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बिहारी भी दिन भर बीना की चुदाई करके काफ़ी थक चुका था. आशना के ऐसा कहने पर वो जूस का ग्लास लेकर उपर चला गया वीरेंदर को देने और फिर अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गया. आशना ने अपना समान उठा कर अपने रूम मे रखा और फ्रेश होकर रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी. फ्रिड्ज से कुछ सब्ज़ियाँ निकाल कर उसने वेज- बिरयानी के लिए समान इकट्ठा कर लिए और सोचा कि जब खाने का टाइम होगा उस से पहले गरम-गरम बना देगी. रात के खाने की सारी तैयारी करके वो अपने रूम मे चली आई. उसे चैन नहीं आ रहा था कि वो वीरेंदर को कैसे बताए लेकिन फिर भी उसने आज की रात एक बार फिर से पूरे घटनाक्रम के बारे मे सोचने का फ़ैसला किया.
बिहारी अपने कमरे मे लेटा काफ़ी खुश था. उसने सोच रखा था कि वीरेंदर जैसे ही आशना से शादी कर लेगा, वो रागिनी को अपने घर ले आएगा. बिहारी, बीना के साथ हुई आज की मुलाकात के बारे मे सोचने लगा.
सुबह करीब 10:15 बजे बीना की गाड़ी वीरेंदर के गॅरेज मे खड़ी थी. बीना ने हॉर्न दबाया तो बिहारी दौड़ता हुआ गाड़ी की तरफ आया और जैसे ही बीना गाड़ी से बाहर निकली, बिहारी ने उसे गोद मे उठा लिया और घर के अंदर आ गया.
बीना: नीचे तो उतार, आज क्या पूरा दिन गोदी मे ही उठाकर रखोगे.
बिहारी: आज तो पूरा दिन तुझे नंगा करके कुतिया की तरह चोदुन्गा.
बीना: मैं तो कब से तैयार हूँ राजा, मगर पहले एक काम की बात सुनो. तुमने रागिनी के लिए बोला था तो मुझे तुमपर तरस आ गया, अब सोच रही हूँ कि उस कली को फूल बनाने का जिम्मा तुझे जल्द ही दे दूं.
बिहारी: वाह रे मेरी छमिया, यह हुई ना बात. लेकिन यह तो बता, माल असली है या किसी ने चख लिया है.
बीना: अब यह तो तू ही चेक कर लेना, तुझे कॉन सा पैसे देकर खरीदना है. फ्री का माल है, जब तक मन चाहे दिल बहला लेना और फिर दोबारा मेरे पास छोड़ देना.
बिहारी: अरे बच्ची है, 3-4 साल तो रागडूंगा ही उसे. इतनी जल्दी थोड़े ही छोड़ दूँगा.
बीना: तो फिर आशना का क्या होगा.
बिहारी: आशना को तो मैं पूरी उम्र अपने साथ रख सकता हूँ लेकिन अपनी रखैल बना कर.
बीना: साले तू मर्द है या टार्ज़ॅन.
बिहारी: घोड़ा जब बूढ़ा होने लगता है तो और ताकतवर हो जाता है. तू तो मेरी प्रेमिका रहेगी, रागिनी को मैं अपनी बीवी बना कर रखूँगा और रही बात आशना की तो वो बस मेरे बच्चों की माँ कहलाएगी मगर मैं उसे दर्जा रखैल का दूँगा.
बीना: तो सुन फिर राघिनी के लिए क्या प्लान है. बीना जैसे जैसे उसे रागिनी के प्लान के लिए बता रही थी, बिहारी उसके दिमाग़ की दाद देते जा रहा था.
बिहारी: साली उसे मालकिन बनाने के खवाब दिखाकर एक नौकर की बीवी बना देगी तू तो.
बीना: दो दिन बाद मैं उसे लेकर आउन्गि, आगे तू संभाल लेना.
बिहारी: आने दे साली को, उसे ऐसा फसाउन्गा कि वो मेरे टटटे पकड़ कर रहम की भीख माँगेगी.
उसके बाद बिहारी और बीना की चुदाई का जो सिलसिला शुरू हुआ वो शाम के करीब 4:00 बजे तक चला. इस दौरान बिहारी ने 4 बार बीना के जिस्म को रौंदा और बीना के सारे कस बल ढीले कर दिए. जाते जाते बीना कह गई, मैं आज ही अपना काम शुरू कर देती हूँ, तुम किसी तरह दो दिन बाद इन दोनो को कहीं बाहर भेज देना थोड़ी देर के लिए.
बिहारी: तू उसकी चिंता ना कर, बस भगवान से दुआ कर कि माल असली हो. साला 40 साल हो गये लेकिन कोई कुँवारी चूत नहीं खोली.
बीना: साले चूत नहीं खोली तो क्या, गांडे तो बहुत खोली हैं इन सालों मे.
बिहारी: हां यह बात तो है तुझे मिलाकर करीब 8 गान्डो पर अपनी मुहर लगा चुका हूँ.अब लग रहा है कि जल्द ही इस गिनती मे दो गांडे और जुड़ने वाली है.
बीना: बच्चियों की गान्डो को ध्यान से चोदना, नहीं तो अगली बार थूकने भी नहीं देंगी.
बिहारी: एक बार ग़लती कर चुका हूँ, बार बार थोड़े करूँगा.
रात करीब 8:00 बजे वीरेंदर के सेल पर बीना की कॉल आई. वीरेंदर ने नंबर. देखा तो झट से फोन उठा लिया.
बीना: क्या हुआ रोमीयो, सुबह तुम्हे कॉल किया था, तुमने रिसीव ही नहीं किया.
वीरेंदर: वो मैं तब उस समय ऑफीस मे था, पता ही नहीं लगा.
बीना: क्या??? तुमने ऑफीस शुरू कर दिया? देखो जानू अभी तुम्हें आराम की ज़रूरत है, वैसे भी अभी तुम्हारे लिए आशना है, काम तो होता ही रहेगा. थोड़ा टाइम उसे भी दो ताकि वो तुम्हारे करीब आ सके.
वीरेंदर: उसे ही घुमाने के लिए ले गया था और जाते जाते शोरुम पर थोड़ी देर रुक कर वहाँ के काम का जायज़ा लिया.
बीना: ओके, तो कहाँ तक बात पहुँची.
वीरेंदर:आ जाएगी धीरे धीरे लाइन पर, टाइम तो लगेगा थोड़ा सा.
बीना: जल्दी से मना ले ना उसे राजा, मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती.
वीरेंदर: मेरा हाल भी तेरे जैसा है मगर मुझे नहीं लगता कि वो इतनी जल्दी हां करेगी.
बीना: खैर तुम लगे रहो, मुझे पूरा यकीन है कि वो तुम्हे ना नही करेगी, कोशिश करते रहो, फल ज़रूर मिलेगा.
वीरेंदर जो कि आज आशना के जाने की बात सुनकर टूट गया था, बीना की बातें सुनकर उसे थोड़ा हॉंसला हुआ.
वीरेंदर:मैं कल शाम को बॅंगलॉर जा रहा हूँ कुछ बिज़्नेस डील है, सोच रहा हूँ कि आशना को भी साथ ले जाऊ.
बीना एक दम खुश होते हुए:यह तो बड़ी अच्छी बात है. हो सकता है इसी ट्रिप में वो तुम्हे आक्सेप्ट करले. ऑल दा बेस्ट, लेकिन एक बात याद रखना, जल्दी आ जाना और अपनी सुहागरात अपने घर पर ही आकर मानना, कहीं बॅंगलॉर मे ही हनिमून शुरू ना कर देना.
वीरेंदर: डॉन'त वरी,, तुम्हारी बेटी के साथ जो कुछ भी करूँगा, सबसे पहले "शर्मा निवास" में ही करूँगा.
बीना: अच्छा चल बाइ, टेक केर ऑफ युवरसेल्फ आंड आशना इन जर्नी.
वीरेंदर ने फोन काट दिया. वीरेंदर आशना को इतनी आसानी से अपनी ज़िंदगी से जाने नहीं देना चाहता था. उसने ठान लिया था कि वो भी आशना को बिना बताए बॅंगलॉर चला जाएगा और उसे मनाने की कोशिश करेगा. वो कम से कम एक बार तो आशना को अपने दिल की बात बताना ही चाहता था.