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Guest
मुझे बहुत बुरा लगा और अगले दिन मैं उस से मिलने उसके घर चला गया। दोपाहर से पहले मैं निरु के मायके में पहुंचा। घर के बाहर मेरे ससुर जी प्लांट्स को पानी दे रहे थे। उन्होंने बताया की निरु अन्दर ही है। मैं अन्दर गया तो वह ड्राइंग रूम में कोई नहीं था। तभी निरु अपने रूम से खिलखिलाते हुए भागते बाहर आयी। उसके भारी हो चुके बूब्स ऊपर नीचे तेजी से उच्छल रहे थे। उसका हँसता चेहरा देख मुझे ख़ुशी हुयी मगर तभी उसके पीछे पीछे उसके जीजाजी भी आए।
मुझे देख कर वो दोनों रुक गए। निरु मेरे ज्यादा करीब खड़ी थी और मैंने नोट किया की उसकी साटन की नाइटी में उसने ब्रा नहीं पहना हैं, जैसा की उसने पहले भी बताया था की आजकल बूब्स में होते दर्द की वजह से वो ब्रा कम ही पहनती है। उसकी नाइटी निप्पल के वहाँ से गीली थी, शायद उस दिन की तरह दूध निकला होगा। गीलेपन से निरु के निप्पल का तीखापन साफ़ दिखाई दे रहा था।
जीजाजी: "अरे प्रशांत तुम यहाँ? हैप्पी बर्थडे इन एडवांस। निरु तो बोल रही थी की तुम काम में फंस गए हो इसलिए तुम्हारा सरप्राइज बर्थडे बुकिंग भी कैंसिल कर दिया और अभी तुम यहाँ?"
मै निरु की शकल देखने लगा, उसने ही शायद बुकिंग कैंसलेशन के लिए यह झूठ बोला होगा।
प्रशांत: "हां काम तो था, पर आगे खिसक गया और मैं फ्री हो गया"
जीजाजी: "आज रात यही रुक जाओ, कल तुम्हारा बर्थडे यहीं मना लेंगे। तुम दोनों बातें करो, मैं आता हूँ"
यह कहकर जीजाजी सीढिया चढ़कर दूसरी मंजिल पर चले गए। मैं निरु की छाती को घूरने लगा जो दूध से गीली थी। मैंने उसका ध्यान उस और दिलाया।
प्रशांत: "यह गीला कैसे हो गया?"
नीरु ने अब ध्यान दिया और अपनी बाजू से दोनों निप्पल ढक दिए और वापिस आने का बोलकर अपने रूम में वापिस चली गयी।
मुझे देख कर वो दोनों रुक गए। निरु मेरे ज्यादा करीब खड़ी थी और मैंने नोट किया की उसकी साटन की नाइटी में उसने ब्रा नहीं पहना हैं, जैसा की उसने पहले भी बताया था की आजकल बूब्स में होते दर्द की वजह से वो ब्रा कम ही पहनती है। उसकी नाइटी निप्पल के वहाँ से गीली थी, शायद उस दिन की तरह दूध निकला होगा। गीलेपन से निरु के निप्पल का तीखापन साफ़ दिखाई दे रहा था।
जीजाजी: "अरे प्रशांत तुम यहाँ? हैप्पी बर्थडे इन एडवांस। निरु तो बोल रही थी की तुम काम में फंस गए हो इसलिए तुम्हारा सरप्राइज बर्थडे बुकिंग भी कैंसिल कर दिया और अभी तुम यहाँ?"
मै निरु की शकल देखने लगा, उसने ही शायद बुकिंग कैंसलेशन के लिए यह झूठ बोला होगा।
प्रशांत: "हां काम तो था, पर आगे खिसक गया और मैं फ्री हो गया"
जीजाजी: "आज रात यही रुक जाओ, कल तुम्हारा बर्थडे यहीं मना लेंगे। तुम दोनों बातें करो, मैं आता हूँ"
यह कहकर जीजाजी सीढिया चढ़कर दूसरी मंजिल पर चले गए। मैं निरु की छाती को घूरने लगा जो दूध से गीली थी। मैंने उसका ध्यान उस और दिलाया।
प्रशांत: "यह गीला कैसे हो गया?"
नीरु ने अब ध्यान दिया और अपनी बाजू से दोनों निप्पल ढक दिए और वापिस आने का बोलकर अपने रूम में वापिस चली गयी।