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बिहारी ने अपने पाजामा की एलास्टिक मे हाथ डालकर उस पर प्यार से हाथ फेरा और बोला "प्यारे अगर सबर नहीं किया ना तो ज़िंदगी भर इस लोंड़िया की चूत के दर्शन भी नसीब नहीं होंगे, इस लिए सबर रख और आराम से खा जो मिले".
बिहारी ने अपने लिंग पर दो चपत लगाई जैसे उसे चुप चाप बैठने के लिए कह रहा हो मगर उसका लिंग भी कोई मामूली लंड नहीं था. काफ़ी औरतो का स्वाद चख चुका था और कुँवारी चूत की महक से तो बिल्कुल बग़ावत पर ही उतर आया था.
बिहारी काफ़ी देर तक टीवी मे ध्यान लगाए रहा ताकि अपने लिंग को धोका दे सके कि आज उसके लिए कोई काम नहीं है. तभी उसे ध्यान आया कि रागिनी को बाथरूम मे गये तो काफ़ी समय हो गया है. बिहारी ने बेड पर लेटते ही रागिनी को आवाज़ लगाई. रागिनी, कहाँ हो तुम???
रागिनी: जी आ रही हूँ बस 5 मिनिट.
बिहारी: साली यह लड़कियाँ बाथरूम मे इतना टाइम क्यूँ लगाती हैं???
बिहारी के लिए तो इस वक्त एक एक मिनिट भी एक घंटे के बराबर था
करीब 10 मिनिट तक भी जब रागिनी बाहर नहीं आई तो बिहारी बाथरूम के दरवाज़े के पास जाकर नॉक करता है.
रागिनी: मुझे बाहर आने मे शरम आ रही है विराट.
बिहारी: चलो मैं एक काम करता हूँ, अपनी आँखें बंद कर लेता हूँ तुम आ जाओ.
रागिनी: विराट, आप प्लीज़ बेड पर लेट कर अपने चेहरे पर कंबल ले लीजिए मैं अभी आती हूँ.
बिहारी(बेड की तरफ जाते हुए): साला, सील पॅक चूत के लिए क्या क्या करना पड़ रहा है. नखरे तो ऐसे कर रही है कि जैसे बिना कपड़े खोले ही चुदवायेगी.
बिहारी बिस्तर पर जाकर कंबल लेकर लेट गया और बोला: आ जाइए मेरी हुस्न की मल्लिका जी.
रागिनी ने धीरे से दरवाज़ा खोला और अपना चेहरा बाहर निकाल कर बाहर देखा और तेज़ी से फिर से सर को अंदर करके बोली: विराट प्लीज़ मुँह ढक लो ना.
बिहारी(मन मैं): साली अजीब मुसीबत है, अभी थोड़ी देर मे नंगी होकर मस्त चुदेगि लेकिन पहले नखरे ज़रूर करेगी.
बिहारी ने अपना मुँह भी ढक लिया लेकिन एक आँख से कंबल को तोड़ा सा हटा दिया ताकि वो रागिनी को देख सके.
रागिनी: मैं आउ???
बिहारी: कहो तो मैं उठा लाउ???
रागिनी: नहीं बस आ रही हूँ.
रागिनी ने फिर से सिर बाहर निकाल कर देखा तो वो यह नहीं देख पाई कि बिहारी की एक आँख अभी भी कंबल से बाहर है. रागिनी तेज़ी से बाथरूम से बाहर आई और दरवाज़ा बंद करके तेज़ी से बेड की तरफ भाग आई. बिहारी को उसकी एक झलक ही मिली लेकिन रागिनी ने अपने शरीर पर चुन्नी लपेट रखी थी. वो ज़्यादा कुछ देख तो नहीं पाया लेकिन वो यह ज़रूर समझ गया कि रागिनी ने उसकी लाई हुई ही कोई ड्रेस पहनी हुई है तभी तो उसे बाहर आने मे इतनी शर्म महसूस हो रही है. बिहारी की पीठ की तरफ आकर रागिनी ने अपने बदन से चुन्नी अलग की और उसे दूर फैंक कर कंबल मे घुस गई लेकिन बिहारी से दूरी बनाकर.
रागिनी: अब आप मुँह बाहर निकाल सकते हो विराट.
बिहारी(धीमी आवाज़ मे): लंड कब बाहर निकालु.
रागिनी:क्या???
बिहारी: मैने कहा, आज की रात भी क्या शरमाना.
रागिनी ने अपने पूरे शरीर को कंबल मे ढक रखा था, सिर्फ़ उसका चेहरा ही बिहारी देख पा रहा था. रागिनी का दमकता मदहोश चेहरा देख कर बिहारी के लंड मे तनाव बढ़ने लगा और वो समझ गया कि दूध ने असर करना शुरू कर दिया है. रागिनी के चेहरे पर इतनी मासूमियत थी कि बिहारी जैसा लड़कीबाज़ आदमी भी एक बार सोचने पर मजबूर हो गया कि क्या वो इस लड़की के साथ ठीक कर रहा है??? फिर उसने सोचा कि जो भी कर रहा हूँ शादी कर कर ही कर रहा हूँ तो इस मे बुरा ही क्या है. बिहारी के दिल मे रागिनी के लिए एक पल के लिए प्यार उमड़ आया.
रागिनी ने शरमाते हुए पूछा: क्या देख रहे हैं??
बिहारी: कुछ दिख ही तो नहीं रहा. एक तो तुमने लाइट पहले ही बंद करवा दी और अब इतना मोटा कंबल भी ले लिया. लगता है के मेरी सुहागरात के अरमान अधूरे ही रह जाएँगे.
रागिनी: ऐसा ना कहें विराट, आपके हर अरमान मे, मैं आपका पूरा साथ दूँगी और दिल-ओ-जान से आपको प्यार दूँगी और खुश रखूँगी. आपकी हर बात मानूँगी.
बिहारी खिसक कर उसके पास सरक गया तो रागिनी के चेहरे पर एक दम सुर्खी आ गई.
बिहारी:क्या तुम सच मे मेरी हर बात मनोगी??
रागिनी: आपसे बाद मेरे लिए इस दुनिया मे कोई नहीं विराट, आपकी कसम.
बिहारी: तो फिर लाइट ओन करने दो ना, मैं तुम्हें पहली ही बार मे जी भर कर देख लेना चाहता हूँ, तुम्हारे जिस्म के हर एक अंग को अपनी आँखों मे बसा लेना चाहता हूँ, तुम्हारे जिस्म की छवि को अपनी रूह मे इस तरह बसा लेना चाहता हूँ कि अगर आँखें बंद भी करूँ तो मुझे तुम ही तुम दिखाई दो.
बिहारी की ऐसी बातों से नासमझ रागिनी एकदम पिघल गई और उसे एकदम नशा सा छाने लगा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे यह क्या होने लगा है लेकिन उसकी आँखों की खुमारी से बिहारी को पता चल गया कि रागिनी पर दूध का असर हावी होने लगा है. वो इस मोके को खोना नहीं चाहता था. उसने देख लिया था कि लोहा गरम है, अब बस हथोडा मारने की देर है.