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Adultery बुरी फसी लक्ष्मी आंटी (Completed)

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विक्की


लक्ष्मी आंटी की आहों से मेरी आंख खुली और कानों ने लक्ष्मी आंटी की आवाज को टॉयलेट में से आते पाया। मैं और सन्नी आगे बढ़े और अंदर झांकने लगे। लक्ष्मी आंटी basin के नीचे घुटनों के बल खड़ी थी और प्रतीक पूरी जोर से उसे चोद रहा था।

सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी चुदाना ही था तो बेड पर आ जाती यूं चुदाने से घुटने छिल जाएंगे।"

"कौन कमबख्त. चूधने के. लिए मुड़ी ई. थी। आह. मैं तो ओह. बस साबुन उठाने. आह.", लक्ष्मी आंटी का दुखड़ा सुन हम दोनों हंसी से लोट पोट हो गए। प्रतीक ने हमें आंख मारते हुए अपनी चुदाई चालू रखी।

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा, "अजी सुनिए, बाबुओं को ओह. तयार कर. के कॉलेज आह. भेजना है। थोड़ी देर अन्ह. रुकिए तो ओ. सही।"

"अरे लक्ष्मी आंटी, चलने दो तुम्हारा काम। हम दोनों के लिए प्रतीक को मत रोको।"

"कीड़े पड़े. उस balakrishna को! आह. कल रात. भर चोद चोद. कर मुझे अंदर. से छिल. गया है. और इन्हें. कोई ई. फ़र्क ही नहीं पड़ा! आह. नजाने क्या. भर दिया. है अंदर!", लक्ष्मी आंटी चुदाते हुए ही बाहर आने लगी। प्रतीक भी लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए उसके साथ बाहर आया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को इशारा किया और हम दोनों बेड के किनारे पर बैठ गए।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े सहलाते हुए उन्हें अपनी मुठ्ठी में भर लिया। लक्ष्मी आंटी ने हमारे लौड़ों को चाटकर साफ़ किया और उन्हें चूसने लगी। लक्ष्मी आंटी की इस प्रकार की सेवा पा कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को उसके काम करने से नहीं रोका और लक्ष्मी आंटी ने चूस चूस कर चुदाते हुए ही हमारा रस पी गई।

लक्ष्मी आंटी को हमारा वीर्य पीते देख प्रतीक ने (आखिरकार) झड कर लक्ष्मी आंटी का पिछ्वाड़ा छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी ने बेड पर लेट कर अपने पैरों को फैला कर उनके बीच देखा। लक्ष्मी आंटी की बुर और गांड़ फट कर सुज गई थी। लक्ष्मी आंटी के छेद अब बन्द नहीं हो रहे थे और खून की छटा लगा वीर्य कहीं से निकल रहा था तो कहीं सुख कर पपड़ी बन गया था।

"हाय रे मैं मर गई!! बाबू लोगों ने मेरा जो हाल पूरे साल में नहीं किया वह आप ने बस आधे दिन में कर दिया। सुनिए जी, मैं दोनों बाबुओं को संभाल सकती हूं पर आप को संभालने के लिए 4 को भी मुश्किल होगा। ना!!. ना!!.. अब मेरी ओर देखना भी नहीं।", लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा।

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए कहा, "जान तुम्हारे प्यार के लिए ही मैं समुंदर पार कर आया हूं। अब अगर तुम मुझे रोकना चाहती हो तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

लक्ष्मी आंटी, "सब कुछ तो आप का है। बोलिए आप को और क्या चाहिए?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के होठों से होंठ लगाते हुए कहा, "आज से तुम मुझे प्रतीक कहोगी। ना आप ना जी ना कुछ और। बस प्रतीक।"

लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों से अपने पति के सामने और अपने प्रेमियों के सामने अपने पति से चुदा चुकी थी पर अपने पति का ऐसे नाम लेना उस से नहीं हो रहा था। प्रतीक ने लक्ष्मी को मनाते हुए कहा,
"लक्ष्मी सही मायनों में मैं तुम्हारा पति कल शाम से बना हूं पर हम पिछले एक साल से अच्छे दोस्त हैं। और दोस्त एक दूसरे को यूं जी कहके बुलाते नहीं। बोलो ' प्रतीक '।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के होठों पर होठ रख कर उसका नाम लिया और पति पत्नी एक दूसरे के प्यार में लिपट गए। हम दोनों ने bedroom से बाहर निकलते हुए उन्हें उनका वक़्त देना सही समझा।

उस दिन साल में पहली बार लक्ष्मी आंटी कॉलेज नहीं गई और हमारे कॉलेज से लौट आने तक लक्ष्मी आंटी और प्रतीक बातें और बाकी सब कुछ करते रहे। शनिवार रविवार के लिए मम्मियों ने लक्ष्मी आंटी और प्रतीक को
अलीबाग में second honeymoon trip पर भेज दिया और हम दोनों ने पहली बार bachelor life जीते हुए पिज़्ज़ा खाया और बरतन धोए।

रविवार को प्रतीक को खाड़ी के पार से टिकट आ गया और लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए उसे एयरपोर्ट पर विदा किया। प्रतीक के लौटने के बाद हम सब अपनी दिन चर्या में वापस व्यस्त हो गए। हम दोनों को खयाल रखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी पढ़ाई और जोर से की।

लक्ष्मी आंटी ने अगले 3 साल में न केवल अपनी B. Com. की डिग्री हासिल की बल्कि finance में MBA भी कर लिया। 3 साल के अंत तक हम दोनों भी अपनी डिग्री पूरी कर घर वापस लौट रहे थे। पिछले साल हम दोनों ने एक छोटी कंपनी शुरू कर दी थी जिसका सारा हिसाब लक्ष्मी आंटी की देखरेख में था। उसे खुशी थी कि उसे एक पूरी कंपनी का हिसाब चलाने का मौका मिला पर वह नहीं जानती थी की हम ने उसे हमारी कंपनी में साझेदार बनाया था।

लक्ष्मी आंटी के graduation के दिन प्रतीक लौट आया और लक्ष्मी आंटी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने कंपनी के मुंबई ऑफिस की जिम्मेदारी संभाली और हम दोनों वापस जा कर पापा के बिजनेस में हाथ बंटाते हुए अपना business बढ़ाने लगे।
 
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