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पत्नी संग दो पल प्यार के

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Antarvasna, sex stories in hindi: मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी से बिल्कुल भी खुश नहीं था मेरी पत्नी और मेरे बीच बिल्कुल भी अच्छा संभंध नहीं था जिससे कि हम लोगों के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। मुझे लगने लगा था कि मुझे अपनी पत्नी को डिवोर्स दे देना चाहिए और फिर मैंने अपनी पत्नी को डिवोर्स देने का फैसला कर लिया। इस बारे में मैंने अपने परिवार से बात की और अपने कुछ रिश्तेदारों से भी बात की तो सब लोगों की रजामंदी से मैंने अपनी पत्नी को डिवोर्स दे दिया। उसके बाद मेरी पत्नी मुझसे अलग हो चुकी थी सरिता का मेरे जीवन से चले जाना शायद मेरे लिए अच्छा ही था। उसका मुझसे अलग हो जाने के बाद मैंने अपनी कंपनी से रिजाइन दे दिया उसके बाद मैंने दूसरी कंपनी ज्वाइन कर ली जिसमें कि मुझे अच्छी तनख्वाह मिलती थी और कुछ ही समय मे मेरा प्रमोशन भी हो गया। मैं अपनी जिंदगी से बहुत ही खुश था और मेरी जिंदगी बड़े ही सामान्य तरीके से चल रही थी मैं काफी खुश था।

जब हमारे ऑफिस में आशा आई तो आशा से मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा आशा और मेरी जिंदगी में कई समानताएं थी उसके पति से उसका डिवोर्स कुछ समय पहले ही हुआ था और मेरे साथ भी बिल्कुल वही स्थिति थी इसलिए आशा और मैं एक दूसरे से काफी घुलने मिलने लगे। हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ गए थे मैं आशा के साथ जब भी होता तो मुझे काफी अच्छा लगता आशा के साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगता है। एक दिन हम लोग लंच टाइम में साथ में बैठे हुए थे तो आशा ने मुझसे कहा कि राकेश आज मैं बहुत परेशान हूं। मैंने उससे कहा कि लेकिन तुम्हारी परेशानी का कारण क्या है तो आशा ने मुझे बताया कि उसके मम्मी पापा चाहते हैं कि वह शादी कर ले लेकिन आशा दोबारा शादी नहीं करना चाहती थी। आशा ने अपने शादीशुदा जिंदगी के अनुभवों को मुझ से साझा किया उसने मुझसे कहा कि मैं फिलहाल शादी नहीं करना चाहती हूं और ऐसे ही कैसे मैं किसी भी लड़के के साथ शादी कर लूं।

आशा और मेरी जिंदगी में कई समानताएं थी इसीलिए मैं आशा को अच्छे से समझता था मैंने आशा को कहा आशा अगर तुम्हारे परिवार वाले चाहते हैं कि तुम शादी करो तो तुम एक बार उस लड़के को मिल लो जिससे वह तुम्हारी शादी करवाना चाहते है इससे तुम्हारे घर वालों की बात भी रह जाएगी और वह लोग तुम्हें भी कुछ नहीं कहेंगे। आशा कहने लगी हां राकेश तुम ठीक कह रहे हो मैं उससे एक बार मिल तो सकती हूं। जब आशा उस लड़के को मिली तो मैंने अगले दिन उससे पूछा कि तुमने क्या सोचा तो आशा कहने लगी कि मैंने तो लड़के को देखते ही मना कर दिया था और मैंने अपने पापा से भी कह दिया कि मैं अब शादी नहीं करना चाहती हूं। मुझे क्या मालूम था कि आशा और मेरे बीच की नजदीकियां इतनी बढ़ती चली जाएंगी की एक समय ऐसा भी आएगा जब मैं आशा के बिना बिल्कुल भी नहीं रह पाऊंगा और मेरी जिंदगी उसके बिना जैसे अधूरी हो जाएगी। एक दिन आशा से मैंने कहा कि आशा मैं तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहता हूं तो आशा मेरी तरफ देख कर कहने लगी कि राकेश मुझे भी तुम्हारा साथ अच्छा लगता है लेकिन मुझे डर लगता है कि कहीं दोबारा से मेरे साथ पहले की तरह ही ना हो जाए। मैंने आशा को कहा आशा देखो तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है और तुम तो मुझे इतने समय से जानती हो मेरी पत्नी के साथ मेरे जो भी रिश्ते थे वह सब भूल कर मैं अब आगे बढ़ चुका हूं क्योंकि उसके साथ मेरी बिल्कुल भी नहीं बन पाई, हम दोनों एक दूसरे को समझते ही नहीं थे शायद इसलिए हम दोनों को एक दूसरे का साथ बिल्कुल भी पसंद नहीं था और हम दोनों का डिवोर्स हो गया और यह बात तुम्हें भी अच्छे से मालूम है आशा मुझे कहने लगी हां राकेश मुझे पता है। हम दोनों अब एक दूसरे को डेट करने लगे थे और यह बात मेरे परिवार वालों को भी पता चल चुकी थी। आशा हमारे घर पर आई तो मैंने उसे अपने घर वालो से मिलाया उसके बाद हम दोनों की नज़दीकियां बहुत बढ़ने लगी थी। मैं और आशा एक दूसरे के इतने नजदीक आ चुके थे कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाते थे जब भी आशा मेरे साथ होती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। इस बीच मुझे अपने ऑफिस के टूर के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए मुंबई जाना था तो आशा को भी यह बात मालूम थी कि मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई जा रहा हूं।

आशा को मैंने कहा कि जब मैं लौटूंगा तो इस बारे में हम लोग बात करेंगे क्योंकि मुझे लगता है कि अब हम दोनों को एक दूसरे के साथ बात करते हुए काफी समय हो चुका है और हमारे रिलेशन को हमें अब आगे बढ़ाना चाहिए। आशा कहने लगी ठीक है राकेश तुम मुंबई से लौट आओ उसके बाद हम लोग इस बारे में बात करेंगे। मैं मुंबई चला गया था और करीब दो दिन तक मुंबई में रहने के बाद मैं वापस लौट आया था। जब मैं वापस लौटा तो आशा ने अपना पूरा मन बना लिया था कि वह मुझसे ही शादी करेगी और आशा चाहती थी कि मैं उसके परिवार वालों से भी मिलूं। मैं जब आशा के परिवार वालों से मिला तो उन्होंने भी मुझे स्वीकार कर लिया था और उन्हें मुझसे कोई आपत्ति नहीं थी सजे बाद हम दोनों की सगाई तय हो गई और जल्द ही हम दोनों की सगाई हो गई। सगाई हो जाने के बाद हम दोनों ने कोर्ट मैरिज करने का फैसला किया क्योंकि आशा चाहती थी कि हम दोनों कोर्ट में ही शादी करें इसलिए मैंने और आशा ने कोर्ट में ही शादी की। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद हम पति-पत्नी बन चुके थे।

आशा ने जॉब से रिजाइन देने का फैसला कर लिया था क्योंकि वह चाहती थी कि वह घर पर रहकर ही मैं मां-पापा की देखभाल करें इसलिए उसने रिजाइन दे दिया था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश है और हमारा शादीशुदा जीवन बहुत अच्छे से चल रहा था आशा घर मैं मेरे माता-पिता की देखभाल बड़े अच्छे से करती और मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब आशा मेरे पापा मम्मी की देखभाल करती। सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था एक शाम में ऑफिस से थका हुआ लौटा उस दिन मै बहुत ज्यादा थका हुआ था आशा मुझे कहने लगी आज तुम बहुत थके हुए हो। मैंने आशा को कहा हां आज ऑफिस ज्यादा काम था इसलिए मुझे थकान महसूस हो रही है मेरे सर में भी बहुत ज्यादा दर्द है। आशा कहने लगी मैं अभी आपके लिए चाय बना देती हूं आशा ने मेरे लिए चाय बनाई चाय पीने के बाद मैं सोफे पर ही लेटा रहा। मैं अपने आपको थोड़ा ठीक महसूस कर रहा था अब मैं कमरे में चला आया आशा ने मेरे बैग को मेज पर रख दिया उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठकर बातें करने लगे काफी दिन हो गए थे हम दोनों की एक दूसरे से अच्छे से बात भी नहीं हो पाई थी। मैंने आशा का हाथ पकड़ते हुए अपनी और खींचा और उस से मैं बातें करने लगा आशा मेरे पास बैठी हुई थी मैं उसकी जांघों को सहला रहा था जब मैं उसकी जांघों को सहला रहा था तो मुझे ऐसा प्रतीत होने लगा जैसे कि मेरे अंदर की गर्मी बढने लगी है और मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा ही बढ़ चुकी थी। मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रहा था मैंने आशा से कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं आशा भी इस बात को समझ चुकी थी उसने मेरी पैंट को उतारकर मेरे लंड को हिलाना शुरु किया उसको मेरे लंड को हिलाने मे मजा आ रहा था अब आशा ने दरवाजा बंद किया। उसके बाद हम एक दूसरे की बाहों में आ चुके थे वह मेरे मोटे लंड को हिला रही थी तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी।

मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था उसने मेरे लंड को बहुत देर तक चूसा। उसके बाद जब मैंने उसके स्तनो को चूसना शुरू किया तो उसको बहुत मजा आने लगा वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है हम दोनों के अंदर की गर्मी पूरी तरह से बढने लगी थी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नही पा रहे थे मैंने आशा के बदन से कपड़े निकाल दिए। जब उसके बदन से मैंने कपड़े उतार कर मैंने उसके स्तनो को बहुत देर तक चूसा उसके निप्पल खड़े होने लगे थे। जब उसके निप्पल खड़े होने लगे तो मेरे अंदर की आग बढने लगी अब हम दोनों बहुत ज्यादा गरम हो चुके थे इसलिए मैंने अब आशा की चूत पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ डाला तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और अपने पैरों को खोलने लगी। वह मुझे कहने लगी राकेश मुझे दर्द हो रहा है मैंने उसके दोनों पैरों को खोल कर उसको तेज गति से चोदना शुरु कर दिया।

उसके अंदर की आग अधिक होने लगी हम दोनों ही बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे ना तो मैं रह पा रहा था और ना ही आशा लेकिन जिस गति से मैं उसको चोद रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उसकी चूत मारने में जिस प्रकार का मजा मुझे आ रहा था उससे वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर कि आग को तुम ऐसे ही बढ़ाते जाओ मेरे अंदर बहुत ज्यादा गर्मी पैदा हो रही थी क्योंकि हम दोनों के लंड और चूत के रगडन से जो गर्मी पैदा हो रही थी उस से एक अलग ही आग निकल रही थी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे मुझे लगने लगा था कि जल्द ही मेरा माल बाहर आ जाएगा। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरु किया वह कहने लगी आज तुमने मेरे अंदर की गर्मी को पूरा बढा दिया है। मुझे जब भी आशा को चूत मारनी होता तो मै आशा की चूत मारकर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया करता और मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब मैं उसकी इच्छा को पूरा कर दिया करता था।
 
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