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Guest
शादी तो बड़ी धूम धाम से हुई थी। हम तो सारे बरातियों को अच्छी प्रकार से सेवा की थी। कही पर कोई शिकायत का मौका ही नहीं दिया।
एकाएक घर आंगन सूना हो जाने से सभी लोग तो रो से पड़े थे। हमारे आँखों में आंसू छलक सा गया था। हमारी फुआ का हाल तो अभी तब बेचारी अपनी फल सी बेटी लक्ष्मी के लिए बेहाल थी। पर यह तो सभी के यहां एक न एक दिन तो होना ही
था।
कौन अपनी बेटी या बहन को जीवन भर बाप मां अपने घर में रखा है। मैंने फुआ को चुप कराकर सोने के लिये चला गया था।
कारण की रात बारह बजने जा रहा था। और धाार के सभी मेहमान जहां जिसको जगह मिली वही सो गये। गरमी का मौसम था लोग घर ओर खेत खलियान में सो गये। में भी काफी थका सा था। हमारी पलके अब जबाब देने लगा था। जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो हम एक लूंगी लपेट उघारे बदन होकर सोने के लिये जगह तलाश रहे थे।
सभी जगह कोई न कोई मेहमान सोये हुये थे। जब मुझे कहीं जगह नहीं मिलस पाया तो हम छत के सबसे उपरी मंजिल पर चला गया सबसे उपरी मंजिल पर चला गया। । साथ में हम एक चादर ओर एक तकिया ले आया था। आँखों में नींद जोरो से सता रही थी।
रात भी काफी हो रहा था। हमने छत पर जाकर जल्दी से चादर बिछाया ओर तकिया पर सर रख मैं सो गया। मौसम इतना अच्छा था कि देखते ही देखते मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
मुझे कुछ डर सा भी लग रहा था। क्यों कि अनजान जगह और देहाती इलाका होने कारण मैं मन ही मन डर रहा था कि मुझे अब क्या हो रहा था...।
मैं डरते हुये पूरी आँखें नहीं खोल पाया था। मैं आँखों की थोड़ी सी पलके हटाकर देखा कोई साया सा हमारे नजदीक बैठा
अब तो जो होना था सो होकर ही रहेगा। मैंने धयान लगाकर उसकसाया को देखा तो वह साया एक ओरत सा नजर आ रहा था।
जब मुझे महसूस हो रहा था कि मेरे लंड के ऊपर कुछ सिहरन सी हो रही थी तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था।
और मैं सर से पांव तक कुछ अजीब सा होने के कारण मुझे गुदगुदी सी हो रही थी। तब मुझे भी डर सा लग रहा था।
मैं मन ही मन सोच रहा था कि आखिर ये औरत कौन है? और इस समय यह हमारे पास बैठकर मेरे लंड पर अपना हाथ रख क्यों सहला रही है। _मैं जवान होने के कारण उसके हाथ के द्वारा सहलाने से मेरे मन में एकगरमी सा होने लगा था। और देखा की हमारा लंड धीरे धीरे तनने सा लगा था। उस समय हमारी उम्र उन्नीस वर्ष का था।
और कुंवारा था। मुझे जल्दी ही खून का दौड़ान तेजी होने के कारण मेरा लंड तेजी के साथ टाईट होता चला जा रहा था। और मैं चुपचाप अपने बदन को टाईट करता चला जा रहा था।
अब तो हम के मारे आँख मूंद उस ओरत को पहचानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर ये ओरत है कौन? और यह हमारे सारी ऐसा क्यो कर रही है? - - रात के करीब एक बज रहा था। चारों ओर सन्नाटा सा हो गया था। गरमी के मौसम होने के कारण पूर्वा हवा बसंती वह रही गी। आराम से हम सोये सब कुछ देख रहे थे। ,
वैसे तो हम समझ ही चुके थे कि यह औरत हमारे साथ क्या कर रही है। और आगे का क्या इरादा है। मुझे इतना हिम्मत नहीं हो रहा था। कि हम उस और त को कुछ कह सके, कि तुम्हे यह सब करते शर्प नहीं आती है। यह तो हमारे जिन्दगी में पहली बार घटना घट रहा था। आज तक में इस लाईन में नहीं रहा था। ना ही कुछ जानता था।
पर का सहला रही थी, तो मुझे बेहत अच्छा लग रहा था। इतना आनंद आ रहा था कि मुझे दुनिया में सबसे अच्छा चीज लग रहा था। गजब मालुम पड़ रहा था।
चांदनी रात थी प्रकाश की तरह चारों ओर इंजोरा सा फैला था। वह औरत को ध्यान से देखा रहा था और पहचानने की कोशिश कर रहा था।
वह औरत हमारे पास बैठकर हमारे बदन पर झुकती चली जा रही थी.......।
हमने उसे औरत को देखा कि वह अपने बदन पर एक चादर सी ओढ रखी है ताकि कोई पहचाने नहीं।
वह औरत अभी तक हमारे लूंगी के उपर से ही हमारे लण्ड पर अपना हाथ रख बस धीरे धीरे सहला रही थी।
उसके सहलाने से ही हमारा लण्ड लोहे की तरह टाईट होकर धीरे धीरे लूंगी के भीतर खड़ा हो रहा था।मैं सर से पांव तक सिहर रहा था। - मुझे बेहद अच्छा लगने के कारण हम उस देखना चाह रहे थे कि यह औरत हमारे साथ आगे क्या क्या करना चाह रही है।
जिसके कारण हम सोने का बहाना कर सब कुछ समझे कि मैं गहरी नींद में सोया हूँ........।
हमने चांदनी रात के उजाले में पहचानने की कोशिश किया तो यह और एकदम से बूढ़ी लग रही थी। उसकी उम्र कम से कम हमारी मम्मी से कम नहीं लग रही थी। । मुझे शर्म भी आ रहा था, कि बताओं इतनी उम्र की यह औरत अपने बेटे समान लड़के के साथ क्या कर रही है। ___पर उस समय वह जो भी हमारे साथ कर रही थी। मुझे बेहद अच्छा लग रहा था।
मैं अपने बदन को ऐठने सा लगा था। औरत मै सब कुछ औरत को देख रहा था। देखा कि वह औरत हमारे बदन से एकदम सट गई। और वह हमारे बदन के उपर झुकती चली गई।
मेरा लण्ड अब एकदम लूंगी के भीतर ही लोहे सा कड़ा होकर खड़ा हो गया था। मै अपनी सास को रोककर चुपचाप नींद का बहाना कर उसे देख रहा था कि आगे क्या करना चाह रही है। ____ अब तो हमारे खडे लण्ड कोज्यों ही अपने हाथ से पकड़ी तो मुझे इतना अच्छा लगा कि मन करता कि मैं जल्दी से उठकर उसे सुलाकर उसकी बुर में अपना लण्ड डाल चोद डालूँ।
पर मुझे हिम्मत ही नहीं हो रहा था और शर्म भी आ रही थी। तो हमारे मां की वह औरत थी।
इतने में देखा कि वह मस्त हो गई। और वह मेरे लण्ड के अपने नर्म हाथ में पकड़ इस तरह से सहलाने लगी की मै चोदने के लिए छटपटा रहा था। और वह औरत भी काफी मस्त होगई थी।
कभी देखता की वह अपने चुचियों पर ही से पकड़ मसलने लगती तो मै और चोदास होकर मेरा लण्ड बांस की तरह मोटा
और लम्बा होता चला गया। - हम मन ही मन अनुमान लगा रहे थे, कि आज तक मेरा लण्ड - में इतनी ताकत और जोश कभी नहीं आया आज इस औरत के हाथ में जाते ही मेरा लण्ड एकदम से लोहा बनेकर उसके कोमल हाथ में फनफना रहा है। __मैं अब भी उसी अवस्था में कनखियों से सब कुछ देख रहा धा। वह बार बार मेरी आंखो को गौर से देखती तो हम झट से आंखें इस तरह से मुंद लेता की वह और सोचे की हम गहरी नींद में है।
अब तो मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। पर किसकी पाकर अपने आप पर काबू रख उस औरत को पहचानने की कोशिश कर रहा था।
एकाएक घर आंगन सूना हो जाने से सभी लोग तो रो से पड़े थे। हमारे आँखों में आंसू छलक सा गया था। हमारी फुआ का हाल तो अभी तब बेचारी अपनी फल सी बेटी लक्ष्मी के लिए बेहाल थी। पर यह तो सभी के यहां एक न एक दिन तो होना ही
था।
कौन अपनी बेटी या बहन को जीवन भर बाप मां अपने घर में रखा है। मैंने फुआ को चुप कराकर सोने के लिये चला गया था।
कारण की रात बारह बजने जा रहा था। और धाार के सभी मेहमान जहां जिसको जगह मिली वही सो गये। गरमी का मौसम था लोग घर ओर खेत खलियान में सो गये। में भी काफी थका सा था। हमारी पलके अब जबाब देने लगा था। जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो हम एक लूंगी लपेट उघारे बदन होकर सोने के लिये जगह तलाश रहे थे।
सभी जगह कोई न कोई मेहमान सोये हुये थे। जब मुझे कहीं जगह नहीं मिलस पाया तो हम छत के सबसे उपरी मंजिल पर चला गया सबसे उपरी मंजिल पर चला गया। । साथ में हम एक चादर ओर एक तकिया ले आया था। आँखों में नींद जोरो से सता रही थी।
रात भी काफी हो रहा था। हमने छत पर जाकर जल्दी से चादर बिछाया ओर तकिया पर सर रख मैं सो गया। मौसम इतना अच्छा था कि देखते ही देखते मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
मुझे कुछ डर सा भी लग रहा था। क्यों कि अनजान जगह और देहाती इलाका होने कारण मैं मन ही मन डर रहा था कि मुझे अब क्या हो रहा था...।
मैं डरते हुये पूरी आँखें नहीं खोल पाया था। मैं आँखों की थोड़ी सी पलके हटाकर देखा कोई साया सा हमारे नजदीक बैठा
अब तो जो होना था सो होकर ही रहेगा। मैंने धयान लगाकर उसकसाया को देखा तो वह साया एक ओरत सा नजर आ रहा था।
जब मुझे महसूस हो रहा था कि मेरे लंड के ऊपर कुछ सिहरन सी हो रही थी तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था।
और मैं सर से पांव तक कुछ अजीब सा होने के कारण मुझे गुदगुदी सी हो रही थी। तब मुझे भी डर सा लग रहा था।
मैं मन ही मन सोच रहा था कि आखिर ये औरत कौन है? और इस समय यह हमारे पास बैठकर मेरे लंड पर अपना हाथ रख क्यों सहला रही है। _मैं जवान होने के कारण उसके हाथ के द्वारा सहलाने से मेरे मन में एकगरमी सा होने लगा था। और देखा की हमारा लंड धीरे धीरे तनने सा लगा था। उस समय हमारी उम्र उन्नीस वर्ष का था।
और कुंवारा था। मुझे जल्दी ही खून का दौड़ान तेजी होने के कारण मेरा लंड तेजी के साथ टाईट होता चला जा रहा था। और मैं चुपचाप अपने बदन को टाईट करता चला जा रहा था।
अब तो हम के मारे आँख मूंद उस ओरत को पहचानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर ये ओरत है कौन? और यह हमारे सारी ऐसा क्यो कर रही है? - - रात के करीब एक बज रहा था। चारों ओर सन्नाटा सा हो गया था। गरमी के मौसम होने के कारण पूर्वा हवा बसंती वह रही गी। आराम से हम सोये सब कुछ देख रहे थे। ,
वैसे तो हम समझ ही चुके थे कि यह औरत हमारे साथ क्या कर रही है। और आगे का क्या इरादा है। मुझे इतना हिम्मत नहीं हो रहा था। कि हम उस और त को कुछ कह सके, कि तुम्हे यह सब करते शर्प नहीं आती है। यह तो हमारे जिन्दगी में पहली बार घटना घट रहा था। आज तक में इस लाईन में नहीं रहा था। ना ही कुछ जानता था।
पर का सहला रही थी, तो मुझे बेहत अच्छा लग रहा था। इतना आनंद आ रहा था कि मुझे दुनिया में सबसे अच्छा चीज लग रहा था। गजब मालुम पड़ रहा था।
चांदनी रात थी प्रकाश की तरह चारों ओर इंजोरा सा फैला था। वह औरत को ध्यान से देखा रहा था और पहचानने की कोशिश कर रहा था।
वह औरत हमारे पास बैठकर हमारे बदन पर झुकती चली जा रही थी.......।
हमने उसे औरत को देखा कि वह अपने बदन पर एक चादर सी ओढ रखी है ताकि कोई पहचाने नहीं।
वह औरत अभी तक हमारे लूंगी के उपर से ही हमारे लण्ड पर अपना हाथ रख बस धीरे धीरे सहला रही थी।
उसके सहलाने से ही हमारा लण्ड लोहे की तरह टाईट होकर धीरे धीरे लूंगी के भीतर खड़ा हो रहा था।मैं सर से पांव तक सिहर रहा था। - मुझे बेहद अच्छा लगने के कारण हम उस देखना चाह रहे थे कि यह औरत हमारे साथ आगे क्या क्या करना चाह रही है।
जिसके कारण हम सोने का बहाना कर सब कुछ समझे कि मैं गहरी नींद में सोया हूँ........।
हमने चांदनी रात के उजाले में पहचानने की कोशिश किया तो यह और एकदम से बूढ़ी लग रही थी। उसकी उम्र कम से कम हमारी मम्मी से कम नहीं लग रही थी। । मुझे शर्म भी आ रहा था, कि बताओं इतनी उम्र की यह औरत अपने बेटे समान लड़के के साथ क्या कर रही है। ___पर उस समय वह जो भी हमारे साथ कर रही थी। मुझे बेहद अच्छा लग रहा था।
मैं अपने बदन को ऐठने सा लगा था। औरत मै सब कुछ औरत को देख रहा था। देखा कि वह औरत हमारे बदन से एकदम सट गई। और वह हमारे बदन के उपर झुकती चली गई।
मेरा लण्ड अब एकदम लूंगी के भीतर ही लोहे सा कड़ा होकर खड़ा हो गया था। मै अपनी सास को रोककर चुपचाप नींद का बहाना कर उसे देख रहा था कि आगे क्या करना चाह रही है। ____ अब तो हमारे खडे लण्ड कोज्यों ही अपने हाथ से पकड़ी तो मुझे इतना अच्छा लगा कि मन करता कि मैं जल्दी से उठकर उसे सुलाकर उसकी बुर में अपना लण्ड डाल चोद डालूँ।
पर मुझे हिम्मत ही नहीं हो रहा था और शर्म भी आ रही थी। तो हमारे मां की वह औरत थी।
इतने में देखा कि वह मस्त हो गई। और वह मेरे लण्ड के अपने नर्म हाथ में पकड़ इस तरह से सहलाने लगी की मै चोदने के लिए छटपटा रहा था। और वह औरत भी काफी मस्त होगई थी।
कभी देखता की वह अपने चुचियों पर ही से पकड़ मसलने लगती तो मै और चोदास होकर मेरा लण्ड बांस की तरह मोटा
और लम्बा होता चला गया। - हम मन ही मन अनुमान लगा रहे थे, कि आज तक मेरा लण्ड - में इतनी ताकत और जोश कभी नहीं आया आज इस औरत के हाथ में जाते ही मेरा लण्ड एकदम से लोहा बनेकर उसके कोमल हाथ में फनफना रहा है। __मैं अब भी उसी अवस्था में कनखियों से सब कुछ देख रहा धा। वह बार बार मेरी आंखो को गौर से देखती तो हम झट से आंखें इस तरह से मुंद लेता की वह और सोचे की हम गहरी नींद में है।
अब तो मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। पर किसकी पाकर अपने आप पर काबू रख उस औरत को पहचानने की कोशिश कर रहा था।