अचानक सोनल ने एकदम से लिंग को मुट्ठी में भर लिया। कुछ देर वो ऐसे ही पकड़े रही और फिर आहिस्ते आहिस्ते अपने हाथ को हरकत दी और हाथ को आगे पिछे करने लगी।
उसने अपना चेहरा उठाया और उपर करके मेरे होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिये। बस मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने उसकी कमर को पकड़ते हुए उसे उपर की तरफ खींचा और उसकेे सिर के पिछे हाथ लगाते हुए बुरी तरह उसके होंठों को चूसने और काटने लगा। सोनल के हाथ की हरकत मेरे लिंग पर बढ़ गई और वो तेजी से हाथ को चलाने लगी।
अचानक उसने अपना हाथ बाहर निकाला और खड़ी हो गई। खड़ी होते ही उसने अपना टॉप उतार फेंका और फिर अपनी ब्रा को भी खोल कर एक तरफ फेंक दिया और फिर नीचे बैठकर मुझे बैठाया और मेरी टी-शर्ट को भी उतार कर एक तरफ फेंक दिया। वो बस बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उसके हर एक एक्ट में बहुत ही ज्यादा उतावलापन था। उसने मेरी शॉर्ट को भी उतार दिया और फिर एकबार तो वो मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरी जांघों पर बैठने वाली थी परन्तु फिर पता नहीं क्या सोचकर वो मेरे साइड में लेट गई और मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने तपते हुए होंठों से मेरे होंठों को जकड़ लिया। उसकी चुचियां मेरे सीने में दब गई, मेरे शरीर में एक लहर दौड़ गई और मैं अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ने लगा। वो पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसके नितम्बों पर रख दिया और जोर जोर से भींचने लगा। अभी कुछ देर पहले ही बुखार से तप रहा मेरा शरीर ठीक होने के बावजूद फिर से प्यार के बुखार में तपने लगा।
वो खुद को कब तक रोकती, आखिरकार वो मेरे उपर आ ही गई और अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ती हुई मेरे उपर लेट गई और अपने उरोजों को मेरी छाती में रगड़ते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैं भी अब बर्दाश्त की हद को पार कर चुका था, मैंने उसे पकड़कर नीचे करने की कोशिश की तो वो तुरंत उठ कर बैठ गई और आंखों से ना का ईशारा करते हुए वापिस मेरे होठों पर टूट पड़ी। होंठों को चूसते हुए ही अपना एक हाथ पिछे ले जाकर उसने अपनी पेंटी को नीचे सरका दिया और फिर मेरे जॉकी को भी नीचे सरका दिया। उसकी योनि और मेरे लिंग का मिलन आज कई दिनों बाद हुआ था, पर ऐसा लग रहा था जैसे कई वर्षाेर् के बाद हुआ हो। वो मेरे लिंग पर अपनी योनि को जोर जोर रगड़ने लगी। उसकी योनि से निकलता गर्म गर्म रस मेरी जांघों पर से गहता हुआ नीचे जाने लगा।
अचानक जैसे ही वो योनि को रगड़ते हुए उपर हुई तो कुछ ज्यादा ही उपर हो गई और जब वापिस नीचे जाने लगी तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि में समा गया। वो बहुत तेजी से अपनी योनि को रगड रही थी जिस कारण जब तक उसे पता चलता लिंग पूरा अंदर जा चुका था। लिंग अंदर जाते ही वो उपर को उठी और उसके और मेरे मुंह से एक मादक आह निकली।
सोनल बहुत तेजी से मेरे लिंग पर उछलने लगी। कई दिन से रूके हुए थे, इसलिए हम दोनों बहुत ज्यादा उतेजित हो गये थे। मैंने भी उसकी कमर को पकड़कर नीचे से जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। बहुत ज्यादा उतेजित होने के कारण ज्यादा देर ना मैदान में नहीं टिक पाये और मेरे लिंग ने अपना प्रेमरस उसके अंदर अर्जित कर दिया। मेरे लिंग से निकलती पिचकारियों को महसूस करते ही सोनल भी जोर से चिखते हुए अपना प्रेमरस बहाने लगी। हम दोनों ने एक दूसरे को बांहों में इस तरह जकड़ लिया जैसे एक दूसरे को बीच में से तोड़ना चाहते हों। जब प्यार का ये ज्वर थमा तो हमारे दोनों के शरीर ढीले पड़ गये और दोनों ही बुरी तरह से हांफ रहे थे। सोनल निढ़ाल होकर मेरे उपर ही लेट गई और मैंने उसे अपनी बांहों में भरकर आंखें बंद कर ली। मेरा लिंग अभी भी उसकी योनि में हल्के हल्के झटके खा रहा था और उसकी योनि ने अभी भी मेरी लिंग को जकड़ रखा था। उसकी योनि मेरे लिंग को एकबार हल्का सा ढीला छोड़ती, फिर तुरंत ही जकड़ लेती, मानों उसे डर हो कहीं ये भाग ना जाये।
ऐसे ही लेटे हुए हम अपनी सांसे नॉर्मल करने की कोशिश करते रहे। मुझे ज्यादा ही थकावट महसूस हो रही थी, इसलिए मुझे नींद आने लगी और जल्दी ही मैं नींद के आगोश में शमा गया।
जब आंख खुली तो सोनल साइड में मुझसे चिपक कर लेटी हुई थी। उसने हमारे उपर एक चद्दर डाल ली थी। उसका सिर मेरे कंधे पर था। मुझे उसकी गर्म सांसे अपने गालों पर महसूस हो रही थी। उसका हाथ मेरे लिंग को पकड़े हुए था जो कि सोनल के मुलायम हाथ को ही बिस्तर बनाकर आराम से सो रहा था।
मुझे बाथरूम लगा था, परन्तु मैं सोनल को उठाना नहीं चाहता था, इसलिए मैं ऐसे ही लेटा रहा और सोनल के उठने का इंतजार करता रहा।
उसने अपना चेहरा उठाया और उपर करके मेरे होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिये। बस मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने उसकी कमर को पकड़ते हुए उसे उपर की तरफ खींचा और उसकेे सिर के पिछे हाथ लगाते हुए बुरी तरह उसके होंठों को चूसने और काटने लगा। सोनल के हाथ की हरकत मेरे लिंग पर बढ़ गई और वो तेजी से हाथ को चलाने लगी।
अचानक उसने अपना हाथ बाहर निकाला और खड़ी हो गई। खड़ी होते ही उसने अपना टॉप उतार फेंका और फिर अपनी ब्रा को भी खोल कर एक तरफ फेंक दिया और फिर नीचे बैठकर मुझे बैठाया और मेरी टी-शर्ट को भी उतार कर एक तरफ फेंक दिया। वो बस बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, उसके हर एक एक्ट में बहुत ही ज्यादा उतावलापन था। उसने मेरी शॉर्ट को भी उतार दिया और फिर एकबार तो वो मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरी जांघों पर बैठने वाली थी परन्तु फिर पता नहीं क्या सोचकर वो मेरे साइड में लेट गई और मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने तपते हुए होंठों से मेरे होंठों को जकड़ लिया। उसकी चुचियां मेरे सीने में दब गई, मेरे शरीर में एक लहर दौड़ गई और मैं अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ने लगा। वो पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसके नितम्बों पर रख दिया और जोर जोर से भींचने लगा। अभी कुछ देर पहले ही बुखार से तप रहा मेरा शरीर ठीक होने के बावजूद फिर से प्यार के बुखार में तपने लगा।
वो खुद को कब तक रोकती, आखिरकार वो मेरे उपर आ ही गई और अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ती हुई मेरे उपर लेट गई और अपने उरोजों को मेरी छाती में रगड़ते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैं भी अब बर्दाश्त की हद को पार कर चुका था, मैंने उसे पकड़कर नीचे करने की कोशिश की तो वो तुरंत उठ कर बैठ गई और आंखों से ना का ईशारा करते हुए वापिस मेरे होठों पर टूट पड़ी। होंठों को चूसते हुए ही अपना एक हाथ पिछे ले जाकर उसने अपनी पेंटी को नीचे सरका दिया और फिर मेरे जॉकी को भी नीचे सरका दिया। उसकी योनि और मेरे लिंग का मिलन आज कई दिनों बाद हुआ था, पर ऐसा लग रहा था जैसे कई वर्षाेर् के बाद हुआ हो। वो मेरे लिंग पर अपनी योनि को जोर जोर रगड़ने लगी। उसकी योनि से निकलता गर्म गर्म रस मेरी जांघों पर से गहता हुआ नीचे जाने लगा।
अचानक जैसे ही वो योनि को रगड़ते हुए उपर हुई तो कुछ ज्यादा ही उपर हो गई और जब वापिस नीचे जाने लगी तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि में समा गया। वो बहुत तेजी से अपनी योनि को रगड रही थी जिस कारण जब तक उसे पता चलता लिंग पूरा अंदर जा चुका था। लिंग अंदर जाते ही वो उपर को उठी और उसके और मेरे मुंह से एक मादक आह निकली।
सोनल बहुत तेजी से मेरे लिंग पर उछलने लगी। कई दिन से रूके हुए थे, इसलिए हम दोनों बहुत ज्यादा उतेजित हो गये थे। मैंने भी उसकी कमर को पकड़कर नीचे से जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। बहुत ज्यादा उतेजित होने के कारण ज्यादा देर ना मैदान में नहीं टिक पाये और मेरे लिंग ने अपना प्रेमरस उसके अंदर अर्जित कर दिया। मेरे लिंग से निकलती पिचकारियों को महसूस करते ही सोनल भी जोर से चिखते हुए अपना प्रेमरस बहाने लगी। हम दोनों ने एक दूसरे को बांहों में इस तरह जकड़ लिया जैसे एक दूसरे को बीच में से तोड़ना चाहते हों। जब प्यार का ये ज्वर थमा तो हमारे दोनों के शरीर ढीले पड़ गये और दोनों ही बुरी तरह से हांफ रहे थे। सोनल निढ़ाल होकर मेरे उपर ही लेट गई और मैंने उसे अपनी बांहों में भरकर आंखें बंद कर ली। मेरा लिंग अभी भी उसकी योनि में हल्के हल्के झटके खा रहा था और उसकी योनि ने अभी भी मेरी लिंग को जकड़ रखा था। उसकी योनि मेरे लिंग को एकबार हल्का सा ढीला छोड़ती, फिर तुरंत ही जकड़ लेती, मानों उसे डर हो कहीं ये भाग ना जाये।
ऐसे ही लेटे हुए हम अपनी सांसे नॉर्मल करने की कोशिश करते रहे। मुझे ज्यादा ही थकावट महसूस हो रही थी, इसलिए मुझे नींद आने लगी और जल्दी ही मैं नींद के आगोश में शमा गया।
जब आंख खुली तो सोनल साइड में मुझसे चिपक कर लेटी हुई थी। उसने हमारे उपर एक चद्दर डाल ली थी। उसका सिर मेरे कंधे पर था। मुझे उसकी गर्म सांसे अपने गालों पर महसूस हो रही थी। उसका हाथ मेरे लिंग को पकड़े हुए था जो कि सोनल के मुलायम हाथ को ही बिस्तर बनाकर आराम से सो रहा था।
मुझे बाथरूम लगा था, परन्तु मैं सोनल को उठाना नहीं चाहता था, इसलिए मैं ऐसे ही लेटा रहा और सोनल के उठने का इंतजार करता रहा।