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Adultery ऋतू दीदी

प्रशांत: "मैं अब और बेवकुफ नहीं बनुंगा। पहले मुझे लगा सिर्फ जीजाजी की नीयत गन्दी है। पर अब लगता हैं तुम खुद इसके लिए ज़िम्मेदार हो"

नीरु: "मैंने थोड़ा सा मजा लेने के लिए जीजाजी का नाम ले लिया तो मैं खराब हो गयी। तुम जो मुझसे बुलवा रहे थे तो तुम्हारी कोई गलती नहीं हैं! ऐसी सोच वाले आदमी के साथ मुझे भी नहीं रहना है। तुम खुद कुए में मुझे धक्का देते हो और फिर कहते हो की मैं गिरि हुयी हूँ"

नीरु उठ गयी और अपने कपडे पहनने लगी। मैं काफी देर तक वहीं लेटा रहा की अब मैं क्या करू? निरु मुझे छोड़कर फिर चली गयी। मेरा शक़ निरु और जीजाजी पर पहले से भी ज्यादा हो गया त। मुझे लगा की जब तक निरु और उसके जीजाजी साथ हैं तब तक मेरा शक़ उन पर बना रहेगा और कभी ख़त्म नहीं होगा। इस से अच्छा तो यही होगा की मैं उसको हमेशा के लिए जाने दू।

तलाक की सुनवायी हुयी तो निरु ने बताया की वो फिर से प्रेग्नेंट है। मैंने दूसरे बच्चे को अपनाने से मन कर दिया। मैं दोनों बच्चो का डीएनए टेस्ट करवाने की मांग रख दि। निरु ने एबॉर्शन के लिए एप्लीकेशन दि। मुझे दूसरे बच्चे से कोई मतलब नहीं था, इसलिए मैंने एबॉर्शन की परमिशन दे दि। निरु भी पहले बच्चे के डीएनए टेस्ट के लिए मान गयी।डीएनए टेस्ट के रिजल्ट का मुझे इन्तेजार था, क्यों की उसमे थोड़ा टाइम लगता है। शायद यह रिजल्ट ही मेरे शक़ को यक़ीन में बदल पायेगा की निरु का जीजाजी के साथ कुछ गलत रिश्ता हैं की नहीं।

एक बार फिर मैं अकेला पड़ चुका था। खाली घर काटने को दौड़ता था। पर अब यह सोचकर अपने मन को बहला लेता था की बेवफा निरु का इस घर में ना रहना ही बेहतर है। फाइनली मुझे डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट मिली।

काँपते हाथों से मैंने वो रिपोर्ट खोली। रिजल्ट कुछ भी होता, दोनों ही केस में मुझे बड़ा झटका लगने वाला था। रिपोर्ट पढ़कर मुझे बहुत ख़ुशी मीली। मगर फिर भयंकर चिन्ता में पढ़ गया। डीएनए टेस्ट के हिसाब से वो बच्चा मेरा ही था। वोही बच्चा जिस पर मुझे जनम के पहले से ही शक़ था की वो जीजाजी का हैं। अब मैं गहरी सोच में था। क्या इसका मतलब यह हैं की निरु ने कभी जीजाजी से चुदवाया ही नहीं होगा! या फिर भले ही वो बच्चा मेरा हैं मगर हो सकता हैं निरु ने जीजाजी से चुदवाया हो।

मगर एक सच तो यह था की अपने शक़ की वजह से मैंने अपने ही बच्चे को किसी और को गोद दे दिया था। इस बच्चे को लेकर मैंने निरु को कितने ताने मारे थे। मै फिर से निरु के ऑफिस के बाहर पंहुचा ताकी कम से कम उस से माफ़ी मांग सकु की मैंने हमारे बच्चे को लेकर उसको जो इतना सुनाया था। नीरु को भी वो डीएनए रिपोर्ट मिल ही गयी थी। हम दोनों की नजरे मीली। निरु का वजन इस बीच थोड़ा और बढ़ गया था।

उसने मुझे देखा और इग्नोर करते हुए थोड़ा आगे चली गयी। मैंने उसको रोका, वो नहीं रुकि और मैं उसके सामने आकर खड़ा हो गया और रास्ता रोक लिया। निरु सड़क की तरफ मुँह करते वह खड़ी हो गयी।

प्रशांत: "मैं बस तुमसे सॉरी बोलने आया हूँ"

नीरु: "डीएनए रिपोर्ट आने के पहले यह सॉरी बोला होता तो इसकी ज्यादा वैल्यू होती। अभी मुझसे मिलने की जरुरत नहीं हैं"

प्रशांत: "पहले माफ़ तो कर दो"

नीरु: "तुमने जो किया हैं उसकी माफ़ी एक बार दे चुकी थी, मगर तुमने वोहि गलती रिपीट की थी"

मै निरु से सॉरी बोलते हुए उसको मना ही रहा था। फिर मुझे क्या सुझा की मैंने निरु का हाथ पकड़ लिया। उसने एक झटके में अपना हाथ छुड़ाया और मेरे चेहरे पर एक चांटा मार दिया।

नीरु: "हमारा तलाक हो चुका हैं और तुम मेरा हाथ पकडने का अधिकार खो चुके हो। तुम्हारे पेरेंट्स का ध्यान रखते हुए पुलिस से शिकायत नहीं कर रही पर आईन्दा से ऐसी हरकत मत करना"

इसके बाद मेरी फिर से हिम्मत नहीं हुयी की निरु से मिलने जाउ। मगर किस्मत में उस से फिर मिलना लिखा था।

कुछ दिनों बाद ही जब मैं अपने घर जा रहा था तो रेलवे स्टेशन पर मैंने निरु को देखा। साथ में उसके जीजाजी भी थे जिनकी वजह से यह सब हुआ था। जीजाजी से मेरी हाय-हेलो हुयी और फिर अकेले में उनसे बात हुयी।

प्रशांत: "डीएनए रिपोर्ट से सब साफ़ हो गया की मैं गलत था। मगर निरु अब मुझे दूसरा चांस देने को तैयार नहीं हैं"

जीजाजी: "निरु अभी प्रेग्नेंट है। तुम्हे शक़ नहीं हैं की वो बच्चा किसका हैं!"

प्रशांत: "निरु प्रेग्नेंट हैं!! ओहः, इसलिए उसका थोड़ा वजन बढा हुआ लग रहा है। मगर उसने तो तलाक के टाइम एबॉर्शन की परमिशन ले ली थी"

जीजाजी: "वो तो तुम्हारा बच्चा था जो उसने एबॉर्शन करवा लिया था। मगर अभी जो उसके पेट में हैं वो मेरा बच्चा हैं"

प्रशांत: "क्या!"

जीजाजी: "मैंने कहा था न की एक न एक दिन तो मैं निरु को फसा कर चोद ही दूंगा"

प्रशांत: "मगर आपने तो कहा था की आप सिर्फ मेरा टेस्ट ले रहे थे, और आपकी निरु के लिए सोच गलत नहीं हैं"

जीजाजी: "झूठ कहा था। क्यों की उस टाइम निरु तुमसे प्यार करती थी, इसलिए उसको फसा कर चोद नहीं पाया। मगर जाते जाते मैंने शक़ एक ऐसा बीज बो दिया की तुमने खुद निरु का तुम्हारे प्रति प्यार को नफरत में बदल दिया"

प्रशांत: "मतलब, उस दौरान आपके और निरु के बीच कुछ नहीं हुआ था!"

जीजाजी: "पहली रात मुझे जमींन पर सोना पडा। सोचा था निरु मुझे अपने साथ सोने को कहेगी पर उसने नहीं कह्। दूसरी रात भी कोई चांस नहीं था, इसलिए बाहर आ गया और तुमको अन्दर भेज दिया"

प्रशांत: "निरु सही थी और मैं गलत"

जीजाजी: "तुमने मेरा काम जरूर आसन कर दिया। तुमसे अलग होने के बाद निरु एक कोरा कागज़ थी, उसके दिल में उतरना आसान हो गया और इसका रिजल्ट देख लो। मेरा बच्चा उसके पेट में हैं"

प्रशांत: "तुम बहुत हरामि हो। मगर निरु तुम्हारे साथ चुदने को रेडी कैसे हो सकती हैं!"
 
जीजाजी: "वो कहाँ मान रही थी, बहुत कोशिश की तब जाकर वो फ़ासी है। बताता हूँ पूरी कहानि, तुम भी मजे लो, अब तो वो तुम्हारी बीवी भी नहीं रही"

जीजाजी ने फिर अपनी और निरु की पहली चुदाई की कहानी बतायी।

तलाक के बाद निरु बहुत दुखी थी, तलाक से ज्यादा दुःख एबॉर्शन करवांने और बच्चे के डीएनए टेस्ट करवाने की वजह से था क्यों की मुझे बच्चे के असली बाप पर शक़ था। काफी दिनों तक निरु घर से बाहर ही नहीं निकली।

उसने जो छुट्टिया ली थी वो भी ख़त्म होने आई थी। जीजाजी निरु को वापिस छोड़ने के लिए मेरे शहर आये थे जहाँ निरु का ऑफिस भी था और किराए का घर लिया था। जीजाजी ने जानबूझ कर एक दिन वही रुकने का प्लान बना लिया था। उदास निरु को सहारा देने के लिए उसको गले से लगाया।

गले लगाते वक़्त उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके बदन को भी महसूस किया। निरु रोते हुए शक़ के किस्से सुना रही थी। जीजाजी ने निरु को चुप कराया और फिर अचानक से उसके होंठो पर किश कर दिया। निरु अवाक सी खड़ी हो जीजाजी को देकखते ही रह गयी।

नीरु: "यह क्या था जीजाजी? "

जीजाजी: "मुझे तुम्हारी हालत नहीं देखि जा रही है। अपने मन के दुःख को भुलाने के लिए तुम्हे शरीर के सुख की जरुरत है। वो मैं तुम्हे देना चाहता हूँ"

नीरु: "यह आप क्या कह रहे हो जीजाजी? मैंने दो बार नादनी में कोशिश की थी और आपने मुझे दोनों बार थप्पड़ मार कर दूर किया था और सही रास्ता दिखाया था। आज आप खुद ही..."

जीजाजी: "उस वक़्त तुम्हे इतनी जरुरत नहीं थी जितनी आज जरुरत है। हो जाने दो हम दोनों का मिलन"

नीरु: "मगर यह गलत है। आप मेरी दीदी के पति हो। मैं अब आपसे यह सब करवाने के बारे में नहीं सोच सकती"

जीजाजी: "डारो मत निरु, इसमें कुछ गलत नहीं है। कुछ न होते हुए भी प्रशांत ने तुम पर शक़ किया, तो अब सच हो जाने दो। कुछ नहीं होगा, सिर्फ थोड़ी शांती के लिए हैं"

नीरु घबराते हुए ना बोलति रही और जीजाजी ने एक एक कर निरु के कपडे निकालने शुरू कर दिए। ब्रा और पैंटी में आने के बाद निरु और ज्यादा घबराने लगी। नीरु पीछे हट गयी पर जीजाजी ने आगे बढ़कर उसको जबरदस्ती सीने से लगा कर उसकी मखमली शरीर को सहलाना शुरू किया। नीरु फिर धीरे धीरे शांत होने लगी और जीजाजी जी की बाँहों में उसको सुकूंन मिलने लगा।

नीरु जब पूरी तरह शांत हो गयी तो जीजाजी ने ऐसे गले लगे हुए ही निरु की पीठ से उसके ब्रा का हुक खोल दिया। जीजाजी की बाँहों में निरु पूरा हील गयी, पर जीजाजी ने उसको और भी कस कर पकडे रखा। जीजाजी ने कुछ देर तक निरु की नंगी पीठ पर हाथ मलते हुए उसके नंगे बदन को महसूस किया। कुछ सेकंड बाद जीजाजी ने निरु को अपने से थोड़ा दूर हटाया।

नीरु अपनी छाती पर अपना खुला हुआ ब्रा थामे अपनी इज़्ज़त छुपाने का प्रयास कर रही थी। जीजाजी ने निरु के गालो पर लुढकते उसके आँसुओ को पोंछा। फिर जीजाजी ने निरु के ब्रा को उसके कन्धो से उतारा और निरु के हाथो में थामा उसका ब्रा खींच कर दूर किया। निरु ने अपनी दोनों हथेलियो से अपने दोनों मम्मो को ढक दिया। मगर उन बड़े से मम्मो को निरु की छोटी हथेलिया पूरा नहीं ढक पा रही थी और निरु को टॉपलेस देखकर जीजाजी का लण्ड उनकी पेंट में कड़क होकर फडकने लगा था।

नीरु सहमि हुयी खड़ी थी और जीजाजी ने नीचे झूकते हुए एक झटके में निरु की पैंटी को उसकी टांगो के नीचे खिसका कर उसको नीचे से नँगा कर दिया। नीरु की सफ़ाचट चूत जीजाजी के सामने थी और जीजाजी ने निरु को पूरा नँगा देखा और बहक गए। इतनी कमसीन जवानी को नँगा देख जीजाजी अब और इन्तेजार नहीं कर पाए। नीरु के दोनों हाथो को उसके मम्मो से दूर किया। निरु अपने हाथो से फिर अपने मम्मो को ढकना चाहती थी पर जीजाजी ने उसके हाथ कास कर पकडे रखे और फिर उसको लेकर बेड पर आ गए।

नीरु धीमी धीमी आवाज में

"यह गलत हैं जिजाजी"

बोल रही थी पर जीजाजी ने निरु को बिस्तर पर लेटा दिया और खुद के कपडे खोल नंगे हो गए। जीजाजी का कड़क खड़ा हुआ लण्ड देखकर निरु के होश उड़ गए और वो बिस्तर से उठने लगी मगर जीजाजी ने उसको दबोच कर फिर से लेटा दिया।

नीरु अब जीजाजी के शरीर के नीचे दबी हुयी थी। निरु के डर के मारे होंठ कंपकंपा रहे थे और जैसे ही जीजाजी ने अपना लण्ड निरु की चूत में घुसया तो निरु के होंठ कंपकंपाने बंद हो गए और एक गहरी "आअह्ह्ह्ह" निकली।

इसके बाद जीजाजी ने निरु को कोई मौका नहीं दिया। धक्के मारते हुए जीजा ने अपनी तलाक़शुदा साली को जाम कर चोदते हुए अपने बरसो के अधूरे अरमान पूरे किये। पुरी चुदाई के दौरान निरु बस सहमे हुए मुँह खोले हलकी सिसकिया और आहें भर रही थी। चुदाई के ख़त्म होने के बाद उसने अपने नंगे बदन को ढकने का भी प्रयास नहीं किया।बिस्तर पर नंगे लेटी निरु को जीजाजी ने देखा और मुस्कुराते हुए उसको दिलासा दिया की कुछ गलत नहीं हुआ हैं।

नीरु को भी पता था की उसने अभी अभी क्या किया था, जीजाजी ने तो प्रोटेक्शन भी नहीं पहना था और उसका रिजल्ट उसको जल्दी ही मिल गया था। जीजाजी और निरु की यह चुदाई की कहानी सुनकर मेरे हाथ पैर कांप उठे थे।

मेरे तलाक से पहले तक उन दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ था यह जानकार मुझे अपने आप पर शर्म और गुस्सा आ रहा था। मेरी ही वजह से निरु कमजोर पड़ी और उसके कमीने जीजा ने फायदा उठा कर उसको चोद दिया और प्रेगनंट कर दिया था।

प्रशांत: "निरु प्रेग्नेंट हैं, यह जानकर ऋतू दीदी और उनके मम्मी पाप ने कुछ नहीं कहा!"

जीजाजी: "मैंने निरु को झूठ बोलने को कहा की उसके ऑफिस के किसी लड़के से उसके रिश्ते बन गए थे और अब वो यह बच्चा पैदा करेगी अपने सहारे के लिए"

प्रशांत: "तो आपने सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए अपनी साली निरु की ज़िन्दगी बर्बाद कर दी"
 
जीजाजी: "ज़िन्दगी बर्बाद नहीं कि, बल्कि उसकी गोद आबाद कर दि। क्या बताऊ तुम्हे, निरु को चोदने में क्या नशा है। खैर तुम्हे तो पता ही होगा। अब मैं चाहे जब निरु को चोदने के मजे ले सकता हूँ। वो अब एडजस्ट हो चुकी हैं"

प्रशांत: "मैं आपकी वाइफ ऋतू दीदी को बता दूंगा"

जीजाजी : "फिर से वोहि गलती! तुम्हारी बात का विश्वास कौन करेगा?"

नीरु से बात करने की हिम्मत नहीं थी। मैं अपने घर आ गया पर परेशान ही रहा। भले ही मैं पहले गलत था, पर निरु को भी अपने जीजाजी से नहीं चुदवाना चाहिए था। फिर सोचा निरु की सिचुएशन ही ऐसी थी की वो क्या करती? मैंने खुद भी तो निरु की बड़ी बहन ऋतू दीदी को एक बार बिना कारण चोद चुका था।

मैने सोच लिया की मैं निरु को अब और ज्यादा जीजाजी का शिकार नहीं बनने दूंगा। शायद ऋतू दीदी मेरी बात समझ जाए। उनको फ़ोन पर अच्छे से समझा ना पाऊं इसलिए खुद जाकर उनसे बात करनी चाहिए। मै पहुँच गया ऋतू दीदी के घर के बाहर। थोडा दूर ही रहा और इंतज़ार करता रहा। लगभग २-३ घन्टे के इंतज़ार के बाद मुझे ऋतू दीदी अपने घर से बाहर अकेले आते दिखि।

मै जल्दी से उनकी तरफ बढा। मगर मैं वहाँ पहुचता तभी गेट से निरु भी बाहर आई और ऋतू दीदी की बगल में जा खड़ी हुयी। मै तब तक उनके करीब आ चुका था इसलिए अब मुझे जो भी बोलना था दोनों के सामने बोलना था।

प्रशांत: "ऋतू दीदि, मैं जो कह रहा हूँ वो ध्यान से सुनिये। जीजाजी की नीयत निरु के लिए खराब हैं और मुझे उन्होंने खुद बताया हैं"

ऋतू दीदी और निरु मेरी तरफ गौर से देख कर आश्चर्य कर रहे थे की मैं अचानक वहाँ कैसे आ गया और क्या बोल रहा हूँ।

प्रशांत: "जीजाजी ने निरु की खराब मानसिक हालात का फायदा उठाय और उसके साथ गलत काम कर लिया हैं"

ऋतू दीदी: "क्या बोल रहे हो प्रशांत!"

प्रशांत: "निरु के पेट में जो बच्चा हैं वो भी जीजाजी का हैं, उन्होंने खुद मुझे बताया है। आपको यक़ीन न आये तो टेस्ट करवा लीजिये"

नीरु: "ऋतू दीदी आप चलो, इस प्रशांत का दिमाग खराब हो गया हैं"

प्रशांत: "मैं तो तुम्हे जीजाजी के चँगुल से बचाना चाहता हूँ। वो तुम्हारा फायदा उठा रहे हैं निरु"

नीरु: "तुम्हारी इनफार्मेशन के लिए बता दु की मेरे पेट में तुम्हारा ही बच्चा है, मैंने कभी एबॉर्शन करवाया ही नहीं था"

प्रशांत: "क्या!!! तो जीजाजी ने मुझसे झूठ क्यों बोला?"

नीरु: "झूठ जीजाजी ने नहीं, तुमने बोला है। अब तो उनका पीछा छोड़ दो, कब तक झूठ बोलोगे और उनको बदनाम करोगे?"

ऋतू दीदी: "निरु सही कह रही है। उसने एबॉर्शन नहीं करवाया था और वो इस बच्चे को तुम दोनों के प्यार की निशानी के तौर पर रखना चाहती थी"

अब मेरी बोलति बंद हो गयी। निरु अपनी ऋतू दीदी को खींच कर ले गयी और मैं वहाँ ठगा सा खड़ा रह गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था की जीजाजी ने एक बार फिर मुझे यह झूठ क्यों बोला की उन्होंने निरु को चोद कर प्रेग्नेंट कर दिया था। मै अपने घर लौट आया। यह पहेली मुझे समझ नहीं आ रही थी। यह सब जानने के लिए मैंने जीजाजी को फ़ोन लगाया।

प्रशांत: "आपने मुझसे झूठ क्यों बोला की आपने निरु को प्रेग्नेंट कर दिया हैं!"

जीजाजी: "मुझे पता था तू फिर से मेरे घर वालों को बताने की कोशिश करेगा इसलिए तुझको निरु की नजरो में और ज्यादा गिराने के लिए मैंने यह झूठ बोला। जितना निरु तुझको भूलेगी उतना मेरे करीब आएगी"

प्रशांत: "तो आप मेरे साथ खेल रहे थे! आपने जो स्टोरी बतायी की आपने कैसे निरु को नँगा करके चोदा था वो भी झूठ था!"

जीजाजी: "कोशिश तो की थी पर निरु इतनी आसानी से फसने वाली मछली नहीं है। फिर स्टेशन पर तुमको देखा तो अपनी एक और चाल चल दी"

मैने फ़ोन काट दिया और अपनी एक और बेवकूफी पर गुस्सा आया। मैं एक बार फिर से जीजाजी की चाल का शिकार बना था। उनकी शुरू से यही कोशिश थी की वो मुझे निरु से दूर कर पाए। शाम को मुझे ऋतू दीदी का कॉल आया और मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने फ़ोन उठया।
 
मैने फ़ोन काट दिया और अपनी एक और बेवकूफी पर गुस्सा आया। मैं एक बार फिर से जीजाजी की चाल का शिकार बना था। उनकी शुरू से यही कोशिश थी की वो मुझे निरु से दूर कर पाए। शाम को मुझे ऋतू दीदी का कॉल आया और मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने फ़ोन उठया।

ऋतू दीदी: "तुम जो दिन में कह रहे थे नीरज के बारे में ..."

प्रशांत: "वो सच हैं, आप बोलो उसकी कसम खा कर बोल सकता हूँ। जीजाजी ने ही मुझे वो सब कुछ झूठ बताया"

ऋतू दीदी: "मुझे पता हैं की तुम सही कह रहे हो और नीरज की निरु के लिए क्या सोच हैं"

प्रशांत: "आपको पहले से ही पता हैं!"

ऋतू दीदी: "मुझे शक़ तो कुछ साल पहले ही हो गया था जब पहली बार नीरज ने निरु का नाम लेते हुए मुझे चोदने की पेशकश की थी"

प्रशांत: "और आप मान भी गयी थी!"

ऋतू दीदी: "पहले तो बहुत गुस्सा आया और नीरज को डांटा भी। वो मुझसे नाराज भी हुआ। पर वो मेरे पीछे ही पड़ गया की इसमें कोई गलत नहीं है। कुछ समय बाद फिर मैंने हर कर उसकी बात मान ली"

प्रशांत: "मतलब मैंने जो दरवाजे के बाहर खड़े होकर दो बार सुना था की निरु का नाम लेते हुए नीरज जीजाजी आपको चोद रहे थे वो सच था, और वो आपकी सहमति से हुआ!"

ऋतू दीदी: "नीरज तो मुझे आये दिन निरु का नाम लेकर चोदते रहता हैं और शायद अपने दिल की अधूरी ख्वाहिश इस तरह पूरा करने की कोशिश करता हैं"

प्रशांत: "तो आपको सब कुछ पता था फिर भी आपने जीजाजी को निरु का फायदा उठने दिया!"

ऋतू दीदी: "मुझे लगा की निरु का नाम लेते हुए मुझे चोदने से ही नीरज को ख़ुशी मिल जाती हैं तो ठीक है। मुझे यह लगता था की नीरज कभी निरु के साथ गन्दा काम तो नहीं करेंगा। मगर तुम्हारे लगातार ईल्जाम सुनकर मुझे भी नीरज पर शक़ होने लगा हैं"

प्रशांत: "नीरज जीजाजी ने बोला हैं की वो निरु को चोद कर रहेंगे और मुझसे दूर कर देंगे। आधे कामयाब तो वो हो ही चुके हैं और मुझे निरु से दूर कर दिया। अभी भी कुछ नहीं बिगडा है। आप उन्हें रोकिये"

ऋतू दीदी: "निरु मेरे से ज्यादा नीरज पर भरोसा करती है। वो मेरी बात नहीं मानेंगी और नीरज के खिलाफ कुछ बुरा नहीं सुनेगी"

प्रशांत: "आप एक बार बात तो करके देखिये"

ऋतू दीदी: "नहीं कर सकती। नीरज ने मुझको धमकी दी हैं की अगर मैंने निरु को कुछ बोला तो वो मेरा वो राज बता देगा जब मैंने तुम्हारे साथ उस दिन होटल में चुदवाया था"

प्रशांत: "अगर आपने मुँह नहीं खोला तो आपके पति मेरी बीवी को चोद देंगे, आप समझ रही हैं न!"

ऋतू दीदी: "यह पाप तो हम दोनों ने भी किया हैं"

प्रशांत: "तो आपको कोई प्रॉब्लम नहीं हैं की वो दोनों चुदाई कर ले?"

ऋतू दीदी: "मैं थोड़ी स्वार्थी हो गयी हूँ। अपनी शादी बचने के लिए मैं अपनी छोटी बहन निरु की ज़िन्दगी शायद ख़राब कर रही हूँ। मगर मुझे यक़ीन हैं की निरु ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी"

प्रशांत: "तो आप मेरी कोई हेल्प नहीं करोगी?"

ऋतू दीदी ने कुछ नहीं बोली।

प्रशांत: "तो ठीक है, मैं खुद निरु को बोल दूंगा की मैंने आपको चोदा था"

ऋतू दीदी: "नहीं, ऐसा मत करो। ऐसा किया तो निरु तुमसे भी दूर हो जाएगी और मुझसे भी। हो सकता हैं वो फिर नीरज के और करीब हो जाये"

प्रशांत: "तो क्या करें?"

ऋतू दीदी: "तुम निरु को बोलो की तुमने अब तक जितना भी शक़ किया था वो जलन के मारे था और माफ़ी मांग लो। मैं भी उसको समझा बुझा कर तुम्हारे पास भेजने के लिए राजी कर लुंगी"

प्रशांत: "मगर जीजाजी तो फिर भी निरु का फायदा उठा पायेंगे न!"
 
ऋतू दीदी: "एक बार तुम निरु को अपने पास बुला लो, फिर आगे सोचते हैं की क्या करना है। तुम कल दोपहर में घर पर आ जाओ, नीरज यहाँ नहीं होगा पर निरु होगी"

प्रशांत: "थैंक यू ऋतू दीदी"

अगले दिन मैं ऋतू दीदी के साथ निरु से मिला। निरु मुझसे मिलना नहीं चाह रही थी पर मैं उसके कदमो में लोट गया और माफ़ी मांग लि, ऋतू दीदी के काफी समझाने पर निरु फिर मान गयी की वो मुझे एक आखिरी मौका देगी। नीरु ३ महीनो के लिए मेरे साथ लिव-इन में रहने को मान गयी।

जीजाजी का चेहरा देखने लायक था, मगर उनको छोड़कर बाकी सब लोग खुश थे। मेरा एक ही डर था की अगर जीजाजी ने गुस्से में आकर मेरे और ऋतू दीदी के बीच हुयी चुदाई का राज निरु को बता दिया तो सब मामला उलटा पड़ जाएगा।

नीरु मेरे साथ आकर रहने लगी। हालाँकि उसने मुझे चोदने की परमिशन नहीं दी थी। हम बिना चुदाई के एक साथ रहने वाले थे। खूबसूरत निरु को देखकर मेरी चुदाई की बहुत इच्छा होती थी और यह बात निरु ने भी फील की थी।

मगर निरु ने मुझे चोदने नहीं दिया और मैंने भी प्रॉमिस रखते हुए उसके साथ कुछ करने की कोशिश नहीं की। हालाँकि एक दो बार उसको कपडे चेंज करते हुए जरूर आधा नँगा देख लिया था और मेरे लण्ड ने उसको सलामी भी दे दी थी।

इस बीच मैंने ऋतू दीदी से फ़ोन पर बात की। हमें कोई तरीका लगाना था जिस से निरु को जीजाजी से दूर किया जा सके। हमने कुछ दिन सोचा कोई अच्छा प्लान मिल जाए।

फिर ऋतू दीदी ने मुझे एक प्लान बताया। प्लान यह था की हम चारो एक बार फिर घूमने जाएंगे और वहाँ अगर निरु अपने कानों से यह सुन ले की जीजाजी कैसे ऋतू दीदी को चोदते वक़्त निरु का नाम लेते हैं तो काम बन जाएगा और निरु का जीजाजी से भरोसा उठ जाएगा।

अगले एपिसोड में पढ़िए क्या प्रशांत और ऋतू दीदी अपने प्लान में कामयाब हो पाएँगे।
 
मैने फ़ोन काट दिया और अपनी एक और बेवकूफी पर गुस्सा आया। मैं एक बार फिर से जीजाजी की चाल का शिकार बना था। उनकी शुरू से यही कोशिश थी की वो मुझे निरु से दूर कर पाए। शाम को मुझे ऋतू दीदी का कॉल आया और मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने फ़ोन उठया।

ऋतू दीदी: "तुम जो दिन में कह रहे थे नीरज के बारे में ..."

प्रशांत: "वो सच हैं, आप बोलो उसकी कसम खा कर बोल सकता हूँ। जीजाजी ने ही मुझे वो सब कुछ झूठ बताया"

ऋतू दीदी: "मुझे पता हैं की तुम सही कह रहे हो और नीरज की निरु के लिए क्या सोच हैं"

प्रशांत: "आपको पहले से ही पता हैं!"

ऋतू दीदी: "मुझे शक़ तो कुछ साल पहले ही हो गया था जब पहली बार नीरज ने निरु का नाम लेते हुए मुझे चोदने की पेशकश की थी"

प्रशांत: "और आप मान भी गयी थी!"

ऋतू दीदी: "पहले तो बहुत गुस्सा आया और नीरज को डांटा भी। वो मुझसे नाराज भी हुआ। पर वो मेरे पीछे ही पड़ गया की इसमें कोई गलत नहीं है। कुछ समय बाद फिर मैंने हर कर उसकी बात मान ली"

प्रशांत: "मतलब मैंने जो दरवाजे के बाहर खड़े होकर दो बार सुना था की निरु का नाम लेते हुए नीरज जीजाजी आपको चोद रहे थे वो सच था, और वो आपकी सहमति से हुआ!"

ऋतू दीदी: "नीरज तो मुझे आये दिन निरु का नाम लेकर चोदते रहता हैं और शायद अपने दिल की अधूरी ख्वाहिश इस तरह पूरा करने की कोशिश करता हैं"

प्रशांत: "तो आपको सब कुछ पता था फिर भी आपने जीजाजी को निरु का फायदा उठने दिया!"

ऋतू दीदी: "मुझे लगा की निरु का नाम लेते हुए मुझे चोदने से ही नीरज को ख़ुशी मिल जाती हैं तो ठीक है। मुझे यह लगता था की नीरज कभी निरु के साथ गन्दा काम तो नहीं करेंगा। मगर तुम्हारे लगातार ईल्जाम सुनकर मुझे भी नीरज पर शक़ होने लगा हैं"

प्रशांत: "नीरज जीजाजी ने बोला हैं की वो निरु को चोद कर रहेंगे और मुझसे दूर कर देंगे। आधे कामयाब तो वो हो ही चुके हैं और मुझे निरु से दूर कर दिया। अभी भी कुछ नहीं बिगडा है। आप उन्हें रोकिये"

ऋतू दीदी: "निरु मेरे से ज्यादा नीरज पर भरोसा करती है। वो मेरी बात नहीं मानेंगी और नीरज के खिलाफ कुछ बुरा नहीं सुनेगी"

प्रशांत: "आप एक बार बात तो करके देखिये"

ऋतू दीदी: "नहीं कर सकती। नीरज ने मुझको धमकी दी हैं की अगर मैंने निरु को कुछ बोला तो वो मेरा वो राज बता देगा जब मैंने तुम्हारे साथ उस दिन होटल में चुदवाया था"

प्रशांत: "अगर आपने मुँह नहीं खोला तो आपके पति मेरी बीवी को चोद देंगे, आप समझ रही हैं न!"

ऋतू दीदी: "यह पाप तो हम दोनों ने भी किया हैं"

प्रशांत: "तो आपको कोई प्रॉब्लम नहीं हैं की वो दोनों चुदाई कर ले?"

ऋतू दीदी: "मैं थोड़ी स्वार्थी हो गयी हूँ। अपनी शादी बचने के लिए मैं अपनी छोटी बहन निरु की ज़िन्दगी शायद ख़राब कर रही हूँ। मगर मुझे यक़ीन हैं की निरु ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी"

प्रशांत: "तो आप मेरी कोई हेल्प नहीं करोगी?"

ऋतू दीदी ने कुछ नहीं बोली।

प्रशांत: "तो ठीक है, मैं खुद निरु को बोल दूंगा की मैंने आपको चोदा था"

ऋतू दीदी: "नहीं, ऐसा मत करो। ऐसा किया तो निरु तुमसे भी दूर हो जाएगी और मुझसे भी। हो सकता हैं वो फिर नीरज के और करीब हो जाये"

प्रशांत: "तो क्या करें?"

ऋतू दीदी: "तुम निरु को बोलो की तुमने अब तक जितना भी शक़ किया था वो जलन के मारे था और माफ़ी मांग लो। मैं भी उसको समझा बुझा कर तुम्हारे पास भेजने के लिए राजी कर लुंगी"

प्रशांत: "मगर जीजाजी तो फिर भी निरु का फायदा उठा पायेंगे न!"

ऋतू दीदी: "एक बार तुम निरु को अपने पास बुला लो, फिर आगे सोचते हैं की क्या करना है। तुम कल दोपहर में घर पर आ जाओ, नीरज यहाँ नहीं होगा पर निरु होगी"

प्रशांत: "थैंक यू ऋतू दीदी"

अगले दिन मैं ऋतू दीदी के साथ निरु से मिला। निरु मुझसे मिलना नहीं चाह रही थी पर मैं उसके कदमो में लोट गया और माफ़ी मांग लि, ऋतू दीदी के काफी समझाने पर निरु फिर मान गयी की वो मुझे एक आखिरी मौका देगी। नीरु ३ महीनो के लिए मेरे साथ लिव-इन में रहने को मान गयी।

जीजाजी का चेहरा देखने लायक था, मगर उनको छोड़कर बाकी सब लोग खुश थे। मेरा एक ही डर था की अगर जीजाजी ने गुस्से में आकर मेरे और ऋतू दीदी के बीच हुयी चुदाई का राज निरु को बता दिया तो सब मामला उलटा पड़ जाएगा।

नीरु मेरे साथ आकर रहने लगी। हालाँकि उसने मुझे चोदने की परमिशन नहीं दी थी। हम बिना चुदाई के एक साथ रहने वाले थे। खूबसूरत निरु को देखकर मेरी चुदाई की बहुत इच्छा होती थी और यह बात निरु ने भी फील की थी।

मगर निरु ने मुझे चोदने नहीं दिया और मैंने भी प्रॉमिस रखते हुए उसके साथ कुछ करने की कोशिश नहीं की। हालाँकि एक दो बार उसको कपडे चेंज करते हुए जरूर आधा नँगा देख लिया था और मेरे लण्ड ने उसको सलामी भी दे दी थी।

इस बीच मैंने ऋतू दीदी से फ़ोन पर बात की। हमें कोई तरीका लगाना था जिस से निरु को जीजाजी से दूर किया जा सके। हमने कुछ दिन सोचा कोई अच्छा प्लान मिल जाए।

फिर ऋतू दीदी ने मुझे एक प्लान बताया। प्लान यह था की हम चारो एक बार फिर घूमने जाएंगे और वहाँ अगर निरु अपने कानों से यह सुन ले की जीजाजी कैसे ऋतू दीदी को चोदते वक़्त निरु का नाम लेते हैं तो काम बन जाएगा और निरु का जीजाजी से भरोसा उठ जाएगा।

अगले एपिसोड में पढ़िए क्या प्रशांत और ऋतू दीदी अपने प्लान में कामयाब हो पाएँगे।
 
अगले दिन मैं ऋतु दीदी के साथ नीरू से मिला. नीरू मुझसे मिलना नही चाहा रही थी पर मैं उसके कदमो मे लौट गया और माफी माँग ली, ऋतु दीदी के काफ़ी समझाने पर नीरू फिर मान गयी की वो मुझे एक आख़िरी मौका देगी.

नीरू 3 महीनो के लिए मेरे साथ लिव-इन मे रहने को मान गयी. जीजाजी का चेहरा देखने लायक था, मगर उनको छोड़कर बाकी सब लोग खुश थे.

मेरा एक ही डर था की अगर जीजाजी ने गुस्से मे आकर मेरे और ऋतु दीदी के बीच हुई चुदाई का राज नीरू को बता दिया तो सब मामला उल्टा पड़ जाएगा.

नीरू मेरे साथ आकर रहने लगी. हालाँकि उसने मुझे चोदने की पर्मिशन नही दी थी. हम बिना चुदाई के एक साथ रहने वाले थे. खूबसूरत नीरू को देखाकर मेरी चुदाई की बहुत इक्षा होती थी और यह बात नीरू ने भी फील की थी.

मगर नीरू ने मुझे चोदने नही दिया और मैने भी प्रॉमिस रखते हुए उसके साथ कुच्छ करने की कोशिश नही की. हालाँकि एक दो बार उसको कपड़े चेंज करते हुए ज़रूर आधा नंगा देख लिया था और मेरे लंड ने उसको सलामी भी दे दी थी.

इस बीच मैने ऋतु दीदी से फोन पर बात की. हूमें कोई तरीका लगाना था जिस से नीरू को जीजाजी से दूर किया जा सके. हमने कुच्छ दिन सोचा कोई अच्छा प्लान मिल जाए.

फिर ऋतु दीदी ने मुझे एक प्लान बताया. प्लान यह था की हम चारो एक बार फिर घूमने जाएँगे और वहाँ अगर नीरू अपने कानो से यह सुन ले की जीजाजी कैसे ऋतु दीदी को चोदते वक़्त नीरू का नाम लेते हैं तो काम बन जाएगा और नीरू का जीजाजी से भरोसा उठ जाएगा

प्लान के मुताबिक मैने नीरू से कहा की हम साथ मे घूमने का प्लान करते हैं. नीरू यह सुनकर बहुत खुश हुई. एक तीर से दो शिकार हो गये थे.

नीरू को अपने जीजाजी और ऋतु दीदी के साथ घूमने का मौका मिला और साथ ही नीरू को यह भी अहसास हुआ की अब मुझे जीजाजी पर शक नही हैं.

दूसरी तरफ ऋतु दीदी ने भी जीजाजी को घूमने का प्लान बताया. जीजाजी तो वैसे ही नीरू से चिपकने के लिए बेकरार थे तो झट से मान गये.

फ्राइडे नाइट को ऋतु दीदी और जीजाजी हमारे घर आए. नीरू कुच्छ दीनो के बाद जीजाजी से मिलने वाली थी तो पहले ही बात कर ली थी और उनको सुरपरिज़े देने के लिए जीजाजी की पसंद की सारी पहन ली.

मैने भी काफ़ी समय बाद नीरू को सारी मे देखा था. प्रेग्नेन्सी की वजह से उसका पेट फूलना अभी इतना शुरू नही हुआ था पर वजन थोड़ा बढ़ चुका था. उस सारी मे वो भरी भराई और भी सेक्सी लग रही थी.

नीरू के मुममे ब्लाउस से जैसे बाहर कूदने को लालायित से थे. एक बार फिर जीजाजी के आते ही नीरू उनके सीने से लगकर चिपक गयी थी.

मैं और ऋतु दीदी एक दूसरे की शकल देख रहे थे, जिस तरह जीजाजी ने नीरू की पीठ और कमर को पकड़े अपना हाथ फेराया था और कुछ सेकेंड तक वो दोनो चिपके हुए ही रहे.

बाद मे नीरू ने ऋतु दीदी को भी इसी तरह गले लगाया पर कुच्छ 2-3 सेकेंड के लिए ही. मैं जीजाजी की आँखों मे वो हवस देख सकता था और जिस तरह से वो नीरू के बदन को घूर रहे थे.

अगले एपिसोड मे पढ़िए क्या प्रशांत और ऋतु दीदी अपने प्लान मे कामयाब हो पाएँगे.
 
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अब तक आपने पढ़ा की प्रशांत को ऋतु दीदी का साथ मिला और वो फिर से नीरू के साथ रहने लगा. अपने प्लान के मुताबिक वो चारो घूमने जाने वाले थे.

अब आगे की कहानी प्रशांत की ज़ुबानी जारी हैं…

सोफे पर बैठे बात करते हुए जीजाजी ने बराबर नीरू का एक हाथ पकड़े हुआ था, तो कभी हाथ नीरू के कंधे पर रखा. मैं सब कुच्छ सहन कर रहा था और ऋतु दीदी भी यह सब देख नॉर्मल बिहेव कर रहे थे.

ऋतु दीदी ने मुझे बता दिया था की जीजाजी हमेशा ऋतु दीदी को या तो सुबह चोदते हैं या फिर रात को. ऋतु दीदी ने मुझे बोला की वो आगे बढ़कर नीरज जीजाजी को नही बोलेगी की वो नीरू का नाम लेकर उन्हे चोदे वरना जीजाजी को हमारे प्लान का शक हो सकता था.

हूमें इंतेजार था की कब जीजाजी वो ग़लती करे और मैं नीरू को वो सब सुना पाऊँ. जीजाजी और ऋतु दीदी गेस्ट रूम में सोने गये और मैं नीरू के साथ मेरे बेडरूम मे.

मैं थोड़ी ही देर मे बाहर आ गया और गेस्ट रूम के बाहर चक्कर मारने लगा ताकि जीजाजी को यह कहते हुए सुन पाऊँ की वो नीरू का नाम लेकर ऋतु दीदी को चोद रहे हो और मैं जाकर नीरू को बुला लाऊँ और यह सब सुना दूं .

काफ़ी देर वेट किया मगर अंदर से कोई आवाज़ नही आई. मुझे लगा वो सफ़र से थकान के मारे सो गये होंगे. मैं फिर अपने कमरे मे जाकर सो गया.

सुबह का अलार्म लगा दिया ताकि जीजाजी की सुबह की चुदाई के दौरान शायद मुझे मौका मिल जाए. मगर मुझे निराशा ही हाथ लगी. उस दिन जीजाजी सुबह देर से उठे थे.

सुबह तैयार होकर हम लोग एक कार से घूमने को निकल गये. होटेल मे सामान रखकर लंच कर हम घूमने निकल गये. नीरू और जीजाजी दोनो बहुत खुश लग रहे थे.

वहाँ पर बहुत से छोटे छोटे झरना थे, प्रोग्राम था की हम झरने मे नहाने के मज़े लेंगे. हम चारो एक झरने के पास आए.

जीजाजी टॉपलेस होकर शॉर्ट्स मे आ गये और नीरू का हाथ पकड़े झरने के नीचे ले आए. मैं भी सिर्फ़ एक शॉर्ट्स मे वहाँ पहुचा.

नीरू ने एक लूस टी शर्ट और साथ मे एक पाजामा पहना था. जीजाजी ने नीरू के दोनो हाथ पकड़ लिए थे और उसको सीधा झरने के पानी की धार मे नीचे पकड़े रखा.

सारा पानी सीधा नीरू की छाती पर गिर रहा था. नीरू का टी शर्ट गीले होकर शरीर से चिपक गया और अंदर से ब्रा की झलक दिखने लगी थी.

मैं झरने के बहते पानी के अंदर बैठा असहाय सा देख रहा था और मेरे साथ थी ऋतु दीदी. हम दोनो भी थोड़ा गीला हो चुके थे.

जीजाजी और नीरू की पानी मे मस्तिया जारी थी. नीरू पानी से बचकर जाना चाह रही थी पर जीजाजी ने नीरू को कस कर अपने से चिपका लिया और उसको जाने नही दिया.

हम सब लोग फिर बहते पानी मे बैठे थे. ऋतु दीदी थोड़ी देर बाद चेंज करने चले गये. नीरू वही च्छिच्छले पानी मे उल्टा लेट गयी.

जीजाजी नीरू के पास ही बैठे थे. नीरू के टी-शर्ट और पाजामे के बीच से नंगी कमर दिख रही थी. जीजाजी कभी नंगी कमर को देखते तो कभी नीरू की गांद से चिपके उसके पाजामे को.

नीरू आँखें बंद किए उल्टी लेटी थी और जीजाजी ने मुझे देखते हुए अपने शॉर्ट मे अपने लंड को पकड़ा और आगे पीछे हिला कर चोदने की आक्टिंग की.

जीजाजी मुझे यह दिखना चाह रहे थे की वो इस तरह नीरू को चोदेन्गे और मैं कुच्छ भी नही कर पाउन्गा.

नीरू जब सीधा लेटी तो जीजाजी उसकी छाती का उभार घूर रहे थे. लेटने से नीरू के भारी मम्मे भी टी शर्ट के उपर से थोड़ा बाहर झाँक रहे थे और जीजाजी की नज़रे वही जमी हुई तही.

जब हम वहाँ से निकले तो मुझे थोड़ी राहत मिली. रात को हम होटेल रूम मे लौट आए. इस बार होटेल मे रूम बुकिंग भी मैने ही की थी. जानबूझकर एक ही रूम बुक किया था.

एक बेड पर मैं और नीरू थे तो दूसरे पर नीरू के जीजाजी और ऋतु दीदी. थके थे तो नींद जल्दी आ गयी और सुबह ही खुली.

रूम मे वॉशरूम एक ही था तो ऋतु दीदी ने पहले से तैयारी के हिसाब से मुझे और नीरू को पहले ब्रेकफास्ट करने के लिए भेज दिया और ताकि वो खुद और जीजाजी तब तक नहा सके.

आज मुझे ब्रेकफास्ट जल्दी से ख़त्म कर फिर से रूम मे जाने की जल्दी थी इसलिए मैं जल्दी जल्दी ब्रेकफास्ट कर रहा था और नीरू को आश्चर्य हो रहा था.

मैने नीरू को भी जल्दी करने को कहा पर वो आराम से खा रही थी. मुझे फिर दिल पर पत्थर रख कर नीरू को कहना पड़ा की वो ज़्यादा खा कर मोटी हो रही हैं.

नीरू की आँखें फट कर बाहर आ गयी और उसने नाराज़ होकर खाना वही छोड़ दिया. मैने नीरू को सॉरी बोला और फिर से रूम की तरफ लाया.

मैने ऋतु दीदी को पहले ही बोल दिया था की वो चुदाई आराम से थोड़ी देर से शुरू करे ताकि मेरे और नीरू के ब्रेकफास्ट करने के बाद आने तक उनकी चुदाई चलती रहे.
 
रूम की चाबी मैं पहले ही साथ ले आया था. नीरू ने मुझको लॉक खोलने से रोका और वो नॉक करना चाह रही थी पर मैने लॉक खोला और उसको लेकर अंदर आया.

वॉशरूम से ओह्ह्ह हू की आवाज़े आ रही थी. मुझे और नीरू को लग गया की अंदर चुदाई चल रही थी. नीरू मेरा हाथ खींच कर रूम से फिर बाहर निकालने लगी पर मैने उसको खींचा और वॉशरूम के बाहर ले आया.

अंदर से पानी गिरने की और जीजाजी के ज़ोर लगा कर हाफने की आवाज़ आ रही थी. बीच बीच मे ऋतु दीदी की हल्की आहें सुनाई दे रही थी.

नीरू ने मेरी कलाई पर चिकोटी काट ली और मुझे उसके साथ कमरे के बाहर आने का इशारा किया पर मैं उसको पकड़े वहाँ खड़ा रहा.

मगर अंदर से जीजाजी की “नीरू” नाम लेकर चोदने की आवाज़ आ ही नही रही थी. कुच्छ सेकेंड्स तक मैने नीरू को रोके रखा पर ज़्यादा देर तक नही रोक पाया.

नीरू अब मेरा हाथ छोड़कर अकेले ही बाहर जाने लगी. वो दरवाजे की तरफ 7-8 कदम बढ़ चुकी थी और मैं अभी भी वॉशरूम के बाहर ही खड़ा था.

तभी मुझे पहली बार वॉशरूम से “नीरू” नाम सुनाई दिया. जीजाजी ने “नीरू” नाम लेकर चोदना शुरू कर दिया था.

दरवाजे के करीब पहुच चुकी नीरू के कानो मे भी यह आवाज़ पहुचि और उसके कदम ठिठक कर रुक गये. वो पीछे मूडी और मेरे चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी.

मैने उंगली से वॉशरूम की तरफ इशारा किया. नीरू के धीमे धीमे कदम फिर से वॉशरूम की तरफ बढ़े. उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी थी.

वॉशरूम के बाहर खड़े मैं और नीरू अब अंदर से आती वो आवाज़े सुन रहे थे.

जीजाजी: “ओह्ह्ह नीरू .. अया …. आजा तुझे चोद लूँ मैं …. क्या सेक्सी बॉडी हैं नीरू … उम्म्म्म .. आज तुझे चोदुन्गा … आ अया .. आ .. उहह … श नीरू मज़ा आ गया नीरू …. उहह उहह .. उम्म्म ..आ आ आ नीरू … तेरी चूत चोदुन्गा मैं नीरू …. अया आ ह… नीरू तेरे मम्मे … आ दबा डू तेरे मम्मे नीरू … ओह्ह्ह नीरू … मेरा लंड तेरी चूत मे … अयाया आअज़ा चोद दूं”

बाहर खड़े यह सब सुन नीरू एक चिंता मे डूबी हुई एकटक वॉशरूम के दरवाजे को देख रही थी. अंदर जीजाजी अपने चरम पर पहुच चुके थे और बुरी तरह हाफ़ रहे थे.

नीरू मुड़कर फिर दरवाजे की तरफ बढ़ी. मैं इठलाता हुआ उसके पीछे पीछे गया. रूम की चाबी मैने वही छोड़ दी.

मैं और नीरू अब होटेल के बाहर टहल रहे थे. नीरू ने अभी तक एक शब्द भी नही बोला था. मैने ही उस से बाते करनी शुरू की.

प्रशांत: “मैने तुम्हे पहले भी कहा था पर तुमने मेरी बात का यकीन नही माना. अब तो तुमने खुद अपने कानो से सुना. अभी यकीन हुआ?”

नीरू टहलती रही और कुच्छ नही बोली. फिर कुच्छ देर बाद उसने कुच्छ बोला.

नीरू: “मैं जीजाजी और ऋतु दीदी से इस बारे मे बात करूँगी”

प्रशांत: “अभी क्या बात करनी हैं! जो उनके दिल मे हैं वो तुमने सुन लिया हैं”

नीरू: “हो सकता हैं वो सिर्फ़ मज़े के लिए रोल प्ले करते हो. जैसे मैं और तुम जीजाजी का नाम लेकर करते थे. इस से यह तो साबित नही होता की जीजाजी सच मे मेरे साथ कुच्छ ग़लत काम करना चाहते होंगे!”

प्रशांत: “मुझे पता हैं, वो तुम्हारे साथ ग़लत काम करना चाहते हैं”

नीरू: “तुमने तो और भी बहुत कुच्छ बोला हैं, जैसे की मेरे पेट मे जीजाजी का बच्चा हैं!”

प्रशांत: “उसके लिए सॉरी, पर यह सच हैं”

नीरू: “मैं नही मानती. रोल प्ले अलग चीज़ हैं और सच मे चोदना अलग चीज़ हैं”

प्रशांत: “किसी का नाम लेकर रोल प्ले तभी करते हैं जब नीयत मे खोट हो”

नीरू: “तुमने मुझे जब ज़बरदस्ती जीजाजी का नाम लेकर चुदने को बोला था, तब मेरे दिल मे तो जीजाजी को लेकर कोई खोट नही थी. हो सकता हैं जीजाजी को भी किसी ने फोर्स किया हो मेरा नाम लेकर चोदने के लिए”

प्रशांत: “फोर्स कौन करेगा? ”

नीरू: “ऋतु दीदी ने!”

प्रशांत: “तुम्हे अपनी दीदी पर शक हैं पर जीजाजी पर नही हैं”

नीरू: “मुझे सच जानना हैं”

प्रशांत: “सच तो यही हैं की जीजाजी तुम्हे चोदना चाहते हैं”

नीरू: “तुम्हारे सामने उन्होने मुझे उस दिन थप्पड़ मारा था जब मैने उनके सामने अपने कपड़े खोले थे!”

प्रशांत: “क्यूकी तुम उस वक़्त वो सब गुस्से मे कर रही थी, वैसे भी मैं भी वहाँ खड़ा था तो उनकी हिम्मत नही होती ऐसा कुच्छ करने की”

नीरू: “मैने तुम्हे बताया था ना, मैने हमारी शादी के पहले भी एक बार नादानी मे उनको मौका दिया था और उन्होने मुझे डाट दिया था”

प्रशांत: “वो इसीलिए क्यू की उस दिन ऋतु दीदी घर मे ही थी और तुम दोनो को देख रहे थी”

नीरू: “तुम्हे कैसे पता, तुम तो वहाँ नही थे!”

प्रशांत: “जीजाजी ने खुद मुझे बोला हैं”

नीरू: “मैं नही मानती. मैं एक बार उनके मूह से सुनना चाहती हूँ की वो मुझे चोदना चाहते हैं, तभी मुझे यकीन होगा”

अगले एपिसोड मे पढ़िए नीरू का क्या प्लान हैं.
 
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