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हिंदी सेक्स स्टोरीज - जादुई लकड़ी


अध्याय 20

डॉ चुन्नी लाल तिवारी यरवदा वाले,उर्फ डॉ चूतिया..

उनकी छोटी सी क्लिनिक को देखकर किसी को अंदाज भी नही लग सकता था की ये आदमी आखिर है क्या चीज,क्लिनिक भी ऐसा जन्हा कोई पेशेंट नही होते थे,अजीब बात थी की उस शख्स को रश्मि के पिता भैरव सिंह भी जानते थे ,जब उन्होंने उसका नाम सुना तो उनकी आंखे ही चमक गई ..

"आखिर डॉ साहब से तुम क्यो मिलना चाहते हो .."

"बस एक काम था अंकल "

हमारे पहुचते शाम हो चुका था ,मैं उनके ही बगीचे में बैठा हुआ उनके साथ चाय पी रहा था ,पास में ही रश्मि भी बैठी थी .

"कोई उनसे मिलने की बात कहे तो समझो की वो कोई बड़ी मुशीबत में है ,वरना ऐसे ही कोई उनसे नही मिलता ..आखिर बात क्या है ..??"

उनकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया था की क्या मुझे उन्हें सब कुछ बताना चाहिए या फिर नही ...

"बस अंकल कुछ ऐसी बात है जिसे मैं आपको नही बताना चाहूंगा "

वो चौक कर रश्मि की ओर देखने लगे,रश्मि ने बस अपना सर हिला कर उन्हें निश्चिंत किया ..

"ठीक है कोई बात नही ,तुम नही बताना चाहते तो मत बताओ लेकिन ..लेकिन अगर तुम्हे मेरी जरूरत पड़े तो मैं सदा तुम्हारे साथ हु ,कभी तुम्हारे पिता मेरे अच्छे दोस्त थे ,और अब तुम मेरी बेटी के दोस्त हो ,तो मैं तुम्हारी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहूंगा .."

उनकी बात सुनकर मुझे उनकी एक बात खटक गई .

"पहले अच्छे दोस्त थे मतलब ??"

उन्होंने एक गहरी सांस ली ..

"मतलब अगर सब कुछ सही होता तो तुम आज मेरे घर में पैदा होते,"

मेरे साथ साथ रश्मि भी चौक गई थी ...

"ये क्या कह रहे हो पापा .."

"हा बेटी लेकिन यही सच है ,इसके पिता रतन और मैं अच्छे दोस्त हुआ करते थे ,हमने एक साथ पढाई की ,कालेज में भी हम साथ ही थे .उस समय तुम्हारे दादा के भाई ने अपने हिस्से की जयजाद बेच दी हमारे नाम आया ये महल और कई तरह की परेशानियां ,हम कहने को तो राजा थे लेकिन हमारी आर्थिक स्तिथि उस समय ठीक नही थी ,वही इसके दादा जी का उस समय बिजनेस की दुनिया में एक बड़ा नाम था, रतन ने मेरे बिजनेस को सेटल करने में मेरी मदद की उसके बिजनेस के कांटेक्ट थे वही मेरी राजनीति में पकड़ मजबूत थी ,क्योकि हम लोग यंहा के राजा थे कोई भी नेता हमारे समर्थन के बिना यंहा से आज भी नही जीत पाता,लेकिन हमारी दोस्ती मे दरार उस समय पड़ी जब हम दोनो को ही एक ही लड़की से प्यार हो गया ..."

उनके इतना कहने भर से मैं और रश्मि एक दूसरे को देखने लगे ,मुझे उनकी बात कुछ कुछ समझ आ रही थी की वो किसके बारे में बात कर रहे थे...

मानो भैरव ने मेरी आंखे पढ़ ली ..

"हा बेटे वो तुम्हारी माँ थी ...और इसी बात में हमारी लड़ाई हो गई ,उसने मेरी बहुत मदद की थी इसलिए उसके लिए मेरे दिल में आज भी इज्जत है ,लेकिन आज भी वो मुझसे बात नही करता,उसके पिता के पास करोड़ो की दौलत थी वो बड़ा नाम थे वही मेरे पिता जी की मौत हो गई और मेरे ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई ,तो अनुराधा(राज की माँ) के पिता ने मेरी जगह रतन को अपना दामाद बनाने का फैसला कर लिया,बस इतनी सी बात है...मैं इस बात से टूट ही गया था लेकिन फिर मेरी जिंदगी में रश्मि की माँ आई और उसने मुझे बेहद ही प्यार दिया और मुझे एक प्यारी सी बेटी भी दे दी ..उसके बाद मैं सब कुछ भूलकर अपनी दुनिया में खुस रहने लगा "

उन्होंने प्यार से रश्मि की ओर देखा ..

रश्मि भी अपने पिता को बड़े ही प्रेम से देख रही थी ..

"ओह पापा "

वो उनके गले से लग गई .

कुछ देर बाद दोनो शांत हुए ..

"तो बेटा ये थी हमारी कहानी ,तो मेरे ख्याल से तुम्हे मैं कल ही डॉ के पास भेज देता हु ,ठीक है ना .."

मैंने हा में सर हिलाया ...

********

दूसरे दिन से ही काजल मेडम का अतापता नही थी,पूछने पर पता चला की वो कुछ दिनों की छुट्टी पर गई हुई है ,मुझे समझ आ गया की शायद उन्हें मेरे बाबा से मिलने की बात का पता चल गया होगा लेकिन कैसे ..??

हो सकता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए हो ..

जो भी हो ,मुझे आज डॉ चूतिया से मिलने जाना था,मैं 10 बजे के करीब ही रश्मि के घर पहुच गया वंहा पहले से रश्मि मेरा इंतजार कर रही थी ,हमारे साथ हमारी सुरक्षा के लिए एक गाड़ी और भी थी ,अंकल ने बताया की उन्होंने डॉ से बात कर ली है..

करीब 2 घण्टे के बाद हम डॉ के क्लिनिक के बाहर थे .

उनका नाम पढ़कर ही रश्मि हंस पड़ी ,

"कैसा अजीब नाम है इनका तुम्हे लगता है की ये हमारी कोई मदद कर पायेगा "

रश्मि की ये बात मुझे बड़ी अच्छी लगी उसने ये नही कहा की क्या डॉ तुम्हारी कोई मदद कर पायेगा ,उसने कहा की क्या डॉ हमारी मदद कर पायेगा,अब हम दोनो मैं और तुम नही बल्कि हम हो चुके थे.

"देखते है .."

हम अंदर गए एक सामान्य सा क्लिनिक था ,सामने रिशेप्शन था और फिर डॉ का केबिन,रिसेप्शन में कोई भी नही था ,जब हम अंदर गए तो वंहा एक पतला दुबला ,सावला आदमी बैठा कम्प्यूटर में कुछ देख रहा था वही उसके बाजू में एक गोरी चिट्टी ,हट्टी तगड़ी,भरी पूरी महिला खड़े हुए उसी कम्प्यूटर में कुछ देख रही थी,मैं उस महिला को पहचानता था ,यही थी जो वेबसाइट में मेरे मम्मे देख लो कर के अपने बड़े बड़े वक्षो को मसल रही थी ,उसे देखने से ही मेरे लिंग में एक सुरसुराहट सी हो गई ..

"नमस्ते डॉ साहब .."

मुझसे पहले रश्मि ने कहा ..

उसकी आवाज सुनकर दोनो ही चौके ..

"ओह आओ आओ ,शायद तुमको भैरव सिंह ने भेजा है राइट .."

"जी "

"बैठो बैठो .."

हम दोनो डॉ के टेबल के सामने की कुर्सी पर बैठ गए .

अब डॉ और मेरी हमारी तरफ मुड़े.

"कहो कैसे आना हुआ ..??"

मैंने उन्हें शुरू से सब कुछ बताना स्टार्ट किया,कैसे मैं,जंगल गया,फिर बाबा से मिला,फिर काजल मेरे जीवन में आयी,फिर वकील आया फिर वकील की मौत फिर चन्दू का गायब होना फिर काजल का मुझे ट्रेन करना और डॉ वाली स्टोरी सुनाना और फिर फिर काजल के बारे में चन्दू से बात करते हुए पता चलना,फिर बाबा से मिलना और अब काजल का गायब हो जाना.

सब सुनकर वो थोड़े देर तक सोच में पड़ गए लेकिन मैरी बोल उठी ..

"वो कमीनी काजल यंहा भी आ गई ,हर जगह आ जाती है लगता है की उसी के कारण कहानी बनती है हमारी तो कोई वेल्यू ही नही है .."(रीडर्स इसे इग्नोर करे )

उसकी बात से मैं चौका ..

"मतलब आप उसे पहले से जानती हो ,उसने मुझे आपकी वीडियो दिखाई थी लेकिन वीडियो में तो आपकी आवाज उसके जैसी है लेकिन असल जिंदगी में तो आपकी आवाज बहुत ही अलग है .."

मेरी बात सुनकर मैरी थोड़ा शर्मा गई

"तो तुमने वो वीडियो देखी,क्या है ना की काजल की आवाज बहुत ही सेक्सी है तो मैंने आवाज उसी से डब करवाया था ..ऐसे कैसे लग रही हु मैं उस वीडियो में तुमने अच्छे से देखा ना.."

उसने अपने वक्षो को थोड़ा मेरे ओर झुका दिया ,उसने सफेद कलर का एक एप्रॉन पहना था जैसा डॉ पहनते है,जो की इतना टाइट था की उसके दोनो मम्मे बाहर की ओर झांक रहे थे ,भरे हुए शरीर की मलिका मिस मैरी मारलो पूरी तरह से एक MILF थी ..

उसे देखकर मैंने अपना थूक गटका ,वही रश्मि ने मेरे जांघो पर अपना हाथ मार दिया,मुझे फिर से होश आया .

"जी जी अच्छा था ,और अब मुझे समझ आया की काजल ने मुझे वो वीडियो क्यों दिखाया था .."

"तुम्हें अच्छा लगा तो तुम्हारे लिए लाइव शो भी रख दूंगी "

उसने अपनी निचली जीभ को अपने दांतो से दबाया जो की इतना सेक्सी था की मेरा तो मुह ही खुला रह गया ,लेकिन रश्मि गुस्से से भर गई .

"डॉ साहब क्या हम काम की बात करे .."

डॉ जैसे किसी सोच से बाहर आया था ..

"हा हा क्यो नही क्यो नही ...देखो ..क्या नाम है तुम्हारा "

"जी मेरा नाम राज है राज चंदानी और ये मेरी दोस्त भैरव सिंह की बेटी रश्मि .."

"ओके तुम रतन चंदानी के बेटे तो नही "

"जी..आप मेरे पिता जी को जानते है ??"

"हा बिल्कुल इतने बड़े बिजनेसमेन है कैसे नही जानूँगा ..और कभी वो भैरव का खास दोस्त भी हुआ करता था "

"जी अंकल ने हमे कल ही बताया .."

"ह्म्म्म अच्छा है ...देखो बेटा ,काजल कभी मेरे ही साथ काम किया करती थी ,वो मेरी ही शागिर्द है और उसे मेरे कनेक्शन का भी अच्छे से पता है ,हमारी राहे अब अलग हो चुकी है लेकिन वो कभ मेरे रास्ते में नही आयी थी ,लेकिन मेरा नाम वो कई जगह पर ले चुकी है तुम्हारे साथ भी उसने ऐसा ही किया,ऐसे वो बाबा जी कौन है ."

"मुझे नही पता ."

"ह्म्म्म जैसा तुमने बताया वो डागा ही होगा .."

उसकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौका ..

"वाट ...लेकिन वो तो क्रिमिनल था ना "

मेरी बात सुनकर डॉ जोरो से हँसा .

"तुम अभी भी काजल की कहि बातो पर भरोसा कर रहे हो ,डागा साहब हमेशा से नेक आदमी थे,हा उनके धंधे कुछ गलत जरूर थे लेकिन धीरे से उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया था ,वो लोगो की मदद करते थे उनकी अध्यात्म में बहुत गहरी रुचि थी इसलिए वो शहर और घर परिवार छोड़कर जंगलो में चले गए,मुझे लगता है की वो डागा ही होंगे,सालो से तपस्या कर रहे है,शायद उन्हें कुछ ऐसी सिद्धि मिली होगी जिसके कारण वो मंत्रो से सिद्ध कर तुम्हारे लिए ताबीज बना सके ,लेकिन मुझे एक बात समझ नही आ रही की आखिर काजल ने डागा और मेरा नाम ही क्यो लिया..?

वो फिर से सोच में पड़ गए .

"हो सकता है की वो आप दोनो को जानती हो इसलिए .."

मैंने संभावना व्यक्त की .

"नही ऐसा नही हो सकता,वो ऐसे ही हमारा नाम इस्तमाल नही करेगी,शायद उसे पता था की डागा ही बाबा है और मेरा नाम लेने से तुम कभी ना कभी मुझ तक पहुच ही जाओगे ...शायद उसने तुम्हे हिंट दिया हो ??"

उनकी बात से मैं और भी कन्फ्यूज़ हो गया ..

"लेकिन वो मुझे क्यो आपतक पहुचाना चाहेगी .??"

मैं बेहद ही कन्फ्यूज़ था ..

"शायद इसलिए की वो जानती हो की मैं तुम्हारी मदद कर सकता हु .."

उनकी इस बात से मैं और रश्मि दोनो ही चौक गए .

"वाट लेकिन वो क्यो चाहेगी की ."

हम इतना ही बोल पाए थे की डॉ बोलने लगे ..

"देखो उसने यू ही तो ये सब कुछ नही किया है इसके पीछे कोई ना कोई स्ट्रॉन्ग वजह हो जरूर होगी ...दूसरी बात हमारा नाम लेने की दो ही वजह हो सकती है पहली की या तो वो तुम्हे मेरे द्वारा मदद पहुचाना चाहती हो ,या दूसरी तुम्हारे साथ मुझे भी फसाना चाहती हो .."

उनकी बात सुनकर हम कुछ देर के लिए चुप ही हो गए थे .

"लेकिन ऐसा नही हो सकता की उसने ऐसे ही आप लोगो का नाम ले लिया हो."

"हो सकता है लेकिन मुझे बाबा बताकर उसे क्या मिलता वही उसने डागा को इस षडयंत्र का मुखिया बताया क्यो...वो डागा को भी तो बाबा बता सकती थी जो की वो है भी .."

मेरे समझ में कुछ भी नही आ रहा था ...ना ही रश्मि की समझ में कुछ आ रहा था हम दोनो बस उनका चहरा ही देख रहे थे .

"मतलब साफ था है की डागा को ढूंढना तुम्हारे लिए कठिन था वही मुझे ढूंढना आसान,ऐसे भी उसे पता था की बाबा से मिलने के बाद तुम मुझतक और भी आसानी से पहुच जाओगे ,जबकि अगर वो डागा को ही बाबा बता देती तो काम वही खत्म हो जाता ,तुम मुझे ढूंढने नही निकलते ,दूसरा की वो सही नही बोल सकती थी ,मतलब वो किसी के दवाब में ये काम कर रही हो .???हो सकता है .."

"लेकिन किसके ??"

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..

"वही तो पता करना होगा,किसके और क्यो ये दो सवाल ही तो है हमारे पास जिसका हमे उत्तर ढूंढना है ,इसके अलावा एक संभावना ये भी हो सकती है की वो सब कुछ अपनी मर्जी से कर रही है लेकिन उसके ऐसा करने का कोई कारण तो नही दिखता,आख़िर उसे तुमसे चाहिए क्या ??"

"मेरी सम्प्पति ."

मेरी बात को सुनकर वो जोरो से हँसे.

"नही नही ये संपत्ति का गेम नही है ,अगर होता तो अभी तक तुम्हे मार देते और चन्दू को सामने कर संपत्ति हथिया लिया जाता,लेकिन तुम्हे एक तरफ ट्रेन किया जा रहा है किसी योद्धा की तरह ,और वही तुम्हे दवाइया दी जा रही है जिससे तुम बेकाबू सांड हो जाओ,वही दूसरी ओर चन्दू और उसका बाप गायब है ,बाप ही क्यो माँ क्यो नही ??? मेरे ख्याल से चन्दू को भी तुम्हारे तरह ही ट्रेनिग दी जा रही होगी,ताकि तुम दोनो लड़ कर मर जाओ .अब रही काजल की बात तो वो तुम दोनो को ट्रेन कर रही है लगभग एक ही जैसे ,अगर वो गलत होती तो वो तुमसे तुम्हरी ताबीज छिनने की कोशिस करती है ना तुम्हे झूठी कहानिया नही सुनाती ...मतलब मेरे ख्याल से उसे कोई दूसरा ही चला रहा है,हमे काजल के बेटे और पति के बारे में जानकारी इकठ्ठी करनी होगी की वो आखिर है कहा,मेरे ख्याल से उन्हें ही किडनेप कर काजल को ब्लैकमेल किया जा रहा होगा "

डॉ की बात से हम गहरे सोच में पड़ गए थे .

"लेकिन ऐसा करना कौन चाहेगा .."

मैं अनायास ही पूछ बैठा ..

"मेरे दिमाग में एक नाम तो आ रहा है "

"कौन..?"

मैं और रश्मि एक साथ बोल पड़े .

"तुम्हारा बाप ..रतन चंदानी ."

डॉ की बात सुनकार्र पूरे कमरे में बस सन्नाटा सा छा गया था ...

 

अध्याय 21

डॉ की बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया था .

"लेकिन डॉ वो ऐसा क्यो करेंगे ??"

डॉ मुस्कुराये ..

"पावर दोस्त पावर ,तुमने ही तो कहा था की उनके पिता और ससुर ने उनके जगह तुम्हारे और तुम्हारी बहनो के नाम सारी प्रॉपर्टी कर दी है ,और अगर ऐसा हो जाए तो उनकी कौन सुनेगा,तुम ही सोचो की जो आदमी जिंदगी भर दुसरो को आपने नीचे दबाने का आदि हो वो ये सब कैसे बर्दास्त कर सकता है की जिंदगी भर वो पैसे पैसे के लिये किसी दूसरे का मोहताज रहे ,भले ही वो उसका बेटा ही क्यो ना हो ...और ये भी सोचो की एक बाप भले ही कितना भी कमीना हो उसके लिए अपने बेटे को ,और इस केस में बेटो को मरना कितना मुश्किल है ,तो वो तुम्हे मारने की बजाय तुम्हे बहकाने की कोशिस कर रहा है,ऐसे काजल ने तुम्हारे साथ और क्या किया ."

मैं डॉ को उन ड्रग्स और उससे उत्पपन होने वाले इफ़ेक्ट्स के बारे में बताने की सोची लेकिन मैं रश्मि की मौजूदगी में ये कैसे बोल सकता था .

शायद मेरी चुप्पी को डॉ समझ गए ..

"रश्मि ,मैरी प्लीज तुम दोनो थोड़े देर के लिए बाहर जाओगी ,मुझे राज से अकेले में कुछ बात करनी है .."

दोनो बाहर चले गए और मैंने उन ड्रग्स और फिर मेरी सेक्स की उत्तेजना के बारे में बता दिया साथ ही साथ ये भी जो मैंने कान्ता ,शबीना और निशा के साथ किया ....

"ओह तो वो तुम्हे अपनी ही नजर में गिरना चाहता है,ताकि उसे लगे की तुम भी उसी की तरह हो ..लेकिन फिर भी इससे उसे कुछ खास हो हासिल नही हो सकता और अभी तो चन्दू भी गायब ही है ...कुछ तो गड़बड़ है मेरे दोस्त ..अगर इसकी तह तक पहुचाना है तो चन्दू और काजल को ढूंढना होगा,तुम इसी काम में लग जाओ और मैं काजल के पति और बच्चे को ढूंढता हु ,और हा जो तुम कर रहे हो वो करते रहो."

"मतलब ??"

"मतलब की जो तुम कान्ता और शबीना के साथ कर रहे हो वो करते रहो,अगर वो तुमसे यही करवाना चाहते थे तो फिर जरूर उन्हें इन बातो की खबर पता चल रही होगी ,उन्हें भी लगने दो की तुम उनके ही जाल में फंस रहे हो ,और इतनी पावर को करोगे भी क्या इसे सम्हालना तुम्हारे लिए मुश्किल ही होगा,इससे तुम हल्के भी बने रहोगे "

डॉ के चहरे में एक मुस्कान थी वही मेरा चहरा शर्म से झुक गया ..कुछ देर चूप रह कर मैं बोल पड़ा ..

"लेकिन डॉ मैं चन्दू और काजल को कैसे ढूंढूंगा,और मुझे तो लगता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए होंगे."

"बिल्कुल वो तुम्हारे ऊपर नजर जरूर रखे होंगे,और इसी का तुम्हे फायदा उठाना है ,आखरी बाबा जी का आशीर्वाद तुम्हारे पास है,वो ताबीज जिससे तुम अपने दिमाग ताकत को कई गुना बड़ा सकते हो तो तुम्हे डर किस बात का है ,तुम पूरे आत्मविस्वास से मैदान में उतर जाओ ,अपना दिमाग चलाओ फिर चाहे कितना बड़ा जाल क्यो ना हो एक बार अगर वो थोड़ा सा भी टूटा तो समझो पूरा जाल बेकार हो जाता है ...तो उनके जाल में ऐसा गेप कर दो की तुम तो वंहा से निकल जाओ और वो लोग ही फंस जाए तो तुम्हे फसाना चाहते थे..अब से समझ लो की गेम शुरू होई चुका है ,और तुम्हे उसे जितना ही है ,भले ही सामने कितना भी शातिर खिलाड़ी क्यो ना हो उसे हराया जा सकता है,ये शतरंज का खेल है यंहा प्यादा भी खतरनाक होता है ...समझ गए .."

मैने हा में सर हिलाया

"तो अब तुम अपने सभी मोहरों का इस्तमाल करो ,और यकीन रखो की तुम उनसे ज्यादा शातिर खिलाड़ी हो ,कभी कभी उनके मोहरों की गलती भी तुम्हे गेम जीता सकती है ,तो खेल शुरू होता है दोस्त,बेस्ट ऑफ लक .."

मैं डॉ की बात सुनकर जोश से भर गया था ,मैं उठा और फिर गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया ..

सच में ये एक खेल था लेकिन मेरे पास सबसे बड़ी ताकत मौजूद थी जिसका मैंने अभी तक सही उपयोग नही किया था ,वो थी मेरी जादुई लकड़ी ...

***********

मैं अपने कमरे में ध्यान में बैठा हुआ सभी संभावनाओं के बारे में विचार कर रहा था ,सभी मोहरे मेरे सामने थे ,लेकिन इस खेल को आखिर खेल कौन रहा है ..?????

मैं उठा और सीधे छत की ओर चला गया ,मैंरे पास एक दूरबीन थी मैं उसे भी अपने साथ ले गया,और ध्यान से छिपकर आसपास को देखने लगा,घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को और दूसरे घरों को आते जाते लोगो को ,अभी रात का समय था लेकिन स्ट्रीट लाइट की वजह से माहौल समझ में आ रहा था ..

घर से दूर मोड़ पर एक गाड़ी खड़ी देखी,उसके बाहर दो लोग बैठे हुए थे ,मैंने जूम किया तो समझ आया की उनके पास गन भी थी ,दोनो का चहरा मेरे दिमाग में बस गया ,मैं वही आंखे बंदकर अपने ताबीज को हल्का सा चाट कर उन चहरो के ऊपर फोकस किया ,यस वो लोग हमारा पीछा कर रहे थे ,मैंने इसी गाड़ी को आज हमारी गाड़ी के पीछे देखा था,मैंने इन लोग को सुबह मैदान में देखा था कभी कभी स्टेडियम के बाहर ..यानी ये मेरा पीछा बहुत दिनों से कर रहे है.

उन्हें देखकर मेरे चहरे में एक स्माइल सी आ गई ,

मैं नीचे उतारा तो मेरे कमरे में निशा भी मौजूद थी .

"कहा थे आप "

"कही नही बस छत में हवा खाने गया था ."

निशा मुझसे लिपट गई ..

"जब से रश्मि को प्रपोज कीया है आप तो मुझे देखते ही नही "

"तुझे क्या देखु,तू तो वैसी है जैसे पहले थी "

वो मेरी बात से गुस्सा होकर सीधे मेरे बिस्तर में जाकर लेट गई

"जाओ मैं आपसे बात नही करती "

मुझे भी उसे मनाने का कोई मूड नही था.

मैं भी उसके बाजू में जाकर सो गया

"आप ऐसे विहेब क्यो कर रहे हो .."

"निशा यार प्लीज ...मुड़ थोड़ा ठीक नही है ,एग्जाम आने वाले है तू पढ़ाई चालू की या नही .."

मेरी बात से निशा का मुह फूल गया

"जाओ सो जाओ मैं तो पढ़ ही रही हु ,तुम ही नही दिखते आजकल .."

निशा सच में गुस्से में थी वो आप से तुम में उतर आई थी .

मैं भी चुप चाप सो गया ,पता नही कितने देर हो चुके थे मुझे नींद की आगोश में गए हुए .

अचानक सी मेरी आंखे खुली ...

मैं एक कमरे में एक कुर्सी में बंधा हुआ था ..मैंने कुछ बोलना चाहा लेकिन ....लेकिन मेरे मुह में पट्टी बंधी थी ,मैं छटपटाया ..

तभी मेरे कानो में एक आवाज गूंजी ..

"लूजर ..तुम पहले भी लूजर थे और आज भी लूजर ही हो ..हा हा हा .."

ये निशा की आवाज थी ,मैं बुरी तरह से खुद को छुड़ाने की कोशिस कर रहा था ,निशा मेरे सामने खड़ी थी .

"तुमने क्या सोचा था की तुम बहुत ही बड़े तुर्रम खा बन गए हो,मेरे पापा को जलील करोगे,उन्हें अपनी प्रोपर्टी का रौब दिखाओगे ."

निशा की आंखों में गुस्सा था .

"रहने दो बेटी इस साले को तो यही बंधे रहने दो,तुम्हारी माँ कहा है "

उसने सामने कुर्सी पर बंधे एक औरत के चहरे पर से पर्दा उठाया ..

वो मेरी माँ थी ,मेरे पापा ने अपने हाथो में रखा चाकू माँ के गले में टिका दिया ..

निशा ने मेरे सामने प्रोपर्टी का एक पेपर्स रख दिया ..

"साइन करो इसे ताकि सारी प्रोपर्टी हमारी हो जाए .."

मैं कुछ बोलना चाहता था लेकिन मेरे मुझे में पट्टी बंधी थी ..

निशा ने पट्टी खोल दी ..

"निशा ये तुम क्या कर रही हो ,तुम तो मुझसे प्यार करती थी "

निशा जोरो से हंसी

"मैं अपने पिता की लाडली हु,तुमने कैसे सोच लिया की मैं उनको छोड़कर तुम्हारा साथ दूंगी ..साइन करो वरना "

मैंने जोर दिया और मेरे हाथो में बंधी हुई रस्सी को तोड़ दिया ,मेरा हाथ सीधे निशा के गले में था ..

"मैं तुम्हे मार डालूंगा तुमने मुझे धोखा दिया है ."

"क्या बोल रहे हो किसने धोखा दिया "

"तुमने मुझे धोखा दिया है निशा तुमने "

मैं उसके गले को और भी जोरो से दबाया ..

"भाई ये क्या कर रहे हो भाई "

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालो में लगा जैसे मुझे होश आया हो ..

मैं निशा के गले को दबाए हुए था,उसका चहरा पूरा लाल हो हुक था ,वही मैं अभी आपने बिस्तर में ही था ..मैंने तुरत ही उसे छोड़ दिया .

"पागल हो गए हो क्या ???क्या हो गया है आपको ...आज तो मुझे मार ही दिया था ,और ये क्या कह रहे थे की मैंने आपको धोखा दिया है ??"

मुझे होश आया की मैं एक सपना देख रहा था शायद दिन भर की मानसिक उथलपुथल का ही नतीजा था ..

"ओह सॉरी मैं ..मैं एक बुरा सपना देख रहा था .."

"अरे सपना ही देखना है तो रोमांटिक वाला देखो ,ये क्या मारा मारी के सपने देखते हो,और मैं आपको कैसे धोखा दे रही थी ,कही किसी दूसरे लड़के के साथ तो नही देख लिया मुझे."

उसके होठो में वही चिरपरिचित सी मुस्कान थी ..

"कुछ भी बोलती है कुछ नही सपना था ,चल सो जा "

"ऐसे नही मुझे बिना प्यार किये सोते हो इसलिए आप ऐसे सपने देखते हो ,मुझसे अच्छे से कसकर लीपट के सो जाओ तो आपको भी अच्छे सपने आएंगे "

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में भी एक मुस्कान सी आ गई ,

मैं उससे लिपट कर सो गया ..

लेकिन मेरे आंखों में अब भी नींद नही थी .

 

अध्याय 22

सुबह ही मैंने एक प्लान बना लिया था ,

आज मैं सुबह उठकर दौड़ाने के लिए स्टेडियम की ओर निकला ,स्टेडियम में दौड़ते हुए दोनो पास ही दौड़ रहे थे ,मैं दौड़ाते हुए स्टेडियम के दूसरे गेट से निकल गया थोड़ी देर तक सड़क में दौड़ाता रहा फिर सड़क से जंगल जैसे पेड़ो के झुरमुट की तरफ बढ़ गया ,वो लोग मुझसे दूरी बनाये हुए थे ताकि मुझे शक ना हो ,मैं उस पगडंडी में दौड़ता रहा जो की सड़क से होकर एक बांध तक जाती थी,और चारो तरफ सरकार द्वारा पेड़ लगाए गए थे जो की एक मिनी जंगल जैसा बन गया था ,

"अरे ये साला कहा गया ,अभी तो सामने ही था "

उसमे एक ने कहा और अपने कमर में रखी पिस्तौल निकालने लगा ..

"अबे इसे अंदर रख ,होगा सामने ही मोड़ के कारण दिखा नही ,बांध की तरफ ही गया होगा चल "

मैं एक मोड़ में गायब हो गया था और पास ही पेड़ की ओट में छिपा हुआ उन्हें देख रहा था .

वो थोड़ा और आगे बढ़ते उससे पहले ही मैंने एक लकड़ी का डंडा एक के सर में दे मारा,

दूसरा भी मुड़ा ही था लेकिन मेरा किक सीधे उसके चहरे में पड़ा उनके हाथ अपने पिस्तौलों पर जाते उससे पहले ही मैं दोनो के स्पाइनल कार्ड में वार कर उन्हें असहाय कर दिया ,वो छटपटाने लगे और मैंने तुरंत ही अपने साथ लाई हुई रस्सी से उनके हाथ पैर बांध कर उनके पास रखी पिस्तोल अपने गिरफत में ले ली ..

मैंने उन दोनो को घसीटते हुए पगडंडी से नीचे ले गया और एक शांत सी जगह में आकर रुका ...

"तुम दोनो मेरा पीछा क्यो कर रहे थे ."

मेरे सवाल का उन्होंने कोई भी जवाब नही दिया बल्कि के दूसरे को देखने लगे,मुझे समझ आ गया था की ये साले ऐसे नही मानेंगे .

मेरा घुसा सीधे उनके चहरे पर पड़ा वो तिलमिल गए,मैंने एक को टारगेट किया और उसे बुरी तरह से धोया जिसे देख कर दूसरे की हालत खराब हो गई ,मैंने पास पड़ा एक लकड़ी का टुकड़ा उठाया और सीधे एक के आंखों पर टिका दिया ...

"बोलेगा की आंखे फोड़ दु ..."

"नही नही बताता हु बताता हु "

दूसरा बोल उठा .

"तो बोल मैं गरजा ."

"हमे कांट्रेक्ट मिला था ,हम मामूली गुंडे है हमे कीसी ने कांट्रेक्ट दिया था तुम्हारे ऊपर नजर रखने के लिए,रात से सुबह तक हम दोनो रहते है और फिर हमारी जगह हमारे दूसरे दो साथी आ जाते है .."

"किसने दिया है कांट्रेक्ट ???"

"हमे नही पता सारा काम फोन से ही होता है "

"तो पैसे ???"

"पैसे हमे एक डस्टबीन से मिलते है ,वंहा लाकर कोई पैसे से भरा बैग डाल जाता है "

मैं सोच में पड़ गया .

"ओके तो उसे फोन लगाओ जिसे तुम रिपोर्ट करते हो और कहो की मैं इस बांध में अकेला बैठा हुआ हु ..."

उन्होंने तुरंत ही फोन लगाया ,सामने से एक आवाज आई

"बोलो.."

"जी वो लड़का ***बांध में आया है और अकेला बैठा हुआ है "

"ओके ,किसी से मिले तो मुझे बताना "

"जी ."

फोन कट गया ,ये आवाज रोबोटिक थी यानी कंप्यूटर द्वारा जनरेट की गई थी ,मतलब साफ था की सामने वाला अपनी इडेन्टिटी इनसे भी छिपा रहा था ...

"उसने कभी मुझे मारने के लिए कहा ,मैं जब अकेले होता हु तो "

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी देर चूप हो गए ..

फिर एक बोला .

"असल में एक बार कहा था लेकिन तुमने उन लडको को स्टेडियम में जिस तरह से मारा था उसे देखकर मना कर दिया ,कहा की तुम्हे ऐसे ही नही मारेगा तड़फा कर मारेगा ."

उनकी बात सुनकर मैं चुप हो गया ..

"और वो लड़की जो मुझे कराटे सिखाती थी उसे जानते हो ."

उन्होंने ना में सर हिलाया ...

मैं गहरे विचार में पड़ गया था की अब उस इंसान तक कैसे पहुचा जाए क्योकि ये लोग किसी काम के नही है ,अगर मैं फोन की लोकेशन भी ट्रेक करवाता तो भी मुझे कुछ नही मिलने वाला था ,क्योकि जो आदमी अपनी आवाज भी छिपा रहा था वो अपनी लोकेशन ट्रेस होने नही दे सकता था ...

"तुम लोगो को इस काम के कितने पैसे मिलते है "

"हर 15 दिन के 4 लाख "

"ओके मैं तुम्हे 8 दूंगा ,वही करते रहो जो कर रहे हो ,लेकिन मुझे भी खबर करते रहना ,और जब जो बोलू वो करना होगा...इस काम के 8 दूंगा ,और उसके बाद जीवन भर की नॉकरी भी दूंगा ताकि एक अच्छी जिंदगी जी सको "

दोनो एक दूसरे को देखने लगे .

"देखो मैं चाहूँ तो तुम्हे अभी मार सकता हु जान भी बक्स रहा हु,पुलिस से भी बचा लूंगा ...बोलो करोगे मेरे लिए काम "

उन्होंने तुरंत ही हा में सर हिलाय ....

*************

उन दोनो ने मुझे बाकी के दो और लोगो से मिलवाया,सभी मेरी बात से सहमत थे ..

मुझे पता था की हो सकता है वो डबल गेम खेल जाए इसलिए मैने डॉ को फोन लगाया और उन्हें सारी बात बताई,उन्होंने मुझे एक नंबर दिया जो एक सीक्रेट सर्विस वाले का था,उससे मैंने कुछ लोगो की मांग की और इधर घर में लगा पहरा भी हटवा लिया .

ताकि कान्ता और शबीना बाहर जा सके ,उनके ऊपर नजर रखने के लिए आदमी लगवा दिए थे,ताकि वो बाहर जाए और अगर चन्दू या उसका कोई आदमी उनसे मिलने की कोशिस करे तो हमे पता चल जाए..

मैंने एक एक आदमी का पहरा नेहा, निशा ,निकिता पर पापा पर भी लगवा दिया था..

सब तो सेट था लेकिन अब इन सबको पेमेंट करने की दिक्कत थी क्योकि मेरे पास पैसे नही थे ...

मैं पिता जी के सामने बैठा था ...

"पापा मुझे कुछ पैसे चाहिए ."

उन्होंने मुझे गौर से देखा क्योकि आजतक मैंने उन्हें कभी पैसे नही मांगे थे .

"कितने .."

"आपने मेरे नाम से एक अकाउंट ओपन करवाया था ,उसका पासबुक मुझे चाहिए "

तो थोड़ी देर तक मुझे देखने लगे फिर अपने कमरे से पासबुक ले आये और मुझे थमा दिया ...साथ ही एक एटीएम भी दिया .

मैंने देखा की उसमे 2.5 करोड़ का FD पहले से करवाया गया था और साथ ही अभी 1 करोड़ के करीब का कैश भी था .

मेरा काम इतने में चल जाता ...

"थैंक्स पापा .."

"कोई बात नही तुम्हारा ही पैसा है ,तुमने कभी लिया नही तो मैंने भी दिया नही अब तुम ही सम्हालो इसे "

पापा के सहज भाव से कहा ...

************

आज नेहा दीदी मेरे कमरे में मौजूद थी .

"आप यंहा ??"

"ह्म्म्म क्या सोचा तुमने राज ..??"

"दीदी कुछ समझ नही आ रहा है क्या करू,असल में चन्दू किसी गलत संगति में फंस गया है और वो लोग उसे बहका रहे है ."

मेरी बात सुनकार नेहा दीदी के चहरे में एक स्माइल आ गई

"जो उन्हें उसका हक दिलाना चाहते है तुम उसे गलत संगति बता रहे हो .."

"हा बिल्कुल और उसके पीछे एक रीजन भी है ,आपको क्या लगता है की अगर चन्दू सामने आ जाए तो क्या होगा ...दादा की प्रोपर्टी का दो हिस्सा होगा और नाना की प्रोपर्टी के चार ..ओके ..लेकिन उसे बाहर नही आने दिया जा रहा है क्यो..? क्या वो चाहते है की पहले वो मुझे खत्म करे फिर उसे बाहर लाया जाए ताकि दो की जगह एक ही हिस्सा हो ,उसे अपना हक ही चाहिए तो मैं देने को तैयार हु लेकिन क्या उसके पीछे उसका साथ देने वाले तैयार होंगे...नही दीदी वो तैयार नही होंगे जानती ही क्यो ..??क्योकि उन्हें चन्दू के हक से कोई मतलब नही है उन्हें बस अपन काम साधना है ,मुझे मारना उनके लिए कठिन है और ये बात वो जानते है लेकिन चन्दू को मारना आसान होगा राइट ,तो चन्दू की आड़ लेकर वो चन्दू और मुझे दोनो को ही मार देंगे.."

"लेकिन इससे उनका क्या फायदा होगा ..."

"वही तो समझ नही आ रहा है लेकिन अगर हक दिलाने की ही बात होती तो हक तो सामने आकर ही मिलेगा ना ,छिपकर नही "

मेरी बात सुनकर नेहा दीदी थोड़े देर सोच में पड़ गई ...

"मैं चन्दू से इस बारे में बात करती हु .."

"आपके बात करने से कुछ नही होगा ,आप चाहे तो ट्राय कर सकती हो लेकिन वो लोग उन्हें जाने नही देंगे ..जानती हो उस दिन मैंने आपसे जो रिकार्डिंग ली थी वो क्यो ली थी ,उसमे एक लड़की की आवाज थी जिसने चन्दू को फोन रखने को कहा था ,जानती हो वो लड़की कौन है .."

उन्होंने नही में सर हिलाया ..

"वही वो लड़की है जिसने मुझे वो दवाइया दी जिसके कारण मैंने कान्ता काकी के साथ वो सब किया था जिसके लिए चन्दू मुझपर गुस्सा था ,यांनी एक तरफ तो मुझे उकसाया भी जा रहा है दूसरी तरफ चन्दू को ...है ना कमाल की बात ,वही थी जो मुझे ट्रेनिंग दे रही थी वही दूसरी ओर वो चन्दू को भी ट्रेनिंग दे रही है ."

नेहा दीदी आवक रह गई ...

"इसका मतलब है की चन्दू खतरे में है .."

उन्होंने जल्दी से कहा

"चन्दू ही नही हम सभी खतरे में है,दिक्कत ये है की हमे पता ही नही है की आखिर हमे खतरा किससे है ."

वो सोच में पड़ गई थी ..

"कहि तू मेरे साथ कोई गेम तो नही खेल रहा है.."

वो अचानक से बोली

"अरे दीदी आप तो मुझे बचपन से जानती हो क्या मैंने कभी भी अपने परिवार का बुरा चाहा है ,आप लोगो ने कभी मेरे साथ अच्छा बर्ताव नही किया लेकिन क्या मैंने कभी आपके साथ बुरा बर्ताव किया ..."

वो थोड़ी देर चुप ही थी ...

"मुझे माफ कर दे भाई ,हा ये सच है की हमने तुझे कभी बहन का प्यार नही दिया,हमारे बीच के भाई बहन का रिश्ता भी ना जाने कब खत्म हो गया ...लेकिन अभी इन सब बातो का समय भी नही है ,,अगर हम चाहे तो भी अपनी गलती को सुधार नही सकते ,और जन्हा तक मेरी बात है मैं चन्दू से बेपनाह प्यार करती हु ,मेरे लिए तुम दोनो में चुनना भी मुश्किल हो गया है लेकिन तेरे साथ तो पूरा परिवार है लेकिन चन्दू के साथ तो मैं ही हु ."

उनकी स्पष्टता मुझे पसंद आयी..

"मुझे इस बात का कोई दुख नही है दीदी की आप चन्दू के साथ है ,लेकिन दुख सिर्फ इतना है की आप मुझपर भरोसा नही कर पा रही है ,जबकि मैंने आप पर पूरा भरोसा किया है ,मैंने आप पर भरोसा किया की आप मुझे मारने नही दे सकती ,लेकिन आप मुझपर भरोसा नही कर रही हो की मैं चन्दू को उसका हक दिलवाना चाहता हु ...."

वो थोड़े देर सोचने लगी फिर बोली ..

"मुझे तुझपर भरोसा है बोल क्या करना है .."

उनकी बात सुनकर सच में मुझे बहुत खुशी हुई .

"थैंक्स दीदी ,अब आप चन्दू को फोन करो और उससे कहो की आप उससे मिलने को बेताब हो रही हो ,वो आपसे मिलने आएगा मेरे लोग आपके पीछे रहेंगे,हम चन्दू को कुछ नही करेंगे ,चन्दू के जरिये हम काजल मेडम तक पहुचेंगे और उनके जरिये उस आदमी तक जो ये सब चन्दू और काजल से करवा रहा है,मेरा विस्वास करो की किसी को पता नही चलेगा की कोई चन्दू और आपके पीछे है ,आप जाइये चन्दू से मिलिए और वापस आ जाइये उसे भी हमारे बारे में कुछ बताने की जरूरत नही है ,"

उन्होंने हा में सर हिलाया ..

"ऐसे उससे मिलकर क्या कहूंगी "

"अरे कहना क्या है करना...जो BF और GF करते है "

मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह से झेंपी ..

"छि अपनी बहन से कैसी बात करता है.."

मैं जोरो से हंस पड़ा .

"वाह दीदी आप अपने भाई को ही अपना bf बना कर रखा है तो कुछ नही और हमे छि कह रही हो "

वो और भी शर्मा गई

"वो बस हो गया ,मैं क्या कर सकती थी ,दिल पर कोई कंट्रोल नही रहता ना,जैसे निशा ने किया ,और चन्दू तो हमारा सौतेला भाई है लेकिन निशा वो तो तुम्हारी सगी बहन है .."

"वो सब मैंने नही निशा ने शुरू किया .."

"तो क्या हुआ तुमने भी तो साथ दिया ना "

"तो आपके नजर में ये सब गलत है ..???"

वो सोच में पड़ गई ..

"पहले था लेकिन अब लगता है की कुछ भी गलत नही है ,जब मैं ही कर रही हु तो मैं इसे गलत कैसे कह सकती हु .."

उनकी बात सुनकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई

"लेकिन मैं और निशा शादी नही करने वाले ,मैं किसी और लड़की से प्यार करता हु..."

उन्होंने मुझे घूरा.

"जानती हु रश्मि ...अच्छी लड़की है लेकिन निशा को कौन समझाए उसके सर पर तो तुम्हारा ही भूत चढ़ा हुआ है,असल में तुम तो हमसे भी ज्यादा गलत हो तुम दोनो का तो सिर्फ और सिर्फ जिस्म का रिश्ता है.."

उन्होंने एक अजीब निगाहो से मुझे देखा

"ये पूरी तरह से सच नही है ,निशा के साथ सोते हुए भी वो मेरे लिए मेरी बहन ही रहती है ,और आज भी निशा मेरे लिए मेरी बहन ही है..."

उन्होंने अपना मुह बिगाड़ा

"ऐसा थोड़े ही होता है की तुम साथ में वो भी करो और भाई बहन भी रहो ..."

मेरे चहरे में मुसकान सी आ गई

"होता है दीदी ऐसा भी होता है कभी आप भी ट्राय ...करके देखिए आप को भी पता चल जाएगा "

मेरी बात सुनकर उनका मुह खुला का खुला ही रह गया वही मैं जोरो से हंस पड़ा.

"छि कितना गंदा हो गया है तू ,और ये सब निशा और तुझे ही मुबारक मेरे लिए मेरा चन्दू ही काफी है "

उन्होंने मुझे गुस्से से कहा और बाहर चली गई ...

उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा की मैंने ये आखिर क्या कह दिया था ,साला आजकल में सोच कहा से रहा हु,दिमाग से या लौड़े से .???

मैंने खुद से सवाल किया और जवाब मेरे लिंग ने एक झटका मार कर दिया .....

 

अध्याय 23

"भइया ये नेहा दीदी को आज क्या हो गया है ,अपने कमरे में बैठे हुए रो रही है.. .."

निशा ने मेरे रूम में आते हुए मुझसे कहा ..

"नेहा दीदी रो रही है .??"

"हा .."

"चलो मैं देखता हु तुम कमरे में ही रुकना मैं अभी आता हु .."

मैं नही चाहता था की निशा को कुछ भी पता चले .

मैं नेहा दीदी के कमरे में गया ..

"क्या हुआ आप रो क्यो रही हो ..चन्दू को कुछ .."

मैंने एक शंका जाहिर की ..

उन्होंने बिना कुछ कहे मुझे अपना मोबाइल थमा दिया ,लास्ट काल किसी अननोन नंबर से आया था ,उसकी काल रिकार्डिंग मौजूद थी ..

"प्लीज् हेडफोन लगा कर सुनना .."

उन्होंने सिसकते हुए कहा ..

मैंने हेडफोन लगा लिया और सुनने लगा ..

"हल्लो चन्दू .."

"हम्म क्या रे कुतिया बहुत मचल रही है मुझसे बात करने के लिए,इतने ईमेल भेजे है मुझे की मैं तुझे काल करू .."

मैं सुनकर बिल्कुल सी शॉक हो गया की ये चन्दू नेहा दीदी से किस तरह से बात कर रहा है ..

नेहा दीद :ये कैसे बात कर रहे हो तुम

चन्दू :.मादरचोद तू भी अपने बाप की ही औलाद निकली ना ,मुझे फसाना चाहती है .

नेहा दीद :ये क्या बोल रहे हो चन्दू ..

चन्दू :वो मादरचोद राज मुझसे मिलना चाहता है ताकि मुझे पकड़ सके .

नेहा दीद :ये तुम्हे किसने कहा

इस बार नेहा दीदी की आवाज थोड़ी लड़खड़ा रही थी ..

चन्दू :मैं सब जानता हु की साले ने कई गार्ड लगा के रखे है,मैं चूतिया नही हु ,सब पर नजर रख रहा है वो मादरचोद,और कुतिया तू मुझसे मिलना चाहती है ...

(चन्दू के इन बातो से नेहा दीदी भड़क गई थी )

नेहा दीद :चन्दू तमीज से बात कर ,मैं तुझसे प्यार करती हु तुझे धोखा नही दे सकती तू जानता है ना,फिर भी ..

चन्दू :.प्यार..(चन्दू जोरो से हंसा ) मादरचोद उसे चूत की खुजली कहते है ,तेरे जैसी प्यार करने वाली कई लड़कियों को चोद चुका हु मैं hahaha(चन्दू जोरो से हंसा लेकिन नेहा दीदी की हिम्मत जैसे टूट गई थी उनकी सिसकी की आवाज सुनाई दी )

नेहा दीद :चन्दू तुझे ये क्या हो गया है ,वो लोग तुझे बहका रहे है,तू तो मुझसे कितना प्यार करता था .(नेहा दीदी सिसक रही थी )

चन्दू :प्यार ..अरे मादरचोद मैं तो तुझे चोदना चाहता था,तेरी बहन और माँ को चोदना चाहता था जैसे तेरे बाप ने मेरी माँ के साथ किया ...तेरी प्रोपर्टी हड़पना चाहता था , लेकिन उस मादरचोद राज के कारण नही चोद पाया ,साले ने जंगल से आकर पूरा काम ही बिगाड़ दिया .लेकिन अब नही मुझे तेरी कोई भी जरूरत नही है ,अब मेरे पास इतना सब कुछ है की वो मादरचोद अब मुझसे बच नही सकता ...

(आखिरकार चन्दू ने सच उगल दिया था ,वो दारू के नशे में लग रहा था )

और साली मैं अब भी तुझे और तेरी बहनो और माँ को अपनी रंडी बना कर रखूंगा बस वक्त आने दे ,तेरा चोदू भाई मुझे कभी नही ढूंढ पायेगा,और मैं उसे मारकर पूरी प्रोपर्टी पर कब्जा करूँगा,फिर तुझे और तेरे घर की सभी औरतो को अपनी रांड बना कर रखूंगा जैसे तेरे बाप ने मेरी माँ के साथ किया ,पूरा बदला लूंगा मादरचोदों.

और सुन मैंने तुझसे कभी भी प्यार नही किया था ,बस तेरा इस्तमाल कर रहा था लेकिन अब मुझे तेरी कोई जरूरत नही है क्योकि अब मेरे वो सबकुछ है जिससे मैं अपने मकसद में कामियाब हो सकता हु ...

(चन्दू शैतानी हंसी में हंसा )

नेहा दीद :तूने अच्छा किया की मेरी आंखे खोल दी

(दीदी अब भी सिसक रही थी लेकिन उनकी आवाज में एक दृढ़ता थी ) मैंने तुझपर भरोसा किया मेरी माँ ने तुझपर भरोसा किया,ताकि मैं खुश रह सकू,तेरे कारण अपने भाई तक को वो प्यार नही दे पाई जो उसे मिलना चाहिए था,हे भगवान ये मुझसे क्या हुआ,लेकिन चन्दू तूने सही कहा की तेरी माँ मेरे बाप की रंडी है,और अब मेरे भाई की ,और तू...तू है ही रंडी की औलाद ...तूने अपनी औकात आखिर दिखा ही दी .

(दीदी की बात सुनकर चन्दू गुस्से में जोरो से गरजा )

चन्दू :.ये साली जुबान सम्हाल कर बात कर ..

(लेकिन इधर से दीदी की एक बेहद ही खतरनाक सी हंसी गूंजी ,जिसमे दर्द था लेकिन एक अजीब सी दृढ़ता और संकल्प भी था )

नेहा दीद :मादरचोद अब तू देखना की मेरा भाई तेरा क्या हाल करता है,वो बेचारा तो तुझे तेरा हक देने को भी तैयार था .उसे तेरे और मेरे प्यार से भी कोई एतराज नही था ,लेकिन तू सच में एक रंडी की औलाद है साले,तू पाप की पैदाइश है ,यही तेरी औकात है और वो अब तुझे तेरी औकात दिखायेगा तुझे कुत्ते की मौत मारेगा,और अगर गांड में दम है ना तो पूरी ताकत लगा ले अपनी हमारी प्रोपर्टी का झांट भर टुकड़ा भी तू नही ले सकता ये मेरा वचन है ....और हा मादरचोद अपना ईमेल रोज देखा करना ,अब से तेरी माँ को मैं असली रांड बना कर रहूंगी ,मेरा भाई ही नही इस घर का हर मर्द उसे चोदेगा,और अगर उससे भी उस रांड की खुजली नही मिटी ना तो मैं उसे टॉमी(मेरा डॉगी) से चुदवाऊंगी ,तू बस रोज बैठ कर उसे देखकर हिलाया करना ..

(दीदी की बातो से ऐसा लग रहा था जैसे कोई जख्मी शेरनी दहाड़ रही हो ,उसकी बात सुनकर तो मुझे भी पसीना आ गया था ना जाने चन्दू का क्या हाल रहा होगा)

चन्दू :मादरचोद अगर मेरी माँ को .

(वो इतना ही बोला था की दीदी फिर से बोल उठी )

नेहा दीद :साले चूहे की तरह बिल में छिपा हुआ है तू क्या उखाड़ लेगा मेरा दम है तो सामने आकर बात करना ...रंडी की औलाद ..

(और फोन दीदी के द्वारा काट दिया गया .)

मैं ये सब सुनकर बिल्कुल ही हस्तप्रद था,दीदी अब भी रो रही थी,उसका रोना भी लाजमी था,जिसको इतना प्यार किया,जिसे लेकर सपने सजाए ,जिसके लिए अपने परिवार से भी लड़ गई,मुझे धोखा दिया,हर हालत और हालात में जिसका साथ दिया उसने आज इसने बेकार तरीके से उन्हें धुत्कार दिया...दिल और सपनो का टूटना क्या होता है ये वो ही जानते है जो इसे जी चुके है ...

मैं दीदी के बाजू में जाकर बैठ गया था ,मैंने उनके कंधे पर अपना हाथ रखा और वो मुझसे लिपट कर रोने लगी .....

"चुप हो जाओ दीदी ,वो इतना काबिल नही की आप उसके लिए रोओ ."

मैं दीदी को दिलासा देने लगा ..

"मैं उसके लिए नही रो रही हु भाई,मुझे तो बस इस बात का दुख है की उसके लिए मैंने क्या नही किया ,लेकिन भाई तुझे मेरी कसम है .."

उन्होंने मेरा हाथ अपने सर में रख दिया ...

"तू उससे बदला लेगा,तू उसे कुत्ते की मौत मारेगा ."

दीदी की बात सुनकर मैं खुद भी सहम गया था ,मैं कोई कातिल नही हु ,लेकिन मैंने दीदी का हौसला रखने के लिए हा में सर हिला दिया ...और उनके आंसू पोछे ..

"अपने कोई भी गलती नही की है आप इस बात को सोचकर उदास मत हो...अपने जो किया वो अपने प्यार के लिए किया और प्यार एक नशा है,और नशे में आदमी को बिल्कुल भी समझ नही आता की वो क्या सही कर रहा है और क्या गलत..."

मेरी बात सुनकर उन्होंने हल्के से मेरे गालो को सहलाया.

"बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है तू ."

उनके चहरे में पहली बार मैंने एक मुस्कान देखी ..

"लेकिन अब तो चन्दू और भी सतर्क हो जाएगा ...अब तुम उसतक कैसे पहुच पाओगे ."

नेहा दीदी ने हल्के से कहा,वही चीज मेरे भी दिमाग को घेरे हुए था,चन्दू को पता चल गया था की मेरे आदमी नेहा दीदी के साथ साथ हमारे घर के सभी सदस्यों के ऊपर नजर रखे है ,मतलब साफ था की उसने सभी के ऊपर पहले से नजर बिठा कर रखी थी ,उसके पीछे जो भी था वो सच में बहुत ही तेज दिमाग का इंसान था ...

मैं सोच में ही पड़ा था की मेरे दिमाग में चन्दू को निकालने का एक आईडिया आ गया ...

अब जरूरत थी मेरे ध्यान में बैठने की ताकि मैं उस प्लान के हर पहलू को अच्छे से समझ सकू ...

मैं उठ कर जाने लगा ....लेकिन फिर रुका और दीदी को देखने लगा ..

"दीदी चन्दू से बदला तो हम लेंगे ही लेकिन प्लीज मेरे टॉमी को बक्स दो ,"

दीदी कुछ सेकंड के लिए सोच में पड़ गई ,लेकिन फिर उन्हें याद आया की उन्होंने चन्दू से क्या कहा था ...वो जोरो से हंस पड़ी और प्यार से मेरे गाल में एक चपत लगा दी .

"जरूरत पड़े तो टॉमी को भी काम में लगना पड़ेगा ...उस कमीने को तो मैं .."

उनके चहरे पर गुस्सा वापस आने वाला था उससे पहले ही मैंने उनके गालो में एक किस कर लिया ,वो हैरान होकर मुझे देखने लगी ...

"आप गुस्से में बहुत प्यारी लगती हो लेकिन गुस्सा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है इसलिए जो भी करना है सोच समझ कर और मस्कुराते हुए ..समझी..."

मेरी बात सुनकर वो फिर से मुस्कुरा उठी और उन्होंने हा में सर हिला दिया ....

 

अध्याय 24

मैं अपने कमरे में आकर ध्यान में बैठा हुआ था ,वही निशा अपने मोबाइल में गेम खेल रही थी ,उसे मैंने कह रखा था की जब तक मैं ध्यान में बैठा रहू मुझे डिस्टर्ब ना करे ...

मैं उठा तो मेरे पास एक प्लान था जिसपर मुझे काम करना था ,मैं इसी सोच में था की अभी तक मुझे ये आईडिया क्यो नही आया ...

मैं खुश था ..

"क्या हुआ खुश दिख रहे हो ,नेहा दीदी से क्या बात हुई वो क्यो रो रही थी कुछ बताया उन्होंने .."

निशा ने अपने उसी मासूमियत से कहा जो उसके चहरे में हर वक्त रहती थी ..

"हा ..उनका चन्दू से ब्रेकअप हो गया "

वो चौकी ..

"वाट.. क्यो..???"

"क्योकि वो मादरचोद था ...या ये कहु की है .."

निशा सोच में पड़ गई थी ,मैं निशा को इन सब पचड़ों से दूर रखना चाहता था ,हा ये हो सकता था की वो भी इस गेम में हो लेकिन उसे देखकर मुझे लगता तो नही था की उसे इन सब चीजो का कोई भी इल्म है ,वही अगर वो सच में किसी के साथ है तो इसका मतलब है की वो मेरे खिलाफ है तो भी मैं उसे ये सब नही बताना चाहता था ....अगर मैं इस बात को सोचता की वो कही मेरे खिलाफ तो नही तो मेरा सर दर्द देने लगता क्योकि मुझे अभी तक कोई भी ऐसी ठोस वजह नही मिली थी जिससे मैं उसपर शक कर सकू ,इसके विपरीत वो मुझे हमेशा से ही बहुत प्यारी और मासूम लगती थी ,इसलिए मैंने उसके बारे में सोचना बंद कर दिया था...लेकिन उससे इन सबके बारे में कोई भी बात नही करता था ..

"क्या हुआ ऐसे क्या सोच रही है ..??"

उसे गहरे सोच में देखकर मैंने पूछा..

"मुझे तो लगता था की चन्दू , निशा दीदी से बहुत प्यार करता है फिर आखिर क्या हो गया ."

उसकी बात सुनकर मैंने एक गहरी सांस ली ..

"जो भी हुआ अच्छा ही हुआ ,कम से कम दीदी को उसकी असलियत का पता तो चल गया ,तू टेंशन मत ले अब वो ठीक है ,तू इधर आ .."

मैंने उसे अपने पास खीच लिया,और उसके होठो में एक किस ले लिया ..

जब से मैंने उसके बारे में सोचना छोड़ने का फैसला किया मुझे उसपर बहुत ही प्यार आने लगा,कारण था की अगर वो लड़की सही है तो सच में वो मुझसे बेइंतहा प्यार करती है...और उसकी मासूम बाते कोई भी उसके प्यार में पड़ जाए ..

मेरे किस करने से वो थोड़ी कसमसाई फिर मुझे जोरो से जकड़ लिया और खुद भी मेरा साथ टूटकर देने लगी .

जब हम अलग हुए तो उसकी सांसे तेज थी ...

"आज फिर से मूड कर रहा है क्या ..??"

उसने भेदती हुई निगहो से मुझे देखा,मुझे अपनी गलती का अहसास हो चुका था,जब से हमारे बीच सेक्स हुआ था मैं अपनी ही जिंदगी में इतना बिजी और टेंशन में था की मैंने उससे प्यार से बात भी नही की थी,और आज जब सीधे उसे किस किया तो उसने ये ही सोचा की मुझे फिर से सेक्स चाहिए इसलिए मैं उससे प्यार दिखा रहा हु ...

"नही बेटू मुझे कुछ नही चाहिए बस तेरे ऊपर बहुत प्यार आ रहा है "

मैंने उसके गालो को अपनी उंगली से सहलाया .

"सच में "उसने अपनी पलके थोड़ी जोरो से झपकाई जो मुझे बहुत ही प्यारी लगी ,मैंने उसके आंखों को चुम लिया ..

"हा सच में "

उसने अंगड़ाई लेते हुए अपनी बांहो को फैला दिया .

"तो आओ ना .."

मैं भी उससे लिपट चुका था ...

कितनी कोमल थी निशा बिल्कुल रेशम सी,

वो मेरे गोद में ही सर रखे कब सो गई हमे पता ही नही चला ,थोड़ी देर में मेरी नींद खुल गई ,मैंने समय देखा तो रात के 2 बज रहे थे,अचानक ना जाने मुझे क्या हुआ मैं निशा को एक ओर कर कमरे से बाहर निकला और घर में घूमने लगा,थोड़ी देर तक मैं यू ही घूमता रहा और कान्ता काकी के कमरे के पास चला गया ..

चारो तरफ अंधेरे का ही साम्राज्य फैला हुआ था..

सन्नाटा और अंधेरा ..

कान्ता के कमरे में कोई भी नही था ,मैंने शबीना के कमरे में झांका ,वंहा मुझे पंखा चलने की आवाज सुनाई दी..मैंने खिड़की को हल्के से धकेला तो सारा नजारा मेरे सामने था जिसे देखकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,मैंने अपना मोबाइल निकाला और दो तीन फोटो फूल फ़्लेश के साथ खीच लिए ताकि फ़ोटो क्लियर आये .

मेरे सामने बिस्तर पर कान्ता ,शबीना और अब्दुल नंगे सोये थे,यानी नेहा दीदी ने चन्दू से सही ही कहा था की वो एक रंडी की औलाद है ...

मैं मस्कुराते हुए माँ पिता जी के कमरे की तरफ से गुजर रहा था,सारे घर में सन्नाटा था लेकिन एक कमरे की रोशनी अभी भी जल रही थी ,मुझे कुछ आवाजे भी आई ..

वो सना का कमरा था .

सना अब्दुल और शबीना की बेटी थी ,मैंने ध्यान से सुना तो पता चला की वो पढ़ाई कर रही है,मैंने उसके दरवाजे को हल्के से खटखटाया ,

"कौन है ..??"

उसके आवाज के आश्चर्य को मैं समझ सकता था ..

"मैं हु सना "

थोड़ी देर में दरवाजा खुला ..

"भइया आप यंहा .."

वो दरवाजे में ही खड़ी थी ,पहले भी हम बाते किया करते थे लेकिन बहुत ही कम ,अक्सर उसे जब कोई पढ़ाई में मदद नही करता तो वो मेरे पास आती थी ,अभी तक उसका मेरे प्रति व्यवहार अच्छा ही रहा ,ना ज्यादा ना कम एक सामान्य सा व्यवहार रहा था सना का ...

वो पढ़ाकू टाइप की लड़की थी और बहुत ही सीधी साधी भी ,पता नही अब्दुल और शबीना जैसे कमीनो के घर ये कैसे पैदा हो गई थी ..

"हा नींद नही आ रही थी तो घूम रहा था ,क्या पढ़ रही हो ??"

"वो केमेस्ट्री .."

"हम्म्म्म बाहर से ही बात करोगी क्या "

मेरे कहने पर वो थोड़ी हड़बड़ाई क्योकि आज से पहले मैं कभी उसके कमरे में नही गया था ,और वो बाहर दरवाजे पर ही खड़ी थी ,तो तुरंत हटकर मुझे अंदर आने के लिए रास्ता देती है ...

मैं अंदर जाकर एक कुर्सी में बैठ गया ...

उसके टेबल में किताबे बिखरी पड़ी थी ...

"ओहो लगता है मेडम डॉ बन कर ही दम लेगी "

मेरी बात से वो थोड़ा शर्मा गई ..

"नही भइया वो एग्जाम है ना तो .."

"ह्म्म्म अब तो तुझे ये भी नही बोल सकता की कोई डाउट हो तो पूछ लेना ,अब तो तू साइंस वाली हो गई है और हम कामर्स वाले "

वो मुझसे एक क्लास ही पीछे थी,जब सब्जेक्ट कॉमन था तो मैं उसे थोड़ा पढा दिया करता था लेकिन अब मुझे केमेस्ट्री क्या घण्टा आता था ..

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराई ..

"आप पानी पियोगे "

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा ..

"तू तो ऐसे विहेब कर रही है जैसे मैं कहि बाहर से आया हु मैं भी इसी घर में रहता हु "

वो फिर से शरमाई ..

"सॉरी .."

"कोई बात नही लगता है की मैंने तुझे पढाई में डिस्टर्ब कर दिया ,चल तू पढ़ मैं चलता हु ,लेकिन रात को ज्यादा देर तक जगाने से अच्छा है की तू सुबह उठकर पढ़ लिया कर "

वो थोड़ी देर चुप रही फिर बोल पड़ी ..

"भइया वो सुबह नींद नही खुलता .."

"मैं उठा दूंगा ,मैं 3-4 बजे तक उठ जाता हु "

उसका मुह खुल गया ..

"इतने सुबह उठकर आप करते क्या हो .."

उसकी बात सुनकर मैं हंस पड़ा ..

"पूरा घर एक तरफ और तू एक तरफ सभी को पता है की जब से मैं जंगल से आया हु तब से मैं सुबह उठाकर स्टेडियम जाता हु ,मैंने पूरी मार्शल आर्ट सिख ली आउट तुझे पता भी नही है .."

"ओह सॉरी भइया अक्चुली में मैं थोड़ा देर से उठती हु फिर तुरंत ही स्कूल का समय हो जाता है "

"कोई बात नही ऐसे भी डॉ बनना है तो दुनिया दारी से दूर ही रहना चाहिए ,,,,,,"

"हा भइया ऐसे कंपीटिशन भी बहुत टफ हो गया है और आप तो जानते हो की मुझे बस एक ही चीज चाहिए वो है MBBS की सीट ."

"हा जानता हु तू बचपन से ही तो इसी सपने के साथ जी रही है .."

मैं थोड़ी देर चुप रहा फिर अचानक ही बोल पड़ा...

"अगर तेरा सलेक्शन ना हुआ तो "

वो अचानक से बहुत ही डर सी गई ,जैसे उसने इसके बारे में कभी सोचा ही नही..

"मुझे नही पता क्योकि मैंने तो इसके बारे में कभी सोचा ही नही .."

वो घबरा सी गई थी ..

"ह्म्म्म तू अपनी मेहनत कर और तुझे डॉ बनाने की जिम्मेदारी मेरी "

वो थोड़ा चौकी .

"कैसे ??"

"सिंपल है अगर तू इंट्रेंस नही निकाल पाई तो मैनेजमेंट कोटे से तेरा एडमिशन करवा देंगे "

उसके तो जैसे चहरे का रंग ही उड़ गया ..

"ये आप क्या कह रहे हो हमारे पास इतने पैसे कहा है ,उसमे तो बहुत ही पैसे लगते है ."

उसकी आवाज भी धीमी हो गई थी ..

"तो क्या हुआ,मैं तो हु ,"

"नही भइया आप लोगो ने ऐसे भी हमारे ऊपर बहुत अहसान किये है मैं किसी भी हालत में इंट्रेंस निकालूंगी ."

"अहसान .?? वाह बहुत ही बड़ी बड़ी बाते करना सिख गई है तू तो ..चल अभी तो पढाई कर जब की तब देखेंगे ,मुझे यकीन है की तू निकाल लेगी ,लेकिन अगर नही निकाल पाई तो भी मेरा वादा है की तू डॉ जरूर बनेगी ."

मैं मुस्कुराता हुआ वंहा से चला गया वही वो बस मुझे देखती ही रह गई,मैंने कभी उससे ऐसी बाते नही की थी यंहा तक की कभी उससे इतने कॉन्फिडेंट से बात भी नही की थी ...

***********

मेरे घर एक पहले माले के कोने में निकिता दीदी का भी कमरा था ,आज सना से बात करने के बाद मुझे ना जाने क्यो लगा की क्यो ना निकिता दीदी से भी बात की जाए ,समय कोई 3 के करीब हुआ था ,मुझे पता था की वो भी गहरी नींद में सो रही होगी ,मैं उनके कमरे के पास पहुचा तो वो बंद था लाइट भी बंद थी लेकिन उसमे एक चीज अलग थी की वंहा से मुझे सिगरेट की बदबू आ रही थी ,मेरा शैतानी दिमाग दौड़ाने लगा और मैंने अपने जेब से एक छोटी सी तार निकाली और चाबी की जगह घुसेड़ कर दरवाजा खोल दिया ,ये कला मैंने यूट्यूब से सीखी थी मुझे नही पता था की ये कितना काम करेगा लेकिन इसने किया ,दरवाजा खोलते ही बस धुंआ ही धुंआ था,मुझे खांसी ही आ जाती लेकिन मैंने जल्दी से अपने मुह को रुमाल से दबा दिया ..

तो क्या निकिता दीदी इतना ज्यादा सिगरेट पीती है ,है भगवान ,मैंने थोड़ा और गौर से निरक्षण किया तो पाया की ना सिर्फ सिगरेट था बल्कि शराब के जाम भी लिए गए थे,मेरा कमरा उनसे थोड़ी ही दूर पर था लेकिन आजतक मुझे इसका पता नही चला की वो कमरे के अंदर ये सब करती है ,असल में बड़े घर की यही प्रॉब्लम है की ये लोगो को जुदा ही कर देता है ,और निकिता दीदी के कमरे में कोई जाता भी नही था ना ही उन्हें पसंद था की कोई उन्हें डिस्टर्ब करे ..

दीदी मुह फाड़े औंधे मुह बिस्तर में पड़ी हुई सो रही थी ,कोई चिवास का बोतल था जो की 2-3 पैक के करीब अब भी बचा हुआ था ,मैंने भी सोचा क्यो ना मैं भी ट्राय करके देख लू ,मैंने सीधे बोतल उठाई और मुह से लगा कर एक ही सांस में उसे गटक लिया ....

सर थोड़ा घुमा लेकिन वो सुरूर मुझे बहुत ही सुकून देने लगा था ,मैंने पास ही पड़े सिगरेट के डिब्बे से एक सिगरेट निकाल कर सुलगाई ,एक गहरा कस लिया और जोरो से खासा फिर दूसरे कस के साथ धुंआ बिल्कुल ही आराम से अंदर जाने लगा था ,दो तीन गहरे कस लगा कर मैने धुंआ ऊपर की ओर छोड़ दिया...

मेरे सामने एक आदमकद दर्पण था मैं उसमे अपनी ही छिबी देखकर हंस रहा था ,मुझे बड़ा ही अजीब सा फील हो रहा था अभी तक ये सब मैंने फिल्मो में ही देखा था ,,मैं दीदी के कमरे को घूम रहा था ,हर चीज अस्त व्यस्त फैली हुई थी ,लग ही नही रहा था जैसे किसी लड़की का कमरा हो ऐसे लग रहा था जैसे किसी बैचलर लड़के का रूम हो ..

मैं सिगरेट पीते हुए दीदी के बिस्तर पर ही लेट गया,वो एक तरफ पड़ी हुई थी ,हा वो पड़ी हुई थी उसे सोना नही कहते शायद नशा जायद होने के बाद वो मोबाइल पकड़कर बिस्तर में गिरी होगी और उसे खुद याद नही रहा होगा की कब उसकी नींद लग गई..

दीदी का कमरा बड़ा ही शानदार था शायद सभी बच्चों में सबसे बड़ा कमरा भी इन्ही को दिया गया था ,एक तरफ की दीवार के जगह मोटा कांच लगाया गया था ताकि वंहा से बाहर का नजारा साफ साफ दिखे ,ऐसे बाहर देखने के लिए कुछ था नही हमारे गर्दन के अलावा ,तो अक्सर वो अपना पर्दा लगा कर रखती है आज भी उन्होंने पर्दा लगाया हुआ था ,मैंने उसे हल्के से खोल दिया ,बिस्तर में लेट कर मैं अपने गार्डन और बाहर के रोड को देख सकता था .

देखते देखते अचानक मैं कांच के और भी पास गया ,कमरे में अंधेरा था तो शायद बाहर से अंदर नही देखा जा सकता होगा,लेकिन मुझे साफ साफ बाहर की चीजे दिख रही थी ,मैने ध्यान से देखा ,सामने की बिल्डिंग में मुझे कुछ दिखाई दिया,मेरे आंखों ने जैसे किसी जादू की तरह उन्हें पहचान लिया था,बिल्डिंग असल में बहुत ही दूर था ,और बहुत ही ऊंचा भी ,रात के अंधेरे में में कुछ कमरों की लाइट जल रही थी उनमे एक कमरा वो भी था जंहा मेरा ध्यान गया था ,मैंने ध्यान से देखा तो समझ आया की कोई आदमी बार बार खिड़की के पास आता है,थोड़ा झुकता है फिर चला जाता है ...वो झुककर क्या कर रहा था वो मुझे समझ नही आया ,मैं और कंसंट्रेट हो सकता था लेकिन जब मेरे पास खुद का दूरबीन था तो मैं क्यो मेहनत करता ,मैं चुप चाप कमरे से बाहर जाकर अपने कमरे में गया थोडा नशा था लेकिन वो सुमार रहा नशा नही ...

अपने कमरे से मैंने अपनी दूरबीन निकाली और साथ ही एक दो लेंस भी ताकि थोड़ी दूरी एडजेस्ट की जा सके ,और छत जाने की बजाय मैं दीदी के कमरे में ही चला गया,वही से देखने लगा ,देखा तो समझ आया की कोई साला महंगा टेलिस्कोप लगा कर रखा है,थोड़े देर में आकर चेक करता है और फिर चला जाता है ,या वही बैठकर बियर पी रहा होता है ,तो क्या ये मेरे घर की निगरानी के लिए किया गया है ..?? हो सकता है ...??या नही भी ??

 

अध्याय 25

मुझे घर से ऐसे निकलना था जैसे किसी को पता भी ना चले ,लेकिन ना जाने कितने जगहों से मेरी पहरेदारी की जा रही थी ,मैंने तुरंत ही अपने सीक्रेट सर्विस वाले को फोन किया और उसे उस आदमी के बारे में बताया जो की टेलिस्कोप लगा कर बैठा था,उसने कहा की वो उसे सम्हाल लेगा लेकिन मैं खुद वंहा जाना चाहता था ,उसका एक कारण ये था की वो आदमी ज्यादा उम्र का नही था ,ऐसा लग रहा था जैसे कोई कालेज गोइंग लड़का होगा,तो मेरे दिमाग में कई तरह के शक पैदा हो गए थे,मैं खुद ही उसे चेक करना चाहता था इसलिए मैंने अपने सर्विस वाले से कहा की मुझे बिना किसी के नजर में आये घर से निकलना है ,उसके लोगो ने कई ऐसे लोगो को स्पॉट किया था जो की मेरे और मेरे घर वालो पर नजर रखते रहे थे,तो उसने ही प्लान बनाया और मुझे कवर करते हुए समय दिया की मैं घर के पीछे की गेट से निकल जाऊ वंहा घर के मोड़ में मुझे एक कार मुहैया करवा दी जाएगी जिससे मैं जन्हा चाहू जा सकता हु .

सुबह के कुछ 6 बजे होंगे ,मैं पीछे की गेट से निकला थोड़ी दूर जाने पर मुझे के एक काले रंग की कार दिखाई दी मैं उसके पीछे की सीट में जाकर बैठ गया ....

मैं उस बिल्डिंग में पहुचा जन्हा वो टेलिस्कोप वाला था,मैंने उसके कमरे के माले को पहले ही गिन लिया था तो मुझे उसे ढूंढने में कोई खास दिक्कत नही हुई ,मैं वंहा अकेले ही गया था ..

थोड़ी देर दरवाजा बजाने के बाद एक लड़के ने दरवाजा खोला ,ये वही लड़का था जिसे मैंने दूरबीन से देखा था ,वंहा से साफ तो नही देख पाया था लेकिन यंहा उसे देखकर मैं मुस्कुरा उठा था ,वो एक मोटा सा लड़का था ,गाल भी फुले हुए थे,आंखों में चश्मा था,उम्र कोई 24-25 की रही होगी,बिल्कुल ही थुलथुला,आंखों से ही लग रहा था की रात भर से सोया नही होगा ..

उसने पूरा दरवाजा नही खोला बल्कि आधा ही खोला था ,

"यस .."

मुझे देखकर उसने कहा,उसका चहरा ही बता रहा था की मेरा आना उसे पसंद नही आया .

मैंने सीधे अपने जेब में रखा पिस्तौल निकाला और उसके पेट में टिका दिया ...पिस्तौल नकली थी लेकिन उसके लिए तो असली ही थी ,उसके चहरे का रंग ही उड़ गया था ...

"कुछ मत बोलना बस दरवाजा खोल मुझे अंदर आने दे ,नही तो यही पर तेरे पेट में कई छेद कर दूंगा "

उसने डर के कांपते हुए दरवाजा खोल दिया ..

मैं अंदर आ चुका था और अंदर से दरवाजा लगा चुका था .

"कौन हो तुम क्या चाहिए ."

उसने डरते हुए कहा ..

"इतनी जल्दी क्या है मोटे.."

मैं इधर उधर देखने लगा मैंने अनुमान लगाया की टेलिस्कोप किस कमरे में होगा ,मैं वंहा पहुचा तो वो उसका बेडरूम था ,जन्हा बड़े से ग्लास के सामने एक बड़ा सा टेलिस्कोप फिट किया गया था ,,उसका फ्लेट 20 वे माले पर था तो शहर यंहा से बड़ी ही अच्छी तरह से दिखता था ,सामने कई बड़े बड़े बिल्डिंग्स थे वही दूर मेरा बंगला भी साफ साफ दिख रहा था..

मैंने देखा की उसने टेलिस्कोप को एक आईपैड से कनेक्ट किया है,मैंने ध्यान से देखा तो पता चला की टेलिस्कोप में जो कुछ भी दिख रहा था वो उस आईपैड में दिख रहा था ..

"क्या चाहिए तुम्हे कौन हो तुम "

वो अब भी बहुत ही डरा हुआ था .

"ये सब तू क्या कर रहा है ."

मैंने टेलिस्कोप की तरफ देखते हुए कहा ..

"वो ..वो मेरे काम का हिस्सा है .."

"काम..? कौन सा काम करता है बे तू मोटे .."

"मैं एक फोटोग्राफर हु ."

उसने डरते हुए कहा ...

"अच्छा ..तो यंहा से किसकी फ़ोटो लेता है .."

वो चुप ही था और मैं उसके बेडरूम को ध्यान से देखने लगा ,वो किसी टिपिकल बैचलर लौण्डे का बेडरूम था पास ही बियर की बोतले पड़ी थी ,सिगरेट का धुंआ पूरे कमरे में फैला हुआ था,एक तरफ बड़ा सा बिस्तर था जिसमे अभी एक लेपटॉप खुला हुआ था,पास ही चिप्स के खाली पैकेट पड़े थे ,और कुछ टिसू पेपर भी ,जिन्हें ध्यान से देखने पर समझ आ रहा था की साले में मुठ्ठ मारकर टिशु पेपर में पोछा है .

मैंने जाकर लेपटॉप को चेक किया ,उसमें अभी चुदाई का वीडियो ही चल रहा था,साफ पता चल रहा था की वो वीडियो होममेड है और कपल को पता ही नही की उनकी वीडियो बनाई जा रही है,इसे दूर से लिया गया था,मैं समझ गया की कैसे ,शायद किसी बिल्डिंग में ये लोग अपने कमरे की लाइट जला कर सेक्स कर रहे थे और इस महानुभाव ने अपने टेलिस्कोप से ये वीडियो बनाया था .

"तो ये काम करता है तू .."

मेरी बात से वो सकपकाया .

मैंने उसका लेपटॉप ढूंढना शुरू किया तो पता चला की ये कोई जासूस नही बल्कि महा ठरकी है ,ना जाने कहा कहा से, किस किस बिल्डिंग की कौन कौन सी लड़कियों और औरतो की वीडियोस और फोटोज उसके पास थी ..

"क्यो बे मादरचोद इसे बेचता है क्या तू .."

मैंने गुस्से में कहा ..

"नही भाई नही बस ये तो मेरे मजे के लिए ही ."

"अच्छा बता वो सामने वाले बंगले से किसकी फोटो निकाला है अभी तक .."

मैंने हमारे घर नही बल्कि बाजू वाले घर की ओर इशारा किया ..

"वंहा से ???,वंहा उसके सर्वेंट क्वाटर में दो लोग की वीडियो है मेरे पास ,आप बोलो तो मैं डिलीट कर दूंगा सभी कुछ .."

"अच्छा और उसके बाजू वाले बंगले से.."

मैंने अब अपने बंगले की ओर इशारा किया ..

"वंहा की भी कुछ है "

"ह्म्म्म .."

मैंने देखा की पास ही एक 5TB का एक्सटर्नल हार्ड डिस्क पड़ा हुआ था मैंने उसे लेपटॉप से कनेक्ट किया और उसका पूरा लेपटॉप ही खाली कर दिया ,

"ये मैं अपने साथ ले जा रहा हु ,और अगर तुझे जिंदा रहना है तो मेरे बारे में किसी से कुछ भी नही कहना,और जैसा मैं कहु मेरा काम तुझे करना है..."

तो थोड़ा और भी डर गया ..

"क्या काम .???"

मैंने उसका आईपैड उठा लिया ..

"ये काम कैसे करता है,"

उसने मुझे बताया की टेलिस्कोप की सेटिंग से लेकर सबकुछ उस आईपैड से ही कंट्रोल हो जाता है...

"ओह ये तो चीज बढ़िया है,बहुत महंगा होगा ना "

"जी ."

"और क्या इसे कहि दूसरे जगह से भी कंट्रोल कर सकते है "

उसने मुझे घूरा .

"हा कर सकते है "

"ओके तो मुझे तेरे टेलिस्कोप का पूरा एक्ससेस चाहिए ,और फिक्र मत कर मैं तुझसे कोई गैरकानूनी काम नही करवाऊंगा ,तू वही कर जो करता है अपनी ठरक मिटा ,फ़ोटो और वीडियो बना लेकिन मुझे तेरे टेलिस्कोप की पूरी एक्सेस दे मैं तुझे इसके लिए पैसे भी दूंगा ,और दूसरी चीज की मेरे लिए भी ये सेटअप खरीदना है तुझे ...अब बोल करेगा की मरेगा .."

उसके लिए चॉइस ही क्या थी उसने बस अपना सर हिलाया ..

"गुड ऐसे नाम क्या है तेरा "

"रोहित .."

"ओके रोहित नाइस तू मिट यू .."

मैं वंहा से एक्सेस लेकर निकल गया साथ ही मैंने रोहित का नंबर भी ले लिया था ..

मैंने रोहित को ये भी बोल दिया था की मैं उसके पीछे एक आदमी लगा कर रखूंगा अगर उसने मेरी बात नही मानी या किसी को मेरे बारे में बताने की कोशिस की तो तुरंत ही उसे उड़ा दिया जाएगा ..

*********

मेरे लिए रोहीत काम का आदमी था वो एक कम्प्यूटर इंजीनियर था जो की घर से ही प्रोगरामिंग करता था और साथ ही अपने शौक के तौर पर छिपकर फोटोज लिया करता था ,उसके पास गजब का कलेक्शन था,शायद ही कोई घर ऐसा हो जन्हा उसकी पहुच ना हो और उसने वंहा नही झांका हो ,वो अपने काम में एक्सपर्ट था ,

मेरे पास उसकी सभी फोटोज और वीडियोस देखने का समय नही था ,मुझे और भी काम करने थे ..

**********

मैं वंहा से निकल कर फिर से उसी तरीके से अपने घर पहुचा जैसे मैं घर से निकला था ,और फिर तैयार होकर फिर से मेन गेट से निकला लेकिन इस बार मेरी मंजिल कही अलग थी ...

मैं निकला और सीधे रश्मि के घर पहुच गया ,मैं भैरव सिंह के सामने बैठा हुआ था ..

"अंकल मेरे दादा और नाना ने हमारे नाम से एक वसीयत की थी ,मुझे तो वसीयत क्लेम करना है ,लेकिन दिक्कत ये है की उसकी ओरोजनल काफी मेरे पास नही है बल्कि एक फोटो कॉपी जरूर है ."

ओरिजनल कॉपी मैंने काजल मेडम को दे दी थी जिसे उन्होंने सुरक्षित रखने के बहाने से लिया था ,अब जबकि चन्दू से मेरा कोई राब्ता नही था और उसके इरादे भी क्लियर हो चुके थे तो मुझे उसे बाहर निकालने का यही रास्ता सुझा .

"ह्म्म्म हो जाएगा मैं अपने वकील से बात करके देखता हु ,रुको "

उन्होंने अपने वकील को फोन लगाया और थोड़ी देर बाद वकील वंहा हाजिर हो गया ...

"ह्म्म्म हो जाएगा ,लेकिन प्रोसेस में थोड़ा समय लगेगा और जब वसीयत क्लेम करोगे तो कुछ 15 दिन का समय और चाहिए होता है (मुझे नही पता कितने दिन का समय चाहिए होता है विज्ञापन देने के बाद उस पर स्टे लेने के लिए मैं 15 दिन मान कर चल रहा हु )

तो ऐसे लगभग 1 महीने तो लग जाएंगे प्रोपर्टी तुम्हारे नाम होने में "

मैंने हा में सर हिला दिया था,मुझे पता था की मेरे पीछे चन्दू के लोग पड़े हुए है और वो वकील को भी आते हुए जरूर देखेंगे तो उसे ये पता तो चल ही जाएगा की मैं वसीयत क्लेम कर रहा हु ,मुझे उम्मीद थी की इससे चन्दू बाहर आ जाएगा या वो नही भी आ पाए तो कम से कम मेरे ऊपर होने वाले हमले बढ़ जायेगे और कोई तो सुराग मिल ही जाएगा ...

दूसरे दिन से हमारे एग्जाम शुरू थे ,तो मुझे अब घर में रहकर पढ़ना था ,और थोड़ा सिक्योरटी को और भी टाइट करना था ,क्योकि हमले शायद एग्जाम दिलाने जाते समय ही होने वाले थे ....

 

अध्याय 26

निशा आज मेरे ही कमरे में आकर पढ़ रही थी ,वो बेहद ही बेचैन हो रही थी जैसे वो हर एग्जाम के पहले होती थी.

"आपकी तैयारी हो गई ???"

मुझे लेपटॉप पकड़े देखकर उसने कहा .

"हा पहले ही सब कम्पलीट कर लिया है.."

जब साला 12 हजार करोड़ की प्रोपर्टी मिलने वाली हो तो पढाई कौन करेगा ...लेकिन ये भी सही था की मैं पढाई में बहुत ही अच्छा था ,और सभी सब्जेक्ट को मैंने पहले ही तैयार कर लिया था,मुझे जाकर बस एग्जाम में बैठना भर था ,और अपने पास तो जादुई लकड़ी भी थी जिसे चाट कर तो मैं एक ही दिन में सीए का एग्जाम भी निकाल देता ..

"आपका ही बढ़िया है इसी लिए हर साल टॉप करते हो ..कुछ ट्रिक तो बताओ "

उसे देखकर मुझे हंसी आ गई ,एक वो एक शार्ट और एक टीशर्ट में थी ,बाल को बांध रखा था और आंखों में चश्मा लगा रखा था,उसके गुलाबी होठ और भी ज्यादा गुलाबी दिख रहे थे ,चहरे का रंग चिंता के कारण लाल हो गया था ,और फुले हुए उसके गालो को देखकर कोई सेब भी शर्मा जाए ..

"एक ट्रिक है मेरे पास .."

"क्या क्या ??"

वो मेरे पास आकर बैठ गई ..

"चल प्यार करते है और सो जाते है ,दिन में मस्त होकर उठेंगे "

उसने अपने होठो को दांतो से दबाया और मेरे कंधे में एक मुक्का मार दिया ....

"आप भी ना ,जब टाइम रहता है तो कुछ नही करते और आज आपको मस्ती सूझी है ..भाग जाओ यंहा से "

वो फिर से मेरे स्टडी टेबल में बैठकर पढ़ने लगी ,और मैंने रोहित के पास से लाई हार्डडिस्क को लेपटॉप से कनेक्ट किया ....

उसमे बहुत सारे फोटोज और वीडियोस थे जिसे उसने अलग लग फोल्डर बना कर रखा था सभी फ़ोल्डर्स का नाम उसने मकान के नाम से दिया था ,जैसे बगला नंबर 123 आदि आदि ,और बिल्डिंग्स के अलग फ़ोल्डर्स थे जिसमे पहले बिल्डिंग का नाम था ,फिर उसके अंदर फ्लेट का नाम ...साला सच में बहुत ही हरामी आदमी था ,मैंने चेक करना शुरू किया,मैं आधे घण्टे के बाद मुझे हमारे बंगले का फोल्डर मिल गया जिसे मैंने अपने लेपि में कॉपी कर लिया .

मुझे देखकर समझ आया की निकिता दीदी की हालत क्या है ,वो कभी सिर्फ टीशर्ट पहने ही खिड़की में खड़ी हुई सिगरेट पीती दिख जाती तो कभी शराब हाथ में लिए मुझे निकिता दीदी का कोई ऐसा फ़ोटो या वीडियो नही मिला जिसे आपत्तिजनक कहा जा सके ..

लेकिन उसमे सिर्फ दीदी के फोटज नही थे,बंगले में रहने वाले कई लोगो के फोटोज थे जैसे हमारे नॉकर जो की गार्डन में किसी के साथ कुछ कर रहे हो ,या मेरा बाप अपने रंडियों के साथ कहि खुले में कुछ कर रहा हो ,सब कुछ कैद था उसमे कुछ फ़ोटोस चन्दू और नेहा दीदी के भी थे जिसमे वो एक दूसरे को किस कर रहे थे.

फिर मुझे वो मिला जिसे देखकर मेरी सांसे ही रुक गई ..

वो मेरे माँ की फोटोज थी,नहाने के बाद जब वो अपने बालकनी में आया करती थी,या खुले हुए खिड़की से अंदर झांकती वो फोटोज जिसमे उनके जिस्म में कोई भी कपड़े नही होते थे,या पिता जी के साथ जब वो पूरे नंगे जिस्म एक दूसरे से मिले होते थे..

उसे देखकर मेर अंदर एक अजीब सी संवेदना उठी और मैंने तुरंत ही उन फोटज को क्लोज कर दिया ,मेरे आंखों के सामने उनकी देह की तस्वीर घूम सी गई ....

मैंने अपने सर को झटका और अपना नया लाया हुआ आईपैड उठा लिया ,मैंने पासवर्ड के द्वारा रोहित के आईपैड का एक्सेस प्राप्त किया और उस टेलीस्कोप को अपने घर की ओर घुमाया .

उसमे मेरा घर साफ साफ दिख रहा था,माँ पिता जी का कमरा नीचे था, इसलिए उतना क्लियर अंदर तक घुस पाना मुश्किल हि था,लेकिन फिर भी अगर वो खिड़की के पास होते तो उन्हें आराम से देखा जा सकता था,वंहा से उनकी फोटो भी ली जा सकती थी और जरूरत पड़े तो वीडियो भी बनाई जा सकती थी ....

मैं अपने घर में कैमरे को घुमाने लगा तभी मुझे कुछ याद आया और मैंने उसे बंद कर वंहा से उठकर नेहा दीदी के पास चला गया ..

"अरे राज कल से तो तेरे एग्जाम शुरू होने वाले है ना तू यंहा क्या कर रहा है .."

मैंने अपने मोबाइल से कान्ता,शबीना और अब्दुल वाली फोटो निकाल कर उन्हें दिखाई ....

"तुमने सही कहा था वो रंडी की ही औलाद है ,इसे मैं आपको भेज रहा हु आप इसे चन्दू को ईमेल कर देना "

मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई थी ..

*************

दूसरे दिन हमारा एग्जाम था मुझे पूरी सिक्युरिटी के साथ ले जाया गया था,मैं और निशा साथ ही गए,मेरे गार्ड ,रश्मि के गार्ड साला ऐसा लग रहा था जैसे की हम कोई VVIP है..

अभी प्रोपर्टी के काम में पूरा महीना लगना था और मैं चन्दू के एक्शन का इंतजार कर रहा था..

मेरा अधिकतर समय आगे की प्लानिंग करने में निकलता था ..

एक दिन डॉ चूतिया का फोन आया ...

"हैलो राज .."

"जी सर "

"हमने काजल के परिवार के बारे में पता किया उसके पति और बच्चे को हमने अपने निगरानी में रख लिया है ,लेकिन अभी भी काजल से कोई कांटेक्ट नही हो पा रहा है,उसके पति ने बताया की वो कुछ दिन से बहुत ही अपसेट थी ,इन लोगो को किडनेप तो नही किया गया था लेकिन ये नजरबंद जरूर थे..

दिक्कत ये है की अब जल्द से जल्द काजल को ढूंढना होगा क्योकि जब उन्हें पता चलेगा की हमने उनके लोगो को ठिकाने लगा दिया है और उसके पति और बच्चे को अपनी निगरानी में ले लिया है तो वो काजल को नुकसान पहुचा सकते है "

"ओह तो क्या काजल मेडम ने उनसे कांटेक्ट करने की कोशिस नही की ..??????."

"नही ये लोग भी उससे कांटेक्ट नही कर पा रहे है ,समझ नही आ रहा है उसे कैसे ढूढे ....."

मैं भी सोच में पड़ गया था काजल का मिलना मेरे लिए एक बड़ी मुसीबत से छुटकारा था ..

मैं फिर से सोच में पड़ गया ,जैसा की बाबा जी ने मुझे बताया था की मेरे पास सबसे बड़ी शक्ति मेरे मन की शक्ति है ,लेकिन मुझे उसका उपयोग करना नही आता,मैं फिर से ध्यान में बैठा गया,मैंने अपने मन में बार बार ये दोहराया की मुझे काजल को ढूंढना है ..

मेरे आँखों के सामने काजल मेडम की तस्वीर उभर कर आ रही थी ,थोड़ी देर में ही मुझे ऐसे लगा जैसे मैं इस शरीर में ही नहीं हु ना ही इस कमरे में ही हु ,मैं कही और था एक बहुत ही अँधेरे वाली जगह में था,मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था ,वो एक गुफा जैसी जगह थी ,जंहा अँधेरा ही अँधेरा था ,लेकिन दूर कही से प्रकाश की किरणे आ रही थी ,मैं उसी और बढ़ने लगा ,लेकिन ये क्या मैं चल नहीं रहा था बल्कि जैसे उड़ रहा था ,मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये मेरे साथ क्या हो रहा है ,मैं प्रकाश की और जाने लगा तो देख कर बुरी तरह से चौक गया ,वो एक बड़ी सी जगह थी लेकिन जैसे कोई गर्भगृह हो ,कोई लाइट वह नहीं थी बस कुछ जलते हुए मसाल थे ,वंहा पर एक विशाल मूर्ति बनी हुई थी ,ना जाने वो किसकी मूर्ति थी लेकिन वो बिल्कुल ही काले पत्थर से बनाई गई थी और देखने में बेहद ही डरावनी थी ,वही एक तांत्रिक जैसा शख्स उसके सामने ध्यान की मुद्रा में बैठा हुआ था ,उसके सामने आग जल रही थी ,पास ही चंदू हाथ में बड़ी सी तलवार लिए खड़ा था ,वो पूरी तरह से नंगा था और उसके माथे पर एक बड़ा सा टिका लगाया था ,वो लाल रंग का टिका था लेकिन कोई गुलाल नहीं बल्कि खून लग रहा था ,हां चंदू के हाथो से खून ही बह रहा था ,शायद उसने अपनी उंगली काँटी थी ,मुझे समझ में नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,मैंने आस पास देखा तो मेरे आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही क्योकि चंदू जिस और खड़ा था वही निचे एक पत्थर में एक इंसान को लिटा कर बंधा गया था ,उस शख्स का चेहरा देखते ही मैं दंग रह गया क्योकि वोई रामु काका थे ,चंदू के पिता ,चंदू जैसे उसकी बलि देने वाला था ,हां वो उसकी बलि ही देने वाला था ,तभी मुझे एक आवाज सुनाई दी ...

"नहीं ऐसा मत करो चंदू तुम अपने को दुष्ट शक्तियों के हाथो में सौप रहे हो ,ये भयानक तबाही ला देगी "

वो आवाज सुनकर मैं और भी आश्चर्य से भर गया क्योकि वो आवाज काजल मेडम की थी ,उन्होंने काजल मेडम को एक खम्भे से बांध रखा था उनके शरीर में कोई भी कपडे नहीं थे लेकिन पूरा शरीर लाल रंग के गुलाल से ढंका हुआ था ...

चंदू जोरो से हंसा

"ये मेरा बाप कभी था ही नहीं ,इसने जो की किया उसकी इसे सजा जरूर मिलेगी ,इसकी बलि देकर मैं शैतान को अपने अंदर बुलाऊंगा और फिर तेरे साथ सम्भोग करके शैतानी शक्तियों का मालिक बन जाऊँगा ..."

मुझे सारी बातें समझ में आ गई थी लेकिन तभी वो शख्स जो की उस मूर्ति के सामने बैठा था वो उठा ,वो बलशाली शरीर का मालिक था और साथ ही बेहद ही डरावना भी ,बड़े बड़े बाल थे और बड़ी बड़ी दाढ़ी थी,वो पलटा और मुझे देखते हुए जोरो से चीखा .........

"ये यंहा कैसे आ गया "

उसकी आवाज ही इतनी डरावनी थी की मैं बुरी तरह से डर गया ,लेकिन मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करू ..

"कौन ..??"

चंदू इधर उधर देखने लगा .....जैसे उसे मैं दिख ही नहीं रहा हु

"ये ..आज तेरी रूह यंहा आ तो गई है लेकिन वापस नहीं जायेगी मैं इसे कैद करके रखूँगा "

उसने अपने पास पड़ा एक त्रिशूल उठा लिया था और उसकी नोक मेरे ओर कर दी मैं अपनी पूरी ताकत लगा कर वंहा से भागने को हुआ लेकिन जैसे मैं वही जम गया था ...

मैं बुरी तरह से डर गया था तभी काजल मेडम चिल्लाई

"राज डरो नहीं खुद पर यकीन करो तुम बेहद ही ताकतवर हो बस तुम्हे अपने ताकत का अंदाजा नहीं है ,खुद पर यकीन करो भागो यंहा से "

वो भी मुझे नहीं देख पा रही थी लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें मेरा अहसास हो गया था .....

"बाबा जी मदद "मैंने अपने मन में कहा और अचानक से ही मेरी आंखे खुल गई ........

मेरी सांसे बहुत ही तेज चल रही थी ,मेरे दिमाग में अब वो दृश्य घूम रहा था ..

मैंने तुरंत ही फोन उठाया और डॉ चूतिया का नंबर घुमा दिया ..........

 

अध्याय 27

मैंने तुरंत ही डॉ को फोन लगाया और उन्हें सभी बातें बताई जो मेरे साथ अभी कुछ देर पहले घटी..

"ओह माई गॉड ....राज तुम्हारे साथ अभी जो हुआ उसे आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरियंस कहते है ...मतलब की तुम अपने शरीर को छोड़कर वंहा चले गए थे जिस जगह का तुमने सोचा था ,यानि की काजल के पास "

"मतलब ??"

मुझे डॉ की बातें समझ नहीं आ रही थी

"मतलब की हमारा सिर्फ एक शरीर नहीं है बल्कि कई शरीर है ,कही कही पर 7 शरीरो का वर्णन मिलता है ,तो कही चार ,लेकिन समझने के लिए हम २ शरीर को मोटे मोटे तौर से समझ सकते है,

एक हमारा स्थूल शरीर और दूसरा हमारा सूक्ष्म शरीर ,स्थूल शरीर वो है जो की जो अभी हम देख रहे है ,और सूक्षम शरीर उसके अंदर एक और शरीर है जो तरंगो से बना हुआ है और जिसका हमे कोई भी पता नहीं ,मरने के बाद सूक्षम शरीर ही बाहर चला जाता यही और स्थूल शरीर ही मरता है ,सूक्षम शरीर हमारे मन का धारक होता है यानि हमारा दिमाग स्थूल शरीर का हिस्सा है लेकिन हमारा मन सूक्षम शरीर का ....

लेकिन इसके बारे में हमें पता नहीं होता इसलिए हम मरने से डरते है ,योगी बहुत ही मेहनत से इस शरीर से जीते हुए भी निकलना सिख जाते है ,इसे ही मार्डन भाषा में आउट ऑफ़ बॉडी एपीरिएंस कहा जाता है ,तुम्हे इंटरनेट में इसके बारे में और भी कई बातें मिल जाएगी ,आजकल इसे सिखाया भी जाता है और सामान्य लोग भी इसमें कामियाब हो रहे है ,एक सामान्य आदमी भी कभी कभी इन चीजों का अनुभव करता यही ,लेकिन साधक इसे प्रॉपर तरीके से सीखते है और इसमें एक्सपर्ट हो जाते है ,तुम्हारे साथ भी आज यही हुआ लेकिन अनजाने में ,अब तुम्हे इसे जानकर सीखना होगा ,तुम्हारे पास एक गजब की कन्सन्टेरशन है तुम इसे आराम से कर सकते हो ..."

डॉ की आवाज में एक खुसी दिख रही थी

"मगर डॉ अगर जो मैंने देखा वो सच है तो काजल मेडम बहुत ही बुरी मुसीबत में फंसी हुई है "

"हां और साथ ही चंदू जरूर शैतानी ताकत हासिल करने में लगा हुआ है,वो अपने बाप की ही बलि दे रहा है ,खैर वो उसका बाप था ही कब,काजल को वंहा से निकलना होगा ,क्योकि अगर चंदू के पास वो ताकत आ गई तो बहुत अनर्थ हो जाएगा ,शैतानी ताकत से वो तुम्हे बहुत ही ज्यादा नुकसान पंहुचा सकता है और अब जब उसे ये पता है की तुम्हरे पास भी जादुई पावर है तो वो काजल को मरने में वक्त नहीं लगाएगा तुम्हे जल्दी से उसके ठिकाने का पता लगाना होगा राज "

मैं बड़ी असमंजस की स्तिथि में फंस गया था

"लेकिन डॉ मैं उसका पता कैसे लागू आपने ही तो कहा था की वो मुझसे अनजाने में हुआ है "

"तुम्हे अपने पर यकीन करना होगा ,मैं एक एक्सपर्ट को जानता हु जो की आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरियंस कर चूका है और उसकी प्रॉपर विधि भी जानता है ,तुम उसके साथ मिलकर इसे तुरंत ही करने की कोसिस करो ,देखो मुझे भी पता है की ये एक दिन का काम नहीं है लोगो को महीनो लग जाते है पहला एक्पीरियंस करने में और सालो लग जाते है इसमें एक्सपर्ट बनाने में लेकिन तुम सामान्य इंसान नहीं हो तुम्हारे पास कुछ शक्तिया है तुम्हे उसका उपयोग करना भी सीखना होगा ...मैं उससे बात करके तुम्हे काल करने के लिए कहता हु तुम उसका प्रयोग करो और जल्दी से इसे सिख कर काजल को ढूंढ लो बाकि की चीजे हम देख लेंगे "

"ओके "

**********************

थोड़े देर ही बीते थे और मेरे पास एक अननोन नंबर से फोन आया ,वो वही इंस्ट्रक्टर था जिसके बारे में डॉ ने मुझे बताया था ..

उसने मुझे अपने सूक्ष्म शरीर को इस शरीर से बहार निकलने की विधि समझाई..

"तुम्हे बस सोना है अपने शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ देना है ,इतना ढीला की अगर तुम हाथो को उठाना भी चाहो तो न उठा सको इसे साइकोलॉजिकल पैरालिसिस कहते है ,फिर तुम्हे इमेजिनेशन करना होगा की तुम्हारा शरीर तुम्हरे शरीर से बाहर है ,या फिर तुम अपने पुरे शरीर की एनर्जी को जो की ध्यान के रूप में पुरे शरीर में फैली हुई है अफने सर तक लाओ और फिर इमेजिनेशन करो की तुम्हारे सर में एक रस्सी बंधी हुई है उसे खींचते हुए तुम्हारा शरीर बहार निकल रहा यही इसे रोप टेक्निक कहते है ,ये दो पॉपुलर विधिया है इसके अलावा और भी विधि है एक बार तुम्हे समझ आ जाये की शरीर से बहार कैसे निकलते है तो फिर तुम तुम्हे किसी विधि की जरूरत नहीं पड़ेगी ,तुम बस चाहोगे और काम हो जाएगा ..."

मुझे उसकी बातें तो समझ आ गई थी लेकिन एक सवाल अभी भी दिमाग में था ..

"सर ऐसे इसे सीखने में कितना समय लग जाता होगा "

"मैंने देखा है की जो व्यक्ति पुरे दिल से इसे सीखता है वो 6 महीने में शरीर से बहार निकलने में कामियाब हो जाता है ,लेकिन शरीर से निकल कर बहार कहि और जाने में सालो की प्रेक्टिस लग जाती है "

**************

जो काम करने में लोगो को सालो का समय लग जाता है वो मुझे अभी करना था ,जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी करना था ...

बाबा ,डॉ ,और काजल मेडम सभी ने मुझसे एक ही चीज कही थी की मुझे अपनी शक्तियों का अहसास नहीं है मुझे खुद पर भरोसा करना होगा ...

मैंने एक गहरी साँस भरी और अपने आप से कहा

"आई केन डु इट"

मैं अपनी लकड़ी को चाट कर बिस्तर में सो गया और अपने शरीर को ढीला कर दिया ,मुझे इसकी टेक्निक पहले ही बाबा ने सीखा दी थी ,उन्होंने मैडिटेशन के रूप में इसे सिखाया था तो मेरे लिए ये कठिन नहीं था ,थोड़े देर बाद मैंने अपने पुरे शरीर में फैले हुए एनर्जी को इकठ्ठा करना शुरू किया ,आज मुझे समझ में आया की बाबा ने ये सभी चीजे मुझे पहले ही सीखा दी थी जिसका मैं इतने दिनों से प्रेक्टिस करता था लेकिन मुझे नहीं पता था की इसका उपयोग किस प्रकार करना चाहिए ,कई दिनों से मैं इसकी प्रेक्टिस कर ही रहा था तो पूरी एनर्जी एक जगह एकत्रित करके मैं सर की और बढ़ा और वंहा एक रस्सी को बंधा हुआ महसूस करने लगा मैं उस रस्सी को पकड़ कर ऊपर की तरफ जाने की कोसिस करने लगा और धीरे धीरे अपने एक अलग ही शरीर को इस शरीर से बहार जाते हुए पाया ,मुझे बहुत ही तेज डर लगा ,मरने का डर जो लेकिन बाबा जी ने मुझे ध्यान सिखाते हुए एक बार कहा था की जब तुम्हे मरने का डर लगे तो समझ जाना की तुम अपनी मंजिल के बहुत ही करीब हो ,मैंने खुद को ऊपर खींचना जारी रखा और ये क्या मैंने खुद को बेहद ही हल्का पाया,मैं ऊपर उड़ रहा था वही मेरा शरीर नीचे सोया हुआ था ,मेरे माथे से एक चमकीली सी रेखा जो किसी रस्सी की तरह ही मेरे इस शरीर से जुडी हुई थी ,मैंने कुछ कुछ आउट ऑफ़ बॉडी एक्पीरियंस के बारे में पढ़ा था तो मुझे समझ आया की ये ही सेतु है जिससे मैं फिर से अपने शरीर में जा सकूंगा ...

इस अहसास के बाद मानो मेरे लिए पूरी दुनिया ही बदल सी गई ,मैं बेहद ही हल्का था और अब मुझे वो सोचना था जंहा मैं जाना चाहता था ,मैंने काजल का विचार किया और मेरा सूक्षम शरीर बहुत ही तेजी से उस ओर जाने लगा ......

 

अध्याय 28

मैं थोड़ी देर बाद काजल के पास था ,ये वही जगह थी जंहा मैं पिछली बार आया था लेकिन इस बार बात कुछ अलग थी ,पिछली बार मैं अनजाने में यंहा आया था लेकिन इस बार मैं जानबूझकर आया था,

उस तलघर या कहे गर्भगृह के अंदर अभी भी मसाले जल रही थी ,थोड़ी रोशनी अभी भी वंहा फैली हुई थी ,मैंने वंहा ना तो उस अघोरी जैसे इंसान को वंहा पाया ना ही चंदू मुझे वंहा दिखा ,लेकिन अभी भी रामु काका वैसे ही बंधे हुए थे और जिन्दा थे लेकिन बेहोश थे ,वही एक स्थान पर काजल मेडम भी वही बंधी हुई थी ...

मैंने सोचा की क्यों ना काजल मेडम से बात की जाए लेकिन फिर मेरे दिमाग में आया की कैसे उस अघोरी ने मुझे पहचान लिया था हो सकता है की ये कोई जाल हो .........

मुझे डॉ की बात याद आयी की वंहा का रास्ता पता करो ,मैं इतने तेजी से वंहा आया था की मुझे पता ही नहीं था की आखिर मैं कहा पर हु ...

मैंने खुद को ऊपर उठाना शुरू किया ,सच पूछो तो ये उड़ने वाला एक्पीरियंस मुझे बहुत ही मजेदार लग रहा था ....

मैं ऊपर उठते उठते उस गर्भगृह की दीवारों को चीरता हुआ बहार आया ये एक गुफा थी जो की जंगल के बीच थी मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर मैं इस जगह के बारे में डॉ को कैसे बताऊंगा ...

मेरे थोड़े और ऊपर होने से मुझे शहर दिखाई देने लगा ,अब मुझे गूगल के सेटेलाइट व्यू की तरह नजारा दिख रहा था और यही आईडिया मेरे दिमाग को जला दिया ,यस मुझे गूगल मेप से इसका लोकेशन डॉ को भेजना चाहिए .........

मैं बहुत देर तक इधर उधर उड़ाते हुए उस जगह की स्पेशल चीजों को नोट करता रहा ताकि मैं गूगल मेप में उन जगहों को अच्छे से मार्क कर सकू ..

मेरा काम हो चूका था और मैं अब फिर से अपने शरीर में था लेकिन इस बार शरीर में आने से मुझे एक अजीब सा अहसास हुआ ,वंहा क्या अहसास था ..........

थोड़े ही देर बाद मैं जल्दी से उस लोकेशन को गूगल मेप में ढूंढने लगा और उसे मार्क करके डॉ को सेंड कर दिया ...

और तुरंत ही उन्हें फोन लगाया

"डॉ काजल मेडम और रामु काका दोनों हो जिन्दा है ,मैंने लोकेशन आपको सेंड कर दी है "

"ओके मैं अभी पुलिस कमिशनर से बात करता हु और पूरी फाॅर्स लगा कर उन्हें बचाता हु ,उन्होंने तुम्हे देखकर रामु की बलि को रोका है इसका मतलब है की वो भी सतर्क होंगे ,इसलिए तुम घर में ही रुको .."

डॉ की बात सुनकर मैं जैसे मचल गया ...

"नहीं डॉ साहब जब ये सब हो रहा होगा तो मैं घर में कैसे रह सकता हु ,मैं भी फाॅर्स के साथ जाऊंगा शायद मैं कोई हेल्प कर सकू "

"नहीं राज तुम बात की गहराई को नहीं समझ रहे हो ,हो सकता है की उन्होंने काजल और रामु को इसीलिए जिन्दा छोड़ दिया है ताकि वो तुम्हे अपने कब्जे में ले सके "

"लेकिन मुझे क्यों ???"

"यार तुम समझते क्यों नहीं ,अभी तक मामला पैसो का लग रहा तह लेकिन अगर इसमें अघोरी शामिल है तो जरूर बात कुछ और भी होगी ,और एक ही बात हो सकती है तुम्हारी लकड़ी को हथियाना "

"लेकिन डॉ साहब ..."

"लेकिन वेकिन कुछ भी नहीं ,तुम घर में ही रुकोगे बात ख़त्म ..."

डॉ में फोन रख दिया ,लेकिन मैं बेचैन हो चूका था ,मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं क्या करू ,मुझसे रहा नहीं जा रहा था ...और मैं घर से निकल पड़ा ...

मैंने एक बाइक उठाई और गूगल मेप को देखता हुआ जंगलो के तरफ चल पड़ा,मैं छिपकर सब कुछ देखना चाहता था ताकि अगर जरूरत पड़े तो मैं बीच में आ कर कुछ मदद कर सकू ...

मैं थोड़ी ही दूर पंहुचा था की मुझे हेलीकाप्टर की आवाजे सुनाई देने लगी वो भी उसी दिशा में जा रही थी ,मैं समझ चूका था की डॉ ने पुलिस को फोन कर दिया है और वो काजल के रेस्क्यू के लिए निकल चुके है ...

मैंने गाड़ी तेज की लेकिन एक समय के बाद रोड ख़त्म हो चूका था ,मेरे पास एक ही रास्ता था वो ये था की मैं गाड़ी वही छोकर दौड़ लगा कर वंहा पहुंच जाओ ,जंगल घना था लेकिन मुझे जंगल में दौड़ने की आदत और अभ्यास हो चूका था ,मैंने दौड़ना शुरू किया ...

मुझे आधा घंटा लगा होगा वंहा पहुंचने में ,रेस्क्यू तीन गुफा के दरवाजे में पड़ा हुआ बड़ा सा पत्थर हटाने में व्यस्त थी ......

मैं झाड़ियों में छिपकर ये सब देख रहा था ,मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करू ,मैंने तुरत ही अपने लकड़ी को चूमा और फिर से अपने शरीर को छोड़कर गुफा की और चला गया,मैं अब गुफा के अंदर ही था ...

काजल मेडम तो वैसी ही नंगी बंधी हुई थी लेकिन मैं आश्चर्य से भर गया था की चंदू वंहा हाथ में तलवार लिए,नंगा खड़ा था .......

उसने मेरे देखते ही देखते रामु काका के गर्दन को धड़ से अलग कर दिया,गले की नशो से खून की धार फुट पड़ी ,काजल मेडम अब भी बेहोश थी ,चंदू ने एक कपाल में वो खून एकत्र किया ....

और पता नहीं कौन सा मंत्र पढ़ा ...देखते ही देखते उसका चेहरा लाल होने लगा था उसने खून के कुछ छींटे उस काले पत्थर से बनी मूर्ति के पैरो में छिड़के और वंहा काजल मेडम को वैसे ही छोड़कर जाने लगा ...

वो एक दूसरे रस्ते से गुफा के बहार चला गया था ...

वही बहार खड़े गार्ड पत्थर हटाने में कामियाब हो गए थे ,मुझे समझ नहीं आया की चंदू ने आखिर ये कर्मकांड पूरा क्यों नहीं किया ,नियमतह उसे काजल के साथ सेक्स करना था लेकिन वो बहार निकल गया था ......

मैंने चंदू का पीछा किया वो मेरे ही शरीर की तरफ बढ़ रहा था ,मैं अब भी शरीर से बहार था ,मैं तुरंत ही अपने शरीर में वापस आ गया लेकिन ये क्या ......

मेरे आंख खोलते ही अघोरी ने मेरे छाती पे अपना त्रिशूल घुसा दिया ,मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसने मेरे गर्दन में बंधी हुई जादुई लकड़ी को खींचकर मुझसे अलग कर दिया .....

मेरे मुँह से अभी शब्द भी नहीं फूटे थे और त्रिशूल फिर से मेरे सीने में धंस गया था

अघोरी मुझे देखते हुए जोरो से हसने लगा ..

"मुझे पता था की तू वापस यंहा जरूर आएगा उस लड़की को बचाने के लिए,इसलिए मैंने चंदू से उसके बाप की बलि ही दिलवाई क्योकि अब इस लकड़ी के मदद से मुझे और भी ज्यादा शक्तिया मिल जायेगी .."

वो हँसाने लगा ,डॉ सही थे ये मेरे लिए बिछाया गया एक जाल था जिसमे मैं फंस चूका था ...

थोड़े देर में ही चंदू वंहा आ पंहुचा था उसके हाथो में वो खून से भरा कपाल था ,

वो मुझे देखकर हँसाने लगा ..

"मादरचोद अब देख मैं तेरे परिवार वालो का क्या हाल करता हु इन शक्तियों से ,और एक बात और भी सुन ले मैं तेरा कोई भाई नहीं हु ,तेरा बाप मेरा पिता नहीं है ,मेरा बाप तेरे बाप की तरह चूतिया नहीं हो सकता जो आज तक मुझे अपना बेटा मान कर पाल रहा था ..."

तभी अघोरी ने उसे टोक दिया

"चंदू ये खून तुझे ताजा ताजा ही पीना है बकवास बाते करके देर मत कर "

और उसने मेरे जादुई लकड़ी को खप्पर में डाल दिया जिसमे पहले से कोयले के अंगारे मौजूद थे ,देखते ही देखते वो लकड़ी जल कर राख हो गई और अघोरी ने बड़ी सावधानी से वो राख एकत्रित करे उस खून में मिला दिया ..

"इसे पी शैतान तेरे अंदर आ जायेगा और उसके बाद तू स्त्री सम्भोग से उसे खुश कर ताकि तुझे वो अपनी शक्तिया दे दे ..."

चंदू ने अपने हाथ में रखे कपाल को अपने मुँह में लगाया ,लेकिन उससे पहले उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा ,मेरा खून बुरी तरह से बह रहा था मेरी आंखे धुंधली होते जा रही थी ,

"तू सोच रहा होगा की अब तक तो काजल उन पुलिस वालो के हाथ लग चुकी होगी फिर मैं किस्से सम्भोग करके शैतान को खुश करूँगा ...तो सुन मैं आज तेरी माँ और उस रंडी नेहा से शैतान का सम्भोग कराकर उसे खुश करूँगा "

वो एक शैतानी हंसी में हंसा लेकिन उसके वाक्य से मैं बुरी तरह से डर गया था ,मैंने उसे पकड़ने के लिए अपने हाथ हो आगे बढ़ाया लेकिन अघोरी ने मेरे हाथो में अपना त्रिशूल घुसा दिया ,मेरा शरीर आखरी बार फड़फड़ाया मैं बेहोश होने वाला था उससे पहले मैंने आंखे बंद की और खुद को अपने शरीर से बहार निकालने का प्रयत्न किया ,मेरे पास वो लकड़ी नहीं थी लेकिन मेरे पास मेरा अनुभव था वो अनुभव जो मैंने इतने दिनों में सीखा था ,मैं अपने शरीर से बहार हो चूका था,अघोरी मेरे सूक्षम शरीर को देख कर मुस्कुराया ..

"अच्छा है की तू मरने से पहले अपने शरीर से बहार आ गया अब तू उन्हें लुटाते हुए देखना ,लेकिन तब तक तेरा शरीर मर चूका होगा ,चंदू अब जल्दी कर इसका सूक्षम शरीर भी अपनी बर्बादी देखने को यंहा मौजूद है "

चंदू ने इधर उधर देखा लेकिन उसे कुछ भी नजर नहीं आया ,वो इस बात को सुनकर की मैं ये सब देखने को मौजूद हु बहुत ही ज्यादा खुश हो गया और तुरंत ही आधा खून पी गया ,अघोरी ने उसे तुरंत ही रोका

"पूरा नहीं आधा मेरे लिए भी रखना है ,तेरे सम्भोग के बाद शैतान का वीर्य इसमें इकठ्ठा करना है मुझे इस खून में वो मिल जाएगा तो फिर ये वो बन जायेगा जिसकी मुझे सालो से तलाश थी ..."

चंदू ने आधा खून अघोरी को दे दिया था ...

अघोरी ने उसे अपने पास रख लिया और चंदू का हाथ पकड़ कर उसे एक और ले जाने लगा ,मैंने देखा की हेलीकाफ्टर अब वापस उड़ रहे है ,वो लोग जा चुके थे ,लेकिन कुछ पुलिस वाले अब भी वंहा रुके थे जो शायद कातिल को ढूंढने में लगे हुए थे ,लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं होने वाला था अघोरी और चंदू दूर जा चुके थे,चंदू के हाव भाव बदल रहे थे उसके ऊपर शैतान समां रहा था ,अघोरी उसे दूसरी गुफा में ले गया ...

"हे शैतान यंहा दो औरते बंधी है जिससे सम्भोग करके आप अपना वीर्य मुझे दीजिये "

चंदू के अंदर का शैतान मानो ख़ुशी से झूम गया हो वही मैं निसहाय बस ये सब होता हुआ देख रहा था ,चंदू और अघोरी दोनों ही अंदर गए साथ में मैं भी वंहा दो औरतो को एक दूसरे के बाजु में एक बिस्तर नुमा बड़े से पत्थर पर बंधा गया था ,उसे देखते ही चंदू की लार टपकने लगी थी ,वो दोनों ही औरते पूरी नंगी थी ..

लेकिन उसे देखकर मैं बेहद ही आश्चर्य में पड़ गया ...चंदू उस ओर ही बढ़ने लगा लेकिन वो चंदू नहीं बल्कि उसके अंदर का शैतान था ,अगर चंदू उसकी जगह होता तो वो कभी उनके ओर नहीं बढ़ता क्योकि वो शबीना और कान्ता मौसी थे ...

मैंने अघोरी को देखा उसने मुझे देखा ...

"मैं ताकत चंदू के लिए नहीं अपने लिए चाहता हु ,तेरी बहनो और माँ को लाना बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन इन दोनों रंडियो को बस इतना कहना पड़ा की चंदू ने इन्हे बुलाया है ये दौड़ी चली आयी ,अब चंदू अपनी ही माँ को चोदेगा..."

वो हंसने लगा था ,

"मुझे माफ़ कर दे चंदू लेकिन मैं इस ताकत को पाने की कोशिस सालो से कर रहा हु ,और अब ये ताकत मेरी होगी ,"

अघोरी ने मेरी ओर देखा

"फिक्र मत कर थोड़ी देर में चंदू भी तुझे देख पाएगा क्योकि शैतान के सम्भोग के बाद शैतान उस शरीर को भी मार देता है जिसका आलंबन उसने लिया हो ,मतलब की सम्भोग के बाद शैतान चंदू को भी मार देगा "

वो फिर जोरो से हंस पड़ा था .......

मैं उस ओर देखने लगा ,

"बेटा चंदू ये क्या हो रहा है .."

चंदू को देखकर कान्ता बोल उठी ,लेकिन चंदू ने बिना कुछ बोले ही कान्ता के शरीर में अपनी जीभ फेर दी ,उसकी जीभ सामान्य से ज्यादा लम्बी थी ,और लार उसमे से चुह रहा था ,

"बेटा ये क्या कर रहा है नहीं बेटा "

कान्ता रोने लगी थी लेकिन चंदू किसी भूखे की कुत्ते की तरह उसे चांटे जा रहा था ,उसका लिंग अकड़ कर विशाल हो चूका था वो किसी बेलन की तरह मोटा था और उसकी नशे जैसे अभी फटने वाली हो,खून के प्रवाह से उसके लिंग की एक एक फूल चुकी थी ,वो गुर्राया ,उसका पूरा शरीर तन चूका था ,उसका शरीर ऐसे लग रहा था जैसे एक एक नश में खून उबलने को तैयार है ,उसकी भुलाये और पुरे शरीर की मांसपेशिया फड़कने लगी थी ,वो बहुत ही डरावना नजारा था ...

उसने दूसरे हाथ से पास ही बंधी शबीना के वक्षो को जोरो से दबाया वो उन्हें इतने जोरो से दबा रहा था की शबीना की चीख ही निकल गई ,

"चंदू ये क्या कर रहा है "

शबीना छटपटाने लगी लेकिन उसके हाथ उसके सर के पीछे बंधे थे वही उसके पैर खुले हुए थे ,वो उन्हें इधर उधर पटकने लगी ,लेकिन चंदू को कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था ,वो बुरी तरह से उसे मसले जा रहा था और अपने मुँह से कान्ता के वक्षो को मुँह में लेकर चूस रहा था कभी कभी वो उसे बेदर्दी से काट देता

"बेटा नहीं ...बेटा मैं हाथ जोड़ती हु रुक जा मैं तेरी माँ हु ,मैंने तुझे जन्म दिया है रुक जा बेटा "

कान्ता चिल्लाई लेकिन चंदू ने उसके वक्षो पर अपने दांतो को इतने जोरो से गड़ाया की कान्ता के होठो से एक चीख निकल गई ,उसे देखकर मेरा दिल भी द्रवित हो चूका था लेकिन अघोरी ये सब देखकर और भी खुश हो रहा था ..

चंदू ने बिना देर किये अपने लिंग को अपनी माँ की योनि में रख दिया

"नहीं बेटा चंदू नहीं ...तू मेरा बेटा है मैं तेरी माँ हु नहीं "

वो बोलती रही लेकिन उसकी बात सुनने वाला चंदू यंहा मौजूद नहीं था ..

चंदू ने एक जोर का धक्का लगाया और उसका विशाल लिंग उसकी माँ की योनि की दीवारों को चीरता हुआ सीधे अंदर घुस गया ..

"नहीं ....."

कान्ता की चीख से तो पत्थर भी दहल जाते

"माँ .."

चंदू ने कहा वो थोड़ा अलग हुआ,शायद कान्ता की आवाज ने चदु को वापस अपने शरीर पर काबू करने का मौका दे दिया था ..

"माँ ये .."

उसने कहा ही था की चंदू ने फिर से अपने कमर को जोर से धक्का दिया ..

"आह नहीं बेटा .."

कान्ता फिर से चिल्लाई

"माँ ये मैं नहीं हु ..मेरा शरीर "

"नहीं ..."

इस बार शबीना थी चंदू ने उसके वक्षो पर अपने नाख़ून गड़ा दिए थे ,चंदू शायद अपने शरीर में काबू पाने की कोशिस कर रहा था लेकिन शैतान के सामने उसकी क्या मजाल थी ..

"बेटा नहीं .."

चंदू के बुरी तरह से दिए गए धक्के के कारण कान्ता चीला उठी चंदू ने उसके कंधे में अपने दांतो को गड़ा दिया था ,कान्ता की हृदयविदारक चीख से मेरा दिल दहल गया था ,मैं अब अपने शरीर में वापस नहीं जा सकता था लेकिन मैं चंदू की मदद तो कर सकता हु ...

मेरे दिमाग में अचनक से ये बात आ गई ,शायद मैं चंदू के शरीर में घुस सकता हु

मैंने बिना देर किये उसमे घुसने का प्रयत्न किया और मैं उसमे समा भी गया था ,उस शरीर पर मैं काबू नहीं पा सकता था ,शैतान बेहद ही ताकतवर था वो बार बार मुझे और चंदू को हटा कर वापस काबू ले लेता ..

"मेरी मदद कर राज मेरी मदद कर "

चंदू को शायद ये पता चल चूका था की मैं उसकी मदद कर रहा हु ,हम दोनों ने मिलकर एक साथ कोशिस की और इस बार हमने फिर से काबू पा लिया

"माँ ...तू फिक्र मत कर ,"

"मौसी आप फिक्र मत करो "

"आह आह बेटा "

कान्ता को चंदू बुरी तरह से पेल रहा था और उसके मुँह से गिरता हुआ लार कान्ता के शरीर को भिगो रहा था ,हम दोनों कभी कभी शरीर में काबू पा लेते थे लेकिन हम बोलने के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहे थे ,वो भी थोड़ा थोड़ा ..

एक समय ऐसा आया की कान्ता के शरीर पर हर जगह काटने के निशान थे वो बेसुध हो चुकी थी ,चंदू ने उसे जोरो से चांटा मारा लेकिन वो हिल ही नहीं पाई ,

चंदू उसे वही छोड़कर शबीना के ऊपर आ गया ,

"बेटे मुझे बचा लो मैं समझ गयी हु इसे कोई बहुत प्रेत पकड़ लिया है ,और राज तू और चंदू इस शरीर में हो मुझे बचा लो मैं जिंदगी भर तुम्हारी गुलाम ...आह बचाओ "

शबीना बोल ही रही थी की चंदू ने अपना लिंग उसके अंदर घुसेड़ दिया था ,मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं बुरी तरह से थक चूका हु ,मेरे पास अब सैतान के ऊपर काबू पाने की शक्ति नहीं रह गई ही वही हाल चंदू का भी था ,पुरे शरीर पर शैतान का ही राज हो गया था कभी कभी ताकत लगा कर चंदू वापस काबू पाता लेकिन उसकी कमर चलते रहती थी ,वो शबीना के शरीर को जोरो से कांट भी रहा था लेकिन उसके आँखों में आंसू आ रहे थे ...

मैंने शरीर छोड़ना ही बेहतर समझा मुझे समझ आ चूका था की हम मिलकर भी उससे नहीं जीत शायद अगर चंदू भी मेरी तरह किसी प्रयास से उस शरीर में आया होता तो बात अलग थी लेकिन यंहा बात अलग थी शरीर उसका था जिसमे दो रूहो ने प्रवेश कर लिया था ...

जब शबीना भी चूर हो गई थी चंदू ने उसे जोरो से मरना शुरू कर दिया जैसे जो भड़क गया हो ,वो गुर्राने लगा ,उसका शरीर फड़फड़ा रहा था ,मैं बहार निकल चूका था

"हे शैतान अपना वीर्य इस स्त्री के अंदर छोडो ,माँ की योनि में बेटे का वीर्य होगा तो शैतानियत और भी बढ़ जायेगी "

शैतान शबीना को छोड़ कान्ता की ओर बढ़ा ...

"नहीं ऐसा मत करो "

चंदू चिल्लाया शायद उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी क्योकि उसका शरीर थोड़े देर के लिए रुक गया था लेकिन बस थोड़े देर के लिए ,

कान्ता के आँखों से आंसू टपक रहा था वही चंदू की आँखों से भी आंसू टपक रहा था ,अब कान्ता कोई भी हरकत नहीं कर रही थी वो एक लाश की तरह पड़ी हुई थी ,और चंदू उसे बुरी तरह से नोचे जा रहा था ,और एक बार वो जोर से गुर्राया उसका पूरा शरीर जैसे तन कर फटने वाला हो,उसने अपनी माँ के होनी में गाढ़े गाढ़े वीर्य की पूरी बरसात कर दी थी ,और फिर इसी बरसात में उसका शरीर फटने लगा चमड़ी तन कर फटने लगी और नश भी टूटने लगे उसका पूरा शरीर ही खून से लथपथ हो चूका था के एक कर उसकी हड्डियों के टूटने की आवाज आने लगी ,चंदू दर्द से चीख रहा था ,और शैतान उसका शरीर छोड़ रहा था लेकिन उसके शरीर छोड़ने पर चंदू का शरीर बुरी तरह से टूट रहा था उसके चीथड़े चीथड़े उड़ने लगे ,एक समय आया जब मैंने देखा की पूरा शरीर मांस के लोथड़े के अलावा कुछ भी नहीं रह गया था ,और चंदू की रूह बहार आ गई शैतान अभी भी उसके शरीर से बहार आ रहा था ,चंदू की रूह उड़ाते हुए दूर चली गई जैसे उसे होश ही नहीं हो ,वही उसका शरीर किसी विस्फोट की तरह फुट गया और चारो तरफ बाब मांस के लोथड़े फ़ैल गए ...

कान्ता के योनि से भी खून और वीर्य एक साथ बह रहा था ...

अघोरी जल्दी से वंहा पहुंचा और अपने हाथो में पकड़ी खोपड़ी में उस वीर्य और खून को इकठ्ठा करने लगा ,उसने एक लकड़ी से उसे मिलाया और एक ही साँस में उसे पी गया ..

वो पागलो की तरह हंस रहा था ,मनो उसे कोई बहुत ही बड़ा खजाना मिल गया हो ..

वो नाचता हुआ मुझे देखने लगा

"मुझे वो मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी और अब तेरी किस्मत में तो बस भटकना ही लिखा है जब तक तेरी वक्तविक जिंदगी की उम्र पूरी नहीं हो जाती या कोई तुझे मुक्ति नहीं दे देता ,तू बस भूतो की तरह भटकता रह "

इतना बोलकर वो वंहा से निकल गया,मैं अपने शरीर के पास वापस चला गया खून पूरी तरह से बह चूका था ,लेकिन मेरा शरीर अब भी जिन्दा था लेकिन अगर थोड़े देर में मुझे उपचार नहीं मिलता तो शायद मेरा शरीर वही पड़े पड़े मर जाता ,पुलिस वाले पास ही थे लेकिन अपने काम में व्यस्त थे उन्हें कोई खबर नहीं थी की यंहा के लाश भी पड़ी है या कोई लाश बनने वाला है ,मेरा शरीर इस काबिल नहीं रह गया था की शरीर में जाने के बाद भी मैं चिल्ला पाता शायद शरीर में जाने के बढ़ मैं बेहोश ही रहता ,और शायद मैं बहार निकलना भी भूल जाता हो सकता था क्योकि चंदू की जब मौत हुई तो उसके रूह को इसकी खबर तक नहीं थी ...

तभी मेरे दिमाग में एक नाम आया जो शायद मुझे देख और सुन सकता था ..............

 

अध्याय 29

मेरा शरीर निचे पड़ा गया था और मैं बिलकुल मजबूर सा खुद को महसूस कर रहा था ,मेरे दिमाग में एक नाम आया और मैं तुरंत ही उसके पास पहुंच गया .......

मैं अभी अपने घर में था अपने कमरे में और टॉमी मुझे देखते ही भूका ,तो मेरा शक सही था ,टॉमी मुझे देख सकता था ,मैंने टॉमी से बात करने की कोशिस की असल में अब मैं और भी स्पस्ट बात कर पा रहा था ,टॉमी मेरी बातो को समझ भी रहा था ,मैंने उसे अपने साथ आने को कहा और उसे अपने शरीर के पास तक ले आया लेकिन .

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी पुलिस वाले जा चुके थे ,मेरे पास समय बहुत ही कम था तभी मेरे मन में एक बात आ गई ......

मैं टॉमी को लेकर वंहा पंहुचा जंहा अघोरी ने कांता और शबीना को मारा था वो दोनों अब भी जिन्दा थे लेकिन बहुत ही बुरी हालत में ..

मुझे तो खोपड़ी दिखाई दी जिसे पीकर अघोरी वंहा से चला गया था .......

"टॉमी उस खोपड़ी में कुछ है ,उसे हिफाजत से ले जाकर मेरे मुँह में डाल देना ,"

उस खोपड़ी में कुछ कुछ द्रव्य अब भी था जो की रामु(दी गई बलि ) के खून से,जादुई लकड़ी के राख से, शैतान के वीर्य से और कुछ खास शैतानी कर्मकांडो के द्वारा बनाया गया था ...

चाहे वो कितना भी घिनौना क्यों ना हो लेकिन अभी वो मेरे लिए अमृत हो सकता था मुझे नहीं पता था की उससे मेरे शरीर पर क्या असर होने वाला है लेकिन फिर भी मैंने ये दावा खेल दिया ...

टॉमी मेरी बात को समझता हुआ तुरंत एक्शन में आ गया और खोपड़ी को अपने दांतो से उठा कर मेरे शरीर के पास ले आया और उस द्रव्य को मेरे मुँह में डालने ही वाला था की मैंने अपने शरीर में प्रवेश कर लिया ..

द्रव्य जैसे ही मेरे मुँह में गया मेरे अंदर कुछ बदलने लगा ,मेरे शरीर के हर एक तिनके में जैसे कोई ऊर्जा उठने लगी ,पेट और साइन में गहरे घाव अभी भी थे लेकिन दर्द बहुत ही कम हो गया था ,मुझे तुरंत ही मेडिकल चिकित्सा की जरूरत थी ,मेरे शरीर में इतनी ताकत आ गई थी की मैंने तुरंत ही डॉ को कॉल लगाया और अपना लोकेशन बताया ,मैं अब भी चलने फिरने के हालत में नहीं था लेकिन मेरे अंदर कुछ तो हो रहा था ,कुछ ही देर में मदद भी पहुंच गई ,और मैंने उनके साथ टॉमी को भेजकर कांता और शबीना के लिए भी मदद जुटा दी ......

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कुछ दिनों बाद

मैं बिस्तर में पड़ा हुआ था सभी मुझसे मिलने आते जाते रहते थे ,डॉ ने मेरे कहने पर चंदू के DNA का टेस्ट करवाया ,क्योकि उसने मुझसे कहा था की वो मेरे पिता का खून नहीं है ,मैं देखना चाहता था की आखिर वो किसका खून है और ना ही वो मेरे पिता का खून था ना ही रामु का ,ना ही अब्दुल का ...

अब वो किसका बेटा था ये तो कांता मौसी ही जानती थी ,जो की कोमा की हालत में थी ,शबीना की हालत में थोड़ी सुधार आ रहा था लेकिन उसे भी नहीं पता था की आखिर चंदू किसका बेटा है ,असल में उसे तो यही लगता था की चंदू मेरे पिता का ही खून है ........

खैर मतलब साफ थी की जायजाद का अब कोई लफड़ा ही नहीं होने वाला है ,

लेकिन एक सवाल अब भी मेरे दिमाग में घूम रही थी की आखिर चंदू घर से क्यों गायब हो गया,और उसे क्यों कोई मेरे खिलाफ बहका रहा था,क्या अघोरी उसे इस्तमाल कर रहा था या फिर इसके पीछे कोई और था ,अब अघोरी अगर उसे इस्तमाल कर रहा था तो एक सवाल ये था की उसके पास इतने पैसे कहा से आये की वो इतने लोगो को मेरे पीछे लगा कर रखता ,नहीं ये सिर्फ अघोरी का काम नहीं था ,इन सबको जानने के लिए मुझे एक बार काजल से बात करनी थी लेकिन डॉ ने मुझे इस बात से मना कर दिया ,वो चाहते थे की मैं अपने दिमाग में ज्यादा जोर ना डालू जब मैं ठीक हो जाऊगा तो वो मुझे काजल से मिलवा देंगे ...

सब कुछ ठीक ही चल रहा था बस एक चीज के ,मेरे अंदर आ रहे परिवर्तन ,मेरे अंदर एक अजीब सी ऊर्जा मुझे महसूस होती जो की जादुई लकड़ी के कारण मुझमे आती थी लेकिन उसके साथ एक अजीब सी मानसिकता मुझे घेरे रहती थी ,मुझे ऐसा कभी नहीं लगा जैसे अब लगता था ,दुनिया को देखने का नजरिया परिवर्तित हो रहा था ,मेरे दिमाग में अजीबो गरीब ख्याल आते जिन्हे मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था .....

वो सभी मुझे शैतानी सी लगते थे ,शायद शैतानी ताकतों का भी असर मेरे ऊपर हुआ था ,ऐसे भी मैं शैतानी ताकत के कारण ही तो जिन्दा था ......

ना जाने आगे ये दो विपरीत उर्जाये क्या क्या खेल दिखने वाली थी ,मैं बहुत ही खतरनाक ताकत को ले कर चल रहा था और जैसे जैसे मेरा शरीर ठीक होता वैसे वैसे मैं खुद को और भी ताकतवर महसूस करता था ,सबसे ज्यादा सर मुझे तब लगा जब मैंने अपनी माँ के बदन को देखकर हवस से भर गया ,ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ था ,लेकिन अब ना जाने ये शैतानी ताकते मुझसे क्या क्या करवाने वाली थी .......???

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