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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

अनन्या की आवाज सुनकर मैं अपने आंसु पौंछता हुआ सोनल से अलग हुआ।
हाय,,,, मैंने अनन्या की तरफ देखकर उससे कहा।
वो तो वहीं खड़े हुए आंखें फाड़ें मुझे देखे जा रही थी।
क्या हुआ, तुम,,, तुम,,, रो क्यों रहे हो, अनन्या ने हमारी तरफ आते हुए कहा।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो सोनल की तरफ देखने लगी।
पता नहीं, कुछ बता ही नहीं रहे,,, सोनल ने उसका आशय समझते हुए कहा।
मैं दिन में आई थी तब भी बहुत उदास-उदास लग रहे थे, मुझे कुछ गड़बड़ तो लग रही थी, पर फिर इन्होंने कहा कि देर तक सोता रहा इसलिए है,,, अनन्या ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
12 बजे उठे थे, सुबह,,, वो भी मैं आ गई थी, नहीं तो पता नहीं पूरे दिन कमरे में ही बंद रहते,,, अनन्या ने कहा।
सोनल उसकी तरफ प्रश्न की मुद्रा में देख रही थी।
ओहह,, मैं अनन्या,,, सामने वाले घर में रहती हूं, रेंट पर।
ओहहह,,, मैं सोनल, सोनल ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा।
सोनल का एक हाथ अभी भी मेरी कमर सहला रहा था।
बेबी, बताओ ना क्या हुआ, देखों मैं बहुत परेशान हो गई हूं,,,, सोनल ने मेरे गाल को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए मेरी तरफ देखते हुए कहा।
ओ माई गोड,,,,, आपका टॉप तो पूरा भीग गया है, क्या ये इनके आंसुओं से भीगा है,,,, अनन्या ने सोनल के टॉप की तरफ इशारा करते हुए आश्चर्य से कहा।
सोनल ने अनन्या की तरफ घूर कर देखा, तो अनन्या चुप हो गई। सोनल ने अनन्या को जाने का इशारा किया।
मैं बाद में आती हूं, सुबह,,, बाये समीर,, बाये सोनल,,,, अनन्या ने हमारी तरफ वेव करते हुए कहा।
बाय,,, मैंने भर्राई हुई आवाज में कहा।
अनन्या चली गई। अनन्या के जाते ही सोनल बेड से उठी और मेरे सामने आकर घुटनों के बल नीचे बैठ गई और मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया।
बेबी, मुझे बताओ क्या हुआ था, कुछ बताओगे नहीं तो कैसे हल निकलेगा,,, सोनल ने मेरे बालों को संवारते हुए बहुत ही प्यार से कहा।
शायद मेरे आंसु ही खत्म हो चुके थे, नहीं तो इतने प्यार भरे शब्दों पर तो खुशी में भी आंसु छलक आयें।
मैं आंखों में सुनापन लिए सोनल को देखता रहा और फिर अचानक ही खड़ा हुआ, सोनल भी खड़ी हो गई और मैंने सोनल को कसके बांहों में भर लिया।
सोनल का एक हाथ मेरी कमर में पहुंच गया और एक हाथ कमर से होता हुआ मेरे सिर को सहारा दे रहा था।
कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाए रहे। सोनल का हाथ लगातार मेरे बालों में चल रहा था।
बेबी, कोई बात नहीं, अभी नहीं बताना, कोई बात नहीं, कहते हुए सोनल ने मुझे खुद से अलग किया और बेड पर बैठा दिया। उसने मेरे शूज उतारकर साइड में रख दिये। फिर वो किचन में चली गई।
मैं ऐसे ही बेड पर बैठे हुए उसे देखता रहा। कल से लेकर अब तक जिस दुख को मैंने अपने अंदर दबा रखा था, सोनल के सम्भालने से वो रूक रूक कर पिघल कर बाहर आ रहा था।
लो पानी पीओ, सोनल ने पानी का गिलास मेरे मुंह के सामने करते हुए कहा।
मैंने गिलास को पकड़ा, परन्तु सोनल ने मेरे हाथ पर हल्का सा मारा और मेरा हाथ दूर हटा दिया। उसने गिलास को मेरे होंठों से लगा दिया। मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पानी पीया।
मैं अभी आई, कहकर वो पानी का गिलास रसोई में रखकर बाहर चली गई।
कुछ देर बाद वो आई और मेरे पैर पकडकर उपर बैठ पर कर दिये और फिर खुद बैड पर चढकर दीवार के सहारे कमर लगाकर अपने पैर फैला कर बैठ गई और मुझे अपनी गोद में गिरा लिया। मेरा सिर अपनी गोद में लेकर वो मेरे गालों और बालों को सहलाती रही। मैं आंखें बंद करके सिमट कर उसकी गोद में लेट गया। काफी देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे।
आज अगर सोनल नहीं आई होती तो शायद धीरे धीरे मैं टूट कर बिखर गया होता। सोनल ने मुझे एक बच्चे की तरह संभाल लिया था। मैं सोनल जैसी दोस्त पाकर खुद पर गर्व महसूस कर रहा था।
बेबी, भूख लगी होगी ना,,, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
शायद गम ऐसी ही चीज होती है, जो भूख प्यास सब भूला देती है। मुझे धयान आया कि कल शाम से मैंने कुछ नहीं खाया है, और ये धयान आते ही जोरों की भूख महसूस हुई।
मैंने अपना सिर उठाकर सोनल की तरफ देखा, वो बहुत ही प्यार से मुझे ही देख रही थी। मैंने अपना सिर हां में हिला दिया।
कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझे अपनी गोद में समाये रही।
ओके,,, आज बाहर खाकर आते हैं, सोनल ने कहा।
हम्मम,,, मैंने कहा और उठकर बैठ गया।
क्रमशः....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--60
गतांक से आगे ...........
मैंने टाइम देखा तो 9 बज चुके थे। उठकर मैंने कपड़े चेंज किये और हम लॉक लगाकर नीचे आ गये।
''पर तुम ऐसे अचानक कैसे आ गई, कोई गड़बड़ तो नहीं'' मन काफी हल्का हो गया था, और थोड़ा बहुत फ्रेश महसूस हो रहा था, परन्तु असली दर्द तो अभी अंदर ही दहक रहा था।
दीवाली की छुट्टियां,,, सोनल ने मेरे गाल को भींचते हुए मुस्कराते हुए कहा।
सोनल ने अपनी स्कूटी निकालने लगी।
पैदल ही चलते हैं ना, इधर दाना-पानी पर ही चलते हैं, मैंने कहा।
नहीं, जी-टी- चलेंगे, दाना-पानी पर बढ़िया नहीं मिलता, सोनल ने कहा और स्कूटी बाहर निकाल लाई।
मैं उसके पिछे बैठ गया और हम जी-टी- के निकल पड़े। तभी मुझे धयान आया कि मैं पर्स तो लेकर ही नहीं आया।
रूको,,, मैंने जोर से कहा।
क्या हुआ, सोनल ने एकदम से ब्रेक लगा दिये।
मैं पर्स तो लाना ही भूल गया,,, मैंने कहा।
पर मैं नहीं भूली, मैं ले आई हूं, सोनल ने कहा और स्कूटी फिर से भगा दी।
मैंने उसकी कमर पर चेहरा रख लिया और अपने हाथ उसके पेट पर कस दिए।
आंटी आ गई, मैंने पूछा।
नहीं, वो दो-तीन दिन बाद आयेंगी, सोनल ने कहा।
3 दिन बाद दीदी भी आ रही हैं, सोनल ने फिर कहा।
वॉव, फिर तो दीवाली पर खूब धमाल होगा,,,, मैंने अपना चेहरा उठाते हुए कहा।
हम्ममम,,, दीदी जब भी घर पर होती है तो बहुत मजा आता है,,, सोनल ने कहा।
तुम तो घर नहीं जा रहे ना दीवाली पर,,,, सोनल ने कहा।
देखो, वैसे अभी जाकर आया हूं, तो शायद ना जाउं,,, मैंने कहा।
तुम चले जाओगे तो कुछ मजा ही नहीं आयेगा,,, सोनल ने कहा।
देखता हूं, मैंने कहा।
ऐसे ही बातें करते हुए हम जी-टी- (गौरव टॉवर) पहुंच गये। सोनल मुझे सीधे मोचा (मल्टीक्यूजिन) में ले आईं। अंदर आकर हम बैठ गये।
आज मैं अपनी पसंद का खिलाउंगी, सोनल ने कहा और वेटर को ऑर्डर दे दिया।

सोनल पूरी कोशिश कर रही थी कि मेरे चेहरे से उदासी गायब हो जाये, परन्तु उसे कहां पता था कि मेरे साथ हुआ क्या है।
कुछ देर में वेटर डिनर ले आया। हमने खाना खाया। सोनल बार बार मेरे उदास चेहरे को देख देख कर परेशान हो रही थी। खाना खाने के बाद हम कुछ देर वहीं बैठे रहे। सोनल ने बिल पे किया और हम बाहर आ गये।
चलो आइसकरीम खाते हैं, सोनल कहते हुए मुझे आइसकरीम पार्लर की तरफ ले आई।
सोनल ने आइसकरीम ली और हम स्कूटी पर आकर बैठ गये। मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा था, सोनल मेरा इतना ख्याल रख रही है और मैं ऐसे ही चुपचाप रहकर उसे परेशान कर रहा हूं। परन्तु मैं बोलने की कोशिश करता तो गला साथ नहीं दे रहा था।
हम कुछ देर तक उधर ही बैठे रहे, आइसकरीम खत्म होने पर सोनल हम घर के लिए चल पडे। रस्ते में सोनल ने एक जगह स्कूटी रोकी और सामने की दुकान से कुछ सामान ले आई। मैं इतना खोया हुआ था कि मुझे पता ही नहीं चला कि वो क्या लेकर आई है और कब हम घर पहुंच गये हैं।
घर आकर उसने स्कूटी अंदर खडी की, उसने कब गेट खोला, मुझे कुछ होश नहीं था। जब मुझे धयान आया कि घर पहुंच गये हैं तो देखा कि सोनल मेरे सिर पर हाथ रखकर बालों को सहला रही थी, उसकी छाती मेरे कंधे पर दबी हुई थी। मैंने उसकी तरफ देखा। उसके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी।
चलें, मुझे खुद की तरफ देखता पाकर सोनल ने प्यार से कहा।
हम्मममम,,, कहते हुए मैं स्कूटी से उतरा और हम उपर की तरफ चल दिये। हम सीधे मेरे कमरे में आ गये।
सोनल ने बाहर चेयर लगा दी और हम उधर बैठ गये। बहुत देर तक मैं ऐसे ही खोया खोया बैठा रहा। सोनल मेरे चेहरे को देखती रही।

''बहुत उदास है कोई उसके चले जाने से,
हो सके तो लौटा लाओ उसे किसी बहाने से,
वो लाख खफा सही मगर एक बार तो देखे,
कोई टूट गया है उसके चले जाने से,''

पता नहीं कैसे मेरे गले से बस इतना ही निकल पाया और इतनी देर से सुन्नी आंखों में एकबार फिर आंसुओं की धारा बहने लगी।
ये सुनकर तो सोनल एकदम से हैरान रह गई। वो एकदम से उठकर मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई और मेरे आंसुओं को पौंछने लगी। उसका स्पर्श पाते ही मैं उसकी बाजुओं में टूट गया। सोनल मुझे अंदर ले आई और बेड पर बैठकर मुझे अपनी गोद में लेटा लिया।
क्या हुआ था,,,, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
कुछ देर तक तो मैं ऐसे ही सुन्नी आंखों से छत की तरफ देखता रहा।
पता नहीं क्यों, उसने ऐसा किया मेरे साथ,,,, मैंने कहा और फिर बहते हुए आंसुओं के साथ उसे सारी बात बताई।
सोनल ने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया और मेरे सिर के पिछे हाथ लगाकर कसकर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
अपूर्वा से बात हुई तुम्हारी,,, कुछ देर बाद सोनल ने पूछा।
नहीं-------
सुबह मैं बात करती हूं, उनसे,,, सोनल ने कहा।
काफी देर तक वो मुझे ऐसे ही अपने सीने से चिपकाए बैठी रही। किसी ने सही ही कहा है कि दिल का दर्द अपनों को बताने से दिल हलका हो जाता है। अब आंखें खोलना मेरे लिये मुश्किल हो रहा था और कब मैं नींद के आगोश में समा गया मुझे पता ही नहीं चला।
सुबह जब मेरी नींद खुली तो काफी हल्का सा महसूस हो रहा था। मैंने आंखें खोली। सोनल वैसे ही दीवार के साथ कमर लगा कर सो रही थी। मैं वैसे ही उसकी गोद में सिर रखे सो गया था। मैं उठा और सोनल को अपनी बाहों में उठाकर सही तरह से बेड पर लेटा कर उसका सिर अपनी गोद में रख लिया। पता नहीं रात को कब सोई होगी, तभी तो इतना हिलने पर भी नींद नहीं खुली। मैं उसके सिरहाने बैड से कमर लगाकर बैठ गया और उसका सिर अपनी गोद में रखकर उसके माथे और बालों में हाथ फेरने लगा।
अगर तुम ना आई होती तो पता नहीं मेरा क्या होता सोनल,,, मैं टूट गया था, किसी के सहारे के लिये तड़प रहा था, और देखो तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो, तुम तुरंत आ गई, मैंने धीरे से कहा, जैसे उसको सुना रहा हों, परन्तु वो तो नींद के आगोश में थी। उसके मासूम चेहरे को सोते हुए देखना एक अलग ही अहसास दे रहा था।

''काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूं हमें रूसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरूखी जुल्म भी मंजूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझा तो दिया होता।

मैं ख्यालों में इतना खो गया था कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब सोनल मेरी गोद में करवट लेकर लेट गई थी और मेरे हाथ से खेलने लग गई थी।

एक तुम ही तो मेरे इतने अजीज हो, तुमको मैं कैसे अकेले तड़पते हुए छोड़ सकती हूं,,, सोनल की ये बात सुनकर मेरे ख्यालों का सिलसिला टूटा।
उठ गई तुम,,,
हम्ममम,,, सोनल ने उठते हुए कहा।
उठ कर सोनल मेरे सामने बैठ गई और मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़ लिया। मैं उसकी आंखों में देखे जा रहा था।
गुड मॉर्निंग, उसने मेरे लबों को थोड़ा सा चूमकर अलग होते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग,, कहते हुए मैंने उसके माथे को चुम लिया।
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा है, उस बूढउ पर, पर पहले मिलकर बात करती हूं, ऐसा क्यों किया उसने,,,, सोनल ने उठते हुए कहा।
मैंने उसका हाथ पकड़कर उसको वापिस खींच लिया और वो मेरे उपर आ गिरी।
उंहहह क्या है बाबा, टॉयलेट जाकर आ रही हूं,,,, सोनल ने कहते हुए मेरी तरफ देखा।
कुछ देर तक तो वो असमंझस के साथ मेरी तरफ देखती रही और मैं उसे देखता रहा और फिर अचानक उसने मेरे चेहरे को पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये। उसका हाथ मेरे सिर के पिछे पहुंच गया और वो बुरी तरह से मेरे होंठों को चुमने लगी। उसके चुम्बन में इतना प्यार, इतना अपनापन था कि मैं पिघल कर उसमें गुम हो गया।
जब वो मुझसे दूर हुई तो दोनों की सांसे बहुत ही तेज चल रही थी। उसका इतना प्यार देखकर मेरी आंखें नम हो गई।
मुझसे तुम्हें इस तरह नहीं देखा जा रहा है, प्लीज,,,, कहते हुए सोनल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया।
हम्मममम,,, कहते हुए मैंने अपने आंसु पौंछू।
तुम्हे टॉयलेट नहीं जाना, मैंने हंसते हुए कहा।
जा रही हूं,, सोनल ने हंसते हुए मेरे गालों पर चिकोटी काट ली और बाथरूम में घुस गई।
उसके जाते ही मेरे चेहरे पर फिर से उदासी छा गई।
2 मिनट बाद वो वापिस आई।
चलो पहले अपूर्वा के घर पर चलते हैं, सोनल ने कहा और मेरा हाथ पकड़कर उठाने लगी।
हम्ममम, कहते हुए मैं खड़ा हो गया।
हम रूम की कुंडी लगाकर नीचे आ गये। सुबह टरेफिक बहुत ही कम थी, इसलिए हमें अपूर्वा के घर पहूंचने में ज्यादा टाइम नहीं लगा।
परन्तु वहां पहुंचकर हमारे चेहरे उदास हो गई। गेट पर ताला लगा हुआ था।
इस बुढ़उ की तो मां की आंख,,,, कहां मर गया अब ये,,, सोनल ने गुस्से में कहा।
तुम्हारे पास अपूर्वा का नम्बर तो हैं ना,,,, सोनल ने कहा।
हां,,,,
मुझे दो,,,,
 
मैंने अपूर्वा का नम्बर डायल किया। परन्तु स्विच ऑफ था।
मैं नवरीत से बात करती हूं,,, कहते हुए सोनल ने अपना मोबाइल निकाला और नवरीत को फोन लगाया।
पूरी घंटी चली गई पर किसी ने फोन नहीं उठाया। सोनल ने एक बार फिर टराई किया परन्तु किसी ने नहीं उठाया।
नवरीत के घर चलते हैं,,, सोनल ने कहा।
हम वापिस नवरीत के घर के लिए चल पड़े। आते वक्त थोड़ा टाइम लगा। नवरीत के घर पर पहुंचकर सोनल ने बैल बजाई। मैं स्कूटी पर ही बैठा रहा। नवरीत के पापा ने गेट खोला।
जी बोलिये, अंकल ने कहा, परन्तु अगले ही पल उनकी नजर मुझपर पड़ी और उनके चेहरे पर कुछ शिकन आ गईं
आओ बेटा, अंदर आओ, अंकल ने हमसे कहा।
हम अंदर आ गये। अंदर आकर अंकल ने हमें डराइंग रूम में बैठा दिया।
मैं अभी आया बेटा, कहते हुए अंकल रूम से बाहर चले गए।
मैंने सोनल की तरफ देखा। सोनल ने मुझे सांत्वना दी। लगभग 15-20 मिनट बाद अंकल वापिस आये, साथ में आंटी भी थी।
सोनल खड़ी हो गई। मुझे तो कोई होश ही नहीं था, अगर सोनल मेरा हाथ पकड़कर नहीं उठाती तो।
बैठो, बैठो, बेटा, कहते हुए आंटी और अंकल हमारे सामने वाले सोफे पर बैठ गये।
अंकल आपको शायद पता ही होगा कि अपूर्वा की शादी की बात समीर से हुई थी, नवरीत ने शायद आपको बताया होगा, सोनल ने कहा।
हां बेटा, खुद भाईसाहब ने ही बताया था हमें,,, आंटी ने कहा।
तो फिर शायद बाद में क्या हुआ, वो भी बताया होगा, हम अभी उनके घर पर ही गये थे, पर वहां पर लॉक था, सोनल ने कहा।
बेटा, हमारी भी समझ में नहीं आ रहा उन्होंने ऐसा क्यों किया, मैंने उन्हें समझाने की कोशिश भी की थी, परन्तु वो मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे, अंकल ने कहा।
उन्होंने कुछ तो बताया होगा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, सोनल ने कहा।
बेटा, मैंने बहुत पूछा था उनसे, पर उन्होंने कुछ बताया नहीं, अंकल ने कहा।
अब वो कहां पर हैं, आपको तो पता होगा, सोनल ने पूछा।
वो सभी इंडिया से बाहर गये हुए हैं, अभी भाईसाहब एक दिन के लिए आये थे, कुछ जरूरी काम था, इधर, फिर वापिस चले गए हैं, आंटी ने कहा।
उनका वहां का कॉन्टैक्ट नम्बर तो होगा ही आपके पास, सोनल ने कहा।
बेटा, मेरी उनके साथ थोड़ी कहासुनी हो गई थी इस बारे में, तो अभी तो उनका कोई कॉन्टैक्ट मेरे पास नहीं है, अंकल ने कहा।
अंकल आपके चेहरे के हाव-भाव से मुझे ऐसा लग रहा है कि आप कुछ छुपा रहे हैं, सोनल ने खड़े होते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं है बेटा,,, अंकल और आंटी भी खड़े हो गए।
तभी नवरीत चाय लेकर आ गई। नवरीत ने मेरी तरफ देखा। मेरी तरफ देखते ही वो कुछ विचलित सी हो गई।
बेटा चाय पीकर जाना आराम से,,, कहते हुए अंकल बाहर चले गए।
क्रमशः....................
 
मैंने सोनल की तरफ देखा। सोनल ने मुझे सांत्वना दी। लगभग 15-20 मिनट बाद अंकल वापिस आये, साथ में आंटी भी थी।
सोनल खड़ी हो गई। मुझे तो कोई होश ही नहीं था, अगर सोनल मेरा हाथ पकड़कर नहीं उठाती तो।
बैठो, बैठो, बेटा, कहते हुए आंटी और अंकल हमारे सामने वाले सोफे पर बैठ गये।
अंकल आपको शायद पता ही होगा कि अपूर्वा की शादी की बात समीर से हुई थी, नवरीत ने शायद आपको बताया होगा, सोनल ने कहा।
हां बेटा, खुद भाईसाहब ने ही बताया था हमें,,, आंटी ने कहा।
तो फिर शायद बाद में क्या हुआ, वो भी बताया होगा, हम अभी उनके घर पर ही गये थे, पर वहां पर लॉक था, सोनल ने कहा।
बेटा, हमारी भी समझ में नहीं आ रहा उन्होंने ऐसा क्यों किया, मैंने उन्हें समझाने की कोशिश भी की थी, परन्तु वो मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे, अंकल ने कहा।
उन्होंने कुछ तो बताया होगा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, सोनल ने कहा।
बेटा, मैंने बहुत पूछा था उनसे, पर उन्होंने कुछ बताया नहीं, अंकल ने कहा।

अब वो कहां पर हैं, आपको तो पता होगा, सोनल ने पूछा।
वो सभी इंडिया से बाहर गये हुए हैं, अभी भाईसाहब एक दिन के लिए आये थे, कुछ जरूरी काम था, इधर, फिर वापिस चले गए हैं, आंटी ने कहा।
उनका वहां का कॉन्टैक्ट नम्बर तो होगा ही आपके पास, सोनल ने कहा।
बेटा, मेरी उनके साथ थोड़ी कहासुनी हो गई थी इस बारे में, तो अभी तो उनका कोई कॉन्टैक्ट मेरे पास नहीं है, अंकल ने कहा।
अंकल आपके चेहरे के हाव-भाव से मुझे ऐसा लग रहा है कि आप कुछ छुपा रहे हैं, सोनल ने खड़े होते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं है बेटा,,, अंकल और आंटी भी खड़े हो गए।
तभी नवरीत चाय लेकर आ गई। नवरीत ने मेरी तरफ देखा। मेरी तरफ देखते ही वो कुछ विचलित सी हो गई।
बेटा चाय पीकर जाना आराम से,,, कहते हुए अंकल बाहर चले गए।
नवरीत ने हमें चाय दी, वो हमारे दोनों के लिए ही चाय बनाकर लाई थी।
मेरी नजरें उस पर ही टिकी थी, इस आस में कि क्या पता यहीं से कुछ पता चल जाए।
ओके बेटा मैं नाश्ते की तैयारी कर लेती हूं, तेरे अंकल को जाना है, आप चाय पीओ,, कहते हुए आंटी बाहर चली गई।
आंटी के जाते ही नवरीत मेरे पास आई और घुटनों के बल नीचे बैठ कर मेरे चेहरे को हाथों में समेट कर मेरे चेहरे को देखने लगी।
क्या तुम मुझे कुछ बता सकती हो अपूर्वा के बारे में, वो कहां पर है, और मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही है,,, कहते हुए मेरी आंखों में आंसु आ गए।
आई एम सॉरी, पर मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया ये सब क्यों हो रहा है, नवरीत ने मेरे आंसु पौंछते हुए कहा।
तुम तो उनके साथ गई हुई थी ना विदेश में, मैंने कहा।
हां, मैं उनके साथ ही गई हुई थी, अभी अंकल आए तब उनके साथ आ गई थी,, नवरीत के चेहरे पर मायूस साफ दिख रही थी।
वो कहां गये हुए हैं, मैं वहीं जाकर अपूर्वा से मिल लूंगा, मैंने नवरीत से विनती करते हुए कहा।
मैं नहंी बता सकती,,, कहते हुए नवरीत की आंखें नम हो गई।

नवरीत बेटा,, बाहर से अंकल की आवाज आई।
नवरीत मायूस नजरों से मेरी तरफ देखते हुए बाहर चली गई। उसकी आंखे नम थी। नवरीत के चेहरे के भावों से मेरा दिल बैठा जा रहा था। जो कुछ भी सोनल के आने से थोड़ा बहुत सुकून मिला था वो एक पल में ही गायब हो चुका था। मुझे किसी अनहोनी की आंशका ने घेर लिया था। अब तो मैं अपूर्वा से मिलने के लिए पहले से भी ज्यादा व्याकुल हो उठा था। परन्तु कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। मेरी आंखों से झर झर आंसु बह रहे थे।
मुझे लग रहा है कि ये कुछ छुपा रहे हैं, सोनल ने खड़े होते हुए कहा।
मैं भी खड़ा होकर बाहर की तरफ चल दिया। हम बाहर आये तो सामने से आंटी हमारी तरफ ही आ रही थी। मेरी आंखों से बहते आंसुओं को देखकर वो मेरे पास आई और मुझे अपने सीने से लगा लिया।
सब कुछ ठीक हो जायेगा बेटा, आंटी के मुंह से इतना ही निकला।
आंटी आप बता दीजिए ना, वो कहां पर गये हैं, मैं वहीं पर चला जाउंगा,,, मेरी आवाज दब रही थी, ऐसा लग रहा था कि कुछ आवाज को बाहर निकलने से रोक रहा है।
आंटी ने मुझे अपने से अलग किया और मेरे सिर में हाथ फेरते हुए कहा, 'बेटा अब मैं क्या बताउं, तुम्हारे अंकल को ही नहीं पता'।
ऐसा कैसे हो सकता है आंटी, वो आपको कुछ भी बताये बिना कैसे जा सकते हैं, और फिर नवरीत तो उनके साथ भी गई थी, तो कैसे आपको नहीं पता,, मैंने कहा।
अब कुछ भी समझ लो बेटा, कहकर आंटी अंदर चली गई। उनकी आंखों में आंसु थे।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्यों रो रहे हैं, ये क्यों इतने दुखी हैं, जबकि ये सब कुछ जानते हैं।
मैं वहीं पर खड़ा हुआ अंदर की तरफ देखता रहा।
चलो, मुझे कहीं और से कुछ पता करना पड़ेगा,,, सोनल ने मुझे बाहर लाते हुए कहा।
मैं अभी भी अंदर ही देखे जा रहा था, इस उम्मीद में कि शायद कोई कुछ बता ही दे।
घर आकर हम उपर आ गये।उपर आते ही सोनल ने मुझे अपने गले लगा लिया।
सब कुछ ठीक हो जायेगा बेबी,,, मैं आ गई हूं ना अब,,, कहते हुए सोनल मुझे बाहों में भरे हुए अंदर आ गई।
 
अंदर आकर हम बेड पर बैठ गये। मैं बस अपूर्वा से बात करने के लिए तड़प रहा था। सुबह से मेरे दिमाग में बस अपूर्वा का पक्ष जानने की बात घूम रही थी। अंकल की कही गई बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ना था, अगर अपूर्वा हां कर दे तो। परन्तु उससे बात कैसे हो समझ नहीं आ रहा था। मुझे पूरा विश्वास था कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं दे सकती, इसलिए अब मेरी उदासी गायब हो रही थी, क्योंकि अंकल की बातों का अब कोई मायने नहीं रहे थे, मुझे बस अपूर्वा का पक्ष जानना था। बस रह गई थी तो बैचेनी अपूर्वा से बात करने की।
मन से अंकल की बात का असर खत्म होते ही मैं उदासी को छोड़कर बस इसी उधेड़ बुन में लग गया था कि किस तरह से अपूर्वा से बात हो। उदासी खत्म होते ही मुझे अपनी मूर्खता पर हंसी आने लगी। कैसे मैं अंकल की बातों से ही दो दिनों तक इस तरह गुम गया था, कि जैसे मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई हो, जबकि अपूर्वा ने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था। मुझे गुस्सा भी आ रहा था खुद पर, यदि उदास होने की बजाय मैं अपूर्वा से मिलने की, उससे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश करता तो अब तक शायद कुछ तो सफलता हाथ लगती।
मैंने अपूर्वा का नम्बर डायल किया परन्तु पूरी रिंग जाने के बाद भी किसी ने नहीं उठाया, मैंने दो-तीन बार टराई किया, परन्तु सिी ने नहीं उठाया। मैंने टाइम देखा तो साढ़े नौ बज चुके थे।
श्श्शि्शट् यार, ऑफिस के लिए लेट हो गया। उदासी के बादल छंटते ही दिमाग ने फिर से काम करना शुरू कर दिया था। अब पहले से काफी अच्छा लग रहा था, दिल थोड़ा सा हल्का हो गया था, क्योंकि मैं जानता था कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं देगी, वो मुझे दिलोजान से चाहती है।
उसकी इसी चाहत ने तो मुझे उसका दिवाना बनाया था, नहीं तो मैं तो जानता भी नहीं था कि मैं उसे प्यार करता हूं, मैं तो इस प्यार को दोस्ती माने बैठा था।
मैं ऑफिस के लिए तैयार होता हूं, कहकर मैं उठा और बाथरूम में घुस गया। जब मैं नहा-धोकर बाहर निकला तो सोनल ने नाश्ता तैयार कर लिया था।
थैंक्स यार, नहीं तो आज भूखा ही रहना पड़ता, कहते हुए मैंने सोनल को बाहों में भरकर उसके होंठों को चूम लिया।
सोनल आश्चर्य से मेरे चेहरे को देखे जा रही थी।
जल्दी से नाश्ता करता हूं, कहते हुए मैं रसोई में गया और एक थाली में परोंठे और अचार ले आया।
मुझमें अचानक आये परिवर्तन से सोनल असमंझस में थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अचानक मुझे क्या हुआ। वो बेड के पास खड़ी हुई बस मुझे घूरे जा रही थी।
क्या हुआ, चलो बैठो, नाश्ता करो, फिर मुझे ऑफिस के लिए भी निकलना है, मैंने बेड पर बैठते हुए कहा।
ऑफिस जाना जरूरी है क्या, सोनल ने बैठते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी थी।
क्या हुआ, मैंने परोंठे का कौर उसके मुंह के आगे करते हुए कहा।
मैंने अभी ब्रुश-----उउउउउउउउ, अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी, मैंने उसके मुंह खोलते ही परांठा उसके मुंह में घुसा दिया।
मैं आज पूरा दिन तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, फिर मम्मी और दीदी आ जायेंगी तो इतना मौका नहीं मिलेगा, उसने मुंह का कौर खत्म करते हुए कहा।
मैंने अपना मोबाइल उठाया और बॉस को फोन करके तबीयत खराब होने की कह दी। बॉस ने डॉक्टर से दिखाने के कहकर आराम करने को कहा।
थैंक्स, सोनल ने मुझे अपने हाथ से परांठा खिलाते हुए कहा।
थैंक्स तो मुझे तुम्हारा कहना चाहिए यारा, अगर तुम नहीं होती तो पता नहीं मैं कब तक ऐसे ही बेवकूफों की तरह आंसु बहाता रहता।
मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि अचानक तुम्हारी उदासी कैसे दूर हो गई, मेरा मतलब मैं बहुत खुश हूं तुम्हें इस तरह उदासी रहित देखकर, परन्तु मेरी समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा क्या हुआ जो तुम-------।
हम्ममम, अंकल की बात सुनकर मेरा दिमाग काम करना बंद कर गया था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था ऐसा कैसे हो सकता है, वो मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं, गम मुझे इस बात से आगे कुछ सोचने ही नहीं दे रहा था, जबकि एक्चुअली ये गम होना ही नहीं चाहिए था, थोड़ा बहुत हो सकता था, परन्तु इतना नहीं होना चाहिए था। अपूर्वा ने थोड़े ही मना किया है, वो तो अंकल ने ही मना किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि अपूर्वा कभी भी मुझे धोखा नहीं दे सकती, वो मुझे बहुत प्यार करती है। और ये बात मेरी समझ में अभी अभी आई है, थैंक्स सोनल, अगर तुम नहीं होती तो शायद ये बात मेरी समझ में नहीं आती, कहकर मैं मुस्करा दिया।
थैंक्स गोड, तुम खुश तो हुए, मेरी तो कल से जान निकली जा रही थी, मैं तुम्हें सहारा तो दे रही थी, परन्तु तुम्हें दुखी देखकर मैं तुमसे ज्यादा दुखी हो गई थी। मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकती, कहते हुए सोनल की आंखों में आंसु आ गये और वो मेरे गले लग गई।
मेरा प्यारा बेबी, जब मेरा सोहना बाबु मेरे पास है तो मैं ज्यादा देर दुखी कैसे रह सकता हूं, मैंने उसके गालों की पप्पी लेते हुए कहा।
मैं दही लेकर आता हूं, ऐसे खाने में मजा नहीं आ रहा, कहते हुए मैं उठने लगा।
हम्मम, तब तक मैं भी फ्रेश हो जाती हूं, फिर आराम से खायेंगे, कहते हुए सोनल भी उठ गई।
मैं पैसे लेकर दही लेने चल दिया और सोनल बाथरूम में घुस गई। वापिस आया तो सोनल अभी बाथरूम में ही थी, शॉवर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी।
मैं उसका इंतजार करने लगा और बार-बार अपूर्वा को फोन टराई करता रहा। परन्तु रिंग तो जा रही थी, कोई उठा नहीं रहा था।
थोड़ी देर बाद सोनल अपने बाल सुखाते हुए बाहर आई। उसे देखते ही मेरी आंखें खुली की खुली रह गई। आज कई दिनों बाद मैं सोनल को नग्न देख रहा था। मेरे लिंग ने तुरंत हरकत की और अपना दरवाजा खटखटाया।

कपड़ो को क्या हुआ, मैंने सोनल से पूछा।
वो नीचे गिर गये नहाते समय हाथ लगकर, गीले हो गये हैं, सोनल ने ऐसे ही तौलिये से बाल सुखाते हुए कहा।
मैं उठा और अपनी शॉर्ट और शर्ट उसे पहनने के लिए दी। सोनल कुछ देर तक तो मेरे सामने खड़ी मेरे चेहरे की तरफ देखती रही, फिर उसने मुस्कराते हुए मेरे हाथ से कपड़े लेकर पहन लिए।
 
वैसे तो उसकी उसकी और मेरी फिटिंग एक जैसी ही थी, परन्तु शर्ट उसे बहुत ही टाइट आई और, आगे से उसकी नाभि तक उठ गई। उसके उभार शर्ट के बटन तोड़ने को उतारू लग रहे थे।
उसने अपने सिर पर तौलिया लपेटा और हम नाश्ता करने लगे।
सॉरी यार, कल से खामखां खुद भी परेशान हो रहा था और तुम्हें भी इतना परेशान कर रखा था।
हम्मम, वो तो है, पर अब सारा बदला लूंगी, सोनल ने मुझे परांठा खिलाते हुए कहा।
स्योर, जैसे चाहो, तुम्हारा तो पूरा का पूरा हक है मुझपर, तुम्हारे जैसी दोस्त पाकर तो मैं खुद को बहुत ही भाग्यशाली समझ बैठा हूं, मैंने उसे परांठा खिलाते हुए कहा।
नाश्ता खत्म करके सोनल ने बर्तन रसोई में रखे और फिर हम बेड पर दीवार से कमर लगाकर एक-दूसरे से सटकर बैठ गये।
सोनल ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। ऐसे ही बैठे हुए मैं सोनल के चेहरे को देखता रहा और सोनल मेरे। दोनों मौन थे, बस एक दूसरे को महसूस कर रहे थे।

तभी नीचे की बैल बजी। अब कौन आ सकता है कहते हुए सोनल उठी और बाहर चली गई।
मैं भी उठकर बाहर आ गया और मुंडेर पर से नीचे देखने लगा। मेरे आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, नीचे नवरीत खड़ी थी। तब तक सोनल नीचे पहुंच चुकी थी।
सोनल ने दरवाजा खोला और वो दोनों गले लगी। सोनल नवरीत को लेकर उपर आ गई।
वाट ए प्लीजेंस सरप्राइज, मैंने नवरीत के गले मिलते हुए कहा।
नवरीत पागलों की तरह मुझे देखने लगी।
ऐसे क्या देख रही हो, मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा।
आइइइइइई, दर्द होता है, कहते हुए नवरीत अपने गाल को सहलाने लगी।
क्या कोई स्पेशल बात हुई है, जिसका मुझे नहीं पता हो, क्योंकि सुबह तो तुम बहुत उदास थे, नवरीत ने मेरे गालों को दोनों हाथों में भरते हुए कहा।
हम्मममम, मैंने कहा। अंकल के मना करने के बाद मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे मैं कुछ सोच नहीं पाया। तुम्हारे घर से आने के बाद मुझे इस बात का ख्याल आया कि अपूर्वा ने तो मना नहीं किया है, और वो मुझसे बहुत प्यार करती है वो मुझे धोखा नहीं दे सकती, बस फिर क्या था, उदासी अपने आप रफूचक्कर हो गई।
मैं दीदी से बात करवाने के लिए ही आई हूं, नवरीत ने कहा।
सच में, मेरे आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, कहां तो मैं दो दिन से कुछ सोच समझ नहीं पा रहा था और कहां अब एक साथ सारी प्रॉब्लम अपने आप सॉल्व होती जा रही थी।
हम अंदर आ गये। मैं इतना खुश हुआ था कि मैंने नवरीत को अपनी बाहों में भर लिया और बेतहाशा उसके माथे को चूमने लगा। नवरीत भी मेरी बाहों में सिमटी रही।
अब जल्दी से फोन मिलाओ, मैंने उसे अपनी बाहों की जकड़ने से आजाद करते हुए कहा।
उसके चेहरे के भावों से मुझे ठीक महसूस नहीं हो रहा था। उसने नम्बर डायल किया।
हैल्लो दीदी, लीजिए आप बात कीजिए----- हां मैं उनके रूम पर ही हूं------ कहते हुए नवरीत ने फोन मुझे दे दिया।
हैल्लो अपूर्वा, कैसी हो तुम, मेरी खुशी का ठीकाना नहीं था। मैं बाकी सब कुछ भूल चुका था।
हाय समीर, मुझे माफ कर देना, कहते हुए अपूर्वा की आवाज बीच में ही रूक गई।
क्या बात है अपूर्वा, ऐसा क्यों कह रही हो तुम, उसकी बात और आवाज में रूआंसापन सुनकर मेरा दिल बैठने लगा था।
मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती, प्लीज हो सके तो मुझे माफ कर देना, अपूर्वा की बहुत ही धीमी आवाज आई, जैसे उसके होंठों ने शब्दों को बीच में ही पकड़ लिया हो।
ये तुम क्या कह रही हो अपूर्वा, ऐसा कैसे हो सकता है, मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं, और,,, और,,, तुम तो मुझसे भी ज्यादा प्यार करती हो मुझसे।
मुझे पता है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो, परन्तु सच्चाई तो ये है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती, अपूर्वा की आवाज अबकी बार एकदम स्पष्ट थी।
पर तुमने खुद ही अपने प्यार का इजहार किया था अपूर्वा, तुम--- तुम---- कहते हुए शब्द गले में ही अटक गए।

वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था।
मैं इतना ही सुन पाया, मोबाइल मेरे हाथों से छूट गया और मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। मैंने खुद को बहुत ही गहरी खाई में गिरते हुए महसूस किया। उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ मालूम नहीं चला।
जब मुझे होश आया तो मैं मेरे बालाें में किसी का हाथ रखा हुआ महसूस हुआ, थोड़ा थोड़ा होश आने पर पता चला कि मेरा सिर किसी की गोद में है। मैंने आंखें खोलने की कोशिश, परन्तु जैसे ही थोडी सी आंखें खोली, लाइट का तेज चमका लगने के कारण वापिस बंद हो गई। ''वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था'' होश में आते ही ये शब्द मेरे कानों में गूंजने लगे थे। मेरी आंखों से आंसू बह चले। मैं वैसे ही लेटा रहा और आंसू बहते रहे। अचानक मेरे सिर पर रखा हाथ हिला और मेरे गालों पर छुकर देखने लगा।
समीर, मेरे कानों में एक मधुर सी आवाज पड़ी।
ये तो नवरीत की आवाज थी। मतलब मैं नवरीत की गोद में लेटा हुआ हूं।
हूं, मैंने बस इतना ही कहा।
सोनल, समीर को होश आ गया है, नवरीत ने लगभग चिल्लाते हुए कहा और अपने हाथों से मेरे आंसु पौंछने लगी।
मैंने अपनी आंखों खोलने की कोशिश की और धीरे धीरे रोशनी का अभ्यस्त होते हुए आंखे खोलने में कामयाब हो गया।
तभी बाहर से सोनल ओर उसके साथ एक आदमी और अंदर आते हुए दिखाई दिये। मुझे ऐसा लग रहा था कि वो बहुत दूर से अंदर आ रहे हैं।
ये तो डॉक्टर है, मतलब मैं हॉस्पिटल में हूं, सोचते हुए मैंने इधर उधर सिर घुमा कर देखा, परन्तु ये तो मेरे रूम जैसा ही लग रहा है। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं कहां पर हूं।
अब घबराने की कोई बात नहीं है, और न ही अब हॉस्पिटल जाने की जरूरत है, डॉक्टर ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
मैंने थोड़ा धयान देकर देखने की कोशिश की तो पता चला कि मैं अपने ही रूम में था।
थैंक्यू डॉक्टर, जैसे ही मम्मी आती है, मैं आपकी फीस पहुंचा दूंगी, सोनल ने डॉक्टर से कहा।
नो प्रॉब्लम बेटा, जब टाइम मिलें तब पहुंचा देना, कहते हुए डॉक्टर चला गया।
सोनल मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे माथे पर हाथ रखकर धीरे धीरे सहलाने लगी।
क्या हुआ था मुझे, मैंने सोनल का हाथ पकडते हुए कहा।
तुम फोन पर बात करते हुए अचानक गिर गये थे, सोनल की आंखों में मुझे नमी दिखाई दी।
हैल्लो दीदी, उनको होश आ गया है, मेरे कानों में नवरीत की आवाज पड़ी।
फिर से अपूर्वा का धयान आते ही मेरे दिल में बहुत ही दर्दनाक टीस उठी और मैं कराह उठा।
क्या हुआ, सोनल एकदम तड़प कर मेरी तरफ झुकी और मेरे गालों पर से आंसु पौंछने लगी।
मैंने अपनी आंखें फिर से बंद कर दी। आंसु लगातार बह रहे थे। नवरीत का हाथ मेरे बालों में सहला रहा था। सोनल मेरे उपर इतनी झुक गई थी कि उसके उभार मेरी छाती पर टिक गये थे। मेरे कानों में बार बार अपूर्वा की कही आखिरी बात गूंज रही थी और दिल में दर्द को बढ़ा रही थी। अब दर्द असहनीय होता जा रहा था।
मैं अब चलती हूं, अपना और समीर का धयान रखना, नवरीत ने उठते हुए कहा। तुरंत ही सोनल ने मेरे सिर को अपनी गोद में रख लिया।
तभी मेरे कानों में पहले से भी भयंकर बम सा फूटा, 'जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी', नवरीत ने दरवाजे पर से पिछे देखते हुए कहा और बाहर निकल गई।
 
पता नहीं कितनी ही देर तक ये आवाज मेरे कानों को फोड़ती रही, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे दिमाग का पुर्जा पुर्जा हिल रहा हो। अब मुझे इस कमरे में पड़े पड़े घुटन महसूस हो रही थी। मैंने उठने की कोशिश की, सोनल ने सहारा देकर मुझे बैठाया, परन्तु जैसे ही मैं बैठा, मेरे आंखों के आगे फिर से अंधेरा छा गया और मैं वापिस सोनल की बाहों में झूलते हुए उसकी गोद में पहुंच गया।
तुम आराम से लेटे रहो, तुम्हें आराम की जरूरत है, सोनल ने मेरे गालों को सहलाते हुए कहा।
मुझे यहां घुटन हो रही है, मैं बाहर जाना चाहता हूं, मेरे मुंह से बहुत ही धीमी सी आवाज में निकला। मुझे नहीं लग रहा था कि सोनल तक मेरी आवाज पहुंची होगी, क्योंकि मुझे ही ठीक तरह से सुनाई नहीं दिया था कि मैंने क्या कहा है।
परन्तु शायद सोनल ने सुन लिया था। उसने धीरे से सहारा देकर मुझे उठाया और अपनी बाहों में भर लिया। मेरी कमर उसके सीने से चिपक गई। कुछ देर ऐसे ही बैठे रहने से मुझे लगा कि अब चक्कर नहीं आयेंगे तो मैं बेड से नीचे उतरने लगा। सोनल ने आराम से मुझे बेड के किनारे लाकर मेरे पैर नीचे कर दिए और खुद नीचे उतरकर मुझे सहारा देकर उठाया। उठने पर एक बार तो मुझे लगा कि फिर से चक्कर आ जायेगा, परन्तु हल्का सा चक्कर आकर मैं सम्भल गया। मैंने चप्पल पहनी और सोनल का सहारा लेते हुए बाहर आ गया।
बाहर की ठण्डी हवा ने सुकून देने की बजाय मेरे दिल की टीस को और भी बढ़ा दिया। मेरा दिमाग बुरी तरह बज रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सिर पर हथोड़ा मार रहा हो। गली में थोड़ी बहुत चहल पहल थी, मतलब रात के 9 के आस पास का टाइम हो चुका था। मतलब मैं 8 घण्टे बेहोश रहा था।

काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूं हमें रूसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरूखी जुल्म भी मंजूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझा तो दिया होता,

सोनल ने मुझे कसके अपनी बाहों में भर लिया। मैं उसके सीने पर सिर रखकर फूट फूट कर बच्चों की तरह रोने लगा। जब आंसुओं ने भी मेरा साथ छोड़ दिया तो मैं सोनल से अलग हुआ और पागलों की तरह इधर उधर देखने लगा। मेरी ये हालत देखकर सोनल तड़प उठी।
कुछ देर यूं ही पागलों की तरह इधर उधर देखते रहने के बाद अचानक ही मैं नीचे की तरफ चल दिया। सीढ़ियों से उतरते हुए मेरे पैर लड़खड़ा रहे थे। सोनल जल्दी से मेरे पिछे पिछे आई और मुझे पकड़ लिया। नीचे उतरने के बाद मैं कुछ देर तक नीचे आंगन में इधर से उधर घूमता रहा, और फिर गेट खोलकर बाहर निकल गया। मैं कहां जा रहा हूं, क्या कर रहा हूं, कुछ ख्याल नहीं रहा। पता नहीं कितनी देर तक मैं ऐसे ही बिना किसी मंजिल के भटकता रहा। कई बार मैं लड़खड़ा कर गिरने को हुआ तो ही पता चला कि सोनल मेरे साथ ही है।
जब चल चलकर थक गया तो एक दुकान के सामने की पौड़ी पर बैठ गया। आंखों से आंसु कभी सूख जाते थे और कभी फिर बहने लग जाते थे।
'वो तो बस तुम्हारे मजे लेने के लिए एक नाटक था' 'जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी' दिमाग में दोनों बातें हथोड़े की तरह लग लगातार लग रही थी।
यहां पर कैसे बैठे हो इतनी रात को, सामने से आवाज आई।
मैंने उधर देखा तो एक पुलिस वाला मेरी तरफ ही चला आ रहा था। मैं पागलों की तरह उसी की तरफ देखने लगा।
पुलिस वाला मेरे पास आकर एकबार तो ठिठका और फिर मेरे पास बैठ गया।
क्या हुआ भाई, इतनी रात को यहां ऐसे अकेले, वो भी इस हालत में, उसने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

मत पूछो मेरे दिल का हाल, आपके भी दिल बिखर जायेंगे,
सुनाना नहीं चाहते हम ये दर्द किसी को, ये सुनके तो तन्हाई के भी आंसु निकल जायेंगे,

हम भी बने हैं शायर होके इश्क में नाकाम, हमने भी किया है नाम होके इश्क में बदनाम,
प्यार में उनके हमें दो नियामतें मिली, एक हाथ में कलम है और दूजें में जाम----- कहते हुए उसने मेरे सामने दारू की बोतल कर दी।

मैं थोड़ी देर तो उसकी तरफ देखता रहा, और फिर उसके हाथ से बोतल लेकर अपने होंठों से लगा दी।
अरे भाई, खोल तो लो, बगैर खोले ही खाली करोगे क्या, उसने हंसते हुए कहा और मेरे हाथ से बोतल लेकर उसे खोलकर वापिस मुझे पकड़ा दी।
मैंने होंठों से लगाई, जैसे ही एक घूंट मुंह में गई, मैंने उसे गटका और उसकी तरफ बोतल बढ़ा दी।
मैं तो अभी ड्यूटी पर हूं भाई, घर जाकर पीयूंगा, तुम पीओ, उसने कहा।

मैंने फिर से बोतल होंठों से लगाई और एक ही सांस में कितने घूंट अंदर उतर गये पता नहीं। काफी देर तक मैं वहां उस पुलिस वाले के साथ बैठा रहा। शराब के नशे ने गम को कुछ कम कर दिया था। मैंने उससे अपना दर्द और उसने अपना दर्द मुझसे शेयर किया। वो भी किसी के इश्क में ठोकर खा चुका था, बस फरक इतना था कि उसे अभी भी आशा थी, जबकि मेरी आशा पूरी तरह खत्म हो चुकी थी।
अच्छा भाई अब मैं अपनी ड्यूटी संभालता हूं, कहते हुए वो उठ खडा हुआ और शराब की बोतल को बंद करके वापिस अपनी शर्ट के नीचे छुपा लिया और चौराहे की तरफ बढ़ गया।
मैं भी खड़ा हुआ, परन्तु जैसे ही खड़ा हुआ लड़खड़ा कर वापिस बैठ गया। थोड़ी देर बाद मैं फिर से खड़ा हुआ, और लड़खड़ता हुआ घर की तरफ चल दिया। जब चलते हुए काफी देर हो गई और घर नहीं आया तो रूककर इधर उधर देखा। परन्तु कुछ समझ में नहीं आया कि मैं कहां पर हूं। मैं पागलों की तरह इधर उधर देखता रहा, परन्तु समझ में नहीं आ रहा था कि मैं कहां पहुंच गया हूं।
तभी मुझे एक लडकी अपनी तरफ आती हुई दिखाई दी, मैंने उसे आवाज देकर अपने पास बुलाया।
मैडम जी, मैं अपने घर का रस्ता भूल गया हूं, वो आज पहली बार कुछ ज्यादा ही पी ली, तो पता नहीं चल रहा किधर जाना है, किधर नहीं, क्या आप बता सकती हैं, लड़खड़ाती आवाज में मैंने कहा।
चलिये, उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे साथ साथ चल पड़ी।
2 मिनट में ही मैं अपने घर पहुंच गया।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आप नहीं आती तो पता नहीं मैं कब तक भटकता रहता ऐसे ही, मैंने गेट खोलते हुए लड़खड़ाती आवाज में कहा।
जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा, मुझे उसकी आंखों में आंसु दिखाई दिए।
अरे, अरे, आप रो क्यों रही हैं, अच्छा लगता है आपका भी किसी ने मेरी तरह दिल तोड़ा है, मैंने उसके आंसु पौंछते हुए कहा।
रोईये मत, देखिये मैं भी नहीं रो रहा, रोने से कुछ नहीं होने वाला, उसे इन आंसुओ से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, मेरी आवाज बुरी तरह लड़खड़ा रही थी।
 
मोहब्बत यहां बिकती है, इश्क निलाम होता है, भरोसे का कत्ल यहां खुले आम होता है,
जमाने से ठोकर मिली तो चले हम मैखाने में, और जमाना हमें शराबी का नाम सरे आम देता है,

इसलिए आंसु पौंछिए और जाम छलकाईये, मैं उंची आवाज में कहा।
चलिये आपको उपर तक छोड़ देती हूं, उस लडकी ने अपने आंसु पौंछते हुए कहा और मेरा हाथ पकड़ कर अंदर की तरफ चल दी।
अरे, आप क्यों कष्ट कर रही हैं, मैं चला जाउंगा, आपको अपने घर भी तो जाना होगा।
परन्तु उसने मेरी बात पर धयान नहीं दिया और मेरा हाथ पकड़कर सहारा देते हुए उपर ले आई।
उपर आकरह मैं सीधा रूम में आया और बेड पर गिर गया। तभी किसी ने मेरे पैरों से चप्पत निकाली और मेरे पैरों को उपर करके बेड पर अच्छी तरह लेटा दिया।
सॉरी, वो थोड़ा दूर तक चला गया था घूमने के लिए, देर हो गई, मैंने आंखें बंद करते हुए बड़बड़ाते हुए कहा।
कोई बात नहीं, तुम आ गये हो, अब आराम से सो जाओ, सोनल ने कहा और दरवाजा बंद करके लाइफ ऑफ करके नाइट लैम्प ऑन कर दिया और बेड पर मेरे पास आकर लेट गई। उसने मेरी तरफ करवट करके मेरे सिर को अपने हाथ पर रख दिया और अपने होंठ मेरे गालों से सटा दिये। उसका दूसरा हाथ मेरी छाती को सहला रहा था।

ऐसे ही लेटे लेटे जल्दी ही मैं नींद के आगोश में समा गया।

(जिन दोस्तों को समझ में नहीं आया हो कि वो लड़की कौन थी, जो मुझे घर पर छोड़ गई, तो उनको बताना चाहूंगा कि वो सोनल ही थी, समीर ज्यादा पीने के कारण उसे पहचान नहीं पा रहा था)
 
सुबह आंख खुली तो सिर दर्द के मारे फटा जा रहा था। दिल में भी एक टीस थी। शायद सपना भी कुछ भयानक ही था, सही तरह से याद तो नहीं आ रहा था, परन्तु जिस तरह से आंखे खुलते ही गालों पर आंसु लुढक आये थे, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है।

''जल्दी ही दीदी की शादी कहीं और हो जायेगी'' नींद खुलते ही ये शब्द मेरे कानों में फिर से गूंजने लगे।

मैंने थोड़ा हिलने की कोशिश की तो पाया कि सोनल पूरी तरह से मुझसे चिपकी हुई है। उसका सिर मेरी छाती पर था। उसका एक पैर मेरे पैरों पर था और उसका हाथ मुझे अपनी बांहों में जकड़े हुए था। मेरे पेट पर उसके उभार दबे हुए थे।
मेरे हिलते ही सोनल ने अपना सिर उठाया और मेरी तरफ देखा। उसकी आंखें एकदम लाल थी।
क्या हुआ तुम्हारे आंखे इतनी लाल क्यों हैं? रूंधी हुई आवाज गले से निकली और मेरा हाथ सोनल की आंखों पर पहुंच गया।
नहीं, बस ऐसे ही, सोनल ने मेरे गालों पर लुढक आये आंसु पौंछते हुए कहा।
मैंने डॉक्टर अंकल को फोन कर दिया है, वो बस आते ही होंगे, सोनल ने मेरे गाल पर एक किस करते हुए कहा।
डॉक्टर, वो किसलिए, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है, मैंने उसके माथे पर हाथ लगाकर देखते हुए कहा।
मुझे कुछ नहीं हुआ, रात से तुम्हें तेज बुखार है, सोनल ने मेरे सिर पर से कपड़ा उठाते हुए कहा।
मैंने अपने सिर पर हाथ लगाकर देखा तो बहुत ही तेज तप रहा था। सोनल कपड़ा लेकर रसोई में चली गई और उसे गीला करके ले आई। जैसे ही उसने मेरे माथे पर कपड़ा रखा, मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। बहुत ही ठण्डा था।
बर्फ में भिगोया है क्या, मैंने माथे पर रखे कपड़े को छूकर देखते हुए कहा।
बर्फ तो रात में ही खत्म हो गई, अभी और बनी नही है, बस ठण्डे पानी में ही भिगोया है, सोनल ने मेरा हाथ पकड़कर अपने सिने से सटाते हुए हाथ की उंगलियों पर एक चुम्मी दे दी।
पर मुझे तुम्हारी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही, तुम्हारी आंखे कितनी लाल हैं, मैंने करवट बदल कर लेटते हुए दूसरा हाथ सोनल की गोद में रख दिया।
अगर सोनल जैसी दोस्त साथ हो तो आदमी किसी भी दर्द-दुख को बहुत ही आसानी से झेल सकता है, बस यही मेरे साथ हो रहा था, मुझे गम तो था अपूर्वा की बेवफाई से, परन्तु सोनल की आंखें लाल देखकर मैं अपने गम को भूल सा गया था और मुझे उसकी ही चिंता हो रही थी।
वो तो नींद सही से नहीं ले सकी, इसलिए हैं, सोनल ने मेरे गालों पर हाथ फेरते हुए कहा।

मेरी आंखें छलक आई।
तुम कितनी केयर करती हो मेरी, सच अगर तुम ना होती तो पता नहीं क्या होना था, कहते हुए मैंने सोनल को अपनी बांहों में भरकर अपने उपर खिंच लिया। सोनल किसी गुड़िया की तरह मेरी बांहों में खिंचती हुई मेरे उपर आ गई। उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया और प्यार से मेरे चेहरे को देखने लगी।
कुछ पल तक मेरे चेहरे को निहारने के बाद उसने हलका सा अपना चेहरा मेरे चेहरे की तरफ बढ़ा दिया। मैंने उसकी आंखों में देखा और अगले ही पल दोनों के लब एक दूसरे में गुम हो गये। सोनल बहुत ही प्यार से मेरे होंठों को चूम रही थी, चूस रही थी।
तभी नीचे की बैल बजी।
शायद डॉक्टर आ गया है, सोनल ने अपने लबों को मेरे लबों की जकड़न से छुड़ाते हुए कहा और फिर मेरे हाेंठों पर छोटी सी किस्सी लेकर नीचे चली गई।
रात को आपने ड्रिंक की थी, डॉक्टर ने मेरे पास बैठकर हाथ देखते हुए कहा।
जिस तरह से कल आप बेहोश हुए थे और आज फीवर है, मुझे नहीं लगता कि ऐसी स्थिति में ड्रिंक आपकी सेहत के लिए अच्छी है। वैसे बेहोशी का कोई खास कारण तो मालूम नहीं हुआ, परन्तु फिर भी ऐतिहात बरतनी चाहिए, डॉक्टर ने इंजेक्शन तैयार करते हुए कहा।
चलिये उलटे लेट जाइये, कहते हुए डॉक्टर खड़ी हो गई।
कुल्हें पर इंजेक्शन लगाते हुए मुझे डर लगता है, प्लीज हाथ पर लगा दीजिये ना, मैंने याचना करते हुए कहा।
जल्दी से उलटे हो जाइये, ये इंजेक्शन हाथ पर नहीं कुल्हे पर ही लगेगा, डॉक्टर ने कहा।
मैं मायूस होकर उलटा हो गया। डॉक्टर ने मेरी शॉर्ट को नीचे किया पर जैसे ही इंजेक्शन लगाने के लिए हाथ हटाया वो वापिस उपर हो गई।

आप इसे पकड़िये, डॉक्टर ने सोनल से कहा।
सोनल ने मेरी शॉर्ट को पकड़ते हुए आधे से ज्यादा कुल्हों से नीचे कर दिया। मैंने जोर से आंखें बंद कर ली।
ईइइइइइइइइइ, सुई महसूस होते ही मेरे मुंह से निकला।
इतने बड़े होकर भी इंजेक्शन से इतना डर, डॉक्टर की हंसी छूट गई।
सही बताउं तो मुझे बस हल्का सा पता चला था कि सुई लगी है, नहीं तो पता ही नहीं चला कि कब इंजेक्शन लगा दिया। वो तो बाद में जब रूई का फाहा रखकर डॉक्टर ने हल्का सा मसला तब पता चला कि इंजेक्शन लग चुका है।
मैं सीधा होने लगा।
अभी एक और लगाना है, मुझे सीधा होते हुए देखकर डॉक्टर ने कहा।
डॉक्टर ने एक इंजेक्शन और लगाया।
अगर कुछ खाया नहीं है तो अभी हल्का फुल्का कुछ खा लिजिए और ये दवाई हैं, कहते हुए डॉक्टर ने सोनल को दवाई समझा दी।
शाम को एकबार फिर से आ जाउंगी, और यदि तबीयत ठीक हो जाये तो मेरे क्लिनिक पर ही आ जाना, कहते हुए डॉक्टर खड़ी हो गई। सोनल डॉक्टर को नीचे तक छोड़कर आई।

अभी भी इंजेक्शन से डर लगता है, सोनल ने मुस्कराते हुए कहा।
मैं दूध लेकर आ रही हूं, कहते हुए सोनल बाहर चली गई।
मैं लेटे हुए सोनल के बारे में ही सोचता रहा। अपूर्वा ने जो गम दिया था सोनल ने उसे बहुत ही कम कर दिया था। अब तो मुझे शक हो रहा था कि मैं अपूर्वा से प्यार करता भी था या नहीं। क्योंकि उसने मुझे धोखा दिया था, उसके बावजूद एक-दो दिन में ही मेरा गम हल्का हो गया था।

''पता है प्यार करके क्या मिला,
अजीब रिश्ता रहा कुछ अपनों से मेरा,
ना नफरत की वजह मिली न मोहब्बत का सिला''

मैं ऐसे ही छत की तरफ देखते हुए सोच में डूब गया था। पहले तो मैं अपने प्यार को सिर्फ दोस्ती ही समझता रहा और जब पता चला कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं, तो वो बेवफाई कर गई। बस इतने ही दिन की थी मेरे प्यार की उम्र। सोचते हुए मेरी आंखों में आंसु आ गये।
दरवाजा खुलने की आवाज ने मेरी सोच का तारतम्य तोड़ा। सोनल दूध ले आई थी। वो सीधी मेरे पास आई और मेरे गालों पर लुढक आये आसुंओ को देखकर बैचेन हो उठी। शायद वो समझ चुकी थी कि अकेले होते ही मैं विचारों में गुम होकर गम में डूब जाता हूं। उसने मेरे गालों पर अपने लब रखे और उन आंसुओं को पी गई। कुछ देर वो मेरे गालों को चूमती रही और फिर मेरे होंठों पर एक किस्सी देकर उठकर रसोई में चली गई।
अजीब कसमकस हो गई थी, सोनल के पास आते ही गम दूर हो जाता था, और सोनल के थोड़ा सा दूर होते ही कम घेर लेता था। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।
सोनल ने ब्रेड टोस्ट किए और खाने के बाद मैंने दवाई ली। तभी फिर से नीचे की बैल बजी।
अब कौन आ गया, सोनल ने उठते हुए कहा और नीचे चली गई।
हाये, अनन्या ने अंदर आते हुए कहा।
 
हाये, कैसी हो, मैंने कहा।
हेहेहेहे, बिमार को दूसरे की तबीयत की ज्यादा चिंता रहती है, अनन्या ने हंसते हुए कहा।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई।
मैं तरस गई थी इस चेहरे को मुस्कराता हुआ देखने के लिए, कहते हुए सोनल मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे चेहरे को हाथों में भर लिया।
सॉरी, मैं सोनल के गालों पर चिकोटी काटते हुए फिर से मुस्करा दिया। सोनल ने मेरे माथे पर एक चुम्मी ली।
मैं फ्रेश होके आती हूं, तब तक आप दोनों बातें कीजिए, कहते हुए सोनल बाहर चली गई।

अब कैसी है तबीयत, अनन्या ने बेड पर बैठते हुए पूछा।
अभी डॉक्टर इंजेक्शन लगा कर गई है।
ओह माई गोड, तुम्हें तो बहुत तेज फीवर है, अनन्या ने मेरा हाथ चैक करते हुए कहा।
हम्ममम, मैंने बस इतना ही कहा।
इतने तेज फीवर में तुम ऐसे नोर्मल बात कैसे कर रहे हो, अनन्या ने शॉक्ड होते हुए पूछा।
वो तो मुझे भी समझ में नहीं आ रहा, नहीं तो मैं तो थोड़े से फीवर में ही सुध-बुध खो देता हूं।
मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा, इतना तेज बुखार होने पर भी तुम नॉर्मल लग रहे हो।
सोनल रातभर ठण्डे पानी की पट्टियां रखती रही सिर पर, शायद उसी का कमाल है, मैंने कहा।
सोनल रात को------- तुम्हारे साथ थी------- तुम्हारे रूम में-------- अनन्या ने आश्चर्य से पूछा।
हां, ज्यादातर इधर ही होती है रात में, मैंने कहा।

मतलब तुम्हारे और उसके बीच में----------?????
अनन्या की बात सुनकर मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ, परन्तु अब तीर निकल चुका था। मैंने उसके चेहरे को धयान से देखा। वो थोड़ा सा शॉक्ड लग रही थी, परन्तु उसके चेहरे पर कुछ मुस्कराहट की रेखाएं भी दिख रही थी।
हां, मैंने बस इतना ही कहा।
मैं तो सोच रही थी कि---- कहते हुए अनन्या के चेहरे पर हल्की सी उदासी छा गई।
क्या सोच रही थी, मैंने पूछा।

सिर्फ जिस्मानी है, या फिर प्यार----- अनन्या ने कुछ देर सोचने के बाद पूछा।
पहले सिर्फ जिस्मानी था, पर अब हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैंने कहा।
मतलब कोई चांस नहीं बचा है अब, अनन्या ने उदास होते हुए कहा।
किस बात का चांस, मैं कुछ समझा नहीं, मैंने कन्फयूज होते हुए कहा।

अनन्या ने मेरा हाथ जो उसने पकड़ा हुआ था अपनी जांघों पर रख कर उपर से अपना हाथ रख लिया और हल्के से मेरे हाथ को सहलाने लगी।

बड़े नासमझ हो, अनन्या ने हंसते हुए कहा।
लड़कियों की बातें कभी भी मेरी समझ में नहीं आती, मैंने सिर खुजलाते हुए कहा।
मैं पट्टी को गीली करके लाती हूं, शायद फिर समझ में आ जाये, अनन्या ने मेरे सिर पर रखी पट्टी को हाथ लगाकर देखते हुए कहा और पट्टी लेकर रसोई में चली गई।
फ्रीज में बर्फ रखी है क्या, अनन्या ने रसोई में से ही पूछा।

देख लो, शायद रखी होगी, मैंने कहा।
कुछ देर में अनन्या पट्टी में बर्फ रखकर ले आई और मेेरे सिर पर रख दी। वो बेड पर मुझसे सट कर बैठ गई।
सिर्फ सोनल ही है या कोई और भी------- अनन्या ने पूछा।
मतलब, मैंने कहा।
तुम्हारा चक्कर सिर्फ सोनल से ही है या------।
अब क्या बताउं, जिस्मानी तो कईयों से रह चुका है, पर तुम यही सब क्यों पूछ रही हो।
देख रही हूं, मेरा चांस है या नहीं, अनन्या ने मुस्कराते हुए कहा।
ओह तो इस चांस की बात कर रही थी तुम, मैंने अपने हाथ को हरकत देते हुए उसकी जांघों को दबा दिया।
आहहहह,, अनन्या ने मुंह से एक मादक सिसकारी निकली।
समीर मैं जल रही हूं, मुझे हर रोज सैक्स की आदत पड़ चुकी है, और जब से यहां आई हूं तो एक बार भी नहीं किया है, अनन्या ने कहते हुए अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया।
तभी सीढ़ियों से उपर आने की आवाज आई। अनन्या थोड़ा दूर होते हुए बैठ गई।
बुखार कुछ कम हुआ क्या, सोनल ने अंदर आते हुए पूछा।
आपने बदली है पट्टी, सोनल ने सिर पर रखी पट्टी को हाथ लगाते हुए अनन्या की तरफ देख कर पूछा।
हां वो सूखी-सूखी सी हो गई थी, अनन्या ने हड़बड़ाते हुए कहा।

थैंक्स, मैं बदलना भूल गई, सोनल ने बैठते हुए कहा।
सोनल के शरीर से मादक महक उठ रही थी, शायद वो नहाकर आई थी। मैंने उसके बालों की तरफ देखा तो वो गीले थे। उसके फ्रेश नहाए शरीर से उठती मादक महक मुझे मदहोश कर रही थी। सोनल मोबाइल उठाने के लिए, जो कि मेरे दूसरी साइड में रखा था, मेरे उपर झुकी तो उसके बाल मेरे चेहरे पर आ गये। उनसे आती भीनी भीनी खूशबू ने मुझे मदहोश कर दिया। उसका हाथ दूसरी साइड में रखी चद्दर पर पड़ा और चद्दर सिल्क की थी तो चद्दर फिसल गई और साथ में उसका हाथ भी और सोनल मेरे उपर गिर गई। उसके उभार मेरी छाती में दब गये। उसके मुंह से एक आह निकली, पता नहीं मजे की थी या फिर दर्द की, पर मेरे मुंह से जरूर मजे की आह निकली थी। अगर अनन्या ना होती तो शायद कुछ हो जाना था।
सोनल जल्दी से उठी। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था।
मैं लन्च तैयार कर देती हूं, तब तक आप बात करो, कहते हुए सोनल रसोई में चली गई।
अनन्या ने एक बार रसोई की तरफ देखा और फिर जल्दी से मेरी तरफ झुकते हुए मेरे होंठों को चूमा और उसके हाथ ने मेरी जांघों पर पहुंच कर मेरे लिंग को दबा दिया। मेरे मुंह से एक मादक आह निकली।
जल्दी से ठीक हो जाओ, फिर तुम्हें ऐसे मजे दूंगी कि याद रखोगे, कहते हुए अनन्या ने अपनी एक आंख दबा दी और उठते हुए एक बार फिर से मेरे होंठों को कसकर चूस लिया।
ओके मैं भी चलकर नाश्ता तैयार कर लेती हूं, अनन्या ने खड़ी होते हुए कहा।
अरे, मैं बना रही हूं, यहीं खा लेना, सोनल ने रसोई में से कहा।
नहीं, वो मैं आधी तैयारी करके रखी है, खामखां वो खराब हो जायेगा, अनन्या ने कहा और फिर बाये बोलकर चली गई।
जब तक सोनल ने नाश्ता तैयार किया मैं फ्रेश हो लिया। सोनल ने रोटी सब्जी ही बनाई थी। हमने नाश्ता किया।
सोनल जाकर नीचे का गेट बंद कर आई। उपर आकर उसने रूम के दरवाजे को भी कुंडी लगाकर बंद कर दिया।
आजकल पूनम दिखाई नहीं दे रही, मैंने उससे पूछा।
क्यों, हूजूर का क्या इरादा है, सोनल ने मेरे पास बैठते हुए कहा।
बस ऐसे ही पूछ रहा था, कई दिनों से दिखाई नहीं दी, मैंने कहा।
कहीं गई होगी, सोनल ने कहा और मेरे कंधे पर सिर रखकर मेरी छाती को सहलाने लगी। मैं दीवार के साथ कमर लगाकर बैठा था।
उसके खुले हुए गीले बाल मेरे गालों को छुने लगे। मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया और हल्के हल्के सहलाने लगा।
मेरा प्याला बाबू, रात भर सोया नहीं, अब सो जा, कहते हुए मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया और नीचे को सरकते हुए लेट गया और सोनल का अपनी छाती पर रख लिया।
सोनल मुझसे चिपक गई। उसका हाथ मेरे पेट पर सहलाने लगा। मेरा हाथ उसके बालों को संवार रहा था तो दूसरा हाथ उसकी कमर को सहला रहा था।
मेरा बुखार उतर सा गया था। बस मुझे हल्का हल्का महसूस हो रहा था। सोनल का हाथ पेट को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे सरक रहा था। उसने मेरी टी-शर्ट को उपर करते हुए मेरे नंगे पेट पर अपना हाथ रख दिया और गुदगुदी करने लगी।

क्या है, सो जाओ आराम से, मैंने उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा।
कुछ देर तक उसने हाथ को कोई हरकत नहीं दी। मैंने अपना हाथ फिर से उसके बालों में रख दिया। कुछ देर तक तो उसने कुछ नहीं किया, परन्तु फिर हल्के हल्के अपने हाथ को हरकत दी और मेरे पेट को सहलाने लगी। उसने अपनी एक उंगली मेरी नाभि में डाल दी और बाकी की उंगलियों को घोड़े की तरह चलाते हुए नीचे की तरफ ले जाने लगी। थोड़ा सा नीचे तक ले जाती और फिर उपर ले आती।
अचानक उसने अपना चेहरा उठाकर मेरी तरफ देखा। मैंने आंखों ही आंखों में उसके पूछा कि क्या हुआ। उसने ना में गर्दन हिला दी और फिर अपना सिर वापिस मेरी छाती पर रख लिया और वापिस पेट पर उंगलियों के घोड़े दौड़ाने लगी। उसकी हरकतों से मेरा लिंग हरकत में आने लगा था और धीरे धीरे अपनी पोजीशन ले रहा था।
मैं आंखें बंद करके उसकी हरकतों को महसूस करने लगा। थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी शॉर्ट से बस हल्का सा उपर रखते हुए वहां पर सहलाने लगी। उसका हाथ बार बार शॉर्ट के किनारों से टच हो रहा था। उसके इस टच में बहुत ज्यादा सेंसेशन था। मेरा लिंग पूरी तरह अपनी पोजीशन ले चुका था और शॉर्ट में एक तम्बू बन गया था।
अचानक उसने अपनी एक उंगली शॉर्ट के किनारों के साथ साथ फिरानी शुरू कर दी और ऐसे ही फिराते हुए धीरे से हल्की सी अंदर की तरफ सरका दी और फिराने लगी। शॉर्ट थोड़ी सी उपर उठ गई थी उसकी उंगली के कारण और उसकी उंगली धीरे धीरे और नीचे जाती जा रही थी। मैं बस आंखें बंद किये महसूस किये जा रहा था। जॉकी ने कुछ देर तक उसकी उंगली को बाहर ही रोके रखा, परन्तु फिर उसने बाधा को भी पार कर लिया और धीरे धीरे अपना हाथ अंदर डालते हुए मेरे लिंग के पास जाकर रूक गई। मेरे शरीर में आनंद की लहरे उठ रही थी। कुछ देर तक उसने वहीं पर अपनी उंगली को फिराया और फिर धीरे धीरे मेरे लिंग पर एक उंगली को फिराने लगी। मेरी हालत खराब होती जा रही थी, मुझसे अब रूकना मुश्किल होता जा रहा था, परन्तु फिर भी मैं खुद को कुछ भी करने से रोके हुए था। मेरा लिंग झटके खा खाकर पागल हो रहा था। बेचारे को हिलने डुलने के लिए खुली जगह नहीं मिल पा रही थी, जिससे वो पगला रहा था।
 
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