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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



रागिनी को जब यह पता चला कि विराट ने आशना को खाने में नींद की गोलियाँ दे दी हैं, तभी से उसकी चूत फडक रही थी और उस पर सेक्स वर्धक दवाई के कारण वो और भी उत्तेजित हो चुकी थी. उसने मन में ठान लिया था कि एक बार वीरेंदर उसके कमरे मे आ जाए. वो आज किसी भी कीमत पर उसे सुबह तक अपने कमरे में रखेगी और जी भर कर उसके लोड्‍े से चुदेगि. उसके बाद चाहे विराट कुछ भी कहें लेकिन वो वीरेंदर से ज़रूर चुदवायेगी. रागिनी को यह नहीं पता था कि विराट ने उसके कमरे में कॅमरा छुपा रखा है. बिहारी ने सोच रखा था कि जैसे ही वीरेंदर अपने कमरे से निकल कर नीचे की तरफ आएगा, वो किसी तरह रागिनी से नज़र बचाकर कॅमरा ऑन कर देगा और फिर उस कमरे से निकल जाएगा.

वीरेंदर और आशना को कमरे मे गये हुए काफ़ी देर हो चुकी थी. बिहारी का दिल बैठा जा रहा था. उसे शक होने लगा कि कहीं वीरेंदर उत्तेजना में, आशना से ही सेक्स ना कर ले. अगर ऐसा हो जाता है तो उसका बना बनाया खेल बिगड़ जाता क्यूंकी एक बार आशना अगर वीरेंदर से चुद जाती तो फिर वीरेंदर कभी भी रागिनी के जाल में फँस नहीं पाएगा.

रागिनी: विराट, उन्हे कमरे में गये हुए तो काफ़ी समय हो गया है. कहीं वीरेंदर आशना के साथ ही तो.........

बिहारी की आँखो में डर और गुस्से के मिले जुले एक्सप्रेशन देख कर रागिनी चुप हो गयी.

बिहारी के चेहरे पेर चिंता की लकीरें उभर आई थी. किसी अनहोनी की आशंका को लेकर उसके दिल की धड़कन बार बार थम रही थी.

बिहारी(मन में): साली आशना ने तो सारा खेल ही पलट दिया. नींद की गोलियाँ भी इस पर बेअसर हैं, यह तो मेरा सारा खेल ही बिगड़ देगी आज की रात.

रागिनी: क्या हुआ विराट???? आप इतने चिंतित क्यूँ लग रहे हैं????

बिहारी: चिंता तो होगी ही ना, अगर वो आज की रात यहाँ नहीं आया तो समझ लो कि आशना ने उसे अपना सब कुछ दे दिया है. इस सूरत मैं वो कभी तुम्हारे जाल मैं फँसने वाला नहीं.

रागिनी: नहीं ऐसा नहीं हो सकता, मैं ऐसा कभी नहीं होने दूँगी.

बिहारी: क्या करोगी तुम????

रागिनी: कुछ भी करूँगी लेकिन वीरेंदर पर पहला हक मेरा है और वो मैं किसी को भी छीनने नहीं दूँगी. एक बार बस एक बार आशना अपने कमरे में चली जाए, उसके बाद तो मैं खुद ही उपेर जाकर वीरेंदर के कमरे में जाकर उसे उत्तेजित करके अपने कमरे में आने के लिए मजबूर कर दूँगी.

बिहारी: तुम यहीं रूको मैं देख कर आता हूँ कि वो दोनो इतनी देर से कर क्या रहें है.

बिहारी उपर पहुँचा तो वीरेंदर के कमरे का दरवाज़ा तो थोड़ा सा खुला हुआ था मगर अंदर बिल्कुल अंधेरा था.

बिहारी(मन में): यहाँ तो साला बिल्कुल अंधेरा है, कहीं सच में आशना की चुदाई तो नहीं कर रहा वीरेंदर. अब अंदर का नज़ारा कैसे दिखे.

तभी उसे दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और साथ ही कमरे में थोड़ी सी रोशनी भी फैली. एक पल के लिए तो बिहारी पीछे पलटा लेकिन तभी उसे एहसास हुआ कि वॉशरूम का दरवाज़ा खुला है और उसी से कमरे में रोशनी फैली है. बिहारी की नज़र बिस्तर पर पड़ी तो वो यह देख कर हैरान रह गया कि वीरेंदर गहरी नींद में सो रहा है.

आशना वीरेंदर के पास पहुँची तो बिहारी ने देखा कि उसके बाल गीले थे. बिहारी समझ गया कि आशना नहा रही थी. ज़्यादा रोशनी ना होने के कारण बिहारी को सॉफ तो कुछ नहीं दिख रहा था मगर वो इतना तो देख सकता था कि आशना ने वोही कपड़े पहने हुए है जो कि उसने खाना खाते वक्त पहने थे.

बिहारी(मन में): शूकर है साली बच गई, मेरी तो जान ही निकल गई थी.

तभी आशना ने पीछे मुड़कर दरवाज़े की तरफ देखा लेकिन बिहारी फुर्ती से पीछे हटा और तेज़ी से भाग कर नीचे आ गया. बिहारी झट से रागिनी के कमरे मे घुसा और दरवाज़े के पीछे छुपकर वीरेंदर के रूम की तरफ देखने लगा. कुछ सेकेंड्स के बाद आशना कमरे से बाहर निकली और वीरेंदर के रूम का दरवाज़ा अच्छे से बंद करके अपने कमरे में चली गई.

बिहारी ने चैन की सांस ली. तभी बिहारी के कंधे पर रागिनी ने हाथ रखा तो बिहारी की चीख निकलते निकलते रुक गई.

रागिनी: क्या हुआ????

बिहारी (बौखलाया हुआ): साली तूने तो मुझे डरा ही दिया.

रागिनी: यह किस तरह से बात कर रहे हैं आप विराट.

बिहारी ने फॉरन अपना लहज़ा ठीक किया और बोला: सॉरी, मेरा मतलब तुमने तो मुझे डरा ही दिया यार.

रागिनी: लेकिन हुआ क्या???आप इतना हाँफ क्यूँ रहे हैं????

 


बिहारी ने उसे सारी बात बताई तो रागिनी मुस्कुराइ और बोली "अब देखना थोड़ी ही देर में वीरेंदर मेरे कमरे में होगा".

बिहारी: लेकिन, नींद की गोलियाँ मैने आशना को खिलाई और घोड़े बेच कर साला वीरेंदर सो रहा है, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.

रागिनी(कुछ याद करते हुए): कहीं आपने नींद की गोलियाँ मटन की कटोरी में तो नहीं डाली थी.

बिहारी: क्या??? हां, मेरा मतलब तुम्हे कैसे पता????

रागिनी: हो गया सत्यानाश. आपके जाने के बाद तो मटन की कटोरी तो उन दोनो ने एक्सचेंज कर ली थी.

बिहारी ने जब यह सुना तो धडाम से सोफे पेर बैठ गया.

रागिनी: क्या हुआ????

बिहारी: होना क्या है, अब तो वो सुबह ही उठेगा. अब हो गया आज की रात का सत्यानाश.

रागिनी(बिहारी के चेहरे पेर उंगली फिराते हुए): अभी रात ख़तम कहाँ हुई है, अभी तो यह भी मेरी तरह जवान है और मेरा पति मेरे साथ है.

बिहारी(मन में): इस से अच्छा तो यह होता कि साली नींद की गोलियाँ इसे ही दे देता. अब यहाँ यह चूत की आग से भड़क रही है और वहाँ आशना की चूत भी लार टपका रही होगी.

बिहारी: आज की रात हम कुछ नहीं कर पाएँगे, आशना अभी तक जागी हुई है. कहीं उसे शक ना हो जाए.

रागिनी: उसे कैसे पता चलेगा कि आप मेरे कमरे मैं हो.

बिहारी: नींद तो उसे भी नहीं आएगी आज की रात, मैं जानता हूँ. आख़िर वीरेंदर ने उसे आज की रात फिर से तड़प्ता जो छोड़ दिया.

रागिनी, बिहारी का हाथ पकेड़ते हुए उसे बेड पर ले जाती है और बोलती है: अगर उसने नीचे आकर हमे देख भी लिया तो आप उसे पकड़ कर यहीं चोद देना, मैं बिल्कुल बुरा नहीं मानूँगी.

बिहारी ने रागिनी को गले से लगा लिया और बोला: ऐसी बातें मत कर पगली, मुझे कुछ हो जाता है.

रागिनी: मैं समझ सकती हूँ विराट. वीरेंदर के साथ आज ऑफीस में मुझे भी कुछ अलग ही रोमांच हुआ था.

बिहारी: अगर आज वीरेंदर यहाँ आ जाता तो क्या तुम भी उस से चुदवा लेती.

रागिनी ने बिहारी को कस कर भींच लिया और शरमा कर धीरे से हां मे गर्दन हिलाई. बिहारी के हाथ एक दम से रागिनी के नितंबों पर चले गये और वो उन्हे मसल्ने लगा.

रागिनी: आह विराट, मेरी प्यास भुजा दो, प्लीज़ मैं बहुत प्यासी हूँ.

बिहारी: जानता हूँ रागिनी कि तुम बहुत प्यासी हो और उपर आशना भी इस वक्त काफ़ी प्यासी होगी.

रागिनी: तो मुझे आशना समझ कर चोद ले बिहारी.

इतना सुनते ही बिहारी के लंड ने एक हुंकार भरी और उसके लंड मैं तनाव आने लगा.

रागिनी: चोद दो अपनी आशना को काका, बहुत तड़प रही है इसकी चूत.

बिहारी: हां आशना, मैं तुम्हे ज़रूर चोदुन्गा, आज सारी रात तुम्हारी चूत और गान्ड बजाउन्गा, तू चिंता ना कर.

रागिनी(खुशी से बिहारी की आँखो में देखते हुए): सच काका?????

बिहारी: हां आशना सच, आज तेरी प्यास जी भर कर भुजा दूँगा मैं.

दोनो के कपड़े उनके जिस्मों से कब जुदा हुए और कब बिहारी ने अपना फनफनाता हुआ लोड्‍ा रागिनी की गरम चूत मे पेला उन्हे पता ही नहीं चला. कमरे मे एक दम से तूफान आ गया. रागिनी दो बार झड चुकी थी लेकिन बिहारी बिना रुके रागिनी को लगातार चोदे जा रहा था.

जिस वक्त बिहारी और रागिनी कमरे मैं धुआँधार चुदाई कर रहे थे, ठीक उसी वक्त एक साया किचन से निकल कर हाल में दाखिल हुआ. दबे पावं पहले तो वो सीडीयों की तरफ बढ़ा लेकिन फिर रागिनी के कमरे से आती थप थप की आवाज़ सुनकर वो साया उस कमरे की तरफ चल पड़ा. रागिनी के कमरे का दरवाज़ा अभी भी खुला हुआ था और वो साया ठीक दरवाज़े के पास खड़ा होकर अंदर का नज़ारा देखने लगा. काफ़ी देर तक वो साया बिना किसी हरकत के वहीं खड़ा रहा.

तभी रागिनी की नज़र दरवाज़े की तरफ पड़ी और वो एक दम चौंक गई.

रागिनी: आआहह, विराट कोई है, पीछे कोई है.

इस से पहले के बिहारी पीछे देखता, वो साया तेज़ी से पीछे की ओर हुआ और कहीं गायब हो गया. बिहारी ने पहले रागिनी की तरफ देखा, फिर दरवाज़े की तरफ देखा और फिर दोबारा से रागिनी की तरफ.

बिहारी: कोई नहीं है रागी, तुम्हारा वहम है और यह कहकर उसने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए.

रागिनी: आह, विराट एक मिनट रूको तो सही, सच मैं कोई था दरवाज़े पर.

बिहारी गुस्से से रागिनी के उपर से उठा और बोला: साली तेरा हो गया तो अब बहाने बनाती है.

रागिनी: नहीं विराट, सच में कोई था वहाँ पर.

बिहारी: ज़्यादा नाटक मत कर. अब वीरेंदर का लोड्‍ा पसंद आ गया है तो मेरे लोड्‍े से चुदने में मज़ा नहीं आ रहा तो बहाने बनाती है.

इतना सुनते ही रागिनी की आँखो मे नमी उतर आई.

रागिनी: प्लीज़ विराट ऐसा मत कहिए. यह सब मैं आप के लिए ही तो कर रही हूँ.

बिहारी: चुप कर साली, मेरे लिए नहीं बल्कि तू यह सब अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिए कर रही है. मैने तो सिर्फ़ तुझे वीरेंदर को फ़साकर प्रॉपर्टी के काग़ज़ बदलवाने के लिए बोला था मगर तूने तो दो दिन में ही उसका लोड्‍ा भी चूस लिया और आज अगर वो ग़लती से नींद की गोलियाँ ना खा गया होता तो अब तक तो उसे अपनी चूत में निगल भी गयी होती.

 


रागिनी के दिल पर बिहारी का हर शब्द तीर की तरह लग रहा था.

रागिनी(रोते हुए):प्लीज़ विराट मुझ पर भरोसा रखिए, यह सब मैं आप के लिए ही कर रही हूँ. हां मैं मानती हूँ कि सेक्स के नशे मैं मुझे अपने आप पर कंट्रोल नहीं रहता मगर यह सब शुरू तो मैने आपको आपका हक दिलाने के लिए ही किया है ना. सोचो कों सी पत्नी अपने पति को उसके हक़ की दौलत दिलाने के लिए इस तरह करेगी.

बिहारी: वोही तो मैं कह रहा हूँ कि कॉन सी बीवी अपने पति के होते हुए किसी और का लंड चूसेगी और मोका मिलने पर उस से चुदने को भी तैयार हो जाएगी. यह सब तू मेरे लिए नहीं बल्कि अपनी चूत की गर्मी शांत करने के लिए कर रही है.

अचानक से रागिनी की आँसुओ से गीली आँखो में आक्रोश भर गया और वो बिहारी की तरफ नफ़रत से देखते हुए बोली: तुझे मुझ पर यकीन नहीं है ना तो जा, कर ले जो करना है. मैं वीरेंदर से तो क्या हर उस मर्द से चुदवाउन्गी जो मेरी भूख शांत कर सके. नहीं जी सकती अब मैं अपने दिल के अरमान दबाकर, बहुत हो गया यह सब, अब मैं वोही करूँगी जो मैं चाहूँगी. देखती हूँ कि मेरे रास्ते में कॉन आता है.

बीना ने मेरी शादी तेरे से करवाकर जो पाप किया था उसे उसकी सज़ा मिल गयी. एक बार भी उसने नहीं सोचा कि तुझ जैसे आदमी से मेरी शादी करकर वो मेरे साथ कितना बड़ा धोखा कर रही है. साली वो तो थी ही नरक जाने लायक.

रागिनी का चन्डी रूप देखकर बिहारी एक दम हैरान रह गया. रागिनी ने फर्श पर पड़े बिहारी के कपड़े उठाकर बिहारी के मुँह पर मारकर कहा, दफ़ा हो जा यहाँ से और फिर कभी मेरे कमरे में आने की हिम्मत नहीं करना. तुझे अगर इस घर में रहना है तो कल से मेरे सामने अपनी नज़रें नीची ही रखना वरना वीरेंदर से कहलवाकर तुझे धक्के देकर घर से बाहर फिकवा दूँगी.

बिहारी की बोलती बंद हो गई थी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया.

बिहारी(नरम लहज़े में):देखो रागिनी...........

रागिनी: चुप चाप निकल जा वरना मैं शोर मचा कर तेरी पोल अभी के अभी खोल दूँगी. वीरेंदर मुझे निकालने से तो रहा मगर तुझे ज़रूर इतनी रात को धक्के देकर घर से निकाल देगा.

बिहारी(कमीनी मुस्कुराहट के साथ): तुझे क्या लगता है कि तूने वीरेंदर का लोड्‍ा चूस लिया तो वो तेरे क़ब्ज़े में आ गया, यह तेरी भूल है रागिनी. वो तुझे भी धक्के देकर बाहर निकाल देगा. मेरे पास तो ऐसे सबूत हैं जिन के दम पर मैं आशना को घर से बाहर भी निकलवा सकता हूँ और प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा अपने नाम भी करवा सकता हूँ.

रागिनी: निकाल देगा तो तुझे क्या लगता है मैं भूखी मर जाउन्गी. मैं जवान हूँ अभी, तेरी तरह पाएर कबार मैं नहीं लटके हैं मेरे. अपना जिस्म बी बेचुंगी ना, तो भी अपना पेट आराम से पाल सकती हूँ.

पैंतरा बदलते हुए बिहारी ने ग्लास में पानी डाला और रागिनी की तरफ करते हुए कहा: अपने पति के होते हुए तुम अपना जिस्म क्यूँ बेचोगी, लानत है मुझ पर. इस से पहले मैं मर जाना बेहतर समझता हूँ.(रागिनी ने बिहारी से ग्लास नहीं लिया और अपना मुँह फेर कर दूसरी तरह खड़ी हो गई)

बिहारी: तुम तो जानती हो कि मैं तुम्हे उत्तेजित करने के लिए यह सब कहता और करता हूँ, तुम तो एक दम बुरा मान जाती हो.

रागिनी बेड पर बैठ कर अपने हाथ सिर पर रखकर रोने लगी. बिहारी भी उसके साथ बैठ गया और अपना एक हाथ रागिनी के कंधे पर रख दिया. रागिनी ने झटके से उसका हाथ दूर फैंक दिया और लगातार रोती रही. बिहारी ने भी चुप रहने में ही समझदारी समझी. रागिनी काफ़ी देर तक रोती रही और बिहारी चुप चाप वहीं पर बैठा रहा.

करीब 15-20 मिनट तक रागिनी सिर झुकाए रोती रही और जब उसके आँसू थमने लगे तो बिहारी ने हिम्मत करके अपना हाथ उसके कंधे पर रखा और उसे अपने सीने से लगा लिया. बिहारी के सीने से लगते ही रागिनी का फुट फुट कर रोना फिर से शुरू हो गया लेकिन इस बार उसने बिहारी की हरकत का विरोध नहीं किया.थोड़ी देर बाद रागिनी, बिहारी पर लूड़क सी गयी. बिहारी ने देखा कि रागिनी रो रो कर बहाल हो गई है.

बिहारी: रागी, ओ रागी. उठो ना रागी, देखो तुम्हारा विराट तुम्हारे पास ही है, तुम्हे किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है.

रागिनी ने होश संभाला और बिहारी को कस कर पकड़ लिया. बिहारी ने चैन की सांस ली.

बिहारी(मन में): साली तू तो सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है, तुझे हलाल कैसे करूँ. चाहूं तो तुझे भी बीना की तरह हमेशा हमेशा के लिए लंबी नींद सुला दूं मगर तू तो मेरा राज योग है. तुझे तो वक्त आने पर ही मारूँगा साली. एक बार आशना को अपने नीचे लिटा लूँ फिर तेरी भी कुर्बानी दे दूँगा.

बिहारी: सम्भालो अपने आप को रागिनी, अगर तुम्हे मेरा मज़ाक बुरा लगता है तो आज के बाद मैं कभी भी तुमसे ऐसी बात नहीं करूँगा.

रागिनी ने झट से अपना चेहरा उठाकर बिहारी की तरफ देखा. लगातार रोने से रागिनी की आँखें लाल हो गई थी और उसका चेहरा उसके दिल का दर्द बयान कर रहा था.

रागिनी(दुखी स्वर में):मज़ाक???? यह मज़ाक था विराट????मेरा दिल दुखाकर कहते हो कि मज़ाक किया था.

बिहारी: कसम से रागिनी, आज के बाद तुमसे ऐसी कोई बात नहीं करूँगा जिस से तुम्हे दुख पहुँचे. मेरा दिल चीर कर देख लो, मैं तुमसे बेपनाह प्यार करता हूँ और तुम्हे दुख देने का कभी सोच भी नहीं सकता. वो तो मुझे लगा कि तुम मुझसे बचने के लिए मुझे उठने के लिए बोल रही हो. तुम खुद तो झड चुकी थी, मैं भी बहुत करीब था. लेकिन उस से पहले तुमने जब मुझे उपेर से हटने को कहा तो मेरा दिमाग़ घूम गया. तुम तो समझ सकती हो ना जब सेक्स अधूरा रह जाए तो कितनी बेचैनी होती है.

रागिनी: लेकिन मैने तो कभी भी आपको शिकायत नहीं की इस बारे में विराट.

बिहारी: इसी लिए तो मैं तुम्हारी कदर करता हूँ रागिनी, तुम मुझे और मेरी हर मजबूरी को समझती हो.

रागिनी: प्लीज़ विराट, आज के बाद कभी मुझे इस तरह हर्ट ना करना.मैं जो भी कर रही हूँ आप के लिए कर रही हूँ और आगे जो भी करूँगी आप के लिए ही करूँगी.

बिहारी: तो चलो फिर, झट से कुतिया बन जाओ और मुझे अपनी गान्ड मरने दो ताकि वीरेंदर से पहले मैं तुम्हारा हर छेद खुला कर दूं और तुम उसे आसानी से अपने हर छेद मैं निगल सको.

रागिनी ने शरमा कर अपना चेहरा बिहारी की छाती में छुपा दिया और हां में गर्दन हिलाई. वीरेंदर के लिए रागिनी की हां पाकर बिहारी के लोड्‍े ने एक हुंकार भरी और थोड़ी देर पहले हुई अपनी बेइज़्ज़ती को भूल कर फिर से खड़ा होने लगा.

उस रात बिहारी ने एक बार रागिनी की गान्ड और दो बार उसकी चूत मारी और सुबह 4:00 बजे आकर अपने कमरे मैं सो गया.रागिनी भी संतुष्ट होकर वीरेंदर से चुदने के हसीन सपने लेती हुई सो गई.

सुबह सबसे पहले आशना उठी या यूँ कहें कि वो सारी रात सो ही नहीं पाई. उस सेक्स वर्धक दवाई ने आशना के जिस्म में ऐसी उत्तेजना भर दी कि वो सारी रात आहें ही भरती रही और करवटें बदल बदल कर रात के बीतने का इंतज़ार करती रही.

सुबह 6:00 उठकर आशना ने सबसे पहले करीब 4 महीनों के बाद हेर रिमूवर यूज़ करके अपने गुप्ताँग को अच्छे से सॉफ किया. आशना ने अपनी टाँगे और बाजुएँ भी वॅक्स कर दी और फिर स्नान किया और फिर बाल सुखाकर तैयार हो गई. आज आशना ने एक डार्क ब्लू कलर का स्लीवेलेस्स टॉप जिस पर फ्रंट मे ठीक उसके वक्षो के उपेर क्रीम कलर से "गेस वॉट" लिखा हुआ था और नीचे उसने लाइट येल्लो कलर की कॅप्री पहनी थी जो कि उसकी जाँघो और नितंबो से चिपकी हुई थी.

 


आशना ने डार्क ब्लू कलर की माथे पर एक छोटी सी बिंदी लगाई और हल्का सा मेकप करके लाइट पिंक कलर की लीप ग्लॉस लगाई जिस से उसके नॅचुरल पिंक लिप्स ग्लो करने लगे. 8:00 बजे तक अच्छी तरह तैयार होकर वो वीरेंदर के कमरे के पास पहुँची.

जैसे ही वो नॉक करने को हुई उसके कानो मे आवाज़ पड़ी "आज मौसम बड़ा बेईमान है बड़ा, बेईमान है आज मौसम. आने वाला कोई तूफ़ा....................आशना ने बोल्ट घूमाकर धडाक से दरवाज़ा खोला.

आशना को देखकर वीरेंदर की आँखो में चमक आ गई और बोला: आ गया तूफान.

आशना, मुस्कुराइ और बोली "गूडमॉर्निंग हॅंडसम'.

वीरेंदर: मॉर्निंग सेक्सी.

आशना ने मुस्कुराते हुए गुस्से से उसे आँखें दिखाई और बोली:आज बड़ी जल्दी उठ गये आप.

वीरेंदर: आज तो बहुत बड़ा दिन है.

आशना: क्यूँ, आज क्या है?

वीरेंदर: आज मेरी सेक्सी गर्लफ्रेंड मेरा मुँह मीठा करवाने वाली है.

आशना शरमा गई और बोली: तो इस खुशी में जनाब जल्दी उठ गये.

वीरेंदर: रात को इतनी ज़बरदस्त नींद पड़ी के खवाब लेने की होश भी ना रहा तो सोचा सुबह जल्दी उठ कर खवाब को हक़ीकत में ही बदल दूँ.

आशना: बड़े आए खवाब को हक़ीकत में बदलने वाले. आप खवाब ही देखो और जैसे ही आशना मुड़ने लगी, वीरेंदर ने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ घुमा कर उसे अपने नज़दीक खींच लिया.

आशना ने अपने दोनो हाथ मोड़ कर अपने और वीरेंदर के बीच रख दिए. आशना ने शरमा कर वीरेंदर की तरफ देखा और ना में धीरे से गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: आज, तुम कुछ नहीं बोलोगि. कोई कुछ नहीं बोलेगा.

 


आशना के दिल की धड़कन बढ़ने लगी.वीरेंदर का चेहरा धीरे धीरे आशना के चेहरे के करीब आने लगा. आशना की आँखें बंद होने लगी. उसकी साँसों में एकदम तेज़ी आ गई. वीरेंदर का चेहरा धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था. आशना के होंठ थरथराने लगे. वीरेंदर की पकड़ आशना की बाज़ुओं पर मज़बूत होने लगी. आशना ने जैसे ही वीरेंदर की साँसों को अपने चेहरे पर महसूस किया तो उसका चहरा शरम से और भी गुलाबी हो गया.वीरेंदर ने मज़बूती से आशना को अपनी तरफ खींचा. आशना की साँस ही अटक गई. उसका शरीर काँपने लगा. तभी वीरेंदर की पकड़ आशना की बाज़ुओं पर एक दम ढीली हो गई.

आशना ने झट से आँखें खोल कर वीरेंदर की तरफ देखा तो पाया कि वीरेंदर उसे देख कर मुस्कुरा रहा था. वीरेंदर: ब्रश किया है ना?

यह सुनते ही आशना ने वीरेंदर के गले में बाहें डाल कर अपने हाथ उसके सिर के पीछे लेजा ते हुए अपने नरम गुलाबी होंठ वीरेंदर के मर्दाना होंठो से चिपका दिए. वीरेंदर की आँखें एकदम हैरानी से खुल गई.

उसके गले से गून गून की आवाज़ निकलने लगी. आशना वीरेंदर के होंठो को चबाए जा रही थी. वो वीरेंदर के उपरी लिप्स को अपने होंठो में लेकर उन्हे चूसने लगी. वीरेंदर अभी भी हैरान परेशान था.

आशना ने अपने हाथों नीचे ले जाते हुए वीरेंदर के हाथों को पकड़ा और उन्हे अपनी कमर पर रख दिया. आशना ने फिर से अपने हाथ वीरेंदर के सिर के पीछे रख कर ज़ोरदार तरीके से वीरेंदर के लब चूसना शुरू कर दिया. वीरेंदर के हाथ जैसे ही उसकी कमर पर कसे, आशना ने अपनी जीभ वीरेंदर के मुँह में घुसा दी और वीरेंदर ने भी अपना मुँह खोलकर उसकी जीभ का स्वागत किया.

वीरेंदर के हाथ अब आशना की पीठ पर घूम रहे थे. वीरेंदर के लंड में तनाव आने लगा. उसने आशना के नितंबों को ज़ोर से दबा कर आशना की योनि को अपने लिंग के साथ सटाया तो दोनो के गले से एक हूंक निकली. कमरे में बस दो धड़कते दिलों का शोर और होंठो के चूसने का शोर गूँज रहा था. वीरेंदर ने ज़ोर से उसके नितंब मसलना शुरू कर दिया और आशना ने भी अपनी योनि वीरेंदर के लिंग पर रगड़ना शुरू कर दी.

वीरेंदर के कमरे में उठा तूफान करीब 15 मिनट तक चला. मदहोशी में आकर वीरेंदर ने अपने हाथ आशना की पीठ पर लपेट कर उसे अपने साथ ज़ोर से भींचा तो आशना के कड़क निपल्स वीरेंदर के सीने में चुभ गये.

वीरेंदर(किस तोड़ते हुए): ऊउच, यह क्या है????

आशण ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और इशारे से पूछा.

वीरेंदर: मेरे सीने में कुछ चुभा.

आशना ने प्यार भरा गुस्सा दिखाते हुए वीरेंदर की तरफ देखा और शरमा कर अपने हाथ अपने चेहरे पर रख दिए.

वीरेंदर: बड़े कड़क हैं यार, मेरे सीने में तो होल ही कर दिया.

आशना ने झट से हाथ चेहरे से हटाए और बोली: अच्छा और आपका वो तो जैसे..................

आशना को जैसे ही अपनी ग़लती का एहसास हुआ वो एक दम से खामोश हो गई.

वीरेंदर मुस्कुरा उठा और बोला: मेरा वो तो अपनी सही जगह ही ठोकर मार रहा था बस बेचारा कपड़ों की दीवार के कारण दिल मसोस कर रह गया. देखो बेचारा कैसे मुँह उठाए तुम्हारी तरफ देख रहा है.

आशना ने शर्मा कर वीरेंदर की तरफ देखा और झट से मुँह फेर कर खड़ी हो गई और बोली: लोफर कहीं के. कितनी गंदी गंदी बातें करते हैं आप.

वीरेंदर:आअहह आशना यह क्या दिखा रही हो यार , मेरी तो पॅंट ही फट जाएगी ऐसे.

आशना ने गर्दन घुमा कर वीरेंदर की तरफ सवालिया नज़र से देखा और जैसे ही उसे समझ में आया कि वीरेंदर किस बारे में बात कर रहा है, वो झट से भाग कर रूम से बाहर निकल गई और बोली: चलो हटो बेशरम नंबर. 1. आप कभी नहीं सुधरोगे.

वीरेंदर: पहले बिगड़ने तो दो यार.

आशना: मैं नीचे जा रही हूँ और अगर आपको ब्रेकफास्ट चाहिए तो 5 मिनट में नीचे आ जाना.

वीरेंदर: ब्रेकफास्ट में मीठा मिलेगा????

आशना, वीरेंदर को ठेंगा और जीभ दिखाकर आगे बढ़ गई.

आशना जैसे ही नीचे पहुँची, रागिनी हाल में बैठी हुई थी. आशना को देख कर रागिनी एक दम उठी और बोली "गुड मॉर्निंग दीदी".

आशना(चहकते हुए): "मॉर्निंग", अरे बैठो बैठो मैं तुम्हारी बॉस नहीं हूँ.

आशना की रिप्लाइ सुनकर रागिनी की जान में जान आई.

रागिनी(मन में): तो इसका मतल्ब रात को हमे देखने वाली यह चुड़ैल नहीं थी.

आशना भी रागिनी के पास जाकर बैठ गई और बिहारी को आवाज़ लगा कर पूछा: काका, ब्रेकफास्ट में क्या बना रहे हो????

बिहारी(किचन से): बिटिया, आज सॅंडविच, जूस और दलिया बनाया है.

आशना: वाउ, आज एकदम लाइट ब्रेकफास्ट. आज तो मज़ा आ जाएगा.

आशना(रागिनी से): आज का क्या प्रोग्राम है????

रागिनी: मेरा क्या प्रोग्राम, ब्रेकफास्ट के बाद ऑफीस और फिर शाम को घर.

आशना: क्या यार देल्ही आते ही इतनी बोरिंग लाइफ, तुम्हारा दिल नहीं घबराता क्या???

रागिनी: अब जॉब भी तो ज़रूरी है ना दीदी.

आशना: आज दोपहर को हम शॉपिंग जा रहे हैं. तुम्हारे बॉस से मैं बात कर लूँगी, ओके???

रागिनी: वाउ, शॉपिंग, फिर तो खूब मज़ा आएगा.

तभी वीरेंदर भी सीडीयाँ उतरता हुआ नीचे आया.

विरेडनेर: अकेले अकेले मज़ा ले रहे हो, क्या बात है???

आशना: आपको भी मज़ा लेना है????

वीरेंदर: अब तो लगता है मज़े वाले दिन शुरू हो गये हैं.

रागिनी: आप के तो मज़े शुरू हो गये हैं सर लेकिन हमारे बारे में भी तो सोचिए.

वीरेंदर: हां हां ज़रूर, आज कुछ सोचता हूँ.

 


रागिनी का दिल यह सुनकर खुश हो गया. वो समझ गयी कि रात वाला इंसान वीरेंदर भी नहीं था. तो क्या सच में रात तो उसकी आँखो को धोखा हुआ था???

तभी बिहारी गरमा गरम नाश्ता लेकर आ गया.

नाश्ता करते हुए, आशना बोली: वीरेंदर आज मैं भी आपके साथ ऑफीस जा रही हूँ और दोपहर को रागिनी को लेकर शॉपिंग चली जाउन्गी.

वीरेंदर: वो सब तो ठीक है, लेकिन मैं अकेला ऑफीस मैं क्या करूँगा????

आशना: आपको जो टेंडर मिला है, उसकी तैयारी भी तो करनी है.

वीरेंदर: वो तो मोहित संभाल लेगा. मुझे कोई टेन्षन नही है.

आशना: तो फिर शाम को जल्दी घर आ जाइएगा, शाम को हमे मेरी एक सहेली से मिलने जाना है. हम ने आज मिलने का प्रोग्राम बनाया है और डिन्नर भी उनके साथ ही करेंगे.

वीरेंदर: तो फिर ठीक है, डन.

नाश्ता करके करीब 9:00 बजे तीनों घर से निकल गये. वीरेंदर अपनी गाड़ी से गया. रागिनी को ना चाहते हुए भी आशना के साथ उसकी गाड़ी में जाना पड़ा. रागिनी के कलेजा जल गया था जब आशना ने उसे अपने साथ चलने को कहा लेकिन वो कर भी क्या सकती थी. रास्ते में दोनो बातें करती हुई टाइम पास कर रही थी.

आशना: रागिनी क्या तुम सारा दिन बोर नहीं हो जाती. ऑफीस से घर , घर से ऑफीस.

रागिनी: दीदी अभी 2-3 दिन ही तो हुए है, अभी से बोर होने लगी तो कोई भी जॉब नहीं कर पाउन्गी.

आशना: वो तो है, काफ़ी समझदारी वाली बातें करती हो यार तुम.

रागिनी: क्या दीदी, आप तो मेरी खिंचाई करने लगी.

आशना: और इतनी छोटी सी ही उम्र में इतने बड़े बड़े काम.

रागिनी को ऐसा लगा जैसे उसके कान मैं किसी ने पिघलता हुआ सीसा डाल दिया हो और उसका कलेजा मुँह को आने को हुआ. उसने हिम्मत करके आशना की तरफ देखा और बोली: क्या मतलब???

आशना(नॉर्मली मुस्कुराते हुए): अरे यार अभी तुम्हारी उम्र ही कितनी है लेकिन फिर भी तुमने अपने परिवार की ज़िम्मेदारी उठा ली और उनका पेट पालने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ कर जॉब कर रही हो.

रागिनी की सांस में सांस आई.

रागिनी: अब अपने परिवार के लिए तो इतना तो बनता ही है ना दीदी????

आशना: शायद तुम सही कह रही हो, परिवार क्या होता है और परिवार की क्या ज़िम्मेदारियाँ होती हैं, मैं शायद समझ नहीं पाउन्गी.

इसके बाद गाड़ी में खामोशी छा गयी.

थोड़ी देर बाद अचानक आशना ने पूछा: रागिनी तुम्हारा कोई बाय्फ्रेंड है क्या???रागिनी ने अचानक से हुए इस सवाल को सुनकर आशना की तरफ देखा. उसके दिल में एक दम डर समा गया कि शायद आशना ने कल रात तो उन्हे देख लिया हो.

रागिनी(हड़बड़ाहट में): जी??????

आशना(मुस्कुराते हुए): देखो मुझसे झूठ मत बोलना, इतना तो मैं यकीन से कह सकती हूँ कि तुम्हारा बाय्फ्रेंड तो है.

रागिनी: जी लेकिन आप इतने यकीन के साथ कैसे......

आशना, रागिनी की हालत देख कर हँसने लगी और बोली: रिलॅक्स यार, मैने तो ऐसे ही कहा था. वैसे तुम्हारी जैसी खूबसूरत और हॉट लड़की का बाय्फ्रेंड ना हो, ऐसा पासिबल तो नही है.

रागिनी(थोड़ा नॉर्मल होते हुए): ऐसी बात नहीं है दीदी, स्कूल में तो काफ़ी प्रपोज़ल आए थे मगर माँ-बाबूजी के डर से किसी को हां नहीं कर पाई. राजौरी(डिस्टिक. ऑफ जम्बू&कश्मीर) छोटा सा तो शहर है, अफेर जैसी खबर तो रातों रात फैल जाती है.

आशना: तो इसका मतलब अपने पेरेंट्स के डर के कारण तुमने इतने दिल तोड़ डाले.

रागिनी मुस्कुराइ और बोली: अब देल्ही आ गई हूँ, अब तो ज़रूर कोई ना कोई बना लूँगी.

आशना: हां लेकिन ध्यान से क्यूंकी यहाँ भी तुम्हारे चाचू हैं, कहीं उन्हे खबर ना हो जाए.

रागिनी(मन ही मन):उनकी पर्मिशन से ही तो वीरेंदर को फाँस रही हूँ.

रागिनी: खूबसूरत तो आप मुझसे कहीं ज़्यादा हैं और हॉट होने के साथ साथ सेक्सी भी हैं.

क्या वीरेंदर सर से पहले भी आपका कोई बाय्फ्रेंड था?

आशना मुस्कुराइ और फिर बोली: तुम्हे क्या लगता है इस बारे में?

रागिनी: अब किसी के दिल में क्या है, कॉन जान सकता है.

आशना: एग्ज़ॅक्ट्ली, यही सोच कर मैने कभी इस तरफ ज़्यादा ध्यान ही नहीं दिया कि क्या पता किसके दिल में क्या है और वो कब धोखा देकर छु मंतर हो जाए.

रागिनी: यह बात तो आपकी बिल्कुल सही है दीदी. लेकिन वीरेंदर सिर के दिल में क्या है,आपको लगता है कि आप सब जानती हैं???

आशना: वीरेंदर की बात अलग है. उन्हे जानने के लिए उनके साथ बस एक दिन गुज़ार लेना ही काफ़ी है. उनके मन में किसी के लिए कोई मैल नहीं है और ना ही उनकी सोच में किसी के लिए कोई घृणा. बस इसी खूबी के कारण मैं तुम्हारे सर को दिल दे बैठी.

रागिनी: वैसे आप मुझसे बड़ी हैं और नॅचुरली मुझसे ज़्यादा समझदार भी तो आप मुझे यह बताएँ कि लड़कों के साथ कहाँ तक फ्रॅंक होना चाहिए, मेरा मतलब................

आशना: इट्स ओके, मैं तुम्हारा मतलब समझती हूँ. देखो लड़के के सामने एक खुली किताब बन कर मत रहो, क्रेज़ को बरकरार रखने के लिए ज़रूरी है कि शादी तक उन्हे बस हसीन सपने दिखाओ और बहुत ज़रूरी होने पर थोड़ी बहुत टचिंग-किस्सिंग करो. ग़लती से भी अगर तुम उनकी डिमॅंड पूरी कर गई तो भूल जाओ कि वो तुमसे शादी करेगा.

रागिनी(मन में): सॉरी आशना, मेरा फंडा तुमसे डिफरेंट है. मेरे ख़याल से लड़के भूखे शेर की तरह होते हैं, जिन्हे एक बार खून लग जाए तो वो आपके पीछे कुत्ते की तरह दुम दबा कर भागेंगे.

आशना: क्या सोचने लगी?????

रागिनी: दीदी सोच रही हूँ कि अब जल्दी से कोई अच्छा सा लड़का देख कर उस से दोस्ती कर ही लूँ, यहाँ पर अकेले टाइम पास करना मुश्किल है.

आशना(खिलखिलाकर हंसते हुए): ऑल दा बेस्ट बट बी सेलेक्टिव इन चूजिंग दा राइट वन.

रागिनी: आइ विल दीदी.

यों ही बातों बातों में दोनो शोरुम पहुँचे. रागिनी जानती थी कि आशना के रहते उसका यहाँ पर कोई चान्स नहीं है. उसने भी धैर्य से काम लेने की सोची क्यूंकी आशना की बातों से उसे आशना पर शक सा हो गया था कि रात तो उन्हे देखने वाला शक्स शायद आशना ही थी. रागिनी ने आशना के साथ रहकर उसे ही टटोलने की सोची.

 


वीरेंदर आते ही टेंडर को लेकर अपने मनेजर और वॉर्कर्स के साथ बिज़ी हो गया था और आशना-रागिनी उसके ऑफीस में बैठी हुई बातें करती रही. अपने सारे वॉर्कर को इनस्टरकेशन देकर वीरेंदर भी अपने कॅबिन में आ गया.

वीरेंदर: लगता है पिछले सारे दिनों की कसर आज ही निकाल लेंगी आप दोनो.

आशना: अरे लड़कियों की बातें ख़तम कहाँ होती है और वो भी जब दोनो यंग हो.

वीरेंदर: वो तो है, यह बात तो माननी ही पड़ेगी.

रागिनी(वीरेंदर की आँखो में देखते हुए): सर, तो आप ही बंद कर दीजिए ना हमारा मुँह.

वीरेंदर, रागिनी का मतलब समझ गया और बोला: अब क्या क्या बंद करूँ मुझे तो खुद ही समझ नहीं आ रहा.

आशना ने हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर: सोच रहा हूँ कि सबसे पहले तो तुम दोनो का ऑफीस आना ही बंद कर दूँ.

रागिनी: क्यूँ, क्या आपको मेरा काम पसंद नहीं आया?????

आशना: क्या आपको मेरा ऑफीस आना बुरा लगता है????

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): अगर तुम दोनो रोज़ इस तरह ऑफीस आती रही तो वॉर्कर्स का सारा ध्यान तुम पर ही रहेगा, वो काम कब करेंगे.

आशना(मुस्कुराते हुए): आप वॉर्कर्स की चिंता रहने दीजिए, सीधा सीधा क्यूँ नहीं कहते कि मेरे यहाँ आ जाने से आपको काम करने में मुश्किल होगी.

वीरेंदर: हा हा हा हा बहुत जल्दी पकड़ लिया तुमने मुझे तो.

रागिनी: दीदी से पहले तो मैने पकड़ लिया सर.

आशना और वीरेंदर दोनो हैरानी से उसकी तरफ देखने लगे. वीरेंदर का दिल ज़ोर से धड़कने लगा.

आशना बोली: क्या मतलब????

रागिनी: वो दीदी आपके बोलने से पहले ही यह बात मेरे दिमाग़ में आ गई लेकिन बोल नहीं पाई.

आशना: यह सारे मर्द होते ही ऐसे हैं और यह कहकर उसने रागिनी को आँख मार दी. तुम ज़रा ध्यान से कोई लड़का चूज़ करना अपने लिए वरना वो भी तुम्हे ऐसे ही परेशन करता रहेगा.

रागिनी: आप दोनो बैठिए मैं चाइ का ऑर्डर देकर आती हूँ.

रागिनी के जाने के बाद, वीरेंदर बोला: आशना आज तुम क्या खरीदने जा रही हो???

आशना: कुछ ज़्यादा नहीं बस अपने और रागिनी के लिए कुछ ड्रेस और कुछ छोटा मोटा समान.

वीरेंदर: अपनी पसंद का शादी का जोड़ा भी खरीद लेना.

आशना का चेहरा शरम से एकदम लाल हो गया.

वीरेंदर: मैं जल्द से जल्द तुमसे शादी कर लेना चाहता हूँ, अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता.

आशना ने होंठ काँपने लगे, सच तो यह था कि वो भी अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी. वीरेंदर उसके जिस्म-ओ-जान पर छा गया था. इस से पहले के वो अपने इरादे से बदल जाए वो खुद को हमेशा हमेशा के लिए वीरेंदर के हवाले कर देना चाहती थी.

वीरेंदर: आज ही पंडित जी से शादी का मुहूरत पूछ लेता हूँ.

आशना खामोश रही मगर उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान वीरेंदर के दिल को एक सुखद अनुभूति दे रही थी.

वीरेंदर: लेकिन शादी से पहले मैं तुम्हारे सामने कुछ कन्फेस करना चाहता हूँ.

आशना ने प्यार भरी नज़रों से उसकी तरफ देखा.

वीरेंदर: मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ कि मेरी ज़िंदगी में तुम्हारे आने के बावजूद भी मैने कुछ ग़लतियाँ की हैं और मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए उन्हे माफ़ कर पाना बहुत मुश्किल है.

आशना ने झट से अपना हाथ वीरेंदर के होंठो पर रख दिया और रोनी सूरत बना कर उसकी आँखो में देख कर 'ना' में सर हिलाया.

वीरेंदर ने आशना का हाथ हटाकर कहा: आशना आज अगर तुमने मुझे नही बोलने दिया तो शायद मैं फिर कभी बोल नहीं पाउन्गा और मैं नहीं चाहता कि हमारी शादी के बाद तुम्हे कुछ ऐसी बातों का पता चले जो तुमने मुझे बताने से रोक दिया था.

आशना: मिस्टर. लोफर, आप एमोशनल भी हो, यह मैने आज ही जाना है.

वीरेंदर ने आशना के चेहरे को प्यार से पकड़ कर उसकी आँखो में देख कर कहा "आशना, आज की रात मैं तुम्हारे साथ गुज़ारना चाहता हूँ, अपना हर दुख , हर दर्द, हर गम तुमसे बाँटना चाहता हूँ, प्लीज़ मना मत करना".

आशना ने उसकी आँखो मे देख कर स्वीकृति मे सर हिलाया और वीरेंदर के गले लग कर बोली, " काश मैं भी आपकी तरह हिम्मत दिखा पाऊ".

वीरेंदर(चौंक कर): तो इसका मतलब तुम भी मुझे कुछ बताना चाहती हो. आशना ने उसके सीने से लगे लगे ही हां मैं गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: हे भगवान, अगर इस लड़की का पहले से कहीं लफडा हुआ तो मैं तुझे कभी माफ़ नहीं करूँगा.

आशना ने वीरेंदर की कमर पर चिकोटी काट ते हुए कहा " बेशरम कहीं के, कितना गंदा सोचते हैं ना आप मेरे बारे में".

वीरेंदर: अरे यह तो कुछ भी नहीं, अगर तुम्हे पता चल जाए कि मैं तुम्हारे बारे मे सोच कर क्या क्या प्लॅनिंग करता हूँ, तुम तो शरम से सर भी ना उठा पाओ.

आशना(आँखें बंद करके फडफडाते हुए होंठो से): उस सोच का आपको हक है वीरेंदर और यह कह कर वो फॉरन वीरेंदर से अलग हुई और उस से दूर जाकर बैठ गई.

वीरेंदर ने अपने वॉलेट से क्रेडिट कार्ड निकाला कर आशना को दिया.

आशना: यह क्या है????

वीरेंदर: अपनी होने वाली बीवी को उसके होने वाली पति की तरफ से पहली भेंट. एंजाय युवर शॉपिंग.

आशना ने झट से वीरेंदर के हाथ से कार्ड ले लिया. वीरेंदर कुछ समझ पाता या बोलता उस से पहले ही कॅबिन का डोर खुला और रागिनी अंदर दाखिल हुई.

तभी आशना का फोन बजा. आशना ने फोन पिक किया.

आशना: हाई जान.

त्रिवेणी: क्या यार तू जले पर नमक तो मत छिड़क. अब हम कभी एक दूसरे की जान नहीं बन सकते तू जानती है कि मैं विजय को दिल दे बैठी हूँ.

आशना: तू फिर शुरू हो गई.

त्रिवेणी: कहाँ यार शुरू होने से पहले हे तेरी-मेरी लव स्टोरी ख़तम हो गई.

आशना: अब बोलेगी भी कि फोन क्यूँ किया.

त्रिवेणी: बड़ी जल्दी मे है, इसका मतलब अपने पिया जी के साथ है. अच्छा सुन, आज का डिन्नर कॅन्सल. वो आक्च्युयली विजय को एक एमर्जेन्सी मीटिंग के लिए जाना पड़ा तो क्यूँ ना कल लंच पर मिलें. कल सनडे भी है तो टाइम की भी चिंता नहीं रहेगी.

आशना: जस्ट वेट, आइ शल अस्क हिम फर्स्ट.

आशना(वीरेंदर से): त्रिवेणी की कॉल है, आज का डिन्नर कॅन्सल करने के लिए बोल रही है और कल लंच का प्रोग्राम है. आपको कोई प्राब्लम तो नहीं कल के लिए?????

वीरेंदर ने आशना को थंब दिखाकर डन के लिए बोला.

आशना(त्रिवेणी से): ओके डन.

त्रिवेणी: लेकिन तेरे उनकी आवाज़ तो आई नहीं फोन पर.

आशना: हम एक दूसरे की आँखों की भाषा भी समझ लेते हैं.

त्रिवेणी: हाई मैं मर जावां, कहीं उनका मुँह कहीं और तो बिज़ी नहीं है.

आशना: शट अप, कल मिलते हैं और और उसने फोन काट दिया.

वीरेंदर: क्या हुआ????

आशना(चेहरा गुलाबी हो चुका था): कुछ नहीं, बस कल का प्रोग्राम फाइनल है.

वीरेंदर: वाउ तो आज की शाम सिर्फ़ मैं और तुम.

रागिनी का दिल यह सुनकर जल भुन गया.

 
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