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सिसकियों ने सेक्स का मजा बढ़ा दिया

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Antarvasna, desi kahani: कॉलेज के पहले दिन मैं अपनी क्लास में गया तो मेरे लिए सब कुछ नया ही था। पापा का ट्रांसफर भी कुछ समय पहले ही दिल्ली में हुआ था। मैं कॉलेज में अपनी क्लास में पहले दिन गया तो उस दिन मुझे गौतम मिला और गौतम से पहले दिन ही बात कर के मुझे अच्छा लगा और गौतम और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे थे। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगने लगा था। जिस तरीके से गौतम और मैं एक दूसरे के साथ बातें करते उससे हम दोनों की दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही थी मैं और गौतम ज्यादातर समय साथ में ही हुआ करते थे। कॉलेज पूरा हो जाने के बाद मैं भी अपनी नौकरी करने लगा था। मैं दिल्ली में ही जॉब करने लगा था और पापा भी जल्द ही रिटायर होने वाले थे भैया अमेरिका में अभी भी जॉब कर रहे हैं।

मैं अपनी जॉब से काफी खुश हूं लेकिन मेरे पास समय भी कम ही हो पाता था क्योंकि अपने ऑफिस के काम के चलते मैं बहुत ज्यादा बिजी रहने लगा था। मैं अपने पापा से कई बार कह चुका था कि पापा हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं लेकिन पापा मुझे कहते कि बेटा थोड़े समय बाद चलेंगे। हम लोगो का काफी समय से कहीं घूमने का प्रोग्राम बन ही नहीं पाया था लेकिन जब भैया दिल्ली आए तो भाभी ने भी इस बारे में बात की और अब हम लोग घूमने के लिए जाना चाहते थे। हम लोग घूमने के लिए शिमला चले गए यह सब प्लान भाभी ने हीं किया। शिमला में हम लोगों को काफी अच्छा लगा जब हम लोग शिमला गए तो वहां पर हम लोगों ने खूब एंजॉय किया और मैं अपने परिवार के साथ बड़ा ही खुश था जिस तरीके से मैं अपनी फैमिली के साथ समय बिता पा रहा था। कहीं ना कहीं भैया और भाभी भी बहुत ज्यादा खुश थे। हम लोग शिमला में काफी दिनों तक रहे और उसके बाद जब हम लोग वापस लौटे तो मैं काफी ज्यादा बिजी रहने लगा था और मेरे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं हो पाता था।

मैं अपने ऑफिस के काम के चलते बहुत ही ज्यादा बिजी रहता हूं इस वजह से मुझे कई बार लगता की मुझे अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताना चाहिए। अब मुझे लगने लगा था कि मुझे नौकरी छोड़कर अपना ही कोई बिजनेस शुरू करना चाहिए। मैंने इस बारे में फैसला किया और मैंने अपनी नौकरी से रिजाइन दे दिया उसके बाद मैंने एक गारमेंट शॉप खोली। कुछ समय तक मेरा काम ठीक नहीं चला जिस वजह से मुझे उसमें काफी नुकसान हुआ और फिर मुझे वह शॉप बंद करनी पड़ी। मैंने अब शॉप बंद कर ली थी और उसके बाद मैं कुछ समय तक घर पर ही रहने लगा, मुझे लगा कि शायद मैं अब बिजनेज़ नहीं कर पाऊंगा। मुझे बिजनेस में काफी नुकसान भी हुआ जिस वजह से मुझे दोबारा से नौकरी करनी पड़ी। मैं दोबारा से नौकरी करने लगा था जिस ऑफिस में मैं जॉब करता हूं उसी ऑफिस में मेरी मुलाकात कविता से हुई। कविता से मिलना मेरे लिए काफी अच्छा रहा क्योंकि कविता और मेरे बीच अब बहुत ही ज्यादा नजदीकियां बढ़ती जा रही थी। हम दोनों एक दूसरे के काफी नजदीक आ चुके थे जिस तरीके से कविता और मैं एक दूसरे के साथ होते उससे हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता।

हम दोनों बहुत ज्यादा खुश हैं कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में है और अब हम दोनों जब भी एक साथ होते तो हमें बहुत अच्छा लगता। मैं ज्यादा समय कविता के साथ ही बिताया करता हूं, हम दोनों अपने ऑफिस खत्म हो जाने के बाद साथ में ही ज्यादा समय बिताया करते। कविता के जन्मदिन के दिन उसने मुझे अपने बर्थडे पार्टी में इनवाइट किया और मैं जॉब कविता की जन्मदिन की पार्टी में गया तो उस दिन कविता ने मुझे अपने माता-पिता से मिलवाया। यह पहली बार था जब मैं उन लोगों से मिला था और उन लोगों से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। उसके बाद कविता का परिवार और मैं एक दूसरे को मिलते ही रहते। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगता और हम दोनों की जिंदगी बड़े अच्छे से चल रही है। मैंने भी कविता को अपने परिवार से मिलवाया और जब मैंने कविता को अपनी फैमिली से मिलवाया तो मुझे काफी अच्छा लगा और वह लोग भी कविता से मिलकर बहुत ज्यादा खुश है। जिस तरीके से कविता और मेरी जिंदगी चल रही है और हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते हैं यह हम दोनों के लिए काफी अच्छा है।

मुझे जब भी अकेलापन महसूस होता है तो कविता मेरे साथ होती है, कविता को मेरा साथ बहुत ही अच्छा लगता है और मुझे भी कविता का साथ बहुत अच्छा लगता है। कविता ने एक दिन मुझे बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ कुछ दिनों के लिए अपने मामा जी के घर जा रही है। मैंने कविता से कहा कि लेकिन तुम अपने मामा जी के घर से कब वापस लौटोगी तो कविता ने कहा कि मैं वहां से जल्द ही वापस लौट आऊंगी। कविता ने कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और वह कुछ दिनों के लिए पानीपत चली गई। वहां पर वह कुछ दिनों तक रही फिर वह वहां से वापस लौट आई। जब कविता वहां से वापस लौटी तो कविता ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें अपने भैया से मिलाना चाहती हूं। कविता ने मुझे अपने भैया से मिलवाया और मुझे कविता के भैया से मिलकर काफी अच्छा लगा। कविता के भैया जयपुर में नौकरी करते हैं और मुझे उस दिन कविता के भैया से मिलकर काफी अच्छा लगा। कविता चाहती थी कि हम दोनों एक दूसरे से शादी कर ले लेकिन फिलहाल यह संभव नहीं था क्योंकि मुझे थोड़ा वक्त चाहिए था। मैंने कविता से कहा कि मुझे थोड़ा समय चाहिए कविता ने मुझे कहा कि ठीक है अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हे थोड़ा समय चाहिए तो मुझे इससे कोई भी ऐतराज नहीं है। हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा खुश हैं और हम दोनों का रिलेशन अच्छे से चल रहा है।

हम एक दूसरे के साथ जब भी होते हैं तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है और मैं और कविता एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश हैं। जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं उससे हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश है और कविता को बहुत अच्छा लगता है जब भी वह मेरे साथ होती है। मेरे ऑफिस में पारस जॉब करता है और पारस के साथ मेरी और कविता की काफी अच्छी बनती है तो उस दिन पारस ने हम दोनों को अपने पापा के रिटायरमेंट की पार्टी के लिए इनविटेशन दिया। पारस के पापा जो की रिटायर हो चुके थे तो मैं और कविता पारस के पापा की रिटायरमेंट पार्टी में गए थे और हम लोगों को वहां पर जाकर काफी अच्छा लगा। कविता और मैं वापस घर लौट रहे थे। जब हम दोनो घर लौट रहे थे तो मैंने कविता से कहा मै चाहता हूं आज हम दोनो साथ मे रहे। पहले तो वह इस बात के लिए तैयार नहीं थी लेकिन किसी तरह मैंने उसे अपने साथ चलने के लिए मना लिया। हम दोनो साथ मे थे। हम दोनो एक होटल मे चले गए और मै जब उसके साथ होटल के रूम मे था तो वह मेरे होंठो को चूमने को बेताब थी और मै भी उसके होंठो को चूमने के लिए बेताब था। मैंने उसके होंठो को चूमना शुरू कर दिया। जब मै उसके होंठो को चूम रहा था तो वह तडप रही थी और मैं भी तडप रही थी। हम दोनो बहुत तडप रहे थे।

मैं उसके होंठो को अच्छे से चूम रहा था और वह भी बहुत ज्यादा तडप रही थी। मैंने कविता के कपडो को खोलना शुरु किया। मैंने उसे नंगा कर दिया उसका नंगा बदन मेरे सामने था। मैं उसके गोरे स्तनो को चूम रहा था। मुझे उसके गोरे स्तनो को चूस रहा था तो वह तडप रही थी और मैं भी तडप रहा था। हम दोनो बहुत ज्यादा तडप रहे थे और मै भी गरम हो चुका था। मैंने उसकी चूत पर लंड को सटाते हुए जैसे ही उसकी चूत के अंदर लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे बोली मेरी चूत से खून निकल रहा है। मैंने देखा कविता की चूत के अंदर से बहुत खून निकल रहा था और मैं उसे तेजी से चोदे जा रहा था। अब कविता और मै साथ मे जमकर सेक्स के मजे ले रहे थे और जब मै उसे चोद रहा था तो उसको भी मजा आ रहा था। वह मादक आवाज मे मुझे गरम करने की कोशिश कर रही थी।

जब वह मुझे गरम करने की कोशिश करती तो मैं भी उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था। अब हम दोनो ही गरम हो चुके थे। जैसे ही मैंने कविता के पैरो को अपने कंधे पर रखा तो मुझे मजा आ रहा था और उसे भी बहुत ही मजा आ रहा था। अब मै कविता को तेजी से चोद रहा था और वह मेरा साथ देती। कविता बहुत ही ज्यादा खुश थी जिस तरह से हम दोनो ने सेक्स के मजे लिए थे और हम दोनो ने एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया था। मैंने कविता की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया था। जब मैंने उसकी चूत मे अपने माल को गिराया तो वह मुझे बोली मुझे डर लग रहा है कहीं कुछ होगा तो नहीं। मैंने कविता से कहा नहीं तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो कुछ नहीं होगा। हम दोनो बहुत ज्यादा खुश थे जिस तरह हम दोनो ने एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया था।
 
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