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चुदाई के शोले-2
हाई दोस्तों, चुदाई के शोले के पहले भाग में आपने देखा की कैसे इनाम की लालच में जय और वीरू गब्बर सिंह को पकड़ने और ठाकुर से उसकी गांड में डिल्डो डलवाने के लिए जाते हैं. साथ ही मैं गांडू बन के अपनी गांड गाँव वालो से मरवाते हैं ताकि गब्बर उन्हें ले दबोचे. राधा जो की ठाकुर की बहु हैं उसकी चुदाई भी जय और वीरू ने मिलके कर डाली हैं. अब आगे पढ़े.
राधा की परफेक्ट चुदाई कर दी
राधा के चूत को जय और वीरू ने इस कदर मारा था की उस से चला भी नहीं जा रहा था. रामलाल को जब पता चला की यह दो लौंडे राधा की चुदाई कर गए हैं तो वो आगबबूला हो गया. लेकिन जब राधा ने उसे यह कहा की काका तुम्हारे लंड में अब वो बात नहीं रही तो वो बेचारा शांत हो गया. राधा अब रोजाना इन दोनों को टिफिन देने के बहाने उनके रूम में जाती और थ्रीसम चुदाई का मजा ले के ही वापस आती थी. एक बार राधा को गर्भ भी रह गया, लेकिन यह दोनों पास के ही गाँव के डॉक्टर सुरमा भोपाली को ले आये और बच्चा गिरा दिया. वीरू ने एक रंडी जिसका नाम बसंती पटेल था उसे भी फांस लिया था. बसंती किसी हिरोइन से कम नहीं थी, वो टांगा चलाने की आड़ में दारु की स्मगलिंग किया करती थी. वीरू उसके वहाँ नियमित दारु लेने जाता और एक दिन मौका देख उसने बसंती को दबोच ही लिया. उधर ठाकुर परेशान था क्यूंकि यह दोनों ठाकुर का खाते थे और 2 महीने तक गाँव के जवान बूढों से गांड मराते थे. ठाकुर को किसी भी तरह अपने डिल्डो का उपयोग करना था. आखिर एक दिन आया जब गब्बर को जय और वीरू के बारे में पता चला. उसके दाहिने हाथ सांभा ने गब्बर को बताया की कालिया और उसके दो साथी दो गुड की गांड मार के आये हैं…….फिर क्या था, बुलाया गब्बर ने तीनो को.
कितने आदमी थे रे कालिया
गब्बर ने तीनो को बिच में खड़ा किया और वो अपनी पेंट उतार के उनकी चारो तरफ घुमने लगा.
गब्बर: कितने आदमी थे रे कालिया.?
कालिया: सरकार, दो.
गब्बर: और तुम.?
कालिया: तिन.
गब्बर: मादरचोद, फिर भी हमका भूल गए. तुम्हे ख़याल नहीं आया की गब्बर भी गांड का भूखा हैं. उसे भी लंड शांत करना हैं. तुमने क्या सोचा सरदार खुश होगा, शाबाशी देगा की तुम तीनो मिल के दो गांडू चोद के आये हो. बहुत ना-इंसाफी है यह हमारे साथ.
कालिया: माफ़ कर दो. सरदार हमने आप के बुरे वक्त में कितनी बार आप से गांड तक मरवाई हैं.
गब्बर: तो अब लौड़ा चुसो.
और सच में गब्बर ने अपने लौड़े को पकड़ के कालिया और बाकी के दो के मुहं में डाल दिया. उसने लंड चुसाते चुसाते ही कहाँ, “होली कब हैं, इस बार ठाकुर को उठाएंगे जब गाँव वाले होली खेल रहे होंगे.”
ठाकुर की फिर से गांड मार ली
होली के दिन बसंती और राधा को ले के जय और वीरू नदी के पीछे बने कोतर में चले गए थे. चुदाई के भूखे इन दोनों लौंडो ने ग्रुपसेक्स चुदाई का प्लान बनाया और राधा और बसंती की चूत और गांड की मस्त चुदाई कर दी. राधा की और बसंती की गांड भी दोनों ने बारी बारी मारी और लंड भी चुसाया. 2 घंटे बाद जब वो नदी में नहा के घर आये तो पता चला की गब्बर के डाकू ठाकुर को घर से उठा ले गए हैं. जय और वीरू हैरान हो गए की साला गब्बर ठाकुर का क्या करेगा.
इधर ठाकुर की पतलून उतार के उसकी गांड में दो डाकू सरसों का तेल मल रहे थे, उधर गब्बर लकड़ियों के ऊपर बकरे के मटन को अपने हाथो से नोंच के खा रहा था. तभी एक डाकू जो तेल लगा रहा था वो बोला: सरदार ठाकुर की गांड में बहुत बाल हैं.
गब्बर: तो भोसड़ी के कैंची से काट दे ना.
डाकू उठ के एक जंग लगी केंची लाया और उसने ठाकुर की गांड के बाल क़तर दिए. ठाकुर ने गब्बर को कहा, “एक बार मेरे हाथ खोल दे, फिर बताता हु तुझे.”
गब्बर: साले तू हमको बहुत सताता था. जिस गांडू को हम गाँव में लाते थे तू खुद ही उनकी गांड की चुदाई करता था. हम भी इंसान हैं, हमें भी चुदाई के अरमान और सपने होते हैं. आज वो सब तेरी गांड में लौड़ा दे के मिटेंगे.
गब्बर:
यह गांड हम को दे दे ठाकुर.
ठाकुर: नहींहीही हीही………………!!!
गब्बर: यह गांड हम को दे दे ठाकुर.
गब्बर ने सीधे ही ठाकुर की फैली हुई गांड में लंड दे दिया. गब्बर के लंड के अंदर जाते ही ठाकुर चिल्ला उठा. गांडू लोगो के सौखीन गब्बर ने 10 मिनिट तक ठाकुर की गांड की मस्त चुदाई की. उसके बाद उसने ठाकुर की गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया. गब्बर फिर से मटन के पास गया और आवाज लगायी, “चलो मादरचोदो, अब तुम्हे क्या टेलीग्राम भेजूं, गांड गरम हैं डाल दो अपना अपना लौड़ा.”
ठाकुर की गांड को गब्बर के बाद सांभा, रणजीत, गोला, प्रभात और कालिया जैसे 7 डाकू ने मारा. ठाकुर की आँखे लाल हुई और वो जय और वीरू को मनोमन गालियाँ देने लगा. दो दिन तक यह लोग ठाकुर की गांड मारते रहे और फिर उसे बाँध के गाँव के चौराहे पे छोड़ आये. ठाकुर ज्योत्यों से घर पहुंचा और रामलाल से अपनी गांड में मलम लगवाया. उसने तभी जय और वीरू को भी बुलवाया.
ठाकुर: मादरचोदो, मेरा खाते हो और गाँव के लोड़ो से चुदाई करवाते हो. भोसड़ीवालो काम कब कर रहे हो मेरा.
जय: ठाकुर साहब, हम लोग कल बंजारों की एक टोली गाँव के बाहर आ रही हैं उसके सरदार लीला से मिलेंगे. यह लीला गब्बर को गांड और चूत सप्लाय करता हैं. हम उसे 10000 का लालच देंगे और अगली बार की गांड की डिलीवरी में दो गांड हमारी होंगी.
ठाकुर: लेकिन तुम लोगो को यह पता हैं की लीला गब्बर के पास जाने वाली हरेक गांड को चेक करता हैं और पहली चुदाई वो करता हैं.
वीरू: ठाकुर, तुम्हारे बदले के लिए 100 लंड तो ऐसे भी हम ले चुके हैं, तो एक और ले लेंगे.
शाम को ही जय और वीरू लीला के पास पहुंचे और उसको विनंती करने लगे की हमारी गांड भी गब्बर को दे दो. लीला ने कहाँ “अंदर जाओ और पतलून उतारो.”
दो मिनिट में लीला अपना 8 इंच का लंड ले के आया और उसने जय और वीरू की गांड की चुदाई कर के चेक किया. उसने दोनों गांड पास कर दी और शाम को ही ऊंट के उपर दोनों को बिठा के गब्बर के पास भेज दिया. दोनों गब्बर की गुफा में आ गए और गब्बर के हाथो से अपनी गांड को 10 दिन तक खूब मरवाते रहे. गब्बर जब उनकी गांड मार मार के थक गया तो उसने उन्हें अपने साथियों को सौंप दिया. यहाँ जय और वीरू का प्लान चालू हुआ. उन्होंने डाकुओ को एक जड़ीबूटी के बारे में पूछा जिसे पिने से लंड 20 मिनिट खड़ा रहता हैं. किसी भी डाकू को इसके बारे में पता नहीं था.
जय: अरे चुतियो, तुम लोगो को कुछ पता ही नहीं हैं, यह देखो मैं दिखाता हूँ.
उसने अपनी जेब से एक छोटी सी पुडिया निकाली जिस में वो लोग वायेग्रा का पावडर ले गए थे. उसने पावडर फांक के दस मिनिट बाद जय की गांड मारनी चालू की. 1 घंटे के बाद मुश्किल से उसका वीर्य निकला. सभी डाकू अब यह जड़ीबूटी मांगने लगे. जय ने उन्हें कहा की शाम के खाने के बाद उन्हें देगा. शाम के खाने के बाद जय और वीरू ने एक पतीले में पानी लिया और दूसरी पुडिया जिस में वायेग्रा के बदले नींद की गोली का पावडर था वो मिला दिया. गब्बर को छोड़ सभी डाकुओ ने यह पानी पिया और आधे घंटे में तो सभी घोड़े बेच के सो गए.
ठाकुर का बदला पूरा हुआ
सभी डाकुओ के सोते ही जय और वीरू ने उनकी बन्दूको से गोलिया निकाल ली और दो भरी हुई बंदूक ले के गब्बर के कमरे में गए. गब्बर वहाँ बैठा शिलाजीत खा रहा था. उन्होंने गब्बर को बंदूक के इशारे पे उठाया और तीनो घोड़ो के उपर गाँव में आये. जय ने पुलिस को ले के गब्बर का अड्डा बता दिया. सभी डाकुओ को सोता पकड़ लिया गया. वीरू ने गब्बर को ठाकुर के हाथो सौंप दिया. ठाकुर ने रामलाल से कह के गब्बर को उल्टा लिटा के उसके हाथ बंधवा दिए. जब ठाकुर गब्बर की तरफ बढ़ने लगा तो गब्बर जोर जोर से हंसने लगा.
गब्बर: हा हा हा हा.
ठाकुर: काहे हंस रहा हैं बे मादरचोद.
गब्बर: तू हम से बदला लेगा बे. तेरे लंड के कीटाणु का तो हम पहले ही रस्ता कर दिया हूँ. अब तेरा लंड बांसुरी के जैसा ही जिस से सिर्फ मूत निकलेगा.
अब ठाकुर जोर जोर से हंस ने लगा और उसने अपनी जेब में हाथ डाल के काला और 12 इंच का डिल्डो निकाला. गब्बर डिल्डो को हैरानी से देखने लगा.
ठाकुर: तेरी चुदाई के लिए बहुत बेकरार हु मैं, मैं नहीं ले सकता बदला लेकिन इस बारह इंच के रबर के लंड को तेरी गांड में पेल के आज हम तुम्हे बताएँगे की गांड की चुदाई में कितना दर्द होता हैं. गब्बर यह गांड हम को दे दे.
गब्बर: नहींहीहीहिहिहिही….!!!
ठाकुर: यह गांड हमको दे दे गब्बर…!
गब्बर अभी और एक चीख लगाये उसके पहले तो ठाकुर ने उसकी गांड में डिल्डो ठूंस दिया. गब्बर की गांड को उसने चार दीन तक ऐसे डिल्डो से चोदा और फिर रामलाल को बोल के गाँव के ही 20 जवान लडको को बोल के गब्बर की गांड की चुदाई करने को कहा. गब्बर यह जिल्लत बर्दास्त नहीं कर सका और उसी रात वो गाँव से भाग गया. ठाकुर ने वादे के मुताबिक़ जय और वीरू को पैसे और जमीन दे दी. जय और वीरू ने गांव में एक डांस बार चालू कर दिया और ख़ुशी से रहने लगे. राधा की और बसंती की चुदाई वो अभी भी करते हैं उन्हें अब डांस बार में बुला के……………….!!!
मित्रो आप को हमारी यह अदभुत चुदाई की कहानी कैसी लगी. लेखक ने आपने मनोरंजन के लिए ख़ास लिखा हैं. अगर आप इस स्टोरी को आप के फेसबुक या ट्विटर पेज के उपर शेर करेंगे तो बहुत महेरबानी होंगी, हम चाहते हैं की यह अदभुत कहानी ज्यादा से ज्यादा फैले और सभी लोग इस जरा हट के चुदाई स्टोरी का मजा ले. आप हमें कमेन्ट में यह लिख भेजें की आप को यह कहानी कैसी लगी,
हाई दोस्तों, चुदाई के शोले के पहले भाग में आपने देखा की कैसे इनाम की लालच में जय और वीरू गब्बर सिंह को पकड़ने और ठाकुर से उसकी गांड में डिल्डो डलवाने के लिए जाते हैं. साथ ही मैं गांडू बन के अपनी गांड गाँव वालो से मरवाते हैं ताकि गब्बर उन्हें ले दबोचे. राधा जो की ठाकुर की बहु हैं उसकी चुदाई भी जय और वीरू ने मिलके कर डाली हैं. अब आगे पढ़े.
राधा की परफेक्ट चुदाई कर दी
राधा के चूत को जय और वीरू ने इस कदर मारा था की उस से चला भी नहीं जा रहा था. रामलाल को जब पता चला की यह दो लौंडे राधा की चुदाई कर गए हैं तो वो आगबबूला हो गया. लेकिन जब राधा ने उसे यह कहा की काका तुम्हारे लंड में अब वो बात नहीं रही तो वो बेचारा शांत हो गया. राधा अब रोजाना इन दोनों को टिफिन देने के बहाने उनके रूम में जाती और थ्रीसम चुदाई का मजा ले के ही वापस आती थी. एक बार राधा को गर्भ भी रह गया, लेकिन यह दोनों पास के ही गाँव के डॉक्टर सुरमा भोपाली को ले आये और बच्चा गिरा दिया. वीरू ने एक रंडी जिसका नाम बसंती पटेल था उसे भी फांस लिया था. बसंती किसी हिरोइन से कम नहीं थी, वो टांगा चलाने की आड़ में दारु की स्मगलिंग किया करती थी. वीरू उसके वहाँ नियमित दारु लेने जाता और एक दिन मौका देख उसने बसंती को दबोच ही लिया. उधर ठाकुर परेशान था क्यूंकि यह दोनों ठाकुर का खाते थे और 2 महीने तक गाँव के जवान बूढों से गांड मराते थे. ठाकुर को किसी भी तरह अपने डिल्डो का उपयोग करना था. आखिर एक दिन आया जब गब्बर को जय और वीरू के बारे में पता चला. उसके दाहिने हाथ सांभा ने गब्बर को बताया की कालिया और उसके दो साथी दो गुड की गांड मार के आये हैं…….फिर क्या था, बुलाया गब्बर ने तीनो को.
कितने आदमी थे रे कालिया
गब्बर ने तीनो को बिच में खड़ा किया और वो अपनी पेंट उतार के उनकी चारो तरफ घुमने लगा.
गब्बर: कितने आदमी थे रे कालिया.?
कालिया: सरकार, दो.
गब्बर: और तुम.?
कालिया: तिन.
गब्बर: मादरचोद, फिर भी हमका भूल गए. तुम्हे ख़याल नहीं आया की गब्बर भी गांड का भूखा हैं. उसे भी लंड शांत करना हैं. तुमने क्या सोचा सरदार खुश होगा, शाबाशी देगा की तुम तीनो मिल के दो गांडू चोद के आये हो. बहुत ना-इंसाफी है यह हमारे साथ.
कालिया: माफ़ कर दो. सरदार हमने आप के बुरे वक्त में कितनी बार आप से गांड तक मरवाई हैं.
गब्बर: तो अब लौड़ा चुसो.
और सच में गब्बर ने अपने लौड़े को पकड़ के कालिया और बाकी के दो के मुहं में डाल दिया. उसने लंड चुसाते चुसाते ही कहाँ, “होली कब हैं, इस बार ठाकुर को उठाएंगे जब गाँव वाले होली खेल रहे होंगे.”
ठाकुर की फिर से गांड मार ली
होली के दिन बसंती और राधा को ले के जय और वीरू नदी के पीछे बने कोतर में चले गए थे. चुदाई के भूखे इन दोनों लौंडो ने ग्रुपसेक्स चुदाई का प्लान बनाया और राधा और बसंती की चूत और गांड की मस्त चुदाई कर दी. राधा की और बसंती की गांड भी दोनों ने बारी बारी मारी और लंड भी चुसाया. 2 घंटे बाद जब वो नदी में नहा के घर आये तो पता चला की गब्बर के डाकू ठाकुर को घर से उठा ले गए हैं. जय और वीरू हैरान हो गए की साला गब्बर ठाकुर का क्या करेगा.
इधर ठाकुर की पतलून उतार के उसकी गांड में दो डाकू सरसों का तेल मल रहे थे, उधर गब्बर लकड़ियों के ऊपर बकरे के मटन को अपने हाथो से नोंच के खा रहा था. तभी एक डाकू जो तेल लगा रहा था वो बोला: सरदार ठाकुर की गांड में बहुत बाल हैं.
गब्बर: तो भोसड़ी के कैंची से काट दे ना.
डाकू उठ के एक जंग लगी केंची लाया और उसने ठाकुर की गांड के बाल क़तर दिए. ठाकुर ने गब्बर को कहा, “एक बार मेरे हाथ खोल दे, फिर बताता हु तुझे.”
गब्बर: साले तू हमको बहुत सताता था. जिस गांडू को हम गाँव में लाते थे तू खुद ही उनकी गांड की चुदाई करता था. हम भी इंसान हैं, हमें भी चुदाई के अरमान और सपने होते हैं. आज वो सब तेरी गांड में लौड़ा दे के मिटेंगे.
गब्बर:
यह गांड हम को दे दे ठाकुर.
ठाकुर: नहींहीही हीही………………!!!
गब्बर: यह गांड हम को दे दे ठाकुर.
गब्बर ने सीधे ही ठाकुर की फैली हुई गांड में लंड दे दिया. गब्बर के लंड के अंदर जाते ही ठाकुर चिल्ला उठा. गांडू लोगो के सौखीन गब्बर ने 10 मिनिट तक ठाकुर की गांड की मस्त चुदाई की. उसके बाद उसने ठाकुर की गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया. गब्बर फिर से मटन के पास गया और आवाज लगायी, “चलो मादरचोदो, अब तुम्हे क्या टेलीग्राम भेजूं, गांड गरम हैं डाल दो अपना अपना लौड़ा.”
ठाकुर की गांड को गब्बर के बाद सांभा, रणजीत, गोला, प्रभात और कालिया जैसे 7 डाकू ने मारा. ठाकुर की आँखे लाल हुई और वो जय और वीरू को मनोमन गालियाँ देने लगा. दो दिन तक यह लोग ठाकुर की गांड मारते रहे और फिर उसे बाँध के गाँव के चौराहे पे छोड़ आये. ठाकुर ज्योत्यों से घर पहुंचा और रामलाल से अपनी गांड में मलम लगवाया. उसने तभी जय और वीरू को भी बुलवाया.
ठाकुर: मादरचोदो, मेरा खाते हो और गाँव के लोड़ो से चुदाई करवाते हो. भोसड़ीवालो काम कब कर रहे हो मेरा.
जय: ठाकुर साहब, हम लोग कल बंजारों की एक टोली गाँव के बाहर आ रही हैं उसके सरदार लीला से मिलेंगे. यह लीला गब्बर को गांड और चूत सप्लाय करता हैं. हम उसे 10000 का लालच देंगे और अगली बार की गांड की डिलीवरी में दो गांड हमारी होंगी.
ठाकुर: लेकिन तुम लोगो को यह पता हैं की लीला गब्बर के पास जाने वाली हरेक गांड को चेक करता हैं और पहली चुदाई वो करता हैं.
वीरू: ठाकुर, तुम्हारे बदले के लिए 100 लंड तो ऐसे भी हम ले चुके हैं, तो एक और ले लेंगे.
शाम को ही जय और वीरू लीला के पास पहुंचे और उसको विनंती करने लगे की हमारी गांड भी गब्बर को दे दो. लीला ने कहाँ “अंदर जाओ और पतलून उतारो.”
दो मिनिट में लीला अपना 8 इंच का लंड ले के आया और उसने जय और वीरू की गांड की चुदाई कर के चेक किया. उसने दोनों गांड पास कर दी और शाम को ही ऊंट के उपर दोनों को बिठा के गब्बर के पास भेज दिया. दोनों गब्बर की गुफा में आ गए और गब्बर के हाथो से अपनी गांड को 10 दिन तक खूब मरवाते रहे. गब्बर जब उनकी गांड मार मार के थक गया तो उसने उन्हें अपने साथियों को सौंप दिया. यहाँ जय और वीरू का प्लान चालू हुआ. उन्होंने डाकुओ को एक जड़ीबूटी के बारे में पूछा जिसे पिने से लंड 20 मिनिट खड़ा रहता हैं. किसी भी डाकू को इसके बारे में पता नहीं था.
जय: अरे चुतियो, तुम लोगो को कुछ पता ही नहीं हैं, यह देखो मैं दिखाता हूँ.
उसने अपनी जेब से एक छोटी सी पुडिया निकाली जिस में वो लोग वायेग्रा का पावडर ले गए थे. उसने पावडर फांक के दस मिनिट बाद जय की गांड मारनी चालू की. 1 घंटे के बाद मुश्किल से उसका वीर्य निकला. सभी डाकू अब यह जड़ीबूटी मांगने लगे. जय ने उन्हें कहा की शाम के खाने के बाद उन्हें देगा. शाम के खाने के बाद जय और वीरू ने एक पतीले में पानी लिया और दूसरी पुडिया जिस में वायेग्रा के बदले नींद की गोली का पावडर था वो मिला दिया. गब्बर को छोड़ सभी डाकुओ ने यह पानी पिया और आधे घंटे में तो सभी घोड़े बेच के सो गए.
ठाकुर का बदला पूरा हुआ
सभी डाकुओ के सोते ही जय और वीरू ने उनकी बन्दूको से गोलिया निकाल ली और दो भरी हुई बंदूक ले के गब्बर के कमरे में गए. गब्बर वहाँ बैठा शिलाजीत खा रहा था. उन्होंने गब्बर को बंदूक के इशारे पे उठाया और तीनो घोड़ो के उपर गाँव में आये. जय ने पुलिस को ले के गब्बर का अड्डा बता दिया. सभी डाकुओ को सोता पकड़ लिया गया. वीरू ने गब्बर को ठाकुर के हाथो सौंप दिया. ठाकुर ने रामलाल से कह के गब्बर को उल्टा लिटा के उसके हाथ बंधवा दिए. जब ठाकुर गब्बर की तरफ बढ़ने लगा तो गब्बर जोर जोर से हंसने लगा.
गब्बर: हा हा हा हा.
ठाकुर: काहे हंस रहा हैं बे मादरचोद.
गब्बर: तू हम से बदला लेगा बे. तेरे लंड के कीटाणु का तो हम पहले ही रस्ता कर दिया हूँ. अब तेरा लंड बांसुरी के जैसा ही जिस से सिर्फ मूत निकलेगा.
अब ठाकुर जोर जोर से हंस ने लगा और उसने अपनी जेब में हाथ डाल के काला और 12 इंच का डिल्डो निकाला. गब्बर डिल्डो को हैरानी से देखने लगा.
ठाकुर: तेरी चुदाई के लिए बहुत बेकरार हु मैं, मैं नहीं ले सकता बदला लेकिन इस बारह इंच के रबर के लंड को तेरी गांड में पेल के आज हम तुम्हे बताएँगे की गांड की चुदाई में कितना दर्द होता हैं. गब्बर यह गांड हम को दे दे.
गब्बर: नहींहीहीहिहिहिही….!!!
ठाकुर: यह गांड हमको दे दे गब्बर…!
गब्बर अभी और एक चीख लगाये उसके पहले तो ठाकुर ने उसकी गांड में डिल्डो ठूंस दिया. गब्बर की गांड को उसने चार दीन तक ऐसे डिल्डो से चोदा और फिर रामलाल को बोल के गाँव के ही 20 जवान लडको को बोल के गब्बर की गांड की चुदाई करने को कहा. गब्बर यह जिल्लत बर्दास्त नहीं कर सका और उसी रात वो गाँव से भाग गया. ठाकुर ने वादे के मुताबिक़ जय और वीरू को पैसे और जमीन दे दी. जय और वीरू ने गांव में एक डांस बार चालू कर दिया और ख़ुशी से रहने लगे. राधा की और बसंती की चुदाई वो अभी भी करते हैं उन्हें अब डांस बार में बुला के……………….!!!
मित्रो आप को हमारी यह अदभुत चुदाई की कहानी कैसी लगी. लेखक ने आपने मनोरंजन के लिए ख़ास लिखा हैं. अगर आप इस स्टोरी को आप के फेसबुक या ट्विटर पेज के उपर शेर करेंगे तो बहुत महेरबानी होंगी, हम चाहते हैं की यह अदभुत कहानी ज्यादा से ज्यादा फैले और सभी लोग इस जरा हट के चुदाई स्टोरी का मजा ले. आप हमें कमेन्ट में यह लिख भेजें की आप को यह कहानी कैसी लगी,