अनन्या की आवाज सुनकर मैं अपने आंसु पौंछता हुआ सोनल से अलग हुआ।
हाय,,,, मैंने अनन्या की तरफ देखकर उससे कहा।
वो तो वहीं खड़े हुए आंखें फाड़ें मुझे देखे जा रही थी।
क्या हुआ, तुम,,, तुम,,, रो क्यों रहे हो, अनन्या ने हमारी तरफ आते हुए कहा।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो सोनल की तरफ देखने लगी।
पता नहीं, कुछ बता ही नहीं रहे,,, सोनल ने उसका आशय समझते हुए कहा।
मैं दिन में आई थी तब भी बहुत उदास-उदास लग रहे थे, मुझे कुछ गड़बड़ तो लग रही थी, पर फिर इन्होंने कहा कि देर तक सोता रहा इसलिए है,,, अनन्या ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
12 बजे उठे थे, सुबह,,, वो भी मैं आ गई थी, नहीं तो पता नहीं पूरे दिन कमरे में ही बंद रहते,,, अनन्या ने कहा।
सोनल उसकी तरफ प्रश्न की मुद्रा में देख रही थी।
ओहह,, मैं अनन्या,,, सामने वाले घर में रहती हूं, रेंट पर।
ओहहह,,, मैं सोनल, सोनल ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा।
सोनल का एक हाथ अभी भी मेरी कमर सहला रहा था।
बेबी, बताओ ना क्या हुआ, देखों मैं बहुत परेशान हो गई हूं,,,, सोनल ने मेरे गाल को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए मेरी तरफ देखते हुए कहा।
ओ माई गोड,,,,, आपका टॉप तो पूरा भीग गया है, क्या ये इनके आंसुओं से भीगा है,,,, अनन्या ने सोनल के टॉप की तरफ इशारा करते हुए आश्चर्य से कहा।
सोनल ने अनन्या की तरफ घूर कर देखा, तो अनन्या चुप हो गई। सोनल ने अनन्या को जाने का इशारा किया।
मैं बाद में आती हूं, सुबह,,, बाये समीर,, बाये सोनल,,,, अनन्या ने हमारी तरफ वेव करते हुए कहा।
बाय,,, मैंने भर्राई हुई आवाज में कहा।
अनन्या चली गई। अनन्या के जाते ही सोनल बेड से उठी और मेरे सामने आकर घुटनों के बल नीचे बैठ गई और मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया।
बेबी, मुझे बताओ क्या हुआ था, कुछ बताओगे नहीं तो कैसे हल निकलेगा,,, सोनल ने मेरे बालों को संवारते हुए बहुत ही प्यार से कहा।
शायद मेरे आंसु ही खत्म हो चुके थे, नहीं तो इतने प्यार भरे शब्दों पर तो खुशी में भी आंसु छलक आयें।
मैं आंखों में सुनापन लिए सोनल को देखता रहा और फिर अचानक ही खड़ा हुआ, सोनल भी खड़ी हो गई और मैंने सोनल को कसके बांहों में भर लिया।
सोनल का एक हाथ मेरी कमर में पहुंच गया और एक हाथ कमर से होता हुआ मेरे सिर को सहारा दे रहा था।
कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाए रहे। सोनल का हाथ लगातार मेरे बालों में चल रहा था।
बेबी, कोई बात नहीं, अभी नहीं बताना, कोई बात नहीं, कहते हुए सोनल ने मुझे खुद से अलग किया और बेड पर बैठा दिया। उसने मेरे शूज उतारकर साइड में रख दिये। फिर वो किचन में चली गई।
मैं ऐसे ही बेड पर बैठे हुए उसे देखता रहा। कल से लेकर अब तक जिस दुख को मैंने अपने अंदर दबा रखा था, सोनल के सम्भालने से वो रूक रूक कर पिघल कर बाहर आ रहा था।
लो पानी पीओ, सोनल ने पानी का गिलास मेरे मुंह के सामने करते हुए कहा।
मैंने गिलास को पकड़ा, परन्तु सोनल ने मेरे हाथ पर हल्का सा मारा और मेरा हाथ दूर हटा दिया। उसने गिलास को मेरे होंठों से लगा दिया। मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पानी पीया।
मैं अभी आई, कहकर वो पानी का गिलास रसोई में रखकर बाहर चली गई।
कुछ देर बाद वो आई और मेरे पैर पकडकर उपर बैठ पर कर दिये और फिर खुद बैड पर चढकर दीवार के सहारे कमर लगाकर अपने पैर फैला कर बैठ गई और मुझे अपनी गोद में गिरा लिया। मेरा सिर अपनी गोद में लेकर वो मेरे गालों और बालों को सहलाती रही। मैं आंखें बंद करके सिमट कर उसकी गोद में लेट गया। काफी देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे।
आज अगर सोनल नहीं आई होती तो शायद धीरे धीरे मैं टूट कर बिखर गया होता। सोनल ने मुझे एक बच्चे की तरह संभाल लिया था। मैं सोनल जैसी दोस्त पाकर खुद पर गर्व महसूस कर रहा था।
बेबी, भूख लगी होगी ना,,, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
शायद गम ऐसी ही चीज होती है, जो भूख प्यास सब भूला देती है। मुझे धयान आया कि कल शाम से मैंने कुछ नहीं खाया है, और ये धयान आते ही जोरों की भूख महसूस हुई।
मैंने अपना सिर उठाकर सोनल की तरफ देखा, वो बहुत ही प्यार से मुझे ही देख रही थी। मैंने अपना सिर हां में हिला दिया।
कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझे अपनी गोद में समाये रही।
ओके,,, आज बाहर खाकर आते हैं, सोनल ने कहा।
हम्मम,,, मैंने कहा और उठकर बैठ गया।
क्रमशः....................
हाय,,,, मैंने अनन्या की तरफ देखकर उससे कहा।
वो तो वहीं खड़े हुए आंखें फाड़ें मुझे देखे जा रही थी।
क्या हुआ, तुम,,, तुम,,, रो क्यों रहे हो, अनन्या ने हमारी तरफ आते हुए कहा।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो सोनल की तरफ देखने लगी।
पता नहीं, कुछ बता ही नहीं रहे,,, सोनल ने उसका आशय समझते हुए कहा।
मैं दिन में आई थी तब भी बहुत उदास-उदास लग रहे थे, मुझे कुछ गड़बड़ तो लग रही थी, पर फिर इन्होंने कहा कि देर तक सोता रहा इसलिए है,,, अनन्या ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
12 बजे उठे थे, सुबह,,, वो भी मैं आ गई थी, नहीं तो पता नहीं पूरे दिन कमरे में ही बंद रहते,,, अनन्या ने कहा।
सोनल उसकी तरफ प्रश्न की मुद्रा में देख रही थी।
ओहह,, मैं अनन्या,,, सामने वाले घर में रहती हूं, रेंट पर।
ओहहह,,, मैं सोनल, सोनल ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा।
सोनल का एक हाथ अभी भी मेरी कमर सहला रहा था।
बेबी, बताओ ना क्या हुआ, देखों मैं बहुत परेशान हो गई हूं,,,, सोनल ने मेरे गाल को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए मेरी तरफ देखते हुए कहा।
ओ माई गोड,,,,, आपका टॉप तो पूरा भीग गया है, क्या ये इनके आंसुओं से भीगा है,,,, अनन्या ने सोनल के टॉप की तरफ इशारा करते हुए आश्चर्य से कहा।
सोनल ने अनन्या की तरफ घूर कर देखा, तो अनन्या चुप हो गई। सोनल ने अनन्या को जाने का इशारा किया।
मैं बाद में आती हूं, सुबह,,, बाये समीर,, बाये सोनल,,,, अनन्या ने हमारी तरफ वेव करते हुए कहा।
बाय,,, मैंने भर्राई हुई आवाज में कहा।
अनन्या चली गई। अनन्या के जाते ही सोनल बेड से उठी और मेरे सामने आकर घुटनों के बल नीचे बैठ गई और मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया।
बेबी, मुझे बताओ क्या हुआ था, कुछ बताओगे नहीं तो कैसे हल निकलेगा,,, सोनल ने मेरे बालों को संवारते हुए बहुत ही प्यार से कहा।
शायद मेरे आंसु ही खत्म हो चुके थे, नहीं तो इतने प्यार भरे शब्दों पर तो खुशी में भी आंसु छलक आयें।
मैं आंखों में सुनापन लिए सोनल को देखता रहा और फिर अचानक ही खड़ा हुआ, सोनल भी खड़ी हो गई और मैंने सोनल को कसके बांहों में भर लिया।
सोनल का एक हाथ मेरी कमर में पहुंच गया और एक हाथ कमर से होता हुआ मेरे सिर को सहारा दे रहा था।
कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाए रहे। सोनल का हाथ लगातार मेरे बालों में चल रहा था।
बेबी, कोई बात नहीं, अभी नहीं बताना, कोई बात नहीं, कहते हुए सोनल ने मुझे खुद से अलग किया और बेड पर बैठा दिया। उसने मेरे शूज उतारकर साइड में रख दिये। फिर वो किचन में चली गई।
मैं ऐसे ही बेड पर बैठे हुए उसे देखता रहा। कल से लेकर अब तक जिस दुख को मैंने अपने अंदर दबा रखा था, सोनल के सम्भालने से वो रूक रूक कर पिघल कर बाहर आ रहा था।
लो पानी पीओ, सोनल ने पानी का गिलास मेरे मुंह के सामने करते हुए कहा।
मैंने गिलास को पकड़ा, परन्तु सोनल ने मेरे हाथ पर हल्का सा मारा और मेरा हाथ दूर हटा दिया। उसने गिलास को मेरे होंठों से लगा दिया। मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पानी पीया।
मैं अभी आई, कहकर वो पानी का गिलास रसोई में रखकर बाहर चली गई।
कुछ देर बाद वो आई और मेरे पैर पकडकर उपर बैठ पर कर दिये और फिर खुद बैड पर चढकर दीवार के सहारे कमर लगाकर अपने पैर फैला कर बैठ गई और मुझे अपनी गोद में गिरा लिया। मेरा सिर अपनी गोद में लेकर वो मेरे गालों और बालों को सहलाती रही। मैं आंखें बंद करके सिमट कर उसकी गोद में लेट गया। काफी देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे।
आज अगर सोनल नहीं आई होती तो शायद धीरे धीरे मैं टूट कर बिखर गया होता। सोनल ने मुझे एक बच्चे की तरह संभाल लिया था। मैं सोनल जैसी दोस्त पाकर खुद पर गर्व महसूस कर रहा था।
बेबी, भूख लगी होगी ना,,, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
शायद गम ऐसी ही चीज होती है, जो भूख प्यास सब भूला देती है। मुझे धयान आया कि कल शाम से मैंने कुछ नहीं खाया है, और ये धयान आते ही जोरों की भूख महसूस हुई।
मैंने अपना सिर उठाकर सोनल की तरफ देखा, वो बहुत ही प्यार से मुझे ही देख रही थी। मैंने अपना सिर हां में हिला दिया।
कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझे अपनी गोद में समाये रही।
ओके,,, आज बाहर खाकर आते हैं, सोनल ने कहा।
हम्मम,,, मैंने कहा और उठकर बैठ गया।
क्रमशः....................