• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

पायल अपनी छत पर जाने के लिए मुंडेर को कूद रही थी। जब उसने अपनी एक टांग उठाकर मुंडेर पर रखी तो उसके सैक्सी कुल्हें क्या मस्त लग रहे थे। जब पूनम ने मुझे अपनी बहन को घूरते देखा तो उसने मेरे कंधे पर एक मुक्का मार दिया।
मैंने उसकी तरफ देखा और फिर जब वापिस पायल की तरफ देखा तो वो दूसरी तरफ जा चुकी थी।
मैं आकर तान्या और रूपाली के पास बैठ गया, पूनम भी मेरे सामने आकर बैठ गई। हम छत पर नीचे ही बैठे थे, बस एक चद्दर बिछी हुई थी।
इतने में सोनल भी उपर आ गई।
चलो, अब मुझे नींद आ रही है, सोनल ने तान्या की पीठ में हाथ मारते हुए कहा।
तान्या ने उसकी तरफ घूर कर देखा और उसका हाथ पकड़कर नीचे खंीचं लिया।
यार मुझे नींद आ रही है, ओके चल तुम बाद में आ जाना जब तुम्हें नींद आये, पर मुझे तो जाने दो, सोनल ने कहा।
तान्या ने उसका हाथ छोड़ दिया और सोनल नीचे चली गई। पूनम अभी भी यही बैठी थी, इसलिए बेचारी तान्या कुछ नहीं कर पा रही थी।
उंहहहह--- मुझे भी नींद आ रही है, मैं भी सोने जा रहा हूं, उंघते हुए मैंने कहा और तान्या की तरफ आंख मार दी।
मैं उठ खड़ा हुआ और अंदर की तरफ चलने लगा। तान्या और रूपाली मायूस सा मुंह लटकाये उठी।
क्या यार, अभी बैठते हैं ना कुछ देर और, अभी कौनसा सोने का टाइम हो गया, पूनम ने झुंझलाते हुए कहा।
कितना अंधेरा हो गया है, और तुम कह रही हो सोने का टाइम नहीं हुआ है, मैंने पूनम की तरफ देखते हुए कहा।

तान्या ने मेरी तरफ मायूस दृष्टि से देखा तो मैंने उसे आंखों के इशारे से आश्वासन दिया और पूनम को उठाकर एक साइड में ले गया।
अरे यार ये अपने घर पर झूठ बोलकर आई हैं, ताकि मेरे साथ सो सकें, पर तुम्हारे कारण शर्मा रही हैं, मैंने धीरे से पूनम से कहा।
क्या------ ये भी------- कमाल करते हो समीर साहब,,,,,, कितनी लड़कियों के साथ चक्कर हैं आपके, पूनम ने दबी आवाज में कहा।
और एक साथ दो-दो, इनको जरा भी शर्म नहीं है क्या--- पूनम ने उनकी तरफ देखते हुए कहा।
इसका मतलब तुम भी बेशर्म हो, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
मैं कैसे, पूनम ने कहा और मेरी आंखों में देखने लगी।
याद है ना सोनल के साथ, सुहानी रात,,, मैंने चटकारा लेते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर पूनम शर्मा गई।
ओके ठीक है,,, मैं चलती हूं, पर ये रात उधार रही आप पर, चुन चुनकर बदला लूंगी, कहते हुए वो अपनी छत पर चली गई।
पूनम के जाते ही तान्या मुझसे लिपट गई और पागलों की तरह मेरे गालों और होंठों को चूसने लगी।
अंदर तो चल, यही पे शुरू हो गई, रूपाली ने तान्या को इस तरह पागल होते देख कहा।
तान्या ने मेरा हाथ पकड़ा और खींचकर अंदर ले आई। हमारे पीछे पीछे रूपाली भी अंदर आ गई।
अंदर आते ही तान्या ने मुझे बेड पर धक्का दिया और खुद भी उपर आ गई। रूपाली ने दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
तान्या ने अपनी टीशर्ट उतारकर एक तरफ फेंक दी और पिछे हाथ करके अपनी ब्रा भी उतार दी और फिर मेरी टी-शर्ट को उतारने लगी। मैंने अपनी कमर उपर करके उतारने में उसकी मदद की। टीशर्ट को उतार कर वो मेरे उपर लेट गई। उसके मीडियम आकार के उभार मेरी छाती पर दब गये और उसके होंठ ने मेरे होंठों को कस लिया। उसकी और मेरी बेल्ट आपस में मेल-जोल बढ़ा रही थी। उसकी जांघें मेरी जांघों पर उठा पटक कर रही थी।
मैंने रूपाली की तरफ देखा, वो दरवाजे से पीठ लगाये खड़ी हमें ही देख रही थी। मैंने अपने हाथ तान्या की कमर में रखे और सहलाने लगा। मेरे हाथ लगते ही उसने एक झटका खाया और बैठ गई।
वो बेड से नीचे उतरी और अपनी बेल्ट खोलने लगी। अपनी बेल्ट खोलकर उसने जींस का हुक भी खोल दिया और जींस की चैन खोलकर मेरी कमर की तरफ अपने हाथ बढ़ा दिये।
उसने मेरी बेल्ट को खोला और जींस का हुक खोलकर अदा के साथ चैन को खोलने लगी। चैन को खोलकर उसने जींस के अंदर हाथ दिया और मेरे सांप को मुठठी में पकड़कर अंडरवियर समेत बाहर खिंच लिया।
मैंने रूपाली की तरफ देखा, उसकी सांसे जोर से चल रही थी और उसका चेहरा एकदम लाल हो चुका था। उसकी सांसों के साथ उसकी चूचियां उठक बैठक कर रही थी और उसका एक हाथ बार बार उसकी मुनिया को सहला रहा था।
तान्या ने मेरे लिंग को अंडरवियर से बाहर निकाला और एक बार मेरी आंखों में देखा और फिर अपने होंठों को मेरे सुपाड़े पर कस दिया। मेरे मुंह से एक जोर की सिसकारी निकली। मेरे सुपाड़े को होंठों में कसे हुए वो उस पर जीभ फिरा रही थी। मेरे शरीर में रह रहकर तरंगे उठ रही थी और साथ में मेरी कमर भी।
मेरे सुपाड़े को चूसते हुए उसने अपनी उंगलियों को मेरी जींस के किनारों में फंसाया और धीरे धीरे नीचे सरकाने लगी। घुटनों तक जींस को सरकाने के बाद उसने अपने हाथ मेरी नंगी जांघों पर रख दिये और सहलाने लगी। मैं कमर उठा कर अपने लिंग को और अंदर करने की कोशिश कर रहा था पर वह मेरी कमर के साथ साथ अपना मुंह भी उपर की तरफ कर लेती। उसने मेरे सुपाड़े को जोरों से अपने होंठों के बीच भींचा हुआ था और जीभ से चाट रही थी।
मुझे लग रहा था कि अगर कुछ देर और ये ऐसे ही चाटती रही तो मैं तो गया काम से, और अबकी बार गया तो काफी टाइम लगेगा दोबारा तैयार होने में, पहले ही सोनल की बच्ची ने ऐसा चबाया था।
मैंने उसके चेहरों को पकड़ा और बैठते हुए उसके मुंह को उपर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
उसके होंठों को चूसते हुए मैं खड़ा हो गया। खड़े होते ही मेरी जींस घुटनों पर आकर टिक गई। मैंने पैरों को हिला हिलाकर जींस को पैरों से अलग कर दिया और अपने हाथ नीचे ले जाकर उसकी जींस को नीचे सरकाना शुरू कर दिया।
अचानक उसने किस तोड़ी और थोड़ा पीछे होते हुए जींस को पकउ़कर अपने पैरों से अलग कर दिया। जींस निकालते हुए उसका मुंह और सिर मेरे लिंग से टकरा रहा था।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--41
गतांक से आगे ...........
मैंने रूपाली की तरफ देखा, वो हमें ही देख रही थी, परन्तु जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा उसने अपनी नजरें नीची कर ली।
मैं धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। उसने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर से अपनी नजरें झुका ली। जैसे जैसे मैं उसकी तरफ बढ़ रहा था उसकी धड़कनें तेज होती जा रही थी और उसके हाथ दरवाजे की कुंडी पर कसते जा रहे थे।
बीच बीच में वो मेरे झुलते हुए लिंग पर चोरी चोरी नजरें फिरा रही थी। जैसे ही मैं उसके नजदीक आया उसने अपना मुंह फेरकर दरवाजे की तरफ कर लिया और दरवाजे से सटकर खडी हो गई। पिछे से उसके छोटे छोटे गोल कुल्हों जिन पर कुर्ती कसी हुई थी ने तो कहर ही ढा दिया।
आगे होकर मैंने उसके कंधों पर अपने हाथ रख दिये और मेरा लिंग सीधा उसके कुल्हों के बीच की गहराई में कपड़ों के उपर से ही जा चिपका।

मेरा स्पर्श पाते ही वो सिहर उठी और उसके मुंह से एक आहहह निकली। वो और भी ज्यादा दरवाजे से चिपक गई और अपने कुल्हों को आगे करने की कोशिश करने लगी। पर आगे तो दरवाजा था। मैं और आगे सरक गया और मेरा लिंग उसके कुल्हों पर सेट हो गया। मैंने उसकी कमर के साइड से अपने हाथ आगे किये और उसके उभारों पर रख दिये। छोटे छोटे उभार पूरे के पूरे मेरे हाथों में समा गये। मेरे लिंग का दबाव उसके कुल्हों पर बढ गया था। मैं अपने कुल्हों को हिला हिलाकर उसके कुल्हों पर अपने लिंग को मसल रहा था।
मैंने एक हाथ नीचे किया और उसकी कुर्ती को उपर सरका दिया। मेरा लिंग उसकी मखमली सलवार के उपर से उसके कुल्हों पर दब गया। सलवार इतनी कोमल थी कि लग ही नहीं रहा था कि मेरे लिंग और उसके कुल्हों के बीच सलवार भी है। मैंने अपने लिंग को उसके कुल्हों के बीच में सैट किया और हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।
उसके दिल की धडकन इतनी बढ गई थी मैं मेरे हाथ भी उसके उभार के साथ में उछल रहे थे। मैंने अपने दूसरे हाथ को नीचे ले जाकर उसकी कुर्ती के अंदर डाल दिया और कुर्ती को उपर उठाते हुए उसके पेट को सहलाने लगा। उसका पेट रह रहकर उछल रहा था। उसके पेट को सहलाते हुए मैंने अपना हाथ धीरे से उसकी सलवार के अंदर डाल दिया और उसकी पेंटी के उपर से उसकी योनि को सहलाने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसकी योनि पर लगा उसके शरीर ने एक झटका खाया और उसके कुल्हें पीछे को निकल आये जिससे मेरा लिंग उसकी सलवार के साथ उसकी गहराई में समा गया। मैं लिंग को जोर जोर से उसकी गहराई में मसलने लगा।
रूपाली की सिसकियों की आवाज तेज होने लगी। उसकी पेंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपना हाथ बाहर निकालते हुए उसकी सलवार के नाड़े को पकड़ लिया और बाहर निकलते ही खींचकर खोल दिया और कमर को हलका सा पिछे कर लिया। उसकी सलवार सीधी उसके घुटनों पर जाकर अटक गई जो कि दरवाजे के साथ चिपके हुए थे।
सलवार निकलते ही मैंने वापिस अपना लिंग उसकी कुल्हों के बीच सैट कर दिया। पेंटी उसके नितम्बों के बीच की गहराई में फंसी हुई थी। मैंने फिर से अपने हाथों को हरकत दी और उसकी पैंटी को भी नीचे सरका दिया और घुटनों तक करके अपना लिंग उसके नंगे नितम्बों के बीच सैट करके हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।
रूपाली का शरीर कांप रहा था और उसके मुंह से दबी हुई सिसकारियां निकल रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी योनि पर रखा और अपनी उंगली से उसकी फांको को अलग करके उसके स्वर्ग द्वार को कुरेदने लगा।
रूपाली पागल हो उठी और घुमकर अपने हाथ मेरी कमर में डाल दिये और मुझे कसकर जकड़कर मेरे सीने में चिपक गई। उसके घुमने से मेरा लिंग सीधा उसकी योनि पर टकर मारने लगा। मैंने अपने हाथ उसके कुल्हों पर रखे और उसे उपर उठा लिया। घूमते समय पहले ही सलवार उसके पैरों में नीचे जा चुकी थी, जैसे ही मैंने उसे उठाया सलवार उसके पैरों से निकलकर फर्श पर जा गिरी।
मैंने उसे उठाकर पास में रखी टेबल पर बैठा दिया। वो मुझसे जोक की तरह चिपक गई थी, दूर होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने उसके हाथों को अपनी कमर में से हटाया और उसको खुद से दूर करते हुए उसकी कुर्ती को पकड़कर उसके शरीर से अलग कर दिया।
व्हाईट कलर की ब्रा में कैद उसके छोटे छोटे उभार देखकर मैं पागल हो गया और पिछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा के हुक खोलते हुए ब्रा को निकालकर एक तरफ उछाल दिया।
रूपाली ने अपने चेहरे को अपने हाथों में छिपा लिया। उसके नंगे बदन को देखकर मैं पागल हुआ जा रहा था। मैंने अपने हाथ उसके उभारों पर कस दिये और जोर जोर से उन्हें मसलने लगा।
रूपाली ने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिये। मैंने अपने होंठ आगे बढ़ाये और उसने तुरंत ही मेरे होंठों को कैद कर लिया।
एकदम नरम गुलाब की पंखुड़ियों जैसे, अनछुए लबों पर जब मेरे होंठ पड़े तो मैं उनमें ही गुम हो गया। मैं बहुत ही जोर जोर से उसके होंठों को चूसने लगा। कभी उपर वाले होंठ को कभी नीचे वाले होंठ को चूस रहा था। उसके हाथ मेरे सिर पर थे। उनमें अपनी जांघों को मेरे कुल्हों पर लपेट दिया जिससे मेरा लिंग उसकी योनि पर टक्कर मारने लगा। मुझे किस करते हुए वो अपनी कमर को आगे पिछे कर रही थी। मेरा लिंग उसकी योनि से निकलते अमृत से भिगता जा रहा था और चिकना होकर उसकी योनि पर जोरदार टक्कर मार रहा था, चिकना होने के वजह से बार बार फिसल कर उसके अकड़े हुए दाने को कुचलता हुआ पेट पर चुम्बन ले रहा था।
अचानक मुझे अपने कुल्हों पर ठंडे ठंडे हाथ महसूस हुये। रूपाली के होंठ चूसने में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं उनसे किसी भी हालत में दूर नहीं होना चाहता था। रूपाली के हाथ मेरे सिर पर थे, ओह तो ये तान्या के हाथ हैं, मैंने मन ही मन सोचा और निश्चिंत होकर रूपाली के होंठों का रस पान करने में लगा रहा। तान्या ने अपने हाथ मेरी पीठ पर फिराने शुरू कर दिये थे। मेरे शरीर में आनंद की लहरें दौड़ रही थी
 
रूपाली भी मेरे होंठों को चूसने में बराबर साथ दे रही थी। जब काफी देर तक चूसने के कारण मेरे होंठ दर्द करने लगे तो मैंने उसके लबों को उसके लबों से अलग किया। हमारे सांसे उखड चुकी थी। मैंने रूपाली को अपनी बांहों में भरकर उठाया और बेड पर लाकर लेटा दिया और खुद उसके साथ लेट गया। मैं अपनी सांसे दुरूस्त करने की कोशिश कर रहा था।
तान्या मुंह लटका कर वहीं टेबल पर अपने पैर लटका कर बैठ गई। जब मेरी सांसे कुछ नोर्मल हुई तो मैं रूपाली के उपर आ गया और उसके योनि के लबों को अपने हाथों से अलग किया। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था, देखने से ऐसा लग रहा था कि अभी आये ही नहीं है। गोरी चिटी योनि की मोटी मोटी फांके देखते ही मेरा लिंग पागल हो उठा और जोर जोर से झटके मारने लगा। मैंने अपनी उंगलियों से उसकी योनि के लबों को एक दूसरे से अलग किया। अंदर पूरी तरह से गीली गुलाबी योनि को देखते ही मेरी लार टपक गई और मेरे होंठ सीधे उसकी योनि से जाकर चिपक गये। मेरी जीभ उसकी योनि की फांकों के बीच अपना पहुंच गई।
जैसे ही मेरे होंठ उसकी योनि पर टच हुए रूपाली की कमर हवा में उठ गई और उसके मुंह से जोर की आहहह निकली और उसके हाथ सीधे मेरे सिर पर पहुंच कर मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगे। मैंने अपनी जीभ से उसका अम्त चाटना शुरू कर दिया। हल्का हल्का बकबका सा रस, पर शायद आज पहली बार बह रहा था। मैंने अपने होंठों को उसके स्वर्ग द्वार पर सैट किया और जोर से अपनी अंदर की तरफ खींचने लगा। उसकी योनि अमृत रस खिंचता चला आया और मेरे मुंह को भर दिया।
रूपाली का शरीर अकड़ कर हवा में उठ गया। सिर्फ उसका सिर और पैरों के पंजे ही बेड पर टिके थे।
मैंने अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसके योनि द्वार पर लगाकर अंदर की तरफ धकेलने लगा। परन्तु उसकी योनि बहुत ही टाइट थी, जीभ अंदर जा ही नहीं रही थी।
एक बार झडने के बाद उसका शरीर वापिस धड़ाम से बेड पर गिरा और वो जोर जोर से सांसे लेने लगी।
मैं उपर की तरफ होता हुआ उसकी नाभि तक आया और अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी। धीरे धीरे मैं उपर की तरफ आता गया और उसके उभारों के पास आकर मैंने अपनी जीभ उसके एक निप्पल पर टच की और फिर उसके ऐरोला पर फिराने लगा। रूपाली के पैरों में फिर से हरकत होनी शुरू हो गई। वो अपनी जांघों को भिंचने लगी।
मैं उसके उपर लेट गया और लिंग को उसकी योनि पर सैट करके हल्का सा धक्का लगाया। पर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने दोबारा ट्राई किया पर फिर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने लिंग को हाथ में पकड़कर उसकी योनि के द्वार पर सैट किया और एक हल्का सा धक्का लगाया। मेरा लिंग हल्का सा अंदर हो गया, केवल सुपाड़े के आगे का भाग।
रूपाली का शरीर एक बार कांपा और फिर ढीला पड़ गया। उसने मुझे कसके अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने लिंग को वैसे ही पकउ़े पकउ़े थोड़ा सा दबाव डाला तो रूपाली की कमर बेड से उपर उठ गई और उसके मुंह से हल्की सी दर्द भरी आह निकली।
उसके हिलने से मेरा लिंग साइड में फिसल गया। मैंने फिर से लिंग को उसकी योनि पर सैट किया और हल्का सा दबाव डाला, पर जैसे ही मैं दबाव डालता वो हिलती और लिंग साइड में फिसल जाता। परेशान होकर मैं बैठ गया और एक तकिया उठाकर उसके कुल्हों के नीचे सैट किया और फिर बैठे बैठे ही अपना लिंग उसकी योनि द्वार पर सैट किया और उसके उपर लैट गया। तकिया लगाने से मेरा लिंग उसकी योनि पर सही तरह से सैट हो गया था। मैंने अपने लिंग को थोड़ा सा पिछे किया, मेरा हाथ अभी भी लिंग को उसकी योनि द्वार के अलाइन में बनाये हुये था और फिर एक धक्का मारा। मेरा लिंग थोड़ा सा अंदर होकर वापिस बाहर की तरफ फिसल गया। पर उस थोउ़े से अंदर होने से ही रूपाली के शरीर में एक दर्द की लहर दौड़ गई।
उसने अपने पैर मेरे कुल्हों पर लपेट दिये और जोर से भींच लिये। उसके ऐसा करने से मैं हिल नहीं पा रहा था, जिससे धक्का नहीं लगा सकता था। मैंने वैसे ही लेटे हुए उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा।
मस्ती में आकर उसके पैरों की पकड़ कुछ ढीली हो गई और मौके का फायदा उठाते हुए मैंने लिंग को उसकी योनि द्वार पर सैट किया और एक जोर का धक्का मार दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी योनि की दीवारों को चीरता हुआ आधा अंदर समा गया।
रूपाली का शरीर अकड़ गया और उसकी आंखों से अश्रु धारा बह निकली। उसके पैरों की पकड़ एकदम कस गई और उसके हाथ सीधे मेरी पीठ पर पर्हुच गये और उसके नाखून मेरी पीठ में उतर गये, उसके नाखून चुभने से मुझे भी काफी दर्द हुआ।
उसके मुंह से निकली चीख मेरे लबों में दब कर रह गई। मैंने ऐसे ही रहते हुए लिंग को थोड़ा थोड़ा दबाव डालने लगा। लिंग योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा। रूपाली के नाखून मेरी कमर में गडने लगे और मेरे होंठों में उसका दांत। दर्द तो बहुत हो रहा था पर जो आनंद उसकी कसी हुई कच्ची टाइट योनि में आ रहा था, उसके सामने दर्द कम ही था। दबाव डालते डालते लिंग लगभग 2 इंच अंदर पहुुंच चुका था। आगे कुछ अड़चन महसूस हो रही थी शायद उसकी झिल्ली थी। मैं कुछ देर वहीं पर रूक गया। जब रूपाली कुछ नोर्मल हुई और उसके नाखून का दबाव मेरी कमर में कम हो गया और होंठों पे दांतों का तो मैंने अपनी कमर को उठाते हुए लिंग को बाहर खींचा और फिर एक जोरदार धक्का मार दिया। लिंग उसकी झिल्ली को फाडता हुआ सीधा उसके गर्भाश्य से जा टकराया।
उसने भी बदला लेते हुए मेरे होंठों को बुरी तरह से काट लिया और नाखून कमर में गाड़ कर खरोंच दिये। दर्द के मारे मेरी आह निकली गई।

उसकी योनि ने मेरे लिंग को इस तरह जकड़ लिया था कि अभी के अभी उसकी जान निकाल लेगी। झिल्ली फटने से बहता गर्म खून आग में घी का काम कर रहा था। इतना दर्द हो रहा था मुझे कि मन कर रहा था उसको कच्च चबा जाउं। मैं ऐसे कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा, कुछ मेरे दर्द के कारण कुछ उसके दर्द के कारण। जब कुछ समय बाद उसके नाखूनों और दांतों की पकउ़ ढीली हुई तो मैंने राहत की सांस ली। उसकी योनि ने अभी भी मेरे लिंग को उसी तरह जकड़ रखा था। जब वो नोर्मल हो गई तो मैंनें उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मजे में दर्द को तो मैं भूल ही चुका था। थोउ़ी ही देर में वो अपने कुल्हे हिलाने लगी। मैंने अपने लिंग को बाहर खींचा और फिर से एक जोर का धक्का मारा। उसके मुंह से आह निकल कर मेरे मुंह में गुम हो गई और उसकी हाथ मेरी कमर पर कस गये और पैर कुल्हों पर। गनीमत थी की अबकी बार नाखून और दांत नहीं कसे थे।
फिर तो धक्कों ने जो रफतार पकड़ी तो उसकी कुल्हें भी ताल से ताल मिलाकर साथ देने लगे।
उसकी योनि के अंदर की गर्मी और इतना ज्यादा कसाव मेरा लिंग सहन नहीं कर पाया और उसके अंदर की आग को शांत करने के लिए अपना रस उगलना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने मेरे रस को महसूस किया उसका शरीर अकड़ा और उसने मुझे इस तरह से अपनी बाहों में भींच लिया कि मानो दो टुकउ़े कर देगी। उसकी योनि ने भी अपना रस बहाना शुरू कर दिया।
मेरा लिंग जड़ तक उसकी योनि में घुसा हुआ था। कुछ देर बाद हम स्वर्ग से वापिस लौटे तो हमारी सांसे उखडी हुई थी और शरीर में दर्द का अहसास तडपा रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे होंठ को काट कर मुझसे अलग कर दिया है। दर्द के अहसास के कारण मेरा लिंग सिकुड कर छोटा सा हो गया और उसकी योनि से बाहर निकल गया।
वो बुरी तरह से मेरे मुंह को चाटने और चूमने लगी।
मेरे होंठ में दर्द हो रहा था इसलिए मैंने खुद को उससे अलग किया और उठ कर बेड पर बैठ गया। मेरा धयान उसकी योनि की तरफ गया तो वो बुरी तरफ से फट चुकी थी और उसका मुंह खुला हुआ था। उसकी योनि से मेरा और उसका रस बह रहा था, जो हलका हलका लाल लाल सा था।
रूपाली बेड पर लेटी हुई अपनी आंखें बंद करके मुस्करा रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बाथरूम में लाकर शॉवर चलाकर उसके नीचे खड़ी कर दिया। परन्तु खड़े होते ही उसे योनि में असीम दर्द का अहसास हुआ जिस कारण से वो मेरे गले में बाहें डालकर झूल गई।
मैंने उसे सहारा देकर कमोड़ पर बैठा दिया और फिर गीजर चालू कर दिया। गर्म गर्म पानी से उसकी योनि को साफ किया और फिर नहाने के लिए शॉवर के नीचे आ गया।
सॉरी----- आई एम सो सॉरी,,, अचानक उसकी आवाज आई।
क्या हुआ,,,, सॉरी क्यों बोल रही हो, मैंने कहा।
उसने अपनी उंगली मेरी कमर की तरफ कर दी। मैंने पिछे मुंह करके सीसे में अपनी कमर देखी तो कमर पर खून जमा हुआ था और जगह जगह घाव हो रहे थे। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
इट्स ओके---- टैंशन मत लो, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही वो उठने लगी पर जैसे ही उसने उठकर एक कदम आगे बढ़ाया उसके शरीर में दर्द की लहर दौड़ गई और वो वापिस कमोड़ पर बैठ गई।
मैंने उसे सहारा देकर उठाया और शॉवर के नीचे लाकर खडी कर दिया। उसने मेरे कंधे को पकड़ लिया और धीरे धीरे नीचे बैठ गई। शॉवर से निकलता हलका गर्म पानी बहुत ही राहत दे रहा था।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--42
गतांक से आगे ...........
शॉवर के बाद हम वापिस बाहर आ गये और मैंने उसके शरीर को पौंछा और उसको बेड पर बैठाकर उसे एक दर्द की गोली दी और खुद भी ली।
मेरी नजर पर गई तो वो ऐसे ही नंगी चेयर पर बैठी हमें घूर रही थी। मेरी कमर को देखकर शायद वो सकुचा रही थी। मैंने उसके पास गया और उसकी तरफ कमर करके फर्श पर बैठ गया और उसे लगाने के लिए मलहम दी। उसने अच्छी तरह से कमर में मलहम लगा दी। मलहम लगवाने के बाद मैं वहीं पर उसके जांघों पर सिर रखकर बैठ गया। वो मेरे बालों को सहलाने लगी। मेरे हाथ साइड से उसकी जांघों को सहला रहे थे।

मेरी नजर पर गई तो वो ऐसे ही नंगी चेयर पर बैठी हमें घूर रही थी। मेरी कमर को देखकर शायद वो सकुचा रही थी। मैंने उसके पास गया और उसकी तरफ कमर करके फर्श पर बैठ गया और उसे लगाने के लिए मलहम दी। उसने अच्छी तरह से कमर में मलहम लगा दी। मलहम लगवाने के बाद मैं वहीं पर उसके जांघों पर सिर रखकर बैठ गया। वो मेरे बालों को सहलाने लगी। मेरे हाथ साइड से उसकी जांघों को सहला रहे थे।
पेन किलर ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और अब दर्द का अहसास लगभग खत्म सा हो गया था। मैंने सिर उठाकर बेड की तरफ देखा, लग रहा था कि रूपाली सो चुकी है।
उंहहहहह नींद आ रही है, चलो सो जाते हैं, मैंने उंघते हुए तान्या से कहा।
क्या, और मैं, मेरा क्या होगा, तान्या ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा।
अच्छा चलो, आप कुछ मत करना, मैं खुद ही कर लूंगी, तान्या ने फिर कहा।
ठीक है, मैंने थोउ़ा सोचते हुए कहा।
हम उठकर बेड पर आकर बैठ गये।
मैं लेटूंगा कैसे, कमर में दर्द होगा, कमर के घाव याद आते ही मैंने कहा।
तान्या ने पिछे तकिये रखकर इस तरह बना दिया कि कंधों तक तो मैं तकियों पर और कमर उनसे नीचे। फिर उसने मुझे पकड़कर तकियों पर लेटा दिया और दो तकिये मेरे कुल्हों के नीचे लगा दिये। इस तरह से मेरी कमर हवा में थी।
मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया। तान्या ने आगे बढ़कर मेरा मुरझाया हुआ लिंग अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुक करने लगी। मेरा लिंग झटका खाकर एकदम से खड़ा हुआ और इधर उधर देखने लगा कि किसने मेरी नींद खराब की, परन्तु जब तान्या की गर्म और खुरदरी जीभ की लपेटे में आया तो अपने होशो हवास भूल बैठा और जोर जोर से फुंफकारे मारने लगा।
तान्या ने कुछ देर और लिंग को सुक किया और फिर मेरे दोनों तरफ पैर करके नीचे बैठने लगी। लिंग के पास आकर उसने लिंग को योनि पर सैट किया और आराम से नीचे होती गई। कुछ ही पल में उसकी योनि ने पूरे लिंग को निगल लिया और जकड़ लिया।
उसकी योनि की गर्मी पाकर लिंग पूरी तरह अकड़ गया और तान्या धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी। बहुत देर से मेरी और रूपाली की कामक्रीड़ा देखकर वो ज्यादा ही उतेजित थी, इसलिए जल्दी ही जोरों से मेरे लिंग के उपर कूदने लगी।
उसके इस तरह कूदने से तकिये इधर उधर हो गये और मेरी कमर बेड से टच होने लगी। दर्द तो हो रहा था पर कुछ सोचकर मैंने धयान नहीं दिया।
पांच मिनट में ही तान्या का शरीर अकड़ कर पिछे की तरफ झुक गया और वो मेरे पैरों पर अपने हाथ रखकर वैसे ही बैठी रही। उसकी योनि से पानी निकलकर मेरे पेट पर बहने लगा।
थोड़ी देर बाद वो वैसे ही बैठे रहने के बाद वो अपनी योनि को मेरे लिंग पर आगे पिछे करने लगी। और दो मिनट में ही फिर से गरम हो गई और उसी तरह बैठे हुए जोर जोर से उछलने लगी। अबकी बार उसकी योनि का कसाव कुछ ज्यादा ही हो गया था। अचानक उसने अपने हाथ उठाये और आगे की तरफ झुककर मेरी छाती में रख दिये और जोर जोर से कूदने लगी।
 
उसकी गर्मी के कारण मैं अब किसी भी समय निकलने वाला था। और वही हुआ। लिंग ने अपने रस से उसकी योनि को भरना शुरू कर दिया और मेरे रस को महसूस करते ही वो दूसरी बार फिर से खाली होने लगी।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद वो मेरे उपर लेट गई। उसके लेटने से मेरी कमर बेड पर जाकर टिक गई और दर्द के मारे मेरे मुंह से आहहहहह निकली।
तान्या तुरंत उठकर साइड में बैठ गई। मैं उठा और बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया और आकर लेट गया। तान्या ने तकियों को सिरहाने रख दिया था और लेटी हुई थी।
मैं आकर औंधा लेट गया और अपना एक हाथ और एक पैर रूपाली के उपर रख दिया और जल्दी ही नींद के आगोश में समा गया।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो मेरी कमर पर हलके हलके हाथ महसूस हुआ। मैंने आंख खोलकर सिर उठाकर देखा तो सोनल बैठी हुई थी।
गुड मॉर्निंग,,,,, मुझे उठा हुआ देखकर सोनल ने कहा।
गुड मॉर्निग------- मैंने बैठते हुए कहा।
मैंने बेड पर देखा तो तान्या और रूपाली वहां पर नहीं थी।
वो दोनों कहां गई---- मैंने सोनल से पूछा।
घर----- सोनल ने कहा।
मैंने टाइम देखा----- साढ़े आठ बजने वाले थे।
मैं जल्दी से उठा, पर जैसे ही उठने लगा तो कमर में खिंचाव महसूस हुआ। मैं वापिस बैठ गया और फिर धीरे धीरे उठ कर बाथरूम में गया। फ्रेश होकर नहाया और तैयार हुआ। सोनल नीचे चली गई थी। तैयार होकर ऑफिस के लिये निकल पड़ा।

ऑफिस जाकर बाइक खडी की और सीधा ऑफिस में आ गया। ऑफिस में कोई नहीं था।
आज अपूर्वा नहीं आई क्या, मैंने मन ही मन सोचा। तभी धयान आया कि अपूर्वा की स्कूटी भी नहीं खड़ी थी।
मैंने सिस्टम ऑन किया और चेयर पर बैठकर अपूर्वा का नम्बर मिलाया।
हैल्लो----- फोन आंटी ने उठाया था।
हैल्लो आंटी, मैं समीर बोल रहा हूं अपूर्वा के ऑफिस से, आज वो आई नहीं, मैंने कहा।
समीर बेटा----- उसकी आज तबीयत खराब है, तो इसलिए मैंने नहीं आने दिया, आंटी ने कहा।
क्या हुआ, डॉक्टर को दिखाया, क्या कहा डॉक्टर ने---- मैंने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए।
कुछ नहीं हुआ, बस हल्का सा बुखार है, डॉक्टर को दिखा दिया, आंटी ने कहा।
बड़ी फिकर हो रही है, आंटी ने फिर से कहा।
बात करनी है---- लो बात करो---- मेरा उतर जाने बगैर ही आंटी ने अपूर्वा को फोन दे दिया।
हैल्लो--- अपूर्वा की धीमी सी आवाज आई।
हैल्ललााो--- मैंने भी उसकी नकल उतारते हुए कहा।
क्या हो गया तुम्हें------- मैंने कहा।
हल्का सा बुखार है------ अपूर्वा ने कहा।
तभी मुझे बाहर से बॉस की आवाज आई।
ओके, जल्दी से ठीक हो जाओ, बॉस आ रहे हैं,, मैं बाद में बात करता हूं,,,, मैंने कहा।
ओके बाय------ अपूर्वा कहा और फोन रख दिया।
आज अपूर्वा नहीं आई, बॉस ने अंदर आते हुए कहा।
वो उसको बुखार है, अभी फोन किया था मैंने, मैंन कहा।
चलो कोई नहीं, मुझे अभी मीटिंग में जाना है, मैडम की तबीयत भी कुछ खराब है, कोमल यहीं पर है, थोड़ा धयान रखना, बॉस ने कहा।
ओके बॉस, मैंने कहा और काम करने लगा।
बॉस चले गये। मैं अपने काम में बिजी हो गया। कुछ देर बाद कोमल चाय लेकर आई। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
गुड मॉर्निंग, उसके अंदर आते ही मैंने कहा।
कोमल ने एक फीकी सी मुस्कान दी और चाय रखकर वापिस चली गई।
बड़ी नखरैल है, मैंने मन ही मन सोचा और चाय पीने लगा।
अभी चाय पी ही रहा था कि कोमल फिर से आई और आकर मेरे साइड में खड़ी हो गई।
मैंने सिर उठाकर उसकी तरफ प्रश्नवाचक निगाह से देखा।
दीदी बुला रही है, चाय पीकर चलो, कोमल ने कहा।
उसकी छोटी सी टी-शर्ट में से झांकता उसका सपाट मुलायम मखमली पेट देखकर मन तो कर रहा था कि छू लूं, पर फिर खुद को रोक ही लिया।
मैंने चाय खत्म की और कोमल के कंधे पर हाथ रखकर खड़ा होने लगा। खड़े होते हुए जानबूझ कर अपना सिर उसके उन्नत उरोजों पर टकरा दिया। एक बार तो उसके मुंह से हल्की सी आह निकली पर फिर वह संभली और तुरंत पिछे हो गई और बाहर निकल गई।
मैं उसके पिछे पिछे चल दिया। उसने एकबार पिछे मुडकर देखा और जब पाया कि मैं पिछे ही आ रहा हूं तो जल्दी जल्दी कुल्हे मटकाते हुए अंदर आ गई।
वो सीधे मैम के बेडरूम में गई। मैं भी उसके पिछे पिछे अंदर आ गया। मैम बेड पर चद्दर ओढकर लेटी हुई थी।
कोमल मैम जाकर बेड पर बैठ गई। वो बेड के साथ कमर लगाकर पैरों को आधे मोडकर बैठी थी। पैरों को थोड़ा सा खोला हुआ था। मैं बेड के सामने आकर खडा हो गया और जैसे ही मेरी नजरें कोमल की तरफ गई तो मेरी आंखें वहीं पर जम गई। उसकी पजामी योनि वाली जगह से गीली थी और उसकी योनि की शेप एकदम से उजागर हो रही थी। गोरी गोरी फांके भीगी हुई पजामी को अपने से चिपकाये हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे आमंत्रण दे रही हों। लग रहा था कि उसने पेंटी नहीं पहनी है। मैं तो बस देखता ही रह गया।
कोमल मैम की तरफ मुंह करके उनसे कुछ कह रही थी। जब उसकी मेरी मुझ पर पड़ी और मेरी आंखों का पीछा करते हुए जब उसे एहसास हुआ कि मेरी नजरें कहां पर हैं, तो उसने एकदम से अपने पैरों को बेड पर सीधा करके एक दूसरे से चिपका लिया और तकिया उठाकर अपनी जांघों पर रख लिया। शायद मैम ने मुझे उसे यों घूरते देख लिया था, वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
तभी मुझे ऐसा लगा कि मैम ने अपनी पजामी का उतारा है चद्दर के अंदर ही, या फिर पहना है। मैं आंखें फाड़कर मैम की तरफ देख रहा था। मैम ने मुझे आंख मारी।
वो तुम्हारे सर को तो आज अचानक मीटिंग में जाना पड़ गया तो तुम कोमल के साथ चले जाओ। जगतपुरा में इसकी कोई दोस्त रहती है, दोनों साथ में कॉलेज में पढ़ती थी।
ठीक है, पर फिर यहां आपका धयान कौन रखेगा, वैसे ही आपकी तबीयत ठीक नहीं है, मैंने मैम से कहा।
मेरी चिंता मत करो, शुकन्तला है, तुम जाओ, मैम ने कहा।
और धयान से जाना, मैम ने फिर कहा।
ओके मैम, मैंने कहा।
कब चलना है कोमल जी, मैंने कोमल की तरफ देखकर कहा।
उसने अपनी आंखें झुका रखी थी और मेरे पूछने पर बस इतना ही बोली, 10 मिनट में चलते हैं।
मैंने ऑफिस में आकर सिस्टम शटडाउन किया और आकर मैम के पास बैठ गया। कोमल वहां पर नहीं थी, शायद तैयार होने गई थी। मैम ने चदद्र को थोडा सा साइड में किया और मेरा हाथ पकड़ कर सीधा अपनी योनि पर रख दिया। मेरा हाथ सीधा उनकी नंगी योनि पर जाकर टकराया। मैंने एकदम से उनकी तरफ देखा। उन्होंने कुछ भी नहीं पहना हुआ था। बिल्कुल नंगी लेटी थी। मैम की योनि एकदम गीली थी।
तब मेरी समझ में आया कि कोमल की योनि क्यों गीली थी, शायद मैम के साथ मस्ती चल रही थी। मेरा धयान दरवाजे की तरफ ही था और हाथ मैम की योनि को सहला रहा था।
तभी बाहर से आवाज आई और मैंने अपना हाथ हटा लिया, मैम ने चद्दर ओढ ली। कोमल ही थी।
जैसे ही वो कमरे में एंटर हुई मैं तो आंखें फाडे उसे ही देखता रह गया। आसमानी चमकदार कुर्ती जिसका गला बहुत ही डिप था, और बटन सभी बटन खुले हुये थे। उसके आधे से ज्यादा उरोज बीच में से नंगे दिख रहे थे। मैंने थोड़ा धयान से देखा तो उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। मेरी सांसे तो उपर नीचे होनी शुरू हो गई। स्कीन टाइट जींस में उसकी मादक जांघें उभर कर आ रही थी।
चले---- उसने मुझे खुदको यूं घूरते हुए देखकर कहा।
ओ-के- चलो, कहकर मैं बाहर आ गया।
मैंने बाइक स्टार्ट की और कोमल ने जाकर गेट खोल दिया।
कोमल आकर बाइक पर बैठ गई। उसने टोपी वाला हेलमेट पहना था। वो थोड़ा पिछे हटकर बैठी थी, उसका मेरे कंधे को पकड़ा हुआ था। वो इतना पिछे बैठी थी कि मेरे थोडा पिछे होने पर भी वो टच नहीं हुई। मैंने बाइक में एकदम से रेस दी और एकदम से ब्रेक लगा दिये। कोमल सीधा मेरी छाती से आकर टकराई और उसके उन्नत उरोज मेरी कमर में गड़ गये। क्या फिलिंग थी, बता नहीं सकता। कोमल के मुंह से एक आह निकल गई।
क्या है, आराम से नहीं चला सकते, मैं नहीं जा रही तुम्हारे साथ,,, कोमल ने कहा।
ठीक से चलानी है तो चलाओ, नहीं तो रहने दो, मैं ऑटो में चली जाउंगी, उसने फिर से कहा।
सॉरी, आराम से चलाउंगा, आप नाराज न हो,,, मैंने कहा और बाइक को आगे बढ़ा दिया।
मैं धीरे धीरे 50 की स्पीड पर बाइक चला रहा था। कोमल अभी भी मुझसे चिपक के ही बैठी हुई थी और उसके उरोज मेरी कमर में दबे हुए थे।
थोडी दूर चलने पर उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर से हटाकर अपनी जांघों पर रख लिया, जो मेरी जांघों को साइड में से छूने लगा। तभी एक बाइक वाले ने तेजी से हमारी साइड से बाइक निकाल कर हमारे आगे कर दी, जिससे मुझे ब्रेक लगाने पड़े। अचानक ब्रेक लगाने से थोड़ा सा बैलेंस बिगड़ा, पर स्पीड कंट्रोल में थी तो संभल में आ गई, पर इससे एक फायदा ये हुआ कि गिरने से बचने के लिए कोमल का हाथ मेरे पेट पर पहुंच गया और उसने दोनों हाथों से मेरे पेट को पकड़ लिया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--43
गतांक से आगे ...........
लगता है लाइन पर आ गई है, मैंने मन ही मन सोचा और थोड़ा सा कमर को पिछे की तरफ कर दिया। मुझे मेरी गर्दन पर कोमल की गर्म गर्म सांसे महसूस हो रही थी। पूरे रस्ते वो वैसे ही बैठी रही, धीरे धीरे बाइक चलाते हुए लगभग आधे घंटे में जगतपुरा पहुंच गये।
कोमल ने उतरकर बैल बजाई और मैं बाइक को खड़ी करके उसके पास आकर खड़ा हो गया। दरवाजा कामवाली बाई ने खोला।
जी बोलिये, क्या काम है, बाई ने पूछा।
मैं रूपाली की दोस्त हूं, मिलने के लिए आई हूं, कोमल ने कहा।
रूपाली का नाम सुनते ही मुझे रात वाली रूपाली याद गई और लिंग ने एक अंगड़ाई ली और फिर वापिस सो गया।
जी कौन रूपाली, यहां तो कोई रूपाली नहीं रहती, बाई ने कहा।
बाई की बात सुनकर मेरी हंसी छूट गई। कोमल ने मेरी तरफ घूर कर देखा तो मैं शांत हो गया, पर हंसी रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी।
आप एकबार अंदर पूछकर आईये, मैं पहले आ चुकी हूं, यहां पर, कोमल ने बाई से कहा।
आप यहीं पर रूकिये, मैं अभी पूछकर आती हूं, कहते हुए बाई अंदर चली गई।
बड़ी हंसी आ रही है, दो मिनट चुपचाप नहीं खड़े रह सकते, कोमल ने मुझे झिडकते हुए कहा।
थोड़ी देर में अंदर से एक बहुत ही सैक्सी लड़की निकल कर आई, मैंने एक बार उस लड़की की तरफ देखा, फिर कोमल की तरफ देखा। कोमल के चेहरे से लग रहा था कि ये रूपाली नहीं है।
जी कहिये, उस लड़की ने गेट पर आकर मेरी तरफ देखते हुए कहा।
जी मैं रूपाली की दोस्त हूं, उनसे मिलने आई हूं, कोमल ने जवाब दिया।
जी आपको कुछ गलतफहमी हुई है, यहां पर कोई रूपाली नहीं रहती, उस लड़की ने कहा।
उसकी बात सुनकर तो मेरी जोर से हंसी छूट गई और मैं थोड़ा साइड में होकर अपनी हंसी को कंट्रोल करने की कोशिश करने लगा।
मैं पहले भी यहां पर आ चुकी हूं, और मुझे अच्छी तरह याद है कि यही घर था, और आप कह रही हैं कि यहां पर कोई रूपाली नहीं रहती, कोमल ने थोड़ा उलझन में कहा।
जी अभी 6 महीने पहले ही हमने ये घर खरीदा है, उस लड़की ने कहा।
शिटटट्--- क्या आपको पता है कि जो पहले यहां पर रहते थे, वो अब कहां रहते हैं, कोमल ने निराश होते हुए पूछा।
उस लड़की की बात सुनकर मैं वापिस बाइक पर आकर बैठ गया था और बाइक स्टार्ट कर ली थी।
जी जब हम यहां पर आये तो ये घर खाली ही थी, जो पहले रहते थे वो हमारे आने से काफी पहले ही खाली कर चुके थे, इसलिए हमें उनके बारे में कुछ भी नहीं पता है, उस लड़की ने थोड़ा सा सांत्वना वाला चेहरा बनाते हुए कहा।
जी, धन्यवाद, कहकर कोमल मेरे पास आकर बाइक के सहारे लगकर खड़ी हो गई।
जी अगर आपकी आज्ञा हो तो चलें, मैंने मुस्कराते हुए कोमल से कहा।
वो लड़की अभी भी गेट पर ही खड़ी थी, इसलिए मैं अपनी हंसी को थोड़ा कंट्रोल कर रहा था।
तुम्हें बड़ी हंसी आ रही है, अब वो यहां से घर बेच कर चले गये तो इसमें मेरी गलती है, कोमल ने गुस्सा होते हुए कहा।
जी बिल्कुल नहीं, उनको आपको सूचित करना चाहिए था घर बेचने से पहले, और अपना नया एड्रेस भी देना चाहिए था, मैंने सीरियस चेहरा बनाते हुए कहा।
कोमल ने एक जोर का मुक्का मेरी कमर में जमा दिया, और मुंह फुला कर बाइक पर बैठ गई। वो मुझसे काफी पिछे हटकर बैठी थी। मैंने बाइक को वापिस घर की तरफ दौड़ा दिया।
वैसे आपकी वो रूपाली जी दिखती कैसी थी, मैंने कोमल से पूछा।
पर कोमल ने कोई जवाब नहीं दिया।
मुझे भूख लगी है, कहीं रूककर कुछ खाते हैं ना, थोड़ी दूर आने पर कोमल ने कहा।
मैंने बाइक गौरव टावर की तरफ मोड दी और कुछ ही देर में हम गौरव टॉवर में डॉमिनोज में टेबल पर बैठे अपने पिज्जा का इंतजार कर रहे थे।
अभी आप क्या कर रही हैं, कोई और बात न सूझने पर मैंने बातचीत शुरू करने के लिए यही सवाल पूछना सही समझा।
कोमल ने मेरी तरफ देखा और फिर कुछ सोचने लगी।
एमबीए कर रही हूं, कोमल ने जवाब दिया।
अब एमबीए के बारे में मुझे ज्यादा कुछ तो पता नहीं था, इसलिए अपनी पोल खुलने से बचने के लिए मैंने आगे इस बारे में कुछ न पूछना ही सही समझा।
अच्छा आपके पिताजी क्या करते हैं, मैंने उसको फिर से चुपचाप बैठते देखकर पूछा।
क्यों फैमिली पर लिटरेचर लिखना है क्या, सब कुछ पूछ कर, कोमल ने कहा।
 
अब इस जवाब के बाद तो मेरी हिम्मत ही नहीं हुई कुछ पूछने की, इसलिए चुपचाप पिज्जा का इंतजार करने लगा।
उसका साथ तो बहुत अच्छा लग रहा था, पर जिस तरह से वो बात कर रही थी, गुस्सा भी बहुत आ रहा था उस पर।
थोड़ी देर में वेटर दो पिज्जा ले आया। पिज्जा को देखकर मेरी समझ में नहीं आया कि इसको कैसे खाउं, इसलिए कोमल की शुरूआत करने का इंतजार करने लगा।
कोमल ने पिज्जा खाना शुरू किया और उसकी देखा देखी मैं भी उसी तरह पिज्जा खाने लगा। पिज्जा खाते ही मेरे मुंह में आग सी लग गई, बहुत ही ज्यादा मिर्ची थी, मैंने सॉफ्रट ड्रिक का गिलास एक ही बार में खाली कर दिया।
मैं सी-सी कर रहा था। कोमल मुझे देखकर हंसने लगीं
क्या बच्चों की तरह सी-सी कर रहे हो, थोड़ी सा भी तीखा नहीं खा सकते, कोमल ने हंसते हुए कहा।
इतनी मिर्ची तो हैं इसमें, मैंने इधर उधर वेटर को ढूंढते हुए कहा।
दो ड्रिंक और लेकर आओ, मुझे इधर उधर देखता हुआ पाकर वेटर हमारे पास आया तो मैंने उससे कहा।
और कुछ सर, वेटर पूछने लगा।
नहीं और कुछ नहीं, बस जल्दी से ड्रिंक लेकर आओ, मैंने कहा।
वेटर चला गया।
कोमल ने मेरे पिज्जा में से एक टुकड़ा लिया और खाते हुए कहा, कहां है मिर्ची, बिल्कुल भी नहीं है इसमें, तुमने चिल्ली सॉस ज्यादा लगा लिया होगा, कोमल ने कहा।
उसने मेरे सॉस की तरफ देखा तो आधे से ज्यादा खत्म था।
अब इतनी चिल्ली लगाओगे तो सी-सी तो करोगे ही, कोमल ने कहा और अपना ड्रिंक मेरे सामने कर दिया।
मेरे तो मुंह में आग लगी हुई थी, मैंने जल्दी से उससे ड्रिंक लिया और पी गया। इतने में वेटर दो ड्रिंक और ले आया।
मैंने जल्दी से उनमें से एक और खत्म किया तब जाकर मुंह में कुछ शांति हुई। थोडी देर रूककर मैंने थोड़ा सा टुकडा खा कर देखा, पिज्जा तीखा नहीं था। फिर तो मैंने सारा पिज्जा ही बगैर सॉस के खाया।
पिज्जा खाकर हम उठने ही वाले थे कि तभी मेरी नजर गेट से अंदर आती हुई रूपाली पर पड़ी, उसके पीछे पीछे नवरीत, सोनल और तान्या भी अंदर आ गई।
एक मिनट मैं अभी आया, कहकर मैं उठ खड़ा हुआ।
क्या हुआ, कहां जा रहे हो, कोमल ने पूछा।
अभी आ रहा हूं, मैंने कहा और गेट की तरफ चल पड़ा।
ओए, आप यहां पर क्या कर रहे हो, मुझे देखते ही नवरीत ने पूछा और उसके साथ साथ सोनल ने भी यही सवाल दाग दिया।
वो बॉस की साली को घुमाने लाया हूं, मैंने हंसते हुए कहा।
कहां है, सोनल ने इधर उधर नजर दौड़ाते हुए कहा।
मैं उनको लेकर कोमल के पास आ गया।
ओए, तू यहां क्या कर रही है, रूपाली ने कोमल की तरफ आश्चर्य से देखते हुए कहा।
पहले तू ये बता कि तू कहां मर गई थी, अभी तेरे घर से ही आ रही हूं, कोमल कहते हुए उठी और रूपाली और कोमल के बेमिसाल उरोज एक दूसरे के गले लग गए।
मेरे घर, तुझे मेरा एड्रेस कहां से मिला, रूपाली ने गले मिलकर हटते हुए कहा।
घर कहां मिला, वहां तो कोई और ही था, कह रहे थे कि तुम वहां से बेच कर चले गये हो, कोमल ने कहा।
यार, तू पहले वाले घर पहुंच गई, वो तो किराये का था, अब मालवीय नगर में ले लिया है हमने मकान, रूपाली ने कहा।
कोमल की आंखें कुछ नम सी हो गई थी।
वॉव यार, चलो ये अच्छा हुआ कि हम यहां पिज्जा खाने के लिए रूक गये, नहीं तो तुम्हें तुम्हारी रूपाली शायद कभी नहीं मिलती, मैंने कहा।
तुम तो कह रहे थे कि बॉस की साली को घुमाने लाया हूं, नवरीत ने कहा।
लाया तो हूं, अब तुम्हारी दोस्त मेरे बॉस की साली है तो मेरा कसूर थोड़े ही है, मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर सभी हंसने लगे।
हाय मैं, नवरीत, रूपाली की दोस्त, और अब तुम्हारी भी दोस्त, नवरीत ने आगे बढ़ते हुए कोमल से हाथ मिलाते हुए कहा।
स्योर, रूपाली के दोस्त मेरे दोस्त, कोमल ने कहा और उसके गले लग गई।
फिर सभी ने अपना अपना परिचय दिया और दूसरी टेबल से चेयर सरका कर सभी बैठ गये। टेबल के चारों तरफ जगह फुल हो गई, मेरे बैठने के लिए जगह ही नहीं बची, तो मैं पास वाली टेबल पर जाकर बैठ गया।
हे, वहां क्यों बैठ गये, यहां आओ, नवरीत ने अपनी चेयर को एडजेस्ट करते हुए एक चेयर की जगह बनाते हुए कहा।
मैं चेयर उठाकर वहां पर आकर बैठ गया।
फिर उन्होंने 6 पिज्जा और ऑर्डर किये। एक और पिज्जा खाकर मेरा पेट तो फुल भर गया।
रूपाली और कोमल खूब बातें करती रही।
खाना-पीना होने के बाद मैंने बिल पे किया और हम डोमिनोज से बाहर आ गये।
अभी तो मैं घर थोड़ा लेट जाउंगी, शाम को जरूर आना, रूपाली ने कहा।
एड्रेस तो बता दे, आना की बच्ची, कोमल ने कहा।
अरे एड्रेस, ये हैं ना इनके साथ आ जाना, मैं इनके घर पर ही मिलूंगी, रूपाली ने कहा।
कोमल ने मेरी तरफ शंकित नजरों से देखा और फिर रूपाली की तरफ देखकर मुस्करा दी।
ओके ठीक है, इनके साथ ही आ जाउंगी, कोमल ने कहा।
कोमल सभी के गले लगी, मुझको छोड़कर। पर उसकी कसर रूपाली, नवरीत, तान्या और सोनल ने पूरी कर दी।
सबको बायें बोलकर मैं और कोमल ऑफिस के लिए चल दिये और बाकी सभी घर की तरफ।
ऑफिस पहुंचकर कोमल अंदर चली गई और मैं सीधा ऑफिस में आ गया।

थोड़ी देर में कोमल ऑफिस में आ गई और अपूर्वा की चेयर को मेरे पास सरका कर बैठ गई।
ये लो-----आपके पैसे, नहीं तो मन ही मन बुरा-भला कहोगेे,,,,,, कोमल ने मेरी तरफ पैसे बढ़ाते हुए कहा।
किस चीज के पैसे----- मेरी समझ में नहीं आया कि कैसे पैसे दे रही है तो मैंने कन्फयूज होते हुए पूछा।
पिज्जा के,,, और किसके------ कोमल ने कहा और पैसे मेरी गोद में रख दिये।
 
देवा रे देवा,,,,,,, क्या करूं इन लड़कियों का,,, मैं अपना माथा पिटते हुए बड़बड़ाया।
मैंने कोमल का हाथ पकड़ा और पैसे उसके हाथ में रखने लगा तो उसने अपना हाथ एक तरफ कर लिया।
मेरी तो सटक गई थी, मैंने उसकी गोद में जोर से हाथ मारते हुए पैसे रख दिए। मेरा हाथ उसकी पजामी में से उभर रही योनि पर टच हो गया। मुझे एकदम से करंट सा लगा। मैंने अपना हाथ वैसे ही रख दिया और अब पकड़ लो इन्हें, कहते हुए और ज्यादा अपने हाथ का दबाव कोमल की योनि पर बना दिया। कोमल की सांसे तेज हो गई थी और उसका शरीर बार बार झुरझुरी सी ले रहा था। पर न तो उसने पैसे पकड़े और न ही मेरा हाथ हटाया। मैं वैसे ही अपना हाथ वहां पर दबाकर रखे रहा।
जब कोमल ने मेरा हाथ नहीं हटाया तो मैंने अपने हाथ को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी उंगली सीधी करके उसकी योनि के उपर रख दी।
कोमल के शरीर ने एकदम से झुरझुरी ली और मुझे अपनी उंगली पर कुछ गीलापन महसूस हुआ। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसकी आंखें आधी बंद थी और चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसके उन्नत उरोज तो सांसों के साथ तेजी से उपर नीचे हो रहे थे। मेरा मन तो कर रहा था कि बस मुंह में भरकर चूस लूं।
उसकी हालत देखकर मैं समझ गया कि अब ये इस दुनिया में नहीं है। मैंने अपनी उंगली का हलका हलका दबाव उसकी योनि पर बढ़ाया और रगड़ने लगा।
मैंने उसकी कुर्ती को उपर किया और पजामी की डोर पकड़कर खींच दी। जैसे ही उसकी पजामी की डोर खुली, कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर जाने से रोक लिया और वापिस अपनी योनि पर पजामी के उपर से ही दबा दिया। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसका उसकी आंखें बंद थी।
वो मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने भी हाथ को सही तरह से सैट करके उसकी योनि को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और एक उंगली, पजामी समेत उसकी फांकों में सैट कर दी।
मेरे ऐसा करते ही कोमल का शरीर अकड़ गया और मेरा हाथ पूरा भीग गया। उसने मेरे हाथ को जोर से अपनी योनि पर दबा लिया था, जिससे मेरी उंगली हलकी सी उसकी योनि में चली गई थी।
कुछ देर तक उसका शरीर ऐसे ही अकड़ा रहा। मुझे अपनी उंगली पर उसकी योनि का संकुचन महसूस हो रहा था। उसकी आंखें जोर से बंद थी।
जब वो कुछ नोर्मल हुई तो मेरे हाथ से उसने अपना हाथ हटा लिया, उसने धीरे से थोड़ी सी आंखें खोली, मुझे अपनी तरफ ही देखता पाकर उसने वापिस अपनी आंखें बंद कर ली।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--44
गतांक से आगे ...........
मैंने अपना हाथ उसके सिर के पिछे रखा और उसके चेहरे को अपनी तरफ खींचकर उसके तपते लबों पर अपने लब रख दिये।
कोमल जैसे नींद से जागी हो, उसने मुझे पीछे धक्का दिया और तेजी से उठकर बाहर भाग गई। उसके इस बिहेवियर से मैं हैरान रह गया। दो मिनट बाद मैं उठकर दरवाजे पर आया तो देखा कि वो बाहर दीवार के सहारे खड़ी है और जोर जोर से हांफ रही है, उसकी आंखों से आंसू बह रहे हैं।
मैं बहुत परेशान हो गया और जैसे ही मैंने आगे बढ़ने के लिए पैर उठाया मेरा पैर वहां पर गिरे पेड के पते पर पड़ा तो हलकी सी आवाज हुई। कोमल ने आंखें खोलकर जब मुझे देखा तो जल्दी से अंदर चली गई।
मुझे खुदपर बहुत गुस्सा आ रहा था कि क्यों मैंने ये हरकत की। मैं आकर अपनी चेयर पर बैठ गया और सिर को पिछे की तरफ टिका कर सोचने लगा।
उठिये, चाय पी लीजिए, आवाज सुनकर मेरी आंख खुली। कब मुझे नींद आ गई थी पता ही नहीं चला। कोई मुझे झकझोर कर उठा रहा था। मैंने आंखें खोल कर देखा, तो सामने कोमल थी। उसके हाथ में चाय की ट्रे थी।
जब उसने देखा कि मैं उठ गया हूं तो चाय का कप टेबल पर रख दिया।
सॉरी,,, मैंने उससे कहा।
वो जल्दी से चाय रखकर बिना कोई जवाब दिये, और बिना मेरी तरफ देखे वापिस चली गई। मैंने कप उठाने के हाथ आगे बढ़ाया तो हाथ में कुछ खिंचाव सा महसूस हुआ। मैंने देखा तो हथेली और उंगलियों पर पपड़ी सी थी। तब मुझे याद आया कि मैंने हाथ तो धोया ही नहीं कोमल के रस का।
मैं उठकर वासबेसिन पर हाथ-मुंह धोकर आया और बैठकर चाय पीने लगा। मैंने टाइम देखा तो साढ़े चार बज गये थे।
दस-पंद्रह मिनट मैं ऐसे ही चेयर पर बैठा रहा। फिर सभी चीजें ऑफ की और ऑफिस का दरवाजा लगाकर बाहर आ गया। तभी मुझे धयान आया कि मैम की तबीयत खराब थी तो मैंने बैल बजाई।
शकुंतला ने दरवाजा खोला, और मैं अंदर आ गया। मैम हॉल में बैठी टीवी देख रही थी।
अब आपकी तबीयत कैसी है मैम, मैंने अंदर आकर पूछा।
ठीक है, गोली ले ली थी तो अब आराम है, मैम ने कहा।
ठीक है मैम, मैं चलता हूं, टाइम हो गया, मैंने कहा।
वो कोमल भी जा रही थी ना साथ, दोपहर को कह रही थी कि शाम को तुम्हारे साथ ही जायेगी, उसकी सहेली का घर उधर ही है, मैम ने कहा।
जी मैम, मैंने कहा।

मैम ने कोमल को आवाज लगाई। कोमल मैम के रूम में थी। वो बाहर आई और सामने मुझे खड़े देखकर नजरें नीचे कर ली।
जी दीदी, उसने वहीं पर खड़े खड़े ही कहा।
'जी दीदी',,,,, ये 'जी' कब से लगाने लग गई, मैम ने कहा और हंसने लग गई।
वो समीर जा रहा है, तुझे जाना था ना अपनी सहेली के घर, मैम ने कहा।
हां, कोमल ने कहा।
हां की बच्ची, फिर कब जायेगी, ये जा रहा है, मैम ने कहा।
अभी आ रही हूं, कपड़े चेंज कर लेती हूं, कोमल ने कहा और अंदर चली गई।
मैं वहीं सोफे पर बैठकर इंतजार करने लगा। मैंने मैम की तरफ देखा, तो मैम मुझे ही घूर रही थी।
जैसे ही हमारी नजरें मिली, मैम ने एक कातिल मुस्कान पेश कर दी।
तभी कोमल कपड़े चेंज करके आ गई। उसने हरे कलर की कुर्ती और जींस पहनी हुई थी।
मैं मैम को गुड इवनिंग बोलकर बाहर आ गया। मैंने बाइक को स्टार्ट किया और कोमल का इंतजार करने लगा। तभी शुकंतला किसी काम से बाहर आई, तो मैंने उसे गेट खोलने के लिए कहा।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और जाकर गेट खोल दिया। मैं बाइक लेकर बाहर आ गया और कोमल का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद कोमल आई। उसने गले में चुन्नी भी डाल ली थी। चुन्नी डालने के बाद तो वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर नजरें नीची कर ली।
आकर वो बाइक पर बैठ गई। वो थोड़ा पिछे होकर बैठी थी। वैसे मैं भी थोड़ा आगे सरक गया था। उसके बैठते ही मैंने बाइक को धीरे से सड़क पर बढ़ा दिया। उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख लिया।
सॉरी,,, मैंने उससे कहा।
जी,,,, कोमल ने कहा, शायद उसे ठीक से सुना नहीं होगा।
जी---- वो दोपहर के लिए सॉरी, मैंने कहा।
कोमल चुप रही, कोई जवाब नहीं दिया।
मैंने भी ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं समझा, इसलिए चुपचाप बाइक चलाता रहा। पंद्रह मिनट में हम घर पहुंच गये।
घर के सामने आकर मैंने बाइक रोक दी।
क्या हुआ, कोमल ने पूछा।
कुछ नहीं, घर आ गया, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही कोमल बाइक से उतर गई। मैंने बाइक को बाहर ही खड़ी कर दिया और हम उपर आ गये।
मैंने बैल बजाइ तो सोनल ने दरवाजा खोला।
आइये, आइये,,, आपका ही इंतजार हो रहा था, सोनल ने कहा।
क्यों, ऐसा क्या प्रोग्राम बना रखा है जो मेरा इंतजार हो रहा था।
अंदर आओ अभी बताती हूं, कहकर वो साइड में हो गई।
मैं अंदर आ गया। उसने कोमल को गले लगाया और उसका हाथ पकड़े पकड़े अंदर ले आई। रूपाली और नवरीत वहीं पर थी।
आज कुछ स्पेशल है क्या, जो नवरीत भी यहीं पर है, रूपाली भी यहीं पर है, मैंने उनको देखकर पूछा।
हां, बहुत स्पेशल है, मेरी दोस्त आई है, तो स्पेशल तो होगा ही, रूपाली ने कहा।
मैं कपड़े चेंज करने के लिए वापिस जाने लगा।
हे, कहां जा रहे हो, नवरीत की आवाज आई।
बस अभी आया, एक बार उपर तक जा रहा हूं, मैंने कहा और बाहर निकल आया।
मैंने उपर आकर लॉक खोला, अभी मैं दरवाजा खोल ही रहा था कि नवरीत भी उपर आ गई।
हाय,,,, मैंने उसे देखकर कहा।
हाय,,,, पोर्शन तो काफी अच्छा है, इतनी बड़ी खुली छत है सामने, ऐसी जगह मुश्किल से ही मिलती है, नवरीत ने कहा।
हां, ये तो है, और पौर्शन ही नहीं, पोर्शन देने वाले भी अच्छे हैं, मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर नवरीत हंसने लगी।
ऐसे मकान मालिक पूरे जयपुर में नहीं मिलेंगे, ढूंढने से, नवरीत ने कहा।
बिल्कुल, मैं कौनसा कह रहा हूं कि मिल जायेंगे,,, मैंने हंसते हुए कहा
 
दरवाजा खोलकर हम अंदर आ गये।
वॉव, एक लड़के के हिसाब से रूम बहुत ही शानदार सजा रखा है, नवरीत ने कहा और बेड पर आकर बैठ गई।
जी कुछ लेंगी आप, कोल्ड ड्रिंक, हॉट ड्रिंक, मैंने नवरीत की तरफ मुस्कराते हुए कहा।
हूंहहहह,,, कुछ नहीं, नवरीत ने कहा।
आपने अभी तक बताया नहीं कि अपूर्वा के साथ आपका चक्कर चल रहा है या नहीं, नवरीत ने आंखें नचाते हुए कहा।
हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, एक-दूसरे के काफी करीब भी हैं, बस इतना ही, मैंने शर्ट निकालते हुए कहा।
नवरीत की आंखें मुझ पर ही जम गई।
कितने करीब,,, नवरीत ने फिर चंचलता से कहा।
उसकी आंखों और चेहरे से चंचलता साफ झलक रही थी।
कितना तो अब कैसे बताउं, पर काफी करीब हैं, एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, साथ घूमने भी जाते हैं, एक दूसरे को झप्पी भी पाते हैं, मैंने टी-शर्ट पहनते हुए कहा।
कभी एक-दूसरे को किश किया है, नवरीत ने चहकते हुए कहा।
क्या, तुम्हें क्यों इतना इंट्रेस आ रहा है, अपूर्वा में, मैंने कहा।
बताओ ना, नवरीत ने थोड़ा सा नाराज होते हुए कहा।

नहीं, मैंने बेल्ट खोलते हुए कहा।
कहकर मैं कैपरी उठाकर बाथरूम में आ गया और जींस निकालकर कैपरी पहनकर वापिस आया।
नवरीत बैड पर ही बैठी बैठी पैर हिला रही थी। उसकी एक उंगली उसके गाल पर थी, लग रहा था कि कुछ गहरी सोच में है।
क्या सोच रही हो, मैंने उसे इस तरह सोचते देखकर कहा।
सोच रही हूं कि----- कहकर वो रूक गई।
मैं आगे की बात सुनने के लिए चुपचाप खड़ा रहा।
क्या सोच रही हो----- जब कुछ देर तक उसने कुछ नहीं बोला तो मैंने फिर से पूछा।
कुछ नहीं---- टाइम आने पर पता चल जायेगा, नवरीत ने कहा।
तभी कोमल, रूपाली और सोनल भी उपर आ गई।
क्या चल रहा है, अकेले अकेले में, सोनल ने अंदर आते हुए कहा।
कुछ नहीं, मैंने कहा और रसोई की तरफ चल दिया। सभी आकर बेड पर बैठ गई। बस कोमल खड़ी थी। मैंने फ्रीज से पानी निकाल कर पिया।
मुझे भी देना, सोनल की आवाज आई।
मैं एक गिलास और बोतल लेकर आ गया। गिलास में पानी डालकर सोनल को दिया। फिर कोमल से पानी के लिए पूछा तो उसने मना कर दिया।
आप खड़ी क्यों है, बैठिये ना, कोमल को खड़े देखकर मैंने कहा।
वो कुछ करती या कहती उससे पहले ही नवरीत ने उसका हाथ पकड़कर बेड पर खींच लिया। कोमल लगभग गिरते हुए बेड पर बैठ गई।
मैं अपना मोब उठाकर बाहर आ गया। काफी कोशिश की पर फोन मिल ही नहीं रहा था, बस कवरेज से बाहर ही आ रहा था।
मैं परेशान होकर वापिस अंदर आ गया।
क्या हुआ, कुछ परेशान लग रहे हो, सोनल ने कहा।
अपूर्वा की तबीयत खराब थी, पूछने के लिए फोन कर रहा था कि अब कैसी है, पर फोन ही नहीं मिल रहा, मैंने मायूसी से कहा।
क्या, अपूर्वा की तबीयत खराब है, क्या हुआ उसे, नवरीत ने चौंकते हुए कहा और अपना सैल निकालकर फोन मिलाने लगी।
सुबह फोन किया था मैंने, बुखार था, अभी मिल ही नहीं रहा, कवरेज से बाहर आ रहा है।
मिल ही नहीं रहा, नवरीत ने फोन मिलाने की कोशिश करने के बाद कहा।
तुम्हें तो उसका घर पता है ना, मैंने नवरीत से कहा।
हां, मालूम है, पर क्यों, नवरीत ने कहा।
उसके घर चलते हैं, मैं कहकर सबसे चेहरे के एक्सप्रेशन देखने की कोशिश करने लगा।
चलो, नवरीत ने बिना किसी की राय जाने ही अपना फैसला सुना दिया और बेड से उतर कर खड़ी हो गई।
मैंने उसकी तरफ देखा और फिर सभी की तरफ देखा।
क्या हुआ, अब चलो, नवरीत ने मचलते हुए कहा।
यार हम तो उसे जानते भी नहीं हैं, हम क्या करेंगे, रूपाली ने कहा।
तो अब जान जाओगी, चलो उठो, नवरीत ने कहा।
और नहीं जाना तो ठीक है तुम इधर ही रूको, हम जा रहे हैं, नवरीत ने फिर कहा।
मैं भी चल रही हूं, सोनल ने बेड से उतरते हुए कहा।
आप यहीं पर रूकेंगी या फिर आप भी चलेंगी मैम,,,, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
मुझे लगा कि जैसे कोमल एकदम से हड़बड़ा सी गई है।
हां---- हां--- मैं---- मैं---- चल रही हूं, कोमल ने हड़बड़ाते हुए कहा।
फिर मैं अकेली यहां पर क्या करूंगी, चलो मैं भी चल रही हूं, रूपाली ने भी कहा।
हम सभी नीचे आ गये। सोनल ने आंटी को बोल दिया कि हम बाहर जा रहे हैं।
सोनल की स्कूटी पर नवरीत और रूपाली की स्कूटी पर कोमल बैठ गई। मैं अपनी बाईक पर।
दस मिनट में हम राजापार्क में थे। सोनल आगे नवरीत से रास्ता पूछकर चल रही थी।
एक कोठी के सामने जाकर सोनल की ने स्कूटी साइड में खड़ी कर दी। हमने भी अपनी बाइक और स्कूटी साइड में लगा दी और नवरीत बिना बैल बजाये सीधे गेट खोलकर अंदर, उसके पिछे पिछे हम।
क्रमशः.....................
 
Back
Top