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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--49
गतांक से आगे ...........
मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए मैं थोड़ा हैरान था और चेहरे पर मुस्कराहट भी थी।
मैंने उसके चेहरे केा पकड़कर उपर उठाया और उसकी आंखों में देखने लगा। उसकी पलकें झुकी हुई थी और गाल एकदम गुलाबी हो चुके थे।
अपूर्वा,,, ये क्या था,,,,,, मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा।
उसने एक बार अपनी पलकें उपर उठाकर मेरी आंखों में देखा और तुरंत ही शरम से वापिस झुका ली और फिर से अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया।
अपूर्वा,,,, मैंने उसके बालों में हाल फिराते हुए कहा।
हूं,,,, उसने इतना ही कहा।
तुम बहुत नॉटी हो गई हो,,,, मैंने उसके सिर को वापिस उपर उठाने की कोशिश करते हुए कहा।
मुझे लज्जा आ रही है, प्लीज,,,,, उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे रोकते हुए कहा।
कुछ देर हम इसी तरह से बैठे रहे,,,, मन तो नहीं कर रहा था, पर रात काफी हो गई थी,,, इसलिए सोना भी जरूरी था।
मैंने अपूर्वा को खुद से अलग किया और उसके चेहरे की तरफ देखा।
उसके उस मासूम से चेहरे पर संतुष्टि,,,,, चंचलता एक साथ झलक रही थी।
चलें,,,, सुबह ऑफिस भी जाना है, मैंने कहा।
हूं,,, कहकर अपूर्वा मुंडेर से नीचे उतर गई।
नीचे आकर हमने रूम में देखा तो तीनों की तीनों पूरे बेड पर फैल चुकी थी एकदूसरे के उपर हाथ-पैर डाले सो रही थी।
उन्हें देखकर मैं दूसरे रूम की तरफ बढ़ गया। अपूर्वा भी मेरे साथ ही उसी रूम में आ गई।

मैं तो सोच रहा था कि बढ़िया तरह से कपड़े वगैरह निकाल के सोउंगा,,, पर अपूर्वा के आने से अब ऐसे ही सोना पडेगा। मैं जाकर बेड पर लेट गया और कम्बल ओढ लिया। अपूर्वा ने लाईट बंद करके नाइट लैंप जला दिया और दरवाजे को हल्का सा खुला रखते हुए बंद करके बाहर चली गई।
अब मैं कपड़े निकालकर सो सकता हूं, मैंने मन ही मन सोचा और कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद कपड़े निकाल कर साइड में रख दिये और आराम से आंखें बंद करके बेड पर फैल कर लेट गया।
तभी दरवाजा खुला और मैं तो बस अंदर तक हिल गया। सामने अपूर्वा थी, उसने झिन्नी सी नाइटी पहनी हुई थी जिसमें से उसकी ब्रा और पेंटी हल्की हल्की नजर आ रही थी। ये तो शुक्र था कि नाइट लैंप जल रहा था, नहीं तो शायद उसका पूरा बदन ही उजागर हो जाता।
वो मुस्कुराते हुए बेड के पास आई और कम्बल को उठाकर उसमें घुस गई।
मेरी तो बुरी हालत हो गई थी। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि मैंने कपड़े क्यों निकाले। मैं थोड़ा सा साइड में सरक गया, जिससे उससे टच न हो पाउं, ताकि उसे पता न चले कि मैंने कपड़े उतार रखे हैं। मेरे शरीर पर बस अंडरवियर और सैंडो ही थी। मुझे बहुत ही शरम आ रही थी। मैं अपूर्वा की तरफ करवट लेकर लेट गया ताकि खुद को उससे टच होने से बचा सकूं।
अपूर्वा मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई और मेरी आंखों में देखने लगी। शरम के मारे मैंने अपनी आंखें बंद कर ली। उसने मेरे गालों पर हाथ रखा और सहलाते हुए बोली, 'गुड नाइट'।
मैंने भी उसे गुड नाइट कहा और दोनों के बीच में कम्बल की थोड़ी सी दीवार बना दी। अपूर्वा हंसने लगी।
ये क्या कर रहे हो,,, अपूर्वा ने हंसते हुए कहा।
लक्ष्मण रेखा खींच रहा हूं,, मैंने भी हंसते हुए कहा।
इसकी कोई जरूरत नहीं है, कहते हुए अपूर्वा ने कम्बल को थोड़ा सा अपनी तरफ खींचा और मेरी तरफ सरक कर सीधी होकर लेट गई।
जब तक मुझे पूरी तरह विश्वास नहीं हो गया कि वो सो गई है तब तक मैं जागता ही रहा और जब मुझे लगा कि अब तो ये सो ही गई है, तो मैंने भी अपनी आंखें बंद कर ली और धीरे धीरे नींद के आगोश में समा गया।
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ट्रननननननननननननननननननननननननननन--------------------------------------------
कानों में ये कर्कश आवाज पड़ने से मेरी नींद खुली, मैंने हाथ उठाकर अलार्म बंद करना चाहा पर मेरा हाथ नहीं उठ पाया।
सोनम मुझसे चिपक कर सो रही थी, उसका हाथ मेरे हाथ पर रखा हुआ था, जिससे मैं हाथ नहीं उठा पा रहा था। मैंने उसके हाथ के नीचे से अपना हाथ निकाला और अलार्म की तरफ बढ़ाया,,, पर वहां तो कोई अलार्म नहीं था। मैंने थोड़ा सा और हाथ को इधर उधर मारा, पर अलार्म हाथ नहीं लगा। मुझे बेड का स्ट्रक्टचर भी कुछ बदला बदला सा लग रहा था।
तभी मुझे धयान आया कि ये अलार्म की टॉन तो मेरे मोबाइल में की है। मैंने मोबाइल उठाने के लिए सिरहाने पर टटोला तो मेरे हाथ में मेरी जींस आ गई।
हूं,,, कल कपड़े भी सिरहाने ही रख दिये,,, मैंने मन ही मन सोचा और जींस को एकतरफ करके मोबाइल ढूंढने लगा, पर मोबाइल हाथ नहीं आया।
तभी सोनल ने थोड़ी सी हलचल की और,,, और भी ज्यादा मुझसे चिपक गई। उसका एक पैर मेरी जांघों पर था और मेरा लिंग पूरी तरह तना हुआ था। उसका सिर मेरे कंधे पर रखा हुआ था और उसका एक हाथ मेरी छाती पर था। उसके उभार पूरी तरह से मेरे शरीर से दबे हुए थे।
मैंने थोड़ी सी आंखें खोली और गर्दन घुमा कर मोबाइल देखने लगा, पर कहीं मिल नहीं रहा था।
गर्दन घुमाने पर मेरी नजर बेड के साइड में रखे पोट पर पड़ी जिसमें मछलियां तैर रही थी, मैं हैरान हो गया, मेरे रूम में ये मछलियां कहां से आ गई।
मैंने आंखों को मसलते हुए इधर उधर देखा तो ये तो मेरा रूम ही नहीं है, मैंने थोड़ा सा दिमाग पर जोर डाला।
ओ तेरे की,,, मैं तो अपूर्वा के घर पर सोया था,,, मतलब मैं अपूर्वा के घर पर हूं,,, और ये,, ये,,, ओह माई गोड,,, ये अपूर्वा मुझसे इस तरह से चिपक कर सो रही है।
मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। इतना धयान आते ही मैंने जल्दी से जींस को उठाया और उसमें से मोबाइल निकालकर अलार्म बंद किया।
शुक्र था कि अपूर्वा की आंख नहीं खुली, नहीं तो मैं कहीं का नहीं रहता।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही लेटा रहा और सोचता रहा कि अब क्या करूं। फिर काफी देर सोचने के बाद निर्णय लिया कि धीरे से इसको अपने से अलग करता हूं।
मैंने कम्बल को उतार कर साइड में कर लिया। पर जैसे ही मेरी नजर अपूर्वा पर पड़ी मैंने वापिस कम्बल को ओढ़ा दिया। उसकी नाइटी उसकी कमर तक आ चुकी थी और उसका नाभि से नीचे का पूरा शरीर नंगा था, बस एक छोटी सी पेंटी थी।
 
कम्बल ओढ़ा कर मैं अपना हाथ उसके पैर तक ले गया और उसे साइड में करने लगा। पर पैर तो साइड में होना दूर, उसका हाथ फिर से मेरे उपर आ गया।
आज तो तू गया बच्चू,,,,, तुने कपड़े निकालकर बहुत बड़ी गलती कर दी,,,, मैंने मन ही मन सोचा।
तभी मुझे बाहर से पानी की आवाज आई। शायद आंटी उठ गई होगी। ये विचार दिमाग में आते ही तो मैं बस परेशान हो उठा।
अगर आंटी ने हमें ऐसे सोते हुए देख लिया तो,,, बस सब कुछ खत्म हो जायेगा, मुझे यहां से धक्के मारकर निकाल देंगे,,, मैंने मन ही मन सोचा और अपूर्वा को ही उठाने का निर्णय किया।
इससे कम से कम आंटी और बाकी को तो पता नहीं चलेगा, अपूर्वा को तो बाद में समझा दूंगा,,, सोचकर मैंने अपूर्वा को उठाने का निर्णय पक्का किया।

मैंने उसको कमर पर से पकड़कर हिलाते हुए धीरे से कहा - अपूर्वा,,,।
हूं,,, उसने इतना ही कहा और,, और भी ज्यादा जोर से मुझसे चिपक गई।
मैंने फिर से उसकी कमर को जोर से हिलाया और कहा - अपूर्वा, उठो,,, सुबह हो गई।
उउंहहहह,,, सोने दो,,, मुझे नींद आ रही है,, अपूर्वा ने नींद में ही कहा और मेरा हाथ पकड़कर अपने उपर रख लिया।
अब क्या करूं, ये तो उठ ही नहीं रही है, आंटी उपर आ गई तो,,, मेरे तो लग जायेंगे। ये विचार आते ही मैं बैचने हो उठा।
फिर मैं खुद ही साइड में होकर उठने का फैसला किया और उससे अपना हाथ छुड़ाकर उसके शरीर को पकड़कर खुद साइड में निकलने लगा, और एक दम से धडाम,,, मैं पहले से ही बेड के बिल्कुल कोने पर पहुंच चुका था, और जैसे ही मैं साइड में होने के लिए एकदम से सरका, सीधा बेड से नीचे।
आआओहहाहहह,,, मेरे मुंह दर्द भरी कराह निकली।
मेरे गिरने की आवाज सुनकर अपूर्वा की भी नींद खुल गई और वो आंख मसलती हुई उठी। उसने इधर उधर देखा तो मैं नीचे पड़ा हुआ कराह रहा था।
वो एकदम से उठकर मेरे तरफ बढ़ी पर उसका बैलेंस बिगड गया और वो भी सीधी मेरे आ गिरी। उसका तो कुछ नहीं बिगड़ा पर मेरे एक तो पहले से ही नीचे गिरने से दर्द था और उपर से वो गिरी तो दर्द दुगुना बढ़ गया।
वो एकदम से उठी और मेरे सिर के नीचे हाथ लेजाकर मुझे बैठाने लगी। मैं धीरे धीरे बैठ गया। मेरे गिरने से पहले मेरे कपडे नीचे गिर गये थे, और जींस का हुक मेरी कमर में चुभ गया था। जिस कारण कमर में ज्यादा दर्द हो रहा था इसलिए ज्यादा देर बैठा नहीं गया।
मैं अपूर्वा और बेड का सहारा लेते हुए उठा और बेड पर लेट गया।
अपूर्वा का चेहरा बहुत ही संकुचित हो गया था। वो एकदम से परेशान हो उठी थी। मेरी आंखों में दर्द के मारे हल्के से आंसू भी आ गये थे।
ज्यादा लग गई क्या,,, अपूर्वा ने परेशान होते हुए पूछा।
कमर में कुछ चुभ गया है, मैंने दर्द भरी आवाज में कहा।
अपूर्वा ने मुझे पकड़कर धीरे धीरे करके पेट के बल लिटाया और मेरी कमर में सहला कर देखने लगी। वो बहुत ही धीरे धीरे से सहला रही थी, जिससे कुछ आराम महसूस हो रहा था।
मेरी कमर को देखने के बाद वो नीचे देखने लगी।
शायद जींस में से कुछ चुभ गया है, हल्की सी खाल भी छिल गई है, उसने नीचे से मेरे कपड़े उठाकर बेड पर रखते हुए कहा।
मैं अभी मम्मी को बुलाती हूं, वो कुछ करेंगी, उसने परेशान होते हुए कहा और बेड से उठ गई।
नहीं, आंटी को मत बुलाना, मैंने उसे रोकते हुए कहा।
क्यों,,, मम्मी कुछ दवाई लगा देंगी,,, अपूर्वा ने कहा।
ठीक है, पर पहले मुझे कपड़े पहनाओ,,, बाद में बुलाना आंटी को,,, मैंने कहा।
अपूर्वा हल्के से मुस्कराई और मेरी जींस मुझे सीधा लेटा कर मेरी जींस पहना दी। फिर गले में से शर्ट पहना कर मुझे हल्का सा उठाया और शर्ट को ठीक तरह से पहना कर मेरे माथे पर एक किस करके बाहर चली गई।
कुछ देर में आंटी और अपूर्वा दोनों कमरे में आई।
क्या हुआ बेटा,,, कैसे लग गई, आंटी ने अंदर आते ही परेशानी वाले स्वर में पूछा।
वो सोते सोते नीचे गिर गया था,,,, मैंने आंटी से कहा।
छोटे बच्चे हो क्या, जो सोते सोते नीचे गिर गये, आंटी ने मुस्कराते हुए कहा।
कहां लगी है, आंटी ने पूछा।
वो कमर में दर्द हो रहा है, मैंने कहा।
आंटी इतना सुनकर वापिस चली गई और कुछ देर बाद एक कटोरी में तेल लेकर आई। आंटी ने मुझे उल्टा करके लेटा दिया और मेरी शर्ट कंधो तक उपर उठा दी।
आहहहह,,,, जैसे ही आंटी ने थोड़ा सा तेल मेरी कमर पर गिराया,, मेरे मुंह से हल्की सी दर्द और सुकून भरी आह निकल गई।
हल्का हल्का गर्म तेल जैसे ही मेरी कमर पर गिरा, एक सुकून सा महसूस हुआ। आंटी ने हल्के हल्के मालिश करनी शुरू कर दी। जैसे जैसे आंटी मालिश करती गई, दर्द छूमंतर होता गया। दर्द एकदम गायब सा हो गया।
अब कुछ देर ऐसे ही लेटे रहना, आंटी ने मालिश खत्म करके कहा और चली गई।
आंटी के जाते ही अपूर्वा बेड पर मेरे पास आकर बैठ गई और मेरी कमर पर हलके हलके सहलाने लगी।
अब दर्द कैसा है, अपूर्वा ने पूछा।
बिल्कुल खत्म हो गया, आंटी के हाथों में तो जादू है, मैंने कहा।
मैंने पहले ना कहा था कि मम्मी दवाई लगा देगी, छोटी मोटी चोट को तो मम्मी तुरंत ठीक कर देती है,, अपूर्वा ने कहा।
हममम,,,, मैंने कहा।
कुछ देर तक मैं वैसे ही लेटा रहा और अपूर्वा मेरी कमर को सहलाती रही।
पर तुम नीचे गिरे कैसे,,,,, अपूर्वा ने पूछा।
पता नहीं, जब नीचे गिर गया तब पता चला कि मैं नीचे गिर गया,,, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
हेहेहेहेहे,,, बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह हो,,, सोते हुए गिर गये,,, अपूर्वा ने हंसते हुए कहा।
हे तुम्हें तो नहीं लगी ना,,, मैंने गंभीर होते हुए उससे पूछा।
हम्मम हल्का हल्का दर्द हो रहा है, अपूर्वा ने कहा।
कहां,,, मैंने पूछा।
अपूर्वा ने नजरें नीचे झुका ली,,, फिर कुछ देर बाद अपने उरोजों की तरफ इशारा किया।
मुझे धयान आया की वो मेरे उपर पेट के बल गिरी थी और उसके उरोज मेरी छाती में बुरी तरह दब गये थे।
तो तुम आंटी को बताओ ना,,, वो कुछ इलाज बतायेंगी, मैंने कहा।
मुझे शर्म आती है, अपूर्वा ने शरमाते हुए कहा।
अब बताना तो पड़ेगा ना, और तुम्हारी मम्मी ही तो है, उनसे क्या शरमाना,,, मैंने कहा।
कौन किससे शरमा रहा है, आंटी ने अंदर आते हुए कहा।
कुछ नहीं मम्मी,,, वो बस ऐसे ही,,, अपूर्वा ने कहा।
वो आंटी दरअसल अपूर्वा भी गिर गई थी तो इसे भी थोड़ी चोट लग गई है,,, मैंने कहां
ये भी गिर गई थी, क्या कर रहे थे तुम दोनों,, झगड़ तो नहीं रहे थे,,, आंटी ने कहा।
नहीं आंटी, वो मैं गिरा तो आवाज सुनकर इसकी आंख खुल गई और मुझे उठाने के लिए जैसे ही ये हड़बड़ाहट में बेड से उतरने लगी तो ये भी गिर गई,,, मैंने सफाई पेश करते हुए कहा।
क्रमशः.................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--50
गतांक से आगे ...........
कहा पर लगी है,,, आंटी ने अपूर्वा तरफ देखते हुए पूछा।
अपूर्वा ने अपनी छाती की तरफ इशारा कर दिया।
यहां कैसे लगी,,, आंटी ने पूछा।
वो इनके उपर गिरी थी, पेट के बल तो,,,,, अपूर्वा ने कहा।
बेटा अब तुम सीधी लेट सकते हो,,,, दर्द कैसा है अब, आंटी ने पूछा।
जी आंटी बिल्कुल ठीक हो गया हे, आपके हाथों में तो जैसे जादू है,, मैंने सीधा होते हुए कहा।
तभी मेरा मोबाइल बजने लगा। मैंने उठाकर देखा, मैम का फोन था।
मैम ने हमारे आने के बारे में पूछा तो मैंने कह दिया कि 9 बजे तक आ जायेंगे, सभी साथ ही आयेंगे।
मैंने टाइम देखा, 7 बजने वाले थे।
कोमल उठ गई क्या आंटी, मैंने पूछा।
कहां, अभी तो तीनों घोड़े बेच कर सो रही हैं, आंटी ने कहा।
मैं उठकर दूसरे कमरे में गया। देखा तो जैसे रात को सोते छोड़कर गया था तीनों वैसे ही सो रही थी।
रात को कोई भी हिली भी नहीं। कैसी नींद है इनकी।, मैंने मन ही मन सोचा और जाकर कोमल को उठाया।
मेरी आवाज सुनकर नवरीत भी और सोनल भी उठ गई।
गुड मॉर्निंग, नवरीत ने अंगडाई लेते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग, कैसी नींद आई रात को, मैंने कहा।
हममम, ये सुबह इतनी जल्दी क्यों हो जाती है, कोमल ने आंखें मसलते हुए कहा।
तभी आंटी चाय लेकर आ गई।
आंटी के आते ही सोनल और कोमल जल्दी से उठकर बैठ गई।
गुड मॉर्निंग बच्चो,,, कैसे नींद आई,,, आंटी ने चाय टेबल पर रखते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग आंटी, बढ़िया नींद आई, सभी ने एक साथ कहा।
ठीक है, अब चलो जल्दी से उठो और तैयार हो जाओ, चलना भी है, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
तभी अपूर्वा कमरे में आई, सभी ने उसे गुड मॉर्निंग कहा।
मैं दूसरे कमरे में जाकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर व नहाकर पहले वाले कमरे में आया।
दरवाजा हलका सा खुला था, जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, तुरंत ही बंद करना पड़ा, कोमल नहाने के बाद कपड़े पहन रही थी।
मैं नीचे आकर अंकल के पास बैठ गया।
उठ गये बेटा, कैसी नींद आई,, अंकल ने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर अखबार पढ़ते हुए ही पूछा।
अच्छी नींद आई अंकल,, मैंने कहा।
इतने में बाकी सभी भी नीचे आ गई और सोफो पर बैठ गई।
सुना, सोते हुए गिर गये थे, अंकल ने अखबार साइड में करके हंसते हुए कहा।
मुझे बहुत शर्म आई, और मैंने सिर्फ 'हां' में जवाब दिया।
बस फिर क्या था, सभी लड़कियां हंसने लगी। अपूर्वा शायद किचन में थी। सोनल, नवरीत और कोमल यहीं पर बैठी थी।
बच्चे हो क्या, जो सोते हुए गिर गये थे, नवरीत ने चहकते हुए पूछा।
मैंने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर नीचे देखने लगा।
कुछ देर बाद आंटी ने खाना लगा दिया। अंकल, अपूर्वा, कोमल और मैंने खाना खाया। नवरीत और सोनल बस खाली-पीली चेयर घेरकर बैठ गई, खाना तो खाया नहीं।
साढ़े आठ बजे हम ऑफिस में लिए निकल पडे।
कोमल अपूर्वा की स्कूटी पर थी और मैं अपनी बाइक पर।
ऑफिस पहुंचकर हमने व्हीकल पार्क किये और कोमल अंदर चली गई, मैं और अपूर्वा ऑफिस में आ गये।
शकुन्तला अभी सफाई कर रही थी तो हम बाहर ही खड़े हो गये।
कैसा लगा मेरा घर, और मम्मी-पापा, अपूर्वा ने पूछा।
हम्मम,, घर भी अच्छा है और घरवाले तो और भी अच्छे हैं, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
तभी शकुन्तला सफाई खत्म करके बाहर आ गई।
कैसी हो शकुन्तला, मैंने उससे पूछा।
बढ़िया हूं साहब, शकुन्तला ने मुस्कराते हुए जवाब दिया।
अपूर्वा ने मेरी तरफ थोड़ी अजीब सी नजरों से देखा और फिर हम अंदर आ गये।

क्या हुआ, ऐसे घूरकर क्यों देख रही हो, मैंने अपूर्वा से कहा।
कुछ नहीं, वो आपने उसका नाम लेकर पूछा ना इसलिए,,, बस,,, अपूर्वा ने कहा।
तभी अपूर्वा एकदम से चेयर पर बैठ गई। उसका हाथ उसके माथे पर पहुंच गया और माथे को दबाने लगा। उसकी आंखें बंद हो गई।
क्या हुआ,,,, मैंने उसे संभालते हुए कहा।
मैंने जैसे ही उसको पकड़ा मुझे हैरानी हुई, उसका शरीर तप रहा था।
चक्कर आ रहे हैं, अपूर्वा ने कहा।
तुम आराम से बैठो, तुम्हें फिर से बुखार हो गया है, मैंने कहा और उसको आराम से चेयर पर कमर टिका कर बैठा दिया।
बाहर आकर मैंने घर की बैल बजाई, कोमल ने दरवाजा खोला।
अपूर्वा की तबीयत ठीक नहीं है, मैम से गाड़ी की चाबी लाना, उसे डॉक्टर के पास ले जा रहा हूं, मैंने कहा।
क्या हुआ, अभी तो ठीक ठाक थी, कोमल ने कहा और फिर बिना मेरे जवाब का इंतजार किये अंदर चली गई।
चलो मैं भी चलती हूं, कहते हुए कोमल ने गाड़ी की चाबी मुझे दे दी और ऑफिस की तरफ चली गई।
मैंने गैरेज में से गाड़ी निकाली और आंगन में लाकर खड़ी कर दी। फिर मैं ऑफिस में जाकर अपूर्वा को सहारा देकर लाया और गाड़ी की पिछली सीट पर लेटा दिया। कोमल ने बैठकर उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसका सिर दबाने लगी।
जल्दी ही हम डॉक्टर के क्लीनिक पर थे। वहां डॉक्टर ने अपूर्वा को एक इंजेक्शन लगाया और कुछ टेबलेट खाने के लिए दी।
नोर्मल फीवर है, मौसम चेंज हो जाने के कारण हो जाता है, डॉक्टर ने कहा।
थैंक्यू डॉक्टर,,, मैंने कहा और डॉक्टर की फीस देकर अपूर्वा को लेकर गाड़ी में लाकर लेटा दिया।
मैंने गाड़ी अपूर्वा के घर की तरफ दौड़ा दी।
पंद्रह मिनट में हम अपूर्वा के घर के सामने थे। मैंने गाड़ी को साइड में खड़ा किया। मैंने अपूर्वा को गोद में उठा लिया, जैसे छोटे बच्चे को उठाते हैं।
अपूर्वा को कुछ होश नहीं था, उसका शरीर बहुत ज्यादा तप रहा था।
क्या हुआ, अंदर पहुंचते ही सामने से आती आंटी ने पूछा।
बुखार हो गया है आंटी, मैंने कहा।
ओहहह,,, ये तो रोज ही होने लगा,,, ठीक है,, उपर इसके रूम में लेटा दो, मैं डॉक्टर को फोन बुलाती हूं, आंटी ने कहा।
नहीं, उसकी कोई जरूरत नहीं है, अभी डॉक्टर के पास से आ रहे हैं, मैंने कहा और उपर की तरफ चल दिया।
उपर आकर मैंने अपूर्वा को बेड पर लेटा दिया, कोमल ने उसे कम्बल ओढ़ा दिया।
मैं बेड पर बैठ गया और अपूर्वा के सिर को सहलाने लगा। उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने गाल पर रखकर गर्दन को टेढी करके अपने गर्दन और गाल के बीच में दबा लिया।
तभी आंटी भी उपर आ गई। मैंने अपना हाथ हटाना चाहा पर अपूर्वा ने नहीं हटाने दिया।
आंटी ने आकर उसके माथे पर हाथ रखकर देखा।
मेरी बच्ची, कितना तेज बुखार है, कहते हुए आंटी बेड पर बैठ गई और कम्बल को सही तरह से औढाने लगी (वैसे पहले ही सही तरह से औढ़ाया हुआ था)।
मैंने फिर से अपना हाथ हटाना चाहा पर अपूर्वा ने नहीं हटाने दिया।
कुछ देर तक हम वहीं पर बैठे रहे। आंटी बार बार अपूर्वा के माथे सहलाती रही और बालों को संवारती रही।
ओके आंटी, अब हम चलते हैं, शाम को फिर आउंगा, हाल-चाल पूछने के लिए,, कहते हुए मैंने अपना हाथ हटाना चाहा।
अपूर्वा ने मेरी तरफ देखा, और फिर अपने गाल से रगड़ते हुए मेरा हाथ छोड़ दिया।
अरे बेटा, बैठो, अभी चाय आ रही है, पीकर जाना, आंटी ने खड़े होते हुए कहा और फिर काम वाली को आवाज लगाई।
कुछ देर में कामवाली चाय लेकर आ गई। चाय लेकर कोमल भी बेड पर बैठ गई। हमने चाय पी और फिर एक बार फिर अपूर्वा के बालों को संवारते हुए उसके गालों को सहलाया बाहर की ओर चल दिये।
शाम को आओगे ना, पिछे से अपूर्वा की आवाज आई।
हां, ऑफिस से सीधा इधर ही आ जाउंगा, मैंने कहा और फिर नीचे आ गये।
 
आंटी को बाये करके हम बाहर आ गये। कोमल आगे ही बैठ गई। मैंने गाड़ी स्टार्ट की और ऑफिस की तरफ चल पडे।
कोमल मेरी तरफ होकर बैठी थी जिससे गियर चेंज करते हुए मेरा हाथ बार-बार उसके घुटनों से टच हो रहा था।
मैंने उसकी तरफ देखा तो मुस्करा दी और फिर सामने देखने लगी।
मुझे लगता है कि अपूर्वा आपसे प्यार करती है, कोमल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं, हम बस बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैंने कहा और मुस्करा दिया।
तुम्हें पता नहीं चला है, पर ये गहरी दोस्ती प्यार में बदल चुकी है, कोमल ने कहा।
तुम चाहे बेशक अभी भी इसको दोस्ती ही समझ रहे हो, पर अपूर्वा तुमसे प्यार करने लगी है, कोमल ने थोड़ा रूककर कहा।
तुम्हें कैसे पता, मैंने सामने देखते हुए ही कहा।
बस मुझे पता है, मैं लडकी हूं, और मुझे पता है कि प्यार में लड़की कैसे बिहेव करती है, आप जब सामने होते हैं तो जो उसके चेहरे पर चमक देखती हूं, जिस तरह से वो आपके साथ घुलती मिलती है, कोमल ने कहा।
अभी कैसे आपका हाथ अपने गालों पर से हटाने नहीं दे रही थी, कोमल ने फिर कहा।
ऐसा नहीं है, हम एक दूसरे से बहुत ज्यादा अटैच हैं, इसलिए हमारे बीच में कोई फॉर्मलटिज नहीं है, और इसीलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है, पर हम बस बहुत ही अच्छे, गहरे दोस्त हैं, और एक दूसरे से भावनात्मक रूप से अटैच हैं, मैंने उसे समझाते हुए कहा।
आप कुछ भी कहो, पर मुझे पता है कि वो आपसे प्यार करती है, कोमल ने अपना डिसीजन सुना दिया।
और आप भी करते हो, कोमल ने थोड़ा रूककर मेरी तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा।
मैं भी उसकी तरफ देखकर बस मुस्करा दिया।
करते हो के नहीं, बताओ,,, कोमल ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, तुम्हें वैसे ही लग रहा है, मैंने अपनी गर्दन को मोड कर उसके हाथ से अपने गाल टच करते हुए कहा।
नहीं, तुम करते हो, बस तुम्हें अभी तक इसका एहसास नहीं हुआ है, कोमल ने कहा और मेरे गालों को पकड़कर खिंच लिया।
आई------ क्या कर रही हो, दर्द हो रहा है,,, मैंने उसका हाथ हटाते हुए कहा।
बातों ही बातों में ऑफिस पहुंच गये।
कोमल उतरकर अंदर चली गई और मैंने गाड़ी को गैरेज में पार्क कर दिया।
बॉस यहीं पर है क्या, मैं गाड़ी को खड़ी करके आया तो कोमल दरवाजे पर ही खड़ी थी।
आज कोई भी नहीं है, दीदी की सहेली के यहां गये हुए हैं, कोई फंक्शन वगैरह है, कोमल ने कहा।
मैं ऑफिस की तरफ चल दिया। मैं अभी ऑफिस में आकर चेयर पर बैठा ही था कि कोमल भी पिछे पिछे आ पहुंची। वो अपूर्वा को चेयर को खींचकर मेरे पास लाई और मेरी चेयर पर अपनी कोहनी टेककर बैठ गई।
मैंने उसकी तरफ देखा और मुस्करा दिया। कोमल भी मुस्करा दी।
तुम पक्का हो ना कि तुम अपूर्वा से प्यार नहीं करते,,, कोमल ने पूछा।
मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो मेरी ही तरफ देख रही थी।
तुम क्यों इतनी इंक्वायरी कर रही हो, मैंने उसकी तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा।
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कुछ ढूंढने की कोशिश की और अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया।
क्रमशः....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--51
गतांक से आगे ...........
तभी कामवाली अंदर आई।
मैं जा रही हूं, मेमसाहब, शाम को आ जाउंगी,,, कामवाली ने कहा।
हां ठीक है, अगर जरूरत हुई तो मैं फोन कर दूंगी,, तुम्हारा नम्बर तो है ना यहां पर,,, कोमल ने हाथ हटाते हुए कहा।
मेरे पास फोन नहीं है मेमसाहब,,, कामवाली ने कहा।
ठीक है तुम रहने देना, आज कोई है भी नहीं, तो मैं बाहर ही खा लूंगी,, कोमल ने कहा।
ओके मेमसाहब,, कामवाली ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्करा कर कहा और बाहर चली गई।
कोमल उठकर बाहर गई और कुछ देर बाद वापिस आई।
कहां गई थी, मैंने पूछा।
दरवाजा बंद करके आई हूं, कोमल ने कहा और दूसरे दरवाजे से बाहर बाथरूम की तरफ निकल गई।
मैं उसे जाते हुए देखने लगा। सफेद झिन्नी पायजामी में से लाल पेंटी की हल्की सी झलक मिल रही थी।
उसके बाहर जाने के बाद मैं दरवाजे की तरफ ही देखता रहा।
कुछ देर बाद वो वापिस आई और मेरी तरफ देखकर मुस्करा दी।
आकर वो चेयर पर बैठ गई और अपना हाथ मेरी चेयर पर गर्दन के पास रख लिया। उसके हाथ की उंगलिया मेरी गर्दन पर टच हो रही थी।
मैं काम करने लगा, और कोमल बैठे बैठे मुझे देखती रही। मुझे उसकी उंगलियां अपनी गर्दन पर ज्यादा टच होती हुई महसूस होने लगी।
उसकी उंगलिया धीरे धीरे मेरी गर्दन पर बढ़ती जा रही थी। मुझे उसके अपने हाथ पर उसके बूब्स का हल्का हल्का स्पर्श महसूस हुआ। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था और उसकी सांसे तेज चल रही थी।
मैं उसकी तरफ देखकर मुस्करा दिया। उसे तो जैसे सिग्नल मिल गया हो। उसने अचानक से मेरा मुंह पकड़ा और अपने तपते हुए होंठ मेरे होंठों पर रख दिये।
एक बार तो मैं शॉक रह गया, पर फिर मेरे हाथ भी उसके सिर के पिछे चले गये और मैं उसके लबों को चूसने लगा।
तभी दरवाजे पर मुझे कोई खड़ा हुआ महसूस हुआ।
मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो कामवाली खडी थी। उसका मुंह खुला हुआ था और वो शाक्ड होकर हमें ही देखी जा रही थी।
मैंने हाथ से उसे जाने का इशारा किया तो उसने अपने हाथ में पकड़ी चाबी दिखाई, मैंने साइड में रखने का इशारा किया।
वो बिना कोई आवाज किये चाबी को पास वाली टेबल पर रखकर चली गई।
कोमल तो पागलों की तरह मुझे किस्स्ससस किये जा रही थी, उसे तो पता भी नहीं चला कि कामवाली आई थी।
जब हमारी सांसे उखड़ने लगी तो मैंने उसको खुद से अलग किया।
मैं तुमसे आखिरी बार पूछ रही हूं, तुम अपूर्वा से प्यार नहीं करते ना,,, कोमल ने बदहवासी में कहा।
मैंने अपने हाथ उसके सिर के पिछे रखे और उसको खींचकर उसके लबों को अपने लबों में फिर से कैद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा।
कोमल मेरे होंठों को काटने लगी। उसके हाथ मेरी शर्ट पर पहुंच गये और वो मेरे बटन खोलने लगी। बटन खोलकर उसने शर्ट को साइड में कर दिया और कभी मेरी छाती और कभी मेरी कमर में हाथ घुमाने लगी। उसके हाथ घुमाने से मुझे गुदगुदी हो रही थी।
मेरे हाथ उसके उरोजों पर पहुंच गये। आहहहह क्या अहसास था एकदम नरम नरम और तने हुए उरोज। मेरा लिग बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा।
कोमल कभी मेरे निप्पल्स को अपनी उंगलियाें बीच लेकर मसल देती थी कभी मेरी नाभि में अपनी उंगली डालकर हलके हलके घुमाने लगती थी।
मैं पागलों की तरह उसके उरोजों को दबाये जा रहा था, बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। इस मजे के कारण लिंग ने पी्रकम की कुछ बूंदे भी अंडरवियर के हवाले कर दी थी, शायद बाहर निकलने के लिए रिश्वत दे रहा था, या डरा-धमका रहा था।
कोमल का हाथ मेरी जींस पर आया और वो बेल्ट खोलने लगी।
मैंने उसे अपने से दूर किया। वो प्रश्नवाचक दृष्टि से मेरी आंखों में देखने लगी, मानो पूछना चाह रही हो 'क्या हुआ'?
मैम कब तक आयेगी, मैंने उससे पूछा।
वो तो देर से आयेंगे रात को, कोमल ने कहा और अपने हाथ मेरे सिर के पिछे रखकर मेरे सिर को अपनी तरह खिंचने लगी।
तुम अंदर जाओ, मैंने कोमल से कहा।
कोमल आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगी।
क्यों, मुझे करना है, मैं कहीं नहीं जा रही, कोमल ने कहा और मेरे होंठों पर टूट पड़ी।
मैंने कुछ देर उसके होंठ चूसकर उसे अलग किया।
यहां कहां करोगी फिर, अंदर आराम से करेंगे, मैंने कहां
मेरी बात सुनकर कोमल मुस्कराई और मेरे गालों को भींचते हुए खड़ी हो गई और बाहर की तरफ चल दी।
दरवाजे के पास जाकर उसने अदा के साथ पिछे गर्दन घुमा कर मेरी तरफ देखा और अपनी उंगली से पिछे पिछे आने का इशारा किया।
उसके इस इशारे से तो मैं घायल ही हो गया।
तुम चलो मैं अभी आ रहा हूं, मैंने कहा और उसकी तरफ आंख दबा दी।
मेरे साथ आओ ना, कोमल ने मेरी तरफ मुड़ते हुए कहा।
कहा ना आ रहा हूं, तुम चलो,,,, मैंने कहा।
मैं नहीं चाहता था कि पड़ोसी हमें साथ-साथ अंदर जाते हुए देखे। इसलिए मैं बाद में जाने के लिए कह रहा था।
कोमल चली गई। कुछ देर बाद मैं उठा और ऑफिस से बाहर आ गया। कोमल जा चुकी थी।
मैं इधर उधर देखते हुए अंदर आ गया। कोमल दरवाजे के पास ही खड़ी थी। जैसे ही मैं अंदर आया उसने मुझे कसकर बाहों में भींच लिया और मेरे लबों पर टूट पड़ी।
मैंने उसे बाहों में उठा लिया और मैम के बेडरूम की तरफ चल पड़ा। उसके हाथ मेरी छाती में मेरे निप्पल से छेड़छाड़ कर रहे थे।
बेडरूम में आकर मैंने उसे बेड पर पटक दिया।
आउचचचच, आराम से नहीं लेटा सकते थे,,, कोमल ने अपनी कमर में हाथ रखकर सहलाते हुए कहा।
अगले ही पल वो बेड पर घुटनों के बल हुई और मेरी शर्ट को पकड़कर मुझसे अलग कर दिया और फिर मेरी बेल्ट को निकाल कर जींस को हुक भी खोल दिया।
मैंने उसे उपर की तरफ खींचा और उसकी टी-शर्ट को पकड़कर उसके शरीर से अलग कर दिया। टी-शर्ट निकलते ही उसके दूध से सफेद उरोज मेरी आंखों के सामने आ गये। पूरी तरह से उन्नत, एकदम तने हुए, मेरे होंठों को आमंत्रित कर रहे थे।
उसका गोरा सपाट पतला सा पेट, पूरी तरह से चर्बी रहित, और उस पर सुशोभित लम्बी नाभि तो जुल्म ही ढा रही थी।
जब तक मैंने उसकी टी-शर्ट निकाली उसने मेरी जींस को सरकाकर घुटनों तक कर दिया था और मेरा कड़क तना हुआ लिंग उसके हाथों में पहुंच चुका था।
उसने मुझे पकड़कर बेड पर खिंच लिया और फिर धक्का धेकर लेटा दिया और मेरी जींस और अंडरवियर को मेरे पैरों से अलग करके घुटनों के बल ही खडे हुए मेरे लिंग को घूरघूर कर देखने लगी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने उपर खिंच लिया। वो झटके से मेरे उपर आ गिरी। उसके उरोज मेरी छाती में दबने से उसके मुंह से एक दर्द भरी आह निकली।
पर उस दर्द में उसको जो मजा आया होगा, क्योंकि उसने सीधे मेरे लबों को अपने लबों में कैद कर लिया और जोर जोर कभी उपर वाले होंठ को तो कभी नीचे वाले होंठ को चूसने लगी।
वो सरककर पूरी तरह से मेरे उपर हो गई। मेरा लिंग उसकी योनि पर पजामी के उपर से ही दब गया। उसके मुंह से आह निकल कर मेरे मुंह में समा गई।
उसने अपनी योनि को मेरे लिंग पर जोरों से रगड़ना शुरू कर दिया। पजामी इतनी मखमली और झिन्नी थी कि ऐसा लग रहा था कि मेरा लिंग सीधा उसकी योनि पर ही रगड़ रहा है। मैंने अपने हाथ उसके नितम्बों पर रख दिये और जोर जोर से मसलने लगा। मैं नीचे से कमर उठाकर लिंग को उसकी योनि पर दबा देता और साथ ही उसके नितम्बों को कसकर नीचे की तरफ दबा देता। दोनों के मुंह से मजे में आह निकलकर एक दूसरे में मुंह में समा जाती।
मैंने कोमल को झटका देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उसके उपर आ गया। कुछ देर तक उसके होंठों को चुसता रहा और लिंग से उसकी योनि पर हल्के हल्के धक्के मारता रहा। जैसे ही मैं लिंग को उपर उठाता उसके साथ साथ कोमल के कुल्हें भी हवा में उठकर मेरे लिंग से योनि को चिपकाने की कोशिश करते।
मैं उससे अलग हुआ और उसकी पजामी को उसके शरीर से अलग कर दिया।
कोमल वासना के ज्वर में बुरी तरह तप रही थी। उसने अपने कुल्हों को उपर उठाकर पजामी निकालने में हैल्प की और जैसे ही मैंने पजामी निकाल कर साइड में रखी उसने मुझे पकड़ कर अपने उपर खिंच लिया और अपनी नंगी योनि को मेरे लिंग पर जोरों से मसलने लगी।
मैंने अपने होंठ उसके उरोजों पर रख दिये और उसके निप्पल को होंठों के बीच लेकर चुसने लगा। कोमल मचल उठी और, और भी जोर से अपनी योनि को उछाल-उछाल कर मेरे लिंग पर मारने लगी। मेरा लिंग उसकी जांघों के बीच में घुस गया और उसकी योनि छिद्र पर ठोकरें मारने लगा।
मैं उसके उभारों को चुसे जा रहा था और वो पागल होती जा रही थी। उसके हाथ मेरे सिर को अपने उभारों पर दबा रहे थे। उसके मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकल रही थी।
उसके उभारों को चुस चुस कर जब मेरा मुंह दुखने लगा तो मैंने अपना मुंह हटाया और उसके मस्त पेट को चुमते हुए नीचे की तरफ आने लगा।
कोमल के पैर मेरे पैरों से बुरी तरह जंग लड़ रहे थे, जिससे मेरे पैरों के बात खिंचने के कारण मुझे दर्द हो रहा था। पर जो मजा आ रहा था उसके सामने ये दर्द कुछ भी नहीं था।
मेरे नीचे की तरफ आने के कारण मेरा लिंग उसकी योनि से दूर हो गया था, जो उसे सहन नहीं हुआ और उसने मुझे वापिस अपने उपर खींच लिया और मेरे होंठों को चूसने लगी।
उसने अपने हाथ हमारे जांघों के बीच में किए और लिंग को अपनी योनि पर सैट करने लगी। मैं समझ गया कि अब ये नहीं रूकने वाली। मैंने थोडा उपर होकर लिंग सैट करने में उसकी हैल्प की और जैसे ही लिंग उसके योनी छिद्र पर लगा मैंने एक हल्का सा धक्का मार दिया।
कुछ तो उसकी योनि से बहते यौवन रस की चिकनाई और कुछ उसके हाथों का सपोर्ट जिससे लिंग इधर उधर नहीं फिसला और सुपाडा उसकी योनि में प्रवेश कर गया।
उसके मुंह से दर्द के मारे जोर की चीख निकली। मैंने तुरंत उसके मुंह को अपने होंठों से बंद कर दिया और उसकी बाकी की चीख मेरे मुंह में गुम हो गई।
उसने अपनी योनि को इधर उधर करके लिंग को बाहर निकाल दिया। उसकी आंखों में आंसू थे। मैंने उसके आंसुओं को अपने होंठों से पिया और उसकी आंखों में देखने लगा।
बहुत दर्द हो रहा है, उसने सुबकते हुए कहा।
पहली बार तो होगा ही, पर ज्यादा देर नहीं होगा, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
मैंने ऐसे ही अपने लिंग को उसकी योनि के उपर सहलाना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद वो वापिस अपने हाथों को जांघों के बीच लाई और मेरे लिंग को अपनी योनि पर सैट किया।
अबकी बार एक बार में ही पूरा डाल देना, बार बार दर्द तो नहीं होगा, उसने कहा।
मैंने हल्का सा दबाव डाला तो मेरा सुपाड़ा उसकी योनि में घुस गया। उसकी आंखें दर्द से फैल गई। परन्तु अबकी बार उसने लिंग को बाहर नहीं निकाला। उसके हाथ अभी भी मेरे लिंग को पकड़े हुए थे।
कुछ देर ऐसे ही रहकर मैंने एक जोर का झटका मारा और मेरा लिंग उसकी योनि की दीवारों को चीरता हुआ दो इंच तक अंदर घुस गया।
उसका शरीर दर्द से कांप उठा और उसकी मुट्ठी मेरे लिंग पर कस गई। ऐसा लग रहा था कि वो भींच कर मेरे लिंग को फोड़ देगी। बहुत ज्यादा दर्द हुआ लिंग में। पर मैंने सह लिया।
मैंने थोड़ा सा उपर उठते हुए अपने हाथ उसके उभारों पर कस दिये और मसलने लगा। उसके दूसरे उभार को अपने मुंह में भरकर चूसने लगा। कुछ देर में वो शांत हुई और नीचे से अपने कुल्हों केा थोड़ा थोड़ा उठाने लगी।
अभी तो पूरा बाहर ही है, जब इतने से में इतना ज्यादा दर्द हो रहा है तो, फिर पूरा अंदर जायेगा तो कितना दर्द होगा, कोमल ने मेरे लिंग को अपने हाथ से नापते हुए कहा।
उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था, पर उस डर में मजे के चिह्न भी दिखाई दे रहे थे।
मैंने उसके हाथों को बीच में से निकाला और लिंग को हल्का सा बाहर खींचा, परन्तु साथ साथ कोमल के कुल्हे भी उपर उठे। मैंने फिर से एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लिंग सीधा उसकी गहराईयों में उतरकर उसके गर्भाश्य से जा टकराया। उसकी चीख निकले उससे पहले ही मैंने अपने होंठों से उसके होंठों को सील कर दिया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--52
गतांक से आगे ...........
उसकी आंखों से झर-झर पानी बहने लगा और उसके मुंह से घुटी घुटी चीख निकलकर मेरे मुंंह में समाने लगी। उसका शरीर अकड़ गया और उसके हाथ बेड पर चद्दर पर कस गये और उसकी योनि ने इतने दर्द के बाद भी अपना लावा उगल दिया।
इस दर्द में शायद उसे मजा कहीं ज्यादा आया था, क्योंकि उसकी योनि पानी छोउ़े जा रही थी। मैं कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा और उसके होंठों को चूसता रहा। मेरा लिंग उसकी योनि में बुरी तरह फंसा हुआ था।
जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो वो नोर्मल होकर बेड पर लेट गई। उसके लेटने के कारण मेरा लिंग थोड़ा सा बाहर निकल आया।
मैंने लिंग को और आधा बाहर निकाला और फिर से एक जोर दार धक्का मारा। लिंग सीधा गर्भाश्य से जाकर टकराया। उसका शरीर एक बार फिर से हवा में उठ गया, परन्तु अगले ही पल वापिस बेड पर जा गिरा।
वो अपने कुल्हों को उपर उठाकर मेरे लिंग को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी। उसके पैर मेरी कमर पर लिपट गए और उसके हाथ मेरे बालों को सहलाने लगे और वो मेरे होंठों को काटने लगी। बार बार वो अपने उभारों को मेरी छाती पर मसल रही थी।
अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया और मैंने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। जल्दी ही वो भी अपने कुल्हे उठा उठा कर मजे लेने लगी।
उसकी योनि की इतनी ज्यादा कसावट और गर्मी मैं सह न सका और दो मिनट में ही मेरे लिंग ने उसके अंदर पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरी पिचकारियों महसूस करते हुए उसका शरीर भी अकड़ गया और उसने भी अपना रस मेरे रस में मिला दिया।
कुछ सैकंड तक उसका शरीर अकड़ा रहा और उसकी योनि मेरे लिंग को कभी छोड़ती और फिर जकड़ लेती। छोउ़ने का अहसास बस हलका सा हो रहा था, क्योंकि लिंग योनि में बुरी तरह से फंसा हुआ था और अंदर बिल्कुल भी जगह नहीं थी।
जब चरम की लहरें थमी तो मैं उसके उपर गिर गया। अब मुझे लिंग में हल्का हल्का दर्द भी महसूस हो रहा था।
मैं उसके उपर ऐसे ही लेटा रहा और वो मेरे बालों और कमर को सहलाती रही।
कुछ देर बाद उसने मेरे चेहरे को पकड़कर उपर उठाया और मेरे माथे, गालों और फिर होंठों पर छोटी-छोटी चुम्मी देने लगी। उसे मुझपर बहुत ही प्यार आ रहा था शायद।
मेरा लिंग जो हल्का हल्का सुस्त हो गया था, उसकी चुम्मीयों के कारण फिर से अकड़ गया। मेरे लिंग को अकड़ता महसूस करके उसके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान तैर गईं और उसने अपने कुल्हों को उपर की तरफ उठा दिया। मैं ऐसे ही लेटा रहा।
वो बार बार अपने कुल्हों को उपर उठाने लगी, परन्तु मैं कुछ नहीं कर रहा था। आखिरकार उसने हार मानकर मेरी पीठ में मुक्के मारने शुरू कर दिए।
करो ना, क्यों तड़पा रहे हो, उसके मुक्के मारते हुए बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा और मेरे गालों को चुमने लगी।
मैंने लिंग को पूरा बाहर निकाला और फिर धीरे धीरे करके पूरा अंदर डाल दिया। कोमल उसी तरह मेरे गालों को चूमती ही जा रही थी।
मैंने फिर से अपने लिंग को पूरा बाहर निकाला और जैसे ही धीरे धीरे अंदर करने लगा, कोमल ने नीचे से अपने कुल्हों को उपर उछाल दिया और मेरा लिंग सीधा उसकी गहराईयों में उतर गया। उसके मुंह से आनंद भरी आह निकली।
फिर तो ऐसे ही शुरू हो गया, मैं लिंग को पूरा बाहर निकालता और जब धीरे धीरे अंदर करता तो वो नीचे से अपने कुल्हें उछाल देती और लिंग एकदम से पूरा अंदर पहुंच जाता।
अबकी बार ये मिलन कुछ ज्यादा देर तक चला, पर बहुत ज्यादा देर न चल सका। जल्दी ही कोमल ने मुझे अपनी बाहों में जोरों से कस लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर कस दिये। उसके पैर मेरे कुल्हों पर बुरी तरह जकड़ गये और उसकी योनि ने मेरे लिंग को जकड़ लिया। उसकी ये जकड़न मैं भी सहन नहीं कर सका और फिर से अपना प्रेम रस उसके प्रेम रस में मिलाना शुरू कर दिया।
चरम आनंद को प्राप्त करने के बाद हम ऐसे ही लेट गये और कब हमारी आंख लगी पता ही नहीं चला।
जब मेरे मोबाइल की घंटी बजी तो कोमल ने मुझे झकझोर कर उठाया। मैंने आंखें खोलते हुए उसकी तरफ देखा।
मोबाइल बज रहा है, उसने कहा।
कोमल के चेहरा पर परम संतुष्टि दिखाई दे रही थी। मेरा लिंग सिकुड कर छोटा सा होकर उसकी योनि से बाहर आ चुका था।
मैं जैसे ही उठने लगा कोमल भी मेरे साथ ही उपर उठ गई। उसकी योनि रस और मेरे रस के कारण हमारे अंग हल्के से आपस में चिपक गये थे, जिसके कारण मेरे उठने पर उसे दर्द हुआ। हल्का सा मुझे भी हुआ। खिंचाव महसूस होते ही हमारे अंग अलग हो गये।
इनका तो अलग होने का मन ही नहीं कर रहा, चिपके बैठे थे,, कहकर कोमल हंसने लगी।
उसकी बात सुनकर मैं भी हंसने लगा। मैंने जींस में से मोबाइल निकाल कर देखा तो सोनल का फोन था।
हाय, मैंने कॉल पिक करके कहा।
हाय, कितनी देर में आ रहे हो,,, सोनल ने कहा।
हूं,,, साढ़े पांच बजे तक आ जाउंगा, मैंने कहा।
कहां खोये हुये हो मिस्टर 6 बज चुके हैं,, कोमल ने हंसते हुए कहा।
क्या,,, मेरे मुंह से आश्चर्य से निकला।
मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो 6 बजकर 10 मिनट हो चुके थे।
बस निकल रहा हूं, कुछ देर में पहुंच जाउंगा,, मैंने कहा और बाये करके कॉल काट दी।
तभी मुझे याद आया कि अपूर्वा के घर भी जाना था।
मर गया यार, अपूर्वा के घर भी जाना था।
मैं उठकर जल्दी से कपड़े उठाकर बाथरूम में गया और फ्रेश होकर कपड़े पहन लिए।
कोमल भी उठ गई थी और अपने कपड़े पहन चुकी थी।
जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो कोमल बेड की चदद्र को उठा रही थी जो उसके और मेरे रस से भीगी हुई थी।
उसने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर शरमाकर नीचे देखने लगी।
मैं उसके पास गया और उसके माथे पर एक किस्सस की।
ओके मैं अब चलता हूं, बहुत लेट हो गया हूं, अपूर्वा भी इंतजार कर रही होगी, सुबह कहकर आया था कि ऑफिस से सीधा आउंगा और सोनल का फोन भी आया था, मैंने उसे कहा और उसके होंठों को चूसने लगा।
अब लेट नहंी हो रहे, कोमल ने मुझे धक्का देकर अलग किया।
ओके बाये, चलता हूं, कहते हुए मैं बाहर की तरफ चल दिया।
अचानक कोमल ने मुझे पिछे से पकड़ लिया और मुझसे लिपट गई।
थैंक्स, उसने कहा।
मैंने उसके हाथों को अलग किया और उसकी तरफ घूमते हुए उसके गालों पर किस करते हुए कहा - थैंक्स तो मुझे तुम्हें कहना चाहिए।
मैं उसके होंठों पर एक किस लेकर बाहर आ गया और बाइक उठाकर चल दिया। कोमल दरवाजे पर खड़ी हुई मुझे जाते हुए देख रही थी।

मैं सीधा अपूर्वा के घर पहुंचा। पहुंचकर मैंने बैल बजाई।
कुछ देर बाद दरवाजा खुला, सामने नवरीत खड़ी थी।
हाय, कहते हुए मैं अंदर जाने लगा।
जैसे ही मैं अंदर घुसा नवरीत ने मेरे गाल पर एक तमाचा जड़ दिया। मैं तो वहीं पर एक दम सुन्न हो गया, मेरा हाथ मेरे गाल पर पहुंच गया और आंखे नवरीत को देखने लगी।
सॉरी, ज्यादा तेज लग गया, मैं तो बस हल्का सा मारना चाहती थी, नवरीत ने अपना हाथ मेरे गाल पर मेरे हाथ के उपर रखकर सहलाते हुए कहा।
पर क्यों मारना चाहती थी, मैंने क्या किया है?, मैंने अपना हाथ उसके हाथ के नीचे से निकालते हुए कहा।
उसका हाथ अब सीधा मेरे गाल को सहला रहा था।
मेरी बात सुनकर उसने मेरा हाथ पकड़ा और खिंचते हुए मुझे उपर ले गई अपूर्वा के रूम में। अंकल आंटी नीचे ही सोफे पर बैठे हुए थे। मैंने उन्हें गुड इवनिंग कहा। पर नवरीत तो मुझे खींचे ही ले जा रही थी। रूम में जाते ही मैंने देखा कि अपूर्वा बेड पर औंधी लेटी हुई है।
लो ले आई हूं पकड़ कर, अब सम्भहाल लेना अपने सैया को, कहते हुए नवरीत ने मुझे हाथ से खिंच कर बेड की तरफ धकेल दिया।
उसके मुंह से सैंया सुनकर मैं तो हक्का-बक्का ही रह गया था, अपूर्वा भी उसकी बात सुनकर एकदम से उठकर बैठ गई।
उसकी आंखे एकदम से लाल थी और गालों पर सूखे आंसुओं की पट्टी दिखाई दे रही थी। उसको इस तरह देखकर नवरीत की कही बात तो हवा हो चुकी थी।
अपूर्वा मुझे देखते उठने लगी। मैं उसकी ये हालत देखकर सीधा उसके पास पहुंचा।
क्या हुआ, तबीयत तो ठीक है ना, ज्यादा तो खराब नहीं हो गई, मैंने बेड पर बैठकर उसके गालों को अपने हाथों में लेते हुए कहा।
अपूर्वा ने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिये और फिर अगले ही पल घुटनों के बल उठकर मेरे गले लग गई।
मैं बेड पर पैर नीचे करके बैठा था और वो बेड पर घुटनों के बल खडी थी, तो गले मिलने पर बस हमारी गर्दन ही एक दूसरे को टच हो रही थी। उसके हाथ मेरे कमर में कस गये।
ओह,, बेबी,, कया हुआ,, तुम रो क्यों रही हो,, मैंने उसकी कमर को सहलाते हुए कहा।
मेरी नजर बेड पर रखे तकिये पर पड़ी, जो काफी गीला था। शायद नवरीत ने मुझे तकीये की तरफ देखते हुए देख लिया था।
पूरे एक घण्टे से आंसु बहा रही है, गीला तो होना ही था, नवरीत ने कहा।
 
हम काफी देर तक ऐसे ही गले लगे रहे। जब अपूर्वा कुछ शांत लगने लगी तो मैंने उसे अपने से अलग किया और उसके चेहरे को हाथों में लेकर उसकी आंखों में देखने लगा। उसने एक बार तो मेरी आंखों में देखा, और फिर अपनी पलकें झुका ली।
क्या हुआ बेबी, बताओ तो, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
ये नहीं बतायेगी, मैं बताती हूं, नवरीत ने बेड पर बैठते हुए कहा।
अपूर्वा ने उसकी तरफ घूरकर देखा और ना के इशारे में गर्दन हिला दी।
ना की बच्ची, फिर रो क्यों रही थी, नवरीत ने उसकी नाक को दबाते हुए कहा।
कुछ बताओगे भी क्या हुआ, या ऐसे ही पहेलियां बुझाते रहोगे,, मैंने परेशान होते हुए कहा।
देखो जी, बात ऐसी है, ये मेरी बहन अपूर्वा,,, आपसे,,,, नवरीत के मुंह से इतना ही निकला था, कि अपूर्वा ने उसे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया।
नवरीत ने उसे बेड पर एक तरफ धकेला और उठकर थोड़ी दूर जाकर अपूर्वा की तरफ जीभ निकालने लगी। अपूर्वा खड़ी होकर उसके पिछे भागी।
जीजू,,, देख लो इसको,,, कहते हुए वो बाहर की तरफ भाग गई और अपूर्वा उसके पिछे पिछे।
इस 'जीजू' शब्द ने और दिमाग खराब कर दिया। अभी अपूर्वा रो क्यों रही थी वो टैंशन तो खत्म नहीं हुई थी और उपर से ये 'जीजू' शब्द।
देख लो आंटी, ये आपकी लाडली को, मेरे को मार रही है, नीचे से नवरीत की हल्की हल्की आवाज आई।
क्यों लड रहे हो बेटा, और तुम आराम क्यों नहीं कर रही, कहीं गिर-विर जाओगी तो, चलो उपर जाकर आराम करो, आंटी की आवाज आई।
और समीर भी तो आया था अभी, फिर से आंटी की आवाज आई।
इधर ही आंटी, इनको तो लड़ने की पड़ी हुई है, तो मैं अपना आराम से बेड पर बैठ गया, बाहर आकर ग्रिल के सहारे खड़े होते हुए मैंने कहा।
मम्मी देख लो इसको, ये मुझे परेशान कर रही है, अपूर्वा ने नवरीत का हाथ पकड़कर आंटी की तरफ देखते हुए कहा।
मैं तो बताउंगी, नवरीत ने फिर उसे जीभ निकाल कर चिड़ाते हुए कहा।
अरे तो मैं भी तो कब से सुनने के लिए बेताब हूं, बताउंगी, बताउंगी कर रही हो, बता कुछ रही नहीं हो, मैंने उपर से ही कहा।
जीजू,, वो ये,, ये,,, उउहहह,,, अभी नवरीत बात पूरी कर भी नही पाई थी कि अपूर्वा ने फिर से उसके मुंह को हाथ से बंद कर दिया।
छोड़ो सबकुछ, पहले ये 'जीजू' का चक्कर समझाओ मुझे, इस 'जीजू' शब्द ने दिमाग खराब कर रखा है, मैंने सीढ़ियों की तरफ आते हुए कहा।
तभी नवरीत अपूर्वा से हाथ छुड़ाकर उपर की तरफ भागी और अपूर्वा उसके पिछे-पिछे।
मान जाओ तुम मरजानियों,,,,, गिर गई तो चोट लग जायेगी,,, आंटी ने उन्हें डांटते हुए कहा, पर किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
जीजू,,, कहते हुए नवरीत आकर मेरे पिछे खड़ी हो गई।
जब भी ये जीजू शब्द सुनाई देता, दिमाग टेंशन में आ जाता। नवरीत के मेरे पिछे आने से अपूर्वा वहीं खड़ी हो गई।
मैं उसके पास गया और उसके बालों को ठीक करके उसका हाथ पकड़ कर अंदर की तरफ चल दिया। अंदर आकर मैंने उसको बेड पर बैठाया।
पहले तो तुम ये बताओ कि रो क्यों रही थी, मैंने उसके पास बैठकर उसके बाल संवारते हुए कहा।
आप नहीं आये इसलिए, नवरीत ने जल्दी से कहा और मेरे साइड में होकर खडी हो गई।
अपूर्वा ने अपना चेहरा नीचे कर लिया और अपने पैर के अंगूठे से चद्दर को कुरेदने लगी।
मैं आ तो गया, मैंने अपूर्वा के चेहरे को पकड़ते हुए उपर उठाते हुए कहा।
अरे तो लेट आये हो ना, कहकर गये थे कि ऑफिस से सीधे आओगे, पर टाइम देखिये साढे छः बज गये हैं, इतने लेट आओगे तो इतने सोचा कि वैसे ही कहकर चले गये, आओगे ही नहीं, नवरीत ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
अरे तो इसमें रोने की क्या बात है, बस लेट हो गया, ऑफिस से लेट निकला था, मैंने अपूर्वा के गालों को सहलाते हुए कहा।
तो इसमें रोने की बात ये है कि आप झूठे हो, आपने फोन भी नहीं किया कि लेट हो जाउंगा, बस इसलिए दीदी रो रही थी, नवरीत ने मेरे कंधे को दबाते हुए कहा।
हूंह,,, प्याली बेबी,,, कहते हुए मैंने अपूर्वा का सिर अपने सिने में रख लिया और अपूर्वा भी सरक कर मेरी बाहों में समा गई।
आप एकदम बुद्धु हो, इतना भी नहीं समझ सकते,, नवरीत ने मेरे कंधे पर मुक्का मारते हुए कहा।
क्या नहीं समझ सकता, मैंने कहा और समझने की बात आते ही मुझे 'जीजू' शब्द याद आ गया, परन्तु फिर भी मैं पहले नवरीत के जवाब का इंतजार करने लगा।

क्रमशः...................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--53
गतांक से आगे ...........
हे भगवान, पता नहीं तुने कुछ दिमाग-विमाग भी दिया है कि नहीं इनको, निरे ठूंठ महाराज है, नवरीत ने कहा और आकर सामने बेड पर बैठ गई और अपूर्वा के बालों में हाथ फिराने लगी।
दीदी, आपने तो एकदम बुद्धू को चुना है, नहीं तो कोई स्मार्ट लड़का होता तो, इतने में तो बारात लेके आ जाता, नवरीत ने अपूर्वा को छेड़ते हुए मेरी तरफ बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा।
अब इसमें बारात की क्या बात आ गई, मैंने नवरीत की तरफ देखते हुए कहा।
अपूर्वा ने अपने हाथ मेरी कमर पर कस दिये थे, और मेरे सीने में दुबक सी गई थी। अब वो अपनी कमर मेरे पैरों के सहारे लगाकर अपना चेहरा मेरे सीने में छुपाये हुई बैठी थी।
हे भगवान, क्या करूं इस लड़के का, निरा है एकदम,,, कुछ अक्ल-वक्ल भी है या नहीं, नवरीत ने अपने माथे में हथेली मारते हुए कहा।
उधर दीवार पर सही तरह से फूटेगा, मैंने हंसते हुए नवरीत को छेड़ा।
आपकी तो मैं, नवरीत ने मेरी तरफ मुक्का दिखाते हुए दांत भींचकर कहा।
आंटी, कहां इनके चक्कर में पड़े हो आप, कोई अच्छा सा लड़का देखकर अपूर्वा की शादी कर दो, यहां मुझे कुछ फायदा नहीं दिख रहा, नवरीत ने चिल्लाते हुए बाहर की तरफ मुंह करते हुए कहा और फिर अपूर्वा को गुदगुदी करने लगी।
अपूर्वा ने उसका हाथ एक तरफ झटक दिया और, और भी ज्यादा मुझसे चिपक गई। मेरे हाथ उसके बालों को सहला रहे थे।
दीदी, मैं साफ साफ बता रही हूं, फिर मत कहना, नवरीत ने अपूर्वा की तरफ घूरते हुए कहा।
पर अपूर्वा तो मेरी बाहों में गुम हो गई थी। उसने कोई जवाब नहीं दिया।
तुम्हारे बस का नहीं है, मैं बताती हूं, आवाज सुनकर हमने दरवाजे की तरफ, आंटी अंदर आती हुई कह रही थी।
क्या बात है आंटी, कोई सीरियस बात है क्या, मैंने थोड़ा गंभीर चेहरा बनाते हुए कहा।
बेटी, अपूर्वा, चलो दूर हटो, मुझे बात करनी है समीर से, आंटी ने अपूर्वा के बालों में हाथ फेरते हुए कहा।
अपूर्वा अपनी नजरें झुकायें हुए मुझसे दूर होकर बैठ गई। उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर तुरंत ही अपने हाथों में अपना चेहरा छिपा लिया और अपने घुटने मोड कर चेहरा उनमें छिपा लिया।
आओ बेटा, आपसे कुछ बातें करनी हैं, नीचे तुम्हारे अंकल भी बैठे हैं, आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैं कन्फयूज चेहरे से उन्हें देखते हुए खड़ा हो गया और आंटी के साथ साथ नीचे आ गया।
आओ बेटा, बैठो, अंकल ने सोफे की तरफ इशारे करते हुए कहा।
मैं सोफे पर बैठ गया, आंटी अंकल के पास बैठ गई।
देखो बेटा, वैसे तो ये बातें बड़े आपस में तय करते हैं, पर अब तुम्हारे मॉम-डैड यहां पर है नहीं, तो तुमसे ही बात कर लेते हैं, अंकल ने कहा और फिर गला साफ करने लगे।
अपूर्वा तुमसे बहुत प्यार करती है, और तुमसे शादी करना चाहती है, अंकल ने कहा और फिर मेरी तरफ देखने लगी।
अंकल की बात सुनते ही मेरा मुंह खुला का खुला रह गया, मेरा दिमाग एकदम से झनझना गया। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं, बस मुंह खोले कभी अंकल को तो कभी आंटी को देखता रहा।
मक्खी घुस जायेगी, ऐसे मुंह खोले बैठे रहोगे तो, नवरीत ने मेरी ठुड्डी के नीचे हाथ लगाकर मेरे मुंह को बंद करते हुए कहा।
मैंने गर्दन घुमाकर देखा, नवरीत मेरे पिछे सोफे का सहारा लेकर खड़ी थी, परन्तु अपूर्वा कहीं नहीं दिखाई दी।
फिर मैंने अंकल-आंटी की तरफ देखा, वो अभी भी मेरे से कुछ सुनने के लिए उसी तरह मेरी तरफ देख रहे थे।
आज पहली बार शादी की बात सुनकर मेरे दिल में कहीं एक गहरा, बहुत ही मीठा सा अहसास हुआ था, नहीं तो आज से पहले जब भी मेरी शादी की बात आती थी तो मैं टाल-मटोल करता रहता था।
मेरा मानना है कि पहले बढ़िया तरह से लाइफ में सैटल हो जाओ, और उसके बाद ही शादी करो, नहीं तो बाद में फिर दुखी ही होना पड़ता है। इसलिए मैं हमेशा शादी की बातों को टाल दिया करता था। परन्तु आज कुछ अलग ही बात थी, मेरे मन में बहुत खुशी हो रही थी।
और हो भी क्यों ना, अपूर्वा जैसी खूबसूरत, प्यारी-सी, एकदम मासूम, केयरिंग, और इन सबके साथ साथ चंचल भी, उसकी आंखों से झलकती चंचलता हमेशा ही मुझे उसकी तरफ आकर्षित करती थी, परन्तु मैं हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह उसे देखता था।
परन्तु आज जब अंकल आंटी ने हमारी शादी की बात की तो, मन में लड्डू से फूट रहे थे। मेरी नजर बार बार उपर अपूर्वा के कमरे की तरफ जा रही थी।
अंकल, पर मैं,, उसे,, उसने,,, मेरा मतलब उसने कभी बताया नहीं, बड़ी मुश्किल से मुझे कहने के लिए कुछ शब्द मिले और कहकर मैं फिर उपर की तरफ देखने लगा।
बेटा वो तो पगली है, हमें सब कुछ बताती रही, पर आपको कुछ नहीं बताया,,, और हमें भी मना कर देती थी, आंटी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा।
आज 5 बजे से तुम्हारा इंतजार कर रही थी, तुम नहीं आये तो रोना शुरू कर दिया, इसलिए आज हमने तुमसे बात करनी ही ठीक समझी, आंटी ने कहा।
मैं तो जैसे ख्वाबों की दुनिया में पहुंच चुका था और बस अंकल-आंटी की बातें सुने जा रहा था।
आज अपूर्वा के साथ शादी की बात सुनकर जो अहसास जागा था, वो मुझे चैन नहीं लेने दे रहा था। अपूर्वा मुझसे प्यार करती है और मैं बेवकूफ समझ नहीं पाया, ये सोचकर मुझे खुदपर गुस्सा भी आ रहा था और हंसी भी।
किसी बात की कोई जल्दी नहीं है बेटा, बस अब आपको पता चल गया है कि वो आपसे प्यार करती है, हमारा काम अब तुम्हारी हां होने के बाद शुरू होगा, तब तक वो जाने और तुम जानो, आंटी ने कहा।
हमें तुम पसंद हो, और इससे बड़ी बात हमारी बेटी को भी पसंद हो, अब रह जाते हैं तुम और तुम्हारे घरवाले, तो उनसे भी बात कर लेते हैं, अंकल ने कहा।
अंकल की बात सुनकर मैं सोचने लगा और मेरा हाथ अपने आप मेरे सिर पर जाकर खुजलाने लगा।
जी, जैसी आपकी मर्जी, पर मैं पहले अपूर्वा से बात करना चाहूंगा, और वैसे भी मैं अभी शादी नहीं करना चाहता तो, मुझे कुछ टाइम चाहिए सोचने के लिए, बस मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि अपूर्वा मुझसे,,,, मैंने सिर खुजाते हुए कहा।
हां-हां क्यों, नहीं, आप बातें करो, आराम से उपर बैठकर, आंटी ने उपर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
नहीं, नहीं, आंटी, अभी तो टाइम नहीं है, आज गांव जा रहा हूं, परसों तक वापिस आ जाउंगा, फिर आने के बाद बात करूंगा, मैंने सिर खुजाते हुए कहा।
मैं रिश्ते वाली बात नहीं बताना चाहता था।
हां, अपूर्वा ने बताया था, तुम्हारा कोई रिश्ता वगैरह की बात चल रही है, उसके सिलसिले में जा रहे हो, बस इसीलिए हमनें अभी बात करनी ठीक समझी, अंकल ने कहा।
अपूर्वा की बच्ची, सब कुछ बता रखा है और मुझसे इतनी बड़ी बात छुपा रखी है, मैंने मन ही मन सोचा।
अब तक मेरा दिमाग शुन्य से कुछ बाहर आ गया था और सोचने समझने की स्थिति में आ गया था।
जी वो मम्मी पिछे पड़ी हुई है शादी के, पर मैं अभी नहीं चाहता, पर फिर भी जाना तो पड़ेगा, बस इसलिए, नहीं तो वहां तो मैं मना ही करने वाला था, मैंने कहा।
फिर भी बेटा कुछ पता नहीं होता, वहां पर जाकर लड़की तुमको पसंद आ जाये, और तुम हां कर दो, तो इसलिए, आंटी ने कहा।

तभी मेरा मोबाइल बजने लगा। मैंने जेब से मोबाइल निकाला, सोनल का था। मैंने साइलेंट करके वापिस जेब में डाल लिया।
जी आंटी अब वो भी देखते हैं, क्या होता है, रब जो चाहेगा, वही होगा, उसकी रजा के बगैर तो पत्ता भी नहीं हिल सकता, मैंने कहा।
एकदम सही बात भई, जैसी रब की मर्जी होगी, वैसा ही होकर रहेगा, उसकी मर्जी को कोई नहीं टाल सकता, अंकल ने कहा।
अब तुम आराम से घर जाओ, वहां पर क्या होता है, आकर हमें बताओ, फिर हम अपनी तरफ से कार्यवाही करते हैं, अंकल ने कहा।
जी अंकल, मैंने कहा।
अच्छा अंकल अब मैं चलता हूं, फिर गांव के लिए भी निकलना है तो, लेट हो जाउंगा, मैंने कहा।
ओके बेटा, धयान से जाना, अंकल ने कहा।
मैंने उठकर अंकल-आंटी के पैर छूए और नवरीत को बायें कहते हुए उपर की तरफ देखा।
एक मन तो कर रहा था कि उपर जाकर अपूर्वा से मिलूं और फिर दूसरा मन कह रहा था कि अभी नहीं, उससे बाद में बात करता हूं।
फिर मैं कुछ सोचकर उपर की तरफ चल दिया। नवरीत भी मेरे पिछे पिछे चल दी।
नवरीत, इधर आ बेटा, उपर पहुंचने से पहले ही नीचे से आंटी की आवाज आई और नवरीत वापिस नीचे चल दी।
अंदर आकर मैंने देखा, अपूर्वा बेड पर औंधी लेटकर कोहनियां बेड पर टिकाकर अपना चेहरा उपर उठा रखा था।
मुझे देखते ही उसने अपने पलकें झुका ली और उसका चेहरा लाल हो गया।
मैं उसके पास जाकर खडा हो गया और उसके देखता रहा। जब कुछ देर तक मैं कुछ नहीं बोला तो उसने अपना चेहरा उपर उठा कर देखा, और मुझे खुदको घूरते हुए पाकर तकिये में अपना चेहरा छुपा लिया।
मैं बेड पर बैठ गया, और उसका बालों को सहलाते हुए उसके चेहरे को पकड़कर उपर उठाया। उसकी आंखे बंद थी।
अपूर्वा, मैंने कहा।
हूं,,, उसने बस इतना ही कहा।
आंखे खोलो, मैं तुम्हारी आंखों में देखना चाहता हूं कि इनमें कितना प्यार है मेरे लिये, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
मुझे शर्म आ रही है, कहते हुए अपूर्वा ने अपने चेहरे को अपने हाथों से छुपा लिया।
मेरे दिमाग में बहुत ज्यादा हलचल मची हुई थी। मैं अपूर्वा से प्यार नहीं करता था, परन्तु फिर भी ये सब जानकर दिल में बहुत ही ज्यादा खुशी महसूस हो रही थी। शायद किसी के द्वारा चाहे जाने का जो आनंद होता है, वो दुनिया की सबसे बड़ी खुशी देता है।
वैसे भी अपूर्वा इतनी प्यारी है कि कोई भी उसे देखते ही प्यार करने लग जाए, बस हमारी पहले दोस्ती हो गई और मैं अभी तक उस दोस्ती में ही बंधा हुआ था। पर अपूर्वा मुझसे इतना प्यार करती है, और मैं उसे सिर्फ दोस्ती समझता रहा।
मेरे दिमाग में वो सारी बातें घूम रही थी, अपूर्वा का बार बार मेरी बाहों में समा जाना, मेरे गले लगना, मुझे प्यार से देखते रहना, वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठे रहना, और कभी कभी मुझ पर झुंझला पड़ना।
वो आंटी और नवरीत का जीजू कहना। मतलब सबको पहले से पता था, बस एक मैं ही हूं जिसे नहीं पता,,,,,,,।
अब मेरी समझ में आ रहा था कि उसने कितने बार अपना प्यार मुझे दिखाना चाहा, पर मैं ही समझ नहीं पा रहा था। अगर पहले मुझे पता चल जाता कि अपूर्वा मुझसे प्यार करती है, तो अब तक तो मैं भी उसके प्यार में गिरफ्रतार हो चुका होता।
वैसे भी अभी तक मैं किसी और के प्यार में चक्कर में नहीं पड़ा हूं, तो अपूर्वा के द्वारा चाहे जाने का वो सुख, वो आनंद, मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझमें उसके प्रति प्यार जगा गया। प्यार तो उससे मैं पहले भी करता था, परन्तु एक दोस्त की तरह, अब वो प्यार दोस्त की तरह ना रहकर, प्रेमिका की तरह हो चुका था, परन्तु मैं अभी भी पूरी तरह से नहीं समझ रहा था।
 
बस दिल में एक अहसास सा था, जिसको दिमाग को समझने में शायद अभी समय लगना था।
अपूर्वा, ओके मैं जा रहा हूं, परसों सुबह तक वापिस आउंगा, कहकर मैंने एक बार फिर से उसके चेहरे को देखा।
एकदम लाल चेहरा जिसे वो अपने हाथों से छुपाने का प्रयास कर रही थी।
मैं खड़ा हो गया और उसके चेहरे केा देखता रहा। कुछ देर के बार अपूर्वा ने अपना चेहरा उपर उठाया और आंखे खोलकर देखा तो मैं सामने ही खड़ा था।
मुझे देखते ही उसने फिर से अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया।
उठो ना, देखों कैसे शर्मा रही हो, अब तक तो नहीं शर्माती थी, तो अब क्यों शर्मा रही हो, कहते हुए मैंने उसकी कमर को पकड़कर उसे पलटते हुए अपनी तरफ खींच लिया।
अपूर्वा एक बेल की तरह मुझसे लिपट गई और अपने हाथों को मेरी कमर पर कस दिया। उसकी गरम सांसे मुझे अपनी कानों पर महसूस हो रही थी।
उसकी उभार मेरी छाती में दब गये थे, और उसकी तेज चलती सांसों के साथ बार बार दबाव बढ़ा रहे थे।
उसके इस तरह एकदम मुझसे लिपटने से मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मैं बेड पर पिछे की तरफ लुढ़कर गया। अपूर्वा साथ साथ मेरे उपर। अब मैं नीचे बेड पर था और अपूर्वा मुझसे लिपटी हुई मेरे उपर।
उसने एक बार चेहरा उठाकर मेरी आंखों में देखा और फिर मुझे मुस्कराता हुआ पाकर वापिस अपना चेहरा छुपा लिया।
'आई लव यू' मेरे कानों में बहुत ही धीमी सी, मधुर आवाज गूंजी, और जैसे चारों तरफ संगीत की धुन घुल गई हो, ऐसा एहसास दिला गई।
इतना कहकर उसने अपने गालों को मेरे गालों से सटा लिया।
'आई लव यू टू' प्यार के उस सागर में मैं बह चुका था। बेशक मैं हमारे रिश्ते को दोस्ती का नाम देता रहा था, परन्तु उसमें कहीं ना कहीं प्यार तो छुपा ही हुआ था, जो आज उसके इजहार करते ही निकल कर सामने आ गया और मैं उसमें बह चुका था।

ये प्यार का अहसास मेरे दिलों दिमाग में भर चुका था और मैं इस लम्हें को भरपूर जीना चाहता था। मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर अच्छी तरह से कस दिये और अपने सीने से चिपका लिया।
मुझे अपने गालों पर कुछ गीला सा महसूस हुआ, मैंने तुरंत अपूर्वा का चेहरा उपर उठाया, उसकी आंखों में आंसु थे।
उसके आंसु देखकर मैं परेशान हो उठा। मैं उठकर बैठ गया और उसको अपनी गोद में बैठा लिया।
क्या हुआ बेबी, रो क्यों रही हो, मैंने उसके आंसु साफ करते हुए पूछा।
उसका अपना सिर मेरी छाती में रख दिया। उसका एक गाल मेरी छाती पर टिक गया और वो मुझे अपनी बाहों में भरकर उस पल को जीने लगी।
मैंने कबसे इस पल का इंतजार किया है, कितना तड़पी हूं मैं इस पल के लिये, उसने रूंधे हुए गले से कहा।
मुझे माफ कर देना बेबी, मुझे तुम्हारे प्यार को समझने में देर लगी, मैंने उसके आंसुओं को पौंछते हुए कहा।
मेरा एक हाथ उसके बालों को सहला रहा था।
क्रमशः....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--54
गतांक से आगे ...........
कुछ तो शर्म करो, यहां घर पर और भी लोग हैं, कैसे बेशर्मों की तरह चिपके हुए हो, नवरीत मुस्कराते हुए अंदर आई और आकर बेड पर बैठ गई।
तो जीजू.............................. मुझे लगता है जिस तरह से आप दोनों एक दूसरे से चिपके हुए हैं तो मैं अब बेखटके जीजू कह सकती हूं, है ना, नवरीत ने आंखे नचाते हुए कहा।
क्यों नहीं, बिल्कुल....... एक ही तो साली साहिबा है हमारी....... वो जीजू ना कहेगी तो कौन कहेगा,,, मैंने हंसते हुए कहा।
तो फिर कब हमें लड्डू खाने को मिलेंगे........ नवरीत ने अपनी पूरी चंचलता को अपने चेहरे पर लाते हुए कहा।
बस इतनी सी बात, अभी ले आता हूं, ये भी क्या बात कही आपने, हमारी साली को लड्डू खाने हैं, तो बोलो कौनसे हलवाई के ज्यादा पसंद है,,, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
मुझे किसी हलवाई-वलवाई के लड्डू नहीं खाने, मैं तो आपकी शादी के लड्डू की बात कर रही हूं हां,,,, नवरीत ने थोड़ा नाराज होते हुए कहा।
अरे शादी के लड्डू तो पुरानी बात हो गई, अब तो शादियों में रसगुल्ले, गुलाब जामुन, बर्फी वगैरह बनती हैं, मुझे उसे छेड़ने में मजा आ रहा था।
तो कब खिला रहे हो गुलाब जामुन, नवरीत ने अपूर्वा की कमर में चिकोटी काटते हुए कहा।
आइइइइइइइ,,,,,,,,, अपूर्वा ने नवरीत के हाथ को झटक दिया।
आज आप घर जा रहे थे ना, नवरीत ने कहा।
जा रहा था नहीं, जा रहा हूं, मैंने कहा।
अब रात में, नवरीत के चेहरे पर हल्के से आश्चर्य के भाव थे और उसकी उंगली मेरी तरफ उठ गई थी।
जी साली साहिबा बिल्कुल,,, रात का सफर मुझे बहुत पसंद है, मैंने कहा।

हम्मममम,,,, नवरीत ने इतना ही कहा।

तभी फिर से मेरा मोबाइल बजने लगा। मैंने जेब से मोबाइल निकाल कर देखा, सोनल का था। मैंने कॉल पिक की।
कहां हो अब तक, कब से फोन कर ही हूं, आना नहीं है क्या,,, सोनल की गुस्से से भरी आवाज मेरे कानों में पड़ी।
आ रहा हूं, अपूर्वा की तबीयत ठीक नहीं थी तो ऑफिस से सीधा इधर आ गया था, पूछने के लिए, मैंने धीरे से कहा।
क्या हुआ अपूर्वा को, सुबह तो एकदम ठीक थी, उसका लहजा अब नरम हो चुका था।
वो दिन में ऑफिस में फिर से बुखार हो गया था, मैंने कहा।
अब कैसी है, सोनल ने पूछा।
अब ठीक है, मैंने कहा।
आप कितनी देर में आ रहे हैं, सोनल ने पूछा।
बस अभी निकल रहा हूं, दस मिनट में पहुंच जाउंगा, कोई खास बात, मैंने कहा।
हां, बहुत खास बात है, आप जल्दी से आ जाओ, बाये, कहकर सोनल ने फोन काट दिया।
मुझे थोड़ा डाउट हुआ कि ऐसी क्या खास बात हो गई, पर फिर ज्यादा धयान नहीं दिया।
मैंने अपूर्वा के चेहरे को पकड़कर अपने सामने किया। वो तो मुझसे दूर होने को तैयार ही नहीं हो रही थी, मुझे कसकर अपनी बाहों में भर रखा था।
चेहरे को सामने करके मैंने उसके माथे पर एक चुम्मा दी, उसकी आंखें बंद थी। वो बस उस पल को महसूस किये जा रही थी।
ओके अब मैं चलता हूं, नहीं तो फिर लेट हो जाउंगा, मैंने कहते हुए अपूर्वा को खुद से दूर किया।
ऐसे कैसे जीजू, अब तो आप इस घर के दामाद हो गये हो, नवरीत ने आंखें नचाते हुए कहा।
तो फिर जाने नहीं दोगी क्या, मैंने कहा।
वैसे अगर मेरा बस चले तो जाने ही नहीं दूं, पर जाने से कौन रोक रहा है, नवरीत ने कहा।
तो फिर, मैंने शंकित होते हुए कहा।
खाना तैयार हो रहा है, खाना खाकर जाना है, नवरीत ने कहा।
अरे,,,,,,,, मेरी बात पूरी होने से पहले ही नवरीत ने अपने होंठों पर उंगली रखकर शााससससससससससस कर दिया।
हम्ममम,, अब साली साहिब का आदेश है तो, मना भी नहीं किया जा सकता, जी तो लाइये खाना, मैंने कहा।
बस अभी तैयार हो जायेगा,,,,, आप तब तक दीदी के साथ बातें कीजिए, मैं अभी लगाती हूं, कहते हुए नवरीत उठ गई और बाहर चली गई।
उसके जाते ही अपूर्वा ने लेट कर अपना सिर मेरी गोद में रख लिया। उसकी आंखें तो रोने के कारण लाल थी ही, परन्तु उसका चेहरा भी शरम से लाल था। वो अपनी आंखें तो खोल ही नहीं रही थी। मैंने उसके बालों में हाथ डालकर उनसे खेलने लगा। और दूसरे हाथ से उसके गालों को सहलाने लगा।
अब घर जाने की क्या जरूरत है, अपूर्वा ने इजहार करने के बाद पहली बार आंखें खोलकर मेरे चेहरे की तरफ देखते हुए कहा।

अरे, जो रिश्ते वाले आ रहे हैं उनको मना करना है और फिर तुम्हारी रिश्ते की बात भी तो बतानी है घर वालों को, मैंने झुक कर उसके माथें को चूमते हुए कहा।
हम्मममम,,,, अपूर्वा ने इतना ही कहा।
सोनल का फोन किसलिए आया था, वो क्यों बुला रही है, अपूर्वा ने कहा।
उसकी आंखें फिर से बंद हो चुकी थी और उसका हाथ उसके बाल पर रखे मेरे हाथ पर आ चुका था।
पता नहीं, कह रही थी कि जरूरी काम है, बाकी कुछ बताया नहीं, मैंने कहा।
अच्छा आपके घर वाले मान जायेंगे इस रिश्ते के लिए, अपूर्वा ने चेहरे पर थोड़े शंका के भाव लाते हुए कहा।
क्यों नहीं मानेगे,,, मैंने उसके चेहरे पर आई बालों की एक लट को संवारते हुए कहा।
नहीं, जाति अलग अलग है ना, अपूर्वा ने कहा।
अरे तो क्या हुआ, न तो मैं इन सब चीजों को मानता हूं और न ही मेरे घर वाले,,,,, मैंने उसके गाल को भींचते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा के चेहरे पर खुशी छा गई।
चलिए अब बहुत हो गई बातें, खाना लग गया है, नवरीत ने अंदर आते हुए कहा।
अपूर्वा उठकर बैठ गई।
महारानी जी, अब बैठी ही रहेंगी या चलेंगी भी, नवरीत ने उसका हाथ पकड़कर खींचते हुए कहा।
अपूर्वा बेड से नीचे उतर गई और उसके साथ साथ मैं भी खड़ा हो गया। नवरीत अपूर्वा को खींचते हुए बाहर ले आई।
ठहर तो मैं फ्रेश तो हो लूं, अपूर्वा ने कहा।
नवरीत ने एक बार उसकी तरफ देखा, और फिर हंसते हुए बोली, अच्छा तो चल जा जल्दी से आंसु साफ कर आ जा।
अंकल आंटी पहले ही खाने की टेबल पर पहुंच चुके थे। हम आकर बैठ गये।
तो क्या बातें हो रही थी, चुपके-चुपके,,, अंकल ने सब्जी डालते हुए कहा।
जी कुछ नहीं, बस ऐसे ही,,, मैंने थोड़ा सा शरमाते हुए कहा।
लिजिए, आज अपनी साली के हाथ से खाइये,,, नवरीत ने एक निवाला मेरी तरफ करते हुए कहा।
मैं मुस्कराया और फिर अपना मुंह खोल दिया। नवरीत ने निवाला मेरे मुंह में ठूंस दिया।
पर जैसे ही मैंने उसमें अपने दांत लगाये, मैं सीधा बाथरूम की तरफ भागा। मैंने उस निवाले को थूंका और अच्छी तरह से कुल्ला करके वापिस आया।
आपको तो मैं देख लूंगा, बदला लेकर रहूंगा, मैंने चेहरे पर नकली गुस्से के भाव लाते हुए कहा।
लीजिए देख लिजिए, आपके सामने ही तो हूं, नवरीत ने खिलखिलाते हुए कहा।
दरअसल उसने उस निवाले में बहुत ही ज्यादा नमक और मिर्च डाल रखी थी। शायद पहले से ही तैयार कर रखा होगा। जैसे ही वो मेरे मुंह में गया, तो मुंह में आग तो लगी ही, साथ ही साथ खारापन घुल गया।
अब सालियां तो ऐसे ही मजाकर करती हैं बेटा, बुरा मत मानना, आंटी ने हंसते हुए कहा।
खाने के दौरान अंकल मेरे घरवालों के बारे में पूछते रहे और अपने बारे में बताते रहे।
जीजू,,, और नहीं खाओगे अपनी साली के हाथ से,,,, बीच-बीच में ये बात कहकर नवरीत मुझे चिढ़ाती रही।
मैं बस उसकी तरफ देखकर मुस्करा देता। अपूर्वा चुपचाप खाना खाये जा रही थी। उसकी नजरें मुझ पर ही थी।
खाना खाकर मैंने अंकल आंटी से विदा ली, और अपूर्वा व नवरीत बाहर तक मुझे छोड़ने आई। जब मैं गेट से बाहर आने लगा तो अपूर्वा आकर मुझे लिपट गई।
ओए होए,,, देखों कैसे तड़प रही है, अब बस भी कर, जाने देगी तभी तो लौट कर आयेंगे, नवरीत ने उसे छेंड़ते हुए कहा।
 
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