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निरु शायद क़बूलने वाली थी की उसने भी मेरी तरह गलती कर दी हैं। जीस तरह ऋतू दीदी ने मुझे मेरी फेवरेट पोजीशन में चोदा था, शायद उसी तरह जीजाजी ने भी निरु को उसकी फेवरेट डॉगी स्टाइल में चोदा होगा। मै इमेजिन करने लगा की जीजाजी ने क्या किया होगा। मैंने निरु की ड्रेस को नीचे से ऊपर चढा कर कमर के ऊपर ले आया और उसकी पैंटी बाहर आ दीखने लगी।
नीरु: “क्या कर रहे हो प्रशांत!”
जब जीजाजी ने निरु की ड्रेस ऊपर उठायी होगी तो ठीक इसी तरह निरु ने बोला होगा की “क्या कर रहे हो जीजाजी”
नीरु की सेक्सी जाँघो को देख मैं उन पर हाथ फेरने लगा। वो गुदगुदाहट से दर्द में भी खिलखिलाने लगी।
नीरु: “छोडो, मुझे गुदगुदी हो रही हैं”
मगर मैं अपनी बीवी के जिस्म को छूते हुए उसको सहलाता रहा। उसने जो जीजाजी से चुदवाते हुए दर्द झेला होगा, मैं उस दर्द को कम करना चाहता था।
नीरु: “आज मैं तुम्हारे साथ नहीं चुदवा सकती, मेरे पैर में दर्द है। प्लीज हाथ हटाओ”
मैने अब निरु की पैंटी के ऊपर ही अपना हाथ फेरने लगा और उसकी गांड को सहलाने लगा। निरु लगातार थोड़ा हील रही थी जैसे उसको गुदगुदी हो रही हो।
मैने सोचा मैं निरु की चूत को चेक कर लेता हूँ की उसकी क्या हालत है। मैंने निरु की पैंटी को पकड़ा और उसकी गांड से निकाल कर नीचे कर दिया। नीरु मुझे लगातार कपडे ना खोलने को बोल रही थी। शायद इसी तरह उसने जीजाजी को अपने कपडे ना खोलने की गुहार की होगी, पर उस हैवान जीजा ने अपनी साली की एक नहीं सुनि होगी और नँगा करके चोद ही दिया होगा।
नीरु की चिकनी गोरी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गांड पर हाथ फेर सहलाने लगा। निरु अब खिलखिलाते हुए मुझे मना कर रही थी। शायद जीजाजी ने निरु की इसी हंसी का गलत मतलब निकाल उसको चोद दिया होगा। मैंने अपनी ऊँगली निरु की गांड की दरार में फिराते हुए चेक करना चाहा की निरु को दर्द होता हैं की नहीं।
मेरी ऊँगली निरु की गांड की दरार में फिरते हुए उसकी गांड के छेद तक आई और मुझे सब कुछ ठीक ठाक लगा। शायद जीजा जी ने निरु की गांड नहीं मारि थी। मै अपनी ऊँगली और नीचे ले गया और मेरी ऊँगली निरु की चूत के छेद के ऊपर के बालो को लगी और थोड़ा गीला हो गयी। मैने अपना हाथ पीछे खींच लिया। जीजाजी ने निरु की चूत चोदी थी।
मुझे पहले पता होता तो मैं ऋतू दीदी के साथ चुदाई नहीं करता। मै अब निरु के पिछवाड़े पर डॉगी स्टाइल में चोदने के अन्दाज में आया और उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। जीजाजी ने इसी तरह निरु की गांड को पकड़ कर धक्के मार कर चोदा होगा।
नीरु: “क्या कर रहे हो? हटो, कपडे पहनाओ मुझे”
मै अब निरु के पीछे से हटा और उसकी पैंटी उसको फिर से पहना दी और उसकी ड्रेस फिर नीचे कर दि।
प्रशांत: “अब बतओ, क्या हुआ?”
नीरु: “तुमने ठीक ही कहा था”
मैने निरु को सुबह ही वार्न कर दिया था की जीजाजी की नीयत ठीक नहीं हैं और वो ऋतू दीदी को “निरु” नाम से चोद रहे थे। तब उसने मेरी बात नहीं मानी थी पर अब उसको पता चल गया था की मैं सच था।
नीरु: “क्या कर रहे हो प्रशांत!”
जब जीजाजी ने निरु की ड्रेस ऊपर उठायी होगी तो ठीक इसी तरह निरु ने बोला होगा की “क्या कर रहे हो जीजाजी”
नीरु की सेक्सी जाँघो को देख मैं उन पर हाथ फेरने लगा। वो गुदगुदाहट से दर्द में भी खिलखिलाने लगी।
नीरु: “छोडो, मुझे गुदगुदी हो रही हैं”
मगर मैं अपनी बीवी के जिस्म को छूते हुए उसको सहलाता रहा। उसने जो जीजाजी से चुदवाते हुए दर्द झेला होगा, मैं उस दर्द को कम करना चाहता था।
नीरु: “आज मैं तुम्हारे साथ नहीं चुदवा सकती, मेरे पैर में दर्द है। प्लीज हाथ हटाओ”
मैने अब निरु की पैंटी के ऊपर ही अपना हाथ फेरने लगा और उसकी गांड को सहलाने लगा। निरु लगातार थोड़ा हील रही थी जैसे उसको गुदगुदी हो रही हो।
मैने सोचा मैं निरु की चूत को चेक कर लेता हूँ की उसकी क्या हालत है। मैंने निरु की पैंटी को पकड़ा और उसकी गांड से निकाल कर नीचे कर दिया। नीरु मुझे लगातार कपडे ना खोलने को बोल रही थी। शायद इसी तरह उसने जीजाजी को अपने कपडे ना खोलने की गुहार की होगी, पर उस हैवान जीजा ने अपनी साली की एक नहीं सुनि होगी और नँगा करके चोद ही दिया होगा।
नीरु की चिकनी गोरी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गांड पर हाथ फेर सहलाने लगा। निरु अब खिलखिलाते हुए मुझे मना कर रही थी। शायद जीजाजी ने निरु की इसी हंसी का गलत मतलब निकाल उसको चोद दिया होगा। मैंने अपनी ऊँगली निरु की गांड की दरार में फिराते हुए चेक करना चाहा की निरु को दर्द होता हैं की नहीं।
मेरी ऊँगली निरु की गांड की दरार में फिरते हुए उसकी गांड के छेद तक आई और मुझे सब कुछ ठीक ठाक लगा। शायद जीजा जी ने निरु की गांड नहीं मारि थी। मै अपनी ऊँगली और नीचे ले गया और मेरी ऊँगली निरु की चूत के छेद के ऊपर के बालो को लगी और थोड़ा गीला हो गयी। मैने अपना हाथ पीछे खींच लिया। जीजाजी ने निरु की चूत चोदी थी।
मुझे पहले पता होता तो मैं ऋतू दीदी के साथ चुदाई नहीं करता। मै अब निरु के पिछवाड़े पर डॉगी स्टाइल में चोदने के अन्दाज में आया और उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। जीजाजी ने इसी तरह निरु की गांड को पकड़ कर धक्के मार कर चोदा होगा।
नीरु: “क्या कर रहे हो? हटो, कपडे पहनाओ मुझे”
मै अब निरु के पीछे से हटा और उसकी पैंटी उसको फिर से पहना दी और उसकी ड्रेस फिर नीचे कर दि।
प्रशांत: “अब बतओ, क्या हुआ?”
नीरु: “तुमने ठीक ही कहा था”
मैने निरु को सुबह ही वार्न कर दिया था की जीजाजी की नीयत ठीक नहीं हैं और वो ऋतू दीदी को “निरु” नाम से चोद रहे थे। तब उसने मेरी बात नहीं मानी थी पर अब उसको पता चल गया था की मैं सच था।