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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

आखिर कार बिना किसी भुमिका और जान पहचान के हम दोनों ही नंगे हो चूके थे।

ऊसके गुमराह मामले गोरे दुधिया शरीर का अपने बांहों में समेट लिया।

तो हम दोनों ही बुरी तरह गरम हो गए । मेरा लण्ड ऊसके चुतड़ों की दरार में रगड़ने लगा । बो आंखे ऊन्द की क्यों थोरी हि देर में अपने गाल और होठ चुसवा रही थी।

मैंने उसकी चुत में उंगली फंसाई तो पता लगा बो बुरी तरह पनिया चुकी थी।

तथा खेली खाई अब मैंने भी देखकर उचित ना समझा उसे फर्श पर बिस्तर पर सीधा लिटाया और फिर उसकी टांगों को उठाकर अपने कंधो पर रख लिया।

और अपना लण्ड अन्दर पहुंचा गया फिर उकसी चुरा पकड़कर ता चांपा तो पुरा लण्ड जट तक कसकी फूल चुत में बैठ "या।

हाय राजा मजा आ गया । बड़े दिनों में में एक मजा पा रही हूं।

बो किसकी तो मैंने भी लम्बे लम्बे धक्के मारने चालु किए। हम दोनों ही के लिए नए थे।

मेरी उम्र 19 साल की थी ओर पूरी तरह समझदार हो चुकी थी मेरे पिताजी रेलवे में बहुत बड़े इंजिनीयर थे।

माता जी को दो साल पुर्व देहान्त हो चुका था ।

एक छोटा भाई और था जिसी उम्र मुश्किल से 10 वर्ष थे मेरे जिताजी की नौकरी का तम्तिमा बर्ष था।

उनका विचार था ब्याह करके वापस गांव ले जायेंगे। लाला जी की मृत्यु के पश्चात मेरी नानी हमारे पास आ गई थी।

लेकिन पिछले महीने ही वे भी वापस गांव चली गई अपना चर सम्भालने ।

आमतौर पर पिताजी को डयुटी सुवह 8 से शाम 5 बजे तक की थी। लेकिन अक्सर उन्हें टुर पर जाना पड़ता था।

इनलिए हमें अकेला रहना पड़ता परन्तु मजबुरी थी।

मैं बी० ए०के अतिन्म साल में पढ़ रही थी जब पढ़ने जाती तो लड़के और राह चलते लोग मुझे घुरते।

मुझे बड़ा अच्छा लगता अब तक मेरी छातियों भर गही थी और पुरी मुट्ठी में भी मुश्किल से आती थी।

चुतड़ भी काफी उमर गये थे जब मैं तंग सलवार कुर्ता पहनती तो सबकी नजरों मेरी तरफ रहता था।

भोला ने मधु को सरिता देती से तो मिलवा दिया था।

मगर मधु की नजरों में कोई आस पास की उठत हुई जवानी अभी नहीं आई थी।

उसे तो अब हर बक्त एक एसी लड़की की तलाश थी जो उसके जाल में प्यार से आ जाय।

आज इसी चक्र में वह राधा के घर गई थी।

राधा के बाराबर में एक उन्नीस बर्षीय खिलती हुई जवानी बैठी हुई थी। बातों बातों में मधु ने पूछा

राधा बे लड़की कौन है। मधु । ये बेचारी भी किसान की मारी है। बाप बचपन में मर गया था ।

मां ने इन्टर त जैसे-तैसे पढ़ाया इसे अब इस बेचारी के बसका कुछ न रह सका।

ये नौकरी करना चाहती है अत- मैं इसकी नौकरी कैसे लगाऊ

तुम्हारा नाम क्या है मइ मधू ने उस लड़की के कन्धे पर हाथ रखकर पुछा तो वह सहम कर धीरे से बोली-मेरा नाम उमा है दीदी

भई नाम तो बड़ा प्यारा है चलो तुम्हारी नौकरी का जिम्मा मे

कल मेरे घरों पर आ जाना तुम्हें सब समझा दुगी। क्या करना होगा। इस बात को सुनते ही उमा को खुशी से उछल पड़ी।

मगर राधा ने आंख मार कर मधु सो कुछ ऐसा इसारा किया जैसे कुद उमा की चुत भी मरवा कर रहेगी फिर वह बोली।

उमा ? तब तुजा कल तु मधु के पास पहुंच जाना जातु अब।

उमा के जाते ही राधा ने मधु को कीली भर ली और उसकों कुम्बा काटकर वह बोली।

क्योरी अपनी का ता तुने उद्घाटन करा ही लिया होगा क्या अब इस बेचारी का बाजा भी किसी से बजवायेगीत ।

चल हट बदमाश। तुझे ऐसी बातों के अवाला कुछ सुझला भी है या नहीं। मधु ने उसे कहते हुए कहा तो वह तो फिर चिहुक उठीमेरी रानी ये बात न हो तो जिन्दगी में रक्खा ही क्या है। मैंने और धक्के लगाने बंद कर दिए और अपना ध्यान निर्मला की ओर आकृष्ट करने लगा था।

मैं देखा रहा था। कि बो धीरे-धीरे गर्म होने लगी थी।

10 मिनट की चुसा चाटी के बाद ही निर्मला भी मेरा लण्ड खाने | को तैयार हो गई। मैंने अपना अकरा लण्ड ज्योति की चुत में से बाहर निकला।

और निर्मला के कपड़े उतारने लगा तो उसने कपरे उनारने से मना

अपनी साड़ी ऊपर उठा दी उसी सफेद झक्ख भरी चिकनी जांघों को देखकर मेरी लण्ड में झटके खाने लगा।

तूने जब उसकी मुलायम झांटों भरी चुत पर हाथ फिराया तो वो रहा ज्योति के बराबर लेट गई।

मैं समझ गया।

कि बो चुदना हो गई हैं सो मैंने भी उसे चोदना ही बेहर समझा। राती एक बक्त खा सकती है।

मगर बाजा बजबाये नहीं रह सकती।

तुझे देखकर भी.लगता है कि तु आठ आदमियों को निगलाचुकी है। अब तक जभी तो तरक्की कर ली जा रही है तु।

मधु को और जोर से भींच कर इस बार राधा ने कहा तो मधु भी चुप न रह सकी वह बोली

जब तेरा कुंआरेपन में ये हाल है तो शादी के बाद तो तु रात दिन यही काम करवाती रहेगी।

samaapt
 
रंगीन सपने

जब से मुझे पर जवानी आई है, मन चुदने को करने लगा है, रंगीन सपने आने लगे हैं।

हाय, मुझे पहले की तरह फिर से कोई ऊपर चढ़ कर चोद डाले। मेरी चूचियाँ मसल डाले...मेरे नरम नरम होंठों को चूस डाले। मैं जैसे ही मूतने जाती हूँ तो मूतने के अलावा मुझे वहाँ बड़ी नरमी से मीठी मीठी खुजली चलने लगती है, फिर तो बस मुझे लण्ड की तलब भी जोरों से होने लगती है। कभी कभी तो मुझे गाण्ड चुदवाने की इच्छा भी होने लगती है, फिर हाय रे...मैं तो अपनी ही सोच पर शर्म से पानी पानी होने लगती है।

जब मेरे इस छोटे से दिल में इस तरह की बातें जब घर करने लगी तो मैं रात में अकेले में जाने क्या क्या सोचने लगने लगती थी। मैं बाहरवी कक्षा में आ चुकी थी, मेरे अंगों में अब तक काफ़ी उभार आ चुका था। कुछ मौसमी के आकार की मेरी चूचियाँ हो चुकी थी। सहेलियाँ भी अब कभी कभी मस्ती में आकर मेरी मौसमी जैसी चूचियों को दबा देती थी, फिर हंसती भी थी- 'अरे ये तो अभी और बड़े होंगे...जरा बड़े होने दे फिर दबाने में और भी आयेगा मजा !'

पहले तो उनके ऐसे दबाने से जलन होने लगती थी, पर आजकल तो दिल में एक मीठी सी टीस उठने लगती है। सपनों में या मन की सोच में कभी कभी लण्डों को मैं अजीब आजीब से आकार में देखने लगती थी। कोई तो मोटा होता था तो कोई लम्बा, कोई काला तो कोई गोरा। फिर मैं उन्हें पकड़ कर दबाने लगती थी, उन्हें चूसने की कोशिश करने लगती थी। उफ़...यह लण्ड कैसा मोहक होता है...काश मेरी चूत में मुझे कोई जानदार लण्ड घुसा देता तो मैं निहाल हो जाती।

उन्हीं दिनों मेरे जीजू और दीदी घर आये हुये थे। मैंने दीदी को देखा तो सन्न सी रह गई... दीदी की चूचियाँ कितनी बड़ी हो गई थी, जिस्म भरा भरा सा लगने लगा था। गर्दन लम्बी और सुन्दर सी हो गई थी। चाल में लचक आ गई थी, चूतड़ मांसल हो गये थे।

मैंने अपनी चूचियाँ देखी, दीदी की तो बहुत ही बड़ी चूचियाँ थी। क्या जीजू ने दीदी को चोद दिया होगा। कैसे चोदा होगा...लण्ड को चूत में घुसा दिया होगा...इस्स्स्स्स, कितना मजा आया होगा।

जीजू तो कितने अच्छे लगते हैं, प्यार से बातें करते हैं, लण्ड चूत की बातें कितनी दिल को छू लेने वाली होती हैं। जीजू सिर्फ़ दीदी को चोदने के लिये ही हैं क्या...मुझे नहीं चोद सकते।

मेरे पास वाला कमरा दीदी का था। मेरे दिल में कसक सी उठती और फिर रात को मैं छुप कर उनकी बातें सुनने का प्रयत्न करती थी। पर अधिकतर तो मुझे तो दीदी की सिसकारियाँ, या हल्की चीखें ही सुनाई पड़ती थी। जरूर दीदी चुद रही होगी। चुदने के बाद सवेरे दीदी बहुत खुश नजर आती थी। मेरे मन में भी चुदने की उत्सुकता बढ़ने लगी।

मैंने बगीचे में जीजू को अखबार पढ़ते देखा तो सोचा दीदी तो भीतर काम कर रही है, क्यों ना एक बार जीजू पर ट्राई मार ली जाये। हिम्मत करके मैंने जीजू से पूछ ही लिया- जीजू, एक बात कहूँ?

'हूंअ, कहो...'

'दीदी को आप रात को मारा मत करो।'

'आपसे दीदी ने कहा क्या?'

'नहीं, पर दीदी के चीखने की आवाजें जो आती हैं ना।'

'उसे जब मजा आता है ना तभी तो वो चिल्लाती है...' जीजू ने शरारत से कहा।

'अरे जीजू, मारने से मजा आता है क्या...'

'नेहा जी, एक बार मरवा कर तो देखो !' जीजू ने अपना तीर चला दिया। मेरा दिल अन्दर तक घायल हो गया।

मैंने शरमा कर जीजू को तिरछी निगाह से देखा। जीजू ने मुझे आँख मार दी। यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं।

मैं शरमा कर अन्दर भाग गई, दिल जोर जोर से धड़कने लगा था, आह...ये जीजू ने क्या कह दिया ! क्या जीजू ने मेरे दिल की बात पहचान ली थी।

मेरा दिल मचल उठा। रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे और दीदी की सिसकारियो और मस्त चीखों की आवाजें उभरने लगी थी। मेरा दिल मचल उठा।

मैं जल्दी से उठी और उनके कमरे के दरवाजे की दरार में से झांकने लगी। जीजू दीदी की मोटी मोटी चूचियाँ दबा रहे थे, दीदी सिसकारियाँ भर रही थी।

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये, अरे मर गई मेरे राम जी ! जीजू का लण्ड है या कोई लोहे का डण्डा, यह तो...इतना बड़ा...उईईई...फिर जीजू ये क्या कर रहे है...वो तो दीदी के बोबे दबा दबा कर उसकी गाण्ड में वही लोहे जैसा लण्ड डाल उसकी गाण्ड मार रहे थे।

मुझे बहुत जोर से शरम आने लगी। पर देखे बिना रहा भी नहीं जा रहा था। दिल जैसे उछल कर गले में आ गया था। मैं बस मंत्र मुग्ध सी आँखें फ़ाड़े देखती रह गई। मेरी चूत पनियाने लगी थी। बिना पैन्टी के मेरी जांघें भीगने लगी थी। मैं भी अपनी चूत दबा दबा कर मस्त सी होने लगी थी। मुझे जब होश आया तो वो दोनो झड़ चुके थे और एक दूसरे के ऊपर चढ़ कर चूमा-चाटी कर रहे थे।

मैं धीरे से अपने कमरे में लौट आई। पर मेरी आँखों में नींद कहाँ थी। बस जीजू और दीदी की गाण्ड मारने का दृष्य आँखों में घूम रहा था। मेरी नरम सी चूत की हालत बड़ी नाजुक हो रही थी। तेज खुजली सी मची हुई थी। मैंने धीरे से अपनी गाण्ड के छेद में अंगुली घुसाई तो आनन्द के मारे मेरे मुख से सिसकी निकल गई। दूसरे हाथ से मैंने अपनी चूत को दबा लिया। चूत को मसलते मसलते मैं दबी हुई सिसकारी के साथ मैं जोर से झड़ गई।

अब तो जीजू मुझे किसी सेक्सी फ़िल्मी हीरो जैसे लगने लगे थे, वो तो मेरे लिये कामदेव की तरह हो चुके थे। दिन को भी मैंने अन्जाने में दो बार हाथ से चूत को घिस घिस कर, जीजू के नाम से अपना पानी निकाल दिया था।

मेरी नजरें बदल गई थी, जीजू ने भी मेरी हालत जान ली थी, वो इस मामले में बहुत तेज थे, उनकी मस्त निगाहें मुझे बार बार चुदने का निमंत्रण देने लगी थी, उनकी नजरें भी प्यार बरसाने लग गई थी।

मेरी नजरों में भी वो चुदाई का आमंत्रण वो पढ़ चुके थे।

अब तो जीजू मुझे किसी सेक्सी फ़िल्मी हीरो जैसे लगने लगे थे, वो तो मेरे लिये कामदेव की तरह हो चुके थे। दिन को भी मैंने अन्जाने में दो बार हाथ से चूत को घिस घिस कर, जीजू के नाम से अपना पानी निकाल दिया था।

मेरी नजरें बदल गई थी, जीजू ने भी मेरी हालत जान ली थी, वो इस मामले में बहुत तेज थे, उनकी मस्त निगाहें मुझे बार बार चुदने का निमंत्रण देने लगी थी, उनकी नजरें भी प्यार बरसाने लग गई थी।

मेरी नजरों में भी वो चुदाई का आमंत्रण वो पढ़ चुके थे।
 
आज मम्मी दीदी को लेकर चाचा जी से मिलवाने ले जा रही थी। शाम तक वो लौट आने वाले थे। जीजू का घर में ही रहने का कार्यक्रमथा, शायद वो मुझे चोदना चाहते थे, जीजू की मीठी नजरों को मैं समझ गई थी। मैं चुदने के इस ख्याल से आनन्दित हो उठी थी।

घर वालों के जाते ही मेरा दिल धड़कने लगा था। आज कुछ ना कुछ अनहोनी होने जैसा लगने लगा था। मुझे एकान्त चाहिये था, अपने आपको सम्भालने के लिये। मैं धीरे धीरे कमरे की ओर जाते हुये छुपी आंखों से जीजू को देखती हुई अन्दर आ गई। दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े बदले, ब्रा और पेन्टी भी उतार दी और मात्र शमीज पहन कर बिस्तर पर लेट गई, शायद इस ख्याल से कि जीजू मुझे चोद डाले। मेरी आँखें जैसे सपने देखने के लिये तड़पने लगी थी। जीजू के लण्ड को पकड़ना, उसे चूसना... हाय... आज मुझे ये क्या हो रहा है। कैसा होगा जीजू का मस्त लण्ड, पास से देखू तो मजा आ जाये। इन्हीं ख्यालों में मेरी पलकें नींद से बोझिल होने लगी।

तभी जीजू ने धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल दिया। मैं जैसे होश में आ गई। जीजू को कमरे में पाकर मेरी छातियाँ धड़क उठी।

'हाय जीजू, आप ...?' मैंने जल्दी से चादर को अपने कंधे तक खींचने की कोशिश की। पर जीजू ने मेरी भरी जवानी की एक झलक तो देख ही ली थी। मैंने जानकर ही तो वो छोटी सी शमीज पहनी हुई थी।

'लेटी रहो...कम कपड़ों में तो नेहा तुम कितनी अच्छी लग रही हो !' जीजू की आँखों में शरारत ही शरारत भरी थी।

'आओ ना जीजू, यहीं आ जाओ !' मैंने मुस्करा कर जीजू को पास बुला लिया। मेरी चूत उन्हें देख कर की पानी छोड़ने लग गई थी।

'एक बात तो बताओ, उस दिन तुम दीदी के बारे में क्या कह रही थी?' जीजू ने मुझे छेड़ा।

मैंने भी मौका देखा और जीजू को बातों में उलझाया।

'वो दीदी रात को सी सी कर रही थी और फिर वो चीख भी रही थी, बस मैं तो इसी बात की शिकायत कर रही थी।' मैंने जीजू को शरमा कर इशारा सा किया।

मेरा दिल अब जोर जोर से धड़कने लग गया था। जीजू की आँखें गुलाबी सी हो गई थी। उन्होंने शराबी सी आवाज में कहा- तुम्हारी दीदी को बहुत आनन्द आ रहा था ना इसीलिये वो सी सी रही थी...'

उसने मुझे सेक्स का सा इशारा किया।

'आप झूठ बोलते है, मारने से आनन्द आता है क्या...?' मैंने शरमा कर कहा।

'नेहा जी आप भी एक बार मरवा कर देख लो...!' जीजू ने एक कसा हुआ बाण चलाया।

'क्या...क्या मरवाऊँ...?' मैं हंसते हुये बोली, पर उनकी बातों से मैं तो मन ही मन में खिल सी गई, मेरी सांसें तेज होने लगी।

जीजू को सब समझ में आ गया था। मुझे लगा कि अब तो मैं गई काम से। जीजू तो अब मुझे जरूर ही चोद डालेंगे। मैं भी अपने आपको तैयार कर रही थी।

'नेहा जी, वही जो आपके पास है, देखो आप बेकार में ही परेशान हो रही हो, मैं तो आपका जीजा जी हूँ, घर की बात घर में ही रहेगी !' जीजू मेरे और करीब आ गये।

'जी हाँ...घर की बात...घर में ...' मैं मुस्कराई और मेरी नजरें झुक ही गई,

नेहा, अपने नींबू तो दिखा दो।'

मैं समझ गई और शर्मा गई।

'मेरे तो है ही नहीं...क्या देखोगे?' मैंने हिम्मत करके कह ही दिया। जीजू ने मेरे निम्बुओं को अपने हाथ से टटोला। मुझे एक तेज गुदगुदी हुई।

'अरे...क्या करते हो...मत करो ऐसे।' मैं उनका हाथ झटक झटक कर हटाती रही।

पर वो नहीं माने...वो उसे सहलाते रहे। मेरी तो चूत पहले पानी से तर हो चुकी थी। वो पानी छोड़ने लगी थी। शायद मुझे अभी तो जवानी का मजा दे रहे है। मुझे भी नशा जैसा रंग चढ़ने लगा था...

मैं बिस्तर पर ही शरम से दूसरी ओर करवट बदल कर अपने पैर सीने की तरफ़ सिमटा लिये। पर मैं ये भूल गई थी कि मैंने पैंटी तो पहनी ही नहीं थी। मेरी छोटी शमीज चूतड़ों पर से ऊपर सरक गई थी और मेरे कोमल सुडौल चूतड़ नग्न हो गए थे। जिसमें से मेरी गाण्ड का गुलाबी छेद उन्हें साफ़ नजर आने लगा था।

तभी मेरी गाण्ड के कोमल छेद में गीला सा अहसास हुआ। उनकी जीभ ने मेरे छेद को चाट लिया था। मेरी छातियाँ धड़क उठी। मैं सिसक उठी। मेरे गालों पर उन्होने हाथ फ़ेर दिया। मैं शरम से लाल हो उठी। वो और नजदीक आते गये और मैं लाज से सिमटती सी चली गई।

वो मेरी गाण्ड के छेद को जोर जोर से चाटने लगे थे। जीजू की गरम सांसें मेरी गाण्ड से टकरा रही थी। मैं मस्ती से झूम उठी। अब उन्होंने अपने हाथों से मेरी चूचियाँ थाम ली और हौले से दबा दी...

उफ़्फ़ आह्ह्ह ! और फिर मुझे अचानक लगा कि उनके होंठ मेरे होंठों से टकरा गये।

मैंने अपनी आँखें खोली तो उनका चेहरा मेरे होंठों के बहुत ही पास था। मैं तो मदहोश हो उठी और मेरे नाजुक पत्तियों जैसे होंठ खुल गये। जीजू के होंठों ने मेरे निचले होंठ को धीरे से दबा लिया।

'जीजू...हाय रे...बस करो ...आह्ह्ह !' मेरे मुख से निकल पड़ा।

मुझे अपनी छाती पर दबाव महसूस हुआ। मैं जीजू के नीचे दब चुकी थी। जीजू मेरे ऊपर चढ़ चुके थे। मैं हिल डुल कर कसमसाने की कोशिश करने लगी। इससे वो अपने लण्ड को मेरी चूत पर सेट करने में सफ़ल हो गये थे। मेरे मन में आनन्द की तरंगें उठने लगी थी। आनन्द इतना अधिक आने लगा था कि मैंने फिर अपने आपको ढीला छोड़ दिया। जीजू धीरे से मेरे ऊपर सेट हो गये थे। मेरे तपते शरीर पर उनका भारी शरीर सवार हो चुका था। मेरे गुप्त अंगों पर दबाव बढ़ता जा रहा था।

फिर मैं भी अपनी चूत को उनके भारी लण्ड पर दबाने लगी। मेरी चूत लण्ड लेने के लिये बार बार ऊपर उठ कर उनके लण्ड को दबा रही थी। मेरे मुख से आनन्द भरी सिसकारी निकलने लगी- ओह्ह मेरे जीजू...मैं तो मर गई...

उनका लण्ड मेरी नाजुक सी चूत को धीरे धीरे घिसने लगा। मेरा दिल पिघलता जा रहा था। मैं तो चुदने के तड़पने लगी।

'नेहा, लण्ड लोगी?' जीजू ने सीधे ही पूछ लिया।

'क्क्क्या...जीजू...?' मेरा मुख खुला ही रह गया। मेरी नशीली आँखें ऊपर उठ गई। हाय अब तो चुद गई मैं तो...

'चूत दोगी मुझे...?' उन्होंने फिर से मुझे बड़े मोहक भरे अन्दाज में कहा।

'उसके लिये तो दीदी है ना...' मैंने धीरे से मुस्करा कहा। मैं तो शरम से पानी पानी हो रही थी।

'दीदी की अब चूत कहाँ रही है वो तो भोसड़ा हो गई है।'

'तो क्या हुआ, गाण्ड तो है ना?' मैंने दबी जबान से कहा।

'वो भी अब तो खुल कर भोसड़े के समान हो चुकी है।'

'तो फिर मेरी मारोगे...? चलो हटो, गुण्डे कहीं के !'
 
जीजू मेरे ऊपर से धीरे से हट गये और बिस्तर पर ही बैठ गये। जीजू का कड़क लण्ड पजामें में से तम्बू की तरह खड़ा हुआ था। मुझे बहुत खराब लगा, सारी मस्ती चूर चूर हो गई थी। उनके खड़े हुये लण्ड से चुदने को पूरी तैयार थी। उनके इस तरह से हट जाने से मैं परेशान सी हो गई। पर मुझे क्या पता था कि आगे के कार्यक्रम क्या है।

मैंने अपनी शमीज ठीक की पर वो छोटी बहुत थी।

'जीजू, मुझे वो अपना...दिखाओ ना !' मैंने तिरछी निगाह से जीजू के लण्ड की ओर देखा।

'क्या लण्ड देखोगी?' जीजू ने मुझे फिर भड़काया, दिल तेजी से धाड़ धाड़ करने लगा

'हाय कैसे बोलते हो...हाँ वही ...' मेरा तो जिस्म ही कांपने लगा था।

'पकड़ोगी मेरा लण्ड...?' उन्होंने फिर मुझे शर्म से लाल कर दिया। मैंने शरमाते हुये हाँ कह दिया।

'चूसोगी...?' वो फिर मुझे बोल बोल कर दिल तक को हिलाते रहे।

'धत्त...इसे कौन चूसता है?' मेरी शर्म से भीगी आवाज निकली।

जीजू ने अपना लण्ड बाहर निकाल दिया। आह्ह्ह ! सच में उसका लण्ड बहुत ही सुन्दर, गोरा और बलिष्ठ लग रहा था। उसकी नसें उभरी हुई लाल सुर्ख सुपाड़ा बहुत ही अद्भुत और चमकदार था। मैंने शरमाते हुये किसी मर्द का लाल सुर्ख लण्ड पहली बार बार थामा।

'लण्ड थामा है तो साथ निभाना !'

'धत्त, ऐसे क्या कहते हो?'

मैंने जीजू का लण्ड दबाना और मसलना शुरू कर दिया। जीजू आहें भरने लगे। बहुत कड़क लण्ड था।

अचानक जीजू ने मेरे बाल पकड़े और मेरे सर को अपने लण्ड पर ले आये।

'नेहा चूस ले रे मेरे लौड़े को...स्स्स्सी सीईईइ चूस ले यार...' जीजू ने अपना मोटा लण्ड मेरे गाल पर रगड़ दिया। फिर उसका गुदगुदा चमकता हुआ लाल सुपाड़ा मेरे मुख में समा गया। फिर वो अपने कूल्हे हिला हिला कर मेरे मुख को जैसे चोदने लगा।

फिर मैंने उसे पूछा- इसमें बहुत मजा आता है क्या...?

मैंने धीरे से पूछ लिया।

'मेरी नेहा, बस पूछो मत...चल अब लेट जा...अपनी टांग उठा ले...चुदा ले अब !' उफ़्फ़्फ़ जीजू कैसे बोलते है हाय रे।

मैंने अपनी दोनों टांगे चौड़ी करके ऊपर उठा ली। जीजू मेरी टांगों के बीच में फ़िट हो गये और अपने हाथों से मेरी भीगी हुई नंगी चूत में लण्ड को जमाने लगे। मुझे उनका भारी सा लण्ड का नरम सा अहसास लगा। फिर मेरी छोटी सी तंग चूत में उसका लण्ड घुसने सा लगा। मुझे लगा ओह्ह मेरी चूत तो अपना मुँह खोलती ही जा रही है। जाने कितनी चौड़ी हो जायेगी ये...मुझे तेज मीठा सा आनन्द आया।

तभी जीजू ने मेरे होंठों को अपने होंठों पर रख कर उसे चूसने लगे और साथ ही कमर उठा कर अपने चूतड़ों से जोर लगा कर लण्ड को जोर से घुसड़ने लगे। मैंने भी तड़प कर जीजू को जोर से बाहों में दबा लिया और लण्ड को भीतर घुसेड़ने का सम्पूर्ण यत्न करने लगी। कितना कसता सा अन्दर जा रहा था। तेज आनन्द भरी खुजली, बहुत मजा आ रहा था।

'मेरे जीजू...जरा कस कर...बहुत मजा आ रहा है।' मेरे मुख से आखिर निकल ही गया।

'बहुत कसी है नेहा जानम !' जीजू ने मेरी तंग चूत पर जोर लगाते हुये कहा।

'उह्ह्ह्ह...बस चोद दो अब...हाय रे, मर जाऊँगी राम...और जोर से दम लगाओ ना !'

जीजू ने धीरे धीरे जोर लगा कर लण्ड को बच्चेदानी के मुख तक पहुँचा दिया। उसका लण्ड का योनि में इतना टाईट फ़िट होने से मुझे बहुत आनन्द आने लगा था। हम दोनो के शरीर एक हो चुके थे, लण्ड से जुड़ चुके थे। अब जीजू धीरे से धीरे मेरी चूत पर अपना लण्ड घिस रहे थे। मुझे बहुत तेज उत्तेजना लग रही थी।

अब जीजू थोड़े से ऊपर उठ गये थे और अपने शरीर को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया था। अब वो लण्ड अन्दर-बाहर करके मुझे चोद रहे थे। लण्ड और चूत दोनो ही चूत के पानी से सरोबार हो चुके थे और थप थप की आवाजें आने लगी थी। उनके इन्हीं प्यारे धक्कों से मुझे मस्ती का ज्वार चढ़ने लगा था और मैं अपनी चूत उछल उछल कर चुदाने लगी।

मस्ती भरी चुदाई, मस्त नशा...मस्त खुमार...इतना चढ़ा कि नहीं चाहते हुये भी मेरी चूत ने रस की धारा छोड़ दी। मेरी चूत जोर जोर से अन्दर बाहर होकर मचक मचक करने लगी और अपना काम रस धीरे धीरे छोड़ने लगी।

जीजू कुछ कुछ हांफ़ते हुये दो मिनट के लिये रुक गये। मैंने भी झड़ने के बाद करवट ले ली और थोड़ी सी उल्टी हो कर लेट कर आनन्द के क्षण को महसूस करते हुये मुस्कराने लगी।

उससे जीजू पर उल्टा ही असर हुआ। उन्होंने मेरे मस्त चूतड़ों को थपथापाया और मेरी गाण्ड के पटों को चीर दिया। भीतर से मेरी कई बार की चुदी हुई गाण्ड मुस्कराने लगी। जीजू ने उसे और खींच कर खोला और अपना लण्ड गाण्ड की छेद पर रख दिया और अपना सम्पूर्ण भार डालते हुये मुझ पर झुक गये।

उसका लण्ड मेरी गाण्ड के भीतर सहजता से उतर गया। मैंने भी पेट के बल लेट कर अपनी पोजीशन ठीक कर ली और गाण्ड की ढीली करके लण्ड को उसमें घुसाने में सहायता की।

जीजू के दोनों हाथ मेरी पीठ से सरकते हुये मेरे सीने पर आ कर जम गये। मेरी गेंद जैसी चूचियों को मसलने लगे।

पहले तो मुझे तेज मीठी सी जलन सी हुई, फिर तेज मीठी सी कसक तन में भरती चली गई। मजा बहुत आने लगा था। मेरी चूचियों पर जीजू का हाथ भारी पड़ रहा था। जीजू ने अपना पूरा जोर लगा दिया और उनका कठोर लण्ड मेरी गाण्ड में घुसता चला गया। गाण्ड मराई में इतना मजा आता है मैंने तो कभी सोच ही ना था। ये तो जीजू के मोटे लण्ड का कमाल था।

'साली की माँ चोद दूँगा, साली चिकनी...गाण्ड मार कर फ़लूदा बना दूँगा।'

'ओह्ह, मीठी मीठी गालियाँ...अच्छी लग रही हैं जीजू...मार दे मेरी गाण्ड ! हाय रे जीजू ! जोर से, मार दे यार !'

'ले छिनाल...चुद ले अब तू भी...याद करेगी कि तुझे तेरे जीजू ने चोदा था।'

'दीदी की तरह चोदो ना।'

'ओह तो तुम सब देखती हो...'

यह कह कर वो जोर जोर से मेरी गाण्ड मारने लगा। इतनी देर में मेरी चूत फिर से उत्तेजित हो चुकी थी, मुझे उसी वजह से बहुत मजा आने लगा था। मैं अपनी टांगे बिस्तर पर फ़ैलाये उल्टी लेटी गाण्ड चुदवा रही थी। हाय राम ! जीजू कितने अच्छे हैं, मुझे कितना सुख दे रहे हैं.. यह सोचते हुये मैं चुद रही थी कि जीजू ने जोर हुंकार भरी और अपना लण्ड मेरी गाण्ड से बाहर निकाल लिया। मैंने सीधे होकर उनका लण्ड अपने हाथ में ले लिया और जोर जोर से मुठ्ठ मारने लगी। तभी उसके लण्ड के सुपाड़े के बीच में से जोर की धार निकल पड़ी। मैं उस धार को ध्यान से देखती रही...कैसा रुक रुक कर वो दूध छोड़ रहा था। मेरी छातियों पर, पेट पर और कुछ बूंदें मेरे मुख पर भी बरस रही थी।

'अरे रे...छिः छिः ये क्या कर दिया...मुझे तो गीली कर दिया।'

'नेहा रानी...जरा चख कर तो देखो !'

'क्या...?'

ये देखो...! ' उन्होंने अपनी एक अंगुली से अपना वीर्य उठा कर चूस लिया।

मैंने उसे आश्चर्य से देखा। फिर उसी अंगली से थोड़ा सा वीर्य और उठाया और मेरे मुँह में अंगुली डाल दी। उसे बताने के लिये तो मैंने उसे ऐसे जताया कि जैसे वो बहुत स्वादिष्ट हो।

फिर मैं उठी और बाथरूम में चली आई। मैंने झांक कर देखा वो बिस्तर पर लेटा हुआ सुस्ता रहा था। मैंने अन्दर जाकर मेरी छाती पर पड़ा हुआ वीर्य फिर से चखा, फिर और चखा...फिर पूरा ही चाट लिया...उह, कोई खास तो नहीं...बस यूँ ही चिकना सा, फ़ीका फ़ीका सा...पर शायद मर्द इसी बात से खुश होते होंगे।
 
मैंने शावर खोला और स्नान करने लगी। तभी जीजू ने पीछे से आकर मुझ गीली को ही दबोच लिया और मुझे चूमने लगे। मैं जीजू की बाहों में तड़प उठी। उनके लण्ड ने मेरी गीली चूत में ठोकर लगानी शुरू कर दी। मैंने भी अपनी टांगें चौड़ा दी, रास्ता साफ़ देख कर जीजू ने मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया।

अह्ह्ह...मजा आ गया...हाय ! मैंने अपनी एक टांग साईड में ऊंची कर दी। लण्ड तो जैसे जन्म-जन्म का प्यासा था... अन्दर-बाहर होता हुआ उनका लण्ड एक बार और चूत में उतर गया।

जीजू मुझे अब बहुत जोर से आनन्दित करके चोद रहे थे। जीजू ने मुझ गीली जवानी को जी भर कर चूसा... मुझे मस्ती से चोदा...और मैंने भी उनका मस्त लण्ड खूब उछल उछल कर लिया... अपनी प्यासी चूत को लण्ड का आनन्द दिया।

उनका मस्त लण्ड जी भर कर खूब चूसा, उसका खूब रस निकाला।

शाम तक मैंने जीजू के लण्ड के साथ खूब मस्ती की। उनके खूबसूरत सुपाड़े को खूब चूसा, अपनी मस्त जवान चूत भी चुसवाई। उन्होंने मेरे चूत के मटर के समान मस्त दाने को अपने होंठों से खूब चूस चूस कर मुझे मस्त किया।

हाय राम...उस दिन तो मैंने जीजू से खूब चुदवा चुदवा कर आनन्द लिया, जीजू मेरी मस्त गाण्ड को भी कितनी ही बार बजाई।

उनके जाने के बाद भी यह कार्यक्रम बाद में भी बहुत महीनों तक चलता रहा। पर समय के साथ साथ यह सब कम होता चला गया।

पर क्या करूँ जवानी का नशा था वो भी पहला नशा...कण्ट्रोल नहीं होता है ना। किसी से अपना शरीर दबवाने की, नुचवाने की इच्छा तो हो ही जाती है ना। दिल मचलने लग जाता है, जिसे सोचने से चड्डी तक गीली हो जाती है।

चलो अब देखते है मेरे नसीब आगे कौन लिखा है...
 
Rohit Kapoor wrote: ↑ 21 Feb 2020 15:55
Excellent update Mastram bhai

Waiting for next update[/b][/size]
 
प्यार का तोहफा तेरा

उस रात हम दोनों पंजाब केसरी में पढ़ तहे थे. उसमें एक समाचार था जिसमें हरियाणा के एक व्यक्ति के उसकी सास के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे. ये खबर का खुलासा तब हुआ जब उनके एक पडोसी ने उन दोनों को दिन में बाहर लंच खाते देख लिया जब दोनों थोडा रोमांटिक मुद्रा में थे. उसने फिर उनका पीछा किया और उनके बेडरूम की खिड़की से अनादर के क्रिया कलाप कि रिकॉर्डिंग की.

उसी दिन mid-day में Ask-Diana में किसी ने सवाल भी पूछा था कि उन्हें अपनी सासू माँ से आकर्षण है और वो क्या करें. जवाब में Diana ने लिखा था कि बहुत सारे मर्द अपनी सास के बारे में ऐसा सोचते हैं.

बात तो सच थी. कम से कम मेरे बारे में. मेरी सास अगर आज तैयार हों तो मैं एक मिनट की देरी किये बिना उनको पूरा जवाब दूंगा.

इसी बीच मेरी पत्नी अनीता का सवाल मुझे चौका ही गया, "गगन डार्लिंग! तुम भी मेरी माँ के बारे में ऐसा कुछ सोचते हो क्या?"

"अरे नहीं तो", मैंने जैसे घबराते हुए जवाब दिया मानों मेरी चोरी पकडी गयी हो.

अनीता मंद मंद मुस्करा रही हो जैसे वो साफ़ पढ़ रही हो कि मैं मन मने क्या सोच रहा हूँ.

मेरी सास जयंती बहुत खूबसूरत थीं. वो उनीस साल की थीं जब उन्होंने अनीता को जन्म दिया. उन्होंने हमेशा अपना ख़याल ठीक से रखा. जिसकी वज़ह से साठ साल की उम्र में भी बहुत ही दिखती हैं. वो मेरी पत्नी से समझो बस एक साइज़ कि ज्यादा बड़ी होंगी. पर उनकी चुन्चिया बड़ी एवं सुडौल हैं. और उनकी गांड गोल और मुलायम है. मुझे इस लिए पता है क्योंकि पिछले हफ्ते जब हम मेट्रो से घर लौट रहे थे तो मेट्रो में खचाखच भीड़ थी. इसकी वज़ह से वो और मैं बहुत सट के खड़े थे. और उनकी गांड को मैं बिलकुल महसूस कर सकता था. मेरा लंड पेंट के अन्दर एकदम टाइट हो रखा था और उनकी गांड की दरार में मानो फंसा हुआ था. मैं तो बस बहाना कर रहा था कि जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है और अपने फ़ोन पर कुछ पढ़ रहा था. पर मन ही मन मैंने उनकी गांड को अपने लंड वाले एरिया में बहुत फील किया और बड़ा मज़ा लिया. मेरी सास बहुत खुश मिजाज़ औरत हैं. और मुझे ऐसा लगता है उन्होंने भी इस अचानक बिना योजना के मजे को अच्छे से महसूस किया होगा.

जयंती को आँखे बड़ी सुन्दर हैं. पता नहीं जब भी मैं उनमें देखता हूँ ऐसा लगता है कि आँखों मुझसे कुछ सवाल कर रही हैं. मानों ये बोल रही हैं कि, "मुझे मालूम है कि तुम मुझे देख कर क्या सोच रहे हो. अरे आगे कब बढोगे?"

और गगन ने कई बात लगभग कोशिश कर ही डाली थी पर उसकी हिम्मत आखिरी समय पर जवाब दे जाती थी.

गगन को पता था उसकी पत्नी अनीता और सासु मन जयंती माँ बेटी कम और सहेलियां ज्यादा है. अनीता ने अपनी माँ को गगन और उसके बीच में क्या क्या हो रहा है लगातार बता के रखा था. उसके अफेयर कि शुरुआत से ले कर उनकी पहली पहली चुदाई कि बात और यहाँ तक कि गगन कि नंगी फोटो भी उन्हें दिखाई थी. उसकी माँ को पता था मैं चूत चूसना बड़ा पसंद है. मुझे पता

मेरी पत्नी अनीता बड़ी कि कामुक स्त्री थी. पर एक बच्चा हो जाने के बाद उसकी सेक्स कि इच्छा काफी कम हो गयी थी. मेरे लिए सेक्स के बिना रहना बहुत मुश्कील था. पर मैं अनीता के साथ कभी भी बेवफाई नहीं कर सकता था. मैं देखने में हैण्डसम हूँ और कसरत कर के शरीर को फिट रखता हूँ. दफतर में कुछ लड़कियों ने कई बात हिंट दिया पर मैं अनीता से बेहद प्यार करता हूँ तो बात बिलकुल आगे नहीं बढाई.

एक दिन अनीता ने मुझसे बोल ही दिया, "गगन, तुम्हें अगर सेक्स कि जरूरत हो तो तुम मेरी माँ कि मदद ले सकते हो".

"जब तुम मुझे उपलब्ध हो तो मैं ऐसा क्यों करूंगा डार्लिंग!" मैंने जवाब दिया.

"यही तो समस्या है. मैं तुम्हें उपलब्ध नहीं हूँ. मुझे मालूम है जितना तुम्हारे शरीर कि जरूरतें हैं वो मैं पूरा नहीं कर पा रही हूँ. इधर उधर मुंह मारने से बेहतर रहेगा तुम ऐसी जगह जाओ जो मुझे पता हो. और वहां जाने से मुझे किसी प्रकार का स्ट्रेस भी न हो". अनीता ने बड़े ही दुःख भरे स्वर में अपने विचार व्यक्त किये.

"पर मैंने तुमसे शादी कि थी तुम्हारी माँ से नहीं"

"हाँ, पर मुझे पता है महीने में दो बार तुम्हारे लिए काफी नहीं है. सच पूछो तो ये नाइंसाफी है तुम्हारे साथ. और साथ में मेरी मम्मी को भी थोडा प्यार मिलेगा जो वो पापा के जाने के बाद से मिस करती हैं"

मन ही मन मैं बड़ा खुश हो रहा था. सासु माँ के संग ऐसा करने के ख़याल से ही मेरा लंड पन्ट में एकदम टाइट हो रखा था.

"तुम एकदम पागल हो"

ऐसा कहते हुए मैंने अनीता के होठों पर होंठ रख कर उसे एन चुम्बन दिया. और तेजी से बाथरूम में घुस कर जल्दी से सडका मारा जिससे खड़े हुए लंड को थोडा करार आया.

इस बात को एक सप्ताह गुजर गया. मैं नहाते समय अपनी सास जयंती देवी के गदरीले बदन कि कल्पना करता और हस्तमैथुन करता. अनीता कि बातों से जो आरजू दिल में जाग गयी थी अब वो थोडा थोडा निराशा में बदल रही थी. शायद अनीता उस समय थोडा दुखी हो और अपना दुःख कम करने के लिए ऐसा कह रही हो. पर मैंने अनीता से इस बारे में कुछ भी कहाँ नहीं.

वो शनिवार का दिन था, मैं दस बजे के आस पास उठा. अनीता चाय ले कर आई.

"सारा इंतज़ाम हो गया है आज का. मैं बच्चे को ले कर माल जा रही हूँ शौपिंग करने"

"क्या मतलब" मैंने पूछा.

"वो दिन आ गया है जब तुम मेरी माँ के साथ ......"

"क्या?... क्या मतलब.?...." मैंने नर्वस होने का ढोंग करते हुए बोला.

"अरे तुम कोई बच्चे नहीं हो. बाकी कैसे करना है...क्या करना है...आप देखो समझो. बस ये समझ लो कि अपनी माँ तुम्हें दे रही हूँ तोहफे में. तो मुझे कोई बढियां सा तोहफा दिलाना"

"ओह...जरूर जरूर" मैं बस इतना ही बोल पाया.

"थोडा आराम से गगन... मुझे पता है कि तुम झूठ बोल रहे थे. जिस तरह से तुम उन्हें देखते हो ..उन्हें भी पता है और मुझे भी पता है कि तुम्हारे इरादे क्या हैं...पिछले हफ्ते जब वो टेबल से प्लेट्स उठा रहें थीं, तुम उनके ब्लाउज के अन्दर झाँक रहे थे. उस दिन मेट्रो में तुम अपना हथियार उनकी पिछाडी पर रगड रगड कर मज़े ले रहे थे."

मैं शर्मा गया. मेरी कान लाल हो उठे.

"अरे शरमाओ मत मेरे राजा. मेरी माँ को भी तुम्हारी ये करतूतें अच्छी लगती हैं. मुझे मालूम है."

अनीता की ये बात सुन कर मन को आराम मिला.

"और सुनो. उन्हें ढंग से करना. दो तीन बार उनका हो जाए ठीक से इस बात का ख़याल रहे. लास्ट टाइम उनकी डेट पर जो बंदा था वो दारु पी के बिना कुछ किये हो सो गया था.

"जरूर" मैंने आश्वासन दिया.

अनीता ने मुझे किस किया और माल के लिए निकल पडीं. जाती हुई कार के जाने की आवाज मुझे कभी इतनी अच्छी नहीं लगी थी.

और अब इंतज़ार था आती हुई कार की आवाज़ का.

ठीक बारह बजे मेरी सासु माँ जयंती देवी का आगमन हुआ. वो थोडा सा नर्वस थीं. मैं उन्हें नीचे के कमरे में ले गया. हम दोनों कि साँसें थोडा तेज चल रहे थीं.

"सो, अब आगे का क्या ख़याल है?" जयंती देवी ने पूछा.

"हाँ, थोडा अजीब सा तो लग रहा है. इस घड़ी का मैं कब से इंतज़ार किया है. और आज ये घड़ी मेरे सामने आ खडी है तो समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें" मैंने लगभग हकलाते हुए बोला.

"इंतज़ार तो मैंने भी बहुत किया है" वो बोलीं.

"पर मुझे पता है कि मैं क्या करूंगा. पहले मैं आप को जी भर के देखूँगा. फिर मैं आप को बांहों में भर लूँगा. फिर धीरे धीरे आपके कपडे उतारूंगा. और फिर उसके आगे जो होना है वो होगा."

"हाँ मैंने तुम्हें आँखों से मेरे कपडे उतारते कई बार देखा है." जयंती देवी शर्माते हुए बोलीं.

"ओह तो आपको पता चल जाता था?" मैंने पूछा.

"हम औरते हैं. हमारा सिक्स्थ सेंस इतना अच्छा होता है कि हम सब भांप लेते हैं." जयंती देवी बोलीं.

"चलो अच्छा है, अब मुझे कुछ छुपाने कि जरूरत नहीं है आपसे". मैंने बोला.

"हाँ और मुझे आप कहने कि भी जरूरत नहीं हैं. इस एक्सरसाइज के बाद हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन्ने वाले हैं."

हम दोनों एक दुसरे कि तरफ आँखों में ऑंखें डाले एक दुसरे की और बढे और बांहों में समां गए. मैंने उनके अधरों को अपने अधरों के बीच में ले लिया. और अपने हाथों से उनकी पीठ और गांड को सहलाने और दबाने लगा.

जयंती देवी के भारी चुंचियां मेरी छाती से मानों पिस रहें थी. वो अपने हाथों को मेरे जीन्स के ऊपर से सहला कर मेरे जवान हथियार का जायजा ले रहें थीं. मैं उनके पीछे जा कर अपना खड़ा लंड उनकी चूतड़ों के दरार में फंसा कर अपने दोनों हाथों से उनकी चुन्चिया दबाने लगा. मैंने उनका कुरता उतार दिया. और उनकी गोरी गोरी मांसल चुंचियों को उनकी काले रंग कि ब्रा से आज़ाद कर दिया.

मैंने एक एक कर के उसकी चुंचियां मुंह लगा कर चूसना शुरू कर दीं. मेरे दोनों हाथो उनकी गांड महसूस कर रहे थे. फिर मैं अपना मुंह नीचे ले जा आकर उनकी नाभि में अपनी जीभ दाल कर जैसे उसे चोदने सा लगा. ये करते हुए मैंने नाडा ढीला कर के उसका पजामा उतार दिया. और उनकी पैंटी को नीचे खींच कर अपना मुंह उनकी चूत के ऊपर टिका दिया. जयंती देवी बेहद गर्म हो चुकी थीं. वो पीछे पड़े दीवान पर बैठ गयीं और पैर हिला कर अपनी पैंटी को एक तरफ फर्श पर फेंक दिया. मेरे मुंह उनकी चूत के भगनाशे को मुंह में ले कर चाट रहा था. उन्होंने अपनी टाँगे फैला के चौडी कर दीं ताकि मैं मुंह से उनकी चूत की चुदाई कर सकूं.

मैंने अपनी जीभ उनके चूत में डाल कर मुख्चोदन प्रक्रिया शुरू कर दी. उन्हें शायद जीवन में पहली बार मुंह से चूत कि चुदाई का अवसर मिला रहा था.

"आह्ह ...आह....म्म्म ....." आनंदातिरेक में बडबडा रहीं थीं.

उनकी चूत मेरी जीभ कि प्रक्रिया से मस्त गीली हो चुकी थी. और मेरे लंड से भी थोडा थोडा पानी निकल रहा था. मैं उठा और मेरे मोटा और खड़ा लंड उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया.

हम दोनों एक दुसरे को नज़रों से नज़रें मिला कर मुस्करा रहे थे.

"तो हो जाए फिर" मैंने मानों उनकी इजाज़त मांगी.

उन्होंने मुस्कराते हुए सर से हामी भर दी.

मैं कमर से एक हलके से झटके से लंड का सुपाडा उनकी चूत में पेल दिया. और होठों से होठों का रसपान करने लगा. उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के ऊपर लगा के जैसे प्रेशर देने लगीं. चूत में लंड पूरा कब घुसा और कब मैं पूरी रफ़्तार से उन्हें छोड़ने लगा पता ही नहीं चला. चूत गीली थी. जब लंड अन्दर बाहर होता था, फच फच कि आवाज आती थी. उन्होंने अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाना चालू कर दिया. मैं समझ गया कि अब वो झडने वाली है. उनके हाथों की पकड़ मेरी गांड पर और तेज हो गयी. मेरे लंड के सुपाडे पर गरम लावा सा बहता हुआ महसूस हुआ. और वो झड़ गयी.

मैंने अपना लंड निकाल लिया. जयंती देवी ने धन्यवाद स्वरुप उठ कर मेरा लंड अपने मुंह में ले कर चूसने लगीं. मैं धीरे धीरे इनकी गांड सहलाने लगा. फिर अपनी दो उँगलियाँ उनकी चुदी हुई चूत में डाल कर हिलाने लगा. थोड़े समय में ही जयंती दूसरी चुदाई सेशन के लिए तैयार हो गयीं.

मैं इस बार नीचे लेट गया और और वो मेरे ऊपर लेट कर आनंद लेने लगीं. मैंने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर भिड़ाया और जयंती ने एक ही धक्के में पूरा का पूरा ले लिया. थोड़ी ही देर में वो भकभक मुझे छोड़ने लगीं. उनकी बड़ी बड़ी चुंचियां मेरे सीने पर छलक रहीं थीं. मैं उनसे खेल लेता. और मेरे लंड को उनकी चूत के अन्दर बाहर होता देख लेता. बीच बीच में उनकी गांड दबा कर आनंद प्राप्त कर लेता.

वो बिलकुल गांड हिला हिला कर जैसे घोड़े कि सवारी कर रही थी. मैंने अपनी एक उंगली को उनके चूत के रस से गीला कर के उनकी गांड में डाल दिया.

"ऊओह्हह्ह....सीईईईई..... नटखट कही के"

चूत में घुसा हुआ लंड और गांड में फंसी उंगली का आनंद जयंती के सहनशक्ति के बाहर हो रहा था और वो फिर जोरों से झड कर बिस्तर पर जा गिरीं.

मैंने जयंती को उल्टा कर के उनकी गांड सहलाने लगा. थोड़ी देर में जब उनकी सांस में सांस आयी, तो मैंने उनकी गांड उठा कर उनको कुतिया बना दिया. और थोडा थूंक अपने लंड पर लगा कर लंड को उनके गांड के छेद पर टिकाया.

"ऊओह....आज तक किसी ने मेरी गांड नहीं मारी दामाद जी." जयंती देवी बोलीं

"पहली बार का मज़ा ले लो", मैं बोला.

"इतना लंबा और मोटा लंड है तुम्हारा मेरी तो गांड ही न फट जाए कहीं" वो चिंता कर रहीं थीं.

मैंने सोचा बातचीत में समय न जाया किया जाए. मैंने थोडा और थूंक लगा कर उनकी गांड के चीड को और चिकना बनाया और एक छोटे से धक्के से सुपाडा अन्दंर धकेल दिया.

"उईई ... मैं मर गयी...."

मैंने उनकी एक न सुनते हुए दो उंगलियां उनकी चूत में पेल दी और धीरे धीरे उँगलियों से चूत में पेलने लगा. जैसे ही उनको मज़ा आने लगा,

मैंने आव देखा न ताव, पूरा का पूरा लौंडा उनकी मोटी गांड में घुसेड मारा.

"आह....सीसीईईई....."

मैंने अब धीरे धीरे उनकी गांड चोदना शुरू कर दिया. जयंती को भी बड़ा मज़ा आ रहा था. उँगलियों से उनकी चूत कि चुदाई बड़े जोरों से हो रही थी और मोटे लंड से उनकी गांड कि सेवा. थोड़ी ही देर में मेरे लंड के अन्दर बड़ी जोर का तनाव महसूस हुआ और मैंने अपना खूब सारा माल उनकी गांड में छोड़ दिया. जयंती भी मेरी उँगलियों के ऊपर झड गयीं. ये उनका तीसरी बार था.

"सारी जिन्दगी आज तक किसी ने मुझे इतना आनंद नहीं दिया, अब मैं समझी कि अनीता ने क्यों मेरी मर्जी के खिलाफ तुमसे शादी की." जयन्ती बोलीं.

"मुझे बड़ी ख़ुशी है कि आपको ख़ुशी मिली सासू माँ." मैंने बोला.

थोड़े देर के आराम के बाद, उन्होंने अपने कपडे पहने. एक बार मुझे फिर से किस किया. और चली गयीं.

मैं बिस्तर पर लेट गया. कब नींद आई नहीं चला. फ़ोन की घंटी से अचानक नींद खुली. अनीता की आवाज ने मुझे जगाया

"क्या चल रहा है जानेमन"

मुझे उस समय अहसास हुआ कि मैं उसे कह सकता हूँ कि मैं उसकी माँ चोद रहा था. पर मैं बस मुस्करा कर रह गया.

जीवन के इस नए अध्याय का रस बड़ा ही मीठा था. और अच्छी बात ये थी इसके कई सारे पन्ने अभी भी बाकी हैं जिन्हें मैं धीरे धीरे पढना चाहूंगा.
 
मेरे चाचू ने बेरहमी से चोदा

यह एक पाकिस्तानी चुदाई की कहानी है, एक बेरहमी से चुदाई की है।

मेरा नाम साना है और अब मैं कराची में रहती हूँ। मेरी उम्र 18 साल है.. मेरा रंग बिल्कुल दूध की तरह गोरा है.. मेरा कद 5’4″ का है, मेरे जिस्म का कटाव 32-28-33 है..

मैं बहुत प्यारी और सेक्सी हूँ.. यह मैं नहीं.. लोग कहते हैं।

मेरे जिस्म का आगे का हिस्सा या यूँ कहूँ कि मेरे स्तन बहुत ही उठे और उभरे हुए हैं.. मेरी सहेलियाँ भी मुझे यही कहती हैं।

अब मैं अपनी कहानी सुनाती हूँ..

मेरे अब्बू के चचेरे भाई का हमारे घर बहुत आना-जाना था। वे मुझे प्यार से हीरा कहते थे.. दरअसल उनकी देखा देखी कई लोग मुझसे हीरा ही कहने लगे थे।

वो पहले ऐसे नहीं थे.. वो बचपन में मुझे बेटी की तरह उठाते थे और एक चाचा के लिहाज़ से मुझे बहुत प्यार करते थे।

वो रिश्ते में मेरे चाचा थे लेकिन मैं उन्हें हसन भाई कहती थी।

उन्होंने कभी मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचा था और ना ही मैंने कभी उनको इस नजरिए से देखा था।

आहिस्ता-आहिस्ता जब मैं बड़ी होने लगी.. तो खूबसूरत भी होने लगी।

लेकिन उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी।

मैं अपनी सहेलियों को मैसेज करने के लिए अपनी अम्मी के मोबाइल इस्तेमाल करती थी।

मुझे मेरे एक कज़िन वलीद से मुहब्बत हो गई थी और उसे मुझसे मुहब्बत हो गई थी.. मैं उसे भी मैसेज करती थी।

एक दिन जब मैं घर से बाहर धूप में बैठी अपने ब्वॉय-फ्रेंड वलीद को मैसेज कर रही थी।

हसन भाई अचानक आ गए तो मैंने जल्दी से मोबाइल नीचे कर लिया और सीधी बैठ गई।

कहा जाता है कि समझदार के लिए इशारा ही काफ़ी होता है।

हसन भाई समझ गए और उनके दिल में यह ख्याल भी आ ही गया कि मैं अब बड़ी हो गई हूँ।

वो अब मुझे दूसरी नज़रों से देखने लगे।

वो अब मुझसे ज्यादा बातें करने लगे और मुझे अपनी गर्ल-फ्रेंड्स के बारे में बताने लगे।

मैं भी बड़े शौक़ से ये सब सुनती थी।

फिर उन्होंने मुझे एक दिन कहा- हीरा.. अब हम बेस्ट-फ्रेंड हैं और अब हम एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाएंगे।

मैं मान गई…

मैं चूंकि उस वक़्त गाँव में रहती थी.. उस वक़्त मैं स्कूल में पढ़ती थी।

तो मैंने एक दिन उनसे पूछा- हसन भाई.. आप नेट इस्तेमाल करते हैं.. मेरी स्कूल की सहेलियाँ तो इस्तेमाल करती हैं.. और याहू पर चैट करती हैं।

उन्होंने कहा- हाँ करता हूँ.. लेकिन हीरा क्या पता.. तुम्हारी फ्रेंड्स वहाँ चैट ही करती हैं.. या कुछ और देखती हैं.. आई मीन कि एक्ट्रेस की फोटोज वगैरह..

मुझे समझ नहीं आया कि वो क्या कहना चाहते हैं।

मैंने कहा- हाँ तो.. देखती हैं तो क्या हुआ… इसमें बुरा क्या है?

उन्होंने कहा- बेवक़ूफ़.. वो वाले नॉर्मल फोटो नहीं.. बल्कि नंगे फोटोज..

यह सुनते ही मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और हैरान रह गई- क्या कह रहे हैं आप हसन भाई.. पागल तो नहीं हो गए हैं?

उन्होंने कहा- कसम से.. इंडियन एक्ट्रेस के नंगे फोटो हैं। तुम किसी को ना बताना ओके.. मैं जब अगली बार आऊँगा तो मोबाइल पर लेकर आऊँगा..

मैंने कहा- झूट मत बोलिए.. प्रियंकी चोपड़ा.. मलिका सेहरावत.. बिपाशा बसु तो लगती हैं ऐसी.. लेकिन ऐश्वर्य.. आयशा टाकिया.. ऐसी नहीं हैं.. वो तो बहुत शरीफ अदाकारा हैं।

उन्होंने जवाब दिया- हीरा तुम वेट करो.. जब मैं अगली बार लाऊँगा.. तो तुम खुद देख लेना।

मैंने कहा- ओके..

मैं वहाँ से चली गई.. अब हसन भाई की नियत खराब होने लग गई।

अगर मैं उन्हें डांटती या अम्मी को बताने की बोलती तो वो फिर ऐसी बातें ना करते.. लेकिन मेरी खामोशी से उन्हें हौसला मिला और सच कहूँ तो मेरा दिल भी नंगे फोटोज को देखने का कर रहा था।

खास तौर पर आयशा टाकिया का.. क्योंकि उसके उठे हुए चूचे मुझे बहुत हैरान करते थे।

वो अपने घर चले गए और जब एक महीने के बाद दुबारा आए.. तो मुझसे मिले और हमने बात भी की।

फिर उन्होंने मुझसे कहा- मैं ‘वो’ ले आया हूँ।

मैंने थोड़ा सख़्त लहजे में कहा- मैं नहीं देखती।

तो वो बोले- प्लीज़ ना.. यार.. तुम मेरी दोस्त नहीं हो..

खैर अगले दिन घर में कोई नहीं था.. सब किसी शादी में गए हुए थे। घर में मेरे अलावा मेरी दादी थीं।

मैं नहा रही थी और दादी सोई हुई थीं क्यूँकि दिन का वक़्त था और गर्मियाँ थीं।

इतने में हसन भाई भी आ गए.. मैं नहा कर निकली तो वो वहाँ ही खड़े थे।

फिर मैं रसोई में गई.. जहाँ पास ही के बरामदे में मेरी दादी सोई हुई थीं।

मैं वहाँ चाय पीने लगी।

हसन भाई उधर आकर बाहर खड़े हो गए और मुझे बाहर आने का इशारा करने लगे।

मैंने इशारा किया कि दादी हैं.. तो उन्होंने इशारा किया कि वो सोई हुई हैं।

फिर थोड़ी देर बाद उनके बार-बार कहने पर मैं बाहर आई और उनका मोबाइल उनसे ले लिया।

जिसमें मैं नंगी फोटोज थीं।

मैंने कहा- हसन भाई.. आप मुझे पिक्स लगा कर दें और दूसरी कमरे में जाएं.. मैं आप के सामने नहीं देखूँगी।

वो मान गए और दूसरे कमरे में चले गए।

मैंने जब पहली नंगी फोटो देखी.. तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया।

वो फोटो ऐश्वर्या राय की फेक फोटो थी.. जिसमें वो बिल्कुल नंगी थी और एक आदमी उसकी गाण्ड में लण्ड देकर उसको चूचियाँ दबा रहा था।

मैं तो हैरान रह गई.. इसी तरह ऐश्वर्या राय, माधुरी, मनीषा, प्रियंका, दीपिका पादुकोणे, रिया सेन, करीना कपूर, करिश्मा कपूर, कटरीना कैफ़, रानी मुखर्जी और मेरी फेवरिट आयशा टकिया की नंगी और कामुक तस्वीरें थीं।

मैंने ये सब देखा तो मुझे हैरानी हुई और मैं गरम भी होने लगी।

फिर मैं उठी.. अपने आप पर क़ाबू किया और बाहर निकल गई।

मैंने हसन भाई को मोबाइल दिया और कहा- तौबा है हसन भाई..

वो हंसे और बोले- मेरे पास तो नंगी वीडियो भी हैं..

मैंने कहा- नहीं.. अब नहीं देखनी..

वो मुस्कुराए और चले गए।

अब वो मुझसे खुलने लग गए… मुझसे गंदी बातें करते.. मेरे हाथ को छूते.. और एक दफ़ा तो मेरे मम्मों को भी छूने लगे।

तो मैंने उनका हाथ रोक लिया.. लेकिन छोटी थी इसलिए किसी को ना कह सकी।

अब वो हर वक़्त मेरे साथ होने का बहाना ढूँढने लगे।

मैंने भी इतना गौर नहीं किया।

फिर कुछ दिनों बाद मेरा ब्वॉय-फ्रेंड वलीद कराची से आया हुआ था।

वो भी मेरा रिश्तेदार था तो मेरे घर आया हुआ था।

हम एक-दूसरे से मुहब्बत भी करते थे.. लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी।

एक दिन मैं और वलीद हमारे घर के एक कमरे में सीट पर दोनों साथ बैठे बातें कर रहे थे।

सारे घर वाले बाहर थे.. और दरवाज़ा थोड़ा सा बंद था।

वलीद ने मेरा हाथ पकड़ा ही था कि अचानक दरवाज़ा खुला और हसन भाई.. मेरे एक और रिश्तेदार अनवर अन्दर आए।

फिर कुछ दिनों बाद मेरा ब्वॉय-फ्रेंड वलीद कराची से आया हुआ था।

वो भी मेरा रिश्तेदार था तो मेरे घर आया हुआ था।

हम एक-दूसरे से मुहब्बत भी करते थे.. लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी।

एक दिन मैं और वलीद हमारे घर के एक कमरे में सीट पर दोनों साथ बैठे बातें कर रहे थे।

सारे घर वाले बाहर थे.. और दरवाज़ा थोड़ा सा बंद था।

वलीद ने मेरा हाथ पकड़ा ही था कि अचानक दरवाज़ा खुला और हसन भाई.. मेरे एक और रिश्तेदार अनवर अन्दर आए।

उन्हें देखते ही वलीद डर कर उठा और एकदम शीशे के सामने खड़ा हो कर बालों पर कंघी करने लगा।

मैं भी एकदम से उठ कर अपनी बुक्स लेने लगी।

हमने ऐसा ज़ाहिर किया कि हम दोनों के दरमियाँ कुछ नहीं है.. लेकिन हसन भाई और अनवर भाई नादान ना थे.. दोनों की उम्र 26 और 24 थी।

जब कि मेरी और वलीद की उम्र उनकी उम्र से काफी कम थी।

उन दोनों ने हम पर शक किया.. यह हमें यक़ीन हो गया था।

वो दोनों चले गए..

बाद में हसन भाई ने मुझसे कहा- अफ़सोस हीरा.. तुमने मुझसे एक बात छुपाई.. अफ़सोस…

मुझे तो यक़ीन हो गया था कि हसन भाई को मेरे और वलीद के अफेयर का पता चल गया है।

मैंने एकदम अपने आपको ठीक से बात करने के लिए और हसन भाई से जान छुड़ाने के लिए कहा- मुझे पता है हसन भाई कि आप क्या सोच रहे हैं.. ऐसा कुछ नहीं है और अब मैं आपसे बात भी नहीं करती और आपकी-हमारी दोस्ती भी ख़त्म..

यह कह कर मैं चली गई..

हसन भाई की तो जान निकल गई।

वो मुझसे माफी माँगने लगे और कहने लगे- साना मैं तो मज़ाक़ कर रहा था… प्लीज़ ऐसा मत करो..

लेकिन मैं नहीं मानी और सच्ची बात तो यह है कि मुझे हसन भाई की हरकतें अच्छी नहीं लगती थीं तो मैंने कहा- नो.. मीन्स.. नो.. अब मुझे तंग किया.. तो मैं अम्मी को बोलूँगी..

उन्होंने बहुत मिन्नतें कीं.. लेकिन मेरे ना मानने पर वो चले गए।

अब हसन भाई मेरे लिए बेचैन होने लगे और वो मुझसे लव करने लगे.. उन्हें यह तो पता था कि मैं भी किसी से लव करती हूँ तो वो समझे कि उनका काम भी बन जाएगा।

लेकिन यह तो उन की गलतफहमी थी।

फिर एक-दो माह वो नहीं आए और इस दौरान वलीद भी वापस कराची चला गया।

फिर एक दिन हसन भाई आए तो मैंने बिल्कुल सामान्य होकर उन्हें सलाम किया और चली गई।

वो उदास-उदास से लग रहे थे.. मैं जहाँ भी बैठी होती वो मुझे मासूम बच्चों की तरह देखते रहते और मुझसे नज़र ना हटाते।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. अनवर भाई से मेरी अच्छी बनती थी.. क्योंकि वो मेरे पड़ोसी भी थे और गाँव के माहौल तो ऐसा होता है कि हर कोई एक-दूसरे के घर बिना किसी रोक-टोक के आता-जाता है।

उसी रात को मैं अनवर भाई के पास बैठी हुई बातें कर रही थी.. तो हसन भाई हमसे दूर बैठे मुझे देख रहे थे और उदास भी थे।

मुझसे रहा ना गया तो मैंने अनवर भाई से पूछा- क्या बात है हसन भाई को?

तो वो बोले- इनकी गर्लफ्रेंड की शादी है और ये उसी बात से परेशान हैं।

मेरा दिल बहुत खफा हुआ और जिस तरह वो मुझे देख रहे थे.. मुझे शक होने लगा कि शायद वो मुझे पसन्द करते हैं।

फिर जब अनवर भाई ने हसन भाई से पूछा तो उसने कहा- यार अनवर, मुझे साना से लव हो गया है और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ।

अनवर भाई ने कहा- पागल है क्या.. वो तुझसे छोटी है.. और रिश्ते में भी तेरी बेटी लगती है।

हसन ने कहा- आई नो.. लेकिन अनवर तू बोल ना उससे यार… तेरी उससे बनती है.. वो मान जाएगी।

अनवर ने कहा- सोच ले हसन.. देख कोई मसला बन गया तो बदनामी हो जाएगी और साना ने अपना अम्मी को बोला तो पूरी कुनबे में हंगामा हो जाएगा।

लेकिन हसन ने कहा- तुम बोलो तो.. बाक़ी देखा जाएगा।

फिर हसन भाई अपने घर वापस चले गए।

दो दिन बाद अनवर भाई ने मुझे बुलाया और पहले इधर-उधर की बातें करने लगे और फिर कहा- हीरा.. तुम्हें पता है कि हसन क्यों उस दिन उदास था?

मैंने कहा- नहीं.. आप बताएँ ना.. वे क्यों खफा थे.. उन्हें देख कर तो मेरे दिल भी खफा हो गया था।

तो उन्होंने कहा- अगर तुम प्रॉमिस करो कि किसी को नहीं बताओगी.. तो मैं बता देता हूँ।

मैंने कहा- ओके आई प्रॉमिस..

अनवर भाई ने कहा- साना.. हसन तुमसे बहुत प्यार करता है और वो तुमसे शादी करना चाहता है। वो पागल है तुम्हारे पीछे..

मुझे शक तो था ही लेकिन अब यक़ीन हो गया कि हसन भाई मुझे मुहब्बत करते हैं।

मेरे दिल को थोड़ी खुशी भी हुई लेकिन फिर मैंने एकदम से कहा- ये आप क्या कह रहे हैं? मैंने कभी उन्हें इस नज़र से नहीं देखा और वो मेरे चाचा की तरह हैं.. वो ऐसा नहीं कह सकते।
 
अनवर ने कहा- तुम उससे बात करके देख लो.. मैं बात करवाता हूँ।

मैंने कहा- ओके… करवाइए।

अनवर ने फिर हसन भाई को कॉल की और उससे कहा- हसन ये लो.. साना बात करेगी।

मैंने मोबाइल लिया और कहा- हैलो हसन भाई.. मैं यह क्या सुन रही हूँ?

हसन ने कहा- क्या हुआ?

मैंने फिर उन्हें सारी बात बता दी तो वो बोले- यार मैंने अनवर को मना किया था कि तुमसे बात ना करे लेकिन उसने पता नहीं क्यों ऐसा किया।

मैंने कहा- वो छोड़िए.. यह बताएँ कि यह सच है कि नहीं?

तो हसन ने कहा- हाँ हीरा.. ये सच है.. प्लीज़ मुझे गलत मत समझो.. मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगा.. आई लव यू साना..

मैंने कहा- प्लीज़ हसन भाई ऐसा मत कहें और उदास मत हों… हम नहीं मिल सकते..

लेकिन वो तो रोने लग गए तो मिन्नतें करने लगे।

तो मुझे भी शक होने लगा कि शायद ये मुझसे सच्चा प्यार करते हैं।

मैंने कहा- प्लीज़ हसन भाई रोईए मत.. जो होगा अच्छा होगा.. आप परेशन मत हों… चलिए आप यहाँ गाँव आइए.. तो बात करते हैं..

वो खुश हो गए और मैं भी थोड़ी खुश हो कर चली गई।

ज़ाहिर है मैं लड़की थी.. मुझसे कहाँ बात पेट में रहती है।

मैंने अपनी सारी सहेलियों और कज़िन को बता दिया कि हसन मुझसे लव करता है।

फिर जब हसन गाँव आए तो मेरी सहेलियों ने मौका मिलने पर हम दोनों को मिलाया और बातें कीं।

मैं फिर भी ना मानी तो मेरी सहेली ने कहा- हसन भाई ये नखरे कर रही है.. मान जाएगी.. मैं इसे मना लूँगी।

अब आहिस्ता-आहिस्ता मैं भी हसन को पसंद करने लगी और जब मैंने सोचा कि हसन भाई को बता दूँ कि आई लव हिम.. तो तो किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि मैं ना तो हसन भाई की रही और ना वलीद की।

मुझे पता ही नहीं चला और कराची में मेरे अब्बू ने हमारे एक रिश्तेदार के बेटे हिलाल से मेरा रिश्ता तय कर दिया और मेरी मंगनी हो गई।

वलीद, हसन भाई ओर मैं शॉक में चले गए।

खैर.. मैं तो संभल गई और अपने अब्बू की खुशी में खुश हो गई और वलीद को भी समझा दिया।

लेकिन हसन भाई न संभल सके.. वो मुझसे और प्रेम करने लगे।

मैं उन्हें मना भी करने लगी और मैंने उनसे बात भी करनी छोड़ दी।

वो पागल हो गए.. उन्होंने अपनी अम्मी को बोल दिया तो उनकी अम्मी ने मेरी अम्मी को कहा।

मेरी अम्मी ने कहा- अब तो बहुत देर हो चुकी है.. आप लोग पहले कहाँ थे.. अब कुछ नहीं हो सकता।

हसन भाई तो टूट गए… वो मुझसे मिन्नतें करते.. मैंने मना किया और अब मैं अपने मंगेतर हिलाल से बातें करने लगी और उसको पसंद करने लगी।

मैं अपने अब्बू की खुशी में खुश हो गई और वलीद को भी समझा दिया।

लेकिन हसन भाई न संभल सके.. वो मुझसे और प्रेम करने लगे। मैं उन्हें मना भी करने लगी और मैंने उनसे बात भी करनी छोड़ दी।

वो पागल हो गए.. उन्होंने अपनी अम्मी को बोल दिया तो उनकी अम्मी ने मेरी अम्मी को कहा।

मेरी अम्मी ने कहा- अब तो बहुत देर हो चुकी है.. आप लोग पहले कहाँ थे.. अब कुछ नहीं हो सकता।

हसन भाई तो टूट गए… वो मुझसे मिन्नतें करते..

मैंने मना किया और अब मैं अपने मँगेतर हिलाल से बातें करने लगी और उसको पसंद करने लगी।

हालांकि मैंने हिलाल को नहीं देखा था क्योंकि वो कराची में था और मैं एबटाबाद में थी।

हम मोबाइल पर बातें करते.. अब वलीद और हसन भाई मेरे दिमाग से निकल गए।

हसन भाई फिर भी मुझे ना छोड़ते और मैसेज करते।

आहिस्ता-आहिस्ता हसन भाई पूरी की पूरी फैमिली में मेरी वजह से बदनाम हो गए।

सब उन्हें बुरा कहते।

अब वो पागल हो गए और जब वो समझे कि मैं अब उनकी नहीं हो सकती तो वो मुझे बुरा-भला कहने लगे..

और हिलाल को भी गालियाँ निकालते और उससे काला और बदसूरत कहते।

क्योंकि हिलाल वाकयी में काला है और खूबसूरत नहीं है।

वो मुझे पर ताने मारते..

अब तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने अम्मी को बोल दिया और अम्मी ने मेरे चाचा को बोल दिया।

सब हसन भाई से नफ़रत करने लगे और हिलाल को भी जब पता चला तो वो भी हसन भाई को कॉल या मैसेज करके गालियाँ देने लगा।

हसन की औकात पूरी फैमिली में मेरी वजह से एक कुत्ते के जैसी हो गई।

उनकी पूरी इज्जत खत्म हो गई। अब वो और अनवर भाई अकेले पड़ गए… इतनी जिल्लत के बाद तो इंसान मर जाता है।

हसन भाई भी मरने को तैयार थे लेकिन बस कुछ दिन के बाद वो समझने लगे और होश में आने लगे।

अब उन्हें मुझसे मुहब्बत नहीं बल्कि नफ़रत हो चुकी थी क्योंकि मेरी वजह से वो बदनाम हो कर रह गए थे।

उन्होंने मुझसे बदला लेने की कसम खा ली।

इसी तरह वक़्त गुज़र गया और मैं जवान हो कर मस्त माल बन चुकी थी.. अब मैं स्कूल के अंतिम दिनों में थी। मैं और भी सेक्सी और हॉट हो गई थी।

उधर हसन भाई अब बदले के लिए तैयार थे।

इस बदले के लिए उन्होंने मेरी बेस्ट-फ्रेंड जो कि कराची में रहती थी और जिससे पता था कि हसन मुझसे मुहब्बत करते हैं.. हसन ने उसी का सहारा लिया और उससे कहा- अब मैं हीरा से नहीं.. तुमसे मुहब्बत करता हूँ।

उसने भी मान लिया और वो हसन से फंस गई।

फिर वो एक-दूसरे के बहुत क़रीब हो गए… इतना कि वो एक-दूसरे की हर बात मानने लग गए।

फिर मेरी वो सहेली जून-जुलाई की छुट्टियों में कराची से एबटाबाद आई.. तो मैं उससे मिल कर बहुत खुश हुई।

हम दोनों सहेलियां साथ घूमने लगीं। मेरी इस सहेली का नाम मदीहा है।

मदीहा भी बहुत खुश थी… मेरी वजह से नहीं बल्कि इसलिए कि उसकी मुलाक़ात हसन भाई से हो गई थी।

मुझे जब उसने बताया कि वो और हसन एक-दूसरे से मुहब्बत करते हैं तो मुझे गुस्सा आया और जलन भी महसूस हुई।

मैंने उससे डांटा और उसे हसन से मिलने के लिए मना किया।

हसन ने उस ज़िल्लत के बाद गाँव आना छोड़ दिया था।

अगर कोई शादी या न्योता हो तो 2-3 घंटे के लिए आकर चला जाता था।

हालांकि गाँव में मेरे दादा का घर यानि उसके मामू का घर.. नानी-नाना का घर.. खालाओं का घर और बहनों का घर भी था।

लेकिन उसने मेरे कारण हुई जिल्लत की वजह से आना छोड़ दिया था।

खैर.. मैं और मदीहा रात को भी साथ सोते.. हमारे घर के साथ मदीहा की भी फूफी का घर था।

मदीहा की फूफी अनवर भाई की भाभी लगती थी और जब भी हसन भाई आते, तो वे अनवर भाई के घर ही सोते और वहीं रहते।

मदीहा भी जब आई तो रात को अनवर भाई के ही घर रहती क्योंकि वो उसकी फूफी का घर था।

अनवर भाई का घर बहुत ही बड़ा था। वो एक तीन मंजिला मकान था और हर मंजिल पर 5-5 कमरे थे।

मदीहा वहाँ रहती तो मुझे भी रात को वहाँ सोना पड़ता।

हम दोनों अलग कमरे में सोते थे।

फिर एक दिन हसन भाई गाँव आए तो मदीहा की खुशी की इंतेहा ना रही.. वो एक-दूसरे को मिले तो सलाम किया।

जब मैं सामने आई तो हसन भाई के चेहरे पर गुस्सा आ गया और वो नफ़रत से मुझे देख कर चले गए।

मैंने सलाम भी किया लेकिन उन्होंने सलाम का जवाब तक ना दिया।

फिर रात को छत पर मदीहा और हसन भाई अकले में मिले तो दोनों एक-दूसरे से गप्पें मारने लगे और चुम्मा-चाटी भी की।

दोनों मोहब्बत में पागल थे.. फिर दोनों छत पर बैठ गए।

मदीहा बैठ गई ओर हसन भाई उसकी गोद में सर रख कर लेट गए और मदीहा उन के बालों में हाथ फेरने लगी।

वो दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर हसन भाई ने कहा- मदीहा मैं बहुत उदास हूँ और दिल खफा है.. मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।

मदीहा ने कहा- हाँ जान बोलो… कैसी मदद चाहिए.. तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. समझे कुछ भी…

इस पर हसन भाई ने कहा- मदीहा मुझे तुम्हारी बेस्ट-फ्रेंड साना से बदला लेना है.. उसकी वजह से मैं पूरी फैमिली में बदनाम हो गया हूँ.. मुझ पर लोगों ने लानत भेजी.. क्या होता अगर वो बात अपने दिल में रखती.. आज मैं किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहा.. प्लीज़ मुझे मदद करो।

ये कह कर हसन भाई रोने लगे..

मदीहा ने एकदम उन्हें अपने गले से लगा कर चुप करवाया और कहा- प्लीज़ हसन मत रो.. मुझे भी अंदाज़ा है.. साना ने बहुत बुरा किया.. सच कहूँ तो मुझे भी अब वो अच्छी नहीं लगती। बातों-बातों में मुझ पर टोक मारती है और जो तुम्हारे साथ किया.. वो तो उसने बहुत ही बुरा किया। मैं तुम्हारी मदद करूँगी.. चाहे कैसी ही क्यों ना हो।

हसन ने कहा- ओके.. तो बताओ कि तुम एक-दूसरे से कितनी खुली हो?

मदीहा ने कहा- इतनी कि हमने एक-दूसरे के नंगे जिस्म भी देखते हैं.. हमको मौका मिले तो नंगे नहाते भी हैं और रात को अगर साथ सो जाऊँ तो एक-दूसरे के मम्मों को दबाते हैं.. अन्दर-बाहर से..

हसन ने सुना तो एकदम बोला- ओके.. यही तो मैं चाहता हूँ.. मतलब मैं बदला उसके साथ चुदाई करके लूँगा।

फिर उन दोनों ने योजना बनाई और चले गए।

सुबह मदीहा रोज़ की तरह मुझसे मिली और सारा दिन मेरे साथ रही.. रात को उसने मुझसे कहा- हीरा आओ आज हम लोग रात को फूफी के घर (मतलब अनवर भाई के घर) रहेंगे..
 
मैं मान गई.. हालांकि वहाँ हसन भाई भी थे.. रात को हसन के प्लान के मुताबिक़ जिस कमरे में हम दोनों सोते थे.. वहाँ हमारे आने से 4-5 मिनट पहले हसन भाई उस कमरे में चले गए और जिस बिस्तर पर हम सोते थे.. उसके सामने वाले बिस्तर के नीचे जाकर वो लेट गए।

अनवर भाई को भी ये सब पता था।

खैर.. थोड़ी देर बाद मैं और मदीहा उस कमरे में आए और दरवाज़ा बंद कर के कुण्डी लगा दी और बिस्तर पर चले गए और बातें करने लगे।

रात को हसन के प्लान के मुताबिक़ जिस कमरे में हम दोनों सोते थे.. वहाँ हमारे आने से 4-5 मिनट पहले हसन भाई उस कमरे में चले गए और जिस बिस्तर पर हम सोते थे..

उसके सामने वाले बिस्तर के नीचे जाकर वो लेट गए।

अनवर भाई को भी ये सब पता था।

खैर.. थोड़ी देर बाद मैं और मदीहा उस कमरे में आए और दरवाज़ा बंद कर के कुण्डी लगा दी और बिस्तर पर चले गए और बातें करने लगे।

मुझे नहीं पता था कि हसन भाई कमरे में हैं और बिस्तर के नीचे हैं.. जब कि मदीहा को पता था..

मैंने पीले रंग के फूल वाले प्रिंट के कपड़े पहने हुए थे और मदीहा ने लाल रंग की सलवार कमीज़ पहने हुई थी।

मदीहा ने अपने मोबाइल में हसन भाई से नंगी वीडियो लेकर रखी हुई थीं।

रात को बातों-बातों में हम चुदाई की बातें करने लगे.. तो मदीहा मुझे नंगी वीडियो दिखाने लगी।

हम दोनों उतेजित होने लगे.. थोड़ी देर बाद हम दोनों बहुत गरम हो गईं तो मदीहा ने अपना हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगी।

मुझे मज़ा आने लगा लेकिन मैंने हिम्मत की और मदीहा को पीछे किया लेकिन वो कहाँ मानने वाली थी।

अब हम दोनों मज़े में पागल होने लगे.. मदीहा आहिस्ता-आहिस्ता मेरी कमीज़ ऊपर करने लगी और मेरे नंगे पेट पर चुम्बन करने लगी।

मैं भी मदीहा के जिस्म पर हाथ फेरने लगी।

थोड़ी देर ये करने के बाद मदीहा ने मेरी कमीज़ उतार दी और मेरी काली ब्रेज़ियर के ऊपर से मेरी चूचियाँ मसलने लगी।

फिर उसने मेरी ब्रा भी उतार दी और मेरी कमीज़ और ब्रा उठा कर उस बिस्तर पर फैंक दिया.. जिसके नीचे हसन भाई छुपे थे।

फिर उसने आहिस्ता-आहिस्ता मेरी सलवार भी उतार दी और मेरी चूत में ऊँगली करने लगी।

मैं मज़े में पागल होने लगी।

अब मैं बिल्कुल नंगी पड़ी थी और मेरा गोरा जिस्म चमक रहा था… वो मेरी चूचियों के निपल्स को चूस रही थी और साथ ही मेरी चूत में ऊँगली कर रही थी।

फिर मैंने भी उसकी कमीज़ और ब्रा उतार दी और उसके मम्मों को चूमने लगी।

थोड़ी देर बाद जैसे ही मैं उसकी सलवार उतारने लगी.. तो हसन भाई बिस्तर के नीचे से बाहर आ गए।

उन के एक हाथ में उनका मोबाइल था और दूसरे हाथ में मेरे कपड़े थे.. जो उन्होंने बिस्तर से उठाए थे।

मोबाइल में वो वीडियो बना रहे थे।

मैंने उन्हें निकलते हुए नहीं देखा था।

मैं उस वक्त नीचे थी और मदीहा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी।

मेरी तो जान उस वक़्त निकल गई जब मुझे उनकी आवाज़ आई- वाह.. जी वाह.. साना बीबी.. ये क्या हो रहा है.. हम मर्द मर गए क्या.. जो ये कर रही हो?

ये सुनते ही मेरी तो सांस रुक गई।

मदीहा भी डरने का नाटक करते हुए उठ कर अलग हो गई।

हसन भाई के सामने मैं पूरी नंगी थी और मदीहा आधी नंगी थी।

मैं रोने लगी और मदीहा हसन भाई से मिन्नतें करने लगी।

इसके साथ ही मदीहा ने जल्दी से अपने कपड़े भी पहनना शुरू कर दिए।

मेरे कपड़े तो हसन भाई के हाथ में थे।

हम दोनों हसन भाई के आगे रोने लगे और मिन्नतें करने लगे..

तो हसन भाई ने कहा- ओके.. जाओ लेकिन किसी को मत बताना.. क्योंकि मेरे पास तुम दोनों की फिल्म है जो अभी बनाई है।

हमने कहा- ओके..

मदीहा बाहर जाने लगी और मैं कपड़ों की तरफ बढ़ी जो कि हसन भाई के पास थे..

तो हसन भाई ने अचानक मुझे धक्का दिया..

मैं बिस्तर पर गिर गई।

वो बोले- मैंने मदीहा को बाहर जाने का कहा है.. तुम्हें नहीं.. साली साना कुतिया.. तुमसे तो मुझे बहुत बदला लेना है।

मैं रोने लगी और मदीहा मुझे अकेला कमरे में छोड़ कर चली गई।

हसन भाई ने कमरे को कुण्डी लगाई और मेरी तरफ आने लगे।

मैं डर कर पीछे होने लगी और कहने लगी- प्लीज़ हसन भाई.. ऐसा मत करें.. मैं आप की रिश्तेदार हूँ.. आपने बचपन से मुझे अपनी बेटियों की तरह प्यार किया.. मैं आपके कज़िन की बेटी हूँ.. प्लीज़ हसन भाई..

मैंने अपने जिस्म को कंबल में छुपाने की कोशश की.. तो हसन भाई ने कंबल को उठा कर दूर फैंक दिया और बोले- साली कुतिया.. तुझे उस वक़्त इन बातों का ख्याल नहीं आया कि मैं तेरा क्या हूँ?

मैंने थोड़ी हिम्मत कर के कहा- आगे मत आना.. वरना शोर करूँगी।

उसने कहा- करो ना.. मुझे क्या.. बदनाम तो तुम होगी..

फिर उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे होंठों को चूमने लगा और मेरे पूरे चेहरे पर चुम्मा-चाटी करने लगा। मैं रोने लगी और उससे पीछे धकेलने लगी।

वो मेरी चूचियाँ को दबाने लगा।

उसने कहा- हीरा आज तुझे चोद कर ही रहूँगा… चाहे कुछ भी हो.. इसलिए ज्यादा ज़ोर मत लगाओ… अगर तुमने ज़ोर ना लगाया और आराम से मुझे चुदाई करने दिया.. तो तुम्हें मैं जल्दी छोड़ दूँगा और तुम चुदाई का मजा भी लूटोगी और मैं किसी को नहीं बताऊँगा.. लेकिन अगर तुमने मेरी बात ना मानी तो सुबह तक तुझे नंगा रखूँगा और तेरे कपड़े भी ले जाऊँगा। इसके बाद अभी अनवर को भी बुलाऊँगा और सबको तेरी नंगी वीडियो बताऊँगा।

ये सुन कर मैं डर गई, मैंने उसके सामने खुद को तकरीबन पेश कर दिया।

वो मेरे पूरे नंगे जिस्म पर हाथ फेरने लगा और मेरे मम्मों को अपने मुँह में ले कर उन्हें पीने और चूसने व काटने लगा।

मेरी तो चीख निकल गई… काफ़ी देर तक वो पागलों की तरह मेरी चूचियाँ को चूसता रहा ओर उन्हें दबाता रहा।

वो मेरे बाएं दूध को दबाता और दाएं को मुँह में डाल कर पीता.. फिर कुछ देर बाद दायें को दबाता और बाएं को मुँह में डालता..

काफ़ी देर बाद जब वो हटा तो उसके थूक से, दबाने से और काटने की वजह से मेरे मम्मे लाल हो गए थे मुझे भी मम्मे चुसवाने से मेरे मम्मे नुकीले और सख्त से लगने लगे थे।

मेरे मम्मे थूक से गीले हो कर चमक रहे थे।

अब मुझे भी मज़ा आने लगा… फिर वो नीचे को हुआ और मेरी चूत के ऊपर हाथ फिराने लगा।

फिर उसने मेरी चूत में अपनी एक ऊँगली डाली तो मेरी चीख निकल गई और मैं बोली- अयायाई… हटो हसन भाई.. प्लीज़ दर्द हो रहा.. बहुत आआआ…ऊऊओ…

हसन ने मेरी एक न सुनी और अपनी पूरी ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा।

फिर जब मुझे थोड़ा आराम मिला तो उसने दूसरी ऊँगली अन्दर डाल दी.. अब तो मैं तो मर ही गई।

‘उफ्फ़… इतनाआआ दर्द… प्लज़्ज़्ज़ हसनन् भईईई… बस ना…’

हसन कहाँ सुन रहा था.. वो अपनी ऊँगली आहिस्ता-आहिस्ता अन्दर बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद मुझे उसकी दो ऊँगलियों से भी मज़ा आने लगा और मैं ‘ऊऊऊ…आआआ…अयाया…’ करने लगी।

काफ़ी देर ये करने के बाद मुझे अपने जिस्म में अजीब सा नशा सा महसूस हुआ और मुझे लगा कि मैं छूटने वाली हूँ।

मेरा जिस्म अकड़ने लगा और मैं मजे में पागल होने लगी।

हसन मुसलसल मेरी चूत में ऊँगलियां कर रहे थे।

फिर अचानक मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मैं एकदम से चीख पड़ी ‘आआआ… ऊऊऊऊ… हस्स्सन भाईयीई… मेरा पाअनी ईईईईईई निकल रहाआ आहि यीईईई… हाआ ईयईईईई…आआआ..’

इसके साथ ही मेरी चूत से पानी निकल गया और मैं बिस्तर से 3 फीट तक ऊपर उठी और फिर नीचे गिर गई…

मेरा पानी निकल कर हसन का हाथ और मेरी टाँगों और बिस्तर पर गिर गया।

थोड़ी देर बाद हसन ने अपने कपड़े उतार दिए।

उसका 8 इंच का लण्ड मेरी तरफ मुँह उठाए खड़ा था…

मेरे चाचू हसन मुसलसल मेरी चूत में उंगलियां कर रहे थे।

फिर अचानक मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मैं एकदम से चीख पड़ी- आआआ… ऊऊऊऊ… हस्स्स्सन भाईयीई… मेरा पाअनीईईईई निकल रहाआ आहि यीईईईई… हाआाईयईईईई…आआआ..

इस के साथ ही मेरी चूत से पानी निकल गया और मैं बिस्तर से 3 फीट तक ऊपर उठी और फिर नीचे गिर गई…

मेरा पानी निकल कर हसन का हाथ और मेरी टाँगों और बिस्तर पर गिर गया।

थोड़ी देर बाद हसन ने अपने कपड़े उतार दिए।

उसका 8 इंच का लण्ड मेरी तरफ मुँह उठाए खड़ा था…

हसन फिर मेरी तरफ आया और मेरे मम्मों को चाटने लगा और फिर मुझे उठाया और अपना लण्ड मेरे हाथ में दे दिया।

तो मैंने गुस्से से उसे दूसरी तरफ कर दिया तो हसन ने ज़ोर से मुझे एक चांटा मारा और कहा- साली छिनाल.. इसे पकड़ वरना तेरे मुँह में लण्ड ठूंस दूँगा।

मैं डर गई और उसके लण्ड को पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी।
 
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