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Adultery आशिक परिंदे ( देवर भाभी की दास्ताने आशिकी )

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StoryPublisher

Guest
Adultery आशिक परिंदे ( देवर भाभी की दास्ताने आशिकी )

अपडेट 01

दोस्तों ये कहानी यूपी के एक गाओं हरीपुर की है

हरीपुर गाओं पूरी तरह से हरा भरा है जिसके एक तरफ घना जंगल है उस जंगल मे जाने की किसी हिम्मत नही होती है क्यूंकी जंगल मे कुछ जंगली जानवर भी हैं

अब बारी है इस कहानी के करेक्टर्स को जानने की

1 ठाकुर दयाल सिंग .... एज 48 यियर्ज़ गाओं मे इनकी बहुत बड़ी हवेली बनी है दयाल सिंग गाओं के सरपंच हैं और एक नेक आदमी भी हैं और सबकी मदद करते हैं इनके दो बेटे हैं

सुनीता देवी.... दयाल सिंग की पत्नी इनकी एक बीमारी की वजह से दो साल पहले मौत हो गयी थी

जय सिंग ..... एज 27 ये दयाल सिंग का बड़ा बेटा है ये अपने बाप से अंदर ही अंदर जलता रहता है वजह दयाल सिंग का ग़रीब लोगों की मदद करना मगर इसकी इतनी हिम्मत नही की ये अपने बाप के आगे कुछ बोल सके

राज सिंग..... एज 23 ये दयाल सिंग का छोटा बेटा है अभी शहर मैं है और अपनी पढ़ाई कर रहा है इसका करेक्टर् कहानी के साथ पता चल जाएगा

ठाकुर भानु सिंग..... एज 45 इनकी भी एक हवेली इसी गाओं मैं है ये एक कमीना आदमी है और एक नंबर का ठरकी भी है ग़रीब लोगों को ब्याज पे पैसे देना और उसके बदले उनसे मोटी रक़म वसूलना इनका काम है ये भी ठाकुर दयाल सिंग से जलता रहता है मगर अपनी जलन को कभी ऊपर से जाहिर नही होने देता वजह आपको कहानी मे पता चलेगी

रामा देवी..... एज 44 ये भानु सिंग की पत्नी है ये अपने पति का हर बुरे कामो मे उसका साथ देती हैं

रिंकी सिंग..... एज 22 ये भानु सिंग की बेटी है ये भी अपनी मा की तरह ही अपने बाप के हर बुरे काम मे उसका साथ देती है और इसके और भी शौक हैं जो कहानी मे पता चल जाएँगे

दोस्तों कहानी मे और भी करेक्टर्स आएँगे उनका इंट्रोडक्षन मैं कहानी के साथ दूँगा
 
हवेली ठाकुर दयाल सिंग

दयाल सिंग अपनी हवेली मे बैठे हुए थे की तभी उनका वफ़ादार नौकर हरिया आता है और हाथ जोड़कर कहता है

हरिया.....मालिक गाओं से कुछ लोग आए हैं जो आपसे मिलना चाहते हैं

हरिया की बात सुनकर

दयाल सिंग.....हरिया उनको अंदर बुला लो

हरिया .... जी मालिक

हरिया सभी गाओं वालों को अंदर बुलाता है

गाओं वाले अंदर आते हैं और हाथ जोड़ कर दयाल सिंग को अपनी परेशानी बताते हैं

पूरी बात सुनकर दयाल सिंग गाओं वालों की मदद करते हैं और उनको वापस भेज देते हैं

ये नज़ारा पास मे खड़ा दयाल सिंग का बड़ा बेटा जय भी देख रहा था जो अंदर ही अंदर अपने बाप को गालियाँ दे रहा था

जय मन मे..... ये बुड्ढ़ा कभी नही सुधर सकता ये सारी दौलत लूटा कर ही मरेगा मुझे कुछ करना ही पड़ेगा वरना ये बुड्ढ़ा मुझे कहीं का नही छोड़ेगा

दयाल सिंग अपने बेटे के मन की बातों से अंजान थे की उसका अपना बेटा ही उनसे जलता है दयाल सिंग तो अपने बेटे को बहुत ही सीधा लड़का समझते थे मगर उनको ये नही पता था ये सीधा लड़का अंदर से कितना कमीना है

जय सिंग को भी अपने बाप को रोकने का कोई तरीका नही दिख रहा था और अपने बाप को सीधे रोकने की उसकी हिम्मत नही थी

जय सिंग भी जानता था की अगर उसने इस बारे मे कुछ कहा तो वो इस हवेली से बाहर होगा जय सिंग ने भी ये सोचा जब वक़्त आएगा तो इस बुड्ढे को भी देख लूँगा

जय ………..

ये आवाज़ दयाल सिंग की थी जो जय को आवाज़ दे रहे थे अपने बाप की आवाज़ सुनते ही जय अपनी सोच से बाहर आया और बड़ी मासूमियत से अपने बाप से बोला

जय .....जी पापा

दयाल सिंग.....किचिन मे जाके कमला से पूछो खाना तय्यार है या नही

कमला हरिया की पत्नी है और दोनो हवेली मे नौकर हैं

दयाल सिंग की बात सुनकर जय सर झुकाए हुए किचिन की तरफ चला गया और कमला से खाने के बारे मे पूछा

खाना लगभग तय्यार था कमला ने फटाफट खाने को टेबल पर लगा दिया

खाना खाने के बाद दयाल सिंग अपने कमरे मे चले गये

और अपने बिस्तर पर लेट गये दयाल सिंग बिस्तर पर लेटे हुए सोच रहे थे

औरत के बिना कितनी सूनी सूनी लगती है ये हवेली अब मुझे अपने बेटे की शादी कर देनी चाहिए तभी इस हवेली मे कुछ अच्छा लगेगा हाँ अब मुझे जय की शादी कर देनी चाहिए

काश सुनीता तुम आज जिंदा होती तो मुझे सारी ज़िम्मेदारियाँ अकेले नही उठानी पड़ती तुम तो मुझे छोड़ कर चली गयी

अपनी पत्नी को याद करते हुए दयाल सिंग की आँखों मे आँसू आ गये

उन आँसुओं को पोचकर दयाल सिंग बिस्तर पर इधर से उधर करवट ले रहे थे पर दयाल सिंग को नींद नही आ रही थी

उनको तो बस एक ही फिकर थी और वो थी हवेली मे किसी औरत का ना होना

हवेली मे एक मात्र औरत कमला थी वो भी शाम को अपने पति हरिया के साथ अपने घर चली जाती थी

यही सब सोचते सोचते दयाल सिंग नींद की गहराइयों मे चले गये

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क्यूँ रे बिरजू मेरे पैसे कब देगा बता मुझे

ये आवाज़ भानु सिंग की थी जो गाओं के ही एक आदमी से अपने ब्याज के पैसे माँग रहे थे

बिरजू सिर झुकाए भानु सिंग के सामने खड़ा था पर कुछ बोल नही रहा

बिरजू को चुप देख कर भानु सिंग का गुस्सा बढ़ गया और भानु सिंग चिल्लाते हुए बोला

भानु सिंग...... चुप क्यूँ है हरामख़ोर या मूह मे ज़बान नही है कुछ बोलता है या मैं अपने तरीके से तेरी ज़ुबान खुलवाऊ

भानु सिंग की बात सुनकर बिरजू काँपते हुए बोला

बिरजू .....म..मालिक अभी मेरे पास पैसे नही हैं म..मगर मैं बहुत जल्द आपके पैसे चुका दूँगा मुझे थोड़ा और वक़्त दे दीजिए

भानु सिंग......क्याआ तुझे और वक़्त चाहिए

बिरजू .....ज..जी मालिक

भानु सिंग...... नही मैं तुझे और वक़्त नही दे सकता ब्याज के पैसे तो तुझे देने ही पड़ेंगे

बिरजू .....म..मगर मालिक ....

भानु सिंग...... अगर तेरे पास पैसे देने की ताक़त नही थी तो तूने पैसे लिए ही क्यूँ

बिरजू .....ग..ग़लती हो गयी मालिक

भानु सिंग.....तो तुझसे ग़लती हो गयी मगर इस ग़लती की सज़ा तो तुझे मिलेगी अगर तूने कल तक मेरे पैसे नही दिए तो तुझे अपनी बीवी को एक रात के लिए मेरे पास भेजना पड़ेगा ब्याज के पैसे मैं तेरी बीवी से वसूल कर लूँगा

ये बोलकर भानु सिंग मुस्कुराने लगता है

भानु सिंग की इतनी गंदी बात सुनकर भी बिरजू कुछ नही बोला वो अच्छी तरह जानता था की अगर उसने कुछ बोला तो भानु सिंग के आदमी उसका क्या हाल करेंगे

भानु सिंग.....कल मेरे आदमी तेरे घर आएँगे या तो मेरे पैसे दे देना या एक रात के लिए अपनी बीवी फ़ैसला तुझे करना है अब अपनी ये मनहूस शकल लेके निकल यहाँ से

भानु सिंग की बात सुनकर बिरजू अपना मूह लटकाए और आँखों मे घोर निराशा लिए वहाँ से चला जाता है

भानु सिंग भी अपनी गाड़ी मे बैठकर अपनी हवेली की चल देता है

रास्ते मे भानु सिंग को जय सिंग दिखाई देता है जो आपनी मोटरसाइकल से चला आ रहा था

जय सिंग को देखकर भानु सिंग उसे आवाज़ देता है

भानु सिंग की आवाज़ सुनकर जय सिंग भी रुक जाता है

भानु सिंग अपनी गाड़ी से उतरकर जय सिंग के पास जाता और मुस्कुराते हुए बोलता है

भानु सिंग...... क्यूँ बेटा जय आज कल तो तुम मुझसे बात भी नही करते मुझसे कोई ग़लती हो गई क्या

जय.....नही ऐसी कोई बात नही बस थोड़ा वक़्त नही मिल पा रहा

भानु ..... वक़्त मिलता नही है वक़्त निकाला जाता है

भानु सिंग की बात सुनकर जय कुछ नही बोलता बस चुप रहता है जय को चुप देख कर भानु सिंग मुस्कुराने लगता है

भानु ....ऐसे चुप मत रहा करो मैं जानता हूँ की तुम क्या चाहते हो

भानु सिंग की बात सुनकर जय चौंक जाता है

जय....मैं क्या चाहता हूँ कुछ भी तो नही

भानु .....अरे भाई जय तुम तो ऐसे चौंक गये जैसे मैने तुम्हारी कोई चोरी पकड़ ली है मैं तो ये कह रहा हूँ की कभी हमारे साथ भी बैठा करो जिंदगी मे कितने मज़े हैं

जय.... कैसे मज़े

भानु.....अरे भाई तुम तो नीरे बुद्धू हो मेरा कहने का मतलब है की अब तुम जवान हो गये हो और जवानी के क्या मज़े होते हैं क्या ये भी मुझे ही बताना पड़ेगा

भानु सिंग की बात सुनकर जय मुस्कुराने लगता है और मुस्कुराते हुए कहता है

जय.....क्या ठाकुर साब आप भी

भानु सिंग भी हँसते हुए बोलता है

भानु .....क्या आप भी माना की में तुम्हारे बाप की उमर का हूँ मगर दिल तो सबका होता है

जय.... ह्म

भानु .....इसलिए कहता हूँ की कभी फ़ुर्सत निकालकर हमारे साथ भी बैठा करो जिंदगी के पूरे मज़े मिलेंगे

जय.....मगर

भानु .....अगर मगर के बारे मे कुछ मत सोचो हम ठाकुर हैं और ठाकुरों के ये शौक होते हैं

भानु सिंग की बात सुनकर जय कुछ नही बोलता है जय को चुप देख कर भानु सिंग फिर बोलता है

भानु .....तुम अपने बाप से मत डरो ये बात सिर्फ़ हम दोनो के बीच ही रहेगी

जय.....अब मैं चलता हूँ

जय की ये बात सुनकर भानु सिंग चौंक जाता है की इतना अपनी बातों मे उलझाने के बाद भी ये पता नही किस मिट्टी का बना है

भानु सिंग...... रूको मेरी पूरी बात तो सुन लो फिर चले जाना

भानु सिंग की बात सुनकर जय रुक जाता है जय के रुकते ही भानु सिंग बड़े प्यार से जय से कहता है

भानु .....देखो जय जो मैने तुमसे कहा है उसपर एक बार ध्यान ज़रूर देना तुमहरा बाप तो वैसे भी चूतिया है जो अपनी दौलत को ग़रीबों मे लुटाता रहता है देख लेना वो तुमको एक दिन भिखारी बना देगा

भानु सिंग ये बात जान बूझकर बोलता है

भानु सिंग की बात का जय पर फ़ौरन ही गहरा असर होता है

जय..... तो आप ही बताइए की मुझे क्या करना चाहिए

जय की बात सुनकर भानु सिंग के चेहरे पर एक ज़हरीली मुस्कान आ जाती है वो समझ जाता है की अब उसे क्या करना है

भानु .... तभी मैं तुमसे कह रहा हूँ की कभी हमारे पास भी बैठा करो

जय....ठीक है मैं कोशिश करूँगा

इतना बोलकर जय निकल जाता है मगर उसको ये नही पता था की अब उसके साथ क्या होने वाला है

जय के जाते ही भानु सिंग अपने मन मे हँसते हुए सोचता है

तेरे बाप से मुझे बहुत पुराना हिसाब चुकाना है और उसकी शुरुआत हो चुकी है

तेरे घर जो भी औरत आएगी वो मेरी रखैल बनेंगी और मैं तेरी वो हालत कर दूँगा की तू खुद ही अपने घर की इज़्ज़त को मेरे रूम मे लूट ते हुए देखेगा हा हा हा
 
मुझे छोड़ दीजिए मालिक मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ

औरत रोते हुए अपने हाथ जोड़ कर गिड गिडा रही थी मगर उस आदमी को कोई रहम नही आ रहा था

तुझे छोड़ दूं ... अगर मैने तुझे छोड़ दिया तो ये मेरे उसूलों से खिलाफ होगा

और ठाकुर भानु सिंग अपने उसूल कभी नही तोड़ता

ये कहते हुए भानु सिंग ने उस औरत की साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और उसे खींच कर उसके शरीर से अलग कर दिया

अब वो औरत सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट मे खड़ी रो रही थी

तभी दूसरी औरत उस रूम मे आती है और हँसते हुए कहती है

औरत ..... ये रोने धोने से काम नही चलेगा हमारा ब्याज तो तुझे चुकाना ही पड़ेगा और ब्याज कैसे वसूल किया जाता है ये मेरा पति तुझे बताएगा

ये थी रामा देवी ठाकुर भानु सिंग की पत्नी जो हर काम मे अपने पति का ही साथ देती हैं चाहे वो काम कितना भी बुरा क्यूँ ना हो

और जो औरत रो रही है वो बिरजू की पत्नी शालु है जिसको भानु सिंग के आदमी उसके घर से अपनी गाड़ी मे लेकर आए थे क्यूंकी बिरजू अपने ब्याज के पैसे नही दे पाया था

रामा देवी आगे बढ़ती हैं और शालु के पास जाकर उसके पेटिकोट के नाडे को पकड़ कर उसे खोल देती है

शालु सिर्फ़ अपनी आँखों को बंद करके रोती रही और रामा देवी एक एक करके उसके सारे कपड़े उतारती चली गयी

अब शालु एक दम नंगी खड़ी थी भानु सिंग आगे बढ़ता है और उसे बिस्तर पर पटक देता है

शालु कोई विरोध नही कर रही थी उसका सारा विरोध ख़तम हो चुका था उसने बहुत हाथ पैर जोड़े थे मगर भानु सिंग एक हैवान था शालु के आँसुओं का उसपर कोई असर नही हुआ था

शालु बिस्तर पर नंगी पड़ी थी और रामा देवी ये नज़ारा देख कर मुस्कुरा रही थी

इधर भानु सिंग ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए उसका 6 इंच का लंड बिल्कुल खड़ा था अपना ब्याज वसूलने के लिए

भानु सिंग के चेहरे पर एक कमीनी मुस्कान थी ... किसी के घर की इज़्ज़त लूटने की मुस्कान

वो आगे बढ़ता है और शालु की चूत पे अपने लंड को सेट करता है मगर शालु तुरंत पलट जाती ये देख कर भानु सिंग गुस्से से आग बाबूला हो जाता है

चटाक़

एक जोरदार तमाचा शालु के गाल पर पड़ता है

ये तमाचा भानु सिंग ने मारा था इस तमाचे से शालु रोते हुए पेट के बल गिर जाती है और उसका बचा खुचा विरोध भी ख़तम हो जाता है

भानु सिंग एक बार फिर से अपने लंड को शालु की चूत पर सेट करके एक धक्का लगाता है

भानु सिंग का लंड एक ही धक्के मे पूरा अंदर चला जाता है

और भानु सिंग अपने लंड को अंदर बाहर करने लगता है मगर शालु चुप थी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी

भानु सिंग..... आआहह साली ग़ज़ब का माल है तू तुझे चोदने मे बहुत मज़ा आ रहा है ब्याज वसूलने का अलग ही मज़ा है उउफ़फ्फ़

मगर शालु को जैसे भानु सिंग की कोई बात सुनाई नही दे रही थी वो तो बस जो हो रहा था उसे होने दे रही थी

5 मिनिट धक्के लगाने के बाद भानु सिंग शालु की चूत मे ही झड़ जाता है

झड़ने के बाद भानु सिंग हाँफते हुए शालु के ऊपर गिर जाता है

भानु को इतनी जल्दी झड़ते देख रामा देवी का पारा चढ़ जाता है और वो गुस्से मे बोलती है

रामा देवी..... तुम अब किसी काम के नही रहे इतनी जल्दी तुम्हारे लंड ने पानी छोड़ दिया और चले हो ब्याज वसूलने अरे जब तुम ठीक से ब्याज नही वसूल कर पाओगे तो असल कैसे वसूल करोगे

रामा देवी की बात सुनकर भानु सिंग गुस्से से उसकी तरफ देखता है मगर कुछ बोल नही पाता

रामा देवी पैर पटकते हुए रूम से निकल जाती है और भानु सिंग उसे जाते हुए देखता रहता है

शालु अब भी पेट के बल पड़ी हुई थी और अपनी किस्मत को रो रही थी

रामा देवी जैसे ही बाहर आती है तो उसकी नज़र हवेली के गेट पर पड़ती है जहाँ से एक बड़ी गाड़ी गेट के अंदर आ रही थी

रामा देवी समझ जाती हैं की उसकी बेटी अपने दोस्तों के साथ घूम कर आ गयी है

गाड़ी का गेट खुलता है और एक खूबसूरत लड़की उस गाड़ी से निकलती है और एक अदा के चलती हुई अपनी मा के पास आती है

रामा देवी का चेहरा देख कर रिंकी समझ जाती है की उसकी मा इस समय गुस्से मैं है

रिंकी.... क्या बात है मा बहुत गुस्से मे लग रही हो

रामा ....नही ऐसी कोई बात नही

रिंकी.... क्यूँ झूठ बोलती हो क्या आज भी पापा ठीक से ब्याज वसूल नही पाए

ये बात बोलकर रिंकी हँसने लगती है रिंकी को हँसते हुए देख कर रामा देवी भी हँसने लगती है और हँसते हुए बोलती हैं

रामा..... तेरे बाप मे अब वो दम नही रहा जो ठीक से ब्याज वसूल सके

रिंकी आँख मारते हुए

रिंकी.....फिर मेरी मा का काम कैसे चलता है

रामा देवी एक लंबी आआहह भरते हुए बोलती है

रामा ..... बस ऐसे ही चलता है

रामा की बात सुनकर रिंकी हँसने लगती है और हँसते हुए अपने रूम मे चली जाती है

रूम मे पहुँच कर रिंकी अपने कपड़े चेंज करके अपने बिस्तर लेट जाती है

रिंकी अपने दोस्तों के साथ बिताए हुए रंगीन पलों को याद करने लगती है की वो कैसे कैसे मज़े करके आई है

धीरे धीरे उसका हाथ उसकी चूत तक पहुँच जाता है मगर जैसे ही वो अपनी चूत को हाथ लगाती है एक लंबी सिसकी उसके मूह से निकल जाती है

ठाकुर दयाल सिंग अपनी हवेली मे बैठे हुए थे और कुछ सोच रहे थे

दयाल सिंग मन मे... ये ठीक रहेगा इस घर के सूने पन को दूर करने के लिए मुझे अपने दोस्त की लड़की का हाथ माँगा पड़ेगा ...

जो जय और इस घर के लिए बिल्कुल ठीक रहेगा

मुझे जल्द से जल्द इस रिश्ते की बात करने के लिए अपने दोस्त के गाओं जाना पड़ेगा

मेरा दोस्त मेरी बात कभी नही टालेगा और इस रिश्ते के लिए तुरंत हाँ कर देगा

ये सोचते हुए दयाल सिंग अपनी कुर्सी से उठ कर अपने रूम मे चले जाते हैं
 
ठाकुर दयाल सिंग अपनी गाड़ी से निकल चुके थे अपने दोस्त से मिलने और उनकी बेटी का हाथ माँगने

गाड़ी दयाल सिंग खुद ड्राइव कर रहे थे क्यूंकी उनको खुद ही गाड़ी चलाना पसंद था

3 घंटे तक गाड़ी चलाने के बाद दयाल सिंग पहुँच जाते है अपने दोस्त के गाओं ...

.....यहा मैं दयाल सिंग के दोस्त और उनके परिवार का इंट्रो दे देता हूँ....

ठाकुर कौशल सिंग...... एज 47 ये काफ़ी ग़रीब हैं इनका काम इनकी खेती बाड़ी से चलता है मगर फिर भी अपनी बेटी को पढ़ने लिखाने मे इन्होने कोई कसर नही छोड़ी है

सीमा देवी..... एज 44 ये भी बहुत सरल स्वाभाव की हैं और अपनी बेटी से बहुत प्यार करती हैं

डॉली सिंग....ये है इस कहानी की हेरोयिन एज 23 ... ये बहुत खूबसूरत है मगर अपनी खूबसूरती पर इसको ज़रा भी घमंड नही है अपने मा बाप का हर कहना मानती है

दयाल सिंग अपनी गाड़ी से उतरकर कौशल के घर का दरवाजा ख़टखटाते हैं

कोई 2 मिनट के बाद घर का दरवाजा खुलता है

दरवाज़ा कौशल सिंग ने खोला था और अपने सामने दयाल सिंग को देखते ही वो आगे बढ़ कर दयाल सिंग को अपने गले लगा लेते हैं दयाल सिंग को भी मज़ाक सूझता है और वो हँसते हुए कहते हैं

दयाल सिंग..... अबे क्या कर रहा है मैं सीमा नही हूँ जो मुझसे चिपका है

दयाल सिंग की बात सुनकर कौशल उनसे अलग होता है और उनके सिर पर हाथ मारते हुए कहता है

कौशल ..... मज़ाक़ करने की तेरी आदत गयी नही

दयाल सिंग.... अबे हम बूढ़े हो गये तो क्या हुआ क्या अब हम मज़ाक़ भी नही कर सकते

कौशल .... बहुत हो गया मज़ाक़ बाकी बातें अंदर चलकर करते हैं

दयाल .... मैने तो सोचा था तू मुझे अपने घर के दरवाजे से ही वापस भेज देगा

ये बोलकर दयाल सिंग फिर से हँसने लगते हैं

कौशल .... तू बिल्कुल नही बदला आज भी वैसा ही है सभी को हंसाने वाला

कुछ देर बाद दोनो दोस्त अंदर बैठे थे और अपने गीले शिकवे दूर कर रहे थे

सीमा जो अभी तक किचिन मे थी आवाज़ सुनकर वो भी बाहर आ जाती है और दयाल सिंग को देखकर बोलती है

सीमा ....मिल गयी फ़ुर्सत हमसे मिलने की मैं तो सोच रही थी की आप हमे भूल ही गये

दयाल ..... नही भाभी मैं आप लोगों को कैसे भूल सकता हूँ बस वक़्त नही मिल पाता है

सीमा.... तो आज कैसे वक़्त मिल गया

कौशल सीमा को टोकते हुए बोलता है

कौशल .... क्यूँ मेरे दोस्त को परेशान कर रही हो

सीमा.... मैं कहाँ परेशान कर रही हूँ मैं बस पूछ रही हूँ की ये हमे भूल तो नही गये

कौशल ..... सीमा मेरा दोस्त इतनी दूर से थका हुआ आया है और तुम हो की सवाल पे सवाल किए जा रही हो अरे कुछ नाश्ते पानी का इंतज़ाम करो

सीमा अपने सर पर हाथ मारते हुए

सीमा .... मैं तो भूल ही गयी

कौशल हँसते हुए

कौशल ..... देखा भूलने की आदत तुमको है मेरे दोस्त को नही

सीमा..... तुमको तो मैं बाद मे देखती हूँ

ये कहते हुए सीमा किचिन मे नाश्ता बनाने चली जाती है सीमा के जाते ही दयाल सिंग मुस्कुराते हुए कहते है

दयाल ..... तूने भाभी को नाराज़ कर दिया है मेरे जाने के बाद वो तेरी अच्छे से खबर लेंगी हा हा हा

कौशल ......वो मुझसे ऐसी बात इसलिए करती है क्यूंकी वो मुझसे बहुत प्यार करती है ... अच्छा छोड़ ये सब और बता आज कैसे आना हुआ

दयाल सिंग थोड़ा गंभीर हो जाते है और कुछ सोचने की मुद्रा मे आ जाते हैं

दयाल सिंग को सोचते हुए देख कर कौशल फिर से बोलता है

कौशल ....ऐसे क्या सोच रहा है

दयाल सिंग ने भी थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए कहा

दयाल सिंग.... देख कौशल मैं तुझसे कुछ माँगने आया हूँ पर डरता हूँ की कहीं तू इनकार ना कर दे

कौशल हँसते हुए

कौशल .....क्या यार तू भी मुझ ग़रीब के पास क्या है जो तू माँगने आया है
 
दयाल सिंग..... नही कौशल तू मुझसे बहुत अमीर है

कौशल ..... अब पहेलियाँ मत बुझा सीधे सीधे बोल की तू क्या माँगने आया है

दयाल सिंग ने एक लंबी साँस ली

दयाल सिंग......मैं अपने बेटे जय के लिए तेरी बेटी का हाथ माँगे आया हूँ बोल मुझ ग़रीब पर एहसान करेगा देगा अपनी बेटी मैं वादा करता हूँ की तेरी मेरे घर मेरी बेटी की तरह रहेगी

दयाल सिंग की बात सुनकर कौशल खुशी से उछल पड़ता है

कौशल .....क्या तू सच कह रहा है

दयाल सिंग......हाँ कौशल मैं सच कह रहा हूँ

कौशल .....मैं भी यही चाहता था मेरी बेटी तेरे घर की बहू बने मगर अपनी ग़रीबी की वजह से मैं तुझसे ये बात बोलने की हिम्मत नही जुटा पाया

कौशल की हाँ सुनकर दयाल सिंग खुश हो जाते है और कौशल को अपने गले लगा लेते हैं

कुछ देर बाद कौशल बोलता है

कौशल .....देख यार मेरी बेटी की पढ़ाई पूरी होने मे बस 2 महीने रह गये हैं उसकी पढ़ाई पूरी होते ही तू जब चाहे इस दरवाज़े पर अपने बेटे की बारात लेकर आ सकता है

दयाल सिंग......ये तो बड़ी अच्छी बात है मेरे बेटे राज की पढ़ाई पूरी होने मे भी 2 महीने रह गये हैं

कौशल सिंग हँसते हुए

कौशल .....पढ़ाई साथ मे कैसे पूरी नही होगी तुझे याद है मेरी बेटी डॉली और तेरा बेटा राज एक ही दिन पैदा हुए थे

दयाल सिंग..... हाँ मुझे याद है तू कैसे अपनी बेटी को गोद मे लिए हॉस्पिटल मे ही उछल रहा था

इतने मे सीमा किचिन नाश्ता बना कर ले आती है और दयाल सिंग के सामने रख देती है

कौशल सिंग ने सीमा को पूरी बात बता देता है की दयाल सिंग उनकी बेटी का हाथ माँगने आए है पूरी बात सुनने के बाद सीमा भी खुश हो जाती है

फिर दयाल सिंग नाश्ता करते हैं और सभी से विदा लेकर खुशी खुशी अपने घर की तरफ चल देते हैं

हवेली पहुँचते ही दयाल सिंग ने सबसे पहले ये खबर अपने सबसे वफ़ादार नौकर हरिया को बताई और ये बोल दिया की सारे गाओं को इस बारे मे बता दो की ठाकुर दयाल सिंग ने अपने बेटे जय की शादी तय कर दी है

जय की शादी की खबर सुनते ही हरिया खुश हो जाता है

मगर वहीं ऊपर छत पे खड़ा जय भी ये बात सुनता है मगर उसको कोई खुशी नही होती वो बस मन मे अपने बाप को गालियाँ दे रहा था

साला बुड्ढ़ा पहले तो ये सिर्फ़ अपने हाथों से अपनी दौलत लूटा रहा था मगर अब मुझसे पूछे बगैर मेरी शादी भी तय करके आ गया ये तो मेरी जिंदगी भी बर्बाद करने मे लगा हुआ है

दूसरे दिन ये बात आग की तरह पूरी गाओं मे फैलते हुए ठाकुर भानु सिंग के कानो तक पहुँच जाती है

साला अपने बेटे की शादी तय करके आ गया ये शादी तो होगी मगर उस लड़की के साथ सुहाग रात सिर्फ़ ठाकुर भानु सिंग मनाएगा ये वादा रहा मगर कैसे

मुझे जल्द से जल्द कुछ करना पड़ेगा नही तो दयाल सिंग से बदला लेना तो दूर की बात मैं उसे छू भी नही पाउन्गा

अचानक भानु सिंग को कुछ याद आता है और वो अपने फोन से एक आदमी को कॉल करता है

कुछ देर बात करने के बाद भानु सिंग फोन रख देता है और अपने मन मे सोचता है

भानु सिंग मंज़िल ज़्यादा दूर नही है
 
आज जय सिंग ठाकुर भानु सिंग के साथ उसके घर मे बैठा था

भानु सिंग की चाल धीरे धीरे कामयाब हो रही थी मगर जय को इसके बारे मे कुछ भी अनुमान नही था की उसने किससे हाथ मिलाया है

वो तो बस अपने बाप से गुस्सा था वजह सिर्फ़ दो

पहली वजह की दयाल सिंग का किसी की मदद करना उसे बिल्कुल पसंद नही था वो बस यही समझता था की उसका बाप सारी दौलत ग़रीबों मे लूटा रहा है

और दूसरी वजह की दयाल सिंग ने बगैर उससे पूछे ही उसकी शादी फिक्स कर दी इस बात ने आग मे घी डालने का काम किया था और जय को भानु सिंग की याद आ गयी

और जय सिंग पहुच गया भानु सिंग की हवेली

मगर जय सिंग को ये नही पता था की इसका अंज़ाम क्या होगा

जय सिंग ये नही जानता था की भानु सिंग इंसान के भेष मे एक राक्षस है

भानु सिंग के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी अपनी कामयाबी की पहली सीधी चढ़ने की मुस्कान

भानु सिंग.....क्यूँ जय सुना है तुम्हारी शादी फिक्स हो गयी है

जय ने एक बार भानु सिंग की तरफ देखा और मायूसी के साथ बोला

जय....ह्म

भानु सिंग.... अरे तो इसमे मायूस होने की क्या ज़रूरत है ये तो खुशी की बात है वैसे कब हुआ ये सब

जय..... अभी 6 दिन पहले

भानु सिंग..... चलो अच्छा है तुमको भी तो एक लड़की की ज़रूरत महसूस होती होगी और उस लड़की के आने से तुम्हारी ज़रूरत भी पूरी हो जाएगी

भानु सिंग की बात सुनकर जय का पारा चढ़ जाता है और वो गुस्से से बोलता है

जय..... खाली लड़की का क्या मैं आचार डालूँगा जब मेरे हाथ मे ही कुछ नही है

जय की बात सुनकर भानु सिंग हँसने लगता है और फिर जय को भड़काता है

भानु सिंग..... क्या जय इतनी बड़ी हवेली बनी है इतनी जायदाद है वो किसलिए है

जय.... मगर मुझे तो कुछ भी नही मिलता है

भानु सिंग...... मगर तुम्हारे पिता ने जो किया है कुछ सोच कर ही किया होगा और उनके मरने के बाद ये सारी दौलत तो तुम्हारी ही तो होगी

जय ये सुनकर चौंक जाता है और अपने मन मे सोचता है ये वही आदमी है जो उस दिन उसके बाप को गालियाँ दे रहा था और आज उसकी तरफ़दारी कर रहा है

मगर फिर भी जय अपनी भड़ास निकाल देता जो गुस्सा उसके अंदर था उसको भानु सिंग के आगे बक देता है

जय..... उसके मरने तक तो मैं कंगाल हो चुका होऊँगा

जय की बात सुनकर भानु अपने मन मे मुस्कुराने लगता है

भानु सिंग......ये कहने से भी कुछ नही होने वाला अब तुम कुछ नही कर सकते

जय खीजते हुए

जय.... तो आप ही बताइए मैं क्या करूँ आप ने उस दिन कहा था की कभी हमारे पास भी बैठ लिया करो और जब मैं आपके पास आया हूँ तो आप मेरे बाप की वक़ालात कर रहे हैं

भानु सिंग..... तो तुम ही बताओ मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ

जय.....आप किसी तरह मेरे बाप को समझाइए की वो मेरे हिस्से की जायदाद मुझे दे दें उसके बाद जितनी दौलत लुटाना चाहें उतनी लुटाएं मुझे कोई फ़र्क़ नही पड़ेगा

भानु सिंग.....बस इतनी सी बात है मैं कोई अच्छा सा मौका देख कर तुम्हारे बाप से बात करूँगा

भानु सिंग की बात सुनकर जय खुश हो जाता है की तभी रूम मे एक आदमी प्रवेश करता है जिसके हाथ मे दो ड्रिंक्स के ग्लास थे

वो आदमी दोनो ग्लास जय और भानु सिंग के सामने रख देता है

अपने सामने ड्रिंक्स के ग्लास और उस आदमी को देख कर जय पूछता है

जय ....ठाकुर साहब इनको पहले कभी नही देखा

जय की बात सुनकर भानु सिंग हँसने लगता है और हँसते हुए कहता है

भानु सिंग.....ये मेरा साला है ठाकुर रंगीला सिंग

( ठाकुर रंगीला सिंग....... एज 43 मगर अभी तक इनकी शादी नही हुई या यूँ कहो की इन्होने शादी नही की मगर इन्होने शादी क्यूँ नही की ये कहानी मे आपको पता चलेगा )

जय बहुत खुश था की भानु सिंग उसके लिए उसके पिता से बात करेंगे और इसी खुशी मे उसने अपने सामने रखे शराब के ग्लास को उठाया और एक ही साँस मे उसे खाली कर दिया

थोड़ी देर और बात करने के बाद जय भानु सिंग से विदा लेकर अपनी हवेली की तरफ चल देता है

जय के जाते ही भानु सिंग हँसने लगता है और साथ मे उसका साला रंगीला भी हँसने लगता है

जैसे भानु सिंग को जय की शादी की खबर मिली थी उसी वक़्त भानु सिंग ने अपने साले को फोन कर दिया था और उनका साला भी तुरंत चला आया

थोड़ी देर हँसने के बाद भानु सिंग बोलता है

भानु ....तुम बिल्कुल सही वक़्त पर आए हो साले साहब तुमने यहाँ आकर मेरा काम और आसान कर दिया

रंगीला .....वैसे तो मैं ऐसे काम नही करता मगर बात मेरे जीजू की थी वरना आप तो जानते हैं मैं सिर्फ़ प्यार के खिलाफ रहता हूँ और जय की बातों के मुताबिक वो उस लड़की को बिल्कुल प्यार नही करता वो तो सिर्फ़ दौलत चाहता है मगर बात मेरे जीजू की थी इसलिए मैं चला आया

भानु सिंग हँसते हुए

भानु सिंग..... तू भी साले भूल जा सब कुछ

रंगीला अपने दाँत पीसते हुए बोला

रंगीला .....भूल जाऊं कैसे भूल जाऊं जो मेरे साथ हुआ है उसे मैं कभी नही भूल सकता मेरे सामने जब भी कोई आदमी प्यार की बात करता है तो मेरा खून खौल जाता है

भानु सिंग ने भी बात को आगे बढ़ाना ठीक नही समझा और चुप हो गया क्यूंकी रंगीला के बगैर वो कुछ नही कर सकता था वरना अब तक वो रंगीला को अपनी हवेली के बाहर फेंक चुका होता

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गर्ल्स कॉलेज

क्यूँ डॉली मैं ये क्या सुन रही हूँ

उस लड़की की बात सुनकर डॉली उसकी तरफ देखती है और मुस्कुराते हुए बोलती है

डॉली ....क्या सुन लिया तूने

लड़की....यही की पढ़ाई के बाद तू शादी कर रही है

लड़की की बात सुनकर डॉली चौंक जाती है

डॉली....तुझे कैसे पता

लड़की.... मैं कल तुझसे मिलने तेरे घर गयी थी मगर तू किसी काम से गाओं के मार्केट गयी तो मैने सोचा तू नही है तो मैं थोड़ी देर आंटी से बात कर लेती हूँ और आंटी जी ने बातों बातों मे मुझे ये बात बता दी

लड़की की बात सुनकर डॉली मुस्कुराते हुए बोली

डॉली.....ठीक है तुझे पता चल गया अच्छी बात है वैसे मैं ही तुझे बता देती क्यूंकी तू ही तो मेरी एकलौती सहेली है जिससे मैं कुछ नही छिपाती

लड़की मूह फुलाते हुए

लड़की .....बड़ी आई बताने वाली अगर तुझे बताना था तो एक फोन कर देती मगर तूने ऐसा नही किया

डॉली.....भूमि तू ऐसी बात क्यूँ कर रही है मैं सच मे तुझे बताने वाली थी कसम से

भूमि.....कमिनी झूठी कसम मत खा

डॉली ....तू तो बेकार मे मुझ पर गुस्सा हो रही है मैं सच कह रही हूँ मैं तुझसे बताने ही वाली थी और तू गुस्सा कर रही है

डॉली ने भूमि को बहुत मनाया तब कही जाकर भूमि का गुस्सा शांत हुआ और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी

भूमि....तो मैडम शादी कर रही हैं कैसे हैं मेरे जीजा जी मुझे भी तो पता चले

डॉली .....यार मुझे तो अभी तक उनकी तस्वीर भी देखने को नही मिली फिर मैं कैसे बता सकती हूँ की तेरे जीजा जी कैसे हैं बस मुझे इतना पता है की वो मेरे पापा के दोस्त का बेटा है

भूमि .....क्याअ ... तूने अभी तक उसकी त्तस्वीर भी नही देखी

डॉली....नही

भूमि .....फिर भी तू ये शादी कर रही है

डॉली.....अरे यार मेरे मा बाप मेरे लिए बुरा क्यूँ सोचेंगे उन्होने जो भी लड़का मेरे लिए चुना होगा वो अच्छा ही होगा

भूमि .....मगर

डॉली.....कुछ अगर मगर नही मा बाप अपने बच्चों का कभी बुरा नही सोचते समझी

डॉली की बात सुनकर भूमि बात बदल देती है और डॉली को छेड़ते हुए बोलती है

भूमि .....मैं अगर मगर क्यूँ करूँगी अगर मगर तो वो करेंगे यानी मेरे जीजा जी

डॉली ....मैं सब जानती हूँ तू मुझे छेड़ रही है मगर तू मुझे कितना भी छेड़ ले मैं परेशान होने वाली नही हूँ

डॉली की बात सुनकर भूमि ने अपना मूह बना लिया और सीरियस होने का नाटक करते हुए बोली

भूमि .....मैं जानती हूँ की मैं तुझे परेशान नही कर पाउन्गी मैं तो बस अपनी सहेली से एक वादा चाहती हूँ

डॉली....कैसा वादा

भूमि .....ऐसे नही पहले तू वादा कर कहीं तू शादी होने के बाद मुकर गयी तो

डॉली.....क्यूँ पहेलियाँ बुझा रही है सीधे सीधे बोल तुझे क्या वादा चाहिए मैं तेरे लिए कुछ भी कर जाउन्गी

भूमि ..... तो फिर ठीक शादी के बाद तू मेरे जीजा को एक बार मेरे साथ भी शेर करेगी ही ही ही ही

ये बोल कर भूमि ज़ोर ज़ोर से हँसने लगती है डॉली समझ जाती है की भूमि उसकी टाँग खिच रही है

डॉली.....कमीनी तू मेरी टाँग खिच रही थी और मैं सच मे सीरियस हो गयी थी की पता नही मेरी सहेली मुझसे क्या वादा माँग ले

भूमि .....तू सच मे बुद्धू है मैं तो मज़ाक़ कर रही थी

डॉली..... अच्छा चल छोड़ ये सब कोई और बात कर नही तो मैं जा रही हूँ

भूमि.....अच्छा तो मैं कोई और बात करूँ ठीक है अपना कान इधर ला क्यूंकी मैं अब जो भी कहूँगी वो तेरे कान मे कहूँगी

भूमि की बात सुनकर डॉली भूमि की तरफ खिसक जाती है और भूमि डॉली के कान मे मूह लगा कर बहुत धीरे से बोलती है

भूमि .....डॉली मेरी जान आज से दो महीने के बाद तेरी चूत की चुदाई होगी और वो चुदाई करेंगे मेरे जीजा जी

भूमि की बात सुनकर डॉली उसे झूठ मूठ मारने लगती है

डॉली....बेशरम लड़की कुछ तो सोच कर बोला कर

भूमि अब खुल कर बोलने के मूड मे आ चुकी थी

भूमि .....क्या ग़लत कहा मैने शादी के बाद तेरी चुदाई नही होगी बोल बता मुझे

डॉली कुछ बोल नही रही थी बस चुप थी

भूमि .....शायद तू मेरी बातों से नाराज़ हो गयी है इसलिए मैं जा रही हूँ

ये बोलकर भूमि उठ जाती है मगर डॉली उसका हाथ पकड़ कर फिर से उसे अपने पास बिठा लेती है और बड़े प्यार से बोलती है

डॉली.... मैं तुझसे नाराज़ नही हूँ मगर जो ये सब बातें तू खुल कर बोलती है तो मुझे शरम आने लगती है

भूमि समझ गयी की डॉली उससे नाराज़ नही है इसलिए उसने आज खुलकर ही बोलने का फ़ैसला कर लिया

भूमि .....अच्छा डॉली एक बात बता की शादी के बाद क्या होता है

डॉली.....मुझे क्या पता

भूमि .....शादी के बाद लड़की की चुदाई होती है और जिसकी बाहों मे तेरे जैसी खूबसूरत और हसीन लड़की बिना कपड़ों के होगी उसकी तो किस्मत की चमक जाएगी ही ही ही

डॉली कुछ नही बोलती बस मुस्कुराती रहती है

भूमि अपनी बक बक चालू रखती है मगर डॉली सिर्फ़ सुनती रहती है जब भूमि बोल बोल कर थक जाती है तो दोनो सहेलियाँ अपने अपने घर निकल जाती हैं

रात के 3 बजे अचानक जय की नींद खुल जाती है और उसको अपने लंड मे एक तेज़ खींचाव महसूस होता है और उसका लंड किसी लोहे की रोड की तरह खड़ा हो जाता है

जय को ऐसा लग रहा था की जैसे की उसका लंड फॅट जाएगा अपने लंड को शांत करने के लिए वो बाथरूम मे घुस जाता है और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को मसलने लगता है

कोई 3 मिनट बाद ही जय के लंड ने पानी छोड़ दिया जैसे ही उसके लंड ने पानी छोड़ा उसका लंड तुरंत बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया और वो हाँफते हुए बाथरूम मे ही बैठ गया

कुछ देर बाद जय बाथरूम से निकलता है और हाँफते हुए अपने बिस्तर लेट जाता है

जय कुछ देर तक इस बारे मे सोचता है की ये सब क्या था

मगर कुछ देर सोचने के बाद वो इस नतीज़े पर पहुँचता की ये तो आम बात है ये तो किसी के साथ भी हो सकता है

मगर जय को ये बात नही पता थी की ये आम बात नही थी ये तो वो अंगूर थे जो आगे चलकर बहुत खट्टे होने वाले थे
 
Lakshmi Raval wrote: ↑ 13 Apr 2026 21:19
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वक़्त किसी के लिए नही रुकता यहा भी ऐसा ही था दिन धीरे धीरे निकल रहे थे और जय का भानु सिंग से मिलने का सिलसिला भी बढ़ गया था

मगर भानु सिंग जय के साथ कौन सी चाल चल रहा था इस बात का जय को बिल्कुल अंदाज़ा नही था

एक रात जय के लंड मे खींचाव आया था मगर जय ने इस बात को घंभीरता के साथ नही लिया था यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली थी

उस रात जय के लंड मे जो खिंचाव आया था और उसके बाद उसके लंड ने अपना पानी छोड़ दिया था

पानी छोड़ने के बाद उसका लंड बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया था

जय ने इस बात पर ध्यान नही दिया था की उसका लंड बर्फ की तरह ठंडा क्यूँ पड़ गया वो तो बस दौलत के पीछे पड़ा था और इसका फ़ायदा भानु सिंग बखूबी उठा रहा था

आज भी जय सिंग भानु सिंग से मिलकर आया था

भानु सिंग ने आज फिर जय को शराब पिलाई और कुछ मीठी मीठी करने के बाद जय को भड़काया था

जय भी भानु सिंग को ही अपना सबसे बड़ा हमदर्द समझ रहा था

भानु सिंग जय के दिमाग़ मे उसके बाप के खिलाफ नफ़रत भरने मे कोई कसर नही छोड़ रहा था और जय भी उसकी बातों के जाल मे फँसता जा रहा था

एक कहावत है...विनाश काले विपरीत बुद्धि

ये कहावत जय पर बिल्कुल फिट बैठ रही थी

जय के जाने के बाद रंगीला भानु सिंग से कहते है

रंगीला....क्या जीजा जी आपने मुझे इतने दिन फालतू मे रोक लिया अगर आप कहते तो मैं एक ही दिन मे आपका काम करके चला जाता

भानु सिंग....नही साले मैं ऐसा बिल्कुल भी नही चाहता बात सिर्फ़ वो नही है बात ये है की मुझे जय को दयाल सिंग का दुश्मन भी बनाना है और ये काम तभी हो सकता है जब जय लगातार हमसे मिलता रहे

रंगीला .....दुश्मनी पैदा करने से क्या होगा

भानु सिंग..... जब उसके लंड मे जान ही नही रहेगी तो वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठेगा और उसके बाद जय गुस्से मे अपने बाप को ही मार सकता है

रंगीला .....इसलिए तो आपसे कहता था की मुझे फालतू मे ही इधर रोक लिया मेरा एक इंजेक्षन और जय हमेशा के लिए नामर्द हो जाता मगर आपने ऐसे नही करने दिया

भानु ....तेरे पास दिमाग़ नही है अगर तू उसे इंजेक्षन लगाता तो वो तुझसे पूछता नही की उसे तो कोई बीमारी नही फिर ये इंजेक्षन किसलिए इसलिए मैने ये काम धीरे धीरे करना बेहतर समझा इसमे मेरा ही फ़ायदा है

रंगीला ....कैसा फ़ायदा

भानु सिंग.....पहली बात इससे मुझे जय को भड़काने का भरपूर मौका मिल जाएगा

रंगीला .....और दूसरी बात

भानु सिंग..... दूसरी बात ये की मैं उसे अपनी बातों से इतना पागल कर दूँगा की वो दौलत के लिए कुछ भी कर जाएगा

रंगीला .....फिर क्या होगा

भानु सिंग.....फिर क्या होगा जब बेचारे का लंड ही नही खड़ा होगा तो उसके पास एक ही ऑप्षन बचेगा और वो ऑप्षन है .. दौलत

रंगीला ...ह्म

भानु सिंग.......दौलत के लिए वो खुद ही अपनी पत्नी को मेरे बिस्तर तक लेकर आएगा और मैं उसके सामने ही उसके घर की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ाउंगा

भानु सिंग ने ये बहुत गुस्से मे कही थी उसकी आँखों मे गुस्सा और हवस सॉफ देखी जा सकती थी

रंगीला .....आपने तो बहुत आगे का प्लान तय्यार करके रखा है

भानु सिंग.......दयाल सिंग शायद वो सब भूल चुका है मगर मैं नही भूला मुझे आज भी याद है की कैसे उसने हमारे घर की बेज़्ज़ती की थी

रंगीला .....बेज़्ज़ती कैसी बेज़्ज़ती

भानु सिंग दाँत पीसते हुए

भानु सिंग.......उसने मेरी बहन से शादी करने से ये कहकर इनकार कर दिया था की वो एक रखैल है अब मैं उसको बताउन्गा की रखैल क्या होती है

रंगीला......मगर उसने शादी से इनकार क्यूँ कर दिया था क्या सच आपकी बहन किसी की ......मेरा मतलब है...

भानु सिंग गुर्राते हुए बोला

भानु सिंग......हाँ थी वो किसी की रखैल और आज भी उसी के साथ रहती है मगर ये बात किसी को भी नही पता थी की वो किसी की रखैल है सिर्फ़ दयाल सिंग को ये बात पता थी और जब मेरी बहन ने पहली बार दयाल सिंग को देखा तो वो उससे प्यार करने लगी और ये बात उसने घर मे मा को बताई की वो दयाल सिंग से शादी करेगी और जब हम उसके घर अपनी बहन का रिश्ता लेकर गये तो जो बात किसी को नही पता थी वो सारे गाओं को पता चल गयी की मेरी बहन किसी की रखैल है

रंगीला ......हमम्म्म

भानु सिंग......पूरे गाओं मे हमारे खानदान की बेज़्ज़ती हो गयी थी सिर्फ़ दयाल सिंग की वजह से मैने उसी दिन कसम खाई थी की मैं उसके घर की औरतों को अपनी रखैल बनाउन्गा और उसके घर की इज़्ज़त के उसके सामने लुटूगा मगर तब मुझे कोई मौका नही मिला था मगर अब मेरे पास मौका है दयाल सिंग ना सही उसका बेटा देखेगा की रखैल क्या होती है

भानु सिंग अपना प्लान तय्यार कर चुका था और दयाल सिंग इससे अंजान था की उसके और उसके परिवार के साथ क्या होने वाला है

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