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Guest
आखिर कार बिना किसी भुमिका और जान पहचान के हम दोनों ही नंगे हो चूके थे।
ऊसके गुमराह मामले गोरे दुधिया शरीर का अपने बांहों में समेट लिया।
तो हम दोनों ही बुरी तरह गरम हो गए । मेरा लण्ड ऊसके चुतड़ों की दरार में रगड़ने लगा । बो आंखे ऊन्द की क्यों थोरी हि देर में अपने गाल और होठ चुसवा रही थी।
मैंने उसकी चुत में उंगली फंसाई तो पता लगा बो बुरी तरह पनिया चुकी थी।
तथा खेली खाई अब मैंने भी देखकर उचित ना समझा उसे फर्श पर बिस्तर पर सीधा लिटाया और फिर उसकी टांगों को उठाकर अपने कंधो पर रख लिया।
और अपना लण्ड अन्दर पहुंचा गया फिर उकसी चुरा पकड़कर ता चांपा तो पुरा लण्ड जट तक कसकी फूल चुत में बैठ "या।
हाय राजा मजा आ गया । बड़े दिनों में में एक मजा पा रही हूं।
बो किसकी तो मैंने भी लम्बे लम्बे धक्के मारने चालु किए। हम दोनों ही के लिए नए थे।
मेरी उम्र 19 साल की थी ओर पूरी तरह समझदार हो चुकी थी मेरे पिताजी रेलवे में बहुत बड़े इंजिनीयर थे।
माता जी को दो साल पुर्व देहान्त हो चुका था ।
एक छोटा भाई और था जिसी उम्र मुश्किल से 10 वर्ष थे मेरे जिताजी की नौकरी का तम्तिमा बर्ष था।
उनका विचार था ब्याह करके वापस गांव ले जायेंगे। लाला जी की मृत्यु के पश्चात मेरी नानी हमारे पास आ गई थी।
लेकिन पिछले महीने ही वे भी वापस गांव चली गई अपना चर सम्भालने ।
आमतौर पर पिताजी को डयुटी सुवह 8 से शाम 5 बजे तक की थी। लेकिन अक्सर उन्हें टुर पर जाना पड़ता था।
इनलिए हमें अकेला रहना पड़ता परन्तु मजबुरी थी।
मैं बी० ए०के अतिन्म साल में पढ़ रही थी जब पढ़ने जाती तो लड़के और राह चलते लोग मुझे घुरते।
मुझे बड़ा अच्छा लगता अब तक मेरी छातियों भर गही थी और पुरी मुट्ठी में भी मुश्किल से आती थी।
चुतड़ भी काफी उमर गये थे जब मैं तंग सलवार कुर्ता पहनती तो सबकी नजरों मेरी तरफ रहता था।
भोला ने मधु को सरिता देती से तो मिलवा दिया था।
मगर मधु की नजरों में कोई आस पास की उठत हुई जवानी अभी नहीं आई थी।
उसे तो अब हर बक्त एक एसी लड़की की तलाश थी जो उसके जाल में प्यार से आ जाय।
आज इसी चक्र में वह राधा के घर गई थी।
राधा के बाराबर में एक उन्नीस बर्षीय खिलती हुई जवानी बैठी हुई थी। बातों बातों में मधु ने पूछा
राधा बे लड़की कौन है। मधु । ये बेचारी भी किसान की मारी है। बाप बचपन में मर गया था ।
मां ने इन्टर त जैसे-तैसे पढ़ाया इसे अब इस बेचारी के बसका कुछ न रह सका।
ये नौकरी करना चाहती है अत- मैं इसकी नौकरी कैसे लगाऊ
तुम्हारा नाम क्या है मइ मधू ने उस लड़की के कन्धे पर हाथ रखकर पुछा तो वह सहम कर धीरे से बोली-मेरा नाम उमा है दीदी
भई नाम तो बड़ा प्यारा है चलो तुम्हारी नौकरी का जिम्मा मे
कल मेरे घरों पर आ जाना तुम्हें सब समझा दुगी। क्या करना होगा। इस बात को सुनते ही उमा को खुशी से उछल पड़ी।
मगर राधा ने आंख मार कर मधु सो कुछ ऐसा इसारा किया जैसे कुद उमा की चुत भी मरवा कर रहेगी फिर वह बोली।
उमा ? तब तुजा कल तु मधु के पास पहुंच जाना जातु अब।
उमा के जाते ही राधा ने मधु को कीली भर ली और उसकों कुम्बा काटकर वह बोली।
क्योरी अपनी का ता तुने उद्घाटन करा ही लिया होगा क्या अब इस बेचारी का बाजा भी किसी से बजवायेगीत ।
चल हट बदमाश। तुझे ऐसी बातों के अवाला कुछ सुझला भी है या नहीं। मधु ने उसे कहते हुए कहा तो वह तो फिर चिहुक उठीमेरी रानी ये बात न हो तो जिन्दगी में रक्खा ही क्या है। मैंने और धक्के लगाने बंद कर दिए और अपना ध्यान निर्मला की ओर आकृष्ट करने लगा था।
मैं देखा रहा था। कि बो धीरे-धीरे गर्म होने लगी थी।
10 मिनट की चुसा चाटी के बाद ही निर्मला भी मेरा लण्ड खाने | को तैयार हो गई। मैंने अपना अकरा लण्ड ज्योति की चुत में से बाहर निकला।
और निर्मला के कपड़े उतारने लगा तो उसने कपरे उनारने से मना
अपनी साड़ी ऊपर उठा दी उसी सफेद झक्ख भरी चिकनी जांघों को देखकर मेरी लण्ड में झटके खाने लगा।
तूने जब उसकी मुलायम झांटों भरी चुत पर हाथ फिराया तो वो रहा ज्योति के बराबर लेट गई।
मैं समझ गया।
कि बो चुदना हो गई हैं सो मैंने भी उसे चोदना ही बेहर समझा। राती एक बक्त खा सकती है।
मगर बाजा बजबाये नहीं रह सकती।
तुझे देखकर भी.लगता है कि तु आठ आदमियों को निगलाचुकी है। अब तक जभी तो तरक्की कर ली जा रही है तु।
मधु को और जोर से भींच कर इस बार राधा ने कहा तो मधु भी चुप न रह सकी वह बोली
जब तेरा कुंआरेपन में ये हाल है तो शादी के बाद तो तु रात दिन यही काम करवाती रहेगी।
samaapt
ऊसके गुमराह मामले गोरे दुधिया शरीर का अपने बांहों में समेट लिया।
तो हम दोनों ही बुरी तरह गरम हो गए । मेरा लण्ड ऊसके चुतड़ों की दरार में रगड़ने लगा । बो आंखे ऊन्द की क्यों थोरी हि देर में अपने गाल और होठ चुसवा रही थी।
मैंने उसकी चुत में उंगली फंसाई तो पता लगा बो बुरी तरह पनिया चुकी थी।
तथा खेली खाई अब मैंने भी देखकर उचित ना समझा उसे फर्श पर बिस्तर पर सीधा लिटाया और फिर उसकी टांगों को उठाकर अपने कंधो पर रख लिया।
और अपना लण्ड अन्दर पहुंचा गया फिर उकसी चुरा पकड़कर ता चांपा तो पुरा लण्ड जट तक कसकी फूल चुत में बैठ "या।
हाय राजा मजा आ गया । बड़े दिनों में में एक मजा पा रही हूं।
बो किसकी तो मैंने भी लम्बे लम्बे धक्के मारने चालु किए। हम दोनों ही के लिए नए थे।
मेरी उम्र 19 साल की थी ओर पूरी तरह समझदार हो चुकी थी मेरे पिताजी रेलवे में बहुत बड़े इंजिनीयर थे।
माता जी को दो साल पुर्व देहान्त हो चुका था ।
एक छोटा भाई और था जिसी उम्र मुश्किल से 10 वर्ष थे मेरे जिताजी की नौकरी का तम्तिमा बर्ष था।
उनका विचार था ब्याह करके वापस गांव ले जायेंगे। लाला जी की मृत्यु के पश्चात मेरी नानी हमारे पास आ गई थी।
लेकिन पिछले महीने ही वे भी वापस गांव चली गई अपना चर सम्भालने ।
आमतौर पर पिताजी को डयुटी सुवह 8 से शाम 5 बजे तक की थी। लेकिन अक्सर उन्हें टुर पर जाना पड़ता था।
इनलिए हमें अकेला रहना पड़ता परन्तु मजबुरी थी।
मैं बी० ए०के अतिन्म साल में पढ़ रही थी जब पढ़ने जाती तो लड़के और राह चलते लोग मुझे घुरते।
मुझे बड़ा अच्छा लगता अब तक मेरी छातियों भर गही थी और पुरी मुट्ठी में भी मुश्किल से आती थी।
चुतड़ भी काफी उमर गये थे जब मैं तंग सलवार कुर्ता पहनती तो सबकी नजरों मेरी तरफ रहता था।
भोला ने मधु को सरिता देती से तो मिलवा दिया था।
मगर मधु की नजरों में कोई आस पास की उठत हुई जवानी अभी नहीं आई थी।
उसे तो अब हर बक्त एक एसी लड़की की तलाश थी जो उसके जाल में प्यार से आ जाय।
आज इसी चक्र में वह राधा के घर गई थी।
राधा के बाराबर में एक उन्नीस बर्षीय खिलती हुई जवानी बैठी हुई थी। बातों बातों में मधु ने पूछा
राधा बे लड़की कौन है। मधु । ये बेचारी भी किसान की मारी है। बाप बचपन में मर गया था ।
मां ने इन्टर त जैसे-तैसे पढ़ाया इसे अब इस बेचारी के बसका कुछ न रह सका।
ये नौकरी करना चाहती है अत- मैं इसकी नौकरी कैसे लगाऊ
तुम्हारा नाम क्या है मइ मधू ने उस लड़की के कन्धे पर हाथ रखकर पुछा तो वह सहम कर धीरे से बोली-मेरा नाम उमा है दीदी
भई नाम तो बड़ा प्यारा है चलो तुम्हारी नौकरी का जिम्मा मे
कल मेरे घरों पर आ जाना तुम्हें सब समझा दुगी। क्या करना होगा। इस बात को सुनते ही उमा को खुशी से उछल पड़ी।
मगर राधा ने आंख मार कर मधु सो कुछ ऐसा इसारा किया जैसे कुद उमा की चुत भी मरवा कर रहेगी फिर वह बोली।
उमा ? तब तुजा कल तु मधु के पास पहुंच जाना जातु अब।
उमा के जाते ही राधा ने मधु को कीली भर ली और उसकों कुम्बा काटकर वह बोली।
क्योरी अपनी का ता तुने उद्घाटन करा ही लिया होगा क्या अब इस बेचारी का बाजा भी किसी से बजवायेगीत ।
चल हट बदमाश। तुझे ऐसी बातों के अवाला कुछ सुझला भी है या नहीं। मधु ने उसे कहते हुए कहा तो वह तो फिर चिहुक उठीमेरी रानी ये बात न हो तो जिन्दगी में रक्खा ही क्या है। मैंने और धक्के लगाने बंद कर दिए और अपना ध्यान निर्मला की ओर आकृष्ट करने लगा था।
मैं देखा रहा था। कि बो धीरे-धीरे गर्म होने लगी थी।
10 मिनट की चुसा चाटी के बाद ही निर्मला भी मेरा लण्ड खाने | को तैयार हो गई। मैंने अपना अकरा लण्ड ज्योति की चुत में से बाहर निकला।
और निर्मला के कपड़े उतारने लगा तो उसने कपरे उनारने से मना
अपनी साड़ी ऊपर उठा दी उसी सफेद झक्ख भरी चिकनी जांघों को देखकर मेरी लण्ड में झटके खाने लगा।
तूने जब उसकी मुलायम झांटों भरी चुत पर हाथ फिराया तो वो रहा ज्योति के बराबर लेट गई।
मैं समझ गया।
कि बो चुदना हो गई हैं सो मैंने भी उसे चोदना ही बेहर समझा। राती एक बक्त खा सकती है।
मगर बाजा बजबाये नहीं रह सकती।
तुझे देखकर भी.लगता है कि तु आठ आदमियों को निगलाचुकी है। अब तक जभी तो तरक्की कर ली जा रही है तु।
मधु को और जोर से भींच कर इस बार राधा ने कहा तो मधु भी चुप न रह सकी वह बोली
जब तेरा कुंआरेपन में ये हाल है तो शादी के बाद तो तु रात दिन यही काम करवाती रहेगी।
samaapt