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Adultery प्यास बुझाई नौकर से

कमलजीत- अच्छा ठीक है। मैं तुम्हें आवाजें लगा रही थी।

रूबी अंजान बनते हुए- “क्या हुआ मम्मीजी? कोई काम था?”

कमलजीत- अरे तुम तो नहा रही थी और इधर राम का पैर फिसल गया और उसे चोट लगी है। उसकी नाक से खून बह रहा है। उसे कोई दवाई वगेरा या मरहम है तो दे दे।

रूबी- ठीक है मम्मीजी। मैं आपको देती हूँ मेडिसिन।

कमलजीत- अरे नहीं तू खुद ही दे दे। मुझे किचेन में काम है। वो बाहर ही बैठा है। जा उसे दे दे और मेरे साथ आकर किचेन में हाथ बटाना।

रूबी जो की रामू का सामना नहीं करना चाहती और अभी भी रामू पे गुस्सा है। किसी तरह अपने मन को समझाकर दवाई ढूँढने लगती है और दर्द की गोली और मरहम लेकर बाहर आती है। बाहर रामू फर्श पे बैठा हुआ था और रूबी को देखकर अपनी आँखें झुका लेता है। रूबी भी उससे अपनी नजरें नहीं मिलाती और उसके पास दर्द की गोली और मरहम रखकर वापिस लौट जाती है।

उसके व्यवहार से रामू समझ जाता है की रूबी अभी भी गुस्से में है। अब तो उसके गुस्से के ठंडा होने का इंतेजार करना होगा और कोई ऐसी हरकत नहीं करनी होगी जिससे उसको अपने उससे हाथ धोना पड़े। अभी चार दिन पड़े हैं, 15 दिन होने में और सीमा के वापिस काम पे आने में। शायद तब तक कुछ बात बन जाए और रूबी उसे माफ कर दे। यही सोचता हुआ रामू अपने कमरे में आ जाता है।

रात को भी जब वो खाना लेने जाता है तो रूबी उससे कुछ नहीं बोलती और उसकी प्लेट में खाना डालकर उसे दे देती है। राम भी चुपचाप रहता है और कोई बात नहीं करता। वो अब कल का इंतेजार करता है जब वो सफाई करने घर में आएगा। रात को सोने के टाइम वो इस उम्मीद में रूबी के कमरे की तरफ जाता है की शायद उसे आज फिर रूबी अपनी चूत ठंडी करती दिख जाए। पर वहां पर पहुँचने पे देखता है की रूबी सोई हुई है।

राम उदास मन से वापिस आ जाता है और सोने की कोशिश करता है। अगले दिन जब सफाई का टाइम आता है तो कमलजीत राम को सफाई करने के लिए बोलती है। राम समझ नहीं पाता की आज रूबी दिखाई क्यों नहीं दे रही? और बड़ी बीवीजी क्यों उससे सफाई को बोल रही है? वो अधूरे मन से सफाई करने की कोशिश करता है पर उसका दिल तो बार-बार रूबी के दीदार के लिए तड़प रहा था। उसे लग रहा था की अभी रूबी आएगी और अपने मुश्कुराते चेहरे से उससे बातें करेगी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
 
कुछ देर बाद उसने देखा की रूबी अपने रूम से बैग लेकर निकलती है और उससे बिना नजर मिलाए बड़ी मालेकिन से बातें करने लगती है।

कमलजीत- बहू ध्यान से जाना। यह अभी तुम्हें छोड़ आएंगे।

रूबी- जी मम्मीजी।

कमलजीत- और हाँ घर पहुँच के मुझे फोन कर देना।

रूबी- जी मम्मीजी।

कमलजीत हँसते हुए- "तुम्हारे बिना दिल नहीं लगेगा हमारा। कोशिश करना जल्दी वापिस आ जाओ।

रूबी- ठीक है मम्मीजी। आप अपना ख्याल रखना मैं रोज आपको फोन करूंगी।

तभी हरदयाल बाहर निकलता है और रूबी कमलजीत के पैर छूकर बिना रामू की तरफ देखकर बाहर निकल जाती है। कमलजीत भी पीछे-पीछे बाहर जाती है।

रामू हरदयाल और रूबी को गाड़ी में बैठते देखता है और फिर गाड़ी उसकी नजरों से दूर हो जाती है। रामू रूबी को जाते देखकर उदास हो जाता है। वो समझ जाता है की रूबी अपने मायके जा रही थी। पर क्या छोटी मालेकिन अभी भी उससे नाराज थी, जो उससे नजरें नहीं मिलाई? और क्या मायके जाने का प्लान रात को ही बना था या फिर पहले से जाना था? बड़ी मुश्किल से वो दिन निकला था राम का। ना तो उसका सफाई में मन लगा और ना ही किसी और काम में। बार-बार उसे ऐसे लगता था की छोटी मालेकिन अभी वापिस आ जाएगी और उससे मुश्कुरा कर बात करेगी।

इधर रूबी का गुस्सा ठंडा पड़ चुका था और वो अपने मायके में अपनी सहेलियों के साथ एंजाय कर कर रही थी। उसे तो रामू की याद भी नहीं आ रही थी। इधर रात को रामू को बुखार हो गया और ठंड में तड़पने लगा।

रूबी ने अगले दिन दोपहर को ससुराल में फोन किया और हालचाल पूछने लगी- "और मम्मीजी सब ठीक है वहां?"

कमलजीत- हाँ बहू सब ठीक है। तुम बताओ मायके में सब खुश है,?

रूबी- जी मम्मीजी।

कमलजीत- ठीक है। और क्या कर रही थी?

रूबी- कुछ नहीं नहाकर फ्री हुई थी और सोचा की आपसे बात कर लूं। आप क्या कर रहे थे मम्मीजी?

कमलजीत- कुछ नहीं बहू सफाई कर रही थी घर की।

रूबी- सफाई?

कमलजीत- हाँ वो रामू को बुखार है तो तुम्हारे ससुर उसे डाक्टर के पास लेकर गये हैं।

रूबी- बुखार?

कमलजीत- हाँ अभी बात हुई थी तुम्हारे पापा से वो बोल रहे थे की जो चोट लगी थी रामू को उससे काम खराब हो गया था। शायद इन्फेक्सन हो गई और काम ज्यादा खराब हो गया। सारी रात ठंड में तड़पता रहा।

रूबी- पर उसे मरहम तो दी थी।

कमलजीत- हाँ, पर पता नहीं क्या हुआ?

रूबी- ओह तो वापिस कब आएंगे पापा?

कमलजीत- कुछ देर में आ जाएंगे।

रूबी- ठीक है। मैं तब फोन करके पूछ लूंगी हालचाल।

कमलजीत- ठीक है
 
रूबी- ओह तो वापिस कब आएंगे पापा?

कमलजीत- कुछ देर में आ जाएंगे।

रूबी- ठीक है। मैं तब फोन करके पूछ लूंगी हालचाल।

कमलजीत- ठीक है

उस रात रूबी राम के बारे में सोचते हुए काफी परेशान हो गई। रूबी जिसके दिमाग में रामू का ख्याल ही नहीं आया था परसों से, अब अपनी को अपराधी महसूस करने लगी थी। उसे लगा की रामू को उसने कुछ ज्यादा हो जोर से मार दिया था। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। आग तो दोनों तरफ लगी थी। रामू की गलती इतनी ही तो थी की वो अपने ऊपर काबू नहीं रख पाया था। इसमें उस बेचारे का क्या कसूर था? वो तो एक मर्द है। मर्द से तो सेक्स कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होता है। सिर्फ औरत ही कंट्रोल कर सकती है। उस बेचारे ने तो कुदरत के कानून का पालन किया था। आज मेरी वजह से रामू बीमार हो गया है।

रूबी को अब अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था। उसे याद आने लगा कैसे रामू ने मासूमियत से उसे किस करने के लिए बोला था। उसकी आँखों में रूबी ने अपने लिए चाहत देखी थी।

राम का चेहरा उसे काफी मासूम लग रहा था। उसकी गलती से आज वो बीमार हो गया था। रूबी के दिल में जो गुस्सा रामू के लिए था अब वो हमदर्दी में बदल चुका था। उसे रामू के होंठों का स्पर्श, उसके हाथों का अपने चूतरों पे घुमाना उसे याद आने लगा। उस एहसास को याद करते-करते रूबी उतेजित होने लगी थी।

उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो अब राम का साथ पाने के लिए आगे बढ़े या वही पे अपने को रोक दे।

अपने को रोक के क्या फियदा होगा उसे? अभी तक खुद को रोके ही रखा था, नहीं तो इतने मर्द उसके गाँव में उसे पाना चाहते थे। अगर अभी भी रोक लिया अपने को तो वो घुट-घुट कर मर जाएगी। रामू के लिए उसके दिल में हमदर्दी और प्यार दोनों भावनाओं ने जनम ले लिया था। इस दुबिधा से कैसे निकला जाए, उसे समझ नहीं आ रहा था।

तभी उसे अपनी ननद प्रीति की याद आई। हाँ, वो इस दुबिधा का अंत कर सकती है। प्रीति उसकी सबसे अच्छी दोस्त भी तो थी। उसकी दिल की हालत उससे अच्छा कौन समझ सकता था। रूबी ने डिसाइड कर लिया को वो प्रीति से इस बारे में बात करेगी। उसके बाद रूबी ने रामू के बारे में सोचते हुए अपनी चूत में उंगली डाल दी

और रगड़ने लगी। थोड़ी देर में उसका पानी निकल गया। अगले दिन के इंतेजार में सोचते-सोचते रूबी की आँख लग गई।

अगले दिन रूबी ने सबसे पहले कमलजीत को फोन किया और हालचाल पूछा। असली मकसद तो उसका रामू का हाल पूछने का था। कमलजीत से पता चला की राम को अभी भी बुखार है और डाक्टर ने उसे आराम करने की सलाह दी है।

अब रूबी ने प्रीति को फोन करके दिल की बात बताना चाहा। उसकी हिम्मत नहीं पड़ रही थी। पता नहीं प्रीति क्या सोचेगी मेरे बारे में? उसने नंबर तो निकल लिया प्रीति का, पर हिम्मत नहीं पड़ रही थी। इसी उधेड़बुन में उससे गलती से काल लग गई और उसने झट से काल बंद कर दी। क्या प्रीति को काल मिस चली गई होगी?
 
अगर उसने काल बैक कर दी तो? अभी रूबी सोच ही रही थी के प्रीति की काल बैक आ गई।

रूबी ने हिम्मत करे फोन उठा लिया, मऔर काँपती आवाज में- “ह-हेलो..."

प्रीति- अरे भाभी क्या हाल है? अपने मिस काल मरके फोन काट दिया था?

रूबी- नहीं वैसे ही ग-गलती से लग गया था।

प्रीति छेड़ने के अंदाज में- “गलती से या मेरी याद आ रही थी?" और हँस पड़ती है।

रूबी- “नहीं, मैं मायके आई हूँ। वैसे लग गया था..” उसे समझ में नहीं आ रहा की वो बात कहां से शुरू करे।

प्रीति- ओहह... तो आप मायके हो। हमें बताया नहीं की आप जाने वाले हो। प्लान कब बना?

रूबी- प-पहले सोचा था।

प्रीति- भाभी आपकी आवाज कुछ बदली-बदली लग रही है।

रूबी घबरा जाती है- “आ। आ। अरे नहीं..."

प्रीति- नहीं कुछ तो है। आज आपकी आवाज में वो जान नहीं है। क्या हुआ भाई, बताओ मुझे?

रूबी- “अ-अरे कुछ भी तो नहीं..” उसका दिल कर रहा था की वो प्रीति को बता दे। पर डर भी रही थी।

प्रीति को लगता है की भाभी उसे घर बुलाना चाहती हैं और चूत की प्यास मिटाना चाहती हैं, पर शायद वो झिझक रही है। उसकी भाभी थोड़ी सी शर्मीली भी तो है। तो प्रीति खुद ही एक अच्छे दोस्त की तरह उससे बात शुरू कर लेती है।

प्रीति- भाभी क्या घर आऊँ दोबारा से?

रूबी- किसलिए?

प्रीति- वोही सब करने, जो हमने किया था।

रूबी- नहीं, यह बात नहीं है।

प्रीति- तो भाभी क्या बात है। आप कुछ उखड़े-उखड़े से लग रहे हो। मैं आपकी दोस्त हूँ आप मुझे नहीं बताओगे

तो किसे बताओगे?

रूबी कुछ नहीं बोलती और चुप रहती है।
 
रूबी कुछ नहीं बोलती और चुप रहती है।

प्रीति उसकी चुप्पी देखकर उससे अगला सवाल करती है- “भाभी एक बात पुडूं?"

रूबी- हाँ।

प्रीति- क्या कोई पसंद है?

रूबी- “क्या?” रूबी को लगता है प्रीति उससे राम की बात निकलवा ही लेगी लेकिन फिर भी अंजान बनती है।

प्रीति- भाभी प्लीज बताओ। मैं आपकी दोस्त हूँ, आपकी हालत समझती हूँ। बताओ आपको कोई भा गया है?

रूबी चुप रहती है। उसकी चुप्पी प्रीति को कन्फर्म कर देती है की उसकी भाभी किसी पे लटू हो गई है। उसे इस बात की खुशी हई की शायद भाभी अपने जिश्म की प्यास बुझा सकती है, और उसे इस बात से फरक नहीं पड़ता अगर उसकी भाभी किसी गैर मर्द के साथ मिलन करती है।

प्रीति- भाभी आपकी चुप्पी हाँ का इशारा दे रही है।

रूबी अभी भी चुप रहती है और डर रही है कहीं प्रीतिटी गुस्सा ना करे।

प्रीति- भाभी मैं खुश हूँ अगर आपको कोई भा गया है। मुझे अच्छा लग रहा है।

इस बात से रूबी की जान में जान आती है की शूकर है प्रीति ने गुस्सा नहीं किया।

प्रीति- भाभी बताओ ना कौन है वो?

रूबी- आ आ अरे कोई नहीं। तुम ग-ल-त सोच रही हो।

प्रीति- भाभी अपनी दोस्त से तो झूठ मत बोलो। मैं आपकी शुभचिंतक हूँ। मैं आपसे गुस्सा भी नहीं हूँ। मुझे तो अच्छा लग रहा है यह जानते हुए। बताओ ना भाभी कौन है वो खुशनसीब? आपको मेरी कसम बताओ ना?

रूबी रूबी को लगा अब छिपाना ठीक नहीं। वैसे भी प्रीति को शक तो पूरा है और आज नहीं तो कल बात निकलवा के रहेगी। उसने बड़ी हिम्मत इकट्ठी की, और कहा- “प्रीति तुम बुरा तो नहीं मनोगी ना?"

प्रीति- भाभी बुरा किस बात का? आप बताओ तो सही उसका नाम?

रूबी- प्रीति वो हमारे लेवेल का नहीं है तो डर लग रहा है।

प्रीति- अरे भाभी मेरी जान। आप उसे पसंद करती हो?

रूबी- हाँ।

प्रीति- तो बस बात खतम। अब नाम बताओ। आपकी जो भी पसंद हो, मेरी तरफ से सहमति है।

रूबी- हाँ।

प्रीति- तो बताओ ना उसका नाम?

रूबी अपनी पूरी हिम्मत इकट्ठी करके कहती है- “रा-मू..."

प्रीति- क्या? अपना रामू?

रूबी- तुम नाराज तो नहीं हो ना प्रीति? प्लीज... नाराज मत होना। तुम्हारे इलावा मैं किससे बात करती?

प्रीति- “ओहह... मेरी प्यारी भाभी, मैं नाराज नहीं हूँ। तो हमारी अप्सरा का दिल रामू पे आया है। अरे भाभी पिछले हफ्ते जब मैं घर आई थी तब तो अपने कुछ नहीं बताया। अब क्या हो गया? बताओ बताओ?"

रूबी एक-एक करके उससे सारी घटनाएं, राम को नहाते देखने से लेकर उसकी चोट तक, सब बता देती है। प्रीति भी ध्यान से बातें सुनती है।

प्रीति- हाँ तो भाभी। अब आप क्या चाहती हो?

रूबी- पता नहीं।

प्रीति- अरे बाबा क्या पता नहीं? कुछ तो सोचा होगा की अब क्या करना है? आगे बढ़ना है या यही पे सब खतम करना है?

रूबी- मुझे नहीं पता क्या करूं?
 
प्रीति- भाभी आप बहुत अच्छी हो। आपको कोई भी मर्द ना नहीं बोल सकता। पर बात यह है की आप किसी में इंट्रेस्टेड नहीं हो, रामू के इलावा। तो आपके पास सिर्फ रामू ही आप्षन है।

रूबी- तो क्या करूं?

प्रीति- आप बताओ? आप यह काली रातें अकेले कैसे काटती है?

रूबी- नहीं।

प्रीति- भाभी मेरे विचार से आपको अपनी अंदर की औरत को शांत करने का पूरा हक है।

रूबी- पर मैं लखविंदर को चीट नहीं करना चाहती।

प्रीति- अरे भईया मर्द हैं। मर्द ज्यादा देर तक सेक्स से दूर नहीं रह सकते। आपको क्या लगता है की वो दुबई में सेक्स वर्कर के पास नहीं जाते होगे? वैसे ही आपको अपना हक मिलना चाहिए, और इसमें चीटिंग की बात नहीं है। अगर भईया यहां पे होते तो मुझे पूरा विश्वाश है की मेरी प्यारी भाभी कभी किसी और मर्द के बारे में नहीं सोचती।

रूबी- तो तुम क्या सलाह देती हो?

प्रीति-भाभी, आपको अपने दिल की बात सुननी चाहिए। मेरी तरफ से तो कोई प्राब्लम नहीं है। अगर राम आपको संपूर्ण औरत होने का एहसास दे सकता है तो आपको यह एहसास लेना चाहिए। बाकी जो आपको ठीक लगे वो करना। और अगर आप आगे बढ़ने का डिसाइड करते हो तो धीरे-धीरे संभाल के आगे बढ़ना। राम को एहसास करवाओ की उसे जो चाहिये वो मिलेगा, पर उसे थोड़ा सबर रखना होगा।

रूबी- मैं कैसे बात करूं उससे इस बारे में? अब तो डाक्टर ने उसे आराम करने को बोला है, और वो काम भी नहीं करेगा। और 3 दिन में सीमा वापिस काम पे आ जाएगी तो राम का घर के अंदर आना भी बंद हो जाएगा फिर से।

प्रीति- अरे भाभी आप बहत भोली हो। ऐसा करो आप फोन कर लो। आप उससे सारी कर लो, जो आपने उसे चोट पहुँचाई है बस।

रूबी- तब?

प्रीति- फिर क्या वो मर्द है? इतनी खूबसूरत औरत को नहीं छोड़ेगा इतनी जल्दी। आप फोन करना और फिर देखना वो खुद ही आगे बढ़ेगा। लेकिन आप खुद संभाल संभाल कर आगे बढ़ना। अच्छा रखती हूँ भाभी, सासू माँ बुला रही हैं कब से।

रूबी- ओके थैक्स प्रीति।

प्रीति- “अरे बैंक्स किस बात का भाभी? आई लोव यू। और हाँ हरजीत की कल से छुट्टियां हो रही हैं स्कूल में तो हम घूमने जा रहे हैं हफ्ते के लिए। अगर इस मामले में आपको कोई हेल्प चाहिए तो मैं हमेशा तैयार हूँ।

बाइ...”

रूबी- “बाइ डियर..." और फोन कट जाता है।

प्रीति से बात करने से रूबी को राहत मिलती है। उसके मन का बोझ कम हो गया था। उसने डिसाइड किया की वो राम के साथ के लिए आगे बढ़ेगी, और शाम को अपना बैग लेकर वापिस ससुराल आ जाती है।

कमलजीत- अरे बहू, तुम वापिस इतनी जल्दी आ गई?

रूबी- मम्मीजी राम ठीक नहीं है तो आपको काम करना पड़ता है। इसलिए मैं वापिस आ गई।

कमलजीत- अरे तो क्या हुआ, अगर दो चार दिन में काम कर लेती?

रूबी- कोई बात नहीं मम्मीजी। अब मैं काम संभाल लूंगी।

रात को खाना खाने के बाद सभी बातें करने लगे और रूबी का ध्यान राम की तरफ था। तभी उसने हरदयाल के फोन से राम का नंबर चोरी कर लिया, और अपने फोन में सेव कर लिया।
 
कमलजीत- अरे तो क्या हुआ, अगर दो चार दिन में काम कर लेती?

रूबी- कोई बात नहीं मम्मीजी। अब मैं काम संभाल लूंगी।

रात को खाना खाने के बाद सभी बातें करने लगे और रूबी का ध्यान राम की तरफ था। तभी उसने हरदयाल के फोन से राम का नंबर चोरी कर लिया, और अपने फोन में सेव कर लिया।

इधर रामू अपने कमरे में था और उसे नहीं पता था की रूबी वापिस आ गई थी। उसको खाना भी कमलजीत उसके अमरे में दे आई थी।

रात को जब सब सो गये तो रूबी भी अपने कमरे में कम्बल लिए हए बेड पे लेटी थी। बार-बार उसका दिल रामू से बात करने को कर रहा था, पर हिम्मत नहीं हो पा रही थी। उसे डर था की अगरा कोई गड़बड़ हो गई तो? फिर उसने सोचा की अगर कोई गड़बड़ हुई तो वो बोल देगी के रामू हालचाल पूछने के लिए फोन किया था। बड़ी मुश्किल से हिम्मत करने के बाद रूबी ने रामू को फोन लगा दिया।

फोन रिंग से रामू चौंक गया। इतनी रात को किसका फोन आ सकता है? कहीं गाँव से तो नहीं आया था। उसने देखा अननोन नंबर था। इधर रूबी की दिल की धड़कन बढ़ गई थी। पता नहीं वो कैसे बात कर पाएगी राम से। क्या वो काट दे फोन? तभी राम ने फोन पिक कर लिया।

रामू- हेलो।

उधर से कोई आवाज नहीं आई।

रामू- हेलो।

फिर कोई आवाज नहीं आई। रामू ने दो-चार बार दुबारा हेलो बोला पर कोई फायदा नहीं। रूबी की हिम्मत जवाब दे रही थी। रामू फोन काट देता है। रूबी की जान में जान आती है। कुछ देर बाद उसका दिल फिर से उसे फोन पे बात करने के लिये जोर देता है। दिल से मजबूर रूबी फिर फोन लगा देती है।

रामू- हेलो।

रूबी का गला सुख रहा था, और कुछ नहीं बोल पाती।

रामू- हेलो। अरे कोई बोलेगा?

रूबी- र-र-राम्मू।

रामू रूबी की आवाज पहचान लेता है- “अरे बीवीजी आप?

रूबी- हाँ। पहचान लिया।

राम- अरे बीवीजी आपकी आवाज को कैसे नहीं पहचानते। आपके होंठों से जब अपना नाम सुनते हैं तो अजीब सा करेंट दौड़ने लगता है जिश्म में।

रूबी- मैंने माफी मांगने के लिए फोन किया था।

राम- किस बात की माफी?

रूबी- हमने तुम्हें चोट पहुँचाई थी ना। हमें अच्छा नहीं लगा।
 
राम- बीवीजी आपकी गलती नहीं है। आप माफी माँग कर हमें छोटा कर रहे हैं। आप हमारी मालेकिन हो। ऐसे माफी मत मांगिए। गलती हमारी थी। आप हमें माफ कर दो। हमने आपका दिल दुखाया है।

रूबी कुछ नहीं बोलती। कुछ देर चुप रहने के बाद रामू आगे बात बढ़ाता है। उसे लगता है की रूबी ने जो फोन किया है तो उसके दिल में उसके लिए प्रेम है। पर अब उसे थोड़ा सा सबर करना होगा और धीरे-धीरे लोहा गरम करना होगा।

रामू- बीवीजी आप नाराज तो नहीं हैं ना हमसे?

रूबी- नहीं राम्।

राम- बीवीजी आप बहुत अच्छी हो।

रूबी के दिल का डर अब कम हो रहा था। धीरे-धीरे दोनों नार्मल बातें करने लगे। राम खुश था की रूबी अब उससे नार्मल बात कर रही थी। तभी राम ने अपनी बातों का रुख उन दोनों के समन्धों की तरफ मोड़ लिया। रूबी को प्रीति की बात याद आई की उसे सिर्फ फोन करना है, बाकी काम रामू खुद संभाल लेगा।

रामू- बीवीजी एक बात बोलूँ?

रूबी- हाँ।

रामू- बुरा तो नहीं मानोगे?

रूबी- नहीं मानती।

रामू- आप वैसे तो काफी नाजुक सी हो। पर गुस्से में पता नहीं आप में इतनी ताकत कहां से आ जाती है?

रूबी हँसते हुए- तुम्हें कैसे पता?

रामू- आपने उस दिन दिखा तो दिया था। सच में बहुत जोर से मारा था।

रूबी- उसके लिए मैं माफी माँग चुकी हूँ। राम- “बीवीजी आप माफी मत मांगिए| आप हमारी मालेकिन है...” कहकर राम रूबी के एमोशन्स से खेल रहा था। उसे पता था अगर वो रूबी को रेस्पेक्ट देगा तो वो उसका दिल जीत पाएगा।

रूबी- यह मालेकिन मालेकिन और बीवीजी बीवीजी क्या लगा रखा है? मैं तुम्हें पगर देती हूँ क्या?

रामू- तो और क्या बोलूँ? आप इस घर की बहू हैं तो हमारी मालेकिन ही हुई।

रूबी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। राम ठीक ही तो कह रहा था, है तो उसकी वो मालेकिन ही। तो क्या उन दोनों में नौकर मालिक की दीवार टूटेगी नहीं?
 
रूबी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। राम ठीक ही तो कह रहा था, है तो उसकी वो मालेकिन ही। तो क्या उन दोनों में नौकर मालिक की दीवार टूटेगी नहीं?

राम- बताओ ना बीवीजी।

रूबी हँसते हुए- “क्या बात है, कभी मालेकिन कभी बीवी जी? एक बार सोच लो मुझे क्या बनाना है?

रामू- हम तो दोस्त बनाना चाहते हैं।

रूबी- अच्छा जी। अभी तो मालेकिन मानते थे और अब दोस्ती पे आ गये?

राम- बताओ ना बीवीजी आप दोस्त बनोगे।

रूबी को उसकी बातों में मासूमियत झलक रही थी। बिहार से आया लड़का जो पंजाब में काम कर रहा था। उसकी परिवार भी बिहार में ही थी, तो उसका तो दोस्त तो हआ नहीं कोई भी यहां पे। उसका भी तो दिल करता होगा दोस्त बनाने को, किसी से बात करने को।

रूबी कुछ सोचते हुए- “ठीक है। दोस्त बन सकते हैं। लेकिन एक शर्त है.."

रामू- आपकी हर शर्त मंजूर। बताओ क्या करना है?

रूबी- तुम ऐसा कोई काम नहीं करोगे जिससे मेरी लाइफ में परेशानी आए।

राम देखता है की मछली फँस रही है और वो एक और तीर छोड़ देता है- "तो आपके कहने का मतलब हम गवार है और आपको लगता है की हम ऐसा कोई काम करेंगे जिससे आपको नुकसान हो?”

रूबी- रामू गँवार की बात नहीं है। तुम बहुत अच्छे हो। पर तुम्हें यह भी समझना चाहिए के हम किसी की बीवी हैं, किसी की बहू हैं। हमारे लिए किसी गैर मर्द से मिलना ठीक नहीं माना जाएगा।

राम- ठीक है बीवीजी। हम अपनी दोस्त को बचन देते हैं की हम उसकी मर्जी के बिना कोई ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे उसको कोई तकलीफ हो।

रूबी- पक्का ... बचन देते हो।

रामू- हाँ। यह रामू की जुबान है बीवीजी। दुनियां इधर से उधर हो सकती है पर हम अपनी जुबान पे खड़े रहेगे।

रूबी- अच्छा देखते हैं रामूजी।

राम- तो हमारी दोस्ती पक्की?
 
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