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Adultery आशिक परिंदे ( देवर भाभी की दास्ताने आशिकी )

एक हॅंडसम सा लड़का जिम मे अपना पसीना बहा रहा था और उससे दूर रखा उसका फोन बज रहा था मगर शायद उसको फोन की घंटी सुनाई नही दे रही थी वो बस अपनी बॉडी बनाने मे लगा हुआ था

तभी वहाँ ऐक और लड़का आता है

लड़का....राज क्या तुझे सुनाई नही देता

राज ....क्या हुआ विशाल

विशाल .....तेरा फोन बज रहा है और तू अपनी बॉडी बनाने मे लगा है और कितनी बॉडी बनाएगा

विशाल की बात सुनकर राज मुस्कुराते हुए उठता है और टवल से अपने जिस्म को पोछता है मगर जैसे ही वो अपने फोन को देखता है तो नंबर देखते ही वो खुश हो जाता है क्यूंकी नंबर उसके पापा दयाल सिंग का था वो तुरंत कॉल पिक करता है

राज और दयाल सिंग काफ़ी देर बात करते हैं बात करने के बाद राज के चेहरे पर खुशी सॉफ देखी जा सकती थी उसे यूँ खुश देख कर विशाल पुछता है

विशाल ....क्या बात है राज बहुत खुश लग रहे हो

राज खुशी से उछलते हुए

राज.....खुशी की तो बात है विशाल

विशाल ....कैसी खुशी कुछ मुझे भी तो पता चले की आख़िर मेरा दोस्त इतना खुश क्यूँ है

राज .....मेरे भाई की शादी हो रही है तू मेरे सामने बहुत अपनी भाभी के बहुत गुण गाता गाता है अब देखना मेरी भाभी तेरी भाभी से भी बेस्ट होगी

विशाल हँसते हुए

विशाल ....तुझे कैसे पता की तेरी भाभी मेरी भाभी से भी बेस्ट होगी

राज ....क्यूंकी मेरे पापा कभी कोई ग़लत काम नही करते और उन्होने मेरे भाई के लिए जो भी लड़की देखी होगी वो बेस्ट से भी बढ़कर होगी

विशाल ..... अंकल ने और क्या बताया

राज .....यही की मेरे एग्ज़ॅम के बाद उन्होने मुझे गाओं बुलाया है और वैसे भी ये मेरे फाइनल एग्ज़ॅम है और मेरी पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी तो यहाँ रुकने का भी कोई फ़ायदा नही

विशाल ....हाँ भाई अब यहाँ क्या है सब कुछ तो तेरी भाभी होगी मैं कुछ नही तेरा

राज थोड़ा उदास होते हुए कहता है

राज.....ऐसा नही है तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है और रहेगा मगर घर का सूनापन क्या होता है ये तुझे नही पता होगा क्यूंकी तेरे घर मे तेरी मा है भाभी है मगर मेरे घर मे तो कोई भी नही था मगर अब मेरे घर के सुनेपन को दूर करने वाली आ रही है यानी मेरी भाभी

थोड़ी देर यूँही बातें चलती रहती हैं और फिर विशाल चला जाता है और राज भी अपने होस्टल निकल जाता है

धीरे धीरे कुछ दिन और निकल जाते हैं और जय का भानु सिंग से मिलने का सिलसिला चालू रहता है

आज रात को भी जय को अपने लंड की नसों मे हल्का सा खींचाव महसूस होता है और उसकी नींद खुल जाती है

मगर आज उसका लंड आधा ही खड़ा था बस उसकी आँख सिर्फ़ अपने लंड मे खींचाव के कारण खुल गयी थी

कुछ देर जय अपने लंड को सहलाता रहा और जब उससे बर्दाश्त नही हुआ तो वो बाथरूम मे घुस गया

बाथरूम मे घुसने के बाद जय अपने लंड को बहुत तेज़ी के साथ मसलने लगा और कुछ देर बाद ही उसके लंड ने अपना पानी छोड़ दिया लंड से पानी निकलते ही आज फिर उसका लंड बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया

वो बाथरूम से निकला और अपने बिस्तर पर गिर गया और गिरते ही सो गया
 
जय को धीरे धीरे ये एहसास होने लगा था की उसके लंड मे कुछ तो खराबी आ रही है

और ये एहसास उसे पिछली रात को हुआ था

क्यूंकी ये उसके साथ 7 बार हो चुका था जब उसके लंड ने पानी छोड़ा था और फिर उसके बाद उसका लंड बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया था

फिर जय सोचता की ये उसका वहम भी हो सकता है और अपने वहाँ को दूर करने के लिए वो बाथरूम मे घुस जाता है

बाथरूम मे घुसने के बाद वो अपनी पैंट की जिब खोल कालकर अपने लंड को बाहर निकालता है और अपनेलंड को मसलने लगता है

मगर उसके लंड मे कोई तनाव नही आ रहा था

ये देख कर वो जय डर जाता है और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को मसलता है मगर कोई नतीज़ा नही निकलता है

कुछ देर बाद उसका लंड पानी छोड़ देता है

जय को कुछ समझ मे नही आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है

जब जय के लंड मे कोई तनाव नही आता है और उसका लंड ऐसे ही अपना पानी छोड़ता है तो जय अंदर तक काँप जाता है

क्यूंकी उसकी शादी मे अब ज़्यादा दिन नही बचे थे उसके हाथ पैर काँप रहे थे एक दर उसके दिल और दिमाग़ मे भर गया था की अब क्या होगा

जय को कुछ समझ मे नही आ रहा था की अब वो क्या करे अगर उसने इस शादी से इनकार किया तो उसका बाप उसे जिंदा नही छोड़ेगा

उसको बस एक ही आदमी की मदद मिल सकती थी और वो आदमी था भानु सिंग

मगर कैसे वो अपनी परेशानी को भानु सिंग से बताए उसे कुछ समझ मे नही आ रहा था

और अपने बाप से कुछ कहने की उसकी हिम्मत नही थी जय तो अपने बाप को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझ रहा था

इसकी सिर्फ़ एक ही वजह थी जय का भानु सिंग से मिलना

जय जब भी भानु सिंग से मिलता तो भानु सिंग जय को भड़काने मे कोई कसर नही छोड़ रहा था और जय पर इसका बहुत गहरा असर हो रहा था

... मगर जय ने कभी अपने बाप से ठीक बात ही नही की थी अगर जय अपने बाप से बात करता तो उसे पता चलता की उसका बाप सिर्फ़ ऊपर से सख़्त है अंदर से बिल्कुल नरम है ...

काफ़ी देर सोचने के बाद जय ने भानु सिंग को ही अपने लंड के बारे मे बताने का फ़ैसला कर लिया

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हवेली ठाकुर भानु सिंग

जय भानु सिंग के सामने बैठा था मगर उसकी समझ मे नही आ रहा था की वो कैसे अपने लंड के बारे मे भानु सिंग को बताए वो बस सिर झुकाए सोचे जा रहा था की वो भानु सिंग से क्या कहे

जय को ऐसे सोचते हुए देख कर भानु सिंग मंद मंद मुस्कुराने लगता है

भानु सिंग.....जय ऐसे क्यूँ सिर झुकाए बैठे हो कुछ बोलो

भानु सिंग की बात सुनकर जय अपनी सोच से बाहर आता है और हकलाते हुए भानु सिंग से बोलता है

जय.....क्कुच समझ मे नही आ रहा की मैं कैसे आपसे इस बात को बताऊं

भानु सिंग.....क्या जय हम दोस्त हैं और एक दोस्त ही दूसरे दोस्त की मदद कर सकता है इसलिए जो भी बात है उसे खुल कर बता दो

जय हकलाते हुए भानु सिंग को अपने लंड के बारे मे सब कुछ बता देता है

पूरी बात सुनने के बाद भानु सिंग अंदर ही अंदर बहुत खुश हो जाता है की उसका प्लान कामयाब हो गया है

भानु सिंग अपनी खुशी को दबाते हुए और चौंकने का नाटक करते हुए बोला

भानु सिंग..... ये तुम क्या कह रहे हो जय

जय .....मैं वही कह रहा हूँ जो सच है

भानु सिंग......अब क्या करोगे

जय .....मैं सोच रहा हूँ की मैं इस शादी से इनकार कर दूं

जय की बात सुनकर भानु सिंग को अपना प्लान फैल होता नज़र आता है इसलिए वो फिर से जय से बोलता है

भानु सिंग.....जय जब तुम शादी से इनकार करोगे तो अपने बाप से क्या कहोगे की अब तुम्हारे हथियार मे दम नही रहा इसलिए तुम ये शादी नही कर सकते सोच लो जय तुम्हारा बाप ये सुनते ही तुम्हे जान से मार देगा

जय.....तो आप ही बताइए की मैं क्या करूँ

भानु सिंग अपनी आगे की चाल चलते हुए बोलता है

भानु सिंग.....मैं तो कहता हूँ तुम ये शादी ज़रूर करो बाकी मैं संभाल लूँगा मेरी एक बात और सुनो जय.....

भानु सिंग.....किसी को इस बारे मे मत बताना की अब तुम्हारे हथियार मे दम नही रहा अगर किसी को इस बारे मे पता चला तो ये बात पूरे गाओं मे फैल जाएगी की जय तो नामर्द है ज़रा सोचो इससे तुम्हारी कितनी बदनामी होगी तुम गाओं मे जिधर से भी निकलोगे सब हसेंगे क्या तुम ये सब बर्दाश्त कर सकोगे नही ना इसलिए कहता हूँ चुप चाप ये शादी करो जब लड़की घर आएगी तब मैं तुमको बताउन्गा की तुमको क्या करना है

जय.....मगर

भानु सिंग......अगर तुमको मरने का इतना ही शौक है तो शादी से इनकार कर दो

जय.....नही मैं मरना नही चाहता मगर डरता हूँ की कहीं शादी के बाद उस लड़की ने ही मेरे बाप को सबकुछ बता दिया तब मैं क्या करूँगा

भानु सिंग......जय तुम डरते बहुत हो मैं वादा करता हूँ की मैं तुम्हारी शादी के बाद मैं तुम्हारा इलाज़ करवा दूँगा और तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे मगर मेरी कुछ शर्तें तुम्हे माननी पड़ेगी

जय .....कैसी शर्त

भानु सिंग मुस्कुराने लगता है और फिर बोलता है

भानु सिंग.....वो सब मैं तुमको तुम्हारी शादी के बाद बताउन्गा

जय को भी भानु सिंग की बात मानने के अलावा कोई रास्ता नही दिख रहा था इसलिए जय भानु सिंग से बोलता है

जय .....ठीक है मैं आपकी शर्त मानूँगा आप जो भी कहेंगे मैं वो करूँगा बस आप शादी के बाद मेरा जल्द से इलाज़ करवा देना

भानु सिंग.....ये हुई ना बात अब तुम अपने घर जाओ और शादी की तय्यारी करो मैं सबकुछ संभाल लूँगा

भानु सिंग की बात सुनकर जय अपनी जगह से उठ जाता है और अपनी हवेली की तरफ निकल जाता है

जय के जाते ही रंगीला आता है जो बाहर खड़ा होकर सारी बातें सुन रहा था

रंगीला .....जीजा जी आपने ये क्यूँ कहा की आप उसका इलाज़ करवा देंगे जबकि आप तो जानते हैं की अब उसका इलाज़ नही हो सकता

भानु सिंग......जैसे डूबते को तिनके का सहारा होता है उसी तरह जय को ये विश्वास दिलाना बहुत ज़रूरी था इसलिए मैने बोला की मैं उसका इलाज़ करवा दूँगा तुम देखना शादी के बाद वो कुत्ते की तरह मेरे आगे पीछे घूमेगा और मैं जो भी कहूँगा जय वो ही करेगा

रंगीला .....मगर

भानु सिंग......सारे काम बंदूक से नही होते कुछ काम प्यार से भी करने पड़ते हैं

प्यार का नाम सुनते ही रंगीला भड़क जाता है

रंगीला .....जीजा जी कुछ भी बोलना मगर मेरे सामने प्यार का नाम भी मत लेना वरना अच्छा नही होगा

ये कहते हुए रंगीला बाहर निकल जाता है और भानु सिंग उसके जाते हुए देखता रहता है और अपने मन मे सोचता है

साला पागल कहीं का प्यार के नाम से ही चिड जाता है

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कुछ दिन बाद

राज के एग्ज़ॅम हो चुके थे और वो अपनी बाइक से अपने गाओं निकल चुका था

इधर डॉली के भी एग्ज़ॅम हो चुके थे और उसके बाप कौशल ने उसकी शादी की डेट भी फिक्स कर दी थी

धीरे धीरे शादी का दिन भी आ गया था जिस दिन जय की बारात जाने वाली थी पूरी हवेली को दयाल सिंग ने दुल्हन की तरह सज़ा दिया था और पूरे गाओं को अपने बेटे की शादी मे आमंत्रित किया था

मगर जय को इस शादी से कोई दिलचस्पी नही थी वो तो सिर्फ़ अपने लंड को लेकर परेशान था

अब जय के सामने दो परेशानियाँ थी एक परेशानी थी ... दौलत

और दूसरी परेशानी थी उसका .लंड जो उठने का नाम नही ले रहा था

…………………..
 
शादी के दिन जय को बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा था उसका मूड उखड़ा हुआ था जय अपने लंड को लेकर बहुत ज़्यादा अपसेट था

मगर उसको भानु सिंग पर पूरा भरोसा था की शादी के बाद भानु सिंग उसके लंड का इलाज़ करवा देगा

मगर ये जय की बहुत बड़ी भूल साबित होने वाली थी जय को ये पता ही नही था की अब वो ठीक नही हो सकता

वहीं जय से इतर सारे घर मे ख़ुसी का माहौल था

दयाल सिंग गाजे बाजे के साथ जय की बारात लेकर जाते हैं और डॉली को विदा कराके ले आते हैं

पूरी हवेली मेहमानो से भारी हुई थी भानु सिंग और उसका परिवार भी आज दयाल सिंग की हवेली मे मौजूद था क्यूंकी दयाल सिंग भानु सिंग को अपना दुश्मन नही समझते थे इसलिए उन्होने भानु सिंग को भी अपने बेटे की शादी मे इन्वाइट किया था

मगर उनको क्या पता था की इतनो सालों की छोटी सी बात को भानु सिंग अपने दिल मे छुपाए हुए उनसे बदला लेना चाहता है

आज राज बहुत खुश था और इसी खुशी मे वो खुद ही सारे मेहमानो की सेवा मे लगा हुआ था

उधर रिंकी की नज़र जैसे ही राज पर पड़ती है तो वो अपने मन मे सोचती है

गाओं मे इतना हॅंडसम और डॅशिंग लड़का ये है कौन पहले तो कभी नही देखा

फिर रिंकी सोचती है की वो इस लड़के के बारे मे अपनी मा से पूछ सकती है ये सोचकर वो अपनी मा से बोलती है

रिंकी.....मा वो लड़का कौन

रामा देवी रिंकी तरफ देखती हैं

रामा देवी.....कौन लड़का

रिंकी अपनी उंगली का इशारा राज की तरफ करती है

रिंकी.....वो लड़का जो मेहमानो की देखभाल कर रहा है

रामा देवी मूह बनाते हुए बोलती हैं

रामा देवी.....अच्छा वो.....वो दयाल सिंग की छोटी औलाद है

रिंकी....उसका नाम क्या है

रामा देवी.....क्या काम है जो तू इतना पूछ ताछ कर रही है ... तेरा शहर से काम नही चलता क्या जो अब तू गाओं मे पूछ ताछ कर रही है

रिंकी....मैं तो बस पूछ रही थी अगर आपको नही बताना है तो मत बताओ

रामा देवी.....देख रिंकी तू जो कुछ भी करती है उसकी सारी खबर मेरे पास रहती है मगर मैं तुझसे कुछ नही कहती क्यूंकी मैं जानती हूँ ये उमर ही ऐसी होती है

रामा देवी की बात सुनकर रिंकी चौंक जाती है

रामा देवी.....ऐसे क्या चौंक रही है मैं तेरी मा हूँ मैं अपनी बेटी के बारे मे नही जानूगी तो और कौन जानेगा और वैसे भी मैं तो तेरे बाप से उस सुख को ठीक से नही पाती ये तो तू भी जानती है मगर मैं ये नही चाहती की मेरी बेटी भी उस सुख से वंचित रहे

रिंकी समझ चुकी थी की उसकी मा को उसके बारे मे सब पता है मगर फिर भी रिंकी एक आखरी बार झूठ बोलती है

रिंकी....ये तुम क्या कह रही हो मा भला मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ

रामा देवी.....पहले मैने तुझसे झूठ बोला था मगर मेरी बात सुनकर जिस तरह तू चौंक गयी थी और तेरे चौंकने के कारण ही मेरी बात सच साबित हो गयी

रिंकी ....मेरे चौंकने का ये मतलब नही था आप तो बेवजह मुझ पर शक कर रही हैं

रामा देवी....देख रिंकी अगर यहाँ इतने मेहमान नही होते तो अपनी बात साबित करने के लिए मैं यहीं तेरे सारे कपड़े उतार कर तुझे नंगी करके तेरी चूत चेक करती मगर कोई बात नही ये काम मैं घर जाकर भी कर सकती हूँ और तब अगर मेरी बात सच साबित हुई तब तू क्या कहेगी

रिंकी कुछ नही बोलती है बस चुप रहती है

रामा देवी उसको चुप देख कर मुस्कुराती हैं और मुस्कुराते हुए बोलती है

रामा देवी.....कमिनी बिल्कुल मुझ पर गयी है

ये बोलकर रामा देवी आगे मेहमानो की भीड़ मे घुस जाती हैं

रामा देवी के ये बोल ... कमिनी बिल्कुल मुझ पर गयी है

रिंकी सोचने लगती है क्या मेरी मा भी..ऊहह तो मेरी मा भी अपने जवानी के दिनों बहुत लडो से चुदी है

ये सोच कर रिंकी मंद मंद मुस्कुराने लगती है
 
मेहमान धीरे धीरे कम होने लगे थी और जो बचे हुए मेहमान थी राज उन मेहमानो की देखभाल करते हुए सोच रहा था

मैं अपनी भाभी को कैसे देखूं अगर मैं उनके रूम मे गया तो उनके आस पास जो भी औरतें बैठी होंगी वो मेरे बारे मे क्या सोचेंगी

मगर ये राज भी कम नही है मैं अपनी भाभी का चेहरा आज ही देखूँगा

मगर कैसे उसकी दिमाग़ मे कुछ आइडिया नही आ रहा था

काफ़ी सोचने के बाद राज अपनी भाभी के रूम की तरफ चल देता है और डॉली के रूम के बाहर एक आवाज़ देता है

राज .....सब लोग निकलो थोड़ी देर मे भैया आ रहे हैं

राज की आवाज़ सुनते ही सारी औरतें रूम से निकलने लगती हैं

जब सारी औरतें निकल जाती हैं तो राज चुपके से डॉली के रूम मे घुस जाता है और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लेता है

दरवाज़े के बंद होने की आवाज़ जैसे ही डॉली के कानो मे पहुँचती है उसका दिल जोरों से धड़कने लगता है डॉली समझती है की ये दरवाज़ा उसके पति ने बंद किया है

डॉली ने अभी तक जय को देखा नही था और ना ही उसकी कोई फोटो देखी थी

राज आगे बढ़ता है और अपनी भाभी के आगे जाकर बैठ जाता है

डॉली का पूरा चेहरा उसके घूँघट से ढका हुआ था

राज अपने हाथ आगे बढ़ाता है और डॉली के चेहरे का घूँघट हटा देता है

जैसे ही राज..डॉली का चेहरा देखता है तो वो डॉली के रूप सौंदर्या मे खो जाता है उसकी पलकें झपकना भूल जाती हैं

वहीं डॉली अपनी नज़रे नीची किए बैठी थी

कुछ देर बाद राज को ये ख़याल आता है की वो इस वक़्त कहाँ है अगर किसी ने देख लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा

राज ने ये सोचा की जल्दी जल्दी दो चार बातें कर लेता हूँ

राज.....आखें खोलिए मैं वो नही हूँ जो आप समझ रही हैं

राज की बात सुनकर डॉली अपनी आँखें खोल देती है और राज की तरफ देखती है

डॉली के सामने एक खूबसूरत और डॅशिंग नवजवान बैठा था जो बैठे बैठे मुस्कुरा रहा था

डॉली ने पहले यही सोचा था की रूम के अंदर जो आया है वो ही मेरा पति है मगर जब उसने खुद कहा की ये वो नही है तो डॉली भी सोचने लगी अगर ये वो नही हैं तो फिर ये कौन है

डॉली को सोचता हुआ देख कर राज मुस्कुराते हुए बोलता है

राज ....भाभी मैं आपको देखने आया हूँ और आप मुझे देख रही हैं

राज के मूह से भाभी शब्द निकलते ही डॉली समझ जाती है की ये उसका देवर है

मगर वो चुप रहती है उसको गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर इस घर मे ये उसकी पहली रात थी इसलिए वो कोई बखेड़ा खड़ा करना नही चाहती थी

वहीं राज को एक ख़याल आता है और वो आगे बढ़ कर डॉली के हाथ मे 500 रूपीए रख देता है और थोड़ा पीछे हटकर बड़े प्यार से बोलता है

राज ....श सॉरी.सॉरी अभी मेरे पास इतने ही हैं वो क्या हैं ना ..अभी मैं कोई काम नही करता जब कमाने लगूंगा तो आपको इससे भी ज़्यादा पैसे दूँगा ये पैसे भी मैने अपनी पॉकेट मनी से बचाएँ हैं
 
राज की प्यार भरी बात सुनकर डॉली का गुस्सा थोड़ा कम हो गया था मगर राज ने ये समझा की उसकी भाभी उसके यहाँ आने से नाराज़ हो गयी है

इसलिए राज अपने दोनो कान पकड़ कर बोला

राज .....लगता है मेरी भाभी मुझसे गुस्सा हो गयी है देखो मैं अपने कान पकड़ कर आपसे माफी माँगता हूँ ..प्लीज़

ये बात राज ने अजीब सा मूह बना कर की थी

और राज का अजीब सा मूह देख कर डॉली की हसी निकल गयी

डॉली को हँसते हुए देख कर राज बोलता है

राज ....भाभी आप मुझसे नाराज़ तो नही हैं

डॉली.......सच कहूँ तो मैं पहले तुमसे नाराज़ थी जब तुम मेरे रूम मे आए थे मगर अब मैं तुमसे नाराज़ नही हूँ

राज .....तो आपने मुझे माफ़ कर दिया

डॉली....हाँ मैने तुम्हे माफ़ कर दिया

राज....तो कैसा लगा आपको आपका देवर

डॉली.....यही की इस घर मे एक बच्चा भी रहता है

राज .....मैं बच्चा नही हूँ मैं तो 23 साल का हो गया हूँ और आप मुझे बच्चा ही समझ रही हैं

डॉली अब राज की टाँग खिचने के मूड मे आ चुकी थी

डॉली....मैने तुमको बच्चा कहाँ कहा है तुम तो मुझे कहीं से भी बच्चे नज़र नही आते

राज को कुछ समझ मे नही आ रहा था की डॉली किसको बच्चा बोल रही है यही सोच कर वो अपना सिर खुजा रहा था और डॉली उसको देख कर मुस्कुरा रही थी जब राज के कुछ समझ मे नही आया तो राज फिर डॉली से बोलता है

राज....भाभी अगर आपने मुझे बच्चा नही कहा है तो किसको कहा है ये तो बता दो

डॉली मुस्कुराते हुए

डॉली.....अच्छा एक बात बताओ इस घर मे कोई बच्चा है

राज .....नही है

डॉली.....तो समझे मेरे बुद्धू देवर मैं किसको बच्चा बोल रही हूँ

जैसे ही राज को समझ आता है की उसकी भाभी उसको ही बच्चा बोल रही तो राज मुस्कुराने लगता है और मुस्कुराते हुए बोलता है

राज .....भाभी आप बहुत अच्छी हैं

डॉली.....तुम भी बहो अच्छे हो

डॉली की ये बात सुनकर राज रूम से निकल जाता है

जब राज रूम से बाहर आता है तो अपने मन मे सोचता है

कितनी खूबसूरत है मेरी भाभी कोई इतना भी खूबसूरत हो सकता है ये मुझे आज पता चला है ...मेरे भैया बहुत लकी हैं जो उन्हे इतनी खूबसूरत बीवी मिली है
 
शादी के 2 दिन बाद ही डॉली ने किचिन और घर का काम संभाल लिया था

दयाल सिंग ने डॉली को बहुत समझाया था की घर का काम करने के लिए उसके नौकर हैं मगर डॉली नही मानी

किचिन मे काम करते करते हुए डॉली सोच रही थी

मेरे ससुर ने इन दो दिनों मे जिस ढंग से मुझसे बात की है मुझे लगता है की उनको मुझसे बहुत उम्मीद है और दूसरा उसका देवर अपने देवर को याद करते ही डॉली के चेहरे पर मुस्कान आ गयी कितना प्यारा है मेरा देवर

मगर जैसे ही वो जय के बारे मे सोचती है उसके चेहरे का रंग बदल जाता है उसके चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती है और एक गुस्सा उसके चेहरे पर विराजमान हो जाता है

डॉली को दो दिन पहले बीती हुई रात याद आ गयी जब वो दुल्हन.के जोड़े मे बैठी थी

रात के 12 बजे जब जय यानी उसका पति रूम मे आया था

जय की आँखे नशे से लाल थी उसके कदम लड़खड़ा रहे थे

लड़खड़ाते हुए कदमो से वो डॉली के पास आया था और आते ही बिस्तर पर गिर गया था

डॉली को इसका बिल्कुल पता नही था की उसका पति शराब भी पीता है

मगर फिर उसने सोचा की शायद इनके दोस्तों ने ज़बरदस्ती इनको शराब पिला दी हो ....हाँ ऐसा हो सकता है

मगर ये डॉली की भूल साबित हुई जब दूसरी रात भी जय नशे मे धुत होकर आया था और जैसे ही डॉली ने कुछ बोलना चाहा था तो जय ने कड़क आवाज़ मे बोला था

चुप चाप सो जा....

ये कहते हुए जय फिर बिस्तर पर लेट गया था और लेट ते ही सो गया था

जय की बात सुनकर डॉली को गुस्सा तो बहुत आया था मगर फिर भी वो अपने मा बाप के संस्कारों को नही भूली थी उसने सोचा था की वो अपने पति के प्यार का इंतज़ार करेगी

भाभी ...

ये आवाज़ सुनते ही डॉली के चेहरे पर स्माइल आ गयी और डॉली किचिन से ही बोलती है

डॉली....क्या बात है राज

राज ....भाभी वो पापा नाश्ता करने के लिए बैठे हैं आप कमला चाची से बोलकर नाश्ता लगवा दो

राज की बात सुनकर डॉली कमला को नाश्ता लगाने के लिए बोल देती है

जब नाश्ता लग जाता है तो दयाल सिंग डॉली को बुलाते हैं और बड़े प्यार से बोलते हैं

दयाल सिंग.....डॉली बेटी तुम भी हमारे साथ ही नाश्ता कर लिया करो

डॉली....पापा आप नाश्ता कर लीजिए मैं बाद मे कर लूँगी

दयाल सिंग.....तुम कोई नौकर नही हो इस घर की मालकिन हो इसलिए बैठो और नाश्ता करो

दयाल सिंग की मालकिन वाली बात सुनकर डॉली भावुक हो जाती है और नाश्ता करने के लिए बैठ जाती है

डॉली के बैठते ही राज भी मुस्कुराते हुए बैठ जाता है

नाश्ता करते हुए दयाल सिंग बोलते हैं

दयाल सिंग.....राज मैं सोच रहा हूँ की इस बार मैं अपनी शुगर मिल को चालू कर दूं

राज....ये तो बहुत अच्छी बात है पापा

दयाल सिंग......हाँ इससे हमारे गाओं वालों को अपना गन्ना बेचने के लिए कहीं दूर नही जाना पड़ेगा

राज ....हाँ पापा और इससे गाओं वालों का बहुत फ़ायदा होगा क्यूंकी अपना गन्ना बेचने के लिए उन्हे दूर जाना पड़ता है

दयाल सिंग.......डॉली बेटी इस बारे मे तुम क्या कहती हो

डॉली....पापा ये बहुत अच्छा विचार है इससे गाओं वालों की आमदनी बढ़ेगी और उनके पास ज़्यादा पैसे बचेंगे

दयाल सिंग ..... तुम्हारी सोच और राज की सोच बिल्कुल एक जैसी है ... सोच से मुझे याद आया आज मैं तुमको बहुत इंट्रेस्टिंग बात बताउन्गा जो शायद ही तुमको पता हो

डॉली सवालिया नज़रों से दयाल सिंग की तरफ देखती है जैसे पूछ रही हो कैसी इंट्रेस्टिंग बात

डॉली को अपनी तरफ देख कर दयाल सिंग मुस्कुराते हुए बोलते हैं

दयाल .....डॉली बेटी तुमको पता है तुम्हारा जन्म और राज का जन्म एक ही दिन और एक ही हॉस्पिटल मे हुआ था

दयाल सिंग की बात सुनकर डॉली राज की तरफ देख कर मुस्कुराने लगती है

थोड़ी देर और बात करने के बाद दयाल सिंग बोलते हैं

दयाल सिंग......डॉली बेटी ये जय कहाँ है

जय का नाम सुनते ही डॉली के चेहरे का रंग बदल जाता है मगर वो ऊपर से बिल्कुल नॉर्मल रहते हुए बोलती है

डॉली.....वो तो बहुत सुबह सुबह की घर से निकल गये

दयाल सिंग......कहाँ

डॉली.....मुझे इस बारे मे कुछ पता नही

डॉली की बात सुनकर दयाल सिंग कुछ नही बोलते और नाश्ते की टेबल से उठकर चले जाते हैं
 
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