज़ाद हो गये. मेरे तो समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है. तभी दीपा ने अपनी पैन्टी को भी निकाल दिया और पूरी नंगी हो गयी और अपने जवान शरीर से खेलने लगी. इस टाइम दीपा किसी को मिल जाती तो कोई बिना चोदे नहीं छोडता उसे. वो लग भी एक रंडी की तरह ही रही थी. और ये सब स्क्रीन पे चल रहा था. सब दारू पी रहे थे और लंड सेहला रहे थे. सब आपस मैं केह रहे थे- भाई ये रंडी बहुत मज़ा देगी देख ना क्या गदराई जवानी है इसकी और नाम भी मस्त है दीपा. मैं समझ गया की ये लोग दीपा के लिये भूखे भेड़िये की तरह बैठे हैं. मैं सोच रहा था क्या करूं तभी एक आदमी आया और मुझे केहने लगा- चल अंदर आजा साहब ने बुलाया है. मैं जैसे ही अंदर गया दीपा को देख के चैन की सांस ली. पर हालत देख समझ नहीं आ रहा था. दीपा पूरी नंगी थी और उसके दोनो हाथ उपर लगे एक रॉड से बंधे थे और उसके दोनो बूब्स ऐसे लग रहे थे की जैसे जाके बस पी लो. और वहीं 3 लोग बैठे थे एक उस बार का मालिक और बाकी वो दोनो पुलिस वाले. उन्होने कहा- आ जा देख तेरी बहन कैसी लग रही है नंगी. इसे कपड़े मत पेहनाया कर ऐसे ही मस्त लगती है. और शायद वीडियो भी तूने देखा होगा ना जो नीचे लोग देख रहे हैं भूखे भेड़िये की तरह. मैने उनसे कहा- सर हम लोगों से क्या गलती हुई है. प्लीज़ हमे छोड़ दो. तभी वो तीसरा आदमी जो शायद उस बार का मालिक था बोल पड़ा- देख तेरी बहन मस्त चुदास माल है. इसे मेरे बार मैं रेहने दे और लोगो को मज़े लेने दे. जब लोग बोर हो जायेंगे इसको देख देख के तो ले जइयो अपनी बहन को और हाँ इस साली की रोज़ 2-3 ब्लू फिल्म बनायेंगे. तेरी बहन की डिमाँड बढ़ रही है लोगो मैं. तू टेंशन मत ले. 2 हफ़्ते रखेंगे तेरी रांड बहन को बस. मैने कहा- नहीं नहीं अगले साल शादी होने वाली है इसकी माफ कर दो और हमे जाने दो. तब उसने कहा- देख अपनी बहन की तरफ और ज़रा नीचे भी देख लोग कैसे पागल हुये जा रहे हैं तेरी बहन की गदराई जवानी से खेलने के लिये. अगर सच मे अभी जाना चाहता है और ये सब नहीं करवाने देना चाहता तो बस लेके जा अभी ऐसी ही नंगी इसको पूरे हाल के बीच से हो के क्यूंकि रास्ता वही है. क्या बोलता है 50 - 60 लोग जो नशे मे तेरी बहन को देख के पागल हुये हैं नीचे देख के क्या करेंगे. अगर केह्ता है तो लेजा अभी तेरी मर्ज़ी नहीं तो हमारी मर्ज़ी चलने दे दो हफ़्ते तक. सही सलामत छोड देंगे दोनो को अगर मन भर गया तो समझा ना. बस तो यहीं पड़ा रह और अपनी रंडी बहन की चुदाई देख रोज़. मेरे पास कोई रास्ता नहीं था उसकी बात मानने के सिवा. फिर ये सब लगातार चलता रहा. दीपा रोज़ अपनी चूत कभी वाइब्रेटर से सेहलाती कभी डिल्डो डालती कभी उन तीनो के साथ गैंग-बैंग करती. और इन सबका वीडियो बनता. लगभग दो हफ़्तो तक ये सब चलता रहा. कभी कोई चोदता वीडियो मे कभी कोई. एक दिन शाम को बार करीब 20 -25 लोगों से भरा था और दीपा का वीडियो चल रहा था नया वाला. तभी वो बार का मालिक दीपा के पास गया जहां वीडियो शूट हो रही थी और जाके दीपा के दोनो निप्पल को पकड़ के ऐसा खींचा की दीपा कराह उठी. दर्द के मारे उसने उसको एक थप्पड़ मार दिया. वो गुस्से से पागल हो गया और उसने दीपा को ज़ोर से धक्का देके गिरा दिया और उसने अपने चार आदमियों को बुलाया और बोला- ले जाओ इसे साली मे बहुत गर्मी है. नीचे ले जाके नंगी ही बीच बार मे खड़ा कर दो और लोगों को बोलना सब अपना अपना लंड चुसवायें. लेकिन किसी का एक बूंद पानी ये रांड नीचे ना गिरने दे सब पीना पड़ेगा इसे. साली मुझपे हाथ उठती है. मैने बहुत रिक्वेस्ट की पर वो नहीं माना.

मैं उपर के रूम मे बंद था और खिड़की के शीशे से नीच देखा रहा था. तभी वो लोग दीपा को नंगा करके उसे बार के हॉल मे ले गये और एक टेबल पर खड़ा करवा दिया. सब दीपा को देख मानो पागल से हो गये. कहा गया- भाइयों आज ये रांड तुम सबका लंड सेहलायेगी और तुम्हारे लंड का एक एक बूंद पानी तक पिएगी. अगर साली ने किसी के भी लंड का एक भी बूंद पानी गिराया तो (एक बड़ा सा बेसबॉल का बल्ला देते हुए) जितने बूंद गिरे उतने मिनट ये 8 इंच तक का मोटा बल्ले का हिस्सा इसके गांड मे डाल के हिलाना और फिर से लंड चुसवाना. और ज्यादा नाटक करे तो सब मिल के इसकी सिर्फ गांड मारना पूरी रात.

मैने देखा सब के सब नंगे हो गये अपने अपने लंड को हाथ मे लेके बढ़े तभी उन लोगो ने कहा- भाई एक बार मे केवल तीन लोग उसके बाद फिर बाकी तीन. पेहले तीन दीपा के सामने अपने बड़े काले मोटे लंड लेके खड़े थे. दीपा क्या करती उसने एक लंड मुह मे लिया दो हाथ मे और चूसने और सेहलाने लगी. और उन लोगों को ये बोल कर की जिसका भी लंड पानी छोडने वाला हो इस रांड को पिलाएं एक एक बूंद और ना पिये तो पता है की क्या करना है. इस तरह दीपा लगभग 19 लंड चूस चुकी थी और उनका रस पी चुकी थी. चूंकि दीपा को वो लोग रोज़ सेक्स बढ़ाने का इंजेक्शन देते थे तो वो ये सब कर पा रही थी वरना पता नहीं उसका क्या होता.
 
नौकरानी के साथ मस्ती--1

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ

मैं एक सरकारी दफ़्तर मे काम करता हूँ और राँची मे अकेला रह ता हूँ. मैने मेरे घर पर सॉफ सफाई और खाना बनाने के लिए एक 25 वर्सिय पुष्पा नाम की नौकरानी को रखा था वो बहुत ही सेक्सी लगती थी., रंग सांवला था पर फेस काफ़ी सेक्सी लगता था, उसका बदन बहुत ही सुडोल है. वो सुबह 8 बजे आती थी और रात 9 बजे चली जाती थी. वो हमेशा घगरा और चोली पहन ती थी उसने घगरा और चोली पहनी हुई थी तो उसकी मोटी मोटी चुचियाँ एक दम सॉफ पता चल रही थी पीछे से उसके चूतदों का साइज़ भी समझ मे आ रहा था देखने से लगता था कि बहुत मोटे मोटे होंगे पर साइज़ का आइडिया नहीं लग पा रहा था. जब उसकी तबीयत खराब होती तो उसकी जगह उसकी मौसी चंदा घर पर काम करती थी चंदा 32 साल की उसकी तरह साँवली और सुडोल महिला थी. उसके भी बड़े बड़े चूतड़ और चुचियाँ थी. कभी कभी दोनो एक साथ काम करने मेरे घर आते थे. यह घटना सनिवार की है उस दिन मेरे दफ़्तर की च्छुटी रहती है पुष्पा सुबह करीब 8 बजे घर आई और मेरे लिए चाइ बनाकर लाई आज वो काफ़ी सेक्सी दिख रही थी मैं फ्रेश होकर नास्टा करके टीवी देखने लगा वो खाना बना रही थी करीब 12:30 मैने विश्की का पेग बना कर पीनी लगा इतने मे पुष्पा कमरे मे आकर मुझे खाना खाने के लिए बुलाया. हम दोनो खाना खा लिया और मैं टीवी देखने लगा वो बर्तन सॉफ करने लगी फिर वो कमरे मे आकर बैठ गयी और टीवी देखने लगी. जब टीवी पर आड़ आरहा था तब मैने उसके परिवार के बारे मे पुछा तो उसने बताया कि उसका घर गाओं मे है उसके पिता गाओं के मुखिया के यहाँ घरलू नौकर है 7 साल पहले ही उसका पति मर गया था. उसके सिर्फ़ एक ही लड़का है और वो उसके पिता के पास गाओं मे है और वो यहाँ काम करती है. फिर उसने पूछा साहब आप ने शादी नही की ? मैने कहा नहीं तो वो हल्के से मुस्करा कर बोली मंन नहीं करता शादी करने का मेने कहा करता तो है पर अभी तो मुझे घर को अच्छी तरह से बसाना है उसके बाद सोचूँगा तो उसने पूछा कि कोई लड़की है क्या जिस से शादी करना चाहते हो मेने कहा नहीं अभी तो कोई नहीं है. तो वो हैरान हो कर बोली कि तुम्हारी उमर मे तो यहाँ शहर मे सब लड़के लड़कियों के साथ घूमते हैं और तुम्हारी कोई दोस्त नहीं है. मेने कहा हां सच मे कोई नहीं है. मैं बात करते हुए उसके बदन को भी देख लेता था स्पेशली उसकी चुचियों को ध्यान से देख रहा था. एक बार उसने मुझे उसकी चुचियों को देखते हुए देख लिया पर वो कुछ नहीं बोली. फिर वो वहीं ज़मीन पर बैठे बैठे टीवी देख रही थी टीवी देखते देखते मुझे कब नींद लगी पता नहीं चला जब नींद खुली तो 4 बज रहे थे मैने देखा कि वो भी पेट के बल लेट कर सो रही थी और गहरी नींद मे थी उसका घगरा उसके चूतदों से उपर सरक गया था मैने ध्यान से उसके चूतड़ को देखा तो हाई क्या गजब के मोटे थे उसने पॅंटी नहीं पहनी थी बहुत ही मस्त चुदास लग रहे थे उसके चूतड़ देखते ही मेरे लंड ने कस कर झटका मारा और तन गया. खेर हिम्मत करके मैने उसके चूतड़ पर हाथ रखा वो कोई भी हरकत किए बिने पड़ी रही मेरी और हिम्मत बढ़ी मैने उसके चूतदों को मसल्ने लगा और उसकी गंद की दरार मे बीच की उंगली से सहलाने लगा तो उसने अपनी गांद सिकोड ली मैं समझ गया कि वो जाग चुकी है और सोने का नाटक कर रही है उसकी साँसे लंबी चल ने लगी अब मे समझ गया था आज यह अच्छे से मुझसे चुद्वायेगि मे भी अब खूब ज़ोर ज़ोर से मसल्ने और सहलाने लगा वो ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी उसके सिसकने की आवाज़ सुन कर मुझे और भी जोश आ रहा था मैने उसके बाए हाथ की हथेली को लूंघी के उपर से लंड पर महसूस किया मैने झट से अपना लंड निकाल कर उसकी मुति मे पकड़ा दिया और उसके कान के पास धीमी आवाज़ से बोलो पुष्पा कितनी अच्छी गंद है तुम्हारी वो भी धीमी आवाज़ मे बोली साहब आप का भी बहुत बड़ा और लंबा है मैं बोला तो मज़ा ले इस मोटे और लंबे लॅंड से वो बोली हां साहब बस ऐसे ही बातें करते हुए मुझे चोद दो कब से तरस रही हूँ मेरा मर्द भी जल्दी मर गया और में ठीक से मज़े भी नहीं ले पाई अब तुम ही मेरी प्यास मिटा दो बना दो मुझे रंडी और ले लो इस चूत और गांद का मज़ा हीईीईईई काश मे सच मे रंडी होती तो रोज जम के चुदति नये लंडो से खूब मज़े ले ले कर सीईईईईईई उईईईईईई माआआआअ और कस के मस्लो मेरे चूतद्द्द्द्द्द्द्दद्ड को ही ले लो मज़ा मेरे बदन का मैने कहा साली अगर सच मे तुझको काफ़ी लंड चाहिए तो बता मेरे दोस्त हैं काफ़ी उन सबके दिला दूँगा तो वो बोली सच मेरे साहब मे तुम्हारा अहसान कभी नहीं भूलॉंगी अगर तुम मुझको सच मे रंडी बना कर चुद्वा दो मैने उसके चूतदों को और कस कर मसल्ते हुवे कहा करा दूँगा मेरी रानी पूरे मज़े करा दूँगा और कस के उसके चूतड़ पर काट लिया वो और तेज़ी से सिसक पड़ी हीईीईईईईईईईई सीईईईईईईईईईईईईईईईई मरररर गयी ए हीईीई माआआअररर डाआाआला क्या मज़ा ले रहा है मेरे चूतद्ड्डों का हीईीईईई और क़ास्स्स्स्सस्स के मसल ना, फाड़ डाल इन साले हरमियों कोदेख बहुत मचलते हैं ये साले उईईईईईईइमाआआआआ मजाआाआ आ गय्ाआआआअ काट डाल साले मदेर्चोद हीईीईई सीईईईईई चूस ले पेल दे हीईीईईई रीईई और क़ास्स्स्स्स्स्सस्स क्ीईईई आआआआआआअ.

अब मैं धीरे धीरे उसके चूतदों से उपर की ओर होने लगा और उसके उपर लेट गया फिर मैने कहा कि साली रांड़ अब ज़रा पलट जा देखू तो सही कि तेरी ये चुचियाँ कितनी मोटी हैं मैं ज़रा इनका असली साइज़ तो देख लूँ तो वो पलट गयी अब मेने उसकी चोली के उपर से उसकी मोटी मोटी चुचियों को सहलाना शुरू कर दिया वाक़ई मे काफ़ी गजब की चुचियाँ थी उसकी बहुत ही मोटी थी मेने उसका साइज़ पूछा तो वो बोली दबाने के लिए साइज़ की क्या ज़रूरत तो मेने कहा नहीं मेरी जान तेरे लिए कल बाज़ार से ब्रा और पॅंटी ले कर आऊंगा फिर वो बोली ठीक है तो गुलाबी रंग की लाना तो मेने कहा की ठीक है फिर उसने साइज़ बताया चुचियों का साइज़ 38 और गांद का साइज़ 40 था सुन कर मुझे मज़ा आ गया मेने कहा तभी साली इतना मज़ा आ रहा था तेरे चूतड़ दबाने मे फिर मेने उसकी चुचियों को और कस कर मसलना और सहलाना शुरू कर दिया वो अभी भी सिसक रही थी मेने उसकी चोली के हुक खोल दिए और उसकी चोली को उतार कर चुचियों को आज़ाद कर दिया उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी उसकी चुचियाँ फुदाक कर बाहर आ गयी वाहह क्या मस्त माल थी साली पूरी चुड़क्कड़ लग रही थी मदेर्चोद में जोश मे आ गया और कस कस कर उसकी एक चुचि को मसल्ने लगा और दूसरी को चूसने लगा वो और ज़ोर से सिसकने लगी हीईीईईईईईई मेरे राजा क्या मज़ा ले रहे हो तुम सच मे तुम मुझको रंडी बना दोगे हीईीईईई और क़ास्स्स्स्सस्स के दब्ाओ नाआआआअ हां ऐसे ही और जोर्र्र्र्र्र्ररर से सीईईईईईईईईईई हीईीईईईईईई उईईईईईईईई माआआआआअ मजाआाआआआ आ गय्ाआआआअ मसल डालो फाड़ डालो बहुत दर्द होता है इन सालियों मे रागडो इनको अच्छे सीईईईई सीईईईईईईईईईई उईईईईईईईईई मररर्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी रीईईई हीईीईईईईई ले लो मज़ा मेरी जवानी कााआअ हीईीईई रीईईई काट लो इनको हां ऐसे ही में इन सब बातों को सुन कर और भी जोश मे आ रहा था और इसी जोश मे मेने उसके निपल पर काट लिया तो वो ज़ोर से सिसक पड़ी हीईीईईईईई रीईई जालिम साले मदेर्चोद काट लिया पर कोई बात नहीं ऐसे ही करते रहो हीईीईईईई में सुर कस कर रगड़ने लगा बोला साली कुतिया मदेर्चोद बहुत बड़ी रंडी है तू और तेरी मा को चोदू साली रांड़ फाड़ डालूँगा तेरी चूत और गांद बहुत मोटी कर रखी है भोसड़ी वाली तूने कुतिया हरम्जदि साली तो वो बोली बाबू हां ऐसे ही मज़े दे दो मुझको फाड़ डालो मेरी चूत और गांद कस के फिर में नीचे होता हुआ उसकी चूत पर आ गया और उसको चाटने लगा अब तो वो बिल्कुल ही पागल हो गयी मस्त हो कर पता नहीं क्या क्या कहने लगी. साले मदेर्चोद ये क्या कर दिया बहुत मज़े ले रहा है तू तो मेरी जवानी के इतने तो मेरा पति भी 6 साल मे नहीं ले पाया हां साले बहन्चोद चूस और कस के हीईीईईईई मे मररर्र्र्र्ररर गाइिईईईईईई उईईईईईईईईईई माआआआआआआ खा जा साले मदेर्चोद सीईईईईईई उईईईईईईईईईई मीईईईई मारीईईईईईईईईईईईई हीईीईईईईईईईईईई बहुत मज़ा आ रहा है साले कुत्ते की तरह चाट रहा है तू तो बहुत मज़ा आ रहा हाईईईई हीईीईईई रीईईईई उईईईईईईईईईईई माआआअ बसस्स्स्स्स्स्स्सस्स अब नहीं सहा जाता साले चोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द मुझको. मेने जोश मे आ कर एक कस कर चाँटा उसके चूतदों पर मारा और बोला साली मद्दरचोड़ कुतिया बहन की लोदी चुप चाप पड़ी रह और मुझे जो मन मे आए करने दे नहीं तो गांद फाड़ दूँगा तेरी वो बोली मेरे राजा मैने कब मना किया है ये चूत तुम्हारी है गांद और चुचियाँ भी तुम्हारी हैं जैसे चाहे मज़े ले लो अब मे और कस कस कर चूसने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी फिर मे उठा और अपने कपड़े उतार दिए तो मेरा मोटा लंबा लंड बाहर आ कर उच्छलने लगा. वो देख कर खुस हो गयी और बोली आज तो मेरी चूत के भाग खुल गये जो ये मस्त लंड मिल रहा है मुझको फिर मेने कहा कुतिया साली ज़्यादा बातें ना बना अब लंड चूस मेरा तो उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया अब मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था हीईीईईईईईई सलिइीईईई कुतियाआआ क्या मस्त चुउउउउउउउउस रही है तू मज़ा आ गया सलिइीई हीईीई सीईईईईईई और मस्त हो कर चूस साली रांड़ पूरी रंडी की तरह मज़े दे साली अब तो तुझे पक्का रंडी बनवा दूँगा अपने सारे दोस्तों के लंड से तेरी चूत पूरी तरह से फाट्वा दूँगा समझी हरम्जदि बहन की लोदी मादर चोद वो और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी अब मे और भी मस्त हो गया था मेने कहा चल साली अब तू लेट जा अब मे तेरी चूत फाड़ूँगा तो वो बोली साहब पहला धक्का खूब ज़ोर से मारना ताकि मुझे बहुत कस के दर्द हो में बहुत सालों से नहीं चुदी हूँ तो चूत भी टाइट हो गयी है जम कर चोद्ना मेने कहा ठीक है और लंड का सूपड़ा उसकी चूत पर लगा दिया और फिर अचानक कस के ईक जोरदार धक्का उसकी चूत मे लगा दिया वो ज़ोर से उच्छल पड़ी और बोली हीईीईईई मईए मररर्र्र्र्र्र्ररर गाइिईईईईई फदद्ड़ डाला मेरिइईईई चुतत्त्टटटटतत्त को उईईईईईईई माआआआआ बचा ले हीईीईईईईईई मररर्र्र्ररर जाऊनगीइिईई सीईईईईईईईईईई फद्द्द्द्दद्ड दिया रीईईईई में थोड़ी देर फिर वैसे ही लेटा रहा फिर जब वो थोड़ा शांत हुई तो एक और जोरदार धक्का लगा दिया इस बार वो और भी उपर को तन गयी हीईीईईईई मे मारीईईईईई सीईईईईईईईईईईईईई फट गयी रीईईई रनडिीईईई बना दिया रीईईई मुझको चोद दलाआअ रे हरम्जदे फाड़ दी मेरी चूत पेल दिया ये मोटा तगड़ा लंड मेरी चूत मे.

फिर मेने एक और धक्का लगा कर पूरा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया अब उसने थोड़ी राहत की साँस ली फिर मेने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए और अब उसको भी मज़ा आने लगा था वो सिसकने लगी हीईीईईई सीईईईईईईई साले मज़ा आ गय्ाआअ उईईईईईईईई माआआआआ बहुत मज़ा आ रहा है हाई काश तुम पहले मिल गये होते तो मे इतना नहीं तड़पति लंड के लिए हीईीईईई मेरे हहाआआआअ फ़ाआआआआद मेरी चुउउउउउत को ले ले मज़ा उईईईईईईईईई डाइईईईईईईया पेल साले कूटे कमिने चोद जम के मुझको फाड़ दे मेरी चूत और ज़ोर से और ज़ोर से हां ऐसे ही कस कस के ही रीईईईईई सीईईईईईईईईईई उईईईईईईईईईईई माआआआअ मजाआा गय्ाआआआआआअ रीईई पेलूऊऊऊओ और जूऊओर से पेल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊ मेरे राजा मे तेरी रखेल हूँ जैसे चाहे मज़े ले ले मेरे साथ ही रीईई पेल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूओ और क़ास्स्स्सस्स के उईईईईईईयाअ हीईीईईईईईईईईईई ससिईईईईईईईईईईईईईईईईई कास्क्ीईईई जूऊऊर सीईईई मदरचूऊऊऊद चुउउउउउउउउउत फ़ाआआआआद मेरिइईईईईईईई कुतिया बना दीईईई मुझको, रनडिीईईईईईईईईई हूँ मे तेरीईईईइ सीईईईईईईई फ़ाआआआआद डीईईईईई रीईईई ज़ोर से चोद साले मदेर्चोद और कस के हरम्जदे पेल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल मुझको बना ले रंडी तेरे सारे दोस्तों का लंड लूँगी खूब मज़े दूँगी सबको हीईीईईई सीईईईईईईईईईईईई उईईईईईईईईईई माआआआआ साँसे चुद्वाने मे तो और भी मज़ा आएगाआआआ हीईीईई फत्त्तटटतत्त गाइिईईईईईईईईईईईई हीईीई रीईईई फ़ाआआाद्द्द्द्दद्ड डीईईई मेरिइईईईईईईईईई चुउउउउउउउउउत सीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ले लो मज़े और ले लो अब में भी बहुत कस कस के उसको पेल रहा था मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था मेरे लंड मे बहुत तेज गुदगुदी हो रही थी मेरा लंड अब पूरा अंदर जा कर बाहर आ रहा था और मे ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था उसकी चूत मे अब बहुत ज़ोर की गुदगुदी होने लगी और वो पागल सी होने लगी ही दिनो मे झाड़ रही हूँ और क़ास्स्स्स्स्स्स्सस्स क्ीईए ईईईईईईईईईईईईई य्ाआआ उईईईई माआआआअ मज़ा आआ गय्ाआआआअ. अब उसकी चूत से मेरी चुदाई के कारण मस्त आवाज़ कर रही थी फॅक फॅक की आवाज़ बहुत ही अच्छी लग रही थी तभी वो कस के मुझसे चिपक गयी उसकी चूत का पानी निकल रहा था पेर मेरा लंड अभी भी तना हुआ था और मे कस के धक्के लगा रहा था फिर मेने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया और उसको कहा साली छीनाल चल अब कुतिया की तरह खड़ी हो जा तो वो हाथ और घुटनो के बल खड़ी हो गयी अब मुझे उसकी गांद का छेद एक दम सॉफ दिख रहा था तो मेने उससे कहा रानी अब में तेरी गांद मारने जा रहा हूँ दर्द होगा ज़्यादा ज़ोर से मत चिल्लाना वो बोली ठीक है चोद लो मेरी गांद ले लो मज़े इन हरामी चूतदों के बहुत साले दुखते हैं मिटा दो आज इन की खुजली को में इन बातों से जोश मे आ गया और अपने लॅंड को उसकी गांद से सटा कर और उसकी चुचियों को दोनो हाथो से कस कर पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा मेरा लॅंड उसकी गांद फाड़ता हुआ उसकी अंदर घुस गया वो दर्द से बहाल हो गयी उईईईईई हीईीईईईईईई में मर जाऊनगीइिईईई मेरिइईईइमाआआआअ में मरीईईइ सीईईईईई फत्त्तटटटटतत्ट गयी मेरी गांद्द्द्द्द्दद्ड हीईीईईईई रीईईईई बहुत दर्द हो रहा है प्ल्ज़ निकाल लो मेने कहा साली कुतिया बहन की लोदी चुप चाप चुद्वाती रह नहीं तो और कस के पेल दूँगा भोसड़ी वाली तुझको तो वो बोली मेरे राजा क्या करूँ बहुत दर्द हो रहा है मेने कहा चुप साली मदर चोद और इसके साथ ही एक और जबरदस्त धक्का उसकी गांद मे लगा दिया वो उच्छल पड़ी वो तो में उसके उपर था और मेरे दोनो हाथ मे उसकी चुचियाँ फसि हुई थी तो मेरा लंड उसकी गांद मे ही फसा रहा अब मेने एक और ज़ोर का धक्का लगा दिया वो अब रोने लगी बाबू मेरी गांद फट गयी है रहने दो में मर जाऊंगी तो मेने उसकी गांद पे एक हाथ कस के मारा और बोला साली रंडी कुतिया कहा ना एक बार चुदवाती रह बस समझ मे नहीं आता है तेरे को और मे कस कस के उसके चूतदों की पिटाई करने लगा में बहुत कस के मार रहा था उसके चूतदों पर तो वो और भी ज़ोर से सिसकने लगी हीईीईई रीईईईईई मेरी माआआआआ मररर्र्र्ररर गाइिईईई सीईईईईईईईईई फ़ाआअद्द्द्द्दद्ड दलाआाअ रीईईईई उईईईईईईईई फटीईईईईई सीईईईईईईईईईईई धीरे सीईईई में मररर्ररर जाऊनगीइिईई उफफफफफफफ्फ़ उईईईईईईईई सीईईईईईईईईई हरम्जदे ऐसे अपनी बीवी की फाडियो तू साले मेने कहा साली तू मेरी रखेल है समझी हरम्जदि तेरी तो गांद और चूत. अब ऐसे ही फटा करेंगे अभी तो तुझको अपने सारे यारों से चुद्वाउँगा सब तेरी गांद मारेंगे तब क्या करेगी तू हीईीईई क्या कसी हुईईइ गांद्द्द्द्द्दद्ड है तेरी बहुत मज़ा आआआ रहा हाईईईईईईईईईईई सीईईईईईईईई हीईीईईईईईईई उईईईईईईईईईईईईई मज़ा आ गया थोड़ी देर मे उसका दर्द भी कम हो गया था और अब उसको भी मज़ा आ रहा था वो खूब सिसकने लगी अब सीईईईईई पेलो मेरे राजा ले लो मज़ा इस गांद के हीईीईईईईईईईईई सीईईईईईईईईईईईई मस्त कर दिया मेरे दिया तुमने मुझको क्या चोद रहे हो मुझे अब लग रहा है कि में सच मे एक चुड़क्कड़ औरत हूँ पेलूऊऊऊऊऊ उईईईईईईईईईईईई मरीईईईइ मे हीईीईईईईईई रीईईईईई माआआ फद्ददडू मेरी गांद्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड कस कस के हीईीईई रीईईई में अब जोश मे आ गया और उसको कस कस के पेलने लगा उसकी चुचियाँ मेरे हाथ मे थी और उसकी गांद मारते हुए मे उनको भी कस के दबा रहा था और उसके निपल्स को रगड़ रहा थॉ ओ मस्त हो कर मज़े ले रही थी अब मेरा लंड झड़ने वाला था मेने स्पीड बढ़ा दी थी और मुझे फुल मज़ा मिल रहा था हीईीई सीईईईई साली कुतियाआआआ मेरा निकलने वाला है बहन की लोदी भोसड़ी वाली मादर चोद रंडी मे झड़ने वाला हूँ हीईीईईई सीईईईईई निकल रहा हाईईईईईई निकल गय्ाआआअ हीईीईई सीईईईईईईईईईईई मज़ा आआआअ गया राणिीईईईईई निकल रहा है बहुत अच्छे से मज़ा आ गया तुझको चोद कर मेरी रंडी कुतिया साली हीईीईईईईईई ईईईईईईईईईईईईईईई सीईईईईईईईईईईईईईईई और फिर में उसके उपेर गिर गया और सुसताने लगा वो भी अपनी चूत मे उंगली करके झाड़ गयी थी फिर मे उसके साथ रूम मे चला गया और बिस्तर पर उसको अपने साथ लिटा लिया और धीरे धीरे उसकी चुचियों से मज़े लेता रहा जिसके कारण मेरा लंड फिर तन गया थोड़ी ही देर मे तो वो बोली क्या आज ही पूरी मा चोद दोगे मेरी मेने कहा नहीं तेरी मा की नहीं तेरी फाड़ दूँगा और उसकी चूत मसलते हुए उसको अपने उपर चढ़ा लिया और फिर से अपने लंड का सूपड़ा उसकी चूत पर लगा दिया और कस के धक्के लगाने लगा पूरा मज़ा आ रहा था और इस तरह मेने उसको बहुत अच्छे से उस रात तीन बार चोदा और 2 बार उसकी गांद भी मारी वो पूरी मस्त हो गयी फिर थक कर हम दोनो चिपक कर सो गये. जब मैं शाम को उठा तो वो नंगी मुझसे चिपकी हुई थी फिर मेने उसको उठाया इस समय 7:30 बज रहे थे उसने उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली बाबू अब जब चाहे मेरी चूत और गांद फाड़ कर मेरे मज़े ले लेना और जब चाहे किसी से भी मुझको चुद्वा देना अब में तुम्हारी रखेल हूँ और पूरी चुड़क्कड़ बन कर तुमको रंडी की तरह मज़ा दूँगी अब मैं तुम्हारे सारे दोस्तों का लंड ले लूँगी अपनी चुदास चूत मे और इस रांड़ की गांद मे फिर वो खाना बनाने चली गयी.

क्रमशः.................................
 
नौकरानी के साथ मस्ती--2

दूसरे रविवार को पुष्पा और उसकी मौसी चंदा दोनो सवेर 7:30 बजे आई क्योंकि रविवार को काम ज़्यादा होता था हफ्ते भर के कपड़े धोना, प्रेस करना साफ सफाई करना, खाना बना ना एट्सेटरा. पुष्पा बाथ रूम मे जाकर कपड़े धोने मे लग गयी और चंदा मौसी नेचाइ बना कर जब मुझे उसने उठाया तो मैं देखता ही रहा गया. जब वो झुक कर मुझे जगा रही थी तब उसका पल्लू नीचे सरक गया था और ब्लाउस मे से उसके बड़ी बड़ी चुचिओ की झलक दिखाई देने लगी. और मैं जब उसकी चुचिओ की गोलाई को निहार रहा था तब वो झेंप कर पल्लू सीधे कर के मूडी और चली गयी. पीछे से उसके भारी भारी चूतादो को देख कर तो मैं और पागल हो गया और बाथरूम मे गया वहाँ इस समय पुष्पा नहीं थी इसलिए मैं चंदा की चुचिओ और उसकी गांद के बारे मे सोचते हुए अपने लंड को रगड़ने लगा तभी दूसरे कमरे से पुष्पा की आवाज़ आई कि साहब आप नहालिए तो मुझे टवल और कछि धोने के लिए देदीजिए मेने बाथरूम का दरवाजा खोल कर उसको बुलाया और कहा कि लंड का पानी हिला हिला कर निकाल दे तो वो मेरे लंड को पकड़ कर कस कस के हिलाने लगी और में भी उसकी चुचियों को हाथ से मसल्ने लगा और उस से कहा हीईीईई सीईईईईईईई रनीईइ मज़ा आ गया क्या मस्त गांद देखी है सुबह सुबह हीईिइ रीईईईई मजाआाअ आ गय्ाआआआआअ उईईईईईईई सीईईईईईई हाई री चंदा मौसी क्या चुदास माल है तू तेरी चूत का भोसड़ा बना दोन्गाआअ चोद चोद कर सलिइीईई कुतियाआआआआअ. पुष्पा मेरी बातें सुन रही थी और अब उसने भी मेरा लंड ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया मेने भी उसका घगरा उठा कर उसकी चूत मे उंगली डाल दी कल की चुदाई से उसकी चूत सूजी हुवी थी लेकिन मैं उंगली डाल कर उसकी चूत मे अंदर बाहर केरने लगा फुल स्पीड मे उसको भी मज़ा आने लगा सीईईईईईई हीईीईईई बाबू मज़ा आआआआ रहााआ हाईईईईईई उईईईईईई सीईईईईईईई में झाड़ रही हूँ में भी झड़ने वाला था हीईीईईई सलिइीई हरम्ज्दि मेरााआ भी निकल रहा हाईईईईईईई सलिइीईईईई उईईईईई सीईईईईई हान्न्न्न्न मेरा निकल रहा हाईईईईईईई सीईईईई निकल गायाअ और उसी समय वो भी झाड़ गयी फिर थोड़ी देर वो मेरा लंड यूँ ही पकड़े रही अब मेरा पूरा पानी निकल गया और उसका भी फिर वो बोली बाबू मज़े मुझसे ले रहे थे और नाम चंदा मौसी का, क्या बात है उसको भी चोदोगे क्या तो मेने कहा देख तू मेरी रखेल है तो तुझको बता देता हूँ कि में आज चंदा मौसी को चोदून्गा वो साली चुड़क्कड़ बहुत है ना मदेर्चोद कुतिया तब वो बोली अगर तुम मेरी मौसी को चोद्ना चाहते हो ठीक है चोद लो लेकिन उसके लिए आप को ही उसे पटाना पड़ेगा पर मेरी चूत को ना भूल जाना तो मेने कहा तू तो मेरी रखेल है और उस्कोभी अपनी रखेल बना लूँगा तो वो बोली हां ये ठीक रहेगा फिर वो अलमारी से कपड़े लाने चली गयी और में नहाने लगा. नाहकार जब आया तो चंदा मौसी ने मुझे नाश्ता लाकर दिया और जब नाश्ता परोस रही थी तब भी मैने उसकी चुचिओ की गोलाई देखी मुझे लगा शायद वो जान भूज़ कर दिखा रही हो फिर वो अपना पल्लू ठीक करते हुवे कमरे से गंद मतकती हुई चली गयी. मैं बनियान और टवल पहने हुवा था. मैं टेबल पर नाश्ता कर रहा था और पेपर पढ़ रहा था मुझे मालूम था कि चंदा मौसी मुझे चाइ देने ज़रूर आएगी इसलिए मैं इस तराहा से बैठ कि मेरी जाँघो से थोड़ा तोलिया सरक जाए और उसे मेरे लंड की झलक मिल जाए. वो थोड़ी देर बाद चाइ लेकर आई मैने तिर्छि नज़रों से देखा वो मेरे करीब रुक कर मेरे मोटे लंड को निहार रही थी. मैं पेपर पढ़ने मे मस्त था. फिर वो चाइ टेबल पर रख कर कोने से झारू उठा कर कमरे को बैठ कर बूहरने लगी लेकिन उसकी नज़रें मेरे लॉड पर ही जमी थी. मई भी जान भुज कर वैसे ही बैठा रहा और तिर्छि निगाहों से उसको देख रहा था. जब वो बैठ कर झारू मार रही थी तब उसकी साडी उसकी घुटनो के उपर थी वो सारी को इस तरह करके बैठी थी कि मुझे उसकी चूत की झलक मिल सके. मुझे उसकी चूत तो सॉफ नज़र नही आराही थी पर चूत के उपर के घने बॉल सॉफ सॉफ दिख रहे थे. मैं समझ गया कि वो आज चुदवाना चाहती है. खेर वो सफाई कर के चली गयी और मैं भी उठ कर टीवी देखने लगा. करीब 1 बजे मैने 2 बॉटल बियर पी और करीब 2 बजे हम तीनो ने खाना खाया. पुष्पा को दूसरे घर मे काम था इसलिए वो चली गयी अब केवल मैं और चंदा मौसी रह गये. खाना खा कर मैं टीवी पर इंग्लीश पिक्चर देखने लगा. कुच्छ देर बाद चंदा मौसी भी कमरे मे आकर ज़मीन पर बैठ गयी कुच्छ देर बाद उसने अपने पैरों को घुटने उपर की ओर करके बैठ गयी उसकी सारी घुटनो पर थी. तभी टीवी पर एक चुंबन का जबरदस्त सीन आया तो मैने उसकी ओर देखा उसका चहरा काम वासना से भरा हुवा था और वो पिक्चर देखते हुवे अपने सारी मे हाथ डाल कर खुजा रही थी. यह देखते ही मैने पुछा चंदा मौसी क्या खुजा रही हो उसने चौक कर सारी से अपना हाथ निकाल लिया पर मुझे उसकी चूत और झांते सॉफ दिखाई देने लगी थी. वो बोली क्या करूँ बाबू जब से मैने तुम्हारा देखा मैं पागल हो गयी हूँ यह सुन कर मैं हैरान हो गया तब वो बोली हैरान मत हो जब से मेने तुम्हारा मोटा लंड देखा है तो मेरी चूत मे आग लग गयी है और वो तुम्हारे लंड से चुद्वा कर ही शांत होगी तो मेने पूछा कि तुमने कब मेरा लंड देख लिया तो वो बोली जब मॉर्निंग मे तुमको पुष्पा जब कपड़े के बारे मे पुछने गई थी तो काफ़ी देर हो गयी तो में भी बाथरूम के पास आई थी पर देखा की पुष्पा तुम्हारे मस्त मोटे लॅंड को कस कस कर हिला रही थी और तुम भी उसकी मस्त मोटी मोटी चुचियों को मसल रहे थे तब देखा मेने तुम्हारा लंड फिर तुमने मस्ती मे बहुत कुछ बोला की रानी तेरी चुचियाँ मसल दूँगा गांद फाड़ दूँगा तेरी लेकिन तुमने पुष्पा का नाम नहीं लिया बल्कि तुमने मेरा नाम लिया तो मेरी चूत और भी गीली हो गयी फिर तुम्हारा और पुष्पा का पनी निकल गया फिर तुमने पुष्पा को बताया कि तुम मेरी चूत और गंद फाड़ना चाहते हो. यह सुन कर मैं उसके करीब गया और उसके और मेरे कपड़े निकाल कर उसकी चुचियों से काफ़ी देर तक खेलता और चूस्ता रहा वो मे मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी और मूह मे लेकर चूस रही थी जब हम दोनो काफ़ी गरम होगये तब. मैने उसको कुतिया की तरह खड़ा किया और उसकी गंद पर ढेर सारा तेल लगा कर उसकी गंद की छ्हेद पर लॉडा लगा कर पूरा लंड उसकी गांद मे पेल दिया लंड गंद मे घुसते ही वो चिल्ला रही थी उईईईईई माआआआअ फाआत्तततत्त गाइिईईईईईईईईई मेरिइईईईई गांद्द्द्द्द्दद्ड हीईीईईईई सीईईईईईईईईई उम्म्म्मममम हीईीईईईई पेल दिया रे फाड़ दिया मेरी प्यारी सी गांद्द्द्द्दद्ड कूऊ ही रीईईईई उईईईईई में मररर्ररर जाऊनगीइिईईईईईई सीईईईईईईईई कोई बचा लूऊऊओ उईईईईईईई सीईईईईईई हीईीईईईईईईईई जाने दो में मारीईईईई रीईईईई उईईईईई सीईईईईईईईई हीईीईईई यह सुनते ही मुझे जोश आगया और उसकी कमर को पकड़ कर लंड को गंद के अंदर बाहर करते हुवे बोला चुप साली कुतिया बहन की लोदी मेरा लंड खाने का तुझे काफ़ी शोक था ना अब ले बहन्चोद ये कह कर मैने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी.

फिर मैने उसकी गंद से लंड निकाल कर उसकी चूत मे डाल दिया और कस कस कर चोद्ने लगा अब चंदा को भी कुछ मज़ा आ रहा था और वो बहुत ज़ोर से सिसकने लाई हीईीईईईईई सीईईईईईई उईईईईईईईईईई माआआआआ मजाआाआअ गय्ाआआआआ आआआााआआ हााआआहा में मररररर अगईइिईईई सीईईईईईई उम्म्म्मममममम और कस के चोद साले कुत्ते फाड़ मेरी चूत सीईईईईई में मररर्र्र्ररर जाऊंगी सीईईईईईईई उईईईईईई माआआआअ खूब ज़ोर से सीईईईईईई हीईीईईई फ़ाआद्दद्ड सलीए मदर छोड़ कुत्ते बहन चोद साले भद्वे गांद फाद्द्द्दद्ड दे मेरिइईईई मैं बोला साली कुतिया आज रात भर तेरी गंद और चूत को फाड़ फाड़ कर चिथड़े कर दूँगा वो बोली जो चाहे कर लो पर ऐसे हो चोद्ते रही मत जाने दो मुझे पर चोदना बहुत कस के हीईीईईई सीईईईई बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राअज्जजजाअ फ़ाआआद्द्दद्ड दे मेरिइईई चूत ही सीईईईईईईईई उम्म्म्मम आआअहह आह उईईईईईईईई माआआआअ मज़ा आ गया बन गयी आज तो में रंडी हां बना दो पूरी रंडी बना दो और कस के फादद्ड़ साले कुत्ते कामीने मदेर्चोद फ़ाआद्द्दद्ड मेरी चुट्त्त हीईीईईई सीईईईईईईई हां हीईिइ मरिन्नन्न्नमारी उईईई सीईईई कास्क्ीई मररर्ररर जाओंगीइिईई सीईईईईई हीईीईईईई हाां अहााआअहह्ा हीईीई सीईईईई झड़ने वाली हूँ और कस्के पेल मुझे हीईीईईई सीईईईईईईई पेल डालो ऐसे ही हीईीईईई और वो झाड़ गयी मैं भी 15-20 धक्को के बाद उसकी चूत मे झाड़ गया. इस तरहा मैं दफ़्तर जाने से पहल रोज सुबह पुष्पा को या चंदा को बहुत चोदा करता था. अगर आपको मेरी ये स्टोए अच्छी लगे तो प्ल्ज़ रिप्लाइ करना ना भूलना. आपका दोस्त राज शर्मा
 
सास बनी हमराज

मेरी नयी नयी शादी हुई है. शादी को अभी ४ महीने भी नहीं बीते हैं, और मेरे पतिदेव ने मेरे साथ अभी १५ दिन भी नहीं बिताये हैं. लोक लाज के भय से अभी तक कुंवारी बैठी थी. सुहागरात को पता चला सेक्स इतना मजेदार होता है. इन १५ दिन में मैं कुल मिला कर ६ दिन ही चुदी थी. इनका पता नहीं कैसा कारोबार है, बाप बेटे दोनों गायब रहते हैं. पता नहीं सासु माँ ने अपनी जिंदगी कैसे बितायी. खैर मुझे तो ये मेरी सास के पास छोड़ गए हैं. पर पता नहीं क्यों मुझे लगता है की सासु माँ कुछ ज्यादा ही मेरे जिस्म से छेड़ छड करती हैं. कभी किसी काम से कभी किसी और काम से उनका हाथ कभी उनकी ऊँगली उनका पाँव मेरे जिस्म का नाप लेने के लिए तत्पर रहता है. कभी मेरे बूब्बे दब जाते हैं हैं, कभी बस सहला कर छोड़ दिए जाते हैं.

एक दिन सासू माँ ने पानी ले कर कमरे में बुलाया. "अरी, आ गयी बहु? कुछ और काम बचा है क्या? खाना वाना बना लिया क्या?"

"हाँ सासू माँ, सब काम हो गया है. बस लेटने ही जा रही थी. कोई और काम है क्या?"

"अरी नहीं. अब लेटने ही जा रही है तो आ, थोड़ी देर बात कर लेते हैं. बहुत दिनों बाद समय मिला है."

थोड़ी देर इधर उधर की बातें होती रही जो घूम फिर कर शादी की बात पर आ गयी.

"बहु, तू खुश तो है न? इतने दिन हो गए हैं, तुझे अपने पति की शकल देखे, कुछ अकेला सा नहीं महसूस करती?"

"सासू माँ, मैं ठीक हूँ, बस कभी कभी लगता है कि ये कुछ जल्दी जल्दी घर आ जाते तो अच्छा होता. थोडा अकेलापन तो लगता है. ससुरजी भी नहीं रहते, अपने अपनी ज़िन्दगी कैसे गुजारी?"

"बेटी तू तो बड़ी गहरी बात पूछ लेती है. पहले अजीब सा लगता था, फिर काम में मन लगा लो, तो कुछ नहीं लगता है."

फिर मैं गिलास लेकर बहार जाने के लिए कड़ी हुई थी कि

"खैर ये सब कहाँ की बातें ले कर बैठ गयी. देखूं तेरा मंगलसूत्र कैसा है?"

यह कह कर उन्होंने मेरे गले से मंगलसूत्र निकालने की प्रक्रिया करी. मेरा मंगलसूत्र थोडा लम्बा था तो वो गले से नीचे मेरी गोलाइयों में अटका था. वो थोडा अटक रहा था तो सासू माँ ने ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल दिया, और फिर गलती से उन्होंने मेरे बूब्बे दबा दिए.

"सासू माँ ये क्या?"

"अरी तुझसे क्या छुपाना? तुझे अच्छा नहीं लगा?"

"मैं समझी नहीं अम्मा?"

"मैं समझती हूँ." यह कह कर सासू माँ ने मेरे ब्लाउज का बटन खोल दिया और मेरे उरोजों को हलके हलके दबाने लगी. मेरे कान में फुसफुसा कर बोलीं "तेरे टेनिस बॉल जैसा खड़ा देख कर तो मेरा पहले दिन से मन टीपने को कर रहा था."

"पर सासू माँ ये गलत है"

"क्या गलत बहू, जब गर्मी बढ़ जाये तो कुछ गलत सही नहीं रहता."

"पर..." मैं कुछ और कहने वाली ही थी की सासू माँ ने मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए. वो उनको बेतहाशा चूमने लगी. उनका एक हाथ बराबर मेरे बूब्बे टीप रहे थे और दूसरा हाथ मेरे हाथ को उनके बूब्बे के तरफ बाधा रहे थे. उनके बूब्बे तो उतने कसे नहीं थे, पर फिर भी उमर्गर औरतों से ज्यादा गठे थे. मेरे दोनों हाथ अब उनके बूब्बे टीप रहे थे, और उनका हाथ मेरी साड़ी के अन्दर जा रहा था. मैं उनको रोकने के लिए बढ़ी, पर सासू माँ ने फिर से उन्हें उनके बुब्बों को दबाने के लिए वापस रख दिया. एक तो मैं गरम हो रही थी, ४ महीने के बाद ऐसा कुछ हो तो मन नहीं मान रहा था. सासू माँ का हाथ अब तक मेरी पैंटी के ऊपर था. वो ऊपर से ही मेरी चूत रगड़ने लगी. मैं अब अपना होश खोने लगी थी. मुझे दुनिया जहाँ की कोई फ़िक्र नहीं थी अब. सासू माँ भी पूरे जोश में आ गयी थी. अब उन्होंने मेरे साए का नाड़ा खींच दिया, जिससे मेरी साड़ी एक झटके में उतर गयी. मैं बस ब्लाउज पैंटी में थी. सासू माँ ने भी अब अपने कपडे उतार दिए. वो पूरी नंगी हो गयी. फिर उन्होंने मेरी पैंटी और मेरे ब्लाउज ब्रा भी उतार दिए. अब मैं अपने बूब्बे खुद टीप रही थी और सासू माँ मेरी चूत को चाटने लगी. जीभ से उन्होंने मेरी पूरी चूत का मुआयना कर डाला. मैं हलकी हलकी सिस्कारियां भरने लगी.

"बहू अब तू बिस्तर पर लेट जा, मैं ड्रेसिंग टेबल से क्रीम लाती हूँ."

मैं नंगी बिस्तर पर लेट गयी, और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी. सासू माँ क्रीम लेकर वापस आई. उनके हाथ में एक डब्बा भी था. सासू माँ ने मेरी चूत पर खूब सारा क्रीम मला. "बड़ी टाईट चूत है तेरी. कितनी बार चुदी है?" "कहाँ अम्मा, ४-५ बार ही तो मौका लगा है." "फिर तो बढ़िया है, इस टाईट चूत का मजा मैं भी ले लूंगी."

यह कह कर सासू माँ ने डब्बे में से एक कित्रिम लौड़ा निकला. इस लौड़े के साथ एक बेल्ट भी था, जिसे सासू माँ ने अपनी कमर पर पहन लिया, अब सासू माँ के लौड़ा भी था और चूचियां भी. मेरी चूत कि तरफ अपना लौड़ा सीध में रख कर एक झटके में मेरी चूत को फाड़ दिया. "आह नहीं, ओह, ओह, नहीं सासू माँ मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ ये चीज़ बहार निकल लो." "अरी रंडी, अब क्या शर्माना. अगर मेरा बेटा तेरी चूत नहीं फा सका तो क्या, तेरी चूत का भोसड़ा उसकी माँ बना देगी." ये कह कर उन्होंने गन्दी गन्दी गलियां सुनानी शुरू कर दी.

"अरी बापचोदी, रंडी, भईचोदी, तुझे तो मैं घोड़ों से चुद्वऊंगी, घोड़ो से क्या, तुझे तो तेरे ससुर से भी चुद्वऊंगी. उनका लंड तो इससे भी बड़ा है. छिनाल, तुझे तेरे ससुर कि रखैल बना डालूंगी. मुझे जान ले, मैं तेरी सौत हूँ, मेरा बेटा मादरचोद, मुझे चोदता है, तुझे भी मैं अपनी सौत बनाऊँगी. " ये कहते हुए वो मेरे चूतडों पर चपत लगते हुए अपनी स्पीड बढ़ा देती है. मैं दह जाती हूँ, पर मेरी सास को तो जैसे आग लगी थी, मुझे कुतिया बना दिया. फिर से मेरी गांड में खूब सा क्रीम लगाया. अबकी उनके पास दो मुँहा लंड था. एक सिरा मेरी गांड में डाल दिया, दूसरा खुद अपनी चूत में ले कर बैठ गयी. पेल पेल कर मेरी गांड भी फाड़ डाली. मैं दूसरी बार दह गयी. इस तरह कर के मेरी गांड भी चोद डाली. पर जो भी हो, ये था बहुत मजेदार.

"क्यों बहू मजा आया?"

मैं शर्मा गयी.

"क्यूँ री, अब तुझे पता चला, मैं कैसे गुजारा करती हूँ? मेरी सास ने मुझे सिखाया था, फिर मेरी ननद और नंदोई बड़ी मदद करते हैं."

पर यह बात हम दोनों के बीच ही नहीं रही. सासू माँ सच कह रही थी. मेरे पति तो मादरचोद निकले. उधर मेरे ससुर का बड़ा लौड़ा सुन कर तो मेरे मुंह में पानी आ गया. मैं बड़ी बेसब्री से अपने ससुर का इंतज़ार कर रही थी. इस के लिए मुझे ज्यादा दिन ठहरना नहीं पड़ा. २ दिन के बाद ही ससुरजी और मेरे पतिदेव आ पहुंचे. जहाँ ससुर के आने से मैं प्रसन्न थी, वही पति के आने से घबडा गयी. ये देख कर सास ने कहा, "अरी घबडा मत, सब का इंतज़ाम है मेरे पास. तू चिंता न कर, बस मेरे इशारे पर आ जाना."

उस दिन रात को सब भरे पड़े थे, ख़ास कर मेरे पति. अगर वो मेरी तरह चुदक्कर नहीं है तो पक्का नयी शादी की विरह झेल नहीं प् रहे होंगे. जैसा सोचा था वैसा हुआ. रात को खाने के बाद वो सीधे कमरे में आ गए. उनका लौड़ा तो लोहे कि तरह तना पड़ा था. दरवाजा लगा कर सीधे मेरे कपडे उतारने लगे. मैं तो पजामे से ही उनका तम्बू देख चुकी थी. दोनों नंगे थे, मुझे वो मुंह में लेने के लिए कह रहे थे, मुझे ऐसा करने में घिन आ रही थी. इतने में सासू माँ कि आवाज़ आई, "अरी बहु, ससुरजी को खिला दिया क्या?" और दरवाजे को खोल कर अन्दर आ गयी.

मेरे पति बोले "माँ, ये क्या?"

सासू माँ ने कहा, "अरे कोई बात नहीं, मैं भी शामिल हो जाती हूँ." ये कह कर वो भी कपडे उतारने लगी.

मुझे न चौंकते हो देख कर मेरे पति चौंक गए, "तुम्हे पता है?"

इस बात का जवाब मेरी सास ने दिया, "हाँ इसे पता है, तू कैसा गांडू आदमी है रे, तुझसे इसकी चूत भी फाड़ी नहीं जा सकी. देख मैंने इसको कैसा टंच माल बना दिया. एक दम रसीली चूत."

"पर माँ, ये तो मुंह में लेने से मना कर रही है."

"तो लंडूरे, ये भी अपनी माँ से कराएगा? ला मैं सिखाती हूँ."

"पर सासू माँ अगर आप इनका लोगी तो मैं कैसे सीखूंगी?"

"अरी तेरे ससुरजी हैं न दरवाजे पर, उनका लंड ले कर देख, फिर कभी नहीं भूलेगी."

इतना कहना था कि ससुरजी लुंगी में अन्दर आ गए. उन्होंने लूंगी उतार दी, और सच में उनका लौड़ा तो इनसे बड़ा था. इनका ७" का उनका ८-८.५" का था. "माँ, इतना बड़ा कैसे लूंगी"

"अरी, जब लेगी तो छोड़ेगी नहीं, पर तू घबरा मत, तेरे पति का भी कुछ दिनों में इतना ही बड़ा हो जायेगा, फिर तू दोनों से चुद्वाती रहना."

सासू माँ ने पहले अपने बेटे का सूपड़ा चाटा, मैं भी उनका अनुकरण करते हुए, अपने ससुर के लंड का सूपड़ा चाटने लगी. फिर सासू ने अन्डो को चाटने चूसने लगी, मैं तो लोलीपोप कि तरह चूसने लगी थी. फिर सास ने लौड़ा मुंह में लिया. ससुरजी का लौड़ा बड़ा था, वो पूरा मुंह में ही नहीं आ रहा था. ससुरजी तो मुन्ह्चोदी में माहिर थे, मैं पूरा नहीं ले पा रही थी तो उन्होंने मेरा सर पकड़ा और सीधे मेरे कंठ में अपना लंड पेल दिया. वो छोड़ ही नहीं रहे थे. थोड़ी देर मुन्ह्चोदी के बाद उन्होंने अपना लंड निकला और मुझे बेड पर फेंका, उधर सास पहले से चुदाने में मशगूल थी. मुझे तरीके तरीके से चोदा गया.

के लिए कहा गया. हम दोनों एक दुसरे को चूमने लगे, पर तभी मेरा ध्यान बाप बेटे पर गया. वो दोनों भी एक दुसरे को चूम रहे थे. मेरे ससुरजी मेरे पति का लंड हिला रहे थे और मेरे पति उनका. फिर मैं और सासू माँ ६९ में आकर एक दुसरे की चूत चाटने लगे, तो दोनों बाप बेटे भी एक दुसरे का लंड चूसने लगे. बाप रे दोनों लंड चूसने में क्या माहिर थे. दोनों तो ऐसे चूस रहे थे कि बरसों कि प्रक्टिस हो. इस पर सासू ने कहा, "अरी, ये दोनों तो पुराने ज़माने के आशिक हैं. बचपन में एक बार इसने मुझे तेरे ससुर से चुदते हुए देख लिया था. मैं तेरे ससुर का चूस रही थी, इसे भी अच्छी लगी, तो ये भी चूसने लगा. मैं बहुत दिनों तक तेरे ससुर को गांड नहीं देती थी, तो इसकी साड़ी प्रक्टिस तेरे ससुर ने तेरे पति पर निकाली है. पर मेरा बेटा भी कच्चा खिलाडी नहीं है. १८ का होते होते, अपने बाप कि भी गांड मारने लगा था. विश्वास न हो तो खुद देख लेना."कहा गया.

अगले दिन भी chudai समारोह हुआ, पर इस बार, सास-बहु को एक दुसरे को चोदने

मेरे पति ने मेरे ससुर को घोड़ी बनाया और उनकी गांड में अपना लंड पेल दिया. मैं ससुर के नीचे आ कर उनका चूसने लगी और सासु माँ मेरा चूसने लगी थी. थोड़ी देर कि चुदाई के बाद बाप बेटे ने adla badali की और इस बार ससुरजी ने मेरे पति की गांड चोदनी स्टार्ट की. ऐसे फर्राटे से गांड मार रहे थे कि मैं जो अब इनसे चुद रही थी, उनके धक्कों का असर महसूस कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि ये नहीं ससुरजी ही चोद रहे हैं. थोड़ी देर में सब दह गए. और इस काम पिपासा कि बांसुरी, अब भी बज रही है.
 


सासु को ससुराल में चोदा


''सासु को ससुराल में चोदा'' तुम्हे विश्वास नहीं हो रहा होगा पर ये घटना सौ टका सही सही है ! इस सही घटना को सुनने/ जानने के बाद तुम्हे ये विश्वास हो जाएगा की महिलाये सेक्स सुख के लिए सभी रिश्तों को ताक पर रख देती है सौ फीसदी सत्य घटना सुना रहा हूँ !

मेरी ससुराल गाँव में है जो बहुत ही सम्पन्न है लम्बी खेती बाड़ी है, बड़ा सा पक्का मकान है, 2 ट्रेक्टर 1 बुलेरो 1 टाटा सूमो गाडी है ! मेरे ससुर जी अपने सभी भाइयों में सबसे बड़े है उनसे 2 छोटे भाई है सभी की शादी हो चुकी है और बड़े-बड़े बच्चे भी है ! मेरे ससुर के सबसे छोटे भाई (मेरे ककिया ससुर) मेरे से उम्र में 2 साल छोटे है उनकी शादी भी मेरी शादी के बाद हुई थी ओ अभी भी फौज में है क्योकि प्रमोसन मिलने के कारण उनकी नौकरी बढ़ती जा रही ! उनके दो लड़के है एक 8 वी में और दुसरा 10 वी में दोनों गाँव से दूर के हास्टल में रहकर पढ़ाई करते है ! गाँव में मेरे ससुर,सास,और सेकण्ड नंबर के काका ससुर उनकी दो लडकिया और सबसे छोटी सास ''मंजू चाची'' सभी ज्वाइंट फेमली में रहती है ! मेरी शादी के 3 साल बाद मंजू चाची आई ससुराल में बहु बनकर जो की गजब की खूब सूरत, चंचल, सोख हसीना लगती है ! जब भी ससुराल जाता हूँ तब मंजू चाची का दामाद होने के कारण ,मेरे पाँव छूती और मेरा खूब आवभगत करती है और साली नहीं होने की पूरी कमी पूरी कर देती है अकेले मौका देखकर हल्का फुल्का हँसी मजाक भी कर लेती है ! मेरी शादी हुए करीब 20 साल हो गए , मंजू चाची की उम्र करीब 34-36 के आसपास होगी ! न तो ज्यादा मोटी और न ही ज्यादा दुबली पतली,एकदम से फिट सेक्सी गदराये हुए वदन की मालकिन है ! अभी 10 साल से जब भी ससुराल जाता तब मंजू चाची कोई न कोई बहाना बनाकर मेरे और मेरी पत्नी के साथ बुलट में 10 KM दूर बाजार करने जरूर जाती ! क्योकि काका ससुर जी तो फौज में है और बाकी दोनों ससुर मंजू चाची के जेठ जी लगे तो उनके साथ नहीं जा सकती ! मई 2014 की बात है ससुराल के पास ही मैं एक शादी में गया था सोचा ससुराल भी घूम और ससुराल पहुंच गया तो खूब आवभगत हुई मेरी ! दिन की भयंकर गर्मी में साले के कूलर लगे कमरे में ही सोता क्योकि साले साहब बहुत अच्छे वकील है जो पास के ही शहर में रहते है अपने पत्नी बच्चो के साथ ! मंजू चाची ने अकेले कमरे में बड़े प्यार से खाना खिलाया हँसी मजाक भी किया !

आज मंजू चाची खूब सजी सवरी थी लाल साडी में बहुत ही सेक्सी लग रही थी, खाना परोसते समय कई बार साडी के पल्लू को गिराया जिसमे उनकी बड़ी बड़ी चूचियों की घाटी साफ़ साफ़ दिखाई देती थी मैं भी तिरक्षी नजर और ललचाई निगाह से चूचियों तरफ देखता तो मंजू चाची हलके से मुस्कुरा कर पल्लू ठीक कर लेती ! खाना खिलाते समय मंजू चाची बोली '' कुछ काम है साम को बाजार चलेंगे मेरे साथ '' मैंने हां कर दिया और बोला '' घर वाले जाने देंगे मेरे साथ अकेले'' तो मुस्कुराते हुए बोली ''उसकी चिंता आप छोड़िये मैं बड़ी जीजी जी से पूछ लूंगी '' ! बड़ी जीजी से मतलब मेरी सासु माँ से है ! इसके बाद मैं खाना खा कर कूलर की ठंढी हवा में सो गया तो मेरी नींद करीब 5 बजे खुली , कुछ ही देर में मंजू चाची आई और बोली '' पानी लाऊ '' तो मैंने हां हिला दिया तो ओ गई और कुछ ही देर में फ्रिज का ठण्डा पानी ले कर दिया और फिर सरबत लाइ जिसे पीने के बाद मंजू चाची बोली '' जीजी से पूछ लिया है 6 बजे तक तैयार हो जाइयेगा'' मैंने फिर से गर्दन हिला दिया और मंजू चली गई ! मैं 6 बजे तैयार होकर घर के बाहर पुरुषो के बैठक हाल में आ गया जहा पर ससुर जी पहले से ही बैठे हुए थे ! मेरे आने के तुरंत बाद मेरी सासु माँ आई और ससुर जी से मंजू चाची के मेरे साथ बाजार जाने की बात किया तो ससुर जी बोले ''अरे दामाद तो लड़के जैसा होते हैं उनके साथ जाने में कोई परेसानी वाली बात ही नहीं'' इतना कहने ससुर जी ने नौकर को आवाज दिया और बोले ''बुलट बाहर निकालकर किसी साफ कपडे से पोछ दे'' नौकर ने अपना काम 10 मिनट में कर दिया ! इतने में सासु माँ और बोली ''बेटवा,मंजू पीछे वाले दरवाजे में खड़ी है'' मैं समझ गया की मंजू चाची अपने जेठ जी के सामने मेरे साथ बुलट में नहीं बैठेगी ! तब मैं उठा और बुलट को सेल्फ से स्टार्ट किया और पीछे वाले दरवाजे (गाँव में एक दरवाजा घर के पीछे या बगल में होता है जहाँ से ज्यादातर घर की महिलाओं का प्रवेश/बाहर होता है)के सामने गया जहा पर मंजू पहले खड़ी थी ! मंजू मेरे बुलट पर दुरी बनाकर बैठ गई ! रास्ते भर दूर ही रही एक दो बार जरूर मेरे पीठ पर उनकी चूची टच हुई तोलगा की चूचियाँ टाइट है ! 20 मिनट में बाजार पहुंच गए कई दुकानो में मंजू चाची ने ढेर सारी शॉपिंग किया ज्यादातर दूकान वालों ने हम दोनों को पति-पत्नी ही समझा ! मंजू चाची ने 34 -36 नंबर की ब्रा और पेंटी लिया काटन की एक गाउन भी लिया और कई साड़ियाँ मेकअप का सामान लिया और सभी सामान को एक मजबूत से झोले में रखकर बुलट के पीछे बांध लिया ! मैं समझ गया था मंजू चाची चुदवा सकती है इस लिए एक मेडिकल स्टोर से बिगोरा 100 की 4 टेबलेट और डेटेड कोहिनूर कंडोम ले लिया ! ये सब लेते लेते साम के साढ़े सात बज गए घुप अधेरा हो गया उसके बाद मंजू चाची बोली भूख लगी है तब एक होटल में गया और नास्ता किया तब तक 8 बज गए ! फिर अँधेरे में जैसे ही बाजार से बाहर मिले मंजू चाची मेरे से चिपक कर बैठ गई और बोली ''ज़रा धीरे धीरे चलाइये घर ही तो चलना है'' नहर के किनारे किनारे बाते करते हुए धीरे धीरे चलने लगे पर बुलट की आवाज में मंजू चाची की आवाज दब जाती तो मैंने सोचा क्यों न बाइक रोककर बात कर लूँ तो पेसाब करने के बाइक को रोड से कुछ दूर लेजाकर रोक दिया

उतर कर पेसाब करने चला गया वापस आया तो देखा की मंजू चाची भी बाइक के पास रही थी जब मैं वापस आया तब भी मंजू चाची बिना सरमाये हुए पेसाब करती रही उनके पेसाब करने की ''स्स्स्स् स्स्स्स्स्स्स्स्स्स'' की आवाज सुनाई दे रही थी ! जब मंजू चाची पेसाब कर चुकी तो उठी और मेरा पास आकर खड़ी हो गई और बातें करने लगी तो मैंने अचानक ही उनका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खीचते हुए किस कर के सीने से लगा लिया, मंजू चाची बिना बिरोध किये मेरे सीने से चिपक गई तो मैंने ताबड़तोड़ कई किस किया और चूची को दबा दिया मंजू चाची ने ज़रा सा भी बिरोध नहीं किया तो मैंने ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर चूचियों को खिलाने लगा तो पता चला की मंजू चाची की चूचियाँ एकदम से टाइट थी , निप्पल भी खूब टाइट पड़ चुकी थी ,तब मैंने ब्लाउज का हुक खोला और झुक कर चुचिओं को चूसने लगा मंजू चाची भी मुझे किस करने लगी और अपने हाथो को मेरे कंधे पर रखकर मुझे अपने सीने से चिपका लिया इस तरह से घुप अँधेरे में दोनों एक दूसरे को खूब किस करते रहे फिर मैं बोला ''कैसे मिलूंगा आपसे '' तब मंजू चाची धीरे से बोली '' रात में सभी छत में सोते है आपका भी बिस्तर छत दूंगी आप भी वही सोना मौका मिलते ही रात में आपको अपने कमरे में बुला लुंगी'' [ मकान की दुसरी मंजिल में सिर्फ मंजू चाची के दो कमरे और कमरे के सामने धान के पियरे की झोपड़ी बनी हुई है ] ये सब बात होने के बाद फिर से दोनों घर की तरफ चल दिए बात करते हुए और घर पहुंच कर उन्हें पीछे दरवाजे में उतार दिया और आगे आ गया बाइक खड़ी किया और ससुर जी के पास बैठ गया तो ससुर जी ने पूछा ''इतना लेट कैसे हो गए'' तो मैं दिखावटी नाराजगी ब्यक्त करते हुए कहा ''तालाब में घुसी भैस और बाजार में घुसी लुगाई जल्दी से बाहर नहीं निकलती'' मेरी ये बात सुनते ही ससुर जी जोर जोर से हसने लगे

इतने में सासु माँ सर्बत पानी का गिलास लेकर आ गई और पूछी ''क्या हुआ काहे को इतना हस रहे हैं'' तो ससुर जी ने मेरी कही हुई बात को दोहराया जिसे सुनकर सासु माँ भी हस पडी और माहौल एकदम से बदल गया तो सासु माँ ने मुझे कपडे बदलने के लिए कहकर चली गई तो मैं कुछ देर में उठा और साले साहब केकमरे में चला गया और फुल लोवर और टीसर्ट पहनकर वापस ससुर जी के पास बैठ गया 9 बजे ससुर जी के साथ खाना खाया और ससुर जी के साथ छत में सोने चला गया ! गर्मी के महीने में छत में एक तरफ पुरुष और कुछ दुरी पर महिलाये सोती है बीच में रस्सी के सहारे कपडे टांग कर ओलट बना लेती है ! रात को सोने के पहले बिगोरा 100 की एक टेबलेट खा लिया ! रात के करीब 11 बजे धूल भरी आंधीके साथ साथ पानी के छींटे गिरने लगी तो सभी छत से नीचे अपने अपने कमरे में चले गए पर कुछ देर में गर्मी से घबराकर आधा घंटे में सभी फिर से छत में आ गए रात के करीब 12:30 बजे फिर से पानी के छींटे गिरने लगी तो फिर से सभी भागते हुए नीचे उत्तर गए, मैं भी उतरने लगा तो सासु माँ मेरे पास आई और बोली ''बार बार परेसान मत होइए आपका बिस्तर यही मंजू के कमरे के सामने टपरी में लगा देती हूँ '' और इतना कहकर मंजू चाची को आवाज दिया तो ओ कमरे से बाहर आई तो सासु माँ बोली '' दामाद जी का बिस्तर यही टपरी में लगा दे बार बार सीढ़ी से उत्तर रहे है कही गिर न जाएँ अँधेरे में '' तब मंजू चाची मेरी चारपाई को घसीटते हुए टपरी में ले गई और चादर को झटकने लगी तो ऐसा लगा जैसे कुछ गिरा सासू माँ पाँव से जमीन में टटोलने लगी तो मैंने मोबाइल की टार्च जलाया और दिखाने लगा तो मंजू चाची बोली ''जरा बिस्तर दिखाएँ कोई कीड़ा-मकोड़ा तो नहीं है''

तब बिस्तर तरफ लाइट दिखाया तो मंजू चाची के ऊपर भी हलकी से लाइट गई तो देखा की मंजू चाची बाजार से जो गाउन लाई है वही पहन रखी है ! बिस्तर लगा गया तो मैं बिस्तर में लेट गया और सासू माँ भी मंजू चाची के रूम में मंजू चाची के पास ही दूसरे बेड पर लेट गई ! मंजू ने लालटेन जला दिया तो कमरे में हल्का सा उजाला हो गया ! पर मेरे दिल में अन्धेरा छा गया क्योकि मैं मन ही मन प्लान फेल होने से दुखी हुआ और अपनी किस्मत पर पहले इतरा रहा था मौसम के कारण ओ अब चिढ में बदल गया ! मैं बिस्तर में लेटते ही नकली खर्राटे लेने लगा ! करीब 25 मिनट बाद में ससुर जी ने सासू जी को आवाज दिया तो सासू माँ नीचे चली गई पर मैं अभी भी नकली खर्राटे ले रहा था, करीब 15 मिनट बाद मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मेरे कंधे को सहला रहा है मैं समझ गया मंजू चाची अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिया मुझे जगा रही है फिर भी मैं सोने की नौटंकी किये जा रहा था इतने में मंजू चाची मेरे गाल पर किस किया और कान में धीरे से बोली ''सो गए क्या'' तब मैं नींद नाटक करते हुए बोला ''कौन है'' तब मंजू चाची मेरे मुँह पर अपना हाथ रखते हुए धीरे से बोली '' मैं हूँ अंजू'' तो मैं मंजू चाची का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा लिया और फिर कंधे पर हाथ रखकर झुकाया और किस कर लिया और फिर चूचियों को टटोलने लगा तो लगा बिना ब्रा के ही गाउन पहनी हुई है बड़ी बड़ी टाइट चूचियाँ लटक रही थी मैं गाउन के ऊपर से ही चूचियों को खिलाने लगा और होठो को चूसने लगा इतने में अचानक तेज तेज हवा चलने लगी और जोर जोर पानी गिरने लगा तो मंजू चाची जल्दी से उठी और सीढ़ी की तरफ भागी और सीढ़ी दरवाजा लगा जल्दी से वापस आ गई तो मैंने पूछा कहाँ गई थी तो बोली ''सीढ़ी का दरवाजा बंद करने गई थी'' तो मैंने पूछा क्यों बंद किया तो बोली ''पानी अंदर जाता हवा के साथ और दालान में पानी भर जाता'' तब मैंने मंजू चाची का हाथ पकड़ा और अपनी चारपाई में बिठा लिया और चूची पर हाथ घुमाया तो लगा की ये तो गीली हो गई है !

तब मंजू को बोला ''आप तो गीली हो गई है कपडे बदल लीजिये'' तो कुछ नहीं बोली तो मैंने फिर से उनके ऊपर हाथ घुमाने लगा तो मेरे हाथ को पकड़ कर चूमने लगी तब मैंने उन्हें अपनी तरफ खीच कर चारपाई में लिटा लिया और उनके ऊपर चढ़ गया और किस करते हुए चूचियों को दबाने लगा ! कुछ ही मिनट में मैंने गाउन की चेन को खोल दिया और चूची को चाटने लगा की इतने में मंजू का फोन बजने लगा तो दौड़ कर कमरे में गई और बात करके वापस आई तो मैंने पूछा ''किसका फोन था'' तो बोली ''जीजी का था,पूछ रही थी दामाद जी की चारपाई गीली तो नहीं हो रही तो मैंने कह दिया नहीं'' और इतना कहा कर वापस जाने लगी तो मैंने पूछा ''अब कहाँ जा रही हैं'' तो बोली ''कपडे बदल लूँ'' तो मैं कहा '''ओके'' और धीरे से चारपाई से उठा और खड़ा हो गया जैसे ही मंजू ने गाउन को उतारा तो लालटेन के उजाले में उनका मस्त गदराया हुआ सेक्सी वदन दिखा तो मैं जाकर पीछे से लिपट गया,लिपटे लिपटे ही अपना लोवर और चढ्ढी उतार कर नंगा हो गया और मंजू की चूचियों को दबाने लगा और मंजू को अपनी तरफ घुमा लिया और खड़े खड़े ही मंजू की चूची को चूसने लगी और एक हाथ को दोनों जांघो के बीच में डालने लगा पर जांघे आपस में सटी हुई थी तो मंजू को बिस्तर में बैठा दिया और दोनों टांगो को फैला कर चूत को चाटने लगा मुस्किल से एक मिनट ही चूत चाटा होगा की मंजू चाची गरम आग पड़ गई और अपने चूतडो को बिस्तर में मेरे मुँह की तरफ बार बार टकराने लगी मंजू की चूत मेरे नाक तक से टकरा रही थी मैं समझ गया मंजू बहुत दिन से नहीं चुदाया है इस लिए इतनी जल्दी पागल हो गई चुदाने के लिए तब मंजू को लिटा दिया और फटाक से चढ़ कर लण्ड पेल दिया पानी के बौछार छत पर और मेरे लण्ड की बौछार मंजू की चूत पर मारने लगा मुस्किल में 25-30 झटके ही मारा होगा की मंजू ने मुझे जोर से चिपकाकर ढीली पड़ गई मैं समझ गया मंजू झर चुकी है पर मैं अंतिम पड़ाव इसलिए लगातार झटके मारता रहा और 30-40 झटकों में ही लण्ड से ढेर सारा वीर्य मंजू की चूत में उड़ेल दिया और जोर से चिपका लिया तो मंजू मुझे अपने ऊपर से हटा कर जल्दी से उठी और उठकर बैठ गई तो मैंने धीरे से पूछा ''क्या हुआ" तो बोली ''अभी 4-5 दिन पहले ही सिर धोई हूँ कही गड़बड़ न हो जाए'' (सिर धोया मतलब माहवारी से फ्री हुई) तब मैं फुसफुसाते हुए बोला ''कंडोम तो लोवर की जेब था पर जल्दी जल्दी भूल गया'' तो मेरी तरफ देखि और मेरे गाल पर एक हलकी सी चपत मारा और उठकर खड़ी हुई तो जांघो से वीर्य बहने लगा और बिस्तर में भी ढेर सारा गिर गया तो अपना पुराना पेटीकोट उठाया और पहले जांघो को साफ़ किया फिर बिस्तर वीर्य को पेटीकोट से पोछने लगी और फिर वापस गाउन को पहन कर छत में किनारे बने बाथरूम में पेसाब करने चली गई मैं भी चढ्ढी लोवर पहन लिया और टपरी में अपने बिस्तर पर आकर लेट गया कुछ देर में मंजू आई तो मैंनेहाथ पकड़ कर रोक लिया तो बोली ''रुकिए आती हूँ 5 मिनट 'में'' और कमरे गई 5 मिनट बाद आई तो उनके हाथ में गिलास था मुझे दिया और बोली ''पी लीजिये'' तब मैंने बोला ''पहले आप'' तो फिर बोली ''मेरा जूठन आपको नहीं पिलाऊगी'' तब मैं धीरे से हसा और बोला ''जब आपकी बुर चाट लिया तब ये जूठन बचाने से क्या फायदा'' तो हँसने लगी और बोली '' चलिए पीजिये बहाने नहीं बनाइये'' तब मैं दूध पीने लगा आधी गिलास बचा तो मंजू की पकड़ा दिया जब अंजू दूध पीने लगी और थोड़ा सा दुष बचा उनके हाथ से गिलास लेकर उनका जूठा दूध पी लिया तो मुझे बड़े प्यार से चुम लिया और खाली गिलास लेकर रूम में रख कर फिर से आ गई और मेरे पास बैठ गई ! हल्का हल्का पानी अभी भी गिर रहा था ! मंजू को याद दिलाया सीढ़ी के दरवाजे को खोलने की तो बोली ''पानी गिरने पर ओ बंद ही रहता है किसी को कोई काम होगा तो बजायेगा'' तब मैंने कहा ''फिर कोई बात नहीं'' इतना कह कर मंजू को अपने पास ही बैठा लिया और दोनों बिलकुल धीमी आवाज में बातें करने लगेकुछ देर में मंजू को अपनी चारपाई लिटा लिया और बाते करने लगे !पानी की हलकी हलकी फुहार ने मौसम को ठंडा कर दिया पर मंजू और मेरे जिस्म में और गर्मी और भड़क गई 2 घंटे तक बात करते करते मेरे लण्ड पर बिगोरा का प्रभाव फिर से दिखा,लण्ड तन खड़ा हो गया तो फिर से मंजू की चूचियों से खेलने लगा और होठों को चूसने लगा तो मंजू ने लोवर के ऊपर से लण्ड को टटोलने लगी तब मैंने कान में धीरे से कहा ''चलिए अंदर चलते है'' तो मंजू तुरंत ही चारपाई से उठी और कमरे में घुस गई मैं भी पीछे पीछे चला गया और जाते ही मंजू को गाउन उतारने को कहा तो ओ तुरंत ही गाउन उतार कर रख दिया ,मैंने भी अपने कपडे उतारे और लोवर से कंडोम निकाला और बेड पर रखकर मंजू की टांगो को फैलाया और चूतचाटने लगा मुस्किल से 3-4 मिनट तक चूत चाटा होगा मंजू मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खीचने लगी तो मंजू को घोड़ी बनने का इसारा किया तो ओ दो तकिये को अपने पेट सीने के नीचे रखी और तुरंत घोड़ी बन गई तो मैंने फनफनाता हुआ लण्ड एक झटके में ही पेल दिया तो मंजू धीरे से बोली ''इस बार कंडोम लगा लीजिये'' इतना कहकर कंडोम मेरे हाथ में पकड़ा दिया तो मैंने लण्ड निकाला और सुपाड़े को नंगा किया बिना ही कंडोम लगा लिया !

इस बार मंजू ज्यादा देर तक चुदाई के लिए रुकेगी ये सोच कर लण्ड की चमड़ी पीछे किये बिना ही कंडोम लगा लिया और एक बार फिर से चूत को चाटने लगा तो मंजू अपने चूतड़ो को अगल -बगल हिलाने लगी और एक हाथ से मेरे सिर को हटाने लगी तो मैंने चूत चाटना बंदकरके अपना 7 इंची लंबा और खूब मोटा लण्ड मंजू की चूत में पेल कर आगे पीछे करने लगा मंजू बड़े मस्त अंदाज में चुदाने लगी जब मैं लण्ड को आगे पीछे करना बंद कर देता तो मंजू खुद ही अपने चूतड़ो को आगे पीछे करने लगती,मैं झुक झुक कर एक हाथ से मंजू की चूचियों को खिलाता तो मंजू में और अधिक चुदाई का जोश चढ़ जाता तो अपने चूतड़ों को और जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगती इस तरह से करीब 7 मिनट तक लगातार लण्ड की बौछार देता रहा ! उधर पानी जोर जोर से गिरने लगा और मौसम में ठंडक बढ़ गई खुले हुए दरबाजे से पानी के छीटे आ रहे थे पानी की बौछार के साथ साथ कमरे का तापमान कम होता जा रहा था पर मंजू और मेरा तापमान बढ़ता जा रहा था, मंजू को तड़पाने के लिए जब लण्ड आगे पीछे करना बंद कर देता तो मंजू अपने चूतड़ों को खुद ही आगे पीछे करने लगती तो मैं फिर दो चार बार जल्दी जल्दी लण्ड की ठोकर मारता और बंद कर देता तो मंजू फिर से अपने चूतड़ों को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगती इस तरह से मैंने कई बार लण्ड की ठोकर मारना बंद कर देता तो मंजू से नहीं रहा गया तो ओ मुझे बिस्तर में गिरा दिया और खुद ही मेरे ऊपर चढ़ कर चुदवाने लगी

मेरे सीने में अपने हाथों को रखा और खड़े लण्ड पर मलखम्भ करने लगी लगातार 5 मिनट तक मलखम्भ करने के बाद थक गई और लण्ड घुसाये हुए मेरे ऊपर लेटकर चूतड़ों को हिलाने लगी और मेरी जीभ को चूसने लगी तब मैंने मंजू को नीचे किया और चढ़ गया मंजू के ऊपर मंजू की दोनों जांघो को अपनी जांघो पर रख लिया और मंजू के ऊपर झुकते हुए मंजू की चूचियों को चूसता जाता और लण्ड के जोरदार झटके मारता जाता ! मंजू ने मेरी कमर पर हाथ रखकर मेरे चूतड़ों को आगे पीछे करने में मदद करने लगी मैं मंजू की जीभ, चूची को बीच बीच में चूसता जाता अब मंजू मुँह से जोर जोर से उउउउ आआह्ह्ह्हाह्ह्हआह्ह्ह स्स्स्स्स्स्स्स्स आअह आआह्ह की आवाज आने लगी मंजू का चेहरा लाल सुर्ख पड़ गया मंजू ने अपना मुह फाड़कर कही मुह से सीटी लगाने लगती उउउउ आआह् ह्ह्हाह्ह् हआह्ह् ह स्स्स्स्स् स्स्स्स करती जाती मैं लण्ड की जोरदार वारि करने लगा उधर बाहर जोर जोर से वारिस होने लगी वारिस तड़ तड़ की आवाज के आगे मंजू की आवाज दब गई इस तरह से लगातार

आखिरी में तरह से लगातार कई झटके मारने के बाद दोनों एक साथ स्खलित हो गए

लगभग 8 मिनट तक लण्ड-चूत की लड़ाई चलती रही और आखिर में दोनों ने हार मान लिया मंजू ने मेरे पीठ पर दोनों हाथो को रखते हुए कस कर अपने सीने से चिपका लिया मुझे मैं भी सखिलित हो गया और मंजू को चूमते हुए मंजू के ही ऊपर लेट गया ! करीब 3 मिनट बाद मंजू ने अपने ऊपर से उठाया तो मैं उठा और कपडे पहन लिया ! बाहर अभी भी पानी गिर रहा था पूरी छत में पानी बह रहा था ! मंजू नंगी ही दरवाजे के सामने ही बैठ कर पेसाब करने लगी ,फिर कमरे के अंदर आई और बार ब्रा और पेंटी पहन कर गाउन डाल लिया ब्रा का हुक मेरे से ही लगवाया ! और पलट कर मुझे किस करते हुए बोली ''आप बहुत मजेदार हैं'' और इतना कह कर मुझे छोड़ते हुए पास ही रखी गैस चूल्हे को जलाया और दूध गर्म करने लगी तो मैंने कहा अब इतनी रात को दूध नहीं पीउंगा तो हॅसते हुए बोली '' बस पेट भर गया दूध से '' तो मैं हँसते हुए जबाब दिया ''आपके दूध से तो कभी भी पेट नहीं भरेगा'' और इतना कहकर पास में जाकर झुक कर मंजू की चूचियों को दबा दबाने लगा तो मंजू फिर से खड़ी हो गई और मुझे चूमते हुए बोली ''आप बहुत मजेदार हैं'' और बाते करने लगी इतने उफना कर तपेली से बाहर गिरने लगा तो उई माँ करते हुए जल्दी से गैस को बंद किया ! मैं बाहर जाकर देखा तो हलकी हलकी बूंदा बांदी अभी भी हो रही थी मैं छत के एक किनारे पर बैठकर पेसाब किया और अंदर रूम में आया तो मंजू बिस्तर पर लेटी हुई थी, मैं भी पास जाकर बैठ गया तो मंजू बोली ''पानी गिर रहा है क्या'' तब मैंने उन्हें ''हां'' में जबाब दिया तो खुद बाहर निकली और घूम घूम कर देखने लगी और मेरे पास आकर बोली ''आपकी चारपाई अब बाहर कर देती हूँ पानी बंद हो गया'' और मेरे उत्तर प्रतीक्षा किये बिना ही चारपाई को घसीटने लगी तो आवाज आने लगी तब मैंने चारपाई का दुसरा सिरा पकड़कर उठा लिया और बाहर छत में लगाया और दोनों चारपाई गए और बाते करने लगे तो मुझे नींद आने लगी और मैं कब सो गया पता ही नहीं चला ! मेरी नींद सुबह साढ़े छः बजे खुली तो देखा की चारो तरफ उजाला फैला हुआ है ! मैं उठकर चारपाई में बैठ गया और इधर उधर देखने लगा इतने में सासु माँ पानी की बोतल और एक गिलास लेकर आई और पानी दिया मैं पानी पीने लगा और सासु माँ मंजू के कमरे के पास गई और दरवाजे को ठोकने लगी और मंजू मंजू कहकर आवाज देने लगी तो मंजू चाची उठ गई तो सासु माँ ने मंजू से कुछ कहा और छत से नीचे चली गई ! कुछ देर में मंजू चाची साड़ी-ब्लाउज में मेरे पास आई और पानी पीने लगी और धीरे से बोली ''बहुत अच्छी नींद लगी'' इतना कहकर मुस्कुराई और छत से नीचे चली गई और कुछ देर में वापस आई उनके हाथ में नीम की दातुन थी जिसे मुझे दिया ,दातुन के बाद मैंने चाय पीया और छत से नीचे आ गया सुबह का नास्ता किया और करीब 8 बजे अपनी कार से वापस गया ! दिसंबर 2014 में मंजू चाची मेरी पत्नी के साथ मेरे यहाँ आई तो मौका पाकर दर्शन के बहाने होटल में भी लेजाकर चोदा ! (होटल की चुदाई बिस्तार से सुनाऊंगा)
 
ऊऊऊहह दीदी बहुत मज़ेदार है तेरी

मैं सीमा हूँ.. और मेरी फिगर 36-25-38 है. गणेश मेरा भाई अभी कुँवारा है. मैं भी कई महीनो से एक अच्छे लंड की तलाश में थी, जो कहीं आज मिला था मुझे. मेरा पति साला 4 इंच का लंड लेकर मुझे चोदने लगता है तो मैं संतुष्ट नहीं हो पाती. कई मर्दों के साथ संबंध बना चुकी हूँ, लेकिन

मेरी चूत हमेशा भूखी रह जाती है. मेरे पति के बॉस ने मुझे एक बार अपने पार्ट्नर के साथ मिल कर दो दो लंड के साथ चोदा था, लेकिन कुछ वक्त से पति के बॉस का भी तबादला हो गया और अब मुझे लंड की कमी महसूस होती है.” सीमा, मेरी प्यारी दीदी, तू भी हमारी मम्मी जैसी चुदकर हो. मम्मी का भी एक मर्द से गुज़ारा नहीं होता।

आज सुबह जब वो रसोई में खाना बना रही थी तो उसकी चुचि ब्लाउस से बाहर झाँक रही थी. उसी वक्त फोन आया तो मम्मी ने उठाया. दूसरी तरफ से मनोहर अंकल ने कहा” रानी, आज अपनी चूत को शेव कर लो, तुझे मैं और दिलबाघ दोनो चोदने वाले हैं… दिलबाघ तुझे ना जाने कब से चोदने के लिए मिन्नते कर रहा है… तुम ठीक 5 बजे होटल संगम पहुँच जाना, मेरी रानी.., आज तेरी दीवाली मनाएँगे…” मैं उस वक्त उन दोनो की बातें सुन रहा था. मेरा तो दिल कर रहा था की मम्मी को वहीं चोद डालूं, पर मैं इस बात पर खुश था की आज शाम को अपनी सीमा दीदी के साथ मजे करूँगा. सच सीमा, मैने आज तक तेरे जैसी औरत नहीं चोदी…”

मेरे बारे में मेरे भाई को कुछ दिन पहले ही पता चला था. मेरा भाई मुझसे मिलने आया था. मेरा पति अपनी दुकान और मेरी सास बाज़ार गयी हुई थी. मुझे यही मौका था और मैं अपने जवान नौकर से चुदवाने लगी. मेरा नौकर रामू भी जानता था की मैं लंड की प्यासी हूँ क्योंकी वो मेरे पति की नामर्दानगी के बारे में जानता था।

रामू उस वक्त टेबल सॉफ कर रहा था जब मेरी सास बाज़ार गयी. मैने रामू को पीछे से पकड़ लिया और उसके मस्ताने लंड से खेलने लगी, ” क्या बात है.., मालकिन, आज बड़ी मस्ती में हो.., कहीं मेरा केला खाने का इरादा तो नहीं है?” मैने उसके पजामे को नीचे सरकाते हुए उसका लंड मुहँ में डाल लिया. रामू मेरी आदत जानता था की मुझे केला खाने की आदत है।

रामू बोला,” सीमा मालकिन क्यों ना आज तुझे तेरी सास के बिस्तर पर चोदा जाए… उसको भी मेरा केला बहुत पसंद है.. अब तो सास बहू दोनो को एक ही लंड से गुज़ारा करना पड़ेगा… साली बुडिया भी लंड की शौकीन है, आपकी तरह..”

रामू मुझे उठा कर सासू माँ के बिस्तर पर ले गया और मुझे नंगा करने लगा. मेरे चूतड़ पर हाथ फेर कर बोला,” सीमा आज ना जाने क्यों तुझे कुत्तिया बनाने का मन कर रहा है… तुम मालकिन भी हो और मेरी रांड़ भी… अगर मैने अपनी मालकिन की सवारी नहीं की तो दुनिया क्या कहेगी? आपकी सास तो मेरे लंड की सवारी करने का शौक रखती है… आपके चूतड़ मुझे बहुत आकर्षित करते है.. अगर एतराज़ ना हो तो जल्दी घोड़ी बन जाओ… बुडिया का कोई पता नहीं कब आ टपके..”

मैं झट से घोड़ी बन गयी. वैसे तो मैं हर आसन में चुदाई का आनंद ले चुकी हूँ, लेकिन घोड़ी बन के मर्द के सामने झुकना मुझे मर्द के आगे समर्पण करने के बराबर लगता है. मैं नौकर के आगे झुकी तो उसके चेहरे पर जीत भरी मुस्कान थी. उसने एक ही धक्के में अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. उसके हाथों ने मुझे चूतड़ से कस के पकड़ रखा था. लंड मेरी चूत चोद रहा था और मेरी चूत सावन के गीत गा रही थी. रामू ने मुझे बालों से खींच कर चुदाई शुरू कर दी. वो मेरे बालों को एसे खींच रहा था जैसे घोड़ी की लगाम खींच रहा हो।

हम दोनो को पता ही नहीं चला की कब से मेरा भाई गणेश हम दोनो को देख रहा था. हम जल्दी में डोर बंद करना भूल गये. मैने उत्तेजना वश आँखें बंद कर रखी थी और एक कुत्तिया की तरह हाँफ रही थी. रामू का लंड किसी पिस्टन की तरह मुझे चोद रहा था,” अहह…..ज़ोर से चोद….रामू….चोद मुझे माँदरचोद….मेरी चूत की आग बुझा साले रामू, चोद ज़ोर से मेरी चूत….है मैं मरी जा रही हूँ…बहनचोद ज़ोर से डाल,” मैं चीख रही थी और रामू लगातार तेज़ धक्के मार रहा था।

उसका लंड भी अब झड़ने को था और वो बोल रहा था,” सीमा…साली रांड़…क्या मस्त माल है तू….अच्छी है तेरा पति नामर्द है वरना एसी मख्खन जैसी चूत मेरी किस्मत में कहा होती….वा मालकिन…मेरी रंडी मालकिन…..चुदवा रामू के मस्त लंड से,”

हम दोनो थोड़ी देर में झड़ गये और रामू काम करने लग गया. गणेश शायद हमारी बेशर्मी देख कर दरवाज़े से हट गया और बाहर चला गया था क्युकि वो थोड़ी देर से घर में दाखिल हुआ. मैं अपने कपड़े बदल चुकी थी और जब अपने छोटे भाई को देखा तो सिर पर दुपटा लेकर उसका स्वागत करने पहुची. मैने अपने भाई के चरण स्पर्श किए जैसे की हमारा रिवाज़ है. कमरे में कोई नहीं था. गणेश मुझे अजीब नज़रों से देख रहा था. उसने मुझे आलिंगन में लेते हुए सीने से लगा लिया।

मेरी चुचि जो के बहुत बड़ी है, मेरे भाई के सीने में धस गयी. उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए पूछा,” दीदी, क्या नौकर अब पति से बढ़ कर है तेरे लिए? जब मैने आपको उसके सामने मर्दजात नंगी होकर घोड़ी बने हुए देखा तो मुझे बहुत शर्म आई… क्या अब रामू का दर्ज़ा मेरे जीजा का हो चुका है? क्या अब मेरे घर की इज़्ज़त नौकर के लंड की मोहताज़ हो चुकी है? क्या अब इस घर में मर्दों की कमी है? अगर जीजा जी में दम नहीं था तो कम से कम अपने भाई तो अपना लिया होता… गणेश साला, रंडी के कोठे पर पैसे देकर चूत मागता फिरता है और उसकी बहन नौकरों को फ्री में बाँट रही है… सीमा, तुझे नंगी देख कर मैं पागल हो चुका हूँ… अब से रामू की छुट्टी कर दो और मुझे अपना पति बना लो… मेरे लंड को देख लो, पूरा 9 इंच का है,” कहते ही उसने अपनी पेंट की ज़िप खोल डाली।

उसका मोटा लंड बहुत प्यारा लगा. लेकिन एक बात मुझे सता रही थी,” गणेश, बहनचोद साले अपनी ही बहन को चोदोगे तुम? अगर ऐसा ही करना था तो मेरी शादी उस नपुंसक से क्यों की थी, जिसकी कमी मैं नौकर से पूरी कर रही हूँ… भाई, बहन को भाई नहीं चोदा करते… भाई के लिए तो भाभी होती है..”

गणेश मेरी बात पर हंस कर बोला,”सीमा, अगर रामू तुझे चोद सकता है तो गणेश में क्या कमी है? जीजा जी की कमज़ोरी का दुख तुझे ही क्यों उठना पड़े? भाई का फ़र्ज़ बनता है की अपनी बहन को हर मुश्किल से निकाले, उसको हर खुशी दे जिस पर उसका हक बनता है… और दीदी, तुझ जैसी सुन्दर और सेक्सी औरत की सेवा करना तो खुशकिस्मत भाई को ही मिलता है… मेरा बस चलता तो मैं तेरी शादी कभी ना होने देता… तुझे अपना बना कर रखता… लेकिन फिकर मत करना… अब तुम मेरी हो… आज से तुझे चूत ठंडी करवाने के लिए किसी के पास जाने की ज़रूरत नहीं है… मैं तेरी सास को बोल दूँगा की मेरे पास अपनी दीदी के लिए अपने ऑफीस में काम है जिसको कर के दीदी के पैसे भी बन जाएँगे और टाइम भी पास हो जाएगा… बुडिया लालची है, शक नहीं करेगी और मान जाएगी… तुम रोज़ मेरे ऑफीस चली आना और हम मेरे कमरे में खूब मौज करेगे… मैने वहाँ बिस्तर पहले ही लगा रखा है.” गणेश ने अपनी पूरी स्कीम मुझे बता डाली।

“लेकिन गणेश, लोग क्या कहेंगे? किसी को शक नहीं होगा?” मैने अपने मन की आशंका बताई.” दीदी, शक कैसा? तुम मेरी बहन हो… क्या बहन अपने भाई के ऑफीस में जॉब नहीं कर सकती? अब सोच विचार का वक्त नहीं है, तुम हां कर दो… बाकी मैं खुद देख लूँगा.” मेरी चूत ने मुझे सोचने का मौका ही नहीं दिया. साली अपने भईया के लंड की खुशबू सूंघ कर मस्ती से भर गयी और मैने भईया की ऑफर मान ली. सासू माँ ने गणेश की बात झट से स्वीकार कर ली. शायद उसके लिए अब रामू से चुदवाने का खुला मौका था. खैर अगले दिन मैं गणेश के ऑफीस जा पहुँची।

ऑफीस काफ़ी बड़ा था. ऑफीस के पीछे भईया का रूम था जिस में वो काम भी करता था और आराम भी. कमरा काफ़ी बड़ा था जिसमें गणेश ने एक फ्रिज, टीवी, कुछ Cd, एक ड्रिंकिंग बार और एक डबल बेड रखा हुआ था. डबल बेड पर सफेद रेशमी

चादर बिछी हुई बहुत सेक्सी लग रही थी. “क्यों कैसा लगा, सुहागदिन का बिस्तर, दीदी? साथ में बाथरूम भी है, जिसमे मेरी प्यारी दीदी बाथ ले सकती है… ऑफीस का कोई आदमी इस कमरे में नहीं आ सकता.. यहाँ हम पति पत्नी बन कर रहा करेंगे,”कहते ही गणेश ने मुझे पीछे से जकड़ लिया और मेरी चुचि को दबाने लगा। मेरी उतेज्ना बढ़ने लगी और चुचि खड़ी होने लगी. गणेश के गर्म साँसें मेरे गालो से टकराने लगी और वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चुचियाँ भींचने लगा.”उहह गणेश, क्या कर रहे हो.. मुझे अभी साँस तो लेने दो… क्या मुझे बस चोदने के लिए ही बुलाया है… तू तो किसी चूत के भूखे लड़के लग रहे हो… उईईई धीरे से दबाओ ना, ये तेरी बहन की चुचि है, किसी रंडी की नहीं… भाई, तेरा लंड मेरे नितंभों में घुस रहा है, इसको संभालो ज़रा!”

गणेश कहा रुकने वाला था. भाई ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए. खिड़की के शीशे में से बारिश होती दिख रही थी और उधर बहन नंगी हो रही थी. मेरा गोरा बदन पेंटी और ब्रा में खड़ा मेरे भाई के लिए हाज़िर था. गणेश मेरी सुडोल जांघों को घूर रहा था, मेरे उभरे नितंभ स्पर्श कर रहा था, मेरी चूची से खेल रहा था और मेरे मसल जिस्म के नशे में झूम रहा था. मेरी वाइट पेंटी के नीचे मेरी चूत किसी डबल रोटी जैसी फूली हुई थी. मेरी भूरी आँखें मदहोशी से बंद हो रही थी. चूत में चीटियाँ दौड़ रही थी. मेरा सारा बदन गंनगना चुका था. मेरे भाई ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरी फूली हुई चूत को ज़ोर से मसल दिया. मेरी चूत से रस की धारा बहने लगी और मैने अपनी जांघें भींच ली. मैने अपना नंगा जिस्म जब मिरर में देखा तो अंदर की आग और भी भड़क उठी. मैने भईया की पेंट के ऊपर से उसका खड़ा लंड पकड़ लिया.. लंड किसी साँप की तरह फूंकार रहा था. मेरी चूत अब कामुकता की आग मैं जल रही थी।

“भईया, अब देर मत करो, मेरी चूत को तुम ने गर्म कर दिया है, अब जल्दी से डालो अपना लंड इसमे, प्लीज़,भईया ,” कहते ही मैने भईया की पेंट उतार डाली और उसके काली झांठो में उठ रहे लंड को देख कर मेरी हरामी चूत खुशी के आँसू बहाने लगी. आज मेरा सगा भाई, अपने लंड से मुझे चोदने वाला था. गणेश ने मेरी अंडरवियर नीचे सरका दी और मेरे ब्रा को खोलने लगा. ब्रा के खुलते ही मेरी गोरी चुचि के ऊपर ब्राउन रंग के चुचक भईया के हाथों में आ गये. गणेश ने मेरे चुचक मुह में ले लिए और चूस लिया,” आआआहह….भैय्आआआ,,,,,चूसो भईया….मेरे निपल्स चुसो….अपनी बहन का दूध पियो….याया….ऊऊऊओह…..मेरी फुददी मारो भईया,” मेरे मुख से बरबस ही निकल गया. मैं आप को बता देना चाहती हूँ की चुदाई के वक्त मैं गंदी गंदी गालियाँ बकती हूँ।

गणेश किसी बच्चे की तरह मेरा दूध चूसने लगा. मेरे चुचक उसके थूक से भीग गये और मैं मस्ती से झूमने लगी. गणेश का एक हाथ मेरी चूत पर रेंग रहा था. मैने चूत को बिल्कुल सॉफ किया हुआ था और मेरी चूत रस टपका रही थी. गणेश ने एक उंगली मेरी चूत में धकेल दी तो मैं सिसकारी भरने लगी. मैने भी हाथ नीचे कर के भईया के लंड को मुठियाना शुरू कर दिया और उसके अंडकोष से खेलने लगी।

गणेश मेरे निपल्स से अपने होंठ हटाता हुआ बोला,” सीमा, आज तक ऐसा जिस्म नहीं देखा मैने. अगर इजाज़त हो तो तेरी चूत का भी स्वाद चख लू… तेरी मख्खन जैसी चूत मेरे लिए आज तक एक सपना ही थी.. इसको चाट लेने दो मुझे.. दीदी” मैं भी यही चाहती थी. मेरा पति मेरी चूत बहुत चाटता था, लेकिन वो बहनचोद चोदने के लायक नहीं था और रामू चोद तो लेता था, मैं उसको कभी चूत चाटने का मौका नहीं देती थी. आज गणेश मुझे चाटने और चोदने वाला था. मैने कमरे की खिड़की खोल दी और बारिश की बोछारे मेरे नंगे चूतड़ पर गिरने लगी,” भईया, जब लाज शर्म छोड़ ही दी है तो जो दिल मैं आए सब कर लो, सीमा दीदी पर अब तेरे हक की कोई सीमा नहीं है… मुझे भईया अपना लंड चुसवाओ… मैने आज तक अपने पति का लंड नहीं चूसा, तेरा चूस लूँगी, तुझे ही अपने दिल से अपना पति मान लिया है मैने, लाओ मुझे भी अपना केला खिला दो..”

गणेश बिस्तर पर साइड लेकर लेट गया और मैं उसके पैरों की तरफ मुहँ करके लेट गयी जिस कारण मेरा मुहँ भईया के लंड के सामने आ गया और मेरी चूत गणेश के मुहँ के सामने आ गयी. हम ने 69 बना कर चूसना शुरू कर दिया. गणेश झूठ नहीं बोल रहा था जब उसने कहा था की उसका लंड 9इंच का है. उसका गुलाबी सूपड़ा मेरे मुहँ में फिट नहीं हो रहा था. उधर गणेश मेरी चूत को फैला कर अपनी ज़ुबान अंदर घुसेड रहा था. गणेश ने मेरे चूतड़ थाम रखे थे और मैं भईया के अंडकोष सहला रही थी. कमरा कामुकता से भरा हुआ था और चूमने चाटने की आवाज़ें सॉफ सुनाई पढ रही थी. गणेश का लंड एक लोहे के डंडे की तरह खड़ा था. मैने अचानक उसके अंडकोष मुहँ में ले लिए और चूसने लगी।

कोई 15 मिनिट के बाद गणेश ने अपना मुहँ मेरी चूत से हटा लिया और बोला,” सीमा अगर तुमने और अधिक लंड चूसा तो मैं झड़ जाउंगा… अब तुम एक बार घोड़ी बन जाओ… मैने जब से तुझे उस कमीने नौकर के सामने घोड़ी बने देखा है, तुझे घोड़ी बना कर सवारी करने का सपना देख रहा हूँ… चलो दीदी, अब घोड़ी बनो अपने भाई के लिए,” मैं अपने भाई की बात कैसे टाल सकती थी. मैं पलंग को पकड़ कर घुटनो के बल घोड़ी बन गयी.. गणेश ने मेरी गांड को प्यार से सहलाया और फिर अपने लंड को मेरे चूतड़ की दरार से मेरी चूत में धकेल दिया. मेरी चूत से रस बह रहा था लेकिन भईया का लंड इतना बड़ा था की मेरी चूत गंनगना उठी. ऐसा लगा की मेरी चूत में एक जलता हुआ शोला डाल दिया हो.

“हा..आई…..भईया….धीरे…ई….बहुत बड़ा है आपका भईया… गणेश साले तेरा लंड किसी गधे के लंड से कम नहीं है,,,,,,मुझे बहुत मजा दे रहा है……चोदो भईया पर धीरे धीरे….मैं तेरी बहन हूँ साले कोई बज़ारु औरत नहीं…..ओह भईया चोदो…” मेरे मुहँ से चीख निकली. गणेश नहीं रुका. उसने अपना लंड डालना जारी रखा. मेरी गांड को पकड़ कर वो धक्के मारने लगा और 9 इंच के लंड ने भी अब मेरी चूत में जगह बना ली थी. मेरी चुचि झूल रही थी जिसको भईया ने पकड़ लिया और ज़ोर जोर से मसलने लगा. भईया के अंडकोष मेरी गांड से टकराने लगे. मैं पसीने से भीग चुकी थी. भईया हाँफ रहे थे लेकिन मुझे चोद रहे थे।

“सीमा, तुम मेरी पत्नी बनने लायक हो…काश ऐसा हो सकता….ओह मेरी बहना…मेरी पत्नी बन जाओ…..कितनी सेक्सी और चुदकर हो तुम मेरी बहना,” गणेश बोल रहा था और मैं अपने चूतड़ पीछे धकेल कर उसका पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी.” भईया, मुझे अपनी पत्नी ही समझो…..अगर तुम कहो तो मैं तलाक़ ले सकती हूँ…तेरे जैसे मर्द के लिए तलाक़ तो क्या मैं क़त्ल भी कर सकती हू…..हम अदालत से कह देंगे की मेरा पति नामर्द है…साला खुद ही तलाक़ दे देगा अपनी इज़्ज़त की खातिर….फिर हम इस शहर को छोड़ देंगे और तुम मुझे बीवी बना लेना, ठीक है ना?” गणेश मेरी बात सुन कर बोला,

‘ मैं एक ऑफीस भोपाल में खोल रहा हूँ, तुझे वहाँ अपनी पत्नी बना के ले जा सकता हूँ, लेकिन हम माँ को क्या कहेंगे? क्या माँ मान जाएगी?” गणेश बोला।

मैने कहा,” भईया माँ को भी तो चुदवाने की आदत है, हम उसको ब्लॅकमेल करेंगे तो उसको हमारी शादी के लिए मानना ही पड़ेगा. और हो सकता है की माँ भी तुझ से चुदवाने को तैयार हो जाए. बस फिर तेरी तो दो दो पत्नियाँ हो जाएगी… माँ भी और बेटी भी!” गणेश मेरी बात सुन कर बहुत खुश हुआ. उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और बोला”पहले तुझे तो पूरी तरह अपना बना लू.. फिर माँ को चोद लूंगा… पहले पूरा बहनचोद तो बन जाऊ.. फिर माँ चोद भी बन जाउंगा… कहते है की जब तक लंड गांड में ना डाला जाए, औरत पूरी तरह अपनाई नहीं जाती, अब में तेरी गांड चोदने वाला हूँ, दीदी. औरत के जिस्म के तिन छेद होते है, मुहँ, चूत और गांड. मैं तेरे सभी छेद पर अपना क़ब्ज़ा करना चाहता हूँ. मुझे अपनी गांड समर्पित करने को तैयार हो बहना?”

“गणेश, तुमने ही तो कहा था की हम सुहाग-दिन मना रहे हैं.. अगर तुम मेरे सुहाग ही हो तो फिर सवाल कैसे? तेरी बहन ने अपनी गांड कुँवारी रखी है तेरे मस्त लंड के लिए.. अब इसकी सील तोड़ डालो मेरे भाई. लेकिन ध्यान रहे मुझे दर्द ना हो,” मैने सुन रखा था की गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है… गणेश उठा और फ्रीज से मख्खन ले आया और उसने मख्खन मेरी गांड पर लगाया और उंगली से मुझे गांड में चोदा और फिर ढेर सारा मख्खन अपने लंड पर लगा कर मेरे पीछे खड़ा हो गया और मेरी गांड पर अपना टोपा रगड़ने लगा. मेरी गांड चाहती थी की लंड उसमे घुस जाए. मैं हाथ पीछे ले गयी और उसके लंड को अपनी गांड की तरफ खिचती हुई बोली,” भईया, अब क्यों तडपा रहे हो अपनी रांड़ बहन को.. अब चोद लो उसकी गांड भी…जमा लो दीदी पर क़ब्ज़ा…अपना लो अपनी सीमा को!”

गणेश ने धीरे से लंड अंदर डाल दिया. उत्तेजना अधिक होने से मुझे दर्द कम हुआ. मैने गांड को ढीला छोड़ दिया था. पहले तो मेरा मन घबरा रहा था लेकिन फिर मुझे मजा आने लगा. मेरा भाई मुझे चोद रहा था और मैं कुत्तीया की तरह मजे से गांड मरवा रही थी,’ ओह….सीमा मेरी रांड़ वाह तेरी गांड,,,,,मैं अब अधिक देर टिक ना पाऊंगा…मेरी रंडी सीमा,,,,मेरा लंड अब पिचकारी छोड़ने को है….ऊऊऊहह दीदी बहुत मज़ेदार है तेरी गांड….मैं झड़ने को हूँ…ऊऊऊऊहह गणेश का हाथ नीचे से मेरी फुद्दी सहला रहा था।

मेरी चूत में पानी छोड़ रही थी. मैं भी चाहती थी की अब भईया काम खत्म कर दे. मैने ज़ोर ज़ोर से अपनी गांड पीछे धकेलनी शुरू कर दी और मेरी चूत का रस भईया के हाथ पर जा गिरा,” अहह..भईया…मैं भी झड़ गयी…डालो ज़ोर से भाई….मेरी चूत गई…ऊऊऊहह उफफफफफफ्फ़…हइईईई…मेरी माँ”

ओर हम दोनों झर गये. ओर कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे ओर बाद में दोनों ने कपडे पहने।
 
चुदाई के शोले-1

हेल्लो दोस्तों, आप लोगो चुदाई की बहुत सारी कहानियाँ पढ़ते है. लेकिन क्या आप ने चुदाई के शोले के बारे में सोचा है. अगर वही किरदार सेक्स के उपर आप का मन लुभाए तो. चलिए आप के लिए पेश है, अब तक की सारी सेक्स स्टोरीस मैं सब से अलग सेक्स स्टोरी……!!!

जय तेरा लंड ढीला क्यूँ हैं इतना

जय और वीरू खेत में हगने बैठे थे. जय का लंड ढीला देख के वीरू बोला: जय पाजी, आप का लंड ढीला क्यूँ हैं.

जय: अबे क्या बताऊँ तुम्हे, वोह जेलर हैं ना, अंग्रेज के ज़माने का कल उसने शाम को मेरे लंड को चूस चूस के पूरा मुठ निगल लिया. चलने के भी होश नहीं थे, साले ने कोई वायेग्रा नाम की गोली मंगवाई थी जिस से लंड बैठ थी नहीं रहा था. लेकिन वीरू तेरी गांड के उपर यह निशान कैसे हैं…?

वीरू: जय पाजी, आप को जेलर बुलाये और हम ना आये. लेकिन मैं जैसे ही कोटडी में घुसने वाला था की जेलर के हवलदारोने मुझे ले दबोचा. साले मुझे एक खाली कोटडी में ले गए और आधे इधर से लंड चुसाते थे और आधे पीछे से गांड मारते थे. और बाकी बचे वो दरवाजे पे खड़े देख रहे थे. जम के चुदाई कर दी सालो ने गांड की. साला मुझे अब भी गांड में दर्द हो रहा हैं. जय पाजी एक बड़ा हाथ मार लेते है और कहीं दूर चले जायेंगे इस चोरी चमारी की दुनिया से. मैं खेतो में हल चलाऊंगा और जो मजदुर लडकियां खेतो में काम करने आएँगी उनकी चूत मारूंगा.

जय: अबे भोसड़ी के, तूने मुठ मारने के अलावा कभी कुछ किया भी हैं, जो बड़ी बड़ी बातें कर रहा हैं. साले गांड धो और उठ. गाँव से बाबू लोहार की चिठ्ठी आई हैं. तू गब्बर सिंह और ठाकुर की बात जानता हैं?

वीरू: नहीं, कौन गब्बर वही जो गांड मारने का सौखीन हैं.?

जय: हाँ वही, उसने पिछले महीने ठाकुर की गांड मार ली और साथ ही साथ उसकी नसबंदी भी कर दी. अब ठाकुर चोद तो सकता हैं लेकिन समझ गया ना.

वीरू: हाँ, हाँ, हाँ…जय पाजी, यह वही ठाकुर हैं ना जो एक साथ 3 3 रांडो को अपनी हवेली में ले के जाता था चुदाई करने के लिए.

जय: हाँ वही ठाकुर. लेकिन अब वो इतना सदमे में चला गया हैं की उसकी मुठ भी घर का नौकर रामलाल मार के दे रहा हैं. उसकी एक बहु भी हैं घर में राधा नाम हैं उसका, एक बार खेत में 2 लोंडो से वो चुदवा रही थी. उसे ऐसे चुदवाते देख उसके पति को दिल का दौरा पड़ा और वो मर गया. अब रामलाल एक तरफ ठाकुर को मुठ मार के देता हैं और रात के सन्नाटे में राधा की चुदाई करता हैं.

वीरू: लेकिन लौड़े, तू मुझे क्यों बता रहा हैं यह सब. हमारा क्या फायदा हैं, गब्बर ने ठाकुर की मारी, रामलाल ठाकुर की मुठ मारता हैं और राधा की चुदाई करता हैं. इन सब में हमें क्या दिलचस्पी बे लौडू.

जय: कर दी ना बेंचोद लंड जैसी बात. साले ठाकुर ने ऐलान किया है की जो गब्बर की नसबंदी कर के उसे उसके पास लाएगा वो उसे 50,000 रूपये देगा और गाँव में 2 एकर जमीन भी देगा.

वीरू: ओह अच्छा, लेकिन गब्बर सिंह तो बड़ा डाकू हैं ना. उसे पकड़ना तो मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं. उसे तो 11 रंडी खाने की रंडिया भी ढूंढ रही हैं क्यूंकि साला उनकी फ्री ,में चुदाई भी करता था और उनके कपडे भी उठा ले जाता था जब वो 19 साल का था और तब वो डाकू नहीं था.

जय: अबे साले अगर हम गांडू लोगो की एक्टिंग करेंगे तो हमें गब्बर के दरबार में पेश किया जाएगा. तब हम चुपके से उठे वहाँ से उठा लेंगे.

जय और वीरू इस बात पर सहमत हुए और वो दुसरे दिन सुबह की बस से रामनगर जाने के लिए निकल पड़े. उन्हें पता नहीं था की गब्बर बायसेक्सुअल था और उसे लंड और चूत दोनों से खेलने का सौख था. यह तो रामनगर जाते ही अपनी गांड लोगो से मरवाने लगे. जय और वीरू बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन और मूवी थियेटर में लोगो को उकसाते थे और अपनी गांड की चुदाई करवाते थे. उनको ऐसे था की ऐसा करने से उनकी रामनगर में गांडू के तौर पर ख्याति होंगी और गब्बर उन्हें पकडवाएगा. एक दिन शाम को वो इनाम की बात करने के लिए ठाकुर की हवेली पर पहुंचे. ठाकुर कमरे में बैठा हुक्का पी रहा था, रामलाल ने चारपाई के निचे एक थूकदान रखी थी. इस थूंकदान में ठाकुर हर तीसरी मिनिट थूंकता था. जय और वीरू अंदर आये.

जय: नमस्ते ठाकुर साहब.

ठाकुर: कौन हैं बे तू भोसड़ी के.

वीरू: ठाकुर साहब आप को याद हैं जब आप रायगढ़ थाने में बंध थे, वो चोरी के इल्जाम में. तब रात को आप के मुहं पर पट्टी बांध के दो लोगो ने आपकी गांड चुदाई की थी. हम वही दोनों हैं.

ठाकुर यह सुनते ही लालपिला हो गया. रामलाल की तरफ देख के वो चीखा: रामलाल, लाओं मेरी बंदूक बेन्चोदो ने दो घंटे तक मेरी मारी थी. लाओं जल्दी लाओं.

रामलाल बंदूक लेने भागा. जय और वीरू की गांड फट गई. उन्होंने ठाकुर के पांव पकड़ के माफ़ी मांगी. ठाकुर ने एक शर्त पे उनको माफ़ किया की वो लोग बारी बारी उसका और रामलाल का लंड चूसेंगे. दोनों जब दो बड़े बड़े लौड़े चूस के फारिग हुए तो ठाकुर बोला: अब बताओ भोसड़ी के लौड़ा चूसने के सौख से आये थे की कुछ काम था.

जय: ठाकुर साहब हम यहाँ गब्बर की गांड मारने आये हैं.

तुम गब्बर की चुदाई नहीं करोगे, वोह मेरा शिकार हैं

ठाकुर चीखा: तुम गब्बर की गांड नहीं मारोगे. वो मेरा शिकार हैं. उसकी गांड की चुदाई मेरे लंड से होंगी. इस लंड ने आज तक 1000 चुतो की चुदाई की हैं. लेकिन साले ने मेरे लंड को चुदाई के काबिल नहीं छोड़ा. लेकिन मैंने भी बोम्बे से एक रबर का लंड मंगवाया हैं जिसे डिल्डो कहते हैं. उसने मेरी गांड की चुदाई 8 इंच के लंड से की थी. मैंने उसके लिए 12 इंच का डिल्डो मंगवाया हैं. एक बार वो हाथ में आ जाए, साले की गांड की खाल उखेड लूँगा.

जय: ठीक हैं, ठाकुर साहब आप कहेंगे ऐसा ही होगा. लेकिन वो इनाम वाली बात.?

ठाकुर: हाँ तुम्हे गाँव में दो एकड़ जमीन और 50,000 रूपये भी मिलेंगे. लेकिन गब्बर मुझे चाहिए बस.

वीरू: चलो ठीक हैं ठाकुर साहब. हम गब्बर को आप के हवाले कर देंगे.

ठाकुर: तुम लोग पहले वादा करो के तुम गब्बर की गांड नहीं मारोगे.

जय: हम वादा करते हैं ठाकुर साहब.

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जय और वीरू ठाकुर के घर से बाहर निकले और जब वो लोग उसकी बाउंड्री वाल से निकल रहे थे की उन्होंने एक 23 साल की लौंडी को देखा जो फ्रूट ठेले वाले से लड़ रही थी.

ठेले वाला: अबे राधा बिटिया, कच्चे केले भला बेचता हैं, क्या कोई ठेले में…?

राधा: मुझे नहीं पता वो, मुझे कच्चे केले चाहिए, आप कहीं से भी ला के दो. और अगर वो ना मिले तो ककड़ी या पतली दुधी ले आना. यह क्या छोटी छोटी सब्जी ले के आते हो, बैगन, चोली वगेरह. मुली भी तो नहीं लाते आप.

ठेलेवाला: ठीक हैं राधा बिटिया, हम आप को कल ला के देंगे.

ठेलेवाले के जाते ही जय और वीरू ने राधा की चुदाई करने की योजना बनाई. जय राधा के पास गया और बोला: हमें पता हैं की कच्चे केले कहाँ मिलते हैं.

राधा: अच्छा, कहाँ पर.

वीरू: उसके लिए आप को हमारे साथ आना पड़ेगा उस टेकरी के पीछे.

राधा: लेकिन अभी, अभी तो गाँव में किसी के खेत में केले नहीं हैं

जय: हम लोग शहर से दो केले ले के आये हैं. अभी भी वो हमारे पास ही हैं.

राधा समझ गई की उसकी केले से चुदाई की योजना यह दो लौंडे समझ चुके हैं. उसने कहाँ: चलो लेकिन ज्यादा देर मत करना, मुझे रामलाल को भी देखना हैं फिर.

जय और वीरू राधा को ले के पहाड़ी के पीछे बावल की झाड़ियो में गए और उसे अपने दोनों लौड़े निकाल के दे दिए. राधा ने भी बहुत दिनों के बाद दो लंड से चुदाई का अवसर पाया था. उसने भी अपनी चूत उठा उठा के जय और वीरू से चुदाई करवाई. जय ने एक तरफ से उसकी चूत में लंड दिया और दूसरी तरफ से वीरू ने राधा की गांड मार दी………!!!

चुदाई के शोले अभी बाकी हैं….
 
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